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मध्य प्रदेश पुलिस की बड़ी कार्रवाई: ऑपरेशन फास्ट में फर्जी सिम रैकेट पर कसा शिकंजा

भोपाल  मध्य प्रदेश स्टेट साइबर पुलिस ने फर्जी सिम कार्डों की बिक्री के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है। 'ऑपरेशन फास्ट' (फर्जी सिम एक्टिवेशन टर्मिनेशन) के तहत पुलिस ने 20 जिलों में 94 सिम विक्रेताओं को पकड़ा है। अब तक 50 एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं और जांच जारी है। इस ऑपरेशन में 44 आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं। मध्य प्रदेश में ऑपरेशन फास्ट: फर्जी सिम की बिक्री में 44 गिरफ्तार फर्जी सिम का इस्तेमाल कंबोडिया, थाईलैंड, झारखंड, पश्चिम बंगाल, बिहार, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और दिल्ली में साइबर फ्रॉड, डिजिटल उत्पीड़न जैसी घटनाओं के लिए हो रहा था। साइबर एसपी प्रणय नागवंशी ने आईएएनएस से बातचीत में बताया कि इंडियन फोर्सेस कम्युनिकेशन दिल्ली से प्राप्त विशाल डेटा से इस अभियान की शुरुआत की गई। उन्होंने बताया कि हमें साइबर क्राइम, फ्रॉड और डिजिटल उत्पीड़न में इस्तेमाल होने वाले नंबरों की जानकारी मिली। विश्लेषण से पता चला कि ये सिम फर्जी नाम-पते पर जारी किए गए थे। कई पॉइंट ऑफ सेल (पीओएस) एजेंट इन्हें अवैध रूप से बेच रहे थे। जांच में सामने आया कि यह रैकेट मध्य प्रदेश के कई जिलों में फैला है। हमने सबसे पहले 20 जिलों को चिन्हित किया और जिला पुलिस के साथ समन्वित कार्रवाई शुरू की।" उन्होंने बताया कि ऑपरेशन 15 दिनों में पूरा किया गया, जिसमें इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और भोपाल के साइबर कार्यालयों के साथ जिला पुलिस की संयुक्त टीम ने काम किया। छह सदस्यीय स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप ने प्रदेशव्यापी अभियान चलाया।तारीखें निर्धारित कर समन्वय स्थापित किया गया। आरोपियों से बरामद सामान में 24 लूप सिम (फर्जी सक्रिय सिम), 26 मोबाइल और लैपटॉप, 7 थंब इंप्रेशन मशीनें, तीन डेबिट कार्ड, दो पासबुक, 100 फेक सिम और कई दस्तावेज शामिल हैं। ये सामान साइबर ठगों को फर्जी आईडी बनाकर फ्रॉड करने में मदद करते थे। नागवंशी ने कहा, "कई ग्राहकों को पता ही नहीं कि उनके नाम पर कितने सिम सक्रिय हैं। हम उन सभी को 'संचार साथी' पोर्टल के जरिए चेक करने की सलाह देते हैं। अगर आपकी जानकारी के बिना सिम लिया गया हो तो उसे निष्क्रिय कराएं। अभी 20 जिलों में कार्रवाई हो रही है, जल्द अन्य जिलों में भी विस्तार होगा।"

नए सभापति सीपी राधाकृष्णन: शपथ ग्रहण कर किया कार्यभार ग्रहण

नई दिल्ली सीपी राधाकृष्णन ने भारत के 15वें उपराष्ट्रपति के रूप में शपथ ली। राष्ट्रपति भवन में आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सीपी राधाकृष्णन को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इसके बाद सीपी राधाकृष्णन ने राज्यसभा के सभापति का कार्यभार संभाला। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर इसकी जानकारी दी। उन्होंने शुक्रवार को औपचारिक रूप से राज्यसभा के सभापति का पदभार ग्रहण किया। साथ ही एक्स पर सीपी राधाकृष्णन के पदभार ग्रहण करते हुए तस्वीरें भी शेयर की गई हैं। इससे पहले उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने राजघाट पर महात्मा गांधी को पुष्पांजलि अर्पित की तथा राष्ट्रपिता और उनके सत्य एवं अहिंसा के शाश्वत आदर्शों का सम्मान किया। उन्होंने सदैव अटल में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि अर्पित की। राधाकृष्णन ने दीन दयाल उपाध्याय मार्ग स्थित पंडित दीन दयाल उपाध्याय के स्मारक पर भी पुष्पांजलि अर्पित की। उन्होंने किसान घाट पर पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित कर उनको नमन किया। साथ ही उन्होंने संसद भवन स्थित प्रेरणा स्थल पर महान विभूतियों को पुष्पांजलि अर्पित की। उन्होंने संसद भवन परिसर में एक पौधा भी लगाया और देश की समृद्ध विरासत एवं एक सतत भविष्य के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। नवनिर्वाचित उपराष्ट्रपति के रूप में सीपी राधाकृष्णन ने जगदीप धनखड़ की जगह ली है। धनखड़ ने 21 जुलाई को स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अचानक से उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया था। उपराष्ट्रपति चुने जाने से पहले राधाकृष्णन महाराष्ट्र के राज्यपाल के पद पर कार्यरत थे। सीपी राधाकृष्णन के शपथ ग्रहण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ भी मौजूद रहे।

प्रतिभाशाली युवा ही राष्ट्र की सच्ची पूंजी है : उप मुख्यमंत्री शुक्ल

प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को किया सम्मानित भोपाल  उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने ठाकुर रणमत सिंह महाविद्यालय रीवा में मेरिट सूची में स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि प्रतिभाशाली युवा ही देश की सच्ची पूंजी हैं। परिश्रम और लगन से ही सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है। मेरिट में स्थान प्राप्त करके सम्मानित होने वाले विद्यार्थियों की सफलता के पीछे उनकी प्रतिभा और परिश्रम की कठिन साधना है। विद्यार्थी संस्कारयुक्त शिक्षा और ऊंचे लक्ष्य प्राप्त कर प्रदेश और देश का गौरव बढ़ाएं। जो विद्यार्थी मेरिट सूची में स्थान नहीं बना सके वे पुन: अधिक मेहनत के साथ प्रयास करें। असफलता से मिली सीख ही हमें सफलता की राह दिखाती है। उन्होंने कहा कि शिक्षा तभी सम्पूर्ण होगी जब उसमें सांस्कृतिक मूल्यों और अच्छे संस्कारों का समावेश हो। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि विद्यार्थियों के लिए स्वामी विवेकानंद का जीवन सबसे प्रेरक है। उन्होंने कहा था कि युवा ही राष्ट्र की रीढ़ और भविष्य के नियंता हैं। स्वामी विवेकानंद ने 1893 में ही भविष्यवाणी कर दी थी कि 21वीं सदी भारत की होगी। विद्यार्थी अपनी प्रतिभा और परिश्रम से स्वामी जी की इस भविष्यवाणी को सच बनाएं। देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 2047 तक देश को विकास के सर्वोच्च शिखर पर पहुंचाने का संकल्प लिया है। इसे पूरा करने में युवाओं की भूमिका निर्णायक होगी। उन्होंने कहा कि महाविद्यालय में जनभागीदारी तथा स्ववित्तीय शिक्षकों के मानदेय में पाँच हजार रुपए की वृद्धि की गई है। इसी तरह कुशल श्रमिकों के मानदेय में 2955 रुपए, अर्द्धकुशल श्रमिक 2613 रुपए तथा अकुशल श्रमिकों के मानदेय में 2470 रुपए प्रतिमाह की वृद्धि मंजूर की गई है। संस्था की प्राचार्य डॉ अर्पिता अवस्थी ने महाविद्यालय में संचालित नवीन व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की जानकारी दी। जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती नीता कोल, नगर निगम अध्यक्ष श्री व्यंकटेश पाण्डेय, जन भागीदारी समिति के अध्यक्ष श्री राजेन्द्र ताम्रकार, प्रशासनिक अधिकारी डॉ. महानंद द्विवेदी सहित प्राध्यापकगण एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।  

गहलोत का बयान: मणिपुर दौरे पर PM मोदी को पहले जाना चाहिए था

जयपुर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 सितंबर को पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर जा रहे हैं, जिसे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने औपचारिक करार दिया। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि प्रधानमंत्री को काफी पहले ही मणिपुर जाकर वहां के लोगों की सुध लेनी चाहिए। लेकिन, अफसोस, उन्होंने आज तक ऐसा करना जरूरी नहीं समझा और अब वो मणिपुर जा रहे हैं। इससे साफ जाहिर होता है कि उनका दौरा कुछ नहीं, सिर्फ औपचारिकता भर है। मैं समझता हूं कि इस तरह के दौरे को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री सिर्फ चार घंटे के लिए मणिपुर जा रहे हैं। मैंने दो महीने पहले गृह मंत्री अमित शाह को कहा भी था कि वे मणिपुर जाएं और वहां की स्थिति के बारे में समझने का प्रयास करें। कांग्रेस नेता ने कहा कि सबसे पहले आपको यह समझना होगा कि किसी भी राज्य में प्रधानमंत्री के दौरे का बहुत ही महत्व होता है। आज मणिपुर की स्थिति वैश्विक मोर्चे पर चर्चा का विषय बनी हुई है। अब वहां की स्थिति किसी से छुपी हुई नहीं है। वहीं, अब अगर मणिपुर से हिंसा की खबर सामने आई है, तो इससे यह साफ जाहिर होता है कि यह प्रधानमंत्री मोदी के दौरे का जवाब है। मैं कहता हूं कि अगर प्रधानमंत्री मोदी काफी पहले ही मणिपुर दौरे पर जाते, तो आज इस तरह की स्थिति ही पैदा नहीं होती। लेकिन, यह दुख की बात है कि आज तक प्रधानमंत्री ने कभी भी मणिपुर की स्थिति की सुध लेने की जरूरत नहीं समझी। शायद इसी वजह से वहां के लोगों में प्रधानमंत्री के आगमन को लेकर गुस्सा है। साथ ही, अशोभनीय टिप्पणी के संबंध में सवाल किए जाने पर कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने कहा कि सभी लोग एक-दूसरे की माता का सम्मान करते हैं। मैं कहता हूं कि निसंदेह राहुल गांधी प्रधानमंत्री मोदी की मां का सम्मान करते हैं। विपक्ष के नेता पक्ष के नेताओं की मां का सम्मान करते हैं और पक्ष के नेता भी विपक्ष के नेताओं का सम्मान करते हैं। हर माता का सम्मान इस देश में होना चाहिए। मां तो मां होती है। मां की जगह इस दुनिया में कोई भी नहीं ले सकता है। मैं समझता हूं कि अब मां जैसे विषय को राजनीतिक विषय बनाना उचित नहीं है। इसके अलावा, उन्होंने नेपाल की स्थिति को चिंता का विषय बताया और कहा कि इससे पहले भी कई देश, जिनमें श्रीलंका और अफगानिस्तान जैसे कई देश शामिल हैं, जहां पर राजनीतिक अस्थिरता हमें देखने को मिल चुकी है, ऐसे में अगर अब मौजूदा समय में हमारे पड़ोसी देश नेपाल में इस तरह की हिंसात्मक स्थिति बनी हुई है, तो निसंदेह हमें इसके समाधान का मार्ग तलाशना होगा। उन्होंने कहा कि हमें इस बात का ध्यान रखना होगा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। यहां देश की जनता को अपने नेतृत्व पर भरोसा है। इसके अलावा, कई मामलों में भारत ने वैश्विक मंच पर अहम भूमिका निभाई है। ऐसी स्थिति में हमें इस बात की नैतिक जिम्मेदारी लेनी होगी कि आखिर नेपाल में हमारे रहने के बावजूद ऐसा कैसे हो गया। आखिर इसके पीछे कौन साजिश कर रहा है? कौन मुल्क ऐसा कर रहा है? इस बारे में पता होना चाहिए। इसकी जानकारी निश्चित तौर पर विदेश मंत्रालय के पास है और होनी चाहिए।

सामाजिक न्याय मंत्री कुशवाहा ने नशामुक्ति केंद्रों की जाँच के दिये निर्देश

राज्य स्तरीय कार्यक्रम कर दिव्यांगों की प्रतिभा को मंच देने के निर्देश भोपाल  सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण मंत्री श्री नारायण सिंह कुशवाहा ने प्रदेश में संचालित समस्त शासकीय नशा मुक्ति केंद्रों के निरीक्षण के निर्देश दिये हैं। उन्होंने कहा कि जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में समिति गठित कर केंद्रों का आकस्मिक निरीक्षण कराया जाए। उन्होंने यह निर्देश शुक्रवार को मंत्रालय में विभागीय समीक्षा बैठक में दिये। इसके साथ ही दिव्यांगों के लिए जिला और ब्लॉक स्तर पर मेडिकल बोर्ड के शिविर आयोजित करने के निर्देश भी दिए। मंत्री श्री कुशवाहा ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के "विकसित भारत का मंत्र-भारत हो नशे से स्वतंत्र" देशव्यापी कार्यक्रम के अंतर्गत मध्यप्रदेश में नशा मुक्ति के क्षेत्र में प्रभावी कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। नशा मुक्त समाज के लिए सामाजिक भागीदारी के साथ-साथ विभाग द्वारा जो कार्यक्रम और योजनाएं संचालित की जा रही है, उनका प्रभावी क्रियान्वयन मैदानी स्तर पर किया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि नशे से पीड़ित लोगों के लिए प्रदेश में 13 नशा मुक्ति-सह-पुनर्वास केन्द्र, सात आउट रिच एंड ड्रॉप इन सेंटर, तीन कम्युनिटी बेस्ड पियर-लेड इन्टरवेशन सेंटर तथा 8 जिला मुख्यालय पर डीडीआरसी संचालित किए जा रहे हैं। इन सभी संस्थानों के सुव्यवस्थित संचालन की नियमित समीक्षा किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजन के लिए चलाए जा रहे "सुगम भारत अभियान" की भी नियमित समीक्षा की जाए। मंत्री श्री कुशवाहा ने कहा कि दिव्यांगजन को प्रोत्साहित करने के लिए विभाग द्वारा राज्य स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएं, जिसमें प्रदेश भर के दिव्यांगजन जो गायन, वादन, नृत्य, अभिनय और खेलकूद में रुचि रखते हैं, उनको प्रतिभा दिखाने का अवसर प्राप्त हो सके। इसके लिए विभाग कार्यक्रम की रूपरेखा बनाकर प्रस्तुत करे। प्रमुख सचिव श्रीमती सोनाली वायंगणकर ने बताया कि प्रदेश में नशा मुक्ति अभियान के अंतर्गत सामाजिक संगठन, शैक्षणिक संस्थाओं, स्वयंसेवी संस्थाओं के साथ सामाजिक न्याय विभाग द्वारा लगातार जन-जागरूकता के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। गांधी जयंती 2 अक्टूबर को विशेष ग्रामसभाओं का आयोजन भी कराया जाएगा। शैक्षणिक संस्थानों में युवाओं को नशे के दुष्प्रभाव से बचने के लिए छात्रावास स्तर पर नशा मुक्ति समितियों का गठन किया गया है। इसके सकारात्मक परिणाम प्राप्त हो रहे हैं। बैठक में प्रमुख सचिव सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण श्रीमती सोनाली वायंगणकर सहित अन्य विभाग की अधिकारी उपस्थित थे।

सुप्रीम कोर्ट की दो-टूक: प्रदूषण रोकने के लिए पूरे भारत में लागू हों सख्त नियम

नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने वायु प्रदूषण को लेकर शुक्रवार को कड़ी टिप्पणी की। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) बी.आर. गवई ने कहा कि अगर दिल्ली-एनसीआर (एनसीआर) के लोगों को स्वच्छ हवा का अधिकार है, तो दूसरे शहरों के निवासियों को क्यों नहीं? उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रदूषण नियंत्रण की नीतियां सिर्फ राजधानी तक सीमित नहीं रह सकतीं, बल्कि पैन-इंडिया स्तर पर लागू होनी चाहिए। बेंच की सुनवाई के दौरान, जिसमें जस्टिस के. विनोद चंद्रन भी शामिल थे, सीजेआई बी.आर. गवई ने पटाखा निर्माताओं की उस याचिका पर विचार किया, जिसमें दिल्ली-एनसीआर में पटाखों की बिक्री और निर्माण पर पूरे साल के लिए लगे प्रतिबंध को चुनौती दी गई थी। बेंच ने कहा, "हम दिल्ली के लिए अलग नीति नहीं बना सकते, सिर्फ इसलिए क्योंकि वहां देश का संभ्रांत वर्ग रहता है।" सीजेआई ने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए बताया, "मैं पिछले साल सर्दियों में अमृतसर गया था। वहां प्रदूषण की स्थिति दिल्ली से भी बदतर थी। अगर पटाखों पर प्रतिबंध लगाना है, तो यह पूरे देश में लगना चाहिए।" कोर्ट ने यह टिप्पणी तब की जब एमिकस क्यूरिए एडवोकेट अपराजिता सिंह ने दिल्ली में सर्दियों के दौरान प्रदूषण की भयावह स्थिति का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि दिल्ली एक लैंडलॉक्ड शहर है, जहां हवा में प्रदूषक फंस जाते हैं, जिससे स्थिति चोकिंग लेवल तक पहुंच जाती है। लेकिन, सिंह ने स्वीकार किया कि एलीट वर्ग प्रदूषण के चरम दिनों में शहर छोड़ देता है। कोर्ट ने सवाल उठाया कि क्या नीतियां सिर्फ अमीरों के लिए बनाई जा रही हैं? बेंच ने स्पष्ट किया कि सभी नागरिकों को स्वच्छ हवा का समान अधिकार है, चाहे वे किसी भी शहर में रहें। इसी सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने एक अन्य याचिका पर एक्शन लिया, जिसमें पटाखों पर पूरे देश में प्रतिबंध लगाने की मांग की गई थी। कोर्ट ने कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (सीएक्यूएम) को नोटिस जारी किया और दो हफ्तों में जवाब मांगा। यह नोटिस दिल्ली-एनसीआर में मौजूदा प्रतिबंध के खिलाफ दायर याचिकाओं के संदर्भ में भी जारी किया गया।

संजय गांधी हॉस्पिटल में डक्ट कूलिंग सिस्टम का किया लोकार्पण

भोपाल  उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने संजय गांधी अस्पताल रीवा में डक्ट कूलिंग सिस्टम और 17 व्हील चेयर का लोकार्पण किया। डक्ट कूलिंग सिस्टम से दो वार्डों में रोगियों और उनके परिजनों को शीतल हवा मिलेगी। इसका निर्माण आइनॉक्स कंपनी द्वारा 20 लाख रुपए की लागत से किया गया है। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि रीवा तेजी से मेडिकल हब बनने की ओर अग्रसर है। उपचार के लिए नागपुर जाने वाले रोगियों की संख्या में कमी आई है। कुछ ही महीनों में कैंसर यूनिट का निर्माण पूरा होते ही रीवा में दो सौ बेड का कैंसर अस्पताल शुरू हो जाएगा। इसमें 40 करोड़ रुपए की लागत से लीनेक मशीन लगाई जा रही है। इस अस्पताल में कैंसर के उपचार की आधुनिकतम सुविधा उपलब्ध रहेगी। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि चिकित्सा सुविधाओं के विकास के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। संजय गांधी अस्पताल में सुधार तथा नई व्यवस्थाओं के लिए 321 करोड़ रुपए मंजूर किए गए हैं। सर्जरी विभाग में सिंगरौली की एनसीएल कंपनी द्वारा दी गई 6 करोड़ रुपए की सहयोग राशि से आधुनिक मशीन लगाई जा रही है। यहाँ के डॉक्टर बहुत योग्य हैं। डॉक्टर और चिकित्साकर्मी अस्पतालों की आत्मा हैं। उन्होंने कहा कि रोगियों का अच्छा उपचार करने के साथ उनसे मृदु व्यवहार भी करें। डॉक्टर के अच्छे व्यवहार से रोगी का आधा रोग ठीक हो जाता है। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि आईनॉक्स कंपनी ने कोरोना संकट के समय ऑक्सीजन की आपूर्ति करके सराहनीय कार्य किया। कंपनी ने संजय गांधी अस्पताल के दो वार्डों में कूलिंग सिस्टम लगाया है। आईनॉक्स कंपनी के प्रतिनिधि श्री अतुल कुमार ने कहा कि कंपनी प्रतिदिन 4500 टन ऑक्सीजन का निर्माण कर रही है। कोरोना काल में प्रतिदिन 40 टैंकर ऑक्सीजन की आपूर्ति प्रदेश को की जा रही थी। जनकल्याण के लिए कंपनी सदैव सहयोग करेगी। जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती नीता कोल, नगर निगम अध्यक्ष श्री व्यंकटेश पाण्डेय, मेडिसिन विभाग के डॉ. पी.के. बघेल, संजय गांधी अस्पताल के अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।  

जनता में गजब का उत्साह, अबतक 1 लाख से अधिक लोगों ने दिया फीडबैक

विकसित यूपी@2047 – 65 जनपदों में नोडल अधिकारियों व प्रबुद्धजनों ने जनता से किया संवाद – ग्रामीण क्षेत्रों से सबसे अधिक 78,513 फीडबैक दर्ज – शिक्षा क्षेत्र से जुड़े सबसे ज्यादा 35,047 सुझाव मिले – बलिया, जौनपुर, कानपुर नगर समेत कई जिलों से 3,500 से अधिक फीडबैक – किसानों ने तकनीकी खेती, कोल्ड स्टोरेज व समर्थन मूल्य की गारंटी की मांग उठाई लखनऊ योगी सरकार द्वारा संचालित "समर्थ उत्तर प्रदेश-विकसित उत्तर प्रदेश @ 2047" अभियान के तहत प्रदेशभर में व्यापक संवाद एवं फीडबैक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। अभियान के दौरान शुक्रवार (12 सितम्बर) तक कुल 65 जनपदों में नोडल अधिकारियों और प्रबुद्धजनों ने भ्रमण कर छात्रों, शिक्षकों, व्यवसायियों, उद्यमियों, कृषकों, स्वयंसेवी संगठनों, श्रमिक संगठनों, मीडिया प्रतिनिधियों और आम जनमानस के साथ संवाद किया। इस संवाद में विगत आठ वर्षों की विकास यात्रा पर जानकारी साझा की गई तथा प्रदेश के भविष्य के विकास के लिए रोडमैप पर चर्चा करते हुए जनता से सुझाव भी आमंत्रित किए गए। 1 लाख से अधिक सुझाव दर्ज अभियान को लेकर जनता में गहरी रुचि दिखाई दी। इसके लिए विशेष रूप से विकसित पोर्टल samarthuttarpradeh.up.gov.in पर अब तक 1 लाख से अधिक फीडबैक प्राप्त हुए हैं। इनमें से 79 हजार से अधिक फीडबैक ग्रामीण क्षेत्रों से जबकि 2़1 हजार से अधिक फीडबैक नगरीय क्षेत्रों से प्राप्त हुए। आयु वर्ग के आधार पर देखा जाए तो 35 हजार से अधिक सुझाव 31 वर्ष से कम आयु वर्ग से, 57 हजार से अधिक सुझाव 31-60 आयु वर्ग से और 6 हजार से अधिक सुझाव 60 वर्ष से अधिक आयु वर्ग से मिले हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि सबसे अहम मुद्दे प्रदेशवासियों ने विकास से जुड़े जिन प्रमुख क्षेत्रों पर राय दी, उनमें शिक्षा क्षेत्र सबसे ऊपर रहा। कुल 35,047 सुझाव शिक्षा से जुड़े मिले, जबकि नगरीय एवं ग्रामीण विकास से संबंधित 17,257 सुझाव आए। स्वास्थ्य क्षेत्र पर 10,894, समाज कल्याण पर 9,436 और कृषि क्षेत्र से जुड़े 12,718 सुझाव दर्ज किए गए। सबसे सक्रिय रहे पूर्वांचल और बुंदेलखंड के जिले बलिया, बलरामपुर, जौनपुर, कानपुर देहात, फिरोजाबाद, कानपुर नगर, मैनपुरी और प्रतापगढ़ जैसे जनपदों से सबसे अधिक 3,500 से अधिक सुझाव प्राप्त हुए। यह आंकड़ा दर्शाता है कि प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में जनता सक्रिय रूप से अभियान में जुड़ रही है। किसानों ने दिए कृषि क्षेत्र से जुड़े अहम सुझाव कृषि एवं संबद्ध सेक्टर से जुड़े सुझावों की संख्या उल्लेखनीय रही। किसानों ने आधुनिक तकनीकों को अपनाने, जल उपयोग की नई विधियों के प्रति जागरूकता, पीएमडीएमसी जैसी आधुनिक सिंचाई प्रणाली लागू करने और हर किसान के घर पर बायो गैस संयंत्र स्थापित करने पर बल दिया। इसके अलावा ड्रिप सिंचाई, सौर ऊर्जा आधारित पंप, बेहतर बीजों का प्रयोग, ई-मार्केटिंग प्लेटफॉर्म और डिजिटल किसान मंडियों के माध्यम से कृषि उत्पादों को बाजार से जोड़ने, भंडारण और कोल्ड स्टोरेज की सुविधाएं गांव-गांव तक पहुंचाने तथा कृषि शिक्षा को बढ़ावा देने के सुझाव सामने आए। किसानों ने रियायती दरों पर उन्नत किस्म के बीज, उर्वरक, कीटनाशक और उपकरण उपलब्ध कराने, सहकारिता विभाग से सस्ती साख सुविधा, फसलों के लिए उचित समर्थन मूल्य की गारंटी तथा व्यवसायिक फसलों को बढ़ावा देने जैसी मांगें भी रखीं। इस अभियान से स्पष्ट है कि प्रदेश की जनता न केवल विकास यात्रा की गवाह है बल्कि भविष्य की दिशा तय करने में सक्रिय भागीदारी भी निभा रही है। सरकार ने प्राप्त सुझावों का गहन विश्लेषण कर उन्हें नीति निर्माण में शामिल करने की बात कही है।

महंगाई पर नया डेटा: अगस्त में खुदरा दर 2.07%, खाने-पीने की चीज़ों के दाम गिरे

नई दिल्ली  भारत की खुदरा महंगाई दर अगस्त में सालाना आधार पर 2.07 प्रतिशत रही है। इसमें जुलाई के मुकाबले 46 आधार अंक की वृद्धि देखने को मिली है। यह जानकारी सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा शुक्रवार को दी गई। इससे पहले जुलाई में खुदरा महंगाई दर 1.61 प्रतिशत थी। मंत्रालय की ओर से बताया गया कि महंगाई दर का निचले स्तरों पर बने रहने की वजह खाद्य महंगाई दर का नकारात्मक रहना है, जो कि अगस्त 2025 में सालाना आधार पर -0.69 प्रतिशत रही है। अगस्त में खाद्य महंगाई दर ग्रामीण क्षेत्र में -0.70 प्रतिशत और शहरी क्षेत्र में -0.58 प्रतिशत रही है। इससे पहले जुलाई में खाद्य महंगाई दर -1.76 प्रतिशत थी। सरकार की ओर से जारी किए गए डेटा में बताया गया कि अगस्त 2025 में ग्रामीण सेक्टर में हेडलाइन और खाद्य महंगाई दर में बढ़त देखने को मिली है। अगस्त 2025 में ग्रामीण इलाकों में हेडलाइन महंगाई दर 1.69 प्रतिशत रही है, जो कि जुलाई 2025 में 1.18 प्रतिशत थी। अगस्त 2025 में ग्रामीण क्षेत्र में खाद्य महंगाई दर में -0.70 प्रतिशत रही है, जो कि अगस्त में -1.74 प्रतिशत थी। आंकड़ों के मुताबिक, शहरी इलाकों में हेडलाइन महंगाई दर अगस्त 2025 में 2.47 प्रतिशत रही है, जो कि जुलाई 2025 में 2.10 प्रतिशत थी। शहरी इलाकों में अगस्त में खाद्य महंगाई -0.58 प्रतिशत रही है, जो कि जुलाई -1.90 प्रतिशत थी। अगस्त में स्वास्थ्य महंगाई दर सालाना आधार पर 4.40 प्रतिशत रही है, जो कि जुलाई में 4.57 प्रतिशत थी। परिवहन और संचार में महंगाई दर अगस्त में 1.94 प्रतिशत रही है, जो जुलाई में 2.12 प्रतिशत थी। ईंधन और प्रकाश में महंगाई दर अगस्त 2025 में 2.43 प्रतिशत थी, जोकि जुलाई में 2.67 प्रतिशत थी। अगस्त में सबसे अधिक 9.04 प्रतिशत की महंगाई दर केरल में थी। इसके बाद कर्नाटक (3.81 प्रतिशत), जम्मू और कश्मीर (3.75 प्रतिशत), पंजाब (3.51 प्रतिशत) और तमिलनाडु (2.93 प्रतिशत) का स्थान था।

सोशल मीडिया से सड़कों तक: नेपाल में जेन-जेड की नई आंदोलनकारी ताकत

काठमांडू पिछले चार साल में नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका में हुई उथल-पुथल के बीच सोशल मीडिया का मेगाफोन के रूप में उपयोग किया जाना चर्चा का विषय है। ये सामाजिक दरार को दर्शाता है, साथ ही जवाबदेही की मांग भी उठाता है। पुणे स्थित एमआईटी आर्ट, डिजाइन एंड टेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी के इंटरनेशनल स्कूल ऑफ ब्रॉडकास्टिंग एंड जर्नलिज्म के प्रभारी निदेशक डॉ. संबित पाल ने बताया, "जेनरेशन जेड 'डिजिटल नेटिव' हैं जो इंटरनेट और सोशल मीडिया के साथ पले-बढ़े हैं और इसलिए इस प्लेटफॉर्म की बारीकियों से वाकिफ हैं।" नेपाल में युवा प्रदर्शनकारियों ने जेन जी या जनरेशन जेड का इस्तेमाल किया। ये शब्द 1997 और 2012 के बीच पैदा हुए लोगों के लिए प्रयोग में लाया जाता है। उन्होंने आगे कहा, "सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ने उन्हें मेनस्ट्रीम मीडिया को दरकिनार कर, अपने नैरेटिव सेट करने और शासन संबंधी मुद्दों पर मिलजुलकर राय व्यक्त करने के लिए प्रेरित किया है।" अध्ययनों से पता चलता है कि सोशल मीडिया अभियान मतदाताओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं, भ्रष्टाचार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन को बढ़ावा दे सकते हैं, और जब पारंपरिक मीडिया सीमित दायरे में काम करती है तो नागरिक संवाद को बनाए रख सकते हैं। मीडिया स्किल्स लैब के संस्थापक-निदेशक जॉयदीप दास गुप्ता ने कहा, "अरब विद्रोह से लेकर दक्षिण एशियाई देशों के आंदोलनों तक, प्रदर्शनकारियों ने इंटरनेट का इस्तेमाल किया है, जो संचार का एक शक्तिशाली माध्यम है, जिसमें न्यूनतम खर्च में अधिकतम पहुंच है।" मीडिया स्किल्स लैब एक शैक्षिक-शोध संस्थान है जो मीडिया साक्षरता, फैक्ट-चैक, एआई साक्षरता, डेटा जर्नलिज्म और सोल्यूशन जर्नलिज्म पर केंद्रित है। फोर्ब्स कम्युनिकेशंस काउंसिल की एक पोस्ट के अनुसार, "सभी सोशल मीडिया चैनल एक जैसे नहीं बनाए जाते। प्रत्येक प्लेटफॉर्म के अपने विशिष्ट यूजर समूह होते हैं, जिनकी सामग्री के साथ बातचीत करने की अपनी विशिष्टताएं होती हैं।" लेख 13 प्रैक्टिस पर प्रकाश डालती है, जिनमें व्यवसाय की प्रकृति को पहचानना, कोर टारगेट ऑडियंस दर्शकों पर फोकस करना, ग्राहक जनसांख्यिकी, प्रतिस्पर्धियों पर शोध आदि शामिल हैं। ज्यादातर बातें चीनी रणनीतिकार और दार्शनिक सुन त्जु की शिक्षाओं जैसी लग सकती हैं, जिन्होंने अपने दुश्मन को जानने के महत्व पर जोर दिया था। दास गुप्ता ने बताया, "इंटरनेट के लोकतंत्रीकरण के साथ, पहुंच आसान हो गई है। संदेश का प्रसार तुरंत होता है और आंदोलन गति पकड़ लेता है।" जब विद्रोह का सामना करना पड़ता है, तो सरकारें आमतौर पर संदेशों के प्रसार को रोकने के लिए सोशल मीडिया हैंडल या इंटरनेट पर ही प्रतिबंध लगा देती हैं। 2022 के विरोध प्रदर्शनों के दौरान, श्रीलंका ने आपातकाल की घोषणा करके सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म तक पहुंच को अस्थायी रूप से प्रतिबंधित कर कर्फ्यू लगा दिया था। तत्कालीन बांग्लादेश सरकार ने भी लगभग इसी तरह की प्रतिक्रिया दी थी, जबकि नेपाल में, राजधानी काठमांडू की सड़कों पर हिंसा भड़कने के साथ प्रतिबंध हटा लिया गया था। हालांकि, जैसा कि घटनाओं से पता चलता है, अधिकारी आपातकालीन समय को छोड़कर वेब सामग्री पर प्रतिबंध नहीं लगा सकते। ये प्लेटफॉर्म निजी स्वामित्व वाले हैं, और इंटरनेट पर पुलिस की निगरानी का सुझाव भी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में बाधा डालने के आरोपों को जन्म देता है। लेकिन ऐसे हैंडल के एल्गोरिदम यह तय कर सकते हैं कि लोग क्या देखें और क्या नहीं। ऐसे एल्गोरिदम वाले कानूनों का इस्तेमाल करते हुए, बाल शोषण, हिंसा और झूठी कहानियों के प्रसार पर लगाम लगाने के लिए एक 'स्टैच्यूरी बिल्डिंग कोड' बनाने की सिफारिश की गई है, जिसमें डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए अनिवार्य सुरक्षा और गुणवत्ता संबंधी जरूरतें शामिल हैं। लेकिन विशेषज्ञों का ये भी मत है कि राजनीतिक और सामाजिक संदेशों को बाध्य नहीं किया जा सकता और न ही किया जाना चाहिए।