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CJP प्रोटेस्ट मामले में CJI की टिप्पणी, कारोबार और आजीविका प्रभावित हुई तो मुआवजे पर विचार

 नई दिल्ली दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल निर्देश जारी करने से इनकार कर दिया है. यह प्रदर्शन कनॉट प्लेस के पास होना है. सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि सभी पक्षों पर बेहतर समझ होगी. उन्होंने छोटे दुकानदारों की आजीविका का जिक्र करते हुए कहा कि इन दिनों की कमाई से उनके परिवार चलते हैं और कोर्ट उन मुश्किलों को समझता है, जिनका सामना उन्हें करना पड़ सकता है. इस दौरान कोर्ट ने मुआवजे पर आदेश जारी करने की बात भी की।  कोर्ट ने यह भी कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट पहले ही इस मामले पर सुनवाई कर रहा है. जस्टिस बागची ने कहा कि ये सभी याचिकाएं एक-दूसरे से जुड़ी हैं. कोई प्रदर्शन करना चाहता है, कोई उसका विरोध कर रहा है और कोई कानून-व्यवस्था बनाए रखना चाहता है. कोर्ट ने संकेत दिया कि अगर कारोबार को नुकसान होता है, तो वह अपने संवैधानिक अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल कर सकता है।  NDMC ने सेंट्रल पार्क बंद किया, मुआवजे पर दे सकते हैं आदेश सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने बताया कि नई दिल्ली नगर परिषद (NDMC) ने देर रात सेंट्रल पार्क को बंद करने का आदेश जारी किया है. इसके चलते वहां कारोबार नहीं हो सकेगा और रेहड़ी-पटरी वालों समेत छोटे व्यापारियों को नुकसान उठाना पड़ सकता है।  इस पर कोर्ट ने कहा कि अगर NDMC के आदेश से कारोबार का नुकसान होता है, तो वह इस मामले को देखेगा. जस्टिस बागची ने कहा कि अगर कोई कदम जरूरत से ज्यादा या अनुचित पाया जाता है, तो अदालत के पास सार्वजनिक कानून और मुआवजे से जुड़े कानून के तहत आदेश देने का अधिकार है।  26 अक्टूबर को फिर होगी सुनवाई मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि कारोबार या आजीविका के नुकसान का मुद्दा पार्क दोबारा खुलने के बाद उठाया जा सकता है. कोर्ट ने कहा कि अगर नुकसान होता है, तो इस पर 26 तारीख को बात रखी जा सकती है. मामले को 26 या 27 अक्टूबर के लिए सूचीबद्ध किया गया है।  इस तरह सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल प्रदर्शन के खिलाफ तत्काल आदेश जारी नहीं किया, लेकिन कारोबार और छोटे दुकानदारों की आजीविका को नुकसान होने पर मुआवजे के विकल्प पर विचार करने की बात कही है। 

झोटा मर्डर के बाद एक्शन में पंजाब सरकार, नशे पर लगाम लगाने के लिए CM मान की बैठक

जालंधर मुख्यमंत्री भगवंत मान आज फिल्लौर में युद्ध नशे के विरुद्ध अभियान की समीक्षा करेंगे जिसमें सभी जिलों के एसएसपी, डीसी, डीएसपी व एसडीएम हिस्सा लेंगे। बैठक में मेडिकल नशों के दुरुपयोग पर सख्ती करने को लेकर अहम फैसले लिए जा सकते हैं, वहीं नशों तस्करों के नेटवर्क पर नकेल कसने के लिए प्रशासन और पुलिस की जवाबदेही तय की जाएगी।आम आदमी पार्टी पंजाब मीडिया प्रभारी बलतेज पन्नू ने बताया कि कुछ दिन पहले सीएम मान ने फिल्लौर में सभी एसएचओ के साथ भी बैठक की थी और अब वरिष्ठ अधिकारियों के साथ यह हाई लेवल बैठक बुलाई गई है।  बैठक में अब तक की परफॉर्मेंस की समीक्षा करने के साथ-साथ आगे की रणनीति और एक्शन प्लान पर विस्तार से चर्चा होगी जिसके तहत ही नशे के खिलाफ मुहिम को और भी तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि नशों की समस्या से निपटने के लिए प्रशासन और संबंधित विभागों को पूरी गंभीरता से काम करना होगा।  CM की मीटिंग को लेकर AAP के मीडिया प्रभारी बलतेज पन्नू ने एक वीडियो भी जारी किया। इसमें कहा गया कि आने वाले एक हफ्ते में पंजाब में नशे के खिलाफ एक बड़ा बदलाव दिखने वाला है। पन्नू ने साफ किया कि सरकार नशे को लेकर कड़ा और बड़ा फैसला ले सकती है। विरोधी पार्टियां कांग्रेस, भाजपा, अकाली दल सहित वारिस पंजाब दे के नेता लगातार सरकार को नशे के मुद्दे पर घेर रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि 2025 से चल रही पंजाब सरकार की 'युद्ध नशे विरुद्ध' मुहिम का अभी तक ग्राउंड पर कोई असर देखने को नहीं मिला है। झोटा मर्डर के बाद सरकार के मंत्री भी नशे को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब देने से बच रहे हैं। सरकार के खिलाफ खड़ी हो रही लहर के चलते अब CM ने सीधे कमान संभाली है। पन्नू ने कहा कि मेडिकल नशों के गलत इस्तेमाल पर कहा कि कुछ नशों नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एडीपीएस) एक्ट के दायरे में आते हैं, जबकि कुछ नशे नहीं। ऐसे नशों को संबंधित कानूनी दायरे में शामिल करने के लिए केंद्र सरकार की भूमिका भी अहम है।  हालांकि पन्नू ने कहा कि मेडिकल नशों के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए खास निगरानी की भी जरूरत है। पंजाब सरकार इस मामले में कोई लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेगी। शुक्रवार को प्रस्तावित बैठक के बाद इस दिशा में जरूरी कदम उठाए जाएंगे। मामले में एसआईटी से जुड़े सवाल पर पन्नू ने कहा कि फिलहाल पुलिस और एडीजीपी के निर्देशों के मुताबिक मामले में कार्रवाई की जा रही है। 1 मार्च 2025 को शुरू हुआ था युद्ध नशे विरुद्ध पंजाब सरकार की 'युद्ध नशे विरुद्ध' मुहिम 1 मार्च 2025 को CM भगवंत मान के निर्देश पर शुरू हुई थी। यह नशा तस्करी के खिलाफ जीरो-टॉलरेंस वाला तलाशी अभियान है। 15 अक्टूबर 2026 तक इस मुहिम के लगभग 592 दिन पूरे हो चुके हैं। इसके तहत पंजाब के सभी 23 जिलों के पुलिस प्रमुख नशे की सूचना पर रेड करते हैं। वे इसे अपने इंस्टाग्राम और एक्स हैंडल पर प्रमोट करते हैं और नशे के खिलाफ की जाने वाली कार्रवाइयों, जिनमें तस्करों की गिरफ्तारी व घर गिराने की कार्रवाई शामिल है, को दिखाते हैं। सरकार का दावा- बड़ी मात्रा में नशा पकड़ा सरकार और पुलिस के दावों के अनुसार, अक्टूबर 2026 तक 85 हजार से ज्यादा नशा तस्करों को गिरफ्तार किया गया है। अक्टूबर 2026 तक करीब 64 हजार FIR दर्ज की जा चुकी हैं। अब तक की मुहिम में लगभग 4,200 किलो हेरोइन और 980 किलो अफीम बरामद की गई है। इसके अलावा भुक्की, गांजा, ICE, लाखों नशीली गोलियां और कैप्सूल तथा 20 करोड़ रुपए की ड्रग मनी बरामद की गई है। नशे की कमाई से बने मकानों पर बुलडोजर चलाने की कार्रवाई भी हुई है। जानें, कैसे नशे के मुद्दे पर घिरती गई AAP सरकार     BJP की पंजाब भर में रैली ने माहौल बनाया: BJP पंजाब ने 'नशा मुक्त पंजाब' स्लोगन के तहत 18 सितंबर को पठानकोट के माधोपुर से एक यात्रा शुरू की। करीब 13 दिनों तक चली इस यात्रा ने पंजाब की सभी 117 विधानसभा सीटों को कवर किया और लगभग 4,000 किलोमीटर का सफर तय किया। इस दौरान बीजेपी नेताओं ने नशा पीड़ित परिवारों से मुलाकात की और हर विधानसभा क्षेत्र में AAP सरकार को घेरा।     31 दिसंबर 2029 तक पंजाब से नशा मिटाने का वादा: 30 सितंबर को गृह मंत्री ने जालंधर के परागपुर में इस यात्रा का समापन किया और 31 दिसंबर 2029 तक पंजाब से नशा मिटाने का वादा किया। इससे पंजाब में नशे को लेकर लोगों की आवाज उठने लगी। मानसा में मारे गए परविंदर झोटा के पिता ने भी सबसे पहले केंद्र सरकार और अमित शाह से ही आरोपियों पर कार्रवाई की अपील की।     कांग्रेस ने विधानसभा में उठाए सवाल: विधानसभा सत्र में कांग्रेस ने नशे के मुद्दे पर कई बार CM को घेरा। CM भगवंत मान की स्पीच के दौरान जुबान लड़खड़ाने और शराब पीकर आने के आरोप लगाए। विधानसभा में इस मुद्दे पर हंगामा हुआ और एल्कोमीटर से सभी के टेस्ट करवाने का दबाव बनाया गया।     सभी विधायकों पर गूंगे होने का आरोप लगाया: जालंधर कैंट के कांग्रेस विधायक और प्रदेश प्रधान परगट सिंह ने सभी विधायकों पर गूंगे होने का आरोप लगाया। पंजाब पुलिस का एक कर्मचारी अमृतसर में चिट्टे के साथ पकड़ा गया। बठिंडा में पंजाब पुलिस की एक कांस्टेबल भी चिट्टे के साथ पकड़ी गई। कांग्रेस और बीजेपी ने लगातार सोशल मीडिया पर नशा लेते और सड़कों पर जॉम्बी बने युवकों के वीडियो शेयर किए।     मोहनजीत, गुलजार और अब परविंदर झोटा, 3 मामले: 29 सितंबर को संगरूर में CM को काला झंडा दिखाने वाले मोहनजीत ने पुलिस पर थर्ड डिग्री टॉर्चर का आरोप लगाया। इस मामले को पूरे विपक्ष ने AAP सरकार के खिलाफ मुद्दा बनाया। मोहनजीत ने भी नशे के खिलाफ आवाज उठाई थी।     गुलजार सिंह को CM से नहीं मिलने दिया गया: संगरूर के दिड़बा में बेटे के नशा करने और इलाके में बिक रहे नशे की शिकायत लेकर गए गुलजार सिंह को CM से नहीं मिलने दिया गया। इससे परेशान होकर उन्होंने जहर खाकर खुदकुशी कर ली थी। … Read more

बेंगलुरु में भारत-वेस्टइंडीज के बीच टी20 सीरीज का आखिरी मुकाबला, जीत पर रहेगी नजर

नई दिल्ली  भारत और वेस्टइंडीज के बीच टी20 सीरीज का आखिरी मुकाबला बेंगलुरु के एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में होना है। यह सीरीज का सबसे निर्णायक मुकाबला होगा। 5 मैचों की सीरीज 2-2 से बराबर है। बेंगलुरु में भारत ने अपना आखिरी टी20 इंटरनेशनल मैच 2024 में खेला था। टीम की भिड़ंत अफगानिस्तान से हुई थी। उस मुकाबले को जीतने में रोहित शर्मा की कप्तानी वाली भारतीय टीम के पसीने छूट गए थे। दो सुपर ओवर के बाद निकला नतीजा भारतीय टीम ने पहले बैटिंग की और 4 विकेट पर 212 रन बनाए। 5वें ओवर में 22 रन पर 4 विकेट गिर चुके थे। इसके बाद कप्तान रोहित शर्मा ने शतक लगाया और 121 रन बनाकर नाबाद रहे। वहीं रिंकू सिंह ने 69 रनों की पारी खेली। दोनों के बीच 190 रनों की नाबाद साझेदारी हुई। अफगानिस्तान ने भी दमदार बैटिंग की। रहमनुल्लाह गुरबाज के साथ ही कप्तान इब्राहिम जादरान और गुलबदिन नईब ने फिफ्टी ठोकी। आखिरी गेंद पर अफगानिस्तान को जीत के लिए तीन रन चाहिए थे। उनके बल्लेबाज दो रन ही ले पाए और मैच टाई हो गया। अफगानिस्तान ने पहले सुपर ओवर में 16 रन बना दिए। रोहित शर्मा ने दो छक्के मारे लेकिन भारतीय टीम भी 16 रनों तक ही पहुंच पाई। दूसरे सुपर ओवर में भारत ने पहले बैटिंग की। टीम ने कुल 11 रन बनाए और सभी रोहित शर्मा के बल्ले से ही निकले। लेग स्पिनर रवि बिश्नोई ने तीन गेंदों पर एक रन देकर दो विकेट लिए और भारतीय टीम को जीत दिला दी। बेंगलुरु की पिच बल्लेबाजों के लिए जन्नत बेंगलुरु के एम चिन्नास्वामी स्टेडियम की पिच हमेशा के बल्लेबाजी के लिए आसान रही है। आईपीएल 2026 की बात करें तो यहां 5 मैच खेले गए थे। इसमें 6 बार टीमों ने 200 से ज्यादा का स्कोर बनाया। दो बार 200 से ज्यादा का टारगेट चेज भी हुआ। सबसे बड़ा स्कोर 250 रनों का रहा। यहां की बाउंड्री भी काफी छोटी है और इसी वजह से गेंदबाज स्ट्रगल करते हैं।  

अयोध्या-चित्रकूट हाईवे में मिलीं गंभीर खामियां, अधिशासी अभियंता निलंबित

प्रयागराज   अयोध्या को चित्रकूट से जोड़ने वाले राम वन गमन मार्ग के निर्माण में लापरवाही पर शासन ने सख्ती दिखाते हुए अधिशासी अभियंता को निलंबित कर दिया था और अधीक्षण अभियंता पर प्रशासनिक कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है। निलंबन की कार्रवाई दैनिक जागरण में प्रकाशित खबरों पर 12 सितंबर को की गई थी। गुरुवार को कार्रदायी संस्था को एक साल के लिए डिबार कर दिया गया है। हाईवे की सड़क और सुरक्षात्मक कार्यों में खामियां मिलने पर अधिशासी अभियंता (राष्ट्रीय मार्ग) प्रयागराज रवींद्र पाल सिंह को निलंबित कर दिया गया है, जबकि अधीक्षण अभियंता (राष्ट्रीय मार्ग) प्रयागराज ओंकार भारतीय के खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई की गई है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (मोर्थ) ने दिल्ली की ठेकेदार फर्म एसएंडपी इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपर्स को एक महीने के लिए अस्थायी रूप से निलंबित किया था। राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-731ए के राम वन गमन मार्ग ग्रीनफील्ड हाईवे के पैकेज-दो के निरीक्षण में कई गंभीर खामियां सामने आई थीं। फ्लाईओवर के एप्रोच और गैप में गड़बड़ी मिली थी। इसके अलावा करीब डेढ़ किलोमीटर तक सड़क के किनारे की पटरी में दरारें थीं, जबकि लगभग 500 मीटर लंबाई में हाईवे के किनारे किए गए सुरक्षात्मक कार्य भी क्षतिग्रस्त पाए गए थे। निरीक्षण टीम ने माना कि अधीक्षण अभियंता और अधिशासी अभियंता ने परियोजना के कार्यों की निगरानी में लापरवाही बरती और अपने पर्यवेक्षणीय दायित्वों का समुचित निर्वहन नहीं किया। इसके बाद सचिव लोक निर्माण विभाग दिव्य प्रकाश गिरि ने अधिशासी अभियंता को निलंबित करने और अधीक्षण अभियंता के खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई के आदेश जारी किए गए।  

जैसलमेर में नाइट टूरिज्म पर पूरी रोक नहीं, डीएनपी के बाहर ऊंट सफारी जारी

जैसलमेर राजस्थान के जैसलमेर घूमने का प्लान बना रहे पर्यटकों के लिए सम और कनोई क्षेत्र के धोरों को लेकर बड़ी खबर है। वन विभाग ने राष्ट्रीय मरु उद्यान (डीएनपी) के दायरे में आने वाले धोरों पर सूर्यास्त के बाद ऊंट सफारी और अन्य पर्यटन गतिविधियों पर रोक लगाई है। हालांकि, इस आदेश को लेकर पर्यटकों और पर्यटन कारोबारियों में असमंजस पैदा हो गया था। अब वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह पाबंदी पूरे सम क्षेत्र या जैसलमेर के सभी धोरों पर लागू नहीं है। डीएनपी की सीमा से बाहर पर्यटन गतिविधियां पहले की तरह जारी रहेंगी। यह पूरा मामला क्षेत्रीय वन अधिकारी की ओर से 11 अक्टूबर को जारी पत्र के बाद सामने आया। इसमें राष्ट्रीय मरु उद्यान के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण को लेकर दिशा-निर्देश दिए गए थे। विभाग ने धोरों पर बढ़ते कचरे, नाइट टूरिज्म के दौरान लेजर लाइट के अत्यधिक इस्तेमाल और सूर्यास्त के बाद पर्यटन गतिविधियों पर चिंता जताई थी। पत्र सामने आने के बाद पर्यटन कारोबारियों और पर्यटकों के बीच चर्चा शुरू हो गई कि क्या अब सम के विश्व प्रसिद्ध सैंड ड्यून्स पर सूर्यास्त के बाद घूमना, ऊंट सफारी करना और अन्य गतिविधियों का आनंद लेना बंद हो जाएगा। इससे रिसोर्ट संचालकों के साथ बाहर से आने वाले पर्यटकों में भी भ्रम की स्थिति बन गई। डीएनपी के बाहर प्रतिबंध नहीं, इन जगहों पर नाइट टूरिज्म ले सकते हैं आनं वन विभाग ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि सूर्यास्त के बाद गतिविधियों पर रोक केवल राष्ट्रीय मरु उद्यान की निर्धारित सीमा में आने वाले धोरों तक सीमित है। इसे जैसलमेर के सभी पर्यटन स्थलों पर लागू नहीं माना जाना चाहिए। डीएनपी सीमा से बाहर स्थित लखमणा और अन्य धोरों पर पहले की तरह ऊंट सफारी और पारंपरिक पर्यटन गतिविधियां संचालित होती रहेंगी। यानी पर्यटकों को जैसलमेर में सूर्यास्त के समय रेतीले धोरों का नजारा देखने और डेजर्ट सफारी का अनुभव लेने के विकल्प मिलते रहेंगे, बशर्ते वे संबंधित क्षेत्र के नियमों का पालन करें। पर्यावरण संरक्षण के लिए उठाया कद सम कैम्प्स एंड वेलफेयर सोसायटी के कैलाश कुमार व्यास के अनुसार, रिसोर्ट संचालक पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े नियमों की पालना कर रहे हैं। धोरों को साफ रखने के लिए समय-समय पर सफाई अभियान भी चलाए जाते हैं। डीएनपी के उप वन संरक्षक चंद्रपालसिंह चौहान ने स्पष्ट किया कि सूर्यास्त के बाद ऊंट सफारी और अन्य गतिविधियों पर रोक केवल डीएनपी क्षेत्र में है। अन्य धोरों पर यह प्रतिबंध लागू नहीं है। ऐसे में जैसलमेर आने वाले पर्यटकों को यात्रा से पहले अपने चुने हुए पर्यटन स्थल की सीमा और वहां लागू नियमों की जानकारी जरूर लेनी चाहिए। इन्होंने कहा- 'सम क्षेत्र के केवल डीएनपी एरिया में ही सूर्यास्त के बाद ऊंट सफारी और अन्य पर्यटन गतिविधियों पर रोक लगाई गई है। यह दिशा-निर्देश अन्य ड्यून्स के लिए नहीं है।' -चंद्रपालसिंह चौहान, उप वन संरक्षक, डीएनपी, जैसलमेर

पंजाब में BRP का बड़ा संगठनात्मक बदलाव, नवजोत कौर सिद्धू की जगह ग्रेवाल को जिम्मेदारी

चंडीगढ़  पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 से पहले भारतीय राष्ट्रवादी पार्टी (बीआरपी) ने संगठन में बदलाव करते हुए डॉ. नवजोत कौर सिद्धू (Navjot Kaur Siddu) को पार्टी की सभी जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया है। पार्टी ने यह फैसला उनके स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए लिया है। डॉ नवजोत कौर सिद्धू पार्टी में राष्ट्रीय महासचिव और पंजाब प्रभारी की जिम्मेदारी संभाल रही थीं। पार्टी ने कहा है कि उनका स्वास्थ्य और व्यक्तिगत कल्याण सर्वोच्च प्राथमिकता है। पार्टी के राष्ट्रीय सचिव एवं मुख्यालय प्रभारी मनोज चौबे की ओर से जारी बयान में नवजोत कौर सिद्धू के योगदान, अनुभव और मार्गदर्शन की सराहना की गई। पार्टी ने कहा कि संगठन के साथ उनका जुड़ाव महत्वपूर्ण बना रहेगा। सुखमिंदरपाल सिंह ग्रेवाल को पंजाब की जिम्मेदारी संगठनात्मक फेरबदल के तहत बीआरपी ने राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुखमिंदरपाल सिंह ग्रेवाल (भुकड़ी कलां) को पंजाब का नया प्रभारी नियुक्त किया है। पार्टी के अनुसार, इस नियुक्ति का उद्देश्य राज्य में संगठन को मजबूत करना और राजनीतिक गतिविधियों को गति देना है। सभी 117 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी बीआरपी ने पंजाब में जमीनी स्तर पर व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाने की बात कही है। पार्टी का दावा है कि वह राज्य में एक विश्वसनीय राजनीतिक विकल्प के रूप में खुद को स्थापित करना चाहती है। पार्टी ने दोहराया कि वह पंजाब की सभी 117 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। इसके साथ ही संगठन को मजबूत करने, निर्णायक नेतृत्व देने और राज्य के भविष्य व जनता के हितों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प जताया है।  

एयर इंडिया एक्सप्रेस की वापसी, चंडीगढ़ से UAE के लिए फिर मिलेंगी सीधी उड़ानें

चंडीगढ़ शहीद भगत सिंह अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट (चंडीगढ़) से खाड़ी देशों की यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। आगामी विंटर शेड्यूल के तहत एयर इंडिया एक्सप्रेस लगभग 3 साल के लंबे अंतराल के बाद चंडीगढ़ से शारजाह और आबू धाबी के लिए अपनी सीधी हवाई सेवाएं दोबारा शुरू करने जा रही है। दोनों ही अंतरराष्ट्रीय रूटों के लिए एयरलाइन ने टिकटों की ऑनलाइन बुकिंग शुरू कर दी है। चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर मिला स्लॉट, 26 अक्टूबर तक अंतिम स्थिति होगी साफएयरपोर्ट अथॉरिटी के मुताबिक, शारजाह रूट के लिए चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर संचालन स्लॉट मंजूर हो चुका है।  हालांकि, शारजाह एयरपोर्ट पर स्लॉट आवंटन से जुड़ी कुछ अंतिम औपचारिकताएं अभी प्रक्रियाधीन हैं। एयरपोर्ट अधिकारियों का मानना है कि 26 अक्टूबर तक दोनों तरफ की सभी प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी हो जाएंगी और स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगी। योजना के तहत शारजाह की उड़ान सप्ताह में चार दिन—सोमवार, बुधवार, शुक्रवार और रविवार को संचालित की जाएगी। फ्लाइट शेड्यूल और अनुमानित किराया (3 मुख्य बिंदु) चंडीगढ़–शारजाह रूट (सप्ताह में 4 दिन): प्रस्थान व आगमन: निर्धारित शेड्यूल के अनुसार, चंडीगढ़ से यह फ्लाइट दोपहर 1:50 बजे रवाना होगी और शारजाह के स्थानीय समयानुसार शाम 4:50 बजे पहुंचेगी। वापसी: वापसी में फ्लाइट शाम 5:50 बजे शारजाह से उड़ान भरकर रात 11:05 बजे चंडीगढ़ पहुंचेगी। किराया: फ्लेक्सी फेयर प्रणाली के आधार पर इस रूट का शुरुआती किराया लगभग ₹23,169 निर्धारित किया गया है। चंडीगढ़–आबू धाबी रूट: प्रस्थान व आगमन: चंडीगढ़ से यह उड़ान सुबह 11:59 बजे रवाना होकर आबू धाबी के स्थानीय समय के अनुसार दोपहर 3:00 बजे पहुंचेगी। वापसी: वापसी में यह फ्लाइट आबू धाबी से सुबह 4:30 बजे उड़ान भरकर सुबह 9:40 बजे चंडीगढ़ लैंड करेगी। किराया: इस रूट पर फ्लेक्सी फेयर के तहत एक तरफ का किराया करीब ₹21,150 रखा गया है। सीधी कनेक्टिविटी से यात्रियों को सहूलियत: इन दोनों प्रमुख अंतरराष्ट्रीय सेवाओं की बहाली से पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और चंडीगढ़ के यात्रियों को दिल्ली जाए बिना सीधे संयुक्त अरब अमीरात (UAE) पहुंचने की सुविधा मिलेगी। क्यों बंद की गई थीं ये उड़ानें? अक्टूबर 2023 में बंद हुई थी शारजाह सेवा: एयर इंडिया एक्सप्रेस ने कम यात्री भार (लो पैसेंजर लोड) का हवाला देते हुए अक्टूबर 2023 में चंडीगढ़-शारजाह उड़ान को स्थगित कर दिया था। उस समय एयरपोर्ट प्रबंधन द्वारा आग्रह के बावजूद इसे बहाल नहीं किया गया था। पश्चिम एशिया तनाव के चलते रुकी थी आबू धाबी उड़ान: खाड़ी क्षेत्र में उपजे युद्ध जैसे हालात और सुरक्षा चिंताओं के कारण 28 मार्च से चंडीगढ़-आबू धाबी सेवा को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया गया था। अब स्थिति सामान्य होने पर एयरलाइन ने इसे अपने विंटर शेड्यूल में फिर से शामिल किया है।

झोटा मर्डर केस में बढ़ा विवाद, परिवार की मांगों पर CM मान ने बुलाई हाईलेवल मीटिंग

मानसा मानसा में एंटी ड्रग एक्टिविस्ट परविंदर झोटा की हत्या के चौथे दिन भी परिवार और लोगों का धरना जारी है। परिवार सीएम भगवंत मान और डीजीपी गौरव यादव के इस्तीफे, सीबीआई जांच समेत 5 मांगों पर अड़ा हुआ है। प्रशासन कई बार परिवार से बातचीत कर चुका है, लेकिन अभी कोई निर्णय नहीं हुआ।  पिता भीम सिंह का कहना है कि मांगें पूरी होने के बाद ही बेटे की डेडबॉडी लेंगे। अभी तक शव का पोस्टमॉर्टम भी नहीं हुआ है। शव मानसा के सिविल अस्पताल में रखा हुआ है। गुरुवार में हत्या के विरोध में पंजाब बंद रहा। प्राइवेट स्कूल-कॉलेज के साथ बाजार बंद रहे। किसान संगठनों ने नेशनल हाईवे जाम किए। पुलिस ने किसान नेताओं को हिरासत में भी लिया। लुधियाना में प्रदर्शन के दौरान CM मान का होर्डिंग उतारने पोल पर चढ़े युवक की करंट लगने से मौत हो गई। उधर, मामला बढ़ता देख सीएम मान ने आज हाई लेवल मीटिंग बुलाई है। वहीं, मानसा लक्ष्मी नारायण मंदिर में शहर के लोगों और सीनियर पुलिस अधिकारियों की भी मीटिंग तय है। झोटा की 13 अक्टूबर को नशा बेचने का विरोध करने पर मेडिकल स्टोर मालिक अश्विनी कुमार ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। पुलिस अश्विनी कुमार के साथ उसकी पत्नी नीलम रानी और मदद करने वाले को गिरफ्तार कर चुकी है। उसे 7 दिन की पुलिस रिमांड पर लिया गया है। मानसा के एसएसपी वैभव चौधरी ने कहा कि अश्विनी ने वारदात के बाद अपना मोबाइल फोन फेंक दिया था। अश्विनी ने आखिरी कॉल अपने चाचा को की थी, जबकि अपने बेटे को चार कॉल की थीं। ड्रग इंस्पेक्टर से देर रात तक पूछताछ इस मामले में आरोपी मेडिकल संचालक अश्विनी कुमार के लाइसेंस रिन्यूअल को लेकर स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है। संबंधित ड्रग इंस्पेक्टर नरेश की भूमिका भी जांच के दायरे में बताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, डायरेक्टर हेल्थ सर्विसेज और मानसा के डिप्टी कमिश्नर ने मामले से जुड़ा रिकॉर्ड तलब किया है। वहीं, ड्रग इंस्पेक्टर से देर रात तक पूछताछ किए जाने की जानकारी सामने आई है। जांच का मुख्य बिंदु यह है कि मेडिकल संचालक के खिलाफ मामले दर्ज होने और शिकायतें मिलने के बावजूद उसके मेडिकल स्टोर का लाइसेंस बार-बार कैसे रिन्यू होता रहा। विभागीय अधिकारी यह पता लगाने में जुटे हैं कि लाइसेंस रिन्यूअल के दौरान संबंधित नियमों और प्रक्रियाओं का पालन किया गया था या नहीं। मामले में अब तक क्या-क्या हुआ…     मेडिकल स्टोर पर गोली मारकर हत्या: 13 अक्टूबर मानसा में मेडिकल स्टोर पर नशे की बिक्री को लेकर परविंदर सिंह झोटा और दुकान मालिक अश्विनी कुमार के बीच विवाद हुआ। झोटा फेसबुक पर लाइव थे। इसी दौरान अश्विनी ने उन पर गोलियां चला दीं। झोटा की मौत हो गई और उनके चार साथी घायल हुए।     मुख्य आरोपी राजस्थान से गिरफ्तार: 14 अक्टूबर को पुलिस ने आरोपी अश्विनी कुमार को राजस्थान के सालासर से गिरफ्तार किया। मामले में एफआईआर दर्ज हुई। पुलिस ने एक अन्य व्यक्ति को भी आरोपी की फरारी में मदद करने के आरोप में पकड़ा।     मेडिकल स्टोर में तोड़फोड़, घर का हिस्सा गिराया: 14 अक्टूबर को हत्या के विरोध में लोगों ने आरोपी के मेडिकल स्टोर में तोड़फोड़ कर आग लगा दी। प्रशासन ने बुलडोजर चलाकर उसके घर का एक हिस्सा अवैध निर्माण का हवाला देकर गिराया।     परिवार ने अंतिम संस्कार रोका, रखीं मांगें: झोटा के पिता भीम सिंह ने इंसाफ मिलने तक अंतिम संस्कार नहीं करने की बात कही। परिवार ने सीबीआई जांच, पीजीआई चंडीगढ़ के डॉक्टरों के बोर्ड से पोस्टमॉर्टम और मुख्यमंत्री भगवंत मान व डीजीपी गौरव यादव के इस्तीफे समेत 5 मांगें रखीं।     पंजाब बंद, बाजार-हाईव बंद किए: 15 अक्टूबर को पंजाब बंद रखा गया। कई जगह बाजार बंद रहे और धरने हुए। किसान संगठनों, विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने बंद का समर्थन किया। स्कूल, बाजार और हाईवे बंद किए गए। झोटा के पिता ने बंद को सफल बनाने के लिए लोगों का धन्यवाद किया और अगले दिन से दुकानें खोलने की अपील की।     पत्नी भी नामजद, थाना प्रभारी सस्पेंड: मानसा के SSP वैभव चौधरी ने बताया कि आरोपी की पत्नी नीलम रानी की भी भूमिका सामने आने के बाद उसे भी मामले में नामजद कर गिरफ्तार किया गया। थाना सिटी-2 की प्रभारी बेअंत कौर को सस्पेंड कर दिया गया। वहीं DSP हरजिंदर सिंह गिल के खिलाफ जांच के लिए DGP ऑफिस को सिफारिश की गई है।     हाईकोर्ट पहुंचा मामला, सीबीआई जांच की मांग: हत्या की जांच सीबीआई को सौंपने के लिए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई। याचिका में पुलिस की भूमिका के साथ मेडिकल स्टोर के ड्रग लाइसेंस और आरोपी के हथियार लाइसेंस की स्वतंत्र जांच की मांग भी की गई। मामले दर्ज होने के बाद लाइसेंस जारी किया अश्विनी के खिलाफ पांच मामले दर्ज होने के बावजूद जिला प्रशासन ने 21 अगस्त 2024 को उसका हथियार लाइसेंस जारी किया था। खास बात यह है कि लाइसेंस की सिफारिश करते समय पुलिस रिकॉर्ड में इन मामलों का उल्लेख भी किया गया था। अश्विनी कुमार के खिलाफ वर्ष 2013 से 2026 तक कुल 6 एफआईआर दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। इनमें से दो मामलों में उसे अदालत से बरी किया जा चुका है, जबकि तीन मामले धारा 188 के तहत दर्ज होने की बात कही गई है। छठा मामला 14 अक्टूबर 2026 को झोटा हत्याकांड के संबंध में दर्ज किया गया। जानकारी के अनुसार, अश्विनी के पास 7.62 एमएम की पिस्टल और 12 बोर की गन थी। लाइसेंस की वैधता 21 अगस्त 2024 से 20 अगस्त 2029 तक थी। उसे एक बार में 50 कारतूस खरीदने और सालभर में अधिकतम 100 कारतूस खरीदने की अनुमति भी दी गई थी।

भगवंत मान की फ्रांस यात्रा पर विवाद, हाईकोर्ट पहुंचा मामला

चंडीगढ़  पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की प्रस्तावित फ्रांस यात्रा को केंद्र सरकार से मंजूरी नहीं मिलने के मामले में आज पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में आज सुनवाई होगी। पंजाब सरकार ने गुरुवार को विदेश मंत्रालय के फैसले को चुनौती देते हुए याचिका दायर की थी। पंजाब सरकार ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री की यात्रा के लिए सभी जरूरी औपचारिकताएं पूरी करने के बावजूद मंजूरी नहीं दी गई। विदेश मंत्रालय के ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन के सामने केवल ‘डिनाइड’ यानी अस्वीकृत लिखा दिखाई दिया। आवेदन खारिज करने का कोई कारण नहीं बताया गया और न ही अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया। अब विस्तार से पढ़िए याचिका में क्या कहा गया 15 से 21 अक्टूबर तक फ्रांस जाना था प्रतिनिधिमंडल पंजाब सरकार की याचिका के अनुसार, मुख्यमंत्री भगवंत मान, मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव को 15 से 21 अक्टूबर तक फ्रांस जाना था। प्रतिनिधिमंडल को पेरिस में आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय खाद्य व्यापार मेले एसआईएएल पेरिस-2026 में शामिल होना था। यह प्रदर्शनी 17 से 21 अक्टूबर तक आयोजित होनी है। यात्रा का उद्देश्य पंजाब के कृषि और खाद्य प्रसंस्करण से जुड़े उत्पादों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में व्यापार की संभावनाएं तलाशना और राज्य के उत्पादों को विदेशी खरीदारों तक पहुंचाने के अवसर बढ़ाना था। सभी औपचारिकताएं पूरी की थीं याचिका में पंजाब सरकार ने बताया कि यात्रा की मंजूरी के लिए 3 सितंबर और 8 सितंबर को पत्र भेजे गए थे। इसके बाद 9 सितंबर को ऑनलाइन आवेदन भी किया गया। सरकार के मुताबिक, फ्रांस में भारतीय मिशन से बातचीत, प्रशासनिक मंजूरी और कैडर क्लीयरेंस जैसी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई थीं। सरकार ने यह भी बताया कि यात्रा का खर्च मार्कफेड की ओर से उठाया जाना था। मार्कफेड का पेरिस में आयोजित प्रदर्शनी में एपीडा के इंडिया पवेलियन के तहत स्टॉल भी था। अब हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार का जवाब महत्वपूर्ण होगा। अदालत यह देखेगी कि यात्रा की मंजूरी नहीं देने के मामले में केंद्र का क्या पक्ष है। मार्कफेड को मेले में मिला था स्टॉल याचिका में बताया गया है कि पंजाब स्टेट कोऑपरेटिव सप्लाई एंड मार्केटिंग फेडरेशन लिमिटेड (मार्कफेड) को इस प्रदर्शनी में स्टॉल आवंटित किया गया है। यह स्टॉल कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के इंडिया पवेलियन में दिया गया है। एपीडा केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधीन काम करता है। सितंबर में ही शुरू कर दी थी मंजूरी की प्रक्रिया पंजाब सरकार की याचिका के मुताबिक, विदेश मंत्रालय से राजनीतिक मंजूरी लेने के लिए 3 और 8 सितंबर को पत्र भेजे गए थे। इसके अलावा 9 सितंबर को ऑनलाइन आवेदन भी जमा कराया गया था। सरकार का कहना है कि यात्रा से करीब पांच सप्ताह पहले ही मंजूरी की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी। याचिका में यह भी कहा गया है कि फ्रांस स्थित भारतीय मिशन से सलाह-मशविरा करने के बाद प्रशासनिक मंजूरी और कैडर क्लीयरेंस की प्रक्रिया पूरी कर ली गई थी। इसके बावजूद विदेश मंत्रालय के पोर्टल पर आवेदन को अस्वीकृत दिखा दिया गया। कारण नहीं बताने पर फैसले को दी चुनौती पंजाब सरकार ने आरोप लगाया है कि विदेश मंत्रालय ने मंजूरी नहीं देने का कोई कारण नहीं बताया। सरकार को अपना पक्ष रखने का अवसर भी नहीं दिया गया। इसी आधार पर राज्य सरकार ने इस फैसले को मनमाना बताते हुए संबंधित आदेश रद्द करने और फ्रांस यात्रा के लिए उचित राहत देने की मांग की है। प्रतिनिधिमंडल को 15 अक्टूबर को फ्रांस के लिए रवाना होना था। यात्रा की तारीख नजदीक होने के कारण पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट से मामले की जल्द सुनवाई करने का आग्रह किया। हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को शुक्रवार सुबह तक जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।  

झारखंड के मिनी लंदन में 22 अक्टूबर को सजेगा भूत मेला, जुटेंगे श्रद्धालु

 रांची  झारखंड के मिनी लंदन कहे जाने वाले मैक्लुस्कीगंज क्षेत्र के इतिहास और लोक-परंपरा में विशेष स्थान रखने वाला ऐतिहासिक “भूत मेला” इस बार 22 अक्टूबर को पूरी भव्यता के साथ आयोजित किया जाएगा। मेले की तिथि को लेकर बना असमंजस अब पूरी तरह दूर हो चुका है, जिसके बाद ग्रामीणों और मेला समिति ने आपसी विचार-विमर्श के बाद सर्वसम्मति से इस तारीख पर मुहर लगा दी है। आयोजन की तैयारियों को लेकर स्थानीय स्तर पर सरगर्मी काफी तेज हो गई है। क्या है इस मेले की खासियत? मैक्लुस्कीगंज थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले हेसालौंग गांव में यह मेला हर साल दशहरा के ठीक बाद (एकादशी तिथि के आसपास) पारंपरिक रूप से आयोजित किया जाता है। हालांकि इसे स्थानीय और लोक-भाषा में भूत मेला (जतरा) के नाम से जाना-बुलाया जाता है, लेकिन यह मुख्य रूप से क्षेत्र की गहरी धार्मिक आस्था, लोक-परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का एक अनूठा प्रतीक है। वर्षों से चली आ रही इस परंपरा का गवाह बनने के लिए न सिर्फ हेसालौंग और खलारी कोयलांचल, बल्कि दूर-दराज के इलाकों और अन्य जिलों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु, पर्यटक और ग्रामीण पहुंचते हैं। व्यापार और सामाजिक मेल-मिलाप का बड़ा केंद्र यह मेला सिर्फ आस्था का केंद्र नहीं है, बल्कि यह स्थानीय आर्थिकी और सामाजिक सौहार्द का भी एक बड़ा माध्यम है। मेले में खिलौने, मिठाइयां, श्रृंगार सामग्री, दैनिक उपयोग की वस्तुएं और पारंपरिक खान-पान की दर्जनों दुकानें सजती हैं, जिससे स्थानीय कारोबारियों और व्यापारियों को अच्छा व्यापारिक अवसर मिलता है।  खलारी और मैक्लुस्कीगंज के इस पारंपरिक आयोजन में आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों का मिलना-जुलना होता है, जो आपसी भाईचारे और सांस्कृतिक ताने-बाने को मजबूत करता है। जोर-शोर से चल रही हैं तैयारियां मेले को ऐतिहासिक, भव्य और पूरी तरह व्यवस्थित बनाने के लिए ग्रामीण और मेला समिति के सदस्य दिन-रात जुटे हुए हैं। समिति ने क्षेत्र के सभी नागरिकों, प्रबुद्ध जनों और आसपास के गांवों के लोगों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर इस पारंपरिक और सांस्कृतिक आयोजन को सफल बनाएं। आयोजन को सफल बनाने में कुलदीप साहू, अनिल प्रसाद साहू, मनोज प्रसाद साहू, शिवदेव प्रसाद साहू, पंकज प्रसाद साहू, महेश प्रसाद साहू, संजय प्रसाद साहू, राजू प्रसाद साहू, सूरज प्रसाद साहू, विवेक साहू समेत क्षेत्र के कई गणमान्य ग्रामीण सक्रिय रूप से अपनी भूमिका निभा रहे हैं।