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समाजवाद के नाम पर ‘परिवारवादी’ खा जाते थे गरीबों का हकः मुख्यमंत्री

लखनऊ. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को प्रदेशवासियों के हित में दो बड़े कार्य किए। सुबह आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को विकास योजनाओं व तकनीक से जोड़ा तो शाम को वंचित व कमजोर वर्ग के कक्षा 9-10 तथा दशमोत्तर के 27,99,982 विद्यार्थियों के बैंक खाते में 3350 करोड़ की छात्रवृत्ति/शुल्क प्रतिपूर्ति का अंतरण किया। सीएम ने गरीब परिवारों के मुख्य अर्जक की मृत्यु होने पर राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना के अंतर्गत 33,334 आश्रित परिवारों को भी 100 करोड़ रुपये की सहायता राशि का अंतरण किया। इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित समारोह में छात्रवृत्ति पाने वाले बच्चों को शुभकामनाएं देते हुए मुख्यमंत्री ने अपने विचार भी प्रकट किए। उन्होंने समाजवादी पार्टी के नेताओं को जमकर आड़े हाथ लिया और कहा कि समाजवाद के नाम पर परिवारवादी गरीबों का हक खा जाते थे। लेकिन, गरीबों के हक पर डकैती डालने वालों को मालूम है कि अब ऐसा किया तो जेल जाना पड़ेगा। सरकार उनके बाप-दादा की कमाई भी जब्त कर गरीबों में बांटेगी। सीएम ने बच्चों को दिया परिश्रम का मूलमंत्र  सीएम ने बच्चों से कहा कि यह छात्रवृत्ति इसलिए है कि आप और मेहनत कर सकें। परिश्रम का कोई विकल्प नहीं हो सकता। छात्रवृत्ति संबल का काम कर रही है, यह आपकी मंजिल नहीं है, आपकी मंजिल परिश्रम है। परिश्रम से प्राप्त अंक ही मंजिल पर ले जाएंगे। यदि मेहनत में कोताही बरती, छात्रवृत्ति की धनराशि का दुरुपयोग किया और परिणाम खराब आया तो यह स्वतः ही बाधित हो जाती है। ऐसी नौबत न आने पाए।  जब संवेदना का हिस्सा बनती है सेवा तो ‘सबका साथ-सबका विकास’ होता है सीएम योगी ने कहा कि सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में 67 लाख बच्चों को 4800 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति उपलब्ध कराई। जब सेवा संवेदना का हिस्सा बनती है तो सरकार का लक्ष्य व्यक्ति, जाति-संप्रदाय नहीं, बल्कि सबका साथ-सबका विकास होता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का प्रेरणादायी मंत्र सबका साथ-सबका विकास बिना भेदभाव सभी समुदायों को छात्रवृत्ति योजना से जोड़ता है। अनुसूचित जाति-जनजाति के शत-प्रतिशत, पिछड़ी जाति के विद्यार्थियों, सामान्य वर्ग के अतिगरीब व अल्पसंख्यक समुदाय के छात्रों की पढ़ाई के लिए प्लेटफॉर्म उपलब्ध हो और उन्हें समय पर छात्रवृत्ति मिले, सरकार की पहले ही दिन से यह मंशा थी।  सपा ने प्रदेश को इतना लूटा कि हमारी सरकार को 2017-18 के साथ 2016-17 के बच्चों की भी छात्रवृत्ति देनी पड़ी थी मुख्यमंत्री ने कहा कि 2016-17 में समाजवादी पार्टी ने अनुसचित जाति-जनजाति के छात्रों को छात्रवृत्ति ही नहीं दी, क्योंकि उन्होंने तब तक प्रदेश को इतना लूट डाला था कि खाते में पैसा ही नहीं था। जो राशि केंद्र सरकार से छात्रवृत्ति के लिए आई थी, उसे भी उन्होंने समाजवादी पार्टी के कार्यों के लिए डायवर्ट कर दिया था। 2017 में जब हमारी सरकार आई तो 2017-18 के साथ ही हमें 2016-17 के बच्चों को भी छात्रवृत्ति देनी पड़ी।  पहले तकनीक का उपयोग नहीं होता था, छात्रवृत्ति के पैसे में मनमानी करते थे अधिकारी  सीएम योगी ने कहा कि पहले छात्रवृत्ति की राशि कम होती थी और उसमें भी तकनीक का उपयोग नहीं होता था। पैसा जिले में जाता था, वहां समाज कल्याण, पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अधिकारी मनमानापन करते थे। छात्रों को 500 की बजाय 200-250 रुपये ही छात्रवृत्ति मिल पाती थी। पीएम ने तकनीक पर ध्यान देने को कहा, जिससे आज एक क्लिक पर 28 लाख छात्रों के खाते में 3350 करोड़ रुपये पहुंच गए। यह दर्शाता है कि तकनीक जीवन को आसान बनाने के साथ ही भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था देती है।  2017 के पहले हर क्षेत्र में था भ्रष्टाचार, आधी राशि खा जाते थे सपा के गुंडे सीएम योगी ने कहा कि 2017 के पहले हर क्षेत्र में भ्रष्टाचार था। कुपोषित बच्चों व नवजात शिशुओं के पोषण आहार, कुपोषित माताओं के पोषाहार, छात्रों की छात्रवृत्ति, विकास योजनाओं, राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ समेत सभी योजनाओं में भ्रष्टाचार था। सीएम योगी ने पूर्व मुख्यमंत्री व सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तंज कसते हुए कहा कि उनका बयान था कि सरकार एक हजार रुपये पेंशन राशि क्यों देती है। उनके समय में दिव्यांगजनों को महज 300 रुपये मिलते थे, वह भी समय से नहीं। छह महीने में एक साथ 1800 रुपये जाते थे, लेकिन इसमें से दिव्यांग को केवल 900 रुपये मिलते थे और 900 रुपये इनके लोग चट कर जाते थे। विधवा-वृद्धजन पेंशन के रूप में 500 रुपये मिलते थे, छह महीने में एक साथ 3000 रुपये जाते थे। इसमें से 1500 रुपये सपा के गुंडे और बाबू हड़प कर जाते थे। सपा शासन में आधी राशि भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाती थी। यूपी में आज 1.06 करोड़ निराश्रित महिलाओं, वृद्धजनों व दिव्यांगजनों को 12 हजार रुपये सालाना पेंशन राशि सीधे अकाउंट में मिलती है। कटौती करने वालों को मालूम है कि गरीबों के हिस्से में डकैती डालेगा तो उसकी जगह जेल होगी और सरकार बाप-दादा की कमाई भी जब्त कर गरीबों में बांटेगी।  समाजवाद के नाम पर परिवारवादी खा जाते थे सहायता राशि  सीएम योगी ने राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना का जिक्र किया, कहा कि इसके लाभार्थियों को पेंशन व 30 हजार रुपये की राशि भी दी जा रही है। इसके तहत आज 100 करोड़ रुपये जारी हुए हैं। 2025-26 में 1.36 लाख से अधिक परिवारों को 412 करोड़ रुपये से अधिक सहायता राशि प्रदान की गई है। 2017 से अब तक 10 लाख से अधिक परिवारों को 3039 करोड़ रुपये से अधिक राशि दी जा चुकी है। पहले यह राशि गरीबों को नहीं मिलती थी। बच्चों की सहायता, माताओं का राशन, गरीबों व वंचितों को मिलने वाली सरकार की सहायता समाजवाद के नाम पर परिवारवादी खा जाते थे। गरीब लाचार-हताश होकर भटकते थे।  सपा के काले कारनामों के कारण ‘बीमारू’ बना था यूपी सीएम ने आरोप लगाया कि 2017 के पहले सत्ता के संरक्षण में पलने वाले गुंडे समानांतर सरकार चलाते थे। वंचित, दलितों की सुनवाई नहीं होती थी। सपा प्रदेश में चार बार सत्ता में आई, लेकिन एक भी दलित महापुरुष-संत व सामाजिक न्याय से जुड़े महापुरुष के प्रति सम्मान का भाव नही रखा। कन्नौज में बाबा साहेब के नाम पर बने मेडिकल कॉलेज का नाम सपा सरकार ने बदल दिया, हमारी सरकार ने फिर से उसका नाम बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के नाम पर … Read more

कल आएगा 12वीं का परिणाम: राजस्थान बोर्ड तैयार, उदयपुर से होगी लाइव घोषणा

उदयपुर. राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) अजमेर की 12वीं कक्षा का परीक्षा परिणाम कल यानी 31 मार्च 2026 को सुबह 10 बजे जारी किया जाएगा। शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर उदयपुर जिला कलक्टर कार्यालय से ऑनलाइन माध्यम से बोर्ड कार्यालय से जुड़कर परिणाम घोषित करेंगे। परीक्षा परिणाम जारी होते ही छात्र आधिकारिक वेबसाइट पर अपना रिजल्ट देख सकेंगे। बोर्ड की ओर से कॉपियों का मूल्यांकन लगभग पूरा हो चुका था और तकनीकी परीक्षण के बाद परिणाम जारी करने की तैयारी अंतिम चरण में थी। अब बोर्ड ने आधिकारिक रूप से 31 मार्च को परिणाम जारी करने की घोषणा कर दी है। 9 लाख से अधिक विद्यार्थियों ने दी थी परीक्षा इस वर्ष 12वीं कक्षा की परीक्षाएं 12 फरवरी से 11 मार्च के बीच आयोजित की गई थीं। इसमें कला, विज्ञान और वाणिज्य संकाय के करीब 9.10 लाख विद्यार्थियों ने भाग लिया था। परिणाम जारी होने के बाद छात्र अपने रोल नंबर के माध्यम से ऑनलाइन रिजल्ट देख सकेंगे। रिकॉर्ड समय में जारी हो रहा परिणाम आमतौर पर राजस्थान बोर्ड 12वीं का परिणाम मई के अंत तक जारी करता है, लेकिन इस बार मार्च में ही परिणाम घोषित किया जा रहा है। ऐसे में यह बोर्ड के इतिहास में सबसे जल्दी आने वाले 12वीं के परिणामों में शामिल हो सकता है। इससे पहले बोर्ड ने 24 मार्च 2026 को 10वीं कक्षा का परिणाम घोषित कर देशभर में सबसे पहले रिजल्ट जारी करने का रिकॉर्ड भी बनाया था। ऐसे डाउनलोड कर सकते हैं RBSE 12वीं का रिजल्ट – सबसे पहले ऑफिसियल वेबसाइट ओपन करें। होमपेज पर 'RBSE 12th Result 2026' के लिंक पर क्लिक करें। अपनी स्ट्रीम चुनें और रोल नंबर ऐड करें। सबमिट पर क्लिक करते ही स्क्रीन पर रिजल्ट दिखाई देगा।

सरकारी स्कूलों के लिए पंजाब सरकार का नया नियम शिक्षक और छात्र की गैरहाजिरी पर सीधा एक्शन

 चंडीगढ़ पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने शिक्षा विभाग की उपलब्धियों को साझा करते हुए एक ऐतिहासिक घोषणा की है। 1 अप्रैल से पंजाब के सरकारी स्कूलों में अनुपस्थिति को लेकर नई व्यवस्था लागू होने जा रही है। अब यदि कोई छात्र या शिक्षक स्कूल से गैर-हाजिर रहता है, तो इसकी तुरंत जानकारी अभिभावकों को दी जाएगी। छात्रों की अनुपस्थिति पर सीधा संपर्क नए नियमों के अनुसार, यदि कोई बच्चा स्कूल नहीं आता है, तो उसकी डिटेल माता-पिता को भेजी जाएगी। यदि कोई छात्र लगातार 2 से 3 दिन तक स्कूल से अनुपस्थित रहता है, तो स्कूल प्रशासन सीधे अभिभावकों से फोन पर संपर्क करेगा और अनुपस्थिति का कारण पूछेगा। इसका मुख्य उद्देश्य बच्चों की पढ़ाई में निरंतरता बनाए रखना और ड्रॉप-आउट रेट को कम करना है। शिक्षकों पर भी रहेगी नज़र मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि पारदर्शिता केवल छात्रों तक सीमित नहीं रहेगी यदि कोई शिक्षक स्कूल से गैर-हाजिर होता है, तो इसकी सूचना उनके वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ विद्यार्थियों के माता-पिता को भी दी जाएगी। शिक्षक की लंबी अनुपस्थिति की स्थिति में स्कूल मैनेजमेंट कमेटी को सूचित किया जाएगा और उनकी जगह तुरंत दूसरे शिक्षक की ड्यूटी लगाई जाएगी ताकि बच्चों का सिलेबस पीछे न रहे। भारत की पढ़ाई बनाम इंडिया की पढ़ाई चंडीगढ़ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सीएम मान ने शिक्षा के दोहरे स्तर पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि हमारे देश में दो तरह की शिक्षा है-एक ‘इंडिया’ की शिक्षा (महंगे प्राइवेट स्कूल) और दूसरी भारत की शिक्षा (सरकारी स्कूल)। सीएम ने चुटकी लेते हुए कहा कि पहले सरकारी स्कूलों को केवल दलिया खाने वाले स्कूल बना दिया गया था, जहाँ शिक्षा से ज्यादा अन्य चीजों पर ध्यान था। मान सरकार का लक्ष्य सरकारी स्कूलों को प्राइवेट स्कूलों के बराबर लाकर खड़ा करना है, ताकि गरीब का बच्चा भी वही क्वालिटी एजुकेशन पा सके जो अमीर के बच्चों को मिलती है।

कोयल नदी पुल की मरम्मत पूरी होने से यात्रियों को मिली बड़ी राहत

रांची रांची-लोहरदगा रेललाइन पर शनिवार से परिचालन सामान्य हो जाएगा। पहली ट्रेन रांची-लोहरदगा-टोरी पैसेंजर सुबह 5.15 बजे रवाना होगी। शुक्रवार को इस लाइन में लाइट इंजन ट्रेन चलाई गई। गौरतलब है कि रांची रेल मंडल के रांची-लोहरदगा-टोरी खंड पर नागजुआ व लोहरदगा स्टेशनों के मध्य कोयल नदी पर स्थित क्षतिग्रस्त पुल संख्या-115 की मरम्मत चल रही थी। इस कारण इरगांव से लोहरदगा के बीच ट्रेनों का परिचालन बंद था। हजारों यात्रियों को हो रही थी दिक्कत इस मार्ग के बाधित रहने से कई ट्रेनों को बदले मार्ग से चलाया जा रहा था। वहीं पुलिया में दरार की सूचना के बाद कुछ ट्रेनों को आंशिक समापन के जरिए भी चलाया गया था। इससे इस रूट में सफर करने वाले हजारों यात्रियों को परेशानी का सामना भी करना पड़ा रहा था। रेलवे ने की थी वैकल्पिक व्यवस्था वहीं, रेलवे ने वैकल्पिक व्यवस्था के तहत नई दिल्ली-रांची राजधानी एक्सप्रेस तय मार्ग टोरी-लोहरदगा-रांची के स्थान पर टोरी-बरकाकाना-मेसरा-टाटीसिलवे-रांची होकर चल रही थी। रांची-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस के अलावा रांची-चोपन-रांची एक्सप्रेस, सासाराम-रांची-सासाराम एक्सप्रेस व अजमेर-सांतरागाछी-अजमेर एक्सप्रेस भी परिवर्तित मार्ग से चल रही थी। आस-पास के इलाकों के लिए है लाइफलाइन बता दें कि रांची-लोहरदगा-टोरी रेलखंड लोहरदगा और आसपास के इलाकों के लिए लाइफलाइन माना जाता है। पुलिया में दरार की वजह से इस मार्ग से जनवरी से परिचालन ठप था। इस रूट पर चलने वाली लोहरदगा-रांची और रांची-लोहरदगा मेमू पैसेंजर ट्रेनों से हर दिन लगभग आठ हजार यात्री सफर करते हैं। इसके अलावे सासाराम एक्सप्रेस और राजधानी का लाभ यात्रियों को मिलता है। ट्रेन परिचालन ठप होने के बाद इन यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अचानक ट्रेन रुकने की सूचना मिलते ही लोहरदगा स्टेशन और आसपास के इलाकों में यात्रियों के बीच हड़कंप मच गया। मजबूरी में लोग बसों और अन्य निजी वाहनों की ओर दौड़ पड़े, जिससे बस स्टैंड और सड़कों पर भीड़ उमड़ पड़ी। लोहरदगा रेलवे स्टेशन पर सन्नाटा पसर गया।

बुंदेलखंड की 90 हजार ग्रामीण महिलाओं ने किया दो हजार करोड़ से अधिक का कारोबार

लखनऊ. एक वक्त था जब बुंदेलखंड की पहचान सूखे, पलायन और गरीबी से थी। लेकिन आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में इसी बुंदेलखंड की ग्रामीण महिलाएं देश के सामने आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख रहीं हैं। बुंदेलखंड की करीब 90 हजार महिलाओं ने दो हजार करोड़ रुपये से अधिक का सामूहिक कारोबार खड़ा कर इतिहास रच दिया है। झांसी जिले से शुरू हुई यह यात्रा आज बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर, जालौन, ललितपुर और महोबा में सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है। प्रतिदिन लगभग तीन लाख लीटर दूध का संग्रह 1143 गांवों में फैले इस नेटवर्क में महिलाएं प्रतिदिन लगभग तीन लाख लीटर दूध का संग्रह कर रहीं हैं। बलिनी एमपीसीएल से जुड़ी महिलाएं अब तक दो हजार करोड़ से अधिक का कारोबार कर चुकीं हैं। पहले जहां बिचौलियों के कारण दूध का वाजिब मूल्य नहीं मिल पाता था, वहीं अब सीधे बैंक खातों में भुगतान होता है। प्रशिक्षण, पशु चिकित्सा सेवाएं, वित्तीय सहायता और उपलब्ध बाजार ने इन महिलाओं को सच्चे अर्थों में उद्यमी बना दिया है। महिलाओं का यह समूह अब ग्रामीण डेयरी व्यवसाय का राष्ट्रीय मॉडल बन रहा है।  परिवार और समाज में आया बदलाव घर की आर्थिक जिम्मेदारी उठाते हुए बुंदेलखंड की महिलाएं अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दिला रहीं हैं, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बना रहीं हैं और सामाजिक रूप से भी सशक्त हो रहीं हैं। जो महिला पहले घर की दहलीज तक सीमित थीं, आज वे ग्राम स्तरीय बैठकों में निर्णय ले रहीं हैं। प्रदेश के सभी जिलों तक पहुंचेगी योजना  योगी सरकार ने इस मॉडल को प्रदेश के 31 जिलों तक पहुंचा दिया है, जिसके तहत महिलाओं के नेतृत्व वाले दुग्ध उत्पादन का कुल कारोबार 5,000 करोड़ रुपये के ऊपर पहुंच गया है। जल्द ही इसे प्रदेश के सभी जिलों तक पहुंचाने की योजना है, जिससे ग्रामीण महिलाओं को आगे बढ़ने के बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे। यह महज एक व्यावसायिक उपलब्धि नहीं, बल्कि योगी सरकार की योजनाओं का जीवंत प्रमाण है, जहां बुंदेलखंड की बेटियां अब पूरे देश को दिशा दिखा रहीं हैं।  

जल संसाधन मंत्री सिलावट का बयान: प्रदेश में जल संवर्धन और जल संरक्षण के कार्यों को बढ़ाएं

प्रदेश में अधिक से अधिक हों जल संवर्धन और जल संरक्षण के कार्य : जल संसाधन मंत्री सिलावट जल गंगा संवर्धन अभियान संबंधी ली बैठक भोपाल जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने कहा है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में जल गंगा संवर्धन अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के अंतर्गत प्रदेश के गांव-गांव, नगर-नगर में जल संरक्षण एवं जल संवर्धन संबंधी कार्य कराए जा रहे हैं। विभागीय अधिकारी समाज के सभी वर्गों एवं आमजन के सहयोग से अपने-अपने क्षेत्र में वृहत रूप से जल संरक्षण और संवर्धन के कार्य कराएं और इस अभियान को पूरी तरह सफल बनाएं। प्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान गत 19 मार्च से चलाया जा रहा है जो तीन माह तक चलेगा। जल संसाधन मंत्री सिलावट ने सोमवार को अपने निवास कार्यालय में जल गंगा संवर्धन अभियान संबंधी बैठक लेकर अभियान के अंतर्गत कराए जा रहे कार्यों की समीक्षा की एवं आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। बैठक में अपर मुख्य सचिव, जल संसाधन डॉ. राजेश राजौरा, अधीक्षण यंत्री पुष्पेन्द्र सिंह, श्रीमती हर्षा जैनवाल एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। मंत्री सिलावट ने निर्देश दिए कि अभियान के अंतर्गत आगामी दिनों में कराए जाने वाले कार्यों की कछारवार विस्तृत रूप रेखा तैयार कर आगामी 3 दिवस में प्रस्तुत की जाए। अभियान के सम्बन्ध में समय-समय पर विभाग द्वारा जारी विस्तृत दिशा निर्देशों के अनुरूप कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। बैठक मैं बताया गया कि जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत जल संसाधन विभाग द्वारा मुख्य रूप से जल संग्रहण स्रोतों के रख-रखाव एवं मरम्मत के अनुरूप अपूर्ण कार्यां को पूर्ण करना, निर्मित तालाब की पाल पर मिट्टी के कटाव अथवा अतिवर्षा से क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में पुनः निर्माण किये जाने, तालाबों की पिचिंग, बोल्डर टो तथा घाट आदि के मरम्मत का कार्य, जल संरचनाओं के किनारों पर अतिक्रमण को रोकना, संपूर्ण नहर प्रणाली में घास, झाडी, छोटे पेड पोधे आदि की सफाई का कार्य एवं वृक्षारोपण, शहरी आबादी क्षेत्रों में प्रमुख नहरों का चिन्हाकंन व सीमांकन का कार्य, स्टाप डेम बैराज-वीयर के गेट इत्यादि की मरम्मत, बांध के फ्लस बार स्लूज बेल की मरम्मत तथा सफाई का कार्य, केचमेंट एरिया में अवरोध का चिन्हांकन कर उसे हटाना तथा अन्य आवश्यक तकनीकी कार्य आदि कराए जा रहे हैं। अधिकारियों को सभी कार्यों को पूर्ण गुणवत्ता के साथ कराए जाने के निर्देश दिए गए।  

कनाडा: हिंदुओं को खालिस्तानी समर्थकों की धमकी, HCF ने कहा- हम झुकेंगे नहीं

लुधियाना  खालिस्तान समर्थकों ने कनाडा में फिर से हिंदुओं को धमकियां देनी शुरू कर दी। खालिस्तान चरमपंथी संगठनों(CBKE) ने 5 अप्रैल 2026 को 2 बड़े हिंदू मंदिरों के बाहर 'खालिस्तान जिंदाबाद' रैलियां और प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। खालिस्तान समर्थक ब्रैम्पटन के त्रिवेणी मंदिर और सरे के श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर को टारगेट कर रहे हैं। खालिस्तानियों ने बकायदा सोशल मीडिया पर इन मंदिरों के गेट पर प्रदर्शन करने का ऐलान कर दिया है। वहीं, हिंदू कैनेडियन फाउंडेशन (HCF) ने इस पर तुरंत सख्त बयान जारी किया है। उन्होंने साफ कहा है "हमारे मंदिर पूजा के पवित्र स्थान हैं, ये प्रदर्शन के मैदान नहीं हैं। हम धमकी के आगे नहीं झुकेंगे।" HCF ने पूरे कनाडा की पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को चेतावनी देते हुए कहा कि इन चरमपंथियों को रोको, वरना हिंदू समुदाय का भरोसा कनाडा की पुलिस और सरकार से टूट जाएगा। खालिस्तान समर्थकों की धमकी पर हिंदुओं जवाब, जानिए..     खालिस्तानियों की धमकी: CBKE ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके साफ ऐलान किया कि 5 अप्रैल को ब्रैम्पटन के त्रिवेणी मंदिर और सरे के लक्ष्मी नारायण मंदिर के बाहर 'खालिस्तान जिंदाबाद रैली' निकाली जाएगी। ये रैलियां सीधे मंदिर के गेट पर होगी।     हिंदुओं को सुनने पड़ेंगे नारे: खालिस्तान समर्थकों ने धमकी देते हुए कहा है कि हिंदू जब पूजा करने आएंगे तो उन्हें नारे सुनने पड़ेंगे, धक्का-मुक्की हो सकती है। खालिस्तान समर्थक कनाडा में पहले भी मंदिरों के बाहर माहौल खराब करने की कोशिश कर चुके हैं।खालिस्तान समर्थक एसजेएफ की तरफ से सोशल मीडिया पर की गई पोस्ट।     हिंदुओं को उकसाने की साजिश: खालिस्तानियों की धमकी के बाद HCF का कहना है कि ये कोई शांतिपूर्ण विरोध नहीं, बल्कि जानबूझकर उकसावे की साजिश है। मंदिर को राजनीतिक स्टेज बनाने की कोशिश की जा रही है।     2024 में हिंदुओं पर लाठियां चलाई थी: HCF का कहना है कि 3 नवंबर 2024 को ब्रैम्पटन के हिंदू सभा मंदिर पर खालिस्तान समर्थकों ने दिन-दहाड़े हमला बोल दिया था। महिलाएं, बच्चे, बुजुर्गों पर लाठियां चलाई थी। सिर्फ इसलिए क्योंकि वे शांतिपूर्वक पूजा कर रहे थे। HCF कहता है कि वो हमला अकेला नहीं था, लगातार मंदिरों को टारगेट किया जा रहा है, भक्तों को डराया जा रहा है। महिलाओं-बच्चों को धमकाया जा रहा है।     अब की बार पीछे नहीं हटेंगे: HCF ने अपने बयान में बहुत साफ-साफ शब्दों में जवाब दिया है और कहा है कि हमारे मंदिर पवित्र हैं। ये विरोध प्रदर्शन के स्थल नहीं, न ही राजनीतिक मंच हैं। अगर इस बार कोई हरकत हुई तो हम डरकर पीछे नहीं हटेंगे। HCF का कहना है कि हम चुप नहीं रहेंगे। हम डरेंगे नहीं। हम अपने मंदिरों से नहीं भागेंगे। उन्होंने कहा कि हिंदू समुदाय कनाडा का अभिन्न हिस्सा है। वे शांतिप्रिय हैं, लोकतंत्र और प्लूरलिज्म में विश्वास रखते हैं। लेकिन अब काफी हो चुका। सरकार हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करे।नवंबर 2024 में मंदिर के बाहर खालिस्तान समर्थकों का हंगामा और हिंदुओं पर हमला करते हुए।      मंदिरों के आसपास बने बबल जोन: HCF कहना है कि कनाडा की संसद ने पहले ही बिल C-9 पास किया है। इसमें पूजा स्थलों पर घृणा, धमकी और बाधा डालने को सख्त सजा का प्रावधान है। ब्रैम्पटन में पहले से ही मंदिरों के आसपास 'बबल जोन' बना दिए गए हैं, जहां प्रदर्शन करना मना है।     टारगेट करना प्रोस्टेस्ट नहीं, धमकी है: हिंदू संगठन ने साफ कहा किटारगेट करना कोई प्रोटेस्ट नहीं, ये धमकी है। पूजा में बाधा डालना कोई फ्री स्पीच नहीं, ये जबरदस्ती है। खालिस्तान समर्थक हिंदू समुदाय को चुप कराने की कोशिश कर रहा है। HCF ने चेतावनी दी कि ये सिर्फ हिंदुओं का मुद्दा नहीं है, बल्कि पूरे कनाडा की सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और सामाजिक भाईचारे के लिए खतरा है।     खालिस्तान समर्थकों के खिलाफ करें कार्रवाई: HCF ने कनाडा के अलग-अलग शहरों की पुलिस को पोसट टैग करते हुए लिखा है कि खालिस्तान समर्थकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें।     हिंसा भड़काने वालों की जवाबदेही तय हो: HCF ने कहा है कि कनाडा की खुफिया एजेंसी ने कई बार चेतावनी दी है कि कनाडा-आधारित खालिस्तानी चरमपंथी घरेलू सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन चुके हैं। HCF का कहना है कि जो लोग हिंसा को भड़काते हैं, उनकी पहचानकर जवाबदेही तय की जाए।

झारखंड में 103 प्रशासनिक पदों पर भर्ती के लिए जेपीएससी ने जारी किया नोटिस जानें परीक्षा का नया शेड्यूल

 झारखंड झारखंड पब्लिक सर्विस कमीशन (JPSC) ने स्टेट पीसीएस प्रीलिम्स परीक्षा 2026 की नई तारीख घोषित कर दी है. इस परीक्षा के लिए आवेदन करने वाले हजारों उम्मीदवार काफी समय से एग्जाम डेट (JPSC Pre Exam Date) का इंतजार कर रहे थे. अब उनका इंतजार खत्म हो गया है. आयोग की ओर से जारी नोटिस के मुताबिक JPSC प्रीलिम्स परीक्षा अब 19 अप्रैल 2026 को आयोजित की जाएगी. इससे पहले परीक्षा की तारीख 12 अप्रैल तय की गई थी, लेकिन बाद में इसे बदलकर नई तारीख घोषित कर दी गई. JPSC Pre Exam से 103 पदों पर होगी भर्ती इस भर्ती अभियान के जरिए झारखंड सरकार के विभिन्न विभागों में कुल 103 पदों को भरा जाएगा. इसमें कई अहम प्रशासनिक पद शामिल हैं. डिप्टी कलेक्टर के 28 पद, डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस यानी DSP के 42 पद और डिस्ट्रिक्ट कोऑर्डिनेटर के 2 पद शामिल हैं. इसके अलावा असिस्टेंट रजिस्ट्रार के 2 पद, असिस्टेंट म्यूनिसिपल कमिश्नर या एग्जीक्यूटिव ऑफिसर के 10 पद और जेल सुपरिटेंडेंट के 2 पद भी इस भर्ती में शामिल हैं. साथ ही असिस्टेंट डायरेक्टर-कम-डिस्ट्रिक्ट पब्लिक रिलेशन ऑफिसर के 10 पद, प्रोबेशन ऑफिसर के 4 पद और असिस्टेंट डायरेक्टर के 3 पद भी भरे जाएंगे. चयन प्रक्रिया JPSC PCS भर्ती प्रक्रिया तीन चरणों में पूरी होती है. सबसे पहले उम्मीदवारों को प्रीलिम्स परीक्षा देनी होती है. जो उम्मीदवार इस चरण में सफल होते हैं, उन्हें मेन्स परीक्षा के लिए बुलाया जाता है. इसके बाद मेन्स में सफल उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाता है. इन तीनों चरणों में अच्छा प्रदर्शन करने वाले उम्मीदवारों का फाइनल सेलेक्शन किया जाता है. इसके बाद उन्हें झारखंड राज्य की अलग-अलग प्रशासनिक सेवाओं में नियुक्ति दी जाती है.

सीएम योगी ने दी डिजिटल, सशक्त और आधुनिक आंगनवाड़ी व्यवस्था की सौगात

लखनऊ. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को लोकभवन में आयोजित भव्य कार्यक्रम के माध्यम से उत्तर प्रदेश की आंगनवाड़ी व्यवस्था को डिजिटल, सशक्त और आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया। इस अवसर पर उन्होंने 69,804 आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों एवं मुख्य सेविकाओं को स्मार्टफोन, 18,440 कार्यकत्रियों एवं सहायिकाओं को नियुक्ति पत्र वितरित किए। उन्होंने 450 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली विभिन्न बाल विकास एवं महिला कल्याण परियोजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास किया।  69 हजार से अधिक स्मार्टफोन वितरित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों और मुख्य सेविकाओं को 69,804 स्मार्टफोन वितरित किए। यह पहल आंगनवाड़ी सेवाओं को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। स्मार्टफोन के माध्यम से अब पोषण ट्रैकिंग, बच्चों का डेटा अपडेट, गर्भवती महिलाओं की निगरानी और सरकारी योजनाओं का रियल-टाइम क्रियान्वयन संभव होगा। नियुक्ति पत्र से जमीनी ढांचे को मिली नई मजबूती कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने 18,440 आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों एवं सहायिकाओं को नियुक्ति पत्र वितरित किए गए। यह भर्ती रिक्त पदों को भरने के साथ ही सेवा तंत्र को और मजबूती प्रदान करेगी। मुख्यमंत्री ने रायबरेली, अमेठी, सिधौली, गोसाईगंज समेत विभिन्न जिलों की चयनित अभ्यर्थियों को मंच से नियुक्ति पत्र सौंपे, जिससे पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया का संदेश भी गया। कुपोषण से लड़ाई को मिलेगा बल मुख्यमंत्री ने आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों को स्टेडियोमीटर, इन्फेंटोमीटर और वेइंग स्केल जैसे आधुनिक उपकरण वितरित किए। प्रदेशभर में 10,553 इन्फेंटोमीटर, 1,33,282 स्टेडियोमीटर और 58,237 मदर-चाइल्ड वेइंग स्केल उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इन उपकरणों से बच्चों की लंबाई, ऊंचाई और वजन की सटीक निगरानी होगी, जिससे कुपोषण की समय रहते पहचान और उपचार सुनिश्चित किया जा सकेगा। ‘सक्षम आंगनवाड़ी’, अब सेवा केंद्र से आगे बढ़कर विकास केंद्र बनेंगी प्रदेश में 23,697 आंगनवाड़ी केंद्रों को ‘सक्षम आंगनवाड़ी’ के रूप में विकसित किया गया है, जिन पर 236 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इन केंद्रों को एलईडी स्क्रीन, आरओ मशीन, ईसीसीई (अर्ली चाइल्डहुड केयर एंड एजुकेशन) किट और आधुनिक फर्नीचर से सुसज्जित किया गया है। अब ये केंद्र केवल पोषण वितरण तक सीमित नहीं, बल्कि बच्चों के समग्र विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और मानसिक विकास के केंद्र बन रहे हैं। 75 जिलों में फैला विशाल नेटवर्क आज उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में 897 बाल विकास परियोजनाएं लगभग 1.89 लाख आंगनवाड़ी केंद्रों से संचालित हो रही हैं। सरकार का लक्ष्य इन सभी केंद्रों को चरणबद्ध तरीके से स्मार्ट, डिजिटल और आधुनिक सुविधाओं से लैस करना है, ताकि हर बच्चे और हर मां तक गुणवत्तापूर्ण सेवाएं पहुंच सकें। कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि स्वस्थ बचपन ही मजबूत राष्ट्र की आधारशिला है। प्रदेश में उत्तम पोषण, प्रारंभिक शिक्षा और समुचित देखभाल के माध्यम से बच्चों के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित किया जा रहा है। आज आंगनवाड़ी केंद्र सुरक्षित, प्रेरणादायक और खेल-आधारित वातावरण प्रदान कर रहे हैं, जो बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है। सीएम ने हाथों मिले नियुक्ति पत्र, स्मार्टफोन व डिवाइस नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों में मीरा देवी (रायबरेली), महिमा (अमेठी), शहरुनिशां (सिधौली), शैलू सिंह (गोसाईगंज), किरण तथा सुभाषिनी और बक्शी का तालाब की मेनका पाल को नियुक्ति पत्र वितरित किए। वहीं सहायिकाओं में सुभाषिनी, मेनका पाल, मंजू सिंह, मुस्कान सोनकर और रूमा देवी को नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए। मुख्यमंत्री ने 69,804 स्मार्टफोन के वितरण के क्रम में मंच पर लखनऊ की आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों – आशा यादव, प्रीति सैनी, अमिता मिश्रा, अर्चना रावत, माया देवी, सुनीता रस्तोगी, निधि जायसवाल, मीना शुक्ला, प्रिया पाल और नेहा भारती को स्मार्टफोन प्रदान किए। वहीं मुख्य सेविकाओं में पूनम राय, अरुणा वाजपेई, मीनू देवी, रूमी रानी और उषा देवी को भी स्मार्टफोन देकर सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री ने मंच से आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों एवं सहायिकाओं को ग्रोथ मॉनिटरिंग डिवाइस (जिसमें स्टेडियोमीटर, इन्फेंटोमीटर व वेइंग स्केल शामिल हैं) का वितरण किया। इनमें नाहिद परवीन, सावित्री, यूतिका सिंह, राधा पांडे, आस्था पाल, अनीता, नीलू रावत, राजरानी, बीना मिश्रा और रेखा मिश्रा सम्मिलित रहीं।  

संवेदनशील नेतृत्व की मिसाल: मुख्यमंत्री साय ने दिव्यांग चंदूलाल की सुनी पुकार, मिनटों में मिला समाधान

रायपुर.  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के संवेदनशील और जनहितकारी शासन की एक भावुक झलक आज चंदखुरी में देखने को मिली, जब उन्होंने एक दिव्यांग ग्रामीण की समस्या को न केवल सुना, बल्कि मौके पर ही उसका समाधान सुनिश्चित कर मानवता और उत्तरदायी नेतृत्व का उदाहरण प्रस्तुत किया। चंदखुरी निवासी दिव्यांग चंदूलाल वर्मा के लिए यह दिन जीवन का अविस्मरणीय क्षण बन गया। वे मुख्यमंत्री से मिलने की आशा लेकर कायस्थ मंगल भवन के लोकार्पण कार्यक्रम में पहुंचे थे। कार्यक्रम समाप्ति के बाद जब वे मुख्यमंत्री से मिलने के लिए आगे बढ़े, तो सुरक्षा कारणों से उन्हें रोक दिया गया।इसी दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की नजर उन पर पड़ी। उन्होंने तत्परता दिखाते हुए सुरक्षाकर्मियों को निर्देश दिया कि वर्मा को मंच पर बुलाया जाए। यह एक छोटा-सा निर्णय था, लेकिन चंदूलाल के जीवन में बड़ा बदलाव लेकर आया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से मिलते ही चंदूलाल ने अपनी व्यथा साझा की। उन्होंने बताया कि वे पहले राजमिस्त्री का कार्य करते थे, लेकिन शुगर की बीमारी और डायबिटिक फुट के कारण उनके पैरों में गंभीर समस्या हो गई, जिससे चलना-फिरना कठिन हो गया। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वे अब कोई कार्य नहीं कर पा रहे हैं और उन्हें बैटरी संचालित ट्राईसिकल की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री साय ने अत्यंत संवेदनशीलता के साथ उनकी पूरी बात सुनी और तत्काल सहायता राशि प्रदान करते हुए अधिकारियों को निर्देशित किया कि उन्हें शीघ्र मोटराइज्ड ट्राईसिकल उपलब्ध कराया जाए। मुख्यमंत्री के निर्देशों का त्वरित पालन सुनिश्चित किया गया। नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतीक बैस ने तत्काल प्रक्रिया पूर्ण कर चंदूलाल वर्मा को मोटराइज्ड ट्राईसिकल उपलब्ध कराया। अपनी खुशी व्यक्त करते हुए चंदूलाल भावुक हो उठे। उन्होंने कहा कि “मैंने सोचा भी नहीं था कि मुख्यमंत्री मुझसे मिलेंगे और मेरी समस्या का इतना जल्दी समाधान हो जाएगा। मैं उनका दिल से आभारी हूँ। धन्यवाद विष्णु भईया।” यह घटना केवल एक व्यक्ति की सहायता भर नहीं, बल्कि यह दर्शाती है कि राज्य सरकार का उद्देश्य हर नागरिक तक संवेदनशीलता, पहुंच और त्वरित समाधान सुनिश्चित करना है। मुख्यमंत्री का यह व्यवहार सुशासन के उस मॉडल को मजबूत करता है, जिसमें हर जरूरतमंद की आवाज सीधे शासन तक पहुंचती है और समाधान भी उतनी ही तेजी से मिलता है।