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पटना में वीकेंड हेलीकॉप्टर जॉय राइड, किराया 2100 रुपये तय

पटना  बिहार आने वाले पर्यटक अब आसमान से बिहार की खूबसूरती को निहार सकेंगे। मुख्यमंत्री बिहार हेली-पर्यटन एवं वायु पर्यटन सेवा योजना, 2026 को मंजूरी मिलने के बाद ऐसा माना जा रहा है कि राज्य में पर्यटकों को आसमान से नए रोमांच का मजा मिलेगा। इससे बिहार में पर्यटन की संभावनाएं तेज भी होंगी। बिहार आने वाले पर्यटक अब राजधानी पटना की हवाई सैर सप्ताह में दो दिन करेंगे। हेलीकॉप्टर से सैर के लिए 2100 रुपये किराया तय किया गया है। इसके लिए राज्य कैबिनेट ने बुधवार को हुई बैठक में मुख्यमंत्री बिहार हेली-पर्यटन एवं वायु पर्यटन सेवा योजना, 2026 को मंजूरी दी है। बैठक की अध्यक्षता मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने की। मंत्रिमंडल विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी ने पत्रकारों को बताया कि योजना का उद्देश्य पर्यटन स्थलों के बीच तेज और सुविधाजनक यात्रा उपलब्ध कराना है। योजना के पहले चरण को 15 जुलाई 2026 से 15 जनवरी 2027 तक लागू करने का प्रस्ताव है। इस योजना के तहत राज्य के नागरिकों एवं पर्यटकों को बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम की ओर से रियायती दरों पर हवाई सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इन सेवाओं का लाभ उठाने के लिए पर्यटकों को पर्यटन पैकेज का चयन करना अनिवार्य होगा। इसी योजना के तहत पटना शहर के स्काईलाइन का हवाई दृश्य उपलब्ध कराया जाएगा। पटना के लिए प्रत्येकशनिवार और रविवार को हेलीकॉप्टर ज्वॉय राइड का संचालन किया जाएगा। इसका किराया प्रति सीट 2100 रुपये तय किया गया है। कैमूर के लिए वायुयान तो राजगीर के लिए हेलीकॉप्टर वाल्मीकिनगर (पश्चिम चंपारण), मां मुंडेश्वरी मंदिर (कैमूर) और राजगीर (नालंदा) में भी हवाई सेवा की शुरुआत की जाएगी। वाल्मीकिनगर के लिए सरकारी विमान का उपयोग किया जाएगा, जबकि कैमूर और राजगीर के लिए किराये के हेलीकॉप्टरतैनात किए जाएंगे। हेलीकॉप्टर की क्षमता (6+2) की होगी। प्रति फेरी अधिकतम पांच सीटें आरक्षित की जा सकेंगी। इस योजना के तहत वाल्मीकिनगर के लिए राजकीय वायुयान कैमूर और राजगीर के लिए आठ सीटर हेलीकॉप्टर का उपयोग किया जाएगा। होम स्टे योजना में उद्यमियों को 11 लाख तक अनुदान मंत्रिमंडल ने पर्यटकों की सुविधा और ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री होमस्टे प्रोत्साहन योजना 2026 मंजूर की है। योजना के तहत होमस्टे संचालकों को प्रति कमरे 2.5 लाख की दर से अधिकतम चार कमरों के लिए 10 लाख तक की कैपिटल सब्सिडी मिलेगी। महिला, स्वयं सहायता समूह तथा 18 से 25 वर्ष के युवा उद्यमियों को प्रति कमरा 25 हजार अतिरिक्त प्रोत्साहन दिया जाएगा, जिससे कुल अनुदान 11 लाख तक पहुंच सकता है। अगले पांच वर्षों में 1000 कमरों के निबंधन का लक्ष्य रखा गया है।

पदोन्नति नियमों में बदलाव, राजस्थान कर्मचारियों और युवाओं को मिलेगा लाभ

जयपुर  राजस्थान सरकार ने राज्य के लाखों सरकारी कर्मचारियों के लिए एक बहुत जरूरी और लाभकारी फैसला लिया है. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बजट घोषणा 2026-27 के क्रियान्वयन के तहत पदोन्नति के नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए आवश्यक सेवा अवधि में दो साल की छूट देने का ऐलान किया है. इस निर्णय से उन कर्मचारियों को सीधा लाभ मिलेगा जो अनुभव की कमी के कारण पदोन्नति से वंचित रह रहे थे. सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह लाभ उन कर्मचारियों को नहीं मिलेगा जिन्होंने डीपीसी वर्ष 2023-24, 2024-25 और 2025-26 के दौरान पहले ही ऐसी छूट का लाभ प्राप्त कर लिया है. इस कदम से विभागीय कार्यक्षमता में वृद्धि होने की उम्मीद है. सचिवालय में बढ़ेंगे रोजगार के अवसर पदोन्नति में छूट के अलावा राज्य सरकार ने सचिवालय में प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए 149 नए पदों को सृजित करने की मंजूरी दी है. इसमें सहायक शासन सचिव के 15 पद, सहायक अनुभाग अधिकारी के 67 पद और लिपिक ग्रेड प्रथम के 67 पदों को शामिल किया गया है. मुख्यमंत्री के इस फैसले से जहां एक ओर विभागीय कर्मचारियों को पदोन्नति के नए और बेहतर अवसर मिलेंगे वहीं दूसरी ओर राज्य के युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार भी खुलेंगे. सरकार का मुख्य उद्देश्य प्रशासनिक कामकाज में गति लाना और कर्मचारियों के मनोबल को ऊंचा रखना है. प्रशासनिक सुधार की दिशा में यह एक दूरगामी परिणाम देने वाला निर्णय माना जा रहा है. जल्द ही इस संबंध में विभिन्न सेवा नियमों में आवश्यक संशोधन की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी.

जशपुर में किसानों को राहत, खाद-बीज की पर्याप्त उपलब्धता; प्रशासन की सख्ती से कालाबाजारी पर लगाम

जशपुर में किसानों को खाद-बीज की पर्याप्त उपलब्धता, प्रशासन की कड़ी निगरानी से कालाबाजारी पर रोक 44 सहकारी समितियों में 9,285 मीट्रिक टन उर्वरक और 6,836 क्विंटल बीज का भंडारण 10 हजार से अधिक किसानों को 37.79 करोड़ रुपये का कृषि ऋण वितरित रायपुर खरीफ सीजन के दौरान किसानों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए जशपुर जिले में खाद, बीज एवं कृषि ऋण की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। कृषि एवं सहकारिता विभाग के समन्वित प्रयासों से जिले की आदिम जाति सेवा सहकारी समितियों में कृषि आदानों का पर्याप्त भंडारण किया गया है। साथ ही कालाबाजारी, जमाखोरी और उर्वरकों के अवैध विक्रय पर रोक लगाने के लिए प्रशासन द्वारा लगातार निगरानी रखी जा रही है। उप संचालक कृषि श्री एम.आर. भगत ने बताया कि किसानों को इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय की अनुशंसाओं के अनुरूप उर्वरकों का वितरण किया जा रहा है। किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग, हरी खाद और जैविक विकल्पों को अपनाने के लिए जागरूक किया जा रहा है, जिससे भूमि की उर्वरता बनी रहे और उत्पादन क्षमता में वृद्धि हो सके। विभागीय अमला गांव-गांव पहुंचकर किसानों को वैज्ञानिक खेती और मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन संबंधी जानकारी भी दे रहा है। किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए जिले में सहकारी समितियों की संख्या 24 से बढ़ाकर 44 कर दी गई है। इससे किसानों को खाद एवं बीज प्राप्त करने के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ रही है और समय तथा परिवहन व्यय दोनों में कमी आई है। वर्तमान में जिले की 44 सहकारी समितियों में 9,285 मीट्रिक टन विभिन्न प्रकार के रासायनिक उर्वरकों का भंडारण किया गया है। इनमें से 3,681 मीट्रिक टन उर्वरकों का वितरण किसानों को किया जा चुका है। इसी प्रकार 6,836 क्विंटल धान बीज का भंडारण किया गया है, जिसमें से 1,872 क्विंटल बीज किसानों तक पहुंचाया जा चुका है। आगामी मांग को देखते हुए खाद एवं बीज का भंडारण लगातार बढ़ाया जा रहा है। कृषि ऋण वितरण के क्षेत्र में भी जिले ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। सहकारी समितियों के माध्यम से अब तक 10,187 किसानों को कुल 37 करोड़ 79 लाख 12 हजार रुपये का कृषि ऋण उपलब्ध कराया गया है। इसमें 31 करोड़ 33 लाख 08 हजार रुपये नगद तथा 6 करोड़ 46 लाख 04 हजार रुपये वस्तु ऋण के रूप में वितरित किए गए हैं। इस सहायता से किसानों को समय पर कृषि निवेश करने और खेती की लागत वहन करने में मदद मिल रही है। कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि किसानों को खाद, बीज एवं कृषि ऋण की उपलब्धता में किसी प्रकार की कमी नहीं होने दी जाएगी। इसके लिए सभी सहकारी समितियों एवं निजी उर्वरक विक्रय केंद्रों की नियमित जांच की जा रही है। वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी एवं ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी लगातार निरीक्षण कर स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। विभाग ने किसानों से वैज्ञानिक अनुशंसाओं के अनुसार उर्वरकों का उपयोग करने, हरी खाद एवं जैविक खेती को बढ़ावा देने तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता की जानकारी तत्काल प्रशासन को देने की अपील की है, ताकि आवश्यक कार्रवाई समय पर सुनिश्चित की जा सके।

क्लब संचालकों से रंगदारी मांग, गैंगस्टरों ने वॉयस नोट से दी धमकी

पंचकूला पंचकूला में नाइट क्लब संचालकों को गैंगस्टरों द्वारा धमकी दिए जाने का मामला सामने आया है। बदमाशों ने वॉयस नोट भेजकर क्लब संचालकों से 5 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगी है। धमकी में कहा गया है कि यदि रकम नहीं दी गई तो उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने होंगे और अगली गोली उनके नाम की होगी। मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस प्रशासन सतर्क हो गया है। संबंधित क्लबों के बाहर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है तथा पुलिस टीमों को जांच में लगाया गया है। पुलिस तकनीकी साक्ष्यों और डिजिटल ट्रैकिंग के माध्यम से धमकी देने वालों की पहचान करने का प्रयास कर रही है। गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से पंचकूला और आसपास के क्षेत्रों में क्लब, रेस्टोरेंट और कारोबारी प्रतिष्ठान गैंगस्टरों के निशाने पर रहे हैं। रंगदारी मांगने, धमकी देने और फायरिंग जैसी घटनाओं के कई मामले सामने आ चुके हैं, जिससे व्यापारियों और क्लब संचालकों में चिंता का माहौल है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले को गंभीरता से लिया गया है और दोषियों की जल्द पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा। साथ ही क्लब संचालकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। जांच एजेंसियां भी मामले के विभिन्न पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं। पुलिस ने आम लोगों से भी अपील की है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें, ताकि कानून-व्यवस्था बनाए रखी जा सके।

संजीव अरोड़ा को नहीं मिली राहत, अदालत बोली- जमानत मिलने पर साक्ष्यों से छेड़छाड़ का खतरा

चंडीगढ़  . पंजाब सरकार में मंत्री और आम आदमी पार्टी के नेता संजीव अरोड़ा को बड़ा झटका लगा है. ट्रायल कोर्ट ने उनकी नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी है. अदालत ने अपने आदेश में कहा कि जमानत देने से गवाहों को प्रभावित किया जा सकता है और साक्ष्‍य भी प्रभावति हो सकते हैं. इसलिए जमानत याचिका खारिज कर दी गयी है।  कोर्ट ने अपने आदेश में विशेष रूप से इस बात का उल्लेख किया कि आरोपी पहले भी मामले से जुड़े एक गवाह को प्रभावित करने का प्रयास कर चुका है. अदालत के अनुसार, संजीव अरोड़ा ने एक गवाह को उसका बयान वापस लेने और साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने के लिए 35 हजार रुपये का भुगतान किया था. अदालत ने इस पहलू को गंभीर मानते हुए कहा कि यदि आरोपी को जमानत पर रिहा किया जाता है तो उसके द्वारा दोबारा गवाहों को प्रभावित करने या सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।  खारिज करने की बताई वजह अदालत ने कहा कि आपराधिक मामलों में निष्पक्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया को सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है. ऐसे में यदि किसी आरोपी के खिलाफ गवाहों को प्रभावित करने के प्रयास के आरोप सामने आते हैं, तो उसे जमानत देने से जांच और सुनवाई प्रभावित हो सकती है. इन्हीं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने माना कि संजीव अरोड़ा नियमित जमानत पाने के हकदार नहीं हैं और उनकी याचिका खारिज कर दी।  पहले भी गवाह प्रभावित कर चुका है कोर्ट ने आदेश के अंत में विशेष रूप से उल्लेख किया कि आरोपी पहले भी एक गवाह को प्रभावित करने का प्रयास कर चुका है. अदालत के अनुसार, आरोपी ने गवाह को अपना बयान वापस लेने और साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने के लिए 35,000 रुपये का भुगतान किया था।  क्‍या है मामला संजीव अरोड़ा पंजाब की राजनीति में एक चर्चित चेहरा हैं और वर्तमान में राज्य सरकार में मंत्री हैं. उनके खिलाफ चल रहे मामले को लेकर पिछले कुछ समय से कानूनी कार्यवाही जारी है. मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष यह दलील दी थी कि आरोपी द्वारा गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश की गई है. इसी आधार पर जमानत का विरोध किया गया था।  अब बचा है ये विकल्‍प अब ट्रायल कोर्ट द्वारा जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद संजीव अरोड़ा को राहत नहीं मिली है. हालांकि, उनके पास सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का विकल्प खुला हुआ है. फिलहाल अदालत के इस फैसले ने मामले को लेकर राजनीतिक और कानूनी दोनों हलकों में चर्चा तेज कर दी है। 

परीक्षार्थियों को नहीं होगी कोई परेशानी, NEET UG री-एग्जाम से पहले कलेक्टर ने परखी व्यवस्थाएं

रायपुर. 21 जून को आयोजित होने वाली नीट (यूजी) 2026 पुनः परीक्षा के सुचारु एवं व्यवस्थित आयोजन को सुनिश्चित करने के लिए कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने जिले के 11 परीक्षा केंद्रों का निरीक्षण कर तैयारियों का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर मूलभूत सुविधाओं की स्थिति की समीक्षा की और आवश्यक निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला सेरीखेड़ी, शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल उपरवारा, शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल फॉरेस्ट कॉलोनी (अभनपुर रोड, माना बस्ती), शासकीय स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक शाला माना कैंप, मिंटू शर्मा स्मृति हायर सेकेंडरी स्कूल डुमरतराई, माधवराव सप्रे उच्चतर माध्यमिक शाला बुढ़ापारा, जे.आर. दानी शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कालीबाड़ी, संत कंवरराम शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक शाला कटोरा तालाब, शासकीय जे. योगानंदम छत्तीसगढ़ कॉलेज बैरन बाजार तथा प्रो. जे.एन. पांडे शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय नलघर चौक का निरीक्षण किया। बारिश को देखते हुए विशेष व्यवस्था के निर्देश कलेक्टर डॉ. सिंह ने संभावित बारिश को देखते हुए निर्देश दिए कि परीक्षार्थियों की फ्रिस्किंग शेड अथवा छायादार स्थान पर की जाए, ताकि उन्हें किसी प्रकार की असुविधा न हो। उन्होंने सभी परीक्षा केंद्रों में पेयजल, शौचालय, साफ-सफाई तथा अन्य आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। ध्वनि विस्तारक यंत्रों पर प्रतिबंध के निर्देश कलेक्टर ने अधिकारियों से कहा कि परीक्षा केंद्रों के आसपास ध्वनि विस्तारक यंत्रों का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित रहे तथा केंद्र तक पहुंचने वाले मार्गों को सुगम और व्यवस्थित रखा जाए, जिससे परीक्षार्थियों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। रायपुर में 25 परीक्षा केंद्र बनाए गए री-नीट परीक्षा को लेकर रायपुर जिले में कुल 25 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। निरीक्षण के दौरान लल्लूराम डॉट कॉम से बातचीत करते हुए कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने कहा कि परीक्षा केंद्रों के आसपास ध्वनि विस्तारक यंत्रों का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा तथा केंद्र तक पहुंचने वाले मार्गों को सुगम और व्यवस्थित रखा जाए, जिससे परीक्षार्थियों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। निरीक्षण के दौरान रायपुर ग्रामीण पुलिस अधीक्षक श्वेता सिन्हा, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी कुमार बिश्वरंजन, डीसीपी मयंक गुर्जर, डीसीपी उमेश कुमार गुप्ता, डीसीपी संदीप कुमार पटेल, एसडीएम नंदकुमार चौबे, एसडीएम अभनपुर रवि सिंह, एडीसीपी राहुल देव शर्मा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) प्रशांत शुक्ला, डिप्टी कलेक्टर उपेन्द्र किंडों सहित संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

जनवरी से मानसिक तनाव में थीं संचिता उगाले, करीबी दोस्त ने साझा किए भावुक दावे

संचिता उगाले के निधन से हर कोई सदमे में है. 22 वर्षीय अभिनेत्री ने 14 जून 2026 में आत्महत्या कर ली. अब, उनकी करीबी दोस्त और एक्स को-स्टार गीतांजलि मंगल ने हाल ही में एक बातचीत में उनकी पर्सनल लाइफ को लेकर बात की. संचिता उगाले की दोस्त ने किया सनसनीखेज खुलासा संचिता उगाले की दोस्त गीतांजलि मंगल ने टेली टॉक इंडिया के साथ बातचीत में बताया कि आत्महत्या की खबर सुनकर दिल टूट गया था. उन्होंने कहा, “मेरी दोस्त में बहुत क्षमता थी, और वो कर लेती अगर वो इतनी निराश नहीं होती. मैं सिर्फ इतनी गुजारिश करूंगी कि रूमर्स पर भरोसा मत करों. मैं सोशल मीडिया देख रही हूं, उसका मजाक बनाया जा रहा है, जो लोग कलतक उससे बात नहीं करते थे, वो आज उसकी चर्चा कर रहे हैं.” गीतांजलि ने कहा, संचिता का नहीं था बॉयफ्रेंड गीतांजलि ने आगे क्लियर किया कि वह किसी रिलेशनशिप में नहीं थी ना बॉयफ्रेंड था, हां मेंटली थोड़ी परेशान जरूर थी. कोई बात उसे परेशान कर रही थी. उन्होंने साझा किया, “मैं चाहती हूं सही डेट और सही रास्ता सामने आए. अगर कोई मुझसे पूछेगा मेरे पास जो मैसेज हैं, जिसमें उसने कहा है, ‘मैं नहीं जीना चाहती, मेरी जिंदगी खत्म हो गई है’, वो मैं दिखाऊंगी, लेकिन सोशल मीडिया पर नहीं, ये सही है शक्स को दिखाऊंगी, जो न्यायक्षेत्र है, जब मुझसे ये मांगा जाएगा. वो डिप्रेशन में थी, ये बात जनवरी से शुरू हुई थी.” संचिता जनवरी से थी परेशान इसी बातचीत के दौरान, गीतांजलि ने बताया कि जनवरी 2026 के लास्ट में उन्होंने संचिता से संपर्क किया. उन्होंने दिवंगत अभिनेत्री से पूछा कि वह कहां थीं. इसपर संचिता इमोशनल रूप से टूट गई और कहा कि वह अपने काम से खुश नहीं है और उनका कहीं मन भी नहीं लगता है. मुझे किसी चीज में पॉजिटिविटी नहीं मिल रही है. यह किस तरह की लाइफ है, जो बेहद दर्दनाक है.

यूपी बोर्ड की सख्त कार्रवाई, 465 स्कूलों पर गिरी गाज; मान्यता रद्द होने के बाद मचा हड़कंप

लखनऊ  माध्यमिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश (UP Board) ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने और नियमों की अनदेखी करने वाले शिक्षण संस्थानों पर बड़ी कार्रवाई की है. यूपी बोर्ड ने प्रदेश के विभिन्न जिलों में संचालित 465 स्कूलों की मान्यता समाप्त कर दी गई है. परिषद के सचिव भगवती सिंह की ओर से जारी आदेश में कहा गया है- इन स्कूलों में पिछले दो शैक्षणिक सत्रों से न तो कोई कक्षाएं संचालित हो रही थी और न ही कोई छात्र बोर्ड परीक्षाओं में शामिल हुआ था, जिसके कारण इन स्व वित्तपोषित विद्यालयों की मान्यता स्वतः समाप्त हो गई है। मान्यता समाप्ति के नियम और प्रावधान यूपी बोर्ड की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक, इण्टरमीडिएट शिक्षा अधिनियम-1921 के अधीन निर्मित परिषद विनियमों के अध्याय-सात (परिषद द्वारा संस्थाओं को मान्यता) के विनियम-11 (ढ़) में विहित प्रावधान हाईस्कूल नवीन (वनटाइम) अथवा इण्टरमीडिएट नवीन वर्ग की मान्यता प्राप्त विद्यालय से लगातार दो वर्ष तक कोई छात्र परीक्षा में सम्मिलित नहीं होते अथवा कक्षाएं संचालित नहीं करते है तो विद्यालय प्रदत्त मान्यता स्वतः समझी जाएगी।  क्या कहते हैं बोर्ड के नियम यूपी बोर्ड के सचिव भगवती सिंह ने कहा कि इस प्रावधान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल सक्रिय रूप से काम करने वाले संस्थानों को ही मान्यता मिलती रहे। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह नियम पहले से मान्यता प्राप्त संस्थानों से जुड़ी इंटरमीडिएट की वन-टाइम कक्षाओं, अतिरिक्त कक्षाओं या वैकल्पिक विषयों के लिए दी गई मान्यता पर लागू नहीं होता है। प्रभावित स्कूलों की सूची बोर्ड द्वारा सार्वजनिक जानकारी और आवश्यक कार्रवाई के लिए जारी कर दी गई है। बोर्ड के अनुसार विनियम 11(d) के अनुसार, किसी नए मान्यता प्राप्त हाई स्कूल (वन-टाइम) या इंटरमीडिएट स्तर के संस्थान को दी गई मान्यता अपने आप समाप्त हो जाती है यदि स्कूल का कोई भी छात्र बोर्ड परीक्षाओं में शामिल नहीं होता है या यदि लगातार दो वर्षों तक शैक्षणिक कक्षाएं नहीं चलाई जाती हैं। प्रभावित संस्थानों के वर्गीकरण से पता चलता है कि इनमें से 306 हाई स्कूल थे, जिनमें 53 बालिकाओं के स्कूल और 253 सह-शिक्षा संस्थान शामिल हैं। शेष 159 इंटरमीडिएट कॉलेज थे, जिनमें 41 बालिकाओं के संस्थान और 118 सह-शिक्षा स्कूल शामिल हैं। आंकड़े बताते हैं कि मान्यता वापस लिए गए स्कूलों में सह-शिक्षा संस्थानों की संख्या सबसे अधिक थी। प्रयागराज में दो दर्जन स्कूलों की मान्यता खत्म बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि इंटर वनटाइम, अतिरिक्त वर्ग या किसी मान्य वर्ग के वैकल्पिक विषयों की मान्यता पर यह प्रावधान लागू नहीं होगा. वहीं सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि प्रयागराज में स्थित जहां माध्यमिक शिक्षा परिषद का मुख्यालय है वहां भी करीब दो दर्जन स्कूलों की मान्यता खत्म कर दी गई है।  इन जिलों में बंद हो रहे हैं स्कूल यूपी बोर्ड द्वारा जारी की गई लंबी सूची में उत्तर प्रदेश के लगभग सभी प्रमुख जिलों के स्कूल शामिल है. इस सूची के अनुसार, आगरा स्थित 'श्री हर प्रसाद इंटर कॉलेज, अछनेरा', 'मां भगवती इंटर कॉलेज' और 'डी प्रिंस गर्ल्स इंटर कॉलेज' की मान्यता खत्म की गई है. फिरोजाबाद के 'सेंट पीटर्स हाई स्कूल', 'राष्ट्रीय विद्यालय शिकोहाबाद', मैनपुरी के 'राम सेवक एचएसएस', 'लोक कल्याण इंटर कॉलेज' शामिल है।  इसके अलावा प्रयागराज, प्रतापगढ़, फतेहपुर, कौशांबी, सुल्तानपुर, अयोध्या, बाराबंकी, अंबेडकर नगर, संत कबीर नगर, गोंडा, गोरखपुर,  देवरिया, बलरामपुर, मऊ, आजमगढ़, बलिया, जौनपुर, गाजीपुर, एटा, मथुरा, इटावा, कन्नौज, अलीगढ़, हाथरस, गाजियाबाद, नोएडा, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, मेरठ, बिजनौर, बरेली, हरदोई, मुरादाबाद व लखनऊ के भी कई विद्यालय इस बड़ी कार्रवाई की जद में आए है. ये वे स्कूल थे जो कागजों पर तो चल रहे थे, लेकिन धरातल पर इनमें शिक्षा से जुड़ी गतिविधियां पूरी तरह से ठप पड़ी हुई थी। 

सीएम भजनलाल शर्मा का बड़ा फैसला: मंडी यार्ड और संपर्क सड़कों का होगा विकास

 जयपुर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने राज्य की विभिन्न कृषि उपज मण्डी समितियों के आधारभूत ढांचे को सुदृढ़ बनाने के लिए 18 करोड़ 86 लाख रुपये की लागत के विभिन्न विकास कार्यों के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है। इससे मण्डी यार्ड निर्माण, संपर्क सड़कों का निर्माण तथा क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत के कार्य करवाए जाएंगे। मुख्यमंत्री द्वारा प्रदान की गई इस स्वीकृति से कृषि उपज मण्डी समिति सोजत सिटी (पाली), पलसाना एवं श्रीमाधोपुर (सीकर), अनाज मण्डी (बीकानेर), मेड़ता सिटी (नागौर) तथा दूदू (जयपुर) में विभिन्न विकास कार्य कराए जाएंगें। इन विकास कार्यों से मण्डियों में किसानों और व्यापारियों के लिए आधारभूत सुविधाओं का विस्तार होगा। इससे कृषि विपणन गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलेगा। कृषि उपज मण्डी समितियों से जुड़ी संपर्क सड़कों के निर्माण एवं क्षतिग्रस्त सम्पर्क सड़कों की मरम्मत से ग्रामीण क्षेत्रों के किसान अपनी उपज सुगमता से मण्डी तक ला सकेंगे। इससे मण्डियों में फसलों की आवक बढ़ेगी, किसानों को अपनी उपज बेचने में आसानी होगी तथा मण्डी राजस्व में भी वृद्धि होगी।

डिजिटल लॉकर में सुरक्षित होगा भविष्य, ‘क्रेडिट बैंक’ में जमा होगी पढ़ाई; उच्च शिक्षा को केंद्र की बड़ी सौगात

विशेष आलेख ​डिजिटल लॉकर में भविष्य, 'क्रेडिट बैंक' में जमा होगी पढ़ाई ​छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षा क्षेत्र में केंद्र की बड़ी सौगात                रायपुर       ​राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत छत्तीसगढ़ को मिली सबसे बड़ी सौगातों में से एक—'एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट' (ABC) और डिजीलॉकर एकीकरण योजना ने राज्य के उच्च शिक्षा परिदृश्य को पूरी तरह बदल दिया है। केंद्र सरकार और छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षा विभाग के समन्वय से सत्र 2023-24 से अनिवार्य रूप से लागू हुई यह योजना वर्ष 2026 में पूरी तरह परिपक्व हो चुकी है। अब राज्य का हर छात्र अपनी जेब में डिजिटल यूनिवर्सिटी लेकर घूम रहा है। ​क्या है यह 'क्रेडिट बैंक' और कैसे बदलेगी जिंदगी?     ​कल्पना कीजिए एक ऐसे बैंक की, जहाँ पैसा नहीं बल्कि आपकी पढ़ाई और कॉलेज के 'क्रेडिट' (अंक) जमा होते हैं। यदि किसी वजह से आपकी पढ़ाई बीच में छूट जाए, तो यह बैंक आपकी मेहनत को बेकार नहीं जाने देता। ​      मान लीजिए बस्तर के किसी कॉलेज में पढ़ने वाले छात्र को पारिवारिक कारणों से सेकंड ईयर के बाद पढ़ाई छोड़नी पड़ी। पहले की व्यवस्था में उसकी दो साल की पढ़ाई 'जीरो' मान ली जाती थी। अब पहले दो वर्षों में छात्र ने जो भी अंक या 'क्रेडिट' कमाए हैं, वे उसकी ABC ID के जरिए डिजिटल बैंक में सुरक्षित रहेंगे। दो या तीन साल बाद जब वह दोबारा पढ़ना चाहेगा, तो वह रायपुर, बिलासपुर या देश के किसी भी अन्य विश्वविद्यालय में सीधे 'थर्ड ईयर' में प्रवेश ले सकेगा। इसे ही "मल्टीपल एंट्री एंड एग्जिट" कहा गया है। ​छत्तीसगढ़ में डिजिटल क्रांति का 'स्कोरकार्ड'     ​यह एकीकृत डिजिटल सिस्टम न केवल छात्रों के दस्तावेजों को सुरक्षित कर रहा है, बल्कि उन्हें देशव्यापी स्तर पर अपनी पढ़ाई को सुगम बनाने की आजादी भी दे रहा है। वर्तमान में यह योजना छत्तीसगढ़ के सभी 33 जिलों में पूरी तरह सक्रिय हो चुकी है, जिसके दायरे में राज्य के 6.5 लाख से अधिक छात्र-छात्राएं आ रहे हैं। ​     इस महा-अभियान में राज्य के अग्रणी विश्वविद्यालय जैसे पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय (रायपुर), अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय (बिलासपुर), और शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय (बस्तर) सहित सभी शासकीय एवं निजी महाविद्यालय पूरी सक्रियता के साथ भागीदार बन चुके हैं। ​शत-प्रतिशत केंद्रीय सहयोग        तकनीक की यह इतनी बड़ी अवसंरचना (Infrastructure) छत्तीसगढ़ को पूरी तरह निःशुल्क मिली है। केंद्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) और शिक्षा मंत्रालय द्वारा शत-प्रतिशत तकनीकी व वित्तीय सहायता दी जा रही है, जिसके चलते राज्य सरकार पर आर्थिक भार पूरी तरह से शून्य है। ​डिजीलॉकर बना 'सुरक्षा कवच': गुम होने का डर खत्म     ​अक्सर दुर्घटना या लापरवाही के कारण छात्रों की मूल अंकसूची (Marksheet) या डिग्रियां नष्ट हो जाती थीं, जिसके बाद उन्हें यूनिवर्सिटी के चक्कर काटने पड़ते थे। अब इस समस्या का स्थायी समाधान कर दिया गया है। ​विश्वविद्यालयों को सीधे 'नेशनल एकेडमिक डिपॉजिटरी' (NAD) पोर्टल से जोड़ दिया गया है, जिससे छात्र की डिग्री और सर्टिफिकेट सीधे उसके डिजीलॉकर में अपलोड हो रहे हैं।  ये डिजिटल दस्तावेज कानूनी रूप से उतने ही मान्य हैं जितनी मूल हार्ड कॉपी। यानी नौकरी के इंटरव्यू में अब भारी-भरकम फाइल ले जाने की जरूरत नहीं, सिर्फ मोबाइल ही काफी है। ​'ग्लोबल' हो रहा है छत्तीसगढ़ का युवा     ​इस योजना ने सुदूर वनांचल जैसे सुकमा, बीजापुर या सरगुजा के कॉलेजों को भी नेशनल पोर्टल से सीधे जोड़कर अमीर और गरीब छात्र के बीच का डिजिटल फासला पूरी तरह खत्म कर दिया है।     ​'ABC ID' के माध्यम से छत्तीसगढ़ का युवा अब सिर्फ अपने राज्य तक सीमित नहीं है। उसके क्रेडिट ट्रांसफर की सुविधा ने उसे पूरे देश के उच्च शिक्षण संस्थानों से जोड़ दिया है। यह सिर्फ कागजों का डिजिटलीकरण नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के 6.5 लाख युवाओं के सपनों को मिला एक नया 'डिजिटल पंख' है।  विष्णु प्रसाद वर्मा  सहायक संचालक