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बिना जानकारी ईएमआई और लोन अवधि बढ़ाना पड़ा भारी, उपभोक्ता आयोग ने कंपनी के खिलाफ सुनाया फैसला

 अलीगढ़  होम लोन की ईएमआई और ऋण अवधि में बिना जानकारी बढ़ोतरी करने के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, अलीगढ़ ने आधार हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड के खिलाफ महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। आयोग ने माना कि शिकायतकर्ता ऋण राशि से अधिक भुगतान कर चुका है और कंपनी को अतिरिक्त जमा धनराशि ब्याज सहित लौटाने तथा ऋण खाते का अंतिम निस्तारण करने का निर्देश दिया है।संजय गांधी कालोनी निवासी दुर्गेश कुमार शर्मा ने उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी। उनका आरोप था कि वर्ष 2016 में आधार हाउसिंग फाइनेंस के अधिकारियों ने 10 से 11 प्रतिशत ब्याज दर और प्रधानमंत्री आवास योजना की सब्सिडी का लाभ मिलने की जानकारी देकर होम लोन दिलाया था। कंपनी ने कुल 7.75 लाख रुपये का ऋण वितरित किया, लेकिन बाद में उनकी जानकारी के बिना बीमा शुल्क जोड़ा गया और ऋण की शर्तों में बदलाव किए गए। शिकायतकर्ता के अनुसार वर्ष 2022 में बिना सूचना ईएमआई 9,950 रुपये से बढ़ाकर 12,387 रुपये कर दी गई तथा ऋण अवधि 20 वर्ष से बढ़ाकर 30 वर्ष कर दी गई। उन्होंने दावा किया कि आठ वर्षों में 10 लाख रुपये से अधिक जमा करने के बावजूद कंपनी उनके खाते में बड़ी बकाया राशि दर्शा रही थी। मामले की सुनवाई के दौरान कंपनी की ओर से आरोपों का प्रभावी खंडन नहीं किया गया। आयोग ने पाया कि ऋण अवधि और ईएमआई में की गई बढ़ोतरी एकतरफा थी तथा शिकायतकर्ता ऋण राशि से अधिक भुगतान कर चुका है। आयोग के अध्यक्ष हसनैन कुरैशी और सदस्य पूर्णिमा सिंह राजपूत की पीठ ने 15 जून 2026 को सुनाए गए फैसले में कंपनी को ऋण खाते का अंतिम निस्तारण करने, अतिरिक्त जमा राशि ब्याज सहित लौटाने, शिकायतकर्ता को पांच हजार रुपये मुआवजा और पांच हजार रुपये वाद व्यय देने का आदेश दिया। साथ ही निर्देश दिया गया कि 45 दिनों के भीतर आदेश का पालन किया जाए, अन्यथा उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

फार्म-टू-कंज्यूमर मॉडल से सीधे घर पहुंचेगा जैविक भोजन, किसानों को मिलेगा नया बाजार

लखनऊ प्रदेश में ‘जहर मुक्त भोजन’ का मेगा कैंपेन शुरू करने की तैयारी चल रही है। गोसेवा आयोग ने इसकी विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है, जिसमें लोगों की थाली तक सीधे खेतों से निकली सब्जियां आदि और अन्य उत्पाद पहुंचाए जाएंगे। इसके लिए इस गोशालाओं को खाद्य पदार्थों के बड़े सप्लाई सेंटर के रूप में विकसित किया जाएगा। प्रस्तावित योजना के अनुसार पहले चरण में चयनित गोशालाओं के पांच किलोमीटर के दायरे में रहने वाले परिवारों को अभियान से जोड़ा जाएगा। इन परिवारों तक प्राकृतिक खेती से उपजे खाद्यान्न, ताजी सब्जियां, फल और पंचगव्य आधारित उत्पाद सीधे पहुंचाए जाएंगे। गोसेवा आयोग ने इसके लिए ‘फार्म टू कंज्यूमर’ (खेत से सीधे उपभोक्ता तक) माडल बनाया है। गो-सेवा आयोग के अध्यक्ष ने क्या बताया? गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि गोशालाओं के सहयोग से तैयार होने वाली 100 प्रतिशत जैविक सब्जियां, फल और अनाज इसके माध्यम से सीधे घरों तक पहुंचेंगे। इनके अलावा औषधीय उत्पाद, पंचगव्य घी, और शुद्ध दूध भी इस चेन का हिस्सा होंगे। इससे केमिकल-फ्री उत्पाद तैयार करने वाले स्थानीय किसानों को अब अपनी फसल बेचने के लिए भटकना नहीं पड़ेगा, गोशालाएं ही उनका बाजार बनेंगी।  

मुंडका मेट्रो स्टेशन के पास बनेगा हाईटेक रेस्ट एरिया, फूड कोर्ट और EV चार्जिंग भी होगी

नई दिल्ली  दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर हर 50 किमी पर रेस्ट एरिया डिवेलप किए गए हैं। ठीक उसी तरह अर्बन एक्सटेंशन रोड (UER-2) पर मुंडका इंडस्ट्रियल एरिया मेट्रो स्टेशन के पास रेस्ट एरिया डिवेलप किया जाएगा। रेस्ट एरिया के लिए नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने मेट्रो स्टेशन के पास 34,349 वर्ग मीटर जमीन चिह्नित की है। रेस्ट एरिया एक्सप्रेसवे के दोनों तरफ बनाए जाएंगे। एक्सप्रेसवे के दाईं ओर 17,138 और बाईं ओर 17,211 वर्ग मीटर एरिया में इन्हें तैयार किया जाएगा।     एनएचएआई के अफसरों के अनुसार यूईआर-2 की कुल लंबाई करीब 75.7 किमी है।     इसका एक बड़ा हिस्सा दिल्ली में पड़ता है। जो नए एक्सप्रेसवे बन रहे हैं, उन पर यात्रियों की सुविधा के लिए एनएचएआई हर 50 किमी की दूरी पर रेस्ट एरिया डिवेलप कर रहा है।     दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर कई जगहों पर इसी तरह से आधुनिक रेस्ट एरिया डिवेलप किए गए हैं, जहां यात्रियों को हर तरह की सुविधा मिल रही है।     अर्बन एक्सटेंशन रोड पर मुंडका इंडस्ट्रियल एरिया मेट्रो स्टेशन के पास एक्सप्रेसवे के दोनों तरफ रेस्ट एरिया डिवेलप किया जाएगा।     जिसमें फूड कोर्ट, कार, बस, ट्रक पार्किंग, ढाबा, चिल्ड्रेन प्ले जोन, ईवी चार्जिंग स्टेशन , बैटरी स्वैपिंग स्टेशन, सेनेटरी पैड वेंडिंग मशीन, रेस्टरूम और अन्य तरह की सुविधाएं होंगी।     यह रेस्ट एरिया मेट्रो स्टेशन के पास होने के चलते लोकल लोगों और मेट्रो यात्रियों को भी इससे सुविधा मिलेगी। UER-2 पर तेजी से बढ़ रहा ट्रैफिक यूईआर के इस स्ट्रेच में डेली ट्रैफिक करीब 25,868 है। जिसमें सबसे अधिक संख्या कारों की है। एक्सप्रेसवे के राइट कैरिज-वे से रोजाना कारों की संख्या 16,476 और बाएं कैरिज-वे से 18,893 कारें गुजरती हैं। लेफ्ट और राइट कैरिज वे को मिलाकर कारों की संख्या रोजाना 25,369 है। इसी तरह से दोनों कैरिज वे को मिलाकर यूईआर-2 पर बसों की संख्या 119 और ट्रकों की संख्या 376 है। भविष्य में यूईआर पर डेली ट्रैफिक में और इजाफा होगा।

खादी को बढ़ावा देने की पहल, मुख्यमंत्री सैनी ने लाभार्थियों को सौंपी बी-बॉक्स और मशीनें

हिसार. मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि सिवानी से आत्मनिर्भरता, स्वाभिमान, रोजगार और समृद्धि का नया अध्याय जुड़ गया है। आज ‘खादी रोजगार उत्सव’ के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का वोकल फार लोकल और विकसित भारत-2047 का संकल्प धरातल पर उतरता दिखाई दे रहा है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी बुधवार को सिवानी में आयोजित खादी रोजगार उत्सव कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। इस दौरान पूर्व मंत्री जेपी दलाल की बहल को उपमंडल बनाने और सिवानी को हिसार में शामिल करने की मांग पर मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पर आगामी समय में उचित कार्रवाई की जाएगी। खादी ग्रामोद्योग आयोग के अध्यक्ष मनोज गोयल ने मुख्यमंत्री को चरखे का स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में आनलाइन बटन दबाकर मधुमक्खी पालन के लिए 2350 बी बाक्स भी वितरित किए। मुख्यमंत्री ने क्या कहा? मुख्यमंत्री ने कहा कि खादी आजादी के आंदोलन से ही करोड़ों भारतीयों के श्रम, सम्मान और स्वाभिमान का परिचायक है। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान भी खादी स्वदेशी का प्रतीक था। इसने बिना हथियार के ब्रिटिश हुकूमत की आर्थिक बुनियाद को हिलाकर रख दिया था। वर्तमान में प्रधानमंत्री ने हमें ‘खादी फार नेशन, खादी फार फैशन और खादी फार ट्रांसफार्मेशन’ का मंत्र दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामोद्योग विकास योजना के तहत हरियाणा के 972 कारीगरों को तीन हजार 645 मशीनें एवं टूल किट्स प्रदान की गई है। इनमें विद्युत चालित चाक, बी-बाक्स एवं बी-कालोनी, सिलाई मशीनें, टर्नवुड टूलकिट, फुटवियर निर्माण मशीनें, चरखे और दोना-पत्तल निर्माण मशीनें शामिल हैं। ये मशीनें गांवों में नई आर्थिक क्रांति का आधार बनेंगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में सूक्ष्म उद्यम स्थापित करने वाले युवाओं और पारंपरिक कारीगरों को 504 करोड़ 68 लाख रुपये की मार्जिन मनी सब्सिडी भी दी गई है। बढ़ गया खादी का कारोबार मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि वर्ष 2013-14 में खादी एवं ग्रामोद्योग का कुल कारोबार लगभग 31 हजार करोड़ रुपये था, जो आज बढ़कर एक लाख 87 हजार करोड़ रुपये हो गया है। पिछले 12 सालों में देशभर में खादी और ग्रामोद्योग के माध्यम से लगभग दो करोड़ रोजगार पैदा हुए हैं। केवीआइसी अध्यक्ष मनोज गोयल ने कहा कि पीएमईजीपी के तहत 22,259 नई इकाइयों के लिए 504.68 करोड़ रुपये की मार्जिन मनी सब्सिडी का आनलाइन संवितरण किया गया है। पूर्व मंत्री जेपी दलाल ने कहा कि भिवानी जिले की जनता ने सदैव आपका साथ दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री मनोहरलाल ने उनके अनुरोध पर लोहारू की दशकों से खाली पड़ी नहरों में टेल तक पूरा पानी पहुंचाया। किसान गरीब सहित हर वर्ग के हित में नीतियां लागू की। इस मौके पर बवानी खेड़ा के विधायक कपूर सिंह बाल्मीकि, विधायक बाढ़डा उमेद पातुवास, नलवा के विधायक रणधीर पनिहार, महेंद्रगढ़ के विधायक कंवर सिंह यादव, भाजपा जिला अध्यक्ष वीरेंद्र कौशिक, डीसी साहिल गुप्ता, सिवानी नगरपालिका की चेयरपर्सन वंदना केडिया, खादी ग्रामोद्योग के वित्तीय सलाहकार जे सरवनन, रवि महमिया और टोनी बराला सहित अन्य मौजूद रहे। मशीनें व टूल्स किए वितरित मुख्यमंत्री ने सोनीपत जिला से आई नेहा, अंजली, ऋतु और रोहतक निवासी सुदेश व पिंकी को फुटवियर मैन्युफैक्चरिंग मशीनें वितरित की। इसी प्रकार रोहतक निवासी साधना, गुंजन शर्मा, मोनिका, ज्योति व नीलम को सिलाई मशीन और भिवानी जिला से झुम्पा निवासी राजेश देवी, ऊषा रानी, छाकली देवी व प्रमिला को चरखा वितरित किया। शहद उत्पादन के लिए फतेहाबाद निवासी कुलदीप सिंह, भीम सिंह, राजेंद्र कुमार, पवन कुमार, कुलवंत और कुरुक्षेत्र निवासी मुनीष को उपकरण वितरित किए। मुख्यमंत्री ने की ये घोषणाएं — गांव गुरेरा, किकराल, नलोई, देवसर, ढाणी रामजस, ढाणी किशनलाल, ढाणी मिठ्ठी में जगमग योजना लागू करने की घोषणा। तीन करोड़ 28 लाख रुपए का खर्च आएगा। लोहारू शहर में छह करोड़ 85 लाख की लागत से एक कम्युनिटी सेंटर बनाया जाएगा। सिवानी के राजकीय महाविद्यालय में एक करोड़ 50 लाख रुपए की लागत से मल्टीपर्पस हाल का निर्माण होगा। सिवानी सिंचाई मंडल की मंढोली डिस्ट्रीब्यूटरी शहरयारपुर व खरकड़ी माइनर की चार करोड़ की लागत से री-माडलिंग। लोहारू सिंचाई मंडल में कासनी, झांझड़ा, बहल, पातवान, सौरा , बड़दु चैना माइनर की री-माडलिंग के लिए आठ करोड़ छह लाख रुपए की राशि खर्च। सिवानी में ड्राइविंग लाइसेंस के लिए मेडिकल सुविधा शुरू करने की घोषणा। किकराल रोड हाईवे बाईपास, सिवानी में ओवरब्रिज का निर्माण करने की घोषणा। सिवानी के नागरिक अस्पताल में चार करोड़ रुपए की लागत से पोस्टमार्टम की सुविधा 12 करोड़ 22 लाख रुपए की लागत से बहल बस स्टैंड का निर्माण। सिवानी नगरपालिका के लिए नए भवन का निर्माण। लोहारू विधानसभा क्षेत्र के सड़क तंत्र को मजबूत करने के लिए लोक निर्माण एवं सड़क निर्माण विभाग की 391.25 किलोमीटर की 120 सड़कों की मरम्मत व मार्केटिंग बोर्ड की 141.68 किलोमीटर की सड़कों की मरम्मत। लोहारू विधानसभा के खेतों के 25 किलोमीटर के रास्तों को पक्का किया जाएगा।

परिवहन व्यवस्था पर मंडराया साइबर संकट, सारथी पोर्टल को निशाना बनाने की आशंका

जालंधर. पिछले तीन दिनों से पंजाब सहित देशभर में परिवहन विभाग की ऑनलाइन सेवाएं प्रभावित रहने के पीछे केवल तकनीकी खराबी ही नहीं, बल्कि संभावित विदेशी साइबर हमले की आशंका भी सामने आई है। नैशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर (एन.आई.सी.) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दावा किया है कि सारथी पोर्टल को पाकिस्तान और चीन से संचालित हैकरों द्वारा निशाना बनाए जाने की संभावना है। इस खुलासे ने देश की महत्वपूर्ण डिजिटल सेवाओं की सुरक्षा को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। सारथी पोर्टल, जो केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अधीन संचालित होता है, देशभर में ड्राइविंग लाइसैंस, लर्निंग लाइसैंस, स्लॉट बुकिंग, लाइसैंस नवीनीकरण, अंतर्राष्ट्रीय ड्राइविंग परमिट और ड्राइविंग स्कूलों की निगरानी जैसी महत्वपूर्ण सेवाएं प्रदान करता है। इसी पोर्टल में आई तकनीकी बाधा के कारण पंजाब के सभी आर.टी.ए. कार्यालयों और ऑटोमेटेड ड्राइविंग टैस्ट केंद्रों में कामकाज बुरी तरह प्रभावित रहा। सारथी पोर्टल में आई खराबी का सबसे अधिक असर आम नागरिकों पर पड़ा। पंजाब के विभिन्न जिलों में लर्निंग लाइसैंस, स्थायी ड्राइविंग लाइसैंस, वाहन पंजीकरण और अन्य सेवाओं के लिए पहले से समय लेकर पहुंचे हजारों आवेदकों को घंटों इंतजार करना पड़ा। जालंधर, लुधियाना, अमृतसर, पटियाला, होशियारपुर और अन्य जिलों के आर.टी.ए. कार्यालयों में पिछले तीन दिनों से आवेदकों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। कई स्थानों पर ड्राइविंग ट्रैक टेस्ट के लिए पहुंचे आवेदकों के बायोमैट्रिक सत्यापन नहीं हो सके, जिससे उनके परीक्षण स्थगित करने पड़े। जिस वजह से बड़ी संख्या में लोगों को बिना काम करवाए लौटना पड़ा। वहीं, तेलंगाना में एन.आई.सी. के राज्य समन्वयक एस. कासी रेड्डी के अनुसार सोमवार को सारथी पोर्टल पर सामान्य 5 हजार उपयोगकर्त्ताओं की तुलना में अचानक 95 हजार उपयोगकर्त्ताओं का ट्रैफिक दर्ज किया गया। इस असामान्य गतिविधि ने साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों को सतर्क कर दिया। उन्होंने बताया कि साइबर सुरक्षा टीम ने संभावित खतरे को देखते हुए एहतियातन पोर्टल को अस्थायी रूप से बंद कर दिया। बाद में सेवाएं बहाल कर दी गईं, लेकिन सर्वर पर पड़े अतिरिक्त दबाव के कारण सिस्टम सामान्य क्षमता प्राप्त नहीं कर पाया और बार-बार बाधित होता रहा। चीन और पाकिस्तान से लगातार होते हैं हमले एन.आई.सी. अधिकारियों के अनुसार केंद्रीय गृह मंत्रालय पहले से ही इस बात से अवगत है कि पाकिस्तान और चीन से जुड़े साइबर अपराधी तथा हैकर समूह समय-समय पर भारत के सरकारी पोर्टलों को निशाना बनाने का प्रयास करते रहते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जिन सरकारी पोर्टलों पर ऑनलाइन भुगतान सुविधा उपलब्ध होती है, वे साइबर अपराधियों के लिए सबसे आकर्षक लक्ष्य बन जाते हैं। ऐसे पोर्टलों को ठप कर प्रशासनिक अव्यवस्था पैदा करना, डेटा चोरी का प्रयास करना या डिजिटल सेवाओं को बाधित करना हमलावरों के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल हो सकता है। हालांकि अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा मामले में किसी भी प्रकार के डेटा लीक या नागरिकों की निजी जानकारी के चोरी होने के प्रमाण नहीं मिले हैं। मजबूत फ़ायरवॉल और साइबर सुरक्षा तंत्र ने किसी भी संभावित घुसपैठ को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। साइबर युद्ध का बदलता स्वरूप साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी पोर्टलों पर हमलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र, सीईआरटी-इन (सी.ई.आर.टी.-इन) तथा अन्य एजैंसियां ऐसे खतरों की पहचान और रोकथाम के लिए लगातार कार्य कर रही हैं। स्मार्ट कोड टैक्नोलॉजीज के संस्थापक सूर्यनारायण रेड्डी के अनुसार आज साइबर अपराधियों के पास कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), चैटबॉट और अत्याधुनिक मैलवेयर जैसे नए हथियार मौजूद हैं। इनके माध्यम से पहले की तुलना में अधिक जटिल और संगठित हमले किए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक दौर में साइबर सुरक्षा एक निरंतर चलने वाला युद्ध बन चुकी है, जहां सुरक्षा एजेंसियों को हर दिन नई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। डिजिटल इंडिया के लिए चेतावनी  सारथी पोर्टल प्रकरण ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि डिजिटल इंडिया की बढ़ती निर्भरता के साथ साइबर सुरक्षा को और मजबूत बनाना समय की आवश्यकता है। देश की परिवहन, बैंकिंग, कराधान, स्वास्थ्य और नागरिक सेवाओं से जुड़े पोर्टल करोड़ों लोगों के दैनिक जीवन का हिस्सा बन चुके हैं। हालांकि अधिकारियों का दावा है कि नागरिकों का डाटा पूरी तरह सुरक्षित है और सेवाएं धीरे-धीरे सामान्य हो रही हैं, लेकिन इस घटना ने यह संकेत अवश्य दिया है कि भारत के महत्वपूर्ण डिजिटल बुनियादी ढांचे पर विदेशी साइबर खतरों की निगाह लगातार बनी हुई है। ऐसे में साइबर सुरक्षा तंत्र को और अधिक मजबूत बनाना तथा सरकारी पोर्टलों की निगरानी को अत्याधुनिक तकनीकों से लैस करना भविष्य की सबसे बड़ी आवश्यकता बनकर उभरा है।

कामकाज से नाराज दिखे अरुण साव, बिलासपुर में PWD अफसरों की लगाई क्लास

बिलासपुर. छत्तीसगढ़ के डिप्टी सीएम अरुण साव ने बिलासपुर में बहतराई स्थित स्वर्गीय बीआर यादव राज्य खेल प्रशिक्षण केंद्र का सरप्राइज इंस्पेक्शन किया। यहां हॉकी स्टेडियम की अधूरी गैलरी, फंड मिलने के बाद भी मैपलवुड लगाने में देरी और मरम्मत कार्यों में लापरवाही देखी तो अधिकारियों पर नाराज हुए। उन्होंने एक्जीक्यूटिव इंजीनियर बीबीएस गौतम से जानकारी मांगी, जब वे तुरंत जवाब नहीं दे पाए साव ने कहा वेरी गूड, ढूंढते रहो। बिलासपुर में लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारियों पर उपमुख्यमंत्री अरुण साव जमकर भड़क गए। बहतराई स्टेडियम के अधूरे निर्माण कार्यों को लेकर उन्होंने ईई, एसडीओ सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई। कलेक्टर संजय अग्रवाल की मौजूदगी में निरीक्षण के दौरान उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने 2017 से लंबित चल रहे कार्यों की धीमी प्रगति पर गहरी नाराजगी जताई। निरीक्षण के दौरान सरल स्वभाव के उपमुख्यमंत्री का ऐसा रूप पहली बार सामने आया। अधिकारियों से उन्होंने कहा कि अगली बार आया और काम नहीं हुआ तो आप दिक्कत में पड़ जाएंगे। काम कंप्लीट करिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा, ‘काम करना है या नहीं? पहले जांच क्यों नहीं हुई? 2017 से काम अधूरा पड़ा है। यह कोई काम करने का तरीका है क्या? मजाक कर रहे हैं या नौकरी?’ जल्द काम पूरा करने के निर्देश इस दौरान अरुण साव ने अधिकारियों से कहा, ‘ईई साहब, आपका सुपरविजन कैसा है? इतने साल बाद भी काम पूरा नहीं हुआ। अगर समय पर निगरानी होती तो यह स्थिति नहीं बनती।’ करीब 9 साल पहले बने इस खेल प्रशिक्षण केंद्र में अब भी कई काम अधूरे हैं। निरीक्षण के दौरान सामने आई कमियों पर डिप्टी सीएम ने नाराजगी जताई और अधिकारियों को जल्द सभी काम पूरे करने के निर्देश दिए। डिप्टी सीएम बोले- दिक्कत में पड़ेंगे आप लोग डिप्टी सीएम अरुण साव ने पीडब्ल्यूडी के कार्यपालन अभियंता (ईई) बीबीएस गौतम को सभी पेंडिंग काम जल्द पूरा करने के लिए संयुक्त बैठक बुलाकर कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि 15 दिनों के अंदर सभी निर्माण और मरम्मत कार्यों की प्रगति रिपोर्ट सौंपी जाए। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि हर काम की खुद जांच कीजिए और 15 दिन में रिपोर्ट दीजिए। मैं दोबारा निरीक्षण के लिए आऊंगा। अगर काम में लापरवाही मिली तो आप लोग दिक्कत में पड़ेंगे। हॉस्टल की स्थिति पर भी नाराजगी इसके बाद अरुण साव ने हॉस्टल की स्थिति पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि जिला खनिज न्यास (DMF) से पैसा मिलने के बावजूद जरूरी मरम्मत और रखरखाव के काम समय पर नहीं हो रहे हैं, इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे। साल 2017 से शुरू हुआ काम अधूरा उन्होंने कहा कि इंडोर स्टेडियम में मैपलवुड फ्लोरिंग का काम साल 2017 में शुरू हुआ था, जो अब तक पूरा नहीं हुआ। ये गंभीर लापरवाही है। अरुण साव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी निर्माण और मरम्मत कार्य तय समय में और अच्छी गुणवत्ता के साथ पूरे किए जाएं। साथ ही कामों की नियमित निगरानी भी की जाए। अरुण साव ने पीडब्ल्यूडी के कार्यपालन अभियंता (ईई) बीबीएस गौतम को काम जल्द पूरा करने के निर्देश दिए हैं। तीरंदाजी मैदान जुलाई तक पूरा करने के निर्देश डिप्टी सीएम ने एसईसीएल की ओर से करीब 2 करोड़ रुपए की लागत से बनाए जा रहे तीरंदाजी मैदान के निर्माण कार्य की समीक्षा की। उन्होंने खेल विभाग के सहायक संचालक ए. एक्का को जुलाई तक मैदान का निर्माण पूरा कराने के निर्देश दिए। इसके साथ ही उन्होंने आउटडोर स्टेडियम में लगी हाईमास्ट लाइट को जल्द ठीक कराने के लिए कहा। पीडब्ल्यूडी और खेल विभाग के अधिकारियों को पूरे स्टेडियम का संयुक्त निरीक्षण करने और जरूरी कामों का प्रस्ताव तैयार कर भेजने के भी निर्देश दिए। साव ने हॉकी मैदान में बन रहे पैवेलियन में अधिकारियों के लिए शौचालय बनाने और दर्शकों के लिए शौचालयों की संख्या बढ़ाने के भी निर्देश दिए।

तालिबान का नया फरमान, सरकारी अधिकारियों के स्मार्टफोन इस्तेमाल पर रोक; दुनिया में बढ़ी चिंता

काबुल  अफगानिस्तान में तालिबान सरकार ने एक और सख्त फैसला लेते हुए सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के स्मार्टफोन इस्तेमाल करने पर रोक लगा दी है. नए आदेश के मुताबिक, अगर कोई अधिकारी या कर्मचारी स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते पकड़ा गया तो उसका फोन मौके पर तोड़ दिया जाएगा और उसके खिलाफ कानूनी और शरिया के तहत कार्रवाई भी की जाएगी।  यह आदेश तालिबान की सैन्य अदालतों की ओर से जारी किया गया है. इसमें कहा गया है कि उच्च पदस्थ अधिकारियों से लेकर सामान्य कर्मचारियों और मुजाहिदीन तक, किसी को भी स्मार्टफोन रखने या इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं होगी. अगर किसी को छूट चाहिए तो उसके लिए तालिबान के सर्वोच्च नेता हिबातुल्लाह अखुंदजादा की लिखित मंजूरी जरूरी होगी।  एक ब्रिटिश न्यूज प्लेटफॉर्म दि गार्डियन के मुताबिक, सोशल मीडिया पर सामने आए कुछ वीडियो में तालिबान अधिकारियों को यह आदेश पढ़ते और लोगों के मोबाइल फोन तोड़ते हुए भी देखा गया है. हालांकि तालिबान की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।  पूरे देश में लागू नहीं किया जा रहा स्मार्टफोन बैन रिपोर्ट के मुताबिक, यह प्रतिबंध पूरे देश में एक समान तरीके से लागू नहीं किया जा रहा. कुछ इलाकों में यह सिर्फ सरकारी कर्मचारियों तक सीमित है, जबकि कुछ प्रांतों में महिलाओं, छात्रों, शिक्षकों और स्वास्थ्यकर्मियों तक भी इसका असर देखने को मिल रहा है।  विशेषज्ञों का मानना है कि तालिबान फिलहाल लोगों की प्रतिक्रिया पर नजर रख रहा है और संभव है कि भविष्य में पूरे देश में स्मार्टफोन पर प्रतिबंध लगाने की कोशिश की जाए. उनका कहना है कि यह कदम अफगानिस्तान को दुनिया से और अधिक अलग-थलग कर सकता है।  इंटरनेट पर पाबंदी का कड़ा विरोध हाल के महीनों में तालिबान ने इंटरनेट और डिजिटल कम्युनिकेशन पर नियंत्रण बढ़ाने की कई कोशिशें की हैं. पिछले साल सितंबर में पूरे देश में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई थीं. तालिबान ने इसे "अनैतिक सामग्री रोकने" के लिए जरूरी बताया था. हालांकि इस फैसले का व्यापार, बैंकिंग, हवाई सेवाओं और आपातकालीन सेवाओं पर गंभीर असर पड़ा था, जिसके बाद इंटरनेट बहाल करना पड़ा।  विश्लेषकों का मानना है कि स्मार्टफोन प्रतिबंध के पीछे कई वजहें हो सकती हैं. हाल ही में हेरात शहर में महिलाओं के विरोध प्रदर्शनों के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए थे. ये प्रदर्शन महिलाओं और लड़कियों की गिरफ्तारी के खिलाफ हुए थे. आरोप है कि तालिबान बलों की कार्रवाई में कई लोगों की मौत भी हुई थी. वीडियो सामने आने के बाद तालिबान को अंतरराष्ट्रीय आलोचना का सामना करना पड़ा।  तालिबान स्मार्टफोन पर क्यों लगा रहा बैन? तालिबान को यह भी चिंता है कि सरकारी अधिकारी मोबाइल फोन के जरिए गोपनीय दस्तावेज और बैठकों की जानकारी लीक कर रहे हैं. कई मामलों में सरकारी फैसलों की जानकारी आधिकारिक घोषणा से पहले ही सोशल मीडिया पर पहुंच गई थी।  हेरात के कुछ सरकारी कर्मचारियों ने बताया कि उनके दफ्तरों में कई महीनों से स्मार्टफोन पर अनौपचारिक रोक लगी हुई थी. एक कर्मचारी ने दावा किया कि जब वह मोबाइल लेकर कार्यालय पहुंचा तो अधिकारियों ने फोन जब्त कर लिया और बाद में उसे तोड़ दिया।  तालिबान का यह भी मानना है कि कर्मचारी काम करने के बजाय घंटों मोबाइल फोन पर समय बर्बाद करते हैं, जिससे सरकारी कामकाज प्रभावित होता है. हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह समस्या दुनिया के कई देशों में है, लेकिन इसका समाधान स्मार्टफोन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना नहीं है।   

बंगाल की राजनीति में बड़ा उलटफेर, हाई कोर्ट के फैसले के बाद ऋतब्रत को मिली नई जिम्मेदारी

कलकत्ता विधानसभा से लेकर संसद तक बगावत झेल रहीं ममता बनर्जी को अब हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कलकत्ता हाईकोर्ट ने टीएमसी से बागी हुए विधायक ऋतब्रत बनर्जी के विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में मान्यता देने के फैसले पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया है। इससे पहले पार्टी ने यहां विधानसभा स्पीकर रथेंद्र बोस के इस फैसले को चुनौती दी थी। ममता खेमे के विधायक शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने इस सिलसिले में कलकत्ता हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की थी। पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति के मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट ने कोई भी अंतरिम आदेश पास करने से इनकार कर दिया है. हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुसार स्पीकर का फैसला बरकरार रहेगा. तृणमूल कांग्रेस के नेता शोभनदेब चट्टोपाध्याय ने नेता प्रतिपक्ष के तौर पर टीएमसी के बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी की नियुक्ति को चुनौती दी है।   टीएमसी की तरफ से दो नाम नेता प्रतिपक्ष के लिए गए थे. शोभनदेब चट्टोपाध्याय के नाम का प्रस्ताव टीएमसी नेतृत्व के गुट की तरफ से भेजा गया, जबकि पार्टी के बागी विधायकों के गुट ने ऋतब्रत बनर्जी का नाम भेजा, जिसे पश्चिम बंगाल विधानसभा के अध्यक्ष रथींद्र बसु ने स्वीकार किया और उन्हें नेता प्रतिपक्ष नियुक्त कर दिया।  कलकत्ता हाईकोर्ट ने गुरुवार (18 जून, 2026) को शोभनदेब चट्टोपाध्याय की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि वह स्पीकर के फैसले पर कोई अंतरिम आदेश पारित नहीं कर रहा है. जस्टिस कृष्ण राव ने सभी पक्षों को विरोध में हलफनामा दाखिल करने और दो हफ्ते में जवाब देने का निर्देश दिया है. अब अगली सुनवाई 28 जुलाई को होगी।  टीएमसी सांसद और सीनियर एडवोकेट कल्याण बनर्जी ने कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश पर कहा कि कोर्ट ने कोई अंतरिम आदेश पारित नहीं किया है, लेकिन याचिका स्वीकार कर ली है. अब इस मामले में फाइनल हियरिंग होगी।  मंगलवार को सुनवाई के दौरान जस्टिस कृष्ण राव ने पूछा था कि अगर एक ही राजनीतिक दल की तरफ से दो अलग-अलग नामों का प्रस्ताव भेजा जाए, तब अध्यक्ष का कर्तव्य क्या होगा, क्या वह स्वत: संज्ञान लेते हुए फैसला ले सकते हैं या फिर दोनों पक्षों को सुनवाई का अवसर देना आवश्यक होगा. इस पर अध्यक्ष के लिए पेश एडवोकेट बिल्वदल भट्टाचार्य ने दलील दी कि पश्चिम बंगाल विधानसभा परिलब्धियां अधिनियम, 1937 के अनुसार नेता प्रतिपक्ष वही सदस्य होता है जिसे सदन में सबसे अधिक संख्या वाले विपक्षी दल के नेता के रूप में मान्यता प्राप्त हो।  उन्होंने यह भी कहा था कि अगर किसी दल का संख्याबल या उसके नेता को लेकर कोई विवाद होता है, तो उस मामले में अध्यक्ष का फैसला अंतिम और निर्णायक होगा. उधर, विधायकों के फर्जी हस्ताक्षर का मामला भी चर्चा में है, जो नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति से ही जुड़ा है. आरोप है कि टीएमसी सांसद और पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी की तरफ से नेता प्रतिपक्ष के लिए भेजे गए शोभनदेब चट्टोपाध्याय के नाम के प्रस्ताव पर विधायकों के हस्ताक्षर फर्जी हैं।  इसे लेकर सबसे पहले ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने ही सवाल उठाए और शिकायत की, जिसके बाद मामला गरमा गया. विधायकों की शिकायत के बाद विधानसभा सचिव ने एफआईआर दर्ज कराई, जिसके बाद पश्चिम बंगाल क्राइम इंवेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (CID) ने मामले की औपचारिक जांच शुरू की. जिन विधायकों के नाम विवादित दस्तावेजों पर हैं, उनके बयान दर्ज किए जा रहे हैं और हस्ताक्षरों के नमूने भी लिए जा रहे हैं। 

लोक निर्माण विभाग के सचिव ने निर्माणाधीन एवं प्रस्तावित कार्यों की समीक्षा की

लोक निर्माण विभाग के सचिव ने निर्माणाधीन एवं प्रस्तावित कार्यों की समीक्षा की अधिकारियों को फील्ड में जाकर गुणवत्ता और निर्धारित समयावधि में कार्य पूर्णता सुनिश्चित करने के दिए निर्देश रायपुर.   लोक निर्माण विभाग के सचिव  मुकेश कुमार बंसल ने कोरिया जिला मुख्यालय बैकुंठपुर में विभाग के प्रस्तावित एवं निर्माणाधीन कार्यों की समीक्षा की। विधायक श्री भईया लाल राजवाड़े, कलेक्टर श्रीमती रोक्तिमा यादव, लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता श्री वी.के. भतपहरी तथा लोक निर्माण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में मौजूद थे।  लोक निर्माण विभाग के सचिव ने विभागीय अधिकारियों को निर्माणाधीन सड़कों, पुलों और भवनों के कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग करने तथा फील्ड में जाकर कार्य की गुणवत्ता व समय-सीमा में पूर्णता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी निर्माण कार्यों को निर्धारित मानकों के अनुरूप तथा निर्धारित समयावधि में पूर्ण करने को कहा।  विधायक श्री भईया लाल राजवाड़े ने सचिव श्री बंसल को कोरिया जिले की बहुप्रतीक्षित सड़कों और पुलों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इनके निर्माण से जिलेवासियों को बड़ी सुविधा मिलेगी। कलेक्टर श्रीमती रोक्तिमा यादव ने कोरिया जिले और वहां के नागरिकों के लिए प्रस्तावित महत्वपूर्ण सड़कों और पुलों से लोक निर्माण विभाग के सचिव को अवगत कराने के साथ ही विकासखंड मुख्यालय सोनहत में सर्किट हाउस के निर्माण का भी आग्रह किया। श्री बंसल ने विधायक श्री भईया लाल राजवाड़े और कलेक्टर श्रीमती रोक्तिमा यादव द्वारा प्रस्तुत सुझावों व प्रस्तावों पर सकारात्मक सहमति व्यक्त करते हुए संबंधित अधिकारियों को शीघ्र प्राक्कलन तैयार कर शासन को भेजने के निर्देश दिए। उन्होंने भूमि अधिग्रहण एवं मुआवजा प्रक्रिया का विधिवत पालन करते हुए एकीकृत प्राक्कलन शासन को भेजने को कहा, ताकि निविदा प्रक्रिया समय पर प्रारंभ की जा सके।

महिलाओं की स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए बड़ा कदम, ‘स्वस्थ नारी-सशक्त परिवार’ क्लीनिक के तहत नई सुविधा

 चंडीगढ़  हरियाणा में महिलाओं में समय से स्तन कैंसर की जांच के लिए आठ जिला अस्पतालों में फुल-फील्ड डिजिटल मैमोग्राफी (एफएफडीएम) मशीनें लगाई जाएंगी। ‘स्वस्थ नारी-सशक्त परिवार’ क्लीनिक के तहत यह मैमोग्राफी मशीनें पंचकूला, रेवाड़ी, सोनीपत, कुरुक्षेत्र, पानीपत, करनाल और नारनौल के साथ ही गुरुग्राम के सेक्टर-10 स्थित नागरिक अस्पताल में स्थापित की जाएंगी। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य महिलाओं को व्यापक स्तर पर स्क्रीनिंग, जांच, परामर्श, निदान और निवारक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। इसी कड़ी में हरियाणा मेडिकल सर्विसेज कारपोरेशन लिमिटेड के माध्यम से राज्य स्वास्थ्य खरीद एवं क्रय समिति ने 11 फुल-फील्ड डिजिटल मैमोग्राफी मशीनों की खरीद को मंजूरी प्रदान की है। प्रत्येक मशीन की कीमत लगभग 1.18 करोड़ रुपये है। वर्तमान में मैमोग्राफी सेवाएं केवल अंबाला छावनी के उपमंडल नागरिक अस्पताल तथा झज्जर और रोहतक जिलों में उपलब्ध हैं। अब विभिन्न जिलों में स्तन कैंसर की जांच सुविधा उपलब्ध होने से रोग की प्रारंभिक अवस्था में पहचान संभव होगी और उपचार की सफलता दर में वृद्धि होगी। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने पीएम केयर्स योजना के तहत हरियाणा को पांच अतिरिक्त मैमोग्राफी यूनिट आवंटित करने की मंजूरी दी है। राज्य सरकार ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणाली संसाधन केंद्र के माध्यम से नौ मशीनों की मांग भेजी थी, जिसके विरुद्ध पांच मशीनों को स्वीकृति प्रदान की गई है। इन अतिरिक्त मशीनों को रोगियों की संख्या, स्थानीय आवश्यकता और सेवा मांग के आधार पर अन्य जिलों में स्थापित किया जाएगा।