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भगवंत मान ने जताई प्रतिक्रिया, UP और बिहार के लोगों के खिलाफ फैसलों पर बोले ये शब्द

चंडीगढ़ पंजाब के कई जिलों से ऐसी खबरें आई हैं कि गांवों के सरपंचों समेत कई लोगों की ओर से यूपी और बिहार के मजदूरों को बाहर निकालने के ऐलान किए गए हैं। होशियारपुर जिले के तो 20 सरपंचों का कहना है कि वे पंजाब से बाहर के लोगों को निवास प्रमाण पत्र जारी नहीं करेंगे। जिले में एक पांच साल के बच्चे के साथ कुकर्म और फिर उसकी दर्दनाक हत्या के बाद ऐसी स्थिति पैदा हुई है। वहीं इससे पहले भी गुरदासपुर समेत कई जिलों में इस तरह के मामले आए हैं। अब इस तरह के ऐलानों के बारे में भगवंत मान से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि किसी को भी देश के किसी भी हिस्से में जाकर काम करने और रहने का हक है। यूपी और बिहार के मजदूरों को पंजाब के गांवों से निकालने के ऐलान पर भगवंत मान ने कहा कि पंजाबी सबसे ज्यादा विदेशों में रहते हैं। मान ने एनडीटीवी से बातचीत में कहा कि हमारे यहां के लोग कनाडा जैसे देशों में गए हैं और वहां मंत्री तक बने हैं। दुनिया भर में विरोध चल रहा है। ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, अमेरिका और ब्रिटेन तक में चल रहा है कि ये लोग क्यों आ गए हैं और उन्हें बाहर निकालो। यदि कोई कानून तोड़े तो उसे सख्त सजा मिले। कानून तोड़ने वाला किसी समुदाय का नहीं होता है, उसे सख्त सजा मिलनी चाहिए। फास्ट ट्रैक पर सुनवाई होनी चाहिए। मान ने कहा कि छत्तीसगढ़, कोलकाता में पंजाबियों का ही ट्रांसपोर्ट है। मुंबई तो पंजाबियों का बहुत कारोबार है। उन्होंने कहा कि लोगों के दिलों में गुस्सा है तो ऐसा हो सकता है। भगवंत मान ने कहा कि हम सुरक्षा देने को तत्पर हैं। उन्होंने कहा कि पहलगाम आतंकी हमला हुआ तो हमने कश्मीरियों को सुरक्षा दी। लेकिन यदि कोई प्रदेश का कानून तोड़ेगा तो सख्त सजा मिलेगी और हमारी उसमें कोई हमदर्दी नहीं है। अपने एक विधायक पर रेप का केस होने और फिर पुलिस के साथ एनकाउंटर होने के मामले में भगवंत मान ने कहा कि हमने तो सारे अच्छे लोग चुने थे, लेकिन कुछ खराब निकल आए तो क्या करें। भगवंत मान ने कहा कि भाजपा के लोगों से यह सवाल पूछिए। वहां तो जिन लोगों के खिलाफ केस होते हैं, यदि वही उनकी पार्टी में आ जाते हैं तो वह सही हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा के पास तो पंजाब में नेता ही नहीं हैं। भाजपा का यहां पर कांग्रेस विंग है। रवनीत बिट्टू, अमरिंदर सिंह, सुनील जाखड़ जैसे नेता मुख्य हैं, जो कभी कांग्रेस में हुआ करते थे। इसी तरह मनप्रीत बादल हैं, जो कई दलों से पाला बदलते हुए भाजपा में आ गए हैं।

कर्नाटक धर्मस्थल मामला: जांच में नया मोड़, सात खोपड़ियां बरामद

कर्नाटक कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिले के बंगलगुद्दा क्षेत्र में धर्मस्थल सामूहिक दफन मामले की जांच कर रही विशेष जांच दल (एसआईटी) को गुरुवार को दो और खोपड़ियां मिली हैं। इसके साथ ही अब तक सात मानव खोपड़ियां बरामद हो चुकी हैं। ये खोपड़ियां मुख्य रूप से मध्यम आयु के पुरुषों की बताई जा रही हैं और ये अवशेष लगभग एक वर्ष पुराने हो सकते हैं। फोरेंसिक जांच से इसकी और पुष्टि होने की उम्मीद है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने संकेत दिया है कि ये अवशेष संभवतः आत्महत्या के मामलों से जुड़े हो सकते हैं। विशेष जांच दल धर्मस्थल में कथित तौर पर सैकड़ों लोगों की हत्या और अवैध दफनाने के मामलों की जांच कर रहा है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, एसआईटी ने बुधवार को पांच खोपड़ियां बरामद की थीं, जबकि गुरुवार को दो और मिलीं हैं। एंटी-नक्सल फोर्स के कर्मियों के साथ पुलिस और वन अधिकारियों की संयुक्त टीम ने लगभग 12 एकड़ में फैले जंगली क्षेत्र को खंगाला है। खोज अभियान के दौरान अन्य मानव अवशेषों के अलावा एक लाठी भी मिली। एसआईटी सूत्रों ने बताया कि ये खोजें बंगलगुद्दा रिजर्व फॉरेस्ट के घने इलाके में की गईं, जहां पहले भी संदिग्ध गतिविधियों की शिकायतें मिली थीं। सनसनीखेज आरोपों से शुरू हुई जांच धर्मस्थल सामूहिक दफन मामला जुलाई 2025 में तब सुर्खियों में आया जब एक पूर्व सफाई कर्मचारी ने दावा किया कि 1995 से 2014 के बीच उसे मंदिर शहर के आसपास 100 से अधिक शव दफनाने के लिए मजबूर किया गया था। शिकायतकर्ता की पहचान सी.एन. चिन्नय्या के रूप में हुई। उसने आरोप लगाया कि ये शव मुख्य रूप से महिलाओं और नाबालिगों के थे, जिनमें यौन हिंसा के निशान थे। चिन्नय्या ने अदालत में कुछ कंकाल अवशेष भी पेश किए थे। इसके बाद कर्नाटक सरकार ने 19 जुलाई को डीजीपी प्रणब मोहंती के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया। जांच के दौरान 17 स्थलों पर खुदाई हुई, लेकिन अधिकांश जगहों पर कोई प्रमुख अवशेष नहीं मिले। अगस्त में चिन्नय्या को झूठी गवाही के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया और उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। एक अन्य ट्विस्ट में, एक महिला ने अपनी बेटी के लापता होने का दावा वापस ले लिया, जो कथित तौर पर काल्पनिक था। चिन्नय्या की अदालती पेशी और हाईकोर्ट का निर्देश गुरुवार को चिन्नय्या को बेलथंगड़ी अदालत में पेश किया गया, जहां उसका बयान दर्ज किया गया। वह अगली सुनवाई के लिए 23 सितंबर को फिर अदालत में पेश होगा। इस बीच, कर्नाटक हाईकोर्ट ने गुरुवार को याचिकाकर्ताओं को निर्देश दिया कि वे धर्मस्थल में कथित शव दफन के बारे में कोई स्वतंत्र जानकारी रिकॉर्ड पर रखें। जस्टिस एम. नागप्रसन्ना ने सुनवाई को 26 सितंबर तक स्थगित कर दिया। एसआईटी के एक अधिकारी ने बताया, "ये खोपड़ियां हाल की लग रही हैं और पुरुषों की हैं। फोरेंसिक परीक्षण से मौत का कारण और समय स्पष्ट होगा। हम आत्महत्या या अन्य प्राकृतिक कारणों की संभावना तलाश रहे हैं।" राजनीतिक हलकों में भी यह मामला गरमाया हुआ है। भाजपा ने कांग्रेस सरकार पर मंदिर शहर की छवि खराब करने का आरोप लगाया है, जबकि कांग्रेस इसे साजिश बता रही है।  

सेवा सम्मान 2025: केसरी फाउंडेशन ने समाजसेवा की विभूतियों को किया सम्मानित

इंदौर इंदौर प्रेस क्लब परिसर में केसरी फाउंडेशन का पहला स्थापना दिवस और केसरी सेवा सम्मान 2025 का भव्य आयोजन सम्पन्न हुआ। यह आयोजन केवल सम्मान समारोह नहीं, बल्कि समाज सेवा, समर्पण और प्रेरणा का उत्सव बन गया। कार्यक्रम में शरीर से दिव्यांग किंतु हौसलों से बुलंद मोटिवेशनल स्पीकर पूनम श्रोती (भोपाल) ने अपने उद्बोधन से सबका दिल जीत लिया। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर संध्या अग्रवाल एवं चित्रा वाजपेई को सम्मानित किया गया। वरिष्ठतम पत्रकार उमेश रेखे को पत्रकारिता में छह दशक से अधिक योगदान हेतु लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड प्रदान किया गया। कुष्ठ रोगियों एवं बुजुर्गों की सेवा में समर्पित सुधीर भाई गोयल, नाममात्र शुल्क पर गंभीर बीमारियों का आयुर्वेद उपचार करने वाले डॉ. शिवदयाल वर्डे को सम्मानित किया गया। इंदौर की स्वच्छता अभियान की मिसाल बनीं सफाई कर्मी इंदिरा बाई श्यामलाल और महिला सुरक्षा में उल्लेखनीय कार्य करने वाली पुलिस अधिकारी गौरी तिवारी को भी सेवा सम्मान मिला। इसके अलावा समाजसेवा और जनहित कार्यों में योगदान हेतु जगप्रीत सिंह टुटेजा, बबीता हार्डिया, पायल गिदवानी, रेनू जय सिंघानी, विवेक गावडे, प्रीति बवेजा, हेमंत गट्टानी, हिना नीमा सहित अनेक विभूतियों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम पूज्य श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर नितिन दास जी महाराज के सानिध्य में सम्पन्न हुआ। विशेष अतिथि के रूप में विधायक गोलू शुक्ला, वरिष्ठ पत्रकार एवं मध्यप्रदेश प्रेस क्लब अध्यक्ष डॉ. नवीन आनंद जोशी तथा केंद्रीय गुरुसिंघ सभा मप्र-छत्तीसगढ़ अध्यक्ष हरपाल सिंह मोनू भाटिया उपस्थित रहे। आयोजन की सफलता में केसरी फाउंडेशन की टीम – संजीव मल्होत्रा, लतिका नजान, संजय मिश्रा, मनजीत चावला, मनोज नजान, तेजपाल सिंह चावला, रोहन मल्होत्रा, शालिनी जोशी, मंजूषा नाचन, उपेंद्र जी, प्रीति अजमानी और हरलीन कौर चावला का महत्वपूर्ण योगदान रहा। फाउंडेशन ने संकल्प लिया है कि समाज सेवा और प्रतिभाओं को मंच देने का यह प्रयास निरंतर जारी रहेगा।

नगर वनों का उचित विकास और रखरखाव हो: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

वनों में स्थित आस्था स्थलों को किया जाए विकसित : मुख्यमंत्री डॉ. यादव नगर वनों का उचित विकास और रखरखाव हो: मुख्यमंत्री डॉ. यादव नदियों के किनारों पर पौधरोपण को करें प्रोत्साहित: मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वन विभाग की गतिविधियों की समीक्षा की भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश के वनांचल में ऐसे बहुत से क्षेत्र हैं जिन्हें स्थानीय समुदायों द्वारा सांस्कृतिक या धार्मिक मान्यताओं के आधार पर पारंपरिक रूप से संरक्षित किया जाता है। आस्था के ये क्षेत्र न केवल आध्यात्मिक महत्व रखते हैं, बल्कि जैवविविधता संरक्षण, पारिस्थितिकी संतुलन, सामुदायिक एकता और सांस्कृतिक विरासत को बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने ऐसे स्थलों को देवलोक वनों के रूप में विकसित करने की जरूरत बताई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वन क्षेत्र में प्रदेश की प्रमुख नदियों के दोनों ओर 5 किलोमीटर क्षेत्र में पौधारोपण गतिविधियों को बढ़ाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरूवार को मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में वन विभाग की गतिविधियों की समीक्षा कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नदियों के किनारों के अतिक्रमण हटाने में स्थानीय समुदाय का सहयोग लिया जाए। साथ ही स्थानीय समुदाय के आय संवर्धन के लिए पौधारोपण में औषधीय पौधों सहित उपयोगी पौधों के रोपण को प्राथमिकता दी जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इंदौर उज्जैन देवास क्षेत्र को मेट्रोपोलिटन एरिया के रूप में विकसित किया जा रहा है, क्षिप्रा नदी के संरक्षण की योजना तदनुसार बनाई जाए। मुख्यमंत्री ने नगर वनों के उचित विकास और रखरखाव के संबंध में भी अधिकारियों को निर्देशित किया। मगरमच्छ व अन्य जलीय जीव, जल संरचनाओं के स्वस्थ इकोसिस्टम के लिए जरूरी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नदियों और जल संरचनाओं के स्वस्थ ईकोसिस्टम को बनाए रखने में मगरमच्छ, घड़ियाल और कछुओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन नदियों और जल संरचना में यह जीव अधिक संख्या में हैं, वहां से उन्हें शिफ्ट कर अन्य नदियों और जल संरचना में छोड़ा जाए। इसकी शुरुआत नर्मदा और तवा नदी से की जाए। बैठक में वन ग्रामों को राजस्व ग्राम में परिवर्तित करने, लघु वन उपज के न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि, तेंदूपत्ता बोनस वितरण आदि विषयों पर भी विचार-विमर्श हुआ। बैठक में अपर मुख्य सचिव वन  अशोक वर्णवाल, प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन बल प्रमुख  व्ही.एन. अम्बाडे सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।  

राहुल की यात्रा में दिखी एकता, पर तेजस्वी की चुप्पी के पीछे क्या है गठबंधन की गांठ?

पटना  बिहार विधानसभा चुनाव में सीटों का बंटवारा दोनों गठबंधनों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है. एनडीए में चिराग पासवान और जीतन राम मांझी अधिकाधिक सीटें हासिल करने के लिए लंबे समय से बवेला मचाए हुए हैं. मांझी अब 20 सीटों के लिए अड़े हुए हैं. चिराग पासवान की पार्टी लोजपा-आर (LJP-R) को न सिर्फ सीटें चाहिए, बल्कि अब सीएम पद की रेस में भी उन्हें शामिल कर दिया है. चिराग के बहनोई सांसद अरुण पासवान की नजर में चिराग सीएम पद के लिए फिट कैंडिडेट हैं. मांझी ने अधिक सीटें मांगने के पीछे के कारण भी उजागर कर दिए हैं. उनका कहना है कि पार्टी को सदन में मान्यता के लिए कम से कम 8सीटों पर जीतना जरूरी है. और, यह तभी संभव होगा, जब उनकी पार्टी को 20 या इससे अदिक सीटें मिलें. एनडीए का तो रिकार्ड ही रहा है कि टिकट बंटवारे से पहले खूब चिल्ल-पों मचती है, लेकिन जिसे जितनी सीटें मिलती हैं, वे उससे ही संतुष्ट हो जाते हैं. सबसे मुश्किल हालात 8 विपक्षी दलों के महागठबंधन में पैदा हो गए हैं. कांग्रेस और आरजेडी के बीच सीट बंटवारे की शर्तों को लेकर घमासान मचा हुआ है. कांग्रेस ने कसी RJD की नकेल महागठबंधन के दो सबसे बड़े घटक दल राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे और नेतृत्व को लेकर तलवारें तन गई हैं. अव्वल तो कांग्रेस तेजस्वी को चुनाव से पहले सीएम फेस घोषित करने को तैयार नहीं, जबकि तेजस्वी खुद को सीएम फेस बताते रहे हैं. बिहार अधिकार पर निकले तेजस्वी कांग्रेस की चुप्पी के बावजूद अपने को भावी सीएम के रूप में पेश कर रहे हैं. पहले भी वे कई बार यह बात कह चुके हैं. राहुल के साथ वोटर अधिकार यात्रा के दौरान उन्होंने यहां तक कह दिया कि राहुल को पीएम और उन्हें सीएम बनाने के लिए वोट कीजिए. जहां तक सीटों का सवाल है तो कांग्रेस 2020 की तरह मनपसंद 70 सीटें तो चाहती ही है, साथ ही अब उप मुख्यमंत्री का पद भी मांगने लगी है. दोनों दलों के बीच तनातनी का आलम यह है कि सीट बंटवारे के मुद्दे पर 15 सितंबर को होने वाली महागठबंधन की बैठक टालनी पड़ गई. अब तेजस्वी यादव ने भी सभी 243 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है. खींचतान से महागठबंधन में दिख रही दरार अगर टूट की बुनियाद बन जाए तो आश्चर्य नहीं. बिहार की वह सीट, जिसे लेकर RJD-कांग्रेस में खींच गई तलवार बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर महागठबंधन के अंदर सीट शेयरिंग का मसला गरमा गया है. खासकर कुटुंबा (SC) विधानसभा सीट को लेकर कांग्रेस और आरजेडी के बीच खींचतान तेज हो गई है. कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक आरजेडी ने इस सीट से पूर्व मंत्री सुरेश पासवान का नाम आगे कर दिया है. इससे कांग्रेस नेताओं में नाराजगी है. कांग्रेस का आरोप है कि आरजेडी जानबूझकर दबाव की राजनीति कर रही है और कुटुंबा में उनकी मजबूत स्थिति को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है. दरअसल, कुटुंबा सीट पर कांग्रेस का लगातार दबदबा रहा है. मौजूदा विधायक राजेश कुमार और उनके पिता सात बार से इस सीट पर कब्जा बनाए हुए हैं. 2020 के विधानसभा चुनाव में भी राजेश कुमार ने कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में जीत हासिल की थी. उन्हें 50,822 वोट मिले थे, जबकि रनर-अप हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) के उम्मीदवार शर्वन भुइंया को 34,169 वोट ही मिले. कांग्रेस ने तब 16,653 वोटों के अंतर से यह सीट अपने नाम की थी. साल 2020 के नतीजे कैंडिडेट    कुल वोट     वोट शेयर राजेश कुमार    50,822    36.61% शर्वन भुइंया    34,169    24.61% कहां फंसा है मामला? यही वजह है कि कांग्रेस मानती है कि इस सीट पर उनकी स्थिति बेहद मजबूत है और आरजेडी का नया चेहरा थोपना केवल राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति है. सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस इस बार आरजेडी की मोहताज नहीं है और बदली हुई परिस्थितियों में बेहतर तरीके से चुनाव लड़ रही है. कांग्रेस नेताओं का यह भी आरोप है कि राजेश राम को डिप्टी सीएम का चेहरा सामने न लाने के लिए भी अंदरखाने राजनीति हो रही है. यानी, महागठबंधन के भीतर सत्ता संतुलन को लेकर खींचतान खुलकर सामने आने लगी है. 76 सीटों पर दावेदारी इसी बीच, खबर है कि कांग्रेस ने इस बार बिहार की 76 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर ली है. इनमें से 38 सीटों पर जल्द ही उम्मीदवारों का ऐलान भी कर दिया जाएगा. सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस इन सीटों पर आरजेडी के ग्रीन सिग्नल का इंतजार नहीं करेगी. यानी, पार्टी अब अपनी रणनीति खुद बनाने के मूड में है. आज दिल्ली में कांग्रेस की अहम बैठक भी होने वाली है, जिसमें बिहार कांग्रेस के कई नेता शामिल होंगे. माना जा रहा है कि इस बैठक के बाद कांग्रेस अपने रुख को और स्पष्ट करेगी. अब देखना यह है कि यह खींचतान सीट शेयरिंग फॉर्मूले को कितना प्रभावित करती है और क्या महागठबंधन एकजुट रहकर मैदान में उतर पाता है. कांग्रेस की आक्रामक दावेदारी सीटों की संख्या के लिए आरजेडी के सामने कांग्रेस ने 2020 को आधार बनाने की शर्त रखी है. तब कांग्रेस को महागठबंधन में 70 सीटें मिली थीं. कांग्रेस का कहना है कि उसे जो सीटें दी गईं, उसमें आधी से अधिक कमजोर सीटें थीं. इसलिए उसने टिकट बंटवारे में अच्छी-बुरी सीटों में संतुलन बनाने की दूसरी शर्त रखी है. कांग्रेस केवल 19 सीटें जीत पाई थी. उसके खराब स्ट्राइक रेट को महागठबंधन की हार का एक मुख्य कारण माना गया था. कांग्रेस का कहना है कि उसे आधी से अधिक वैसी कमजोर सीटें मिली थीं, जिसकी वजह से उसका स्ट्राइक रेट खराब रहा. कांग्रेस ने अपने लिए उप मुख्यमंत्री पद की तीसरी शर्त रखी है. महागठबंधन में शामिल वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी भी डिप्टी सीएम पद के लिए पहले से ही हाय-तौबा मचाए हुए हैं. सहनी तो यहां तक कहते हैं कि अगर तेजस्वी सीएम बनेंगे तो उनका डिप्टी सीएम बनना पक्का है. कांग्रेस की शर्तों से यह साफ है कि काग्रेस अब बिहार में अपने को आरजेडी का पिछलग्गू बनाए रखने से बचना चाहती हैं. राहुल की वोटर अधिकार … Read more

राहुल गांधी के Gen-Z बयान पर विश्वास सारंग ने कसा तगड़ा जवाब

भोपाल   मध्य प्रदेश के मंत्री विश्वास सारंग ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बयानों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि जेन ज़ी (युवा पीढ़ी) ने देश को बचाने का काम किया है और यही कारण है कि उन्होंने नरेंद्र मोदी को बार-बार देश का प्रधानमंत्री चुना. सारंग ने राहुल गांधी पर नकारात्मक राजनीति करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी झूठ और भ्रामक बातों के सहारे लोगों को भड़काने की कोशिश करते हैं. उनकी राजनीति देश और उनके लिए हितकारी नहीं है. सारंग ने राहुल के रवैये को बचकाना बताया और कहा कि वह गंभीर मुद्दों को समझने में असमर्थ हैं. सारंग ने राहुल गांधी के उस बयान पर भी निशाना साधा जिसमें उन्होंने कहा था कि लोकतंत्र बचाने की जिम्मेदारी उनकी नहीं है, वह सिर्फ दबाव बनाएंगे. सारंग ने इसे गैर-जिम्मेदाराना बयान बताया और कहा कि राहुल गांधी की नकारात्मक सोच के कारण ही जनता ने उन्हें बार-बार नकारा है. उन्होंने वोट चोरी के मुद्दे पर भी राहुल को आड़े हाथों लिया. सारंग ने कहा कि चुनाव आयोग पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि अगर कोई शिकायत है, तो उसे लिखित शपथपत्र के साथ दर्ज करना होगा. लेकिन राहुल गांधी बिना सबूत के बयानबाजी करते हैं. सारंग ने जोर देकर कहा कि देश का हर वर्ग, खासकर जेन ज़ी, नरेंद्र मोदी के साथ है. युवाओं में मोदी के प्रति विशेष आकर्षण है और वह उनके लिए हीरो हैं. उन्होंने कहा कि मोदी सरकार युवाओं के लिए कई कदम उठा रही है, जिससे देश 2047 तक विकसित भारत बनने की दिशा में बढ़ रहा है. यह सपना जेन ज़ी ही साकार करेगी. सारंग ने कहा कि नकारात्मक राजनीति का कोई भविष्य नहीं है. देश का लोकतंत्र मजबूत है और जनता ने बार-बार मोदी को चुनकर यह साबित किया है. राहुल गांधी की गैर-जिम्मेदाराना बातें और भ्रामक बयानबाजी उनकी हार का कारण बनी हैं. जनता ने उनकी नकारात्मक राजनीति को पूरी तरह खारिज कर दिया है.

खाड़ी देश का साफ संदेश: इज़रायल से संबंध नहीं तोड़ेंगे, मुस्लिम जगत में बढ़ी खींचतान

अबू धाबी  कतर पर इजरायली हमले और फिलिस्तीन के मुद्दे पर एकजुट हुए अरब जगत में अब विरोध के सुर उठने लगे हैं। खाड़ी देश संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने अन्य मुस्लिम देशों के अलग स्टैंड लेते हुए कहा है कि अगर प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार वेस्ट बैंक के कुछ हिस्से या पूरे हिस्से को अपने देश मिला लेती है, तब भी संयुक्त अरब अमीरात इजरायल के साथ अपने राजनयिक संबंधों को नहीं तोड़ेगा। हालांकि, UAE ने कहा कि वह राजनयिक संबंधों को कम करने पर विचार कर सकता है लेकिन दोनों देशों के बीच संबंध पूरी तरह से नहीं तोड़ सकता। बड़ी बात यह है कि रॉयटर्स के सूत्रों ने यह खबर ऐसे समय में दी है, जब UAE विदेश मंत्रालय की अधिकारी लाना नुसेबेह ने 3 सितंबर को द टाइम्स ऑफ इजरायल को दिए इंटरव्यू में कहा था कि वेस्ट बैंक का किसी भी तरह का विलय एक "रेड लाइन" होगा और वह अब्राहम समझौते को खतरे में डालेगा। साथ ही साथ क्षेत्रीय एकीकरण की कोशिशों को खत्म कर देगा लेकिन गुरुवार की शाम अनाम खाड़ी अधिकारियों के हवाले से इस रिपोर्ट का खंडन कर दिया गया और यह बात सामने आई के UAE इजरायल से नाता नहीं तोड़ेगा। वेस्ट बैंक इजरायल-फिलिस्तीनी संघर्ष का केंद्र बना हुआ है। फिलिस्तीनी इसे गाजा पट्टी के साथ अपने परिकल्पित राष्ट्र का अहम हिस्सा मानते हैं। दोहा में जुटे थे UAE समेत 50 मुस्लिम मुल्क यह डेवलपमेंट ऐसे वक्त में हुआ है, जब कुछ दिनों पहले ही कतर की राजधानी दोहा में करीब 50 मुस्लिम देशों ने बैठक की और इजरायल के खिलाफ एकजुटता दिखाई है। इस बैठक में UAE के पड़ोसी देशों सऊदी, ईरान, इराक, समेत जॉर्डन, तुर्की, पाकिस्तान, मलेशिया, सीरिया भी शामिल हुआ था। UAE भी उस बैठक का हिस्सा था। इसमें सभी अरब देशों ने इजरायल को गाजा में नरसंहार के लिए जिम्मेदार ठहराया और दोहा में उजरायली हमले की निंदा की। 2020 से UAE और इजरायल में संबंध बता दें कि संयुक्त अरब अमीरात उन कुछ अरब देशों में से एक है जिनके इजरायल के साथ राजनयिक संबंध हैं और इन संबंधों को कमतर करना अब्राहम समझौते के लिए एक बड़ा झटका होगा। UAE ने 2020 में इजरायल के साथ संबंध स्थापित किए थे। अगर संबंधों में कटौती होती है तो यह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और नेतन्याहू की विदेश नीति के लिए भी एक उपलब्धि हो सकती है। इजरायल सरकार ने हाल ही में ऐसे कदम उठाए हैं जो वेस्ट बैंक के विलय का पूर्वाभास दे सकते हैं, जिसे 1967 में छह दिवसीय युद्ध में जॉर्डन से पूर्वी यरुशलम के साथ छीन लिया गया था। संयुक्त राष्ट्र और अधिकांश देश इस तरह के कदम का विरोध करते रहे हैं। दूसरी तरफ, नेतन्याहू अगले साल होने वाले चुनाव से पहले इस विलय को एक चुनाव जिताऊ मुद्दे के रूप में देख रहे हैं।  

स्ट्राइक रेट के नाम पर सीटों की डिमांड, लोजपा ने चिराग को 2:17 वाला उदाहरण दिखाया

पटना  बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए एनडीए में सीट शेयरिंग पर अभी सहमति नहीं बनी है।इस बीच केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने लोकसभा के स्ट्राइक रेट के आधार पर विधानसभा चुनाव में सीटों की मांग कर दी है। एलजेपी-आर ने अपनी सहयोगी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) को 2019 में 2 सांसदों के बावजूद एनडीए में 17 सीटों की याद दिलाकर सियासी पारे को गर्मा दिया है। एलजेपी-आर के बिहार प्रभारी अरुण भारती ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि आज बिहार विधानसभा में उनकी पार्टी का एक भी विधायक नहीं है। चर्चा हो रही है कि आने वाले चुनाव में लोजपा को सम्मानजनक सीटें नहीं मिलेंगी। उन्होंने दावा किया कि यह धारणा अधूरी है। असलियत यह है कि कुछ लोग LJP-R को केवल सीमित सीटों तक बांधकर देखना चाहते हैं। मानो उसकी असली ताकत और जनता में पकड़ को नजर अंदाज किया जा सकता हो। चिराग पासवान के जीजा एवं जमुई से लोजपा (रामविलास) के सांसद अरुण भारती ने आगे कहा,"बिहार की राजनीति और NDA का इतिहास बार-बार इसके बिल्कुल उलट गवाही देता है। 2019 के लोकसभा चुनाव में जब सिर्फ 2 सांसद की पार्टी (जेडीयू) को लोकसभा चुनाव में 17 सीटें मिल सकती हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में जब केवल 1 सांसद वाली पार्टी को 5 सीटें दी जा सकती हैं और वह पांचों सीटों पर जीत दर्ज करके गठबंधन के भरोसे को और मजबूत कर सकती है, तब यह तर्क ही बेमानी हो जाता है कि लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को विधानसभा चुनाव में सीमित हिस्सेदारी दी जानी चाहिए।" अरुण भारती ने साफ कहा कि लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) की जमीनी पकड़, संगठन की मजबूती इस बात को साबित करती है कि पार्टी को सीमित सीटों तक बांधकर देखना गलत है। उन्होंने दावा किया किआने वाले विधानसभा चुनाव में LJP-R निर्णायक भूमिका निभाएगी और गठबंधन के भीतर उसे उसका योग्य और सम्मानजनक स्थान अवश्य मिलेगा। दरअसल, 2014 के लोकसभा चुनाव में जेडीयू ने एनडीए से अलग रहकर 38 सीटों पर चुनाव लड़ा था और दो पर ही जीत मिल पाई थी। 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले नीतीश एनडीए में वापस आ गए थे। उस चुनाव में दो सांसदों वाली जेडीयू को एनडीए में 17 सीटें लड़ने के लिए मिली थीं। उस समय लोजपा भी गठबंधन में थी और 7 में से 6 सीटों पर जीत दर्ज की थी। इसके बाद लोजपा में टूट हो गई और चिराग पासवान एवं चाचा पशुपति पारस के दो अलग-अलग गुट बन गए। पारस गुट एनडीए में बना रहा और चिराग 2020 के विधानसभा चुनाव से पहले अलग होकर अकेले बिहार के चुनावी मैदान में उतरे थे। हालांकि, वे कुछ खास कमाल नहीं कर पाए थे। 2024 लोकसभा चुनाव में चिराग का 100 फीसदी स्ट्राइक रेट 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले चिराग की एनडीए में वापसी हो गई और चाचा पशुपति पारस आउट हो गए। चिराग की पार्टी को एनडीए में रहकर 5 सीटें लड़ने कों मिली थीं, जिसमें सभी पर एलजेपी-आर की जीत हुई थी। अब पार्टी उसी 100 प्रतिशत स्ट्राइक रेट के हिसाब से बिहार विधानसभा चुनाव में जिताऊ सीटें मांग रही है।  

MBBS डॉक्टर को नहीं आता इंजेक्शन लगाना, गोरखपुर में 15 वर्षीय बच्ची बनी शिकार

गोरखपुर जिले के गगहा थाना क्षेत्र के महुराई सिंघला गांव में एक 15 वर्षीय बच्ची रंजना यादव को अस्पताल में लापरवाही का ऐसा खामियाजा भुगतना पड़ा, जो उसकी जान पर बन आई। परिजनों के अनुसार, निजी अस्पताल के एक कर्मचारी ने गलत तरीके से इंजेक्शन लगाया, जिससे इंजेक्शन की सुई (निडिल) टूटकर बच्ची की नस में फंस गई। घटना के बाद न केवल अस्पताल प्रशासन पर गंभीर सवाल उठे, बल्कि पुलिस पर भी आरोप लगे कि उन्होंने शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया। फिलहाल बच्ची का ऑपरेशन कर निडिल निकाल दी गई है और अब वह खतरे से बाहर है। सीएमओ गोरखपुर ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। क्या हुआ था? रंजना की तबीयत खराब होने पर परिवार वाले उसे लेकर हाटा स्थित एक अस्पताल में गए। वहां एक कर्मचारी ने बाएं हाथ में इंजेक्शन लगाया, लेकिन तुरंत ही रंजना को असहनीय दर्द शुरू हो गया। थोड़ी देर बाद दूसरे हाथ में भी इंजेक्शन लगाया गया, मगर आराम नहीं मिला। रातभर दर्द से कराहती बच्ची को परिजन दोबारा अस्पताल ले गए, लेकिन वहां से सिर्फ दवा देकर वापस भेज दिया गया। दर्द बढ़ने पर एक्स-रे करवाया गया, जिसमें खुलासा हुआ कि निडिल टूटकर नस में फंसी हुई है। अस्पताल ने किया इंतजार, फिर भगाया एक्स-रे रिपोर्ट लेकर जब परिजन दोबारा उसी अस्पताल पहुंचे, तो वहां उन्हें पूरे दिन अस्पताल में बैठाए रखा गया और आखिर में बदसलूकी कर भगा दिया गया। इससे आहत परिवार ने गगहा थाने में शिकायत की, लेकिन वहां भी कोई सुनवाई नहीं हुई। डीएम से की शिकायत, सीएमओ ने दिए जांच के आदेश न्याय न मिलने पर पीड़ित परिवार ने जिलाधिकारी कार्यालय में गुहार लगाई, जिसके बाद DM गोरखपुर ने सीएमओ को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। बच्ची को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने 2 दिन इलाज के बाद सफल ऑपरेशन कर नस में फंसी निडिल निकाल दी। परिजनों की मांग: हो सख्त कार्रवाई रंजना की मां सीमा यादव का कहना है कि अगर समय पर सही इलाज मिलता, तो बच्ची को इतनी पीड़ा नहीं झेलनी पड़ती। उन्होंने मांग की कि ग़ैरजिम्मेदार अस्पताल कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी और मरीज के साथ ऐसी लापरवाही न हो।  

मंदोदरी के किरदार में दिखेंगी पूनम पांडेय, लव-कुश रामलीला में रावण की भूमिका पर चर्चा

नई दिल्ली एक्ट्रेस पूनम पांडेय शोबिज में काफी वक्त से नहीं दिखी हैं. वो पैप्स के कैमरों में जरूर स्पॉट होती हैं. मगर किसी शो या मूवी में नजर नहीं आई हैं. पूनम को स्क्रीन पर देखने का इंतजार कर रहे फैंस के लिए गुडन्यूज है. एक्ट्रेस को वो पर्दे पर तो नहीं लेकिन रामलीला में एक्टिंग करते हुए देख पाएंगे. पूनम को रामलीला में मिला अहम रोल पुरानी दिल्ली में होनी वाली लव कुश रामलीला में पूनम पांडे रावण की पत्नी मंदोदरी का रोल प्ले करेंगी. रामलीला में एक्टर आर्य बब्बर रावण का रोल निभाएंगे. रामलीला में मंदोदरी का अहम रोल प्ले करने का मौका मिलने पर पूनम ने खुशी जताई है. उनका एक बयान सामने आया है जिसमें उन्होंने रामलीला समिति का आभार जताया है. पूनम ने जताया आभार पोस्ट में लिखा है- लव कुश रामलीला समिति की ओर से मुझे इस पावन अवसर पर आमंत्रित करने के लिए मैं दिल से धन्यवाद करती हूं. ये मेरे लिए खुशी और गर्व की बात है. मुझे इस ऐतिहासिक और भव्य आयोजन का हिस्सा बनने का जो मौका मिला है. रामलीला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि हमारी संस्कृति और पंरपरा का उत्सव है. इसमें सम्मिलित होकर मैं खुद को सौभाग्यशाली मानती हूं. मैं पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ इस इवेंट का हिस्सा बनने का इंतजार कर रही हूं. आर्य बब्बर बने रावण  दिल्ली में होने वाली लव कुश रामलीला सबसे फेमस रामलीला में गिनी जाती हैं. इसका मंच लाल किले के मैदान में तैयार किया जाता है. आर्य बब्बर ने 2015 में आए टीवी शो 'संकट मोचन महाबली हनुमान' में रावण का रोल प्ले किया था. इस किरदार को रामलीला के मंच पर फिर से निभाने के लिए वो सुपर एक्साइटेड हैं. फैंस पूनम पांडेय और आर्य बब्बर की जोड़ी को लेकर उत्साहित हैं.  वर्कफ्रंट पर पूनम को आखिरी बार स्क्रीन पर वेब सीरीज 'हनीमून सुइट रूम नंबर 911' में देखा गया था. इससे पहले वो रियलिटी शो 'लॉकअप' में दिखी थीं. पूनम में 2013 में मूवी 'नशा' से बॉलीवुड में कदम रखा था. उनका एक्टिंग करियर काफी कोशशों के बावजूद नहीं चल सका. पूनम का अपना यूट्यूब चैनल और ऐप है, जहां वो अपनी बोल्डनेस का तड़का लगाती हैं. एक्ट्रेस अपनी लव लाइफ और तलाक के कारण लाइमलाइट में रहीं.