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नई GST दरों के लागू होने से पहले बाजार में हड़कंप, रिटेलर्स कर रहे खरीदारी

मुंबई  जीएसटी की नई दरें सोमवार से लागू होने से पहले ही बाजार में उपभोक्ता उत्पादों की कीमतों में कमी दिखने लगी है। आइसक्रीम से लेकर साबुन और शैंपू तक की चीजें दुकानों में सस्ते दामों पर उपलब्ध हो रही हैं। ब्रांड्स और रिटेलर्स लास्ट-मिनट स्टॉकिंग की रेस से बचने के साथ-साथ सकारात्मक उपभोक्ता रुझानों का लाभ उठाने की कोशिश कर रहे हैं। रिटेलर्स अपनी दुकानों को एफएमसीजी उत्पादों से तेजी से भर रहे हैं, ताकि उपभोक्ताओं को तुरंत फायदा मिल सके। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस हफ्ते कहा था कि जीएसटी परिवर्तनों के बाद 12 प्रतिशत स्लैब वाले 99 प्रतिशत सामान अब 5 प्रतिशत स्लैब में आ जाएंगे। इसमें बटर, पनीर, मिठाइयां और नमकीन स्नैक्स जैसे उत्पाद शामिल हैं। बिस्किट्स, आइसक्रीम, साबुन और टूथपेस्ट जैसे कई उत्पादों पर भी 18 प्रतिशत की जगह अब 5 प्रतिशत टैक्स लगेगा। हालांकि नई टैक्स दरें सोमवार से प्रभावी होंगी, लेकिन कंपनियां पहले से ही टैक्स के अंतर को खुद वहन करके रिटेलर्स को उत्पाद भेज रही हैं। आइसक्रीम ब्रांड बास्किन रॉबिन्स के मालिक ग्रेविस फूड्स प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ मोहित खट्टर ने कहा, "हमारे सारे बिल अब 5 प्रतिशत जीएसटी पर शिफ्ट हो चुके हैं।" पहले प्रोडक्टस दिखने का फायदा? इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, किराना उत्पाद निर्माताओं ने वितरकों और खुदरा दुकानों को चुनिंदा कम कीमत वाले उत्पाद भेजना शुरू कर दिया है। एक पर्सनल केयर कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि कम कीमत वाले हमारे कुछ बड़े पैक पहले से ही खुदरा विक्रेताओं के पास दिखाई दे रहे हैं, और हम हफ्ते के अंत तक इसे और बढ़ा देंगे। उन्होंने कहा, "ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि 22 सितंबर की सुबह कम कीमत वाले हमारे उत्पाद दुकानों में उपलब्ध हों। इन उत्पादों का बिल नई जीएसटी दरों पर दिया जा रहा है, और हम कम से कम कुछ हद तक अंतर को माफ करने को तैयार हैं।" प्रॉक्टर एंड गैंबल (पीएंडजी), हिंदुस्तान यूनिलीवर (एचयूएल), लॉरियल, आईटीसी और ब्रिटानिया जैसी प्रमुख कंपनियों ने अखबारों में विज्ञापनों या इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए नई कीमतों की घोषणा की है। पीएंडजी ने अपने हेड एंड शोल्डर्स और पैंटीन शैंपू ब्रांड, पैम्पर्स डायपर, जिलेट शेविंग क्रीम, ओल्ड स्पाइस डियोडोरेंट और विक्स डिकंजेस्टेंट की कीमतें कम कर दी हैं। वहीं, एचयूएल ने डव और क्लिनिक शैंपू, ब्रू कॉफी, किसान जैम, लक्स और लाइफबॉय साबुन की कीमतों में कटौती की है।   बिक्री में उछाल की उम्मीद क्विक-कॉमर्स और ई-कॉमर्स कंपनियां भी पहले कदम उठाने का लाभ उठाने के लिए विभिन्न श्रेणियों में बिक्री और छूट शुरू कर रही हैं। क्विक-डिलीवरी प्लेटफॉर्म स्विगी इंस्टामार्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमितेश झा ने कहा कि वे शनिवार से कई उत्पादों पर छूट देकर जीएसटी बचत का लाभ जल्दी उठा रहे हैं। त्वरित-वाणिज्य क्षेत्र में देर से आई कंपनी अमेजन नाउ अपने ऐप पर दैनिक आवश्यक वस्तुओं के लिए ‘25,000 रुपये की वार्षिक बचत’ अभियान चला रही है, साथ ही 200 रुपये तक का कैशबैक भी दे रही है। सरकार ने जीएसटी दरों को तीन मुख्य स्लैब में सरल बना दिया है: 5 प्रतिशत, 18 प्रतिशत और 40 प्रतिशत। जहां 5 प्रतिशत की दर अधिकांश दैनिक आवश्यक वस्तुओं और घरेलू सामानों पर लागू होगी, वहीं 18 प्रतिशत की दर अधिकांश अन्य उपभोक्ता उत्पादों और सेवाओं के लिए नया मानक बनेगी। लक्जरी वस्तुओं और ‘सिन’ श्रेणियों जैसे गैसयुक्त पेय और तंबाकू को 40 प्रतिशत के उच्चतम कर दायरे में रखा गया है। कंपनियां विभिन्न श्रेणियों में बिक्री सुधारने के लिए जीएसटी लाभों पर भारी निर्भर हैं, खासकर पांच तिमाहियों से चली आ रही मंदी के बाद, जब महंगाई से प्रभावित उपभोक्ताओं, विशेष रूप से शहरों में, ने या तो खपत कम कर दी थी या कम कीमत वाले पैक अपना लिए थे, जिससे बिक्री की मात्रा और मूल्य वृद्धि दोनों प्रभावित हुई थीं। उपभोग में बढ़ोतरी की संभावना सिंथॉल साबुन बनाने वाली कंपनी गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स के प्रबंध निदेशक सुधीर सीतापति ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों से उपभोग में थोड़ी नरमी रही है, लेकिन आयकर और जीएसटी उपायों के संयोजन से सभी क्षेत्रों में विकास को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा, "न केवल उन श्रेणियों को लाभ होगा जहां दरों में कमी की गई है, बल्कि उन श्रेणियों को भी लाभ होगा जहां जीएसटी में कमी नहीं की गई है, क्योंकि उपभोग और विवेकाधीन खर्चों पर कुल उपलब्ध खर्च बढ़ जाएगा।"  

बेटियों का सशक्तिकरण: CM योगी बोले, अब वे खुद तय करती हैं अपना भविष्य

लखनऊ  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को लोकभवन सभागार में नारी की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन के लिए समर्पित महत्वाकांक्षी अभियान ‘मिशन शक्ति-5.0’ का भव्य शुभारंभ किया। इस दौरान कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने कहा कि पहले बेटियां सुरक्षित नहीं थीं, लेकिन आज वे खुद अपने रास्ते बना रही हैं। उन्होंने कहा कि नारी सम्मान उनकी प्राथमिकता है, यही वजह है कि 2017 के बाद से प्रदेश में महिलाओं की स्थिति में अभूतपूर्व परिवर्तन आया है। उन्होंने कहा कि सरकार की नीयत साफ होती है तो योजनाएं खुद अपना रास्ता बना लेती हैं। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के सभी 1,647 थानों में नवस्थापित मिशन शक्ति केंद्रों का बटन दबाकर उद्घाटन किया। साथ ही, मिशन शक्ति केंद्रों की एसओपी पुस्तिकाओं, बुकलेट और ‘सशक्त नारी, समृद्ध प्रदेश’ फोल्डर का विमोचन भी किया। इस दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जनपदों के अधिकारीगण और मंत्रीगण इस ऐतिहासिक पल से जुड़े रहे। सीएम योगी ने कार्यक्रम को संबोधन करते हुए कहा कि मिशन शक्ति के पांचवें चरण का शुभारंभ करते हुए उन्हें गर्व और प्रसन्नता हो रही है। पांच साल पहले, 2020 में इस अभियान की शुरुआत के समय लोग संशय में थे कि क्या होगा, कैसे होगा, इसकी थीम क्या होगी? लेकिन मिशन शक्ति को नारी सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन से जोड़कर इसे नारी गरिमा के अनुरूप ढाला गया। आज इसके सकारात्मक परिणाम सबके सामने हैं। उन्होंने बताया कि इस अभियान ने नारी को सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन का मार्ग दिखाया है, जिसे तेजी से आगे बढ़ाया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि आजादी के बाद से 2017 तक पुलिस में महिला कार्मिकों की संख्या महज 10,000 थी, लेकिन 2017 से अब तक यह संख्या 44,000 से अधिक हो गई है। हर भर्ती में 20 प्रतिशत महिलाओं को अनिवार्य रूप से शामिल किया जा रहा है और उनकी समय पर ट्रेनिंग सुनिश्चित की जा रही है। हाल ही में संपन्न 60,200 पुलिस कार्मिकों की भर्ती में 12 हजार से अधिक महिलाएं शामिल हुई हैं, जो वर्तमान में ट्रेनिंग ले रही हैं। सीएम योगी ने कहा कि यह ‘मिशन रोजगार’ और बिना भेदभाव के नौजवानों को जोड़ने का परिणाम है कि 2017 से पहले जो ट्रेनिंग क्षमता महज 3,000 थी, उसे बढ़ाकर अब 60,000 से अधिक कर दिया गया है। सीएम योगी ने कहा कि शिक्षा और अन्य विभागों में भी महिला भर्ती को बढ़ावा दिया गया। 2017 से पहले ट्रेनिंग की कमी एक बड़ी चुनौती थी, लेकिन अब उत्तर प्रदेश में ही 60,200 से अधिक पुलिसकर्मियों की ट्रेनिंग संभव हो रही है। इसके अलावा, बेसिक शिक्षा परिषद के 1.60 करोड़ से अधिक बच्चे पढ़ रहे हैं, जबकि 2017 से पहले 70-75 फीसद बेटियां नंगे पांव और पुराने कपड़ों में स्कूल जाती थीं। एक मार्मिक घटना का जिक्र करते हुए सीएम ने बताया कि बुंदेलखंड दौरे के दौरान उन्होंने एक बच्ची से बात की, जिसने कहा, “मेरे भाई के लिए जूते आए, लेकिन मुझे नहीं, क्योंकि मैं बेटी हूं।” इस घटना ने उन्हें प्रेरित किया और अब हर बच्चे के लिए दो यूनिफॉर्म, बैग, किताबें, जूते, मोजे और स्वेटर की व्यवस्था की गई, जिसकी लागत 1,200 रुपये प्रति बच्चे है। सीएम योगी ने मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना की चर्चा करते हुए कहा कि बेटी के जन्म से स्नातक तक 25,000 रुपये का पैकेज दिया जाता है। जन्म पर 5,000 रुपये, एक वर्ष पर 2,000 रुपये (टीकाकरण के बाद), पहली और छठी कक्षा में 3,000-3,000 रुपये, नौवीं में 5,000 रुपये और 12वीं पास करने पर 7,000 रुपये दिए जाते हैं। इस योजना से 26 लाख से अधिक बेटियां सीधें लाभान्वित हो रही हैं। इसके अलावा, मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में हर बेटी को 1 लाख रुपये की सहायता दी जा रही है, जो पहले चेहरा देखकर दी जाती थी, अब बिना भेदभाव के उपलब्ध है। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, मातृ वंदना, फिट इंडिया मूवमेंट, स्वच्छ भारत मिशन (12 करोड़ शौचालय) और उज्ज्वला योजना (10 करोड़ कनेक्शन) से महिलाओं को चूल्हे के धुएं से मुक्ति मिली है, महिला स्वस्थ होगी तो परिवार सशक्त होगा। उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत (50 करोड़ लाभार्थी) और 80 करोड़ को मुफ्त राशन जैसी योजनाओं को नारी गरिमा से जोड़ा। उन्होंने कहा कि परिवार में बीमारी के समय नारी अपना आभूषण तक गिरवी रखती है, इसलिए ये योजनाएं उसके सम्मान से जुड़ी हैं। उत्तर प्रदेश ने 3 करोड़ ग्रामीण भू-अभिलेख में 1 करोड़ से अधिक महिलाओं के नाम किए और 60 लाख गरीबों को आवास उपलब्ध कराए गए। सीएम योगी ने कहा कि कोरोना काल में शुरू की गई बैंकिंग कॉरेस्पॉन्डेंस सखी योजना से 40,000 से अधिक महिलाएं हजारों करोड़ का लेन-देन कर रही हैं और मुनाफा कमा रही हैं। पोषाहार मिशन में पहले ठेकेदारों की धांधली थी, लेकिन अब 204 टेक होम राशन प्लांट से 60,000 महिलाएं 8,000 रुपये प्रति माह कमा रही हैं और 2 करोड़ बहनें लाभान्वित हो रही हैं। सीएम योगी ने कहा कि साफ नीयत से योजनाएं अपना रास्ता बनाती हैं। सीएम योगी ने महिला सुरक्षा पर जोर देते हुए कहा कि 1 जनवरी 2024 से अगर सिर्फ 2024-25 तक के मामले देखें तो 9,513 मामलों में 12,271 अपराधियों को दंडित किया गया, 12 को मृत्युदंड, 987 को आजीवन कारावास, 3,455 को 10 साल से अधिक और 817 को 10 साल से कम सजा दिलाई गई। सीएम योगी ने बरेली की एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि बाहरी अपराधियों ने महिला सुरक्षा में सेंध लगाने की कोशिश की, लेकिन पुलिस की कार्रवाई से वह चिल्लाया, “गलती से उत्तर प्रदेश आ गया, आगे नहीं करूंगा।” यह अपराधियों के लिए चेतावनी है।  

RJD-CONG की परेशानी बढ़ी: राहुल गांधी का बयान बिहार चुनाव में बना तीर

नई दिल्ली  बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए माहौल गरमाने लगा है। महागठबंधन के बड़े नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी इस बार पूरे जोर-शोर से ‘वोट चोरी’ का मुद्दा उठा रहे हैं। वे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को संस्थागत वोट चोरी का तरीका बता रहे हैं। लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि क्या इस मुद्दे पर इतनी आक्रामक राजनीति कांग्रेस और उसके सहयोगियों को फायदा देगी, या फिर यह दांव उल्टा भी पड़ सकता है? राहुल गांधी ने गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि कर्नाटक की एक विधानसभा सीट पर वोट अवैध रूप से हटाए गए, जबकि महाराष्ट्र की एक सीट पर फर्जी तरीके से जोड़े गए। उन्होंने दावा किया कि उनके पास “हाइड्रोजन बम” जैसे बड़े सबूत हैं, जिन्हें वे जल्द सार्वजनिक करेंगे। इससे पहले वे “एटम बम” छोड़ने की बात कह चुके हैं। राहुल लगातार बीजेपी और चुनाव आयोग पर हमलावर हैं। उनका कहना है कि वोटर लिस्ट में हेरफेर कर चुनाव परिणाम प्रभावित किए जा रहे हैं। हालांकि, अब तक उन्होंने चुनाव आयोग के पास औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई है। सहयोगियों की बेचैनी महागठबंधन के भीतर ही इस रणनीति को लेकर असहजता दिखाई दे रही है। राजद सूत्रों के मुताबिक, तेजस्वी यादव बेरोजगारी, पलायन, अपराध, सरकारी सेवाओं की बदहाली और पेपर लीक जैसे सीधे मुद्दों पर आक्रामक कैंपेन कर रहे हैं। इसके उलट राहुल गांधी बार-बार सिर्फ ‘वोट चोरी’ की बात कर रहे हैं। इससे संदेश एकतरफा हो रहा है और जनता के असली सरोकारों पर ध्यान कम हो रहा है। कांग्रेस के अंदर भी कुछ नेताओं को आशंका है कि यह आक्रामक रुख न सिर्फ चुनावी रणनीति को नुकसान पहुंचा सकता है, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की साख पर भी सवाल खड़े कर सकता है। जमीन पर असर कितना? राहुल गांधी ने हाल ही में वोटर अधिकार यात्रा के दौरान 16 दिन तक मार्च किया और हर सभा में वोट चोरी का मुद्दा उठाया। लेकिन जमीनी स्तर पर इसका असर कितना है? वोट वाइब के बिहार इलेक्शन 2025 सर्वे के मुताबिक, राज्य में सिर्फ 21% लोग SIR प्रक्रिया और वोट चोरी को बड़ा चुनावी मुद्दा मानते हैं। इसके विपरीत बेरोजगारी को 32% लोग सबसे अहम मुद्दा बता रहे हैं। इससे साफ है कि जनता की प्राथमिकताओं में वोट चोरी फिलहाल सबसे ऊपर नहीं है। बड़ा दांव या जोखिम? विश्लेषकों का कहना है कि राहुल गांधी ने अपनी पूरी ताकत ‘वोट चोरी’ के आरोपों पर केंद्रित कर दी है। अगर यह मुद्दा जनता के बीच उतना असरदार नहीं रहा तो इसका खामियाजा महागठबंधन को भुगतना पड़ सकता है। खासकर तब जब विपक्षी गठबंधन ने हाल के महीनों में तेजी से चुनावी गति पकड़ी थी। अब देखना होगा कि राहुल गांधी का यह “हाइड्रोजन बम” वास्तव में सत्तारूढ़ दल को झटका देता है या फिर कांग्रेस के लिए ही भारी पड़ जाता है।  

67 साल के टिम बर्टन और गर्लफ्रेंड का ब्रेकअप, 2 साल बाद टूटा रिश्ता

लॉस एंजिल्स फिल्ममेकर टिम बर्टन और इटली की खूबसूरत एक्ट्रेस मोनिका बेलुची पिछले दो साल से रिलेशनशिप में थे। खबर है कि दोनों ने अपना रिश्ता खत्म कर लिया है। दोनों का कहना है कि 'रिश्ता खत्म हुआ है, लेकिन इज़्ज़त और ख्याल हमेशा रहेगा।' टिम बर्टन और मोनिका बेलुची की पहली मुलाकात साल 2006 में कान फिल्म फेस्टिवल में हुई थी, लेकिन तब कहानी आगे नहीं बढ़ी। उस वक्त दोनों अपने-अपने पार्टनर्स के साथ कमिटेड थे। इसके बाद दोनों साल 2022 में दोबारा मिले और धीरे-धीरे उनकी लव स्टोरी आगे बढ़ी। स्पेन की गलियों से लेकर रोम फिल्म फेस्टिवल तक, दोनों की तस्वीरे सोशल मीडिया पर खूब वायरल होने लगीं। 2023 में कन्फर्म हुआ था रिश्ता साल 2023 में टिम बर्टन और मोनिका का रिलेशनशिप तब ऑफिशियल हो गया, जब दोनों रोम फिल्म फेस्टिवल में साथ नजर आए। टिम बर्टन ने मोनिका को साल 2024 में आई अपनी फिल्म Beetlejuice में ‘डेलोरेस’ का किरदार दिया था, जो 1988 की कल्ट क्लासिक फिल्म का सीक्वल है। टिम बर्टन की अथाह संपत्ति और नेट वर्थ पर्सनल लाइफ में भले ही टिम का रिश्ता टूट गया हो, लेकिन प्रोफेशनल लाइफ में उनकी चमक बरकरार है। टिम बर्टन की कुल संपत्ति करीब 100 मिलियन डॉलर (करीब8,809,935,000 करोड़ रुपये) बताई जा रही है। वह हॉलीवुड की फिल्मों में बड़ा नाम हैं और कई फिल्में डायरेक्ट-प्रोड्यूस कर चुके हैं। टिम बर्टन के पास अथाह संपत्ति है। उनके पास इंग्लैंड और अमेरिका में आलीशान प्रॉपर्टी है। हाल ही उन्होंने अपनी एक ऑक्सफोर्डशायर की प्रॉपर्टी लगभग 50 करोड़ रुपये में बेचने का ऐलान किया है। एक्टर विन्सेंट कैसल की पत्नी थीं मोनिका बेलुची टिम बर्टन 2001 से 2014 तक अभिनेत्री हेलेना बोनहम कार्टर के साथ लंबे समय तक रिलेशनशिप में रहे। दोनों ने शादी नहीं की, लेकिन उनके दो बच्चे हैं। टिम और हेलेना लंदन में पास-पास के घरों में रहते थे और कई फिल्मों में साथ काम किया। हेलेना से अलग होने के बाद, टिम ने उन्हें 166 करोड़ रुपये की एलिमनी दी थी। वहीं, मोनिका बेलुची पहले फ्रेंच एक्टर विन्सेंट कैसल की पत्नी थीं। उन्होंने 1999 में शादी की थी और 2013 में दोनो अलग हो गए थे। उनके भी दो बच्चे हैं। टिम बर्टन की जिंदगी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं लगती, एक तरफ़ प्यार और ब्रेकअप की कहानी, दूसरी तरफ दौलत और शोहरत का खेल।

पीएम पर केंद्रित विशेष गैलरी: दिल्ली विधानसभा में विभिन्न भाषाओं की किताबों का संग्राहलय

दिल्ली  विधानसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर लिखे साहित्य पर सबसे बड़ी किताब गैलरी बनाई गई है। ये पीएम के प्रेरक जीवन, शासनकाल, उपलब्धियों को एक छत के नीचे समेटे हुए है। दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने सेवा पखवाड़े के तहत इस गैलरी का उद्घाटन किया। दो अक्तूबर तक आम नागरिकों के लिए गैलरी खुली रहेगी। ये युवाओं व शोधकर्ताओं के पास पीएम के विजन से प्रेरणा लेने का खास मौका है। शीर्षक अपने प्रधानमंत्री को जानें किताब गैलरी पीएम के जीवन, शासन व भारत को विकसित बनाने के उनके संकल्प को समर्पित की गई है। विधानसभा पुस्तकालय में इसके लिए खास गैलरी बनाई गई है। इसके उद्घाटन के मौके पर विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता, उत्तर प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना, उपाध्यक्ष मोहन सिंह बिष्ट और कई विधायक मौजूद रहे। विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि यह गैलरी पीएम की प्रेरक यात्रा को एक पुस्तकालय में समेटने का अनोखा प्रयास है। यह न केवल उनकी उपलब्धियों को दर्शाती है बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है। विज्ञापन 200 से ज्यादा खास किताबें विजेंद्र ने कहा कि यह एक जीवंत दस्तावेज है जो पीएम के विजन और भारत के विकास की कहानी बयां करती है। इस संग्रह को समय के साथ और समृद्ध बनाएंगे। ये छात्रों, शोधकर्ताओं और विधायकों के लिए उपयोगी है। गैलरी में पीएम की लिखी और उनके जीवन पर आधारित करीब 200 से ज्यादा खास किताबें हैं। इनमें एग्जाम वारियर्स, मोदी एट द रेट 20, मन की बात एट द रेट 100, ज्योतिपुंज, सामाजिक समरसता और द मोदी इफैक्ट जैसी किताबें शामिल हैं। ये किताबें देशभर से जुटाई गई हैं और कई भाषाओं में उपलब्ध हैं। अगर दिल्लीवासियों के पास पीएम पर लिखी कोई किताब है तो उसे इस गैलरी में जोड़ा जाएगा।

महायुति पर सवाल: संजय राउत बोले, ज्यादातर विधायक illegitimate, जनता खोज रही जवाब

मुंबई  शिवसेना यूबीटी सांसद संजय राउत ने वोट चोरी के मुद्दे पर एक बार फिर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में ऐसे-ऐसे लोग चुनकर आए हैं जिनका कुछ अता-पता नहीं। लोग उन्हें ढूंढ रहे हैं कि कौन विधायक है। मीडिया से बातचीत में राउत ने शनिवार को कहा, 'ये लोग वोट चोरी से महाराष्ट्र में विधायक बन गए। एकनाथ शिंदे, अजित पवार या फिर बीजेपी के 90 फीसदी विधायक तो वोट चोरी बने हुए हैं। वे घपला करके बने हैं। इसलिए जनता को उनके नाम भी नहीं मालूम हैं।' संजय राउत ने कहा कि वे आकर धमकियां देते हैं तो देने दो। उन्होंने कहा, 'बीजेपी का अब यह कल्चर बन गया है। कोई जयंत पाटिल के पिता जी के बारे में बोलता है तो कोई मुझे गाली देता है। मैंने जो सवाल पूछा है उसका जवाब मिलना चाहिए। लोकतंत्र में आलोचना की जा रही है।' राउत ने कहा कि घुसकर मारने की बात करोगे तो वापस नहीं जाओगे। दरअसल, महाराष्ट्र के भाजपा विधायक गोपीचंद पडलकर ने एनसीपी (एसपी) के नेता जयंत पाटिल और उनके माता-पिता के बारे में अपमानजनक टिप्पणी की थी। भाजपा विधायक पडलकर की टिप्पणी से विवाद विपक्षी दल के अध्यक्ष शरद पवार ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को फोन कर अपनी असहमति दर्ज कराई थी। पडलकर ने संबंधित टिप्पणी हाल में सांगली जिले में अपने विधानसभा क्षेत्र जत में रैली के दौरान की थी। इससे उत्पन्न विवाद के बीच फडणवीस ने भी आपत्ति व्यक्त की और विधायक को संयम बरतने की सलाह दी। टिप्पणी के विरोध में एनसीपी (एसपी) ने पाटिल के निर्वाचन क्षेत्र सांगली के ईश्वरपुर व ठाणे में भी प्रदर्शन किया और पडलकर का पुतला जलाया। पाटिल हाल तक NCP (एसपी) के प्रदेश प्रमुख थे और वह कई वर्षों तक मंत्री रहे हैं। वह दिवंगत राजाराम पाटिल के पुत्र हैं, जो कांग्रेस के दिग्गज नेता होने के साथ ही पश्चिमी महाराष्ट्र में सहकारिता क्षेत्र के अग्रदूतों में से एक थे।  

छात्रा की सोशल मीडिया पोस्ट पर HC ने कहा नहीं रद्द करेंगे केस, पढ़ाई और ऑपरेशन सिंदूर पर बहस

मुंबई  ऑपरेशन सिंदूर पर विवादित पोस्ट के मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि छात्रा पढ़ने में अच्छी है, केवल इस आधार पर केस रद्द नहीं किया जा सकता। चीफ जस्टिस चंद्रशेखर और जस्टिस गौतम अखंड की बेंच ने कहा कि सिर्फ इसलिए कि आरोपी एक मेधावी छात्रा है और उसने अपनी परीक्षाएं अच्छे अंकों से उत्तीर्ण की है, इसका मतलब यह नहीं है कि उसके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी रद्द की जा सकती है। 19 वर्षीय छात्रा ने ऑपरेशन सिंदूर के खिलाफ पोस्ट की थी। हाई कोर्ट ने आगे कहा कि केवल पोस्ट हटा लेना और माफी मांग लेना ही काफी नहीं है। अदालत पुणे की एक छात्रा द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही जिसमें ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत-पाकिस्तान शत्रुता पर सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के लिए मई में उसके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने का अनुरोध किया गया था। उसे गिरफ्तार किया गया था लेकिन बाद में उच्च न्यायालय से जमानत मिलने के बाद उसे रिहा कर दिया गया था। शुक्रवार को छात्रा के वकील ने अदालत को बताया कि जमानत मिलने के बाद, वह परीक्षा में शामिल हुई और उसे अच्छे अंक मिले। हालांकि, बेंच ने कहा कि इसलिए कि वह एक मेधावी छात्रा है, प्राथमिकी रद्द करने का आधार नहीं हो सकता। छात्रा के वकील ने दलील दी कि पोस्ट के पीछे उसकी कोई बुरी मंशा नहीं थी और उसने तुरंत इसे हटा दिया और माफी मांग ली। हालांकि, अदालत ने कहा कि (पोस्ट को) हटाने से मामला और भी गंभीर और जटिल हो गया है। पीठ ने मामले की अगली सुनवाई दो हफ्ते बाद निर्धारित की और सरकारी वकील मनखुवर देशमुख को ‘केस डायरी’ पेश करने का निर्देश दिया। छात्रा ने 7 मई को, इंस्टाग्राम पर 'रिफॉर्मिस्तान' नाम के एक अकाउंट से एक पोस्ट को रीपोस्ट किया था, जिसमें भारत सरकार की आलोचना की गई थी। दो घंटे के भीतर, छात्रा को अपनी गलती का एहसास हुआ और कई धमकियां मिलने के बाद उसने पोस्ट हटा दिया।  

Google Gemini नहीं, WhatsApp से ही बनाइए साड़ी ट्रेंड की फोटो

नई दिल्ली   Google का Gemini Nano Banana इन दिनों इंटरनेट पर छाया हुआ है। सभी लोग इसके जरिए तरह-तरह के फोटोज बना रहे हैं। हर कोई इसकी बातें कर रहा है। इस इमेज जनरेटर और एडिटर से आप अपनी यूनिक फोटोज बना सकते हैं। इसकी मदद से अभी तक इंटरनेट पर लोगों के अपने 3D खिलौने वाली AI तस्वीरें और AI साड़ी वाली तस्वीरें शेयर की हैं। यह ट्रेंड खूब देखने को मिला। लोगों की सुविधा के लिए अब Perplexity ने Nano Banana मॉडल को अपने WhatsApp बॉट में शामिल कर लिया है। इसका मतलब है कि अब लोग व्हाट्सऐप के जरिए भी नैनो बनाना से फोटो बना पाएंगे। आइये, जानते हैं कैसे। व्हाट्सऐप से बना पाएंगे नैनो बनाना वाली फोटोज Perplexity के CEO अरविंद श्रीनिवास ने LinkedIn पर पोस्ट करके बताया है कि Perplexity के व्हाट्सऐप चैटबॉट में गूगल जेमिनी के नैनो बनाना टूल को इंटीग्रेट कर लिया गया है। अब WhatsApp के जरिए Nano Banana का यूज करके लोग आसानी से फोटो बना सकेंगे। श्रीनिवास ने एक छोटा सा वीडियो भी दिखाया है। इस वीडियो में एक यूजर Perplexity Chatbot से एक फोटो में खुद को गंजा करने के लिए कहता है। बॉट कुछ ही सेकंड में उसके दिए गए प्रॉम्प्ट के अनुसार फोटो बना रहा है। इससे यह भी पता चलता है कि Nano Banana को इस्तेमाल करने के लिए Gemini ऐप की जरूरत नहीं होगी। आप WhatsApp से फोटो बना पाएंगे। Perplexity के CEO अरविंद श्रीनिवास का कहना है कि WhatsApp के जरिए Nano Banana के इस्तेमाल से लोगों को बहुत फायदा होगा। वे आसानी से अपनी तस्वीरों में बदलाव कर सकेंगे। WhatsApp पर Nano Banana से फोटो बनाना है बहुत आसान     नैनो बनाना का व्हाट्सऐप पर यूज करने के लिए आपको सबसे पहले अपने स्मार्टफोन पर WhatsApp ओपन करना होगा।     इसके बाद सर्च बॉक्स पर टैप करें।     अब Perplexity Bot का नंबर डालें, जो +1 (833) 436-3285 है।     ऐसा करते ही आपको सर्च रिजल्ट में बॉट दिखाई देगा। बॉट पर टैप करें और चैट पर जाएं।     अब आपको चैट में अपनी पसंद की एक फोटो डालनी होगी और उसके साथ वह प्रॉम्प्ट दें, जिसके अनुसार आप बदलाव देखना चाहते हैं     फिर बस थोड़ी देर इंतजार करें और आपकी फोटो बन जाएगी। हालांकि, ध्यान रखें कि अच्छी फोटोज के लिए आपको प्रॉम्प्ट सही देना होगा, ताकि चैटबॉट आपकी बात आसानी से समझ पाए और आपके अनुसार फोटो बना सके। नैनो बनाना का यूज करके आप अलग-अलग साड़ी में या फिर स्टाइल में फोटो बना सकते हैं।

छात्र राजनीति में करारी हार: NSUI की नाकामी से कांग्रेस के लिए दिल्ली अब भी दूर

नई दिल्ली दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव के नतीजों से संकेत मिला है कि राजधानी की राजनीति में कांग्रेस की वापसी की राह अभी लंबी है। एबीवीपी की प्रचंड जीत और एनएसयूआई की कमजोर मौजूदगी से कांग्रेस का मजबूत गढ़ मानी जाने वाली छात्र राजनीति उससे लगभग पूरी तरह छिन चुकी है। इस बार कांग्रेस का छात्र संगठन केवल उपाध्यक्ष पर पर ही जीत सका, जबकि गत वर्ष वह अध्यक्ष व संयुक्त सचिव पद जीतने में सफल हो गया था। डूसू में कभी निर्णायक भूमिका निभाने वाली एनएसयूआई लगातार हाशिये पर जा रही है। इस बार के चुनाव में भी वह छात्रों के बीच प्रभावशाली प्रदर्शन करने में नाकाम रही। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह केवल चुनावी नतीजे नहीं, बल्कि दिल्ली की जमीनी राजनीति का संकेत भी है।  छात्र राजनीति से ही भविष्य के नेता तैयार होते हैं और कांग्रेस के लिए लोकसभा, विधानसभा व एमसीडी चुनाव के बाद इस मोर्चे पर लगातार पराजय चिंता का विषय है। एनएसयूआई की लगातार हार से स्पष्ट है कि कांग्रेस का संगठन युवाओं के बीच पकड़ बनाने में असफल रहा है। दिल्ली में लंबे समय तक सत्ता में रहने के दौरान छात्र राजनीति उसका महत्वपूर्ण सहारा हुआ करती थी। विश्वविद्यालय की राजनीति से ही कांग्रेस ने कई मजबूत चेहरे तैयार किए, लेकिन पिछले एक दशक में उसका यह आधार तेजी से कमजोर हो रहा है। इस पराजय का असर  आने वाले एमसीडी चुनाव में भी देखा जा सकता है। एनएसयूआई के पास    न तो प्रभावी नेतृत्व दिख रहा है न ही कैंपस में सक्रिय संगठनात्मक  ताकत है।  राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर कांग्रेस ने समय रहते अपनी छात्र इकाई को पुनर्जीवित करने और युवाओं से जुड़ने की ठोस रणनीति नहीं बनाई तो दिल्ली की राजनीति में उसकी स्थिति सुधरनी मुश्किल है।  ‘आरएसएस-भाजपा के खिलाफ बहादुरी से लड़े’ एनएसयूआई ने कहा कि आरएसएस-भाजपा और विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ बहादुरी से लड़ाई लड़ी। डूसू चुनाव में उपाध्यक्ष पद पर राहुल झांसला ने जीत हासिल की है। यह जीत एक कठिन संघर्ष के बाद मिली है। एनएसयूआई ने केवल एबीवीपी का ही नहीं बल्कि विश्वविद्यालय प्रशासन, दिल्ली सरकार, केंद्र सरकार, आरएसएस-भाजपा और दिल्ली पुलिस जैसी संयुक्त ताकतों का भी डटकर मुकाबला किया। एनएसयूआई के अनुसार भारी पैमाने पर सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग के बावजूद हजारों छात्रों ने एनएसयूआई और उसके उम्मीदवारों का मजबूती से साथ दिया। एनएसयूआई अध्यक्ष वरुण चौधरी ने कहा कि हमें अपने उम्मीदवारों पर गर्व है जिन्होंने यह चुनाव साहस और ईमानदारी के साथ लड़ा। आरएसएस-भाजपा समर्थित एबीवीपी ने चुनाव अधिकारियों की मदद से ईवीएम में गड़बड़ी और प्रोफेसरों को शामिल कर चुनाव चोरी करने की शर्मनाक कोशिश की। अदालत ने विजय जुलूस पर लगा दी थी रोक  अदालत ने अपने 17 सितंबर के आदेश में दिल्ली विश्वविद्यालय के उम्मीदवारों और छात्र संगठनों को डूसू चुनाव के नतीजों की घोषणा के बाद राष्ट्रीय राजधानी में कहीं भी विजय जुलूस निकालने पर रोक लगा दी थी। याचिकाकर्ता, अधिवक्ता प्रशांत मनचंदा ने पीठ के सामने कई तस्वीरें और समाचार रिपोर्ट साझा कीं और न्यायिक आदेश और लिंगदोह समिति की सिफारिशों के उल्लंघन का दावा किया।

675 करोड़ की ई-बस योजना कागजों में फंसी, नोएडा एयरपोर्ट की उड़ान अब भी टिकी

लखनऊ  देश के सबसे महत्वाकांक्षी बुनियादी ढांचे में शामिल नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन 30 अक्टूबर को प्रस्तावित है, लेकिन एयरपोर्ट तक सुगम यातायात सुविधा की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी ई-बस सेवा अब भी कागजों में उलझी हुई है. बेहतर कनेक्टिविटी नहीं होने की वजह से यात्रियों का सीधे एयरपोर्ट पहुंचना मुश्किल होगा. 500 बसों की योजना जिले में सार्वजनिक परिवहन को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से 500 इलेक्ट्रिक बसों के संचालन की योजना तैयार की गई थी जिसमें नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण (यीडा) क्षेत्रों को शामिल किया गया है. योजना के मुताबिक नोएडा में 300, ग्रेटर नोएडा व यीडा क्षेत्र में 100-100 बसें चलाई जानी है. इसके लिए 25 रूट प्रस्तावित किए गए है.   कंपनी का गठन अधर में लटका अभी तक बस संचालन के लिए आवश्यक जरूरतें जैसे बस स्टैंड, ई-चार्जिंग स्टेशन और वर्कशॉप आदि पूरी तरह विकसित नहीं हो पाई है. इतना ही नहीं तीनों प्राधिकरणों की सहमति के बावजूद बसों के संचालन के लिए गठित की जाने वाली संयुक्त कंपनी ग्रीन ट्रांसपोर्ट लिमिटेड का औपचारिक गठन भी अधर में लटका हुआ है. करीब 675 करोड़ की लागत इस योजना की लागत लगभग 675 करोड़ रुपये आंकी गई है इसे प्लान करके लागू करने पर विचार किया जा रहा है. शासन स्तर पर दो निजी कंपनियों ट्रैवल टाइम मोबिलिटी इंडिया प्रा. लि. और डेलबस मोबिलिटी का चयन कर लिया गया है, जो बस संचालन की जिम्मेदारी संभालेंगी. यात्रियों के बिना कैसे चलेंगी बसें ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ एनजी रवि कुमार ने स्पष्ट किया कि बिना पर्याप्त यात्री संख्या के रूट पर बसें चलाने से तीनों प्राधिकरणों पर फाइनेंशियल बोझ बढ़ सकता है. इसलिए बसों के संचालन से पहले एक बार इस रूट का सर्वे करना जरूरी है. यीडा ने शुरू की तैयारी यीडा ने एयरपोर्ट को ध्यान में रखते हुए अपने ई-बस रूट में एयरपोर्ट को प्रमुख ठहराव बनाने की तैयारी शुरू कर दी है. ओएसडी शैलेंद्र भाटिया ने बताया कि गाजियाबाद, नोएडा और ग्रेटर नोएडा से यात्रियों की सीधी कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए ई-बस रूट की शुरुआत नोएडा एयरपोर्ट से ही की जाएगी. एयरपोर्ट उद्घाटन के 45 दिनों के भीतर विमान सेवाएं शुरू होने की संभावना है. ऐसे में यात्रियों को एयरपोर्ट तक पहुंचने के बेहतर कनेक्टिविटी होनी जरूरी है.