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पंजाब के नए DGP पर मंथन तेज, 14 IPS अधिकारियों में से चुने जाएंगे 3 नाम

चंडीगढ़. पंजाब पुलिस को जल्द ही स्थायी मुखिया मिलने की संभावना बढ़ गई है। राज्य में नियमित डीजीपी की नियुक्ति की प्रक्रिया निर्णायक चरण में पहुंच गई है। संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने 30 जून को एंपैनलमेंट कमेटी की बैठक बुलाई है, जिसमें पंजाब कैडर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों में से तीन नामों का पैनल तैयार किया जाएगा। इसके बाद पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार इन तीन नामों में से एक अधिकारी को राज्य का नियमित डीजीपी नियुक्त करेगी। पंजाब में चार साल से कार्यवाहक डीजीपी यह नियुक्ति राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पंजाब में पिछले लगभग चार वर्षों से पुलिस महकमा कार्यवाहक डीजीपी के नेतृत्व में चल रहा है। जुलाई 2022 में गौरव यादव को कार्यवाहक डीजीपी नियुक्त किया गया था। तब से लेकर अब तक राज्य में नियमित डीजीपी की नियुक्ति नहीं हो सकी। ऐसे में आगामी 2027 विधानसभा चुनाव से पहले स्थायी डीजीपी की नियुक्ति कानून-व्यवस्था और चुनावी तैयारियों के लिहाज से अहम मानी जा रही है। नियमित डीजीपी की नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद इस प्रक्रिया ने गति पकड़ी। शीर्ष अदालत ने 5 फरवरी को सुनवाई के दौरान कई राज्यों पर नाराजगी जताई थी, जहां लंबे समय तक कार्यवाहक डीजीपी के भरोसे पुलिस प्रशासन चलाया जा रहा था। अदालत ने स्पष्ट किया था कि प्रकाश सिंह पुलिस सुधार मामले में तय दिशा-निर्देशों का पालन अनिवार्य है और डीजीपी नियुक्ति यूपीएससी की प्रक्रिया के तहत ही होनी चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा था कि राज्यों में “एक्टिंग डीजीपी” व्यवस्था स्थायी विकल्प नहीं हो सकती। यूपीएससी ने 18 फरवरी को मांगी पात्र अफसरों की लिस्ट इसी आदेश के बाद यूपीएससी ने 18 फरवरी को पंजाब सरकार से पात्र अधिकारियों की सूची मांगी थी। पंजाब सरकार ने 6 अप्रैल को 14 योग्य आईपीएस अधिकारियों की सूची आयोग को भेजी। इनमें 1992 बैच के चार वरिष्ठ अधिकारी प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं। इस बैच में शरद सत्य चौहान सबसे वरिष्ठ हैं। उनके बाद हरप्रीत सिंह सिद्धू, कार्यवाहक डीजीपी गौरव यादव और कुलदीप सिंह का नाम आता है। इसके अलावा 1993 बैच के तीन तथा 1994 बैच के सात अधिकारियों को भी पात्र सूची में शामिल किया गया है। सूत्रों के अनुसार यूपीएससी ने पैनल बैठक से पहले कुछ अधिकारियों से जुड़े लंबित मामलों पर पंजाब सरकार से स्पष्टीकरण मांगा था। शरद सत्य चौहान के खिलाफ लंबित मामलों की स्थिति तथा कुलदीप सिंह की 23 फरवरी से 16 अक्टूबर तक की हाफ-पे लीव को लेकर आयोग ने जानकारी मांगी थी। राज्य सरकार द्वारा आवश्यक दस्तावेज और स्पष्टीकरण सौंपने के बाद अब चयन प्रक्रिया अंतिम दौर में पहुंच गई है। कमेटी में ये लोग रहेंगे शामिल यूपीएससी की एंपैनलमेंट कमेटी में आयोग के चेयरमैन, केंद्रीय गृह सचिव या उनके नामित वरिष्ठ अधिकारी, केंद्रीय पुलिस संगठन का प्रमुख तथा पंजाब के मुख्य सचिव और मौजूदा डीजीपी शामिल रहेंगे। यह कमेटी अधिकारियों के सेवा रिकॉर्ड, वरिष्ठता, उपलब्धियों, नेतृत्व क्षमता और विजिलेंस स्थिति का मूल्यांकन कर तीन नामों का पैनल तैयार करेगी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पैनल तैयार होने के बाद अंतिम फैसला पंजाब सरकार के हाथ में होगा। यानी आप सरकार को तीन नामों में से अपने पसंद के अधिकारी को डीजीपी नियुक्त करने का अधिकार रहेगा। नियमित डीजीपी को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत कम से कम दो वर्ष का कार्यकाल मिलेगा, चाहे इस दौरान सेवानिवृत्ति की तारीख क्यों न आए। अब पुलिस महकमे से लेकर राजनीतिक गलियारों तक सबकी नजर 30 जून की बैठक पर टिकी है।

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026: स्वस्थ जीवन और विकसित भारत का आधार बनेगा योग

रायपुर.  भारत में प्राचीन काल से ही योग हमारी जीवनशैली और संस्कृति का अभिन्न अंग रहा है। ऋषि-मुनियों, योगियों और संतों ने योग के माध्यम से स्वस्थ शरीर, शांत मन और आध्यात्मिक चेतना का मार्ग दिखाया। भारतीय ज्ञान परंपरा की यह अमूल्य धरोहर आज विश्वभर में स्वास्थ्य और कल्याण का पर्याय बन चुकी है। इसी विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर वर्ष 2014 में संयुक्त राष्ट्र ने 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मान्यता प्रदान की, जो आज विश्वव्यापी जनआंदोलन का स्वरूप ले चुका है। वर्ष 2026 के अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की थीम “योग फॉर हेल्दी एजिंग” (स्वस्थ एवं सक्रिय वृद्धावस्था के लिए योग) रखी गई है। यह थीम योग के माध्यम से जीवन के प्रत्येक चरण में शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने का संदेश देती है। योग न केवल रोगों से बचाव का प्रभावी माध्यम है, बल्कि स्वस्थ और सक्रिय जीवनशैली की आधारशिला भी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने योग को वैश्विक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके नेतृत्व में योग आज विश्व के करोड़ों लोगों के जीवन का हिस्सा बन चुका है। प्रधानमंत्री का मानना है कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि व्यक्ति, समाज और प्रकृति के बीच सामंजस्य स्थापित करने वाली जीवन पद्धति है। योग व्यक्ति को स्वस्थ बनाकर परिवार समाज और राष्ट्र को सशक्त बनाने का माध्यम बनता है इस वर्ष राष्ट्रीय स्तर का मुख्य आयोजन कोलकाता में आयोजित किया जा रहा है जहां प्रधानमंत्री स्वयं योगाभ्यास का नेतृत्व करेंगे।  छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का राज्य स्तरीय मुख्य समारोह अंबिकापुर में आयोजित किया जा रहा है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय स्वयं योगाभ्यास में सहभागिता करेंगे और प्रदेशवासियों को नियमित योग अपनाकर स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संदेश देंगे। राज्य सरकार द्वारा योग को जन-जन तक पहुंचाने के लिए विभिन्न विभागों, शैक्षणिक संस्थानों, पंचायतों और सामाजिक संगठनों के सहयोग से व्यापक स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री साय का मानना है कि स्वस्थ नागरिक ही विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत के निर्माण की सबसे बड़ी शक्ति हैं। योग शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक संतुलन, सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास को भी बढ़ाता है। यही कारण है कि राज्य सरकार स्वास्थ्य संवर्धन और जनजागरूकता अभियानों में योग को विशेष महत्व दे रही है।  प्राकृतिक संसाधनों और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से परिपूर्ण छत्तीसगढ़ में योग का संदेश लोगों के जीवन से सहज रूप से जुड़ता है। प्रदेश के ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवनशैली योग के मूल सिद्धांतों को प्रतिबिंबित करती है। विद्यालयों, महाविद्यालयों, आंगनबाड़ी केंद्रों और शासकीय संस्थानों में नियमित योग गतिविधियों के माध्यम से स्वस्थ समाज निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास किए जा रहे हैं। वर्तमान समय में बढ़ते तनाव, अनियमित जीवनशैली और विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं के बीच योग एक सरल, सुलभ और प्रभावी समाधान के रूप में उभरा है। नियमित योगाभ्यास शरीर को निरोग, मन को शांत और जीवन को संतुलित बनाता है। यह व्यक्ति को सकारात्मक ऊर्जा प्रदान कर जीवन की चुनौतियों का सामना करने की क्षमता विकसित करता है। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 हमें यह संकल्प लेने का अवसर देता है कि योग को केवल एक दिवस का आयोजन न मानकर दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाएं। स्वस्थ शरीर, स्वस्थ मन और स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए योग को अपनाना समय की आवश्यकता है। आइए, योग के माध्यम से स्वस्थ छत्तीसगढ़, विकसित भारत और समृद्ध विश्व के निर्माण में अपना योगदान दें।

शशि थरूर की तारीफ से सियासी घमासान: भाजपा ने कांग्रेस नेतृत्व पर साधा निशाना

नई दिल्ली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने प्रधानमंत्री मोदी की प्रशंसा से जुड़े कांग्रेस सांसद शशि थरूर के कथित बयान का हवाला दिया है। पार्टी ने शनिवार को दावा किया कि राहुल गांधी अपनी ही पार्टी के भीतर समर्थन खो रहे हैं। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने आरोप लगाया कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने नाविकों के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अपनाए गए रुख की शशि थरूर की सराहना, राहुल गांधी के रुख के विपरीत है। उन्होंने यह भी कहा कि राहुल गांधी असली नेता नहीं हैं, वह अब केवल रील नेता बनकर रह गए हैं। जन्मदिन पर राहुल गांधी को कोई उपहार नहीं मिलाः पूनावाला पूनावाला ने वीडियो जारी कर एक बयान में कहा, 'यह शर्मनाक है। कल (शुक्रवार को) राहुल गांधी का जन्मदिन था, लेकिन उन्हें कोई उपहार नहीं मिला। डॉ. शशि थरूर ने इसी मुद्दे पर राहुल गांधी के रुख का खंडन करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति ट्रंप के सामने नाविकों के मुद्दे पर भारत का पक्ष बेहद मजबूती से रखा और देश की स्थिति को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।' भाजपा का दावा- थरूर ने पीएम मोदी का सराहा भाजपा नेता ने दावा किया कि थरूर ने मोदी के नेतृत्व गुणों की भी प्रशंसा की है। उन्होंने कहा, 'इतना ही नहीं, थरूर ने प्रधानमंत्री मोदी के दृ्ष्टिकोण, अपनी बात रखने की क्षमता, ऊर्जा व वक्तृत्व शैली की भी भरपूर प्रशंसा की है। थरूर ने कहा है कि मोदी ने भारतीयों के जीवन पर अपनी छाप छोड़ी है।' राहुल की पीएम की दावेदारी पर कांग्रेस को घेरा पूनावाला ने राहुल गांधी को भविष्य के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में पेश करने को लेकर भी कांग्रेस पर निशाना साधा और दावा किया कि पार्टी के कुछ नेता इस विचार से सहमत नहीं हैं। एक तरफ कांग्रेस कहती है कूल पीएम राहुल और दावा करती है कि राहुल गांधी देश के प्रधानमंत्री बनेंगे। लेकिन उनकी अपनी पार्टी के सांसद भी शायद इस बात पर विश्वास नहीं करते। राहुल गांधी ने जनता का समर्थन खो दियाः पूनावाला भाजपा प्रवक्ता ने दावा किया कि राहुल गांधी ने जनता का समर्थन खो दिया है और उन लोगों का साथ भी खो दिया है, जो कभी उनके करीबी माने जाते थे। पूनावाला ने कहा, ' इससे साबित होता है कि राहुल गांधी ने जनमत खो दिया है, क्योंकि वह 99 चुनाव हार चुके हैं। उन्होंने उन लोगों का समर्थन भी खो दिया है, जो कभी उनके करीब थे, चाहे वह रामचंद्र गुहा हों या शशि थरूर।' राहुल गांधी असली नेता नहीं हैंः भाजपा पूनावाला ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस के कुछ सहयोगी राहुल गांधी के नेतृत्व को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं। पूनावाला ने कहा, 'अब उन्हें अपने गठबंधन के सहयोगियों का समर्थन भी हासिल नहीं है। चाहे वामपंथी दल हों या द्रमुक, वे राहुल के नेतृत्व को स्वीकार नहीं करते। राहुल गांधी एक 'रील नेता' बनकर रह गए हैं। वह एक वास्तविक नेता नहीं हैं।'  

रेलवे नियम बदलाव: अनियमित यात्रा और उल्लंघनों पर 500 रुपये तक न्यूनतम जुर्माना

नई दिल्ली अगर आप ट्रेन में बिना टिकट यात्रा करते हैं तो सावधान हो जाएं। पकड़े जाने पर अब पहले से दोगुना जुर्माना भरना पड़ेगा। रेलवे में नए नियमों के तहत अब बिना टिकट यात्रा करने या यात्रा का प्रयास करने पर देय न्यूनतम अतिरिक्त जुर्माना राशि को दोगुना करते हुए 250 रुपये से बढ़ाकर 500 रुपये कर दिया गया है। इसी प्रकार, अनियमित यात्रा से संबंधित मामलों में भी अब 250 रुपये के स्थान पर 500 रुपये का न्यूनतम अतिरिक्त प्रभार वसूला जाएगा। जुर्माना राशि में कड़ा संशोधन रेलवे में अनुशासन बनाए रखने, यात्रियों की सुविधा और रेल सेवाओं के सुरक्षित संचालन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से रेल अधिनियम में संशोधित दंड एवं जुर्माना प्रावधान लागू कर दिए गए हैं। रेलवे अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि केवल टिकट ही नहीं, बल्कि रेलवे परिसर में अनधिकृत प्रवेश, अनधिकृत फेरी, महिलाओं के लिए आरक्षित डिब्बों में पुरुषों का जबरन प्रवेश और रेलवे कर्मचारियों के निर्देशों की अवहेलना करने जैसे अन्य विभिन्न उल्लंघनों से संबंधित दंड प्रावधानों तथा जुर्माना राशि में भी कड़ा संशोधन किया गया है। 19 जून से प्रभावी रेल मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) अधिनियम, 2026 के तहत रेल अधिनियम, 1989 की विभिन्न धाराओं में किए गए ये महत्वपूर्ण बदलाव 19 जून से प्रभावी हो चुके हैं। लंबे समय से अपरिवर्तित चली आ रही दंड राशियों को वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप और व्यावहारिक बनाने के लिए यह कदम उठाया गया है। बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित की जा सकेगी वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरभ जैन ने शनिवार को बताया कि इन संशोधित प्रावधानों का मुख्य उद्देश्य यात्रियों में नियमों के प्रति जागरुकता बढ़ाना और बिना टिकट व अनियमित यात्रा पर पूरी तरह प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है। इसके साथ ही रेलवे परिसरों में पहले से बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित की जा सकेगी। टिकटधारी यात्रियों को मिलेगा फायदा रेलवे प्रशासन का मानना है कि बढ़े हुए दंड प्रावधानों के डर से बिना टिकट और अनियमित यात्रा की घटनाओं में भारी कमी आएगी। इसका सीधा फायदा उन वैध टिकटधारी यात्रियों को मिलेगा जो पूरा किराया देकर सफर करते हैं। इससे रेलवे परिसरों में अनुशासन और सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ किया जा सकेगा।  

सुशासन का नया चेहरा बना बस्तर मॉडल, डिजिटल सिस्टम और जमीनी प्रशासन ने रचा इतिहास

​रायपुर.  प्रशासनिक व्यवस्था में किसी भू-स्वामी की मृत्यु के पश्चात उनके वारिसों के नाम जमीन ट्रांसफर करने यानी 'फौती नामांतरण' (Mutation) को एक बेहद जटिल प्रक्रिया माना जाता रहा है। ग्रामीण अंचलों में जानकारी के अभाव, बिचौलियों के जाल और लंबी कागजी औपचारिकता के कारण ये मामले दशकों तक अदालतों में लटके रहते हैं। इससे न केवल पारिवारिक विवाद बढ़ते हैं, बल्कि कृषि क्षेत्र का विकास भी प्रभावित होता है। ​इस पारंपरिक ढर्रे को पूरी तरह बदलते हुए छत्तीसगढ़ के जनजातीय बहुल जिले बस्तर ने सुशासन का एक ऐसा 'सक्रिय मॉडल' (Proactive Model) प्रस्तुत किया है, जो राज्य के अन्य  जिलों के लिए एक मार्गदर्शक केस स्टडी बन सकता है। 'सक्रिय अभियान': एक क्रांतिकारी प्रशासनिक सोच ​आमतौर पर राजस्व विभाग में यह परंपरा रही है कि जब पीड़ित परिवार आवेदन लेकर दफ्तर पहुंचता है, तब प्रक्रिया शुरू होती है। बस्तर जिला प्रशासन ने इस 'रिएक्टिव' (प्रतिक्रियात्मक) रवैये को बदलकर 'प्रोएक्टिव' (सक्रिय) रुख अपनाया। प्रशासन ने तय किया कि वह खुद चलकर जनता के दरवाजे तक जाएगा। ​इस विशेष अभियान के तहत मात्र चार महीनों के भीतर 12 जून 2026 तक संकलित आंकड़ों के अनुसार जिले के 611 गांवों से डेटा जुटाकर, लंबित फौती नामांतरण प्रकरणों का शत-प्रतिशत निराकरण कर भूमि अभिलेखों (Land Records) को अपडेट कर दिया गया है। ​प्रशासनिक तंत्र की रीढ़: जब 'त्रिमूर्ति' ने संभाला मोर्चा ​इस 'प्रोएक्टिव गवर्नेंस मॉडल' की सफलता केवल फाइलों या डिजिटल पोर्टल तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसका असली श्रेय जमीनी स्तर पर काम करने वाली प्रशासनिक कड़ियों (ग्रासरूट ब्यूरोक्रेसी) के उस अनूठे तालमेल को जाता है, जिसने सेवा की पूरी परिभाषा ही बदल दी। ​इस पूरे अभियान को एक सुव्यवस्थित पिरामिड की तरह संचालित किया गया। इसके शीर्ष पर तहसीलदार और नायब तहसीलदार मार्गदर्शक की भूमिका में थे, जो हर हफ्ते कड़ाई से मॉनिटरिंग कर रहे थे और विधिक प्रक्रियाओं को समय-सीमा के भीतर अमली जामा पहनाकर अंतिम आदेश पारित कर रहे थे। इस शीर्ष नेतृत्व के ठीक नीचे, मैदानी अमले की 'त्रिमूर्ति' ने इस अभियान को संभाला। डेटा का प्राथमिक स्रोत ग्राम सचिव ने अपने 'जन्म एवं मृत्यु पंजीयक' के दायित्व का निर्वहन करते हुए पिछले 04 वर्षों में मृत हुए 17,405 व्यक्तियों की एक अचूक सूची (Line List) तैयार की। जिन मामलों में मृत्यु प्रमाण पत्र लंबित थे, वहां उन्होंने परिवारों को ये प्रमाणपत्र सुलभ कराए और जहां देरी हुई थी, वहां तहसीलदार से 'विलम्ब पंजीयन' की विशेष अनुमति दिलाकर नए प्रमाण पत्र जारी करवाए। तकनीकी और विधिक सेतु के रूप में सचिव से सूची प्राप्त होते ही पटवारी ने छत्तीसगढ़ के डिजिटल लैंड रिकॉर्ड पोर्टल 'भुइयां' पर उसका मिलान किया। इससे तत्काल 8,651 ऐसे मृत व्यक्तियों की पहचान हुई जिनके नाम पर जमीन दर्ज थी। इसके बाद, पटवारी ने स्वयं आगे बढ़कर वारिसों से संपर्क कर आवेदन लिए तथा उनके विधिक उत्तराधिकार को तय करने वाला 'वंश वृक्ष' तैयार किया। पारदर्शिता की जमीनी कसावट के लिए ग्रामीण भारत की सबसे पारंपरिक कड़ी कोटवार ने सोशल ऑडिट (सामाजिक सत्यापन) का जिम्मा संभाला। उन्होंने गांव-गांव जाकर मृतकों की सूची और पटवारी द्वारा तैयार किए गए वारिसों के 'वंश वृक्ष' का भौतिक सत्यापन किया। उनके इस जमीनी ज्ञान के कारण किसी भी प्रकार के फर्जीवाड़े या अपात्र दावों की गुंजाइश पूरी तरह खत्म हो गई। ​ बस्तर की तहसीलों में सुशासन का 'सेचुरेशन' ​जिले की सभी 10 तहसीलों के कुल 639 गांवों में से 611 गांवों को इस मुहिम से जोड़कर पूरी पारदर्शिता के साथ काम किया गया। मैदानी अमले द्वारा चिन्हित किए गए कुल 8,651 आवश्यक मामलों में से रिकॉर्ड 8,241 मामलों में ऑनलाइन नामांतरण पंजी (MD सीरिज) के तहत विधिक प्रक्रिया इश्तेहार प्रकाशन व दावा-आपत्ति निराकरण पूर्ण कर आदेश पारित किए जा चुके हैं। अब पूरे जिले में महज 410 प्रकरण ही लंबित बचे हैं। ​बस्तर जिले के इस विशेष अभियान के तहत सभी 10 तहसीलों में बेहतरीन समन्वय और तत्परता देखने को मिली है। आंकड़ों के लिहाज से तोकापाल तहसील इस पूरी मुहिम में सबसे आगे रही, जहां जिले में सर्वाधिक 1,553 मामले चिन्हित किए गए और रिकॉर्ड 1,454 मामलों का सफलतापूर्वक निपटारा किया गया। वहीं बकावण्ड तहसील अपने 1,153 मामलों में से 1,142 को पूर्ण कर शत-प्रतिशत 'सेचुरेशन' (सौ फीसदी लक्ष्य) के बिल्कुल करीब पहुंच चुकी है, जहां अब केवल 11 मामले ही शेष हैं। ​प्रशासनिक दक्षता के मामले में बस्तर तहसील ने भी 1,000 से अधिक मामलों की दहलीज को पार करते हुए अपने 1,087 प्रकरणों में से 1,019 का निराकरण कर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की। जिला मुख्यालय से जुड़ी जगदलपुर तहसील का प्रदर्शन बेहद अनुकरणीय रहा, जिसने अपने 1,061 मामलों में से 1,057 को निपटा लिया है और वहां अब महज 4 प्रकरण लंबित हैं। इसी तरह, भानपुरी तहसील ने मैदानी स्तर पर तीव्र प्रगति दिखाते हुए 1,018 संवेदनशील मामलों में से 959 का कार्य पूर्ण कर लिया है। ​भौगोलिक और सामाजिक रूप से भिन्न अन्य क्षेत्रों में भी यह रफ्तार कायम रही। लोहण्डीगुड़ा तहसील अपने 805 मामलों में से 799 का निपटारा कर पूर्ण संतुष्टि की दहलीज पर खड़ी है, जहां सिर्फ 6 मामले बाकी हैं। करपावण्ड (565 में से 504 मामले) और नानगुर (544 में से 518 मामले) तहसीलों ने तय समय-सीमा के भीतर विधिक प्रक्रियाओं का त्वरित संपादन कर भू-अभिलेखों को अपडेट करने में सफलता पाई है। ​अंतिम छोर पर स्थित दुर्गम और अंदरूनी इलाकों से घिरे दरभा अंचल ने अपनी चुनौतियों के बावजूद सराहनीय प्रयास किया और 484 आवश्यक मामलों में से 452 का निपटारा सुनिश्चित किया। वहीं, सीमित संसाधनों के बीच बेहतरीन तालमेल का उदाहरण पेश करते हुए बास्तानार तहसील ने भी अपने 381 चिन्हित मामलों में से 337 भू-स्वामियों के रिकॉर्ड पूरी तरह दुरुस्त कर दिए हैं। ​बस्तर का यह प्रयोग केवल जमीन के कागजात दुरुस्त करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके दूरगामी सामाजिक और आर्थिक प्रभाव हैं। डिजिटल ट्रैकिंग (MD सीरिज) और स्वतः संज्ञान (Suo Motu) प्रक्रिया के कारण बिचौलियों की भूमिका पूरी तरह समाप्त हो गई। समय-सीमा के भीतर आदेश पारित होने से आदिवासियों और किसानों को मानसिक व आर्थिक प्रताड़ना से मुक्ति मिली है। भूमि रिकॉर्ड अपडेट होने से अब ये नए भू-स्वामी किसान क्रेडिट कार्ड (KCC), कृषि सब्सिडी और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए तुरंत पात्र हो गए हैं। ​इस … Read more

खैबर पख्तूनख्वा में रिमोट-कंट्रोल ब्लास्ट, वाहनों को निशाना बनाकर किया गया हमला

नई दिल्ली पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा (KP) प्रांत के बन्नू जिले में दो लगातार धमाकों से हड़कंप मच गया है। इन धमाकों में 7 लोगों की मौत हो गई है, जबकि कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। पुलिस ने इन रिमोट-कंट्रोल धमाकों को 'कायराना आतंकी हमला' करार दिया है। क्या है पूरी घटना? बन्नू के वजीर सब-डिवीजन के अंतर्गत आने वाले अर्ध-जनजातीय और पहाड़ी इलाके 'मरका बेरा' में यह दिल दहला देने वाली घटना घटी है। बन्नू के डिस्ट्रिक्ट पुलिस ऑफिसर (DPO) यासिर अफरीदी ने इस बात की पुष्टि की है कि इन दो धमाकों में सात लोगों की जान गई है और तीन लोग घायल हुए हैं। रिमोट-कंट्रोल से वाहनों को बनाया गया निशाना डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने बताया कि फांग मूसा खेल इलाके में रिमोट-कंट्रोल ब्लास्ट के जरिए दो वाहनों को टारगेट किया गया। पुलिस और स्थानीय सूत्रों के अनुसार, डैटसन का एक प्राइवेट वाहन यात्रियों को लेकर डोमेल की तरफ जा रहा था। इसी दौरान इसे निशाना बनाया गया। इस जोरदार धमाके में वाहन पूरी तरह नष्ट हो गया और 5 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। दूसरा धमाका कहां हुआ? मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि जब पहले धमाके के घायलों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया जा रहा था, तभी घटनास्थल से लगभग एक किलोमीटर की दूरी पर दूसरा ब्लास्ट हुआ। इसमें दूसरे वाहन के भी परखच्चे उड़ गए और 2 अन्य लोगों ने जान गंवा दी। बचाव कार्य और सर्च ऑपरेशन जारी घटना के तुरंत बाद 'रेस्क्यू 1122' की टीमों ने मोर्चा संभाला और शवों व घायलों को डोमेल रूरल हेल्थ सेंटर और खलीफा गुल नवाज टीचिंग अस्पताल पहुंचाया। सुरक्षा बलों ने इलाके की घेराबंदी कर सघन तलाशी अभियान शुरू कर दिया है। अधिकारियों को आशंका है कि इलाके में और भी विस्फोटक उपकरण (IED) छिपे हो सकते हैं, जिसके चलते चप्पे-चप्पे की तलाशी ली जा रही है। पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने इस आईईडी हमले की कड़ी निंदा की है और निर्दोष नागरिकों की मौत पर गहरा दुख व्यक्त किया है। बन्नू में लगातार बढ़ रहे हैं आतंकी हमले यह ताजा हमला बन्नू के पहाड़ी इलाकों में बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों को साफ तौर पर दर्शाता है, जिससे वहां के निवासियों में भी खौफ का माहौल है। हाल के महीनों में बन्नू जिले में आतंकी हिंसा में तेजी से इजाफा हुआ है। एक सप्ताह पहले ही आतंकवादियों ने मिर्यान रोड पर स्थित 'तेरी राम ब्रिज' को विस्फोटकों से उड़ाने की कोशिश की थी, जिससे पुल को आंशिक नुकसान पहुंचा था। 12 जून को बन्नू में ही टारगेट किलिंग की दो अलग-अलग घटनाओं में दो पुलिसकर्मी मारे गए थे। पिछले महीने सुरक्षा बलों, शांति समिति और आतंकवादियों के बीच हुई एक भीषण मुठभेड़ में 25 आतंकी मारे गए थे। इस दौरान दो पुलिसकर्मी और दो नागरिकों की भी जान गई थी।

स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर सड़क पर उतरे डॉक्टर, रायपुर में निकाला कैंडल मार्च

रायपुर. छत्तीसगढ़ के चिकित्सा समुदाय ने राजधानी रायपुर स्थित पं. जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय परिसर में अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण कैंडल मार्च निकाला। जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (JDA) रायपुर, JDA छत्तीसगढ़ और छत्तीसगढ़ डॉक्टर्स फेडरेशन (CGDF) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में इंटर्न, पीजी रेजिडेंट, सीनियर रेजिडेंट, सुपरस्पेशलिटी डॉक्टर और अन्य चिकित्सकों ने भाग लिया। डॉक्टरों ने राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ विरोध जताया। इस दौरान बगैर पंजीयन दूसरे राज्य से आउटसोर्सिंग का विरोध किया गया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इससे छत्तीसगढ़ के स्थानीय डॉक्टरों के रोजगार और भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। प्रदर्शन के दौरान डॉक्टरों ने सरकार के सामने कई मांगें रखीं, जिनमें प्रमुख हैं—     इंटर्न, पीजी, सीनियर रेजिडेंट और सुपरस्पेशलिटी डॉक्टरों के स्टाइपेंड में तत्काल और सम्मानजनक वृद्धि।     राज्य के बाहर से मेडिकल प्रोफेशनल्स की आउटसोर्सिंग संबंधी आदेश को तत्काल वापस लिया जाए।     छत्तीसगढ़ के स्थानीय डॉक्टरों के रोजगार, अधिकार और चिकित्सा व्यवस्था की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।     मेडिकल, नर्सिंग, फार्मासिस्ट एवं पैरामेडिकल क्षेत्र में बाहरी राज्यों से बिना पंजीयन प्रवेश का विरोध। लंबे समय से उनकी जायज मांगों की अनदेखी का आरोप कैंडल मार्च के दौरान वक्ताओं ने कहा कि यह आंदोलन केवल स्टाइपेंड बढ़ाने का मुद्दा नहीं है, बल्कि छत्तीसगढ़ के चिकित्सा क्षेत्र के भविष्य, स्थानीय युवाओं के रोजगार और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की रक्षा का भी सवाल है। डॉक्टरों ने आरोप लगाया कि लंबे समय से उनकी जायज मांगों की अनदेखी की जा रही है। वहीं स्वास्थ्य विभाग के हालिया निर्णय ने प्रदेश के युवा चिकित्सकों में असंतोष और चिंता को और बढ़ा दिया है। डॉक्टरों ने सरकार को दी चेतावनी प्रदर्शन में शामिल चिकित्सकों ने कहा कि यदि सरकार समय रहते उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। यह संघर्ष पूरे चिकित्सक समुदाय के सम्मान और भविष्य की रक्षा के लिए है। कैंडल मार्च के दौरान डॉक्टरों ने “हमारा हक-हमारी आवाज-हमारा भविष्य”, “Save Local Doctors, Save Our Future” और “Respect Our Work, Respect Our Rights” जैसे नारों के साथ अपनी एकजुटता का प्रदर्शन किया। JDA और CGDF का संयुक्त बयान जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (JDA) और छत्तीसगढ़ डॉक्टर्स फेडरेशन (CGDF) के पदाधिकारियों ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि यह आंदोलन किसी एक संगठन का नहीं, बल्कि पूरे चिकित्सक समुदाय के सम्मान और स्थानीय युवाओं के भविष्य की रक्षा का आंदोलन है। उन्होंने राज्य सरकार से चिकित्सकों की मांगों पर संवेदनशीलता के साथ विचार कर शीघ्र समाधान निकालने की अपील की।

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस : चार जिलों में मुख्य अतिथियों के नामांकन में आंशिक संशोधन

रायपुर. छत्तीसगढ़ शासन के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा 21 जून को आयोजित होने वाले अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर राज्य के सभी जिलों के लिए मुख्य अतिथियों का नामांकन पूर्व में किया गया था। विभाग द्वारा आज जारी संशोधित आदेश के अनुसार चार जिलों में मुख्य अतिथियों के नामांकन में आंशिक परिवर्तन किया गया है। राज्य के शेष जिलों में पूर्व आदेशानुसार नामांकित मुख्य अतिथि यथावत रहेंगे। संशोधित आदेश के अनुसार मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में राज्यसभा सांसद श्री देवेन्द्र प्रताप सिंह को नामांकित किया गया है। इसी प्रकार बेमेतरा जिले में सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले में विधायक श्री डोमनलाल कोर्सेवाड़ा तथा बीजापुर जिले में विधायक श्री नीलकंठ टेकाम मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम में शामिल होंगे। सामान्य प्रशासन विभाग ने संबंधित जिलों के कलेक्टरों को निर्देशित किया है कि अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के कार्यक्रमों का आयोजन मुख्य अतिथियों के परामर्श तथा चिकित्सा शिक्षा (आयुष) विभाग द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप सुनिश्चित किया जाए।

अशोकनगर में किन्नरों के दो गुटों में विवाद, ‘सनातन’ मुद्दे पर बढ़ा तनाव; पुलिस का पहरा

अशोक नगर. जिला मुख्यालय सहित आसपास के क्षेत्रों में किन्नर समुदाय के दो गुटों के बीच चल रहा वर्चस्व का विवाद अब खुलकर सड़कों पर आ गया है। काजल ठाकुर और चांदनी नायक ग्रुप के बीच शुरू हुई यह लड़ाई अब केवल इलाकों (गुरु गद्दी) के बंटवारे तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें सनातन बनाम गुरु-शिष्य परंपरा और जातिगत बयानों का एंट्री हो चुकी है। एक ओर जहां काजल ठाकुर ने इस पूरे मामले को सनातन धर्म से जोड़कर नया मोड़ देने का प्रयास किया है, वहीं अशोकनगर की किन्नर गुरु चांदनी नायक ने पलटवार करते हुए कहा है कि किन्नर की कोई जाति या धर्म नहीं होता, किन्नर की स्वयं किन्नर ही जाति होती है और वे सभी धर्मों का सम्मान करती हैं। सनातन में वापसी के आग्रह से सुलग उठी विवाद की चिंगारी मिली जानकारी के अनुसार, कुछ समय पूर्व काजल ठाकुर ने मध्य प्रदेश के कई जिलों में अपनी सक्रियता बढ़ाते हुए कई स्थानीय किन्नरों को अपने गुट में शामिल कर लिया था। इसके साथ ही उन्होंने सभी किन्नरों से सनातन धर्म में वापसी करने का आग्रह किया। जब यह मामला प्रदेश के किन्नर समाज के बीच पहुंचा, तो गुरु-शिष्य की सदियों पुरानी परंपरा को बचाए रखने के लिए अशोकनगर की किन्नर गुरु चांदनी नायक ने सबसे पहले मोर्चा खोला और काजल ठाकुर का जमकर विरोध किया। इस विरोध से बौखलाई काजल ठाकुर ने चांदनी नायक पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए उन्हें 'जिहादी' तक कह डाला। इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए चांदनी मौसी ने स्पष्ट किया कि उनका मकसद केवल अपनी परंपरा को बचाना है। अशोक नगर में दी गई थी मारपीट की धमकी, तैनात रहा पुलिस बल विवाद इस कदर बढ़ा कि करीब 15 दिन पहले काजल ठाकुर द्वारा अशोकनगर आकर किन्नर गुरु चांदनी नायक के साथ मारपीट करने की धमकी दी गई थी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए चांदनी नायक ने तत्काल अशोकनगर पुलिस और जिला प्रशासन से लिखित शिकायत कर सुरक्षा की गुहार लगाई थी। प्रशासन ने मुस्तैदी दिखाते हुए किन्नर गुरु को पुलिस प्रोटेक्शन मुहैया कराया और उनके निवास पर पुलिस बल तैनात कर दिया। हालांकि, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होने के चलते फिलहाल अशोकनगर में ऐसी कोई अप्रिय घटना सामने नहीं आई है।

पीएम मोदी का ओडिशा दौरा: जनजातीय क्षेत्रों में विकास और बुनियादी ढांचे पर बड़ा फोकस

भुवनेश्वर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज अपने एक दिवसीय दौरे पर ओडिशा को बड़ा उपहार दिया है। 47 हजार करोड़ रुपये की विभिन्न परियोजनाओं का उद्घाटन एवं शिलान्यास करने के साथ ही ओडिशा सरकार के दो वर्ष पूर्ति के उपलक्ष्य में आयोजित जनसभा को प्रधानमंत्री ने संबोधित किया। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, राज्यपाल डा. हरिबाबू कम्भमपति ने राष्ट्रपति को जन्म दिन की शुभकामना दी। जानकारी के मुताबिक राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु भी इस दौरे में प्रधानमंत्री के साथ रहीं। आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार, आज पूर्वाह्न लगभग 11:15 बजे राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री मयूरभंज जिले के पहाड़पुर गांव पहुंचे।यहां वे संथाली जाहेरा और हो जाहेरा के पवित्र उपवनों में पूजा-अर्चना किए। इसके अलावा वे स्किल सेंटर और पहाड़पुर स्कूल का भी किए।यह यात्रा जनजातीय और ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा, कौशल विकास तथा सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों को रेखांकित करेगी। इतना ही नहीं प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति के साथ उनके गांव का भी भ्रमण किया है, राष्ट्रपति के स्कूल का भी प्रधानमंत्री ने परिदर्शन किया, ऐसे में उक्त क्षेत्र में सुबह से ही उत्सव एवं उत्साह का माहौल देखने को मिला।लोग सुबह से ही सड़क किनारे पारंपरिक नृत्य गीत करते हुए प्रधानमंत्री एवं राष्ट्रपति का स्वागत किए। राष्ट्रपति का जन्म दिन होने से आज लोगों ने अपनी शुभकामना दी।विभिन्न प्लाकार्ड लेकर लोग जगह जगह खड़े रहे।पहाड़पुर जाते समय राष्ट्रपति ने अपने काफिले को रोककर बच्चों से मुलाकात की और उन्हें चाकलेट दिया।ये बच्चे राष्ट्रपति की एक झलक पाने को सड़क किनारे घंटे से खड़े थे। राष्ट्रपति महुलीपड़ा घर से निकलकर पहाड़पुर पहुंची जहां पर मुख्यममंत्री ने उनका स्वागत किया। दोपहर करीब 1 बजे राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री मयूरभंज जिले के रायरंगपुर में राज्य सरकार के दो वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम में भाग लिए।कार्यक्रम का विषय “विकास की धारा, ओडिशा सारा” रखा गया है। इस अवसर पर 47,600 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास प्रधानमंत्री ने किया और इस दौरान जनसभा को संबोधित किए प्रमुख परियोजनाएं प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति ने ऊर्जा, औद्योगिक अवसंरचना, सड़क संपर्क, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन और सिंचाई जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों से जुड़ी परियोजनाओं का उद्घाटन एवं शिलान्यास किए।इन परियोजनाओं से राज्य में बुनियादी ढांचे को मजबूती, बेहतर संपर्क, ऊर्जा सुरक्षा और रोजगार के नए अवसर मिलने की उम्मीद है। इन परियोजनाओं का हुआ शिलान्यास     600 मेगावाट की अपर इंद्रावती पंप्ड स्टोरेज परियोजना।     आईबी थर्मल पावर स्टेशन के स्टेज-2 विस्तार परियोजना की दो नई 660-660 मेगावाट इकाइयां।     झारसुगुड़ा जिले के लखनपुर में भारत कोल गैसीफिकेशन एंड केमिकल्स लिमिटेड (बीसीजीसीएल) परियोजना।     भुवनेश्वर में 300 टीपीडी क्षमता का स्रोत-आधारित पृथक्कृत ठोस कचरे से संचालित संपीड़ित बायोगैस संयंत्र।     कटक और भुवनेश्वर को सीधे जोड़ने के लिए काठजोड़ी नदी पर नया पुल।     बौद्ध जिले में ढालपुर-हरभंगा सड़क का चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण।     नुआपड़ा से घाटीपाड़ा तक एनएच-353 के एक हिस्से का फोरलेन निर्माण।     कुसुमढी मेगा लिफ्ट सिंचाई परियोजना।     रायरंगपुर में इग्नू क्षेत्रीय केंद्र और इंडोर बैडमिंटन कॉम्प्लेक्स। इन परियोजनाओं का उद्घाटन     बौद्ध में 300 बिस्तरों वाला जिला मुख्यालय अस्पताल भवन।     ओडिशा के विभिन्न जिलों में 24 अटल बस स्टैंड।     नौ स्वचालित वाहन परीक्षण केंद्र (ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन)।     एनएच-57 पर नयागढ़ टाउन बाईपास।     कुसुमी स्मार्ट सिंचाई परियोजना का भूमिगत पाइपलाइन घटक।     जखपुरा-जाजपुर-केंदुझर रोड-बैतरणी रोड मल्टी-ट्रैकिंग परियोजना।     हिंदोल रोड-मेरामंडली मल्टी-ट्रैकिंग परियोजना। रायरंगपुर में स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और ट्राइबल रिसर्च सेंटर का प्रधानमंत्री एवं राष्ट्रपति ने उद्घाटन किया है। इन परियोजनाओं के पूरा होने से ओडिशा में स्वास्थ्य, परिवहन, सिंचाई, ऊर्जा और औद्योगिक विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है। इस पूरे कार्यक्रम में राज्यपाल डा. हरिबाबू कम्भमपति, मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के सरकार राज्य सरकार के कई मंत्री एवं विधायक उपस्थित रहे।