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बस्तर रेंज को मिला नया IG, IPS बद्रीनारायण मीणा संभालेंगे कमान

रायपुर. राज्य शासन ने भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के वरिष्ठ अधिकारी बद्रीनारायण मीणा को बस्तर रेंज के नए आईजी नियुक्त किए हैं। इसका आदेश आज गृह (पुलिस) विभाग ने जारी किया है। जारी आदेश के अनुसार, वर्तमान में पुलिस महानिरीक्षक पुलिस मुख्यालय नवा रायपुर के पद पर पदस्थ बद्रीनारायण मीणा को अस्थायी रूप से आगामी आदेश तक पुलिस महानिरीक्षक, बस्तर रेंज, जगदलपुर के पद पर पदस्थ किया गया है। राज्य सरकार द्वारा जारी इस प्रशासनिक आदेश के बाद मीणा अब बस्तर रेंज की कानून-व्यवस्था, सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारी संभालेंगे। बस्तर क्षेत्र नक्सल प्रभावित इलाकों में शामिल होने के कारण यह पद महत्वपूर्ण माना जाता है। सरकार के आदेश के अनुसार यह पदस्थापना आगामी आदेश तक प्रभावी रहेगी। NIA के आईजी बनाए गए हैं सुंदरराज पी बता दें कि बस्तर आईजी छत्तीसगढ़ कैडर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी सुंदरराज पी को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) में इंस्पेक्टर जनरल (IG) के पद पर नियुक्त किया गया है। इसके चलते बस्तर आईजी का पद खाली था। वर्ष 2003 बैच के आईपीएस अधिकारी सुंदरराज पी लंबे समय तक बस्तर रेंज के आईजी रहे हैं। उन्हें छत्तीसगढ़ में नक्सल विरोधी अभियानों के सबसे प्रभावशाली अधिकारियों में गिना जाता है। उनके नेतृत्व में सुरक्षा बलों ने बस्तर के दुर्गम और नक्सल प्रभावित इलाकों में लगातार अभियान चलाए, जिससे माओवादी संगठन को बड़ा नुकसान पहुंचा। नक्सलवाद के खिलाफ अभियान का प्रमुख चेहरा रहे सुंदरराज पी सुंदरराज पी की रणनीति केवल सशस्त्र कार्रवाई तक सीमित नहीं रही। उन्होंने खुफिया तंत्र को मजबूत करने, स्थानीय युवाओं को सुरक्षा अभियानों से जोड़ने, नए सुरक्षा कैंप स्थापित करने और सड़क व विकास कार्यों को आगे बढ़ाने पर विशेष जोर दिया। अबूझमाड़ जैसे इलाकों में सुरक्षा बलों की पहुंच बढ़ाने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनके कार्यकाल में बड़ी संख्या में नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया।

बेअदबी मामले में CM मान का बड़ा खुलासा, कहा- गले के निशान बताते हैं पूरी साजिश

चंडीगढ़  बेअदबी मामले में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बड़ा पलटवार करते हुए दावा किया है कि उनके खिलाफ सुनियोजित साजिश रची गई है. वीडियो में दिख रहा शख्स वह नहीं, बल्कि उनके चेहरे का मास्क पहनने वाला व्यक्ति है. इस दौरान, सीएम मान ने गले के निशान से लेकर हुलिये तक कई सबूत पेश भी किए. साथ ही, उन्‍होंने दावा किया कि लोगों के मन में उनके खिलाफ नफरत फैलाने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने साफ कहा कि धर्म का इस्तेमाल राजनीति के लिए करना गलत है और आने वाले दिनों में इस पूरे मामले के पीछे पैसे देने वालों का भी खुलासा किया जाएगा।  पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी कथित आपत्तिजनक वीडियो को लेकर कई बड़े दावे किए हैं. उन्होंने दावा किया कि सोशल मीडिया पर वायरल की गई वीडियो पूरी तरह फर्जी है और इसे सियासी फायदे के लिए तैयार कराया गया है. इस नकली वीडियो के जरिए सिर्फ उनकी छवि खराब करने की कोशिश नहीं है, बल्कि लोगों के मन में उनके खिलाफ धार्मिक आधार पर नफरत पैदा करने की साजिश भी है।      प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भगवंत मान ने एक वीडियो भी दिखाई. उनका कहना था कि वीडियो बनाने का दावा करने वाले जगमन समरा के हाथ में उनके चेहरे वाला मास्क साफ दिखाई देता है. वीडियो में जिस व्यक्ति को दिखाया गया है, उसने उनका मास्क पहना हुआ है।      उन्होंने सवाल उठाया कि अगर वीडियो असली होती तो उसमें उनके गले पर बचपन के ऑपरेशन का निशान क्यों नहीं दिखाई देता. उन्होंने कहा कि मेरे गले पर बचपन से ऑपरेशन का निशान है, लेकिन वायरल वीडियो में ऐसा कोई निशान नहीं है।      मुख्यमंत्री ने यह भी दावा किया कि वीडियो में दिख रहा व्यक्ति हमेशा चश्मा लगाए हुए नजर आता है, क्योंकि आंखों से असली पहचान छिपाई नहीं जा सकती. होटल के कमरे में गुरु साहब की तस्वीर लगाए जाने की बात भी पूरी तरह गलत है।      उन्होंने कहा कि नवंबर 2016 के बाद वह कभी कनाडा गए ही नहीं, जबकि वीडियो बनाने वाला व्यक्ति कनाडा में बैठा है. सीएम भगवंत मान ने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में राजनीतिक साजिश रची गई है. कांग्रेस, अकाली दल और बीजेपी मिलकर उनके खिलाफ सांझा मोर्चा बनाकर काम कर रहे हैं।      उनका कहना था कि उनकी सरकार ने बेअदबी कानून, पालकी साहब वाली गाड़ियों के टोल और पवित्र शहरों को विशेष दर्जा देने जैसे कई अहम फैसले किए हैं, जिन्हें पहले की सरकारें नहीं कर सकीं. इसी वजह से उन्हें लगातार निशाना बनाया जा रहा है।      मुख्यमंत्री मान ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) पर भी सवाल उठाए. उन्होंने पूछा कि गुरुद्वारों के बाहर उनके खिलाफ बोर्ड क्यों लगाए जा रहे हैं, जबकि पहले ऐसा कभी नहीं हुआ. उन्होंने कहा कि एसजीपीसी के प्रधान खुद सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि वह सुखबीर बादल के सिपाही हैं।      भगवंत मान ने कहा कि वह पहले भी अकाल तख्त साहिब गए थे और अगर दोबारा बुलाया जाएगा तो फिर जाएंगे. उन्होंने कहा कि उस समय उन्होंने कार्यवाही को लाइव करने की भी अपील की थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया. अब अलग-अलग क्लिप जारी कर लोगों को गुमराह किया जा रहा है।  गुरु नानक नाम लेवा संगत के हाथों अंतिम फैसला मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि वह इस नकली वीडियो को अकाल तख्त साहिब को भी भेजेंगे ताकि उसकी निष्पक्ष जांच हो सके. उन्होंने कहा कि अंतिम फैसला गुरु नानक नाम लेवा संगत पर छोड़ते हैं. साथ ही उन्होंने ऐलान किया कि जगमन समरा को इंटरपोल की मदद से भारत लाने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है. उन्होंने दावा किया कि आने वाले दिनों में यह भी सामने लाया जाएगा कि इस वीडियो को बनवाने के लिए पैसा किसने दिया था. मान ने कहा कि चाहे जितनी कोशिश कर ली जाए, पंजाब के लोगों के मन में उनके खिलाफ नफरत पैदा करने की यह साजिश सफल नहीं होगी। 

निर्धन परिवार, वृद्धजन और दिव्यांग साथी स्वयं को बेसहारा न समझें: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

बुजुर्गों और असहाय लोगों का आदर करना हमारा धर्म : मुख्यमंत्री डॉ. यादव निर्धन परिवार, वृद्धजन और दिव्यांग साथी स्वयं को बेसहारा न समझें प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में अंत्योदय का संकल्प हो रहा है सिद्ध मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 33 लाख 92 हजार 695 सामाजिक सुरक्षा पेंशन हितग्राहियों के खातों में अंतरित किए 203 करोड़ 56 लाख रुपये मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रालय से हितग्राहियों को किया वर्चुअली संबोधित भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि घर में बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद होना, तपती धूप में ठंडी छांव के समान होता है। हमारी संस्कृति में बुजुर्गों, असहायों और समाज के सबसे कमजोर वर्ग को आदर देना केवल कर्तव्य नहीं बल्कि हमारा धर्म माना गया है। राज्य सरकार द्वारा प्रदेश के प्रत्येक नागरिक के सम्मान के लिए प्रतिबद्ध हैं। हमारी कोशिश है कि राज्य का कोई भी निर्धन परिवार, माताएं, बहनें या हमारे दिव्यांग साथी स्वयं को बेसहारा न समझें। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में अंत्योदय का संकल्प सिद्ध हो रहा है। इसी दिशा में राज्य सरकार भी गरीबों, वंचितों और कमजोर वर्गों के कल्याण में जुटी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिंगल क्लिक से सामाजिक सुरक्षा पेंशन वितरण के लिए मंत्रालय में आयोजित कार्यक्रम में यह विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम से विभिन्न जिलों के हितग्राही वर्चुअली जुड़े। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 33 लाख 92 हजार 695 से अधिक भाई-बहनों और बुजुर्गों के खातों में माह मई महीने की 203 करोड़ 56 लाख रुपये की सामाजिक सुरक्षा पेंशन राशि सिंगल क्लिक से अंतरित की। इस अवसर पर सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा, मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई, संजय शुक्ला, मनीष रस्तोगी, प्रमुख सचिव श्रीमती सोनाली वायंगणकर कार्यक्रम में उपस्थित थी। सामाजिक सुरक्षा पेंशन सरकार के स्नेह, सम्मान और सुरक्षा का वचन है मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सामाजिक सुरक्षा पेंशन केवल आर्थिक सहायता नहीं है, अपितु निर्धन परिवारों, दिव्यांग साथियों में आपके प्रति सरकार का स्नेह, सम्मान और सुरक्षा का वचन है। राज्य सरकार सभी को अपने परिवार का हिस्सा मानती है। सरकार प्रत्येक नागरिक के सम्मान के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषक कल्याण वर्ष में राज्य सरकार ने किसान हितैषी महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। प्रदेश के किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर कर्ज दिया जाएगा और इसे चुकाने की समयावधि 31 मार्च नहीं होगी, बल्कि किसान जिस तारीख को कर्ज लेंगे, उसे अगले 12 माह की अवधि में ऋण भरना होगा। 10 साल में देश के 25 करोड़ से ज्यादा लोग बाहर आए गरीबी से मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश का प्रत्येक नागरिक स्वयं को सुरक्षित महसूस कर रहा है। पिछले 10 वर्षों में देश के 25 करोड़ से ज्यादा लोग गरीबी रेखा से बाहर आए हैं। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के माध्यम से 80 करोड़ से अधिक लोगों को हर महीने मुफ्त राशन मिल रहा है। प्रधानमंत्री आवास, आयुष्मान भारत, जल-जीवन मिशन, उज्जवला योजना जैसी योजनाओं ने जन-कल्याण का इतिहास लिखा है। राज्य सरकार अधिकांश कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में देश में अग्रणी है। सरकार गरीब, युवा, नारी और किसान कल्याण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। सामाजिक सुरक्षा पेंशन राशि वितरण कार्यक्रम में प्रदेश के अलग-अलग जिलों से वरिष्ठजन, माताएं-बहनें और हितग्राही वर्चुअली सम्मिलत हुए।  

संपत्ति विवाद पर सियासत तेज, कांग्रेस के आरोपों के बीच CM मोहन यादव के समर्थन में मंत्री मैदान में

भोपाल  सीएम मोहन यादव और उनके परिवार पर जमीनों की खरीद फरोख्त के आरोप पर बीजेपी ने अब हमलावर रुख अपना लिया है। मामले में सीएम के बचाव में प्रदेश के मंत्रियों की फौज उतर आई। बीजेपी ने राज्य सरकार के आधा दर्जन मंत्रियों के बयानों के वीडियो जारी किए जिसमें सीएम मोहन यादव पर लगे आरोपों को बेबुनियाद बताया गया है। बीजेपी के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष व सरकार के वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री राकेश सिंह से लेकर तुलसी सिलावट, चेतन काश्यप, कृष्णा गौर, प्रद्युम्न सिंह तोमर, इंदर सिंह परमार ने इस मामले में कांग्रेस पर पलटवार किया। पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह ने तो सीएम CM Mohan Yadav पर गलत आरोप लगाने पर कांग्रेस को मानहानि का नोटिस देने की भी बात कही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस, सीएम के रिश्तेदारों की संपत्ति भी जोड़ रही है। प्रदेश कांग्रेस ने सीएम डॉ. मोहन यादव व उनके परिवार के सदस्यों पर कई एकड़ जमीन खरीदने के आरोप लगाए हैं। बुधवार को इस मामले में बीजेपी नेताओं और मंत्रियों ने न केवल सीएम पर लग रहे आरोपों का बचाव किया बल्कि रॉबर्ट वाड्रा के बहाने कांग्रेस को ही घेरा। प्रदेश के लोक निर्माण विभाग यानि पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि कांग्रेस ने सीएम मोहन यादव पर बेबुनियाद आरोप लगाकर उनकी छवि खराब करने का षड्यंत्र रचा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस राजनीतिक दिवालियापन के दौर से गुजर रही है। सीएम मोहन यादव के रिश्तेदारों की संपत्ति को उनसे जोड़ा मंत्री राकेश सिंह ने पलटवार करते हुए कहा कि जब रॉबर्ट वाड्रा का नाम भूमि घोटालों में आता है तो कांग्रेसी इसे व्यक्तिगत बताते हुए किनारा करते हैं जबकि सीएम मोहन यादव के रिश्तेदारों की संपत्ति को उनसे जोड़ा जाता है। उन्होंने मामले में कांग्रेस को घेरते हुए कहा कि उसे मानहानि का नोटिस देंगे। पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि सरकारी और निजी ट्रस्ट में अंतर होता है, यह कांग्रेस समझ नहीं पाई। जिस वीर भारत न्यास को 1 रुपए में उज्जैन में भूमि देने का आरोप लगाया जा रहा है, वह संस्कृति विभाग का हिस्सा है, न कि निजी न्यास। उन्होंने बताया कि अब लीगल सेल पूरे प्रकरण को देख रहा है। बीजेपी ने सभी मंत्रियों के बयानों के बाकायदा वीडियो जारी किए सरकार के अन्य वरिष्ठ मंत्रियों तुलसी सिलावट, चेतन काश्यप, कृष्णा गौर, प्रद्युम्न सिंह तोमर, इंदर सिंह परमार ने भी जमीन विवाद पर सीएम मोहन यादव का पक्ष प्रस्तुत किया। इससे पहले शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने भी मामले में कांग्रेस पर सवाल दागे थे। बीजेपी ने सभी मंत्रियों के बयानों के बाकायदा वीडियो जारी किए हैं।

भारत पर Amazon का बड़ा दांव, PM मोदी से मुलाकात में CEO ने बताया ₹1220000000000 लाख करोड़ निवेश और विस्तार का प्लान

नई दिल्ली अमेजन ने भारत में एक और बड़े निवेश का एलान किया है। Amazon के CEO एंडी जेसी भारत दौरे पर हैं, और उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) से मुलाकात की। इस दौरान एंडी जेसी ने घोषणा की है कि कंपनी 2030 तक AI और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने के लिए देश में अतिरिक्त $13 बिलियन (1.22 लाख करोड़ रुपये) का निवेश करेगी। यह अतिरिक्त निवेश Amazon द्वारा भारत में $35 बिलियन के नए निवेश की घोषणा के छह महीने के भीतर किया गया है। कंपनी के अनुसार, दिसंबर 2025 में घोषित $35 बिलियन और 25 जून को घोषित $13 बिलियन के निवेश को मिलाकर, 2010-2030 के बीच भारत में Amazon का कुल निवेश $88 बिलियन से ज़्यादा हो गया है। AI में भारी निवेश इस नए निवेश के साथ, Amazon भारत में AI और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश करने वाली सबसे बड़ी ग्लोबल कंपनियों में से एक बन गई है। इसके अलावा, Amazon भारत में सबसे बड़ी विदेशी निवेशक, ई-कॉमर्स एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने वाली सबसे बड़ी कंपनी और देश में सबसे ज़्यादा नौकरियां देने वाली कंपनियों में से एक है। अमेज़न के CEO एंडी जेसी ने कहा: "हम एक दशक से भी पहले भारत आए थे और तब से अपने अलग-अलग बिज़नेस के ज़रिए ग्राहकों, सेलर्स, डेवलपर्स, स्टार्ट-अप्स और कंपनियों को सेवा दे रहे हैं। हमें बहुत अच्छा रिस्पॉन्स मिला है, खासकर हमारे ई-कॉमर्स, AI और क्लाउड बिज़नेस में ज़बरदस्त ग्रोथ हुई है।" 20 साल में 88 अरब डॉलर का निवेश अमेजन ने भले ही 6 महीने के भीतर 48 अरब डॉलर के निवेश का ऐलान कर डाला है, लेकिन साल 2010 से 2030 तक के कुल निवेश को देखा जाए तो अमेजन ने भारत में करीब 88 अरब डॉलर का निवेश कर दिया है. हालिया निवेश घोषणा के बाद अमेजन भारत में ग्‍लोबल एआई और क्‍लाउड इन्‍फ्रा पैसे लगाने वाली सबसे बड़ी कंपनी बन चुकी है. साथ ही यह सबसे बड़ी विदेशी निवेशक भी बन चुकी है. अमेजन भारत में सबसे बड़ी विदेशी निर्यात करने वाली ई-कॉमर्स कंपनी के साथ ही जॉब पैदा करने वाली विदेशी कंपनी भी है।  कई साल से भारत में दे रहे सेवाएं अमेजन के सीईओ ने बताया कि उनकी कंपनी दशकों पहले भारत आई थी और इसके बाद से ही यहां लगातार सेवाएं दे रही है. अमेजन आज अपने कस्‍टमर्स, सेलर, डेवलपर्स, स्‍टार्टअप और छोटी कंपनियों सहित तमाम कारोबार को सेवाएं दे रही है. अभी तक का प्रदर्शन काफी बेहत रहा है, खासकर ई-कॉमर्स, एआई और क्‍लाउड के बिजनेस में अमेजन काफी अच्‍छा काम कर रही है।  पीएम मोदी की जमकर तारीफ एंडी जेसी ने प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद कहा क‍ि अमेजन भारत में अपने विकास के साथ यहां छोटे कारोबारियों की मदद करने और जॉब पैदा करने में भी सहयोग दे रही है. हमने अगले 5 साल में 48 अरब डॉलर के निवेश की योजना बनाई है, जो देश के हर क्षेत्र की डिमांड के हिसाब से किया जाएगा. हम पीएम मोदी के विजन से काफी प्रभावित हैं, जो विकसित और आत्‍मनिर्भर भारत जैसी योजनाओं के जरिये लॉन्‍ग टर्म में विकास का हिस्‍सा बनने के लिए प्रेरित करते हैं।  38 लाख नौकरियां पैदा करने में मदद एंडी जेसी ने कहा कि पीएम मोदी के इस विजन के साथ अमेजन ने करीब 38 लाख नौकरियां पैदा की हैं और 80 अरब डॉलर के ई-कॉमर्स निर्यात में भी मदद की है. इसके अलावा 1.5 करोड़ से ज्‍यादा छोटे कारोबारियों तक एआई का फायदा पहुंचाने के साथ साल 2030 तक 40 लाख सरकारी स्‍कूलों तक भी एआई की सेवाएं पहुंचाने का लक्ष्‍य है. साल 2026 से 2030 के बीच भारत में अमेजन 48 अरब डॉलर का निवेश करेगी, जिसमें से 21 अरब डॉलर का इस्‍तेमाल तो सिर्फ एआई और क्‍लाउड निवेश में किया जाएगा।  भारत को लेकर क्या हैं प्राथमिकताएं एंडी जेसी ने कहा, "जैसे-जैसे हम भारत में Amazon का विस्तार कर रहे हैं, हमारे बिज़नेस की प्राथमिकताएं भारत की प्राथमिकताओं के साथ मेल खाती जा रही हैं – जैसे AI तक पहुंच को आसान बनाना, छोटे बिज़नेस को डिजिटल बनाना, रोज़गार पैदा करना और एक्सपोर्ट को बढ़ावा देना। भारत में अपने बिज़नेस की बढ़ती मांग को पूरा करने और देश को इन प्राथमिकताओं को हासिल करने में मदद करने के लिए हम अगले पाँच सालों में $48 बिलियन से ज़्यादा का निवेश कर रहे हैं।" एंडी जेसी ने यह भी कहा कि हम प्रधानमंत्री मोदी के 'विकसित और आत्मनिर्भर भारत' के विज़न से प्रेरित हैं और भारत के साथ लंबे समय तक पार्टनर बने रहने के लिए प्रतिबद्ध हैं।  

समय आने पर होगा फैसला, BJP-अकाली गठबंधन पर नितिन नबीन ने दिए संकेत

अमृतसर   पंजाब में शिरोमणि अकाली दल या किसी अन्य अकाली धड़े के साथ भविष्य में गठबंधन को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता नितिन नबीन ने बड़ा संकेत दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि गठबंधन को लेकर अभी दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं और इस संबंध में कोई भी फैसला सही समय आने पर ही लिया जाएगा। अपने हालिया पंजाब दौरे के दौरान जालंधर में आयोजित एक मीडिया कॉन्क्लेव में पूछे गए सवाल के जवाब में नबीन ने कहा, "कुछ निश्चित मुद्दों को सही समय आने पर हल कर लिया जाएगा।" भाजपा नेता ने इस बात को दोहराया कि मौजूदा हालात में पार्टी का पूरा ध्यान पंजाब के हर विधानसभा क्षेत्र में अपने सांगठनिक ढांचे को मजबूत करने पर है। नबीन ने कहा, "अभी हम इसी दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। जब चुनाव नजदीक आएंगे और राजनीतिक गतिविधियां बढ़ेंगी, तब हम उस समय की परिस्थितियों का आकलन करेंगे और उसी के आधार पर (गठबंधन पर) निर्णय लेंगे। आज के दिन हम न तो गठबंधन के पक्ष में हैं और न ही इसके खिलाफ हैं।" पार्टी की तात्कालिक रणनीति को स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा ने फिलहाल अपने दम पर आगे बढ़ने का फैसला किया है। नबीन ने कहा, "हम अपनी खुद की ताकत से आगे बढ़ना चाहते हैं। समय के साथ कई चीजें अपने आप स्पष्ट हो जाएंगी। जहां तक गठबंधन का सवाल है, तो उस पर फैसला लेने के लिए अभी काफी वक्त है। आज इसका समय नहीं है, सही समय को आने दीजिए।" छह महीने बाद जनता के संदेश का होगा आकलन नितिन नबीन ने बताया कि राज्य के नए प्रदेश अध्यक्ष के नेतृत्व में पार्टी अगले छह महीने तक अपनी तय योजनाओं और रणनीति के तहत काम करेगी। उन्होंने कहा, "अगले छह महीनों में हम खुद को मजबूत आधार पर स्थापित करेंगे, हर विधानसभा क्षेत्र के प्रत्येक मुद्दे को उठाएंगे और सीधे जनता के बीच जाएंगे। भविष्य में गठबंधन करना है या नहीं, यह आगे तय होगा। हम देखेंगे कि हमें जनता की तरफ से क्या संदेश मिलता है। हम छह महीने बाद इस पर दोबारा फैसला लेंगे।" भाजपा नेता के इस बयान ने 'द ट्रिब्यून' की उस पूर्व रिपोर्ट की भी एक तरह से पुष्टि कर दी है, जिसमें यह संकेत दिया गया था कि पंजाब में दोनों पुराने सहयोगियों के बीच दोबारा साथ आने का अध्याय अभी पूरी तरह से समाप्त नहीं हुआ है।

छिंदवाड़ा से शिवसेना का बड़ा ऐलान, MP की हर सीट पर चुनाव लड़ने की तैयारी

छिन्दवाड़ा   शिवसेना मध्य प्रदेश में हर तरह के चुनाव लड़ने के लिए प्रत्याशी उतारेगी. ये कहना है शिवसेना के राष्ट्रीय सचिव अभिजीत अडसूल का. छिंदावाड़ा में आयोजित एक कार्यक्रम में पहुंचे अभिजीत ने कहा कि शिवसेना अब पंचायत चुनाव से लेकर विधानसभा और लोकसभा में भी अपने कैंडिडेट उतारकर चुनाव लड़वाने जा रही है. इसके लिए पार्टी ने तैयारियां शुरू कर दी है।  उद्धव के घमंड से टूट गई शिवसेना : अभिजीत शिंदे गुट शिवसेना के राष्ट्रीय सचिव और महाराष्ट्र के पूर्व विधायक अभिजीत अडसूल ने छिन्दवाड़ा में पार्टी कार्यकर्ताओं को भी संबोधित किया. कार्यकर्ताओं के इस सम्मेलन में उन्होंने पार्टी विस्तार की रणनीति के साथ ज्यादा से ज्यादा सदस्यों को पार्टी से जोड़ने और सदस्यता अभियान चलाने की बात कही. महाराष्ट्र में चले ऑपरेशन टाइगर पर अभिजीत ने कहा, '' शिवसेना UBT को छोड़कर 6 सांसद शिवसेना शिंदे में शामिल हो गए हैं. इसका सबसे बड़ा कारण उद्धव ठाकरे की अकड़बाजी (घमंड) है क्योंकि वे कार्यकर्ताओं से ठीक से व्यवहार और उनसे मुलाकात भी ठीक से नहीं करते थे, जिसकी वजह से कार्यकता दूर होते गए और फिर उन्होंने लोकप्रिय नेता एकनाथ शिंदे का साथ पकड़ लिया।  2 साल पहले भी चला था एक ऑपरेशन अभिजीत अडसूल ने कहा, '' 2 साल पहले भी एक ऐसा ही ऑपरेशन महाराष्ट्र में चला था क्योंकि शिवसेना के हाई कमान राष्ट्रीय अध्यक्ष कार्यकर्ताओं को वक्त नहीं देते थे. 40 विधायक एकनाथ शिंदे के साथ अलग हुए. शिंदे मुख्यमंत्री बने थे और हमने पार्टी को खड़ा करने के लिए बहुत मेहनत की लेकिन अपनी आंखों के सामने पार्टी की स्थिति खराब होती देखना पसंद नहीं था. इसलिए हमें उद्धव ठाकरे को अलग करना पड़ा क्योंकि बाला साहब ठाकरे ने जिस उद्देश्य से पार्टी का गठन किया था, वो अपने उद्देश्यों से भटक रही थी।  बीजेपी और शिंदे शिवसेना के विचार एक : अभिजीत शिवसेना के राष्ट्रीय सचिव अभिजीत अडसूल ने कहा, '' बालासाहेब ठाकरे के सपनों को सत्ता के लिए उद्धव ठाकरे ने उसी दिन तोड़ दिया था, जब कांग्रेस और NCP ने मिलकर सरकार बनाई थी, जिससे महाराष्ट्र का विकास रुक रहा था. शिंदे की सरकार बीजेपी के साथ बनी तो महाराष्ट्र ने फिर से विकास की रफ्तार पकड़ ली क्योंकि बीजेपी के साथ विचार भी मिलते हैं. अब केंद्र की सरकार और राज्य की सरकार मिलकर विकास कर रही है। 

कलाकारों के लिए खुशखबरी, झारखंड सरकार देगी बुजुर्ग, बीमार और दिव्यांग कलाकारों को 4 हजार रुपये पेंशन

रांची. झारखंड के वरिष्ठ, गंभीर रूप से बीमार एवं स्थायी रूप से दिव्यांग कलाकारों के लिए राज्य सरकार ने बड़ी पहल की है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कलाकारों की सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा सुनिश्च्त करने के उद्देश्य से मासिक निवृत्तिका (कलाकार पेंशन) योजना को मंजूरी दे दी है। इसके तहत पात्र कलाकारों को प्रतिमाह 4,000 रुपए की सम्मान राशि सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जाएगी। कला-संस्कृति विभाग के निदेशक आसिफ एकराम ने बताया कि यह योजना उम्र, गंभीर बीमारी अथवा स्थायी दिव्यांगता के कारण आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहे कलाकारों के लिए महत्वपूर्ण सहारा सिद्ध होगी। उन्होंने कहा कि यह पहल कलाकारों के जीवनपर्यंत योगदान के प्रति राज्य सरकार के सम्मान और कृतज्ञता का प्रतीक है। योजना का उद्देश्य केवल वित्तीय सहायता प्रदान करना नहीं, बल्कि कलाकारों के योगदान का सम्मान करना भी है। आवेदन करने वालों में राज्य के मूल निवासी, वृद्ध, गंभीर रूप से बीमार और स्थायी रूप से दिव्यांग कलाकार शामिल रहेंगे। संगीत, नृत्य, रंगमंच, लोककला, चित्रकला, मूर्तिकला तथा अन्य सांस्कृतिक विधाओं से जुड़े कलाकारों को यह सुविधा दी जाएगी। आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई है। आवश्यक प्रक्रिया और दस्तावेज इच्छुक कलाकार विज्ञापन के साथ जारी आवेदन प्रपत्र को भरकर योजना के लिए आवेदन कर सकते है। पूर्ण रूप से भरा हुआ आवेदन पत्र आवश्यक दस्तावेजों के साथ सांस्कृतिक कार्य निदेशालय, रांची के कार्यलय में जमा करना होगा। आवेदन प्रपत्र विभाग की आधिकारिक वेबसाइट [www.jharkhandculture.com](https://www.jharkhandculture.com) से डाउनलोड किया जा सकता है। आवेदन के साथ निम्नलिखित दस्तावेज कला क्षेत्र (संगीत, नृत्य, रंगमंच, चित्रकला, लोककला, मूर्तिकला आदि) से जुड़ी उपलब्धियों, सम्मान एवं पुरस्कारों के प्रमाण-पत्र झारखंड का स्थायी निवासी होने संबंधी प्रमाण-पत्र आयु प्रमाण-पत्र वार्षिक आयु प्रमाण-पत्र बैंक खाते का विवरण आधार कार्ड अथवा अन्य वैध पहचान-पत्र की छायाप्रति गंभीर बीमारी या स्थायी दिव्यांगता की स्थिति में सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी चिकित्सा अथवा दिव्यांगता प्रमाण-पत्र आवेदन पत्र विभाग की आधिकारिक वेबसाइट से डाउनलोड कर निर्धारित प्रक्रिया के तहत जमा किया जा सकता है।

SIR अभियान में BLO की दोबारा दस्तक, घर बंद मिलने पर फिर पहुंचेंगे अधिकारी

चंडीगढ़/जालंधर. पंजाब में 25 जून से यानी आज विशेष गहन पुनरीक्षण (एस.आई.आर.) के तहत घर-घर गणना के पहले चरण का काम शुरू है। घर-घर गणना संबंधी सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। गणना के पहले चरण के दौरान बी.एल.ओ. द्वारा घर-घर जाकर प्री-प्रिंटेड फॉर्मों का वितरण किया जाएगा। बी.एल.ओज. इन फॉर्मों को भरने में मतदाताओं की मदद करेंगे और इन्हें घर-घर जाकर वापस भी एकत्रित करेंगे। घर-घर गणना की प्रक्रिया 24 जुलाई तक चलेगी। यदि बी.एल.ओज. को कोई फॉर्म प्राप्त न हो तो वह उस घर का 3 बार दौरा करेगा और अपने दौरे संबंधी जानकारी घर के दरवाजे पर स्टिकर चिपकाकर दर्ज करेगा। उन्होंने बताया कि 24,453 बी.एल.ओज. द्वारा राज्य के 2 करोड़ 14 लाख 61 हजार 43 मतदाताओं की गणना की जाएगी। वर्तमान में पंजाब में 1 करोड़ 84 लाख 61 हजार 581 मतदाताओं की मैपिंग हो चुकी है, जो 86.02 प्रतिशत है। मुख्य चुनाव अधिकारी पंजाब ने बताया कि भारत चुनाव आयोग द्वारा एस.आई.आर. संबंधी घोषित कार्यक्रम के अनुसार 25 जून से 24 जुलाई तक घर-घर गणना, पोलिंग स्टेशन की रैशनेलाइजेशन का काम 24 जुलाई तक पूरा किया जाएगा, जबकि मतदाता सूचियों का ड्राफ्ट 3 अगस्त को प्रकाशित किया जाएगा। मतदाता सूचियों संबंधी आपत्तियां और दावे 3 अगस्त से 2 सितम्बर तक प्रस्तुत किए जा सकेंगे। आपत्तियों और दावों का निपटारा 3 अगस्त से 28 सितम्बर तक किया जाएगा। अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 1 अक्तूबर को किया जाएगा। मुख्य चुनाव अधिकारी अनिंदिता मित्रा ने बताया कि एस.आई.आर. की पूरी प्रक्रिया संबंधी पंजाब राज्य की सभी राजनैतिक पार्टियों को बैठक करके जानकारी दे दी गई है और उनके द्वारा दिए गए सुझावों पर अमल किया गया है। SIR अभियान: मतदाताओं के लिए क्या बदलेगा, क्या नहीं घर-घर वोटर लिस्ट की जांच क्यों हो रही है? चुनाव आयोग वोटर लिस्ट को साफ और दुरुस्त करने के लिए SIR अभियान चला रहा है। इसका मकसद यह पता लगाना है कि सूची में कोई फर्जी नाम, दोहरी एंट्री, मृत व्यक्ति या स्थान बदल चुके मतदाता तो नहीं हैं। BLO आपके घर आए तो क्या प्रक्रिया होगी? बूथ लेवल अधिकारी मतदाता की जानकारी की पुष्टि करेगा। जरूरत पड़ने पर फॉर्म भरवाया जाएगा और रिकॉर्ड अपडेट किया जाएगा। यह सामान्य सत्यापन प्रक्रिया है। घर पर न मिलने से वोट पर असर पड़ेगा? नहीं। अगर कोई घर पर नहीं मिलता तो अधिकारी दो-तीन बार दोबारा संपर्क करेगा। सिर्फ इस वजह से किसी की वोट नहीं हटाई जाएगी। शहर से बाहर रहने वालों को चिंता करने की जरूरत नहीं काम, पढ़ाई या किसी और कारण से बाहर रह रहे लोगों की वोट अपने आप खत्म नहीं होगी। उन्हें जानकारी देने का पूरा मौका मिलेगा। अगर अधिकारी घर नहीं आया तो क्या करें? मतदाता खुद पहल कर सकते हैं। इसके लिए हेल्पलाइन, BLO या चुनाव कार्यालय से संपर्क किया जा सकता है। SIR में कोई फीस नहीं लगती यह पूरी प्रक्रिया मुफ्त है। अगर कोई व्यक्ति पैसे की मांग करता है, तो उसकी शिकायत की जा सकती है। पहले से वोटर हैं, फिर भी जांच क्यों? SIR सिर्फ नए नाम जोड़ने का अभियान नहीं है। पुराने मतदाताओं की जानकारी को भी अपडेट और सत्यापित किया जा रहा है। वोटर कार्ड या आधार न हो तो? वोटर कार्ड या आधार कार्ड जरूरी नहीं है। अन्य वैध दस्तावेजों से भी पहचान साबित की जा सकती है। किरायेदार, छात्र और PG में रहने वालों के अधिकार किराए पर रहने वाले, छात्र या हॉस्टल/PG में रहने वाले लोग जहां रह रहे हैं, वहां वोट बनवा सकते हैं, लेकिन एक व्यक्ति का नाम एक ही जगह रह सकता है। विदेश में रहने वाले भारतीय मतदाता जो लोग विदेश में पढ़ाई या नौकरी कर रहे हैं और अब भी भारतीय नागरिक हैं, वे वोटर बने रह सकते हैं। विदेशी नागरिकता लेने पर वोट का अधिकार खत्म हो जाता है। अनमैप्ड वोटर का मतलब क्या है? कुछ मतदाताओं का नाम सूची में तो है, लेकिन उनका पता या पोलिंग बूथ डिजिटल सिस्टम में सही तरह जुड़ा नहीं है। ऐसे लोगों को अपनी जानकारी ठीक कराने के मौके दिए जाएंगे। दो जगह वोट होने पर क्या होगा? कानून के मुताबिक एक व्यक्ति एक ही जगह वोटर हो सकता है। दो जगह नाम होने पर एक जगह की एंट्री हटानी होगी। पता बदला है तो क्या करना चाहिए? जिले या राज्य बदलने पर वोट ट्रांसफर कराने की सुविधा मौजूद है। इसके लिए आवेदन किया जा सकता है। क्या किसी की वोट सीधे हट सकती है? नहीं। बिना सूचना और जवाब का मौका दिए किसी का नाम नहीं हटाया जाएगा। फॉर्म नहीं भरा तो क्या वोट कट जाएगी? नहीं। केवल फॉर्म न भरने से वोट अपने आप समाप्त नहीं होती। नए वोटरों के लिए राहत की खबर जो युवा 1 जुलाई 2026 तक 18 साल के हो जाएंगे, वे आवेदन करके वोटर बन सकते हैं। SIR के बाद दावे और आपत्तियां ली जाएंगी। सभी प्रक्रियाओं के बाद अंतिम वोटर सूची 1 अक्टूबर 2026 को जारी की जाएगी। निष्कर्ष SIR अभियान वोट छीनने की कार्रवाई नहीं है, बल्कि वोटर लिस्ट को पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने की कोशिश है। सही जानकारी देने से मतदाता और चुनाव व्यवस्था – दोनों मजबूत होंगे।

धर्मांतरण मामले में रायपुर में बवाल, दो पास्टर गिरफ्तार; थाने पहुंचा ईसाई समाज

रायपुर. रायपुर ग्रामीण के खरोरा थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम मांठ में धर्मांतरण से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है। हिंदू देवी-देवताओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी और जबरन धर्म परिवर्तन के आरोप में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने दो पास्टर को गिरफ्तार किया है। वहीं, इस गिरफ्तारी के विरोध में ईसाई समाज के लोग बड़ी संख्या में थाने पहुंचे और कार्रवाई को गलत आरोपों के आधार पर की गई गिरफ्तारी बताते हुए विरोध जताया। मामला खरोरा थाना क्षेत्र का है, लेकिन सुरक्षा के लिहाज से और आरोपियों को आगे की पूछताछ और कानूनी प्रक्रिया के लिए उन्हें विधानसभा थाना लाया गया है। ग्रामीणों की शिकायत पर दर्ज हुआ मामला मामला तब सामने आया जब ग्राम मांठ निवासी हेमंत मरावी ने अरुण कुमार उइके और राकेश कुमार उइके के साथ खरोरा थाने पहुंचकर लिखित शिकायत दी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि रायपुर निवासी पास्टर सुशांत ज्ञानिक और उसका सहयोगी पीयूष पटेल पिछले कुछ समय से गांव के आदिवासी मोहल्ले में लगातार आ-जा रहे थे और ग्रामीणों से संपर्क कर उन्हें हिंदू धर्म छोड़कर ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे थे। शिकायतकर्ताओं का यह भी आरोप है कि इस दौरान हिंदू देवी-देवताओं और धार्मिक मान्यताओं पर आपत्तिजनक टिप्पणियां की जाती थीं। विरोध के बावजूद जारी रही गतिविधियां ग्रामीणों का कहना है कि आरोपियों की गतिविधियों का कई बार विरोध कर समझाइश दी गई थी कि वे गांव में इस तरह की गतिविधियां न करें और किसी पर धर्म परिवर्तन का दबाव न डालें, लेकिन इसके बावजूद वे लगातार गांव में आते रहे और लोगों को प्रार्थना सभाओं में शामिल होने तथा धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित करते रहे। शिकायत के अनुसार, 24 जून की शाम करीब 7 बजे सुशांत ज्ञानिक और पीयूष पटेल एक बार फिर ग्राम मांठ के आदिवासी मोहल्ले पहुंचे। वहां उन्होंने लोगों को एकत्र कर प्रार्थना करने और ईसाई धर्म स्वीकार करने की बात कही। ग्रामीणों ने जब इसका विरोध किया तो विवाद की स्थिति बन गई। इसके बाद गांव के लोगों ने पुलिस को इस गतिविधि की सूचना दी। एफआईआर में यह भी उल्लेख है कि उसी दिन मोहल्ले के एक घर में ईसाई धर्म से संबंधित प्रार्थना सभा आयोजित की जा रही थी, जिससे ग्रामीणों में नाराजगी और बढ़ गई। पुलिस ने दर्ज किया मामला पुलिस ने शिकायत और जांच के आधार पर पास्टर सुशांत ज्ञानिक और उनके सहयोगी पीयूष पटेल को गिरफ्तार कर लिया है। उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 299, 302, 3(5) तथा छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम, 1968 की धारा 4 के तहत अपराध दर्ज किया गया है। थाने में ईसाई समाज का विरोध दोनों पास्टर की गिरफ्तारी के बाद बड़ी संख्या में ईसाई समाज के लोग विधानसभा थाना पहुंचे और कार्रवाई का विरोध किया। उनका कहना है कि यह गिरफ्तारी गलत आरोपों के आधार पर की गई है और मामले की निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए। फिलहाल, पुलिस मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है और संबंधित लोगों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं।