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पंजाब पुलिस का बड़ा एक्शन, अमृतसर एनकाउंटर में 2 शूटर दबोचे गए

अमृतसर. अमृतसर देहात पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए खलचियां क्षेत्र में मुठभेड़ के बाद 2 कथित शूटरों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 2 अवैध पिस्तौल भी बरामद किए हैं। पुलिस का दावा है कि दोनों आरोपी किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में थे। एसएसपी अमृतसर देहात कवलप्रीत सिंह चहल ने बताया कि पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि विदेश में बैठकर गैंग संचालित करने वाले अमनदीप सिंह उर्फ मन्ना के 2 शूटर खलचियां इलाके में मौजूद हैं। सूचना के आधार पर पुलिस ने तकनीकी साधनों और खुफिया तंत्र की मदद से दोनों आरोपियों का पता लगाया।  जब पुलिस टीम ने डेमो वाली नहर के पास दोनों संदिग्धों को रोकने का प्रयास किया तो आरोपियों ने पुलिस पर फायरिंग कर दी। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच जवाबी फायरिंग हुई। आत्मरक्षा में पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई के दौरान एक गोली आरोपी हीरा सिंह के पैर में लगी। घायल आरोपी को तुरंत उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। आरोपियों से 32 बोर पिस्तौल और  9 mm पिस्तौल बरामद पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों की पहचान हीरा सिंह और लवप्रीत सिंह के रूप में हुई है। हीरा सिंह के खिलाफ पहले से हत्या का मामला दर्ज है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि दोनों आरोपी विदेश में बैठे गैंगस्टर अमनदीप सिंह उर्फ मन्ना के लिए काम करते थे, जो यूरोप से अपना गैंग संचालित कर रहा है। पुलिस ने आरोपियों के पास से एक 32 बोर पिस्तौल और एक 9 एमएम पिस्तौल बरामद की है। एसएसपी चहल ने कहा कि विदेश में बैठकर पंजाब में आपराधिक गतिविधियां संचालित करने वाले अपराधियों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा रही है और उन्हें भारत लाने की प्रक्रिया जारी है। फिलहाल पुलिस दोनों आरोपियों से गहन पूछताछ कर रही है।

गांव में बढ़ा तनाव, धर्मांतरण को लेकर ईसाई और आदिवासी समाज के बीच टकराव

नारायणपुर. जिले के भरण्डा गांव में धर्मांतरण को लेकर विवाद गहरा गया है। सुबह से गांव में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। हालात को देखते हुए प्रशासन ने गांव को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया है। बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। जानकारी के अनुसार, करीब 26 मतांतरित परिवारों का आरोप है कि गांव के आदिवासी ग्रामीणों ने उन्हें गांव छोड़ने का फरमान जारी किया है। उनका कहना है कि उनसे ईसाई धर्म का पालन छोड़कर आदिवासी रीति-रिवाज अपनाने का दबाव बनाया जा रहा है। परिवारों का दावा है कि उन्हें घरों से बाहर निकालने की कोशिश की गई। वहीं, आदिवासी समुदाय का कहना है कि ईसाई धर्म अपनाने वाले कुछ लोग गांव की पारंपरिक आदिवासी संस्कृति, रीति-रिवाज और देवी-देवताओं का अपमान करते हैं। समुदाय का कहना है कि यदि वे गांव में रहना चाहते हैं तो उन्हें आदिवासी परंपराओं का सम्मान करना होगा अन्यथा गांव छोड़ना होगा। पुलिस ने की शांति बनाए रखने की अपील दोनों पक्षों के बीच इस मुद्दे को लेकर जमकर कहासुनी और झूमाझटकी हुई। हालांकि पुलिस की मौजूदगी से स्थिति फिलहाल नियंत्रण में बताई जा रही है, लेकिन गांव में तनाव बना हुआ है। दोनों पक्ष एक-दूसरे का बात मानने तैयार नहीं हैं। किसी भी तरह का समझौता होता नहीं दिख रहा है। प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। पुलिस अधिकारियों ने लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों से बचने की अपील की है। मामले को सुलझाने के लिए प्रशासन दोनों पक्षों से बातचीत कर रहा है।

राजस्थान में शिक्षा, स्वास्थ्य और शहरी विकास पर मंत्रिमंडलीय उप-समिति की अहम बैठक

 जयपुर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रदेश के चहुंमुखी विकास, जन-सुविधाओं के विस्तार और संस्थागत सुदृढ़ीकरण के लिए निरंतर नीतिगत निर्णय ले रही है। इसी क्रम में मंगलवार को शासन सचिवालय में मंत्रिमंडलीय उप-समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रदेश के विभिन्न जिलों में सार्वजनिक हित, उच्च शिक्षण संस्थान, स्वास्थ्य सेवाएं, सामाजिक कल्याण एवं औद्योगिक केंद्रों की स्थापना के लिए रियायती दरों पर भूमि आवंटन के विभिन्न प्रकरणों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।  उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह, शिक्षा मंत्री मदन दिलावर, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री अविनाश गहलोत तथा  नगरीय विकास एवं आवासन राज्य मंत्री(स्वतंत्र प्रभार) झाबर सिंह खर्रा सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।  भूमि आवंटन प्रकरणों की हुई विस्तृत समीक्षा  बैठक में जनहित, शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक कल्याण एवं शहरी आधारभूत सुविधाओं के विस्तार से संबंधित बिंदुओं की समीक्षा की गई। समिति ने पात्र प्रकरणों में नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। शैक्षणिक एवं सामाजिक सरोकार से जुड़े संस्थानों के भूमि आवंटन प्रकरणों को प्राथमिकता से आगे बढ़ाने पर भी सहमति व्यक्त की गई।  स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार पर जोर  बैठक में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, विशेषीकृत चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता तथा आमजन को बेहतर उपचार सुविधाएं उपलब्ध कराने से संबंधित प्रस्तावों की समीक्षा की गई। समिति ने राज्य सरकार से लाभ प्राप्त संस्थाओं द्वारा  जनकल्याणकारी योजनाओं का अधिकतम लाभ आमजन तक पहुंचाने तथा स्वास्थ्य संस्थानों में राज्य सरकार की विभिन्न चिकित्सा सहायता योजनाओं जैसे मा और आरजीएचएस के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए।  शहरी विकास एवं नागरिक सुविधाओं पर निर्देश  समिति ने औद्योगिक एवं व्यापारिक संगठनों के भवन निर्माण में पेनल्टी पर छूट जैसे प्रकरणों पर एवं शेष प्रकरणों के समाधान के लिए प्रक्रियाओं में आवश्यक सरलीकरण, किश्तों में भुगतान की सुविधा तथा नियमानुसार ग्रेस पीरियड उपलब्ध कराने के सुझावों पर भी सकारात्मक विचार-विमर्श किया गया।  शहरी विकास से जुड़े विषयों पर समिति ने शहरी सेवा अभियान के अंतर्गत पट्टों सहित विभिन्न लाभों के वितरण में तेजी लाने, लंबित प्रकरणों के अधिकाधिक निस्तारण तथा नागरिकों को राहत प्रदान करने के लिए उपलब्ध प्रावधानों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।  पारदर्शी नगरीय कराधान व्यवस्था के निर्देश  समिति ने नगरीय कराधान एवं शुल्क निर्धारण से संबंधित विषयों की समीक्षा करते हुए पारदर्शी एवं व्यावहारिक व्यवस्था विकसित करने के लिए आवश्यक प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए तथा पात्रता के निर्धारित प्रावधानों का पूर्ण पालन सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया।  आरक्षित दरों से छूट के प्रकरणों पर विचार  बैठक में विभिन्न संस्थागत, शैक्षणिक, सामाजिक एवं सार्वजनिक उपयोग के भूमि आवंटन प्रकरणों में आरक्षित दरों से छूट के मामलों पर भी विचार किया गया। समिति ने जनहित एवं लोककल्याण की भावना को ध्यान में रखते हुए पात्र प्रकरणों को प्राथमिकता से निस्तारित करने पर सहमति व्यक्त की।  उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक विकास तथा शहरी आधारभूत संरचना को सुदृढ़ करने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि विभिन्न संस्थागत एवं जनोपयोगी परियोजनाओं के माध्यम से आमजन को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा विकास कार्यों को गति देने के लिए आवश्यक निर्णय समयबद्ध रूप से लिए जा रहे हैं।

जेडी वेंस की पाकिस्तान टिप्पणी पर बवाल, अपनी ही पार्टी के सांसदों ने जमकर सुनाई खरी-खोटी

बर्न पाकिस्तान इन दिनों ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता की भूमिका निभा रहा है. इस बीच, US सीनेटरों ने पाकिस्तान के आतंकवादियों को पनाह देने और बिन लादेन को छिपाने के इतिहास को उठाया. उन्होंने 'पाकिस्तान प्रेम' के लिए अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को जमकर खरी-खोटी सुनाई है।  दरअसल वेंस ने स्विट्जरलैंड में वार्ता के दौरान कहा था, 'हम पाकिस्तान से प्यार करते हैं.'  वेंस ने पाकिस्तानी आर्मी चीफ असीम मुनीर उनके दो पसंदीदा लोगों में से एक बताया था. ऐसे में दो रिपब्लिकन सीनेटरों ने वेंस के इस बयान को लेकर उनकी आलोचना की।  बता दें कि वेंस ने कहा था, 'मैं कहूंगा कि जब से फील्ड मार्शल मुनीर ने इस्लामाबाद में प्राइम मिनिस्टर के साथ हमारा स्वागत किया है, मैंने मजाक में कहा है कि मेरी जिंदगी में दो बहुत, बहुत जरूरी लोग हैं- एक इंडियन और एक पाकिस्तानी. इंडियन मेरी पत्नी हैं और पाकिस्तानी फील्ड मार्शल मुनीर हैं।  ''कतर और पाकिस्तान का आतंकवादियों को पनाह… सीनेटर रिक स्कॉट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा, 'अब तक सबको ये साफ हो जाना चाहिए कि हमारे असल में दोस्त कौन हैं.' स्कॉट ने कहा, 'कतर और पाकिस्तान का आतंकवादियों को पनाह देने का लंबा इतिहास रहा है और अभी वो एक मतलब की शांति पाने के बजाय ईरान के दशकों पुराने आतंकी कैंपेन को सपोर्ट करने में कहीं ज्यादा लगे हुए लग रहे हैं।  स्कॉट ने आगे दावा करते हुए कहा था कि अभी भी एक ऐसे एग्रीमेंट की गुंजाइश है जिससे सबको फायदा हो. लेकिन, सबको ये बात समझ लेनी चाहिए कि ईरान के न्यूक्लियर हथियार बनाने की शून्य संभावना है।  पाकिस्तान पर लादेन को छिपाने का आरोप मोंटाना से सीनेटर टिम शीही ने फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में अल कायदा लीडर ओसामा बिन लादेन को पनाह देने में पाकिस्तान की भूमिका पर भी सवाल उठाए. शीही ने कहा, 'पाकिस्तान, हमें ये नहीं भूलना चाहिए कि पाकिस्तान ने बिन लादेन को दस साल तक छुपाया. उन्होंने ISI इंश्योरेंस के जरिए अयातुल्ला को फंड दिया।  अमेरिका-ईरान के बीच स्थायी शांति की नींव पड़ी अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने स्विट्जरलैंड में ईरान के साथ वार्ता को सफल समझौते की नींव रखने वाली कहा है। अमेरिका की ओर से मुख्य वार्ताकार जेडी वेंस ने स्विट्जरलैंड में ईरानी नेताओं के साथ बातचीत को स्थायी शांति की तरफ अच्छी शुरुआत कहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य और लेबनान पर अभी भी दोनों पक्षों में तनाव बना हुआ है लेकिन वेंस ने उम्मीद जताई की चीजें बेहतरी की तरफ जाएंगी। ईरान और अमेरिका में स्विट्जरलैंड में रविवार और सोमवार को बातचीत हुई है। जेडी वेंस ने कहा कि तेहरान परमाणु निरीक्षकों को अनुमति देने और विदेशों में अपनी फ्रीज की गई संपत्तियों को संभालने और युद्धविराम का प्रबंधन करने के लिए तंत्र स्थापित करने पर सहमत हो गया है। उन्होंने कहा, हमने एक सफल अंतिम समझौते के लिए बहुत अच्छी नींव रखी है। थोड़ी धमकी थी, थोड़ी शिकायत थी, लेकिन दिन के अंत में बातचीत जारी रही और हमने काफी प्रगति की।' ईरान को निर्यात पर छूट ईरान की सीज संपत्तियों को रिलीज किए जाने पर वेंस ने कहा कि हम ऐसी प्रक्रिया बनाना चाहते हैं, जिससे इस राशि का फायदा आम ईरानियों को हो।ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बताया है कि तेहरान ने तेल और पेट्रोकेमिकल निर्यात के लिए छूट, विदेशों में अपनी कुछ फ्रीज की गई संपत्तियों की रिहाई और ईरान के लिए पुनर्निर्माण और विकास योजना शुरू करने की मंजूरी हासिल कर ली है। ईरान ने कहा है कि स्विट्जरलैंड में दो दिनों तक चली शांति वार्ता के दौरान एमओयू से जुड़े उन मुद्दों पर बात हुई, जिनके आधार पर अंतिम समझौते के लिए वार्ता शुरू होगी। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकई ने कहा कि ये बिंदु लेबनान में युद्ध रोकने, ईरान की फ्रीज संपत्तियां रिलीज करने और ईरानी तेल के निर्यात से जुड़े हुए हैं। मध्यस्थ देश क्या बोले मध्यस्थ पाकिस्तान और कतर ने बताया है कि दोनों पक्षों ने पिछले हफ्ते हुए अंतरिम समझौते को आगे बढ़ाते हुए रिसॉर्ट बर्गेंस्टॉक में हुई बातचीत में 60 दिनों के भीतर एक स्थायी समझौते की दिशा में एक रोडमैप पर सहमति व्यक्त की है। लेबनान में लड़ाई रोकने और होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने के लिए एक संचार लाइन खोलन पर सहमति बनी है। इस बातचीत के खत्म होते ही अमेरिका ने ईरान के तेल उत्पादों पर लगा प्रतिबंध हटा लिया है। अमेरिकी वित्त विभाग ने यह प्रतिबंध दो महीने के लिए हटाया है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि 60 दिनों के लिए एक अस्थायी सामान्य लाइसेंस जारी किया है, जिसके तहत ईरानी तेल के उत्पादन, आपूर्ति और बिक्री की अनुमति दी गई है। उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तान और कतर बातचीत की मेज पर हैं, तो US को UAE, इजरायल और सऊदी अरब को भी बातचीत में शामिल करना चाहिए. शीही ने UAE, इजरायल और सऊदी अरब को मिडिल ईस्ट में US का असली साथी बताया।  पाकिस्तान की मध्यस्थता पर सवाल मोंटाना के सीनेटर ने ये भी दावा किया कि कतर दशकों से आतंकवादी संगठनों के लिए मनी लॉन्ड्रिंग कर रहा है. शीही ने कहा, 'पाकिस्तानियों ने ISI के जरिए हमारे खिलाफ बगावत को फंड किया और बिन लादेन को छिपाया. इसलिए ये मानना ​​कि वो यहां सिर्फ बिचौलिए होंगे, मुझे नहीं लगता कि ये सही है।  शीही ने आगे कहा, 'मुझे लगता है कि हमें ये पक्का करना होगा कि हम UAE के साथ खड़े हों और हम बिना किसी शक के इजरायल के साथ खड़े हों, क्योंकि चाहे कुछ भी हो जाए, वो इस इलाके में हमारे अगुआ रहेंगे। 

शिवसेना UBT में बढ़ी बगावत, आदित्य के करीबी नेता ने भी छोड़ा साथ; उद्धव पर संकट गहराया

मुंबई  महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना की सियासत मातोश्री से ही चलती रही है. एक समय था कि 'मातोश्री' का हुक्म आखिरी माना जाता था, लेकिन आज मातोश्री अपने सबसे मुश्किल दौर से गुजर रहा है. शिवसेना (यूबीटी) के मुखिया उद्धव ठाकरे के सामने एक बार फिर से पार्टी और अपने राजनीतिक अस्तित्व को बचाने का एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है।  पिछले चार साल में दूसरी बार उद्धव की पार्टी में टूट पड़ी है. 2022 में सत्ता और शिवसेना गंवाई और चार साल के बाद फिर से टूट हो गई है. इस बार 6 लोकसभा सांसद उद्धव का साथ छोड़कर एकनाथ शिंदे के साथ चले गए और अब विधायकों पर भी संकट गहरा गया है।  ठाकरे परिवार के सामने संकट की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जिस नेता ने साल 2019 में उद्धव के बेटे आदित्य ठाकरे के राजनीतिक उदय के लिए हंसते-हंसते अपनी सीट का बलिदान दे दिया था, आज वह भी उद्धव का साथ छोड़कर बागियों के पाले में जा खड़ा हुआ है. यह केवल एक विधायक का टूटना नहीं है, बल्कि ठाकरे परिवार के प्रति निष्ठा की दीवारों में आई गहरी दरार का सबूत है।  उद्धव ठाकरे की बैठक में नहीं पहुंचे चार विधायक  उद्धव ठाकरे ने विधानसभा और विधान परिषद के सदस्यों की बैठक बुलाई थी. ऑपरेशन टाइगर की चर्चा के बीच बुलाई गई उद्धव की बैठक में शिवसेना (यूबीटी) के तीन विधायक और एक एमएलसी नहीं पहुंचे. इसके चलते एक बार फिर रा चर्चा तेज हो गई कि सांसदों के बाद क्या अब उद्धव गुट के विधायक भी शिंदे सेना का दामन थामेंगे।  हालांकि, इन विधायकों ने अपनी गैरहाजिरी के बारे में पार्टी को पहले ही बता दिया था कि वे बैठक में नहीं आ पाएंगे. उन्होंने अपनी गैर-मौजूदगी के लिए एमएलसी चुनाव, खराब सेहत और निजी कामों का हवाला दिया था. ऐसी ही बातें उस समय भी सामने आई थी, जब बैठक से सांसद नदारद रहे थे. इस बार की फेहरिश्त में एक नाम बहुत अहम है, वो सुनील शिंदे का है. MLC सुनील शिंदे ही वो नेता हैं, जिन्होंने आदित्य ठाकरे के लिए अपनी वर्ली सीट खाली की थी।  आदित्य के लिए सीट छोड़ने वाला नेता क्या होगा बागी  उद्धव ठाकरे के सियासी विरासत को आगे बढ़ाने का बीढ़ा आदित्य ठाकरे ने उठा रखा है. ठाकरे परिवार के इतिहास में पहली बार कोई सदस्य 2019 के विधानसभा चुनाव मैदान में  उतरने का फैसला किया था. ये नाम आदित्य ठाकरे का है, जिनके लिए सबसे सुरक्षित और मुफीद सीट 'वर्ली' चुनी गई. इस सीट पर शिवसेना के कद्दावर नेता सुनील शिंदे का दबदबा था, वो 2014 में वर्ली से विधायक बने थे।  आदित्य ठाकरे का जब चुनाव लड़ने का फैसला तय हो गया और मातोश्री से आदेश आया, तो सुनील शिंदे ने बिना एक पल गंवाए, अपनी जीती-जतायी सीट आदित्य ठाकरे के लिए 'कुर्बान' कर दी. आदित्य ठाकरे वर्ली से चुनाव लड़े और जीतकर विधायक बने. 2024 में दूसरी बार विधायक बने हैं।  सुनील शिंदे के सीट छोड़ने के फैसले को शिवसेना की परंपरा और ठाकरे परिवार के प्रति अटूट निष्ठा के रूप में देखा गया था, लेकिन समय का चक्र ऐसा घूमा कि आज वही 'त्याग' करने वाला नेता उद्धव की बैठक से दूर रहा.  ऐसे में सवाल उठने लगा है कि क्या सुनील शिंदे भी बागी गुट के साथ जाना चाहते हैं, जिसके लिए उद्धव की बैठक में शामिल नहीं हुए. सुनील शिंदे भी बागी गुट के साथ जाते हैं और उद्धव से मुंह मोड़ लेते तो फिर पार्टी के भीतर असंतोष की आग काफी गहरी है।  उद्धव ठाकरे के लिए गहराया अस्तित्व का संकट? शिवसेना (यूबीटी) के एक के बाद एक करीबियों का साथ छोड़ना उद्धव ठाकरे के लिए सिर्फ एक राजनीतिक झटका नहीं, बल्कि उनके नेतृत्व की साख पर बड़ा सवालिया निशान है। इसके मुख्य रूप से तीन बड़े कारण नजर आते हैं. बागियों का हमेशा से यही आरोप लगाया है कि उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे तक आम विधायकों और कार्यकर्ताओं की पहुंच बेहद मुश्किल हो गई है. 'मातोश्री' के दरवाजे जो कभी शिवसैनिकों के लिए हमेशा खुले रहते थे, वहां एक खास घेरा तैयार हो गया था।  उद्धव ठाकरे की पार्टी में हुई बगावत ने महाविकास अघाड़ी का ढांचा पूरी तरह हिल गया. महाराष्ट्र में कांग्रेस के बाद उद्धव की पार्टी के पास सांसद थे, लेकिन शिंदे के ऑपरेशन टाइगर ने उन्हें सियासी हाशिए पर पहुंचा दिया है. इस टूट-फूट के चलते उद्धव ठाकरे की सियासी ताकत कमजोर पड़ी है. शिवसेना के पास 3 सांसद ही रह गए हैं और उद्वव की बैठक से तीन विधायक और एक एमएलसी की गैर-मौजूदगी अगर बगावत में बदलती है तो फिर महाराष्ट्र की राजनीति में उद्धव ठाकरे के लिए मुश्किल हो जाएगी।  महाविकास अघाड़ी के गठन के बाद से ही पारंपरिक शिवसैनिकों का एक बड़ा वर्ग असहज महसूस कर रहा था. कांग्रेस और एनसीपी के साथ गठबंधन को जमीनी स्तर पर शिवसैनिक पचा नहीं पाए, जिसका फायदा विरोधी गुट ने पहले उठाया और अब भी उठा रहे हैं. बालासाहेब ठाकरे के समय शिवसेना में कोई बगावत सोच भी नहीं सकता था, लेकिन आज स्थिति यह है कि जिन नेताओं को उद्वव ठाकरे के लेकर आए, वो भी बागी हो गए हैं।  क्या आदित्य ठाकरे का सियासी भविष्य खतरे में है? बालासाहेब ठाकरे के सियासी वारिस उद्धव ठाकरे बनकर उभरे, लेकिन बगावत के बाद एकनाथ शिंदे ने खुद को साबित किया. उद्धव ठाकरे का साथ छोड़ने वाले ज्यादातर नेताओं का ठिकाना शिंदे की शिवसेना ही बन रही है. शिवसेना की असली ताकत हमेशा से मुंबई, ठाणे, और कोंकण के तटीय इलाके रहे हैं. पहली बगावत के बाद इन क्षेत्रों के विधायकों, नगरसेवक और जमीनी स्तर के नेता शिंदे के साथ जा चुके हैं।  शिवसेना में फंड और बूथ मैनेजमेंट संभालने वाले कद्दावर नेता भी पाला बदल चुके हैं.इस तरह से जब आपकी अपनी जमीन पर ही सियासी घेराबंदी हो रही हो, तो आप सहयोगियों से राज्य स्तर पर बड़ी रियायतों की मांग नहीं कर सकते. अब उद्धव ठाकरे का सियासी वारिस आदित्य ठाकरे माने जा रहे, लेकिन जिस तरह पार्टी के नेता साथ छोड़कर शिंदे के साथ एक के बाद एक जा रहे हैं, … Read more

लापरवाह ठेकेदारों पर सख्त एक्शन, राज्यमंत्री गौर ने ब्लैकलिस्ट करने के दिए निर्देश

लापरवाह ठेकेदारों एक्शन की तैयारी, राज्यमंत्री गौर ने ब्लैक लिस्ट करने के दिए निर्देश विकास कार्यों की हुई समीक्षा, 3 दिनों में लंबित कार्य पूर्ण करने के दिये निर्देश भोपाल  पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर ने मंगलवार को मंत्रालय में विकास कार्यों की विस्तृत समीक्षा बैठक ली। बैठक में निर्माण कार्यों में देरी और लापरवाही पर उन्होंने नाराजगी व्यक्त करते हुए नगर निगम के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जो ठेकेदार निर्धारित समय सीमा में गुणवत्तापूर्ण कार्य नहीं कर रहे हैं, उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई करते हुए उन्हें ब्लैक लिस्ट किया जाए। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने कहा कि जनता की सुविधा से जुड़े विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र में जिन विकास कार्यों के वर्कऑर्डर जारी हो चुके हैं, उनका शीघ्र भूमि पूजन कर निर्माण कार्य प्रारंभ कराया जाए, जिससे आमजन को समय पर इन सुविधाओं का लाभ मिल सके। बैठक में उन्होंने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, प्रगति और समय-सीमा की विस्तार से समीक्षा की तथा अधिकारियों को नियमित मॉनिटरिंग कर कार्यों को तय समय में पूर्ण कराने के निर्देश दिए।  

राजस्थान यूनिफॉर्म सिविल कोड: शादी, तलाक और संपत्ति नियमों में बड़े बदलाव की संभावना

जयपुर जयपुर की एक बुजुर्ग महिला वर्षों से अपने पैतृक घर के एक हिस्से पर हक की लड़ाई लड़ रही है। दूसरी तरफ, एक युवती अदालतों के चक्कर काटते हुए यह साबित करने में लगी है कि शादी के बाद भी उसे बराबरी का अधिकार मिलना चाहिए। कहीं एक महिला अपने पति की दूसरी शादी के खिलाफ न्याय चाहती है, तो कहीं लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाला एक जोड़ा सामाजिक पहचान की तलाश में है। अब राजस्थान में यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी समान नागरिक संहिता की तैयारी के साथ इन तमाम कहानियों का भविष्य बदल सकता है। सरकार ने बढ़ाया पहला बड़ा कदम राज्य सरकार ने यूसीसी लागू करने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित कमेटी कानून का मसौदा तैयार करेगी। लेकिन यह सिर्फ एक नया कानून नहीं होगा, बल्कि राजस्थान के करोड़ों लोगों की निजी जिंदगी को प्रभावित करने वाला सबसे बड़ा सामाजिक बदलाव साबित हो सकता है। शादी के नियमों में बड़ा बदलाव अगर यूसीसी लागू होती है तो सबसे बड़ा असर विवाह व्यवस्था पर दिखाई देगा। प्रदेश में किसी भी धर्म का व्यक्ति एक से ज्यादा शादी नहीं कर सकेगा। अभी अलग-अलग धर्मों के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत कानून लागू हैं, लेकिन नए कानून के बाद विवाह के नियम एक समान हो सकते हैं। इसका मतलब यह होगा कि शादी केवल सामाजिक या धार्मिक रस्म नहीं रहेगी, बल्कि कानूनी रूप से पंजीकृत संबंध बन जाएगी। महिलाओं को मिल सकती है नई ताकत विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे महिलाओं की स्थिति मजबूत होगी। आज भी कई मामलों में महिलाएं दूसरी शादी, भरण-पोषण और वैवाहिक अधिकारों को लेकर लंबी कानूनी लड़ाई लड़ती हैं। एक समान कानून इन विवादों को कम कर सकता है। महिलाओं को अपने अधिकारों के लिए अलग-अलग कानूनों की व्याख्या पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। बेटियों के अधिकारों की नई कहानी यूसीसी का दूसरा बड़ा प्रभाव संपत्ति के अधिकारों पर पड़ सकता है। राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में आज भी कई परिवारों में बेटियों को पैतृक संपत्ति में बराबरी का हिस्सा देने को लेकर अनिच्छा दिखाई देती है। हालांकि कानून पहले से अधिकार देता है, लेकिन व्यवहार में स्थिति अलग है। यूसीसी लागू होने के बाद संपत्ति के उत्तराधिकार को लेकर एक समान व्यवस्था बनने की संभावना है, जिससे बेटा और बेटी दोनों के अधिकारों को और स्पष्ट कानूनी मजबूती मिल सकती है। लिव-इन रिलेशनशिप भी आएंगे कानूनी दायरे में लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर भी बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार ऐसे संबंधों का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया जा सकता है। समर्थकों का कहना है कि इससे महिलाओं और बच्चों के अधिकार सुरक्षित होंगे, जबकि आलोचक इसे निजी जीवन में सरकारी दखल के रूप में देखते हैं। लेकिन इतना तय है कि पहली बार ऐसे रिश्ते कानूनी बहस के केंद्र में आ जाएंगे। शादी और तलाक का रिकॉर्ड बनेगा जरूरी शादी और तलाक का अनिवार्य पंजीकरण भी आम लोगों की जिंदगी में बड़ा बदलाव लाएगा। आज भी प्रदेश में हजारों विवाह केवल सामाजिक और धार्मिक स्तर पर संपन्न होते हैं, जिनका कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं होता। बाद में संपत्ति, पहचान, भरण-पोषण या वैवाहिक विवादों के दौरान यही सबसे बड़ी समस्या बन जाती है। रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होने से ऐसे विवादों में कमी आ सकती है परंपराओं और कानून के बीच संतुलन की चुनौती हालांकि यूसीसी का रास्ता पूरी तरह आसान नहीं होगा। राजस्थान की सामाजिक संरचना बेहद विविध है। यहां अलग-अलग धर्म, समुदाय और परंपराएं सदियों से साथ-साथ चलती रही हैं। ऐसे में नया कानून लागू होने पर कई सवाल भी उठेंगे। क्या सभी समुदाय इसे समान रूप से स्वीकार करेंगे? क्या पारंपरिक रीति-रिवाजों और आधुनिक कानूनी व्यवस्था के बीच संतुलन बन पाएगा? यही वह चुनौती है जिस पर गठित कमेटी को सबसे ज्यादा काम करना होगा। जनजातीय समुदायों के लिए अलग व्यवस्था संभव सरकार ने संकेत दिए हैं कि स्थानीय जनजातीय समुदायों को उनकी सांस्कृतिक और संवैधानिक विशेषताओं के आधार पर नए कानून के दायरे से बाहर रखा जा सकता है। यदि ऐसा होता है तो राजस्थान में यूसीसी का स्वरूप अन्य राज्यों से कुछ अलग भी हो सकता है। दूसरे राज्यों के अनुभवों पर भी नजर उत्तराखंड पहले ही यूसीसी लागू कर चुका है। गुजरात और असम भी इस दिशा में आगे बढ़ चुके हैं। अब राजस्थान इस बहस का नया केंद्र बनने जा रहा है। लेकिन यहां सवाल सिर्फ कानून का नहीं है। सवाल उन महिलाओं का है जो बराबरी चाहती हैं। उन बेटियों का है जो अपने हिस्से का सम्मान मांगती हैं। उन परिवारों का है जो वर्षों से अलग-अलग कानूनी व्यवस्थाओं के बीच उलझे हुए हैं। विधानसभा से घर-घर तक पहुंचेगी बहस आने वाले महीनों में जब कमेटी अपनी रिपोर्ट देगी और विधानसभा में इस पर बहस होगी, तब सिर्फ एक विधेयक पर चर्चा नहीं होगी। चर्चा इस बात पर होगी कि क्या राजस्थान अपनी सामाजिक संरचना में एक ऐसा बदलाव स्वीकार करने के लिए तैयार है, जो लोगों के निजी जीवन, पारिवारिक रिश्तों और अधिकारों की परिभाषा को नए सिरे से लिख सकता है। एक कानून से कहीं बड़ी कहानी फिलहाल यूसीसी एक प्रस्ताव है, लेकिन इसकी आहट ने प्रदेश में एक नई बहस शुरू कर दी है। यह बहस अदालतों से निकलकर घरों तक पहुंच चुकी है। और शायद यही इसकी सबसे बड़ी कहानी है। आने वाले समय में यह तय होगा कि यूसीसी केवल कानून बनकर रह जाती है या फिर राजस्थान के सामाजिक इतिहास में एक नए अध्याय की शुरुआत करती है।

शतक के बाद ड्रॉप हुए जायसवाल, शशि थरूर बोले- वही हाल जो संजू सैमसन का हुआ था

नई दिल्ली  भारतीय क्रिकेट टीम के उभरते हुए स्टार सलामी बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल को इंग्लैंड के खिलाफ आगामी वनडे सीरीज के लिए भारतीय स्क्वाड में जगह नहीं मिली है। सीनियर खिलाड़ियों की टीम में वापसी के चलते जायसवाल को टीम से बाहर का रास्ता देखना पड़ा। चयनकर्ताओं का यह फैसला फैंस और क्रिकेट दिग्गजों के गले नहीं उतर रहा है, क्योंकि जायसवाल ने अपने पिछले ही वनडे मैच में शानदार शतक जड़ा था। जायसवाल को ड्रॉप किए जाने पर अब कांग्रेस सांसद और क्रिकेट प्रेमी शशि थरूर का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर कर चयनकर्ताओं के इस फैसले पर तीखा तंज कसा है और जायसवाल की स्थिति की तुलना संजू सैमसन से की है। शशि थरूर ने क्या कहा? शशि थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जायसवाल के समर्थन में पोस्ट करते हुए लिखा, 'भारत में इस समय टॉप-ऑर्डर का बल्लेबाज होना कितना कठिन काम है! जायसवाल ठीक उसी दौर और अनुभव से गुजर रहे हैं जिससे 2024-25 में संजू सैमसन गुजरे थे— यानी ठीक एक मैच पहले शतक बनाने के बाद अगले ही वनडे मैच से ड्रॉप कर दिया जाना। यह उतना ही बुरा है जितना 1960 के दशक में एक विश्व स्तरीय स्पिनर होना था (जब भारतीय टीम में स्पिनरों की भारी भरकम जगह के कारण कई दिग्गजों को मौका नहीं मिलता था)!' पिछले मैच में ठोका था 110 रनों का दमदार शतक यशस्वी जायसवाल को टीम से बाहर करना इसलिए भी हैरान करने वाला है क्योंकि उन्होंने अफगानिस्तान के खिलाफ हाल ही में समाप्त हुई वनडे सीरीज के तीसरे और आखिरी मुकाबले में 110 रनों की विस्फोटक शतकीय पारी खेली थी। अपनी इस पारी से उन्होंने साबित किया था कि वह वनडे फॉर्मेट में भी टीम के लिए कितने बड़े मैच विनर बन सकते हैं। हालांकि, इंग्लैंड जैसी मजबूत टीम के खिलाफ सीरीज के लिए जैसे ही सीनियर खिलाड़ियों की स्क्वाड में वापसी हुई, युवाओं में सबसे पहला गाज जायसवाल पर गिरा। संजू सैमसन के पुराने जख्म हुए ताजा शशि थरूर ने अपने पोस्ट के जरिए केरल के विकेटकीपर बल्लेबाज संजू सैमसन के साथ हुए पुराने वाकये को याद दिलाया। साल 2024-25 के दौरान संजू सैमसन ने भी वनडे क्रिकेट में शानदार शतक जड़ा था, लेकिन उसके ठीक बाद सीनियर खिलाड़ियों की वापसी या टीम कॉम्बिनेशन के नाम पर उन्हें अगले ही मैच की टीम से बाहर कर दिया गया था। अब ठीक वैसा ही बर्ताव 24 वर्षीय यशस्वी जायसवाल के साथ दोहराया गया है। हालांकि संजू सैमसन लंबे समय से भारतीय टी20 टीम का हिस्सा हैं और उन्होंने भारत के लिए दो टी20 वर्ल्ड कप भी जीत लिए हैं।  

बिहार में खेल प्रतिभाओं के लिए बड़ा मौका, राज्य खेल सम्मान की प्रक्रिया शुरू

पटना   बिहार के खेल जगत और प्रतिभावान खिलाड़ियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। राज्य में खेल और खिलाड़ियों को बढ़ावा देने के लिए बिहार राज्य खेल प्राधिकरण (BSSA) ने 'बिहार राज्य खेल सम्मान 2026' के लिए आधिकारिक तौर पर नोटिफिकेशन जारी कर दी है। इस सम्मान के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राज्य का नाम रोशन करने वाले प्रतिभावान खिलाड़ियों, अनुभवी कोचों, खेल संघों और खेल अधिकारियों से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। सरकार के इस कदम से बिहार के खेल गलियारे में भारी उत्साह का माहौल है। यह सम्मान उन लोगों को दिया जाएगा जिन्होंने अपनी कड़ी मेहनत और प्रतिभा से खेल के मैदान में बिहार का गौरव बढ़ाया है। 24 जून से शुरू होगी ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया बिहार राज्य खेल प्राधिकरण द्वारा जारी की गई सूचना के मुताबिक, इस खेल सम्मान के लिए ऑनलाइन आवेदन करने की प्रक्रिया कल यानी 24 जून से पूरी तरह शुरू होने जा रही है। इच्छुक और योग्य दावेदार घर बैठे ही इंटरनेट के माध्यम से अपना फॉर्म भर सकते हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि आवेदन करने की अंतिम तिथि 15 जुलाई 2026 तय की गई है। सभी आवेदकों को 15 जुलाई की शाम 5 बजे से पहले अपना फॉर्म और उससे जुड़े सभी जरूरी दस्तावेज ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करने होंगे। तय समय सीमा के बाद मिलने वाले किसी भी आवेदन पर विचार नहीं किया जाएगा। प्रशासन ने जारी किया विशेष QR कोड इस बार पूरी आवेदन प्रक्रिया को बेहद डिजिटल और आसान बनाया गया है ताकि खिलाड़ियों को फॉर्म भरने में किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। बिहार राज्य खेल प्राधिकरण ने आवेदन के लिए एक विशेष QR कोड भी जारी किया है, जिसे स्कैन करके खिलाड़ी सीधे मुख्य एप्लीकेशन पेज पर पहुंच सकते हैं। इसके अलावा, यदि किसी खिलाड़ी या कोच को फॉर्म भरने या दस्तावेज अपलोड करने में कोई दिक्कत आती है, तो उसकी सहायता के लिए विभाग ने एक विशेष हेल्पलाइन नंबर 9031045384 भी जारी किया है। इस नंबर पर कॉल करके खेल सम्मान से जुड़ी किसी भी तकनीकी समस्या या नियम की जानकारी तुरंत हासिल की जा सकती है।

पुराने लखनऊ को राहत: 7 नए सबस्टेशन और 100 फीडर से खत्म होगी बिजली समस्या

लखनऊ यूपी की राजधानी लखनऊ के बिजली उपभोक्ताओं के लिए अच्छी खबर है। पुराने लखनऊ के लोगों की समस्याएं दूर होंगी। पुराने लखनऊ की बिजली व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए 550 करोड़ रुपये का प्लान तैयार किया गया है। आरडीएसएस योजना के तहत वर्ष 2031 तक की बिजली जरूरतों को ध्यान में रखते हुए 07 नए उपकेंद्र व 01 नया पावर ट्रांसमिशन सबस्टेशन बनाया जाएगा। इसके अलावा 100 नये फीडर बनेंगे। इससे लगभग 10 लाख आबादी को बिजली कटौती व लो-वोल्टेज से निजात मिलेगी। 20-20 एमवीए लोड के बिजली उपकेंद्र बनेंगे लेसा के लखनऊ सेंट्रल जोन के राजाजीपुरम, अपट्रॉन, ऐशबाग, ठाकुरगंज, चौक, रेजीडेंसी, राजभवन, हुसैनगंज, अमीनाबाद क्षेत्र में बेहतर बिजली सप्लाई के लिए सात नये उपकेंद्रों का निर्माण होगा। इसमें तालकटोरा में दो उपकेंद्र बनेंगे। इसके अलावा ऐशबाग, मलपुर (राजाजीपुरम), राजेन्द्र नगर, अर्जुनगंज, बालागंज में एक-एक उपकेंद्र बनेंगे। सभी 20-20 एमवीए लोड के बिजली उपकेंद्र बनेंगे। पावर ट्रांसफार्मर की क्षमता में वृद्धि पुराने बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए क्षेत्र के 11 मौजूदा उपकेंद्रों के पावर ट्रांसफार्मर की क्षमता बढ़ाई जाएगी। इनमें प्रमुख रूप से हरिहरपुर, अर्जुनगंज, जवाहर भवन, हनुमान सेतु, यूपीआईएल, नूरबाड़ी, अपट्रॉन, आरडीएसओ, ऐशबाग, विधानसभा मार्ग और बालाघाट शामिल हैं। इसके अलावा 33 केवी और 11 केवी की नई लाइन बिछाई जाएगी। नई एलटी लाइन निर्माण में इंसुलेटेड कंडक्टर लगाई जाएगी। 100 नए फीडर से सुधरेगी सप्लाई ओवरलोडिंग की समस्या को खत्म करने के लिए कुल 100 नए फीडर बनाए जाएंगे। मुख्य अभियंता के अनुसार, 07 नए उपकेंद्रों के बनने से 70 नए फीडर तैयार होंगे, जबकि पुराने उपकेंद्रों में 30 अतिरिक्त फीडर जोड़े जाएंगे। इसके अलावा, तालकटोरा में बनने वाले ट्रांसमिशन सबस्टेशन से 14 उपकेंद्रों के लिए नई बिजली लाइनें भी बिछाई जाएंगी। ऐसा होने इलाके बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिल जाएगी। इलाके की बिजली व्यवस्था बेहतर हो जाएगी। दरअलस, लो वोल्टेज और बिजली कटौती की समस्या से उपभोक्ता जूझ रहे। बिजली व्यवस्था बेहतर होने से लोगों को समस्याओं से निजात मिल जाएगी। इलाके के लोगों को भरपूर बिजली मिलने लगेगी। लो-वोल्टेज की समस्या भी खत्म हो जाएगी। ओवरलोडिंग की समस्या भी खत्म हो जाएगी। मध्यांचल निगम को जल्द प्रस्ताव भेजा जाएगा लखनऊ सेंट्रल मुख्य अभियंता रवि अग्रवाल ने बताया कि आरडीएसएस योजना के तहत वर्ष 2031 तक बेहतर बिजली सप्लाई के लिए पुराने लखनऊ में 07 बिजली उपकेंद्रों का निर्माण होगा। इसके अलावा 11 उपकेंद्रों में पावर ट्रांसफार्मर की क्षमता वृद्धि होगी। साथ ही 100 नये फीडर बनेंगे। मध्यांचल निगम को जल्द प्रस्ताव भेजा जाएगा।