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अमेरिका ने कर दिया 300 अरब डॉलर का ऐलान, अब खाड़ी देशों की जेब पर नजर! जवाब देंगे मार्को रुबियो?

वाशिंगटन/तेहरान  मध्य पूर्व युद्ध को खत्म करने वाले समझौते की सबसे बड़ी शर्त रही- ईरान के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास के लिए 300 अरब डॉलर के फंड की. ईरान को हुए नुकसान की भरपाई के लिए ये रकम काफी है लेकिन अभी तक यह साफ नहीं है कि इस भारी-भरकम राशि का खर्चा कौन उठाएगा? इस्लामाबाद MoU में लिखा है कि अमेरिका अपने खाड़ी के साझेदारों के साथ मिलकर ईरान के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर का एक ठोस योजना तैयार करेगा. इस योजना को अंतिम समझौते के साथ 60 दिनों के अंदर लागू किया जाएगा।  इसके अलावा अमेरिका सभी जरूरी लाइसेंस, छूट और अनुमतियां भी देगा ताकि पैसे के लेन-देन में कोई रुकावट न आए. इस फंड के अलावा अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर होते ही ईरान पर लगी सभी प्रकार की पाबंदियां हटा ली जाएंगी और उसे तुरंत तेल बेचने की छूट मिल जाएगी. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने साफ कहा है कि ईरान को ये सब पाने के लिए 60 दिनों में शर्तों का पालन करना होगा. उन्होंने जोर देकर कहा कि अमेरिकी टैक्सपेयर्स का एक भी डॉलर ईरान को नहीं जाएगा. तो फिर ईरान को इतने पैसे देगा कौन? कौन देगा ईरान को 300 बिलियन डॉलर?     ईरान की इस डील को लेकर एक्सपर्ट्स कहते हैं कि अमेरिका इसके पैसे अपने अमीर खाड़ी देशों से वसूलेगा. आपको बता दें कि ये वही देश हैं, जहां अमेरिका के मिलिट्री बेसेज हैं और जिन पर युद्ध के दौरान ईरान ने हजारों ड्रोन और मिसाइलें दागी थीं. युद्ध के तबाह हो चुके ईरान को इस फंड की बहुत जरूरत है, लेकिन खाड़ी देश अभी तैयार नहीं दिख रहे।      सऊदी विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान ने पिछले हफ्ते इस फंड पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. उन्होंने ये कहकर बात टाल दी कि पहले विश्वास बहाल करना होगा. ईरान के हमलों के बाद रिश्ते सुधारने की बातचीत जरूरी है, उसके बाद ही आर्थिक सहयोग और निवेश की बात हो सकती है. सऊदी अरब अपनी घरेलू परियोजनाओं को प्राथमिकता दे रहा है।      वहीं संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने पहले ही ईरान से युद्ध क्षतिपूर्ति मांगी थी, हालांकि समझौते से पहले उसका रुख कुछ नरम हुआ था. UAE युद्ध से पहले ईरान का प्रमुख व्यापारिक साझेदार भी था, बावजूद इसके उसे ईरान के हमलों का सामना करना पड़ा।  मार्को रुबियो देंगे इस सवाल का जवाब? अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो इन सवालों के बीच तीन दिन के खाड़ी देशों के दौरे पर आ रहे हैं, जहां वे यूएई, कुवैत और बहरीन के नेताओं से मुलाकात करने वाले हैं. उनकी इस यात्रा का मकसद ही अपने साझेदार देशों में ये विश्वास जगाना है कि तेहरान के साथ अमेरिका की डील से उनका कोई नुकसान नहीं होगा. उन्होंने इस देशों को साफ करना होगा कि 300 अरब डॉलर का इंवेस्टमेंट पैकेज आएगा कहां से और उसे कैसे इस्तेमाल किया जाएगा. अमेरिका के लिए तो ये डील है लेकिन खाड़ी देशों के सर्वाइवल का सवाल है क्योंकि तेहरान ये रकम मिलने के बाद खुद को खड़ा तो करेगा लेकिन उनकी सेना और क्षेत्रीय प्रभाव भी मजबूत होगा. कतर, बहरीन, कुवैत, यूएई और सऊदी जैसे देश खाड़ी की सुरक्षा में अहम योगदान निभाते हैं, ऐसे में ईरान का मजबूत होना उनके लिए सिरदर्द है।  क्या-क्या आ रही हैं चुनौतियां?     खाड़ी देशों को डर है कि पैसा ईरान के हथियारों और प्रॉक्सी समूहों पर खर्च न हो जाए. इसलिए उन्हें मजबूत गारंटी चाहिए. जब तक उन्हें ये विश्वास मिल नहीं जाता, तब तक वे शायद ही अपना कोष ईरान के लिए खोलें।      समझौते में ईरान के फ्रोजन असेट्स को पूरी तरह उपलब्ध कराने का वादा है. जेडी वेंस ने कहा कि कतर और जेयर्ड कुश्नर ने इसके लिए एक दिलचस्प समाधान निकाला है. अमेरिका और कतर इस प्रक्रिया पर नजर रखेंगे।      वेंस के मुताबिक अगर पैसे छोड़े गए तो वे ईरानी लोगों को खाना खिलाने और अमेरिकी किसानों को फायदा पहुंचाने में लगाए जाएंगे. ईरान इस पैसे से अमेरिका से सोयाबीन, मक्का और गेहूं खरीद सकेगा. हालांकि तेहरान के केंद्रीय बैंक ने इससे इनकार कर दिया है।  समझौते की 60 दिनों का मियाद अब शुरू हो चुकी है. अगर इस दौरान अच्छी प्रगति हुई तो 300 अरब डॉलर का फंड ईरान को नया जीवन दे सकता है, लेकिन अगर विश्वास की कमी बनी रही तो यह सिर्फ कागजी वादा बनकर रह सकता है. यह फंड मध्य पूर्व में स्थायी शांति का आधार बन सकता है, लेकिन इसके लिए सभी पक्षों को समझौता करना होगा. फिलहाल सवाल यह है कि क्या खाड़ी देश ईरान को फिर से खड़ा करने के लिए अपना खजाना खोलेंगे?

डिफेंस सेक्टर के लिए सुनहरा अवसर: इजरायल से सहयोग, UAE को ब्रह्मोस से भारत को मिल सकती है बढ़त

 नई दिल्ली हाल के वर्षों में भारत ने अपनी रक्षा नीति और निर्यात क्षमता में जबरदस्त बदलाव देखा है. UAE के साथ ब्रह्मोस मिसाइल की संभावित डील और इजरायल के साथ गहरी हथियार उत्पादन साझेदारी इसका ताजा उदाहरण है. ईरान-इजरायल संघर्ष ने मध्य पूर्व में सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है, जिससे कई देश नए और विश्वसनीय हथियार आपूर्तिकर्ताओं की तलाश में हैं. भारत ठीक इसी जगह पर मजबूती से खड़ा हुआ है. पुराना आयातक देश अब निर्यातक के रूप में उभर रहा है।  ईरान संघर्ष का असर और अवसर ईरान-इजरायल तनाव और उससे जुड़े युद्ध ने पूरे क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति बदल दी. यूएई और अन्य गल्फ देशों ने महसूस किया कि अमेरिकी हथियारों पर अंधाधुंध निर्भरता पर्याप्त नहीं है. उन्हें तेज, सटीक और विश्वसनीय सिस्टम चाहिए जो क्षेत्रीय खतरों का सामना कर सकें. ब्रह्मोस मिसाइल और अकाशतीर एयर डिफेंस सिस्टम ठीक इन्हीं जरूरतों को पूरा करते हैं।  भारत इन वार्ताओं में तेजी से आगे बढ़ रहा है. ब्रह्मोस मिसाइल मैक 3 की स्पीड से दुश्मन को चौंका देती है. 2025 के ऑपरेशन सिंदूर में इसकी भूमिका ने कई देशों का ध्यान खींचा. यूएई अब नई नीति अपना रहा है. भारत को विश्वसनीय पार्टनर मान रहा है. यह डील सिर्फ व्यापार नहीं, बल्कि रणनीतिक साझेदारी का हिस्सा है।  इजरायल के साथ गहराती साझेदारी इजरायल की रक्षा मंत्रालय की उच्च स्तरीय टीम भारत दौरे पर है. डायरेक्टर जनरल मेजर जनरल (रि.) अमीर बराम ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और अन्य अधिकारियों से मुलाकात की है. दोनों पक्षों ने संयुक्त उत्पादन, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, AI, साइबर सुरक्षा और सह-विकास पर चर्चा की. फरवरी 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इजरायल यात्रा के दौरान हस्ताक्षरित MoU ने इस रास्ते को और मजबूत किया।  दोनों देश अब सिर्फ खरीद-बिक्री तक सीमित नहीं रहना चाहते. वे संयुक्त हथियार बनाने, भारत में उत्पादन स्थापित करने और तीसरे देशों में निर्यात करने की दिशा में काम कर रहे हैं. इजरायल की तकनीक और भारत की निर्माण क्षमता का यह कॉम्बिनेशन गेम चेंजर साबित हो सकता है. Barak-8 मिसाइल, Heron ड्रोन और अन्य सिस्टम पहले से ही भारतीय सेना में सफल हैं. अब आगे का फोकस को-प्रोडक्शन पर है।  भारत का रक्षा निर्यात कैसे बढ़ा? पिछले दशक में भारत के रक्षा निर्यात में भारी उछाल आया है. FY 2025-26 में यह आंकड़ा 38,424 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष से 62% ज्यादा है. सरकार का लक्ष्य 2030 तक 50,000 करोड़ रुपये का है. आत्मनिर्भर भारत अभियान, नई डिफेंस एक्विजिशन प्रोसीजर और प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी ने इस बदलाव को संभव बनाया।  ईरान संघर्ष ने दुनिया की सप्लाई लाइन को प्रभावित किया. कई देशों ने देखा कि भारत न केवल हथियार दे सकता है बल्कि समय पर और विश्वसनीय तरीके से सप्लाई भी कर सकता है. फिलीपींस पहले ही ब्रह्मोस ले चुका है. अब UAE, सऊदी अरब जैसे देश भी रुचि दिखा रहे हैं. भारत की तटस्थ विदेश नीति भी फायदेमंद साबित हो रही है. वह न तो पूर्ण रूप से किसी एक ब्लॉक का हिस्सा है और न ही दूसरे का।  रणनीतिक महत्व यह विकास भारत को ग्लोबल डिफेंस प्लेयर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. पहले भारत मुख्य रूप से रूस, इजरायल और कुछ पश्चिमी देशों से हथियार खरीदता था. अब वही भारत ब्रह्मोस जैसी स्वदेशी मिसाइल निर्यात कर रहा है. MUM-T (Manned-Unmanned Teaming) और ऑटोनॉमस सिस्टम में भी प्रगति हो रही है।  UAE और इजरायल दोनों के साथ मजबूत संबंध भारत की मध्य पूर्व नीति को संतुलित बनाते हैं. एक तरफ इजरायल के साथ तकनीकी गहराई, दूसरी तरफ अरब देशों के साथ आर्थिक और सुरक्षा साझेदारी. ईरान संघर्ष ने इन अवसरों को तेज किया है क्योंकि क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ने से हर देश अपनी सुरक्षा मजबूत करना चाहता है।  हालांकि सफलता के साथ चुनौतियां भी जुड़ी हैं. ब्रह्मोस में रूस का हिस्सा होने से कुछ डील्स में उसकी मंजूरी जरूरी है. भू-राजनीतिक संवेदनशीलता को संभालना भी मुश्किल है. फिर भी, भारत की बढ़ती क्षमता और डिप्लोमेसी इन चुनौतियों से निपटने में सक्षम दिख रही है।  UAE को ब्रह्मोस देने की बातचीत और इजरायल के साथ संयुक्त उत्पादन साझेदारी भारत के रक्षा क्षेत्र की नई कहानी लिख रही है. ईरान-इजरायल युद्ध ने दुनिया को अस्थिर किया, लेकिन भारत ने इसे अवसर में बदल लिया. आज भारत न सिर्फ अपनी सेना को मजबूत कर रहा है बल्कि दुनिया को विश्वसनीय हथियार और प्रौद्योगिकी भी दे रहा है. यह बदलाव भारत को 21वीं सदी का रक्षा निर्यातक बनाने की राह पर ले जा रहा है। 

अल-नीनो के संभावित प्रभाव से निपटने राज्य सरकार मुस्तैद, किसानों को अल-नीनो से बचाने किए जा रहे हैं उपाय: मंत्री नेताम

रायपुर अल-नीनो के प्रभाव से इस बार मानसून कमजोर रहने की आशंका के बीच छत्तीसगढ़ सरकार ने किसानों के हितों की रक्षा के लिए तेजी से कदम उठाए हैं। सूखे की स्थिति से निपटने के लिए राज्य सरकार ने कम अवधि वाली फसलों, दलहन-तिलहन पर जोर, बीज सुरक्षा और फसल बीमा को प्राथमिकता देते हुए व्यापक रणनीति तैयार की है। इस आशय की जानकारी कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री  राम विचार नेताम ने केन्द्रीय कृषि मंत्री  शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में दी। बैठक वीडियोकांफ्रेंसिंग के माध्यम से संपन्न हुई।       बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त  सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी, संचालक कृषि  राहुल देव, संचालक अनुसंधान डॉ. विवके त्रिपाठी सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।       वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित बैठक में मंत्री  नेताम ने बताया कि       प्रदेश में 22 जून तक औसत वर्षा महज 30.8 मिलीमीटर दर्ज की गई है, जो पिछले 10 वर्षों के औसत से 58.3 मिलीमीटर कम है। खरीफ बोनी का लक्ष्य 48.69 लाख हेक्टेयर है, लेकिन अभी तक केवल 2 प्रतिशत क्षेत्र में ही बोनी हो पाई है। इस चुनौतीपूर्ण स्थिति में सरकार ने किसानों को संभावित घाटे से बचाने के लिए कई ठोस उपाय शुरू कर दिए हैं।     कृषि उत्पादन आयुक्त  परदेशी ने बताया कि कृषि विभाग ने कम अवधि वाली धान के किस्मों को बढ़ावा देने के साथ-साथ मक्का, कोदो, कुटकी, रागी, दलहनी और तिलहनी फसलों के गुणवत्तापूर्ण बीजों को सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं। उच्चहन भूमि में अनाज के साथ दलहन-तिलहन फसलों को अंतरवर्तीय फसल के रूप में लगाने की सलाह दी जा रही है। धान की जगह दलहन-तिलहन फसलों की ओर किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।      उन्होंने बताया कि बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करते हुए करते हुए राज्य बीज निगम ने 4.95 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज वितरण का लक्ष्य रखा है। सूखे प्रभावित 15 जिलों के लिए 1,22,095 क्विंटल बीज उपलब्ध कराया गया है, जिसमें से 48,449 क्विंटल किसानों तक पहुंच चुका है।        परदेशी ने बताया कि रासायनिक उर्वरकों का पर्याप्त भंडारण सुनिश्चित करने के साथ नैनो उर्वरक और लाभकारी फसलों के प्रति जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।      सरकार ने बीमा कंपनियों के साथ समन्वय स्थापित कर फसल नुकसान की भरपाई के लिए बीमा प्लान को प्रभावी बनाने के निर्देश भी दिए हैं। ताकि किसानों को  आर्थिक क्षति से बचाया जा सके। उन्होंने यह भी बताया कि अल-नीनो के प्राभाव  कम होने वाली दलहन-तिलहन और कम अवधि की फसलों पर फोकस किया जा रहा है। साथ ही  इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर अनुसंधान विभाग द्वारा अल-नीनो को ध्यान में रखते हुए आकस्मिक कार्ययोजना तैयार की गई है।

मोहन नागर और स्व. भगवानदास रैकवार के योगदान ने मध्यप्रदेश को किया गौरवान्वित : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राष्ट्रपति मती द्रौपदी मुर्मु जी द्वारा मंगलवार को नई दिल्ली में मध्यप्रदेश की दो विभूतियों  मोहन नागर (समाज सेवा) तथा  भगवान दास रैकवार (खेल और बुंदेली मार्शल आर्ट, मरणोपरांत) को ‘पद्म’ सम्मान प्रदान किए जाने पर बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि समाज सेवा और खेल जगत में दोनों विभूतियों के उल्लेखनीय योगदान ने न केवल मध्यप्रदेश को गौरवान्वित किया है बल्कि समाज और युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का एक उत्कृष्ट उदाहरण भी प्रस्तुत किया है। उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश से इस वर्ष (2026) कुल 4 हस्तियों का पद्म पुरस्कार से सम्मानित करने के लिए चयन किया गया। इनमें  मोहन नागर,  कैलाश चंद्र पंत,  भगवान दास रैकवार और डॉ. नारायण व्यास शामिल हैं। भारत सरकार द्वारा 25 जनवरी 2026 को पुरस्कारों की घोषणा हुई। वर्ष 2026 के पद्म पुरस्कार प्रदान करने का समारोह नई दिल्ली के राष्ट्रपति भवन में दो चरणों में आयोजित किया गया। पहला चरण 25 मई 2026 को संपन्न हुआ। इस वर्ष कुल 131 पद्म पुरस्कारों की घोषणा की गई। मध्य प्रदेश की दो विभूतियां  पंत जी (साहित्य और शिक्षा क्षेत्र) और डॉ व्यास जी (पुरातत्व क्षेत्र) प्रथम चरण में गत माह सम्मान प्राप्त कर चुकी हैं। मंगलवार को हुए समारोह के द्वितीय चरण में 23 जून 2026 को 65 हस्तियों को सम्मानित किया गया। इसमें मध्यप्रदेश की दो विभूतियां शामिल हैं। मंगलवार 23 जून को  मोहन नागर ने सम्मान प्राप्त किया। इसके साथ ही गत 18 अप्रैल को दिवंगत हुए  भगवान दास रैकवार को मरणोपरांत सम्मान दिया गया, जो उनके पुत्र  राजकुमार रैकवार ने ग्रहण किया।  

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सुशासन संकल्प के अनुरूप जिला प्रशासन की बड़ी कार्रवाई

रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा शासकीय भूमि की सुरक्षा और भू-माफियाओं के विरुद्ध अपनाई गई जीरो टॉलरेंस नीति के तहत दुर्ग जिले में जिला प्रशासन लगातार कड़ी कार्रवाई कर रहा है। कलेक्टर  अभिजीत सिंह के निर्देशन में प्रशासन ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा करने वालों के लिए जिले में कोई स्थान नहीं है और ऐसे तत्वों के विरुद्ध कठोर एवं विधिसम्मत कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी।           इसी क्रम में धमधा तहसील के ग्राम बसनी में लंबे समय से शासकीय भूमि पर किए गए अवैध कब्जों को हटाकर शासन की जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया गया। कुछ प्रभावशाली व्यक्तियों द्वारा शासकीय भूमि पर झटका तार लगाकर तथा खरीफ एवं रबी फसलों की खेती कर अवैध कब्जा किया गया था। शिकायत प्राप्त होने पर कलेक्टर  अभिजीत सिंह ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच के निर्देश दिए।      तहसीलदार धमधा द्वारा हल्का पटवारी से प्रतिवेदन प्राप्त कर राजस्व प्रकरण में विस्तृत जांच और सुनवाई की गई। तथ्यों की पुष्टि होने पर संबंधित कब्जाधारियों के विरुद्ध विधिवत बेदखली आदेश पारित किया गया। आदेश के पालन में 22 जून 2026 को राजस्व विभाग और ग्राम पंचायत बसनी के संयुक्त प्रयास से व्यापक कार्रवाई करते हुए शासकीय भूमि को कब्जा मुक्त कराया गया।           तहसीलदार मती मीना साहू ने बताया कि कार्रवाई के दौरान सेवाराम लोधी द्वारा शासकीय खसरा नंबर 1077 की 20 डिसमिल तथा खसरा नंबर 1188 की 0.34 हेक्टेयर भूमि पर किए गए कब्जे को हटाया गया। इसी प्रकार राजकुमार लोधी के कब्जे से 7 डिसमिल तथा राजकपूर लोधी के कब्जे से 13 डिसमिल शासकीय भूमि मुक्त कराई गई। वहीं शिवकुमार मौर्य द्वारा खसरा नंबर 1077 की 8 डिसमिल भूमि तथा खसरा नंबर 1076 की 0.19 हेक्टेयर भूमि पर किए गए अवैध कब्जे और लगाए गए झटका तार को भी हटाकर भूमि को शासन के पक्ष में सुरक्षित किया गया। पूरी कार्रवाई शांतिपूर्ण और विधिसम्मत ढंग से संपन्न हुई, जिसमें राजस्व निरीक्षक धमधा, राजस्व निरीक्षक पेण्ड्रावन, हल्का पटवारी एवं ग्राम पंचायत सचिव उपस्थित रहे।           जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय की मंशा के अनुरूप शासकीय संपत्तियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। भू-माफियाओं, अवैध कब्जाधारियों और शासकीय भूमि का दुरुपयोग करने वालों के विरुद्ध भविष्य में भी इसी प्रकार कठोर कार्रवाई जारी रहेगी। प्रशासन की इस निर्णायक पहल से ग्रामीणों में संतोष और विश्वास का माहौल है तथा शासकीय भूमि को संरक्षित करने के इस कदम की व्यापक सराहना की जा रही है।

वर्ष 2025 में अब तक के सर्वाधिक 49 हजार एडमिशन हुए

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में रोजगार के क्षेत्र में सतत रूप से नवाचारों की आवश्यकता है। मध्यप्रदेश में धार्मिक, प्राकृतिक, पुराधरोहर से संबंधित पर्यटन क्षेत्र समृद्ध है। पर्यटकों को आवश्यक मार्गदर्शन के लिए गाइड की व्यवस्था को सशक्त बनाने और विभिन्न व्यंजनों का आनंद दिलवाने के लिए कार्य की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। युवाओं को बड़ी संख्या में इन कार्यों से रोजगार मिलेगा। कौशल विकास और रोजगार विभाग का पर्यटन विभाग से तालमेल स्थापित कर यह कार्य संभव है। इसी तरह के रोजगारपरक कार्य दिलवाने के लिए विभिन्न विभाग नवाचार कर सकते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंगलवार को मंत्रालय में कौशल विकास और रोजगार विभाग की गतिविधियों की बैठक में समीक्षा की। बैठक में कौशल विकास और रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  गौतम टेटवाल,मुख्य सचिव  अनुराग जैन, मुख्यमंत्री कार्यालय में अपर मुख्य सचिव  नीरज मंडलोई, तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार विभाग के प्रमुख सचिव  मनीष सिंह और विभागीय अधिकारी उपिस्थत थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में फैक्ट्री परिसर में भी प्रशिक्षण संस्था संचालित की जा सकती है। उद्योगों की जरूरत को देखते हुए आवश्यक ट्रेड में प्रशिक्षण के प्रबंध किए जाएं। कौशल विकास और रोजगार दिलवाने के विभिन्न विभागों के कार्यों का समग्र प्रतिवेदन भी तैयार किया जाए। विभिन्न विभाग संचालित योजनाओं से दी जा रही सेवाओं और सृजित नए रोजगारों का विवरण भी संकलित करें ताकि इस क्षेत्र की उपलब्धि एक नजर में दर्शाई जा सके। शासकीय और निजी क्षेत्र द्वारा उपलब्ध करवाए जा रहे रोजगार, राज्य की ही उपलब्धि है। विभाग के प्रमुख नवाचार बैठक में विभाग स्तर पर किए गए विभिन्न नवाचारों की जानकारी दी गई। परम फाउंडेशन के अंतर्गत 10 आईटीआई का संचालन एक विशेष नवाचार है। प्रतिमाह युवा संगम के आयोजन, महिला ड्राइविंग प्रशिक्षण, प्रतिभा सम्मान, वर्ष 2025 से आईटीआई में 30 प्रतिशत के स्थान पर 35 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने, विद्यार्थियों को विदेशी भाषा प्रशिक्षण और इसके माध्यम से रोजगार की संभावना बढ़ाने का कार्य किया गया है। इसके अलावा मानव संसाधन सुदृढ़ीकरण के अंतर्गत तकनीकी और अंतर्राष्ट्रीय प्रशिक्षण का लाभ युवाओं को दिलवाया गया है। कौशल विकास क्षेत्र की प्रमुख उपलब्धियां बैठक में विभागीय उपलब्धियों की जानकारी भी दी गई। इनमें वर्ष 2025 में 490 दिव्यांग प्रशिक्षणार्थियों को संस्थाओं में प्रवेश, गत 2 वर्ष में प्लेसमेंट ड्राइव के माध्यम से 18 हजार 403 प्रशिक्षणार्थियों को रोजगार, वर्ष 2025 में आईटीआई चलो अभियान में अब तक के सर्वाधिक 49 हजार 402 प्रवेश, यूएन वूमेन के सहयोग से 12 जनजातीय बहुल जिलों की 2127 महिलाओं को प्रशिक्षण, प्रदेश के तीन प्रशिक्षण अधिकारियों को राष्ट्रीय शिक्षक अवार्ड, युवा संगम से सवा तीन लाख आवेदकों को लाभ, संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल पार्क में वर्ष 2024 से रोबोटिक्स, मेक्ट्रोनिक्स ऑटोमोबाइल जैसे 9 आधुनिक लाँगटर्म कोर्स का संचालन, 10 संभागीय आईटीआई के लिए हब इंस्टीट्यूट के रूप में व्यवस्थाएं कर ऑन-द-ऑब ट्रेनिंग और प्लेसमेंट सहायता दिलवाई जा रही है। वर्ष 2025 में आई टी आई में 3484 सीटों की वृद्धि की गई। वर्ष 2026 में 2356 सीटों की वृद्धि हुई। इस तरह दो वर्ष में 5840 सीट्स बढ़ी हैं। आईटीआई के विभिन्न ट्रेड में इस वर्ष 10 प्रशिक्षणार्थियों ने राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में सर्वाधिक अंक प्राप्त किए। इसके अतिरिक्त कौशल विकास और रोजगार विभाग युवाओं को अंतर्राष्ट्रीय स्पर्धाओं में भागीदारी का अवसर दिलवा रहा है। इस क्रम में वर्ष 2024 में फ्रांस में हुई अंतर्राष्ट्रीय वर्ल्ड स्किल स्पर्धा में मध्यप्रदेश के संस्कार शर्मा ने सायबर सिक्योरिटी स्किल में मेडालियम ऑफ एक्सीलेंस हासिल किया। क्षेत्रीय स्पर्धा में 44 पदक और राष्ट्रीय स्पर्धा में 8 पदक प्राप्त करने की उपलब्धि भी मध्यप्रदेश को मिली है। ग्लोबल पार्क, भोपाल में वर्ष 2026-27 में 3 हजार सर्टिफिकेशन का लक्ष्य तय किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रमुख निर्देश              प्रदेश में कौशल विकास की गतिविधियां निरंतर संचालित हों।              औद्योगिक संस्थानों की आवश्यकता के अनुरूप कोर्स डिजाइन कर युवाओं को प्रशिक्षित किया जाए।              खान-पान तैयार करने (पाक कला प्रशिक्षण) और गाइड के प्रशिक्षण को भी प्राथमिकता दी जाए।              कोसा वस्त्रों के निर्माण के लिए प्रदेश में अधोसंरचना उपलब्ध है। युवाओं को उद्यानिकी विभाग के सहयोग से शहतूत उत्पादन जैसे कार्यों से जोड़ा जाए। रेशम उत्पादन की संभावनाओं पर भी कार्य किया जाए।  गुना जिले में जैकेट बनाने का कार्य एक आदर्श मॉडल है। आर्थिक लाभ दिलवाने वाली अनेक गतिविधियां घर से ही संचालित की जा सकती हैं। लघु और कुटीर उद्योगों से युवाओं को जोड़ने के ठोस प्रयास किए जाएं।  

डिजिटल गवर्नेंस को सुरक्षित और विश्वसनीय बनाने पर जोर, देशभर के विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव

रायपुर राज्य में डिजिटल गवर्नेंस के तेजी से बढ़ते दायरे और शासकीय सेवाओं के बढ़ते डिजिटलीकरण के बीच नागरिकों के डेटा एवं महत्वपूर्ण डिजिटल अवसंरचना की सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाने के उद्देश्य से रायपुर में "Strengthening Cyber Security Frameworks for State Data" विषय पर राज्य स्तरीय विभागीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग, छत्तीसगढ़ शासन तथा चिप्स (CHiPS) द्वारा आयोजित इस कार्यशाला में विभिन्न विभागों, बोर्डों एवं निगमों के 120 से अधिक वरिष्ठ अधिकारी, तकनीकी विशेषज्ञ और राष्ट्रीय स्तर के साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ शामिल हुए। साइबर सुरक्षा अब सुशासन और जनविश्वास का विषय : सचिव  अंकित आनन्द कार्यक्रम के मुख्य अतिथि इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव  अंकित आनन्द  ने कहा कि डिजिटल गवर्नेंस की सफलता नागरिकों के विश्वास पर आधारित है और यह विश्वास तभी मजबूत होगा जब शासकीय डिजिटल प्रणालियां सुरक्षित, विश्वसनीय और साइबर खतरों का सामना करने में सक्षम हों। उन्होंने कहा कि साइबर सुरक्षा अब केवल तकनीकी विषय नहीं रह गई है, बल्कि यह सुशासन, सेवा निरंतरता और जनविश्वास से जुड़ा एक महत्वपूर्ण रणनीतिक विषय बन चुका है। राज्य शासन का लक्ष्य केवल डिजिटल सेवाओं का विस्तार करना नहीं, बल्कि उन्हें सुरक्षित और लचीला बनाना भी है। राज्य के लिए तैयार हो रहा व्यापक साइबर सुरक्षा रोडमैप चिप्स के मुख्य कार्यपालन अधिकारी  मयंक अग्रवाल ने कार्यशाला की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि राज्य शासन साइबर सुरक्षा को डिजिटल शासन की आधारशिला मानते हुए राज्य की डिजिटल परिसंपत्तियों की सुरक्षा के लिए व्यापक और भविष्य उन्मुख रोडमैप तैयार कर रहा है। उन्होंने बताया कि कार्यशाला में भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप छह प्रमुख विषयों पर चर्चा की गई, जिनमें जोखिम आधारित सुरक्षा मूल्यांकन, राज्य डेटा सेंटर एवं नेटवर्क सुरक्षा, सुरक्षा संचालन केंद्र (SOC), जीरो ट्रस्ट आर्किटेक्चर, डेटा गवर्नेंस तथा साइबर जागरूकता एवं क्षमता निर्माण शामिल हैं। विशेषज्ञों ने बताए राष्ट्रीय और वैश्विक सुरक्षा मानक तकनीकी सत्रों में देश के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने साइबर सुरक्षा के विभिन्न आयामों पर विस्तृत जानकारी साझा की। पुलिस महानिरीक्षक (तकनीकी सेवाएं) डॉ. ध्रुव गुप्ता ने डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट (DPDP Act-2023) की जानकारी देते हुए बताया कि यह कानून वर्ष 2027 से पूर्ण रूप से लागू हो जाएगा। गृह मंत्रालय के पूर्व संयुक्त सचिव एवं NATGRID के सलाहकार डॉ. सौरभ गुप्ता ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की सर्वोत्तम साइबर सुरक्षा प्रथाओं पर प्रकाश डाला। वहीं, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के पूर्व वैज्ञानिक-जी एवं डिप्टी डायरेक्टर जनरल  सुरेश चंद्रा ने सरकारी डेटा सुरक्षा के लिए मानकीकरण, प्रमाणन और Trusted IT Systems के महत्व को रेखांकित किया। समूह चर्चाओं से मिले महत्वपूर्ण सुझाव कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को छह विषयगत समूहों में विभाजित कर विस्तृत विचार-विमर्श कराया गया। चर्चा के दौरान साइबर सुरक्षा परिपक्वता बढ़ाने, सुरक्षा निगरानी तंत्र को मजबूत करने, विभागीय जवाबदेही सुनिश्चित करने, नियमित सुरक्षा ऑडिट, प्रभावी घटना प्रतिक्रिया तंत्र (Incident Response Mechanism) और मानव संसाधन क्षमता निर्माण जैसे विषयों पर महत्वपूर्ण सुझाव प्राप्त हुए। राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचेंगी कार्यशाला की अनुशंसाएं कार्यशाला से प्राप्त सुझावों और अनुशंसाओं का संकलन कर राज्य की साइबर सुरक्षा कार्ययोजना को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा। चयनित अनुशंसाओं को राष्ट्रीय स्तर पर विचारार्थ संबंधित संस्थाओं एवं भारत सरकार को भी भेजा जाएगा। कार्यक्रम में एनआईटी रायपुर के निदेशक डॉ. व्ही. रमन्ना राव, छत्तीसगढ़ राज्य सूचना विज्ञान अधिकारी  टी.एन. सिंह, चिप्स के अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी  शशांक पाण्डेय,  यू.एस. अग्रवाल,  आशीष जायसवाल, संयुक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी  अनुपम आशीष टोप्पो सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी एवं तकनीकी विशेषज्ञ उपस्थित रहे। सुरक्षित डिजिटल भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण पहल कार्यक्रम के समापन पर प्रतिभागियों ने सुरक्षित डिजिटल शासन, मजबूत साइबर अवसंरचना तथा नागरिकों के डेटा संरक्षण के लिए सभी विभागों के समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। यह कार्यशाला राज्य में साइबर सुरक्षा को नई दिशा देने और डिजिटल सेवाओं को अधिक सुरक्षित एवं भरोसेमंद बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हुई।

26वें अखिल भारतीय फिंगरप्रिंट सम्मेलन-2026 में उत्कृष्ट केस स्टडी के लिए द्वितीय पुरस्कार प्राप्त करने पर डीजीपी ने दी बधाई

भोपाल  राष्ट्रीय अपराध रकॉर्ड ब्यूरो (NCRB), गृह मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा नई दिल्ली में आयोजित 26वें अखिल भारतीय फिंगरप्रिंट सम्मेलन-2026 में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान प्राप्त करने वाले जिला विदिशा के निरीक्षक (फिंगरप्रिंट)  योगेन्द्र साहू ने आज पुलिस मुख्यालय भोपाल में पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा से सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा ने निरीक्षक  योगेन्द्र साहू को उनकी उल्लेखनीय उपलब्धि पर बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वैज्ञानिक अनुसंधान एवं आधुनिक तकनीकों का प्रभावी उपयोग वर्तमान पुलिसिंग की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि मध्यप्रदेश पुलिस की तकनीकी दक्षता, अनुसंधान क्षमता एवं पेशेवर उत्कृष्टता का राष्ट्रीय स्तर पर प्रमाण है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस उपलब्धि से प्रदेश के अन्य पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी भी वैज्ञानिक अनुसंधान तथा तकनीक आधारित अपराध विवेचना के लिए प्रेरित होंगे। उल्लेखनीय है कि नई दिल्ली में 19 एवं 20 जून 2026 को आयोजित 26वें अखिल भारतीय फिंगरप्रिंट सम्मेलन-2026 में देशभर के फिंगरप्रिंट विशेषज्ञों, फोरेंसिक वैज्ञानिकों एवं पुलिस अधिकारियों ने सहभागिता की थी। सम्मेलन का उद्घाटन माननीय केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री  अमित शाह द्वारा किया गया था। सम्मेलन में मध्यप्रदेश पुलिस के निरीक्षक (फिंगरप्रिंट)  योगेन्द्र साहू को “Smart Use of Fingerprint Science in Investigation” विषय पर प्रस्तुत उत्कृष्ट केस स्टडी के लिए राष्ट्रीय स्तर पर द्वितीय पुरस्कार प्रदान किया गया। उनकी प्रस्तुति जिला विदिशा के थाना शमशाबाद में दर्ज एक जघन्य ब्लाइंड मर्डर प्रकरण पर आधारित थी, जिसमें घटनास्थल से प्राप्त फिंगरप्रिंट साक्ष्यों एवं नेशनल ऑटोमेटेड फिंगरप्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (NAFIS) के प्रभावी उपयोग के माध्यम से आरोपी की पहचान कर प्रकरण का सफल निराकरण किया गया था। केस स्टडी में वैज्ञानिक साक्ष्य संकलन, तकनीकी विश्लेषण, आधुनिक फिंगरप्रिंट विज्ञान तथा NAFIS प्रणाली के प्रभावी उपयोग को विस्तार से प्रदर्शित किया गया, जिसकी राष्ट्रीय स्तर पर विशेषज्ञों एवं वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा विशेष सराहना की गई। प्रतियोगी मूल्यांकन में देशभर से प्राप्त प्रविष्टियों के मध्य इस प्रस्तुति को द्वितीय स्थान प्राप्त हुआ। यह उपलब्धि मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा वैज्ञानिक एवं तकनीक आधारित पुलिसिंग को सशक्त बनाने के निरंतर प्रयासों का परिणाम है। इस अवसर पर अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (SCRB)  जयदीप प्रसाद, संचालक फिंगरप्रिंट ब्यूरो मध्यप्रदेश  मनोज राजपूत उपस्थित थे।  

सारंगढ़-बिलाईगढ़ में खनिज विभाग की बड़ी कार्रवाई 1 पोकलेन और 6 हाईवा जब्त

​रायपुर      राज्य में अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण के खिलाफ मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के सख्त और 'जीरो टॉलरेंस' के निर्देशों का असर अब जमीनी स्तर पर दिखने लगा है। सीएम के कड़े रुख के बाद प्रदेश भर में खनिज माफियाओं के हौसले पस्त हैं। इसी कड़ी में सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में कलेक्टर  के मार्गदर्शन में खनिज विभाग ने बीते दो दिनों में एक बड़ी और ताबड़तोड़ कार्रवाई को अंजाम दिया है। इस विशेष अभियान के तहत अवैध गतिविधियों में संलिप्त 1 पोकलेन मशीन और 6 हाईवा वाहनों को जब्त किया गया है। ​सोमवार और मंगलवार को लगातार कार्रवाई        खनिज अमले द्वारा जिले के विभिन्न क्षेत्रों में सघन निरीक्षण किया जा रहा है। इसी क्रम में ​सोमवार को सारंगढ़ तहसील क्षेत्र में निरीक्षण के दौरान गौण खनिज साधारण रेत का अवैध परिवहन करते हुए 02 हाईवा (वाहन क्रमांक CG-07-CR-7715 एवं CG-13-AQ-0321) को रंगे हाथों पकड़ा गया। इन दोनों वाहनों को जब्त कर सारंगढ़ थाने की सुरक्षा में सौंप दिया गया है। इसी तरह ​मंगलवार की कार्रवाई के तहत तहसील सारंगढ़ के ही अंतर्गत दोबारा किए गए निरीक्षण में गौण खनिज चूना पत्थर का अवैध परिवहन करते पाए जाने पर 02 और हाईवा (वाहन क्रमांक CG-13-BB-2721 एवं CG-13-BB-2321) पर दंडात्मक कार्रवाई करते हुए उन्हें भी सारंगढ़ थाने की सुपुर्दगी में रखा गया। ​कोसीर क्षेत्र में औचक दबिश: पोकलेन मशीन भी जब्त      ​ खनिज विभाग की टीम ने उप तहसील कोसीर क्षेत्र के ग्राम पंचायत पासीद में औचक निरीक्षण (सरप्राइज रेड) किया। इस कार्रवाई ने रेत माफियाओं में हड़कंप मचा दिया। मौके पर साधारण रेत के अवैध उत्खनन में सीधे तौर पर संलिप्त 01  पोकलेन मशीन को जब्त कर स्थानीय ग्राम सरपंच की सुपुर्दगी में दिया गया। इसके साथ ही रेत के अवैध परिवहन में लगे 02 अन्य हाईवा (वाहन क्रमांक CG-06-HD-6457 एवं CG-11-BK-6697) को जब्त कर कोसीर थाने की सुरक्षा में खड़ा कराया गया है। ​कड़े कानूनों के तहत दर्ज हुआ मामला     ​ खनिज विभाग के अधिकारियों ने बताया कि यह पूरी बड़ी कार्रवाई छत्तीसगढ़ गौण खनिज नियम 2015 एवं खान एवं खनिज विकास अधिनियम 1957 की धारा 21 के कड़े प्रावधानों के तहत की गई है।        ​ मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के स्पष्ट निर्देश हैं कि राज्य की संपदा को नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी रसूखदार या माफिया को बख्शा नहीं जाएगा। खनिज विभाग ने साफ कर दिया है कि जिले में अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण पर इस तरह की सख्त कार्रवाई आगे भी निरंतर जारी रहेगी।

तकनीकी साक्ष्यों और सतर्क पुलिसिंग से आरोपी गिरफ्तार

भोपाल  मध्यप्रदेश पुलिस की संवेदनशील, तकनीक आधारित एवं त्वरित कार्रवाई का एक उत्कृष्ट उदाहरण सामने आया है। जीआरपी थाना जबलपुर ने अमरकंटक एक्सप्रेस में यात्रा के दौरान चोरी गए 10 लाख रुपये से अधिक मूल्य के आभूषण एवं अन्य सामान को घटना के मात्र दो घंटे के भीतर बरामद कर आरोपी को गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त की है। पुलिस अधीक्षक रेल जबलपुर  सुंदर सिंह कनेश ने बताया कि 22 जून को नर्मदापुरम जिले के इटारसी निवासी  नीलेश मालपानी ने जीआरपी थाना जबलपुर में शिकायत दर्ज कराई थी कि ट्रेन क्रमांक 12853 अमरकंटक एक्सप्रेस में यात्रा के दौरान उनकी पत्नी के पर्स से सोने के आभूषण, एप्पल एयरपॉड, नगदी एवं अन्य दस्तावेज सहित लगभग 10 लाख 47 हजार रूप्ए की सामग्री चोरी हो गई हैं। रिपोर्ट पर थाना जीआरपी जबलपुर में प्रकरण दर्ज कर विवेचना प्रारंभ की गई। मामले को गंभीरता से लेते हुए अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक रेल  राजा बाबू सिंह के मार्गदर्शन में एक विशेष टीम का गठन किया गया। पुलिस टीम द्वारा रेलवे स्टेशन एवं आसपास के क्षेत्रों के सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी साक्ष्यों तथा मोबाइल लोकेशन का गहन विश्लेषण किया गया। जांच के दौरान चोरी गए एप्पल एयरपॉड की लोकेशन ट्रेस होने पर प्राप्त तकनीकी जानकारी एवं मुखबिर सूचना के आधार पर शिवनगर, गोहलपुर क्षेत्र में दबिश दी गई। कार्रवाई के दौरान एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया। आरोपी के कब्जे से चोरी गया सोने का हार, अंगूठियां, कान के टॉप्स, ब्रेसलेट, एप्पल एयरपॉड, नगदी, आधार कार्ड सहित अन्य सामग्री लगभग 10 लाख 47 हजार रूपए की जब्‍त की। मध्यप्रदेश पुलिस नागरिकों की सुरक्षा के प्रति तथा आधुनिक तकनीक और त्वरित कार्रवाई के माध्यम से अपराधियों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई करने हेतु प्रतिबद्ध है।