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परोपकारी संस्थाओं के प्रोत्साहन से दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं का किया जाएगा सशक्तीकरण

भोपाल उप मुख्यमंत्री एवं लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के मंत्री  राजेन्द्र शुक्ल की अध्यक्षता में वल्लभ भवन में मध्यप्रदेश (परोपकारी संस्थाओं के लिए) मेगा स्वास्थ्य सेवा अधोसंरचना प्रोत्साहन नीति-2026 के प्रारूप पर मंत्रिपरिषद समिति ने विमर्श किया। बैठक में प्रस्तावित नीति के विभिन्न प्रावधानों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया और समिति के सदस्यों ने नीति को जन-केंद्रित, सेवा-उन्मुख, गरीब एवं वंचित वर्गों की स्वास्थ्य आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने संबंधी महत्वपूर्ण सुझाव दिए। बैठक में मंत्रिपरिषद समिति के सदस्य सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री  चैतन्य काश्यप, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री  नरेन्द्र शिवाजी पटेल, पंचायत एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री मती राधा सिंह सहित अपर मुख्य सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा  अशोक बर्णवाल, आयुक्त  धनराजू एस तथा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण तृतीयक एवं सुपर स्पेशलिटी स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता बढ़ाना समय की आवश्यकता है। विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों, ग्रामीण क्षेत्रों तथा दूरस्थ अंचलों के नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए परोपकारी संस्थाओं की सहभागिता को प्रोत्साहित किया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित नीति का मूल उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को सेवा-भाव एवं सामाजिक उत्तरदायित्व के साथ आमजन तक पहुंचाना है। वर्तमान में प्रदेश गुणवत्तापूर्ण तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता एवं पहुंच के क्षेत्र में चुनौतियों का सामना कर रहा है। सुपर स्पेशलिटी अस्पतालों सहित उच्चस्तरीय स्वास्थ्य संस्थान मुख्यतः बड़े शहरों तक सीमित हैं, जिससे प्रदेश के अन्य क्षेत्रों के नागरिकों को उपचार के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। साथ ही विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी भी गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को प्रभावित करती है। प्रस्तावित नीति का उद्देश्य प्रदेश में उच्चस्तरीय तृतीयक एवं सुपर स्पेशलिटी अस्पतालों की स्थापना को प्रोत्साहित करना, चिकित्सा शिक्षा का विस्तार करना, विशेषज्ञ एवं एमबीबीएस चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ाना, गरीब मरीजों को गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराना, अन्य राज्यों में उपचार के लिये मरीजों के पलायन को कम करना तथा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार लाना है। नीति के अंतर्गत केवल सेवा-उन्मुख एवं लाभ-निरपेक्ष परोपकारी संस्थाओं को पात्र माना जाएगा। इनमें कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 8 के अंतर्गत पंजीकृत कंपनियां, भारतीय ट्रस्ट अधिनियम, 1882 के अंतर्गत पंजीकृत धर्मार्थ ट्रस्ट तथा सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 के अंतर्गत पंजीकृत संस्थाएं शामिल हो सकेंगी। पात्र संस्थाओं के लिए न्यूनतम तीन वर्ष का पंजीकरण एवं सेवा गतिविधियों का संतोषजनक अनुभव होना प्रस्तावित किया गया है। चिकित्सा महाविद्यालय एवं नर्सिंग कॉलेज जैसी अतिरिक्त सुविधाएं विकसित करने वाली संस्थाओं को प्राथमिकता दिए जाने का भी प्रस्ताव है। बैठक में प्रस्तावित प्रोत्साहनों की भी समीक्षा की गई। इसके अंतर्गत राज्य सरकार द्वारा उपयुक्त भूमि का चयन कर रियायती दरों पर दीर्घकालीन लीज पर उपलब्ध कराने, सुपर स्पेशलिटी सेवाओं के लिये उच्च लागत वाले चिकित्सा उपकरणों पर निर्धारित शर्तों के अधीन अनुदान उपलब्ध कराने तथा विभिन्न स्वीकृतियों के लिए सिंगल-पॉइंट क्लियरेंस प्रणाली विकसित करने जैसे प्रावधानों पर चर्चा की गई। मंत्रिपरिषद समिति ने नीति के प्रारूप का परीक्षण करते हुए सुझाव दिया कि इसके सभी प्रावधानों का केंद्र बिंदु आमजन, विशेषकर गरीब एवं वंचित वर्गों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना होना चाहिए। समिति ने नीति को अधिक सेवा-उन्मुख, पारदर्शी एवं जनहितकारी स्वरूप प्रदान करने पर बल दिया।  

कम बारिश और बढ़ती इथेनॉल मांग से संकट में चीनी उद्योग, निर्यात पर लंबा असर संभव

 नई दिल्ली भारत दुनिया के चीनी उत्पादक देशों में शामिल है, लेकिन आने वाले सालों में तस्वीर बदल सकती है. मौसम विशेषज्ञों ने इस साल अल-नीनो के असर से कम बारिश की आशंका जताई है. सरकार के इथेनॉल पर बढ़ते फोकस की वजह से गन्ने का इस्तेमाल भी बढ़ रहा है. ऐसे में जानकारों का कहना है कि कम से कम तीन साल तक भारत के पास इतनी ज्यादा चीनी नहीं बच सकती कि वह बड़े पैमाने पर देशों को बेच सके।  भारत में गन्ने की खेती काफी हद तक मॉनसून पर निर्भर करती है. मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक, इस साल बारिश सामान्य से कम रह सकती है. जून महीने में भी कई जगहों पर सामान्य से कम बारिश हुई है. इसी वजह से कुछ किसान गन्ने की जगह सोयाबीन, अरहर और दूसरी कम पानी वाली फसलें लगाने का फैसला कर रहें हैं. अगर ऐसा ही रहा तो आने वाले सीजन में गन्ने की खेती और उत्पादन दोनों पर असर पड़ सकता है।  चीनी की जरूरत ज्यादा, उत्पादन कम उद्योग के अनुमान के मुताबिक, 2025-26 सीजन में भारत का चीनी उत्पादन करीब 2.79 करोड़ टन रह सकता है. वहीं देश में हर साल करीब 2.85 करोड़ टन चीनी की खपत होती है. यानी देश में जितनी चीनी बन रही है, उससे ज्यादा चीनी की जरूरत है. इसी वजह से मिलों में चीनी का स्टॉक घटकर करीब 35 लाख टन रह सकता है, जो कई दशक में सबसे कम लेवल में से एक होगा।  इथेनॉल की बढ़ती मांग भी बड़ी वजह सरकार पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा बढ़ाने पर जोर दे रही है ताकि कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम की जा सके. इसके लिए गन्ने और उससे जुड़े उत्पादों का इस्तेमाल इथेनॉल बनाने में बढ़ रहा है. फिलहाल देश में इथेनॉल की मांग करीब 12 से 13 अरब लीटर है. आने वाले सालों में यह बढ़कर 30 अरब लीटर तक पहुंच सकती है. ऐसे में गन्ने का बड़ा हिस्सा चीनी की बजाय इथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल हो सकता है।  सरकार की नजर घरेलू सप्लाई पर  भारत पहले दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी का एक्सपोर्टर था. 2022-23 तक पांच सालों में देश हर साल आमतौर पर 68 लाख टन चीनी विदेशों में बेचता था, जो वैश्विक चीनी करोबार का करीब 10% हिस्सा था. अब हालात बदल चुके हैं. सरकार की प्राथमिकता देश के भीतर चीनी की उपलब्धता बनाए रखना है. आने वाले सीजन में भी चीनी निर्यात को लेकर सख्त रुख देखने को मिल सकता है।  क्या भारत को भी चीनी खरीदनी पड़ सकती है? विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अल-नीनो का असर ज्यादा रहा और गन्ने की खेती में बड़ी गिरावट आई, तो आने वाले वर्षों में भारत को विदेशों से चीनी खरीदने की जरूरत भी पड़ सकती है. भारत ने आखिरी बार 2016-17 और 2017-18 में चीनी आयात की थी. उस समय सूखे और कम उत्पादन की वजह से ऐसी स्थिति बनी थी।  इससे पहले 2009 और 2010 में भारत की बड़ी खरीदारी ने दुनिया भर में चीनी की कीमतों को काफी ऊपर पहुंचा दिया था. कम बारिश की आशंका, गन्ने की खेती पर बढ़ता दबाव और इथेनॉल की बढ़ती मांग भारत के चीनी सेक्टर के सामने बड़ी चुनौती बनकर उभर रहे हैं।  अगर मौसम के अनुमान सही साबित होते हैं, तो आने वाले कुछ सालों तक देश के पास विदेशों में बेचने के लिए अतिरिक्त चीनी कम बच सकती है. इतना ही नहीं, हालात ज्यादा बिगड़े तो भारत को भविष्य में चीनी आयात करने पर भी विचार करना पड़ सकता है।   

बिहार में थानों का अपग्रेडेशन: 425 थानों में इंस्पेक्टर होंगे थाना प्रभारी

पटना बिहार में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने और अपराधों की जांच को ज्यादा असरदार बनाने के लिए पुलिस मुख्यालय ने एक बड़ा निर्णय लिया है। अब राज्य के 425 महत्वपूर्ण पुलिस थानों की कमान सब-इंस्पेक्टर (दरोगा) के हाथों में नहीं होगी, बल्कि इन थानों में केवल इंस्पेक्टर रैंक के सीनियर अधिकारियों को ही थानाध्यक्ष (थाना प्रभारी) बनाया जाएगा। प्राप्त जानकारी के अनुसार, डीजीपी विनय कुमार ने सोमवार को यह नया आदेश जारी कर दिया है। इन अनुभवी इंस्पेक्टरों के पास अब अंचल निरीक्षक (सर्किल इंस्पेक्टर) जैसी शक्तियां होंगी। इनके आने से थानों के अंदर मुकदमों की जांच और सुरक्षा व्यवस्था को संभालने के लिए दो अलग-अलग विशेष टीमें पूरी मुस्तैदी से काम करेंगी। 217 नए थाने किए गए अपग्रेड इस नई प्रशासनिक व्यवस्था को लागू करने के लिए पुलिस मुख्यालय ने थानों को चुनने का एक बहुत ही साफ-सुथरा पैमाना तय किया है। पहले से तय 208 थानों के अलावा अब राज्य के 217 और थानों को अपग्रेड किया गया है। इन थानों को उनके बड़े आकार, अपराध के लिहाज से संवेदनशीलता और वहां हर साल दर्ज होने वाले कम से कम 350 या उससे अधिक मुकदमों की संख्या को देखकर चुना गया है। डीजीपी के आदेश के बाद यह नया नियम तुरंत पूरे बिहार में लागू कर दिया गया है। रेलवे और जिला पुलिस को सख्त हिदायत दी गई है कि अगर कोई इंस्पेक्टर छुट्टी पर भी जाता है, तो उसकी जगह नीचे के रैंक के किसी अधिकारी को इन थानों का परमानेंट चार्ज नहीं दिया जाएगा। थानेदार के नीचे काम करेंगे दो सब-इंस्पेक्टर इस नई व्यवस्था की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इन थानों में इंस्पेक्टर स्तर के थाना प्रभारी के नीचे दो अलग-अलग सब-इंस्पेक्टर (SI) तैनात किए जाएंगे। इनमें से एक सब-इंस्पेक्टर का काम सिर्फ केसों की जांच करना होगा, जबकि दूसरे सब-इंस्पेक्टर का काम इलाके में शांति बनाए रखना होगा। पुलिस मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि 425 थानों में इस नए तरीके से अफसरों की तैनाती करने से बिहार सरकार की तिजोरी पर कोई भी अतिरिक्त नया आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा और न ही इसके लिए किसी नए पद को बनाने की जरूरत होगी। इस बेहतर व्यवस्था से जहां पुलिस को काम करने में आसानी होगी, वहीं आम जनता की शिकायतों का निपटारा भी बिना किसी देरी के सीधे थानों में ही हो जाएगा।

अयोध्या राम मंदिर दान जांच: गृह विभाग को सौंपी गई रिपोर्ट, दोषियों पर कार्रवाई की सिफारिश

अयोध्या अयोध्या राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी मामले की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट गृह विभाग को सौंप दी है। एसआईटी के प्रमुख सदस्य एवं लखनऊ मंडल के आयुक्त विजय विश्वास पंत ने मंगलवार को टीम के अन्य दो सदस्यों के साथ अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद को यह प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी। जांच में मंदिर ट्रस्ट के कई अधिकारी और कर्मचारी प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए हैं। सूत्रों के मुताबिक, रिपोर्ट में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की सिफारिश की गई है। सूत्रों के अनुसार, रिपोर्ट में कुछ वरिष्ठ पदाधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। बताया जा रहा है कि शाम को प्रारंभिक रिपोर्ट को सीएम योगी के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी। अयोध्या में राम मंदिर दान के वित्तीय प्रबंधन में कथित हेराफेरी की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) ने मंगलवार को अपर मुख्‍य सचिव (गृह) संजय प्रसाद को अपनी प्रारंभिक प्रतिवेदन रिपोर्ट सौंप दी। जांच दल का नेतृत्व कर रहे एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने राम मंदिर ट्रस्ट के वित्तीय प्रबंधन और दान राशि से संबंधित आरोपों की जांच के लिए 13 जून को तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया। अधिकारियों ने बताया था कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर एसआईटी गठित की गई। यह दल तीर्थ क्षेत्र में दान पात्रों के संबंध में लगाए जा रहे आरोपों की जांच कर सरकार को अपनी रिपोर्ट देगा। योगी ने किया था एसआईटी का गठन एसआईटी में भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी तथा लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी व पुलिस महानिरीक्षक किरन एस. और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल हैं। अयोध्या स्थित तीर्थ क्षेत्र में दानपात्रों को लेकर सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों को गंभीरता से लेते हुए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से विशेष जांच दल गठित किए जाने का अनुरोध किया था।ट्रस्ट के अनुसार, अफवाहों पर रोक लगाने और मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए इसकी गहन जांच आवश्यक है। यह तीर्थ क्षेत्र की छवि और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को चोट पहुंचाने की गहरी साजिश है, जिसका पर्दाफाश होना बेहद जरूरी है। अयोध्या में क्या बोले थे योगी इस मामले की शुरुआत सात जून को हुई जब समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कुछ तथ्यों का हवाला देते हुए मंदिर के दान में गबन का मामला उठाया और इसमें न्यायिक संज्ञान लेने की अपील की। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल में अपनी अयोध्‍या यात्रा में यह दावा किया था कि इस जांच में एसआईटी दूध का दूध और पानी का पानी करेगी। उन्होंने राम भक्तों से कहा कि पांच सौ वर्षों तक इंतजार किया और 15 दिन और इंतजार करके देख लो।

हज-2027 के लिए ऑनलाइन आवेदन शुरू, 20 जुलाई 2026 तक भर सकेंगे फॉर्म

रायपुर हज कमेटी के माध्यम से वर्ष 2027 की हज यात्रा पर जाने के इच्छुक आवेदकों के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 22 जून 2026 से प्रारंभ हो गई है। छत्तीसगढ़ राज्य हज कमेटी के चेयरमैन मिर्ज़ा एजाज़ बेग ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हज कमेटी ऑफ इंडिया द्वारा हज-2027 के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। इच्छुक आवेदक हज कमेटी ऑफ इंडिया की वेबसाइट पर उपलब्ध हज आवेदन पत्र एवं दिशा-निर्देशों का अध्ययन कर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा आवेदक हज सुविधा मोबाइल एप के माध्यम से भी आवेदन जमा कर सकते हैं। मिर्ज़ा एजाज़ बेग ने बताया कि हज-2027 के लिए आवेदन करने वाले सभी आवेदकों के पास 31 दिसंबर 2027 तक वैध पासपोर्ट होना अनिवार्य है। ऑनलाइन आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 20 जुलाई 2026 को रात्रि 11:59 बजे निर्धारित की गई है। उन्होंने हज यात्रा के इच्छुक लोगों से अपील की है कि आवेदन करने से पहले हज गाइडलाइन को ध्यानपूर्वक पढ़ें तथा उसमें दिए गए सभी दिशा-निर्देशों का पालन करें, ताकि आवेदन प्रक्रिया में किसी प्रकार की परेशानी न हो। अधिक जानकारी के लिए आवेदक छत्तीसगढ़ राज्य हज कमेटी कार्यालय, मुखर्जी बाड़ा, बैरन बाजार, रायपुर से संपर्क कर सकते हैं। इसके लिए दूरभाष क्रमांक 0771-4266646 पर भी जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

अतीक-अशरफ से जुड़ी संपत्तियों पर शिकंजा, शिकायतों के बाद पुलिस की बड़ी कार्रवाई

प्रयागराज पी के संगमनगरी प्रयागराज में माफिया अतीक अहमद और उसके करीबियों की कथित बेनामी संपत्तियों की जांच के लिए पुलिस ने विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन किया है। यह कार्रवाई अधिवक्ता केपी श्रीवास्तव की शिकायत के बाद की गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि अतीक अहमद और उसके परिजनों ने अपने करीबी मदन लाल भारतीया के नाम पर धूमनगंज क्षेत्र में कई संपत्तियां खरीदी थीं। मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस अधिकारियों ने संपत्तियों की जांच कर आवश्यक विधिक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। एसआईटी में पुलिस उपायुक्त नगर मनीष कुमार शांडिल्य, एडीएम सिटी सत्यम मिश्र, अपर नगर आयुक्त अरविंद राय, एआईजी स्टाम्प राकेश चंद्रा और पीडीए सचिव विनीत कुमार सिंह को शामिल किया गया है। टीम को संबंधित संपत्तियों के बारे में गोपनीय एवं प्रामाणिक जानकारी जुटाने, दस्तावेजों की जांच करने तथा अवैध रूप से अर्जित संपत्तियां मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। आदेश के अनुसार एसआईटी को तीन दिन के भीतर जांच शुरू करनी होगी। साथ ही टीम को प्रत्येक सोमवार को संयुक्त हस्ताक्षरयुक्त साप्ताहिक प्रगति रिपोर्ट अपर पुलिस आयुक्त को देनी होगी। माना जा रहा है कि अतीक अहमद से जुड़े आर्थिक नेटवर्क और बेनामी संपत्तियों के खिलाफ चल रहे अभियान में यह कार्रवाई महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। हर दूसरी शिकायत में है नाम 15 अप्रैल 2023 की रात भले ही माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की मौत हो चुकी हो, लेकिन आज भी शहर में लोग उसके नाम और कारनामों से परेशान हैं। माफिया ने अपने जीवन में इतनी जमीनों पर कब्जा किया कि आज भी हर दूसरी शिकायत में उसका नाम आता है। लोग कभी अतीक तो कभी अशरफ और कभी उसके गुर्गों से खुद के परेशान होने की शिकायत कर रहे हैं। अफसर इस बात को लेकर त्रस्त हैं कि इस माफिया के अपराध की जड़े कितनी गहरी थीं कि मौत के तीन साल बाद भी उसके निशान मिट नहीं रहे हैं। 100 में से 40 से 50 शिकायतें अतीक-अशरफ के नाम सबसे ज्यादा मामले सदर तहसील की जनसुनवाई में आते हैं। हर दिन आने वाली 100 शिकायतों में 40 से 50 जमीन, संपत्ति कब्जे की शिकायतों में माफिया अतीक अहमद, उसके भाई अशरफ का नाम रहता है। विशेषकर करेली, करैलाबाग, कटुहला, गौसपुर, रसूलपुर समेत अन्य क्षेत्रों के हर मामले में ही उसका नाम रहता है। गंभीरता से होती है जांच जिन शिकायतों पर अतीक और अशरफ का नाम आता है, उसकी जांच भी बहुत अधिक गंभीरता से होती है। कई शिकायतों की जांच में बात में सच्चाई भी होती है। अफसरों का कहना है कि माफिया की मौत के बाद उससे परेशान लोग अब धीरे-धीरे सामने आ रहे हैं। अभी गौसपुर कटहुला में ही पांच बीघा जमीन पर माफिया के गुर्गों ने कब्जा किया था। ऐसे मामलों की सूची बन रही है।

रांची RSS ऑफिस अटैक केस में बड़ा खुलासा, दुबई और मुंबई तक जुड़े तार

 रांची  रांची के चुटिया थाना क्षेत्र के निवारणपुर स्थित राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) कार्यालय पर पेट्रोल बम से हमला मामले में एटीएस ने रविवार को रांची जिले के चुटिया में दर्ज कांड का प्रभार ले लिया है। इस केस को टेकओवर करते हुए एटीएस ने अपनी जांच शुरू कर दी है। जांच के क्रम में ही एटीएस के अधिकारियों की टीम सोमवार को घटनास्थल पर पहुंची। घटना की रात आरएसएस कार्यालय में मौजूद लोगों, आसपास के लोगों से भी पूछताछ की। अपराधियों के आने-जाने वाले मार्ग की भी जानकारी ली, ताकि अपराध की जांच की कड़ियों को जोड़ा जा सके। टीम ने पेट्रोल बम से हमले से जुड़े साक्ष्य को संकलित की है। एटीएस की जांच टीम ने आरएसएस कार्यालय में लगे सीसीटीवी फुटेज को भी खंगाला है। रांची पुलिस व एटीएस की जांच में गिरफ्तार तीनों ही आरोपितों का चार राज्यों से कनेक्शन जुड़ा है, जिनमें झारखंड के अलावा उत्तर प्रदेश, दिल्ली व मुंबई शामिल है। जांच टीम आरोपितों के विदेश से आने-जाने, संदिग्धों से मुलाकात, संबंधित राज्यों के अन्य सहयोगियों से मुलाकात सहित उनकी ट्रेवेल हिस्ट्री को खंगाल रही है। जांच टीम को उम्मीद है कि आरोपितों की ट्रेवेल हिस्ट्री जांच की कड़ी को आगे बढ़ाएगी। अमन का जब्त हुआ है पासपोर्ट, इंटरनेट प्लेटफार्म को भी खंगाल रही एटीएस आरएसएस कार्यालय पर हमला मामले में रांची पुलिस ने तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया था। इन आरोपितों में सैफ अंसारी, अमन अंसारी उर्फ गोलू व सायम सुजान शामिल हैं। तीनों ही मूल रूप से लोहरदगा के निवासी हैं। इन तीनों ही आरोपितों में एक आरोपित अमन अंसारी उर्फ गोलू का विदेश कनेक्शन सामने आया। पुलिस ने उसके पासपोर्ट को जब्त किया था। अमन का यह पासपोर्ट उसके पिता स्व. सनोफ अंसारी के निधन के बाद उसके सौतेले पिता नसीम खान ने 2022 में बनवाया था। अमन दुबई में काम करने गया था और वहीं पर उसके दिमाग में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने की खौफनाक साजिश भरी गई। एटीएस सभी आरोपितों के इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म को भी खंगाल रही है, जिसके माध्यम से तीनों व उनके अन्य सहयोगी जुड़े थे। एटीएस इन तीनों ही आरोपितों से जुड़े अन्य सहयोगियों का डेटा भी खंगाल रही है। तीनों ही आरोपितों को एक बार फिर रिमांड पर लेकर एटीएस उनके संदिग्ध सहयोगियों का सत्यापन कराएगी। 16 जून की रात हुई थी घटना, तीन आरोपित हुए थे गिरफ्तार 16 जून की रात चुटिया के निवारणपुर स्थित आरएसएस कार्यालय पर पेट्रोल बम से हमला हुआ था। इस मामले में चुटिया थाने में 17 जून को कांड संख्या 85/26 के तहत प्राथमिकी दर्ज हुई थी। जांच के क्रम में पुलिस ने कोडरमा के पास गझंडी रेलवे स्टेशन के पास से सैफ अंसारी व अमन अंसारी उर्फ गोलू को गिरफ्तार किया था। सैफ अंसारी लोहरदगा के बगरू मोड़, ईमली मोड़ के पास बड़ा तलाब का निवासी है, जबकि अमन अंसारी उर्फ गोलू भी लोहरदगा के न्यू आजाद बस्ती का रहने वाला है। दोनों ने पूछताछ में अपने तीसरे साथी सायम सुजान का नाम लिया, जिसकी गिरफ्तारी रांची से हुई थी। सायम सुजान भी लोहरदगा के पत्थलकुदवा स्थित फुलबगान का निवासी है। गिरफ्तार आरोपित सैफ अंसारी 18 जून को कोतवाली थाना परिसर से भाग गया था, जिससे चान्हो थाना क्षेत्र में पुलिस से मुठभेड़ हुई थी। मुठभेड़ में पैर में गोली लगने के बाद सैफ फिर से पकड़ा गया था। इस मामले में उसके विरुद्ध रांची के कोतवाली में हाजत से भागने व चान्हो में पुलिस का हथियार छिनने व मुठभेड़ मामले में भी अलग-अलग दो प्राथमिकियां दर्ज हैं। सैफ न्यायिक हिरासत में इलाजरत है, जबकि दो अन्य सहयोगी रांची के होटवार स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा में बंद हैं। दुबई के भट्ठी व राणा, मुंबई के जिशान व अमृतसर के बीर का भी सत्यापन इस पूरे प्रकरण में एटीएस जांच के क्रम में चार संदिग्धों का सत्यापन कर रही है। इनमें दुबई के शहबाज आलम उर्फ भट्टी व राणा हुसैन, मुंबई के ट्रेवेल एजेंट जिशान तथा अमृतसर के बीर शामिल हैं। जांच व आरोपितों से पूछताछ में इनके नाम सामने आए हैं गिरफ्तार आरोपित अमन एसी तकनीशियन के काम के सिलसिले में दुबई गया था और वहां उसकी मुलाकात शहबाज आलम उर्फ भट्टी व राणा हुसैन से हुई थी। दोनों पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी इंटर सर्विस इंटेलिजेंस (आइएसआइ) व आतंकी संगठन तहरीक ए तालिबान हिंदुस्तान (टीटीएच) से जुड़े थे। दोनों ने अमन अंसारी का ब्रेनवाश किया और हिंदुस्तान में आतंक फैलाने का टास्क सौंपा। जिशान मुंबई का ट्रेवेल एजेंट है, जिसके माध्यम से अमन ओमान व दुबई जा चुका है। जांच में अमृतसर के बीर का नाम आया है, जो आतंकियों के संपर्क में था। सभी इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म पर एक-दूसरे से जुड़े थे। उनकी योजनाओं से संबंधित जानकारी भी जांच टीम को मिली है, जिसका सत्यापन चल रहा है। आरएसएस कार्यालय पर हमला से संबंधित वीडियो दुबई के भट्टी को भेजे जाने संबंधित सबूत भी मिले हैं, जिसके बाद जांच की कड़ी विदेशी कनेक्शन पर आगे बढ़ी है।

पंजाब पुलिस का बड़ा एक्शन, अमृतसर एनकाउंटर में 2 शूटर दबोचे गए

अमृतसर. अमृतसर देहात पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए खलचियां क्षेत्र में मुठभेड़ के बाद 2 कथित शूटरों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 2 अवैध पिस्तौल भी बरामद किए हैं। पुलिस का दावा है कि दोनों आरोपी किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में थे। एसएसपी अमृतसर देहात कवलप्रीत सिंह चहल ने बताया कि पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि विदेश में बैठकर गैंग संचालित करने वाले अमनदीप सिंह उर्फ मन्ना के 2 शूटर खलचियां इलाके में मौजूद हैं। सूचना के आधार पर पुलिस ने तकनीकी साधनों और खुफिया तंत्र की मदद से दोनों आरोपियों का पता लगाया।  जब पुलिस टीम ने डेमो वाली नहर के पास दोनों संदिग्धों को रोकने का प्रयास किया तो आरोपियों ने पुलिस पर फायरिंग कर दी। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच जवाबी फायरिंग हुई। आत्मरक्षा में पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई के दौरान एक गोली आरोपी हीरा सिंह के पैर में लगी। घायल आरोपी को तुरंत उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। आरोपियों से 32 बोर पिस्तौल और  9 mm पिस्तौल बरामद पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों की पहचान हीरा सिंह और लवप्रीत सिंह के रूप में हुई है। हीरा सिंह के खिलाफ पहले से हत्या का मामला दर्ज है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि दोनों आरोपी विदेश में बैठे गैंगस्टर अमनदीप सिंह उर्फ मन्ना के लिए काम करते थे, जो यूरोप से अपना गैंग संचालित कर रहा है। पुलिस ने आरोपियों के पास से एक 32 बोर पिस्तौल और एक 9 एमएम पिस्तौल बरामद की है। एसएसपी चहल ने कहा कि विदेश में बैठकर पंजाब में आपराधिक गतिविधियां संचालित करने वाले अपराधियों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा रही है और उन्हें भारत लाने की प्रक्रिया जारी है। फिलहाल पुलिस दोनों आरोपियों से गहन पूछताछ कर रही है।

गांव में बढ़ा तनाव, धर्मांतरण को लेकर ईसाई और आदिवासी समाज के बीच टकराव

नारायणपुर. जिले के भरण्डा गांव में धर्मांतरण को लेकर विवाद गहरा गया है। सुबह से गांव में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। हालात को देखते हुए प्रशासन ने गांव को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया है। बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। जानकारी के अनुसार, करीब 26 मतांतरित परिवारों का आरोप है कि गांव के आदिवासी ग्रामीणों ने उन्हें गांव छोड़ने का फरमान जारी किया है। उनका कहना है कि उनसे ईसाई धर्म का पालन छोड़कर आदिवासी रीति-रिवाज अपनाने का दबाव बनाया जा रहा है। परिवारों का दावा है कि उन्हें घरों से बाहर निकालने की कोशिश की गई। वहीं, आदिवासी समुदाय का कहना है कि ईसाई धर्म अपनाने वाले कुछ लोग गांव की पारंपरिक आदिवासी संस्कृति, रीति-रिवाज और देवी-देवताओं का अपमान करते हैं। समुदाय का कहना है कि यदि वे गांव में रहना चाहते हैं तो उन्हें आदिवासी परंपराओं का सम्मान करना होगा अन्यथा गांव छोड़ना होगा। पुलिस ने की शांति बनाए रखने की अपील दोनों पक्षों के बीच इस मुद्दे को लेकर जमकर कहासुनी और झूमाझटकी हुई। हालांकि पुलिस की मौजूदगी से स्थिति फिलहाल नियंत्रण में बताई जा रही है, लेकिन गांव में तनाव बना हुआ है। दोनों पक्ष एक-दूसरे का बात मानने तैयार नहीं हैं। किसी भी तरह का समझौता होता नहीं दिख रहा है। प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। पुलिस अधिकारियों ने लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों से बचने की अपील की है। मामले को सुलझाने के लिए प्रशासन दोनों पक्षों से बातचीत कर रहा है।

राजस्थान में शिक्षा, स्वास्थ्य और शहरी विकास पर मंत्रिमंडलीय उप-समिति की अहम बैठक

 जयपुर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रदेश के चहुंमुखी विकास, जन-सुविधाओं के विस्तार और संस्थागत सुदृढ़ीकरण के लिए निरंतर नीतिगत निर्णय ले रही है। इसी क्रम में मंगलवार को शासन सचिवालय में मंत्रिमंडलीय उप-समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रदेश के विभिन्न जिलों में सार्वजनिक हित, उच्च शिक्षण संस्थान, स्वास्थ्य सेवाएं, सामाजिक कल्याण एवं औद्योगिक केंद्रों की स्थापना के लिए रियायती दरों पर भूमि आवंटन के विभिन्न प्रकरणों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।  उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह, शिक्षा मंत्री मदन दिलावर, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री अविनाश गहलोत तथा  नगरीय विकास एवं आवासन राज्य मंत्री(स्वतंत्र प्रभार) झाबर सिंह खर्रा सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।  भूमि आवंटन प्रकरणों की हुई विस्तृत समीक्षा  बैठक में जनहित, शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक कल्याण एवं शहरी आधारभूत सुविधाओं के विस्तार से संबंधित बिंदुओं की समीक्षा की गई। समिति ने पात्र प्रकरणों में नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। शैक्षणिक एवं सामाजिक सरोकार से जुड़े संस्थानों के भूमि आवंटन प्रकरणों को प्राथमिकता से आगे बढ़ाने पर भी सहमति व्यक्त की गई।  स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार पर जोर  बैठक में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, विशेषीकृत चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता तथा आमजन को बेहतर उपचार सुविधाएं उपलब्ध कराने से संबंधित प्रस्तावों की समीक्षा की गई। समिति ने राज्य सरकार से लाभ प्राप्त संस्थाओं द्वारा  जनकल्याणकारी योजनाओं का अधिकतम लाभ आमजन तक पहुंचाने तथा स्वास्थ्य संस्थानों में राज्य सरकार की विभिन्न चिकित्सा सहायता योजनाओं जैसे मा और आरजीएचएस के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए।  शहरी विकास एवं नागरिक सुविधाओं पर निर्देश  समिति ने औद्योगिक एवं व्यापारिक संगठनों के भवन निर्माण में पेनल्टी पर छूट जैसे प्रकरणों पर एवं शेष प्रकरणों के समाधान के लिए प्रक्रियाओं में आवश्यक सरलीकरण, किश्तों में भुगतान की सुविधा तथा नियमानुसार ग्रेस पीरियड उपलब्ध कराने के सुझावों पर भी सकारात्मक विचार-विमर्श किया गया।  शहरी विकास से जुड़े विषयों पर समिति ने शहरी सेवा अभियान के अंतर्गत पट्टों सहित विभिन्न लाभों के वितरण में तेजी लाने, लंबित प्रकरणों के अधिकाधिक निस्तारण तथा नागरिकों को राहत प्रदान करने के लिए उपलब्ध प्रावधानों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।  पारदर्शी नगरीय कराधान व्यवस्था के निर्देश  समिति ने नगरीय कराधान एवं शुल्क निर्धारण से संबंधित विषयों की समीक्षा करते हुए पारदर्शी एवं व्यावहारिक व्यवस्था विकसित करने के लिए आवश्यक प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए तथा पात्रता के निर्धारित प्रावधानों का पूर्ण पालन सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया।  आरक्षित दरों से छूट के प्रकरणों पर विचार  बैठक में विभिन्न संस्थागत, शैक्षणिक, सामाजिक एवं सार्वजनिक उपयोग के भूमि आवंटन प्रकरणों में आरक्षित दरों से छूट के मामलों पर भी विचार किया गया। समिति ने जनहित एवं लोककल्याण की भावना को ध्यान में रखते हुए पात्र प्रकरणों को प्राथमिकता से निस्तारित करने पर सहमति व्यक्त की।  उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक विकास तथा शहरी आधारभूत संरचना को सुदृढ़ करने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि विभिन्न संस्थागत एवं जनोपयोगी परियोजनाओं के माध्यम से आमजन को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा विकास कार्यों को गति देने के लिए आवश्यक निर्णय समयबद्ध रूप से लिए जा रहे हैं।