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इंदौर DAVV में गर्भ संस्कार की ट्रेनिंग, योग से लेकर भ्रूण विकास तक की मिलेगी शिक्षा

इंदौर  गर्भावस्था के दौरान मां का स्वास्थ्य अच्छा रहे और बच्चे का जन्म सुरक्षित तरीके से हो, इसके लिए सही पोषण, नियमित स्वास्थ्य जांच, तनाव प्रबंधन और सुरक्षित शारीरिक गतिविधियों की अहम भूमिका होती है। इन्हीं पहलुओं को अब विश्वविद्यालय स्तर पर पढ़ाने की तैयारी। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (DAVV) के स्कूल ऑफ फिजिकल एजुकेशन के स्कूल ऑफ योगा में गर्भ संस्कार पर पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा कोर्स शुरू किया जाएगा। गर्भ संस्कार पर केंद्रित यह अपनी तरह का पहला कोर्स होगा। जुलाई 2026-27 सत्र से इसे शुरू करने की योजना है। पहले बैच में 30 विद्यार्थियों को प्रवेश देने का प्रस्ताव है। इस पाठ्यक्रम में भारतीय परंपरा में प्रचलित गर्भ संस्कार की अवधारणा को आधुनिक गर्भावस्था देखभाल से जोड़ने की कोशिश की जाएगी। विद्यार्थियों को गर्भधारण से लेकर प्रसव तक महिला के शरीर में होने वाले बदलावों, भ्रूण के विकास, संतुलित पोषण, योग, प्राणायाम, ध्यान और मां तथा गर्भस्थ शिशु के बीच भावनात्मक जुड़ाव जैसे विषय पढ़ाए जाएंगे। इसके साथ ही गर्भावस्था के अलग-अलग चरणों में सुरक्षित शारीरिक गतिविधियों और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े पहलुओं की जानकारी भी दी जाएगी। कोर्स में सैद्धांतिक पढ़ाई के साथ अस्पतालों में व्यावहारिक प्रशिक्षण की योजना भी है। जुलाई से नए सत्र में शुरू करने की तैयारी DAVV के स्कूल ऑफ योगा में गर्भ संस्कार के पीजी डिप्लोमा के साथ तीन सर्टिफिकेट कोर्स भी शुरू करने की योजना है। इनमें योग एवं पोषण, योग एवं नेचुरोपैथी तथा योग एवं एक्यूप्रेशर शामिल हैं। इन पाठ्यक्रमों के माध्यम से योग, स्वास्थ्य, पोषण और प्राकृतिक स्वास्थ्य पद्धतियों से जुड़े विषयों की बुनियादी जानकारी दी जाएगी। आयुर्वेद की अवधारणाओं के साथ आधुनिक भ्रूण विज्ञान का अध्ययन स्कूल ऑफ योगा की एचओडी एवं प्रोफेसर सुंधीरा चंदेल ने बताया कि भारतीय परंपरा में गर्भ संस्कार को गर्भस्थ शिशु के विकास के अनुकूल वातावरण तैयार करने की अवधारणा के रूप में देखा जाता है। इसमें सकारात्मक विचारों, संगीत, संवाद, संतुलित भोजन और मां के भावनात्मक स्वास्थ्य को महत्व दिया जाता है। पाठ्यक्रम में गर्भ संस्कार के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पारंपरिक पक्षों के साथ आधुनिक भ्रूण विकास से जुड़ी जानकारी भी शामिल होगी। पाठ्यक्रम के तहत आयुर्वेद में वर्णित महीनेवार गर्भ विकास की अवधारणाओं और आधुनिक भ्रूण विज्ञान का तुलनात्मक अध्ययन कराया जाएगा। विद्यार्थियों को महिला और पुरुष प्रजनन तंत्र की संरचना, गर्भधारण की प्रक्रिया तथा प्रजनन से जुड़े हार्मोन की भूमिका के बारे में पढ़ाया जाएगा। इसके अलावा गर्भावस्था में हृदय और रक्त संचार तंत्र, श्वसन तंत्र, गुर्दों, पाचन तंत्र, मांसपेशियों, हड्डियों और मेटाबॉलिज्म में होने वाले बदलावों को भी समझाया जाएगा। तीनों ट्राइमेस्टर के अनुसार सिखाए जाएंगे योगाभ्यास गर्भावस्था के दौरान महिला की शारीरिक जरूरतें समय के साथ बदलती हैं। इसे ध्यान में रखते हुए पाठ्यक्रम में पहली, दूसरी और तीसरी तिमाही के अनुसार योगाभ्यास में जरूरी बदलाव करना सिखाया जाएगा। पहले ट्राइमेस्टर में हल्के व्यायाम और जोड़ों की गतिशीलता से जुड़े अभ्यासों की जानकारी दी जाएगी। दूसरे ट्राइमेस्टर में शरीर का संतुलन बनाए रखने, कमर को सहारा देने और आरामदायक मुद्राओं पर जोर रहेगा। तीसरे ट्राइमेस्टर में तकिए, कुर्सी और अन्य सहायक साधनों की मदद से संशोधित योगाभ्यास की जानकारी दी जाएगी। इसके साथ अनुलोम-विलोम, भ्रामरी, डायाफ्रामेटिक ब्रीदिंग, ध्यान और योग निद्रा जैसे विषय भी शामिल होंगे। इनका उद्देश्य विद्यार्थियों को तनाव प्रबंधन, श्वसन और विश्राम तकनीकों की समझ देना है। गर्भावस्था में किसी भी योग या शारीरिक गतिविधि का चयन महिला की स्वास्थ्य स्थिति और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार करना जरूरी होगा। अस्पतालों में डॉक्टरों के साथ मिलेगा व्यावहारिक अनुभव प्रस्तावित पाठ्यक्रम में व्यावहारिक प्रशिक्षण भी शामिल है। योजना के अनुसार, विद्यार्थियों को अस्पतालों में जाकर चिकित्सकों के साथ काम करने का अवसर दिया जाएगा। इससे वे गर्भावस्था के दौरान होने वाले सामान्य शारीरिक बदलावों, पोषण की जरूरतों, सुरक्षित गतिविधियों और मानसिक स्वास्थ्य जैसे विषयों को व्यावहारिक संदर्भ में समझ सकेंगे। डॉक्टरों के साथ संवाद के जरिए यह जानने में भी मदद मिलेगी कि किन परिस्थितियों में गर्भवती महिला को विशेषज्ञ चिकित्सा देखभाल की जरूरत होती है। इन पाठ्यक्रमों के जरिए भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े विषयों को व्यवस्थित शैक्षणिक स्वरूप देने की कोशिश की जाएगी। गर्भ संस्कार का कोर्स इसी दिशा में एक पहल है, जिसमें पारंपरिक अवधारणाओं के साथ आधुनिक भ्रूण विज्ञान, पोषण, योग और गर्भावस्था देखभाल से संबंधित विषयों को शामिल किया जाएगा।

MP के एरण को मिलेगी नई पहचान, विदेशों से वापस आएंगी प्राचीन मूर्तियां और पुरावशेष

सागर  भारत सरकार द्वारा देश के 15 लिविंग कल्चरल स्पेस की सूची में सागर के एरण को शामिल किए जाने के बाद एक वैश्विक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की तैयारी हो रही है. एरण एक ऐसा स्थान है, जहां हड़प्पा के समकालीन ताम्र पाषाण कालीन संस्कृति से लेकर गुप्तकालीन वास्तुकला के एक से बढ़कर एक उदाहरण है. एरण को भारत सरकार की DESH (डेवलपमेंट ऑफ एक्सकैवेशन साइट्स एंड हेरिटेज कॉम्प्लेक्स) योजना के तहत देश के उन 15 पुरास्थलों में शामिल किया गया है. जिन्हें लिविंग कल्चरल स्पेस के तौर पर विकसित किया जाएगा।  ऐसे में एरण के पुरावशेष जो अंग्रेजों के समय कोलकाता और लंदन म्यूजियम ले जाए गए हैं. उनको फिर से एरण में वापस ले जाने की चर्चा तेज हो गयी है. इसी कड़ी में सबसे पहली मांग कोलकाता के नेशनल म्यूजियम ले जाए गए समुद्रगुप्त के अभिलेख को वापस लाने की मांग ने जोर पकड़ा है. खास बात ये है कि इस मुहिम में पुरातत्वविद और जनप्रतिनिधि भी शामिल हैं और एरण के वैभवशाली इतिहास को अपने मूल स्थान पर वापस देखना चाहते हैं।  समुद्रगुप्त के अभिलेख कोलकाता म्यूजियम से आएंगे वापस! एरण को लिविंग कल्चरल स्पेस में शामिल किए जाने के साथ ही यहां के पुरातत्वविद और हेरिटेज लवर इस बात की मांग उठाने लगे हैं कि जब एरण को एक पर्यटन और पुरातत्व महत्व के स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है. तो एरण की वो मूर्तियां और पुरावशेष जो देश विदेश ले जाए गए हैं, उनको वापस लाया जाए. इस सिलसिले में सबसे पहला नाम समुद्रगुप्त के अभिलेख का सामने आया है. दरअसल समुद्रगुप्त का अभिलेख एरण के विष्णु मंदिर के पास मिला था।  जिसका उल्लेख ब्रिटिश अफसर जो इंजीनियर होने के साथ साथ भारतीय पुरातत्व के विद्वान के रूप में मशहूर हुए, उन्होंने अपनी किताब टूर रिपोर्ट बुंदेलखंड एंड मालवा में किया है. ये अभिलेख जनरल एलेक्जेंडर कनिंघम 1874-75 को मिला था और वो इस अभिलेख को एरण से कोलकाता से कोलकाता ले गए थे. जहां वो नेशनल म्यूजियम में रखा गया है. ये अभिलेख गुप्तकालीन ब्राह्मी और संस्कृत भाषा में लिखा गया है. इस अभिलेख की चौड़ाई 9 इंच, 3 फीट 1 इंच ऊंचा है. इसमें उकेरे गए अक्षरों का आकार आधे इंच का है।  क्या लिखा है समुद्रगुप्त अभिलेख में एरण के मूल निवासी और इंदिरा गांधी जनजातीय विश्वविद्यालय अमरकंटक के प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति व पुरातत्व प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष प्रो. मोहनलाल चढ़ार बताते हैं कि, ''इस अभिलेख में काफी महत्वपूर्ण जानकारियां हैं. इसमें समुद्रगुप्त को वीरता और नीति और तुष्टि में कुबेर के समान और क्रोधित होने पर यम के समान बताया गया है. समुद्रगुप्त को भक्ति नीति, पराक्रम से राजा की उपाधि के माध्यम से अपनी कीर्ति बढ़ाने वाला बताया गया है. समुद्रगुप्त को स्वर्णदान करने में राजा प्रथु एवं राघव से बताया गया है. लेख में समुद्रगुप्त को संपूर्ण पृथ्वी के संपूर्ण राज्यों को जीतकर वैभव प्रदान करने वाला बताया गया है. लेख के अनुसार समुद्रगुप्त के न्याय और पराक्रम से प्रसन्न होकर उसके पिता चंद्गगुप्त प्रथम ने उसे राजा शब्द से अभिषेक कर सम्मानित किया था और उत्रराधिकारी नियुक्त किया।  अभिलेख में समुद्रगुप्त की पत्नी दत्तदेवी का उल्लेख प्रो, मोहनलाल चढ़ार बताते हैं कि, ''इस अभिलेख में समुद्रगुप्त के साथ उनकी पत्नी दत्तदेवी का भी उल्लेख है. उसे उच्च कुल वाली कुलवधु राजलक्ष्मी एवं पतिव्रता नारी के रूप में बताया गया है. समुद्रगुप्त दत्तदेवी के अनेक पुत्र और पौत्रों की जानकारी अभिलेख में मिलती है. अभिलेख में कहा गया है कि दत्तदेवी गुप्त वंश में राजलक्ष्मी के रूप में आयी और उसके आने के पश्चात इस राजवंश में आमोद प्रमोद का वातावरण हो गया. अभिलेख के अनुसार दत्तदेवी के विवाह के समय वह अपने साथ हाथी घोड़े रत्न धन्य धान्य से युक्त होकर आयी थी. लेख में समुद्गगुप्त को अनेक युद्धों में विजय करने वाला, ओजस्वी यश प्राप्त करने वाला, युद्ध क्षेत्र में उर्जावान एवं कुशल बताया गया है।  एरिकेण नाम से एरण का उल्लेख जनरल एलेक्जेंडर कनिंघम के अनुसार, ''इस अभिलेख को विष्णु मंदिर की स्थापना से संबंधित बताया गया है. समुद्रगुप्त ने ऐरिकेण प्रदेश को अपना स्वभोग नगर बनाया था, इसकी जानकारी अभिलेख में मिलती है. अभिलेख में समुद्गगुप्त के नाम का उल्लेख है. एरण का नाम एरिकेण लिखा गया है. एरण क्षेत्र को नगर एवं प्रदेश शब्दों के साथ उल्लेख किया गया है. अभिलेख में उल्लेख मिलता है कि समुद्ग गुप्त के पराक्रम से उसके शत्रु सपने में भी आतंकित रहते थे।  समुद्रगुप्त वृद्धावस्था के दिनों में पत्नी, उससे उत्पन्न पुत्रों व बहुओं और पौत्रों के साथ आमोद पूर्वक रहने के लिए एरण आया था. अभिलेख एरण में किए गए किसी निर्माण कार्य का उल्लेख करता है, लेकिन अभिलेख के अंश से ये स्पष्ट नहीं होता है कि निर्माण कार्य क्या था अथवा किस देवता से संबंधित था. अभिलेख के सुरक्षित अंश में कोई तिथि नहीं दी गई है. यदि तिथि दी गई होगी, तो वह नष्ट हो चुकी है. अभिलेख की पांचवीं पंक्ति ’स्वभोगनगऐरिकिण प्रदेशे’ का अर्थ प्रो. कृष्णदत्त वाजपेयी ने 'अपने आमोद-प्रमोद के नगर ऐरिकिण क्षेत्र के नगर ऐरिकिण प्रदेशे' माना है।  सागर सांसद बढ़ाएगी मुहिम को आगे सांसद लता वानखेड़े का कहना है कि, ''सागर संसदीय क्षेत्र में एरण महत्वपूर्ण पुरास्थल है. सबसे पहले मैं मुख्यमंत्री का धन्यवाद करना चाहूंगी कि मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने उसे मध्य प्रदेश के कैलेंडर में शामिल कर महोत्सव की शुरुआत कराई है. इसके अलावा मैं लगातार केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को पत्र लेकर एरण के विकास के लिए अनुरोध किया है और उसी का नतीजा है कि आज एरण लिविंग कल्चरल स्पेस के रूप में जाना जाएगा. मुझे जानकारी मिली है कि, एरण की कई पुरातत्व महत्व की मूर्तियां अलग-अलग जगह पर ले जायी गयी हैं. एरण से लंदन मूर्तियां ले जाई गई हैं और समुद्रगुप्त का प्रसिद्ध अभिलेख कोलकाता म्यूजियम ले जाया गया है. मैं इन सब को वापस लाने के लिए केंद्र सरकार के माध्यम से प्रयास करूंगी। 

Dhanteras 2026: धनतेरस पर कब करें पूजा और खरीदारी? जानें शुभ मुहूर्त और पूजन विधि

Dhanteras 2026 : हर साल कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी तिथि को धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है. इस धन त्रयोदशी भी कहो जाता है. इस दिन भगवान धनवंतरी, कुबेर महाराज और माता लक्ष्मी की पूजा का विधान बताया गया है. मान्यता है कि इस दिन इनके विधिवत पूजन और कुछ खास चीजों की खरीदारी से धनधान्य और सुख-संपन्नता में वृद्धि होती है. आइए जानते हैं इस साल धनतेरस का त्योहार किस तारीख को मनाया जाएगा और इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त क्या रहने वाला है. धनतेरस 2026 का शुभ मुहूर्त हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर को सुबह करीब 9:30 बजे शुरू होगी. इस तिथि का समापन 7 नवंबर 2026 को सुबह करीब 11:45 बजे होगा. ऐसे में धनतेरस का त्योहार 6 नवंबर दिन शुक्रवार को मनाया जाएगा. खरीदारी और पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है? धनतेरस पर नई चीजों की खरीदारी बेहद शुभ मानी जाती है. मान्यता है कि इस दिन सोना, चांदी, पीतल के बर्तन, झाड़ू और धनिया खरीदकर घर लाने से सुख-संपन्नता बढ़ती है. बहुत सारे लोग अपने जरूरत की चीजें भी इस दिन खरीदकर लाते हैं. किसी नए काम की शुरुआत करना भी इस दिन लाभकारी माना गया है. धनतेरस का शुभ मुहूर्त खरीदारी का मुहूर्त- 6 नवंबर को सुबह 9:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक पूजा का शुभ मुहूर्त- शाम 6:18 बजे से रात 8:10 बजे तक धनतेरस पूजा की विधि धनतेरस के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें. घर और पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई करें. फिर एक चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर भगवान धनवंतरी और कुबेर महाराज की प्रतिमा स्थापित करें. इनके साथ मां लक्ष्मी की संयुक्त पूजा भी की जा सकती है. इनके समक्ष घी का दीपक जलाएं. गेहूं की एक कटोरी चौकी पर रखें. इसके बाद भगवान को कुमकुम और चंदन से तिलक करें. उन्हें फल, फूल और मिठाई अर्पित करें. फिर इनके मंत्रों का जाप करें. अंत में सभी देवी-देवताओं की आरती करें और हाथ जोड़कर सुख-समृद्धि की कामना करें. धनतेरस पर क्या खरीदना शुभ माना जाता है? धनतेरस पर खरीदारी करना बहुत शुभ माना जाता है. इस दिन सोना-चांदी, पीतल के बर्तन या नए बर्तन, झाड़ू, धनिया, पीली कौड़ी और लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा खरीदना शुभ माना जाता है. इसके अलावा, आप चाहें तो कोई गैजेट, इलेक्ट्रोनिक आइटम या घर की जरूरत का कोई सामान भी खरीदकर ला सकते हैं. मान्यता है कि धनतेरस पर इन चीजों की खरीदारी से धनधान्य में और सुख-संपन्नता में दिन दूनी रात चौगुनी वृद्धि होती है.

किसानों के लिए राहत की खबर, रबी सीजन के बीज उपलब्ध; अधिकृत विक्रय केंद्रों से करें खरीदारी

रबी फसलों के बीज का पर्याप्त भण्डारण,किसान अधिकृत विक्रय केन्दों में बीज प्राप्त करें भोपाल  किसानों को आगामी रबी मौसम के लिए गुणवत्तापूर्ण  बीज का पर्याप्त भण्डारण उपलब्ध है। जिलों में शासकीय एवं अन्य अधिकृत संस्थाओं के पास उपलब्ध है। किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग द्वारा जिलों में बीज की उपलब्धता की निरंतर समीक्षा की जा रही है। किसानों की मांग एवं आवश्यकता के अनुसार बीज की पर्याप्त उपलब्धता है। किसानों से आग्रह है कि वे अधिकृत विक्रय केन्द्रों एवं संबंधित सहकारी संस्थाओं से प्रमाणित बीज क्रय कर सकते हैं। बीज खरीदते समय टैग, बिल एवं बीज की वैधता जांच कर लें। किसी भी प्रकार की अनियमितता या निर्धारित दर से अधिक कीमत पर बीज विक्रय होने पर संबंधित जिले के कृषि विभाग के अधिकारियों को सूचना दें। जिलों में मध्यप्रदेश राज्य बीज एवं फार्म विकास निगम में 91452 क्विंटल, शासकीय कृषि प्रक्षेत्रों में 12403 क्विंटल, बीज संघ में 652739 क्विंटल, राष्ट्रीय बीज निगम में 255718 क्विंटल, अन्य अधिकृत संस्थाओं में 190839 क्विंटल इस प्रकार संस्थागत में 1203191 क्विंटल एवं निजी बीज संस्थाओं में 2548843 क्विंटल उपलब्ध है। इस प्रकार कुल 3751994 (सैतींस लाख इक्यावन हजार नौ सौ चौरान्वे) क्विंटल चना, मसूर, सरसों, अलसी, मटर, गेहूं एवं जौ बीज उपलब्ध हैं। 

PM किसान योजना से किसान उमेंद्र को राहत, खेती की जरूरतें पूरी करने में मिल रही आर्थिक मदद

पीएम-किसान सम्मान निधि बनी उमेन्द्र की खेती का सहारा, खाद-बीज की जरूरतों को पूरा करने में मिल रही मदद हर साल 6 हजार रुपये की आर्थिक सहायता से खेती-किसानी के खर्चों का प्रबंधन हुआ आसान सीधे बैंक खाते में मिल रही सम्मान निधि, किसान उमेन्द्र यादव ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति जताया आभार रायपुर,  खेती-किसानी में समय पर खाद, बीज और अन्य जरूरी संसाधनों की उपलब्धता किसानों के लिए महत्वपूर्ण होती है। विशेषकर फसल की तैयारी के समय छोटी-छोटी कृषि आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए आर्थिक संसाधनों की जरूरत पड़ती है। ऐसे में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना किसानों को आर्थिक संबल प्रदान कर रही है। जांजगीर-चांपा जिले के नवागढ़ विकासखंड अंतर्गत ग्राम सलखन निवासी किसान उमेन्द्र यादव भी इस योजना से लाभान्वित हो रहे हैं। उन्हें प्रतिवर्ष तीन समान किस्तों में मिलने वाली 6 हजार रुपये की सहायता राशि खेती-किसानी के जरूरी खर्चों को पूरा करने में मददगार साबित हो रही है। खाद-बीज की व्यवस्था में मिल रही राहत, खेती की तैयारी हुई आसान उमेन्द्र यादव के लिए खेती-किसानी आजीविका का प्रमुख आधार है। फसल की बुआई और कृषि कार्यों की तैयारी के दौरान खाद, बीज एवं अन्य आवश्यक सामग्री की व्यवस्था करना जरूरी होता है। इन जरूरतों को पूरा करने के लिए समय पर राशि उपलब्ध होना किसानों के लिए महत्वपूर्ण होता है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता उमेन्द्र यादव को इन्हीं आवश्यकताओं की पूर्ति में सहयोग प्रदान कर रही है। उमेन्द्र यादव बताते हैं कि खेती के दौरान कई ऐसे छोटे-छोटे खर्च होते हैं, जिनके लिए समय पर पैसों की जरूरत पड़ती है। सम्मान निधि की राशि से खाद-बीज की खरीदी और अन्य कृषि कार्यों की तैयारी में मदद मिलती है। इससे खेती से जुड़े आवश्यक खर्चों का प्रबंधन करना उनके लिए अधिक सुविधाजनक हुआ है। तीन किस्तों में सीधे बैंक खाते में मिलते हैं 6 हजार रुपये प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के अंतर्गत पात्र किसान परिवारों को प्रतिवर्ष 6 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। यह राशि दो-दो हजार रुपये की तीन समान किस्तों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजी जाती है। इस व्यवस्था से किसानों को कृषि संबंधी आवश्यकताओं और अन्य जरूरतों के लिए आर्थिक सहयोग उपलब्ध होता है। उमेन्द्र यादव को भी योजना के तहत नियमित आर्थिक सहायता प्राप्त हो रही है। उनके लिए यह राशि खेती की तैयारी के समय आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था करने और कृषि कार्यों को सुचारू रूप से जारी रखने में उपयोगी साबित हो रही है। सम्मान निधि से मिला आर्थिक संबल, किसान ने जताया आभार उमेन्द्र यादव ने बताया कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना से मिलने वाली सहायता राशि खेती-किसानी के जरूरी खर्चों को पूरा करने में सहयोग करती है। उन्होंने इस आर्थिक सहायता के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत उमेन्द्र यादव की यह कहानी दर्शाती है कि किसानों को मिलने वाली नियमित आर्थिक सहायता खेती-किसानी की आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के माध्यम से किसानों को समय-समय पर आर्थिक सहयोग मिल रहा है, जिससे उन्हें कृषि कार्यों की तैयारी और जरूरी संसाधनों की व्यवस्था करने में सुविधा हो रही है।

मध्य प्रदेश में 14 अक्टूबर को 3,310 लाख यूनिट बिजली सप्लाई, जल और ताप विद्युत उत्पादन में आई कमी

बिजली की कमी को दूर करने प्रयास जारी : ऊर्जा मंत्री तोमर भोपाल  ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया है कि प्रदेश में इस वर्ष कुछ क्षेत्रों में हुई अल्पवृष्टि, धान की सिंचाई एवं पलेवा के लिए बिजली की मांग में अचानक वृद्धि हुई है। पिछले वर्ष 14 अक्टूबर 2025 की अधिकतम मांग 11874 मेगावाट थी जो इस वर्ष 17124 मेगावाट हो गयी है। मतलब मांग मे लगभग 5000 मेगावाट की वृद्धि हुई है। पिछले वर्ष 1 अक्टूबर 25 को कृषि के लिये बिजली की मांग 1752 मेगावाट होती थी जो इस वर्ष 01 अक्टूबर 26 को ही 3701 मेगावाट हो गयी है। ऊर्जा मंत्री तोमर ने बताया है कि पिछले वर्ष के मुक़ाबले 14 अक्टूबर 2026 को 38.6 प्रतिशत अधिक विद्युत प्रदाय की गयी है। पिछले वर्ष 2423 लाख यूनिट विद्युत प्रदाय की गयी थी, जबकि इस वर्ष 3310 लाख यूनिट विद्युत आपूर्ति की गयी। वर्षा की कमी के कारण जल विद्युत उत्पादन क्षमता में भी कमी आई है। इससे गांधीसागर, ओंकारेश्वर, इंदिरा सागर, राजघाट और सरदार सरोवर से जल विद्युत उत्पादन मे लगभग 1500 मेगावाट कमी आई है। पूरे देश मे कोयले की कमी एवं तकनीकी समस्या के कारण ताप विद्युत इकाइयों की ट्रिपिंग से ताप विद्युत उत्पादन में भी कमी आई है। ताप विद्युत गृहों मे तकनीकी समस्या के कारण भी लगभग 1000 मेगावाट उत्पादन प्रभावित हुआ है। भारत के प्रमुख बिजली एक्सचेंज, इंडियन एनर्जी एक्सचेंज मे 13 अक्टूबर 2026 की स्थिति मे पीक आवर्स मे बिजली खरीदने की अधिकतम बोली लगभग 70 हजार मेगावाट की रही ,जबकि उक्त अवधि मे बेंचने वाले केवल 500 मेगावाट (लगभग) रहे, और उसकी दर भी 10 रूपये प्रति यूनिट है। पूरे देश मे बिजली की कमी है। वर्तमान में बिजली एक्सचेंज मे भी बिजली उपलब्ध नही है। प्रदेश मे विद्युत की पर्याप्त उपलब्धता हो इसके लिए उत्तर प्रदेश से पीक घंटो मे 500 मेगावॉट पॉवर ले रहे हैं और भारत के प्रमुख बिजली एक्सचेंज से भी विद्युत खरीदने के प्रयास किए जा रहे हैं। इकाइयाँ जो वार्षिक संधारण के कारण बंद हैं उनको भी जल्दी शुरू करने के प्रयास किए जा रहे हैं। खंडवा और बीरसिंहपुर की इकाई में मेंटेनेन्स के बाद पुन: ऊर्जा उत्पादन शुरू हो गया हैं। इससे लगभग 1000 मेगावाट ऊर्जा उपलब्धता में वृद्धि हो गई है। 20 अक्टूबर 2026 तक लेनको पॉवर एवं एनटीपीसी गाडरवाड़ा की यूनिट से भी बिजली उपलब्ध हो जायेगी। इससे लगभग 600 मेगावाट की ऊर्जा उपलब्धता में वृद्धि होगी। इसके अतिरिक्त तकनीकी कारणों से बंद हुई लगभग 1200 मेगावाट की इकाइयां भी 1 से 2 दिन मे प्रारंभ हो जायेगी। प्रदेश मे 16 अक्टूबर 2026 से 500 मेगावॉट की बैंकिंग ऊर्जा भी उपलब्ध होने लगेगी। इस प्रकार आगामी सप्ताह से लगभग 3 से 4 हजार मेगावॉट अतिरिक्त ऊर्जा उपलब्ध हो जायेगी, इससे वर्तमान मे उत्पन्न बिजली की कमी दूर होने की पूरी संभावना है। रबी सीज़न में विद्युत उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु किए जा रहे उपाय गत वर्ष 3600 मिलियन यूनिट की तुलना में लगभग 225 मिलियन यूनिट अतिरिक्त अग्रिम बैंकिंग की गई है, जिससे 01.11.2026 से 10.03.2027 तक 407 से 3,900 मेगावॉट विद्युत प्राप्त होगी।   

MP में औद्योगिक विकास को मिलेगी रफ्तार, धरमपुरा और आष्टा में बनेंगे विशाल इंडस्ट्रियल पार्क

इंदौर/भोपाल/जबलपुर  मध्यप्रदेश में विकास की नई इबारत लिखने की तैयारी हो रही है। राज्य के तीन प्रमुख शहरों इंदौर, भोपाल और जबलपुर को जोड़ने वाले प्रस्तावित 600 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेस-वे के किनारे प्रदेश का सबसे बड़ा और पहला इंडस्ट्रियल कॉरिडोर विकसित किया जाएगा। यह एक्सप्रेस-वे महज शहरों के बीच सफर का रास्ता नहीं होगा, बल्कि इसके आसपास के इलाकों में नए औद्योगिक क्षेत्र बसाए जाएंगे, जो नए उद्योगों की स्थापना का मुख्य आधार बनेंगे। धरमपुरा और आष्टा में बनेंगे विशाल औद्योगिक पार्क     इस महात्वाकांक्षी परियोजना के तहत जबलपुर और भोपाल के बीच धरमपुरा में 576 करोड़ रुपये की लागत से 954 एकड़ में एक मल्टी-प्रोडक्ट इंडस्ट्रियल पार्क तैयार किया जा रहा है। यह जगह जबलपुर से मात्र 40 किमी और भोपाल से 297 किमी की दूरी पर स्थित है। वहीं, भोपाल और इंदौर के मध्य सीहोर जिले के आष्टा में लगभग 21 हजार एकड़ (8,482 हेक्टेयर) जमीन पर एक और विशाल औद्योगिक पार्क प्रस्तावित है। इसके अलावा बढ़ियाखेड़ी और झीलेरा में भी नए औद्योगिक केंद्र विकसित किए जाएंगे। आष्टा वाले प्रोजेक्ट के लिए सरकार 5 हजार हेक्टेयर निजी जमीन का अधिग्रहण करेगी, जबकि 6 हजार एकड़ सरकारी और औद्योगिक विकास निगम की जमीन पहले से उपलब्ध है। जमीन अधिग्रहण के लिए बनेगी स्पेशल कंपनी (SPV)     सड़क किनारे उद्योगों के लिए माकूल जमीन तलाशने का जिम्मा एक नई स्पेशल पर्पज व्हीकल (एसपीवी) कंपनी को सौंपा जाएगा। सरकार इस कंपनी को जमीन अधिग्रहण के विशेष अधिकार भी दे सकती है। गुरुवार को होने वाली कैबिनेट बैठक में इस कंपनी के गठन को मंजूरी मिलने की पूरी संभावना है। इसके लिए सरकार एक अलग कंपनी (एसपीवी) बनाएगी, जो सड़क के आसपास उद्योगों के लिए उपयुक्त जमीन तलाशेगी। कंपनी को जमीन अधिग्रहण के अधिकार भी दिए जा सकते हैं। प्रस्ताव गुरुवार को कैबिनेट में आ सकता है। मंजूरी मिली तो यह प्रदेश का पहला और सबसे बड़ा इंडस्ट्रियल कॉरिडोर होगा। एक साल में नए निवेश क्षेत्र तय होंगे 1. जबलपुर-भोपाल के बीच धरमपुरा में 954 एकड़ में मल्टी प्रोडक्ट इंडस्ट्रियल पार्क विकसित होगा। इस पर 576 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। यह जबलपुर से 40 किमी, सिवनी से 156 किमी, नागपुर से 260 किमी, भोपाल से 297 किमी दूर होगा। 2. भोपाल-इंदौर के बीच सीहोर जिले के आष्टा में 8,482 हेक्टेयर यानी करीब 21 हजार एकड़ में औद्योगिक पार्क प्रस्तावित है। इसके अलावा बड़ियाखेड़ी और झीलेला में औद्योगिक क्षेत्र विकसित होंगे। यहां 6 हजार एकड़ सरकारी और मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम की जमीन है। 5 हजार हेक्टेयर निजी अधिग्रहीत करेंगे। 3. कैबिनेट की मंजूरी के बाद कंपनी बनेगी उद्योग विभाग ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट से पहले जमीन की उपलब्धता व सड़क संपर्क की संभावनाएं तलाश रहा है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद अलग कंपनी गठित होगी। यह एक साल में तय करेगी कि एक्सप्रेस-वे के आसपास किन-किन जगहों पर नए औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए जा सकते हैं। प्रस्ताव के मुताबिक, किराया राज्य के बजाय कलेक्टर की अध्यक्षता वाली जिला समिति तय करेगी। प्रदेश के 19 जिलों में बस संचालन के लिए ऑपरेटर नहीं मिलने से करीब 1.5 लाख बच्चे परेशान हैं। विभिन्न विभागों की योजनाएं 31 मार्च 2031 तक जारी रखने के प्रस्ताव भी रखे जाएंगे। कैबिनेट की हरी झंडी मिलने के बाद, यह कंपनी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट से पहले कनेक्टिविटी और जमीन की उपलब्धता तलाशेगी और एक साल के भीतर यह तय करेगी कि एक्सप्रेस-वे के आसपास किन-किन जगहों पर उद्योग स्थापित किए जा सकते हैं।     गौरतलब है कि प्रदेश के 19 जिलों में बस ऑपरेटर नहीं मिलने के कारण करीब 1.5 लाख बच्चों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसके अतिरिक्त, बैठक में नए जिलों (निवाड़ी, मैहर, मऊगंज और पांढुर्ना) में महिला एवं बाल विकास विभाग के कार्यालय खोलने और विभिन्न विभागों की योजनाओं को 31 मार्च 2031 तक निरंतर रखने के प्रस्ताव भी रखे जाएंगे।  

इंदौर में 14 इंच कम बारिश से बढ़ी चिंता, भूजल स्तर आधा; जलसंकट से निपटने के लिए मांगे ₹50 करोड़

इंदौर  इंदौर में इस बार कमजोर मानसून ने अगले साल गर्मी में जल संकट की आशंका बढ़ा दी है। शहर में सामान्य तौर पर होने वाली करीब 37 इंच बारिश के मुकाबले इस मानसून में लगभग 23 इंच पानी ही बरसा। यानी करीब 14 इंच बारिश कम हुई। इसका असर जलस्रोतों के साथ भूजल रिचार्ज पर भी दिखाई दे रहा है। यशवंत सागर सहित शहर के प्रमुख तालाबों में भी पिछले वर्षों की तुलना में कम पानी जमा हुआ है। वहीं, 2026 में भूजल रिचार्ज का आंकड़ा पिछले चार वर्षों के मुकाबले काफी नीचे आ गया है। 2008 में भी बनी थी जलसंकट की स्थिति इंदौर में वर्ष 2008 में भी करीब 20 इंच बारिश हुई थी और उस समय भी जल संकट की स्थिति बनी थी। अब 18 साल बाद कम बारिश के कारण एक बार फिर गर्मी में पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ रही है। शहर की बड़ी आबादी नर्मदा जलापूर्ति पर निर्भर है, लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक नर्मदा से मिलने वाले पानी की मात्रा बढ़ाने की गुंजाइश सीमित है। ऐसे में तालाबों में कम जलभराव, भूजल का लगातार दोहन और सप्लाई नेटवर्क में होने वाला नुकसान चुनौती बढ़ा सकते हैं। शहर की आबादी करीब 35 से 40 लाख मानी जाती है। घरेलू जरूरतों के लिए प्रतिदिन करीब 620 एमएलडी पानी की आवश्यकता का अनुमान है। औद्योगिक, व्यावसायिक, संस्थागत और अन्य उपयोग जोड़ने पर कुल मांग 750 से 800 एमएलडी तक बताई जाती है। नर्मदा से 440 एमएलडी पानी मिलने का आंकड़ा इसके मुकाबले नर्मदा से करीब 440 एमएलडी पानी मिलने का आंकड़ा दिया गया है। वितरण के दौरान लीकेज और अन्य कारणों से 20 से 22 प्रतिशत तक पानी का नुकसान होने की बात भी सामने आती है। ऐसे में उपलब्ध पानी का बेहतर प्रबंधन और वैकल्पिक स्रोतों को सुरक्षित रखना जरूरी है। पिछली गर्मियों में बोरवेल पर निर्भर आबादी के करीब 40 प्रतिशत हिस्से को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ा था। हालात संभालने के लिए करीब 700 टैंकरों से पानी पहुंचाना पड़ा। शहर में एक लाख से अधिक निजी बोरवेल और नगर निगम के करीब 6,500 बोरवेल व हाइड्रेंट बताए जाते हैं। लेकिन भूजल का लगातार दोहन भविष्य के लिए चिंता का विषय है। केंद्रीय भूजल बोर्ड की 2025 की रिपोर्ट में शहर और ग्रामीण क्षेत्रों को क्रिटिकल जोन में रखे जाने का उल्लेख है। भूजल दोहन का स्तर करीब 90 प्रतिशत बताया गया है, जो बढ़ने पर स्थिति और गंभीर हो सकती है। इंदौर शहर में 27 तालाब शहर में तालाबों की भूमिका भी अहम है। इंदौर में 27 तालाब हैं, जिनमें से सात प्रमुख तालाबों की निगरानी नगर निगम करता है। इनकी संयुक्त क्षमता करीब 2,880 करोड़ लीटर बताई गई है, जबकि उपलब्ध पानी का एक अन्य आकलन करीब 2,260 करोड़ लीटर है। 2022 से 2025 तक भूजल रिचार्ज का आंकड़ा लगभग 40 से 42 हजार हेक्टेयर मीटर के बीच रहा। 2026 में यह घटकर 21,039 हेक्टेयर मीटर रह गया। तालाबों में नहीं हुआ जलभराव इस बार कम बारिश के कारण तालाबों में अपेक्षित जलभराव नहीं हुआ। कुछ तालाबों में जलस्तर क्षमता के मुकाबले काफी नीचे है, जबकि कुछ के आंकड़ों का दोबारा मिलान जरूरी है। शहर के कई वार्डों में अपनी ओवरहेड टंकियां नहीं हैं। ऐसे क्षेत्रों में दूसरे वार्डों की टंकियों से पानी पहुंचाया जाता है। कुछ जगहों पर एक ही टंकी से तीन वार्डों तक आपूर्ति होती है। इससे सप्लाई के समय और वितरण पर दबाव बढ़ता है। पिछले साल मालवा मिल स्थित हाइड्रेंट को भी पहली बार बंद करना पड़ा था। इस बार संकट से बचने के लिए जलस्रोतों की स्थिति, टैंकरों की जरूरत, पाइपलाइन लीकेज और भूजल रिचार्ज पर समय रहते काम करने की जरूरत है। सीएम से 50 करोड़ का का पैकेज मांगा इस बीच महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से जल प्रबंधन के लिए 50 करोड़ रुपए के पैकेज की मांग की है। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की 15 अक्टूबर को नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अपर मुख्य सचिव, मंत्री तुलसी सिलावट और जलप्रदाय व नगर निगम के अधिकारियों के साथ बैठक प्रस्तावित है। इसमें नर्मदा-गंभीर लिंक के जरिए यशवंत सागर और बिलावली तालाबों तक पानी पहुंचाने की संभावना सहित जल संकट से निपटने के उपायों पर चर्चा हो सकती है। वार्डवार संकट का आकलन, टैंकरों की व्यवस्था, लीकेज सुधार, रिचार्ज पिट और वर्षा जल संचयन जैसे उपाय भी अहम होंगे। भूजल पर बढ़ती निर्भरता     शहर में एक लाख से अधिक निजी बोरवेल बताए जाते हैं।     नगर निगम के करीब 6,500 बोरवेल और हाइड्रेंट हैं।     पिछली गर्मियों में बोरवेल पर निर्भर आबादी के करीब 40 प्रतिशत हिस्से को गंभीर संकट का सामना करना पड़ा।     पानी की आपूर्ति के लिए करीब 700 टैंकर लगाने पड़े थे।     केंद्रीय भूजल बोर्ड की 2025 की रिपोर्ट में इंदौर शहर और ग्रामीण क्षेत्रों को क्रिटिकल जोन में रखने का उल्लेख है।     भूजल दोहन का स्तर करीब 90 प्रतिशत बताया गया है। पानी की गुणवत्ता भी चिंता 2019 में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 70 स्थानों पर बोरवेल के पानी के नमूनों की जांच किए जाने का उल्लेख है। इनमें से 69 नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे थे। इस आंकड़े का उपयोग करते समय जांच के मानक, प्रदूषण के प्रकार और रिपोर्ट का संदर्भ स्पष्ट करना जरूरी है। भूजल की उपलब्धता के साथ उसकी गुणवत्ता की नियमित जांच भी जरूरी है।

पंजाब में वोटर लिस्ट के विशेष पुनरीक्षण से बदलेगा चुनावी गणित? 13.60 लाख मतदाताओं की कटौती

चंडीगढ़  पंजाब में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। सूबे में एसआईआर के बाद मतदाताओं की संख्या 2.14 करोड़ से घटकर 2.01 करोड़ रह गई है। एसआईआर से पहले राज्य में 2,14,61,043 मतदाता पंजीकृत थे, जबकि अब जारी अंतिम सूची में 2,01,00,727 मतदाता दर्ज हैं। कुल 13,60,316 मतदाता कम हुए हैं, जबकि 13 अगस्त को जारी ड्राफ्ट सूची में 20,66,608 नाम हटाए गए थे। दावे-आपत्तियों के निपटारे के बाद 7,06,292 मतदाता बढ़े। एसआईआर की स्थिति देखें तो पंजाब में अधिकतर दिग्गजों के हलकों में जितने नए वोट जुड़े हैं, उससे ज्यादा कट गए हैं। वोटों का यही गणित आगामी विधानसभा चुनाव में सभी 117 सीटों पर नए सियासी समीकरण बनाएगा। लगभग सभी हलकों में मतदाताओं की संख्या घटी है। राजनीतिक मामलों के जानकार परमजीत सिंह कहते हैं कि यह देखना होगा कि किस हलके में कितने वोट कम हुए हैं और कितने बढ़े हैं, यानी दोनों के बीच अंतर कितना है। इससे राजनीतिक समीकरण बदलेंगे। वोट घटने से पारंपरिक जीत-हार के अंतर और जातिगत समीकरणों पर सीधा असर पड़ेगा। इससे आगामी चुनावों में मुकाबला रोचक और अप्रत्याशित होने की उम्मीद है। कहां कितने वोटर  मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान: धूरी हलके में एसआईआर से पहले 1,66,143 पंजीकृत मतदाता थे। अब 1,57,073 मतदाता हैं। 9,070 वोट कम हुए और 3,052 वोट बढ़े। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा: दिड़बा हलके में पहले 1,82,695 मतदाता थे। अब 1,83,640 मतदाता हैं। 945 मतदाता बढ़े। मंत्री अमन अरोड़ा: सुनाम हलके में एसआईआर से पहले 1,95,780 मतदाता थे। अब 1,89,779 मतदाता हैं। 6,001 मतदाता कम हुए और 1,148 बढ़े। मंत्री हरजोत बैंस: आनंदपुर साहिब हलके में पहले 1,91,727 मतदाता थे। एसआईआर के बाद 1,80,471 मतदाता हैं। 11,256 वोट कटे और 1,715 वोट जुड़े। मंत्री डॉ. बलजीत कौर: मलोट हलके में एसआईआर से पहले 1,94,875 मतदाता थे। अब इनकी संख्या 1,67,963 है। 26,912 वोट कटे और 2,564 वोट बढ़े। मंत्री हरभजन सिंह ईटीओ: जंडियाला हलके में एसआईआर से पहले 1,79,560 पंजीकृत मतदाता थे। अब 1,74,635 मतदाता हैं। 4,925 मतदाता घटे और 7,189 बढ़े। मंत्री लालचंद कटारूचक: भोआ हलके में पहले 1,94,845 मतदाता थे। अब 1,83,841 मतदाता हैं। 11,004 वोट कटे और 6,219 वोट जुड़े। मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंद: खन्ना हलके में पहले 1,74,061 मतदाता थे। अब 1,61,347 मतदाता हैं। 12,714 वोट कटे और 4,514 वोट बढ़े। मंत्री बरिंदर गोयल: लहरा हलके में पहले 1,74,451 मतदाता थे। अब 1,73,265 मतदाता हैं। 1,186 वोट कटे और 4,435 मतदाता बढ़े। मंत्री डॉ. रवजोत सिंह: शाम चौरासी हलके में एसआईआर से पहले 1,74,770 पंजीकृत मतदाता थे। अब 1,67,179 मतदाता हैं। 7,591 वोट कटे और 5,858 मतदाता बढ़े। मंत्री डॉ. बलबीर सिंह: पटियाला ग्रामीण हलके में पहले 2,20,255 मतदाता थे। अब 2,06,147 मतदाता हैं। 14,108 वोट कटे और 7,676 वोट बढ़े। मंत्री मोहिंदर भगत: जालंधर पश्चिम हलके में पहले 1,71,462 मतदाता थे। अब 1,63,415 मतदाता हैं। 8,047 वोट घटे और 9,698 वोट बढ़े। मंत्री संजीव अरोड़ा: लुधियाना पश्चिम हलके में पहले 1,74,437 मतदाता थे। अब 1,45,610 मतदाता हैं। 28,827 वोट कटे और 4,144 वोट बढ़े। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष परगट सिंह: जालंधर कैंट में एसआईआर से पहले 1,89,711 मतदाता थे। अब 1,76,638 मतदाता हैं। 13,073 वोट कटे और 8,595 वोट बढ़े। शिअद अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल: जलालाबाद हलके में पहले 2,13,903 मतदाता थे। अब 2,11,189 मतदाता हैं। 2,714 वोट घटे और 5,592 वोट बढ़े। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों: बरनाला हलके में पहले 1,80,088 मतदाता थे। अब 1,63,329 मतदाता हैं। 16,759 वोट कटे और 3,498 मतदाता बढ़े। नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा: कादियां हलके में एसआईआर से पहले 1,82,130 मतदाता थे। अब 1,79,762 मतदाता हैं। 2,368 मतदाता घटे और 10,190 बढ़े।  

राजा वड़िंग को लेकर सचिन पायलट का बड़ा बयान, पंजाब चुनाव के लिए कांग्रेस की क्या है रणनीति?

चंडीगढ़  पंजाब में कांग्रेस ने पिछले दिनों अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद से हटाकर परगट सिंह को कमान सौंपी। ऐसे में पंजाब की सियासत और कांग्रेस में अंदरूनी कलहों ने जोर पकड़ लिया। इस क्रम में अब राज्य के लिए पार्टी के केंद्रीय प्रभारी सचिन पायलट ने राजा वड़िंग के लिए बड़ी बात कही है। समाचार एजेंसी पीटीआई को दिए एक इंटरव्यू में सचिन पायलट ने उन्हें एक "लड़ाकू" बताया है। उन्होंने कहा कि अगले साल की शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनावों में वडिंग बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। राज्य के प्रभारी के रूप में कार्यभार संभालने के तुरंत बाद जब पायलट से पंजाब इकाई में हुए बदलाव के बारे में पूछा गया तो उन्होंने वड़िंग की तारीफ की और कहा कि उन्होंने संगठन को मजबूत करने के लिए कड़ी मेहनत की है। हालांकि, कांग्रेस महासचिव ने यह भी कहा कि कभी-कभी संगठन में बदलाव जरूरी हो जाते हैं। वड़िंग को 20 साल से जानता हूं: सचिन पायलट पायलट ने पीटीआई से कहा, "मैं आपको बता दूं कि मैं राजा वड़िंग को 20 साल से जानता हूं। वह बहुत ही ऊर्जावान और मेहनती युवा हैं। उन्होंने कांग्रेस पार्टी को तब मजबूत करने में मदद की, जब हमारे पास केवल 15-16 विधायक थे। वह बहुत ही चुनौतीपूर्ण समय था। उन्होंने चार साल से भी ज्यादा समय तक संगठन को मजबूत करने के लिए कड़ी मेहनत की है। पार्टी आलाकमान के फैसले के बाद, राजा वड़िंग ने 2 अक्टूबर को प्रदेश अध्यक्ष का पद छोड़ दिया और पूर्व ओलंपियन परगट सिंह ने यह जिम्मेदारी संभाली। उस समय राजा वड़िंग अपने पद से हटने के लिए परोक्ष रूप से पायलट को जिम्मेदार ठहरा रहे थे। इस हफ्ते की शुरुआत में परगट सिंह के कार्यभार संभालने के कार्यक्रम के दौरान राजा वडिंग ने कहा था कि हो सकता है पायलट उन्हें हटा दें या उन्हें चुनाव का टिकट भी न दें, लेकिन वह राहुल गांधी के एक सिपाही के रूप में कांग्रेस का झंडा ऊंचा रखना जारी रखेंगे। हालांकि, एक इंटरव्यू में पायलट ने वड़िंग की खूब तारीफ की। राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री ने कहा…     वह एक फाइटर हैं। लेकिन कभी-कभी संगठन में बदलाव होते रहते हैं। उत्तर प्रदेश में भी फरवरी में चुनाव होने हैं, वहां भी हमारे पास एक नई अध्यक्ष (आराधना मिश्रा-मोना) हैं। इसी तरह परगट सिंह जी को पंजाब का नया अध्यक्ष बनाया गया है। तो ये बदलाव समय-समय पर होते रहते हैं, जो इस बात पर निर्भर करता है कि हम आगे कैसे बढ़ना चाहते हैं। सचिन पायलट, कांग्रेस प्रभारी क्या राजा वड़िंग उपयुक्त नहीं थे? जब पायलट से पूछा गया कि क्या उन्हें लगता है कि राजा वड़िंग अब राज्य कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में उपयुक्त नहीं थे, तो पायलट ने कहा कि यह उपयुक्तता का सवाल ही नहीं है। उन्होंने कहा, "जैसा कि मैंने कहा, उन्होंने युवाओं के लिए बहुत काम किया है। उन्होंने युवाओं को आगे आने और आम आदमी पार्टी से मुकाबला करने के लिए प्रोत्साहित किया है। लेकिन चुनावों के दौरान कई बातों पर विचार करना पड़ता है, और नेतृत्व ने तय किया कि यूपी और पंजाब में नए अध्यक्ष नियुक्त किए जाने चाहिए।''