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वीज़ा संबंधी प्रामाणिक जानकारी के लिए सरकारी अथवा दूतावास की आधिकारिक वेबसाइट का करें उपयोग

भोपाल विदेश मंत्रालय भारत सरकार द्वारा एडवाइजरी जारी कर विदेशों में रोज़गार और निवास वीज़ा दिलाने के नाम पर सोशल मीडिया पर सक्रिय फ़र्ज़ी वीज़ा एवं माइग्रेशन एजेंसियों से नागरिकों को पूरी तरह सतर्क रहने की सलाह दी गई है। अबू धाबी स्थित भारतीय दूतावास और दुबई एवं उत्तरी अमीरात स्थित भारत के महावाणिज्य दूतावास (कॉन्सुलेट जनरल) को भारतीय नागरिकों से ऐसी कई शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जिनमें भारत से बाहर (संयुक्त अरब अमीरात सहित) संचालित निजी एजेंसियों द्वारा धोखाधड़ी किए जाने के मामले सामने आए हैं। यह एजेंसियाँ सोशल मीडिया पर आकर्षक विज्ञापन देकर विभिन्न देशों में नौकरी या निवास वीज़ा दिलाने का झूठा दावा करती हैं। आवेदकों से भारी शुल्क वसूलने के बाद न तो कोई वीज़ा या सेवा प्रदान की जाती है और न ही धनराशि लौटाई जाती है। नागरिकों से अपील की गई है कि वे केवल सोशल मीडिया विज्ञापनों के आधार पर कोई निर्णय न लें और भारत के बाहर से कार्य कर रही निजी एजेंसियों पर बिना गहन जाँच-पड़ताल के भरोसा न करें। नागरिकों को परामर्श दिया गया है कि वे जिस देश में जाने की योजना बना रहे हैं, भारत स्थित उस देश के दूतावास अथवा वाणिज्य दूतावास से वीज़ा की आवश्यक औपचारिकताओं, आवेदन प्रक्रिया और वैध तरीकों की सीधे पुष्टि करें। किसी भी एजेंसी द्वारा वीज़ा दिलाने के मात्र वादे के आधार पर कोई भुगतान न किया जाए, क्योंकि वीज़ा जारी करने का संपूर्ण अधिकार केवल संबंधित देश की सरकार का होता है और कोई भी एजेंसी इसकी गारंटी नहीं दे सकती। वीज़ा से संबंधित प्रामाणिक और अद्यतन जानकारी के लिए बिचौलियों पर निर्भर रहने के बजाय हमेशा संबंधित देश की सरकारी अथवा दूतावास की आधिकारिक वेबसाइट का ही उपयोग करें।  

सरगुजा के बच्चों में भी देश में पहचान बनाने की प्रतिभा: मंत्री राजेश अग्रवाल

प्रतिभा बड़े शहरों की मोहताज नहीं, सही अवसर और मार्गदर्शन मिले तो सरगुजा का बच्चा भी देश में बना सकता है अपनी अलग पहचान: मंत्री राजेश अग्रवाल मंत्री राजेश अग्रवाल ने सरगुजा जिले के 35 शासकीय स्कूलों में नीट एवं जेईई की निःशुल्क लाइव ऑनलाइन कोचिंग का किया शुभारंभ सरगुजा के 2,120 विद्यार्थियों को दो वर्षों तक मिलेगी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं की गुणवत्तापूर्ण कोचिंग आधुनिक स्मार्ट क्लासरूम, विशेषज्ञ शिक्षकों और एआई आधारित तकनीक से संवरेंगे विद्यार्थियों के सपने रायपुर  सरगुजा जिले के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के डॉक्टर और इंजीनियर बनने के सपनों को साकार करने की दिशा में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल के मार्गदर्शन में एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक पहल की गई है। अब जिले के शासकीय विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को नीट एवं जेईई जैसी प्रतिष्ठित राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बड़े शहरों की ओर रुख करने की आवश्यकता कम होगी। उन्हें अपने विद्यालयों में ही आधुनिक स्मार्ट क्लासरूम, विषय विशेषज्ञ शिक्षकों और नवीनतम डिजिटल तकनीक के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण कोचिंग की सुविधा मिलेगी। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने शनिवार को जिला कलेक्टोरेट सभाकक्ष में आयोजित कार्यक्रम में सरगुजा जिले के 35 शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में नीट एवं जेईई की निःशुल्क लाइव ऑनलाइन कोचिंग का शुभारंभ किया। जिला खनिज संस्थान न्यास एवं स्कूल शिक्षा विभाग के संयुक्त तत्वावधान में शुरू की गई इस महत्वाकांक्षी परियोजना से लगभग 2,120 विद्यार्थियों को दो वर्षों तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का अवसर मिलेगा। यह पहल विशेष रूप से उन प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी, जो आर्थिक एवं भौगोलिक परिस्थितियों के कारण बड़े शहरों में जाकर महंगी कोचिंग प्राप्त नहीं कर पाते। अब सरगुजा के विद्यार्थियों को अपने ही विद्यालय में राष्ट्रीय स्तर के शिक्षकों से पढ़ने, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने और अपनी प्रतिभा को निखारने का अवसर प्राप्त होगा। यह केवल कोचिंग की शुरुआत नहीं, बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव है: मंत्री अग्रवाल कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि यह केवल एक शैक्षणिक परियोजना का शुभारंभ नहीं, बल्कि सरगुजा के हजारों बच्चों के सपनों को नई उड़ान देने का संकल्प है। शिक्षा ही वह सशक्त माध्यम है, जिससे समाज और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य संवारा जा सकता है। हमारा प्रयास है कि सरगुजा का कोई भी प्रतिभाशाली विद्यार्थी केवल संसाधनों और आर्थिक परिस्थितियों के अभाव में अपने सपनों से वंचित न रहे। मंत्री अग्रवाल ने कहा कि शासकीय विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को नीट और जेईई जैसी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बेहतर संसाधन एवं गुणवत्तापूर्ण मार्गदर्शन उपलब्ध कराना हमारी प्राथमिकता है। इस पहल से विद्यार्थियों को विषय विशेषज्ञों का मार्गदर्शन मिलेगा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में आने वाली आर्थिक एवं शैक्षणिक कठिनाइयों को कम करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि प्रतिभा किसी बड़े शहर की मोहताज नहीं होती। सही अवसर, उचित मार्गदर्शन और कठिन परिश्रम करने का हौसला हो तो सरगुजा का बच्चा भी देश में अपनी अलग पहचान बना सकता है। आवश्यकता केवल इस बात की है कि बच्चों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए समान अवसर और उचित संसाधन उपलब्ध कराए जाएं। बड़े सपने देखिए, पूरी मेहनत से उन्हें साकार कीजिए और सरगुजा का नाम रोशन कीजिए: मंत्री अग्रवाल मंत्री अग्रवाल ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए लक्ष्य निर्धारित करना, अनुशासन बनाए रखना और निरंतर मेहनत करना आवश्यक है। पढ़ाई के साथ अच्छा व्यवहार और सकारात्मक सोच  सफलता की महत्वपूर्ण आधारशिला है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि आप बड़े सपने देखिए, उन्हें पूरा करने के लिए पूरी लगन से मेहनत कीजिए और सफलता हासिल कर अपने माता-पिता, विद्यालय, सरगुजा तथा छत्तीसगढ़ का नाम रोशन कीजिए। उन्होंने विद्यालयों के प्राचार्यों को निर्देशित किया कि ऑनलाइन कोचिंग में विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जाए और अभिभावकों को भी बच्चों की पढ़ाई के प्रति जागरूक एवं प्रेरित किया जाए।  35 स्कूलों के 2,120 विद्यार्थियों को मिलेगा दो वर्षों तक विशेषज्ञ शिक्षकों का मार्गदर्शन परियोजना के अंतर्गत शैक्षणिक सत्र 2026-27 एवं 2027-28 के दौरान कक्षा 11वीं विज्ञान संकाय के लगभग 2,120 विद्यार्थियों को दो वर्षों तक लाइव ऑनलाइन कोचिंग उपलब्ध कराई जाएगी। गणित समूह के विद्यार्थी जेईई तथा जीव विज्ञान समूह के विद्यार्थी नीट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर सकेंगे। कोचिंग का संचालन फिजिक्स वाला लिमिटेड द्वारा किया जाएगा। जिले के सभी 35 चयनित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में एक साथ लाइव टू-वे इंटरैक्टिव कक्षाएं संचालित होंगी। हिंदी एवं अंग्रेजी के मिश्रित माध्यम में आयोजित होने वाली इन कक्षाओं में विद्यार्थी विषय विशेषज्ञ शिक्षकों से सीधे संवाद कर अपनी शंकाओं का समाधान भी प्राप्त कर सकेंगे। विद्यार्थियों को लाइव कक्षाओं के साथ रिकॉर्डेड लेक्चर, मोबाइल ऐप, लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम, क्लास नोट्स, मुद्रित अध्ययन सामग्री, प्रश्न बैंक, ऑनलाइन मॉक टेस्ट और ऑल इंडिया टेस्ट सीरीज जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।  एआई तकनीक से होगी विद्यार्थियों की प्रगति की निगरानी, स्मार्ट क्लासरूम में मिलेगी आधुनिक शिक्षा परियोजना की विशेषता यह है कि इसमें विद्यार्थियों की पढ़ाई और प्रदर्शन के आकलन के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जाएगा। एआई आधारित लर्निंग एनालिटिक्स, प्रदर्शन ट्रैकिंग तथा अभिभावक रिपोर्टिंग डैशबोर्ड के माध्यम से विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति की निगरानी की जाएगी। सभी चयनित विद्यालयों में आधुनिक स्मार्ट क्लासरूम की व्यवस्था की गई है। इनमें 75 इंच के 4के इंटरैक्टिव फ्लैट पैनल, कंप्यूटर सिस्टम, वायरलेस माइक्रोफोन, एचडी वेब कैमरा, स्पीकर सिस्टम और कम से कम तीन घंटे के पावर बैकअप की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। कार्यक्रम में सांसद चिंतामणि महाराज ने कहा कि कमजोर आर्थिक परिस्थितियों के कारण अनेक प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए आवश्यक मार्गदर्शन नहीं मिल पाता। ऐसे विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने की यह पहल सराहनीय है। उन्होंने विद्यार्थियों को कड़ी मेहनत और लगन से सफलता प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया। लुण्ड्रा विधायक प्रबोध मिंज ने कहा कि युवाओं के भविष्य को संवारने की दिशा में यह अत्यंत महत्वपूर्ण परियोजना है। उन्होंने विद्यार्थियों से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में अपनी पूरी क्षमता का उपयोग करने का आह्वान किया। राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष विश्व विजय सिंह तोमर ने कहा कि यह पहल सरगुजा जिले … Read more

निजी निवेश, सार्वजनिक-निजी भागीदारी के सरलीकरण से खुलेंगे आवास विकास के नए अवसर

पोर्टल ugconclave.mp.gov.in पर सहभागिता के लिए ऑनलाइन पंजीयन प्रारंभ भोपाल मध्यप्रदेश में तीव्र गति से हो रहे शहरीकरण को दृष्टिगत रखते हुए नागरिकों की आवासीय आवश्यकताओं की समुचित पूर्ति तथा सर्वसुलभ एवं किफायती आवासों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए राज्य सरकार द्वारा बहुआयामी प्रयास किए जा रहे हैं। आगामी 28 अक्टूबर, 2026 को इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में राज्य स्तरीय 'अर्बन कॉन्क्लेव-2026' का आयोजन किया जा रहा है। कॉन्क्लेव में शहरी आवास विकास, निजी निवेश की संभावनाओं, सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) और भविष्य की भावी आवश्यकताओं के अनुरूप शहरों के सुव्यवस्थित नियोजन से जुड़े विभिन्न नीतिगत एवं क्रियान्वयन संबंधी विषयों पर गहन विचार-मंथन किया जाएगा। कॉन्क्लेव से प्रदेश में समावेशी शहरी विकास के नए अवसरों को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) एवं निम्न आय वर्ग (एलआईजी) के परिवारों के लिए सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण और किफायती आवासों की सुलभता सुनिश्चित करने के सतत् प्रयासों को एक नई दिशा प्राप्त होगी। प्रदेश के नगरों में बढ़ती आवासीय माँग को ध्यान में रखते हुए ऐसे प्रगतिशील एवं नवोन्मेषी विकास मॉडलों को अंगीकार करने पर विशेष बल दिया जा रहा है, जिससे समाज के प्रत्येक जरूरतमंद वर्ग को उसकी आर्थिक क्षमता के अनुरूप समुचित आवास उपलब्ध कराए जा सकें। इस दिशा में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी 'प्रधानमंत्री आवास योजना–शहरी 2.0' के दूरगामी उद्देश्यों के सर्वथा अनुरूप आवासीय सुविधाओं का व्यापक विस्तार, शासकीय भूमि का पारदर्शी एवं प्रभावी उपयोग तथा आधुनिक तकनीक आधारित विकास मॉडलों को बढ़ावा दिया जा रहा है। यह अनूठी पहल प्रदेश की दीर्घकालीन आवासीय आवश्यकताओं की पूर्ति करने के साथ ही एक सशक्त, समृद्ध एवं सतत शहरी अधोसंरचना के निर्माण में अत्यधिक सहायक सिद्ध होगी। शहरी आवास विकास के लिए पर्याप्त भूमि की सुलभता सुनिश्चित करने तथा किफायती आवास परियोजनाओं को वित्तीय व व्यावहारिक दृष्टि से अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए विकास संबंधी नियमों एवं प्रावधानों में समयानुकूल सुधार किए जा रहे हैं। इसके अंतर्गत फ्लोर एरिया रेशियो में न्यायसंगत वृद्धि, विभिन्न शुल्कों एवं प्रभारों में विशेष रियायत तथा सार्वजनिक-निजी भागीदारी पर आधारित विकास मॉडलों को प्रोत्साहित करने के लिए अनुकूल वातावरण निर्मित किया जा रहा है। इन दूरदर्शी उपायों से स्थापत्य एवं आवास निर्माण क्षेत्र में निजी पूंजी निवेश की व्यापक संभावनाएं उत्पन्न होंगी। अर्बन कॉन्क्लेव में देश-विदेश के प्रतिष्ठित निवेशकों, विषय विशेषज्ञों, नगरीय विकास निकायों तथा वित्तीय संस्थानों के प्रतिनिधियों की सहभागिता से इस क्षेत्र में नए अवसरों का सूत्रपात होगा। राज्य सरकार द्वारा आवासीय आवश्यकताओं को केवल पारंपरिक निर्माण तक सीमित न रखकर एक समग्र एवं व्यापक दृष्टिकोण से देखा जा रहा है। इसके तहत किफायती किराये के आवासों, औद्योगिक एवं निर्माण श्रमिकों के लिए सुरक्षित आवासीय परिसरों तथा समाज के विभिन्न आय वर्गों की विविध आवश्यकताओं के अनुसार सर्वसुविधायुक्त विकल्पों के विकास पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। इसके साथ ही बस्तियों के पुनर्विकास तथा बुनियादी जन-सुविधाओं का विस्तार कर शहरी निवासियों के जीवन स्तर के उन्नयन के ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। इससे आजीविका की तलाश में शहरों में आगमन करने वाले श्रमिकों सहित प्रत्येक जरूरतमंद वर्ग को सुरक्षित एवं सुविधाजनक आवासीय विकल्प उपलब्ध हो सकेंगे। राज्य स्तरीय अर्बन कॉन्क्लेव शहरी विकास के क्षेत्र से जुड़े राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों, प्रमुख निवेशकों, वित्तीय संस्थानों, नवोन्मेषी स्टार्ट-अप्स तथा ऊर्जावान युवाओं को मध्यप्रदेश में सृजित हो रही अपार विकास संभावनाओं से सीधे जुड़ने का एक सशक्त मंच प्रदान करेगा। कॉनक्लेव में सहभागिता के इच्छुक निवेशक, स्टार्ट-अप्स एवं युवा आधिकारिक पोर्टल https://ugconclave.mp.gov.in/ पर जाकर अपना ऑनलाइन पंजीयन करा सकते हैं। राज्य सरकार की इस दूरदर्शी पहल से प्रदेश के शहरों में सतत, समावेशी एवं आधुनिक विकास का नया अध्याय प्रारंभ होगा।  

बिना ठोस टिप्पणी के शिकायतें बंद करने पर कार्रवाई, PWD के 13 अधिकारियों से मांगा जवाब

सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायतों के निराकरण को लेकर शासन गंभीर शिकायतों को बिना सारगर्भित टीप के बंद किए जाने पर पीडब्लूडी के 13 अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस विभाग ने 15 दिनों में मांगा जवाब   रायपुर नागरिकों द्वारा सीएम हेल्पलाइन-1076 पर दर्ज कराई गई शिकायतों के समाधान को लेकर राज्य शासन बेहद गंभीर है। पोर्टल पर दर्ज शिकायतों का संबंधित विभागों द्वारा सक्रियता और गंभीरता से निराकरण किया जा रहा है। लोक निर्माण विभाग ने सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायतों के असंतोषप्रद समाधान और लापरवाही पर 13 अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इनमें तीन अधीक्षण अभियंता, पांच कार्यपालन अभियंता और पांच अनुविभागीय अधिकारी शामिल हैं। सीएम हेल्पलाइन में दर्ज शिकायतों को बिना सारगर्भित टीप के बंद किए जाने के कारण लोक निर्माण विभाग द्वारा अधिकारियों के विरुद्ध ये कार्रवाई की गई है। सीएम हेल्पलाइन पोर्टल पर विगत दो महीनों अगस्त और सितम्बर माह में लोक निर्माण विभाग से संबंधित शिकायतों की समीक्षा में पाया गया कि एल-1, एल-2 और एल-3 स्तर पर शिकायतों को ऐसी टीप के साथ बंद किया गया है, जो शिकायत का समाधान नहीं दर्शाती है। विभाग ने एल-1 स्तर पर शिकायतों के असंतोषप्रद समाधान पर राष्ट्रीय राजमार्ग उप संभाग बिलासपुर के अनुविभागीय अधिकारी श्री अतुल राज पेगवार, बेमेतरा उप संभाग के अनुविभागीय अधिकारी श्री राजेश कुमार बाजपेयी, पेंड्रा उप संभाग के अनुविभागीय अधिकारी श्री जगदीश प्रसाद, सेतु उप संभाग दुर्ग के अनुविभागीय अधिकारी श्री अशोक कुमार हरियाले और पाटन उप संभाग की अनुविभागीय अधिकारी श्रीमती सोनल ढालेन्द्र को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। एल-2 स्तर पर शिकायतों के उचित निराकरण नहीं होने पर विभाग द्वारा बेमेतरा संभाग के कार्यपालन अभियंता श्री केशव प्रसाद लहरे, कोरबा संभाग के कार्यपालन अभियंता श्री घासीराम जांगड़े, राष्ट्रीय राजमार्ग संभाग बिलासपुर के कार्यपालन अभियंता श्री रोशन कुमार साहू, सारंगढ़ संभाग के कार्यपालन अभियंता श्री प्यारे लाल पैकरा और कांकेर संभाग की कार्यपालन अभियंता श्रीमती प्रज्ञा नंद को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।  इसी प्रकार से सीएम हेल्पलाइन में दर्ज शिकायतों को एल-3 स्तर पर बिना सारगर्भित टीप के बंद किए जाने पर मंडल क्रमांक-2, रायपुर के अधीक्षण अभियंता श्री डी.के. नेताम, दुर्ग मंडल की अधीक्षण अभियंता श्रीमती अर्पणा चौरपगार तथा राष्ट्रीय राजमार्ग मंडल बिलासपुर के अधीक्षण अभियंता श्री महादेव लहरे को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। राज्य शासन ने इन अधिकारियों को जारी कारण बताओ नोटिस में कहा है कि शिकायत बंद करते समय यह अपेक्षित है कि टीप में स्थल निरीक्षण के निष्कर्ष, की गई या प्रस्तावित कार्यवाही, उसकी तिथि या समय-सीमा एवं शिकायतकर्ता को दी गई सूचना का स्पष्ट उल्लेख हो। यदि शिकायत अन्य विभाग से संबंधित हो तो उसका कारण सहित उल्लेख हो। ऐसा नहीं पाए जाने पर टीप से नागरिकों की समस्या का निराकरण नहीं हुआ तथा पोर्टल पर निराकरण के आँकड़े भ्रामक हुए।  लोक निर्माण विभाग ने इसे कर्त्तव्य पालन में लापरवाही और पदीय कर्त्तव्यों का सही ढंग से निर्वहन नहीं किया जाना मानते हुए संबंधित अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। अधिकारियों को अपना लिखित प्रतिवाद नोटिस मिलने के 15 दिनों की समयावधि में लोक निर्माण विभाग के सचिव को प्रस्तुत करने कहा गया है। लिखित प्रतिवाद निर्धारित समयावधि में प्राप्त नहीं होने पर अधिकारियों के विरूद्ध एकपक्षीय कार्यवाही की जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा बयान: बच्चों को इंटरनेट से पूरी तरह दूर नहीं रखा जा सकता

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इंटरनेट के इस्तेमाल को हर व्यक्ति का मौलिक अधिकार बताया है. कोर्ट ने कहा है कि यह अधिकार बच्चों को भी हासिल है. उन्हें इससे पूरी तरह वंचित करना गलत होगा. बेंच ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा और उनकी आजादी एक-दूसरे के खिलाफ नहीं हैं. बच्चों को दोनों का अधिकार है।  सोशल मीडिया और दूसरी ऑनलाइन सेवाओं पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री पर चिंता जताने वाली एक याचिका पर आदेश देते हुए कोर्ट ने यह बातें कहीं हैं. जस्टिस जे बी पारडीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच ने इस तरह की सामग्री की पहचान करने और उसे हटाने की व्यवस्था मजबूत करने का निर्देश दिया है।  इंटरनेट का इस्तेमाल भी मौलिक अधिकार फैसले में जजों ने माना है कि संविधान के अनुच्छेद 21 और 19(1)(a) के तहत इंटरनेट का इस्तेमाल भी एक मौलिक अधिकार है. बच्चों को इंटरनेट से पूरी तरह दूर रखना उनकी सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं का समाधान नहीं हो सकता. इंटरनेट पर बच्चों के लिए कई खतरे हैं, लेकिन उनकी मौजूदगी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की नाकामी है. इसे लेकर कदम उठाए जाने चाहिए।  सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि अगर बच्चों के इंटरनेट के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाया गया तो इसके बुरे परिणाम हो सकते हैं. प्रतिबंध के बावजूद बच्चे इंटरनेट इस्तेमाल कर सकते हैं और ऐसे अनियंत्रित प्लेटफॉर्म पर जा सकते हैं, जहां उनके लिए खतरा ज्यादा हो. प्रतिबंध के चलते बच्चे ऑनलाइन धमकी या शोषण के बारे में माता-पिता या भरोसेमंद लोगों को बताने से भी डर सकते हैं।  बेंच ने कहा कि इंटरनेट विचारों, रचनात्मक अभिव्यक्ति और जानकारी का बड़ा माध्यम है. दूरदराज के इलाकों में रहने वाले कई बच्चों के लिए यह सीखने और जानकारी हासिल करने का एकमात्र साधन हो सकता है. विशेष जरूरतों वाले बच्चों को भी इंटरनेट के जरिए अपने जैसे दूसरे लोगों से जुड़ने का अवसर मिलता है।  शिकायत पर 24 घंटे में देना होगा रेफरेंस नंबर सोशल मीडिया कंपनियों को अपनी वेबसाइट और ऐप पर शिकायत अधिकारी की जानकारी और बच्चों के यौन शोषण से जुड़े मामलों के लिए अलग शिकायत विकल्प देना होगा। हर शिकायत मिलने के 24 घंटे के भीतर रेफरेंस नंबर देना होगा। प्रशिक्षित अधिकारी शिकायत की जांच करेंगे और फैसले के साथ उसका कारण भी बताएंगे। कोर्ट ने केंद्र से आईटी नियमों में जरूरी बदलाव करने को कहा है। नियम तोड़ने वाली कंपनियों पर जुर्माने पर विचार कोर्ट ने आईटी कानून और नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर आर्थिक जुर्माना लगाने की व्यवस्था पर विचार करने को कहा है। जुर्माना तय करते समय उल्लंघन की गंभीरता, अवधि, बार-बार हुई चूक और कंपनी के आकार और कारोबार को ध्यान में रखने का सुझाव दिया गया है। पेड और सब्सक्रिप्शन वाली सेवाओं की भी जांच होगी, ताकि इनके जरिए बच्चों के यौन शोषण से जुड़ा कंटेंट न फैलाया जाए। सरकार से ऐसी सामग्री से हुई कमाई जब्त करने के विकल्प पर भी विचार करने को कहा गया है। स्कूली पढ़ाई में शामिल होगी ऑनलाइन सुरक्षा कोर्ट ने बच्चों को ऑनलाइन खतरे पहचानना, निजी जानकारी सुरक्षित रखना और गलत व्यवहार की शिकायत करना सिखाने पर जोर दिया है। उम्र के हिसाब से सहमति, सुरक्षित-असुरक्षित स्पर्श और ऑनलाइन शोषण जैसे विषय पढ़ाए जाने चाहिए। NCERT और राज्य शैक्षिक संस्थाओं को विशेषज्ञों की मदद से पढ़ाई की सामग्री तैयार करने को कहा गया है। डिजिटल सुरक्षा और उम्र के अनुसार यौन शिक्षा को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने पर भी जोर दिया गया है। केंद्र सरकार को 10 दिसंबर तक देनी होगी रिपोर्ट केंद्र सरकार को निर्देश लागू करने के लिए जरूरी दिशानिर्देश और प्रक्रियाएं तैयार करनी होंगी। जरूरत के मुताबिक आईटी कानून और नियमों में बदलाव भी करने होंगे। सरकार को हलफनामा देकर निर्देशों पर हुई प्रगति की जानकारी देनी है। मामले की अगली सुनवाई 10 दिसंबर 2026 को होगी। डेटाबेस में असली फोटो-वीडियो नहीं, उनकी डिजिटल पहचान होगी जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने निर्देश दिया कि डेटाबेस में बच्चों के यौन शोषण से जुड़े प्रमाणित कंटेंट की डिजिटल पहचान यानी हैश और उन वेबसाइटों के लिंक रखे जाएंगे, जहां यह सामग्री मौजूद है। इसे मौजूदा सहयोग पोर्टल पर या अलग से बनाया जा सकता है।     तीन विशेषज्ञ करेंगे जांच: किसी सामग्री को डेटाबेस में दर्ज करने से पहले उसकी जांच होगी। कम से कम तीन प्रशिक्षित विशेषज्ञ स्वतंत्र रूप से तय करेंगे कि वह बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी है या नहीं। शुरुआती जांच में सॉफ्टवेयर की मदद ली जा सकती है।     गलत जानकारी हटाने की व्यवस्था: जांच का रिकॉर्ड रखा जाएगा। डेटाबेस तक किसने पहुंच बनाई, इसकी जानकारी भी दर्ज होगी और समय-समय पर स्वतंत्र ऑडिट किया जाएगा। गलत तरीके से दर्ज सामग्री को हटाने और इसकी शिकायत करने की व्यवस्था भी बनानी होगी।     एक प्लेटफॉर्म से हटाया कंटेंट दूसरे पर भी पहचाना जाएगा: सोशल मीडिया कंपनियां अपने प्लेटफॉर्म पर मौजूद सामग्री का मिलान डेटाबेस से कर सकेंगी। इससे वही कंटेंट दोबारा अपलोड होने पर भी पहचाना जा सकेगा। कंटेंट हटाने के बाद कंपनियां पुलिस को रिपोर्ट करेंगी कोर्ट ने कहा कि सोशल मीडिया कंपनियों को ऐसे मामलों की जानकारी संबंधित विशेष किशोर पुलिस इकाई (SJPU), स्थानीय पुलिस या साइबर क्राइम पोर्टल को देनी होगी। इसके लिए तीन स्थितियों में अलग समयसीमा तय की गई है।     कंपनी को अपनी जांच में कंटेंट मिले: अज्ञात स्रोत का ऐसा कंटेंट हटाने पर दो घंटे के भीतर रिपोर्ट देनी होगी।     शिकायत के बाद कंटेंट हटाया जाए: शिकायत का निपटारा होने के तुरंत बाद रिपोर्ट देनी होगी। किसी भी स्थिति में इसमें दो घंटे से ज्यादा समय नहीं लगना चाहिए।     डेटाबेस से मिलान होने पर कंटेंट हटे: राष्ट्रीय डेटाबेस में दर्ज सामग्री से मिलान के कारण हटाए गए कंटेंट की जानकारी संबंधित प्राधिकरण को हर सप्ताह एक साथ देनी होगी। कोर्ट ने 2020 और 2025 के फैसले का किया जिक्र इस फैसले में कोर्ट ने 2020 के 'अनुराधा भसीन' और 2025 के 'प्रज्ञा प्रसून' फैसलों का भी ज़िक्र किया है. कोर्ट ने कहा कि इन फैसलों में इंटरनेट के इस्तेमाल से अभिव्यक्ति की आजादी और डिजिटल … Read more

बस्तर के विकास पर अमित शाह का जोर, नक्सलवाद के बाद अब इन चुनौतियों पर रहेगा फोकस

रायपुर  छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद खत्म हो गया है। नक्सलवाद के खात्मे के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बस्तर को लेकर नया प्लान बनाया है। अमित शाह ने कहा कि सरकार नक्सलवाद के शेष निशानों को खत्म करने और बस्तर को एक शांतिपूर्ण तथा समृद्ध क्षेत्र के रूप में बहाल करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में बुनियादी ढांचे और सुविधाओं को बेहतर बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के शासन प्रमुख के तौर पर 25 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में ‘सेवा संकल्प अभियान’ का आयोजन किया गया था। गुरुवार को दिव्यांग के लिए सहायक उपकरणों के वितरण समारोह को अमित शाह ने वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि केवल नक्सलवाद के खत्म होने से “पांच दशकों की पीड़ा” नहीं मिटेगी। पीड़ा का दूर करना सरकार की जिम्मेदारी अमित शाह ने कहा नक्सलवाद को खत्म करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि पांच दशकों में इसके कारण लोगों को जो पीड़ा झेलनी पड़ी है, उसे दूर करना भी सरकार की जिम्मेदारी है। इसका सबसे अधिक असर क्षेत्र के गरीब आदिवासी समुदायों पर पड़ा है। शाह ने कहा कि नक्सलवाद ने बस्तर के गरीब आदिवासी समुदायों को बहुत अधिक पीड़ा पहुंचाई है। उन्होंने कहा, “हमें इस पीड़ा से मिले घावों को भरना होगा, पीड़ितों को फिर से अपने पैरों पर खड़े होने में मदद करनी होगी, और यह सुनिश्चित करना होगा कि वे गरिमा और सम्मान के साथ जी सकें।” ‘नियाद नेल्लनार’ योजना के तहत बस्तर में बुनियादी ढांचे के विस्तार और जरूरी सेवाएं पहुंचाने के लिए काफी प्रयास किए गए हैं। उन्होंने कहा, “बस्तर क्षेत्र के पारंपरिक आदिवासी नेतृत्व ने भी इसमें बड़ा योगदान दिया है।” पुनर्वास के लिए क्या-क्या कदम उठाए गए नक्सलियों के पुनर्वास और प्रभावित क्षेत्रों में बुनियादी सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए उठाए गए कदमों का उल्लेख करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि लगभग 8,526 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। उन्होंने बताया कि 7,328 ऐसे लोगों के बैंक खाते खुलवाए गए जिनके पास खाते नहीं थे जबकि 1,620 लोगों को इनाम की राशि दी गई। उन्होंने कहा कि 7,882 लोगों को प्रोत्साहन राशि दी गई, 455 लोगों को रोजगार मिला और 129 लोगों को जमीन आवंटित की गई। पीएम आवास का मिला लाभ इसके अलावा, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 4014 लाभार्थियों को घर मिले हैं, और 2308 से अधिक आदिवासी लोगों ने कौशल विकास प्रशिक्षण प्राप्त किया है। 6,763 नए राशन कार्ड जारी किए गए हैं, 2,808 परिवारों को मुफ्त बिजली दी गई है, और 372 नयी सड़क परियोजनाओं पर काम शुरू हो गया है। 670 छोटे पुलों का निर्माण कार्य चल रहा है, 48,526 लोगों को आधार कार्ड जारी किए गए हैं, और 44 ग्राम पंचायतों को ‘इलवाड पंचायत पुरस्कार’ के तहत मान्यता दी गई है। सुरक्षा शिविरों को बदला जा रहा है गृह मंत्री ने बताया कि 500 ​​से अधिक सुरक्षा शिविर स्थापित किए गए हैं, जिनमें से 200 से ज्यादा शिविरों को ‘शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा’ में बदल दिया जाएगा। जिन स्थानों पर कभी हमारे सुरक्षाकर्मी आपकी रक्षा के लिए बैठते थे, अब वहीं भारत सरकार और छत्तीसगढ़ सरकार के अधिकारी विकसित बस्तर की नींव रखेंगे। ये सार्वजनिक सेवा केंद्र सरकार को विकसित बस्तर के अपने दृष्टिकोण को साकार करने में मदद करेंगे। उन्होंने कहा कि इन केंद्रों से बच्चों के स्वास्थ्य और शिक्षा संबंधी जरूरतों, युवाओं के रोजगार से जुड़े मुद्दों तथा आदिवासी समुदायों की आर्थिक आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद मिलेगी।

चोट के बाद नीरज चोपड़ा ने दिया बड़ा अपडेट, 2027 में वापसी को लेकर बताया पूरा प्लान

 नई दिल्ली भारत के स्टार जैवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा ने अपने कमबैक को लेकर बड़ा अपडेट दिया है. दो बार के ओलंपिक मेडलिस्ट नीरज ने बताया कि टखने की चोट से अब वह काफी बेहतर महसूस कर रहे हैं और अगले साल यानी 2027 में दमदार वापसी करना चाहते हैं. उनका लक्ष्य अगले सीजन में फिर से अपने प्रदर्शन का स्तर ऊंचा करना है।  नीरज को अगस्त में ट्रेनिंग के दौरान टखने में लिगामेंट टियर (Ankle Ligament Tear) हुआ था. इस चोट के कारण उन्हें 2026 एशियन गेम्स और डायमंड लीग फाइनल से बाहर होना पड़ा. इससे पहले उन्होंने जुसाने डायमंड लीग में 88.05 मीटर का थ्रो किया था और दूसरे स्थान पर रहे थे।  मुंबई में 2026 ऑडी Q3 की लॉन्चिंग के दौरान नीरज ने अपनी रिकवरी पर बात की. उन्होंने कहा- बिल्कुल, ओलंपिक अभी कुछ समय दूर हैं, क्योंकि ये 2028 में होने हैं. जैसा कि आप जानते हैं, मुझे चोट लगी थी और अब मैं वापसी की तैयारी कर रहा हूं. मेरा चोटिल टखना अब काफी बेहतर महसूस कर रहा है और रिकवरी भी अच्छी चल रही है।  नीरज ने आगे कहा- फिलहाल मेरा मुख्य फोकस अगले साल दमदार वापसी करने और उन प्रदर्शनों को हासिल करने पर है, जो मैं अब तक नहीं कर पाया हूं।  यशवीर और रोहित के प्रदर्शन से खुश नीरज एशियन गेम्स 2026 में हिस्सा नहीं ले पाने के बावजूद नीरज को भारतीय जैवलिन थ्रोअर के प्रदर्शन से खुशी मिली. नागोया में हुए इन खेलों में यशवीर सिंह ने सिल्वर और रोहित यादव ने ब्रॉन्ज मेडल जीता. यशवीर ने 85.72 मीटर का अपना सर्वश्रेष्ठ थ्रो किया, जबकि रोहित का सर्वश्रेष्ठ थ्रो 84.35 मीटर रहा. श्रीलंका के रुमेश पथिरागे ने 88.55 मीटर के थ्रो के साथ गोल्ड मेडल जीता।  2023 के हांगझोऊ एशियन गेम्स में नीरज ने 88.88 मीटर के थ्रो के साथ गोल्ड जीता था, जबकि किशोर जेना ने 87.54 मीटर के थ्रो के साथ सिल्वर अपने नाम किया था. उस समय भारत ने इस स्पर्धा में गोल्ड और सिल्वर दोनों मेडल जीते थे. 2026 में नीरज और किशोर, दोनों के नहीं खेलने के बावजूद भारतीय खिलाड़ियों ने दो मेडल जीतने का सिलसिला जारी रखा।  नीरज ने कहा- मुझे लगता है कि सिर्फ यशवीर ही नहीं, रोहित ने भी शानदार प्रदर्शन किया. पिछले खेलों में हमने दो मेडल जीते थे, एक गोल्ड और एक सिल्वर. इस बार किशोर और मेरे नहीं खेलने के बावजूद हम दो मेडल जीतने में सफल रहे।  उन्होंने आगे कहा- इन नए और युवा खिलाड़ियों का उभरना भारत के लिए बहुत सकारात्मक संकेत है. यह दिखाता है कि हमारे देश में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है. मैं उन्हें भविष्य के लिए शुभकामनाएं देता हूं. मैं बस उनसे यही कहना चाहूंगा कि अपना ध्यान रखें, चोट से बचें और अपने गेम को इंजॉय करें। 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विजयवाड़ा में उद्योगपतियों और निवेशकों से की चर्चा

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश में निवेश के नए अवसरों और औद्योगिक साझेदारियों को प्रोत्साहित करने की दिशा में विजयवाड़ा, आंध्र प्रदेश में प्रमुख उद्योगपतियों एवं निवेशकों से वन-टू-वन चर्चा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बैठकों के दौरान निवेशकों और उद्योगपतियों से मध्यप्रदेश में उपलब्ध निवेश की व्यापक संभावनाओं, अनुकूल औद्योगिक वातावरण तथा उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार द्वारा लागू की गई विभिन्न उद्योग मित्र नीतियों की जानकारी साझा की।  

भारत-न्यूजीलैंड ट्रेड डील का असर, शराब और कीवी समेत कई आयातित उत्पादों पर घटेगा टैक्स

नई दिल्‍ली भारत और न्‍यूजीलैंड के बीच फ्री ट्रेड डील का ऐलान पहले ही किया जा चुका है, लेकिन अभी तक भातर की ओर से किन-किन वस्‍तुओं पर कितना टैक्‍स छूट होगा, इसके बारे में नोटिफाई जारी नहीं किया गया था. हालांकि, अब भारत ने न्यूजीलैंड के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के तहत आयातित वस्तुओं पर सीमा शुल्क में पहली छूट की घोषणा कर दी है।  इस ऐलान के साथ ही शराब, मनुका शहद, कीवी फल और भेड़ के मांस सहित अन्य उत्पादों पर रियायती दरें 20 अक्टूबर से लागू हो रही हैं. वित्त मंत्रालय की 16 अक्टूबर के नोटिफ‍िकेशन में कुछ खास वस्तुओं के लिए संशोधित मूल सीमा शुल्क और टैक्‍स रेट तय कर दी गई हैं. ये छूट नोटिफिकेशन में लिस्‍टेड उत्पादों, तय दरों और शर्तों के अधीन लागू होती हैं।   भेड़ का मांस पर कोई शुल्‍क नहीं लगता  नोटिफिकेशन के अनुसार, टैरिफ के तहत आने वाले ताजे, ठंडे और जमे हुए भेड़ के मांस पर शून्‍य टैरिफ, एग्रीकल्‍चर इंफ्रा एंड डेवलप टैक्‍स (AIDC) और हेल्‍थ टैक्‍स लगेगा. 2.50 डॉलर प्रति किलोग्राम या उससे अधिक कीमत के पात्र कीवी फलों के आयात पर 15% की दर से टैक्‍स लगेगा. यह छूट लागू उत्पाद क्‍लारिफिकेशन और आयात के लिए तय शर्तों के अधीन है. कई मछलियों पर टैक्‍स 25.71 फीसदी का लागू होगा, ज‍बकि एआईडीसी और स्वास्थ्य उपकर शून्य होंगे।  हालांकि, लागू दर विभिन्न शुल्क श्रेणियों में भिन्न होती है, इसलिए उपलब्ध छूट आयातित उत्पाद के क्‍लियरिफिकेशन पर निर्भर करेगी. इस नोटिफिकेशन में आयात शुल्क को पूरी तरह से हटाने के बजाय कुछ खास टैरिफ और उपकरों से राहत दी गई है. आयातकों को हर खेप पर लागू दर जानने के लिए संबंधित टैरिफ की जांच करनी होगी।  चुनिंदा उत्‍पादों को ही छूट  इस नोटिफिकेशन में टैरिफ रेट कोटा का भी प्रावधान है, जिसके तहत चुनिंदा उत्‍पादों को ही भारत में रियायती दरों पर एंट्री की अनुमति दी गई है. आयातकों को खास प्रोडक्‍ट्स की जरूरतों को पूरा करना होगा और छूट के लिए पात्र होने के लिए न्‍यूजीलैंड बेसिक का प्रमाण पेश करना होगा. ये उपाय संवेदनशील क्षेत्रों के लिए छूट बरकरार रखते हुए चुनिंदा न्यूजीलैंड आयातों तक सीमित पहुंच प्रदान करते हैं. डेयरी उत्पाद और प्रमुख कृषि उत्पाद रियायतों से बाहर रहेंगे।  सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 की धारा 25(1) के तहत राजस्व विभाग द्वारा जारी 16 अक्टूबर की अधिसूचना में भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते के तहत सीमा शुल्क रियायतों के पहले सेट के लिए लागू दरें और शर्तें निर्धारित की गई हैं। 

तीन साल पहले मुंबई में हुआ था चार्टर विमान हादसा, अजित पवार प्लेन क्रैश से क्या है कनेक्शन?

 मुंबई सितंबर 2023 में मुंबई एयरपोर्ट पर हुए वीएसआर चार्टर फ्लाइट क्रैश लैंडिंग मामले में एयर एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो यानी AAIB ने अपनी फाइनल रिपोर्ट जारी कर दी है। रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि अनस्टेबलाइज़्ड अप्रोच के कारण क्रैश लैंडिंग हुई, VSR विमान के रनवे पर फिसलने के बाद दो क्रू मेंबर और 6 यात्रियों को गंभीर चोटें आईं. AAIB की अंतिम रिपोर्ट में बताया गया है कि फ़्लाइंग क्रू ने SOP का पालन नहीं किया और VSR एयरलाइंस ने आंतरिक ऑडिट ठीक से नहीं किए. इसी कंपनी का लियरजेट बारामती में क्रैश हो गया था, जिसमें महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार और अन्य लोगों की मौत हो गई थी।  AAIB ने बताया 14 सितंबर 2023 को एक नॉन-शेड्यूल पैसेंजर फ्लाइट विशाखापत्तनम से मुंबई आई थी. विशाखापत्तनम से टेक-ऑफ सामान्य था और उड़ान के दौरान कोई समस्या नहीं हुई. इसके बाद विमान को रनवे 27 पर लैंड करने की मंज़ूरी दी गई. लैंडिंग के समय मुंबई एयरपोर्ट पर भारी बारिश के कारण विजिबिलिटी कम हो गई थी। अप्रोच के दौरान, विमान स्थिर नहीं था और शुरू में रनवे के बाईं ओर हट गया और उसके बाद लगातार रनवे 27 के दाईं ओर ड्रिफ्ट होता चला गया. ऑटोपायलट के डिस्कनेक्ट होने के लगभग 40 सेकंड बाद, कॉकपिट में स्टिक शेकर अलर्ट बजा और साथ ही स्टॉल की चेतावनी भी मिली।  इसके बाद, EGPWS चेतावनियां मिलीं और विमान टैक्सीवे W और टैक्सीवे N के इंटरसेक्शन के किनारे पर क्रैश लैंड हुआ. इसके बाद विमान फिसला और टैक्सीवे U और टैक्सीवे N के इंटरसेक्शन के पास एक कच्ची जगह (स्टैंड C80 के पास) में रुका. क्रैश के बाद आग लग गई और दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग बुझाई।  विमान में सवार सभी लोगों को बाहर निकाला गया, लेकिन उन्हें टक्कर के कारण कई चोटें आईं और उन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया।  दुर्घटना का संभावित कारण फ़्लाइट क्रू का खराब मौसम की स्थिति में भी अन-स्टेबलाइज़्ड अप्रोच जारी रखने का फैसला और विमान को गलत तरीके से संभालना बताया जा रहा है, जिसके कारण कम ऊंचाई पर  एरोडायनामिक स्टॉल हुआ और विमान उससे उबर नहीं पाया।