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मनरेगा भुगतान प्रक्रिया में तेजी लाने को राज्य स्तर पर प्रशिक्षण आयोजित

मनरेगा भुगतान प्रक्रिया में तेजी लाने को राज्य स्तर पर प्रशिक्षण आयोजित मनरेगा मजदूरी के समय पर भुगतान के लिये अधिकारियों को दिया गया प्रशिक्षण भोपाल महात्मा गांधी नरेगा अंतर्गत त्वरित भुगतान प्रणाली पर जिला एवं जनपदों पंचायतों में कार्यरत समस्त लेखाधिकारी एवं सहायक लेखाधिकारियों का एक दिवसीय राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम विकास भवन के सभागार में मंगलवार को हुआ। प्रशिक्षण कार्यक्रम में मनरेगा आयुक्त  अवि प्रसाद ने सभी प्रशिक्षणार्थियों को SNA-SPARSH के साथ ही मनरेगा के सारे तकनीकी पहलुओं को सीखने के सुझाव देते हुए भुगतान में पारदर्शिता अपनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह प्रणाली रियल-टाइम ट्रैकिंग की सुविधा प्रदान करती है। जिससे फंड के उपयोग पर नजर रखी जा सके। प्रशिक्षण में विषय विशेषज्ञों/मास्टर ट्रेनर्स द्वारा "SNA SPARSH" के विभिन्न तकनीकी पहलुओं एवं बारीकियों पर प्रशिक्षणार्थियों को गहन प्रशिक्षण प्रदान किया गया। उल्लेखनीय है कि SNA SPARSH एक डिजिटल प्रणाली है जो केंद्र सरकार द्वारा विभिन्न राज्यों में संचालित की जा रही है, जिसमें मनरेगा समेत कई केंद्रीय योजनाओं के तहत फंड ट्रांसफर किया जाता है। यह प्रणाली फंड के दुरुपयोग को रोकने और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए डिज़ाइन की गई है। SNA स्पर्श के माध्यम से फंड सीधे लाभार्थी के खाते में ट्रांसफर किया जाता है, जिससे फंड के दुरुपयोग की संभावना कम होती है। SNA SPARSH प्रणाली फंड को आवश्यकतानुसार रिलीज करने में मदद करता है, जिससे फंड के अनावश्यक रूप से खातों में पड़े रहने की समस्या का समाधान होता है।  

मंत्री शुक्ला का ऐलान: नॉलेज पार्टनरशिप के नए अवसरों की होगी खोज

सिंगापुर के काउंसलेट्स ने नवकरणीय ऊर्जा मंत्री से की भेंट भोपाल नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री  राकेश शुक्ला ने कहा कि सिंगापुर से नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में नॉलेज पार्टनरशिप की संभावनाओं को गंभीरतापूर्वक तलाशा जायेगा। उन्होंने यह बात सिंगापुर के काउंसलेट्स से मंत्रालय में हुई मुलाकात में कही। ऊर्जा विकास निगम के एमडी  अमनबीर सिंह बैंस ने मध्यप्रदेश में नवकरणीय ऊर्जा उत्पादन की वर्तमान स्थिति से मंत्रालय में सिंगापुर के प्रतिनिधि मण्डल को अवगत कराया। प्रतिनिधि मण्डल में काउंसल जनरल  मिंग फुंग चेंग, पॉलिटिकल काउंसल  जेरोम वोंग ली वाई और रिसर्च एण्ड इन्फार्मेशन एनॉलिस्ट सु रिद्धि कोठावले शामिल थीं। नवकरणीय ऊर्जा मंत्री  शुक्ला ने सिंगापुर के प्रतिनिधि मण्डल के साथ हुई बैठक में कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश में नवकरणीय ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किये जा रहे हैं। बैठक में नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में मध्यप्रदेश और सिंगापुर के परस्पर संभावित सहयोग पर चर्चा हुई। मध्यप्रदेश में संभावित निवेश पर भी विचार-विमर्श हुआ। बैठक में तकनीकी सहयोग को साझा करने और आपसी संबंधों को बेहतर और सुदृढ़ करने का विश्वास व्यक्त किया गया।  

मिशन शक्ति का नवाचार, जीजीआईसी चुन्नीगंज की 9 से 12 की छात्राओं की थाली में इस्कॉन का स्वाद

मिशन शक्ति -5 कक्षा 9 से 12 में छात्राओं को प्रतिदिन निःशुल्क मिड डे मील उपलब्ध कराने वाला प्रदेश का पहला विद्यालय बना कानपुर का जीजीआईसी चुन्नीगंज मिशन शक्ति का नवाचार, जीजीआईसी चुन्नीगंज की 9 से 12 की छात्राओं की थाली में इस्कॉन का स्वाद सीएम योगी के मार्गदर्शन में हुई अनूठी पहल, चुन्नीगंज की छात्राओं को प्रतिदिन मिलेगा निःशुल्क मिड-डे-मील समाज और प्रशासन की साझेदारी से पोषक व्यंजनों से सजेगी जीजीआईसी की थाली कानपुर  बरगद की छांव से छनकर आती धूप, अनुशासन में सजी कतारें और थालियों में परोसा गरमागरम भोजन। मंगलवार को कानपुर के राजकीय बालिका इंटर कॉलेज (जीजीआईसी) चुन्नीगंज में यह नज़ारा किसी त्यौहार से कम नहीं था। मिशन शक्ति के अंतर्गत पहली बार कक्षा 9 से 12 तक की छात्राओं को निःशुल्क मिड-डे-मील उपलब्ध कराने का शुभारंभ हुआ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में कक्षा 9 से 12 में इस पहल को शुरू करने वाला जीजीआईसी चुन्नीगंज प्रदेश का पहला विद्यालय बन गया।  डीएम ने स्वयं छात्राओं के साथ बैठकर किया भोजन इस पहल से अब विद्यालय की कक्षा 9 से 12 तक की 456 छात्राओं को प्रतिदिन पौष्टिक भोजन मिलेगा। खास बात ये भी रही कि जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने स्वयं छात्राओं के साथ बैठकर भोजन किया और इस नई पहल की शुरुआत की। इससे पहले राज्य सरकार की योजना केवल कक्षा 6 से 8 तक सीमित थी। जिलाधिकारी की पहल पर इस्कॉन कानपुर और अचिन्त्य फाउंडेशन ने आगे बढ़कर जिम्मेदारी ली है कि उच्च कक्षाओं की छात्राओं को भी रोजाना भोजन उपलब्ध कराया जाएगा। कक्षाओं में उपस्थिति बेहतर होने की उम्मीद विद्यालय की प्रिंसिपल मंगलम गुप्ता ने बताया कि संस्थान में कुल 705 छात्राएं अध्ययनरत हैं। इनमें कक्षा 6 से 8 तक की 249 छात्राओं को अक्षयपात्र फाउंडेशन के माध्यम से पहले से ही भोजन मिल रहा है, जिसकी वजह से उनकी उपस्थिति 80 प्रतिशत से अधिक है। जबकि कक्षा 9 से 12 की 456 छात्राओं की उपस्थिति लगभग 50 प्रतिशत तक सिमटी रही। भोजन मिलने से बड़ी कक्षाओं में भी उपस्थिति बेहतर होने की उम्मीद है। प्रतिदिन निःशुल्क भोजन की आपूर्ति इस्कान के प्रभु अमृतेश कृष्ण दास ने कहा कि स्थानीय गतिविधियों के अंतर्गत हम जिला प्रशासन का पूरा सहयोग करने के लिए तत्पर हैं ताकि हमारा समाज भूख से मुक्त हो सके। हमारी पूरी योजना तैयार है और हम प्रतिदिन पांच हज़ार लोगों को भोजन उपलब्ध कराने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने कहा कि इस्कॉन द्वारा विद्यालय को प्रतिदिन निःशुल्क भोजन की आपूर्ति की जाएगी। 20 लाख रुपये प्रतिवर्ष का व्यय समाजसेवी एवं अचिन्त्य फाउंडेशन के निदेशक अभिषेक अग्रवाल ने कहा कि इस योजना पर लगभग 20 लाख रुपये प्रतिवर्ष का व्यय आएगा, जिसे इस्कॉन, अचिन्त्य फाउंडेशन और अन्य समाजसेवियों के सहयोग से पूरा किया जाएगा। छात्राओं की सेहत और पढ़ाई दोनों में सकारात्मक असर होगा जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि यह पहल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के मिशन शक्ति से जुड़े विजन के अनुरूप शिक्षा और पोषण को जोड़ने का प्रयास है। डीएम ने बताया कि इससे छात्राओं की सेहत और पढ़ाई दोनों में सकारात्मक असर होगा और समाज की भागीदारी से शिक्षा को और सशक्त बनाया जा सकेगा। जिलाधिकारी ने इसके साथ ही जनसहयोग से कक्षा 9 से 12 की 456 छात्राओं को स्कूली ड्रेस एवं जूते भी उपलब्ध कराए हैं, जिससे उन्हें पढ़ाई में और सुविधा मिलेगी। अन्य जनपद भी अपना सकते हैं मॉडल प्रदेश में मिड-डे-मील योजना वर्षों से कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए संचालित हो रही है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस योजना से स्कूल छोड़ने की दर में कमी आई और छात्र-छात्राओं की उपस्थिति में वृद्धि हुई। जीजीआईसी चुन्नीगंज का यह प्रयोग अब उच्च कक्षाओं तक मिड-डे-मील की संभावनाओं को खोलता है। यदि यह मॉडल सफल होता है, तो इसे जनपद के अन्य विद्यालयों में भी लागू किया जाएगा। इस अवसर पर डीआईओएस संतोष कुमार राय, समाजसेवी दिशा अरोड़ा सहित विभिन्न अधिकारी एवं विद्यालय की छात्राएं मौजूद थी। हर दिन थाली में अलग स्वाद इस्कॉन द्वारा जीजीआईसी चुन्नीगंज की छात्राओं के लिए मिड-डे-मील का मेन्यू इस तरह तैयार किया गया है कि थाली में पौष्टिकता के साथ स्वाद का संतुलन भी बना रहे। सप्ताह के हर दिन कुछ नया मिलेगा— सोमवार – कढ़ी पकोड़ा, आलू-परवल, चावल, रोटी मंगलवार – चावल, मूंग दाल, रोटी, सोया आलू बुधवार – चावल, अरहर दाल, रोटी, चना आलू गुरुवार – चावल, मूंग दाल छिलका, रोटी, आलू सीताफल शुक्रवार – चावल, रोटी, छोला, हलवा शनिवार – चावल, राजमा, मिक्स सब्ज़ी, रोटी यह विविधता न केवल बच्चों के स्वाद को लुभाएगी, बल्कि उनके पोषण स्तर को भी बेहतर बनाएगी।

11 साल पहले ट्रेन हादसे के बाद लोगों की मदद के लिए योगी ने नवरात्र तोड़ी थी पीठ की परंपरा

लोक कल्याण के आगे गोरक्षपीठ ने कभी नहीं की परंपरा की परवाह 11 साल पहले ट्रेन हादसे के बाद लोगों की मदद के लिए योगी ने नवरात्र तोड़ी थी पीठ की  परंपरा बतौर सीएम बार बार नोएडा और अयोध्या जाकर भी दी परंपरा को चुनौती  लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 19 सितंबर को ग्रेटर नोएडा में थे। इस दौरान उन्होंने एक्सपोमार्ट जाकर  25 से 29 सितंबर तक आयोजित यूपी ट्रेड शो की तैयारियों का निरीक्षण किया। चंद रोज बाद भी वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ नोएडा में होंगे। अवसर होगा एशिया के सबसे बड़े इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लोकार्पण का। मार्च 2017 में मुख्यमंत्री बनने के बाद से योगी विकास परियोजनाओं के शिलान्यास, लोकार्पण, समीक्षा बैठकों के लिए करीब 20 बार नोएडा जा चुके होंगे। यह वही नोएडा है जिसे तीन दशक तक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्रियों ने अभिशप्त शहर मान लिया था। मान्यता थी कि जो बतौर सीएम नोएडा गया, उसे कुर्सी से हाथ धोनी पड़ी। कुर्सी को ही सब कुछ मानने वालों के दिलोदिमाग में यह डर इतना बैठ गया कि कोई नोएडा जाता ही नहीं था। दरअसल, योगी गोरखपुर स्थित जिस गोरक्षपीठ के पीठाधीश्वर हैं वह शुरू से ऐसी मान्यताओं का विरोधी रही है। अस्पृश्यता के दौर में योगी के गुरु ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ का काशी के डोमराजा के घर भोजन इसका सबसे बड़ा प्रमाण है। बाद में तो सामाजिक समरसता के लिए सहभोज पीठ ने इसकी परंपरा ही शुरू कर दी। ग्यारह साल पूर्व नवरात्र में जब योगी ने तोड़ी थी पीठ की परंपरा बात करीब 11 साल पुरानी है। सितंबर खत्म होने को था। गुलाबी सर्दी की शुरुआत हो चुकी थी। शारदीय नवरात्र के दिन चल रहे थे। साल के दोनों नवरात्र गोरक्षपीठ के लिए बेहद खास होते है। मंदिर स्थित मठ पर ही सारे अनुष्ठान और पूजन होते हैं। परंपरा के मुताबिक इस दौरान पीठ के पीठाधीश्वर या उनके उत्तराधिकारी मठ की पहली मंजिल से नीचे नहीं उतरते। न जाने कबसे प्रचलित पीठ की इस परंपरा को योगी ने 30 सितंबर 2014 को तोड़ दिया। क्यों तोड़ी थी परंपरा परंपरा तोड़ने की वजह एक ट्रेन हादसा बनी। हुआ यह कि गोरखपुर स्थित नंदानगर क्रासिंग पर कृषक एक्सप्रेस ने बरौनी एक्सप्रेस में पीछे से टक्कर मार दी। दोनों यात्री ट्रेनें। हजारों की संख्या में यात्री। इसमें बच्चे, बुजुर्ग, बीमार, महिलाएं और चोटिल सभी शामिल थे। सबके साथ सामान अलग से। वक्त भी रात का था। वहां से रेलवे स्टेशन और बस स्टेशन की दूरी करीब 6 से 7 किलोमीटर थी। मदद के संसाधन कम थे। लोग चर्चा करते सुने गए छोटे महाराज (योगीजी) आ जाते तो लोगों की समय से प्रभावी मदद हो जाती। मुंहों मुंह बात उन तक पहुंची। स्थित की गंभीरता का उनको अहसास हुआ। परंपरा तोड़ वह मठ से नीचे उतरे और दुर्घटनास्थल की ओर रवाना हो गए। जानकारी मिलते ही हजारों  समर्थक भी वहां पहुंच गए। प्रशासन भी अपेक्षाकृत अधिक सक्रिय हो गया। कुछ देर में सभी यात्रियों को सुरक्षित रेलवे स्टेशन या बस स्टेशन पहुंचा दिया गया था। जिस अयोध्या का नेता नाम नहीं लेते थे वहां भी बार-बार गये योगी यही नहीं जिस अयोध्या के नाम से राजनीतिक दलों को करंट लगता था, वहां बार-बार जाकर योगी ने साबित किया कि पहले की तरह वह अयोध्या के हैं और अयोध्या उनकी। और, अब तो उनके ही कार्यकाल में उनके गुरु के सपनों के अनुसार अयोध्या में जन्मभूमि पर भव्य राम मंदिर बनकर लगभग तैयार है। मंदिर निर्माण के साथ विभिन्न परियोजनाओं के जरिए अयोध्या का कायाकल्प भी हो रहा है। आने वाले कुछ वर्षों में अयोध्या का शुमार धार्मिक लिहाज से दुनिया के सबसे खूबसूरत धार्मिक पर्यटन स्थलों में होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की यही मंशा भी है। वह बार बार इसकी चर्चा भी करते हैं।

सीएम योगी के निर्देश पर योजना के 7 वर्ष पूरे होने पर पूरे प्रदेश में आयोजित किये गये विभिन्न कार्यक्रम

आयुष्मान भारत योजना ने पूरे किए 7 साल, उत्तर प्रदेश बना आयुष्मान कार्ड निर्माण में देश का अग्रणी राज्य  – सीएम योगी के निर्देश पर योजना के 7 वर्ष पूरे होने पर पूरे प्रदेश में आयोजित किये गये विभिन्न कार्यक्रम  पूरे देश में सबसे अधिक यूपी में 5.38 करोड़ लोगों को बनाया जा चुका है आयुष्मान कार्ड  – योजना के जरिये गरीब, वंचित और जरूरतमंद परिवारों को उपलब्ध कराया जा रहा निशुल्क और गुणवत्तापूर्ण इलाज  लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर मंगलवार को पूरे प्रदेश में  आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PMJAY)के सात साल पूरे होने आयुष्मान भारत दिवस के रूप में विभिन्न कार्यक्रमाें का आयोजन किया गया। इसके तहत प्रदेश के हर जिले में विशेष रूप से शिविर का आयोजन किया गया है, जहां पर आयुष्मान कार्ड भी बनाए गए। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र माेदी ने 23 सितंबर 2018 को योजना का शुभारंभ किया गया था। अब यह दुनिया की सबसे बड़ी सार्वभौमिक स्वास्थ्य सुरक्षा योजना बन चुकी है। इस योजना का उद्देश्य गरीब, वंचित और जरूरतमंद परिवारों को निःशुल्क और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है, और इसमें उत्तर प्रदेश ने ऐतिहासिक सफलता हासिल की है।  पूरे देश में सबसे अधिक यूपी में 5.38 करोड़ लोगों के आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके सांची की सीईओ अर्चना वर्मा ने बताया कि उत्तर प्रदेश ने आयुष्मान भारत योजना में अपनी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की है। राज्य में अब तक कुल 9 करोड़ लक्षित लाभार्थियों में से 5.38 करोड़ लोगों के आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं, जिससे उत्तर प्रदेश पूरे देश में पहले स्थान पर है। राज्य के 87 प्रतिशत पात्र परिवारों में कम से कम एक सदस्य का आयुष्मान कार्ड बन चुका है, जो इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन को दर्शाता है। सामाजिक-आर्थिक और जाति जनगणना (SECC) 2011 के बाद, कई महत्वपूर्ण श्रेणियों के लाभार्थियों को योजना में शामिल किया गया है। इनमें कुम्भ वर्कर्स, मुख्यमंत्री जन आरोग्य अभियान के लाभार्थी, NFSA डेटा, STPHH, मान्यता प्राप्त पत्रकार, आशा वर्कर्स, आंगनवाड़ी वर्कर्स और सहायकाएं, निर्माण श्रमिक (BOCW), अंत्योदय कार्ड धारक, अत्यंत पिछड़ी जनजातियाँ (PVTG), और 70 वर्ष और उससे अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिक शामिल हैं। योगी योजना को और अधिक व्यापक बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में घोषणा की है कि अब प्रदेश के शिक्षक भी इस योजना से लाभान्वित होंगे। इस तरह यह योजना अब एक यूनिवर्सल कवरेज की दिशा में आगे बढ़ रही है, और इसका उद्देश्य है कि राज्य का प्रत्येक पात्र लाभार्थी इस योजना का लाभ प्राप्त कर सके। अब तक 74.40 लाख लाभार्थी योजना का उठा चुके हैं लाभ सीईओ ने बताया कि अब तक प्रदेश में 74.40 लाख लाभार्थियों को योजना के तहत सूचीबद्ध चिकित्सालयों में निःशुल्क उपचार प्रदान किया जा चुका है। इस पर कुल 12,283 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। उपचार सेवाओं की सहज उपलब्धता को सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश में 2921 सरकारी और 3088 निजी अस्पतालों सहित कुल 6099 चिकित्सालयों को सूचीबद्ध किया गया है, जो पूरे देश में सर्वाधिक संख्या है। योजना के तहत तृतीयक उपचार सेवाओं पर अब तक 4200 करोड़ खर्च किए गए हैं, जिसमें कैंसर, कार्डियोलॉजी, ऑर्थोपेडिक, अंग प्रत्यारोपण, शिशु कैंसर, प्लास्टिक सर्जरी और अन्य विशिष्ट उपचार शामिल हैं। आयुष्मान भारत–प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना ने सात वर्षों में यह साबित कर दिया है कि यह योजना न केवल गरीब और वंचित वर्ग को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं सुलभ कराती है, बल्कि भारत को सार्वभौमिक स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में मजबूत और निर्णायक कदम भी प्रदान करती है। इस योजना का आगे और अधिक परिवारों तक विस्तार होने की पूरी संभावना है, और यह अपने उद्देश्यों को पूर्ण करेगी।  

मुख्यमंत्री की एक और घोषणा पर अमल, 6.69 लाख धान उत्पादक किसान होंगे लाभान्वित

बालाघाट के कटंगी में होगा राज्य स्तरीय कार्यक्रम भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव प्रदेश के धान उपार्जित करने वाले किसानों को बालाघाट जिले के तहसील मुख्यालय कटंगी से बड़ी सौगात देंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा समर्थन मूल्य पर धान उपार्जित करने वाले किसानों के लिये प्रति हेक्टेयर 4 हजार रूपये बोनस देने की घोषणा की गई थी। इस घोषणा को अमल में लाने के लिये बालाघाट जिले के तहसील मुख्यालय कटंगी में समर्थन मूल्य पर धान विक्रय करने वाले किसानों को बोनस वितरण के लिए राज्य स्तरीय कार्यक्रम आज होगा। कृषि उपज मंडी प्रांगण में होने वाले इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव समर्थन मूल्य पर धान विक्रय करने वाले 6 लाख 69 हजार धान उत्पादक किसानों को 337 करोड़ 12 लाख रुपये की बोनस राशि सिंगल क्लिक के माध्यम से उनके खातों में अंतरित करेंगे। 4315 युवाओं को प्रदान किए जाएंगे नियुक्ति पत्र मुख्यमंत्री डॉ. यादव कार्यक्रम में 4315 युवाओं को नियुक्ति-पत्र प्रदान करेंगे और बालाघाट जिले में 244 करोड़ रुपये की लागत के 75 निर्माण कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन भी करेंगे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसान-बंधु सहित युवा शामिल होंगे। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने समर्थन मूल्य पर धान का विक्रय करने वाले किसानों को 04 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर अधिकतम 10 हजार रूपये बोनस देने की घोषणा की थी। बोनस राशि से बालाघाट जिले के एक लाख से अधिक किसान लाभांवित होंगें।  

चौंकाने वाली खबर: MP Police भर्ती में अब हिंदी-अंग्रेजी परीक्षा नहीं होगी!

भोपाल मप्र कर्मचारी चयन मंडल (ESB) गृह विभाग के लिए सूबेदार शीघ्रलेखक (स्टेनोग्राफर) और सहायक उप निरीक्षक (अनुसचिवीय) के 500 पदों पर भर्ती परीक्षा आयोजित कर रहा है। इस तरह की भर्ती आठ साल बाद होने जा रही है। इस परीक्षा के लिए ईएसबी ने नियमावली जारी कर दी है। उसके मुताबिक इन पदों पर चयन के लिए सामान्य ज्ञान, तर्कशक्ति और गणितीय दक्षता तो जांची जाएगी, लेकिन हिंदी या अंग्रेजी भाषा की दक्षता जांच के लिए कोई परीक्षा नहीं होगी।   नियमावली के मुताबिक, यह भर्ती परीक्षा दो चरणों में होगी। पहले चरण में 100 अंकों की लिखित परीक्षा होगी, जिसमें सामान्य ज्ञान, बौद्धिक क्षमता व गणित-विज्ञान से प्रश्न पूछे जाएंगे। इस परीक्षा में निगेटिव मार्किंग का प्रविधान नहीं है। सूबेदार और एएसआई की परीक्षा में 40 अंक सामान्य और तार्किक ज्ञान के रहेंगे, 30 अंक बौद्धिक क्षमता और मानसिक अभिरुचि के होंगे, जबकि 30 अंक विज्ञान एवं सरल अंक गणित के होंगे। वहीं, परीक्षा के दूसरे चरण में दस्तावेज सत्यापन व प्रायोगिक परीक्षा (टंकण/आशुलिपि) ली जाएगी। पहली बार शीघ्रलेखक पद के लिए पहली परीक्षा व शार्टहैंड टाइपिंग प्रायोगिक परीक्षा के अंक को मिलाकर अंतिम सूची बनेगी। दोनों परीक्षा के लिए 100-100 अंक तय किए हैं। पिछली बार जो परीक्षा हुई थी, उसमें टंकण/आशुलिपि दक्षता परीक्षा केवल क्वालिफाइंग थी। उसमें न्यूनतम अंक पाने वाले को दक्ष मानकर लिखित परीक्षा के अंकों के आधार पर मेरीट बन गया था। बताया गया है कि पहले चरण की लिखित परीक्षा के कटआफ के सात गुना अभ्यर्थियों को प्रायोगिक परीक्षा के लिए बुलाया जाएगा। परीक्षा में कट ऑफ के बराबर पर्सेंटाइल प्राप्त करने वाले सभी अभ्यर्थियों को दूसरे चरण के लिए बुलाया जाएगा, भले ही कुल संख्या विज्ञापित रिक्तियों की सात गुना से अधिक हो। 3 अक्टूबर से ऑनलाइन आवेदन कर्मचारी चयन मंडल ने परीक्षा की अधिसूचना जारी कर दी है। इसके लिए आवेदन तीन अक्टूबर से शुरू होंगे। आवेदन की अंतिम तिथि 17 अक्टूबर है। वहीं, पहले चरण की लिखित परीक्षा 10 दिसंबर से शुरू होगी। इस भर्ती के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता 12वीं पास है। आवेदक के पास कंप्यूटर दक्षता प्रमाणपत्र (सीपीसीटी) होना अनिवार्य है। 500 पदों पर होगी भर्ती इस परीक्षा के जरिए गृह विभाग के कुल 500 पदों पर भर्ती होनी है। सूबेदार शीघ्रलेखक की सामान्य शाखा में 90 पद, वहीं विशेष शाखा में 10 पदों पर भर्ती होगी। वहीं सहायक उप निरीक्षक (अनुसचिवीय) की सामान्य शाखा में 110 पद, मैदानी इकाई में 220 पद, विशेष शाखा में 55 पद व अपराध अनुसंधान विभाग में 15 पद पर भर्ती होनी है। साकेत मालवीय (डायरेक्टर, ईएसबी) के मुताबिक, पुलिस विभाग में रिक्त पदों के लिए परीक्षा आयोजित की जा रही है। प्रश्नपत्रों का पैटर्न विभाग ने तैयार कर दिया है। मंडल की जिम्मेदारी परीक्षा आयोजित कराने की है। इस बार प्रायोगिक परीक्षा के लिए भी अंक होंगे।

यात्रियों के लिए खुशखबरी! नवरात्रि पर रेलवे ट्रेन में परोसेगा शुद्ध फलाहारी खाना

ग्वालियर नवरात्र के दौरान उपवास रखकर ट्रेनों में सफर कर रहे यात्रियों की सुविधा के लिए इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कार्पोरेशन (IRCTC) ने फलाहारी मैन्यू की शुरुआत की है। रेलवे ने यात्रियों के लिए सात्विक भोजन और फलाहारी भोजन की सुविधा शुरू कर दी है। ऐप से बुक कर सकेंगे खाना सात्विक आहार के मैन्यू में साबूदाने से लेकर सेंधा नमक जैसी चीजें शामिल की हैं। जीरा आलू, आलू की टिक्की, साबूदाना की खिचड़ी, साबूदाना बड़ा, मलाई बर्फी, लस्सी, सूखे मखाने, व्रत में खाई जाने वाली सब्जियां, मूंगफली नमकीन और सादा दही को शामिल किया गया है।   इसके लिए IRCTC की ई-कैटरिंग वेबसाइट या ऐप पर बुकिंग सुविधा उपलब्ध कराई गई है। यहां ऑनलाइन पेमेंट या पे ऑन डिलीवरी दोनों ही विकल्प हैं। ऑर्डर करने पर संबंधित स्टेशन पर यात्री को अपनी बर्थ पर ही खाना मिल जाएगा। इन सात्विक थालियों की कीमत 100 से 200 रुपये के बीच है। वंदे भारत एक्सप्रेस में अब मिलेगी एक लीटर रेल नीर की बोतल भोपाल के रानी कमलापति स्टेशन से ग्वालियर होते हुए हजरत निजामुद्दीन जाने वाली वंदे भारत, खजुराहो वंदे भारत सहित अब सभी वंदे भारत ट्रेनों में यात्रियों को फिर से एक लीटर रेल नीर उपलब्ध कराया जाएगा। इससे पहले ट्रेन में यात्रा करने वाले यात्रियों को 500 मिली रेल नीर की बोतल दी जाती थी। रेलवे बोर्ड ने सभी जोनल रेलवे को निर्देश जारी किए हैं कि यात्रियों को एक लीटर रेल नीर की बोतल उपलब्ध कराई जाए। IRCTC के मुख्य क्षेत्रीय अधिकारी अजीत सिन्हा ने बताया कि रेलवे बोर्ड से सर्कुलर जारी किया गया है।

उत्तर प्रदेश में हड़कंप: नकली नियुक्तियों में शामिल कर्मचारियों-शिक्षकों पर योगी सरकार की बड़ी कार्रवाई

लखनऊ  सरकारी दफ्तरों और शैक्षिक संस्थानों में अनुकंपा नियुक्तियों की आड़ में गलत तरीके से नौकरी पाने वाले कर्मचारियों की मुश्किलें अब बढ़ने वाली हैं। शासन ने ऐसे मामलों की जांच तेज कर दी है और सभी विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि पात्रता से बाहर जाकर नौकरी पाने वालों की पहचान कर रिपोर्ट भेजी जाए। अनुकंपा नियुक्ति का नियम साफ है कि यदि किसी कर्मचारी की सेवा के दौरान मृत्यु हो जाए, तो उसके आश्रित को नौकरी दी जा सकती है। लेकिन अगर पति-पत्नी दोनों ही सरकारी सेवा में हों और उनमें से किसी एक का निधन हो जाए, तो आश्रित बच्चों को यह सुविधा नहीं मिलती। इसके बावजूद कई जगह अधिकारियों की अनदेखी या मिलीभगत से ऐसे लोगों को भी नियुक्ति मिल गई जो पात्र नहीं थे।   विभागों में खलबली, विरोधियों से शिकायतें सूत्रों के मुताबिक, गलत तरीके से नौकरी पाने वालों में खलबली मची हुई है। विरोधियों द्वारा शासन स्तर पर शिकायतें पहुंचने के बाद कई मामलों का खुलासा हुआ है। हालांकि, पहले मिली शिकायतों पर विभागों ने सिर्फ फाइलें तलब कर दस्तावेज मांगे, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं की। अब शासन की सख्ती के बाद मामले फिर से खंगाले जा रहे हैं। निकायों में भी उजागर हो सकती हैं गड़बड़ियां नियम कहता है कि अनुकंपा नियुक्ति केवल मृतक के पति, पत्नी या बेटे-बेटी को दी जा सकती है। इसके बावजूद कई नगर निकायों और विभागों में मृतक के भाई या अन्य रिश्तेदारों को भी नौकरी दे दी गई। यदि यहां जांच गहराई से हुई तो बड़ी संख्या में ऐसे कर्मचारी सामने आ सकते हैं जो पात्र ही नहीं थे। अधिकारियों पर भी गिरेगी गाज किसी भी अनुकंपा नियुक्ति से पहले विभागीय अधिकारियों को तथ्यों की जांच करनी होती है। ऐसे में यह भी स्पष्ट है कि यदि गलत तरीके से किसी को नौकरी मिली है, तो संबंधित अधिकारी की जिम्मेदारी तय होगी और उनके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। हाईकोर्ट के आदेश से खुली नींद इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने हाल ही में एक ऐसे मामले पर सख्त रुख अपनाया जिसमें एक व्यक्ति ने अनुकंपा नौकरी लेते समय अपनी मां के सरकारी शिक्षिका होने की बात छिपा ली थी। अदालत के आदेश के बाद शासन और विभागीय अधिकारी हरकत में आ गए हैं। अब सभी विभागों को शासन को रिपोर्ट भेजनी होगी, जिससे यह सामने आ सकेगा कि कितने कर्मचारियों ने नियमों को ताक पर रखकर नौकरी हासिल की है।

शोले की रामलीला में बड़ा मोड़! पूनम पांडे का मंदोदरी रोल रद्द, माफी का पत्र जारी

मुंबई  पूनम पांडे लवकुश रामलीला में मंदोदरी का रोल नहीं निभा सकेंगी। आज लव कुश रामलीला कमेटी ने ये फैसला लिया है और इसे लेकर कमेटी ने पूनम पांडे को पत्र लिखा है। पूनम पांडे दिल्ली में होने वाली भव्य लवकुश रामलीला में मंदोदरी का किरदार निभाने वाली थीं। मंदोदरी के रोल के लिए उनका नाम फाइनल होने के बाद से ही इस फैसले का जमकर विरोध हो रहा था, आखिरकार विरोध को देखते हुए लवकुश रामलीला समिति ने आखिरकार उन्हें हटाना ही उचित समझा और इसे लेकर पूनम पांडे को पत्र लिखकर सूचित किया। समिति ने लिखा-हमें क्षमा कर दें समिति के अध्यक्ष अर्जुन कुमार और महासचिव सुभाष गोयल ने बताया कि पूनम पांडे ने समिति के आमंत्रण पर मंदोदरी की भूमिका निभाने की सहमति दी थी। लेकिन उनके नाम की घोषणा के बाद अनेक संस्थानों और वर्गों से आपत्तियां सामने आईं, जिससे रामलीला के उद्देश्य प्रभु श्रीराम का संदेश समाज तक पहुंचाने में बाधा उत्पन्न हो रही थी। इसी वजह से गहन विचार-विमर्श के बाद समिति ने सर्वसम्मति से यह फैसला लिया है कि इस वर्ष मंदोदरी की भूमिका किसी अन्य कलाकार से करवाई जाएगी। समिति ने पूनम पांडे के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि वे इस निर्णय को समझेंगी और क्षमा करेंगी। पूनम पांडे ने किया था पोस्ट बता दें कि कल ही यानी सोमवार को ही पूनम पांडे ने एक वीडियो भी शेयर किया था और उसके जरिए बताया था कि वो इस किरदार को निभाने के लिए कितनी उत्साहित हैं। उन्होंने ये भी कहा था कि मैं नवरात्र के लिए पूरे नौ दिनों का व्रत भी रखूंगी। मंदोदरी को रोल मिलने के बाद से ही उनके खिलाफ कड़ी आपत्ति जताई जा रही थी और इस विवाद को देखते हुए ही कमेटी ने ये फैसला लिया कि उन्हें इस रोल से हटा दिया जाए। अब उनकी जगह मंदोदरी का किरदार कोई और निभाएगा।   पूनम पांडे को लेकर हुआ था विरोध पूनम पांडे के नाम को लेकर विश्व हिंदू परिषद से लेकर कंप्यूटर बाबा तक ने कड़ा विरोध जताया था। कंप्यूटर बाबा ने तो इतना कह दिया था कि पूनम पांडे को तो मंदोदरी नहीं, सूर्पनखा का रोल देना चाहिए। कंप्यूटर बाबा ने कहा कि रामलीला के अध्यक्ष को इतनी बुद्धि नहीं आई कि आपको किसको क्या पात्र देना चाहिए? मैं ये अनुरोध करूंगा कि जो जैसा है उसको वैसा ही पात्र बनाया जाए।" वहीं, विश्व हिंदू परिषद ने पूनम पांडे को रामलीला में लिए जाने के विरोध में एक चिट्ठी लिखकर आग्रह किया था कि उन्हें इस भूमिका से हटा दिया जाना चाहिए। पत्र में लिखा गया था कि रामलीला केवल एक नाट्य-प्रस्तुति नहीं, बल्कि भारतीय समाज और संस्कारों का एक जीवंत हिस्सा है।