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रोबोटिक्स में बड़ा बदलाव: Figure AI में इंसानों से ज्यादा हुए ह्यूमनॉयड रोबोट्स

आखिरकार एक कंपनी में इंसानों की तुलना में ह्यूमनॉयड रोबोट्स की संख्या ज्यादा हो गई है. फिगर AI नाम की कंपनी के सीईओ ने खुद पोस्ट करके बताया है कि उनके कर्मचारियों की संख्या में अब इंसानों से ज्यादा ह्यूमनॉयड रोबोट्स शामिल हो चुके हैं. अब कंपनी के पास कुछ ही इंसान बतौर कर्मचारी बचे हुए हैं. X प्लेटफॉर्म (पुराना नाम Twitter) पर फिगर AI के सीईओ ब्रेट एडॉक ने ऐलान किया है कि उनकी कंपनी के वर्कफॉर्स में बड़ा बदलाव है. उन्होंने पोस्ट में लिखा, फिगर AI में पहली बार रोबोट की संख्या इंसानों से ज्यादा हो गई है. सीईओ ने पोस्ट में एक ग्राफ भी दिखाया है, जिसमें साफ दिखाया गया है कि कैसे अचानक से इंसानों की तुलना में रोबोट्स कर्मचारियों की संख्या में इजाफा हुआ है. फिगर AI के सीईओ ब्रेट एडॉक का पोस्ट पोस्ट में शेयर किए गए ग्राफ पर टाइटल दिया है कि हेडकाउंट बनाम रोबोट्स. ग्राफ के अंदर दो ट्रैक को दिखाया है, जिसमें एक रोबोट और दूसरा इंसान को दिखाता है. साल 2022 से 20226 तक का डेटा दिखाने की कोशिश की है. ग्राफ में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि साल 2025 के पहले क्वार्टर में संख्या बहुत ही धीरे-धीरे बढ़ रही है. इसके बाद साल 2025 के चौथे क्वार्टर में रोबोट्स की संख्या में तेजी से उछाल देखा है, फिर साल 2026 के दूसरे क्वार्टर में यह संख्या इंसानी कर्मचारियों से भी आगे निकल चुकी है. रोबोट्स की फोटो भी पोस्ट की फिगर AI के सीईओ ने अलग पोस्ट में एक इमेज भी शेयर की है, जिसमें उन्होंने लिखा है कि पावर ऑन और फोटो में रोबोट्स को दिखाया गया है. दर्जनों रोबोट्स बॉक्स के अंदर हैं. कई कंपनियां कर रही हैं छंटनी दुनिया में बहुत सी कंपनियां हैं, जहां इंसान कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है, जबकि रोबोट्स/आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) पर जोर है. हालांकि कई रिपोर्ट्स में ये भी दावा किया है कि इंसानों की तुलना में AI की सर्विस कंपनियों के लिए ज्यादा खर्चीली पढ़ रही है. Figure AI क्या है? Figure AI, असल में एक रोबोटिक्स स्टार्टअप है, जो हाल ही में वायरल भी हो चुकी है. इस कंपनी के रोबोट फिगर 3 रोबोट को बतौर इन्टर्न रखा, जो 8 घंटे की शिफ्ट तक कर रहा है.

कनाडा से पंजाबियों को राहत! नए रिफ्यूजी नियम लागू, अवैध एंट्री के बाद भी मिलेगा असाइलम का मौका

जालंधर कनाडा में रह रहे पंजाबियों को कनाडा सरकार ने वीजा नियमों में राहत दी है। इमिग्रेशन, रिफ्यूजीज एंड सिटीजनशिप कनाडा (IRCC) ने बिल C-12 के तहत 6 नए नियम लागू किए हैं। नए नियमों के अनुसार अब कनाडा पहुंचने के 14 दिन के अंदर शरणार्थी का दावा किया जा सकता हैं।  IRCC के अनुसार, ये बदलाव सिस्टम में बढ़ रहे आवेदनों के बोझ को कम करने, प्रशासनिक देरी को समाप्त करने और इमिग्रेशन व्यवस्था सही करने के लिए किए गए हैं। इससे केवल जरूरतमंदों को समय पर सुरक्षा मिल सकेगी। इन बदलावों से जो लोग तय समय-सीमा के कारण अयोग्य माने जाएंगे, उनके लिए भी प्री-रिमूवल रिस्क असेसमेंट (PRRA) का सुरक्षा विकल्प बरकरार रहेगा, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि किसी को भी ऐसे स्थान पर न भेजा जाए, जहां उसे जान का जोखिम हो। पहले रिफ्यूजी वीजा के लिए अप्लाई करने की सीमा एक साल थी। इससे इमिग्रेशन एंड रिफ्यूजी बोर्ड (IRB) के पास पेंडिंग मामलों का अंबार लग गया था। इससे वास्तविक जरूरतमंदों को भी सुनवाई के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता था। कनाडा इमिग्रेशन के 6 प्रमुख बदलाव…     शरणार्थी दावे के लिए एक साल का नियम: अब कोई भी व्यक्ति कनाडा में आने के एक साल के भीतर ही शरण (Asylum claim) के लिए दावा कर सकता है। यदि कोई व्यक्ति कनाडा में आने के एक साल बाद दावा करता है, तो उसके मामले को इमिग्रेशन एंड रिफ्यूजी बोर्ड (IRB) के पास नहीं भेजा जाएगा और वह अयोग्य माना जाएगा।     अवैध रूप से सीमा पार करने वालों के लिए 14 दिन की समय-सीमा: यदि कोई व्यक्ति अमेरिका से कनाडा की सीमा को आधिकारिक चेकपोस्ट से अलग किसी अन्य रास्ते से पार करता है, तो उसे 14 दिनों के भीतर शरण का दावा करना अनिवार्य है। 14 दिनों के बाद किए गए दावे पर विचार नहीं किया जाएगा।     आवेदन प्रक्रिया का आधुनिकीकरण: शरणार्थी प्रणाली को तेज और आसान बनाने के लिए अब ऑनलाइन आवेदन को बढ़ावा दिया जा रहा है। सरकार केवल उन्हीं आवेदनों को स्वीकार करेगी, जो पूरी तरह से दस्तावेजों के साथ तैयार होंगे, ताकि प्रक्रिया में अनावश्यक देरी न हो।     डेटा साझा करने का अधिकार: अब इमिग्रेशन विभाग (IRCC) के पास यह कानूनी अधिकार है कि वह शरणार्थियों से संबंधित जानकारी अन्य सरकारी विभागों (प्रांतीय और संघीय) के साथ साझा कर सके। इसका उद्देश्य सरकारी सेवाओं में बेहतर तालमेल बिठाना और सुरक्षा को पुख्ता करना है।     इमिग्रेशन दस्तावेजों में किया जा सकता बदलाव: जनहित को ध्यान में रखते हुए सरकार के पास अब वीजा, वर्क परमिट या स्टडी परमिट जैसे दस्तावेजों को रद्द करने, निलंबित करने या बदलने की व्यापक शक्तियां हैं। ऐसा कोई भी निर्णय लेने से पहले सरकार को संसद में इसकी जानकारी देनी होगी।     देश निकाले से पहले जोखिम का मूल्यांकन होगा: जो लोग नए नियमों के कारण शरण के लिए अयोग्य पाए जाते हैं, उनके लिए भी एक सुरक्षा विकल्प मौजूद है। इसे प्री-रिमूवल रिस्क असेसमेंट कहते हैं, जो यह सुनिश्चित करता है कि किसी को भी ऐसे देश में वापस न भेजा जाए, जहां उसे जान का खतरा या उत्पीड़न का डर हो। आपराधिक मामले में छूट नहीं मिलेगी रिफ्यूजी के लिए वे लोग अप्लाई करते हैं जो कनाडा के नियम पूरे न करने पर (पूरा टैक्स न देने, पेपर क्लीयर न करने के कारण) अपना पीआर अप्लाई नहीं कर पाते। रिफ्यूजी के तहत बिना पीआर के भी रह सकते हैं। हालांकि, आपराधिक मामले में छूट नहीं मिलेगी।

NEET परीक्षा से जुड़े इनपुट पर STF का एक्शन, रोहतक में दो डॉक्टर समेत तीन लोग हिरासत में

रोहतक. नीट परीक्षा पेपर संबंधित सूचना पर सोनीपत एसटीएफ ने रोहतक के दो चिकित्सकों और एक शिक्षक से करीब 13 घंटे तक गहन पूछताछ की। हालांकि प्रारंभिक जांच में लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम-2024 के उल्लंघन से संबंधित कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिलने पर तीनों को छोड़ दिया गया है। जानकारी के अनुसार एसटीएफ को सूचना मिली थी कि नीट परीक्षा के नाम पर प्रश्नपत्र बेचने अथवा अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ पहुंचाने की योजना बनाई जा रही है। इसी सूचना के आधार पर टीम ने रोहतक में छापेमारी कर एक निजी अस्पताल से जुड़े दो चिकित्सकों और एक शिक्षक को पकड़ कर पूछताछ की। हालांकि मामला अस्पताल में लेन-देन से संबंधित बताया गया है। पूछताछ के दौरान एसटीएफ ने तीनों के मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रानिक उपकरणों की जांच की। जांच एजेंसियों को फोन में परीक्षा की तैयारी से जुड़े प्रश्न और अध्ययन सामग्री तो मिली, लेकिन अब तक ऐसा कोई दस्तावेज या प्रश्नपत्र बरामद नहीं हुआ है जिसे नीट परीक्षा का वास्तविक पेपर माना जा सके। डीएसपी सांपला राकेश कुमार ने बताया कि अभी तक की जांच में किसी प्रकार का आपराधिक मामला दर्ज करने योग्य साक्ष्य सामने नहीं आया है। इसलिए फिलहाल कोई एफआइआर दर्ज नहीं की गई है। हालांकि मामले की जांच अगले 14 दिन तक जारी रहेगी और संबंधित व्यक्तियों को जांच में सहयोग करने के निर्देश दिए गए हैं। मामले के सभी पहलुओं की गहनता से जांच की जा रही है और आवश्यकता पड़ने पर आगे भी पूछताछ की जाएगी।

उबले अंडे दोबारा गर्म करना कितना सुरक्षित? जानिए सही तरीका और सावधानियां

अक्सर लोग सुबह हेल्दी नाश्ता करने के कारण या फिर सुबह की जल्दबाजी में अंडे खाना पसंद करते हैं क्योंकि उन्हें पकाना काफी आसान है. लेकिन कई लोग बार-बार पकाने या उबालकर रखने के चक्कर में एक साथ अंडे उबाल लेते हैं और उन्हें फ्रिज में रख देते हैं. बाद में जब उन्हें खाना होता है तो वे फ्रिज से निकालकर अंडों को दोबारा गर्म या उबालने लगते हैं. वैसे तो बचे हुए खाने को दोबारा गर्म करना एक नॉर्मल बात है लेकिन अंडों के मामले में थोड़ी सावधानी बरतना बहुत जरूरी है. ऐसा करना कितना सही है? इस बारे में सभी को जानना काफी जरूरी है क्योंकि गलत तरीका आपकी सेहत के लिए भी बेहद खतरनाक साबित हो सकता है. क्या अंडे दोबारा गर्म करना सेफ है? Healthline के अनुसार, पहले से उबले या पके हुए अंडों को दोबारा गर्म करना पूरी तरह से सुरक्षित है बस उन्हें सही तरीके से स्टोर किया गया हो. उबले हुए अंडों को पकाने के बाद 2 घंटे के अंदर फ्रिज में रख देना चाहिए. दोबारा गर्म करते समय अंडे का तापमान कम से कम 74 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचना चाहिए ताकि उसमें मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया जैसे साल्मोनेला पूरी तरह खत्म हो सकें. यदि अंडा लंबे समय तक कमरे के तापमान पर बाहर रखा रहा हो तो उसे दोबारा गर्म करके खाने की भूल बिल्कुल न करें. माइक्रोवेव में भूलकर भी न करें गर्म उबले हुए अंडे को दोबारा गर्म करने का सबसे आसान तरीका लोगों को माइक्रोवेव लगता है जो कि सबसे बड़ी गलती है. ब्रिटिश फूड सेफ्टी एक्सपर्ट वेबसाइट Commodious के मुताबिक, साबुत उबले अंडे को माइक्रोवेव में कभी भी गर्म नहीं करना चाहिए. दरअसल, माइक्रोवेव की वेव्स अंडे के अंदर मौजूद पानी के मॉलिक्यूल्स को तेजी से भाप में बदल देती हैं. चूंकि अंडे का छिलका या उसका सफेद हिस्सा इस भाप को बाहर नहीं निकलने देता इसलिए अंडे के अंदर बहुत ज्यादा प्रेशर बन जाता है. जैसे ही आप इसे खाने के लिए काटते हैं या मुंह में लेते हैं, यह बम की तरह फट सकता है जिससे चेहरा जलने का गंभीर खतरा रहता है. अंडा दोबारा गर्म करने का सही तरीका क्या है? अगर आप उबले हुए अंडे को दोबारा गर्म और फ्रेश करना चाहते हैं तो इसके लिए सबसे सुरक्षित तरीका है उबलते पानी का इस्तेमाल करना. इसके लिए सबसे पहले एक गहरे बर्तन में पानी उबाल लें और गैस बंद कर दें. अब उबले हुए अंडों (बिना छिलका उतारे) को उस गर्म पानी में डाल दें और बर्तन को 10 मिनट के लिए ढककर छोड़ दें. इस तरीके से अंडे के अंदर की नमी बरकरार रहती है, उसका टेक्सचर रबर जैसा नहीं होता और वह बिना किसी ब्लास्ट के रिस्क के अंदर तक अच्छी तरह गर्म हो जाता है.

नहर टूटने से गुरदासपुर में हाहाकार, कई घर जलमग्न; बाढ़ जैसे बने हालात

गुरदासपुर. पंजाब सरकार की ओर से नहरों को मजबूत करने और सिंचाई व्यवस्था बेहतर बनाने के किए जा रहे दावों के बीच गुरदासपुर जिले के सठियाली हेड वर्क्स के पास अपर बारी दोआब नहर में बड़ा कटाव हो गया। नहर में करीब 40 फीट से अधिक चौड़ा कट लगने के कारण पानी आसपास के घरों, खेतों और रिहायशी इलाकों में फैल गया, जिससे लोगों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार नहर रात के समय टूटी। नहर विश्राम गृह में रहने वाले प्रवासी मजदूरों ने बताया कि रात करीब 3 बजे अचानक उनके कमरों में पानी भरना शुरू हो गया। इसके बाद पता चला कि नहर टूट चुकी है। तेज बहाव के साथ पानी श्री हरगोबिंदपुर-गुरदासपुर मार्ग को पार करता हुआ आसपास के घरों और खेतों में जा घुसा। नहर टूटने से किसानों की हाल ही में लगाई गई धान की फसल पूरी तरह पानी की चपेट में आ गई है। घटना की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंच गए और प्रभावित परिवारों के लिए हालात चिंताजनक बने हुए हैं। प्रभावित निवासी तरसेम सिंह, सुरजीत सिंह और अन्य लोगों ने बताया कि घरों में पानी घुसने से खाने के लिए रखी गेहूं, घरेलू सामान और अन्य कीमती वस्तुएं खराब हो गई हैं। प्रभावित लोगों और किसानों ने पंजाब सरकार से की मांग  उन्होंने कहा कि नुकसान का सही आकलन अभी करना संभव नहीं है, लेकिन यह लाखों रुपये तक पहुंच सकता है। इस संबंध में मौके पर मौजूद नहरी विभाग के अधिकारियों से बातचीत करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने तुरंत कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। वहीं, एक निजी ठेकेदार की भारी पोकलेन मशीनों की मदद से नहर के कटाव को बंद करने का काम जारी है। हालांकि नहर में पानी का बहाव लगातार जारी रहने के कारण मरम्मत कार्य में मुश्किलें आ रही हैं। किसानों ने बताया कि कुछ दिन पहले लगाई गई धान की फसल पानी में डूब गई है और इसके बचने की संभावना बेहद कम है। किसानों ने चिंता जताई कि उनके पास दोबारा धान लगाने न तो पौध उपलब्ध है और न ही नुकसान की भरपाई का कोई भरोसा दिया गया है। प्रभावित लोगों और किसानों ने पंजाब सरकार तथा जिला प्रशासन से मांग की है कि नुकसान का तुरंत सर्वे करवाकर उचित मुआवजा दिया जाए और नहर की मजबूती के लिए स्थायी प्रबंध किए जाएं, ताकि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो।

‘कॉकटेल 2’ ने वीकेंड पर मचाया धमाल, 3 दिनों में 75 करोड़ के पार पहुंची कमाई

सिनेमाघरों में एक बार फिर लव ट्राएंगल का जादू लौट आया है. बॉलीवुड स्टार शाहिद कपूर, कृति सेनन और रश्मिका मंदाना की मच-अवेटेड फिल्म 'कॉकटेल 2' को ऑडियंस से अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है. ये ही वजह है कि महज 3 दिनों में कमाई 75 करोड़ रुपये पार हो गई है. कुल मिलाकर फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर पहले वीकेंड में शानदार कमाई की. हालांकि, फिल्म को लेकर समीक्षकों और दर्शकों की राय थोड़ी बंटी हुई नजर आ रही है, लेकिन इसके बावजूद बॉक्स ऑफिस पर फिल्म लगातार अपने पैर जमाए हुए है. खासकर वीकेंड पर फिल्म ने अच्छी रफ्तार पकड़ी है, जिससे मेकर्स ने थोड़ी राहत की सांस जरूर ली होगी. तीसरे दिन बॉक्स ऑफिस पर दिखा उछाल Sacnilk की रिपोर्ट के मुताबिक, 'कॉकटेल 2' ने अपनी रिलीज के तीसरे दिन यानी रविवार को घरेलू बॉक्स ऑफिस पर शानदार बढ़त हासिल की है. रविवार को देशभर के करीब 10,462 शोज़ से फिल्म ने 17.75 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन किया. अगर इसकी तुलना दूसरे दिन (शनिवार) की कमाई से करें, जहां फिल्म ने 16.25 करोड़ रुपये कमाए थे, तो रविवार को इसके बिजनेस में 9.2% का उछाल देखने को मिला है. यह आंकड़े साफ करते हैं कि वीकेंड का फिल्म को भरपूर फायदा मिला है. तीन दिनों में कुल इतनी हुई कमाई शुरुआती तीन दिनों के सफर के बाद अब फिल्म का भारत में कुल नेट कलेक्शन 47.50 करोड़ रुपये के आंकड़े तक पहुंच गया है. वहीं, अगर भारत में इसके ग्रॉस कलेक्शन की बात करें, तो यह अब तक 57 करोड़ रुपये हो चुका है. भारतीय दर्शकों के साथ-साथ विदेशी बाजारों में भी फिल्म को ठीक-ठाक रिस्पॉन्स मिल रहा है. तीसरे दिन फिल्म ने विदेशों से 4 करोड़ रुपये बटोरे, जिससे इसका कुल ओवरसीज ग्रॉस कलेक्शन 19.25 करोड़ रुपये हो गया है.  इन सभी आंकड़ों को मिलाकर 'कॉकटेल 2' का अब तक का कुल वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन 76.25 करोड़ रुपये हो चुका है. भारी-भरकम बजट बना चुनौती भले ही फिल्म का कलेक्शन लगातार बढ़ रहा है, लेकिन इसकी राह इतनी आसान नहीं है. 'कॉकटेल 2' का कुल बजट करीब 150 करोड़ रुपये बताया जा रहा है. इस भारी-भरकम बजट के लिहाज से फिल्म की इस शुरुआती कमाई को बहुत ज्यादा मजबूत नहीं, बल्कि एक मिला-जुला रिस्पॉन्स माना जा रहा है. वीकेंड पर फिल्म ने अपनी पकड़ तो मजबूत रखी है, लेकिन अपनी लागत निकालने और मुनाफे की तरफ बढ़ने के लिए इसे आने वाले वर्किंग डेज (सोमवार से गुरुवार) में भी इसी तरह की मजबूत रफ्तार बनाए रखनी होगी. क्या है फिल्म की दिलचस्प कहानी? होमी अदजानिया की डायरेक्ट की गई फिल्म 'कॉकटेल 2' कुणाल (शाहिद कपूर) और दिया (रश्मिका मंदाना) की कहानी है, जो बचपन के प्रेमी हैं. हालांकि उनके बीच गहरा रिश्ता है, लेकिन वे शादी की तरफ अगला कदम बढ़ाने से हिचकिचाते हैं. सिसिली में छुट्टियों के दौरान उनकी जिंदगी में एक अनपेक्षित मोड़ आता है, जहां वे दिया की करीबी दोस्त एली (कृति सेनन) से दोबारा मिलते हैं. एली उन्हें अपने ट्रैवल प्लान छोड़कर उसके साथ समय बिताने के लिए मना लेती है. अब इसके बाद क्या कुछ होता है. ये ही देखने लायक है.

‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ में बड़ा ट्विस्ट: अरमान की भूलने की बीमारी से बढ़ा ड्रामा

सीरियल ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ में अब कहानी और भी इमोशनल होती जा रही है. शो के आने वाले एपिसोड में ऐसा बड़ा ट्विस्ट देखने को मिलेगा, जिसने फैंस की टेंशन बढ़ा दी है. अरमान की हरकतों से अब अभीरा को शक होने लगा है कि वह धीरे-धीरे अपनी याददाश्त खो रहा है.  अरमान को हुई भूलने की बीमारी एपिसोड की शुरुआत मायरा और मुक्ति से होती है, जो लॉक कार के अंदर फंस जाती हैं. कार में फैले पेंट की तेज गंध से दोनों की हालत खराब होने लगती है. उधर अरमान उनकी परेशानी देख मदद करने जाता है, लेकिन तभी अभीरा की आंखों में पेंट चला जाता है. अभीरा की हालत देखकर अरमान पूरी तरह उसकी देखभाल में लग जाता है और मायरा और मुक्ति के बारे में भूल जाता है. कुछ देर बाद अभीरा को दोनों लड़कियों के कार में फंसे होने का पता चलता है. वह उन्हें बाहर निकालती है. इस दौरान मुक्ति बताती है कि अरमान को उनके बारे में पता था और वह चाबी लेने गया था, लेकिन वापस ही नहीं आया. सबकुछ भूल जाता है अरमान जब अरमान वहां पहुंचता है तो उसे कुछ भी याद नहीं रहता. वह उल्टा ये सोचता है कि किसी ने कार चोरी करने की कोशिश की है. टूटा हुआ शीशा देखकर वह पुलिस बुलाने की बात करता है. तभी अभीरा को एहसास होता है कि मामला सिर्फ भूलने का नहीं है. उसे शक होने लगता है कि अरमान किसी गंभीर मेमोरी प्रॉब्लम से गुजर रहा है. अभीरा डॉक्टर से बात करती है. डॉक्टर अरमान का एमआरआई कराने की सलाह देते हैं. अरमान से सवाल करेगी अभीरा अभीरा, अरमान से सीधे बात करती है. वह उसे याद दिलाती है कि मायरा और मुक्ति खतरे में थीं, लेकिन वह उन्हें भूल गया था. सच जानकर अरमान खुद भी चौंक जाता है. अभीरा उसे अस्पताल जाकर एमआरआई कराने के लिए कहती है, लेकिन अरमान मानने से इनकार कर देता है.

वास्तु शास्त्र: झाड़ू लगाने के नियम, दाहिने हाथ से सफाई को माना जाता है शुभ

 वास्तु शास्त्र में झाड़ू लगाने से संबंधित बहुत सारे नियमों का उल्लेख है. जिसमें सबसे विशेष है कि झाड़ू किस हाथ से लगानी चाहिए. वास्तु शास्त्र के मुताबिक, झाड़ू को हमेशा दाहिने हाथ (Right Hand) से पकड़कर सफाई की शुरुआत करनी चाहिए. चूंकि हिंदू सनातन परंपरा और वास्तु में झाड़ू को देवी लक्ष्मी का रूप माना गया है, इसलिए इसे पकड़ने और इस्तेमाल करने के कुछ खास नियम बताए गए हैं. झाड़ू पकड़ने और इस्तेमाल करने के नियम दाहिने हाथ से शुरुआत किसी भी शुभ या जरूरी कार्य की तरह, झाड़ू को भी दाहिने हाथ से पकड़कर ही बुहारना (सफाई करना) शुरू करना चाहिए. यदि आप बाएं हाथ से काम करने वाले (Left-handed) हैं, तो आप अपनी सुविधा के अनुसार बाएं हाथ का उपयोग कर सकते हैं, क्योंकि वास्तु में भाव और स्वच्छता को अधिक महत्व दिया गया है. दोनों हाथों का उपयोग यदि झाड़ू भारी या लंबी है, तो आप दोनों हाथों से उसे पकड़ सकते हैं, लेकिन मुख्य नियंत्रण दाहिने हाथ में ही होना चाहिए. पैर न लगाएं झाड़ू को कभी भी पैर नहीं लगाना चाहिए और न ही इसके ऊपर से लांघकर (पार करके) जाना चाहिए. अगर गलती से पैर लग जाए, तो हाथ से छूकर क्षमा मांग लेनी चाहिए. झाड़ू लगाने के मुख्य वास्तु नियम सही दिशा झाड़ू हमेशा घर के पश्चिम (West) या दक्षिण-पश्चिम (South-West) कोने में रखनी चाहिए. झाड़ू लगाते समय कोशिश करें कि शुरुआत उत्तर या पूर्व दिशा से करते हुए कचरे को दक्षिण या पश्चिम की तरफ लाएं. समय का ध्यान झाड़ू लगाने का सबसे शुभ समय सूर्योदय के तुरंत बाद का होता है. शाम को झाड़ू न लगाएं सूर्यास्त के बाद या शाम के वक्त झाड़ू लगाने से सख्ती से बचना चाहिए. माना जाता है कि इससे घर की सकारात्मक ऊर्जा और लक्ष्मी बाहर चली जाती है. अगर किसी वजह से शाम को सफाई करनी ही पड़े, तो कचरे को घर से बाहर न फेंकें, उसे एक कोने में इकट्ठा कर दें और सुबह फेंकें. झाड़ू को छुपा कर रखें जैसे घर में धन को छुपाकर रखा जाता है, वैसे ही झाड़ू को भी ऐसे स्थान पर रखना चाहिए जहां बाहर से आने वाले किसी मेहमान या बाहरी व्यक्ति की सीधी नजर उस पर न पड़े. खड़ी न रखें झाड़ू झाड़ू को कभी भी खड़ी करके नहीं रखना चाहिए. इसे हमेशा लिटाकर रखना ही वास्तु के अनुसार शुभ होता है. खड़ी झाड़ू घर में कलह और दरिद्रता का कारण बन सकती है.

राष्ट्रीय कर्तव्य पर बोले मुकुल कानिटकर, कहा- भ्रष्टाचारियों को समाज में सम्मान नहीं मिलना चाहिए

रायपुर. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के पंचम सरसंघचालक स्व. कुप्पाहली सीतारमैया सुदर्शन की जयंती के अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय व्याख्यान में मुख्य वक्ता मुकुल कानिटकर ने कहा, हिंदू समाज का आधार मैं से हम की ओर जाना है. इस यात्रा में पांच परिवर्तन के उद्देश्य तय किया गया है जिसमें स्वदेशी का चिंतन है, संवाद से कुटुंब परिवार की शक्ति बढ़ाना, सामाजिक समरसता की संकल्पना है, पर्यावरण के प्रति संवेदना और राष्ट्रीय कर्तव्य के प्रति हमारी प्रतिबद्धता शामिल है. कार्यक्रम की अध्यक्षता संघचालक डॉ टोपलाल वर्मा एवं मुख्यातिथि अनुराग पांडे थे. संचालन साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शशांक शर्मा ने किया. कार्यक्रम संयोजिका शील शर्मा ने स्वागत भाषण दिया. मुख्य वक्ता मुकुल कानितकर ने राष्ट्रीय कर्तव्य, स्वार्थ ही देशद्रोह विषय पर बोलते हुए कहा, हमारा शरीर खरबों कोशिकाओं से मिलकर बना है, सभी कोशिकाएं मिलकर प्रत्येक अंग बनते हैं, जो अपना अपना कार्य करते हैं इसलिए जीवन चलता है. इसी प्रकार देश भी सभी व्यक्ति से मिलकर बनता है, मिलकर अपना अपना कार्य करेंगे तो राष्ट्र शक्तिशाली होगा. यही प्रत्येक व्यक्ति का देश के प्रति कर्तव्य है. जैसे एक कोशिका के स्वार्थी हो जाने से शरीर बीमार और कमजोर हो जाएगा. इसी प्रकार एक व्यक्तिव स्वार्थी हो जाने से देश कमजोर हो जाता है. उन्होंने कहा, देश के प्रति कर्तव्य नहीं करने के कारण समाज, व्यवस्था में अनुशासनहीनता, भ्रष्टाचार बढ़ गया है. इसे समाज में मान्यता मिल गई है. इस भ्रष्टाचार से मुक्ति का उपाय यही है कि समाज ऐसे लोगों को दंडित करे, बहिष्कार करे. व्यक्ति अपने स्वार्थ में देश का नुकसान करे उसे समाज प्रतिष्ठा न दे. मुकुल कानिटकर ने कहा, संघ को लेकर विवाद खड़े वे लोग करते हैं, जिन्हें संघ की समझ नहीं है. संघ हिंदू समाज को संगठित करने की यात्रा है. संघ की शताब्दी वर्ष कोई उत्सव का अवसर नहीं है बल्कि समाज परिवर्तन के अपने कार्य के सिंहावलोकन करने का अवसर है. राष्ट्र निर्माण के लिए व्यक्ति निर्माणकार ही संघ का लक्ष्य है. संघ की स्थापना भारत के स्वाधीन होने के बाद भारत का स्व तंत्र कैसे विकसित हो, शक्तिशाली कैसे बने इस विचार को लेकर कार्य प्रारंभ करने के लिए किया था. इसके लिए हिंदू समाज को संगठित करना आवश्यक है, राष्ट्रीय चरित्र का निर्माण करना आवश्यक है. इन आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए डॉ हेडगेवार ने संघ की स्थापना की. यह भारतीय स्वाधीनता का सशस्त्र आंदोलन, अहिंसा और सत्याग्रह के बाद तीसरा आंदोलन था. कार्यक्रम के अध्यक्ष छत्तीसगढ़ प्रान्त के संघचालक डॉ टोपलाल वर्मा ने स्व. सुदर्शन जी का स्मरण करते हुए कहा कि उनका जीवन और विचार देश को प्रेरणास्पद है.  मुख्य अतिथि अनुराग पांडे ने कहा कि नागरिक कर्तव्य नहीं होने के कारण जगह जगह गंदगी, यातायात की समस्या, भ्रष्टाचार जैसी अव्यवस्था फैलती है.

राष्ट्रपति के MP दौरे का समापन, कूनो भ्रमण के बाद ग्वालियर से दिल्ली रवाना; राज्यपाल रहे मौजूद

ग्वालियर  राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु मध्यप्रदेश के भ्रमण के उपरांत 22 जून को सुबह 10.35 बजे वायुसेना के विमान से ग्वालियर से दिल्ली रवाना हुईं। राष्ट्रपति श्योपुर जिले के कूनों से प्रात: 9.15 बजे हैलीकॉप्टर द्वारा रवाना होकर वायुसेना के विमानतल महाराजपुरा ग्वालियर पधारीं। उनके साथ मध्यप्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल भी आए। ग्वालियर विमानतल पर राज्यपाल मंगुभाई पटेल, प्रदेश के जल संसाधन मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री तुलसीराम सिलावट, सामाजिक न्याय एवं उद्यानिकी मंत्री नारायण सिंह कुशवाह, ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, सांसद भारत सिंह कुशवाह एवं महापौर शोभा सिकरवार ने विदाई दी। विमानतल पर अपर मुख्य सचिव मनु श्रीवास्तव, डीजी होमगार्ड सुश्री प्रज्ञा रिचा श्रीवास्तव, संभागीय आयुक्त मनोज खत्री, आईजी अरविंद कुमार सक्सेना, डीआईजी असित यादव, कलेक्टर रुचिका चौहान, पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह, नगर निगम आयुक्त संघ प्रिय एवं वायु सेना के अधिकारी उपस्थित थे। कूनो सफारी से किया जंगल भ्रमण राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कूनो सफारी से किया जंगल भ्रमण, चीता परिवार को नजदीक से देखा। कूनो नेशनल पार्क के दो दिवसीय दौरे पर आई राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सोमवार को सुबह चीता सफारी से कूनो के जंगल का भ्रमण किया। उन्होंने चीता और उनके शावकों को नजदीक से देखा। राष्ट्रपति ने सफारी के बाद आदिवासी समाज के चीता मित्र, सफारी ड्राइवर और गाइड से बातचीत की। प्रशासन, पुलिस, वन विभाग और अन्य विभागों के अधिकारियों ने श्योपुर जिले की पहचान से जुड़े उपहार भी राष्ट्रपति को भेंट किए हैं। कुछ ही देर में वह कूनो से प्रस्थान करेगी।