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IPL की सबसे बड़ी डील: पंत- कुलदीप का ब्लॉकबस्टर ट्रेड, बदली टीमों की तस्वीर

नई दिल्ली आईपीएल 2027 से पहले ऋषभ पंत और कुलदीप यादव की टीमें बदल चुकी है। दिल्ली कैपिटल्स और लखनऊ सुपर जाएंटस के बीच सबसे बड़ा ट्रेड हो चुका है। लंबे समय से इसकी खबरें क्रिकेट के गलियारों में टहल रही थी। आज यानि 23 जून को आईपीएल की ओर से इस पर आधिकारिक मुहर लगा दी गई है। पंत दिल्ली में 15 करोड़ में वापसी करेंगे तो वहीं कुलदीप को एलएसजी ने 13.5 करोड़ की कीमत पर साइन किया है। ऋषभ पंत और कुलदीप यादव की अदला-बदली 2 साल लखनऊ सुपर जाएंट्स का हिस्सा रहने के बाद ऋषभ पंत की एक बार फिर अपनी पुरानी टीम दिल्ली कैपिटल्स में वापसी हो चुकी है। डीसी के साथ उन्होंने 2016 में अपने करियर की शुरुआत की थी। तो वहीं साल 2022 से दिल्ली के लिए खेल रहे कुलदीप यादव लखनऊ के लिए खेलेंगे। आईपीएल 2027 से पहले यह लीग की सबसे बड़ी ट्रेड डील मानी जा सकती है। क्योंकि दोनों ही खिलाड़ी आईपीएल के साथ ही भारतीय क्रिकेट के भी स्टार खिलाड़ियों में से एक हैं।

फर्जी सेना कोटे से मिली पुलिस नौकरी! हरियाणा के जींद में दो भाइयों के खिलाफ मामला

जींद. जुलाना थाना पुलिस ने दो भाइयों के खिलाफ फर्जी प्रमाण-पत्र के आधार पर पुलिस में नौकरी पाने पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। दोनों भाइयों ने पुलिस में भर्ती होते समय अपने पिता के आर्मी कोटे का लाभ उठाया था। नियमों के अनुसार केवल एक ही आश्रित इसका लाभ उठा सकता है। जुलाना थाना पुलिस ने गतौली गांव निवासी दो हवलदार भाइयों दलेल व भूपेंद्र के खिलाफ मामला दर्ज किया है। जुलाना थाना पुलिस को दी शिकायत में सोनीपत निवासी 70 वर्षीय हेल्थ सुपरवाइजर से सेवानिवृत्त कमला दहिया ने बताया कि गतौली गांव निवासी गतौली निवासी हरिओम सेना से सेवानिवृत्त हुए थे। 2008 में उनके बड़े बेटे दलेल अपने पिता के कोटे का लाभ उठाते हुए पुलिस में भर्ती हो गए। दलेल इस समय जींद में कार्यरत हैं। 2014 में हरिओम का दूसरा बेटा भूपेंद्र भी अपने पिता के कोटे का लाभ उठाते हुए पुलिस में भर्ती हो गया। नियमों के अनुसार सेवानिवृत्त आर्मी कर्मचारी का केवल एक ही पुत्र इस कोटे का लाभ उठा सकता है। भूपेंद्र इस समय हांसी जिले में तैनात है। दोनों अब मुख्य सिपाही के पद पर पदोन्नत हो गए हैं। कमला दहिया ने कहा कि उनके एक रिश्तेदार ने भी आर्मी कोटे का लाभ लेते हुए पुलिस भर्ती के लिए आवेदन किया था। उसके रिश्तेदार को यह लाभ नहीं मिला। अब उसे पता चला कि गतौली गांव निवासी दो भाइयों ने इसी प्रकार ईएसएम कोटे का लाभ उठाया है और वह दोनों इस समय पुलिस में कार्यरत हैं। कमला दहिया ने कहा कि जब दो भाइयों को लाभ मिल रहा है तो उसके रिश्तेदार को क्यों नहीं मिल सकता। जब पुलिस के पास यह शिकायत पहुंची तो उन्होंने इस मामले की जांच की और पाया कि एक कोटे का केवल एक ही आश्रित लाभ उठा सकता है। दोनों ने लाभ उठाकर धोखाधड़ी की है। इसलिए अब पुलिस ने भूपेंद्र व दलेल के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी। जुलाना थाना प्रभारी कुलदीप सिंह ने कहा कि सोमवार को ही भूपेंद्र व दलेल के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। अभी मामले की जांच की जाएगी।

राजस्थान सरकार का बड़ा कदम, समान नागरिक संहिता का प्रारूप होगा तैयार

जयपुर संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल और गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने सोमवार को शासन सचिवालय में आयोजित प्रेस वार्ता में कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान तेजी से समान नागरिक संहिता (यूनिफार्म सिविल कोड) की ओर अग्रसर है। इसमें सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक कानून होंगे। राज्य सरकार ने विधेयक का प्रारूप तैयार करने हेतु उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। पटेल ने बताया कि संवैधानिक भावना को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित मंत्रिमण्डल की बैठक में 14 अप्रैल, 2026 को राज्य में इस विषय पर सार्थक कार्यवाही करने का निर्णय लिया था। इसके अंतर्गत आदिवासी समुदाय के रीति-रिवाज को सुरक्षित रखा जाएगा और उन्हें संवैधानिक सुरक्षा मिलेगी। इससे प्रदेश को नई दशा और दिशा मिलेगी।   उन्होंने बताया कि संविधान के भाग 4 में वर्णित राज्य की नीति के निर्देशक तत्वों के अंतर्गत अनुच्छेद 44 के प्रावधानों के मद्देनजर राज्य सरकार ने राज्य में समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया है। अनुच्छेद 44 में उल्लेख है कि राज्य, भारत के समस्त राज्य क्षेत्र में नागरिकों के लिए एक समान सिविल संहिता (Uniform Civil Code-UCC) प्राप्त कराने का प्रयास करेगा। बेढम ने बताया कि ‘राजस्थान समान नागरिक संहिता, 2026’ (The Rajasthan Uniform Civil Code, 2026) के विधेयक का प्रारूप तैयार करने हेतु उच्चतम न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई है। समिति के अन्य सदस्य सेवानिवृत्त आई.ए.एस. शत्रुघ्न सिंह, राजस्थान उच्च न्यायालय के अतिरिक्त महाधिवक्ता बसंत सिंह छाबा, राजकीय विधि महाविद्यालय, श्रीगंगानगर के सेवानिवृत्त प्राचार्य रामस्वरूप अग्रवाल और डॉ. शुचि चौहान बनाये गये हैं। अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) को समिति का सदस्य सचिव नियुक्त किया गया है। उन्होंने बताया कि समान नागरिक संहिता के विधेयक के प्रारूप को समावेशी और पारदर्शी बनाने के लिए समिति संभाग स्तर पर जन-संवाद को प्राथमिकता देगी। वेबसाइट के माध्यम से राज्य के आम नागरिक अपने बहुमूल्य सुझाव सीधे समिति तक पहुंचा सकेंगे। समान नागरिक संहिता में विवाह और तलाक का अनिवार्य पंजीकरण, बहुविवाह पर पूर्ण रोक समान नागरिक संहिता का प्रमुख ध्येय देश या राज्य में रहने वाले सभी नागरिकों के लिए एक समान नागरिक कानून लागू करना है, चाहे वे किसी भी धर्म, जाति या समुदाय के हों। वर्तमान में शादी, तलाक, संपत्ति के उत्तराधिकार, गोद लेने और भरण-पोषण जैसे मामलों में अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों का पालन होता है। यूसीसी लागू होने से ये विसंगतियां समाप्त होंगी। इसका मुख्य उद्देश्य अलग-अलग पर्सनल लॉ में महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव को समाप्त कर उन्हें लैंगिक समानता और पुरुषों के बराबर अधिकार दिलाना है। इसके तहत विवाह और तलाक का अनिवार्य पंजीकरण, बहुविवाह पर पूर्ण रोक, लिव-इन रिलेशनशिप का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन तथा पैतृक संपत्ति में बेटा-बेटी दोनों को समान अधिकार जैसे प्रमुख बदलाव शामिल हैं। राज्य सरकार समिति के माध्यम से राज्य की आवश्यकताओं और सामाजिक ताने-बाने के अनुरूप एक आदर्श और प्रगतिशील कानून का प्रारूप तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है।  

क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2 के ऑफ-एयर होने की अफवाहें, मेकर्स ने दी सफाई

17 साल बाद जब ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2’ की वापसी हुई, तो फैंस बेहद एक्साइटेड नजर आए. अब शो को लेकर एक नई चर्चा तेज हो गई है. कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि यह शो जल्द ऑफ एयर हो सकता है. हालांकि अब तक मेकर्स या चैनल की ओर से शो बंद करने को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है. यह पहली बार नहीं है जब ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2’ के बंद होने की खबरें सामने आई हैं. इससे पहले मार्च में भी ऐसी अफवाहें तेजी से वायरल हुई थी. तब मेकर्स और चैनल ने साफ तौर पर इन खबरों को गलत बताया था. स्टार प्लस ने अपने आधिकारिक बयान में कहा था, “हमने कुछ मीडिया रिपोर्ट्स देखी हैं, जिनमें दावा किया जा रहा है कि शो बंद हो रहा है और उसकी जगह ‘क्योंकि रिश्तों के भी रूप बदलते हैं’ ले रहा है. हम साफ करना चाहते हैं कि ये खबरें पूरी तरह बेबुनियाद हैं. फिलहाल शो को बंद करने की कोई योजना नहीं है.”  तुलसी और मिहिर की कहानी से जुड़ाव आज भी कायम ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2’ में स्मृति ईरानी और अमर उपाध्याय ने एक बार फिर तुलसी और मिहिर विरानी के अपने आइकॉनिक किरदारों में वापसी की. इतने सालों बाद भी दर्शकों का इन किरदारों से जुड़ाव कम नहीं हुआ है. शो में इस बार पुराने चेहरों के साथ नई पीढ़ी को भी जोड़ा गया है. रोहित सुचांती, तनिषा मेहता, शगुन शर्मा और अमन गांधी जैसे कलाकार नई कहानी को आगे बढ़ाते नजर आ रहे हैं.

संजीव कपूर का खुलासा: मास्टरशेफ इंडिया में अक्षय कुमार से ज्यादा फीस की थी शर्त

 सेलेब्रिटी शेफ संजीव कपूर ने हाल ही में ‘मास्टरशेफ इंडिया’ को लेकर ऐसा खुलासा किया, जिसे फैंस जानते नहीं होंगे. संजीव ने बताया कि जब उन्हें पहली बार ‘मास्टरशेफ इंडिया’ ऑफर हुआ था, तब उन्होंने शो करने से इनकार कर दिया था. वजह थी उनकी एक खास शर्त, जिसे मेकर्स मानने के लिए तैयार नहीं थे. Sanjeev Kapoor Reveals His Condition: ‘मेरी एक ही शर्त थी’ Culinary Culture से बातचीत में संजीव कपूर ने कहा, “जब वे पहली बार मेरे पास आए थे, तब उन्होंने मेरी शर्त नहीं मानी. मेरी शर्त सिर्फ इतनी थी कि मुझे अक्षय कुमार से एक रुपया ज्यादा फीस मिलनी चाहिए.” उन्होंने आगे कहा, “यह शो का पहला सीजन था और मुझे लगता था कि इस काम को मुझसे बेहतर कोई नहीं कर सकता. जब उन्होंने मुझसे बात की, तो मैंने कहा कि मेरी एक शर्त है. उन्होंने उसे नहीं माना और मैं समझौता नहीं करना चाहता था. मैं अपने फैसले से खुश था.” संजीव ने यह भी बताया कि शो छोड़ने के बाद भी मेकर्स लगातार उन्हें मनाने की कोशिश करते रहे. गेस्ट बनकर भी नहीं पहुंचे शो में शेफ ने बताया कि मेकर्स ने उन्हें कई बार एक एपिसोड के लिए गेस्ट बनकर आने का ऑफर भी दिया, लेकिन उन्होंने हर बार मना कर दिया. संजीव कपूर ने कहा, “वे लोग बार-बार कहते थे कि सर, एक एपिसोड के लिए आ जाइए. लेकिन मैंने साफ कह दिया था कि मैं ऐसा नहीं करूंगा.”  तीसरे सीजन में बदली पूरी कहानी संजीव कपूर ने बताया, “तीसरे सीजन में उन्होंने मुझसे कहा कि शो सही तरीके से नहीं चल रहा है और उन्हें मेरी जरूरत है. मैंने कहा कि मुझे नहीं लगता मैं कर पाऊंगा. तब उन्होंने कहा कि हम बिल्कुल वैसा ही करेंगे जैसा आप कहेंगे.” इसके बाद संजीव ने अपनी शर्तों पर शो साइन किया. जब उनसे पूछा गया कि क्या आखिरकार उन्हें अक्षय कुमार से ज्यादा फीस मिली थी, तो उन्होंने हंसते हुए कहा, “बिल्कुल मिली थी. वह शर्त कभी बदलने वाली नहीं थी. अगर मैं अपने फील्ड में यह नहीं कर सकता, तो फिर क्या मतलब है?”

लेट हो रहा मानसून, लेकिन बारिश बनी राहत! पंजाब में पारा लुढ़का, अगले चार दिन यलो अलर्ट

अमृतसर  पंजाब में भले ही मानसून आने में देरी हो रही है, लेकिन कईं जगहों पर हुई हल्की बारिश से भीषण गरमी से कुछ राहत मिली है। सोमवार को पंजाब के तापमान में 3.6 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई। इससे अब पारा सामान्य से 2.3 डिग्री नीचे पहुंच गया है। सबसे अधिक 38.6 डिग्री का पारा बठिंडा का दर्ज किया गया।  मौसम विभाग ने अगले चार दिनों के लिए पंजाब में यलो अलर्ट जारी कर दिया है। इसके तहत पंजाब में गरज-चमक के साथ 40 से 50 किलोमीटर की रफ्तार से तेज हवाएं चलेंगी और हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। विभाग ने मंगलवार व बुधवार के लिए पंजाब के 14 जिलों के लिए अलर्ट जारी किया है।  इनमें पठानकोट, गुरदासपुर, अमृतसर, तरनतारन, होशियारपुर, नवांशहर, कपूरथला, जालंधर, लुधियाना, संगरूर, फतेहगढ़ साहिब, रूपनगर, पटियाला और मोहाली शामिल हैं। इसके बाद 25 जून से पश्चिमी विक्षोभ मजबूत होगा और दो दिन पंजाब के सभी जिलों में तेज हवाओं के साथ बारिश पड़ेगी। पंजाब के न्यूनतम तापमान में भी 1.5 डिग्री की कमी दर्ज की गई। यह सामान्य. से 1.7 डिग्री नीचे हो गया है। सबसे कम 23.2 डिग्री का न्यूनतम पारा पठानकोट का दर्ज किया गया। जून के आखिरी हफ्ते में दस्तक दे सकता है मानसून  मौसम विभाग के चंडीगढ़ केंद्र के डायरेक्टर सुरिंदर पाल के मुताबिक मानसून पूर्वी भारत में तेजी से आगे बढ़ चुका है और अब उत्तर प्रदेश की ओर बढ़ रहा है। अगर स्थितियां अनुकूल बनी रहीं और इसी तरह से मानसून आगे बढ़ता रहा, तो जून के आखिरी हफ्ते में 29 या फिर 30 जून को यह पंजाब में प्रवेश कर सकता है। डायरेक्टर ने कहा कि पंजाब में 25 जून तक होने वाली बारिश पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से पड़ेगी। यह प्रि मानसून की बारिश नहीं है। गौरतलब है कि इससे पहले पंजाब में 20 से 25 जून के बीच मानसून के दस्तक देने की संभावना जताई गई थी।  अमृतसर का अधिकतम पारा 34.9 डिग्री (सामान्य से 3.2 डिग्री नीचे) लुधियाना का 34.2 डिग्री, पटियाला का 36.3 डिग्री, पठानकोट का 36.6 डिग्री, फाजिल्का का 36.0 डिग्री, होशियारपुर का 34.8 डिग्री, एसबीएस नगर का 31.8 डिग्री और रूपनगर का 36.8 डिग्री दर्ज किया गया। अमृतसर का न्यूनतम पारा 24.0 डिग्री, लुधियाना का 23.8 डिग्री, पटियाला का 26.7 डिग्री, बठिंडा का 25.5 डिग्री, फाजिल्का का 25.8 डिग्री, होशियारपुर का 24.7 डिग्री और रूपनगर का 25.8 दर्ज किया गया।

महज 48 घंटे में खुला क्लिनिक फायरिंग केस, जालंधर पुलिस ने आरोपी को दबोचा

जालंधर. पुलिस कमिश्नरेट जालंधर ने वेरका मिल्क प्लांट के निकट स्थित आर्यन होम्योपैथिक क्लिनिक पर फायरिंग करने के मामले को सुलझाते हुए एक आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपित की पहचान गुरपाल सिंह निवासी अशोक विहार कालोनी, वेरका मिल्क प्लांट के निकट के रूप में हुई है। पुलिस ने आरोपित के खिलाफ दर्ज मामले में कार्रवाई करते हुए उसे हिरासत में ले लिया है। पुलिस कमिश्नर सतिंदर सिंह ने बताया कि थाना प्रभारी सब-इंस्पेक्टर राकेश कुमार की अगुवाई में पुलिस ने मामले की जांच करते हुए आरोपित को गिरफ्तार किया। 22 को डॉ. संदीप शर्मा निवासी वीनस वैली, जालंधर के बयान पर मामला दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता ने बताया कि 20 जून की रात उनकी पत्नी डा. विश्वजीत कौर ने सलेमपुर रोड स्थित आर्यन होम्योपैथिक क्लिनिक को बंद किया था। 22 जून की सुबह जब भतीजे मोहित बावा ने क्लिनिक का शटर खोला तो अंदर का शीशा टूटा हुआ मिला। जांच करने पर पता चला कि शीशे पर गोली लगने का निशान था और गोली आर-पार हुई प्रतीत हो रही थी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने विभिन्न धाराओं और आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की। जांच और सूचनाओं के आधार पर पुलिस ने आरोपित गुरपाल सिंह को गिरफ्तार कर लिया। आरोपित से पूछताछ जारी है। जांच के दौरान यह भी पता लगाया जा रहा है कि फायरिंग के पीछे क्या कारण था और क्या इस घटना में कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल था।

संजीवनी एम्बुलेंस बनी प्रसूति कक्ष, चलते वाहन में हुआ शिशु का जन्म

गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही. छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में 108 संजीवनी एम्बुलेंस एक बार फिर जीवनदायिनी साबित हुई. ग्राम करजा निवासी गर्भवती महिला गोमती को प्रसव पीड़ा होने पर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था. जांच के बाद डॉक्टरों ने उन्हें सिम्स अस्पताल बिलासपुर रेफर कर दिया. हालांकि रास्ते में ही प्रसव पीड़ा तेज हो गई, जिसके बाद एम्बुलेंस स्टाफ की तत्परता से महिला का सुरक्षित प्रसव कराया गया. महिला ने एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया. फिलहाल जच्चा और बच्चा दोनों पूरी तरह सुरक्षित हैं. जानकारी के अनुसार, कोरजा (गौरेला) निवासी गोमती (28 वर्ष), पति संदीप को प्रसव पीड़ा होने पर जिला अस्पताल GPM में भर्ती कराया गया था. डॉक्टरों ने चेकउप के बाद पाया कि ‘ प्रसव में रुकावट’ थी और प्रोग्रेस नहीं हो पा रही थी. इसके साथ जिला अस्पताल में एनेस्थीसिया डॉक्टर उपलब्ध नहीं होने से डॉक्टरों ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए सिम्स (CIMS) बिलासपुर रेफर कर दिया. ​परिजन आनन-फानन में महिला को डायल 108 एम्बुलेंस से बिलासपुर ले जा रहे थे. सफर के दौरान जैसे ही एम्बुलेंस कोनी (बिलासपुर) के पास पहुंची, महिला की प्रसव पीड़ा असहनीय हो गई और स्थिति काफी नाजुक हो गई. ​गंभीरता को देखते हुए ड्यूटी पर तैनात ईएमटी (EMT) चंद्रिका प्रसाद ने तुरंत गाड़ी रुकवाई. उन्होंने बिना समय गंवाए सहायक पायलट शिवशंकर पुरी और साथ में मौजूद मितानिन के सहयोग से एम्बुलेंस के भीतर ही प्रसव कराने का निर्णय लिया.​ ​स्टाफ की कुशलता से महिला का प्रसव पूरी तरह सफल रहा और एम्बुलेंस में ही किलकारी गूंज उठी. गोमती ने एक स्वस्थ शिशु को जन्म दिया. सफल प्रसव के बाद संजीवनी 108 की टीम ने बिना देरी किए जच्चा और बच्चा दोनों को सिम्स अस्पताल बिलासपुर में दाखिल कराया. जहां डॉक्टरों की देखरेख में दोनों की स्थिति पूरी तरह सामान्य और स्वस्थ बताई जा रही है. विपरीत परिस्थितियों में सूझबूझ दिखाकर सुरक्षित प्रसव कराने के लिए परिजनों ने संजीवनी 108 के स्टाफ और मितानिन का आभार व्यक्त किया है. सोशल मीडिया पर भी लोग इस जीवन रक्षक टीम की जमकर सराहना कर रहे हैं. व्यवस्था पर सवाल पिछले 25 दिनों से स्थाई एनेस्थीसिया डॉक्टर का जिला अस्पताल में न होना कहीं न कहीं आम लोगों के स्वास्थ्य से साथ खिलवाड़ है. ​वर्तमान में मनेंद्रगढ़ से वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर एनेस्थीसिया डॉक्टर बुलाए जाते हैं. स्थाई डॉक्टर न होने के कारण आपातकालीन स्थितियों में डॉक्टरों को न चाहते हुए भी गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों को बिलासपुर रेफर करना पड़ रहा है, जिससे मरीजों की जान जोखिम में बनी रहती है.

मध्य प्रदेश में UCC बिल की तैयारी, क्या इंटरकास्ट मैरिज से प्रभावित होंगे आदिवासी अधिकार?

भोपाल   मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) का ड्राफ्ट अगले 10 दिनों में तैयार हो जाएगा. देश की सबसे बड़ी आदिवासी आबादी वाले राज्य मध्यप्रदेश में यूसीसी के दायरे में आदिवासी समाज को कुछ मामलों में लाने की तैयार की जा रही है. आदिवासी समाज में अंतरजातीय विवाह करने पर उन्हें मिलने वाले आदिवासी अधिकारों को खत्म किया जा सकता है. इसे लेकर आए सुझावों पर गठित की गई उच्च स्तरीय कमेटी विचार कर ही है. उधर आदिवासियों के लिए भी विवाह का रजिस्ट्रेशन का विकल्प खुला रखा जा सकता है।  आदिवासियों की संपत्ति बंटवारे पर भी विचार समान नागरिक संहिता के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति ने भोपाल में अलग-अलग वर्गों से सुझाव लिए हैं. समिति सभी जिलों से सुझाव प्राप्त कर चुकी है. उच्च स्तरीय समिति की अध्यक्षता कर रहे उत्तराखंड के पूर्व मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह के मुताबिक, '' उम्मीद है कि अगले दस दिनों में समान नागरिक संहिता का ड्राफ्ट तय कर लिया जाएगा. यूसीसी के दायरे में अंतरजातीय विवाह करने वाले आदिवासी युवक-युवतियों को भी लाया जा सकता है. ऐसे मामलों में उनके संपत्ति बंटवारे को भी यूसीसी के दायरे में लाए जाने पर विचार किया जा रहा है. यूसीसी में बहु विवाह पर रोक लगाने, विवाह के रजिस्ट्रेशन अनिवार्य करने के साथ आदिवासियों के लिए विवाह रजिस्ट्रेशन का विकल्प रखा जाएगा।  आदिवासियों का मिल सकती है ये राहत यूसीसी के दायरे में आदिवासियों को भी लाए जाने पर सुझाव आए हैं. समिति सदस्य और उत्तरखंड के पूर्व मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह ने कहा, '' एक विचार बिलकुल साफ है कि संविधान में अनुसूचित जनजाति के व्यक्तियों के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं. उनकी परंपराओं, संस्कृति को संरक्षित रखने के लिए संविधान में अलग से व्यवस्था की गई है, इस व्यवस्था को हम नजरअंदाज नहीं कर सकते. लेकिन क्या उसके अंतर्गत रहते हुए यूसीसी के प्रावधानों का लाभ उनको दिया जाय या न दिया जाए इसको लेकर चर्चा हुई है. यदि कोई स्वैच्छिक रूप से वैवाहिक पंजीयन कराना चाहे तो करें और यदि कोई न चाहे कि उनकी संपत्ति का अधिकार यूसीसी के नियमों के तहत मिलना चाहिए, इस प्रावधान को शामिल किया जाए या न किया जाए इसको लेकर विचार चल रहा है।   गैर आदिवासी समुदाय में विवाह करने पर छिनेंगे अधिकार अनुसूचित समुदाय का कोई व्यक्ति गैर अनुसूचित समुदाय में विवाह करता है, तो उसे फैमिली लाॅ में जो अधिकार मिलते हैं वह यूसीसी से तय होंगे या उनकी पारंपरिक नियमों से तय होंगे इसको लेकर कुछ विचार आए हैं. यदि आदिवासी समाज की महिला गैर अनुसूचित जनजाति में विवाह करती है तो ऐसे में आदिवासी को मिलने वाले अधिकार को समाप्त माना जाए, क्योंकि विवाह के बाद महिला आदिवासी कल्चर को फाॅलो नहीं करेगी. इसी तरह यदि कोई आदिवासी पुरुष गैर आदिवासी महिला से विवाह करता है तो क्या उस पर भी यह नियम लागू किया जाए? इस पर समिति विचार करेगी।  मानूसन सत्र में आ सकता है विधेयक शत्रुघ्न सिंह ने बताया कि यूसीसी के फाइनल ड्राफ्ट के साथ दो रिपोर्ट तैयार होंगी, इसमें एक में व्यक्तियों, विशेषज्ञों और समूहों से लिए गए सुझावों को रखा जाएगा, जबकि दूसरे में इन सुझावों का निचोड़ होंगे, जिसे ड्राफ्ट में शामिल किया जाएगा। माना जा रहा है कि सरकार यूसीसी के इस विधेयक को आगामी मानसून सत्र में पेश कर सकती है. मुख्यमंत्री डाॅ. मोहन यादव इसे लेकर पहले ही इशारा कर चुके हैं।  लिव इन रिलेशनशिप गुजरात और उत्तराखंड दोनों राज्यों में लिव इन रिलेशनशिप में रजिस्ट्रेषन अनिवार्य किया गया है.गुजरात में प्रावधान किया गया है कि 21 साल से कम आयु की स्थिति में अभिभावक को सूचित किया जाएगा. 30 दिन के अंदर रजिस्ट्रेशन कराना होगा. बिना रजिस्ट्रेशन एक माह से अधिक समय तक लिव इन में रहने पर 3 माह की कैद या 10 हजार रुपए का जुर्माने का प्रावधान है. दोनों राज्यों में लिव इन रिलेशनशिप में जन्मे बच्चे को वैध माना जाएगा और दोनों को बच्चे को अपना नाम देना होगा।  संपत्ति का अधिकार गुजरात में संपत्ति के अधिकार में प्रावधान किया गया है कि वसीयत न करने की स्थिति में पति-पत्नी और बच्चों को संपत्ति समान रूप से बांटी जाएगी. उत्तराखंड में संपत्ति पर पति या पत्नी (जो भी जीवित हो) के अलावा पुत्र के साथ पुत्री का भी समान अधिकार दिया गया है. मृतक की संपत्ति में भी दोनों के समान अधिकार दिए गए हैं. पहले उत्तराखंड में प्रावधान था कि मृतक की पत्नी को ही संपत्ति दी जाएगी। 

नौकरी के साथ कमाई के नए रास्ते! मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में सबसे ज्यादा रोजगार, PG-टिफिन बिजनेस भी चमका

चंडीगढ़  पंजाब में विनिर्माण क्षेत्र सबसे अधिक रोजगार प्रदान कर रहा है। प्रदेश में कुल 3.05 लाख प्रतिष्ठान काम कर रहे हैं। इनमें से 1.27 लाख प्रतिष्ठानों में एक से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं। लोग अब पेइंग गेस्ट और टिफिन सर्विस से भी कमाई कर रहे हैं। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अखिल भारतीय छठे आर्थिक सर्वे में यह जानकारी सामने आई है। सर्वे के अनुसार, सभी कृषि और गैर-कृषि गतिविधियों में बड़े प्रतिष्ठानों की भागीदारी अभी भी कम है। केवल 2.69 फीसदी प्रतिष्ठानों में ही 10 से अधिक कर्मी कार्यरत हैं। मंत्रालय ने संगठित और असंगठित क्षेत्र पर यह सर्वे किया है।  रिपोर्ट बताती है कि घरों से छोटी-मोटी गतिविधियों से कमाई की प्रवृत्ति बढ़ी है। प्रदेश में कुल 36.46 लाख प्रतिष्ठान काम कर रहे हैं। इनमें से 23.63 लाख प्रतिष्ठानों पर एक या उससे अधिक कर्मी लगे हुए हैं। खुदरा व्यापार और सेवा क्षेत्र   खुदरा व्यापार में इस समय 3.64 लाख इकाइयां कार्यरत हैं। इनमें से 91835 इकाइयों पर एक या उससे अधिक कर्मी हैं। आवास और खाद्य सेवा गतिविधियों में कुल 56,448 प्रतिष्ठान शामिल हैं। इनमें से 20,821 प्रतिष्ठानों पर एक से अधिक कर्मी काम कर रहे हैं। शहरों में अधिकतर लोग पेइंग गेस्ट चला रहे हैं। किराए पर मकान देकर और टिफिन सर्विस से भी लोग आय अर्जित कर रहे हैं। पिछले कुछ  समय से इनका चलन बढ़ा है। यह काम भी असंगठित क्षेत्र का प्रमुख हिस्सा बनता जा रहा है। पशुपालन और शिक्षा क्षेत्र प्रदेश में पशुपालन क्षेत्र में 2.61 लाख प्रतिष्ठान हैं। इनमें से 49,187 प्रतिष्ठान एक या उससे अधिक कर्मियों के साथ चल रहे हैं। पिछले कुछ समय से प्रदेश में डेयरी का चलन भी बढ़ा है। काफी संख्या में किसान परिवार कृषि के साथ ही डेयरी भी चला रहे हैं। शिक्षा के क्षेत्र में कुल 44,325 संस्थान इस समय चल रहे हैं। इनमें से 36,763 प्रतिष्ठानों पर एक से अधिक कर्मी हैं। शिक्षा में बढ़ती प्रतियोगिता के कारण कोचिंग संस्थानों की संख्या पहले से बढ़ रही है। निर्माण और अन्य सेवाएं निर्माण कार्य में कुल 31,654 प्रतिष्ठान चल रहे हैं। इनमें से 8849 संस्थान अन्य लोगों के लिए भी रोजगार का साधन बन रहे हैं। मछली पालन के कुल 291 प्रतिष्ठान हैं। इनमें से 74 प्रतिष्ठान एक और अधिक कर्मियों से चल रहे हैं। बिजली, गैस और एयर कंडीशनिंग की आपूर्ति में लगे प्रतिष्ठानों की कुल संख्या 1350 है। इनमें 1277 प्रतिष्ठानों पर एक से ज्यादा कर्मी काम कर रहे हैं। पानी की आपूर्ति, सीवरेज और कचरा प्रबंधन में 16,097 प्रतिष्ठान शामिल हैं। इनमें से 6409 संस्थान और लोगों को भी रोजगार दे रहे हैं। मोटर वाहनों व मोटरसाइकिलों की मरम्मत के काम में कुल 47,167 प्रतिष्ठान हैं। इनमें से 21,146 प्रतिष्ठानों में एक या ज्यादा कर्मी काम कर रहे हैं। कला, मनोरंजन और खेल में भी कुल 10,013 संस्थान कार्यरत हैं।