samacharsecretary.com

पीढ़ियों को प्रभावित करने वाले सिकल सेल एनीमिया रोग के नियंत्रण में आगे है प्रदेश

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जनजातीय संस्कृति के संरक्षण के साथ जनजातीय समाज के विकास और समाज की समस्याओं के समाधान के लिए राज्य सरकार कार्य कर रही है। सिकल सेल एनीमिया नियंत्रण का कार्य वर्ष 2022 से प्रारंभ हुआ है। इसके अच्छे परिणाम मिले हैं। कई पीढ़ियां प्रभावित करने वाली बीमारी सिकल सेल एनीमिया की स्क्रीनिंग नियंत्रण और उपचार की दिशा में राज्य सरकार कार्य कर रही है। इस क्षेत्र में प्रदेश अग्रणी है। जनजातीय नायकों के सम्मान में प्रदेश में तीन विश्वविद्यालय प्रारंभ किए गए हैं। सतपुड़ा क्षेत्र में राजा भभूत सिंह, राजा शंकर शाह, रघुनाथ शाह और रानी दुर्गावती की स्मृति में विभिन्न आयोजन किए गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव भोपाल के निकट ग्राम अचारपुरा में पांच दिवसीय शिल्पकार महोत्सव के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ डिज़ाइन और जनजातीय कार्य विभाग के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित महोत्सव में जनजातीय कलाकारों द्वारा तैयार शिल्प कृतियों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया और इन कलाकृतियों को पारंपरिक शैली में आधुनिकता के साथ पेश करने के प्रयासों की सराहना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कलाकारों से आत्मीयता के साथ चर्चा भी की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जनजातीय शिल्पकारों को प्रोत्साहित करने के लिए अधिक से अधिक प्रयास किए जा रहे हैं। जनजातीय शिल्प का डंका देश-विदेश में बज रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के विरासत से विकास के अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि पूरे देश में लोक संस्कृति को बढ़ावा देते हुए प्रगति के कदम उठाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राष्ट्रपति मती द्रौपदी मुर्मु गत सप्ताह मध्यप्रदेश भ्रमण पर रहीं और विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लिया, जो प्रदेश के लिए गर्व का विषय है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि 24 जून को वीरांगना रानी दुर्गावती का बलिदान दिवस है। रानी दुर्गावती ने गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत को नई ऊंचाइयाँ प्रदान की। दुनिया ने उनकी वीरता, शौर्य और पराक्रम को देखा। रानी दुर्गावती ने गौंडवाना क्षेत्र के स्वाभिमान की रक्षा के लिए तत्कालीन मुगल सत्ता के विरुद्ध अनेकों युद्धों में विजय प्राप्त की। उन्होंने राष्ट्र गौरव के लिये संघर्ष करते हुए प्राणों की आहूति दे दी। आज हम रानी कमलापति के पराक्रम के क्षेत्र भोपाल में वीरांगना रानी दुर्गावती के शौर्य को नमन कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश अनेक जनजातीय वीरों की धरती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आदिरंग शिल्पकार महोत्सव में जनजातीय कलाकारों ने प्रकृति के माध्यम से हमारे जीवन में उत्सव के रंग भरने का प्रयास किया है। एनआईडी ने जनजातीय परंपरागत कला को नए आयाम पर पहुंचाया है। कला-संस्कृति के माध्यम से कई लोगों के जीवन में आर्थिक समृद्धि का सूर्य उदय होगा। राज्य सरकार इसके लिए प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में भारत चहुंमुखी विकास कर रहा है। राष्ट्रीय फलक पर पहचान बना रही जनजातीय कला जनजातीय कार्य मंत्री कुंवर विजय शाह ने कहा कि नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ डिज़ाइन के साथ संयुक्त तत्वावधान में मनाये जा रहे इस आदिरंग शिल्पकार महोत्सव में जनजातीय समाज की प्रतिभा को देखने का अवसर मिला है। एनआईडी के समन्वय से मध्यप्रदेश की परंपरागत शिल्प को अब राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल रही है। जनजातीय कार्य विभाग के प्रयासों से जनजातीय कलाकारों को प्रोत्साहन भी मिल रहा है। राज्य सरकार प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए संकल्पित है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में इस दिशा में बेहतर कार्य किये जा रहे हैं। राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान (एनआईडी) की निदेशक डॉ. विद्या राकेश ने कहा कि आदिरंग सिर्फ एक शिल्पकार महोत्सव नहीं, बल्कि डिजाइन, कल्चर, कम्युनिटी और एम्पॉवरमेंट को जोड़ने का एक प्रयास है। गत कुछ वर्षों में एनआईडी ने मध्यप्रदेश जनजातीय कार्य विभाग के साथ मिलकर बैगा, गौंड, भील और अन्य जनजातीय समाज के बीच डिजाइन डेवलपमेंट कार्यशालाएं आयोजित की हैं। इनके माध्यम से शिल्पकारों को डिजाइन अवेयरनेस, प्रोडक्ट डेवलपमेंट, ब्रांडिग, पैकेजिंग और मार्केटिंग जैसे विषयों से परिचित करवाया गया है ताकि उनकी कला को वर्तमान बाजार की जरूरतों के हिसाब से लिंक किया जा सके। एनआईडी ने जनजातीय समुदायों की संस्कृति का दस्तावेजीकरण भी किया है। यह उनकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे रोजगार के साथ-साथ सांस्कृतिक विकास के नए अवसर भी विकसित होते हैं। एनआईडी जनजातीय समाज को वोकल फॉर लोकल से जोड़कर राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका निभा रहा है। जनजातीय कलाकार  गगन सिंह मरावी ने अनुभव साझा करते हुए बताया कि आदिरंग महोत्सव में गौंड चित्रकारों को नई चीजें सीखने का मौका मिला। भील चित्रकार मती गोरिया भाबोर ने बताया कि इस महोत्सव में हमें अपनी चित्रकार को आगे बढ़ाने का अवसर मिला है। आदिरंग महोत्सव में 140 से अधिक जनजातीय शिल्पकार हुए शामिल समारोह में जनजातीय कला, शिल्प और आजीविका संवर्धन के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी गई। पांच दिवसीय महोत्सव में मध्यप्रदेश के विभिन्न अंचलों से आए 140 से अधिक जनजातीय शिल्पकार शामिल हुए। भील, गोंड, बैगा सहित विभिन्न जनजातीय समुदायों के शिल्पकारों ने अपनी पारंपरिक कला, शिल्प और हस्तनिर्मित उत्पादों का प्रदर्शन किया। महोत्सव के दौरान आयोजित डिजाइन हस्तक्षेप कार्यशालाओं में शिल्पकारों ने एनआईडी मध्यप्रदेश के संकाय सदस्यों एवं छात्र स्वयंसेवकों के सहयोग से बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप नए उत्पाद विकसित किए। समापन समारोह में कार्यशालाओं के दौरान विकसित उत्पादों और डिजाइन अवधारणाओं की विशेष प्रदर्शनी आयोजित की गई। कार्यक्रम में विधायक  विष्णु खत्री, अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष  रामदास रौतेल, अनुसूचित जनजाति आयोग के सदस्य  भगत सिंह नेताम,  मंगल सिंह धुर्वे, प्रमुख सचिव जनजातीय विकास  गुलशन बामरा, आयुक्त  तरुण राठी और अन्य अधिकारी गण उपस्थित थे। कार्यक्रम में मती भगवती एवं साथी कलाकारों ने पारंपरिक लोक संगीत से मुख्यमंत्री डॉ. यादव और अन्य अथितियों का स्वागत किया।मुख्यमंत्री डॉ. यादव को स्मृति चिन्ह के रूप में गौंड चित्रकला से निर्मित कला-रूप भेंट किया गया। कार्यक्रम स्थल परिसर में मध्यप्रदेश के विभिन्न जनजाति अंचलों से आए कलाकारों के उल्लास पूर्ण नृत्य और संगीत से हर्ष, उल्लास का वातावरण निर्मितकर दिया।  

संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल्स पार्क में मई-2025 बैच का वैलेडिक्टरी समारोह में प्रशिक्षणार्थियों को वितरित किए सर्टिफिकेट

भोपाल  कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  गौतम टेटवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश कौशल विकास के क्षेत्र में नई पहचान बना रहा है। संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल्स पार्क इसका सशक्त उदाहरण है, जिसने राष्ट्रीय ही नहीं, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की है। उन्होंने कहा कि कौशलयुक्त युवा ही विकसित भारत की सबसे मजबूत आधारशिला हैं। युवा केवल रोजगार प्राप्त करने तक सीमित न रहें, बल्कि रोजगार सृजित करने की क्षमता भी विकसित करें और "स्किल्ड इंडिया, कौशलयुक्त भारत" के संकल्प को साकार करने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं। मंत्री  टेटवाल संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल्स पार्क, भोपाल में आयोजित मई-2025 बैच के वैलेडिक्टरी समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने संत शिरोमणि रविदास की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए तथा विद्यार्थियों के साथ दीप प्रज्ज्वलित कर समारोह का शुभारंभ किया। इस अवसर पर संस्थान का प्रेरणादायी गीत भी प्रस्तुत किया गया। मंत्री  टेटवाल ने सफलतापूर्वक प्रशिक्षण पूर्ण करने वाले सभी प्रशिक्षुओं को बधाई देते हुए कहा कि यह प्रमाण-पत्र केवल प्रशिक्षण पूर्ण होने का प्रतीक नहीं, बल्कि अनुशासन, आत्मविश्वास, व्यावसायिक दक्षता और नए अवसरों की शुरुआत का प्रमाण है। उन्होंने विद्यार्थियों से निरंतर सीखते रहने, बदलती तकनीकों के अनुरूप स्वयं को विकसित करने तथा अपने कौशल से प्रदेश और देश की प्रगति में योगदान देने का आह्वान किया। समारोह में मई-2025 बैच के प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण पूर्ण करने पर प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए तथा विभिन्न ट्रेड्स में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। एडवांस नेटवर्किंग एंड सिस्टम्स एडमिनिस्ट्रेशन ट्रेड के छात्र आशीष कुमार को उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन एवं उल्लेखनीय उपलब्धियों के लिए मेडल ऑफ एक्सीलेंस प्रदान किया गया। वहीं एडवांस इलेक्ट्रिकल टेक्नोलॉजी (पावर एंड कंट्रोल) ट्रेड की छात्रा सान्ध्री त्रिवेदी को अनुशासन, उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन और निरंतर उत्कृष्टता के लिए मिनिस्टर मेडल से सम्मानित किया गया। बैच के स्टूडेंट को-ऑर्डिनेटर्स को भी नेतृत्व क्षमता एवं संस्थान की गतिविधियों में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया। समारोह में विद्यार्थियों ने अपने प्रशिक्षण अनुभव साझा करते हुए संस्थान, फैकल्टी और प्लेसमेंट सहयोग के प्रति आभार व्यक्त किया। इस बैच के अनेक प्रशिक्षुओं ने भारतीय वायु सेना, मध्यप्रदेश पुलिस, अदाणी समूह, हिंदुजा टेक लिमिटेड और ट्राइडेंट जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं में रोजगार प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। कार्यक्रम के दौरान "वॉक डाउन मेमोरी" वीडियो के माध्यम से विद्यार्थियों की एक वर्ष की प्रशिक्षण यात्रा, सीखने के अनुभव, सांस्कृतिक गतिविधियों, अंतर्राष्ट्रीय एक्सपोजर और उपलब्धियों को प्रदर्शित किया गया। प्रमुख सचिव, तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार  मनीष सिंह ने वीडियो संदेश के माध्यम से प्रशिक्षुओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि कौशल, समर्पण और निरंतर सीखने की प्रवृत्ति ही उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए सक्षम बनाएगी। उन्होंने विद्यार्थियों से संस्थान के एलुमनाई नेटवर्क से जुड़े रहने का आग्रह किया। कौशल विकास संचालनालय के संचालक  बसंत कुर्रे ने कहा कि कौशल आधारित शिक्षा युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने कौशल का निरंतर विकास करते हुए नए अवसरों का लाभ उठाने का आग्रह किया। सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस के  प्रदीप राउत ने कहा कि उद्योग जगत आज ऐसे युवाओं की अपेक्षा करता है जो सीखने के लिए सदैव तैयार रहें और नवाचार की सोच के साथ आगे बढ़ें। संस्थान के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) डॉ. गिरीश शर्मा ने अपने संदेश में कहा कि मई-2025 बैच के प्रशिक्षुओं ने प्रशिक्षण के दौरान केवल तकनीकी दक्षता ही नहीं, बल्कि व्यावसायिकता, अनुशासन और नेतृत्व क्षमता भी अर्जित की है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि संस्थान के प्रशिक्षु देश-विदेश में अपनी कार्यशैली और उत्कृष्ट प्रदर्शन से संस्थान तथा मध्यप्रदेश का गौरव बढ़ाएंगे। कार्यक्रम में कौशल विकास संचालनालय के संचालक  बसंत कुर्रे, संस्थान के डायरेक्टर एक्सटर्नल रिलेशंस  नीरज सहाय, डायरेक्टर प्रोक्योरमेंट एंड फैकल्टी  संजय जैन, डायरेक्टर एडमिनिस्ट्रेशन एंड फाइनेंस मती रोमा बाजपेयी, सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस के  प्रदीप राउत, उप संचालकगण, सहायक संचालकगण, संस्थान के अधिकारी, कर्मचारी, प्रशिक्षु एवं उनके अभिभावक उपस्थित रहे।  

रविन्द्र भवन से साइबर जागरूकता रथ को करेंगे रवाना

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव प्रदेश में नागरिकों को साइबर अपराधों से सुरक्षित रखने और जिम्मेदार डिजिटल व्यवहार को बढ़ावा देने के लिए बुधवार, 24 जून 2026 को राजधानी भोपाल के रविन्द्र भवन में राज्य स्तरीय साइबर जागरूकता अभियान "सेफ क्लिक 2.0" का शुभारंभ करेंगे। मध्यप्रदेश पुलिस के इस विशेष अभियान का मुख्य उद्देश्य आमजन, विद्यार्थियों, युवाओं, महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों को साइबर ठगी तथा ऑनलाइन धोखाधड़ी के प्रति जागरूक करना है जिससे वे सुरक्षित साइबर व्यवहार अपना सकें। इस अवसर पर पुलिस महानिदेशक श्री कैलाश मकवाणा भी विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम के दौरान साइबर सुरक्षा और बाल संरक्षण के क्षेत्र में सहयोग को सुदृढ़ करने के लिए 'इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन' के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। साथ ही, स्कूली बच्चों में डिजिटल सुरक्षा के प्रति समझ विकसित करने के उद्देश्य से तैयार की गई एक विशेष साइबर जागरूकता बुकलेट और 'सेफ क्लिक 2.0' अभियान के जागरूकता वीडियो का विमोचन भी किया जाएगा। इस अवसर पर जनसामान्य को सरल एवं प्रभावी ढंग से जागरूक करने के लिए साइबर सुरक्षा पर आधारित एक नुक्कड़ नाटक का प्रदर्शन किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रदेश के विभिन्न जिलों में व्यापक स्तर पर जनजागरूकता गतिविधियों के संचालन के लिए 'साइबर जागरूकता रथ' को हरी झंडी दिखाकर (फ्लैग ऑफ) रवाना करेंगे। यह रथ पूरे प्रदेश का भ्रमण कर नागरिकों तक सुरक्षित डिजिटल व्यवहार और सतर्कता का संदेश पहुंचाएगा। इस अभियान के तहत मध्यप्रदेश पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधि की सूचना तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 या आधिकारिक वेबसाइट www.cybercrime.gov.in पर दें और एक सुरक्षित डिजिटल समाज के निर्माण में सहभागी बनें।  

अब ₹32 लीटर में चलेगी गाड़ी! सस्ते ईंधन और 60 KM तक के एवरेज ने किया कमाल

 वडोदरा पेट्रोलियम उत्पादों के आयात से देश के खजाने पर पड़ने वाले बोझ को हल्का करने के लिए नए-नए विकल्प तलाशे जा रहे हैं। इथेनॉल मिले हुए पेट्रोल के बाद अब एक नए तरीके का पेट्रोल-डीजल देश में तैयार किया गया है, जो ना सिर्फ बेहद सस्ता होगा बल्कि एवरेज भी सामान्य तेल जितना ही मिल रहा है। प्लास्टिक वेस्ट से तैयार किए गए इस पेट्रोल-डीजल से एक तरफ जहां ईंधन का एक नया और सस्ता विकल्प मिलेगा, बल्कि प्लास्टिक कचरे की समस्या का समाधान भी होगा। एक रिपोर्ट के मुताबिक, वडोदरा में गति शक्ति विश्वविद्यालय (जीएसवी) के वैज्ञानिकों ने यह कमाल किया है। उन्होंने सफलतापूर्वक मिक्स्ड प्लास्टिक वेस्ट को पेट्रोल-डीजल जैसे ईंधन में बदला है। ऐसा नहीं कि यह फॉर्मूला फाइलों या लैब तक सीमित है, बल्कि मोटसाइकिलों को दौड़ाकर देख लिया गया है। भारत के प्रमुख दोपहिया निर्माता कंपनी की तीन मोटसाइकिलों को इन पेस्ट्रो पेट्रोल से दौड़ाया गया। इसके लिए इसमें किसी बदलाव की जरूरत नहीं हुई। प्लास्टिक वाले पेट्रोल से बाइक में 60 का मिला एवरेज एक और अच्छी बात यह है कि माइलेज भी लगभग सामान्य पेट्रोल जितना ही है। 100 सीसी की एक बाइक जिसने सामान्य पेट्रोल से 62 का एवरेज दिया वह प्लास्टिक से तैयार एक लीटर पेट्रोल से 60 किलोमीटर दौड़ी। जब आप इस नए पेट्रोल के फायदे जानकर खुश हो रहे हैं तो एक और खुशखबरी है। इस पेट्रोल से प्रदूषण भी मानक के भीतर ही हो रहा है। प्लास्टिक वाले पेट्रोल से चल रही मोटरसाइकिलों ने पलूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया। 100 KG प्लास्टिक से निकलेगा 50 KG ईंधन, 32 रुपये कीमत रिसर्च करने वाले वैज्ञानिकों का कहना है कि 100 किलोग्राम प्लास्टिक को कचरे को प्रोसेस करके करीब 50 किलोग्राम ईंधन निकाला जा सकता है। कच्चा तेल जहां 24 रुपये लीटर की कीमत पर उत्पादित किया जा सकता है तो अपग्रेड करने के बाद इसकी कीमत 32 रुपये प्रति लीटर होगी। वैज्ञानिकों ने बताया कि इस टेक्नॉलजी से उत्पादित तेल 90 फीसदी तक सामान्य पेट्रोल-डीजल जैसा ही है। विमान भी उड़ सकेंगे प्लास्टिक वाले ईंधन से? पेस्ट्रो पेट्रोल में कितनी संभावना हो सकती है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि एविएशन कंपनी एयरबस भी जीएसवी के साथ काम कर रही है। कोशिश की जा रही है कि प्लास्टिक कचरे से विमान को उड़ाने वाले ईंधन को भी विकसित किया जाए। कई जगहों पर हो सकती है शुरुआत प्लास्टिक वाले पेट्रोल से ईंधन बनाने की शुरुआत पहले उन जगहों पर की जा सकती है जहां प्लास्टिक का कचरा एक बड़ी समस्या है और ईंधन का पहुंचना उतना ही मुश्किल। लेह, लद्दाख, केदारनाथ और बद्रीनाथ जैसे स्थानों पर यूनिट लगाने पर विचार चल रहा है। इसके अलावा झांसी के रेलवे लोकोमोटिव शेड और कोलकाता की छावनी में भी ऐसा किया जा सकता है। इसको लेकर कई मंत्रालयों में विचार विमर्श चल रहा है।

सिवनी के ‘भूतबंधानी सीताफल’ को मिला GI टैग, दुनिया भर में चमकेगा मध्यप्रदेश का नाम

 सिवनी  जिले का प्रसिद्ध जम्बो सीताफल अब वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना सकेगा। कई वर्षों से जम्बो सीताफल को जीआई टैग दिलाने में जिला प्रशासन और उद्यानिकी विभाग को सफलता मिल गई है। मध्य भारत सहित देश के अलग-अलग हिस्सों में सिवनी का जम्बो सीताफल दीपोत्सव सहित अन्य त्योहार की प्राकृतिक मिठास व अनूठा स्वाद विशेष पहचान रखता है। औषधीय गुणों से भरपूर ’जम्बो सीताफल’ की प्राकृतिक रूप से सितंबर से नवंबर के बीच सर्वाधिक पैदावार होती है। जिले के छपारा भूतबंधानी में तैयार होने वाला जम्बो सीताफल ट्रकों से हर साल कानपुर, लखनऊ, दिल्ली जैसे महानगरों में भेजा जाता है। छपारा जंगल में प्राकृतिक रूप से उगने वाले स्वादिष्ट सीताफल की उपज का लाभ आदिवासी संग्राहकों को मिलता है। आदिवासियों की आजीविका का मुख्य जरिया 'जम्बो सीताफल’ सुदूर जंगल-पहाड़ी क्षेत्र व खेत की मेढ़ में प्राकृतिक रूप से तैयार 'जम्बो सीताफल' आदिवासियों की आजीविका का मुख्य जरिया है। 'बड़े आकार' व अनोखी 'मिठास' से विशेष पहचान बनाने वाले 'जम्बो सीताफल' की मांग साल दर साल बढ़ती जा रही है, जिससे इस पर निर्भर हजारों परिवारों की आय में वृद्धि हो रही है। लगभग 6 हजार मीट्रिक टन सीताफल का अनुमानित उत्पादन हर साल जिले में होता है, जिसके क्रय-विक्रय से 20-25 करोड़ रुपये का कारोबार दो से तीन माह में हो जाता है। जीआई टैग के मिलने से सिवनी के इस विशेष सीताफल की मार्केटिंग व बिक्री में वृद्धि होगी, सीताफल उत्पादक किसानों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। उत्पादन, विपणन में मिलेगी नई दिशा उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग की सहायक संचालक डॉ. आशा उपवंशी-वासेवार ने बताया कि भोपाल में महानियंत्रक (पेटेंट, डिजाइन एवं ट्रेड मार्क्स) व रजिस्ट्रार (भौगोलिक संकेत) से चेन्नई जीआई रजिस्ट्री में किए गए आवेदन सुनवाई के बाद विभाग ने सिवनी के सीताफल को जीआई टैग जारी कर दिया है। जीआई टैग के लिए किसान उत्पादक संगठन भूतबंधानी सीताफल क्रॉप प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड के प्रतिनिधि सदम सिंह बरकडे व राजकुमार भलावी ने सुनवाई में सिवनी जम्बो सीताफल की विशिष्टता तथा इसके महत्व को अधिकारियों के समक्ष रखा था। जीआई टैग मिलने से सिवनी के सीताफल उत्पादन व विपणन में नई दिशा मिलेगी, जिससे स्थानीय सीताफल उत्पादक किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार होने की उम्मीद है। साथ ही यह सीताफल देशभर और विदेशों में अपनी विशेष पहचान बनाने में भी सक्षम होगा। सिवनी जम्बो सीताफल अपने बड़े आकार, विशिष्ट स्वाद और गुणवत्ता के लिए प्रसिद्ध है। यह सीताफल अन्य स्थानों पर पाए जाने वाले सीताफलों से कहीं अधिक बड़ा और अधिक मीठा होता है। इन्हीं विशेषताओं के कारण जम्बो सीताफल को जीआई (भौगोलिक संकेत) टैग दिया गया है। विशेष पहचान मिलने से जिले के सीताफल की बाजार में मांग बढ़ेगी और मूल्य में वृद्धि होने से किसानों की आय में भी बढ़ोतरी होगी। स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ने के साथ निर्यात के अवसर भी बढ़ेंगे। जम्बो सीताफल की विशिष्टता     विशाल आकारः सिवनी के सीताफल का आकार अन्य स्थानों के सीताफल की तुलना में बहुत बड़ा होता है। जिले का सीताफल 400 ग्राम से अधिक बड़ा होता है। कुछ फल एक किग्रा तक भी होता है। अन्य जिलों का सीताफल औसत रूप से 100 से 150 ग्राम का होता है जबकि सिवनी जिले का छोटा फल भी 200 ग्राम से ज्यादा वजन का होता है। विशिष्ट स्वाद: जिले के सीताफल का स्वाद सबसे हटके है। यहां का सीताफल बहुत मीठा होता है अन्य स्थानों के सीताफल पनीले पानी के स्वाद का होता है। प्राकृतिक उत्पादन: जिले का सीताफल प्राकृतिक रूप से पैदावार होने के कारण पूर्णतः जैविक होता है, किसी भी प्रकार का खाद, उर्वरक का उपयोग नहीं किया जाता है। पल्प की अधिक मात्रा: जिले के सीताफल में पल्प (गूदा) की मात्रा अधिक होती है।  

मरीजों की सुरक्षा से समझौता बर्दाश्त नहीं, अनियमितताएं मिलने पर स्वास्थ्य विभाग की त्वरित कार्रवाई

रायपुर  राज्य सरकार की मंशा के अनुरूप आम नागरिकों को सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण और जवाबदेह स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए जिला प्रशासन लगातार सतर्क और सक्रिय है। इसी कड़ी में  जीपीएम जिला प्रशासन के निर्देश पर डी.डी. हॉस्पिटल, सेमरा तिराहा पेंड्रारोड का स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम द्वारा विस्तृत निरीक्षण एवं जांच की गई। जांच के दौरान अस्पताल के संचालन तथा मरीजों को प्रदान की जा रही स्वास्थ्य सेवाओं में गंभीर अनियमितताएं पाए जाने पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा अस्पताल प्रबंधन को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। जांच में सामने आया कि मृतक मरीज ज्योति सोनवानी एक्लेम्सिया जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित थी, जिसका उपचार चिकित्सा महाविद्यालय स्तर की स्वास्थ्य संस्था में किया जाना आवश्यक था। इसके बावजूद मरीज को अस्पताल में भर्ती कर उपचार किए जाने को नियमानुसार उचित नहीं पाया गया। स्वास्थ्य विभाग ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए अस्पताल प्रबंधन से स्पष्टीकरण मांगा है। निरीक्षण के दौरान यह भी पाया गया कि नर्सिंग होम अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार आपातकालीन सेवाओं के लिए चौबीसों घंटे चिकित्सक की उपलब्धता अनिवार्य है, किंतु 17 एवं 18 जून 2026 को अस्पताल में मरीजों की देखरेख के लिए कोई चिकित्सक एवं पर्याप्त दक्ष स्टाफ उपलब्ध नहीं था। यह स्थिति न केवल नियमों का उल्लंघन है बल्कि मरीजों की सुरक्षा के लिए भी गंभीर चिंता का विषय है। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अस्पताल के वार्डों का निरीक्षण किया, जहां सर्जरी के बाद कई मरीज भर्ती पाए गए। ऐसी संवेदनशील परिस्थिति में ऑन ड्यूटी चिकित्सक का अनुपस्थित होना अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही को दर्शाता है। जांच में यह भी सामने आया कि शल्य चिकित्सा कार्यों के लिए आवश्यक स्त्री रोग विशेषज्ञ, शल्य चिकित्सक, निश्चेतना विशेषज्ञ तथा अन्य प्रशिक्षित चिकित्सा कर्मियों की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित नहीं की गई थी। साथ ही भर्ती मरीजों की चौबीसों घंटे निगरानी के लिए आवासीय चिकित्सा अधिकारी की व्यवस्था भी नहीं पाई गई। आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत उपचार प्राप्त करने वाले मरीजों से निर्धारित पैकेज के अतिरिक्त लगभग एक लाख पचास हजार रुपये की राशि लिए जाने संबंधी शिकायत भी जांच के दौरान सामने आई। स्वास्थ्य विभाग ने इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए इसकी जांच प्रारंभ कर दी है। प्रशासन का स्पष्ट मत है कि जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक बिना किसी अतिरिक्त आर्थिक बोझ के पहुंचना चाहिए। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा जारी नोटिस में कहा गया है कि अस्पताल द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य उपचर्यागृह तथा रोगोपचार संबंधी स्थापनाएं अनुज्ञापन अधिनियम 2010 के अंतर्गत निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया गया है। अस्पताल प्रबंधन को तीन दिवस के भीतर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर लिखित स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। संतोषजनक जवाब प्राप्त नहीं होने की स्थिति में नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मरीजों के जीवन और स्वास्थ्य सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। राज्य सरकार के मार्गदर्शन में जिले में स्वास्थ्य संस्थाओं की नियमित निगरानी जारी रहेगी तथा निर्धारित मानकों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। यह कार्रवाई स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही और गुणवत्ता बनाए रखने की दिशा में राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

दिशोम गुरु शिबू सोरेन को बड़ा सम्मान: राष्ट्रपति मुर्मू ने परिवार को सौंपा पद्म भूषण

रांची झारखंड आंदोलन के प्रमुख नेता, झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री दिशोम गुरु शिबू सोरेन को मरणोपरांत देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म भूषण से सम्मानित किया गया. मंगलवार को संसद भवन में आयोजित सम्मान समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मां रूपी सोरेन को यह सम्मान प्रदान किया. इस अवसर पर गांडेय विधायक कल्पना सोरेन, अंजनी सोरेन और परिवार के अन्य सदस्य भी मौजूद रहे. शिबू सोरेन को यह सम्मान आदिवासी समाज, झारखंड आंदोलन और सार्वजनिक जीवन में उनके लंबे योगदान के लिए दिया गया है. नेमरा गांव से शुरू हुआ था संघर्ष का सफर शिबू सोरेन का जन्म 11 जनवरी 1944 को वर्तमान रामगढ़ जिले के नेमरा गांव में हुआ था. बचपन में उनका नाम शिवलाल था, लेकिन बाद में वे शिबू सोरेन के नाम से देशभर में पहचान बनाने लगे. उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा नेमरा गांव के स्कूल और बाद में गोला हाई स्कूल से प्राप्त की. उनके पिता सोबरन सोरेन शिक्षक होने के साथ गांधीवादी विचारधारा के समर्थक थे. 27 नवंबर 1957 को महाजनों द्वारा उनकी हत्या कर दी गई. जमीन कब्जे और शोषण के खिलाफ आवाज उठाने के कारण हुई इस घटना ने किशोरावस्था में ही शिबू सोरेन के जीवन की दिशा बदल दी. इसके बाद उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी और अन्याय के खिलाफ संघर्ष का रास्ता चुना. महाजनों के खिलाफ आंदोलन से मिली पहचान युवा अवस्था में उन्होंने आदिवासी समाज को संगठित करने का काम शुरू किया. उन्होंने संताल नवयुवक संघ और सोनोत संताल समाज का गठन किया. इसके बाद धनकटनी आंदोलन चलाकर आदिवासियों के अधिकारों की लड़ाई को नई दिशा दी. गोला, बोकारो, जैनामोड़ और टुंडी क्षेत्र में आंदोलन को मजबूत करने के दौरान उनकी मुलाकात विनोद बिहारी महतो से हुई. बाद में पारसनाथ की पहाड़ियों और टुंडी क्षेत्र को उन्होंने अपने आंदोलन का केंद्र बनाया. टुंडी में बनाई सामाजिक व्यवस्था की नई मिसाल टुंडी और आसपास के इलाकों में शिबू सोरेन ने सामूहिक खेती, पशुपालन और रात्रि पाठशालाओं की शुरुआत कर ग्रामीण समाज को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया. उस समय क्षेत्र में उनकी एक तरह की समानांतर सामाजिक व्यवस्था भी चलती थी, जहां स्थानीय विवादों का निपटारा किया जाता था. इन्हीं प्रयासों के कारण आदिवासी और मूलवासी समाज में उनकी लोकप्रियता लगातार बढ़ती गई और वे “दिशोम गुरु” के नाम से पहचाने जाने लगे. झारखंड आंदोलन को दी नई दिशा साल 1973 में शिबू सोरेन ने विनोद बिहारी महतो और एके राय के साथ मिलकर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की स्थापना की. पार्टी में विनोद बिहारी महतो अध्यक्ष और शिबू सोरेन महासचिव बने. अलग झारखंड राज्य की मांग को लेकर शुरू हुआ यह आंदोलन आने वाले वर्षों में व्यापक जन आंदोलन में बदल गया. आपातकाल के दौरान वर्ष 1975 में उन्हें जेल भी जाना पड़ा. 1977 में उन्होंने टुंडी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा. सांसद से लेकर मुख्यमंत्री तक का सफर 1980 में वे पहली बार दुमका से लोकसभा सांसद चुने गए. इसके बाद कई बार संसद पहुंचे और राष्ट्रीय राजनीति में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई. 1987 में निर्मल महतो की हत्या के बाद उन्होंने झामुमो की कमान संभाली और पार्टी अध्यक्ष बने. 15 नवंबर 2000 को झारखंड राज्य का गठन हुआ, लेकिन वे पहले मुख्यमंत्री नहीं बन सके. हालांकि बाद के वर्षों में उन्होंने तीन बार राज्य की कमान संभाली.     2005 में पहली बार मुख्यमंत्री बने, लेकिन बहुमत साबित नहीं कर सके.     2008 में दूसरी बार मुख्यमंत्री बने.     2009 में तमाड़ विधानसभा उपचुनाव हारने के बाद इस्तीफा देना पड़ा.     दिसंबर 2009 में तीसरी बार मुख्यमंत्री बने.     वर्ष 2010 में उनकी सरकार गिर गई. मोदी लहर में भी बरकरार रखा जनाधार 2014 के लोकसभा चुनाव में देशभर में भाजपा और नरेंद्र मोदी की लहर के बावजूद शिबू सोरेन दुमका से सांसद चुने गए. 2019 के लोकसभा चुनाव में हार के बाद उन्हें राज्यसभा भेजा गया और वे राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय बने रहे. 15 अप्रैल 2025 को झामुमो के महाधिवेशन में हेमंत सोरेन को पार्टी का अध्यक्ष बनाया गया, जबकि शिबू सोरेन को संस्थापक संरक्षक की जिम्मेदारी सौंपी गई. लंबी बीमारी के बाद हुआ निधन लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे शिबू सोरेन का 4 अगस्त 2025 को 81 वर्ष की आयु में नई दिल्ली स्थित सर गंगा राम अस्पताल में निधन हो गया. उनके निधन से झारखंड की राजनीति और आदिवासी आंदोलन के एक युग का अंत माना गया. संघर्ष से सम्मान तक की यात्रा शिबू सोरेन का राजनीतिक जीवन केवल सत्ता तक सीमित नहीं रहा. उन्होंने दशकों तक आदिवासियों, वंचितों और झारखंड की पहचान के लिए संघर्ष किया. यही कारण है कि उनके समर्थक उन्हें केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि “दिशोम गुरु” के रूप में याद करते हैं. अब मरणोपरांत पद्म भूषण सम्मान के साथ उनके सार्वजनिक जीवन और योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर भी औपचारिक मान्यता मिली है. नेमरा गांव के एक साधारण परिवार से निकलकर देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान तक पहुंचने की यह यात्रा भारतीय लोकतंत्र और जन आंदोलनों के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज रहेगी.

काले हिरण व चिंकारा के शिकार कर अतंर्राज्यीय स्तर पर तस्करी करने वाले आरोपी रिजवान एवं इम्तियाज की जमानत याचिका ख़ारिज

भोपाल जिला एवं सत्र न्यायालय इंदौर में आरोपी रिजवान और आरोपी इम्तियाज द्वारा जमानत याचिका दायर की गयी। जिला एवं सत्र न्यायालय इंदौर के समक्ष स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स मध्यप्रदेश इकाई इंदौर द्वारा शासन का ठोस पक्ष रखा गया एवं अन्य प्रकरणों जैसे वीरूपक्षा गोडा विरूद्ध स्टेट आफ कर्नाटक राज्य में पारित आदेश एवं उक्त प्रकरण के महत्वपूर्ण तथ्यों से अगवत कराया गया। आरोपियों की मोबाइल फारेन्सिक रिपोर्ट से प्राप्त शिकार के साक्ष्यों को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया। जिला एवं सत्र न्यायालय इंदौर द्वारा स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स मध्यप्रदेश इकाई इंदौर द्वारा की गई सटीक विवेचना एवं रखे गए ठोस पक्ष के आधार पर उक्त जमानत याचिकाएं खारिज की गई। प्रकरण में अग्रिम विवेचना जारी है। स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स इकाई इंदौर द्वारा प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) म.प्र. के निर्देश पर वनमण्डल इंदौर एवं स्थानीय पुलिस द्वारा संयुक्त रूप से कार्यवाही की गई। किशनगंज जिला इंदौर से वन्यजीवों के मांस की तस्करी करने वाले 3 आरोपियों को 65 कि.ग्रा. (लगभग), एक नग देसी पिस्टल, 3 जिंदा कारतूस एवं एक नग चार पहिया वाहन टोयोटा इनोवा क्रिस्टा क्रमांक एम.एच-02-ई.पी.-4223 के साथ विभिन्न धाराओं में परिक्षेत्र महू वनमण्डल इंदौर के अंतर्गत वन अपराध प्रकरण दर्ज कर गिरफ्तार किया गया था। प्रकरण की गंभीरता को देखते हुये वन्यजीव मुख्यालय द्वारा इस प्रकरण को अग्रिम विवेचना के लिये स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स (एसटीएसएफ) इकाई इंदौर को हस्तांतरित किया गया। एसटीएसएफ द्वारा वैज्ञानिक तकनीकी साक्ष्यों की सहायता से नया प्रकरण क्रमांक POR No. 237/22 दिनांक 21.08.25 दर्ज कर विवेचना की जा रही है। उक्त आरोपी इम्तियाज 19 माह से व आरोपी रिजवान 4 माह से ही न्यायिक अभिरक्षा में है। वर्तमान में प्रकरण में कुल 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।  

कानपुर में कोचिंग सेंटरों पर छापा: 26 प्रतिष्ठान सील, सुरक्षा नियमों पर सख्त कार्रवाई

लखनऊ लखनऊ में आग की घटना के बाद हरकत में आए केडीए ने समूचे शहर में अवैध बेसमेंट, बेसमेंट में हो रहे नियम विपरीत व्यावसायिक कार्य और अग्निशमन संयंत्रों के बिना संचालित किए जा रहे प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई की। लखनऊ अग्निकांड के बाद जागी सरकारी मशीनरी ने सोमवार की शाम से ही शहर में छापेमारी जारी रखी है। मंगलवार को भी दोपहर बाद तक 10 और कोचिंग सेंटरों को सील कर दिया गया। इसके साथ ही 20 और कोचिंग सेंटर कार्रवाई के लिए चिन्हित किए गए हैं। कानपुर विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष अंकुर कौशिक के निर्देश पर यह अभियान चल रहा है। सोमवार को भी 16 कोचिंग सेंटर सील किए गए थे। अब तक इसकी संख्या 26 पहुंच चुकी है। दूसरी ओर पुलिस कमिश्नर ने कोचिंग सेंटर संचालकों के साथ बैठक की है, जिसमें कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाने के आसार हैं। सूत्रों के मुताबिक शहर के अधिकांश कोचिंग सेंटर बंद कर दिए गए हैं। कुछ सेंटरों में अग्नि शमन से जुड़ी सेवाएं शुरू की जा रही हैं। जिन कोचिंग सेंटर में क्लासेस चल रहे थे उनमें से छात्र-छात्राओं को पहले बाहर किया गया उसके बाद विकास प्राधिकरण द्वारा सील लगाई गई। इस दौरान विकास प्राधिकरण के सचिव अभय कुमार पांडेय ने बताया कि छात्र-छात्राओं की जन की सुरक्षा के लिए ही यह कदम उठाए गए हैं। अग्निशमन सुरक्षा संबंधी उपकरण और इंतजाम करने के बाद सेंटरों से सील हटाई जा सकती है। सोमवार को कोचिंग सेंटरों समेत 16 प्रतिष्ठान सील सोमवार को भी कानपुर में कोचिंग सेंटर समेत 16 प्रतिष्ठानों को सील कर दिया। इसके साथ ही अन्य प्रतिष्ठानों को भी कार्रवाई के लिए चिह्नित किया गया है। शासन के निर्देश पर केडीए उपाध्यक्ष अंकुर कौशिक ने सभी प्रवर्तन जोन के प्रभारियों को निर्देश दिया कि तत्काल जोन में जाएं और नियमों के विपरीत संचालित प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई करें। इसमें कोचिंग संस्थान, गेमिंग सेंटर और काम्प्लेक्स में संचालित शो रूम को भी सूचीबद्ध किया गया। इससे पहले दिल्ली में आग की घटना के बाद भी केडीए ने अभियान चलाया था और प्रतिष्ठानों की सूची तैयार की थी। ऐसे में अभियान चलाने में ज्यादा मशक्कत नहीं करनी पड़ी। सोमवार को केडीए सबसे पहले बड़े कोचिंग सेंटरों पर धावा बोला। विद्यापीठ, फिजिक्स वाला, संजीव राठौर कोचिंग सेंटर, फिजिक्स स्टाइल ऑफ विवेक और अंकित सर क्लासेज के कोचिंग सेंटर को सील किया। केडीए के विधि, जनसंपर्क अधिकारी एवं ओएसडी सत शुक्ला के मुताबिक प्रवर्तन जोन-1ए में तीन, जोन-2बी में पांच, जोन-3 में तीन तथा जोन-4 में पांच प्रतिष्ठानों के विरुद्ध सीलबंदी की कार्यवाही की गई।

कृषि अवशेष, गोबर और जैविक अपशिष्ट से तैयार होगी हरित ऊर्जा, किसानों की आय बढ़ाने और निवेश को मिलेगा नया प्रोत्साहन

रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में आज आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में छत्तीसगढ़ कम्प्रेस्ड बायोगैस (CG-CBG) नीति 2026 को मंजूरी प्रदान की गई। यह नीति राज्य में स्वच्छ ऊर्जा, हरित औद्योगिकीकरण, कृषि आधारित अर्थव्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण को नई दिशा देने वाली महत्वपूर्ण पहल साबित होगी। छत्तीसगढ़ में कृषि एवं फसल अवशेष, पैडी स्ट्रॉ, पशु गोबर, पशुधन अपशिष्ट, नगरीय ठोस अपशिष्ट, प्रेसमड, गन्ना अवशेष तथा नेपियर जैसी ऊर्जा फसलों से प्रतिवर्ष लगभग 1.65 लाख मेट्रिक टन कम्प्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) उत्पादन की संभावना है। इससे राज्य में स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा तथा पारंपरिक जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम होगी। नई नीति के प्रभावी क्रियान्वयन से प्रतिवर्ष लगभग 2.16 लाख टन पेट्रोल एवं डीजल के समतुल्य ईंधन की आपूर्ति सीबीजी के माध्यम से की जा सकेगी। इससे विदेशी मुद्रा की बचत होने के साथ-साथ देश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता को भी मजबूती मिलेगी। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कहा है कि छत्तीसगढ़ के किसानों, गौपालकों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए यह नीति नए अवसर लेकर आएगी। कृषि अवशेषों एवं जैविक अपशिष्टों के बेहतर उपयोग से किसानों की अतिरिक्त आय बढ़ेगी तथा ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर सृजित होंगे। सीबीजी संयंत्रों से सह-उत्पाद के रूप में प्राप्त जैविक खाद के उपयोग से प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा मिलेगा। इससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होगी, भूमि की उर्वरता संरक्षित रहेगी और टिकाऊ कृषि को प्रोत्साहन मिलेगा। यह नीति राज्य को हरित विकास और जलवायु अनुकूल अर्थव्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। सीबीजी के उपयोग से ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी आएगी तथा छत्तीसगढ़ नेट-ज़ीरो उत्सर्जन के राष्ट्रीय लक्ष्य की दिशा में प्रभावी योगदान दे सकेगा। भारत सरकार द्वारा सतत एवं किफायती परिवहन को बढ़ावा देने के लिए संचालित SATAT (Sustainable Alternative Towards Affordable Transportation) पहल के अनुरूप यह नीति तैयार की गई है। राष्ट्रीय स्तर पर स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के प्रयासों में छत्तीसगढ़ की यह पहल महत्वपूर्ण योगदान देगी। राज्य में विकसित हो रहे सिटी गैस वितरण नेटवर्क तथा गैस अधोसंरचना का लाभ भी इस नीति को मिलेगा। इससे सीबीजी उत्पादन, वितरण और उपयोग की मजबूत पारिस्थितिकी विकसित होगी तथा निवेशकों को बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे। छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण (CBDA) द्वारा वर्ष 2024 से सीबीजी क्षेत्र में सक्रिय पहल की जा रही है। वर्तमान में रायपुर, दुर्ग-भिलाई, बिलासपुर, राजनांदगांव, धमतरी, अंबिकापुर, रायगढ़ और कोरबा सहित आठ स्थानों पर बीपीसीएल एवं गेल इंडिया लिमिटेड के निवेश से सीबीजी संयंत्र स्थापित किए जा रहे हैं। इन सभी परियोजनाओं के लिए भूमि आबंटन की प्रक्रिया पूर्ण की जा चुकी है। राज्य में निजी क्षेत्र से भी सीबीजी उद्योग के प्रति उल्लेखनीय रुचि दिखाई गई है तथा लगभग 3,600 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। नई नीति लागू होने के बाद इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश, रोजगार सृजन तथा औद्योगिक विकास की संभावनाओं को और अधिक बल मिलेगा। मंत्रिपरिषद द्वारा अनुमोदित इस नीति के छह प्रमुख आधार स्तंभ हैं – आधारभूत अधोसंरचना सहायता, फीडस्टॉक आपूर्ति श्रृंखला सुदृढ़ीकरण, संयंत्र स्थापना एवं संचालन सहायता, जैव उर्वरक प्रबंधन एवं सहायक अधोसंरचना विकास, सीबीजी मांग सृजन एवं परिवहन क्षेत्र में एकीकरण तथा निवेश प्रोत्साहन एवं उद्योग विकास। नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण (CBDA) को राज्य की नोडल एजेंसी नामित किया गया है। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कहा कि यह नीति छत्तीसगढ़ को स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन, हरित उद्योग, जैविक कृषि और सतत विकास के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर सिद्ध होगी। यह पहल विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के संकल्प को नई ऊर्जा प्रदान करेगी।