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Operation Sindoor: सरकार ने पहली बार जारी किए 6 शहीद जवानों के नाम, वॉर मेमोरियल पर मिली अमर पहचान

 नई दिल्ली भारतीय सेना के ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शहीद हुए छह जवान अब औपचारिक रूप से देश के सामने आए हैं. सरकार ने पहली बार इन शहीदों के नाम सार्वजनिक किए हैं. इन नामों को नेशनल वॉर मेमोरियल की वेबसाइट पर रोल ऑफ ऑनर में शामिल किया गया है. युद्ध स्मारक की वॉल 3डी पर 2025 सेक्शन में अंकित किया गया है।  यह पहली बार है जब सरकार ने मई 2025 में पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में आतंकवादी ठिकानों के खिलाफ चलाए गए क्रॉस-बॉर्डर ऑपरेशन सिंदूर में हुई मौतों की आधिकारिक पुष्टि की है. इससे पहले सरकार ने इन शहीदों की पहचान सार्वजनिक नहीं की थी, हालांकि मीडिया और सोशल मीडिया पर कई रिपोर्ट्स और अटकलें चल रही थीं।  मई 2025 में भारत ने पाकिस्तान और PoK में आतंकवादी बुनियादी ढांचे को निशाना बनाते हुए एक महत्वपूर्ण सैन्य अभियान चलाया था. इसे ऑपरेशन सिंदूर नाम दिया गया. यह चार दिनों तक चला. इसका मकसद सीमा पार से आने वाले आतंकवाद को कुचलना और भारत की सुरक्षा को मजबूत करना था. इस दौरान भारतीय सेना, वायुसेना और अन्य बलों ने संयुक्त रूप से कार्रवाई की।  अब तक सरकार ने ऑपरेशन के दौरान हुई सैन्य क्षति के बारे में विस्तार से नहीं बताया था. लेकिन राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर इन छह नामों को शामिल करना सरकार की ओर से पहली आधिकारिक स्वीकृति मानी जा रही है कि ऑपरेशन में भारतीय बलों को नुकसान हुआ था।  राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर अंकित छह शहीद सैनिकों और एयर वारियर्स के नाम इस प्रकार हैं…     सूबेदार मेजर पवन कुमार – हेडक्वार्टर 10 इन्फैंट्री ब्रिगेड       राइफलमैन सुनील कुमार, वीर चक्र – 4 जम्मू एंड कश्मीर लाइट इन्फैंट्री       लांस नायक दिनेश कुमार – 5 फील्ड रेजिमेंट       एविएशन टेक्नीशियन मूड मुरलीनायक – 851 लाइट रेजिमेंट       हवलदार सुनील कुमार सिंह – 237 फील्ड वर्कशॉप कंपनी       सार्जेंट सुरेंद्र कुमार, वायु मेडल – 39 विंग इनमें दो सैनिकों को वीरता के लिए सम्मानित किया गया था – राइफलमैन सुनील कुमार को वीर चक्र और सार्जेंट सुरेंद्र कुमार को वायु मेडल मिला था।  राष्ट्रीय युद्ध स्मारक का महत्व राष्ट्रीय युद्ध स्मारक इंडिया गेट के पास है. यहां देश के सभी शहीद सैनिकों के नाम दीवारों पर अमर कर दिए जाते हैं. हर साल नए शहीदों के नाम संबंधित वर्ष के सेक्शन में जोड़े जाते हैं. इन छह नामों को 2025 सेक्शन में शामिल किया गया है।  रोल ऑफ ऑनर में नाम दर्ज होना सिर्फ औपचारिकता नहीं है. यह देश के लिए इन वीरों के सर्वोच्च बलिदान को मान्यता देने का तरीका है. परिवारों, साथी सैनिकों और पूरे देश के लिए यह भावनात्मक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है. अब इन शहीदों को आधिकारिक रूप से फॉलेन हीरोज कहा जा रहा है।  सरकार की चुप्पी और अब खुलासा ऑपरेशन सिंदूर के दौरान कई दिनों तक दोनों तरफ से तनाव रहा. भारत ने आतंकवादी ठिकानों को नष्ट करने का दावा किया, जबकि पाकिस्तान ने भी कुछ दावे किए. लेकिन भारत सरकार ने शुरुआत से ही सैन्य हताहतों की संख्या या नामों पर चुप्पी साध रखी थी. सुरक्षा कारणों और रणनीतिक वजहों से यह गोपनीयता बरती गई थी।  अब नाम जारी करने को विशेषज्ञ सकारात्मक कदम मान रहे हैं. इससे परिवारों को न्याय मिला है. देश के लोग अपने शहीदों को सलाम कर सकते हैं. ये छह जवान देश की रक्षा करते हुए अपनी जान न्योछावर कर गए. सूबेदार मेजर पवन कुमार जैसे अनुभवी जवान ब्रिगेड की अगुवाई करते थे।  राइफलमैन सुनील कुमार जैसे युवा सिपाही सीमा पर तैनात थे. एविएशन टेक्नीशियन और सार्जेंट जैसे एयर वारियर्स ने हवाई समर्थन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. हर शहीद के परिवार में अब दर्द है, लेकिन गर्व भी है. पूरे देश को इन वीरों पर गर्व है. इनके बलिदान ने एक बार फिर साबित कर दिया कि भारतीय सशस्त्र बल आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर अडिग हैं। 

Bihar Teacher Transfer Policy में बड़ा बदलाव, महिलाओं और बीमार शिक्षकों को राहत

पटना  Bihar Teachers: शिक्षा विभाग ने शिक्षकों के स्थानांतरण की जो नई नियमावली तैयार की है उसमें 40 से अधिक उम्र की मह‍िला श‍िक्ष‍िकाओं का विशेष ध्‍यान रखा गया है। इस बात का जिक्र किया गया है कि अगर किसी अविवाहित महिला शिक्षक की उम्र 40 वर्ष से अधिक है तो स्थानांतरण में उनकी पसंद को वरीयता दी जाएगी। अगर कोई महिला शिक्षक विधिक रूप से अलग रह रहीं तो उन्हें भी स्थानांतरण में वरीयता मिलेगी। नियमावली में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जिन विद्यालयों में स्वीकृत शिक्षक की संख्या चार से कम है , वहां वरीयता श्रेणी के शिक्षकों के पदस्थापन पर विचार नहीं किया जाएगा। बीमारी और दिव्यांगता में इस तरह वरीयता बीमारी और दिव्यांगता के तहत शिक्षकों को स्थानांतरण में किस तरह से अधिमानता मिलेगी इसका भी विशेष रूप से स्थानांतरण की नई नियमावली में जिक्र किया गया है। वरीयता श्रेणी के तहत कैंसर रोग से ग्रस्त शिक्षक, ओपन हार्ट सर्जरी, एट्रियल सेप्टल डिफेक्ट अंग प्रत्यारोपण के मामले में 20 प्रतिशत स्वयं, 10 प्रतिशत पत्नी के मामले में तथा 10 प्रतिशत की वरीयता संबंधित शिक्षक के 18 वर्ष से कम उम्र के आश्रित के संदर्भ में दी जाएगी। इसी तरह की वरीयता एकल किडनी, किडनी ट्रांसप्लांट, व डायलिसिस के मामले में दी जाएगी। ब्रेन ट्यूमर, न्यूरो सर्जरी, बोन टीबी व अन्य अन्य गंभीर टीबी के साथ-साथ पक्षाघात पीड़ित शिक्षकों को भी स्थानांतरण में वरीयता मिलेगी। दिव्यांगता के संदर्भ में यह प्रावधान किया गया है कि 80 से 100 प्रतिशत तक की दिव्यांगता जिसमें दृष्टि, अस्थि अथवा श्रवण बाधा शामिल है, से प्रभावित शिक्षकों को स्थानांतरण में वरीयता दी जाएगी। बीमारी और दिव्यांगता श्रेणी के तहत आए आवेदन की जांच के लिए शिक्षा विभाग के स्तर चिकित्सा बोर्ड का गठन किया जाएगा। यदि कोई शिक्षक वरीयता श्रेणी के तहत आवेदन करता है पर उनका स्थानांतरण नहीं होता है तो वह अगले स्थानांतरण चक्र में वरीयता श्रेणी के तहत स्थानांतरण के लिए आवेदन कर सकेगा। वरीयता का दावा गलत होने पर वैधानिक कार्रवाई अगर किसी शिक्षक की वरीयता का दावा गलत निकलता है तो संबंधित जिले के जिला शिक्षा अधिकारी के स्तर से उसकी जांच कराई जाएगी। संबंधित शिक्षक को अपना स्पष्टीकरण दिए जाने को ले सात दिन का समय दिया जाएगा। यदि दावा गलत निकलता है तो संबंधित शिक्षक पर अनुशासनिक के साथ-साथ वैधानिक कार्रवाई भी होगी। वहीं राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार तथा राज्य शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित शिक्षकों को भी स्थानांतरण में क्रमश: 10 व पांच प्रतिशत वरीयता दिए जाने का प्राविधान किया गया है।

मरीज की मौत के बाद फोर्टिस अस्पताल में अनियमितताओं की जांच, सीसीटीवी फुटेज से खुलासा

नई दिल्ली  मरीजों के इलाज में कथित लापरवाही और विभिन्न अनियमितताओं की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शालीमार बाग स्थित फोर्टिस अस्पताल के खिलाफ जांच के आदेश दिए है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर विभागों की संयुक्त टीम ने गुरुवार को अस्पताल का निरीक्षण किया, जिसमें कड़े अनियमितताएं सामने आने की बात कही गई है। सीएम ने जन सुनवाई के दौरान मिली एक शिकायत के बाद जांच का आदेश दिया था। दरअसल मुख्यमंत्री जनसेवा सदन में सुनवाई के दौरान एक परिवार ने मुख्यमंत्री को शिकायत की थी कि शालीमार बाग क्षेत्र में उनके बेटे को चाकू मारकर घायल कर दिया गया था। उनके बेटे को फोर्टिस अस्पताल ले जाया गया। परिवार ने आरोप लगाया कि अस्पताल ने उसका इलाज करने से पहले उनसे पैसे की मांग की। जिसके चलते सही समय पर इलाज न मिलने के कारण उनके बेटे की मौत हो गई। सीएम ने इसे गंभीरता से लेते हुए डीएम की निगरानी में जांच के आदेश दिए थे। कई विभागों ने अस्पताल में की जांच सेंट्रल नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट के डीएम एस एस परिहार की निगरानी में स्वास्थ्य, नगर निगम, अग्निशमन व अन्य विभागों ने अस्पताल की जांच की। टीम ने अस्पताल में मरीजों के उपचार, प्रशासनिक प्रक्रियाओं और अन्य व्यवस्थाओं से जुड़ी शिकायतों के आधार पर अस्पताल के विभिन्न विभागों और रिकॉर्ड की पड़ताल की। अस्पताल में नियमों का उल्लंघन प्रारंभिक जांच में कई खामियां और नियमों के उल्लंघन से जुड़े मामले सामने आए है। इस दौरान बिल्डिंग बायलॉज का दुरुपयोग, अवैध निर्माण, आग बुझाने के सिस्टम में गड़बड़ी, बेसमेंट का मिसयूज और चिकित्सीय नियमों के लिए बनाई गई एसओपी में भी गंभीर लापरवाही पाई गई। टीम ने की इमरजेंसी विभाग की जांच टीम ने सीसीटीवी फुटेज की जांच कर पाया कि जो युवक चाकू लगने से मारा गया था, वह खुद चलकर इमरजेंसी में पहुंचा था। इससे पता चलता है कि अगर उसका सही समय पर इलाज होता तो उसकी जान बच जाती। टीम ने इमरजेंसी विभाग के रिकॉर्ड की भी जांच की है। डीएम के अनुसार इन अनियमितताओं व मरीजों के इलाज में बरती गई लापरवाही को ध्यान में रखते हुए अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई का निर्णय लिया गया है। जांच की विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है। अस्पताल ने क्या कहा? इस बीच अस्पताल ने बयान जारी कर कहा कि फोर्टिस मरीजों की देखभाल के सर्वोच्च मानकों, चिकित्सीय उत्कृष्टता और सभी नियामकीय प्रावधानों के पालन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। जैसे ही मामले का औपचारिक विवरण हमारे साथ साझा किया जाएगा, हम उसकी समीक्षा करेंगे और संबंधित अधिकारियों को पूरा सहयोग देंगे। मरीजों की सुरक्षा और उनका स्वास्थ्य हमारे लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है।  

पुलिस महकमे में प्रमोशन की लहर: 1997–2000 बैच के PPS अफसरों को IPS बनने की हरी झंडी

लखनऊ उत्तर प्रदेश के दो दर्जन से अधिक पुलिस अधिकारियों के लिए अच्छी खबर है। प्रदेश के दो दर्जन से अधिक पीपीएस अधिकारी के प्रमोशन को मंजूरी मिल गई है। ये सभी पुलिस अफसर जल्द ही आईपीएस बनेंगे। नई दिल्ली में संघ लोक सेवा आयोग में गुरुवार को पीपीएस अधिकारियों के प्रमोशन के लिए डीपीसी की बैठक हुई। बैठक में वर्ष 1997,1998,1999 और 2000 बैच के अफसरों की पदोन्नति को मंजूरी दे दी गई है। इस फैसले के बाद यूपी पुलिस के इन पीपीएस अफसरों में खुशी की लहर में है। आपको बता दें कि नई दिल्ली स्थित यूपीएससी ऑफिस में गुरुवार को पुलिस की हाई लेवल मीटिंग हुई। विभागीय डीपीसी की एक बैठक हुई। बताया जा रहा है कि इसमें डीजीपी राजीव कृष्ण भी पर मौजूद थे। बैठक में कुल 30 पीपीएस अधिकारियों को आईपीएस कैडर में प्रमोट करने के प्रस्ताव को हरी झंडी दी गई। अब इसके बाद राज्य सरकार के नोटिफिकेशन का इंतजार है। इसके बाद ये सभी अधिकारी आईपीएस हो जाएंगे। इस सूची में इन अफसरों के नाम इस लिस्ट में यूपी पुलिस के कई दिग्गज और तेजतर्रार अधिकारियों के नाम शामिल हैं। इनमें सुरेश चंद्र रावत, शोएब इकबाल, राहुल मिठास, आलोक कुमार शर्मा, राजकुमार-प्रथम, महेश सिंह अत्री, विनीत भटनागर, जितेंद्र कुमार श्रीवास्तव, शशि शेखर सिंह, कुलदीप सिंह-प्रथम, ज्ञानेंद्र नाथ प्रसाद, हरेंद्र प्रताप यादव, वंश राज सिंह यादव, डॉ. कृष्णा गोपाल, मधुबन कुमार सिंह कपिल देव सिंह, बलवंत कुमार चौधरी, राहुल श्रीवास्तव, राजेश कुमार पांडे-प्रथम, प्रीति बाला गुप्ता, विकास चंद्र त्रिपाठी, पूर्णेन्दु सिंह, हरेंद्र कुमार, मार्तंड प्रकाश सिंह, अभय नाथ त्रिपाठी, पवित्र मोहन त्रिपाठी, देवेश कुमार शर्मा, प्रशांत कुमार प्रसाद, डा. अरविंद कुमार व सिद्धार्थ वर्मा प्रमुख हैं। 53 पीसीएस अधिकारियों का बढ़ा ग्रेड पे उधर, उत्तर प्रदेश के 53 पीसीएस अफसराें के लिए भी अच्छी खबर है। योगी सरकार ने इन अफसरों को बड़ी खुशखबरी दी है। प्रदेश के 53 पीसीएस अधिकारियों को 5 साल की सेवा पूरी होने के बाद 5400 ग्रेड पे से 6600 ग्रेड पे दिया गया है। इन अधिकारियों को 1 जून बढ़े हुए ग्रेड पे का लाभ मिलेगा। ये अधिकारी मौजूदा समय में एसडीएम के पद पर तैनात है।

झारखंड के छात्रों के लिए बड़ा बदलाव, फिजिकल एजुकेशन में लागू होंगी NCERT की पुस्तकें

रांची. राज्य सरकार राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) द्वारा कक्षा तीन से आठ के लिए तैयार शारीरिक शिक्षा एवं कल्याण विषय पर तैयार नई पाठ्यपुस्तकों को लागू कर सकती है। हाल ही में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव उमाशंकर सिंह की अध्यक्षता में झारखंड शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (जेसीईआरटी) की बैठक में इस पर चर्चा हुई। बैठक में इस बात पर विचार किया गया कि केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की अनुशंसा के अनुरूप एनसीईआरटी की पुस्तकें लागू की जाए या झारखंड के लिए राज्य स्तर पर नई पाठ्यपुस्तकें तैयार की जाएं। इस पर सचिव ने जेसीईआरटी को एनसीईआरटी द्वारा तैयार पुस्तकों की समीक्षा कर एक प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए, ताकि उसपर अंतिम निर्णय लिया जा सके। कक्षा नौ से 12वीं के लिए भी तय हुआ कि एनसीईआरटी द्वारा तैयार की जानेवाली पुस्तकों की समीक्षा के बाद ही उस पर निर्णय लिया जाएगा। दरअसल, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में स्कूलों में शारीरिक शिक्षा एवं कल्याण (फिजिकल एजुकेशन एंड वेल-बीईंग) की पढ़ाई पर जोर दिया गया है। एनसीईआरटी द्वारा तैयार पाठ्य-पुस्तकों में फिजिकल फिटनेस, खेल, स्वास्थ्य जागरुकता, इमोशनल बैलेंस, टीम स्पिरिट और ज़िम्मेदार लाइफ स्टाइल के ज़रिए बच्चों के समग्र विकास पर जोर दिया गया है। बताते चलें कि राज्य के सरकारी स्कूलों में जेसीईआरटी द्वारा कक्षा एक से आठ तक के लिए तैयार पुस्तकें पढ़ाई जाती हैं। नौवीं से 12वीं कक्षाओं के लिए एनसीईआरटी की पुस्तकें पढ़ाई जाती हैं। राज्य सरकार एनसीईआरटी से कापी राइट लेकर पुस्तकों का प्रकाशन कराती है। राज्य में अभी तक शारीरिक शिक्षा के लिए अपनी पुस्तकें तैयार नहीं की गई हैं। यदि स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग एनसीईआरटी की शारीरिक शिक्षा की पुस्तकों को लागूनहीं कर स्वयं पुस्तकें तैयार करने का निर्णय लिया जाता है तो इसकी जिम्मेदारी जेसीईआरटी को दी जाएगी।

कोटा को मिली 100 इलेक्ट्रिक बसों की सौगात, 250 युवाओं को मिलेगा रोजगार

कोटा शहर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था अब एक बड़े बदलाव की दहलीज पर खड़ी है। आने वाले कुछ दिनों में कोटा की सड़कों पर इलेक्ट्रिक बसें दौड़ती नजर आएंगी। प्रधानमंत्री ई-बस योजना के तहत शहर को कुल 100 ई-बसें मिलने जा रही हैं, जिनकी पहली खेप जुलाई के पहले सप्ताह तक कोटा पहुंचने की संभावना है। इन बसों के शुरू होने से न सिर्फ शहर के लोगों का सफर आसान होगा, बल्कि नगर निगम सीमा में शामिल हुए दूरदराज के ग्रामीण इलाकों के हजारों लोगों को भी पहली बार नियमित और आधुनिक सार्वजनिक परिवहन की सुविधा मिलेगी। शहर के साथ गांव भी होंगे सीधे जुड़े अब तक शहर से दूर बसे कई गांवों के लोगों को निजी वाहनों या महंगे साधनों पर निर्भर रहना पड़ता था। नई ई-बस सेवा इस तस्वीर को बदलने जा रही है। नगर निगम और कोटा बस सर्विसेज लिमिटेड ने ऐसे 20 रूट तय किए हैं, जिनके जरिए शहर के साथ-साथ निगम सीमा में शामिल ग्रामीण क्षेत्रों को भी जोड़ा जाएगा। इससे विद्यार्थियों, नौकरीपेशा लोगों, व्यापारियों और मरीजों को रोजाना आने-जाने में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। 20 रूट पर चलेगी नई इलेक्ट्रिक बस सेवा योजना के तहत रेलवे स्टेशन से बंधा धर्मपुरा, मुकुन्दरा विहार और कोलीपुरा गांव तक बसें संचालित होंगी। न्यू बस स्टैंड से बोराबास, एरोड्राम, डीसीएम, भामाशाह मंडी और कॉमर्स कॉलेज तक कनेक्टिविटी मिलेगी। एरोड्राम से रानपुर, सोगरिया, धनेश्वर और दरा जंक्शन, रायपुरा से भदाना और सोगरिया स्टेशन, झालीपुरा से अरण्डखेड़ा, बड़गांव से सीमलिया, चंद्रेसल से आरके पुरम, सोगरिया स्टेशन से अनंतपुरा, बड़ तिराहे से शंभुपुरा एयरपोर्ट, नयापुरा से तालेड़ा और रेलवे स्टेशन प्लेटफॉर्म नंबर-4 से जीएडी सर्किल तक के रूट भी इस योजना में शामिल किए गए हैं। 100 बसों में 95 होंगी 9 मीटर लंबी कोटा को मिलने वाली 100 ई-बसों में अधिकांश 9 मीटर लंबी होंगी, जबकि पांच बसें 12 मीटर श्रेणी की रहेंगी। इन बसों को यात्रियों की संख्या और विभिन्न मार्गों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। सभी बसें आधुनिक सुविधाओं से लैस होंगी और पर्यावरण के अनुकूल सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देंगी। सुभाष नगर में तैयार हुआ चार्जिंग स्टेशन बसों के संचालन से पहले जरूरी तैयारियां भी अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। सुभाष नगर में बस स्टॉप और चार्जिंग स्टेशन का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है। अधिकारियों के अनुसार बसों की देखरेख, मरम्मत और ड्राइवर उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी बस सप्लाई करने वाली कंपनी के पास रहेगी। इससे संचालन व्यवस्था को बेहतर और नियमित बनाए रखने में मदद मिलेगी। 250 लोगों को मिलेगा रोजगार ई-बस परियोजना केवल परिवहन व्यवस्था ही नहीं बदलेगी, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी लेकर आएगी। स्थानीय स्तर पर कंडक्टर, लिपिकीय स्टाफ और अन्य कर्मचारियों सहित करीब 250 लोगों की नियुक्ति संविदा फर्म के माध्यम से की जाएगी। इसके लिए टेंडर जुलाई के पहले सप्ताह में खोले जाने की तैयारी है। इतना होगा बस का किराया नगर निगम ने यात्रियों को राहत देने के लिए किराया भी किफायती रखा है। पहले तीन किलोमीटर तक का किराया 10 रुपये होगा। तीन से छह किलोमीटर तक 15 रुपये, छह से दस किलोमीटर तक 20 रुपये और अधिकतम किराया 60 रुपये निर्धारित किया गया है। इससे आम लोगों को कम खर्च में सुरक्षित और सुविधाजनक सफर का विकल्प मिलेगा। बदलेगी शहर की परिवहन व्यवस्था ई-बसों के संचालन के साथ कोटा में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था एक नए दौर में प्रवेश करेगी। प्रदूषण कम करने, ट्रैफिक का दबाव घटाने और शहर के साथ ग्रामीण इलाकों को बेहतर कनेक्टिविटी देने की दिशा में यह योजना महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यदि सब कुछ तय समय के अनुसार हुआ तो जुलाई के पहले सप्ताह से कोटा के लोग आधुनिक, स्वच्छ और सुविधाजनक ई-बस सेवा का लाभ उठाना शुरू कर देंगे।

राशन कार्डधारकों के लिए जरूरी अपडेट, नया सदस्य जोड़ने से पहले करानी होगी e-KYC

रांची झारखंड में राशन कार्ड में नया नाम जोड़ने के लिए पहले ई-केवाईसी कराना अब अनिवार्य होगा। राशन वितरण व्यवस्था में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग ने सभी राशन कार्डधारियों के लिए ई-केवाईसी की व्यवस्था को अनिवार्य कर दिया है। लाभार्थियों का ई-केवाईसी किए बिना अब राशन कार्ड में किसी भी नए सदस्य का नाम नहीं जोड़ा जाएगा। इसके साथ ही राशन कार्ड में दर्ज परिवार के सभी सदस्यों का ई-केवाईसी नि:शुल्क कराया जा रहा है। ई-केवाईसी का मुख्य उद्देश्य रांची जिला प्रशासन के अनुसार, ई-केवाईसी का उद्देश्य लाभार्थियों का सत्यापन करना, अपात्र और फर्जी कार्डधारियों की पहचान करना तथा खाद्यान्न वितरण प्रणाली को और अधिक पारदर्शी बनाना है। इसके माध्यम से वास्तविक जरूरतमंदों तक सरकारी योजनाओं का लाभ सुनिश्चित किया जा सकेगा। खाद्य आपूर्ति विभाग ने सभी जिला पदाधारियों को दिशा-निर्देश दिया है कि किसी भी परिस्थिति में ई-केवाईसी के बिना नया नाम जोड़ने की कार्यवाही नहीं की जाए। खाद्य आपूर्ति विभाग का मानना है कि इस व्यवस्था से अपात्र लोगों को लाभ लेने से रोका जा सकेगा और पात्र लाभुकों को समय पर राशन उपलब्ध होगा। ई-केवाईसी की लगातार निगरानी खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग ने विभाग ने कहा है कि ई-केवाईसी अभियान की लगातार निगरानी की जा रही है और शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने के लिए जन वितरण प्रणाली दुकानदारों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। ई-केवाईसी नहीं कराने वाले लाभुकों को भविष्य में राशन प्राप्त करने में कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है। ई-केवाईसी जल्द पूरा करने की अपील जिला प्रशासन ने बताया कि लाभुक अपने नजदीकी जन वितरण प्रणाली (पीडीएस) दुकान पर आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन के माध्यम से ई-केवाईसी करा सकते हैं। इसके लिए किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाएगा। अधिकारियों ने सभी कार्डधारियों से अपने परिवार के प्रत्येक सदस्य का ई-केवाईसी जल्द पूरा कराने की अपील की है।

Punjab News: तरनतारन में नकली नशा मुक्ति केंद्र पर छापा, फर्जी डॉक्टर बनकर मरीज किए गए भर्ती

तरनतारन. तरनतारन में पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त कार्रवाई में एक कथित अवैध नशा मुक्ति केंद्र का भंडाफोड़ किया गया है। आरोप है कि केंद्र संचालक खुद को डॉक्टर बताकर लोगों के साथ धोखाधड़ी कर रहे थे और नशा छुड़ाने के नाम पर उन्हें गैरकानूनी तरीके से केंद्र में बंधक बनाकर रखा गया था। छापेमारी के दौरान पुलिस ने सात लोगों को वहां से मुक्त कराया। मामले में दो लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है, जिनमें से एक आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि दूसरे की तलाश में पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है। थाना सिटी तरनतारन के प्रभारी निरीक्षक परमजीत सिंह विरदी ने बताया कि पुलिस को सूचना मिली थी कि शहर में एक नशा मुक्ति केंद्र बिना वैधानिक अनुमति के संचालित किया जा रहा है। सूचना के आधार पर स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ संयुक्त रूप से छापा मारा गया। जांच के दौरान कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। डॉक्टर बता कर रहे थे उपचार पुलिस के अनुसार, अमृतसर निवासी सरबजीत सिंह और राणा प्रताप सिंह इस केंद्र का संचालन कर रहे थे। दोनों पर आरोप है कि वे स्वयं को डॉक्टर बताकर लोगों को उपचार का भरोसा देते थे। इसके बाद नशे की लत से जूझ रहे लोगों को केंद्र में रखकर उनका गैरकानूनी तरीके से इलाज किया जाता था। पुलिस का दावा है कि केंद्र में मौजूद लोगों को उनकी इच्छा के विरुद्ध बंधक बनाकर रखा गया था। छापेमारी के दौरान केंद्र से सात लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। इन सभी को तत्काल गांव ठरू स्थित सरकारी नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती कराया गया, जहां अब उनका चिकित्सकीय उपचार और देखभाल की जा रही है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच की शुरू पुलिस ने दोनों आरोपितों के खिलाफ धोखाधड़ी, गैरकानूनी तरीके से लोगों को बंधक बनाकर रखने और अन्य संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। कार्रवाई के दौरान राणा प्रताप सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि दूसरे आरोपित सरबजीत सिंह की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है। थाना प्रभारी परमजीत सिंह विरदी ने कहा कि मामले की गहन जांच की जा रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि केंद्र कितने समय से संचालित किया जा रहा था, यहां अब तक कितने लोगों का इलाज किया गया और क्या इसके लिए किसी प्रकार की वैधानिक अनुमति ली गई थी या नहीं।

सरकारी स्कूलों के होनहार छात्रों के लिए खुशखबरी, शिक्षा निदेशालय ने मांगी मेरिट सूची

हिसार  सरकारी स्कूल में 12वीं कक्षा में पढ़ने वाले अनुसूचित वर्ग के होनहारों के लिए खुशखबरी है। जिन विद्यार्थियों ने वार्षिक परीक्षा में 90 प्रतिशत व इससे अधिक अंक प्राप्त किए तो उन्हें वन टाइम छात्रवृति दी जाएगी। इसके लिए शिक्षा निदेशालय ने पत्र जारी कर उपरोक्त कक्षा के होनहारों की सूची मांगी है। जिले स्तर पर डीईओ कार्यालय में डिटेल भेजी जाएगी। जिसके बाद रिपोर्ट को शिक्षा निदेशालय भेज दिया जाएगा। इससे पहले निदेशालय ने डीईओ को आदेश दिए है कि वे संबंधित कक्षा के होनहारों के बैंक की कापी की जांच कर सत्यापित करें। यह पूरी प्रक्रिया 30 जून तक पूरी करनी होगी।बता दें कि सरकार की ओर से अनुसूचित वर्ग के विद्यार्थियों को पढ़ाई के प्रति जागरूक करने के लिए वन टाइम छात्रवृति शुरू की गई है। 12 कॉलम पर स्कूल मुखिया देंगे होनहारों की जानकारी स्कूल मुखिया को 12 कालम पर होनहारों को जानकारी देनी होगी। जिनमें विद्यार्थी का नाम, लड़का-लड़की, कक्षा, स्कूल का नाम, एसआरएन नंबर, जिला का नाम, राज्य का नाम, देश, बैंक का नाम, आईएफएससी कोड, खाता नंबर, आधार नंबर व मोबाइल नंबर शामिल है। जिनमें कक्षा इंचार्ज बच्चे की पूरी डिटेल उपरोक्त कालम अनुसार भरेंगे। जिसके बाद कक्षा प्रभारी अपनी रिपोर्ट संबंधित स्कूल मुखिया को देंगे। जिसके बाद रिपोर्ट जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में भेजी जाएगी। छात्रवृति देने के ये है फायदें     स्लम एरिया में अनुसूचित वर्ग से संबंध रखने वाले अधिकांश परिवार आर्थिक रूप से कमजोर होते हैं। उनको छात्रवृति देकर हौंसलावर्धन होता है     अनुसूचित वर्ग के विद्यार्थियों के ड्रापआउट की संभावना अधिक रहती है।     उपरोक्त वर्ग के विद्यार्थियों को छात्रवृति से एक तो आर्थिक मदद मिलती है। साथ ही प्रोत्साहन राशि से वे अपनी पढ़ाई जारी रख सकेंगे।     शिक्षा निदेशालय से हमें पत्र मिला है। जिसमें हमसे सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले अनुसूचित वर्ग के होनहार जिन्होंने 90 प्रतिशत व इससे अधिक अंक प्राप्त किए है तो उन्हें वन टाइम छात्रवृति मिलेगी। जिससे उन्हें आर्थिक मदद भी मिलेगी। साथ ही पढ़ाई में प्रोत्साहन भी मिलेगा। -रामरतन, जिला शिक्षा अधिकारी, हिसार।  

Mamata Banerjee का बागियों पर बड़ा हमला, बोलीं- पार्टी से विश्वासघात कभी माफ नहीं होगा

कलकत्ता तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख ममता बनर्जी ने शुक्रवार को पार्टी छोड़ने वाले नेताओं को खरी-खरी सुनाई है. उत्तर कोलकाता जिला तृणमूल कांग्रेस की वर्चुअल मीटिंग में ममता ने पार्टी छोड़कर जाने वालों और दल बदलने वाले विधायकों-सांसदों और पार्षदों को 'गद्दार' करार दिया है. उन्होंने कहा कि जिस पार्टी ने किसी नेता को पहचान और सम्मान दिया, मुश्किल समय में उसे छोड़ देना वैसा ही है जैसे कोई अपनी बीमार मां का साथ छोड़ दे।  ममता बनर्जी ने कहा, 'जिस मां ने आपको पूरी जिंदगी पाला-पोसा, जब वही मां बीमार पड़ जाए तो उसकी सेवा करने से इनकार कर देना सबसे बड़ा विश्वासघात है. गद्दारों के लिए कोई माफी नहीं है. आज वे खुद को बचा सकते हैं, लेकिन आने वाले समय में जनता भी उनसे हिसाब मांगेगी और पार्टी के कार्यकर्ता भी।  मौजूद राजनीतिक माहौल डर और आर्थिक संकट से भरा बैठक की शुरुआत में कार्यकर्ताओं का अभिवादन करते हुए ममता ने मौजूदा राजनीतिक माहौल को डर और आर्थिक संकट से भरा बताया. उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार लगातार विपक्ष को निशाना बना रही है. उन्होंने कहा, 'हर तरफ दमन का माहौल है. एक के बाद एक मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं. लोग डर के कारण आत्महत्या तक करने को मजबूर हो रहे हैं. फुटपाथ दुकानदारों की दुकानें तोड़ी जा रही हैं. कई लोगों की नौकरियां चली गई हैं और उनके सपने टूट रहे हैं।  ममता ने दावा किया कि इस संकट का सामना केवल एकजुट तृणमूल कांग्रेस ही कर सकती है. उन्होंने कहा कि भाजपा द्वारा पैदा किए गए इस माहौल में पार्टी के बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं, बीएलओ और जमीनी कैडर ने अपनी जान जोखिम में डालकर संघर्ष किया है. 'आज जो लोग सत्ता में हैं, उनकी सफलता के पीछे हमारे कार्यकर्ताओं का खून-पसीना और बलिदान है।  पार्टी के साथ विश्वासघात करना अक्षम्य टीएमसी प्रमुख ने दल-बदलने वाले नेताओं पर आरोप लगाया कि वे अपने खिलाफ चल रहे मामलों और परिवार की संपत्ति बचाने के लिए भाजपा का दामन थाम रहे हैं. उन्होंने कहा, 'कुछ लोग सिर्फ खुद और अपने परिवार को बचाने के लिए पार्टी छोड़ रहे हैं. उनमें धैर्य नहीं है. जिनके खिलाफ हम लड़ते रहे, उन्हीं के साथ जाकर खड़े हो गए. अगर वे सीधे भाजपा में चले जाते तो हमें इतनी आपत्ति नहीं होती, लेकिन पार्टी के साथ विश्वासघात करना अक्षम्य है।  उन्होंने उन नेताओं पर भी निशाना साधा जो दावा करते हैं कि उन्होंने कार्यकर्ताओं को बचाने के लिए पार्टी छोड़ी. ममता ने कहा, 'वे कहते हैं कि कार्यकर्ताओं को बचाने के लिए गए हैं, लेकिन अपने ही इलाके में एंट्री नहीं कर पा रहे. वे कार्यकर्ताओं को नहीं, बल्कि अपनी दौलत बचाने गए हैं. क्या वे आपका पैसा वापस लाएंगे? नहीं. उन्होंने धर्म, सांप्रदायिक सौहार्द और मूल्यों तक का सौदा कर दिया है और अब अहंकार के साथ घूम रहे हैं।  ममता बनर्जी ने बागियों को चेतावनी देते हुए कहा कि अभी भी जिन लोगों में समझ बाकी है, वे वापस लौट आएं. उन्होंने कहा, 'जो लोग सोच रहे हैं कि वे इस रास्ते पर चलकर बच जाएंगे, वे अंत में कहीं के नहीं रहेंगे. न इधर के रहेंगे, न उधर के।  जमीनी कार्यकर्ताओं को बताया महत्वपूर्ण अपने भाषण में ममता ने बार-बार पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं की भूमिका को सबसे महत्वपूर्ण बताया. उन्होंने कहा, 'कार्यकर्ता नेता बनाते हैं और नेता कार्यकर्ताओं को तैयार करते हैं. मैं हर दिन अपने कार्यकर्ताओं से मिलती हूं और वे मजबूती से हमारे साथ खड़े हैं.' उन्होंने आरोप लगाया कि जिन नेताओं ने पार्टी छोड़ी, वे कार्यकर्ताओं के संघर्ष और बलिदान से लाभ उठाकर आज व्यक्तिगत हितों के लिए दल बदल रहे हैं. उन्होंने कहा, "हमने खून बहाया, संघर्ष किया. जो कठिन समय में हमारे साथ नहीं रहे, अगर वे पार्टी नहीं छोड़ते तो भाजपा हमारे कार्यकर्ताओं पर इतना अत्याचार करने की हिम्मत नहीं करती।  ममता ने पुलिस और मीडिया पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में पुलिस का ऐसा रूप पहले कभी नहीं देखा.'क्या पुलिस का काम लोगों से कहना है कि गाड़ी लेकर आए हैं, बैठो और उस शैतान के पास चले जाओ? पुलिस का कर्तव्य कानून-व्यवस्था बनाए रखना है, लेकिन जो कुछ हो रहा है, वह पूरी तरह गैरकानूनी है।  उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों को सभाओं और रैलियों की अनुमति नहीं दी जा रही है और सोशल मीडिया पर सरकार की आलोचना करने वालों को गिरफ्तार किया जा रहा है. उन्होंने कहा, "यूट्यूब, फेसबुक, इंस्टाग्राम और दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपनी बात रखने वाले लोगों को गिरफ्तार किया जा रहा है. क्या भाजपा का मतलब 'वन पार्टी, वन नेशन' है? हम इसे कभी स्वीकार नहीं करेंगे।  ममता बनर्जी ने अपने परिवार का जिक्र करते हुए कहा कि विश्वासघात की वजह से उन्होंने अपने दो भाइयों से संबंध तोड़ लिए थे, लेकिन उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी का परिवार हमेशा उनके साथ खड़ा रहा. उन्होंने कहा कि अभिषेक को लगातार सीआईडी, ईडी और सीबीआई के समन मिलते रहते हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है. "मैं एयरपोर्ट जाती हूं तो भी उन्हें पहले से पता चल जाता है कि मैं कहां जा रही हूं।  भाषण के अंत में ममता बनर्जी ने 21 जुलाई को होने वाली टीएमसी की शहीद दिवस रैली को सफल बनाने की अपील की. उन्होंने कहा, 'इस रैली का आयोजन आसान नहीं होता, इसमें बहुत मेहनत और संघर्ष लगता है. लेकिन अगर सिर्फ पांच कार्यकर्ता भी आएंगे, तब भी हम यह सभा करेंगे. हमने कभी किसी से एक पैसा नहीं लिया. 21 जुलाई के बाद सभी लोग एकजुट होकर आगे बढ़ें।  उन्होंने भाजपा द्वारा मनाए जा रहे 'संविधान हत्या दिवस' का भी जिक्र किया और सवाल उठाया कि 'आज संविधान और कानून का राज कहां है? लोग पुलिस के जरिए डराए और धमकाए जा रहे हैं. ऐसे समय में केवल जनता और हमारे कार्यकर्ता ही एकजुट होकर इसका मुकाबला कर सकते हैं।  ममता बनर्जी का यह बयान ऐसे समय आया है जब हाल के दिनों में टीएमसी के कई नेता भाजपा में शामिल हुए हैं और पार्टी के कई नेताओं के खिलाफ केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्रवाई जारी है. … Read more