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एक साथ 5000 छात्र कर सकेंगे पढ़ाई झारखंड की इस मेगा लाइब्रेरी में दिखेंगी परमवीर चक्र विजेताओं की गाथाएं

झारखंड  झारखंड की राजधानी रांची के मोराबादी में शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी पहल तेजी से आकार ले रही है. यहां पर करीब 65 करोड़ रुपये की लागत से मेगा अत्याधुनिक लाइब्रेरी बनाई जा रही है. यह लाइब्रेरी सूबे के छात्रों के लिए एक नई उम्मीद लेकर आ रही है. रविवार को झारंखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार और रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने इसका निरीक्षण कर कार्य की प्रगति का जायजा लिया. एक साथ 5000 छात्रों के बैठने की सुविधा यह लाइब्रेरी अपने आप में बेहद खास होगी, जहां एक साथ करीब 5,000 छात्र बैठकर पढ़ाई कर सकेंगे. हर फ्लोर पर मॉडर्न रीडिंग रूम बनाए जा रहे हैं, जिससे छात्रों को बेहतर और शांत वातावरण मिल सके. इसके साथ ही ग्राउंड फ्लोर पर कैफेटेरिया की सुविधा भी विकसित की जा रही है, ताकि छात्रों को पढ़ाई के बीच आराम और रिफ्रेशमेंट मिल सके. सीनियर सिटीजन्स के लिए विशेष व्यवस्था इस लाइब्रेरी की खास बात यह होगी कि इसमें हर आयु वर्ग के लोगों को सुविधा मिलेगी. पहली मंजिल पर सीनियर सिटीजन्स के लिए अलग व्यवस्था की जा रही है. इसका उद्देश्य यह है कि बुजुर्ग भी यहां आकर पढ़ें और समय बिताएं. परमवीर चक्र विजेताओं को मिलेगा सम्मान इस लाइब्रेरी को सिर्फ पढ़ाई का केंद्र नहीं, बल्कि प्रेरणा का केंद्र भी बनाया जा रहा है. प्रस्ताव रखा गया है कि यहां परमवीर चक्र से सम्मानित 21 वीर सपूतों के चित्र लगाए जाएं. राज्यपाल ने इस प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए निर्देश दिया है कि पूरी पहली मंजिल को इन वीरों को समर्पित किया जाए, जहां उनके शौर्य और बलिदान की कहानियां भी प्रदर्शित होंगी. जून तक पूरा होने की उम्मीद निर्माण कार्य तेजी से जारी है और उम्मीद जताई जा रही है कि यह लाइब्रेरी जून तक बनकर तैयार हो जाएगी. अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि जून या जुलाई में इसका उद्घाटन कर दिया जाए, ताकि छात्र जल्द से जल्द इसका लाभ उठा सकें. आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को मिलेगा लाभ इस लाइब्रेरी को एक ट्रस्ट के माध्यम से संचालित किया जाएगा. इसका मुख्य उद्देश्य ऐसे छात्रों तक महंगी किताबें और संसाधन पहुंचाना है, जो आर्थिक तंगी के कारण उन्हें खरीद नहीं पाते. इससे शिक्षा के क्षेत्र में समान अवसर को बढ़ावा मिलेगा. कोल इंडिया और सीसीएल का अहम योगदान इस महत्वाकांक्षी परियोजना को साकार करने में कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) और सेंट्रल कोल फील्ड लिमिटेड (सीसीएल) का बड़ा योगदान रहा है. इनके सहयोग से यह लाइब्रेरी आधुनिक सुविधाओं से लैस हो रही है. शिक्षा का नया केंद्र बनेगा मोराबादी रांची के बीचों-बीच, कई विश्वविद्यालयों के पास स्थित यह लाइब्रेरी आने वाले समय में पूरे झारखंड के छात्रों के लिए एक प्रमुख शिक्षा केंद्र बन सकती है. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि यह पहल सिर्फ एक इमारत तक सीमित रहती है या राज्य के भविष्य को नई दिशा देने वाला ज्ञान का सबसे बड़ा हब बनती है.

ईरान पर हमला करेगा US ? ट्रंप के प्लान में 2500 नौसैनिक, 3500 सैनिक और युद्धपोत, ग्राउंड ऑपरेशन की तैयारी

वाशिंगटन पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष अब एक निर्णायक और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है. 'एसोसिएटेड प्रेस' (AP) और 'वॉशिंगटन पोस्ट' की ताजा रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी मरीन कॉर्प्स की पहली 'एक्सपीडिशनरी यूनिट' (31st MEU) मध्य पूर्व पहुंच चुकी है।  इसके साथ ही पेंटागन ने ईरान के भीतर हफ़्तों तक चलने वाले ग्राउंड ऑपरेशन का खाका तैयार कर लिया है.अमेरिकी रक्षा मुख्यालय पेंटागन ने ईरान में संभावित जमीनी सैन्य अभियान की तैयारी तेज कर दी है. वहीं अमेरिका ने क्षेत्र में 3500 से ज्यादा सैनिक तैनात किए गए हैं।  अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से 'द वॉशिंगटन पोस्ट' ने दावा किया है कि  पेंटागन कई हफ्तों तक चलने वाले ग्राउंड ऑपरेशन की योजना बना रहा है. इसमें स्पेशल ऑपरेशन फोर्स और पारंपरिक पैदल सेना शामिल हो सकती है. हालांकि अंतिम फैसला अभी अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को लेना है।  मिडिल ईस्ट पहुंचा युद्धपोत  इसी बीच अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने पुष्टि की है कि अमेरिकी नौसेना का युद्धपोत USS Tripoli करीब 2500 मरीन सैनिकों को लेकर मिडिल ईस्ट पहुंच गया है. इस जहाज पर 31st मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट के सैनिक तैनात हैं. यह यूनिट पहले जापान में तैनात थी और ताइवान के आसपास अभ्यास कर रही थी, लेकिन करीब दो हफ्ते पहले इसे मिडिल ईस्ट भेजने का आदेश दिया गया।  USS त्रिपोली अपने साथ ट्रांसपोर्ट विमान, अत्याधुनिक स्ट्राइक फाइटर जेट्स (F-35) और Amphibious हमले के उपकरण भी मौजूद हैं जो समुद्र से जमीन पर सीधा प्रहार करने में सक्षम है।  वॉशिंगटन पोस्ट के अनुसार, अमेरिकी अधिकारी अब ईरान के भीतर 'स्पेशल ऑपरेशन्स' और पारंपरिक इन्फैंट्री सैनिकों द्वारा छापेमारी (Raids) की योजना बना रहे हैं. हालांकि, ट्रंप द्वारा इन जमीनी सैन्य अभियानों को अंतिम मंजूरी देना अभी बाकी है, लेकिन 82nd एयरबोर्न डिवीजन के हजारों सैनिकों और सैन डिएगो से रवाना हुए।  और खतरनाक मोड़ पर पहुंच सकता है युद्ध दरअसल मिडिल ईस्ट में तनाव तब चरम पर पहुंचा जब ईरान ने सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर हमला किया, जिसमें 10 अमेरिकी कर्मी घायल हुए. वहीं, ईरान द्वारा होर्मुज की नाकेबंदी ने वैश्विक तेल संकट पैदा कर दिया है. यमन के हूती विद्रोहियों की सक्रियता ने 'बाब अल-मंडेब' जैसे व्यापारिक मार्गों को भी असुरक्षित बना दिया है।  सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका ईरान में जमीनी ऑपरेशन शुरू करता है, तो यह युद्ध और व्यापक हो सकता है. अभी तक युद्ध मिसाइल, ड्रोन और एयर स्ट्राइक तक सीमित था, लेकिन ग्राउंड ऑपरेशन शुरू होने पर सीधे जमीन पर लड़ाई शुरू हो जाएगी।  कूटनीतिक स्तर पर भी बातचीत जारी है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है. ऐसे में मिडिल ईस्ट में बड़े युद्ध की आशंका लगातार बढ़ती जा रही है और दुनिया की नजर अब अमेरिका के अगले कदम पर टिकी है। 

चंडीगढ़ में बेंगलुरु के प्रोडक्शन मालिक को सजा, एक साल की कैद और 10 लाख जुर्माना; चेक बाउंस के मामले में फैसला

चंडीगढ़  चंडीगढ़ की जिला अदालत ने सारा प्रोडक्शन बेंगलुरु के मालिक सचिन कांबले को शनिवार को 1 साल की सजा सुनाई है। साथ ही 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। यह मामला मोहाली की कैनम मूवी प्रोडक्शन प्राइवेट लिमिटेड के साथ चेक फ्रॉड से जुड़ा हुआ है।  फिल्म शूटिंग के लिए गलत कैमरे दिए मंगत वर्मा ने 5 जून 2019 को सचिन कांबले और दिलीप कुमार (दिया प्रोडक्शन) के साथ MoU साइन किया। फिल्म शूटिंग के लिए रेड एपिक कैमरा, CP-2 लेंस, DR-जूम आदि उपकरण खरीदने के लिए कुल 24.50 लाख रुपये दिए गए। लेकिन उपकरण खराब और गलत स्पेसिफिकेशन के निकले थे। बाद में नए उपकरण देने और 9.50 लाख रुपये मुआवजे का वादा किया गया। कुल देय राशि 34 लाख रुपये हो गई। खाता बंद होने के कारण चेक बाउंस सचिन कांबले ने 30 अप्रैल 2021 को एक्सिस बैंक (मल्लेश्वरम ब्रांच, बेंगलुरु) का चेक नंबर 004151 जारी किया, राशि 10 लाख रुपये थी। चेक 17 जून 2021 को बाउंस हो गया। बैंक का रिमार्क था – “Account Closed”। मंगत वर्मा ने 12 जुलाई 2021 को कानूनी नोटिस भेजा, लेकिन सचिन कांबले ने 15 दिन में पैसे नहीं दिए। इसके बाद 11 अगस्त 2021 को धारा 138 NI Act के तहत शिकायत दर्ज की गई।  

सनशाइन डबल पूरा कर दिग्गज खिलाड़ियों की सूची में शामिल हुई सबालेंका

अरिना सबालेंका ने मियामी ओपन के खिताब को अपने नाम किया। उन्होंने फाइनल मुकाबले में विश्व के चौथे नंबर की खिलाड़ी कोको गॉफ को 6-2, 4-6, 6-3 से हराया। इगा स्वियातेक के बाद सबालेंका 'सनशाइन डबल' पूरा करने वाली पहली खिलाड़ी बन गई हैं। यह उनका लगातार दूसरा मियामी ओपन खिताब है। इससे पहले एश्ले बार्टी (2019 और 2021) और सेरेना विलियम्स (2013 से 2015) ही लगातार यह टूर्नामेंट जीत पाई थीं। इस तरह सबालेंका ने दिग्गज खिलाड़ियों की सूची में अपनी जगह बना ली है। सबालेंका का कीर्तिमान सबालेंका एक ही सीजन में इंडियन वेल्स और मियामी में सनशाइन डबल जीतने वाली पांचवीं महिला खिलाड़ी बन गई हैं। सबालेंका से पहले स्टेफी ग्राफ, किम क्लिस्टर्स, विक्टोरिया अजारेंका और इगा स्वियाटेक यह कारनामा कर चुकी हैं। सबालेंका 2000 के बाद से चौथी खिलाड़ी हैं जो साल के अपने पहले चार टूर्नामेंट (मार्टिना हिंगिस, 2001, सेरेना विलियम्स, 2003, और विक्टोरिया अजारेंका, 2012) के फाइनल में पहुंची हैं। ये सभी टूर्नामेंट हार्ड कोर्ट पर हुए हैं। उन्होंने इनमें से तीन जीते, जिसमें ब्रिस्बेन और सनशाइन डबल शामिल हैं। खिताब जीतने के बाद सबालेंका ने कहा  यह खिताब काफी खास है। मेरा लक्ष्य हमेशा इतिहास में अपना नाम दर्ज कराना रहा है और मैंने बस वही किया। यह सुनने में बहुत अजीब लगता है। मुझे नहीं पता कि मैं यह कैसे कर पाई, लेकिन अभी मुझे बहुत गर्व है। बेशक, इस खूबसूरत ट्रॉफी से बहुत खुश हूं। नंबर पर स्थिति मजबूत की यह जीत उनके करियर का 24वां डब्ल्यूटीए एकल खिताब और कुल मिलाकर 30वां खिताब है जिसमें छह युगल खिताब भी शामिल हैं। इनमें चार ग्रैंडस्लैम एकल खिताब, दो डबल्स, 11 डब्ल्यूटीए 1000 सिंगल्स टाइटल और दो डबल्स खिताब शामिल हैं। सबालेंका लंबे समय से दुनिया की नंबर एक खिलाड़ी बनी हुई हैं और अब उनकी यह स्थिति और मजबूत हो गई है। सबालेंका ने अब तक विश्व नंबर एक खिलाड़ी के रूप में कुल 83 हफ्ते बिताए हैं। इसमें उनका मौजूदा शानदार दौर भी शामिल है जो लगातार 75 हफ्तों तक पहुंच चुका है। सोमवार को वह लगातार 76वें हफ्ते के लिए नंबर एक बनी रहेंगी। इसके साथ ही वह इगा स्वियातेक के सबसे लंबे नंबर एक रहने के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ देंगी। हालांकि, उनसे आगे अभी एश्ले बार्टी हैं, जिन्होंने सितंबर 2019 से मार्च 2022 तक लगातार 114 हफ्तों तक नंबर 1 की कुर्सी संभाली थी। उस दौरान कोविड-19 महामारी की वजह से रैंकिंग कुछ समय के लिए रुकी भी थी।  

इन्फ्रास्ट्रक्चर को बूस्ट: बिहार में 26 NH प्रोजेक्ट जल्द शुरू, जमीन अधिग्रहण में तेजी

पटना. राष्ट्रीय उच्च पथ (एनएच) की 26 परियोजनाओं के लिए वन विभाग की 711.92 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ी है। पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल ने बताया कि केंद्र सरकार के कानून के तहत प्रतिपूरक वनीकरण की जिम्मेदारी संबंधित निर्माण एजेंसी की होगी। पथ निर्माण विभाग के सचिव के स्तर से एनएच की संबंधित परियोजनाओं की मानीटरिंग की जा रही है। पथ निर्माण विभाग के सचिव ने कहा कि राष्ट्रीय उच्च पथ परियोजनाएं राज्य की कनेक्टिविटी को सुदृढ़ करने, निवेश आकर्षित करने एवं समग्र आर्थिक विकास को गति प्रदान करने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इन परियोजनाओं के समयबद्ध निष्पादन हेतु केंद्र एवं राज्य सरकार के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित किया गया है। यह बताया गया कि 711.92 हेक्टेयर वन भूमि से संबंधित प्रस्तावों को प्राथमिकता के आधार पर विधिवत अग्रसारित किया गया है। वन विभाग एवं अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ सतत समन्वय स्थापित कर आवश्यक स्वीकृतियां शीघ्र प्राप्त करने की दिशा में ठोस पहल की गयी है। विभाग द्वारा यह सुनिश्चित किया जा रहा कि किसी भी महत्वपूर्ण परियोजना में अनावश्यक विलंब की स्थिति उत्पन्न न हो। कुदरा में एनएच निर्माण बना मुसीबत  कैमूर जिले के कुदरा प्रखंड मुख्यालय से सकरी गांव तक भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) और परिवहन विभाग की लापरवाही के कारण सड़क सुरक्षा पूरी तरह सवालों के घेरे में है। राष्ट्रीय राजमार्ग-19 पर चल रहा सिक्स लेन निर्माण कार्य पिछले कई महीनों से अधूरा पड़ा है, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार कुदरा से सकरी गांव तक एनएच-19 और उसकी सर्विस सड़क की स्थिति बेहद खराब हो चुकी है। निर्माण कार्य के दौरान जगह-जगह गहरे गड्ढे खोद दिए गए हैं, लेकिन उन्हें भरने या समतल करने की दिशा में तत्परता नहीं दर्शायी जा रही है। सर्विस सड़क और उसके किनारे बने फुटपाथ भी इस हालत में हैं कि पैदल चलना तक मुश्किल हो गया है। स्थिति और भी गंभीर तब हो जाती है जब कई स्थानों पर बैरियर लगाकर आवागमन बाधित कर दिया जाता है। इससे वाहनों को अचानक दिशा बदलनी पड़ती है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। खासकर रात के समय और बारिश में यह मार्ग और अधिक खतरनाक हो जाता है। सुरक्षा मानकों की अनदेखी स्थानीय नागरिकों का कहना है कि निर्माण कार्य में हो रही देरी और सुरक्षा मानकों की अनदेखी प्रशासन की संवेदनहीनता को दर्शाती है। लोगों का आरोप है कि न तो पर्याप्त चेतावनी संकेत लगाए गए हैं और न ही वैकल्पिक रास्तों की समुचित व्यवस्था की गई है। गौरतलब है कि कुदरा थाना क्षेत्र में हाल के दिनों में सड़क दुर्घटनाओं की घटनाएं लगातार बढ़ी हैं। ऐसे में एनएच-19 की बदहाल स्थिति और अधूरा निर्माण कार्य हादसों को और आमंत्रित कर रहा है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि निर्माण कार्य को जल्द पूरा कराया जाए, गड्ढों को भरकर सड़क को सुरक्षित बनाया जाए तथा पर्याप्त संकेतक और सुरक्षा उपाय सुनिश्चित किए जाएं। उनका कहना है कि यदि समय रहते स्थिति में सुधार नहीं किया गया तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।

बांसवाड़ा में पर्यटन को नई पहचान, जगमेरू हिल्स पर ‘राम वाटिका’ निर्माण की तैयारी

बांसवाड़ा. ‘राजस्थान का स्कॉटलैंड’ व ‘100 द्वीपों के शहर’ (सिटी ऑफ हंड्रेड आइलैंड्स) के नाम से प्रसिद्ध बांसवाड़ा जिले में पर्यटकों की लोकप्रिय जगमेरू हिल्स जल्द अब पर्यटन के नए नक्शे पर उभरेंगी। प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध इस पहाड़ी स्थल को विकसित करने वन विभाग यहां करीब दो करोड़ रुपए की लागत से ‘राम वाटिका’ बनाने की योजना तैयार कर रहा है। यहां पर्यटक बादलों से बातें करते हुए बांसवाड़ा की पहचान ‘बांस’ से बने मड़ हाउस और सेल्फी प्वॉइंट से प्राकृतिक खूबसूरती को अपने कैमरे में कैद कर सकेंगे। वन विभाग के अनुसार राज्य सरकार की ओर से राम वाटिका विकसित करने के एक नई प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो रहा है। इसमें खूबसूरत वाटिका पर चरणबद्ध रूप से दो करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। योजना के तहत वन विभाग ने जगमेरू हिल्स को इसमें शामिल किया है। अक्सर यहां पर्यटक यहां कम ऊंचाई की छोटी-छोटी पहाड़ियां और इसकी चोटियां देखने आते हैं। बरसात में यह बेहद खूबसूरत हो जाती हैं। यहां पर्यटन सुविधाएं विकसित होने से बांसवाड़ा पर्यटन मानचित्र पर और उभार सकेगा। प्राकृतिक रोमांच, स्थानीय पहचान बढ़ेगी जगमेरू हिल्स पर बादलों के बीच खड़े होने का अहसास, नीचे से ऊपर उठते हुए धुंध के दृश्य और चारों ओर फैली हरियाली पर्यटकों को आकर्षित करती है। वन विभाग की ओर से प्रस्तावित रामवाटिका में बांसवाड़ा की पहचान बांस से बनी झोपड़ी, फर्नीचर सहित उसके सजावटी सामान होंगे। बांस का मड हाउस भी यहां बनाया जाएगा। बांस की कलाकारी और फर्नीचर के लिए प्रसिद्ध आदिवासी कारीगरों को भी प्रोत्साहन मिलेगा। ये भी होंगे आकर्षण बांस के मड़ हाउस के अलावा नक्षत्र गार्डन, गोत्र गार्डन, सेल्फी प्वॉइंट एवं चिल्ड्रन पार्क यहां बच्चों के लिए आकर्षण का केंद्र होंगे। इसके अलावा पर्यटकों के लिए यहां पेयजल, बैठने की व्यवस्था और स्वच्छ शौचालय जैसी जरूरी सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। माही बांध क्षेत्र में ‘100 द्वीप’ होंगे नए आकर्षण इसके साथ ही राज्य सरकार ‘100 द्वीपों के शहर’ (सिटी ऑफ हंड्रेड आइलैंड्स) के नाम से प्रसिद्ध बांसवाड़ा के माही क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ाएगी। सरकार ने एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है। यह समिति माही बांध के भराव क्षेत्र और आसपास के टापुओं पर पर्यटन विकास के लिए मास्टर प्लान तैयार करेगी। प्रशासनिक सुधार विभाग ने इसके आदेश जारी कर दिए हैं। माही बैकवाटर में फैले खूबसूरत टापू, हरियाली और पहाड़ियां पहले से ही पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। अब यहां वाटर स्पोर्ट्स, नेचर टूरिज्म और व्यू प्वाइंट जैसे नए आकर्षण विकसित किए जाएंगे। माही बैक वाटर में फैले टापू, चारों ओर हरियाली और पहाड़ियों से घिरा इलाका है। इस क्षेत्र में पानी से जुडी गतिविधियां, नेचर-बेस्ड टूरिज्म, व्यू-पॉइंट और अन्य आकर्षण विकसित किए जा सकेंगे। माही नदी पर बने इस बांध के जलाशय में फैले छोटे-बड़े टापू प्राकृतिक सुंदरता का अद्भुत नजारा पेश करते हैं। पर्यटन का नया डेस्टिनेशन बनेगा रामवाटिका के लिए जगमेरू हिल का प्रस्ताव बनाया गया है। अमूमन जून से दिसंबर तक यहां पर्यटक प्राकृतिक खूबसूरती देखने आते हैं। पर्यटकों के लिए यहां गार्डन सहित अन्य सुविधाएं विकसित होने से यह पर्यटन का नया डेस्टिनेशन बनेगा। – अभिषेक शर्मा, डीएफओ, बांसवाड़ा

हार्दिक पंड्या ने अपनी गर्लफ्रेंड माहिका को दी मर्सिडीज कार, कीमत है इतनी

मुंबई  भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार ऑलराउंडर और आईपीएल में मुंबई इंडियंस के कप्तान हार्दिक पंड्या ने अपनी गर्लफ्रेंड माहिका शर्मा को एक बेहद लग्जरी तोहफा दिया है. हार्दिक ने उन्हें भारत की पहली Mercedes-Benz V-Class कार गिफ्ट की है, जिसकी कीमत करीब 1.7 करोड़ रुपये बताई जा रही है।  हार्दिक पंड्या का यह खास तोहफा सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है. लग्जरी और प्रीमियम फीचर्स से लैस यह मर्सिडीज वी-क्लास देश की सबसे शानदार एमपीवी गाड़ियों में से एक मानी जाती है।  हार्दिक पहले भी अपनी लग्जरी लाइफस्टाइल, महंगी घड़ियों, कारों और फैशन सेंस को लेकर सुर्खियों में रहे हैं. हाल ही में टी20 वर्ल्ड कप जीतने के बाद उन्होंने 12 करोड़ की फेरारी कार भी खरीदी थी. जिसपर वो अपनी ग्रलफ्रेंड माहिका के साथ घूमते नजर आए थे. इससे पहले उन्होंने अपने बेटे को भी एक महंगी कार गिफ्ट की थी।  बता दें कि हार्दिक पंड्या ने आईसीसी मेन्स टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारतीय टीम की खिताबी जीत में अहम किरदार निभाया था. हार्दिक ने 9 मैचों में 27.12 की औसत से 217 रन बनाए थे, जिसमें दो अर्धशतक शामिल रहे. वहीं गेंदबाजी की बात करें तो उन्होंने 32.33 के एवरेज से 9 विकेट झटके।  हार्दिक के पास कई लग्जरी कारें  हार्दिक पंड्या के पास पहले से ही कई महंगी और हाई-परफॉर्मेंस कारें मौजूद हैं. उनके गैरेज में रोल्स-रॉयस फैंटम (Rolls‑Royce Phantom), लैम्बोर्गिनी हुराकैन ईवीओ (Lamborghini Huracán EVO), लैम्बोर्गिनी उरुस (Lamborghini Urus), मर्सिडीज-एएमजी जी63 (Mercedes‑AMG G63), रेंज रोवर वोग (Range Rover Vogue) और ऑडी A6 जैसी गाड़ियां शामिल हैं।  हार्दिक ने हाल ही में की थी माहिका की तारीफ हार्दिक पंड्या ने टी20 वर्ल्ड कप जीतने के बाद अपनी गर्लफ्रेंड माहिका शर्मा की खूब तारीफ की थी. तब उन्होंने कहा था कि जबसे उनकी जिंदगी में माहिका आई है तब से सबकुछ अच्छा ही अच्छा हो रहा है. इसके बाद माहिका और हार्दिक के कई वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुई थीं. बता दें कि हार्दिक पंड्या इन दिनों आईपीएल में बिजी हैं और वो मुंबई इंडियंस की कप्तानी कर रहे हैं। 

नोएडा एयरपोर्ट से यूपी आने वाले विदेशी पर्यटकों के लिए बढ़ी सुविधाएं

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्टः यूपी आने वाले विदेशी पर्यटकों को होगी सुविधा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जेवर से सीधे यूपी हार्टलैंड में प्रवेश कर सकेंगे विदेशी पर्यटक, बढ़ेगा ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक पर्यटन आगरा, मथुरा-वृंदावन के साथ अयोध्या, वाराणसी आने वाले विदेशी पर्यटकों को भी मिला नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का नया विकल्प जेवर/ लखनऊ  नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जेवर से उत्तर प्रदेश में कनेक्टिविटी के विस्तार के साथ व्यापार, निवेश, औद्योगिक विकास और पर्यटन गतिविधियों के विकास में एक नया अध्याय शुरू होने की संभावना है। यमुना एक्सप्रेस-वे के किनारे बनाया गया यह एयरपोर्ट न सिर्फ दिल्ली-एनसीआर का दूसरा इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनेगा, बल्कि आगरा, मथुरा-वृंदावन, फतेहपुर सीकरी और यहां तक कि लखीमपुर खीरी के दुधवा नेशनल पार्क जैसे पर्यटन स्थलों को वैश्विक मानचित्र पर नई चमक देगा। जेवर में बना नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट न सिर्फ उड़ानों का हब बनेगा, बल्कि उत्तर प्रदेश की समृद्ध संस्कृति, इतिहास, आस्था और प्रकृति को वैश्विक पर्यटकों तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम साबित होगा। उत्तर प्रदेश वर्तमान में देश में घरेलू पर्यटन के मामले में शीर्ष स्थान पर पहुंच चुका है। साथ ही प्रदेश के आगरा, मथुरा, वाराणसी, अयोध्या और प्रयागराज में विदेशी पर्यटकों की संख्या में भी योगी सरकार के 9 वर्षों में तेज वृद्धि दर्ज की गई है। यूपी, जिसे ‘लैंडलॉक्ड’ माना जाता है, अब हवाई मार्ग से दुनिया से जुड़कर विदेशी पर्यटन के क्षेत्र में भी नई ऊंचाइयां छू सकता है। वर्तमान में यूपी आने वाले विदेशी पर्यटकों को लखनऊ, वाराणसी, कुशीनगर और अयोध्या के इंटरनेशनल एयरपोर्टों के साथ जेवर एयरपोर्ट का विकल्प भी मिल गया है। साथ ही यूपी में आगरा, फतेहपुर सीकरी और मथुरा-वृंदावन आने वाले अंतर्राष्ट्रीय कृष्ण भक्तों को पहले दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर निर्भर रहना पड़ता था। लेकिन नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के शुरू होने से पर्यटकों को यमुना एक्सप्रेस-वे के जरिए आगरा और फतेहपुर सीकरी महज 1.5 से 2 घंटे में, जबकि मथुरा-वृंदावन केवल 90 मिनट में पहुंचने की सुविधा मिल जाएगी। यही नहीं, जेवर में बना यह एयरपोर्ट केवल यूपी ही नहीं, बल्कि देश के इंटरनेशनल टूरिज्म हब दिल्ली-आगरा-जयपुर का क्लासिक गोल्डन ट्रायंगल भी विदेशी पर्यटकों के लिए अब और अधिक आकर्षक व सुविधाजनक हो जाएगा। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जेवर में आवागमन शुरू हो जाने से यूपी में ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक पर्यटन के साथ ही इको-टूरिज्म को भी बढ़ावा मिलेगा। प्रदेश के प्रसिद्ध दुधवा नेशनल पार्क, लखीमपुर खीरी और उत्तराखंड के जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क, देहरादून आने वाले प्रकृति प्रेमी पर्यटकों को भी विशेष सुविधा मिल सकेगी। यही नहीं, यूपी की पर्यटन नीति-2022 में जिस तरह इको-टूरिज्म को बढ़ावा दिया गया है, उसके चलते दुधवा ही नहीं, कतर्निया घाट (बहराइच), सैफई लायन सफारी जैसे स्थलों के लिए भी विदेशी पर्यटकों की पहुंच आसान होगी।  इसके साथ ही नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के निर्माण से यूपी में मेडिकल और बिजनेस टूरिज्म को भी जबरदस्त बढ़ोतरी मिलेगी। यूपी में पर्यटन की बढ़ोतरी के साथ होटल, रेस्टोरेंट, रिसॉर्ट्स, गाइडों के साथ हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों व व्यंजनों का भी तेज गति से विकास होगा। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जेवर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के वन ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी के विजन को व्यापार, उद्योग, निवेश के साथ पर्यटन में उल्लेखनीय वृद्धि के जरिए साकार करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

जैकब डफी को मिले एक लाख और माइकल ब्रेसवेल पर हुई रुपयों की बारिश

इंडियन प्रीमियर लीग के 19वें संस्करण (IPL 2026) का आगाज शनिवार से हो गया है. पहले मैच में विराट कोहली ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए नाबाद 69 रन बनाए, देवदत्त पडिक्कल (61) ने भी महत्वपूर्ण अर्धशतक जड़ा. इन पारियों की मदद से RCB ने 202 के लक्ष्य को 16वें ओवर में हासिल कर लिया. रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के गेंदबाज जैकब डफी को प्लेयर ऑफ द मैच अवार्ड मिला, उन्होंने 4 ओवरों में 22 रन देकर 3 विकेट चटकाए थे. इस अवार्ड के साथ उन्हें 1 लाख रुपये की प्राइज मनी मिली. इसी विंडो में पाकिस्तान सुपर लीग भी जारी है, जिसके प्लेयर ऑफ द मैच अवार्ड की प्राइज मनी 5 लाख पाकिस्तानी रुपये है. इंडियन प्रीमियर लीग दुनिया की सबसे बड़ी टी20 लीग है, लेकिन पाकिस्तान दावा करता है कि उनकी लीग IPL को टक्कर देती है. हालांकि ये सच नहीं है, चाहे प्राइज मनी हो, प्लेयर्स की सैलरी हो, फ्रेंचाइजियों की वैल्यू, दर्शकों की संख्या, व्यूवरशिप हो या कुछ भी, हर चीज में IPL आगे नजर आती है. हालांकि प्लेयर ऑफ द मैच अवार्ड की प्राइज मनी में पीएसएल आगे है, लेकिन अंतर सिर्फ हजारों का है. IPL 2026 में POTM की प्राइज मनी इंडियन प्रीमियर लीग के 19वें संस्करण के पहले मैच में आरसीबी के तेज गेंदबाज जैकब डफी को प्लेयर ऑफ द मैच अवार्ड मिला, इसके साथ उन्हें 1 लाख रुपये की प्राइज मनी भी दी गई. PSL 2026 में POTM की प्राइज मनी पाकिस्तान सुपर लीग के एक मैच में माइकल ब्रेसवेल को प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया, वह पेशावर जाल्मी के लिए खेल रहे हैं. उन्हें प्राइज मनी के तौर पर 5 लाख पाकिस्तानी रुपये मिले. हालांकि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भारतीय मुद्रा की तुलना में पाकिस्तानी मुद्रा कम है. भारतीय मुद्रा में देखें तो पाकिस्तानी 5 लाख रुपये करीब 1 लाख 50 हजार रुपये होते हैं. टोटल प्राइज मनी में ज्यादा खर्च करता है IPL हालांकि आईपीएल में प्लेयर ऑफ द मैच अवार्ड के साथ कुछ और खिताब भी दिए जाते हैं, जैसे हर मैच में सुपर स्ट्राइकर, बेस्ट कैच आदि के लिए भी अवार्ड दिए जाते हैं. रिपोर्ट के अनुसार प्रति मैच सभी अवार्ड्स की प्राइज मनी को मिलाएं तो 5 लाख रुपये बनते हैं, जो PSL की तुलना में 3 गुना से अधिक होते हैं.  

मालाबार पाइड हॉर्नबिल और उड़न गिलहरी की मौजूदगी दर्ज, उदंती में तकनीक और परंपरा का संगम

जगदलपुर. छत्तीसगढ़ के घने जंगलों में एक दिलचस्प बदलाव दिखाई दे रहा है. यहाँ की पहाड़ियों और वनों में अब फिर से उन दुर्लभ प्रजातियों की आहट सुनाई देने लगी है, जो कभी पश्चिमी घाट और हिमालयी क्षेत्रों की पहचान मानी जाती थीं. मालाबार पाइड हॉर्नबिल, मालाबार विशाल गिलहरी और भारतीय उड़ने वाली गिलहरी जैसी प्रजातियाँ अब उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व में अपना विस्तार कर रही हैं. इस बदलाव के पीछे आधुनिक तकनीक और स्थानीय समुदायों के पारंपरिक ज्ञान का एक अनूठा संगम काम कर रहा है. सेंट्रल इंडियन हाइलैंड्सः एक प्राकृतिक ‘जीव-जंतु पुल’ छत्तीसगढ़ का सेंट्रल इंडियन हाइलैंड्स क्षेत्र पश्चिमी घाट, पूर्वी घाट और हिमालय के बीच एक महत्वपूर्ण पारिस्थितिक कड़ी का काम करता है. यह क्षेत्र कई वन्यजीव प्रजातियों के लिए “फॉनल ब्रिज” यानी जीव-जंतुओं के आवागमन का प्राकृतिक मार्ग बनता है. उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व इसी हाईलैंड्स का हिस्सा है. यह क्षेत्र उन प्रजातियों के लिए आदर्श माना जाता है जो ऐसे वनों में पनपती हैं जहाँ वृक्षों के छत्र आपस में जुड़े हों, जिन्हें “वृक्षीय राजमार्ग” कहा जाता है. सालभर जल स्रोत उपलब्ध हों, फल देने वाले वृक्ष जैसे बरगद, पीपल और सेमल मौजूद हों. लेकिन पिछले वर्षों में अतिक्रमण, अवैध शिकार और अवैध वृक्ष कटाई के कारण इन वनों को नुकसान पहुँचा और इन दुर्लभ प्रजातियों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई. जब एआई ने जंगलों की निगरानी शुरू की वर्ष 2022 में उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व ने जंगल संरक्षण में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग शुरू किया. रिजर्व ने गूगल अर्थ इंजन आधारित रिमोट सेंसिंग पोर्टल का उपयोग करते हुए 1840 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में वन आवरण और जल स्रोतों की स्थिति का विश्लेषण किया. सेंटिनल और लैंडसैट उपग्रहों से प्राप्त पिछले 15 वर्षों के आंकड़ों का अध्ययन कर मशीन लर्निंग एल्गोरिदम के माध्यम से एनडीवीआई (वनस्पति सूचकांक) और एनडीडब्ल्यूआई (जल सूचकांक) में बदलावों का विश्लेषण किया गया. इस तकनीक से उन क्षेत्रों की पहचान संभव हुई जहाँ, वन आवरण तेजी से कम हो रहा था. वृक्षों के छत्रों में अंतराल बढ़ रहा था. जल स्रोत सूख रहे थे. इन क्षेत्रों को “हॉटस्पॉट” के रूप में चिह्नित किया गया. ड्रोन से हुआ जमीनी सत्यापन उपग्रह चित्रों से मिले संकेतों की पुष्टि के लिए एआई-संचालित सर्वेक्षण ड्रोन का उपयोग किया गया. इन ड्रोन की मदद से हॉटस्पॉट क्षेत्रों का उच्च-रिज़ॉल्यूशन मानचित्र तैयार किया गया. जंगलों की वास्तविक स्थिति का आकलन हुआ. संरक्षण के लिए प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान की गई. इससे वन विभाग को एक सटीक और अद्यतन तस्वीर मिली, जो संरक्षण रणनीति बनाने में अत्यंत उपयोगी साबित हुई. असली जानकारी समुदाय के पास तकनीक के साथ-साथ स्थानीय समुदायों का ज्ञान भी इस पहल का महत्वपूर्ण हिस्सा बना. ओढ़, अमलोर, आमामोरा, नारिपानी, अमली, खालगढ़, मेचका, बमनीझोला, आमगाँव, बहिगाँव और कारिपानी जैसे गांवों के वनवासियों से बातचीत कर इन प्रजातियों के पुराने रहवास क्षेत्रों, भोजन के स्रोतों और आवागमन के रास्तों की जानकारी जुटाई गई. यह पारंपरिक ज्ञान कई मामलों में वैज्ञानिक डेटा का पूरक साबित हुआ. तीन वर्षों में उठाए गए महत्वपूर्ण कदम एकत्रित जानकारी और विश्लेषण के आधार पर पिछले तीन वर्षों में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए. लगभग 850 हेक्टेयर अतिक्रमण हटाया गया. हॉटस्पॉट क्षेत्रों के 21 तालाबों में सौर ऊर्जा से चलने वाले पंप लगाए गए, जो गर्मियों में सूख जाया करते थे. फाइकस प्रजातियों और फलदार वृक्षों का बड़े पैमाने पर रोपण किया गया. जल संरक्षण के लिए कंटूर ट्रेंच, चेक डैम और जल संचयन संरचनाएँ बनाई गईं. इसके साथ ही अवैध शिकार रोकने के लिए 60 से अधिक एंटी-पोचिंग अभियान चलाए गए, जिनमें ओडिशा और यूएसटीआर क्षेत्र से लगभग 500 शिकारी और लकड़ी तस्करों की गिरफ्तारी हुई. समुदाय के साथ संरक्षण की नई पहल वन विभाग ने समुदाय आधारित संरक्षण कार्यक्रम भी शुरू किए हैं. इनमें प्रमुख हैं, “हॉर्नबिल रेस्टोरेंट” जहाँ हॉर्नबिल के लिए भोजन उपलब्ध कराया जाता है. “वीविंग बैक द स्क्विरल कैनोपी” भारतीय विशाल और उड़न गिलहरियों के लिए जुड़े हुए वृक्ष छत्रों का पुनर्निर्माण. इन पहलों ने स्थानीय लोगों को संरक्षण का सक्रिय भागीदार बना दिया है. अब लौट रही हैं दुर्लभ प्रजातियाँ इन संयुक्त प्रयासों के परिणाम अब दिखने लगे हैं. मालाबार पाइड हॉर्नबिल, जो पहले केवल कुलहाड़ीघाट परिक्षेत्र में दर्ज की जाती थी, अब चार परिक्षेत्रों-कुलहाड़ीघाट, अरसिकनहार, दक्षिण उदंती और इंदागाँव- तक फैल चुकी है. इसी तरह भारतीय विशाल गिलहरी और उड़ने वाली गिलहरी भी अब रिजर्व के कई नए क्षेत्रों में दिखाई देने लगी हैं. यह विस्तार न केवल इन प्रजातियों की वापसी का संकेत है बल्कि जंगलों के बेहतर होते स्वास्थ्य का भी प्रमाण है. यही जंगल महानदी का उद्गम स्थल भी हैं. इको-टूरिज्म से खुलेगा विकास का नया रास्ता विशेषज्ञों का मानना है कि इस क्षेत्र में इको-टूरिज्म की अपार संभावनाएँ हैं. विशेषकर गर्मियों के मौसम में यहाँ बर्ड वॉचिंग के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक आ सकते हैं. इससे स्थानीय समुदायों को रोजगार मिलेगा और पलायन कम हो सकता है. तकनीक और परंपरा का सफल संगम उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व का यह मॉडल दिखाता है कि जब आधुनिक तकनीक और स्थानीय ज्ञान साथ आते हैं तो जंगलों और वन्यजीवों के संरक्षण में चमत्कारी परिणाम मिल सकते हैं. यह पहल न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बन सकती है.