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राजनीति की सलाह: दीपांकर ने कहा—कांग्रेस कम लड़े, ज्यादा जीते

पटना  बिहार चुनाव को लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) और महागठबंधन (MGB) दोनों में सबसे बड़े दोनों दलों के बीच ही सीट बंटवारे पर बात नहीं बन पा रही है, इसलिए सहयोगी दल भी परेशान हैं। एनडीए की सीट शेयरिंग पर सहमति बनाने की कोशिश में गुरुवार को पटना में गृह मंत्री अमित शाह और सीएम नीतीश कुमार के बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल यूनाइटेड (JDU) के बड़े नेताओं की मौजूदगी में चर्चा हुई। इस बीच महागठबंधन के सबसे बड़े वामंपथी दल भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी- मार्क्सवादी लेनिनिवादी (CPI-ML) के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने कांग्रेस को नसीहत दी है कि वो औकात से ज्यादा सीट ना मांगे और इसकी चिंता करे कि भले सीटें कम लड़नी पड़े, लेकिन कैसे ज्यादा जीती जाए। भाकपा-माले के नेता दीपांकर भट्टाचार्य ने कांग्रेस द्वारा 2020 की तरह फिर 70 सीटों की मांग को लेकर चल रही चर्चाओं पर कहा- “कुछ कांग्रेस नेताओं द्वारा लगभग 70 सीटों की मांग की खबरें मैंने देखी हैं। लेकिन पिछली बार वो 70 सीटों पर लड़े और जीत सिर्फ सीट 19 ही पाए। 2015 में कांग्रेस 40 सीट लड़ी और 27 जीती थी। वो अच्छा स्ट्राइक रेट था। लेकिन 2020 में वो 70 सीट लड़ी… जो उनकी औकात (लड़ने की क्षमता) से ज्यादा थी। इसलिए मुझे लगता है कि इन सबके बीच संतुलन होना चाहिए।” याद दिला दें कि 2020 के चुनाव में मात्र 12 सीटों के अंतर से तेजस्वी यादव मुख्यमंत्री बनने से चूक गए थे। राजद के कई नेता इसके लिए कांग्रेस को जिम्मेवार मानते हैं जो 70 सीटों पर लड़ी लेकिन सिर्फ 19 जीतकर आई। सीपीआई-माले मात्र 19 सीट लड़ी और 12 जीत गई। राजद ने 144 लड़कर 75 सीट निकाली थी। उस चुनाव में कांग्रेस का स्ट्राइक रेट 27 फीसदी रहा, जबकि राजद का 52 परसेंट, सीपीआई-माले का 63 परसेंट, सीपीएम का 50 परसेंट और सीपीआई का 33 फीसदी रहा था।  

सीएम योगी ने गाजियाबाद में किया ‘भारतवर्ष की स्वर्णाभा नरेन्द्र मोदी’ पुस्तक का विमोचन

गाजियाबाद में युवाओं से सीएम योगी का आह्वान- एआई और उभरती हुई टेक्नोलॉजी को अपनाएं 'विकसित भारत-विकसित यूपी' थीम पर आयोजित हुआ कार्यक्रम अब गंदगी और गैंगेस्टर नहीं, गाजियाबाद की पहचान शिक्षा और उद्योग से जुड़ चुकी है : मुख्यमंत्री  अफवाह फैलाकर गौतमबुद्ध नगर को बना दिया गया था लूट का अड्डा : योगी आदित्यनाथ वित्तीय वर्ष 2025-26 में ही यूपी को बनाएंगे 36 लाख करोड़ की अर्थव्यवस्था : मुख्यमंत्री गाजियाबाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को गाजियाबाद में पूर्व सांसद रमेश चंद्र तोमर द्वारा लिखित पुस्तक 'भारतवर्ष की स्वर्णाभा नरेन्द्र मोदी' का विमोचन किया। इस मौके पर उन्होंने 'विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश' के संकल्प को आगे बढ़ाने और युवाओं को तकनीक से जुड़ने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि लिखना एक साधना है और यह पुस्तक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अब तक की उपलब्धियों को संजोने वाली प्रेरणादायी कृति है। उन्होंने सुझाव दिया कि इसे विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और पुस्तकालयों में रखा जाए ताकि नई पीढ़ी प्रेरणा ले सके। वहीं उन्होंने युवाओं से एआई और उभरती हुई तकनीकी ज्ञान को अपनाने का आह्वान किया।  सीएम ने दोहराया विकसित भारत और यूपी का संकल्प योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत आज दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और जल्द ही तीसरे स्थान पर पहुंचने वाला है। उत्तर प्रदेश भी तेजी से विकास की ओर अग्रसर है। 2017 से पहले यूपी को बीमारू राज्य कहा जाता था, लेकिन आज यह देश की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। 2016-17 में यूपी की जीडीपी ₹12.75 लाख करोड़ थी, जिसे 2025-26 में ही ₹36 लाख करोड़ तक पहुंचाने का लक्ष्य है। टेक्नोलॉजी और एआई पर जोर सीएम योगी ने युवाओं से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल टेक्नोलॉजी को अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी रोजगार छीनती नहीं बल्कि नए अवसर पैदा करती है। जिस तरह कंप्यूटर आने पर नई संभावनाएं बनीं, उसी तरह एआई भी कृषि, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में नई दिशा देगा। किसान यदि तकनीक अपनाएंगे तो उनकी उत्पादकता तीन गुना तक बढ़ सकती है। लोगों ने कहा आगरा के सर्किट हाउस में भूत है, मगर मैं वहां भी रात में रुका… मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 से पहले गाजियाबाद की पहचान 'गंदगी और गैंगेस्टर' से जुड़ी थी। गौतमबुद्ध नगर को अफवाह फैलाकर 'लूट का अड्डा' बना दिया गया था। कहा जाता था कि कोई मुख्यमंत्री यहां नहीं आ सकता, आएगा तो कुर्सी चली जाएगी। यही हाल बिजनौर और आगरा के लिए भी बना दी गई थी। डर और अफवाहें फैला दी गई थीं। उन्होंने कहा, ''मैं बिजनौर में रात में रुका, आगरा के कथित 'भूतिया' सर्किट हाउस में ठहरा और नोएडा भी गया। इसके बावजूद जनता ने दोबारा आशीर्वाद देकर मुझे मुख्यमंत्री बनाया।" अफवाहें फैलाने वालों की सच्चाई जनता के सामने आनी जरूरी थी। आज गाजियाबाद शिक्षा और उद्योग का केंद्र बन चुका है। युवाओं से किया आह्वान सीएम योगी ने कहा कि यूपी का युवा, किसान, नारी शक्ति और उद्यमी हमारी ताकत हैं। उन्होंने सभी से समर्थ यूपी पोर्टल पर अपने सुझाव अवश्य देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हर जिले से तीन श्रेष्ठ सुझावों को जनपद स्तर पर और पांच श्रेष्ठ सुझावों को प्रदेश स्तर पर सम्मानित किया जाएगा।  गुलामी की मानसिकता छोड़ने का दिया संदेश मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री के 'पंच प्रण' की चर्चा करते हुए कहा कि भारतीयों को गुलामी की मानसिकता से बाहर निकलना होगा और अपनी भारतीयता पर गर्व करना होगा। उन्होंने शेर और सियार की कहानी सुनाते हुए कहा कि हम भारतीयों को अपनी दहाड़ पहचाननी चाहिए, विदेशी को श्रेष्ठ मानने की मानसिकता छोड़नी चाहिए। सीएम योगी ने कहा कि 2017 से पहले यूपी के युवा बाहर अपनी पहचान छिपाते थे, जबकि आज गर्व से कहते हैं कि वे यूपी से हैं। उन्होंने दावा किया कि आने वाले वर्षों में यूपी देश की नंबर वन अर्थव्यवस्था बनेगा। इस अवसर पर प्रदेश सरकार में मंत्री सुनील कुमार शर्मा, नरेन्द्र कश्यप, सांसद अतुल गर्ग, राजकुमार सांगवान, नारायण गिरी जी महाराज, बीजेपी क्षेत्रीय अध्यक्ष सत्येन्द्र सिसोदिया, महापौर सुनीता दयाल, जिला पंचायत अध्यक्ष ममता त्यागी, विधायकण संजीव शर्मा,अजीत पाल त्यागी, नंद किशोर गुर्जर, धर्मेश तोमर, धर्मेन्द्र भारद्वाज, महानगर अध्यक्ष मयंक गोयल, जिलाध्यक्ष जयंत पाल, क्षेत्रीय उपाध्यक्ष मानसिंह गोस्वामी, संयोजक और पुस्तक के लेखक पूर्व सांसद रमेश चंद्र तोमर, पूर्व सांसद अनिल अग्रवाल सहित गाजियाबाद के प्रबुद्धजन और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। 

बाबा रामदेव की पतंजलि पर मीलॉर्ड का हमला, कोर्ट ने दी कड़ी चेतावनी

नई दिल्ली दिल्ली हाई कोर्ट ने आज (शुक्रवार, 19 सितंबर को) योग गुरु बाबा रामदेव की पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड और पतंजलि फूड्स लिमिटेड को तब कड़ी फटकार लगाई, जब डाबर इंडिया के साथ च्यवनप्राश के विज्ञापनों को लेकर चल रहे विवाद में कंपनी अपनी अपील पर अड़ गई। पतंजलि आयुर्वेद ने सिंगल बेंच के उस आदेश को चुनौती देते हुए अपील दायर की थी, जिसमें उसे अपने विज्ञापनों के कुछ हिस्सों को हटाने का निर्देश दिया गया था। कथित तौर पर उन विज्ञापनों में पतंजलि ने डाबर सहित अन्य प्रतिद्वंद्वी कंपनियों के च्यवनप्राश उत्पादों पर अपमानजनक टिप्पणी की थी। जस्टिस हरि शंकर और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की पीठ ने पतंजलि से कहा कि या तो वह अपील वापस ले ले या फिर जुर्माना भरने के लिए तैयार हो जाए। कोर्ट ने सख्त लहजे में पतंजलि को चेतावनी दी कि अगर कंपनी ने अपनी चुनौती वापस नहीं ली तो उस पर भारी भरकम जुर्माना लगाया जाएगा। पीठ ने कहा कि आदेश में पतंजलि को पूरा विज्ञापन हटाने का निर्देश नहीं दिया गया है, बल्कि केवल उसके कुछ हिस्सों में संशोधन करने का आदेश दिया गया है, जो दूसरी कंपनियों को अपमानजनक तरीके से कमतर दिखाते हैं। विवाद दिसंबर 2024 में शुरू हुआ यह विवाद दिसंबर 2024 में शुरू हुआ, जब भारत की सबसे पुरानी और सबसे बड़ी उपभोक्ता वस्तु कंपनियों में से एक, डाबर ने पतंजलि के च्यवनप्राश विज्ञापन अभियान के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। डाबर ने अपनी अर्जी में आरोप लगाया कि पतंजलि के दावे भ्रामक, अपमानजनक और उसकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाने वाले हैं। डाबर के क्या आरोप? दशकों से च्यवनप्राश का विपणन करने वाली डाबर ने अपनी याचिका में आरोप लगाया कि पतंजलि के विज्ञापनों में दावा किया गया है कि उसके प्रतिद्वंद्वी कंपनी के च्यवनप्राश में पारा होता है, इसलिए वह बच्चों के लिए असुरक्षित हैं। कंपनी ने पतंजलि के इस दावे को भी चुनौती दी कि उसका च्यवनप्राश 51 जड़ी-बूटियों से तैयार किया गया था, जबकि डाबर के संस्करण में केवल 40 जड़ी-बूटियाँ हैं। डॉबर ने आरोप लगाया कि पतंजलि के इस भ्रामक विज्ञापन ने दशकों से पीढ़ियों के बीच बने उपभोक्ता विश्वास को नुकसान पहुंचाया है। सिंगल बेंच का क्या था आदेश? जुलाई 2025 में, जस्टिस मिनी पुष्करणा की सिंगल बेंच ने एक अंतरिम आदेश पारित कर पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड और पतंजलि फूड्स लिमिटेड को पतंजलि स्पेशल च्यवनप्राश के अपने विज्ञापनों को संशोधित करने का निर्देश दिया था। इसी के खिलाफ पतंजलि ने डबल बेंच में अपील की थी। बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, पतंजलि की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता जयंत मेहता ने पीठ के सख्त रुख को देखते हुए अगली कार्रवाई के बारे में निर्देश लेने के लिए समय की माँग की। इसके बाद कोर्ट ने मामले की सुनवाई मंगलवार, 23 सितंबर तक टाल दी। पतंजलि आयुर्वेद के तर्क हालांकि, सुनवाई के दौरान योग गुरु रामदेव और आचार्य बालकृष्ण द्वारा सह-स्थापित पतंजलि ने अपने अभियान का बचाव करते हुए इसे वैध आत्म-प्रचार बताया। कंपनी ने कहा कि उसके विज्ञापनों में डाबर का नाम नहीं लिया गया है और न ही उसकी सीधी तुलना की गई है। कंपनी ने तर्क दिया कि विवादित बयान उत्पाद लेबल सहित सार्वजनिक जानकारी पर आधारित हैं, और इसलिए उन्हें भ्रामक नहीं माना जा सकता लेकिन पीठ ने उनकी एक नहीं सुनी।  

474 पार्टियों का पंजीकरण खत्म, चुनाव आयोग ने उठाया बड़ा कदम

नई दिल्ली  चुनाव आयोग ने गैर मान्यता प्राप्त पंजीकृत दलों पर बड़ा ऐक्शन लिया है। चुनाव आयोग ने ऐसी 474 राजनीतिक पार्टियों का रजिस्ट्रेशन समाप्त कर दिया है। इससे पहले अगस्त में भी चुनाव आयोग ने बड़ा ऐक्शन लिया था और 334 दलों का पंजीकरण समाप्त किया गया था। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के मुताबिक किसी भी पंजीकृत दल को चुनावी प्रक्रिया में हिस्सा लेना होता है। यदि वह लगातार 6 साल तक इलेक्शन से दूर रहता है तो उसका पंजीकरण समाप्त हो जाता है। इसी नियम के तहत इलेक्शन कमिशन ने यह कार्रवाई की है। इस तरह अगस्त से लेकर अब तक 808 पार्टियों का पंजीकरण समाप्त किया जा चुका है। किसी पंजीकृत राजनीतिक दल को टैक्स छूट समेत कई रियायतें मिलती हैं। लेकिन बीते 6 साल से चुनाव ना लड़ने के बाद भी ऐसी रियायतों का लाभ लेते रहने वाले दलों पर ऐक्शन हुआ है। राजनीतिक दलों के रजिस्ट्रेशन को लेकर जो गाइडलाइंस हैं, उसके मुताबिक यदि कोई दल 6 सालों तक चुनाव नहीं लड़ता है तो फिर उसका पंजीकरण समाप्त किया जा सकता है। 2019 के बाद से ही चुनाव आयोग ऐसे दलों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है, जो चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। इसी के तहत पहले राउंड में 9 अगस्त को ऐक्शन हुआ था और फिर 18 सितंबर को दूसरा ऐक्शन हुआ। इस तरह दो महीने के अंतराल में ही 808 राजनीतिक दलों का पंजीकरण खत्म हुआ है।

खारिज़, खारिज़, खारिज़… बानू मुश्ताक मामले में CJI का स्पष्ट निर्णय

नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार विजेता बानू मुश्ताक को इस साल मैसुरु दशहरा उत्सव के उद्घाटन के लिए आमंत्रित करने के कर्नाटक सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें कर्नाटक हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई थी। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने शुक्रवार (19 सितंबर) को कर्नाटक हाई कोर्ट के 15 सितंबर के आदेश को बकरार रखा, जिसमें राज्य सरकार के फैसले के खिलाफ याचिकाओं पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया गया था। हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ एच एस गौरव ने शीर्ष अदालत में अपील दायर की थी। यह उत्सव 22 सितंबर से शुरू होगा। इस याचिका में कहा गया था कि चामुंडेश्वरी मंदिर में होने वाले दशहरा के अनुष्ठान के रीति-रिवाज प्रतीकात्मक नहीं है, बल्कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत संरक्षित आवश्यक धार्मिक प्रथा हैं। इस परंपरा के तहत देवी चामुंडेश्वरी के गर्भगृह के समक्ष दीप प्रज्वलित किया जाता है, हल्दी व कुमकुम लगाया जाता है, फल और फूल चढ़ाए जाते हैं। याचिकाकर्ता ने क्या दी थी दलील? याचिका के अनुसार, ये हिंदू पूजा के कार्य हैं जो आगमिक परंपराओं द्वारा निर्धारित होते हैं, और इन्हें कोई गैर-हिंदू नहीं कर सकता, जबकि मैसुरु जिला प्रशासन ने तीन सितंबर को, विपक्षी भाजपा सहित कुछ वर्गों की आपत्तियों के बावजूद, बानू मुश्ताक को औपचारिक रूप से इस आयोजन में आमंत्रित किया था। इसी फैसले को पहले हाई कोर्ट में चुनौती दी गई थी, जहां चीफ जस्टिस विभु बाखरू और जस्टिस सीएम जोशी की पीठ ने उसे खारिज कर दिया था। SC ने पूछा, याचिका का उद्देश्य क्या है? बार एंड बेंच के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान जस्टिस विक्रम नाथ ने याचिकाकर्ता से पूछा, "इस याचिका को दायर करने का उद्देश्य क्या है?" इस पर याचिकाकर्ता के वकील ने कहा, "यह अनुच्छेद 25 के तहत मेरे अधिकारों को प्रभावित करता है।" इतना सुनते ही जस्टिस विक्रम नाथ ने याचिका खारिज कर दी। तभी याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत से अनुरोध किया कि कृपया तीन मिनट के लिए मेरी बात सुनी जाए। जस्टिस विक्रम नाथ ने यूं कर दी याचिका खारिज़ जब वकील ने अपनी बात रख ली तो जस्टिस विक्रम नाथ ने फिर पूछा, "इस देश के संविधान की प्रस्तावना क्या है?" इस पर याचिकाकर्ता के वकील मिस्टर सुरेश ने कहा, “धर्मनिरपेक्ष.. लेकिन मेरी धार्मिक गतिविधियों में हस्तक्षेप न करें।” इस पर जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि यह राज्य का कार्यक्रम है…राज्य 'क', 'ख' और 'ग' में कैसे अंतर कर सकता है? इस पर फिर वकील ने कहा कि मंदिर के अंदर पूजा करना धर्मनिरपेक्ष कार्य नहीं है…यह समारोह का हिस्सा है…वहाँ कई फैसले हैं। इतना सुनते ही जस्टिस विक्रम नाथ ने फिर कहा, खारिज। कह तो दिया,अब कितनी बार कहूं? वकील ने फिर जिरह की और कहा, "बानू द्वारा ऐसे-ऐसे बयान दिए गए हैं जो हमारे अनुसार हमारे धर्म के खिलाफ हैं। ऐसी परिस्थितियों में, आप ऐसे लोगों को आमंत्रित नहीं कर सकते। दो बातें हैं – एक व्यक्ति जो धर्मनिरपेक्ष होने का दावा करता है और दूसरा व्यक्ति हमारे खिलाफ बिल्कुल विपरीत रुख अपनाता है…आप ऐसे लोगों को आमंत्रित नहीं कर सकते।" इस पर जस्टिस नाथ ने कहा, "हमने तीन बार खारिज-खारिज कह दिया है, और कितनी बार कहूं?" 2027 में CJI बनेंगे जस्टिस विक्रम नाथ जस्टिस विक्रम नाथ 7 फरवरी, 2027 से 23 सितंबर, 2027 तक देश के मुख्य न्यायाधीश पद की जिम्मेदारी संभालेंगे। जस्टिस सूर्यकांत के रिटायरमेंट के बाद उनका कार्यकाल लगभग 8 महीने का होगा। जस्टिस सूर्यकांत मौजूदा CJI जस्टिस बी आर गवई के बाद इसी साल नवंबर में CJI का पद संभालेंगे। बता दें कि यह विवाद बानू मुश्ताक द्वारा अतीत में दिए गए कुछ बयानों को लेकर खड़ा हुआ है, जिन्हें कुछ लोग ‘हिंदू विरोधी’ और ‘कन्नड़ विरोधी’ मानते हैं। पूर्व भाजपा सांसद प्रताप सिम्हा और अन्य आलोचकों का तर्क है कि यह उत्सव परंपरागत रूप से वैदिक अनुष्ठानों और देवी चामुंडेश्वरी को पुष्पांजलि अर्पित करके शुरू होता है, ऐसे में मुश्ताक का चयन, धार्मिक भावनाओं और लंबे समय से चली आ रही परंपराओं का अनादर है। मैसुरु में दशहरा उत्सव 22 सितंबर से शुरू होकर दो अक्टूबर को विजयादशमी पर समाप्त होगा।

मुख्यमंत्री ने की यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो की तैयारियों की समीक्षा, दिए आवश्यक दिशा निर्देश

पीएम मोदी के आगमन से पूर्व मुख्यमंत्री ने आयोजन स्थल का भी किया स्थलीय निरीक्षण  सीएम योगी बोले- वोकल फॉर लोकल और मेक इन इंडिया अभियानों को मिलेगा बढ़ावा  यूपीआईटीएस 2025 में ओडीओपी स्टॉल्स और युवाओं की हो भागीदारीः सीएम  युवाओं को प्रत्यक्ष अनुभव और उद्यमिता के अवसर प्रदान करने का महत्वपूर्ण मंच होगा ट्रेड शोः मुख्यमंत्री   सीएम ने खादी व ग्रामोद्योग को प्रोत्साहित करने और विदेशी बायर्स की सुरक्षा सुनिश्चित करने के भी निर्देश  लखनऊ  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो मार्ट सभागार में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ आगामी उत्तर प्रदेश अंतरराष्ट्रीय ट्रेड शो (UPITS-2025) की तैयारियों की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को आयोजन की तैयारी, सुरक्षा, व्यवस्थापन और प्रतिभागियों की सुविधा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह आयोजन प्रदेश की समृद्ध परंपरा, हुनर और उत्पादों को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने के साथ-साथ वोकल फॉर लोकल और मेक इन इंडिया अभियानों को बढ़ावा देगा। उन्होंने सभी जिलों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने, ODOP स्टॉल्स और शैक्षणिक संस्थानों में व्यापक ब्रांडिंग पर जोर दिया। इसके अलावा युवाओं को प्रत्यक्ष अनुभव और उद्यमिता के अवसर प्रदान करने, खादी व ग्रामोद्योग को प्रोत्साहित करने और विदेशी बायर्स की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए। सभी जिलों की होगी सक्रिय सहभागिता मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिए कि आगामी यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो (UPITS-2025) में प्रदेश के प्रत्येक जिले की सक्रिय और प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित की जाए। प्रत्येक जिले के वन डिस्टिक्ट वन प्रोडक्ट (ओडीओपी) से जुड़े उत्पादों के लिए विशेष स्टॉल स्थापित किए जाएंगे, ताकि स्थानीय हस्तशिल्प, खाद्य, हस्तकला और उद्योग संबंधी उत्पादों को वैश्विक खरीदारों और निवेशकों के सामने प्रदर्शित किया जा सके। उन्होंने कहा कि यह केवल प्रदर्शनी नहीं होगी, बल्कि यूपी की विविधता, सांस्कृतिक विरासत और व्यावसायिक प्रतिभा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करने का महत्वपूर्ण अवसर होगी। इसके माध्यम से स्थानीय उत्पादकों और उद्यमियों को नई संभावनाओं, व्यापारिक नेटवर्क और निवेश के अवसर प्राप्त होंगे, जिससे प्रदेश के विकास और युवाओं के रोजगार सृजन में भी मदद मिलेगी। शैक्षणिक संस्थानों में हो व्यापक ब्रांडिंग मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिए कि यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस-2025) की पहचान को मजबूत करने के लिए प्रदेश के सभी जिलों और शैक्षणिक संस्थानों में इसकी व्यापक ब्रांडिंग और प्रचार-प्रसार किया जाए। इसका उद्देश्य युवाओं और छात्रों को आयोजन के महत्व से अवगत कराना और उन्हें सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करना है। इसके तहत कॉलेज, यूनिवर्सिटी और अन्य शैक्षणिक संस्थान अपने कैंपस में यूपीआईटीएस के पोस्टर, डिजिटल डिस्प्ले और इवेंट जानकारी साझा करेंगे, ताकि छात्र, फैकल्टी और स्थानीय समुदाय सीधे इस आयोजन से जुड़ सकें और युवाओं में उद्यमिता तथा नवाचार के प्रति जागरूकता बढ़े। सीएम योगी ने गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं को आयोजन से जोड़ने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इससे युवाओं को प्रत्यक्ष अनुभव और रोजगार/उद्यमिता के अवसर मिलेंगे। फैशन शो में खादी और ग्रामोद्योग को बढ़ावा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिए कि यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो  के अंतर्गत आयोजित होने वाले फैशन शो में देशभर की फिल्म सिटी से जुड़े विशेषज्ञों को भी शामिल किया जाए। इसका उद्देश्य खादी, हैंडीक्राफ्ट और ग्रामोद्योग से जुड़े उत्पादों को व्यापक दृश्यता और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस माध्यम से न केवल उत्तर प्रदेश की हस्तकला और पारंपरिक उद्योग को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि युवा डिजाइनर्स और स्थानीय कारीगर भी नए अवसरों और बाज़ार तक पहुंच बनाने में सक्षम होंगे। फैशन शो में खादी और ग्रामोद्योग के उत्पादों को पेश करने के लिए विशेष कैटवॉक और प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी, जिससे इन उत्पादों की गुणवत्ता और सौंदर्य का प्रभाव वैश्विक स्तर पर दिखाया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि इस पहल से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और युवाओं को उद्यमिता, नवाचार और रोजगार के नए अवसर प्राप्त होंगे। वृद्धजन और आगंतुकों को मिले बेहतर सुविधा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिए कि आयोजन में प्रतिभाग करने वाले वृद्धजनों और वरिष्ठ नागरिकों की सुविधा के लिए विशेष इंतजाम किए जाएं। इसके तहत नासा पार्किंग स्थल से शटल सेवा उपलब्ध कराई जाएं, ताकि उन्हें सहज और आरामदायक तरीके से आयोजन स्थल तक पहुंचने में मदद मिल सके। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सुरक्षा और संचालन की पूर्ण जिम्मेदारी सुनिश्चित की जाए। किसी भी ई-रिक्शा या वाहन का संचालन नाबालिग चालक द्वारा न किया जाए। इसके अलावा, आगंतुकों के लिए सुरक्षा, मार्गदर्शन और सुविधा संबंधी निर्देश भी स्पष्ट किए जाएं, ताकि सभी प्रतिभागियों को सुरक्षित, व्यवस्थित और स्वागतपूर्ण अनुभव प्राप्त हो। सीएम ने विदेशी बायर्स और मेहमानों की सुरक्षा, आवास, परिवहन और संपूर्ण रहन-सहन पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि विदेशी मेहमानों को सहज, सुरक्षित और स्वागतपूर्ण अनुभव मिलना चाहिए ताकि उत्तर प्रदेश की छवि मजबूत हो। बैठक में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री राकेश सचान, औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी समेत अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारीगण मौजूद रहे। अपर मुख्य सचिव, एमएसएमई विभाग आलोक कुमार ने पावर प्रजेंटेशन के माध्यम से मुख्यमंत्री को अब तक की तैयारियों से अवगत कराया। सीएम योगी ने यूपीआईटीएस के आयोजन स्थल का किया स्थलीय निरीक्षण मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 25 से 29 सितंबर के बीच ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो मार्ट में आयोजित होने वाले यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस 2025) की तैयारियों का जायजा लेने के लिए शुक्रवार को स्थलीय निरीक्षण भी किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस आयोजन का शुभारंभ करेंगे। इसको देखते हुए  मुख्यमंत्री ने पूरे आयोजन स्थल का दौरा किया और अधिकारियों से तैयारियों के विषय में जानकारी ली और आवश्यक दिशा निर्देश भी दिए। इस दौरान अपर मुख्य सचिव एमएसएमई आलोक कुमार ने उन्हें पूरे आयोजन स्थल और वीआईपी मूवमेंट की जानकारी दी। डीएम मेधा रूपम ने भी आयोजन स्थल पर व्यवस्थाओं और सुविधाओं का पूरा ब्यौरा दिया। वहीं पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने उन्हें सुरक्षा व्यवस्था से अवगत कराया। मुख्यमंत्री जी ने ई कार्ट में बैठकर पूरे आयोजन स्थल को देखा। इस दौरान उनके साथ सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री राकेश सचान, औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी और अन्य जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे।

रक्षा मंत्री का बयान: 1965 के युद्ध की याद में बोले – जीत अपवाद नहीं, परंपरा है

नई दिल्ली  विजय हमारे लिए अपवाद नहीं, बल्कि आदत बन चुकी है। शुक्रवार को यह बात रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कही। रक्षामंत्री ने यह बात नई दिल्ली में 1965 के युद्ध के जांबाज वयोवृद्ध सैनिकों एवं शहीद वीरों के परिजनों से भेंट करने के दौरान कही।यह कार्यक्रम पाकिस्तान पर भारत की ऐतिहासिक विजय की 60वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया। इस दौरान रक्षा मंत्री ने उन सभी वीर जवानों को नमन किया, जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया और भारत को इस शक्ति परीक्षण में विजयी बनाया। उन्होंने कहा, “पाकिस्तान ने सोचा था कि वह घुसपैठ, गुरिल्ला युद्धकौशल और अचानक हमलों से भारत को भयभीत कर देगा, लेकिन उसे यह आभास नहीं था कि हर भारतीय सैनिक यह भावना लेकर सेवा करता है कि राष्ट्र की संप्रभुता और अखंडता किसी भी कीमत पर समझौते योग्य नहीं है।” सिंह ने असल उत्तर, चाविंडा और फिल्लौरा जैसी निर्णायक लड़ाइयों में भारतीय सैनिकों की वीरता और राष्ट्रभक्ति को याद किया। उन्होंने विशेष रूप से परमवीर चक्र विजेता कंपनी क्वार्टर मास्टर हवलदार अब्दुल हमीद के अदम्य साहस का उल्लेख किया, जिन्होंने असल उत्तर की लड़ाई में अपने प्राणों की आहुति देकर कई दुश्मन टैंकों को ध्वस्त कर दिया। रक्षा मंत्री ने कहा, “हमारे बहादुर अब्दुल हमीद ने सिखाया कि बहादुरी हथियार के आकार से नहीं, बल्कि हृदय की महानता से होती है। उनका शौर्य बताता है कि साहस, संयम और देशभक्ति का संगम असंभव को भी संभव बना देता है।” उन्होंने कहा, “कोई भी युद्ध केवल रणभूमि पर नहीं जीता जाता, विजय पूरी राष्ट्र की सामूहिक संकल्प शक्ति का परिणाम होती है। उस समय लाल बहादुर शास्त्री के सशक्त नेतृत्व ने न केवल निर्णायक राजनीतिक दिशा दी, बल्कि पूरे राष्ट्र का मनोबल भी ऊंचा किया। प्रतिकूल परिस्थितियों में भी हमने एकजुट होकर युद्ध जीता।” उन्होंने कहा कि भारत ने बार-बार यह साबित किया है कि देश अपना भाग्य स्वयं रचता है। हालिया 'ऑपरेशन सिंदूर' का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, “पहलगाम की कायराना आतंकी वारदात ने हमें आहत किया, परंतु हमारे हौसले को नहीं तोड़ पाई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकियों को सबक सिखाने का संकल्प लिया और 'ऑपरेशन सिंदूर' ने दिखा दिया कि हम कितने सक्षम हैं। हमारे सैनिकों ने जिस साहस और समन्वय से यह अभियान सफल किया, वह इस बात का प्रमाण है कि हमारे लिए विजय अपवाद नहीं, बल्कि आदत बन चुकी है।” राजनाथ सिंह ने कहा कि सरकार सैनिकों, पूर्व सैनिकों और शहीदों के परिवारों के सम्मान और कल्याण के लिए पूर्णत प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, “रक्षा आधुनिकीकरण, सैनिकों के बेहतर प्रशिक्षण और उपकरणों के उन्नयन की हमारी नीति का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हमारे जवान कभी संसाधनों की कमी से न जूझें।” इस अवसर पर थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी, पश्चिमी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल मनोज कुमार कटियार, दिल्ली एरिया के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल भवनीश कुमार, अन्य वरिष्ठ अधिकारी, वॉर हीरो, वीरता पुरस्कार विजेता एवं 1965 के शहीदों के परिजन उपस्थित रहे। वयोवृद्ध सैनिकों ने भी अपने अनुभव साझा किए। लेफ्टिनेंट जनरल सतीश के. नाम्बियार (सेवानिवृत्त) ने रणनीतिक विचार रखे, वहीं वीर चक्र विजेता मेजर आरएस बेदी (सेवानिवृत्त) ने युद्धभूमि का रोमांचक विवरण सुनाया। यह समारोह 1965 के युद्ध में हुए बलिदानों की भावपूर्ण याद दिलाता रहा और आने वाली पीढ़ियों को साहस, त्याग और सेवा परमो धर्म के आदर्शों को जीवित रखने की प्रेरणा प्रदान करता रहा। 

भाजपा विधायक के विवादित शब्दों पर शरद पवार का ऐक्शन, फडणवीस से मांगी सफाई

मुंबई भाजपा विधायक गोपीचंद पडलकर की ओर से एनसीपी-एसपी के नेता जयंत पाटिल पर विवादित बयान ने हलचल मचा दी है। पडलकर के बयान पर दिग्गज नेता शरद पवार तक ने आपत्ति जताई है। यही नहीं उन्होंने सीएम देवेंद्र फडणवीस को ही सीधे शुक्रवार सुबह फोन लगाया और कहा कि वह इस मामले को देखें। शरद पवार ने कहा कि आपके विधायक का बयान महाराष्ट्र की राजनीतिक संस्कृति के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि आज तक महाराष्ट्र में किसी ने इतने निचले स्तर तक जाकर टिप्पणी नहीं की है। दरअसल गोपीचंद पडलकर और जयंत पाटिल के बीच सालों से अदावत रही है। लेकिन गुरुवार को पडलकर ने ऐसा बयान दे दिया है, जिसकी हर कोई आलोचना कर रहा है। दरअसल सांगली जिले में स्थित अपनी विधानसभा में गोपीचंद ने जयंत पाटिल पर खुद को फंसाने की कोशिश का आरोप लगाया था। पडलकर ने कहा था कि एक ठेकेदार की हत्या के मामले में मुझे जयंत पाटिल ने फंसाने की कोशिश की। पडलकर ने कहा कि मुझे हैरानी होती है कि कैसे इतना मूर्ख आदमी महाराष्ट्र का नेता हो सकता है। कैसे उन्होंने एनसीपी का महाराष्ट्र में नेतृत्व किया होगा। पडलकर ने कहा कि जयंत पाटिल मूर्ख हैं। हर एक सप्ताह में जयंत पाटिल साबित करते हैं कि वे कितने मूर्ख हैं। उन्होंने कहा था कि मेरा और ठेकेदार का कोई संबंध नहीं था। लेकिन जयंत पटेल का काम सिर्फ़ गोपीचंद पडलकर को बदनाम करना है। लेकिन मैं अब यहां क्यों हूं ? मैं ऐसी बहुत सी चीज़ें लेकर आया हूँ। इन लोगों के राज में मैं दो महीने जेल में रहा हूं। इसके आगे पडलकर कहते हैं कि जयंत पाटिल आखिर किसके बेटे हैं। उन्होंने कहा कि वह राजारामबापू पाटिल के बेटे हैं, यह लगता नहीं। कुछ तो गड़बड़ है। इसके आगे वह कहते हैं कि ये गोपीचंद पडलकर जयंत पाटिल जैसे भिखारी का बेटा नहीं है। उनके इसी बयान पर हल्ला मचा तो शरद पवार ने सीधे सीएम फडणवीस को फोन लगा दिया है। उन्होंने कहा कि वह अपने विधायक को समझाएं और मामले को देखते हुए कोई ऐक्शन भी लें। दरअसल जयंत पाटिल के पिता राजाराम पाटिल का महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा नाम रहा है। इसके अलावा सूबे में सहकारिता से जुड़े कामों में भी उनके योगदान की सराहना की जाती रही है।  

हरजोत बैंस का बड़ा ऐलान, ग्रामीण क्षेत्रों के लिए नई पहल शुरू

पंजाब  पंजाब के शिक्षा तथा सूचना व लोक सम्पर्क विभाग के कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा है कि हिमाचल प्रदेश की सीमा से लगे पंजाब के इलाकों में बरसात के मौसम दौरान बाढ़ के कारण भारी नुकसान हो जाता है। इसका स्थायी हल नदियों को चैनलाइज करके ही हो सकता है, इसलिए केंद्र सरकार को चैनलाइजेशन की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए। हिमाचल प्रदेश से सटे पंजाब के नीम पहाड़ी इलाके में हुई भारी वर्षा के कारण सरसा नदी और खड्डों में अधिक मात्रा में पानी आने से गांव आसपुर, अवानकोट, रणजीतपुरा, आलोवाल और खरोटा के किसानों के खेतों में हुए नुकसान का जायजा लेने पहुंचे हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि वे पिछले कई हफ्तों से नंगल/श्री आनंदपुर साहिब उपमंडल के दर्जनों गांवों का दौरा कर चुके हैं। 100 से अधिक गांवों का नुकसान हुआ है। इस भारी बरसात ने इन गांवों के किसानों की फसलें और जमीनें बहुत नुकसान पहुंचाया है। पंजाब सी.एम. भगवंत सिंह मान ने 20 हजार रुपए प्रति एकड़ मुआवजा देने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि इन गांवों की भी विशेष गिरदावरी के आदेश दे दिए गए हैं जो जल्द ही पूरी की जाएगी। बैंस ने मौके पर पहुंचकर गांव आसपुर के निवासियों से मुलाकात की और हालात का जायजा लिया। प्रशासन को तुरंत राहत कार्य शुरू करने के आदेश जारी किए। उन्होंने कहा कि उनकी टीमें, वालंटियर, पंच, सरपंच और नौजवान लगातार प्रभावित लोगों की सेवा में लगे हुए हैं। उन्होंने लोगों को भरोसा दिलाया कि सरकार उनके साथ है और जल्द ही राहत पहुंचाई जाएगी।    इस मौके पर जुझार सिंह मुल्तानी (मैंबर सैणी वैल्फेयर बोर्ड पंजाब), सतनाम सिंह आसपुर, निर्मल सिंह, गुरबख्श सिंह, दयाल सिंह, हरि सिंह, हरजिंदर सिंह नंबरदार, गुरमीत सिंह, पवन कुमार, हरविंदर सिंह आदि मौजूद थे।

अंतरराष्ट्रीय झटका: बलूच आर्मी पर प्रतिबंध लगाने की चीन-पाक योजना पर अमेरिका और यूरोप ने रोका

न्यूयॉर्क पाकिस्तान में सक्रिय विद्रोही संगठन बलूच लिबरेशन आर्मी और उसकी मजीद ब्रिगेड को संयुक्त राष्ट्र की पाबंदी सूची 1267 में शामिल कराने के प्रस्ताव पर अमेरिका ने वीटो कर दिया है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पाकिस्तान और उसके सदाबहार दोस्त चीन की ओर से इस प्रस्ताव को रखा गया था। इस पर अमेरिका ने वीटो लगा दिया। इसके अलावा ब्रिटेन और फ्रांस जैसे देशों ने भी विरोध किया। इस तरह यह प्रस्ताव गिर गया। दरअसल संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंध समिति 1267 के तहत यह प्रावधान है कि अलकायदा और इस्लामिक स्टेट से किसी भी तरह का ताल्लुक रखने वाले आतंकी संगठन पर पाबंदी लगाई जाती है। ऐसे संगठनों की संपत्तियों को दुनिया भर में जब्त किया जा सकता है। इसी को लेकर अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन ने कहा कि जिस बलूच लिबरेशन आर्मी और उसके आत्मघाती दस्ते मजीद ब्रिगेड पर पाबंदी का प्रस्ताव है, उसका अलकायदा और इस्लामिक स्टेट से तो कोई संबंध ही नहीं है। ऐसे में इन दोनों को इस सूची में शामिल नहीं किया जा सकता। संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि आसिम इफ्तिखार अहमद ने बुधवार को कहा था कि अफगानिस्तान में अलकायदा, इस्लामिक स्टेट, तहरीक-ए-तालिबान, ईस्ट तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट, बलूच लिबरेशन आर्मी और मजीद ब्रिगेड के ठिकाने हैं। पाकिस्तानी राजनयिक का दावा था कि अफगानिस्तान में इन संगठनों के कम से कम 60 ठिकाने हैं। लेकिन अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस ने इस दलील के आधार पर पाबंदी से इनकार किया। अमेरिका ने साफ कहा कि बलूच लिबरेशन आर्मी का अलकायदा या फिर इस्लामिक स्टेट से कोई संबंध नहीं पाया गया। इसलिए इस सूची में शामिल नहीं किया जा सकता। हालांकि यह भी सही है कि अमेरिका ने बलूच लिबरेशन आर्मी और मजीद ब्रिगेड को आतंकी संगठन घोषित किया है। बलूचिस्तान में लंबे समय से स्वायत्तता की मांग उठती रही है। बलूच लिबरेशन आर्मी ने इस मांग को लेकर विद्रोह ही छेड़ रखा है। बता दें कि भारत कई बार पाकिस्तान में सक्रिय आतंकी संगठनों पर पाबंदी की मांग कर चुका है, लेकिन चीन अकसर अड़ंगे लगाता रहा है। अब ऐसा पहली बार हुआ है, जब चीन और पाकिस्तान के साझा प्रयास को अमेरिका ने इस तरह झटका दिया है। उसके अलावा फ्रांस और ब्रिटेन ने भी विरोध किया है।