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छत्तीसगढ़ में श्रम आधारित उद्योगों से बढ़ेंगे रोजगार के अवसर, CM विष्णु देव साय का बयान

छत्तीसगढ़ में श्रम आधारित उद्योगों को बढ़ावा देकर युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित कर रही सरकार : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने नवा रायपुर में यश फैन्स एंड एप्लायंसेस लिमिटेड की नई औद्योगिक इकाई का किया भूमिपूजन 150 करोड़ रुपए से अधिक के निवेश से स्थापित होगी इकाई, साढ़े तीन हजार से अधिक लोगों को मिलेगा प्रत्यक्ष रोजगार मुख्यमंत्री साय ने नवचयनित युवाओं को प्रदान किए नियुक्ति पत्र, उज्ज्वल भविष्य की दी शुभकामनाएं नई औद्योगिक नीति से निवेश को मिली गति, प्रदेश को मिले साढ़े आठ लाख करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्ताव उद्योगों की स्थापना और संचालन को सुगम बनाने के लिए 279 प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने की विशेष पहल निवेश के साथ बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन नई औद्योगिक नीति का प्रमुख लक्ष्य : वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी प्रदेश में तीन हजार से अधिक उद्योग स्थापित, 50 हजार से अधिक लोगों को मिला रोजगार : उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन रायपुर  छत्तीसगढ़ में औद्योगिक विकास का लाभ प्रदेश के युवाओं तक रोजगार और आर्थिक अवसरों के रूप में पहुंचे, यह राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इसी उद्देश्य से नई औद्योगिक विकास नीति में ऐसे श्रम आधारित उद्योगों को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है, जिनमें अपेक्षाकृत कम पूंजी निवेश के साथ बड़ी संख्या में रोजगार सृजित करने की क्षमता है। राज्य सरकार का लक्ष्य केवल निवेश आकर्षित करना नहीं, बल्कि निवेश को रोजगार, स्थानीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और प्रदेश की समृद्धि का माध्यम बनाना है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज नवा रायपुर में यश फैन्स एंड एप्लायंसेस लिमिटेड की प्रस्तावित नई औद्योगिक इकाई के भूमिपूजन समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही।  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि यश फैन्स एंड एप्लायंसेस लिमिटेड की नई इकाई छत्तीसगढ़ की औद्योगिक विकास यात्रा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इस परियोजना में 150 करोड़ रुपए से अधिक का निवेश प्रस्तावित है और इससे साढ़े तीन हजार से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। इस इकाई में विभिन्न प्रतिष्ठित कंपनियों के लिए उत्पादों का निर्माण किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस परियोजना की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन है। हमारी सरकार चाहती है कि छत्तीसगढ़ में ऐसे उद्योग अधिक से अधिक स्थापित हों, जो प्रदेश के युवाओं और महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराएं। जब युवाओं को अपने ही प्रदेश में कौशल और क्षमता के अनुरूप रोजगार मिलेगा तो उनके परिवार आर्थिक रूप से सशक्त होंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी। मुख्यमंत्री साय ने कार्यक्रम के दौरान नवचयनित युवाओं को नियुक्ति पत्र प्रदान किए और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि युवाओं के हाथ में नियुक्ति पत्र देना किसी भी औद्योगिक निवेश की सबसे सार्थक उपलब्धि है। एक रोजगार केवल एक व्यक्ति को आत्मनिर्भर नहीं बनाता, बल्कि पूरे परिवार के जीवन में आर्थिक सुरक्षा और नई उम्मीद लेकर आता है। मुख्यमंत्री ने युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर तैयार करने की पहल के लिए यश ग्रुप की सराहना की। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत-2047 के संकल्प में छत्तीसगढ़ अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तेजी से आगे बढ़ रहा है। विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन, कौशल विकास और आधुनिक अधोसंरचना के विस्तार पर एक साथ काम किया जा रहा है। प्रदेश में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों, ऊर्जा, कुशल मानव संसाधन और बेहतर कनेक्टिविटी का लाभ उठाकर छत्तीसगढ़ को देश के प्रमुख औद्योगिक और निवेश केंद्रों में स्थापित करने की दिशा में सरकार निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने नई औद्योगिक विकास नीति 2024–2030 में रोजगार सृजन करने वाले उद्योगों के लिए विशेष प्रोत्साहन का प्रावधान किया है। नीति तैयार करते समय इस बात पर विशेष ध्यान दिया गया है कि प्रदेश में आने वाला निवेश स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अधिक से अधिक अवसर पैदा करे। टेक्सटाइल, फूड प्रोसेसिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा और अन्य श्रम आधारित क्षेत्रों में निवेश को प्रोत्साहित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में निवेश के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने के साथ ही उद्योग लगाने और संचालित करने की प्रक्रियाओं को सरल बनाया जा रहा है। उद्यमियों को अनावश्यक प्रक्रियाओं और जटिलताओं से मुक्ति दिलाने के लिए लगातार सुधार किए गए हैं। जन विश्वास से जुड़े सुधारों के अंतर्गत 279 प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने की विशेष पहल की गई है। विभिन्न अनुमतियों और स्वीकृतियों की प्रक्रिया को सरल एवं समयबद्ध बनाया जा रहा है, ताकि निवेश प्रस्ताव तेजी से धरातल पर उतरें और उत्पादन तथा रोजगार सृजन शीघ्र प्रारंभ हो सके। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की नई औद्योगिक विकास नीति को देश-विदेश के निवेशकों से उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली है। प्रदेश को साढ़े आठ लाख करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। अब सरकार का विशेष जोर इन निवेश प्रस्तावों को तेजी से धरातल पर उतारने पर है। निवेशकों को परियोजनाओं की स्थापना से लेकर संचालन तक हर स्तर पर आवश्यक सहयोग दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में औद्योगिक विकास की नई संभावनाएं आकार ले रही हैं। सरकार की प्राथमिकता है कि औद्योगिकीकरण का विस्तार केवल कुछ क्षेत्रों तक सीमित न रहे, बल्कि प्रदेश के अलग-अलग अंचलों तक पहुंचे। स्थानीय संसाधनों पर आधारित उद्योगों के विकास से क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और युवाओं को अपने क्षेत्र में ही रोजगार एवं स्वरोजगार के बेहतर अवसर मिलेंगे। मुख्यमंत्री साय ने विश्वास व्यक्त किया कि यश ग्रुप की यह नई इकाई नवा रायपुर और आसपास के क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों को गति देने के साथ रोजगार के नए अवसर भी सृजित करेगी। उन्होंने कंपनी प्रबंधन को राज्य सरकार की ओर से हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाते हुए कहा कि परियोजना समयबद्ध रूप से पूर्ण हो और शीघ्र उत्पादन प्रारंभ करे, इसके लिए संबंधित विभाग आवश्यक समन्वय और सहयोग सुनिश्चित करेंगे। वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ की औद्योगिक नीति की सोच में महत्वपूर्ण बदलाव आया है। अब निवेश का मूल्यांकन केवल निवेश की राशि से नहीं, बल्कि उससे उत्पन्न होने … Read more

‘अराजकता फैलाकर सत्ता हासिल करना चाहती हैं कुछ शक्तियां’, मुख्यमंत्री योगी का बड़ा बयान

अराजकता फैलाकर सत्ता हथियाने का सपना देख रही शक्तियां: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री योगी ने एक्स पर पोस्ट कर साधा निशाना, कहा- लोकतंत्र में सत्ता का रास्ता जनादेश से निकलता है, अराजकता से नहीं बांग्लादेश की तर्ज पर भारत में सत्ता परिवर्तन का स्वप्न देखने वालों पर प्रहार, युवाओं को अराजकता का औजार बनाने की कोशिश चुनाव सुधार और न्याय के नाम पर देश में अस्थिरता के बीज बोने का आरोप, कहा- षड्यंत्रों के अंधड़ से नहीं हिलेगा भारतीय लोकतंत्र सत्ता की भूख मिटाने के लिए नहीं, राष्ट्र निर्माण के लिए है युवाशक्ति, अराजकता की सियासी साजिश नहीं होने देंगे सफल राजनीति के मारीचों-कालनेमियों को जनता पहले ही सत्ता से कर चुकी है दूर, अब अराजकता फैलाकर कुर्सी हथियाने की कोशिश लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देश में अराजकता फैलाकर सत्ता परिवर्तन का सपना देखने वाली शक्तियों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता का मार्ग जनादेश से निकलता है, अराजकता से नहीं। बांग्लादेश की तर्ज पर भारत में सत्ता परिवर्तन का स्वप्न देखने वाली शक्तियां युवाओं को राष्ट्र निर्माण के बजाय अराजकता की ओर धकेलना चाहती हैं। चुनाव सुधार का मुखौटा लगाकर, न्याय का नारा देकर और लोकतंत्र की दुहाई देकर देश में अस्थिरता के बीज बोने की कोशिश हो रही है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत का लोकतंत्र जनविश्वास की मजबूत जड़ों पर खड़ा है। इसे किसी षड्यंत्र से हिलाया नहीं जा सकता। मुख्यमंत्री योगी ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर देश में राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने की कोशिशों पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा कि बांग्लादेश की तर्ज पर भारत में सत्ता परिवर्तन का स्वप्न देखने वाली शक्तियां युवाओं के हाथों में राष्ट्र निर्माण की मशाल के स्थान पर अराजकता के औजार थमाना चाहती हैं। उनका इशारा उन शक्तियों की ओर था, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया के बजाय अराजकता के सहारे सत्ता तक पहुंचने का सपना देख रही हैं। चुनाव सुधार का मुखौटा लगाकर अस्थिरता फैलाने की कोशिश मुख्यमंत्री ने चुनाव सुधार, न्याय और लोकतंत्र के नाम पर देश में अस्थिरता पैदा करने की कोशिशों को लेकर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि चुनाव सुधार का मुखौटा, न्याय का नारा और लोकतंत्र की दुहाई देकर देश में अस्थिरता के बीज बोने वालों को समझना होगा कि भारत का लोकतंत्र जनविश्वास की जड़ों पर खड़ा विशाल वटवृक्ष है। षड्यंत्रों के अंधड़ उसे हिला नहीं सकते। मुख्यमंत्री का संदेश था कि सत्ता परिवर्तन का एकमात्र लोकतांत्रिक रास्ता जनता का जनादेश है, न कि अराजकता का सहारा लेना। राष्ट्र निर्माण के लिए है युवाशक्ति, सत्ता की भूख मिटाने के लिए नहीं मुख्यमंत्री योगी ने युवाओं को अराजकता की राजनीति में इस्तेमाल करने की कोशिशों पर भी प्रहार किया। उन्होंने कहा कि भारत की युवाशक्ति देश का भविष्य संवारने के लिए है, किसी की सत्ता की भूख मिटाने के लिए नहीं। राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका को रेखांकित करते हुए उन्होंने उन शक्तियों पर निशाना साधा, जो अपने राजनीतिक उद्देश्यों के लिए युवाओं को अराजकता का औजार बनाना चाहती हैं। मारीचों-कालनेमियों को पहचान चुकी है जनता मुख्यमंत्री ने अपने पोस्ट में राजनीतिक विरोधियों के लिए मारीच और कालनेमि का उल्लेख करते हुए तीखा कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि जनता-जनार्दन ने राजनीति के इन मारीचों-कालनेमियों को पहचानकर ही सत्ता से दूर रखा है। अब ये देश को अराजकता की आग में झोंककर कुर्सी हथियाना चाहते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश ऐसी किसी भी सियासी साजिश को सफल नहीं होने देगा।

योगी सरकार की पहल से बालिकाओं में आत्मसम्मान, स्वास्थ्य जागरूकता और निर्णय लेने की क्षमता विकसित करने पर जोर

सेल्फ एस्टीम कार्यक्रम के माध्यम से बालिकाओं को आत्मविश्वास और आत्मसम्मान का दिया गया प्रशिक्षण सरकारी अस्पताल में पर्चा बनवाने से लेकर चिकित्सकीय परामर्श और विभिन्न जांचों की प्रक्रिया से कराया गया परिचित स्वास्थ्य सेवाओं की व्यावहारिक जानकारी से बालिकाओं को जागरूक और सक्षम बनाने की पहल लखनऊ बालिकाओं को आत्मविश्वास से भरने, उनमें आत्मसम्मान की भावना विकसित करने और स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति जागरूक बनाने की दिशा में उत्तर प्रदेश में महत्वपूर्ण पहल की गई है। प्रदेश के प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, कम्पोजिट विद्यालयों और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों (केजीबीवी) की 1,29,227 बालिकाओं ने सेल्फ एस्टीम कार्यक्रम पर आधारित प्रशिक्षण में प्रतिभाग किया। कार्यक्रम के तहत छात्राओं को आत्मसम्मान और व्यक्तित्व विकास से जुड़ी जानकारी देने के साथ सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त करने की व्यावहारिक प्रक्रिया भी समझाई गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बालिकाओं की शिक्षा और उनके समग्र विकास को लेकर किए जा रहे प्रयासों के क्रम में यह कार्यक्रम छात्राओं को जीवनोपयोगी जानकारी से जोड़ने की दिशा में अहम है। बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह के निर्देशन में संचालित विभागीय गतिविधियों के तहत बालिकाओं को शिक्षा के साथ अपने स्वास्थ्य और व्यक्तिगत जरूरतों के प्रति जागरूक बनाने पर जोर दिया जा रहा है। आत्मसम्मान और आत्मविश्वास विकसित करने पर जोर सेल्फ एस्टीम कार्यक्रम का केंद्र बालिकाओं में आत्मसम्मान की भावना को प्रोत्साहित करना और उन्हें अपनी क्षमताओं को पहचानने के लिए प्रेरित करना है। प्रशिक्षण के माध्यम से छात्राओं को स्वयं के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण रखने और दैनिक जीवन में आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने के महत्व से परिचित कराया गया। इस तरह की गतिविधियां बालिकाओं को केवल शैक्षिक ज्ञान तक सीमित न रखकर व्यावहारिक जीवन की आवश्यकताओं के प्रति भी जागरूक बनाने का अवसर प्रदान करती हैं। अस्पताल भ्रमण से समझीं स्वास्थ्य सेवाओं की प्रक्रिया कार्यक्रम की एक महत्वपूर्ण विशेषता बालिकाओं को सरकारी अस्पतालों की कार्यप्रणाली से परिचित कराना रही। छात्राओं को अस्पताल भ्रमण के दौरान पर्चा बनवाने, संबंधित डॉक्टर को दिखाने और विभिन्न प्रकार की चिकित्सकीय जांच करवाने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी गई। इस गतिविधि के जरिए बालिकाओं को समझाया गया कि स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकता होने पर सरकारी अस्पताल में किस प्रकार पंजीकरण कराया जाता है, चिकित्सक से परामर्श कैसे लिया जाता है और जांच की प्रक्रिया किस तरह पूरी होती है। स्वास्थ्य सेवाओं की यह व्यावहारिक जानकारी छात्राओं को जरूरत पड़ने पर उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं तक पहुंचने की प्रक्रिया समझने में मदद कर सकती है। 1.29 लाख से अधिक बालिकाओं की भागीदारी प्रदेश के विभिन्न प्रकार के विद्यालयों की 1,29,227 बालिकाओं की सहभागिता कार्यक्रम के व्यापक दायरे को दर्शाती है। प्राथमिक से लेकर उच्च प्राथमिक और कम्पोजिट विद्यालयों के साथ केजीबीवी की छात्राओं को शामिल कर प्रशिक्षण को विभिन्न शैक्षिक स्तरों तक पहुंचाया गया। बालिकाओं में आत्मसम्मान, स्वास्थ्य जागरूकता और व्यावहारिक जीवन कौशल को बढ़ावा देने वाली ऐसी पहलें शिक्षा को जीवन से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। सेल्फ एस्टीम प्रशिक्षण और अस्पताल भ्रमण के माध्यम से छात्राओं को स्वयं के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने तथा स्वास्थ्य सेवाओं की प्रक्रिया समझने का अवसर मिला। यह पहल बालिकाओं के व्यक्तित्व विकास और उन्हें अधिक जागरूक बनाने की दिशा में उपयोगी कदम है। बालिकाओं में आत्मविश्वास, आत्मसम्मान और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता विकसित करना हमारी प्राथमिकता है। सेल्फ एस्टीम कार्यक्रम उन्हें जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए अधिक जागरूक और सक्षम बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। संदीप सिंह, राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार), बेसिक शिक्षा 1,29,227 बालिकाओं की सहभागिता वाले इस कार्यक्रम में छात्राओं को आत्मसम्मान के साथ सरकारी अस्पतालों में पंजीकरण, चिकित्सकीय परामर्श और विभिन्न जांचों की प्रक्रिया की व्यावहारिक जानकारी दी गई, ताकि वे स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति जागरूक बन सकें। मोनिका रानी, महानिदेशक, स्कूल शिक्षा

आगर मालवा में पुलिसकर्मी ने मौके पर दिया सीपीआर

डायल-112 की तत्परता से सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को समय पर मिली मदद भोपाल मध्यप्रदेश पुलिस की डायल-112 सेवा आपात परिस्थितियों में त्वरित पुलिस सहायता के साथ जरूरतमंदों को समय पर प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। आगर मालवा जिले में सड़क दुर्घटना की सूचना मिलते ही डायल-112 की एफआरवी तत्काल मौके पर पहुंची, जहां एएसआई श्री विजय बड़गोत्या ने दुर्घटना में घायल व्यक्ति को तत्काल सीपीआर एवं प्राथमिक उपचार दिया। इसके बाद पुलिस टीम ने घायल को डायल-112 वाहन से ही शासकीय चिकित्सालय पहुंचाया, जहां उसका उपचार प्रारंभ किया गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार, नलखेड़ा निवासी सुनील स्कूटी से नलखेड़ा से आगर की ओर जा रहे थे। चामड़दा फंटे के पास अज्ञात वाहन ने उनकी स्कूटी को टक्कर मार दी। दुर्घटना में वे स्कूटी सहित सड़क किनारे झाड़ियों में जा गिरे और घायल हो गए। दुर्घटना की सूचना प्राप्त होते ही डायल-112 की एफआरवी तत्काल घटनास्थल पर पहुंची। घायल की स्थिति को देखते हुए एएसआई श्री विजय बड़गोत्या ने तत्काल सीपीआर एवं प्राथमिक उपचार प्रदान किया। इसके बाद चालक श्री जीवन यादव की सहायता से घायल को डायल-112 वाहन से ही शासकीय चिकित्सालय पहुंचाया। पुलिस टीम द्वारा घायल के परिजनों को भी दुर्घटना की सूचना दी गई। सीपीआर प्रशिक्षण से आपात स्थिति में त्वरित सहायता देने में सक्षम हो रहे पुलिसकर्मी मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा पुलिसकर्मियों को आपात परिस्थितियों में त्वरित सहायता उपलब्ध कराने के लिए सीपीआर एवं प्राथमिक उपचार का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। आगर मालवा में हुई इस दुर्घटना में एएसआई श्री विजय बड़गोत्या द्वारा प्रशिक्षण का उपयोग करते हुए घायल को तत्काल सीपीआर देना और डायल-112 के माध्यम से अस्पताल पहुंचाना इसी प्रशिक्षण और तत्परता का प्रत्यक्ष उदाहरण है। मध्यप्रदेश पुलिस आम नागरिकों से अपील करती है कि सड़क दुर्घटना, स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थिति अथवा किसी अन्य संकट की स्थिति में नागरिक तत्काल डायल-112 पर सूचना दें।  

राखीगढ़ी में सात दिवसीय महोत्सव की तैयारियां तेज, हेरिटेज वॉक और सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे आयोजित

नारनौल  राखीगढ़ी महोत्सव 19 से 25 अक्तूबर तक आयोजित होगा। यह सात दिवसीय महोत्सव इतिहास, पुरातत्व, शिक्षा, ग्रामीण जीवन और हरियाणवी लोक संस्कृति का संगम होगा। महोत्सव की तैयारियों ने जोर पकड़ लिया है। पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग के निदेशक अमित खत्री ने वीरवार को डीसी राहुल नरवाल के साथ संबंधित विभागों के अधिकारियों की बैठक ली। राखीगढ़ी स्थित पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में हुई बैठक में तैयारियों की समीक्षा की गई। अधिकारियों को सभी व्यवस्थाएं निर्धारित समय सीमा में पूरी करने के निर्देश दिए गए। इसका उद्देश्य पर्यटकों, विद्यार्थियों और शोधार्थियों को किसी प्रकार की परेशानी से बचाना है। महोत्सव के दौरान हड़प्पा सभ्यता से संबंधित प्रदर्शनी और हेरिटेज वॉक आयोजित होगी। शैक्षणिक गतिविधियां, प्रश्नोत्तरी और चित्रकला प्रतियोगिताएं भी इसमें शामिल होंगी। इनसे विद्यार्थियों और युवा पीढ़ी को राखीगढ़ी के ऐतिहासिक महत्व से परिचित कराया जाएगा। स्थानीय कला और पर्यटन को बढ़ावा ग्रामीण खेलों और हरियाणवी लोक संस्कृति पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होंगे। स्थानीय कारीगरों, स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण उद्यमियों को अपने उत्पाद प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा। इससे स्थानीय हस्तशिल्प और ग्रामीण उत्पादों को बढ़ावा मिलेगा, साथ ही क्षेत्र में पर्यटन को प्रोत्साहन मिलेगा। बैठक में निदेशक अमित खत्री ने साफ-सफाई, पेयजल, सुरक्षा और यातायात प्रबंधन पर चर्चा की। डीसी राहुल नरवाल ने विभिन्न विभागों को सौंपी गई जिम्मेदारियों की जानकारी दी।  

‘मुख्यमंत्री योगी ने बढ़ाया गन्ने का मूल्य, सपा ने किए खोखले वादे’… पंकज चौधरी ने अखिलेश को घेरा

'सपा राज में गन्ना किसानों को भुगतान के लिए करना पड़ता था आंदोलन'… दयाशंकर सिंह का अखिलेश पर हमला '2027 में हार का डर, इसलिए चुनाव आयोग पर निशाना साध रहे अखिलेश'… दयाशंकर सिंह का सपा पर तीखा प्रहार 'पश्चिम में सनातन धर्म और जाटों के अपमान का खामियाजा भुगतेगी सपा':दयाशंकर सिंह 'पिछड़ों-दलितों का सपा में कोई सम्मान नहीं', संजय निषाद का अखिलेश पर हमला 'किसानों के मुद्दे पर जितना बोलेंगे, उतना फंसेंगे'… संजय निषाद ने अखिलेश को दी नसीहत लखनऊ समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के गन्ना किसानों, PDA और चुनाव आयोग को लेकर दिए गए बयान पर NDA नेताओं ने तीखा पलटवार किया है। केंद्रीय मंत्री और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री दयाशंकर सिंह और संजय निषाद ने अलग-अलग मुद्दों पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव को घेरा। पंकज चौधरी ने कहा कि पूरा प्रदेश सपा की किसान विरोधी सोच से वाकिफ है। दयाशंकर सिंह ने कहा कि अखिलेश यादव को 2027 में हार का डर सता रहा है, इसीलिए वो अभी से चुनाव आयोग पर निशाना साध रहे हैं। वहीं, संजय निषाद ने कहा कि अखिलेश यादव की पार्टी में पिछड़ों और दलितों का कोई सम्मान नहीं है। 'सपा राज में गन्ना किसानों को भुगतान के लिए आंदोलन करना पड़ता था' भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने कहा कि योगी आदित्यनाथ ने किसानों के लिए काम करके दिखाया है। उन्होंने कई बार गन्ने का मूल्य बढ़ाया है, जबकि सपा सरकार के दौरान किसानों से केवल खोखले वादे किए जाते थे। वहीं, कैबिनेट मंत्री दयाशंकर सिंह ने कहा कि समाजवादी पार्टी के शासनकाल में गन्ना किसान सबसे ज्यादा परेशान थे और उन्हें भुगतान के लिए आंदोलन करना पड़ता था। उन्होंने कहा कि आज गन्ना किसानों को समय पर भुगतान मिल रहा है। दयाशंकर सिंह ने कहा कि सपा ने पश्चिमी यूपी में जिस तरह से जाटों का अपमान किया है। हिंदुओं के साथ अत्याचार किया है। उसका खामियाजा उसे 2027 के विधानसभा चुनाव में भुगतना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि सपा सरकार में मुजफ्फरनगर में हुए दंगे को कोई सनातनी नहीं भूला है। पश्चिम में और पूरे प्रदेश में सपा का सफाया निश्चित है। कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने कहा कि आज सपा के नेता किसानों की बात कर रहे हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि सपा सरकार के समय के लंबित भुगतान भी मौजूदा सरकार में किए गए थे। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अखिलेश यादव किसानों के मुद्दे पर जितना अधिक बोलेंगे, उतना ही फंसते जाएंगे। 'पिछड़ों-दलितों का सपा में कोई सम्मान नहीं' संजय निषाद ने कहा कि पिछड़े और दलित पहले सपा के साथ जुड़े थे, लेकिन अखिलेश यादव की नजर में उनका कोई सम्मान नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा केवल एक ही जाति और धर्म को महत्व देती है। इसी वजह से अब पिछड़े और दलित सपा से दूर हो गए हैं। संजय निषाद ने कहा कि भाजपा ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ के सिद्धांत पर चलती है।

मध्यप्रदेश में मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण का कार्यक्रम

भोपाल भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश अनुसार मध्यप्रदेश में 1 जनवरी 2027 की अर्हता तिथि के आधार पर मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण की समय-सारणी निर्धारित की गई है। मध्यप्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी श्री संजीव कुमार झा ने आयोग के निर्देश अनुसार प्रदेश के सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को तदानुसार कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। प्रमुख तिथियाँ ▪ 2 नवंबर 2026 तक: मतदान केंद्रों का युक्तिकरण एवं पुनर्व्यवस्थापन ▪ 12 नवंबर 2026: प्रारूप मतदाता सूची का प्रकाशन ▪ 12 नवंबर – 11 दिसंबर 2026: दावे एवं आपत्तियाँ प्रस्तुत करने की अवधि ▪ 28 दिसंबर 2026 तक: दावे एवं आपत्तियों का निराकरण ▪ 4 जनवरी 2027: अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन इस प्रक्रिया के अंतर्गत मतदाता सूची का पुनरीक्षण निर्धारित समय-सारणी के अनुसार किया जाएगा।  

बी.फार्मा और एम.फार्मा डिग्रीधारियों को राहत, दूसरे सरकारी पदों के लिए बनेगी तीन सदस्यीय समिति

पटना  बिहार के सरकारी अस्पतालों में नियुक्ति के लिए बी.फार्मा, एम.फार्मा व फार्मा-डी डिग्रीधारियों के धरना-प्रदर्शन के बाद स्वास्थ्य विभाग ने मंगलवार को स्थिति स्पष्ट कर दी है। संयुक्त सचिव दिनेश कुमार झा द्वारा जारी पत्र के अनुसार, अस्पतालों में फार्मासिस्ट पद पर नियुक्ति की शर्तों में कोई बदलाव नहीं होगा। वहीं, बी.फार्मा, एम.फार्मा व फार्मा-डी डिग्रीधारियों की उपयोगिता को देखते हुए उन्हें दूसरे सरकारी पदों पर नियुक्त करने, पद सृजन और वेतन निर्धारण के लिए एक तीन सदस्यीय टीम बनाई गई है। स्वास्थ्य विभाग के विशेष सचिव डॉ. त्यागराजन एसएम को इस समिति का अध्यक्ष, ओएसडी रेणु कुमारी व राज्य औषधि नियंत्रक नित्यानंद किसलय को सदस्य बनाया गया है। इसके साथ ही अस्पतालों में फार्मासिस्टों के रिक्त 1600 से अधिक पदों पर नियुक्ति के लिए अनिवार्य अर्हता का रास्ता साफ हो गया है। स्वास्थ्य विभाग ने 13 अक्टूबर को जारी आदेश में बिहार फार्मासिस्ट संवर्ग नियमावली, 2014 और संशोधन नियमावली, 2024 के प्रावधानों को स्पष्ट किया है। इसके अनुसार, फार्मासिस्ट के मूल पद पर नियुक्ति के लिए डी.फार्मा उत्तीर्ण होने के साथ-साथ बिहार फार्मेसी काउंसिल में पंजीकरण अनिवार्य है। बी.फार्मा व एम.फार्मा उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को भी इस पद पर नियुक्ति के लिए डी.फार्मा की योग्यता पूरी करनी होगी। विभाग ने इस संबंध में 16 जनवरी 2026 को सर्वोच्च न्यायालय की ओर से एसएलपी (सी) संख्या 12236/2025, मोहम्मद फिरोज मंसूरी एवं अन्य बनाम बिहार राज्य एवं अन्य मामले में पारित आदेश का उल्लेख किया है। अब माना जा रहा है कि 2016 से डिप्लोमा फार्मासिस्ट व बी.फार्मा डिग्रीधारियों के बीच फार्मासिस्ट पद पर भर्ती की योग्यता को लेकर चल रही खींचतान की स्थिति स्पष्ट हो गई है। बी.फार्मा डिग्रीधारी, फार्मासिस्ट पद की योग्यता में अपनी डिग्री को शामिल करने की मांग कर रहे थे। वहीं, डिप्लोमा फार्मासिस्ट संगठन भर्ती नियमावली के अनुरूप डी.फार्मा योग्यताधारियों की बहाली की मांग कर रहा था। बी.फार्मा के लिए कहां खुलेंगे रोजगार के रास्ते: तीन सदस्यीय समिति वर्तमान में उपलब्ध अवसरों की समीक्षा करने के साथ यह आकलन करेगी कि बी.फार्मा डिग्रीधारियों के लिए कितने पदों की जरूरत है। इन पदों का सृजन किन-किन कार्यालयों में किया जा सकता है और उनके लिए वेतन स्तर व पदसोपान क्या होना चाहिए। समिति की अनुशंसा के बाद आगे की कार्रवाई का रास्ता स्पष्ट होगा। बी.फार्मा व एम.फार्मा के लिए पहले से कई संवर्ग: डिप्लोमा फार्मासिस्ट ऑर्गेनाइजेशन छात्र संघ के प्रदेश अध्यक्ष अरविंद कुमार चौधरी ने बताया कि बी.फार्मा व एम.फार्मा डिग्रीधारियों के लिए प्रदेश में पहले से अलग-अलग संवर्गों में नियुक्ति के अवसर उपलब्ध हैं। बिहार राज्य औषधि नियंत्रण संवर्ग नियमावली 2014 और बिहार औषधि नियंत्रण प्रयोगशाला तकनीकी कर्मी संवर्ग नियमावली 2019 के तहत औषधि निरीक्षक, गवर्नमेंट एनालिस्ट, असिस्टेंट बैक्टीरियोलॉजिस्ट और साइंटिफिक असिस्टेंट जैसे पदों पर इनकी नियुक्ति की जाती है। इसके अतिरिक्त सरकारी फार्मेसी कॉलेजों में सहायक प्राध्यापक के पदों पर भी इन्हीं की नियुक्ति होती है। संगठन ने विभाग का आभार जताते हुए शेष रिक्त पदों पर जल्द बहाली के लिए विज्ञापन प्रकाशित करने की मांग की है।  

1.74 लाख से अधिक विद्यालयों को मिली तीन स्टार या उससे अधिक की रेटिंग, 31 अक्टूबर तक होगा भौतिक सत्यापन

प्रत्येक मूल्यांकनकर्ता को अधिकतम 15 से 25 विद्यालयों की जिम्मेदारी लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश के विद्यालयों को स्वच्छ, हरित और पर्यावरण-अनुकूल शिक्षण परिवेश के रूप में विकसित करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में स्वच्छ एवं हरित विद्यालय रेटिंग (SHVR) 2026-27 के अंतर्गत प्रदेश के 1,88,301 विद्यालयों ने स्व-मूल्यांकन सर्वेक्षण पूरा कर पोर्टल पर जमा किया है। इनमें 1,74,754 विद्यालयों ने तीन स्टार या उससे अधिक की रेटिंग प्राप्त की है। अब दूसरे चरण में विद्यालयों की व्यवस्थाओं का भौतिक सत्यापन किया जाएगा, जिसे 31 अक्टूबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। विद्यालयों में स्वच्छता, स्वास्थ्यकर वातावरण और पर्यावरण के प्रति जागरूकता को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से संचालित एसएचवीआर (SHVR) के अंतर्गत मूल्यांकन की प्रक्रिया दो चरणों में निर्धारित है। पहले चरण में विद्यालयों ने निर्धारित प्रश्नावली के आधार पर अपनी व्यवस्थाओं का स्व-मूल्यांकन किया। अब दूसरे चरण में इस विवरण का जमीनी स्तर पर सत्यापन किया जाएगा, जिससे पोर्टल पर दर्ज सूचनाओं और विद्यालयों की वास्तविक स्थिति का मिलान हो सके। ज्ञात हो कि प्रदेश के 1,88,301 विद्यालयों का स्वमूल्यांकन पूरा होना इस अभियान का महत्वपूर्ण पड़ाव है। अब 31 अक्टूबर तक सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद विद्यालयों में स्वच्छता और हरित परिवेश से संबंधित व्यवस्थाओं का अधिक विश्वसनीय आकलन सामने आएगा। राज्य सरकार की विद्यालयी परिवेश को बेहतर बनाने की प्राथमिकताओं के अनुरूप यह पहल स्वच्छता, पर्यावरणीय चेतना और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण वातावरण को प्रोत्साहित करने में सहायक होगी। जिलास्तरीय समितियों की निगरानी में होगा सत्यापन दूसरे चरण की प्रक्रिया को समयबद्ध ढंग से पूरा करने के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किए गए। निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार जिलास्तर पर मूल्यांकन समितियों के माध्यम से सत्यापन कार्य की निगरानी की जाएगी। समिति की अध्यक्षता जिलाधिकारी अथवा उनके नामित अधिकारी द्वारा की जाएगी। इसमें शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ जलापूर्ति, स्वास्थ्य और अन्य संबंधित विभागों के प्रतिनिधियों तथा निर्धारित मानकों के अनुरूप विशेषज्ञों एवं नागरिक समाज के प्रतिनिधियों की सहभागिता का प्रावधान है। इस व्यवस्था के माध्यम से विद्यालयों में उपलब्ध सुविधाओं और स्व-मूल्यांकन में दर्ज विवरण की जांच की जाएगी। इससे मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ाने के साथ विद्यालयों की वास्तविक स्थिति का आकलन करने में सहायता मिलेगी। विभिन्न विभागों के पात्र कार्मिक बनेंगे मूल्यांकनकर्ता सत्यापन कार्य के लिए डायट (DIET) प्रशिक्षुओं, अकादमिक रिसोर्स पर्सन (ARP), स्टेट रिसोर्स ग्रुप (SRG), शिक्षक संकुल और संबंधित विभागों के पात्र मैदानी कार्मिकों की सेवाएं ली जा सकती हैं। निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार पंचायती राज, राजस्व, मनरेगा, बाल विकास एवं पुष्टाहार और स्वास्थ्य विभाग से जुड़े पात्र कार्मिकों तथा स्वयंसेवकों को भी इस प्रक्रिया में शामिल किया जा सकता है। मूल्यांकनकर्ताओं को एसएचवीआर प्रश्नावली की जानकारी होना आवश्यक है। इसके साथ एंड्रॉयड मोबाइल फोन, सक्रिय मोबाइल नंबर और ई-मेल जैसी आवश्यक शर्तें भी निर्धारित की गई हैं। कार्य को व्यवस्थित ढंग से पूरा करने के लिए प्रत्येक मूल्यांकनकर्ता को अधिकतम 15 से 25 विद्यालय आवंटित किए जाने का प्रावधान है। विद्यालयों की भौगोलिक निकटता और क्लस्टर को प्राथमिकता देकर सत्यापन प्रक्रिया को सुचारु बनाने पर जोर दिया गया है। बेहतर विद्यालयी परिवेश के आकलन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम स्वच्छ एवं हरित विद्यालय रेटिंग का उद्देश्य विद्यालयों में स्वच्छता, स्वास्थ्यकर वातावरण और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार व्यवहार को प्रोत्साहित करना है। दूसरे चरण का भौतिक सत्यापन इस प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है, क्योंकि इससे विद्यालयों की व्यवस्थाओं का आकलन वास्तविक परिस्थितियों के आधार पर किया जा सकेगा। स्वच्छ एवं हरित विद्यालय रेटिंग के माध्यम से प्रदेश के विद्यालयों में स्वच्छता, स्वास्थ्यकर वातावरण और पर्यावरणीय चेतना को प्रोत्साहित किया जा रहा है। दूसरे चरण में भौतिक सत्यापन से विद्यालयों की वास्तविक स्थिति का आकलन होगा और मूल्यांकन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी एवं विश्वसनीय बनेगी। — मोनिका रानी, महानिदेशक, स्कूल शिक्षा, उत्तर प्रदेश

इंदौर में 28 अक्टूबर को आयोजित होगा राज्य स्तरीय अर्बन कॉन्क्लेव

नगरीय विकास के साथ जल संरक्षण एवं उपचारित जल के पुनः उपयोग पर होगा वृहद मंथन उपचारित प्रयुक्त जल पुनर्चक्रण पर होगी चर्चा भोपाल मध्यप्रदेश में सुनियोजित नगरीय विकास की नवीन संभावनाओं, निवेश प्रोत्साहन तथा आधुनिक शहरी अधोसंरचना को गति देने के उद्देश्य से आगामी 28 अक्टूबर को इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में राज्य स्तरीय 'अर्बन कॉन्क्लेव-2026' का आयोजन किया जाएगा। कॉनक्लेव में प्रदेश के भावी शहरों की प्राथमिकताओं एवं आवश्यकताओं, डिजिटल गवर्नेंस, ग्रीन सिटी अवधारणा तथा पर्यावरण-अनुकूल सतत् विकास जैसे विषयों पर विषय-विशेषज्ञों और नीति-निर्माताओं द्वारा गहन विचार-विमर्श किया जाएगा। शहरी क्षेत्रों में जल राशि के सुदृढ़ एवं वैज्ञानिक प्रबंधन तथा प्रयुक्त जल के पुनः चक्रण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कॉन्क्लेव में उपचारित प्रयुक्त जल पुनर्चक्रण विजन पर भी चर्चा होगी ।इसका मुख्य ध्येय उपचारित जल का सुरक्षित एवं व्यापक उपयोग सुनिश्चित कर प्राकृतिक व ताजे जल स्रोतों पर बढ़ती निर्भरता को कम करना तथा जल संरक्षण को नगरीय विकास की मुख्यधारा का अनिवार्य अंग बनाना है। इसके अंतर्गत औद्योगिक इकाइयों, निर्माण कार्यों, कृषि एवं उद्यानों की सिंचाई सहित विभिन्न गैर-पेयजल आवश्यकताओं में उपचारित जल के उपयोग को प्राथमिकता देने और प्रोत्साहित करने के सुदृढ़ प्रावधान जैसे विषयों पर भी मंथन होगा। अर्बन कॉन्क्लेव-2026 में सहभागिता हेतु इच्छुक प्रतिभागी, निवेशक, विषय-विशेषज्ञ, उद्यमी एवं युवा आधिकारिक पोर्टल https://ugconclave.mp.gov.in/ पर जाकर अपना ऑनलाइन पंजीयन (Registration) करा सकते हैं।