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रेजिडेंसी परमिट को लेकर स्वीडन का बड़ा फैसला, नए कानून से बढ़ी प्रवासियों की चिंता

 स्टॉकहोम  स्वीडन की संसद ने एक नया कानून पारित किया है, जिसके तहत अधिकारियों को प्रवासियों (इमिग्रेंट्स) का रेजिडेंसी परमिट खराब आचरण के आधार पर रद्द करने का अधिकार मिल गया है. इसमें बकाया कर्ज न चुकाना, बिना स्थानीय अधिकारियों को बताए काम करना या चरमपंथी संगठनों से संबंध जैसे कारण शामिल हैं।  ये कानून न केवल लंबित रेजिडेंसी परमिट आवेदनों पर लागू होगा, बल्कि पहले से दिए जा चुके परमिटों की भी समीक्षा कर उन्हें रद्द किया जा सकेगा. यह कदम दक्षिणपंथी सरकार और उसकी सहयोगी राष्ट्रवादी पार्टी स्वीडन डेमोक्रेट्स की सख्त इमिग्रेशन नीति का हिस्सा है. सितंबर में होने वाले संसदीय चुनाव से पहले सरकार लगातार इमिग्रेशन नियमों को कड़ा कर रही है।  नए कानून की हो रही आलोचना हालांकि, विपक्षी दलों और मानवाधिकार संगठनों ने इस कानून की आलोचना की है. उनका कहना है कि यह मनमाना कानून है, क्योंकि इसके तहत ऐसे व्यवहार के आधार पर भी कार्रवाई की जा सकती है जिसे कानूनी रूप से अपराध घोषित नहीं किया गया है।  स्टॉकहोम स्थित मानवाधिकार संगठन सिविल राइट्स डिफेंडर्स ने कहा कि यह 'अच्छे व्यवहार वाला कानून' लोगों के बीच असमंजस पैदा करता है कि उनकी कौन-सी गतिविधि या अभिव्यक्ति उनके खिलाफ इस्तेमाल की जा सकती है. संगठन के अनुसार, इससे कानून के शासन और कानून के समक्ष समानता के सिद्धांत को कमजोर किया जाता है।  2022 का चुनाव इस वादे के साथ जीतने वाली सरकार का कहना है कि जो लोग नियमों का पालन नहीं करते या अपराध करते हैं, उनका देश में स्वागत नहीं है।  कानून में यह साफ नहीं किया गया है कि कौन-कौन से व्यवहार अस्वीकार्य माने जाएंगे. हालांकि सरकार ने संकेत दिया है कि बकाया कर्ज, टैक्स न चुकाना, आपराधिक गतिविधियां और चरमपंथी संगठनों से संबंध ऐसे कारण हो सकते हैं।  इन मामलों की समीक्षा स्वीडिश माइग्रेशन एजेंसी करेगी और उसके फैसलों के खिलाफ माइग्रेशन कोर्ट में अपील की जा सकेगी. मार्च में इस विधेयक को पेश करते समय स्वीडन के आव्रजन मंत्री योहान फोर्शेल ने कहा था, 'जो लोग सही तरीके से रहने की कोशिश नहीं करते, उन्हें यह उम्मीद नहीं करनी चाहिए कि वो स्वीडन में बने रह सकेंगे।   

नौसेना के ‘फ्लाइंग फ्रिगेट’ का युग समाप्त, सी-किंग एमके 42बी स्क्वॉड्रन हुआ रिटायर

नई दिल्ली भारतीय नौसेना ने अपने सबसे भरोसेमंद और शक्तिशाली सी किंग एमके 42बी (Sea King Mk 42B) हेलिकॉप्टर के मुख्य स्क्वाड्रन को आधिकारिक तौर पर रिटायर कर दिया है. तीन दशकों से भी अधिक समय तक भारतीय समुद्री सीमाओं की सुरक्षा करने वाले और नौसैनिक अभियानों की रीढ़ माने जाने वाले इस हेलिकॉप्टर को फ्लाइंग फ्रिगेट यानी उड़ता हुआ युद्धपोत के नाम से जाना जाता था।   मुंबई स्थित नौसैनिक एयर स्टेशन 'आईएनएस शिक्रा' (INS Shikra) पर तैनात आईएनएएस 330 हारपून्स स्क्वाड्रन द्वारा संचालित इस सी किंग बेड़े ने देश की 36 वर्षों तक शानदार सेवा की. अब इसे आधिकारिक तौर पर नंबर-प्लेटेड यानी निष्क्रिय कर दिया गया है।  मुख्य स्क्वाड्रन के हटने के बाद अब नौसेना के पास केवल एक अंतिम सक्रिय सी किंग स्क्वाड्रन बचा है, जिसमें पुराने सी किंग एमके 42सी वेरिएंट के कुछ ही हेलिकॉप्टर बचे हैं, जिनका इस्तेमाल भी आने वाले समय में चरणबद्ध तरीके से बंद कर दिया जाएगा।  क्या रही सी किंग की ऐतिहासिक भूमिका? मुख्य बेड़े की विदाई के बाद बचे हुए कुछ गिने-चुने सी किंग हेलिकॉप्टर्स का संचालन अब विशाखापत्तनम स्थित 'आईएनएस डेगा' पर तैनात आईएनएएस 350 'सारस' स्क्वॉड्रन द्वारा किया जा रहा है. इन हेलिकॉप्टरों को अब मुख्य युद्धक भूमिकाओं से हटाकर प्राथमिक रूप से खोज और बचाव अभियानों तथा विशेष नौसैनिक अभियानों के बैकअप सपोर्ट के काम में लगाया गया है।  अपने गौरवशाली इतिहास में ब्रिटिश-निर्मित सी किंग हेलिकॉप्टरों ने समुद्र में भारत की ताकत का लोहा मनवाया था. यह अकेला ऐसा विमान था जो दुश्मन की पनडुब्बियों को खोजकर नष्ट करने, समुद्री जहाजों पर हमला करने, चौबीसों घंटे समुद्री निगरानी रखने के साथ-साथ गंभीर चक्रवातों और आपदाओं के दौरान मानवीय सहायता व बचाव कार्यों में सबसे आगे रहता था।  बड़े युद्धपोतों पर आसानी से लैंड करने और अत्यधिक घातक हथियारों से लैस होने के कारण ही नौसैनिक इसे 'फ्लाइंग फ्रिगेट' कहते थे।  अमेरिकी 'रोमियो' की एंट्री: एमएच-60आर सीहॉक संभालेंगे देश की कमान सी किंग हेलिकॉप्टरों की इस विदाई का मतलब यह नहीं है कि समुद्र में भारत की नजर कमजोर होगी; बल्कि यह नौसेना के आधुनिक और अधिक घातक रोटरी-विंग प्लेटफॉर्म की ओर बढ़ने का एक बड़ा रणनीतिक कदम है।  इन बूढ़े हो चुके हेलिकॉप्टरों की जगह लेने के लिए भारत ने अमेरिका से अत्याधुनिक एमएच-60आर सीहॉक रोमियो हेलिकॉप्टरों को अपने बेड़े में शामिल करना शुरू कर दिया है. भारत ने अमेरिकी सरकार के साथ एक सरकारी सौदे के तहत कुल 24 एमएच-60आर हेलिकॉप्टरों का ऑर्डर दिया था, जिनमें से 21 हेलिकॉप्टर भारत को मिल चुके हैं।  इन 21 में से 15 रोमियो हेलिकॉप्टर वर्तमान में फ्रंटलाइन युद्धपोतों के साथ पूरी तरह से ऑपरेशनल हैं, जबकि तीन हेलिकॉप्टरों को अमेरिकी जमीन पर ही भारतीय पायलटों और क्रू मेंबर्स की एडवांस ट्रेनिंग के लिए रखा गया है।  बाकी बचे हेलिकॉप्टरों में भारत की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुकूल जरूरी बदलाव और सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया चल रही है, जिसके बाद वे भी मुख्य सेना का हिस्सा बन जाएंगे।  अमेरिकी कंपनी लॉकहीड मार्टिन द्वारा निर्मित एमएच-60आर को दुनिया का सबसे आधुनिक नौसैनिक हेलिकॉप्टर माना जाता है, जो एडवांस सेंसर, एमके-54 टॉरपीडो और एजीएम-114 हेलफायर मिसाइलों से लैस है. इसके आने से हिंद महासागर में चीन की पनडुब्बियों पर नजर रखना भारत के लिए बेहद आसान हो जाएगा। 

6.30 लाख ग्राहकों के लिए खुशखबरी, पोस्ट ऑफिस से निकासी के लिए पासबुक जरूरी नहीं

 रायबरेली  जिले के करीब 6.50 लाख डाकघर खाताधारकों के लिए राहत भरी खबर है। अब पासबुक साथ न होने पर भी आधार कार्ड के माध्यम से मुख्य डाकघर, उपडाकघर और ग्रामीण शाखा डाकघरों से जमा-निकासी की सुविधा मिल सकेगी। इससे विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों के खाताधारकों को बड़ी सहूलियत होगी। डाक विभाग ने अन्य बैंकों की तर्ज पर आधार आधारित लेनदेन एईपीएस (आधार-सक्षम भुगतान प्रणाली) की सुविधा लागू कर दी है। इसके तहत खाताधारक आधार संख्या और बायोमेट्रिक सत्यापन के जरिए अपने खाते से नकदी निकालने के साथ ही धनराशि जमा भी करा सकेंगे। इससे पासबुक खो जाने या साथ न होने की स्थिति में भी बैंकिंग कार्य प्रभावित नहीं होगा। जिले में दो मुख्य डाकघर और 54 उपडाकघर संचालित हैं। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में शाखा डाकघरों के माध्यम से भी यह सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। डाक अधीक्षक अनूप अग्रवाल का कहना है कि 6.50 लाख खाताधारकों को इस सुविधा का लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि आधार आधारित जमा-निकासी प्रणाली पूरी तरह सुरक्षित है और बायोमेट्रिक सत्यापन के बाद ही लेनदेन किया जाएगा।

नैनो यूरिया और नैनो डीएपी से किसान मनोहर यादव की खेती बनी अधिक लाभकारी

रायपुर  छत्तीसगढ़ शासन द्वारा कृषि क्षेत्र में नवाचार और वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयास किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं। जांजगीर-चांपा जिले के नवागढ़ विकासखंड अंतर्गत ग्राम कचंदा निवासी किसान  मनोहर यादव इसकी एक प्रेरणादायक मिसाल हैं। नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के उपयोग से उन्होंने अपनी खेती की लागत कम करने के साथ-साथ उत्पादन और आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि हासिल की है। लगभग दो एकड़ भूमि पर खेती करने वाले  यादव पहले बढ़ती कृषि लागत और उत्पादन की अनिश्चितता से चिंतित रहते थे। कृषि विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन तथा राज्य शासन की किसान हितैषी पहलों से प्रेरित होकर उन्होंने पारंपरिक खेती के साथ आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने का निर्णय लिया और अपनी फसलों में नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी का प्रयोग शुरू किया। नई तकनीक के परिणाम शीघ्र ही सामने आने लगे। नैनो उर्वरकों के उपयोग से फसलों को संतुलित पोषण मिला, जिससे पौधों की वृद्धि बेहतर हुई और उत्पादन में वृद्धि दर्ज की गई। साथ ही उर्वरकों पर होने वाला खर्च भी कम हुआ, जिससे खेती की लागत नियंत्रित करने में मदद मिली। कम मात्रा में अधिक प्रभावी साबित होने वाले नैनो उर्वरकों ने उनकी खेती को पहले की तुलना में अधिक लाभकारी बना दिया है।  मनोहर यादव बताते हैं कि नैनो उर्वरकों का परिवहन और उपयोग बेहद सरल है, जिससे समय और श्रम दोनों की बचत होती है। बेहतर गुणवत्ता वाली फसल और बढ़ी हुई पैदावार का सीधा लाभ उनकी आय में वृद्धि के रूप में मिला है। उन्होंने अन्य किसानों से भी आधुनिक कृषि तकनीकों और वैज्ञानिक खेती को अपनाने की अपील करते हुए कहा कि बदलते समय के साथ नवाचार आधारित खेती ही समृद्धि का मार्ग है। उनका मानना है कि नई तकनीकों और कृषि विभाग के मार्गदर्शन का लाभ उठाकर किसान कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त कर अपनी आर्थिक स्थिति को सशक्त बना सकते हैं।

राखी के त्योहार पर ग्रहण की छाया, क्या बदलेगा रक्षाबंधन मनाने का तरीका?

इंदौर  रक्षाबंधन का पावन पर्व इस बार 28 अगस्त दिन शुक्रवार को सावन पूर्णिमा के दिन मनाया जाएगा. लेकिन इस दिन साल 2026 का अंतिम चंद्र ग्रहण भी लगने वाला है. यह ग्रहण कुंभ राशि और शतभिषा नक्षत्र में घटित होने वाला है. ऐसे में रक्षाबंधन के पर्व को लेकर लोगों के मन में बड़ा सवाल आ रहा है कि जब रक्षाबंधन के दिन चंद्र ग्रहण लग रहा है तो क्या राखी बांधने को लेकर नियम और तिथि बदल जाएगी. ज्योतिषीय और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण के दौरान कई शुभ कार्यों से परहेज करने की सलाह दी जाती है, लेकिन इसकी मान्यता ग्रहण की दृश्यता पर भी निर्भर करती है. आइए जानते हैं रक्षाबंधन के दिन चंद्र ग्रहण होने से क्या राखी बांधने में कोई बाधा आएगी… इस समय लगेगा चंद्र ग्रहण भारतीय समय के अनुसार, रक्षाबंधन के दिन लगने वाले चंद्र ग्रहण की शुरुआत सुबह 6 बजकर 53 मिनट से होगी और दोपहर 12 बजकर 32 मिनट को ग्रहण का समापन होगा. ग्रहण की कुल अवधि लगभग 5 घंटे 39 मिनट बताई जा रही है और यह एक गहरा आंशिक ग्रहण होगा. इस दौरान चंद्रमा का बड़ा पृथ्वी की छाया में ढक जाएगा. इस दौरान चंद्रमा गहरा लाल या तांबे के रंग जैसा नजर आएगा, इसी वजह से इसे ब्लड मून भी कहा जाएगा. यह ग्रहण अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका, प्रशांत महासागर और अटलांटिक महासागर में पूरी तरह दिखाई देने वाला है।  इस राशि और नक्षत्र में लग रहा है चंद्र ग्रहण ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, रक्षाबंधन के दिन लगने वाला चंद्र ग्रहण कुंभ राशि और शतभिषा नक्षत्र में घटित होने वाला है. हालांकि, ग्रहण से जुड़े नियमों का पालन करने वाले कुछ लोग ग्रहण काल के दौरान भोजन ना करने, गर्भवती महिलाओं को घर पर रहने की सलाह, मंत्र जाप करने और भगवान का स्मरण करने जैसी परंपराओं का पालन करते हैं. लेकिन जहां ग्रहण दिखाई नहीं देता, वहां इन नियमों को अनिवार्य नहीं माना जाता।  किस राशि और नक्षत्र में लगेगा ग्रहण ज्योतिषीय नजरिए से देखा जाए, तो यह ग्रहण कुंभ राशि और शतभिषा नक्षत्र में होगा, जिससे यह इस राशि के जातकों के लिए खास रूप से महत्वपूर्ण है। हालांकि ग्रहण का असल प्रभाव हर व्यक्ति की कुंडली के मुताबिक भिन्न होता है, जिसका मतलब है कि, इसका प्रभाव सार्वभौमिक नहीं है। रक्षा बंधन पर चंद्र ग्रहण का प्रभाव विशेषज्ञों के मुताबिक, साल का दूसरा चंद्र ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, ग्रहण का असर सिर्फ उन्हीं हिस्सों में पड़ता है, जहां इसे देखा जा सकता है। इसलिए ग्रहण के दौरान अशुभ माने जाने वाला सूतक काल भी भारत में लागू नहीं होगा। इसका मतलब है कि रक्षा बंधन बिना किसी बाधा के मनाया जा सकता है। बहनें अपने भाइयों को शुभ अवसर पर राखी बांध सकती हैं। हालांकि भाद्र काल में राखी बांधने से सावधान रहने की जरूरत है, क्योंकि यह काल राखी के लिए काफी अशुभ माना जाता है। साल का दूसरा चंद्र कहां दिखाई देगा? साल का दूसरा चंद्र ग्रहण मुख्य रूप से अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका और प्रशांत एवं अटलांटिक महासागरों के आसपास के हिस्सों में दिखाई दे सकता है। इन स्थानों पर दर्शक चंद्रमा को एक अलग रंग में देखेंगे, जिससे इस खगोलीय घटना का आकर्षण और भी बढ़ जाएगा। कुल मिलाकर इस साल रक्षा बंधन पर चंद्र ग्रहण का साया रहने वाला है, लेकिन भारत में यह नहीं दिखाई देगा इसलिए इसके नकारात्मक प्रभाव मान्य नहीं होंगे। इस तरह भाई-बहन का त्योहार खुलकर मनाया जा सकेगा। भारत में दिखाई नहीं देगा चंद्र ग्रहण ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि इस बार लगने वाला चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा. ऐसे में देश के अधिकांश हिस्सों में रक्षाबंधन के पर्व पर ग्रहण का कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं माना जाएगा. बहनें शुभ मुहूर्त में अपने भाइयों को राखी बांध सकेंगी और पर्व की पारंपरिक रस्में सामान्य रूप से संपन्न की जा सकेंगी. चूंकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा इसलिए इस ग्रहण का सूतक काल भी मान्य नहीं होगा. जानकारी के लिए बता दें कि चंद्र ग्रहण का सूतक काल ग्रहण से लगभग 9 घंटे पहले शुरू हो जाता है।  श्रद्धालु अनावश्यक भ्रम से बचें रक्षाबंधन के दिन चंद्रग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा. ऐसे में आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है, बिना किसी संशय के आप भाई-बहन के इस पावन पर्व को मनाएं. लेकिन भद्राकाल का ध्यान जरूर रखें क्योंकि भद्रा के समय राखी बांधना अशुभ माना जाता है. रक्षाबंधन भाई-बहन के अटूट प्रेम और विश्वास का प्रतीक माना जाता है. इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उनके सुख, समृद्धि और लंबी आयु की कामना करती हैं, जबकि भाई उनकी रक्षा का संकल्प लेते हैं. ऐसे में ग्रहण को लेकर फैली शंकाओं के बीच विद्वानों का कहना है कि श्रद्धालुओं को अनावश्यक भ्रम से बचना चाहिए। 

पेंशनर्स के परिवारों को राहत, फैमिली पेंशन के लिए नया खाता खोलने की जरूरत नहीं

नई दिल्ली  केंद्रीय पेंशनभोगियों और उनके जीवनसाथी के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और राहत भरी खबर है. पेंशन और पेंशनभोगी कल्याण विभाग (DoPPW) तथा भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियमों के अनुसार, मुख्य पेंशनभोगी के निधन के बाद उनके पति या पत्नी के साथ चल रहा जॉइंट बैंक अकाउंट बंद नहीं किया जाएगा. इसके साथ ही, फैमिली पेंशन शुरू कराने के लिए जीवित जीवनसाथी को कोई भी नया सिंगल बैंक अकाउंट खोलने की आवश्यकता नहीं होगी. सरकार के इस कदम का मुख्य उद्देश्य संकट की घड़ी में बुजुर्गों को बैंकों की लंबी कागजी कार्रवाई और चक्कर काटने से बचाना है।  क्या है नया नियम और व्यवस्था? पेंशन विभाग और बैंकिंग नियमों के मुताबिक, यदि पेंशनभोगी का अपने जीवनसाथी के साथ "आइदर और सर्वाइवर" (Either or Survivor) या "फॉर्मर और सर्वाइवर" मोड में संयुक्त खाता है, तो पेंशनभोगी की मृत्यु के बाद उसी खाते में फैमिली पेंशन ट्रांसफर की जाएगी. बैंक इस मौजूदा जॉइंट अकाउंट को ही सिंगल अकाउंट में परिवर्तित कर देगा. इसके लिए पूरी बैंकिंग प्रक्रिया को नए सिरे से दोहराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है।  फैमिली पेंशन शुरू कराने की आसान प्रक्रिया पेंशनभोगी के निधन के बाद परिवार को सबसे पहले संबंधित बैंक शाखा को सूचित करना होगा. इसके लिए जीवनसाथी को केवल निम्नलिखित दस्तावेज जमा करने होंगे:     मृत्यु प्रमाण पत्र: पेंशनभोगी के निधन की आधिकारिक पुष्टि के लिए.     PPO की कॉपी: यदि पीपीओ में पति/पत्नी का नाम फैमिली पेंशन के लिए पहले से दर्ज है, तो काम बेहद आसान हो जाता है।      साधारण आवेदन पत्र और KYC: बैंक खाते का स्टेटस अपडेट करने के लिए एक साधारण फॉर्म और पहचान पत्र।  इन दस्तावेजों को जमा करते ही बैंक केंद्रीय पेंशन प्रसंस्करण केंद्र (CPPC) को सूचना भेजेगा और उसी खाते में फैमिली पेंशन क्रेडिट होना शुरू हो जाएगी. इस प्रक्रिया में जीवित पति/पत्नी को 'फॉर्म 14' भरने की भी जरूरत नहीं पड़ती।  देरी से बचने के लिए अभी करें ये काम विशेषज्ञों के अनुसार, अक्सर फैमिली पेंशन में देरी नियमों की वजह से नहीं, बल्कि दस्तावेजों में कमियों के कारण होती है. इसलिए पेंशनभोगियों को समय रहते ये कदम उठाने चाहिए: नाम की स्पेलिंग जांचें: सुनिश्चित करें कि पीपीओ, आधार कार्ड, पैन कार्ड और बैंक खाते में जीवनसाथी के नाम की स्पेलिंग बिल्कुल एक जैसी हो।  KYC अपडेट रखें: बैंक खाते का नो-योर-कस्टमर (KYC) रिकॉर्ड हमेशा अपडेटेड रखें ताकि खाता कभी फ्रीज न हो।  जॉइंट अकाउंट मोड: यदि खाता जॉइंट नहीं है, तो उसे तुरंत 'आइदर या सर्वाइवर' मोड में बदलवा लें। 

काकोली घोष दस्तीदार का बड़ा राजनीतिक कदम, NCPI की कमान संभाली; NDA में एंट्री की तैयारी

कोलकाता तृणमूल कांग्रेस (TMC) से बगावत करने वाले सांसदों ने दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता से बचने के लिए एक बड़ा 'मास्टरस्ट्रोक' चला है। 20 बागी टीएमसी सांसदों ने नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय कर लिया है और अब इस पार्टी की कमान पूरी तरह से अपने हाथों में ले ली है। कभी टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी की बेहद करीबी मानी जाने वालीं और इस बगावत का प्रमुख चेहरा बनीं काकोली घोष दस्तीदार को NCPI का नया अध्यक्ष चुन लिया गया है। कैसे हुआ यह 'तख्तापलट'? सूत्रों के मुताबिक, बागी गुट और NCPI के बीच एक आपसी सहमति से यह टेकओवर हुआ है। काकोली घोष की ताजपोशी से ठीक दो दिन पहले NCPI की तत्कालीन अध्यक्ष शेवली कुंडू ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद 30 मई को चार बार की सांसद काकोली घोष दस्तीदार को आधिकारिक तौर पर इस पार्टी (NCPI) का अध्यक्ष चुन लिया गया। रविवार को 20 बागी सांसदों के गुट ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की और उन्हें इस अनजान पार्टी के साथ अपने विलय की आधिकारिक जानकारी दी, जिसके बाद से यह पार्टी रातों-रात राष्ट्रीय सुर्खियों में आ गई है। अभिषेक बनर्जी से नाराजगी बनी बगावत की वजह टीएमसी के भीतर मचे इस घमासान की असल जड़ ममता बनर्जी के भतीजे और पार्टी के अघोषित उत्तराधिकारी अभिषेक बनर्जी को माना जा रहा है। बागी सांसदों का आरोप है कि अभिषेक बनर्जी का रवैया बेहद 'अहंकारी' है और उन्होंने पार्टी के आंतरिक ढांचे को पूरी तरह दरकिनार कर दिया है। इसी कथित मनमानी के चलते सांसदों में गुस्सा पनपा, जो अंततः इस बड़ी बगावत में तब्दील हो गया। बीजेपी नेताओं का मिला परदे के पीछे से साथ इस पूरे घटनाक्रम में बीजेपी आधिकारिक तौर पर तो कुछ नहीं कह रही है, लेकिन बागी सांसदों को उसका पूरा सहयोग मिला है। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी, केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और अनुभवी सांसद निशिकांत दुबे ने बागी गुट के साथ लगातार चर्चा कर उनकी आगे की रणनीति तय करने में अहम भूमिका निभाई। बागी सांसदों की कई अहम बैठकें सीधे केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर ही हुईं। NDA में शामिल होने की अपील रविवार को स्पीकर ओम बिरला को दिए गए विलय के पत्र में इन 20 सांसदों ने खुद को बीजेपी के नेतृत्व वाले NDA का हिस्सा बताया है। उन्होंने मांग की है कि चूंकि अब तक वे टीएमसी के साथ विपक्ष में बैठते थे, इसलिए अब उन्हें सत्ताधारी गठबंधन (NDA) के साथ सीटें आवंटित की जाएं। क्या है NCPI (नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया)? NCPI को जनवरी 2023 में एक राजनीतिक दल के तौर पर मान्यता मिली थी। चुनाव आयोग के रिकॉर्ड में इसका पता पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले के सांकराइल का है। यह पार्टी चुनाव आयोग में रजिस्टर्ड 2000 से अधिक गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों (RUPPs) में से एक है। साल 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में इस पार्टी ने 4 उम्मीदवार उतारे थे, जिनमें से एक उम्मीदवार को सबसे ज्यादा महज 536 वोट ही मिल सके थे। सुदीप बंद्योपाध्याय भी बागियों के साथ छह बार के सांसद और बागियों में सबसे वरिष्ठ सदस्य सुदीप बंद्योपाध्याय भी कुछ दिन पहले ही इस गुट में शामिल हो गए हैं। उन्होंने यह कदम काकोली घोष के NCPI के 'राजनीतिक मामलों की समिति' द्वारा अध्यक्ष चुने जाने के बाद उठाया। आगे क्या होगा? अगर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला इस विलय को अपनी मंजूरी दे देते हैं, तो यह भारतीय राजनीति का एक बड़ा उलटफेर होगा। कल तक संसद या किसी भी राज्य विधानसभा में एक भी सदस्य न रखने वाली पार्टी NCPI रातों-रात लोकसभा की 5वीं सबसे बड़ी पार्टी और सत्ताधारी NDA का दूसरा सबसे बड़ा दल बन जाएगी।

खजराना गणेश मंदिर के लिए फाइनल हुआ खास डिजाइन, 5 प्रतिमाओं को पहनाए जाएंगे स्वर्ण मुकुट

इंदौर  विश्व प्रसिद्ध इंदौर के खजराना गणेश मंदिर में श्रद्धालु लगातार दिल खोलकर दान कर रहे हैं. दानपेटियों में नगदी के अलावा सोना-चांदी भी भक्त दान कर रहे हैं. इसके अलावा कई भक्त मंदिर प्रबंधन समिति को सीधा सोना दान कर रहे हैं. ये स्वर्ण दान उस अभियान में कारगर साबित होने वाला है, जिसके तहत गर्भगृह में भगवान गणेश के साथ ही रिद्धि-सिद्धि भी स्वर्ण मुकुट धारण करेंगी. इसके अलावा गर्भगृह में शुभ और लाभ की प्रतिमाओं को भी सोने का मुकुट सुशोभित किया जाएगा।  स्वर्ण मुकुट अभियान: अभी ढाई किलो सोना और चाहिए अभी तक खजराना मंदिर प्रबंधन समिति को करीब साढ़े 5 किलो सोना दान में मिल चुका है. टारगेट 8 किलो सोना जुटाने का है. इस सोने से 5 स्वर्ण मुकुट बनाए जाने हैं. 3 दिन पहले ही एक श्रद्धालु ने दो तोला सोना भगवान गणेश को अर्पित किया है. अभी 5 स्वर्ण मुकुट बनाने के लिए करीब ढाई किलो सोने की और जरूरत है. अभी खजराना गणेश को 1 किलो सोने का मुकुट तिल चतुर्थी, गणेश चतुर्थी पर पहनाया जाता है. योजना के अनुसार नए मुकुट के साथ एक किलो का स्वर्ण छत्र, मां रिद्धि-सिद्धि के मुकुट 600-600 ग्राम के नए के बनेंगे. लाभ-शुभ के मुकुट 100-100 ग्राम के नए बनवाए जाएंगे।  श्रद्धालु दानपेटी में अर्पित करते हैं सोने की ज्वैलरी खजराना गणेश मंदिर में पूरे देश से श्रद्धालु पहुंचते हैं और अपनी श्रद्धा के अनुसार यहां दान करते हैं. विदेश में रहने वाले बप्पा के भक्त भी दानराशि भेजते हैं. हाल ही में दान पेटियां जब खोली गईं और काउंटिंग की गई तो ये राशि करीब 1.78 करोड़ निकली. दान पेटियों में सोना, चांदी, हीरे जड़े आभूषण भी मिले. नगद राशि को मंदिर के विकास में इस्तेमाल किया जाता है. भक्तों के लिए सुविधाए विकसित की जाती हैं।  दानपेटी और प्रत्यक्ष रूप से मिले सोने को सहेजकर रखा जाता है, क्योंकि इसी सोने से स्वर्ण मुकुट बनने हैं. गणेश चतुर्थी पर खजराना गणेश मंदिर में भगवान गणपति का 5 करोड़ के गहनों से श्रृंगार किया गया. सिर पर हीरे मोती से जड़ा सोने का मुकुट धारण किए हुए खजराना गणेश सुसज्जित हुए, बप्पा का मनमोहक श्रृंगार देख भक्त भावविभोर हो गए थे।  सोने के रेट बढ़ने का असर भी दिखा हालांकि बीते एक से डेढ़ साल के अंदर सोने के बेतहाशा बढ़ते रेट के कारण दान में कुछ कमी आई है. लेकिन इसके बाद भी भक्तों के साथ ही मंदिर प्रबंधन समिति को भरोसा है कि 8 किलो सोना इकट्ठा करने का टारगेट बहुत जल्द पूरा होगा. खजराना गणेश मंदिर के पंडित अशोक भट्ट बताते हैं "गर्भगृह स्थित भगवान गणेश महाराज के साथ ही रिद्धि, सिद्धि, शुभ और लाभ की प्रतिमाओं के लिए नए स्वर्ण मुकुट तैयार करने की प्लानिंग है. स्वर्ण मुकुट की स्पेशल डिजाइन तैयार हो चुकी है. इस काम के लिए लक्ष्य के अनुसार कुल 8 किलो सोना चाहिए।  डेढ़ हजार लोगों को रोजाना मुफ्त भोजन खजराना गणेश मंदिर में आने वाली दानराशि का इस्तेमाल केवल मंदिर के विस्तार व विकास के लिए नहीं होता बल्कि यहां अन्न क्षेत्र में रोजाना करीब डेढ़ हजार लोगों को मुफ्त में भोजन कराया जाता है. इसके साथ ही गरीब व असहाय लोगों के इलाज पर राशि खर्च की जाती है. इस कार्य में पूरा इंदौर शहर साथ देता है। 

ग्लोबल मार्केट में निवेश करने वालों के लिए खुशखबरी, ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म्स को मिली हरी झंडी

मुंबई  विदेश के शेयर बाजारों में निवेश करने की चाहत रखते हैं तो ये खबर आपके लिए है। दरअसल, भारत के चार बड़े रिटेल ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म जेरोधा, ग्रो, एंजल वन और Upstox को GIFT सिटी के जरिए अंतरराष्ट्रीय और अमेरिकी शेयरों में निवेश की सुविधा शुरू करने की मंजूरी मिल गई है। इन कंपनियों को इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर्स अथॉरिटी (IFSCA) से जरूरी मंजूरी मिली है। बता दें कि IFSCA, GIFT सिटी के इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर (IFSC) में काम करने वाले फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स, सेवाओं और संस्थानों के लिए रेगुलेटर है। कब से शुरू होगी सुविधा? मनीकंट्रोल की एक खबर के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय और अमेरिकी शेयरों में निवेश की सुविधा अगले दो से तीन महीनों में शुरू होने की उम्मीद है। जानकारी के मुताबिक ब्रोकरेज कंपनियां टेक्नोलॉजी इंटीग्रेशन, टेस्टिंग और कंप्लायंस की प्रक्रियाएं पूरी कर रही हैं। इसी के साथ ये ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म उन कंपनियों की लिस्ट में शामिल हो जाएंगे जो GIFT सिटी के जरिए विदेशी इक्विटी में निवेश की सुविधा देती हैं। रिपोर्ट के अनुसार जेरोधा और Upstox ब्रोकर-डीलर के तौर पर काम करेंगे जबकि ग्रो और एंजेल वन ग्लोबल एक्सेस प्रोवाइडर (GAP) फ्रेमवर्क के तहत यह सेवा देंगे। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जेरोधा और Upstox के विदेशी पार्टनर्स – जैसे ViewTrade इंटरनेशनल, Interactive ब्रोकर्स और Alpaca सिक्योरिटीज के जरिए ट्रेड करने की उम्मीद है। धन को मिल चुकी है मंजूरी ये मंजूरी धन (Dhan) द्वारा US स्टॉक में निवेश की सुविधा शुरू करने के कुछ दिनों बाद मिली है, जो यह दिखाता है कि भारतीय निवेशकों को ग्लोबल मार्केट तक एक्सेस देने में ब्रोकरेज फर्मों की दिलचस्पी बढ़ रही है। ब्रोकरेज कंपनियां अगले कुछ महीनों में इसे लॉन्च करने की तैयारी कर रही हैं। बता दें कि स्मॉलकेस, INDmoney और HDFC सिक्योरिटीज जैसे कई प्लेटफॉर्म पहले से ही अलग-अलग तरीकों से अंतरराष्ट्रीय स्टॉक तक एक्सेस दे रहे हैं। अब जेरोधा, ग्रो, एंजल वन और Upstox के आने से रिटेल निवेशकों की विदेशी बाजारों तक एक्सेस और बढ़ सकती है। बता दें कि हाल के वर्षों में अंतरराष्ट्रीय निवेश की मांग बढ़ी है क्योंकि भारतीय निवेशक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक वाहन और स्पेस टेक्नोलॉजी जैसे सेक्टर में निवेश करना चाहते हैं। GIFT सिटी क्या है? गुजरात में स्थित GIFT सिटी भारत के इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर का घर है, जो एक खास फाइनेंशियल जो है और इसे सीमा-पार फाइनेंशियल सेवाओं और ट्रांजैक्शन को आसान बनाने के लिए बनाया गया है। विदेशी सिक्योरिटीज तक एक्सेस बढ़ाने के लिए IFSCA ने ग्लोबल एक्सेस प्रोवाइडर (GAP) फ्रेमवर्क शुरू किया है। इसके तहत, GIFT सिटी से काम करने वाली रेगुलेटेड कंपनियां निवेशकों को भारत-आधारित रेगुलेटरी स्ट्रक्चर के जरिए विदेशी स्टॉक, दूसरी अंतरराष्ट्रीय सिक्योरिटीज तक एक्सेस दे सकती हैं।

एक दिन, तीन बड़े मैच! अफगानिस्तान से भिड़ेगी टीम इंडिया, महिला विश्व कप का भी होगा रोमांच

नई दिल्ली भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों के लिए 17 जून बेहद व्यस्त और रोमांच से भरपूर रहने वाला है। खास बात यह है कि टीम इंडिया की तीन अलग-अलग टीमें एक ही दिन अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेलती नजर आएंगी। सुबह श्रीलंका में भारत A की चुनौती होगी, दोपहर में सीनियर पुरुष टीम अफगानिस्तान से भिड़ेगी और शाम होते-होते महिला टीम टी20 विश्व कप में जीत का सिलसिला आगे बढ़ाने के इरादे से मैदान में उतरेगी। ऐसे में क्रिकेट प्रेमियों को पूरे दिन टीवी स्क्रीन से नजरें हटाने का मौका शायद ही मिले। भारत A के लिए ‘करो या मरो’ का मुकाबला सबसे पहले एक्शन की शुरुआत श्रीलंका से होगी, जहां तिलक वर्मा की कप्तानी में भारत A टीम त्रिकोणीय सीरीज (Team India) खेल रही है। भारतीय टीम ने टूर्नामेंट की शुरुआत जीत के साथ की थी, लेकिन इसके बाद अफगानिस्तान A से हार और श्रीलंका A के खिलाफ सुपर ओवर में मिली शिकस्त ने फाइनल की राह मुश्किल बना दी है। अब भारत A के सामने अफगानिस्तान A के खिलाफ जीत दर्ज करना बेहद जरूरी हो गया है। यह मुकाबला दांबुला के रंगीरी दांबुला इंटरनेशनल स्टेडियम में खेला जाएगा और भारतीय समयानुसार सुबह 10 बजे शुरू होगा। इस मैच का परिणाम तय करेगा कि भारत A फाइनल की दौड़ में बना रहेगा या नहीं। शुभमन गिल की अगुआई में सीरीज जीतने का मौका इसके बाद नजरें लखनऊ के इकाना स्टेडियम पर टिकेंगी, जहां भारत और अफगानिस्तान की सीनियर टीमें तीन मैचों की वनडे सीरीज के दूसरे मुकाबले में आमने-सामने होंगी। पहले वनडे में टीम इंडिया ने शानदार प्रदर्शन करते हुए बढ़त हासिल की थी और अब शुभमन गिल की कप्तानी वाली टीम की कोशिश होगी कि दूसरा मुकाबला जीतकर सीरीज अपने नाम कर ली जाए। यह मुकाबला दोपहर 1:30 बजे शुरू होगा। चूंकि यह 50 ओवर का मैच है, इसलिए क्रिकेट प्रेमियों को देर शाम तक रोमांच देखने को मिलेगा। महिला विश्व कप में नीदरलैंड्स से होगी भिड़ंत दिन का तीसरा मुकाबला आईसीसी महिला टी20 विश्व कप 2026 में खेला जाएगा। हरमनप्रीत कौर की कप्तानी में भारतीय महिला टीम ने अपने पहले मुकाबले में पाकिस्तान को हराकर शानदार शुरुआत की थी। अब अगली चुनौती नीदरलैंड्स की है। इंग्लैंड के हेडिंग्ले मैदान पर होने वाला यह मुकाबला भारतीय समयानुसार शाम 7 बजे शुरू होगा। भारत की कोशिश लगातार दूसरी जीत दर्ज कर सेमीफाइनल की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाने की होगी। दिलचस्प बात यह है कि शाम के समय कुछ घंटों के लिए भारतीय पुरुष और महिला टीमों (Team India) के मुकाबले एक साथ चलते दिखाई देंगे। जहां एक ओर सीनियर पुरुष टीम वनडे मैच के अंतिम चरण में होगी, वहीं दूसरी ओर महिला टीम टी20 विश्व कप में अपनी चुनौती पेश कर रही होगी। ऐसे में क्रिकेट फैंस को चैनल बदलने की कड़ी परीक्षा भी देनी पड़ सकती है। 17 जून का पूरा मैच शेड्यूल मुकाबला                                                       टूर्नामेंट                             स्थान                    भारतीय समय भारत A बनाम अफगानिस्तान A           श्रीलंका त्रिकोणीय सीरीज                दांबुला, श्रीलंका           सुबह 10:00 बजे भारत बनाम अफगानिस्तान (दूसरा वनडे)     अफगानिस्तान का भारत दौरा     लखनऊ                      दोपहर 1:30 बजे भारत महिला बनाम नीदरलैंड्स महिला     ICC महिला टी20 विश्व कप 2026     हेडिंग्ले, इंग्लैंड            शाम 7:00 बजे सुबह की शुरुआत युवा खिलाड़ियों के संघर्ष से होगी, दोपहर में सीनियर टीम सीरीज जीतने उतरेगी और रात में महिला टीम विश्व कप अभियान को मजबूती देने की कोशिश करेगी। एक ही दिन तीन भारतीय टीमों का मैदान पर उतरना बेहद दुर्लभ अवसर होता है। ऐसे में 17 जून भारतीय क्रिकेट कैलेंडर के सबसे व्यस्त और रोमांचक दिनों में से एक साबित हो सकता है।