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नारायणपुर में खरीफ सीजन की तैयारियां तेज, 47% खाद और 87% प्रमाणित बीजों का भंडारण पूरा

​नारायणपुर में खरीफ की तैयारियां तेज: 47% खाद और 87% प्रमाणित बीजों का भंडारण पूरा, वितरण में आई तेजी ​रायपुर     खरीफ सीजन 2026 को सफल बनाने और किसानों की समृद्धि सुनिश्चित करने के लिए कृषि विभाग नारायणपुर द्वारा युद्ध स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं। जिले में किसानों को समय पर खाद और उन्नत बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए भंडारण और वितरण के कार्य में तेजी आई है, ताकि मानसूनी बुवाई के दौरान अन्नदाताओं को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।       ​कृषि विभाग द्वारा जारी ताजा प्रगति रिपोर्ट के अनुसार, जिले में खाद और बीज की उपलब्धता तथा वितरण की स्थिति काफी मजबूत है। जिले में लक्ष्य के मुकाबले अब तक आधे से अधिक खाद-बीज का वितरण पूरा किया जा चुका है।     जिले के खेतों को समृद्ध करने के लिए इस साल कुल 4,645 मीट्रिक टन रासायनिक उर्वरक वितरण का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है। इस लक्ष्य के मुकाबले विभाग अब तक 2,187.80 मीट्रिक टन खाद का सुरक्षित भंडारण कर चुका है, जो कि कुल लक्ष्य का लगभग 47 प्रतिशत है। राहत की बात यह है कि भंडारित की गई इस खाद में से 1,511.35 मीट्रिक टन यानी उपलब्ध खाद का 69 प्रतिशत किसानों के हाथों तक पहुंच चुका है, जिससे खेतों में शुरुआती पोषण की कमी नहीं होगी।       दूसरी ओर, खेतों में बेहतर अंकुरण और बंपर पैदावार के लिए प्रमाणित बीजों का वितरण भी बेहद संतोषजनक है। जिले को इस सीजन के लिए 2,303 क्विंटल बीज वितरण का लक्ष्य मिला था, जिसके जवाब में विभाग ने रिकॉर्ड तेजी दिखाते हुए 2,011.80 क्विंटल बीजों का भंडारण कर लिया है। यह कुल लक्ष्य का शानदार 87 प्रतिशत है। इस उपलब्ध बीज में से 1,355.96 क्विंटल लगभग 67 प्रतिशत बीज किसानों को वितरित किए जा चुके हैं, और किसान अब अपने खेतों में बुवाई की तैयारियों को अंतिम रूप दे रहे हैं। ​कालाबाजारी पर रोक और पारदर्शी वितरण प्राथमिकता         जिले की कृषि विभाग की उपसंचालक ने बताया कि इस बार रणनीति एडवांस प्लानिंग के तहत तैयार की गई है। उन्होंने कहा कि हमारा मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ऐन बुवाई के वक्त किसी भी किसान को कतारों में न लगना पड़े और न ही सामग्री की कमी हो। खाद और उन्नत बीजों का भंडारण व उठाव समानांतर रूप से जारी है ताकि अंदरूनी क्षेत्रों के अंतिम किसान तक इसकी समय पर पहुंच हो सके। ​कृषि विभाग ने राज्य के किसानों से अपील की है कि वे किसी भी तरह के भ्रम या बिचौलियों के झांसे में न आएं।       ​किसान केवल प्राधिकृत (अधिकृत) विक्रेताओं और शासकीय सहकारी समितियों से ही खाद-बीज की खरीदी करें।​खरीदी के समय पावती/बिल अवश्य लें। किसी भी प्रकार की किल्लत, गुणवत्ता में कमी या अधिक दाम वसूलने की शिकायत पर तत्काल अपने नजदीकी ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी (RAEO) या जिला कृषि कार्यालय से संपर्क करें। ​

सेफ दिल्ली ऐप: वॉयस कमांड से सेकंडों में मिलेगा SOS अलर्ट, सीधे पुलिस कंट्रोल रूम से जुड़ेंगे नागरिक

नई दिल्ली  राजधानी में महिलाओं, बुजुर्गों, और छात्रों की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए दिल्ली सरकार जल्द ही 'सेफ दिल्ली ऐप' लॉन्च करने जा रही है। दावा है कि यह मोबाइल ऐप किसी भी आपात स्थिति में एक सेकंड से भी कम समय में पुलिस कंट्रोल रूम तक अलर्ट भेज सकेगा। इसके जरिए न केवल लोकेशन, बल्कि घटनास्थल का लाइव ऑडियो, विडियो और GPS भी पुलिस को तुरंत उपलब्ध होगा। रेखा सरकार के सेफ दिल्ली ऐप की सबसे बड़ी खासियत यह है कि खतरा महसूस होने पर पीड़ित को फोन चलाने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी। मोबाइल ऐप में पहले से दर्ज किए गए वॉयस कमांड बोलते ही ऐप सक्रिय हो जाएगा और पुलिस कंट्रोल रूम को अलर्ट भेज देगा। इसके साथ ही ऐप में आपात स्थिति में संपर्क करने के लिए पहले से फीड किए गए मोबाइल नंबर पर SMS और वट्सऐप के माध्यम से परिवार या भरोसेमंद लोगों को भी सूचना भेजी। अधिकारियों का कहना है कि यह ऐप खासतौर पर उन महिलाओं के लिए उपयोगी साबित होगा जो देर रात ऑफिस से घर आती है, वो छात्राएं जो सुनसान रास्तों या कॉलेज कैंपस में अकेली होती है और वरिष्ठ नागरिक जो घर में अकेले रहते हैं। बिना समय गंवाए पुलिस से सीधे जुड़ जाएंगे किसी भी आपात स्थिति में वे बिना समय गंवाए पुलिस से सीधे जुड़ सकेंगे। आपात स्थिति में सीधे पुलिस कंट्रोल रूम को अलर्ट भेज सकेंगे। सरकार का दावा है कि दिल्ली में स्ट्रीट क्राइम, महिलाओं के साथ छेड़छाड़, स्टॉकिंग, लूटपाट, चेन स्नैचिंग, सुनसान इलाकों में होने वाली वारदातों और बुजुर्गों के साथ अपराधों पर अंकुश लगाने वाला यह ऐप देश में अपनी तरह का पहला SOS अलर्ट एक सकड से भी कम समय में पुलिस तक पहुंचेगा। अधिकारियों ने क्या कहा अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली पुलिस के सेंट्रल जिले में सेफ दिल्ली ऐप का एक सफल पायलट प्रोजेक्ट पूरा हो चुका है। सरकार को इसकी रिपोर्ट भेजी जा चुकी है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि लाइव विडियो और ऑडियो मिलने से कंट्रोल रूम को घटनास्थल की वास्तविक तस्वीर तुरंत मिल जाएगी। फुटेज होने से अपराधियों की पहचान करने में मदद मिलेगी। सूत्रों के मुताबिक सरकार ने सेफ दिल्ली ऐप को मंजूरी देने के लिए कैबिनेट प्रस्ताव तैयार कर लिया है। सबकुछ ठीक रहा तो बहुत जल्द इसे कैबिनेट से लॉन्च भी कर दिया जाएगा

फालसे का ठंडा शरबत: गर्मी में लू से राहत देने वाली आसान और नेचुरल रेसिपी

गर्मी में पारा चढ़ते ही शरीर को हाइड्रेटेड और एक्टिव रखने के लिए हम अक्सर फ्रिज में रखे ठंडे ड्रिंक्स, लस्सी या छाछ की तरफ भागते हैं. लेकिन रोज वही छाछ और नींबू पानी पीकर मन भर जाता है. अगर आप इस चिलचिलाती गर्मी में कोई ऐसा ड्रिंक ढूंढ रहे हैं जो पूरी तरह नेचुरल हो और जिसका स्वाद बेहद चटपटा और लाजवाब हो तो आपको मशहूर शेफ कुणाल कपूर की रेसिपी से घर पर फालसे का शरबत जरूर बनाना चाहिए. छोटे-छोटे जामुनी बेर जैसे दिखने वाले फालसे गर्मियों के मौसम का एक बेहतरीन सुपरफूड हैं. जब इन्हें काले नमक, भुने जीरे और पुदीने के साथ मिलाकर ठंडे-ठंडे शरबत का रूप दिया जाता है तो यह न सिर्फ आपके गले को तर करता है, बल्कि लू और पेट की गर्मी से भी तुरंत राहत दिलाता है. आइए जानते हैं इसे बनाने की एकदम आसान विधि. फालसा शरबत बनाने की साम्रगी ताजा फालसा: 500 ग्राम चीनी या मिश्री: 100 ग्राम (आप स्वादानुसार कम या ज्यादा भी कर सकते हैं) काला नमक और सफेद नमक भुना हुआ जीरा पाउडर: आधा छोटा चम्मच पुदीने की पत्तियां: 5-6 (सजावट और खुशबू के लिए) ठंडा पानी और बर्फ के टुकड़े बनाने का तरीका सबसे पहले फालसा को अच्छी तरह धोकर साफ कर लें. एक बाउल या परात में फालसा लें और उसमें चीनी और दोनों नमक डालकर उन्हें हाथों से मसलें (मिक्सर का प्रयोग न करें, क्योंकि इससे बीज पिस सकते हैं जो स्वाद कड़वा कर देते हैं). अब इसे एक छलनी में डालकर मसलें. बीच-बीच में ठंडा पानी मिलाते रहें और तब तक उसे मसलते रहें जब तक कि फालसे का सारा गूदा रस के रूप में निकल आ जाए. अच्छी तरह मिक्स करें. जब पूरा रस निकल आए तो गिलास में बर्फ के टुकड़े डालें, ऊपर से शरबत डालें और पुदीने की पत्तियों से सजाकर ठंडा-ठंडा सर्व करें. फालसा शरबत के फायदे विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर फालसा शरीर को अंदर से ठंडा रखने और लू से बचाने का एक प्राकृतिक तरीका है. उत्तर भारत में इसका शरबत बनाकर पीने का खूब चलन है. जाने-माने सेलिब्रिटी शेफ कुणाल कपूर ने कुछ समय पहले अपने यूट्यूब चैनल पर इसकी आसान रेसिपी बताई थी जिसे हम आपके साथ शेयर कर रहे हैं.

घने पौधे बालकनी और बगीचे में बन सकते हैं सांप-बिच्छू के छिपने की जगह, सावधानी जरूरी

अक्सर हम अपने घर या अपार्टमेंट की बालकनी और बगीचे को हरा-भरा बनाने के लिए कई तरह के पौधे लगा लेते हैं.लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुछ पौधे अनजाने में सरीसृपों और कीटों के लिए छिपने की बेहतरीन जगह बन सकते हैं? टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, घनी झाड़ियाँ और कुछ विशेष प्रकार के पौधे सांप और बिच्छुओं को आकर्षित कर सकते हैं. यहां उन प्रमुख पौधों की सूची दी गई है, जिन्हें घर के आसपास लगाने में सावधानी बरतनी चाहिए: 1. चमेली (Jasmine) क्यों खतरनाक: यह तेजी से बढ़ती है और इसकी घनी लताओं के नीचे नमी और सूखी पत्तियां जमा हो जाती हैं, जो कीड़ों और छोटे छिपकलियों के लिए छिपने की जगह बनती हैं.इन्हें खाने वाले जीव और उनके पीछे-पीछे सांप यहाँ आ सकते हैं. वास्तु और दिशा: चमेली का पौधा सकारात्मक ऊर्जा देता है, लेकिन इसे घर के मुख्य द्वार या खिड़कियों के ठीक बगल में बहुत घना न होने दें.वास्तु के अनुसार, इसे उत्तर या पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है, बशर्ते इसकी नियमित कटाई-छंटाई की जाए. 2. केला (Banana Plant) क्यों खतरनाक: केले के चौड़े पत्ते जमीन पर गिरकर नमी बनाए रखते हैं.यह नमी बिच्छुओं और छोटे रेंगने वाले जीवों को आकर्षित करती है.घनी पत्तियों के नीचे सांपों को आसान आश्रय मिल जाता है. वास्तु और दिशा: वास्तु शास्त्र में केले के पौधे का बहुत महत्व है, इसे उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) में लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है.बस ध्यान रखें कि इसके पास कचरा जमा न हो और जमीन हमेशा साफ रहे. 3. जुनिपर झाड़ियाँ (Juniper Shrubs) क्यों खतरनाक: ये झाड़ियाँ जमीन के काफी करीब फैलती हैं, जिससे इनके नीचे एक अंधेरा और सुरक्षित कोना बन जाता है.यहाँ बिच्छू छिप सकते हैं और रात में सांप इन रास्तों का उपयोग सुरक्षित गलियारे के रूप में कर सकते हैं. वास्तु और दिशा: इसे घर के मुख्य रास्तों या प्रवेश द्वार पर न लगाएं.इसे पश्चिम या दक्षिण दिशा में खुले स्थान पर लगाना बेहतर है, जहाँ आप आसानी से देख सकें कि इसके नीचे कोई हलचल तो नहीं है. 4. ग्राउंडकवर और सजावटी बेलें (Groundcovers/Ivy) क्यों खतरनाक: ये पौधे जमीन को पूरी तरह ढक लेते हैं.इनके नीचे क्या हो रहा है, यह देख पाना मुश्किल होता है, जो इन्हें बिच्छुओं और सांपों के लिए सुरक्षित अड्डा बनाता है. वास्तु और दिशा: इन्हें घर की बाहरी सीमा (Boundary Wall) के पास लगाने से बचें.यदि लगाना ही हो, तो दक्षिण-पश्चिम दिशा में सीमित मात्रा में लगाएं, लेकिन ध्यान रखें कि ये दीवारों पर न चढ़ें. वास्तु और सुरक्षा के उपाय सांप और बिच्छुओं से बचने के लिए केवल पौधों को हटाना ही काफी नहीं है, बल्कि कुछ वास्तु और सुरक्षा नियमों का पालन भी जरूरी है: नियमित सफाई: पौधों के नीचे सूखी पत्तियों, कचरे या निर्माण सामग्री को बिल्कुल भी जमा न होने दें. कटाई-छंटाई (Pruning): पौधों को इतना न बढ़ने दें कि वे दीवारों या जमीन को पूरी तरह ढक लें.हवा और रोशनी का आवागमन बना रहना चाहिए. रोशनी की व्यवस्था: बगीचे या बालकनी के उन कोनों में लाइट जरूर लगाएं जहाँ अंधेरा रहता है.सांप और बिच्छू अंधेरी और ठंडी जगह पसंद करते हैं. पानी का निकास: गमलों के आसपास पानी का जमाव न होने दें, क्योंकि नमी कीटों को आकर्षित करती है. वास्तु टिप्स: घर के मुख्य द्वार के पास बहुत घने और कांटेदार पौधे लगाने से बचें.ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) को हमेशा साफ-सुथरा रखें.घर की परिधि (Boundary) के पास अधिक घनी झाड़ियाँ लगाने के बजाय खुले स्थान रखें.

यूपी में बिजली दरों को लेकर फैसला टलता रहा, अब नियामक आयोग की तैयारियां अंतिम चरण में

लखनऊ  बिजली बिलों की नई दरों को लागू करने को लेकर पिछले कई दिनों से चल रही उठक-बैठक अब खत्म होने वाली है। जल्द ही नियामक आयोग नई दरों को लेकर ऐलान कर सकता है। माना जा रहा है कि इस बार नई नदरों में बिजली उपभोक्ताओं को राहत मिल सकती है।कभी भी नई दरों का ऐलान हो सकता है। बिजली की नई दरों के ऐलान की उलटी गिनती अब शुरू हो गई है। सूत्रों के मुताबिक नियामक आयोग की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। इस बार लगातार सातवें साल बिजली की दरों में बढ़ोतरी की उम्मीद बेहद कम है। अगर ऐसा हुआ तो यह नया रिकॉर्ड होगा। बिजली की नई दरों पर सभी बिजली कंपनियों के प्रस्ताव पर नियामक आयोग ने मार्च और अप्रैल में सुनवाई की प्रक्रिया पूरी की थी। इसके बाद राज्य सलाहकार समिति की बैठक भी हो चुकी है। नियम के मुताबिक नियामक आयोग को पांच जून के पहले ही दरें घोषित कर देनी चाहिए थीं। हालांकि, अब देर से ही सही, जल्द ही ये जारी हो सकती हैं। 16,448 करोड़ रुपये के अंतर को माना आधार पावर कॉरपोरेशन और बिजली वितरण कंपनियों ने वर्ष 2024-25 के ट्रू-अप में लगभग 3,995 करोड़ रुपये और वर्ष 2026-27 के लिए लगभग 12,453 करोड़ रुपये के राजस्व का अंतर बताया है। उन्होंने लगभग 16,448 करोड़ रुपये के अंतर को आधार बनाकर बिजली दरों में इजाफे की मांग की है। इसके अलावा स्मार्ट प्रीपेड मीटरिंग योजना के तहत लगभग 3,838 करोड़ रुपये के खर्च को उपभोक्ता बिलों में शामिल करने का भी प्रस्ताव पावर कॉरपोरेशन ने दिया है। बिजली दरों में सुनवाई के दौरान उपभोक्ता परिषद ने स्मार्ट मीटर के दाम उपभोक्ताओं पर डाले जाने को भी गलत बताते हुए इसे नियम विरुद्ध बताया है। नोएडा पावर कंपनी के उपभोक्ताओं को मिल रही 10 प्रतिशत रियायत बरकरार रहे इसके लिए भी पैरवी की गई है। केवल दरें ही नहीं और भी फैसले आएंगे टैरिफ आदेश में केवल बिजली दरें ही नहीं तय होंगी बल्कि और भी फैसले आएंगे। इनमें बहुमंजिला इमारतों में रहने वाले उपभोक्ताओं को साझा क्षेत्र में बिजली खर्च का ब्योरा मिलने, घरों में छोटी दुकान करने वाले उपभोक्ताओं को घरेलू कनेक्शन ही इस्तेमाल करने की छूट और स्मार्ट मीटर के दाम उपभोक्ताओं से न लिए जाने समेत अन्य मसले शामिल हैं। बिजली बिल में पुराना बकाया नहीं जोड़ सकेगा पावर कॉरपोरेशन पावर कॉरपोरेशन अब पुराने बकाया भुगतान की रकम बिजली बिलों में नहीं वसूल सकेगा। जून में हो रही 10 प्रतिशत अतिरिक्त वसूली मामले में नियामक आयोग ने अपने फैसले में यह स्पष्ट कर दिया है। आयोग ने कहा है कि नियम पुराना बकाया जोड़ने की इजाजत नहीं देते हैं। बीते साल अप्रैल से हर महीने उपभोक्ताओं के बिजली बिल में ईंधन अधिभार के एवज में अतिरिक्त शुल्क लगता रहा है। बीते 14 महीने में पावर कॉरपोरेशन ने इस तरह से करीब 2800 करोड़ रुपये की वसूली की। इस बीच 600 करोड़ रुपये उपभोक्ताओं के अलग-अलग महीनों में कम भी किए गए। इस साल जून में जब अधिकतम ईंधन अधिभार शुल्क के तौर पर 10 प्रतिशत लिए जाने लगे तो इसी गणना को लेकर सवाल उठने लगे। हर महीने बिल में जोड़ा जा रहा था अधिभार शुल्क मामला नियामक आयोग पहुंचा तो पावर कॉरपोरेशन ने जवाब दिया कि उसने बकाया भुगतान की रकम को भी जोड़कर अधिभार शुल्क लगाया है। साथ ही यह भी कहा कि ऐसा पहली बार नहीं बल्कि हर महीने किया गया है। नियामक आयोग ने अपने फैसले में बकाया भुगतान की रकम को ईंधन अधिभार शुल्क में जोड़ना गलत बता दिया। ऐसे में अब सभी 14 महीनों में हुई वसूली की समीक्षा होगी, जिसके बाद अतिरिक्त वसूली गई रकम पर फैसला होगा। वहीं, आयोग ने अब पहली बार यह भी साफ कर दिया है कि इस तरह की रकम पर फैसला सालाना तौर पर बिजली दरें तय करते वक्त लिया जाएगा। आयोग के इस फैसले तक बकाया भुगतान की रकम के समायोजन तक स्थिति स्पष्ट नहीं थी। आयोग ने आदेश में कहा है कि केवल तय महीने में वास्तिवक ईंधन, ऊर्जा खरीद और ट्रांसमिशन पर खर्च की रकम के एवज में ही अधिभार शुल्क लगाया जाएगा।

29 जून की ज्येष्ठ पूर्णिमा से मेष, मिथुन, तुला और धनु राशि वालों के लिए शुभ योग बनने के आसार

 इस बार ज्येष्ठ पूर्णिमा 29 जून को मनाई जाएगी और इसी को वट सावित्री पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है. ज्येष्ठ पूर्णिमा का सनातन धर्म और ज्योतिष शास्त्र में विशेष महत्व है. इस दिन चंद्रमा अपने पूर्ण आकार में होता है और ज्येष्ठ मास समाप्त होकर आषाढ़ महीने की शुरुआत होती है. ग्रहों और नक्षत्रों की विशेष स्थिति के कारण इस पूर्णिमा का प्रभाव सभी राशियों पर पड़ता है. कुछ राशियों के लिए यह समय बेहद शुभ और धन-लाभ कराने वाला रहेगा, तो वहीं कुछ राशियों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होगी. आइए जानते हैं कि ज्येष्ठ पूर्णिमा से किन राशियों को लाभ होने जा रहा है और किन्हें नुकसान या चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है. इन राशियों को होगा जबरदस्त लाभ (Lucky Zodiac Signs) मेष राशि (Aries) मेष राशि के जातकों के लिए यह पूर्णिमा आर्थिक रूप से बेहद शुभ रहने वाली है. रुके हुए काम गति पकड़ेंगे.  नौकरीपेशा लोगों को कार्यस्थल पर सराहना मिलेगी. पदोन्नति के योग बन सकते हैं. व्यापार में कोई बड़ी डील फाइनल हो सकती है. समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा. पैतृक संपत्ति से लाभ होने की संभावना है. मिथुन राशि (Gemini) आपकी गोचर कुंडली में धन भाव और भाग्य भाव सक्रिय रहने से आर्थिक स्थिति में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा. नए बिजनेस की शुरुआत के लिए समय उत्तम है. अगर निवेश करने की सोच रहे हैं, तो यह अवधि आपको भविष्य में बड़ा मुनाफा देगी. प्रेम जीवन और वैवाहिक जीवन में मधुरता आएगी. संतान पक्ष से कोई शुभ समाचार मिल सकता है. तुला राशि (Libra) तुला राशि वालों के लिए ज्येष्ठ पूर्णिमा मानसिक शांति और धन-धान्य लेकर आ रही है. आय के नए स्रोत बनेंगे. जो लोग कला, मीडिया, या लेखन के क्षेत्र से जुड़े हैं, उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने के बेहतरीन अवसर मिलेंगे. पुराने कर्जों से मुक्ति मिल सकती है. परिवार के साथ किसी धार्मिक यात्रा पर जाने के योग हैं. धनु राशि (Sagittarius) आपकी राशि के लिए यह समय भाग्योदय जैसा रहेगा. अटके हुए सरकारी काम पूरे होंगे. नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं को अच्छी खबर मिल सकती है. अधिकारियों का पूरा सहयोग मिलेगा. स्वास्थ्य में सुधार होगा. कोर्ट-कचहरी के मामलों में फैसला आपके पक्ष में आने की उम्मीद है. इन राशियों को रहना होगा सावधान (Cautious Zodiac Signs) 1. वृषभ राशि (Taurus) नुकसान: आर्थिक मामलों में थोड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है. खर्चों में अचानक बढ़ोतरी होने से बजट बिगड़ सकता है. सलाह- इस समय किसी को भी बड़ा कर्ज या उधार देने से बचें, पैसा फंस सकता है. वाणी पर नियंत्रण रखें, अन्यथा अपनों से विवाद हो सकता है. 2. कन्या राशि (Virgo) नुकसान: कार्यस्थल पर काम का दबाव बढ़ने से मानसिक तनाव और थकान का अनुभव हो सकता है. विरोधी आपके काम में बाधा डालने की कोशिश कर सकते हैं. सलाह- सेहत को लेकर बिल्कुल लापरवाही न बरतें. कोई भी बड़ा निवेश करने से पहले अनुभवी लोगों की सलाह जरूर लें. 3. मकर राशि (Capricorn) नुकसान: वैवाहिक जीवन या साझेदारी के बिजनेस में कुछ वैचारिक मतभेद उभर सकते हैं. बिना सोचे-समझे लिया गया फैसला नुकसान करा सकता है. सलाह- वाहन चलाते समय विशेष सावधानी रखें. खुद को शांत रखने के लिए ध्यान या योग का सहारा लें. पूर्णिमा के विशेष उपाय शुभ फलों की प्राप्ति और नकारात्मक प्रभाव को कम करने के लिए इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें. शाम के समय चंद्र देव को दूध और जल का अर्घ्य दें. दान-पुण्य करने से मानसिक शांति और सुख-समृद्धि मिलती है.

मुरैना ट्रिपल मर्डर से सनसनी, पत्नी और मासूम बच्चों की हत्या के बाद आरोपी पति ने की आत्महत्या

मुरैना   मध्य प्रदेश के मुरैना में पति-पत्नी के बीच हुए आपसी झगड़े में पति इतना आक्रोशित हो गया कि उसने अपने दो मासूम बच्चों व पत्नी को कुल्हाड़ी से काट दिया और खुद भी ट्रेन से जाकर कट गया। यह घटना माता बसैया थाना क्षेत्र के किशनपुर गांव में घटित हुई। इस हत्याकांड का पता शनिवार की सुबह पड़ोसियों को लगा तो पुलिस को सूचना दी पुलिस मौके पर पहुंचकर छानबीन कर रही है। पत्नी से चल रहा था विवाद, मायके से दो दिन पहले ही लाया था जानकारी के मुताबिक किशनपुर गांव निवासी बलराम पुत्र हरिचरण कुशवाह का अपनी पत्नी रविता उम्र 30 साल से विवाद चल रहा था। जिसकी वजह से वह कुछ दिन से अपने मायके कुतवार गांव में रह रही थी। दो दिन पहले ही बलराम व अन्य लोग पंचायत के बाद उसे किशनपुर गांव लाये थे। शुक्रवार की रात बलराम और रविता में फिर विवाद हो गया। जिससे आक्रोशित बलराम ने रविता और अपने बच्चों आरव उम्र 10 साल व अतुल उम्र 7 साल पर कुल्हाड़ी से ताबड़तोड़ प्रहार कर मौत के घाट उतार दिया। इसके बाद खुद घर से भाग गया। सुबह जब बलराम के घर के दरवाजे नही खुले तो पड़ोसियों ने देखा तो घर के आंगन में मां और दो बच्चों के रक्तरंजित शव पड़े थे। जिस पर पुलिस को सूचना दी गई। उधर, शनिवार की सुबह पता चला कि शिकारपुर फाटक के पास जाकर बलराम ने भी ट्रेन के सामने जाकर खुदकुशी कर ली। पुलिस अभी मोके पर पड़ताल कर रही है। चरित्र शंका ने उजाड़ा परिवार बताया जा रहा है कि मृतक बलराम अपनी पत्नी रविता के चरित्र पर शक करने लगा था। कुछ दिन पहले किशनपुर में आयोजित भागवत कार्यक्रम के दौरान रविता ने मंच पर डांस किया था। कार्यक्रम में मौजूद किसी करीबी व्यक्ति ने उसका वीडियो बनाकर बलराम को भेज दिया। वीडियो देखने के बाद बलराम के मन में पत्नी को लेकर संदेह गहराने लगा और वह आए दिन उससे विवाद करने लगा।विवाद बढ़ने पर रविता कुछ समय के लिए अपने मायके भी चली गई थी, लेकिन इसके बावजूद बलराम की नाराजगी और नफरत कम नहीं हुई। बताया जाता है कि उसने डांस का वीडियो अपने करीबी रिश्तेदारों को भी भेजा और पत्नी के बारे में आपत्तिजनक व भला-बुरा लिखकर मैसेज भी भेजे। वारदात से जुड़े अहम घटनाक्रम     बचाव के लिए कड़ा संघर्ष- घटनास्थल के हालात देखकर साफ है कि मृतका रविता ने खुद को और बच्चों को बचाने के लिए कड़ा संघर्ष किया था। उसका शव खटिया से करीब 20 फीट दूर मिला।     मौके से कुल्हाड़ी बरामद- पुलिस को छानबीन के दौरान वारदात में इस्तेमाल की गई खून से सनी कुल्हाड़ी घर के भीतर से ही मिल गई है।     घर के बाहर सो रही थी मां- दिल दहला देने वाली बात यह है कि मृतक बलराम की मां रामकली रातभर घर के बाहर ही सो रही थी, लेकिन उसे भीतर चल रहे इस कत्लेआम की भनक तक नहीं लगी।     दूधवाले के आने पर खुला राज- शनिवार सुबह जब दूधवाला आया और घर के भीतर हलचल नहीं हुई, तब जाकर इस खौफनाक हत्याकांड का खुलासा हुआ।  

किशनगंज-पूर्णिया में भारी बारिश की चेतावनी, उत्तर बिहार में गरज-चमक की संभावना

पटना  बिहार में मौसम का रंग बदलने लगा है। अधिकतम और न्यूनतम तापमान में कमी से हीट वेव से निजात मिली है। कई जिलों में बादलों की आवाजाही से मौसम पहले से बेहतर हुआ है। राज्य के 23 शहरों के अधिकतम तापमान में शुक्रवार को आंशिक कमी दर्ज की गई। मौसम विभाग ने शनिवार को किशनगंज और पूर्णिया में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। वहीं, अररिया, कटिहार, मधेपुरा, सहरसा और सुपौल में मेघ-गर्जन और वज्रपात का अलर्ट जारी किया है। कुल मिलाकर सात जिलों में बारिश और वज्रपात की संभावना है। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार दक्षिण मध्य बिहार में भी एक दो जगहों पर आंधी -पानी की संभावना है। मौसम विभाग की ओर से 28 और 29 जून को राज्य में कई जगहों पर तेज बारिश का पूर्वानुमान किया गया है। मौसमविदों के अनुसार मानसून ट्रफ अभी राज्य में मोतिहारी से होकर गुजर रहा है। उत्तर बिहार में पुरवा तो दक्षिण बिहार में कई जगहों पर पछुआ का प्रभाव है। पटना में पुरवा और पछुआ के मिलन की स्थिति बनी हुई है। इस वजह से धूप और नमी के मिश्रण से गरज तड़क वाले बादल बन रहे हैं। मानसूनी बारिश के लिए अभी करना होगा इंतजार मुजफ्फरपुर जिले में मानसून की बारिश के लिए अभी और इंतजार करना पड़ सकता है। मौसम विभाग ने शुक्रवार को जारी पूर्वानुमान में इसकी जानकारी दी है। इसके अनुसार अगले चार दिनों में बारिश की संभावना काफी कम है। दक्षिण-पश्चिम मानसून के कमजोर पड़ने से यह स्थिति बन रही है। हालांकि, इस दौरान जिले में तीन दिनों तक खंड बारिश की संभावना जताई गई है। वहीं, शुक्रवार को अधिकतम के साथ ही न्यूनतम तापमान में गिरावट आई। लेकिन, पुरवा हवा के कारण उमस की अधिकता से लोग बेचैन रहे। पूसा स्थित ग्रामीण मौसम विज्ञान केंद्र के नोडल अधिकारी डॉ. ए. सत्तार ने बताया कि पहले से ही बंगाल की खाड़ी से आनेवाला मानसूनी ट्रफ जिले में प्रवेश के साथ कमजोर पड़ा है। उसके बाद अब दक्षिण-पश्चिम मानसून भी पूर्वी यूपी में आने के बाद कमजोर हो गया है। इससे बारिश की संभावना कम हो गई है। फिलहाल 30 जून तक बारिश होने की संभावना महज 20 से 25 फीसदी है। यह बारिश भी जिले के एकाध स्थानों पर हो सकती है। लेकिन इस बीच जिले में गरज चमक के बीच 50 किमी तक की तेज पुरवा हवा चल सकती है। दो जुलाई के बाद बंगाल की खाड़ी में मानसूनी गतिविधियों के जोर पकड़ने की संभावना है। नमी बढ़ने से परेशानी इधर, पिछले 24 घंटे में अधिकतम तापमान एक डिग्री कम होकर 36.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। यह सामान्य से 2.3 डिग्री कम रहा। वहीं, न्यूनतम तापमान में 2.2 डिग्री की कमी आई। यह सामान्य से 2 डिग्री नीचे 24.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। औसत नमी 70% रही। साथ ही 8 किमी की गति से पुरवा हवा चली।

नीम करोली बाबा और उनका कंबल: आस्था, वैराग्य और आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक

 भारत एक ऐसा देश है जहां लोग आस्था, संस्कृति, धर्म और रहस्यमयी शक्तियों पर गहरा विश्वास रखते हैं. यहां के संत-महात्माओं में एक बहुत प्रसिद्ध नाम है नीम करोली बाबा, जिन्हें उनके भक्त प्यार से महाराज जी कहते हैं. उनकी ख्याति सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रही, बल्कि विदेशों तक पहुंची. मशहूर बिजनेसमैन स्टीव जॉब्स और अमेरिकी आध्यात्मिक गुरु राम दास भी उनसे प्रभावित थे. नीम करोली बाबा की एक खास पहचान उनकी सादी ऊनी चादर थी. कहा जाता है कि वे हर मौसम में, चाहे कड़ाके की ठंड हो या तेज गर्मी, हमेशा उसी चादर में रहते थे. यह बात कई लोगों को हैरान करती थी और वे सोचते थे कि इसके पीछे क्या रहस्य है. नीम करोली बाबा हमेशा कंबल क्यों ओढ़ते थे? हालांकि, इस बात का कोई पुख्ता सबूत तो नहीं है. लेकिन, बाबा के भक्त दादा मुखर्जी कहते हैं कि कि वह कंबल जैसे बाबा का ही एक हिस्सा हो. बाबा जहां भी जाते, वह कंबल हमेशा उनके साथ रहता था. कई बार उस कंबल से नवजात बच्चे जैसी खुशबू आती थी. लोगों का यह भी मानना था कि वह कंबल कभी बहुत हल्का तो कभी भारी महसूस होता था, जैसे उसमें अपनी कोई शक्ति या चेतना हो. उन्होंने कहा कि बाबा के पास दो कंबल थे, एक जो सबको दिखता था, जो उनके शरीर को ढकता था. दूसरा जो दिखाई नहीं देता था, जो उनकी बड़ी आध्यात्मिक शक्ति और उपलब्धियों को छुपाए रखता था. वैराग्य का प्रतीक दादा मुखर्जी ने बताया कि बाबा का कंबल सिर्फ पहनने की चीज नहीं था, बल्कि वह त्याग (वैराग्य) और आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक था. महाराज जी हमेशा वैराग्य की बात करते थे कहा जाता है कि एक बार एक भक्त उनके कंबल को ठीक करने लगा, तो बाबा ने कहा, 'इसे रहने दो, जैसा है वैसा ही रहने दो. किसी को भी किसी चीज से बंधा नहीं होना चाहिए.' भक्तों का मानना है कि यह हिंदू धर्म के एक मुख्य सिद्धांत वैराग्य को दर्शाता है. यह कंबल इस बात का प्रतीक था कि हमारा शरीर अस्थायी है और आत्मा ही सच्ची और हमेशा रहने वाली है. बाबा अपने आराम और बाहरी रूप की परवाह नहीं करते थे, ताकि लोग अंदर की चेतना पर ध्यान दें, न कि शरीर पर. भक्तों की रक्षा के लिए एक और वजह यह मानी जाती है कि बाबा कंबल अपने भक्तों की रक्षा के लिए ओढ़ते थे. कहा जाता है कि वे अपने भक्तों की बीमारी और कर्मों का बोझ खुद पर ले लेते थे. दादा मुखर्जी के अनुसार, 'वह कंबल उन सभी दुखों और पीड़ा को छुपा लेता था, जो बाबा दूसरों से अपने ऊपर ले लेते थे. वह सिर्फ शरीर को नहीं ढकता था, बल्कि उसमें ऐसी आध्यात्मिक शक्ति भी थी, जिससे वे अपने भक्तों का दुख दूर कर सकते थे.' कई लोगों का यह भी मानना है कि बाबा कभी-कभी बीमार लोगों पर वह कंबल रख देते थे, जिससे उन्हें राहत मिलती थी. एक भक्त ने बताया कि एक बहुत ठंडी रात में वह कंबल आसपास के लोगों को गर्माहट और सुकून देता हुआ महसूस हुआ. जीवन में शांति का प्रतीक महाराज जी के कंबल का रंग भी खास माना जाता है. उनका कंबल अक्सर नीले या हल्के रंग का होता था. नीला रंग शांति और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है. इसलिए लोग मानते हैं कि वह कंबल उन्हें अंदर से शांत और संतुलित बनाए रखता था. बाबा कहते थे कि इंसान सिर्फ शरीर नहीं है, बल्कि एक गहरी आध्यात्मिक शक्ति का रूप है. उनका कंबल यह भी दिखाता था कि उन्हें गर्मी-ठंड जैसी शारीरिक चीजों से कोई फर्क नहीं पड़ता था, क्योंकि उनका ध्यान अपने आध्यात्मिक मार्ग पर था. अपनी शक्तियों को छुपाने का माध्यम नीम करोली बाबा बहुत साधारण जीवन जीते थे, लेकिन माना जाता है कि उनके पास कई चमत्कारी शक्तियां (सिद्धियां) थीं, जिनके बारे में वह ज्यादा बात नहीं करते थे. कहा जाता है कि उनका कंबल उन शक्तियों को छुपाने का एक तरीका था, ताकि लोग उन्हें लेकर ज्यादा आकर्षित न हों. दादा मुखर्जी के अनुसार, 'शायद वे ऐसा अपने बचाव के लिए या लोगों की भीड़ से बचने के लिए करते थे.' बाबा का कंबल और आस्था अमेरिकी मनोवैज्ञानिक रिचर्ड एलपर्ट, जो बाद में राम दास बने, ने 1979 में मिरेकल ऑफ लव नाम की किताब लिखी थी. इसमें उन्होंने बाबा के चमत्कारों का जिक्र किया और एक घटना ‘बुलेटप्रूफ कंबल’ के बारे में भी बताया. क्योंकि बाबा हमेशा कंबल ओढ़ते थे, इसलिए आज भी जब लोग कैंची धाम आश्रम जाते हैं, तो फूल-माला की जगह कंबल चढ़ाते हैं. आज भी क्यों खास है यह कंबल? 1973 में बाबा के निधन के कई साल बाद भी उनकी कंबल ओढ़े तस्वीरें आज भी लोगों को प्रेरित करती हैं. इन तस्वीरों में वे मुस्कुराते हुए नजर आते हैं. कुछ लोगों के लिए यह कंबल प्यार और सुरक्षा का प्रतीक है, तो कुछ के लिए यह सादगी, त्याग और आत्मिक शांति का संदेश देता है. हालांकि, इतिहास में इसका कोई पक्का कारण नहीं मिलता कि बाबा हर मौसम में कंबल क्यों पहनते थे, लेकिन भक्त मानते हैं कि इसका महत्व सिर्फ उपयोग तक सीमित नहीं था. दादा मुखर्जी ने कहा, 'उस कंबल के नीचे बाबा दुनिया का सारा दुख अपने ऊपर ले लेते थे. यह हमें कर्म और दुखों से बचाने का उनका तरीका था. यह कंबल हमें याद दिलाता है कि जो कुछ हम बाहर ढूंढते हैं, वह सब हमारे अंदर ही है. असली महत्व बाहरी चीजों का नहीं, बल्कि अंदर की यात्रा का है.'

​मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप अंतिम छोर के व्यक्ति तक पहुँच रही योजनाएँ

​सुशासन की नई मिसाल: सारंगढ़-बिलाईगढ़ में 'सुशासन तिहार' बना लाचारों का मजबूत सहारा ​मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप अंतिम छोर के व्यक्ति तक पहुँच रही योजनाएँ शिविरों के माध्यम से समाज कल्याण विभाग ने 169 को दिए सहायक उपकरण, 248 को दी नई पेंशन की सौगात रायपुर        राज्य शासन की मंशानुसार जब प्रशासनिक तंत्र संवेदनशीलता के साथ जनता के द्वार पर पहुँचता है, तो सुशासन की परिभाषा ज़मीनी हकीकत में बदल जाती है। कुछ ऐसा ही अभूतपूर्व नज़ारा छत्तीसगढ़ के नवगठित जिले सारंगढ़-बिलाईगढ़ में देखने को मिला। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के विजन और कलेक्टर के कुशल मार्गदर्शन में आयोजित ‘सुशासन तिहार 2026’ ने जिले के सैकड़ों दिव्यांगजनों, वृद्धजनों और निराश्रितों के जीवन में उम्मीद का एक नया सवेरा लाया है।      ​मई से 10 जून तक जिले के दूर-दराज के ग्रामीण अंचलों में सजे विभागों के स्टॉल सिर्फ शिकायतें दर्ज करने के केंद्र नहीं, बल्कि आमजन की समस्याओं के त्वरित और मौके पर समाधान का माध्यम बने। ​ आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम: 169 को मिले सहायक उपकरण   ​शिविरों के दौरान समाज कल्याण विभाग ने सेवा और संवेदनशीलता की अनूठी मिसाल पेश की। विभाग द्वारा आवेदनों की स्क्रूटनी कर अत्यंत कम समय में 169 जरूरतमंद हितग्राहियों को उनकी आवश्यकता के अनुसार सहायक उपकरण वितरित किए गए।​इनमें प्रमुख रूप से ​11 वृद्धजनों को सहारा देने वाली वॉकिंग स्टिक (छड़ी),​04 दिव्यांगजनों को नई व्हीलचेयर,​03 दिव्यांगजनों को गति देने वाली ट्राइसाइकिल,​02 हितग्राहियों को बैशाखी,​01 हितग्राही को दुनिया की आवाज़ सुनने के लिए श्रवण यंत्र (हियरिंग एड)  शामिल हैं।      इन उपकरणों की मदद से अब बुजुर्ग और दिव्यांगजन बिना किसी दूसरे पर निर्भर रहे अपने दैनिक कार्यों को सहजता से पूरा कर पा रहे हैं। उनके चेहरे की मुस्कान शासन के प्रयासों की सफलता को बयां कर रही है। ​ आर्थिक सुरक्षा का कवच: 248 नवीन पेंशनों को तत्काल स्वीकृति       ​सुशासन तिहार का सबसे बड़ा असर सामाजिक सुरक्षा के मोर्चे पर दिखा। शिविरों में आए आवेदनों का ऑन-द-स्पॉट परीक्षण कर 248 पात्र हितग्राहियों के लिए नवीन सामाजिक सुरक्षा पेंशन की स्वीकृति जारी की गई। अब इन वृद्ध, बेसहारा और दिव्यांग नागरिकों को हर महीने नियमित आर्थिक सहायता मिलेगी, जिससे वे सम्मानजनक जीवन जी सकेंगे।      ​सुशासन तिहार 2026 के तहत आयोजित इन विशेष शिविरों में जिला प्रशासन और समाज कल्याण विभाग के आपसी समन्वय से उल्लेखनीय सफलता हासिल हुई है। मई महीने से शुरू होकर 10 जून 2026 तक चले इस अभियान के दौरान ज़मीनी स्तर पर बड़े फैसले लिए गए। इसके तहत जहाँ एक ओर 169 जरूरतमंद हितग्राहियों को उनके जीवन को सुगम बनाने के लिए विभिन्न सहायक उपकरण प्रदान किए गए, वहीं दूसरी ओर 248 पात्र नागरिकों के लिए नवीन सामाजिक सुरक्षा पेंशन को भी तत्काल स्वीकृति दी गई, जिससे अब उन्हें नियमित आर्थिक संबल मिल सकेगा।  "योजनाएं अब कागजों पर नहीं, हमारे हाथों में हैं"     ​प्रशासन की इस त्वरित और मानवीय कार्यप्रणाली से अभिभूत होकर लाभांवित हितग्राहियों ने मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन का सहृदय आभार व्यक्त किया। ग्रामीणों का कहना है कि यह 'सुशासन तिहार' उनके लिए राहत और अटूट विश्वास का केंद्र बनकर उभरा है। साय सरकार का सुशासन केवल दफ्तरों तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के जीवन को सुगम और गरिमामय बनाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रहा है।