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राफेल, S-400 और Su-30 बेसों को मिलेगा नया बूस्ट, बंगाल सरकार ने एयरबेस के लिए दी अतिरिक्त जमीन

कलकत्ता पूर्वी भारत की हवाई सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. सरकार ने हसीमारा एयर फोर्स स्टेशन के लिए 25 एकड़ और कलाईकुंडा एयर फोर्स स्टेशन के लिए 37 एकड़ जमीन आवंटित करने का फैसला किया है।  यह जमीन दोनों एयरबेस के बुनियादी ढांचे के विस्तार, नई सुविधाओं और भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए इस्तेमाल होगी. यह कदम भारत की पूर्वी हवाई सुरक्षा व्यवस्था को नई ताकत देगा, खासकर चीन की सीमा के करीब।  हसीमारा एयरबेस: राफेल और S-400 का गढ़ हसीमारा एयरबेस अलीपुरद्वार जिले में भूटान सीमा के पास स्थित है. यह भारतीय वायुसेना का बेहद महत्वपूर्ण फॉरवर्ड बेस है. यहां राफेल फाइटर एयरक्राफ्ट की दूसरी स्क्वाड्रन तैनात है, जो पूर्वी क्षेत्र और भारत-चीन सीमा पर भारत की लड़ाकू क्षमता को बहुत बढ़ाती है।  राफेल बेहद आधुनिक मल्टीरोल फाइटर है जो लंबी दूरी तक हमला कर सकता है. दुश्मन के रडार से बच सकता है. हवा से हवा, हवा से जमीन दोनों तरह के मिशन कर सकता है. सूत्रों के अनुसार इस बेस पर S-400 ट्रायम्फ लंबी दूरी की एयर डिफेंस सिस्टम भी मौजूद हैं. सरकार ने इसे आधिकारिक रूप से स्वीकार नहीं किया है।  1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद 1963 में इस बेस को सक्रिय किया गया था. चुम्बी घाटी त्रिजंक्शन के पास होने के कारण यह सिलीगुड़ी कॉरिडोर और पूर्वी हिमालय क्षेत्र की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाता है. अतिरिक्त जमीन मिलने से यहां रनवे सुविधाएं, हैंगर, रखरखाव कार्यशालाएं और सैनिकों की आवास व्यवस्था बेहतर होगी. कलाईकुंडा एयरबेस: ट्रेनिंग और ऑपरेशन का प्रमुख केंद्र पश्चिम मेदिनीपुर जिले में स्थित कलाईकुंडा एयरबेस पूर्वी एयर कमांड के तहत एक बड़ा फाइटर और ट्रेनिंग हब है. यहां Su-30 MKI और हॉक ट्रेनर एयरक्राफ्ट तैनात रहते हैं. यह बेस अंतरराष्ट्रीय एयर एक्सरसाइज के लिए भी प्रसिद्ध है, खासकर सिंगापुर एयर फोर्स के साथ हुए कई द्विपक्षीय अभ्यास यहां हो चुके हैं।  कलाईकुंडा की रनवे लगभग 10,000 फीट लंबी है, जो फाइटर और ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट दोनों को संभाल सकती है. मिली 37 एकड़ जमीन से यहां लॉजिस्टिक्स, आवास, रखरखाव और सपोर्ट सुविधाएं बढ़ेंगी. यह विकास गेम चेंजर साबित होगा क्योंकि शांति और युद्धकाल दोनों में यहां तैनाती बदलती रहती है।  राफेल और S-400 का संयोजन हसीमारा को दुश्मन के लिए बहुत खतरनाक बना देता है. S-400 सिस्टम 400 किलोमीटर दूर तक दुश्मन के विमान, मिसाइल और ड्रोन को नष्ट कर सकता है. राफेल इस डिफेंस को आक्रामक ताकत देता है।  पूर्वी क्षेत्र में चीन की बढ़ती गतिविधियों के बीच इन बेसों का विस्तार जरूरी है. दोनों बेस सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं, जो भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को बाकी देश से जोड़ता है।  पूर्वी कमान की तैयारियों में तेजी भारतीय वायुसेना पूर्वी क्षेत्र में अपनी मौजूदगी लगातार बढ़ा रही है. हसीमारा और कलाईकुंडा के विस्तार के साथ-साथ नए रडार, कम्युनिकेशन सिस्टम और लॉजिस्टिक सपोर्ट को मजबूत किया जा रहा है. यह विकास न सिर्फ चीन बल्कि समग्र क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों के लिए तैयार रहने में मदद करेगा।  पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा जमीन आवंटन से रक्षा मंत्रालय और वायुसेना को तेजी से काम करने में आसानी होगी. इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार भी बढ़ेगा क्योंकि बुनियादी ढांचे के निर्माण में स्थानीय कंपनियां और मजदूर शामिल होंगे।  पूर्वी भारत की भौगोलिक स्थिति काफी संवेदनशील है. भूटान, नेपाल, बांग्लादेश और चीन की सीमाएं यहां करीब हैं. इन बेसों का मजबूत होना न सिर्फ हवाई श्रेष्ठता बल्कि थल सेना और नौसेना के साथ समन्वय में भी मदद करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक युद्ध में एयरबेस सिर्फ विमान उड़ाने के स्थान नहीं रह गए हैं. ये कमांड सेंटर, ड्रोन बेस, लॉजिस्टिक हब और इंटेलिजेंस यूनिट का काम भी करते हैं. अतिरिक्त जमीन इन बहु-उद्देशीय क्षमताओं को विकसित करने में उपयोगी होगी।  पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा हसीमारा और कलाईकुंडा एयरबेस के लिए जमीन आवंटित करना पूर्वी भारत की सुरक्षा दृष्टि से एक महत्वपूर्ण फैसला है. राफेल और S-400 जैसी अत्याधुनिक प्रणालियों के साथ इन बेसों का विस्तार भारत को क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने में मजबूती देगा. आने वाले समय में इन बेसों की क्षमता बढ़ने से वायुसेना की तैयारियां और बेहतर होंगी तथा देश की समग्र रक्षा क्षमता को नई ऊंचाई मिलेगी। 

UP में राज्यसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज, टिकटों पर मंथन और नए चेहरों की तलाश

लखनऊ  उत्तर प्रदेश की सियासत में आने वाले दिन बेहद सरगर्मियों से भरे रहने वाले हैं. अगले साल होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से ठीक पहले राज्य में राज्यसभा की 10 सीटों पर चुनाव होंगे. राज्यसभा चुनाव ने राज्य की राजनीतिक हलचल को चरम पर पहुंचा दिया है. इस चुनाव को केवल संसद के ऊपरी सदन का समीकरण बदलने के तौर पर नहीं, बल्कि 2027 के महामुकाबले से पहले भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी के बीच सेमीफाइनल के रूप में देखा जा रहा है. जिन 10 सांसदों का कार्यकाल पूरा हो रहा है, उनमें भाजपा के हरदीप सिंह पुरी, अरुण सिंह, बृजलाल, नीरज शेखर, सीमा द्विवेदी, गीता शाक्य, बनवारी लाल वर्मा और दिनेश शर्मा शामिल हैं. वहीं समाजवादी पार्टी के रामगोपाल यादव और रामजी गौतम का कार्यकाल भी समाप्त हो रहा है।  आइए समझते हैं कि इस बार उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों का पूरा गणित क्या है, किसका पत्ता साफ होने जा रहा है और दोनों दल किस रणनीति पर काम कर रहे हैं. भाजपा के मौजूदा सांसदों में से कई ऐसे चेहरे हैं जिनका कार्यकाल खत्म हो रहा है, लेकिन पार्टी को दोबारा राज्यसभा भेजना मजबूरी है. हालांकि, पार्टी इस बार कई नए चेहरों को मौका देने की तैयारी में भी है. इससे कुछ मौजूदा सांसदों का पत्ता साफ होना लगभग तय माना जा रहा है. वहीं, समाजवादी पार्टी के सुप्रीमो अखिलेश यादव भी इस बार कम से कम दो नए वफादारों जिसमें पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक चेहरों को दिल्ली भेजने की तैयारी में हैं।  राज्यसभा की 10 सीटों के लिए किसका दावा कितना मजबूत? विधानसभा में वर्तमान संख्या बल को देखें तो भाजपा और उसके सहयोगियों के पास करीब 290 विधायक हैं, जबकि समाजवादी पार्टी के पास लगभग 102 विधायक हैं. ऐसे में गणित भाजपा के पक्ष में दिखाई देता है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा 8 सीटें जीतने की रणनीति पर काम कर सकती है, जबकि सपा के लिए 2 सीटें सुरक्षित मानी जा रही हैं. सबसे ज्यादा चर्चा उन नेताओं को लेकर है जिनकी दोबारा राज्यसभा वापसी हो सकती है. केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और और पूर्व आईपीएस बृजलाल के नाम फिर से चर्चा में हैं. जबकि, संगठन में मजबूत पकड़ रखने वाले अरुण सिंह का पत्ता कट सकता है. बीजेपी सामाजिक समीकरणों और 2027 विधानसभा चुनाव की रणनीति को ध्यान में रखते हुए कई नए चेहरों को भी मौका दे सकती है।  संख्याबल और संभावित जीत यूपी विधानसभा में 403 सदस्य हैं. एनडीए (बीजेपी + सहयोगी): 290-294 MLAs सपा + सहयोगी: 103-105 (सपा 101-102 + कांग्रेस 2) अन्य बसपा 1, JD(L) आदि, कुछ खाली एक सीट जीतने के लिए लगभग 37 वोट चाहिए. ऐसे में मौजूदा गणित के आधार पर बीजेपी/एनडीए 7-8 सीटें आसानी से जीत सकती हैं. सपा 2 सीटें और अधिकतम 3 जीत सकती हैं, अगर बागी न हों और गठबंधन मजबूत हो।  सपा प्रमुख अखिलेश यादव अपने कोर ‘PDA’ फॉर्मूले को मजबूत करने के लिए किसी बड़े अति-पिछड़े या दलित चेहरे को उच्च सदन भेज सकते हैं. वहीं बीजेपी भी पश्चिम से लेकर पूर्व तक के जातीय संतुलन को साधने वाले नेताओं पर दांव लगाएगी. अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से ठीक पहले यह राज्यसभा चुनाव दोनों पार्टियों के लिए नाक का सवाल बन चुका है. जो भी पार्टी उम्मीद से ज्यादा सीटें जीतने में कामयाब होगी, वह राज्य में यह नैरेटिव बनाने में सफल रहेगी कि ‘हवा’ उसके पक्ष में बह रही है. बगावत या क्रॉस वोटिंग के जरिए यदि किसी दल ने दूसरे को पटखनी दी, तो विरोधी खेमे के कैडर का मनोबल टूट जाएगा।  बीजेपी और सपा का सीट गणित उत्तर प्रदेश विधानसभा में विधायकों की मौजूदा संख्या के आधार पर ही राज्यसभा की इन 10 सीटों का फैसला होगा. एक राज्यसभा सीट को जीतने के लिए तय प्रथम वरीयता के वोटों की आवश्यकता होती है. बीजेपी अपने मजबूत संख्याबल और सहयोगी दलों जैसे रालोद, सुभासपा, अपना दल के दम पर कम से कम 7 सीटें जीतने का लक्ष्य लेकर चल रही है. पार्टी इसके लिए अतिरिक्त वोटों का इंतजाम करने और विपक्षी खेमे में सेंधमारी की रणनीति पर भी काम कर सकती है. वहीं समाजवादी पार्टी के पास पिछले चुनावों के मुकाबले विधायकों की संख्या बेहतर है. कांग्रेस के साथ गठबंधन के बाद सपा आसानी से 3 सीटें अपने दम पर जीतने की स्थिति में है. यदि विपक्ष एकजुट रहता है और कुछ असंतुष्ट विधायक साथ आते हैं, तो सपा चौथी सीट के लिए भी कड़ा मुकाबला पेश करेगी।  किसका चमकेगा भाग्य और किसका कटेगा टिकट? राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, इस बार दोनों ही दल किसी भी ऐसे चेहरे को दोबारा मौका नहीं देना चाहेंगे जो आगामी विधानसभा चुनाव में जमीन पर जातीय या क्षेत्रीय समीकरणों को फिट न बैठता हो. जो नेता पिछले कुछ समय से संगठन में निष्क्रिय रहे हैं या जिनका स्थानीय स्तर पर विरोध है, उनका टिकट कटना तय माना जा रहा है. बीजेपी कुछ बुजुर्ग नेताओं को मार्गदर्शक मंडल या संगठन में भेजकर नए और युवा चेहरों को मैदान में उतार सकती है। 

ब्रिटेन की राजनीति में बड़ा भूचाल! कीर स्टार्मर का इस्तीफा, कहा- देश पहले, पद बाद में

लंदन  ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्‍टार्मर ने अपनी लेबर पार्टी के कई सांसदों के महीनों से चले आ रहे दबाव के बाद अपने पद से इस्‍तीफा दे दिया है। नए नेता का चुनाव होने तक वह अपने पद पर बने रहेंगे। अब लेबर पार्टी में एक बार फिर से नए नेता के चुनाव के लिए दौड़ शुरू हो गई है। कीर ने इस्‍तीफा देने के बाद दिए अपने भाषण में कहा कि उनके लिए देश पहले है। पिछले 1 दशक में 7वें नेता अब ब्रिटेन के पीएम बनेंगे। इससे पहले ऋषि सुनक ने अपने पद से इस्‍तीफा दिया था। कीर स्‍टार्मर जब इस्‍तीफा देने के लिए अपने आधिकारिक आवास 10 डाउनिंग स्‍ट्रीट से निकले तो लोगों ने उनका जोरदार स्‍वागत किया। उन्‍होंने पीएम बनने को अपने जीवन लिए सबसे गर्व का क्षण बताया था। कीर ने कहा कि वह करोड़ों लोगों के जीवन को बदलने के लिए राजनीति में आए थे। उन्‍होंने लेबर पार्टी की साल 2024 की शानदार जीत को अपनी सरकार की उपलब्धि बताया। कीर स्टार्मर ने क्या ऐलान किया? देश के नाम अपने संबोधन के आखिर में कीर स्टार्मर की आवाज भावुक होकर भर्रा गई. स्टारमर ने कहा, "अब मेरी पार्टी यह सवाल पूछ रही है कि क्या मैं अगले आम चुनाव में पार्टी का नेतृत्व करने के लिए सबसे सही व्यक्ति हूं. मैंने इस सवाल पर अपनी संसदीय पार्टी का जवाब सुन लिया है और मैं उस जवाब को सम्मान के साथ स्वीकार करता हूं।  फिर कीर स्टार्मर ने कहा है कि वे सत्तारूढ़ लेबर पार्टी के नेता पद से इस्तीफा दे रहे हैं. स्टार्मर ने कहा कि अगले कुछ हफ्तों में नया लेबर नेता चुने जाने तक वे कार्यवाहक (केयरटेकर) प्रधानमंत्री के रूप में काम करते रहेंगे।  ब्रिटेन के राजा को दी इस्‍तीफे की जानकारी कीर स्‍टार्मर ने प्रधानमंत्री और लेबर पार्टी के लीडर दोनों ही पद से इस्‍तीफा दे दिया है। इसके साथ ही उनका पीएम पद का 2 साल का कार्यकाल खत्‍म हो गया है। उन्‍होंने कहा कि मैंने उन्‍होंने आज सुबह ही राजा से मुलाकात की है और उनको इस इस्‍तीफे के बारे में बताया है। उन्‍होंने कहा कि लेबर पार्टी की कार्यकारी समिति की बैठक होगी और 9 जुलाई से नामांकन होने लगेगा। कीर स्‍टार्मर ने कहा कि जो कोई भी अगला पीएम बनेगा, उसे उनका पूरा समर्थन रहेगा। साथ ही वह एक सामान्‍य तरीके से सत्‍ता के हस्‍तातंरण में पूरी मदद करेंगे। कीर ने कहा कि मैंने जो कोई भी फैसला लिया, उसे देश को ध्‍यान में रखकर लिया जिसे मैं प्‍यार करता हूं। उन्‍होंने कहा कि देश की अर्थव्‍यवस्‍था अब तेजी से विकास कर रही है और मजदूरी भी बढ़ी है। यह महंगाई से ज्‍यादा है। 17 जुलाई तक ब्रिटेन को नया प्रधानमंत्री मिलेगा स्टार्मर ने कहा कि लेबर पार्टी जुलाई के मध्य तक अपना नया नेता चुन लेगी। नए नेता और प्रधानमंत्री के चुने जाने तक वह अपने पद पर बने रहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि वह अपने उत्तराधिकारी को पूरा सहयोग देंगे। स्टार्मर ने बताया कि उन्होंने सोमवार सुबह ब्रिटेन के किंग चार्ल्स III को अपने फैसले की जानकारी दे दी। अब लेबर पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारी समिति (NEC) नए नेता के चुनाव का कार्यक्रम तय करेगी। इसके तहत 9 जुलाई से नामांकन प्रक्रिया शुरू होगी और 17 जुलाई से शुरू होने वाले संसद के ग्रीष्मकालीन अवकाश से पहले नए नेता का चुनाव पूरा करने की कोशिश की जाएगी। ब्रिटेन में जनता सीधे प्रधानमंत्री नहीं चुनती। लोग अपने-अपने क्षेत्र से सांसद चुनते हैं। जिस पार्टी के पास संसद में बहुमत होता है, उसी पार्टी का नेता प्रधानमंत्री बनता है। अभी लेबर पार्टी की सरकार है। इसलिए जो व्यक्ति लेबर पार्टी का नया नेता बनेगा, वही प्रधानमंत्री बनने का सबसे बड़ा दावेदार होगा। इसके लिए पूरे देश में आम चुनाव कराने की जरूरत नहीं होती। लेबर पार्टी में एंडी बर्नहैम सबसे आगे ब्रिटेन की राजनीति में काफी लोकप्रिय चेहरा माने जाते हैं। उन्हें पार्टी के लेफ्ट और सेंट्रिस्ट दोनों गुटों का समर्थन हासिल है। बर्नहैम पहले स्वास्थ्य मंत्री समेत कई अहम सरकारी पद संभाल चुके हैं। कोविड महामारी के दौरान उन्होंने मैनचेस्टर के लिए केंद्र सरकार से खुलकर टक्कर ली थी। उस समय उनकी छवि आम लोगों के हितों के लिए लड़ने वाले नेता की बनी, जिससे उनकी लोकप्रियता बढ़ी। मेकरफील्ड उपचुनाव में जीत के बाद एंडी बर्नहैम की स्थिति और मजबूत हुई है। कई राजनीतिक जानकार मानते हैं कि वह स्टार्मर की जगह लेने के सबसे बड़े दावेदार हैं। हालांकि अभी तक किसी उम्मीदवार ने आधिकारिक तौर पर अपनी दावेदारी पेश नहीं की है। पार्टी के दूसरे नेता भी मैदान में उतर सकते हैं। ऐसे में नेतृत्व का चुनाव मुकाबले वाला भी हो सकता है। लेबर पार्टी के सांसदों और कार्यकर्ताओं का रुख भी काफी अहम रहेगा। अगर बड़ी संख्या में नेता और सांसद बर्नहैम के समर्थन में आ जाते हैं, तो उन्हें बिना ज्यादा मुकाबले के नेता चुना जा सकता है। कीर स्टार्मर को क्यों छोड़नी पड़ी कुर्सी कीर स्टार्मर पर पिछले कुछ दिनों में लगातार दबाव तेजी से बढ़ गया था कि वे लेबर पार्टी के नेता पद से इस्तीफा दे दें, ताकि एंडी बर्नहम नए ब्रिटिश प्रधानमंत्री बन सकें. पिछले हफ्ते उत्तरी इंग्लैंड के मेकरफील्ड उपचुनाव में एंडी बर्नहम ने दक्षिणपंथी प्रतिद्वंदी को हराकर बड़ी जीत हासिल की थी. इस जीत के बाद प्रधानमंत्री पद के लिए उनका दावा और मजबूत हो गया था. अब उनको ही सत्ताधारी लेबर पार्टी का अगला नेता और ब्रिटेन का नया पीएम माना जा रहा है।  जुलाई 2024 के आम चुनाव में कीर स्टार्मर ने 174 सीटों के बड़े बहुमत के साथ शानदार जीत हासिल की थी. लेकिन पिछले कुछ महीनों में उनके प्रधानमंत्री कार्यकाल पर कई विवाद छाए रहे हैं. इनमें लेबर पार्टी के सीनियर नेता पीटर मेंडलसन को अमेरिका में ब्रिटेन का राजदूत बनाना भी शामिल है, जबकि उनके दोषी यौन अपराधी जेफरी एप्सटीन से संबंधों की जानकारी पहले से थी।  इसके अलावा टैक्स और सामाजिक कल्याण योजनाओं (सोशल बेनिफिट्स) को लेकर सरकार के कुछ फैसलों और बाद में उन्हें बदलने (यू-टर्न लेने) से भी उनकी छवि को नुकसान पहुंचा है. दूसरी तरफ, एंडी बर्नहम पहले कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं. बाद में उन्होंने … Read more

खातीपुरा मेगा कोचिंग टर्मिनल का उद्घाटन, रेल सुविधाओं को मिला नया आयाम

पटना जयपुर (खातीपुरा)-दरभंगा अमृत भारत एक्सप्रेस रेल सेवा का शुभारंभ हो गया है। यह ट्रेन यात्रा को एक नया आयाम देगी। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, राजस्थान के सीएम भजनलाल शर्मा तथा बिहार के सीएम सम्राट चौधरी ने रविवार को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर खातीपुरा में देश के पहले मेगा कोचिंग टर्मिनल और विभिन्न रेलवे स्टेशनों पर विकसित यात्री सुविधाओं का भी उद्घाटन किया गया। राजस्‍थान और म‍िथ‍िला के संबंधों को मजबूती कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि नई ट्रेन राजस्थान और बिहार के मिथिला क्षेत्र के बीच सांस्कृतिक एवं सामाजिक संबंधों को मजबूत करेगी। उन्होंने बताया कि खातीपुरा में 205 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित मेगा कोचिंग टर्मिनल देश का पहला ऐसा आधुनिक केंद्र है, जहां वंदे भारत, एलएचबी, डेमू सहित विभिन्न प्रकार की ट्रेनों का अनुरक्षण एक ही स्थान पर किया जा सकेगा। बिहारवासियों को होगा विशेष लाभ इसकी क्षमता प्रति माह लगभग 450 ट्रेनों के रखरखाव की है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि इस ट्रेन से राजस्थान में कार्यरत प्रवासी बिहारवासियों को विशेष लाभ मिलेगा। उन्‍होंने कहा कि यह ट्रेन बिहार के लोगों के लिए एक सौगात की तरह है। सप्ताह में छह दिन चलने वाली यह अमृत भारत एक्सप्रेस रोजगार, शिक्षा, व्यापार और पारिवारिक कारणों से यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए सुविधाजनक विकल्प साबित होगी। इसके साथ ही उत्तर पश्चिम रेलवे के 41 छोटे और मध्यम स्टेशनों पर भी यात्री सुविधाओं का विस्तार किया गया है, जिससे रेल यात्रियों को बेहतर सेवाएं मिल सकेंगी।

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि ने बदली दुर्गेश यादव के खेती की तस्वीर

रायपुर. ,  प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना छोटे और सीमांत किसानों के लिए आर्थिक सहारे का मजबूत आधार बन रही है। गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले के ग्राम बिजरवार निवासी किसान दुर्गेश यादव भी उन लाभार्थियों में शामिल हैं, जिनके जीवन में इस योजना ने सकारात्मक बदलाव लाया है। सीमित कृषि भूमि होने के बावजूद वे खेती-किसानी से अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। पहले खेती के लिए बीज, खाद और अन्य आवश्यक कृषि सामग्री की व्यवस्था करना उनके लिए चुनौतीपूर्ण था, लेकिन अब प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना से मिलने वाली सहायता ने उनकी राह आसान कर दी है। दुर्गेश यादव बताते हैं कि योजना के तहत उन्हें प्रत्येक तीन माह में दो हजार रुपये की राशि सीधे उनके बैंक खाते में प्राप्त होती है। समय पर मिलने वाली यह आर्थिक सहायता खेती के मौसम में आवश्यक कृषि सामग्री खरीदने में मददगार साबित हो रही है। इससे खेती की लागत का बोझ कम हुआ है और उन्हें आर्थिक परेशानियों से काफी राहत मिली है। उन्होंने बताया कि पहले कृषि कार्यों के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाने में कठिनाई होती थी, लेकिन अब योजना से मिलने वाली राशि का उपयोग बीज, उर्वरक और अन्य कृषि जरूरतों को पूरा करने में किया जा रहा है। इससे खेती का कार्य अधिक व्यवस्थित ढंग से हो पा रहा है और उत्पादन बढ़ाने की दिशा में भी मदद मिल रही है। दुर्गेश यादव का कहना है कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ केवल उन्हें ही नहीं, बल्कि क्षेत्र के अनेक किसानों को मिल रहा है। नियमित आर्थिक सहायता मिलने से किसानों का आत्मविश्वास बढ़ा है और वे खेती के कार्यों को बेहतर योजना और उत्साह के साथ कर पा रहे हैं। किसानों की आय में वृद्धि के साथ-साथ उनकी आर्थिक स्थिति भी मजबूत हुई है। उन्होंने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना को किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी और सराहनीय पहल बताते हुए कहा कि यह योजना छोटे और सीमांत किसानों को आर्थिक संबल प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। योजना के माध्यम से किसानों को समय पर सहायता मिल रही है, जिससे वे खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बना पा रहे हैं। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना आज ग्रामीण भारत के लाखों किसानों की तरह गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले के किसान दुर्गेश यादव के जीवन में भी नई उम्मीद, आत्मविश्वास और आर्थिक मजबूती का आधार बन रही है।

मानसून में वन संरक्षण को प्राथमिकता, झारखंड में एक करोड़ से अधिक पौधारोपण की तैयारी

रांची राज्य के वनों में होने वाली पर्यटन समेत अन्य गतिविधियां एक जुलाई से 30 सितंबर तक बंद रहेंगी। वन क्षेत्र में रहने वाले जीवों की सुरक्षा और नए लगने वाले पौधों को बारिश में पनपने के लिए गतिविधियों पर रोक लगाई जाती है। पलामू टाइगर रिजर्व, दलमा समेत सभी वन क्षेत्र में इस दौरान सड़क निर्माण, बिजली के टावर लगाने जैसे कार्य भी बंद रहेंगे। मानसून और बारिश के इन तीन महीनों में वनक्षेत्र में दस लाख से ज्यादा नए पौधे भी लगाए जाएंगे। कच्ची संरचना में होगा पानी का संचयन वन एवं पर्यावरण विभाग ने इस दौरान वनों के विकास और नए पौधों के संरक्षण उपाय किए हैं। वर्षा के समय कच्ची संरचना में पानी का संचयन किया जाएगा। जून तक पलामू क्षेत्र में औसत से कम बारिश हुई है। ऐसे में नए लगने वाले पौधों की सिंचाई के लिए स्थानीय स्तर पर उपाय किए जा रहे हैं। कृषि वानिकी विशेषज्ञ संजय पांडे ने बताया कि राज्य के वनों में जुलाई से सितंबर कर ज्यादा बारिश होती है। लेकिन जून में लगने वाले पौधों को बचाने के लिए टैंकरों या अन्य माध्यम से पानी पहुंचाना ही विकल्प है। इको टूरिज्म का बढ़ेगा दायरा राज्य के वन क्षेत्र में मानसून के बाद होने वाली पर्यटन गतिविधियों में इको टूरिज्म का दायरा बढ़ाया जाएगा। जंगल सफारी के लिए बैट्री चालित वाहनों की संख्या 25 तक करने की योजना है। इसके अलावा वन क्षेत्र में आवासीय क्षेत्र में सोलर आधारित विद्युत व्यवस्था की जाएगी। पलामू टाइगर रिजर्व के साथ लातेहार में बनने वाली सफारी का काम भी मानसून के बाद तेज किया जाएगा।

आवास मेला-2025 के लक्की ड्रॉ का सफल आयोजन, विजेताओं की हुई घोषणा

छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय आवास मेला-2025 तथा इसके उपरांत 31 दिसम्बर 2025 तक मंडल की विभिन्न आवासीय एवं व्यावसायिक योजनाओं में पंजीयन कराकर भवन आबंटन प्राप्त करने वाले पात्र हितग्राहियों के लिए विशेष लक्की ड्रॉ का आयोजन आज दिनांक 22 जून 2026 (सोमवार) को अपराह्न 3:00 बजे मंडल मुख्यालय, सेक्टर-19, नवा रायपुर अटल नगर में हितग्राहियों एवं पत्रकारों के उपस्थिति में किया गया। लक्की ड्रॉ कार्यक्रम छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल के अध्यक्ष अनुराग सिंह देव तथा आयुक्त अवनीश शरण की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित किया गया। ड्रॉ की संपूर्ण प्रक्रिया लॉटरी पद्धति के माध्यम से पारदर्शी एवं निष्पक्ष ढंग से संपन्न कराई गई, जिसका अवलोकन उपस्थित हितग्राहियों एवं अधिकारियों द्वारा किया गया। आवास मेले तथा निर्धारित अवधि में पंजीयन कराने वाले पात्र हितग्राहियों के लिए आयोजित इस विशेष लक्की ड्रॉ में मारुति स्विफ्ट कार, होंडा शाइन मोटरसाइकिल, होंडा एक्टिवा स्कूटी, वाशिंग मशीन, रेफ्रिजरेटर (फ्रिज), एलईडी टेलीविजन सहित अन्य आकर्षक उपहारों के लिए विजेताओं का चयन किया गया। विशेष लक्की ड्रॉ के अंतर्गत बम्पर उपहार "मारुति स्विफ्ट कार" सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले की पूजा बरेठ ने जीती। उन्होंने अटल विहार योजना, दानसरा में एल.आई.जी. भवन क्रमांक-32 बुक कराया था। होंडा शाइन मोटरसाइकिल कोरबा जिले के खरमोरा निवासी रवि प्रकाश राठौर को मिली। उन्होंने अटल विहार योजना अंतर्गत गोकुल नगर, खरमोरा, कोरबा में कमर्शियल-कम-रेजिडेंशियल फ्लैट की दुकान क्रमांक-06 क्रय की है। होंडा एक्टिवा स्कूटी भी खरमोरा, कोरबा के कृष्ण कुमार को प्राप्त हुई। उन्होंने अटल विहार योजना अंतर्गत गोकुल नगर, खरमोरा, कोरबा में एम.आई.जी. फ्लैट ब्लॉक क्रमांक-1, तृतीय तल, फ्लैट क्रमांक एफ-302 बुक किया है। रेफ्रिजरेटर (फ्रिज) की प्रथम विजेता श्रीमती सुषमा गुप्ता रहीं, जिन्होंने अटल विहार योजना, जगदीशपुर में ई.डब्ल्यू.एस. मकान बुक किया है। दूसरा रेफ्रिजरेटर अरुण कुमार प्रधान ने जीता, जिन्होंने वन टाइम सेटलमेंट योजना-2 अंतर्गत अभिलाषा परिसर में एच.आई.जी. फ्लैट बी-सी-604 बुक कराया था। वाशिंग मशीन के विजेताओं में ओम सोनी शामिल हैं, जिन्होंने अटल विहार योजना, बोदरी (बिलासपुर) में ई.डब्ल्यू.एस. मकान क्रमांक-414 बुक किया है। दूसरी वाशिंग मशीन कोहका, तिल्दा की रेणुका घृतलहरे ने जीती। उन्होंने अटल विहार योजना, कोहका-तिल्दा में एरिका पाम एल.आई.जी. स्वतंत्र मकान क्रमांक-126 क्रय किया है। एलईडी टेलीविजन के विजेताओं में गजेन्द्र कुमार यादव शामिल हैं, जिन्होंने पुलगांव फेस-2, दुर्ग में एच.आई.जी. डीएक्स-34 मकान बुक कराया है। दूसरे विजेता संजीत कुमार साह रहे, जिन्होंने सामान्य आवास योजना, सेक्टर-12, नवा रायपुर अटल नगर में जूनियर एम.आई.जी.-1 मकान क्रमांक-555 बुक कराया है। उल्लेखनीय है कि राज्य स्तरीय आवास मेले के दौरान भी प्रतिदिन कूपन के माध्यम से भाग लेने वाले हितग्राहियों के लिए लक्की ड्रॉ आयोजित कर आकर्षक उपहार वितरित किए गए थे। प्रथम दिवस (23 नवम्बर 2025) को हिया साहू ने एलईडी टीवी, गौरव सौंपिपरे ने वाशिंग मशीन तथा राजेन्द्र धृतलहरे ने रेफ्रिजरेटर (फ्रिज) जीता था। वहीं आर.के. साहू, प्रदीप चन्द्रवंशी एवं आनंद जावुलकर ने मिक्सर ग्राइंडर जीता था। इसके अतिरिक्त पांच अन्य विजेताओं ने स्टीम आयरन प्राप्त किया था। द्वितीय दिवस (24 नवम्बर 2025) को जीतेन्द्र कुमार साहू ने एलईडी टीवी, प्रिया कर्मकार ने वाशिंग मशीन तथा विशाल टीकम ने रेफ्रिजरेटर (फ्रिज) जीता था। वहीं त्रिलोचन पांडेय, भुनेश्वरी वर्मा एवं तुलेश्वर भोड़कर ने मिक्सर ग्राइंडर जीता था। इसके अतिरिक्त पांच अन्य विजेताओं ने स्टीम आयरन प्राप्त किया था। तृतीय दिवस (25 नवम्बर 2025) को प्रदीप वर्मा ने एलईडी टीवी, संजय शुक्ला ने वाशिंग मशीन तथा राजा बंजारे ने रेफ्रिजरेटर (फ्रिज) जीता था। वहीं उन्नति पाल, नीलू साहू एवं पवन रेड्डी ने मिक्सर ग्राइंडर जीता था। इसके अतिरिक्त पांच अन्य विजेताओं ने स्टीम आयरन प्राप्त किया था। विशेष लक्की ड्रॉ बम्पर उपहार के चयनित विजेताओं को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उपहार प्रदान किए जाएंगे। उपहार वितरण समारोह 25 जून 2026 को सर्किट हाउस, नवा रायपुर अटल नगर में आयोजित किया जाएगा, जहां विजेताओं को सम्मानपूर्वक उनके उपहार प्रदान किए जाएंगे। मंडल अध्यक्ष अनुराग सिंह देव ने सभी विजेताओं को बधाई देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल राज्य के नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण आवास उपलब्ध कराने तथा हितग्राही-केंद्रित योजनाओं के माध्यम से उन्हें अधिकतम लाभ पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। आयुक्त अवनीश शरण ने सभी हितग्राहियों के प्रति आभार व्यक्त किया तथा कार्यक्रम के सफल आयोजन पर मंडल के सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को बधाई दी । साथ ही उन्होंने भविष्य में भी मंडल की योजनाओं में इसी प्रकार सहभागिता बनाए रखने की अपील सभी हितग्राहियों से की।

पश्चिमी सिंहभूम में वोटर लिस्ट अपडेट को लेकर विशेष पुनरीक्षण अभियान युद्धस्तर पर शुरू

पश्चिमी सिंहभूम  झारखंड में मतदाता सूची (Voter List) को पूरी तरह त्रुटिहीन, पारदर्शी और अपडेटेड बनाने के लिए ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) अभियान की तैयारियां युद्धस्तर पर शुरू हो गई हैं. इसी सिलसिले में निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी-सह-अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) श्रुति राजलक्ष्मी ने सोमवार को कराईकेला में बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLO) के साथ एक हाई-लेवल बैठक की. बैठक में उन्होंने एसआईआर (SIR) प्रक्रिया की बारीकियों को साझा करते हुए सख्त निर्देश दिए कि इस बार लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं होगी और हर पात्र नागरिक का नाम वोटर लिस्ट में जोड़ना सुनिश्चित किया जाएगा. घर-घर दस्तक देंगे बीएलओ, दरवाजे पर चिपकेगा स्टिकर एसडीओ श्रुति राजलक्ष्मी ने साफ शब्दों में कहा कि इस पूरे महा-अभियान की सबसे मजबूत कड़ी बीएलओ की ‘घर-घर दस्तक’ होगी. इस बार प्रक्रिया को बेहद पारदर्शी बनाया जा रहा है. इसके मुताबिक इन्यूमरेशन फॉर्म का वितरण बीएलओ हर घर जाकर फॉर्म बांटेंगे. मतदाता उसे मौके पर ही भरवाकर वापस कलेक्ट करेंगे. पहचान के तौर पर हर घर के बाहर एक विशेष स्टिकर चिपकाया जाएगा. इस स्टिकर पर न सिर्फ मकान संख्या दर्ज होगी, बल्कि संबंधित बीएलओ का नाम और उनका मोबाइल नंबर भी साफ-साफ लिखा होगा. एसडीओ ने बताया कि चुनाव आयोग की इस अनूठी पहल का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि आम जनता को वोटर कार्ड या लिस्ट से जुड़ी किसी भी समस्या के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे. लोग अपने घर के बाहर लगे स्टिकर से नंबर देखकर सीधे अपने बीएलओ से संपर्क कर सकेंगे. पारदर्शिता से ही बनेगी सटीक सूची: बीडीओ बैठक में मौजूद प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) भीषम कुमार ने भी बीएलओ को दो टूक लहजे में अपनी कार्यशैली सुधारने और पूरी जिम्मेदारी से काम करने की हिदायत दी. उन्होंने कहा कि मतदाता सूची को सटीक और अद्यतन (Updated) बनाने का पूरा दारोमदार बीएलओ के कंधों पर है. राज्य स्तर पर पिछले गहन पुनरीक्षण की सूची से मैपिंग का काम शुरू हो चुका है, इसलिए फील्ड वर्क में किसी भी तरह की गड़बड़ी तुरंत पकड़ में आ जाएगी. इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में बीडीओ भीषम कुमार के अलावा प्रखंड सांख्यिकी पदाधिकारी सदानंद होता, कृषि पदाधिकारी विजय सिंह जोंकों सहित बंदगांव प्रखंड क्षेत्र के बड़ी संख्या में बीएलओ और निर्वाचन कर्मी मुख्य रूप से उपस्थित थे.

अमेरिका को चीन का झटका, 46 अमेरिकी कंपनियों को सरकारी खरीद सूची से किया बाहर

बीजिंग  चीन ने 46 अमेरिकी कंपनियों से कोई भी उत्पाद खरीदने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। चीनी वित्त मंत्रालय ने सोमवार को इस आशय की सूची जारी की है। इन कंपनियों में लॉकहीड मार्टिन कॉरपोरेशन भी शामिल है। मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि लागू कानूनों और नियमों के अनुसार, सरकारी खरीद गतिविधियों के दायरे में 46 अमेरिकी कंपनियों के खिलाफ प्रासंगिक कदम उठाने का निर्णय लिया गया है।   चीनी कंपनियों को इन 46 अमेरिकी कंपनियों में बने उत्पादों को खरीदने से रोक दिया गया है, हालांकि चीन में काम कर रहे अमेरिकी निवेश वाले उद्यमों को इससे छूट दी गयी है। चीन ने लॉकहीड मार्टिन पर प्रतिबंध लगाकर एक तरह से अमेरिका को भी संकेत दिया है कि वह अपने मामले में किसी तरह का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं करेगी। गौरतलब है कि लॉकहीड मार्टिन सैन्य विमान और उन्नत तकनीकी हथियारों की दुनिया की सबसे बड़ी निर्माता कंपनी है और यह कंपनी अमेरिकी सरकार के जरिए ताइवान को सबसे ज्यादा हथियारों और सैन्य उपकरणों की आपूर्ति करती है, जबकि चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है।

‘मेडल की खान’ बने हरियाणा के अखाड़े, यहां तैयार हो रहे देश के अगले चैंपियन

झज्जर. हर साल 23 जून को जब पूरी दुनिया अंतरराष्ट्रीय ओलिंपिक दिवस मनाती है, तो झज्जर जिले में इस दिन के मायने कुछ अलग ही नजर आते हैं। झज्जर की हवाओं में केवल फसलों की महक नहीं, बल्कि अखाड़ों की मिट्टी और पसीने की वह सोंधी खुशबू भी घुली है, जिसने देश को कई ओलिंपिक पदक विजेता दिए हैं। झज्जर जिला हरियाणा में कुश्ती के सबसे बड़े केंद्रों में से एक है। जिले में 50 से अधिक निजी और पंजीकृत अखाड़े संचालित हो रहे हैं, जहां पर वर्तमान में 3,000 से अधिक युवा पहलवान सुबह और शाम के सत्रों में कड़ा अभ्यास करते हैं। झज्जर के छारा, खुड्डन, बिरोहड़ और गोरिया जैसे गांवों ने देश को ऐसे नायाब हीरे दिए हैं। छारा गांव की बात करें तो अकेले इस गांव में 5 सक्रिय अखाड़े हैं। यहां का ''लाला दीवान चंद माडर्न कुश्ती एवं योग केंद्र'' देश भर में अपनी एक अलग पहचान रखता है, जिसने बजरंग पूनिया और दीपक पूनिया जैसे अंतरराष्ट्रीय पहलवान देश को दिए हैं। इन अखाड़ों में हरियाणा के ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और महाराष्ट्र तक के युवा आकर ओलंपिक पदक जीतने का सपना संजोए मिट्टी और मैट पर खुद को तपा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चमकने वाले सितारों की गौरवगाथा – मनु भाकर: निशानेबाजी की दुनिया में रचा इतिहास गांव: गोरिया, जिला झज्जर खेल: निशानेबाजी (10 मीटर एयर पिस्टल) प्रमुख उपलब्धि:  पेरिस ओलिंपिक 2024 में दो कांस्य पदक (एकल और मिश्रित टीम) जीतकर एक ही ओलंपिक में दो पदक जीतने वाली पहली भारतीय बनीं। सफलता की कहानी: झज्जर के गोरिया गांव में जन्मी मनु भाकर की कहानी असाधारण एकाग्रता की मिसाल है। उनके पिता राम किशन भाकर मर्चेंट नेवी में चीफ इंजीनियर हैं, जिन्होंने मनु की प्रतिभा को पहचाना और उनके खेल के लिए शुरुआती निवेश किया। मनु ने निशानेबाजी से पहले कराटे, स्केटिंग, टेनिस और मुक्केबाजी में भी हाथ आजमाया था, लेकिन 14 साल की उम्र में उन्होंने पूरी तरह शूटिंग को अपना लिया। टोक्यो ओलिंपिक में पिस्टल खराब होने के कारण लगे बड़े झटके के बाद मनु टूटी नहीं, बल्कि अपने गुरु जसपाल राणा के मार्गदर्शन में रोजाना 12 से 16 घंटे अभ्यास किया। कड़ी तपस्या का परिणाम रहा कि पेरिस के मंच पर उन्होंने दो बार तिरंगा ऊंचा कर झज्जर और पूरे देश का मस्तक गर्व से ऊंचा कर दिया। अमन सहरावत: दुखों के पहाड़ को चीरकर बने सबसे युवा पदक विजेता गांव: बिरोहड़, जिला झज्जर खेल: फ्रीस्टाइल कुश्ती (57 किलोग्राम भार वर्ग) प्रमुख उपलब्धि: पेरिस ओलिंपिक 2024 में कांस्य पदक विजेता, व्यक्तिगत ओलिंपिक पदक जीतने वाले भारत के सबसे युवा खिलाड़ी (21 वर्ष 24 दिन)। सफलता की कहानी: अमन सहरावत का जीवन संघर्ष किसी फिल्म की कहानी से कम नहीं है। मात्र 11 वर्ष की अल्पायु में अमन ने अपने माता-पिता दोनों को खो दिया था। इस भयानक पारिवारिक त्रासदी के बाद वह गहरे अवसाद और तनाव से जूझे, लेकिन उनके दादा मांगेराम और चाचाओं ने उन्हें संभाला। अमन ने दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम में कोच ललित कुमार की देखरेख में अपनी कुश्ती को धार दी। गति और आक्रामक खेल शैली के धनी अमन ने साल 2022 में अंडर-23 विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण जीतकर इतिहास रचा था। ओलिंपिक में देश के शीर्ष पहलवान रवि दहिया को ट्रायल्स में हराकर जगह बनाने वाले अमन ने पेरिस में शानदार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया। वह आज झज्जर के हर उस बच्चे के लिए रोल माडल हैं जो अभावों में जी रहा है। बजंरग पूनिया: मिट्टी से उठकर विश्व स्तर पर धाक जमाने वाले पहलवान गांव: खुड्डन, जिला झज्जर खेल: फ्रीस्टाइल कुश्ती (65 किलोग्राम भार वर्ग) प्रमुख उपलब्धि: टोक्यो ओलिंपिक 2020 में कांस्य पदक विजेता, विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में 4 पदक जीतने वाले भारतीय पहलवान। सफलता की कहानी: खुड्डन गांव के एक साधारण परिवार में जन्मे बजरंग पूनिया के पास बचपन में महंगे खेल उपकरणों के लिए पैसे नहीं थे। उनके पिता बलवान सिंह स्वयं पहलवान थे, जिन्होंने बजरंग को 7 साल की उम्र में स्थानीय मिट्टी के अखाड़े में उतारा। बजरंग की खुराक और दूध-बादाम का खर्च पूरा करने के लिए उनके पिता बस का किराया बचाकर साइकिल से सफर करते थे। बजरंग ने छारा गांव के वीरेंद्र आर्य के अखाड़े से शुरुआत की और बाद में ओलिंपिक पदक विजेता योगेश्वर दत्त को अपना मेंटर माना। राष्ट्रमंडल खेलों और एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाले बजरंग ने टोक्यो ओलंपिक में घुटने की चोट के बावजूद देश को कांस्य पदक दिलाकर अपनी वीरता का परिचय दिया था। दीपक पूनिया: ओलंपिक पदक के बेहद करीब पहुंचने वाले जांबाज गांव: छारा, जिला झज्जर खेल: फ्रीस्टाइल कुश्ती (86 किलोग्राम भार वर्ग) प्रमुख उपलब्धि: टोक्यो ओलंपिक 2020 में चौथे स्थान पर रहे, राष्ट्रमंडल खेल 2022 में स्वर्ण पदक विजेता। सुमित नागल: भारतीय टेनिस के नए सिरमौर गांव: जैतपुर, जिला झज्जर खेल: टेनिस (पुरुष एकल) प्रमुख उपलब्धि: टोक्यो ओलिंपिक 2020 और पेरिस ओलंपिक 2024 में भारत का प्रतिनिधित्व किया, एटीपी चैलेंजर खिताब विजेता और देश के नंबर-1 एकल टेनिस खिलाड़ी।  दो बार के ओलिंपियन सुमित नागल ने विश्व रैंकिंग के शीर्ष 70 खिलाड़ियों में जगह बनाकर यह तक साबित किया कि हरियाणा की माटी टेनिस जैसे खेल में भी वैश्विक स्तर पर कमाल कर सकती है। दीक्षा डागर: बाधाओं को पार कर गोल्फ कोर्स पर रची इबारत मूल संबंध: गांव छप्पार खेल: गोल्फ प्रमुख उपलब्धि: टोक्यो ओलिंपिक 2020 और पेरिस ओलंपिक 2024 में भारत का प्रतिनिधित्व किया, डेफलिंपिक (मूक-बधिर ओलंपिक) में दो बार की स्वर्ण पदक विजेता। – यह यात्रा दर्शाती है कि यदि इरादे मजबूत हों, तो कोई भी शारीरिक कमजोरी आपकी सफलता की राह में रोड़ा नहीं बन सकती। राहुल रोहिल्ला: बहादुरगढ़ (हरियाणा) के रहने वाले है। 20 किलोमीटर रेस वाक (पैदल चाल) में टोक्यो ओलिंपिक में देश का प्रतिनिधित्व किया। सुजीत मान पहलवान, सिदिपुर लोवा भी ओलिंपिक में भाग ले चुके हैं।