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रणवीर सिंह की ‘धुरंधर’ डुओलॉजी ने मचाया धमाल, प्रॉफिट शेयरिंग से कमाए 325 करोड़ रुपये

बॉलीवुड सुपरस्टार रणवीर सिंह ने बॉक्स ऑफिस पर एक ऐसा धमाका किया है, जिसने उन्हें भारतीय सिनेमा के सबसे महंगे सितारों की कतार में सबसे आगे लाकर खड़ा कर दिया है. ब्लॉकबस्टर फिल्म 'धुरंधर' की डुओलॉजी (दो फिल्मों की सीरीज) से रणवीर ने अनुमानित ₹325 करोड़ की रिकॉर्ड तोड़ कमाई की है. खास बात यह है कि रणवीर ने इसके लिए कोई बंधी-बंधाई मोटी फीस नहीं ली थी, बल्कि मेकर्स के साथ मुनाफे में हिस्सेदारी (प्रॉफिट-शेयरिंग) का एक बड़ा सौदा किया था. अब इस स्मार्ट मूव के साथ ही वो अब शाहरुख खान और रजनीकांत जैसे उन चुनिंदा सुपरस्टार्स की लीग में शामिल हो गए हैं, जो अपनी फिल्मों की बंपर कमर्शियल सफलता का सबसे बड़ा फायदा खुद उठाते हैं. तय फीस छोड़ी और खेला बड़ा दांव हिंदुस्तान टाइम्स की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, रणवीर सिंह ने 'धुरंधर' के लिए अपनी एक्टिंग फीस न लेने का एक साहसिक और समझदारी भरा फैसला किया था. इसकी जगह उन्होंने प्रॉफिट-शेयरिंग मॉडल को चुना. इस डील का सबसे बड़ा फायदा यह हुआ कि रणवीर की जेब में सिर्फ बॉक्स ऑफिस कलेक्शन का हिस्सा ही नहीं आया, बल्कि फिल्म के सैटेलाइट राइट्स, डिजिटल (ओटीटी) और म्यूजिक राइट्स की बिक्री से हुई मोटी कमाई का भी एक सीधा और बड़ा हिस्सा उनके खाते में गया. बजट बढ़ा तो खुद लगाए पैसे शुरुआती रिपोर्ट्स बताती हैं कि 'धुरंधर' को पहले एक ही फिल्म के तौर पर प्लान किया गया था, लेकिन बाद में इसे दो भागों में बनाने का फैसला हुआ. जब फिल्म का प्रोडक्शन बजट बढ़ने लगा, तो रणवीर ने पीछे हटने के बजाय प्रोजेक्ट को पूरा सपोर्ट किया और फिल्म में अपने पास से अतिरिक्त पैसे भी लगाए. उनका यह कदम मास्टरस्ट्रोक साबित हुआ, क्योंकि फिल्म में निवेश करने की वजह से मुनाफे में उनका पार्टनरशिप शेयर और ज्यादा बढ़ गया. जब ये दोनों फिल्में सिनेमाघरों में रिलीज हुईं, तो इन्होंने कमाई के सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए और रणवीर की यह रणनीति उनके करियर की सबसे बड़ी लॉटरी साबित हुई. 40 की उम्र में रचा नया इतिहास अगर इंडस्ट्री में चल रही ₹325 करोड़ की यह संख्या पूरी तरह सही है, तो 40 साल के रणवीर सिंह इस समय भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के सबसे ज्यादा कमाई करने वाले एक्टर बन चुके हैं. हालांकि, बड़े स्टार्स के बीच प्रॉफिट-शेयरिंग का यह ट्रेंड अब तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इसमें जोखिम भी उतना ही ज्यादा होता है. अगर फिल्म फ्लॉप हो जाए, तो एक्टर को खाली हाथ भी रहना पड़ सकता है. इसके विपरीत, जब फिल्म 'धुरंधर' जैसी ब्लॉकबस्टर साबित होती है, तो एक्टर की कमाई किसी भी तय फीस के मुकाबले कई गुना ज्यादा ऊपर निकल जाती है. बड़े-बड़े दिग्गजों की लीग में एंट्री रणवीर की इस छप्परफाड़ कमाई ने भारतीय सिनेमा के इतिहास के कुछ सबसे बड़े नामों के साथ उनकी तुलना शुरू कर दी है. इससे पहले रजनीकांत, शाहरुख खान, प्रभास और अल्लू अर्जुन जैसे पैन-इंडिया सुपरस्टार्स ही अपनी ब्लॉकबस्टर फिल्मों के लिए इस तरह के रेवेन्यू-शेयरिंग समझौतों के जरिए इतनी भारी-भरकम रकम कमा चुके हैं. हालांकि, सोशल मीडिया और मीडिया गलियारों में ₹325 करोड़ के इस आंकड़े को लेकर जबरदस्त चर्चा और उत्साह है, लेकिन अभी तक खुद रणवीर सिंह या 'धुरंधर' के मेकर्स की तरफ से इस कमाई पर कोई आधिकारिक मुहर नहीं लगाई गई है.

अलीगढ़ दौरा बीच में छोड़कर लखनऊ रवाना हुए मुख्यमंत्री

अलीगढ़.  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ अग्निकांड की सूचना मिलने पर अपना अलीगढ़ दौरा बीच में ही रद कर दिया। उन्हें लोकार्पण व शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान ही इस हादसे की जानकारी मिली, इसके तत्काल बाद मुख्यमंत्री राजधानी लखनऊ के लिए प्रस्थान कर गए।अलीगढ़ में आयोजित लोकार्पण/शिलान्यास कार्यक्रम में संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने जनसमूह से कहा कि मेरी इच्छा थी कि यहीं रहूं। लेकिन अभी-अभी जानकारी मिली है कि लखनऊ में एक दुर्घटना हुई है और कुछ बच्चे अग्निकांड की चपेट में आए हैं। इसमें कुछ बच्चों की दुखद मौत हो गई है। प्रशासन राहत कार्यों में लगा है। मुझे भी इस दुखद घटना के कारण तत्काल वापस लखनऊ जाना पड़ रहा है। मुख्यमंत्री ने घायलों के उचित इलाज का भी निर्देश दिया।  डीजीपी व एसीएस (गृह) को मौके पर जाने का निर्देश  सीएम ने कहा कि जिन परिवारों ने अपने नौजवानों को खोया है, उनके प्रति गहन संवेदना व्यक्त करता हूं। पुलिस महानिदेशक व अपर मुख्य सचिव (गृह) को निर्देश दिया है कि मौके पर जाकर इसकी रिपोर्ट प्रस्तुत करें। मैं स्वयं भी वहां के लिए प्रस्थान कर रहा हूं। इस मामले की तह में जाकर दोषियों को सजा दिलाई जाएगी। सीएम ने जनहानि पर जताया शोक मुख्यमंत्री ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर भी घटना पर दुख जताया। मुख्यमंत्री ने लिखा कि लखनऊ में अग्नि दुर्घटना में हुई जनहानि अत्यंत दुःखद एवं हृदय विदारक है। मेरी संवेदनाएं शोकाकुल परिजनों के साथ हैं। प्रभु श्रीराम से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्माओं को शांति तथा घायलों को शीघ्र स्वास्थ्य लाभ प्रदान करें। मुख्यमंत्री ने अलीगढ़ में कहा मेरी हार्दिक इच्छा थी कि आज मैं अलीगढ़ में रहूं, लेकिन मुझे दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि अभी अभी मुझे जानकारी मिली है कि लखनऊ में एक अग्निकांड की दुखद घटना हुई है, उसकी चपेट में कुछ बच्चे आये हैं, उनकी दुखद मौत हुई है, इसलिए मुझे तत्काल वापस जाना पड़ रहा है। जिन्होंने जान खोई उनके परिजनों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करता हूं। इस पूरे मामले के लिए पुलिस महानिदेशक व अपर मुख्य सचिव गृह को भी कहा है कि मौके पर जाकर इसकी रिपोर्ट प्रस्तुत करें। मैं स्वयं भी वहां प्रस्थान कर रहा हूँ जिससे इस पूरे मामले की तह में जाकर दोषियों को सज़ा भी दे सकें और उन पीड़ित परिवारों के प्रति अपनी संवेदना भी व्यक्त कर सकें.

अब त्योहारों व मांगलिक कार्यक्रमों में उपहार में चीनी उत्पादों के बजाए दी जाती हैं फिरोजाबाद के ग्लास की मूर्तियां: मुख्यमंत्री

फिरोजाबाद.  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सपा के एजेंडे में विकास नहीं है। समाज को बांटना, सामाजिक एकता को छिन्न-भिन्न करना, गुंडागर्दी-माफियागिरी को प्रोत्साहित करना, गरीब कल्याण के कार्य न होने देना, विकास योजनाओं में रोड़े अटकाना और त्योहारों के पहले उत्सव को उपद्रव में बदल देना ही उसका काम रहा है। यूपी में 2017 के पहले के हालात किसी से छिपे नहीं हैं। लेकिन, जनता के आशीर्वाद से डबल इंजन सरकार आज विकास व विरासत की यात्रा को बढ़ा रही है। यूपी अब अच्छी कानून व्यवस्था तथा विकास परियोजनाओं से पहचाना जा रहा है। मुख्यमंत्री सोमवार को कांच नगरी में 658 करोड़ रुपये से अधिक लागत की 81 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास करने के बाद जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। इनमें टुंडला की 452 करोड़ और शिकोहाबाद की 206 करोड़ रुपये की परियोजनाएं शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने बाबा नीम करोली की जन्मस्थली पर नागरिकों को विकास परियोजनाओं की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि इसके पीछे हमारे विधायकों की मेहनत है। शिकोहाबाद के विधायक भी हमारी तरह काम करते तो यह संख्या बढ़ सकती थी। सपा शासन में सीना तानकर उपद्रव करता था माफिया सीएम ने कहा कि डबल इंजन सरकार ‘एक जिला-एक उत्पाद’, ‘एक जिला-एक कुजीन’, ‘एक जिला-एक मेडिकल कॉलेज’ दे रही है, जबकि सपा ‘एक जिला-एक माफिया’ देती थी। हर जिले का चिह्नित माफिया जमीन पर कब्जा, गुर्गों के जरिए व्यापारियों से वसूली कर अराजकता पैदा करता था। प्रदेश को तबाह करने वाले माफिया सीना तानकर उपद्रव करते थे, लेकिन अब यूपी माफिया, गुंडा, उपद्रव मुक्त है। नो कर्फ्यू-नो दंगा, यूपी में है सब चंगा।  गरीब को तबाह करती थी सपा व कांग्रेस  सीएम ने सपा को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि यह पार्टी रामनवमी का विरोध करती थी। कांवड़ यात्रा व श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के उत्सवों पर रोक लगाती थी। गरीब को आवास, आयुष्मान, एलपीजी सिलेंडर, शौचालय आदि की कोई सुविधा नहीं देती थी। बिजली भी नहीं थी, क्योंकि सपा व कांग्रेस के लोग अंधेरे में रहकर डकैती डालते थे। ये लोग गरीब को तबाह करते थे। लोकल से ग्लोबल बन रही फिरोजाबाद की विकास यात्रा  मुख्यमंत्री ने कहा कि पीएम मोदी के मार्गदर्शन में डबल इंजन सरकार द्वारा किए जा रहे विकास का श्रेय जनता-जनार्दन को है। क्योंकि जब आप ईवीएम का सही बटन दबाकर अच्छे जनप्रतिनिधि चुनते हैं और वे कमल का फूल लेकर लखनऊ पहुंचते हैं तो विकास आता है। इससे फिरोजाबाद की यात्रा लोकल से ग्लोबल बनती है। यहां का ग्लास उद्योग नवाचार का नया केंद्र बना है। इसने चीन को पीछे कर दिया है। पहले होली, दीवाली, विजयदशमी आदि त्योहारों पर चीन के बने उत्पाद ही बाजारों में पहुंचते थे। लेकिन, जब यहां के कारीगरों ने नई तकनीक, डिजाइन व बाजार की मांग के अनुरूप उत्पाद बनाने शुरू किए तो त्योहारों, जन्मदिन व अन्य मांगलिक कार्यक्रमों पर ग्लास की सुंदर मूर्तियां व कलाकृतियां भेंट की जाती हैं। गणपति, राम दरबार, राधा-कृष्ण, भगवान शिव, महात्मा बुद्ध आदि की शानदार प्रतिमाएं देखकर हर कोई अभिभूत होता है। यह प्रतिभा और कला पहले भी थी, लेकिन 2017 से पहले इन्हें प्लेटफॉर्म व प्रोत्साहन नहीं मिलता था। अब स्थानीय उद्यमी व कारीगर इस सुहाग नगरी को नई ऊंचाई दे रहे हैं। डबल इंजन सरकार उन्हें और प्रोत्साहित करेगी। पीएम मोदी जब अन्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष को ओडीओपी का उपहार देते हैं तो इससे उत्तर प्रदेश भी गौरवान्वित होता है। प्रदूषण बोर्ड की छापेमारी रोकी, दी नई तकनीक व सुविधाएं  सीएम ने कहा कि 9 साल पहले विधायक मनीष असीजा मेरे पास आए और अपना आक्रोश प्रकट करते हुए कहा कि प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड ने तबाही मचाई हुई है, यह बंद हो तो उद्यमी-व्यापारी कुछ करें। हमने बोर्ड के छापों को बंद कराया, उद्यमियों को नई तकनीक दी और गैस आपूर्ति सुनिश्चित कराई। अब फिरोजाबाद के उद्यमी बिजली से भी भट्टियों का संचालन कर उसे सोलर पैनल से जोड़कर नई तकनीक के साथ आगे बढ़ चुके हैं। आलू उत्पादक किसानों ने भी फिरोजाबाद को समृद्ध किया है। लोकमाता की प्रतिमा जनपद को दिला रही पहचान मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा जनपद को पहचान दिलाते हुए सनातन धर्मावलंबियों को पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने की प्रेरणा दे रही है। उनका जन्म भले ही महाराष्ट्र में हुआ, वह इंदौर की महारानी रहीं, लेकिन उनका कार्यक्षेत्र पूरा भारत था। जहां सनातन धर्म है, वहां लोकमाता की उपस्थिति है। विदेशी आक्रांताओं ने जिन धर्मस्थलों को नष्ट किया, लोकमाता ने उन सभी का पुनरुद्धार किया। जब उनकी जयंती के 300 वर्ष हुए तो पूरे देश में लोकमाता के त्रिशताब्दी कार्यक्रम को भव्यता से मनाया गया। मैं भी अनेक कार्यक्रमों से जुड़ा। हमारी सरकार ने जगह-जगह उनकी प्रतिमाओं को स्थापित किया। औरैया मेडिकल कॉलेज का नामकरण लोकमाता के नाम पर किया गया। लोकमाता ने अपने कृतित्व के माध्यम से धर्म की स्थापना व पुनरुद्धार के लिए प्रेरणा प्रदान की। हमारे जनप्रतिनिधियों को मिलता रहेगा जनता का आशीर्वाद सीएम ने कहा कि यहां की विकास परियोजनाएं बताती हैं कि विधायकों ने मेहनत की। उनका व्यक्तिगत परिश्रम भी रंग लाया। सीएम ने विधायक प्रेमपाल धनगर व अन्य जनप्रतिनिधियों को विकास में रुचि के लिए बधाई दी। कहा कि अब टुंडला में भी विकास दिखाई दे रहा है। सीएम ने विश्वास जताया कि जनता का आशीर्वाद भाजपा व हमारे जनप्रतिनिधियों को प्राप्त होता रहेगा।  प्रदेशवासियों को दीं असीमित सुविधाएं  सीएम ने प्रदेशवासियों को मिलने वाली सुविधाओं का जिक्र करते हुए कहा कि 15 करोड़ गरीबों को राशन, आय़ुष्मान भारत के तहत 10 करोड़ लोगों को पांच लाख रुपये की निःशुल्क स्वास्थ्य सुविधा, 65 लाख गरीबों को आवास, दो करोड़ गरीबों को रसोई गैस कनेक्शन, लगभग डेढ़ करोड़ परिवारों को बिजली कनेक्शन और 16 लाख किसानों के निजी ट्यूबवेल के बिल माफ कर मुफ्त बिजली दी जा रही है। किसानों को सरकार क्रय केंद्रों व सॉइल हेल्थ कार्ड की सुविधा उपलब्ध कराती है। पीएम मोदी ने शनिवार को किसानों के खाते में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि भेजी, जिसमें यूपी के किसानों के खाते में 4300 करोड़ रुपये से अधिक आए। अब कार्यालयों में नहीं लगाने पड़ते बाबू के चक्कर सीएम ने स्पष्ट कहा कि यह हमारी कार्य संस्कृति है कि अब किसी कार्यालय में बाबू के चक्कर नहीं लगाने … Read more

विदेश भेजने के नाम पर कारोबार! जालंधर में बिना लाइसेंस संचालित हो रहे 4 ऑफिस

जालंधर. विदेश यात्रा कंस्ल्टैंट्स (छोटी बारादरी) का मालिक बिना लाइसैंस के चार-चार ऑफिस चला रहा था और इसका प्रशासन को पता तक नहीं लगा। यह लापरवाही है या फिर अनदेखी लेकिन विदेश यात्रा कंसल्टेंट्स का मालिक पिछले चार सालों से लोगों को ठग रहा था। विदेश यात्रा कंसल्टेंट्स के खिलाफ एंटी फ्रॉड में ही 60 से ज्यादा शिकायतें दर्ज हैं लेकिन अभी तक कोई एफ.आई.आर. दर्ज नहीं हुई। सूत्रों की मानें तो विदेश यात्रा कंसल्टेंट्स ने गढ़ा रोड पर ही नहीं बल्कि सहदेव मार्कीट के पास भी ऑफिस खोल रखा था। इसके अलावा ग्रैंड मॉल में उसके दो दफ्तर हैं जिसमें से 5वीं मंजिल पर बनाया गया ऑफिस तो आलीशान था जबकि एक आफिस तीसरी मंजिल पर था। बताया है कि बी.एम.सी. चौक के पास भी विदेश यात्रा कंसल्टेंट्स के नाम पर दफ्तर चला रहा है। प्रशासन की लापरवाही के चलते विदेश यात्रा कंसल्टेंट्स के मालिक ने सैंकड़ों लोगों के साथ विदेश भेजने के नाम पर फ्रॉड किया। करतारपुर का रहने वाला विदेश यात्रा कंसल्टेंट्स का मालिक उन्हीं पैसों से शहर के पॉर्श इलाके माडल टाऊन में करीब अढ़ाई करोड़ की कोठी बनाई है। इस तथा कथित एजैंट खिलाफ अपराधिक केस दर्ज हैं जिसके बारे भी जल्द खुलासा किया जाएगा। इसकी गाड़ी नंबर 3131 और अदिति नाम की करीबी महिला दोस्त भी काफी चर्चित रह चुकी है। गौरतलब है कि विदेश यात्रा कंसल्टेंट्स नाम से संचालित यह संस्था बिना लाईसेंस के सोशल मीडिया का सहारा लेकर विदेश भेजने का लालच देकर भोले-भाले लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है और फिर उन्हीं लोगों को ठगी का शिकार बना लिया जाता है। वर्क परमिट के लिए ज्यादा पैसे वसूल विदेश यात्रा कंसल्टेंट्स का मालिक इतना शातिर था कि वह अपने क्लाइंट से वीजा लगवाने के लिए ज्यादा पैसे लेकर कम पैसों का एफिडेविट देता था। काम न होने पर अगर क्लाइंट पुलिस को शिकायत भी देता था कि वह क्लाइंट को कुछ पैसों देकर शिकायत ही खत्म करवा देता था जबकि पुलिस भी लिखित में प्रूफ होने की बात कह कर ज्यादा गंभीरता से मामले को नहीं लेती थी। सूत्रों की मानें तो विदेश यात्रा कंसल्टेंट्स में गया अगर क्लाइंट मलेशिया में वर्क परमिट के लिए अप्लाई करता था तो उससे डेढ़ लाख रुपए लिए जाते थे, लेकिन एफिडेविट पर वही राशि 40 हजार रुपए लिखी जाती थी। पहले तो क्लाइंट को वीजा आने का भरोसा दिया जाता था जिससे क्लाइंट भी उस एफिडेविट पर साइन कर देता था और अगर काम नहीं होता था तो शिकायत देने पर एफिडेविट के हिसाब से विदेश यात्रा कंसल्टेंट्स का मालिक 40 हजार रुपए लौटा देता था और काफी शातिर तरीके से 1.10 लाख रुपए हड़प जाता था। जिसने काम में एंट्री दिलाई, उसी से कर चुका फ्रॉड सूत्रों ने बताया कि विदेश यात्रा कंसल्टेंट्स के मालिक को नरिंदर सिनेमा के पास पड़ते एक इमीग्रेशन के मालिक ने इस काम में एंट्री दिलाई थी। विदेश यात्रा कंसल्टेंट्स के मालिक को इस काम की कोई जानकारी नहीं थी, जिसके चलते इमीग्रेशन के मालिक ने उसे अपने साथ जोड़ा और सारा काम सिखाया। काफी समय से वह दोनों एक साथ काम करते रहे लेकिन बाद में विदेश यात्रा कंसल्टेंट्स के मालिक ने अपने गुरु को ही ठग लिया और फिर अपना बिजनेस शुरू कर दिया। वहीं विदेश यात्रा कंसल्टेंट्स के मालिक द्वारा किए अपराधों की लिस्ट लंबी है।

प्रवासी पक्षियों पर रहेगी स्मार्ट नजर: सुल्तानपुर में AI कैमरे और ड्रोन करेंगे निगरानी

चंडीगढ़  सुल्तानपुर राष्ट्रीय उद्यान में अब कृत्रिम बुद्धिमता (एआइ) और ड्रोन के माध्यम से पक्षियों की गणना होगी। पहली बार डिजिटल रिकार्ड तैयार किया जाएगा कि आगामी सीजन में कितने प्रवासी पक्षी आए, कब पहुंचे और किन हिस्सों में रुके। साथ ही पता लगाया जाएगा कि कितने समय तक प्रवासी पक्षी रहे और पर्यावरणीय बदलावों का उनकी गतिविधियों पर क्या असर पड़ा। गुरुग्राम जिले में फरुखनगर के पास स्थित सुल्तानपुर राष्ट्रीय उद्यान में अभी तक पक्षियों की गणना प्रत्यक्ष अवलोकन पर आधारित रही है। इसमें पक्षियों की मौजूदगी का केवल एक समय का चित्र सामने आता था। जलभराव, दलदली हिस्से और संवेदनशील क्षेत्र कई बार प्रत्यक्ष गणना को सीमित कर देते हैं। निगरानी टावरों पर लगाए गए एआई आधारित कैमरे नई व्यवस्था में ड्रोन उन हिस्सों का सर्वे भी करेंगे जहां सामान्य टीमें नहीं पहुंच पातीं। इससे पक्षियों की गतिविधि का ज्यादा व्यापक और सटीक रिकार्ड तैयार होने की उम्मीद है। ड्रोन से मिलने वाली तस्वीरें और वीडियो एआइ विश्लेषण के साथ जोड़कर गणना को अधिक विश्वसनीय बनाने की योजना है। उद्यान में दो स्थानों पर बने निगरानी टावरों पर एआइ आधारित कैमरे लगाए जा रहे हैं, जो पार्क की झीलों, जलभराव वाले क्षेत्रों और आसपास के खुले भूभाग को लगातार रिकार्ड करेंगे। इससे पूरे मौसम का व्यावहारिक डेटा तैयार होगा, जिससे पता लगेगा कि कौन सी प्रजाति किस समय सबसे ज्यादा सक्रिय रही, किस हिस्से में आवाजाही बढ़ी या घटी और किन इलाकों का उपयोग कम हुआ। इन कामों में एआई से मिलेगी मदद एआइ सिस्टम दुर्लभ और संवेदनशील प्रजातियों की पहचान के साथ उनके व्यवहार और आवास में बदलाव के संकेत भी रिकार्ड करेगा। देखा जाएगा कि जल क्षेत्र कितना बदला, वनस्पति की स्थिति कैसी रही और किस हिस्से में पक्षियों की गतिविधि कम या ज्यादा हुई। अक्टूबर से शुरू होने वाली डिजिटल निगरानी से यह समझने में मदद मिलेगी कि बदलता मौसम, मानसून में देरी, गर्मी-सर्दी, सिकुड़ते वेटलैंड और बढ़ती मानवीय गतिविधियां प्रवासी पक्षियों को किस तरह प्रभावित कर रही हैं। इसके आधार पर भविष्य में पानी प्रबंधन, वनस्पति नियंत्रण, संवेदनशील क्षेत्रों में आगंतुकों की आवाजाही और संरक्षण की रणनीति तय की जा सकेगी। लगातार बदल रही पक्षियों की संख्या सुल्तानपुर में हर साल 250 से अधिक प्रजातियों के पक्षी होते हैं, जिनमें 100 से ज्यादा प्रवासी प्रजातियां शामिल रहती हैं। हाल के वर्षों के आंकड़े दिखाते हैं कि पक्षियों की संख्या और प्रजातियों की संरचना लगातार बदल रही है। 2025 में यहां 48 प्रजातियों के 2,593 प्रवासी पक्षी दर्ज किए गए, जबकि 2024 में 43 प्रजातियों के 2686 और 2023 में 61 प्रजातियों के 6,036 पक्षी दर्ज किए गए थे।

डॉक्टरों की कमी पर सवाल, CG के मेडिकल कॉलेजों में खाली पद भरने की मांग तेज

रायपुर. छत्तीसगढ़ सिविल सोसाइटी ने मुख्य सचिव को 16 पन्नों का पत्र लिखा है। इस पत्र में प्रदेश के शासकीय मेडिकल कॉलेजों और स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों तथा शैक्षणिक स्टाफ के रिक्त पदों को तत्काल नियमित भर्ती से भरने एवं लड़खड़ाती चिकित्सा व्यवस्था को सुदद करने की मांग की गई है। पत्र के अनुसार, छत्तीसगढ़ के प्रतिष्ठित सरकारी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में डॉक्टरों व शैक्षणिक स्टाफ की भारी कमी ने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को वेंटिलेटर पर ला खड़ा किया है। हाल ही में सामने आए आंकड़े न केवल चौंकाने वाले हैं, बल्कि सरकारी दावों की पोल खोलने के लिए काफी हैं। ये आंकड़े साफ बयां करते हैं कि करोड़ों मरीजों का बोझ उठाने वाले प्रदेश के मुख्य चिकित्सा संस्थान खुद स्टाफ की किल्लत से बुरी तरह हांफ रहे हैं। विडंबना यह है कि एक तरफ सरकारें ‘डॉक्टरों की कमी’ का रोना रोती हैं, वहीं दूसरी तरफ राज्य में हजारों योग्य डॉक्टर होने के बावजूद सालों से नियमित भर्ती प्रक्रिया ठप पड़ी है। चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत आने वाले संस्थानों में स्वीकृत पदों के मुकाबले आधे से अधिक पद खाली पड़े हैं। इस प्रशासनिक उदासीनता का सीधा असर मरीजों के इलाज पर तो पड़ ही रहा है, साथ ही सूबे के भावी डॉक्टरों (मेडिकल छात्रों) की पढ़ाई और भविष्य भी भगवान भरोसे चल रहा है। आलम ये है कि प्रदेश से हर साल लगभग 2250 एमबीबीएस निकल रहे हैं। इसके एवज में पीजी में बमुश्किल 399 ही सीट हैं। इसके अलावा अन्य विशेषज्ञों की तो सीट भी नहीं है। रायपुर-बिलासपुर को छोड़ दें तो राज्य के अन्य कालेजों में 80 प्रतिशत डाक्टरों के पद खाली हैं। एमबीबीएस के बाद इंटर्नशिप करने वाले डॉक्टारों को महज 530 प्रतिदिन रुपये मानदेय मिलता है, जबकि अन्य राज्यों में स्थिति बेहतर है। बांड की शर्तों के अनुरूप काम करने वाले डाक्टरों को भी केवल 49 हजार ही मानदेय मिलता है। दो साल तक उन्हें गांव में सेवा देनी पड़ती है। यही वजह है कि ज्यादातर युवा डॉक्टर स्वेच्छा से बांड शर्तों से मुक्त होकर 25 लाख रुपये जमा करके प्रदेश से ही मुक्ति पाने की कोशिश में लगे रहते हैं। चिकित्सा व्यवस्था की दुर्दशा इसी से समझ सकते हैं कि प्रदेश में आज तक प्रदेश के सरकारी क्षेत्र में एक भी किडनी, लीवर या हार्ट ट्रांसप्लांट सर्जरी नहीं हो सकी है। उच्च चिकित्सा के लिए राज्य के बाहर जाने की स्थिति बनी हुई है। रिक्त पदों का गणित: रीढ़ विहीन ढांचा सरकारी आंकड़ों का बारीकी से विश्लेषण करें, तो इस बदहाली का सबसे स्याह और डरावना चेहरा सीनियर रेजिडेंट्स (SR) के पदों पर देखने को मिलता है। किसी भी मेडिकल कॉलेज अस्पताल के भीतर व्यावहारिक चिकित्सा और चौबीस घंटे मुस्तैद रहने वाली व्यवस्था की रीढ़ सीनियर रेजिडेंट्स ही होते हैं। राज्य में इनके कुल 518 स्वीकृत पद हैं, जिनमें से 375 पद खाली पड़े हैं। यानी करीब 72.3 प्रतिशत पदों पर डॉक्टरों की तैनाती ही नहीं हुई है। यही वजह है कि ओपीडी से लेकर इमरजेंसी वार्डों तक में मरीजों को इलाज के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है और गिने-चुने डॉक्टरों पर काम का मानसिक दबाव लगातार बढ़ रहा है पद का नाम रिक्तता (प्रतिशत में) स्थिति का आकलन सीनियर रेजिडेंट 72.3% सर्वाधिक गंभीर असिस्टेंट प्रोफेसर 51.6% चिंताजनक एसोसिएट प्रोफेसर 49.1% गंभीर संकट प्रोफेसर 48.5% शैक्षणिक ढांचा प्रभावित जूनियर रेजिडेंट 41.6% जमीनी स्तर पर स्टाफ की कमी चिंता की बात यह भी है कि मेडिकल कॉलेजों में सिर्फ जूनियर डॉक्टरों की ही कमी नहीं है, बल्कि देश के भविष्य (डॉक्टरों) को तैयार करने वाले प्रोफेसरों की कुर्सियां भी सूनी हैं। चिकित्सा शिक्षकों की कमी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर तीनों श्रेणियों में लगभग 50 प्रतिशत पद खाली हैं। जानकारों का स्पष्ट कहना है कि अगर समय रहते इन पदों को नियमित भर्ती के जरिए नहीं भरा गया, तो चिकित्सा सेवाओं का पूरी तरह चरमराना तय है। चिकित्सा विशेषज्ञ के 80 प्रतिशत तक पद खाली चिकित्सा विशेषज्ञ: प्रदेश में कुल स्वीकृत 1773 पदों में से केवल 355 कार्यरत हैं (नियमित: 320, तदर्थ: 2, संविदा: 33)। इसके चलते रिकार्ड 1418 पद खाली हैं, यानी लगभग 80% पद रिक्त हैं। चिंताजनक बात यह है कि मोहला-मानपुर और सुकमा जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में विशेषज्ञों की संख्या शून्य है, जिससे ग्रामीण अंचलों में गंभीर स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। चिकित्सा अधिकारी : इसी तरह चिकित्सा अधिकारियों के कुल 2296 स्वीकृत पद हैं, जिनमें से 1174 पदों पर डॉक्टर कार्यरत हैं और 305 पद रिक्त पड़े हैं। हालांकि, कार्यरत अमले में नियमित डॉक्टरों की संख्या (सिर्फ 37) बेहद कम है, जबकि तदर्थ (780) और संविदा (1991) कर्मियों की संख्या कहीं अधिक है। यह स्वास्थ्य ढांचे की संविदा और तदर्थ व्यवस्था पर अत्यधिक निर्भरता को दर्शाता है। विरोधाभास: 17 हजार से अधिक डॉक्टर उपलब्ध, फिर भी नियुक्तियां बंद स्वास्थ्य सेवाओं की इस दुर्दशा के पीछे डॉक्टरों की अनुपलब्धता नहीं, बल्कि सरकारी और प्रशासनिक इच्छाशक्ति की कमी है। छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल में पंजीकृत डॉक्टरों के ताजा आंकड़े इस विरोधाभास को पूरी तरह स्पष्ट करते हैं। राज्य में वर्तमान में कुल 17,142 डॉक्टर पंजीकृत हैं, जो चिकित्सा ढांचे को मजबूत बनाने के लिए पर्याप्त हैं। काउंसिल के आंकड़ों के अनुसार: एमबीबीएस डॉक्टर: 11,132 एमडी (विशेषज्ञ): 2,850 एमएस (सर्जन): 2,740 सुपर स्पेशलिस्ट (DM): 190 सुपर स्पेशलिस्ट (MCh): 230 नियमित डॉक्टरों के अलावा, राज्य में करीब 5,000 अस्थायी डॉक्टर भी पंजीकृत हैं, जो समय-समय पर संविदा या अन्य माध्यमों से चिकित्सा कार्यों में महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान करते हैं। इतने बड़े पूल के बावजूद राज्य में साल 2020 के बाद से छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) के माध्यम से कोई नियमित भर्ती प्रक्रिया आयोजित नहीं की गई है। योग्य डॉक्टरों की फौज सड़क पर है या निजी अस्पतालों की ओर रुख कर रही है, और सरकारी अस्पताल खाली पड़े हैं।

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने राष्ट्र की एकता और अखंडता को दी सर्वोच्च प्राथमिकता: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने राष्ट्र की एकता और अखण्डता को दी सर्वोच्च प्राथमिकता: मुख्यमंत्री डॉ. यादव डॉ. मुखर्जी के विचारों को जन-जन तक पहुंचाना जरूरी 23 जून से 6 जुलाई तक का पखवाड़ा डॉ. मुखर्जी को होगा समर्पित भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जीवन राष्ट्रीय एकीकरण के लिए समर्पित रहा। उन्होंने राष्ट्र की एकता और अखंडता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उनका जन्म 6 जुलाई 1901 को निधन 23 जून 1953 को हुआ, जिसे राष्ट्रहित में दिए गए उनके सर्वोच्च बलिदान के रूप में देखा जाता है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में विशेष व्यवस्था के विरोध में आंदोलन किया था, उनका बलिदान राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक माना जाता है। डॉ. मुखर्जी शिक्षाविद, चिंतक, सांसद और दूरदर्शी राजनेता थे। डॉ. मुखर्जी ने वर्ष 1951 में भारतीय जनसंघ की स्थापना की। उन्होंने वैचारिक राजनीति और संगठन निर्माण पर बल दिया और राष्ट्रहित को दलगत राजनीति से ऊपर रखने का संदेश दिया। डॉ. मुखर्जी की पुण्यतिथि 23 जून से उनकी जयंती 6 जुलाई तक विशेष पखवाड़ा आयोजित किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नगरीय निकायों के महापौर तथा नगरपालिका अध्यक्ष को मुख्यमंत्री निवास से वी.सी. के माध्यम से संबोधित कर यह निर्देश दिए। जनसेवा का अभियान हो पखवाड़ा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि डॉ. मुखर्जी का मानना था कि युवा राष्ट्र निर्माण की सबसे बड़ी शक्ति हैं। उन्होंने युवाओं को नेतृत्व, शिक्षा और सामाजिक उत्तरदायित्व के लिए प्रेरित किया। इस पखवाड़े का मुख्य उद्देश्य उनके विचारों को जन-जन तक पहुंचाना है। पखवाड़े के दौरान युवा सम्मेलन, निबंध प्रतियोगिता और संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। इससे नई पीढ़ी को राष्ट्रवादी विचारधारा से जोड़ने का अवसर मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नगरीय निकायों द्वारा मार्गों और उद्यानों का नामकरण डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम पर किया जा सकता है। इस प्रकार की पहल के लिए सभी प्रक्रियाओं का पालन, आवश्यक रूप से किया जाए तथा सक्षम स्तर से सभी स्वीकृतियां अवश्य ली जाएं। पखवाड़ा जनसेवा का अभियान होना चाहिए। पौधरोपण, स्वच्छता अभियान, रक्तदान, स्वास्थ्य शिविर जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएं। यह पखवाड़ा डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने तथा सेवा, सुशासन और राष्ट्र निर्माण के संकल्प को मजबूत करने का अवसर है।  

प्रदेश का सबसे मॉडल शहर बनेगा रायगढ़, वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने बताई विकास की बड़ी योजना

प्रदेश का सबसे मॉडल शहर बनेगा रायगढ़ : वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी शहर में चल रहे प्रमुख विकास कार्यों का किया निरीक्षण, गुणवत्ता और समय-सीमा पर दिया विशेष जोर मरीन ड्राइव, आईएसबीटी, ऑक्सीजोन और जल संरक्षण परियोजनाओं का लिया जायजा रायपुर  वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक ओ.पी. चौधरी ने सोमवार को रायगढ़ नगर निगम क्षेत्र में संचालित विभिन्न महत्वाकांक्षी विकास परियोजनाओं का निरीक्षण कर कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने मरीन ड्राइव, अंतर्राज्यीय बस स्टैंड (आईएसबीटी), एफसीआई ऑक्सीजोन, मिट्ठूमुड़ा तालाब, किसान राइस मिल ऑक्सीजोन तथा कयाघाट पुल सहित कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं का स्थल पर पहुंचकर अवलोकन किया और अधिकारियों को गुणवत्ता के साथ निर्धारित समय-सीमा में कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान वित्त मंत्री चौधरी ने कहा कि रायगढ़ को प्रदेश के सबसे आधुनिक, सुव्यवस्थित और सुविधासंपन्न शहर के रूप में विकसित करना उनका संकल्प है। उन्होंने कहा कि सड़क, परिवहन, पर्यावरण, जल संरक्षण और नागरिक सुविधाओं से जुड़ी ये परियोजनाएं पूर्ण होने के बाद रायगढ़ विकास का नया मॉडल बनकर उभरेगा। नवंबर तक पूरा होगा मरीन ड्राइव प्रगति नगर स्थित निर्माणाधीन मरीन ड्राइव का निरीक्षण करते हुए वित्त मंत्री ने कार्यों की गुणवत्ता और प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने मुख्य बॉक्स कल्वर्ट एवं डायवर्सन निर्माण कार्य समय पर पूरा होने पर संतोष व्यक्त किया और संबंधित एजेंसियों की सराहना की।उन्होंने कहा कि मरीन ड्राइव केवल यातायात सुविधा का माध्यम नहीं, बल्कि रायगढ़ की नई पहचान बनने जा रही है। इससे शहर की सुंदरता बढ़ेगी, यातायात व्यवस्था सुगम होगी तथा नागरिकों को एक आकर्षक सार्वजनिक स्थल भी मिलेगा। उन्होंने अधिकारियों को आगामी नवंबर तक परियोजना पूर्ण करने के निर्देश दिए। रायगढ़ को मिलेगा अत्याधुनिक बस टर्मिनल वित्त मंत्री ने निर्माणाधीन अंतर्राज्यीय बस स्टैंड (आईएसबीटी) का निरीक्षण करते हुए कहा कि यह परियोजना आगामी चार दशकों की जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित की जा रही है। उन्होंने बताया कि बस स्टैंड में एक साथ 30 बसों के संचालन की सुविधा होगी, जबकि अतिरिक्त 40 बसों के लिए भी पर्याप्त पार्किंग एवं स्थान आरक्षित रहेगा। यात्रियों के लिए आधुनिक प्रतीक्षालय विकसित किया जा रहा है, जहां लगभग 550 लोगों के बैठने की व्यवस्था होगी। वहीं बसों के रखरखाव और मरम्मत के लिए पृथक वर्कशॉप क्षेत्र भी बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह बस टर्मिनल रायगढ़ को प्रदेश और देश के प्रमुख शहरों से बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करेगा तथा यात्रियों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराएगा। हरियाली और पर्यावरण संरक्षण को मिलेगी नई मजबूती निरीक्षण के दौरान वित्त मंत्री ने एफसीआई परिसर में विकसित किए जा रहे ऑक्सीजोन प्रोजेक्ट का भी अवलोकन किया। लगभग सात एकड़ क्षेत्र में विकसित हो रहे इस हरित परिसर को उन्होंने रायगढ़ के पर्यावरणीय भविष्य के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने अधिकारियों को नागरिकों की सुविधा के लिए ऑक्सीजोन में दो प्रवेश द्वार विकसित करने के निर्देश दिए। चौधरी ने कहा कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण के दौर में ऐसे हरित क्षेत्रों का विकास समय की आवश्यकता है। यह परियोजना शहरवासियों को स्वच्छ एवं स्वस्थ वातावरण प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। चौधरी ने कहा कि रायगढ़ में विकास और पर्यावरण संरक्षण दोनों को समान प्राथमिकता दी जा रही है। यही कारण है कि शहर में आधुनिक आधारभूत संरचना के साथ-साथ हरित परियोजनाओं पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इस अवसर पर नगर निगम महापौर जीवर्धन चौहान, कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

रांची फ्लाइंग इंस्टिट्यूट में बड़ा विस्तार, पीपीपी मॉडल पर शुरू होंगे एविएशन कोर्स

रांची  झारखंड सरकार ने राज्य में विमानन क्षेत्र को सशक्त बनाने और स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मंत्रिमंडल सचिवालय एवं निगरानी विभाग (नागर विमानन प्रभाग) के तहत स्थापित झारखंड फ्लाइंग इंस्टिट्यूट में एयर होस्टेस के अलावा केबिन क्रू एवं ग्राउंड हैंडलर के गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण हेतु पीपीपी (सार्वजनिक-निजी भागीदारी) मोड पर एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर कर लिया गया है। इसके साथ ही रांची में जल्द ही एयर होस्टेस, केबिन क्रू ट्रेनिंग (डिप्लोमा अथवा सर्टिफिकेट कोर्स) और ग्राउंड हैंडलिंग स्टाफ प्रशिक्षण शुरू किया जाएगा। प्रशिक्षण पीपीपी मोड पर निजी भागीदार के साथ संचालित होगा, जिसमें आधुनिक बुनियादी ढांचा, केबिन माक-अप और प्रतिष्ठित संस्थानों से मान्यता शामिल होगी। पहले चरण में सितंबर से सैकड़ों युवाओं, विशेषकर महिलाओं को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य है, जिसके लिए प्रशिक्षण शुल्क निर्धारित किया गया है। 60 हजार से 1.20 लाख तक खर्च का अनुमान इंस्टिट्यूट द्वारा पहले से ही नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) के मानकों के अनुरूप कामर्शियल पायलट लाइसेंस (सीपीएल) को लेकर आधुनिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। अब एयर होस्टेस और ग्राउंड स्टाफ प्रशिक्षण जुड़ने से यह संस्थान पूर्वी भारत में विमानन प्रशिक्षण का अग्रणी केंद्र बनकर उभरेगा। प्रारंभिक तौर पर राज्य सरकार और परिवहन विभाग किसके लिए 60 हजार एवं 1,20,000 रुपये फीस निर्धारित करने का निर्णय ले सकता है। डिप्लोमा कोर्स के लिए 60,000 रूपये का फीस होगा जबकि सर्टिफिकेट कोर्स के लिए यह राशि 1.2 लाख रुपये हो सकती है। सरकार इस मामले में कमजोर वर्गो के विद्यार्थियों को राहत देने का मन बना रही है। इंडस्ट्री लिंक्ड सिलेबस लागू होगा अधिकारियों के अनुसार, निजी भागीदारी के सहयोग से अत्याधुनिक ट्रेनिंग सुविधा, लाइब्रेरी और इंडस्ट्री-लिंक्ड सिलेबस लागू किया जाएगा। प्रशिक्षण के बाद युवाओं को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस में बेहतर वेतनमान वाली नौकरियों में प्लेसमेंट के अवसर मिलेंगे। जेएफआई के प्रबंध निदेशक कैप्टन एस.पी. सिन्हा ने कहा, यह पहल सरकार की दूरदर्शी सोच का परिणाम है, जो न केवल युवाओं को आत्मनिर्भर बनाएगी बल्कि झारखंड को विमानन क्षेत्र में पसंदीदा गंतव्य भी बनाएगी। उन्होंने कहा कि अगले कुछ वर्षों में सैकड़ों स्थानीय युवा एयर होस्टेस, केबिन क्रू और ग्राउंड हैंडलिंग पदों पर काम करते नजर आएंगे। यह कदम राज्य के ग्रामीण एवं शहरी युवाओं को समान अवसर प्रदान करेगा और विशेष रूप से महिला सशक्तिकरण की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

Insurance Claim पर बड़ा फैसला: बीमारी छिपाने का आरोप लगाने पर बीमा कंपनियों को देना होगा सबूत

भोपाल  अब बीमा कंपनियां केवल यह कहकर क्लेम खारिज नहीं कर सकेंगी कि बीमित व्यक्ति ने अपनी पुरानी बीमारी छिपाई है। उपभोक्ता आयोग ने साफ कर दिया है कि ऐसे मामलों में आरोप लगाने वाली बीमा कंपनी को ठोस सबूत भी पेश करने होंगे, अन्यथा क्लेम रोकना ‘सेवा में कमी’ माना जाएगा। उपभोक्ता कानून के तहत केवल आरोप लगाना पर्याप्त नहीं है। कंपनी को दस्तावेजी साक्ष्य के साथ यह साबित करना होता है कि बीमारी पहले से मौजूद थी और उसे जानबूझकर छिपाया गया। बीमा दावा खारिज करने के मामलों में कंपनियों की मनमानी पर भोपाल जिला उपभोक्ता आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। भोपाल उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग (बेंच-2) ने चोलामंडलम एमएस जनरल इंश्योरेंस कंपनी को फटकार लगाते हुए उपभोक्ता को 1.63 लाख रुपए का क्लेम 7% ब्याज सहित चुकाने का आदेश दिया है। साथ ही मानसिक और आर्थिक क्षति के लिए मुआवजा और वाद व्यय भी देने के निर्देश दिए गए हैं। बता दें कि आयोग ने यह फैसला हाल ही में सुनाया है। क्या था पूरा मामला देवास निवासी नसरुद्दीन खान ने वर्ष 2020 में चोलामंडलम एमएस जनरल इंश्योरेंस कंपनी से ‘आरोग्य संजीवनी’ पॉलिसी ली थी, जिसकी अवधि 29 जुलाई 2020 से 28 जुलाई 2021 तक थी। इस पॉलिसी के लिए उन्होंने 4554 रुपए का प्रीमियम जमा किया था। बीमा अवधि के दौरान 12 जून 2021 को उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें भोपाल के फ्यूचर मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल एंड ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया। यहां 7 दिन इलाज चला और कुल 1,63,156 रुपए का खर्च आया। इलाज के बाद किया क्लेम, कंपनी ने टालमटोल की परिवादी ने अस्पताल में भर्ती होने की सूचना तत्काल बीमा कंपनी को दी और सभी जरूरी दस्तावेजों के साथ क्लेम भी प्रस्तुत किया। इसके बावजूद कंपनी ने लंबे समय तक क्लेम पर कोई निर्णय नहीं लिया। कई बार फोन और व्यक्तिगत संपर्क करने के बाद भी कंपनी ने भुगतान नहीं किया। बीमा कंपनी ने 27 जुलाई 2022 को पत्र जारी कर दावा यह कहते हुए खारिज कर दिया कि प्रस्तुत दस्तावेज गलत और मनगढ़ंत हैं। कंपनी ने यह भी आरोप लगाया कि बीमित ने पॉलिसी लेते समय अपनी पुरानी बीमारी छिपाई थी, जो नियमों का उल्लंघन है। उपभोक्ता आयोग में पहुंचा मामला क्लेम खारिज होने के बाद परिवादी ने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने 1.63 लाख रुपए की क्लेम राशि के साथ 18% ब्याज, 2 लाख रुपए क्षतिपूर्ति और 20 हजार रुपए वाद व्यय की मांग की। उनका कहना था कि उन्होंने कोई जानकारी नहीं छिपाई और कंपनी ने गलत तरीके से दावा निरस्त किया। कंपनी ने समय-सीमा का उठाया मुद्दा बीमा कंपनी ने अपने जवाब में कहा कि परिवाद देरी से दायर किया गया है और इसलिए यह स्वीकार्य नहीं है। साथ ही उन्होंने पुनः यही तर्क दिया कि पॉलिसी लेते समय बीमारियों की जानकारी छिपाई गई थी। आयोग ने मामले में प्रस्तुत दस्तावेजों, बिल, जांच रिपोर्ट और डिस्चार्ज समरी का परीक्षण किया। इससे स्पष्ट हुआ कि परिवादी वास्तव में बीमार था और अस्पताल में भर्ती होकर इलाज कराया गया था। इलाज में खर्च की गई राशि भी दस्तावेजों से प्रमाणित हुई। बीमा कंपनी आरोप साबित नहीं कर पाई आयोग ने पाया कि बीमा कंपनी ने धोखाधड़ी के आरोप तो लगाए, लेकिन इसके समर्थन में कोई ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया। न ही कोई ऐसा दस्तावेज दिया गया जिससे यह साबित हो सके कि परिवादी को पहले से बीमारी थी। आयोग ने माना सेवा में कमी आयोग ने कहा कि बीमा कंपनी का यह कृत्य ‘सेवा में कमी’ की श्रेणी में आता है। बीमा अनुबंध ‘अत्यंत सद्भावना’ (Utmost Good Faith) पर आधारित होता है, लेकिन जब कंपनी दावा खारिज करती है तो आरोप सिद्ध करना उसी की जिम्मेदारी होती है, जो यहां पूरी नहीं हुई। वहींआयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल देरी के आधार पर उपभोक्ता के अधिकार खत्म नहीं होते। यदि उपभोक्ता लगातार अपने अधिकार के लिए प्रयास कर रहा है, तो देरी को उचित कारण मानकर माफ किया जा सकता है। आदेश: ब्याज सहित क्लेम और मुआवजा दें आयोग ने आदेश दिया कि बीमा कंपनी दो माह के भीतर परिवादी को 1,63,156 रुपए 7% वार्षिक ब्याज सहित अदा करे। इसके अलावा 10,000 रुपए मानसिक, शारीरिक व आर्थिक क्षति के लिए और 5,000 रुपए वाद व्यय के रूप में देने होंगे। आयोग ने स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित समय में भुगतान नहीं किया गया, तो पूरी राशि पर 9% वार्षिक ब्याज देना होगा। उपभोक्ता आयोग का स्पष्ट रुख उपभोक्ता आयोग ने अपने हालिया फैसले में कहा कि बीमा अनुबंध ‘अत्यंत सद्भावना’ (Utmost Good Faith) के सिद्धांत पर आधारित होता है, लेकिन यदि बीमा कंपनी किसी दावे को धोखाधड़ी बताकर खारिज करती है, तो उस आरोप को प्रमाणित करना उसी की जिम्मेदारी है। बिना सबूत के क्लेम खारिज करना गलत है।