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मानव सेवा दिवस: कॉलेज में हुई प्रेरक गतिविधियों की झलक, विद्यार्थियों ने की मदद की पहल

समराला  गुरु गोबिंद सिंह खालसा कॉलेज फॉर वूमेन झाड़ साहिब में आज भाई घनैया मानव सेवा दिवस श्रद्धा सहित मनाया गया। गुरु साहिबान द्वारा दिखाए सरबत दा भला के मार्ग पर चलते हुए भाई घनैया जी ने 1704 ई. में श्री आनंदपुर साहिब की लड़ाई के दौरान बिना किसी भेदभाव के सबमें परमात्मा का रूप देखते हुए घायलों को पानी पिलाया और आवश्यकता अनुसार मरहम-पट्टी की। उनकी महान सेवाओं से विद्यार्थियों को परिचित करवाने के लिए हर साल 20 सितंबर को मानव सेवा दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर पर कॉलेज के धार्मिक अध्यापक द्वारा उन के जीवन और सेवा के संकल्प के संबंध में छात्राओं के साथ विचार साझा किए गए और उन्हें निःस्वार्थ सेवा भाव अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। इसके उपरांत डॉ. अंजू खुराना, ग्रामीण चिकित्सा अधिकारी झाड़ साहिब ने छात्राओं को प्राथमिक चिकित्सा सहायता संबंधी जानकारी दी। इस मौके पर कॉलेज प्राचार्या डॉ. रजिंदर कौर ने कहा कि हमें भाई साहिब द्वारा दिखाए मार्ग पर चलते हुए मेरा-तेरा की रेखा मिटाकर तन-मन-धन से मानवता में एक परमात्मा को अनुभव करते हुए सेवा और सिमरन से जीवन को सफल बनाना चाहिए।

पाकिस्तान टीम पर PCB चीफ का ऐसा मज़ाक, हंसते-हंसते नहीं रोक पाएंगे आप

नई दिल्ली  एशिया कप में भारत से सुपर 4 मैच से पहले पाकिस्तानी टीम की हालत बहुत खराब है। लीग स्टेज में टीम इंडिया ने जिस तरह से एकतरफा अंदाज में पाकिस्तान को पीटा, उससे लगता है पड़ोसियों देश के खिलाड़ियों के हौसले पस्त हो गए हैं। तभी तो भारत के साथ सुपर 4 मैच से पहले पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड को डॉक्टर राहील नाम के एक मॉटिवेशनल स्पीकर की सेवा लेनी पड़ी है। इस बीच पीसीबी के एक पूर्व चीफ नजम सेठी ने पाकिस्तानी टीम का मजाक उड़ाते हुए कहा है कि मनोचिकित्सक भी उन्हें नहीं सिखा सकता। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक पीसीबी ने मॉटिवेशन स्पीकर नहीं, बल्कि एक मनोचिकित्सक को नियुक्त किया है। कुछ उन्हें मनोवैज्ञानिक बता रहे हैं। जो भी हो, उनको इसलिए लाया गया है कि वह पाकिस्तानी खिलाड़ियों के मेंटल हेल्थ का ध्यान रख सकें। इसे लेकर पीसीबी के पूर्व चीफ नजम सेठी ने कहा है कि मनोचिकित्सक भी पाकिस्तानी खिलाड़ियों को कुछ नहीं सिखा सकता क्योंकि वो जो अंग्रेजी में कहेगा उसे खिलाड़ी समझ ही नहीं पाएंगे। सेठी ने ये बातें पाकिस्तानी न्यूज चैनल समा टीवी पर कही और उसका क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल है। सेठी ने कहा, ‘मैंने अपने कार्यकाल में इसकी कोशिश (मनोचिकित्सक की नियुक्ति) की थी लेकिन खिलाड़ी इस तरह की चीजों को स्वीकार नहीं करते हैं। इसकी वजह ये है कि हमारे यहां कल्चर नहीं है कि आप थेरेपी में जाएं।' उन्होंने आगे कहा, 'ये समझा जाता है कि हमारी बहुत बेइज्जती हो रही है कि साइकिएट्रिस्ट के पास जाना है। यहां जब बात होती है साइकिएट्रिस्ट की तो लोग कहते हैं कि पागल हो गया है, साइकिएट्रिस्ट के पास ट्रीटमेंट चल रहा है।’ पीसीबी के पूर्व चीफ ने कहा, ‘यहां मेंटल हेल्थ का ये मतलब है कि पागल है या नहीं पागल है… लेकिन यहां सबसे रोचक बात ये है कि इनमें से ज्यादातर एक्सपर्ट विदेश से पढ़े-लिखे होते हैं। अंग्रेजी उनकी जुबान है। हमारे जो बेचारे बच्चे हैं, उनकी अंग्रेजी जुबान नहीं है। उन्हें पंजाबी या पश्तो में समझाना पड़ता है।’ नजम सेठी ने पाकिस्तानी टीम का एक तरह से मजाक उड़ाते हुए कहा, 'उनकी पृष्ठभूमि, उनका क्लास या उचित शिक्षा की कमी एक अन्य मसला है। साइकिएट्रिस्ट (मनोचिकित्सक) भी रातों रात उनको कुछ नहीं सिखा सकता।'  

न्यायपालिका में नई पहचान: पवन कुमार बजंथरी ने ली पटना हाईकोर्ट की कमान

पटना  पटना उच्च न्यायालय को नया मुख्य न्यायाधीश मिल गया है। पवन कुमार बजंथरी ने पटना हाईकोर्ट के नए चीफ जस्टिस के तौर पर पद औऱ गोपनीयता की शपथ ले ली है। बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने पवन कुमार बजंथरी को शपथ दिलाई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस शपथ ग्रहण समारोह में शामिल थे। सीएम नीतीश कुमार ने शपथ ग्रहण समारोह की कुछ तस्वीरें भी शेयर की हैं। इन तस्वीरों को शेयर कर सीएम नीतीश कुमार ने लिखा, ‘ पटना उच्च न्यायालय के माननीय मुख्य न्यायाधीश (मनोनीत) न्यायमूर्ति पवन कुमार भीमप्पा बजंथरी जी के शपथ ग्रहण समारोह में सम्मिलित हुआ।’ पवन कुमार बजंथरी 27 अगस्त, 2025 से पटना उच्च न्यायालय के कार्यकारी न्यायाधीश के तौर पर अपना दायित्व संभाल रहे थे। दरअसल तत्कालीन मु्ख्य न्यायाधीस जस्टिस बिपुल एम. पंचोली के सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत होने के बाद से यह रिक्त हो गया था। जिसके बाद पवन कुमार बजंथरी पटना उच्च न्यायालय के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश का कार्यभार संभाल रहे थे। अब पटना में शपथ ग्रहण के बाद वो पू्र्णकालिक मुख्य न्यायाधीश के तौर पर पटना उच्च न्यायालय में न्यायिक प्रशासन का नेतृत्व करेंगे। जानकारी के मुताबिक, कर्नाटक में जन्मे पवन कुमार बजंथरी ने बेगलुरु के एलजेआरसी लॉ कॉलेज से कानून की पढ़ाई की थी। इससे पहले वो कर्नाटक हाईकोर्ट के जज रह चुके हैं। आपको बता दें कि हाल ही में पी.बी बजंथरी को लेकर पटना हाईकोर्ट के वकीलों की नाराजगी भी सामने आई थी। दरअसल दो वकीलों पर हुए कथित हमले में उचित कार्रवाई नहीं करने को लेकर वकील पी.बी. बजंथरी से खफा थे। उच्च न्यायालय अधिवक्ता संघ समन्वय समिति के अनुसार यह कदम तब उठाया गया जब अधिवक्ता अंशुल आर्यन और उनकी पत्नी मनोग्या सिंह के साथ एक निजी स्कूल के कर्मचारियों द्वारा अदालत जाते समय कथित तौर पर मारपीट की गई। वकीलों ने कहना था कि 10 सितंबर को कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश बजंथरी और न्यायमूर्ति आलोक कुमार सिन्हा की पीठ ने सुनवाई के दौरान आदेश पर सवाल उठाते हुए थाना प्रभारी की व्यक्तिगत उपस्थिति का निर्देश हटा दिया था।  

मोहनलाल को मिलेगा दादा साहेब फाल्के पुरस्कार, सिनेमा जगत में खुशी की लहर

नई दिल्ली, साउथ सिनेमा के सुपरस्टार मोहनलाल की फैन फॉलोइंग बेहद मजबूत है। 5 राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, 9 स्टेट अवॉर्ड, पद्म भूषण और पद्मश्री जैसे सम्मानों से नवाजे जा चुके मोहनलाल अब तक 400 से ज्यादा फिल्मों में अभिनय कर चुके हैं। भारतीय सिनेमा में उनके अभूतपूर्व योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें दादा साहेब फाल्के पुरस्कार 2023 से सम्मानित करने की घोषणा की है। इस ऐलान के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उन्हें शुभकामनाएं दीं। सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने कहा कि चयन समिति की सिफारिश पर मोहनलाल को दादा साहेब फाल्के पुरस्कार दिया जाएगा। मंत्रालय ने उनके शानदार फिल्मी सफर को प्रेरणादायक बताते हुए कहा कि उनकी बेमिसाल प्रतिभा और मेहनत ने भारतीय सिनेमा के इतिहास में कई कीर्तिमान स्थापित किए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर मोहनलाल के साथ एक तस्वीर शेयर की और लिखा, मोहनलाल जी केरल की संस्कृति के प्रति गहरी आस्था रखते हैं। वे मलयालम सिनेमा और रंगमंच के अग्रदूत हैं और तेलुगु, तमिल, कन्नड़ व हिंदी फिल्मों में भी बेहतरीन अभिनय कर चुके हैं। उनका सिनेमाई कौशल सचमुच प्रेरणादायक है। दादा साहेब फाल्के पुरस्कार मिलने पर उन्हें हार्दिक बधाई। उनकी उपलब्धियां आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहें। कब मिलेगा पुरस्कार? यह प्रतिष्ठित सम्मान मोहनलाल को 23 सितंबर 2025 को 71वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में प्रदान किया जाएगा। 1980 में फिल्मी करियर की शुरुआत करने वाले मोहनलाल ने 45 वर्षों में करीब 400 फिल्में की हैं, जिनमें से ज्यादातर हिट साबित हुईं। गौरतलब है कि पिछले साल यह पुरस्कार बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती को दिया गया था।  

अब दिल्ली में गाड़ियां बिना रुके दौड़ेंगी, जानें सरकार का हाईटेक ट्रैफिक समाधान

नई दिल्ली  दिल्ली को ट्रैफिक जाम से राहत दिलाने और रिंग रोड को बेहतर बनाए रखने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. लोक निर्माण विभाग (PWD) ने रिंग रोड के रखरखाव और मरम्मत को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए इसे आठ हिस्सों में बांटने का फैसला किया है. प्रत्येक हिस्से की जिम्मेदारी चीफ इंजीनियर स्तर के अधिकारी को सौंपी गई है. दिल्ली को भीड़भाड़ से मुक्त बनाने के लिए बनाए गए रिंग रोड को बेहतर रखरखाव और मरम्मत के लिए आठ हिस्सों में बांटकर किया गया है.प्रत्येक हिस्सों की निगरानी के लिए एक चीफ इंजीनियर स्तर के अधिकारी नियुक्त किया जाएगें. 48 किलोमीटर लंबी रिंग रोड पर 14 से अधिक बड़े जंक्शन हैं, जहां अक्सर जाम की स्थिति बनती है. सड़कों की खराब स्थिति, नालियों की गंदगी और हरित क्षेत्र की उपेक्षा को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही थीं. इसी को ध्यान में रखते हुए लोक निर्माण मंत्री प्रवेश वर्मा ने हाल ही में अधिकारियों के साथ रिंग रोड का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया और कई निर्देश दिए. अब लोक निर्माण विभाग के विशेष सचिव ने एक आदेश जारी कर कहा है कि रिंग रोड के प्रत्येक खंड की नियमित निगरानी की जाएगी. इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य अधिकारियों की टालमटोल प्रवृत्ति पर रोक लगाना और उनकी जवाबदेही तय करना है. दिल्ली रिंग रोड सुधार योजना के तहत जिन इलाकों को आठ हिस्सों में बांटा गया है, उनमें शामिल हैं पहला प्रगति मैदान से कश्मीरी गेट ब्रिज तक है. दूसरा सिविल लाइंस से मुकरबा चौक तक है. तीसरा शालीमार बाग ब्रिज से ब्रिटानिया चौक तक है. चौथा पंजाबी बाग से मानसरोवर गार्डन तक है. पांचवां मायापुरी फ्लाईओवर से दिल्ली कैंट तक है. छठा धौला कुआं से वर्ल्ड ट्रेड सेंटर तक है. सातवां सरोजिनी नगर से लाजपत नगर पुल तक है. आठवां श्रीनिवासपुरी से मिलेनियम पार्क तक है. इस फैसले से रिंग रोड के रखरखाव की जिम्मेदारी स्पष्ट होगी और समय पर मरम्मत और सफाई सुनिश्चित होगी. सरकार का दावा है कि इससे दिल्लीवासियों को बेहतर और सुरक्षित सड़क पहुंच मिलेगी.

राजनीतिक तकरार तेज: पाठक ने राहुल और अखिलेश पर साधा निशाना

बरेली  बरेली पहुंचे यूपी के उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने रविवार को समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया पर कटाक्ष करते हुए कहा कि अखिलेश यादव की पार्टी सत्ता में जब भी आई, राज्य में जंगल राज कायम रहा। उप्र में पुलिस मुठभेड़ पर सपा प्रमुख के आरोपों पर करारा प्रहार करते हुए पाठक ने कहा कि जब-जब अखिलेश यादव की पार्टी सत्ता में आई, उनकी सत्ता में गुंडे माफिया फले फूले, लेकिन जब हम सत्ता में आए तब गुंडे माफिया प्रदेश छोड़कर भागने पर मजबूर हो गए। राहुल गांधी पर हमला बोलते हुये पाठक ने कहा कि राहुल गांधी को स्वयं ही नहीं पता है कि वह कहां खड़े हैं और क्या करना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री के जन्म दिवस से लेकर महात्मा गांधी की जयंती तक सेवा पखवाड़ा के रूप में मनाया जा रहा है और आज देश भर में मैराथन दौड़ का आयोजन किया गया है। पाठक ने बताया कि मैराथन दौड़ में हजारों की तादाद में युवा अपनी भागीदारी दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि सेवा पखवाड़े में जन-जन की सेवा के तहत कार्य किया जा रहा है, जिसका फायदा सीधे तौर पर जनता को मिल रहा है। डिप्टी सीएम ने मैराथन दौड़ का किया शुभारंभ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में मनाए जा रहे सेवा पखवाड़ा के तहत रविवार को बरेली में स्पोर्ट्स स्टेडियम में नमो मैराथन दौड़ का आयोजन किया गया। पांच किलोमीटर की इस मैराथन दौड़ का शुभारंभ डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने हरी झंडी दिखाकर किया। ‎भाजपा युवा मोर्चा महानगर के तत्वावधान में आयोजित नमो युवा रन के आयोजन में हजारों की संख्या में शामिल हुए बच्चों ने इस पांच किलोमीटर लंबी मैराथन में जोश और उत्साह के साथ हिस्सा लिया। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने सुबह 6:30 बजे दौड़ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह मैराथन स्टेडियम से शुरू होकर आईवीआरआई गेट तक गई और वहीं से वापस लौटकर स्टेडियम में समाप्त हुई। प्रतियोगिता में प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को क्रमशः 5100, 3100, 2100 के नकद पुरस्कार दिए गए। तीन अन्य प्रतिभागियों को प्रोत्साहन पुरस्कार स्वरूप 1000-1000 की धनराशि दी गई। इसके साथ ही सभी प्रतिभागियों को टी-शर्ट और प्रतिभाग प्रमाणपत्र भी दिए गए। भाजयुमो महानगर अध्यक्ष अमन सक्सेना, क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी चंचल मिश्रा के नेतृत्व में आयोजन की सभी व्यवस्थाएं सुव्यवस्थित रहीं। बच्चों के लिए चाय-नाश्ता, पानी और मेडिकल सुविधा की पूरी तैयारी पहले से की गई थी।  

नोबेल मेरे लिए बनता है – US राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत-पाक संघर्ष को बताया रोकथाम का कारण

न्यूयॉर्क/वाशिंगटन  अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत-पाकिस्तान संघर्ष को व्यापार के माध्यम से सुलझाने का एक बार फिर दावा किया और कहा कि उन्हें ‘‘सात युद्धों को समाप्त कराने'' के लिए नोबेल शांति पुरस्कार मिलना चाहिए। ट्रंप ने कहा, ‘‘वैश्विक मंच पर हम एक बार फिर ऐसे काम कर रहे हैं जिससे हमें उस स्तर का सम्मान मिल रहा है जो पहले कभी नहीं मिला।'' ट्रंप ने शनिवार को ‘अमेरिकन कॉर्नरस्टोन इंस्टिट्यूट फाउंडर्स डिनर' के वार्षिक कार्यक्रम में कहा, ‘‘हम शांति समझौते करा रहे हैं और युद्ध रोक रहे हैं। तो हमने भारत-पाकिस्तान और थाईलैंड-कंबोडिया के बीच युद्ध को रोका है।'' उन्होंने कहा, ‘‘भारत और पाकिस्तान के बारे में सोचिए, आप जानते हैं कि मैंने इसे कैसे रोका – व्यापार के जरिए। वे व्यापार करना चाहते हैं और मैं दोनों नेताओं का बहुत सम्मान करता हूं।'' अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया, ‘‘जरा देखिए भारत-पाकिस्तान, थाईलैंड-कंबोडिया, आर्मेनिया-अजरबैजान, कोसोवो-सर्बिया, इजराइल-ईरान, मिस्र-इथियोपिया, रवांडा-कांगो- हमने इन देशों के बीच के संघर्ष को रोक दिया और इनमें से 60 प्रतिशत को व्यापार के कारण ही रोका जा सका।'' उन्होंने कहा, ‘‘मैंने भारत से कहा था कि देखिए आप दोनों के पास परमाणु हथियार हैं। यदि आप युद्ध की शुरुआत करते हैं तो हम आपके साथ कोई व्यापार नहीं करेंगे। मेरे इतना कहने पर वे रुक गए।'' ट्रंप ने कहा, जैसा कि उन्हें बताया गया था कि यदि वह रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष को रोकने में सफल रहते है तो उन्हें नोबेल पुरस्कार मिलना ही चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘मैंने कहा, अच्छा, बाकी सातों का क्या? मुझे हर एक के लिए नोबेल पुरस्कार मिलना चाहिए तो उन्होंने कहा, अगर आप रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष रुकवा दें तो आपको नोबेल मिल जाना चाहिए। मैंने कहा कि मैंने सात युद्ध रोके हैं।''

बम्लेश्वरी धाम में उमड़ेगा आस्था का सैलाब, सुरक्षा व सुविधा के पुख्ता इंतज़ाम

 डोंगरगढ़ छत्तीसगढ़ का डोंगरगढ़ मां बम्लेश्वरी धाम एक बार फिर नवरात्र पर्व के लिए तैयार हो गया है. चैत्र और क्वांर नवरात्र में यहां लाखों श्रद्धालु देश-विदेश से माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं. इस बार भीड़ के मद्देनज़र मंदिर ट्रस्ट और जिला प्रशासन ने सुरक्षा से लेकर सुविधाओं तक हर पहलू पर खास ध्यान दिया है. शारदीय नवरात्र इस साल 22 सितंबर से शुरू होकर 2 अक्टूबर तक चलेगा. डोंगरगढ़ का यह धाम लगभग 1,600 फीट ऊंचाई पर स्थित है, जहां पहुंचने के लिए 1,000 से अधिक सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं. श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए रोपवे की व्यवस्था की गई है, हालांकि हाल ही में हुए हादसे ने सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया था. तकनीकी जांच और सुधार के बाद रोपवे को दोबारा शुरू किया गया है. इस बार ट्रस्ट ने स्पष्ट किया है कि नवरात्र में सुबह से रात तक रोपवे चलेगा और बीच-बीच में नियमित मेंटेनेंस भी होगा. डोंगरगढ़ की कहानी सदियों की आस्था और लोककथाओं का ताना-बाना है: प्राचीन काल में ‘कामावती’ (या कामाख्या नगरी) नाम से प्रसिद्ध यह स्थान लोकमान्य कथाओं के अनुसार राजा कामसेन के राज्य का केन्द्र था, जिनकी तपस्या से मां बगलामुखी/बम्लेश्वरी का यहाँ अवतरण माना जाता है; कुछ वार्ताएं इसे उज्जैन के विक्रमादित्य की कथा से भी जोड़ती हैं और स्थानीय-पुरातात्विक रेकॉर्ड व लोककथाएँ मंदिर को लगभग 2,000–2,200 वर्ष पुराना बताती हैं. ऊँचे पहाड़ी शिखर पर स्थित बड़ी बम्लेश्वरी (लगभग 1,600 फीट) और नीचे की चोटी पर स्थित छोटी बम्लेश्वरी—दोनों ने समय के साथ तीर्थयात्रा की परंपरा गढ़ी; नवरात्र में यहाँ ‘ज्योति कलश’ और श्रद्धालुओं का सैलाब इस धाम को आधुनिक समय में भी जीवित रखता है. विकास के साथ रोपवे और रेल जैसी सुविधाओं ने पहुंच आसान की है, आज मंदिर ट्रस्ट व जिला प्रशासन पारंपरिक आस्था और आधुनिक व्यवस्थाओं को संतुलित करते हुए तीर्थयात्रियों के स्वागत को व्यवस्थित करते हैं. भक्तों की सुविधा के लिए देवी ने पहाड़ी के नीचे भी छोटी बम्लेश्वरी और मंझली रणचंडी के रूप मे यहाँ स्वरूप धारण किया. यही वजह है कि यहां बड़ी और छोटी दोनों माता के मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है. नवरात्र पर्व के दौरान डोंगरगढ़ की सबसे बड़ी परंपरा है ज्योति कलश प्रज्वलन. इस साल ट्रस्ट के मुताबिक ऊपर वाले मंदिर में करीब 7,000, नीचे वाले मंदिर में 900 और शीतला माता मंदिर में 61 ज्योति कलश जलाए जाएंगे. इनमें देश के अलग-अलग राज्यों से आए भक्तों के साथ ही अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और नामीबिया जैसे देशों से भी श्रद्धालु अपनी आस्था अर्पित करेंगे. भक्तों की बढ़ती संख्या को देखते हुए ट्रस्ट ने इस बार छिरपानी में विशाल पार्किंग की व्यवस्था की है. रेलवे स्टेशन से मंदिर की दूरी महज आधा किलोमीटर है, जहां तक ऑटो या पैदल आसानी से पहुंचा जा सकता है. मंदिर परिसर और चढ़ाई वाले रास्तों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं. एसी वेटिंग हॉल, कैंटीन, ठंडे पानी की व्यवस्था और चिकित्सा बूथ जैसी सुविधाओं को और सुदृढ़ किया गया है, प्रशासन ने मेले की तैयारियां पूरी कर ली हैं. आस्था और विश्वास का प्रतीक मां बम्लेश्वरी धाम सिर्फ छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए आस्था का बड़ा केंद्र है. नवरात्र के दौरान यहां उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भीड़ इस बात का सबूत है कि भक्तों के लिए मां बम्लेश्वरी न सिर्फ आस्था का धाम हैं, बल्कि मनोकामनाओं की पूर्ति का विश्वास भी.

भूकंप की आफत: पड़ोसी देश में आए झटके, मेघालय में भी हिली ज़मीन

ढाका  भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश में रविवार को भूकंप का झटका महसूस किया गया, जिससे देश के मेघालय राज्य तक धरती हिल गई। हालांकि, राहत की बात यह है कि इससे कोई नुकसान नहीं हुआ। बांग्लादेश में रविवार को चार तीव्रता का भूकंप का झटका आया है। बांग्लादेश में भूकंप आने के बाद इसके झटके मेघालय में भी महसूस किए गए। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि बांग्लादेश से लगती मेघालय की सीमा के पास भारतीय समयानुसार पूर्वाह्न 11.49 बजे भूकंप महसूस किया गया। उन्होंने कहा कि मेघालय में किसी भी तरह के नुकसान या किसी के हताहत होने की तत्काल कोई खबर नहीं है। वहीं, गुजरात के कच्छ में भी रविवार को भूकंप का झटका महसूस किया गया। यहां 3.1 तीव्रता का भूकंप आया। आईएसआर ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि भूकंप दोपहर 12 बजकर 41 मिनट पर आया और इसका केंद्र भचाऊ से लगभग 12 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में था। सुबह लगभग छह बजकर 41 मिनट पर भी कच्छ में 2.6 तीव्रता का भूकंप आया था। सुबह आए भूकंप का केंद्र धोलावीरा से 24 किलोमीटर पूर्व-दक्षिण-पूर्व में था। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी ने बताया कि इसमें जान-माल के नुकसान की कोई खबर नहीं है। कच्छ जिला ‘अत्यधिक जोखिम’ वाले भूकंपीय क्षेत्र में स्थित है, जहां कम तीव्रता के भूकंप नियमित रूप से आते रहते हैं। कच्छ में वर्ष 2001 में आया भूकंप पिछली दो शताब्दियों में भारत का तीसरा सबसे बड़ा और दूसरा सबसे विनाशकारी भूकंप था। साल 2001 में आए भूकंप में लगभग 13,800 लोगों की मौत हो गई थी और 1.67 लाख लोग घायल हुए थे।  

डीडीए की बड़ी घोषणा: 1172 फ्लैटों के लिए बुकिंग शुरू, जल्द करें आवेदन वरना रह जाएंगे पीछे

नई दिल्ली दिल्ली में आम लोगों के लिए एक अच्छी खबर है. दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने जनसाधारण आवास योजना 2025 के तहत 1172 फ्लैटों की बिक्री प्रक्रिया शुरू कर दी है. ये फ्लैट आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और जनता श्रेणी के लिए हैं. बुकिंग प्रक्रिया सोमवार, 22 सितंबर 2025 से शुरू हो चुकी है और यह 21 दिसंबर 2025 तक जारी रहेगी. फ्लैटों का आवंटन पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर होगा डीडीए की ओर से यह योजना पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर चलाई जा रही है, यानी जो पहले आवेदन करेगा, उसे पहले फ्लैट मिलेगा. इन फ्लैटों की कीमतें अपेक्षाकृत कम रखी गई हैं ताकि आम लोग भी अपना घर बनाने का सपना पूरा कर सकें. फ्लैट कहां-कहां उपलब्ध हैं? ईडब्ल्यूएस फ्लैट्स, नरेला, लोकनायकपुरम, द्वारका सेक्टर-14, द्वारका सेक्टर-19बी और मंगलपुरी, जनता फ्लैट्स, टोडापुर और रोहिणी को आवेदन के हिसाब से आवंटित किया जाएगा. योजना का लाभ लेने से पहले जान लें ये बात योजना की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी. सभी फ्लैट्स रेडी टू मूव इन (तत्काल रहने योग्य) के आधार पर होगा. ये फ्रीहोल्ड प्रॉपर्टी होंगी. इच्छुक खरीदार साइट विजिट भी कर सकते हैं. आवेदक की वार्षिक आय 10 लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए. आवेदन के लिए ₹2500 की नॉन-रिफंडेबल रजिस्ट्रेशन फीस देनी होगी. योजना का लाभ लेने के लिए यहां से लें जानकारी इन फ्लैटों से जुड़ी सभी जानकारियां डीडीए की आधिकारिक वेबसाइट [https://dda.gov.in/](https://dda.gov.in/) पर उपलब्ध हैं. इसके अलावा, DDA के टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1800110332 पर कॉल कर जानकारी ली जा सकती है.