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उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने नवीन सर्किट हाउस सभागार रीवा में विभिन्न निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा की

भोपाल उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने नवीन सर्किट हाउस सभागार रीवा में विभिन्न निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि बसामन मामा गौ वन्य विहार, पेयजल की आपूर्ति तथा जल संरक्षण के कार्य तत्परता से पूरा कराएं। हिनौती गौधाम में भी स्वीकृत निर्माण कार्य पूरा कराकर निराश्रित गौवंश को रखने की व्यवस्था करें। बाउन्ड्रीवॉल और सड़क निर्माण का कार्य तत्परता से पूरा कराएं।  उन्होंने चिरहुलानाथ मंदिर परिसर में चल रहे निर्माण कार्यों तथा प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना के संबंध में भी अधिकारियों को निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि रीवा बायपास का निर्माण दो माह में पूरा कराएं। इसी तरह बेला-सिलपरा सड़क का निर्माण भी तय समय सीमा में पूरा करें। इन सड़कों का निर्माण पूरा होने से आवागमन सुगम होगा। बैठक में जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती नीता कोल, नगर निगम अध्यक्ष श्री व्यंकटेश पाण्डेय, पूर्व महापौर श्री वीरेन्द्र गुप्ता सहित निर्माण कार्यों से जुड़े अधिकारी, निर्माण एजेंसी के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। 

केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री के साथ मुख्यमंत्री ने की प्रदेश के सहकारिता विभाग की समीक्षा

प्रदेश में स्थापित होगा राज्य सहकारी महाविद्यालय, सहकारिता में शोध व अध्ययन को मिलेगा बढ़ावा: मुख्यमंत्री केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री के साथ मुख्यमंत्री ने की प्रदेश के सहकारिता विभाग की समीक्षा सहकारिता के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश की उपलब्धियां अन्य राज्यों के लिए अनुकरणीय: केंद्रीय राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल सहकारिता को युवाओं के लिए कृषि, डेयरी, मत्स्य व सेवा क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों का द्वार बनाया जाए: मुख्यमंत्री 12 सितम्बर से 12 अक्टूबर तक एम-पैक्स सदस्यता महाभियान, हर किसान-परिवार को सहकारिता से जोड़ने का संकल्प सहकारिता क्षेत्र में नवाचारों के मिल रहे अच्छे परिणाम, 16 बंद जिला सहकारी बैंक पुनर्जीवित, ₹306.92 करोड़ की सहायता से सभी बैंक लाभ में, वर्ष 2017 के कुल एनपीए 800 करोड़ से घटकर ₹278 करोड़ एफसीआई द्वारा 35 जनपदों में 96 स्थलों की पहचान, अप्रैल 2026 तक देश की सबसे बड़ी अन्न भंडारण योजना पूरी होगी एम-पैक्स को ₹10 लाख तक ब्याज-मुक्त ऋण सीमा से बड़ा लाभ, अब तक ₹5,400 करोड़ का टर्नओवर और ₹120 करोड़ मार्जिन मनी 6,101 सोसाइटी में डिजिटल भुगतान व्यवस्था लागू, 6443 एम-पैक्स पीएम किसान समृद्धि केंद्र के रूप में हुए हैं अपग्रेड लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में सहकारिता के क्षेत्र में अध्ययन, अध्यापन और शोध को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सहकारी महाविद्यालय की स्थापना की तैयारी के निर्देश दिए हैं। शुक्रवार को केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल की उपस्थिति में सहकारिता विभाग की समीक्षा बैठक में इस विषय पर चर्चा हुई। केंद्रीय राज्य मंत्री ने इस पहल पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया। बैठक में एम-पैक्स सदस्यता महाभियान पर भी विस्तार से चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'सहकार से समृद्धि' मंत्र को आत्मसात करते हुए 12 सितम्बर से 12 अक्टूबर तक आयोजित अभियान के माध्यम से हर किसान और हर ग्रामीण परिवार को सहकारिता से जोड़ना प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 में आयोजित प्रथम सदस्यता महाअभियान में 30 लाख से अधिक नए सदस्य जुड़े थे, जिनमें 17.33 लाख किसान, 3.92 लाख अकुशल श्रमिक, 1.56 लाख कुशल श्रमिक, 2.20 लाख पशुपालक और 6,411 मत्स्यपालक शामिल थे। इस अभियान से सहकारिता क्षेत्र में ₹70 करोड़ का अंशदान प्राप्त हुआ था। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि द्वितीय महाअभियान को और व्यापक बनाया जाए तथा गाँव-गाँव में कैंप, ऑनलाइन/ऑफलाइन पंजीकरण और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री ने कहा कि सहकारिता के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश की उपलब्धियां अन्य राज्यों के लिए अनुकरणीय हैं और प्रधानमंत्री जी के विजन को साकार करने में प्रदेश अग्रणी भूमिका निभा रहा है। बैठक में सहकारी बैंकिंग सुधारों की समीक्षा करते हुए अवगत कराया गया कि 2017-18 से 2024-25 तक राज्य सरकार द्वारा 16 बंद जिला सहकारी बैंकों को ₹306.92 करोड़ की सहायता से पुनर्जीवित किया गया है। इन बैंकों का एनपीए 2017 में ₹800 करोड़ से घटकर मार्च 2025 में ₹278 करोड़ रह गया। मार्च 2025 तक ₹1000 करोड़ का ऋण व्यवसाय दर्ज हुआ और सभी बैंक लाभ में आ गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान और जमाकर्ताओं का विश्वास ही सहकारिता की असली पूँजी है, इसे हर हाल में सुरक्षित रखा जाए। उन्होंने कहा कि सहकारिता भारतीय ग्रामीण समाज की प्राचीन परंपरा है। समाज को एकजुट रखने में इसकी बड़ी भूमिका है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश सहकारिता क्षेत्र में नए इतिहास रच रहा है। अन्न भंडारण योजना की प्रगति पर चर्चा करते हुए बताया गया कि एफसीआई ने प्रदेश के 35 जनपदों में 96 स्थलों की पहचान की है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि 15 नवम्बर 2025 तक वित्तीय समापन प्रक्रिया पूरी कर जनवरी 2026 से निर्माण कार्य प्रारंभ कर अप्रैल 2026 तक पूरा कर लिया जाए। उन्होंने कहा कि गोदाम निर्माण किसानों की समृद्धि का आधार है, इसे सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।  इस अवसर पर एम-पैक्स के गठन और कार्यप्रणाली पर भी विस्तार से समीक्षा की गई। बताया गया कि 2024-25 में 266 एम-पैक्स के सापेक्ष चालू वित्तीय वर्ष में अब तक 457 नये एम-पैक्स गठित हो चुके हैं, जबकि सितम्बर माह में 1,088 ग्राम पंचायतों में संगठन प्रक्रिया चल रही है। एम-पैक्स को उर्वरक वितरण हेतु ₹10 लाख तक ब्याज-मुक्त ऋण सीमा दी गई है, जिससे अब तक ₹5,400 करोड़ का टर्नओवर और ₹120 करोड़ की मार्जिन मनी प्राप्त हुई है। इसी प्रकार, 757 नवगठित एम-पैक्स के उन्नयन के लिए राज्य सरकार ₹1 लाख मार्जिन मनी तथा ₹1 लाख आधारभूत अवसंरचना विकास के लिए उपलब्ध करा रही है। डिजिटल भुगतान व्यवस्था के तहत 6,101 सोसाइटी में क्यूआर/यूपीआई आधारित प्रणाली लागू हो चुकी है। साथ ही, व्यवसाय विविधीकरण को बढ़ावा देते हुए 5170 एम-पैक्स में सीएससी सेवाएं, 6443 एम-पैक्स को पीएम किसान समृद्धि केंद्र तथा 161 एम-पैक्स में प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जन औषधि केंद्र अस्पतालों के निकट स्थापित किए जाएं और सहकारिता को युवाओं के लिए कृषि, डेयरी, मत्स्य व सेवा क्षेत्रों में रोजगारमूलक अवसरों का द्वार बनाया जाए। बैठक में प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री सूर्य प्रकाश शाही, धर्मपाल सिंह, संजय निषाद, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जेपीएस राठौर, भारत सरकार के सचिव सहकारिता डॉ. आशीष कुमार भूटानी, नाबार्ड के डीजीएम एनएल साहू तथा प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

दुग्ध उत्पादकों के लिए बड़ी खबर: 2 अक्टूबर से प्रदेश में लगने वाला समृद्धि अभियान

प्रमुख सचिव ने ली तैयारियों संबंधी बैठक भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा अनुरूप प्रदेश के किसानों की पशुपालन के माध्यम से आय बढ़ाने और दुग्ध उत्पादन को दोगुना करने के लक्ष्य को पूरा करने के उद्देश्य से प्रदेश में 2 अक्टूबर से "दुग्ध समृद्धि सम्पर्क अभियान'' प्रारंभ किया जायेगा। अभियान के अंतर्गत गाँव-गाँव पशुपालकों से व्यक्तिश: सम्पर्क किया जायेगा और उन्हें पशुओं में नस्ल सुधार, पशु स्वास्थ्य एवं पोषण के संबंध में जागरूक किये जाने के साथ आवश्यक मार्गदर्शन भी दिया जायेगा। अभियान 3 चरणों में चलाया जायेगा। इसकी शुरूआत 2 अक्टूबर को ग्राम सभाओं से की जायेगी। अभियान 9 अक्टूबर तक चलेगा। प्रमुख सचिव पशुपालन एवं डेयरी विकास श्री उमाकांत उमराव ने शुक्रवार को मंत्रालय में अभियान की तैयारियों संबंधी बैठक ली। बैठक में सभी संबंधित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे। प्रमुख सचिव ने निर्देश दिये कि अभियान का प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया तथा अन्य संचार माध्यमों से व्यापक प्रचार-प्रसार कराया जाये। गाँवों में मुनादी पिटवाकर इसकी जानकारी दी जाये। बैठक में बताया गया कि अभियान में 10 या 10 से अधिक गौ-वंश रखने वाले पशुपालकों से व्यक्तिश: सम्पर्क किया जायेगा। अभियान के द्वितीय चरण में 5 या अधिक गौ-वंश रखने वाले पशुपालकों और तीसरे चरण में 5 या कम गौ-वंश रखने वाले पशुपालकों से सम्पर्क किया जायेगा। अभियान के अंतर्गत सहायक पशु चिकित्सा अधिकारी/मैत्री द्वारा पशुपालकों से गृह भेंट की जायेगी और उन्हें पशु पोषण, पशु स्वास्थ्य एवं नस्ल सुधार के संबंध में जागरूक किया जायेगा। साथ ही पशुओं में टैग लगाने संबंधी जानकारी भी एकत्र की जायेगी। इस कार्य के लिये मैत्री को प्रति पशुपालक 5 रुपये का मानदेय भी दिया जायेगा। दुग्ध समृद्धि सम्पर्क अभियान संबंधी प्रशिक्षण प्रत्येक जिले के मास्टर ट्रेनर को राज्य पशुपालन प्रशिक्षण संस्थान, भोपाल में दिया जायेगा।  

26 सितंबर को सुनाई जाएगी अहम तारीख, सिद्धू मूसेवाला मामले में कोर्ट का महत्वपूर्ण आदेश

मानसा पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड में अदालत ने जेल प्रशासन को आरोपियों को फिजिकल तौर पर पेश करने के आदेश जारी किए हैं। अदालत ने 26 सितंबर को मामले के 6 आरोपियों को अदालत में पेश करने के निर्देश दिए हैं। दरअसल, आज मानसा की सेशन कोर्ट में इस केस की सुनवाई हुई, जिसमें सिद्धू मूसेवाला के पिता बलकौर सिंह की गवाही शुरू हुई। इस दौरान वे थोड़े भावुक भी हो गए। हत्याकांड के आरोपियों की पहचान के बारे में बात करते हुए बलकौर सिंह ने कहा कि उनकी नजर कमजोर है और वे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आरोपियों की पहचान नहीं कर सकते। उन्होंने आरोपियों को अदालत में सामने पेश करने की अपील की। इस अपील को स्वीकार करते हुए अदालत ने आदेश दिया कि आरोपियों को फिजिकली पेश किया जाए। इसके लिए 26 सितंबर की तारीख तय की गई है। इस दौरान संदीप केकड़ा, अंकित सिरसा और दीपक मुंडी समेत 6 आरोपियों को अदालत में पेश किया जाएगा।

सहायक पुलिसकर्मियों के लिए CM हेमंत का ऐतिहासिक आदेश, अब सेवा अवधि 1 साल लंबी

रांची झारखंड में कार्यरत सहायक पुलिसकर्मियों के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बड़ी खुशखबरी दी है। उन्होंने सहायक पुलिसकर्मियों की सेवा अवधि को एक वर्ष तक अनुबंध के आधार पर बढ़ाने का आदेश दिया है। यह निर्णय उनके लिए राहत और सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस संबंध में झारखंड सरकार प्रस्ताव तैयार करेगी और उसे मंत्रिपरिषद के समक्ष स्वीकृति के लिए प्रस्तुत करेगा। अधिकारियों का कहना है कि आने वाली कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलना लगभग तय है। मान्यता मिलने के बाद हजारों सहायक पुलिसकर्मी अपनी सेवाएं एक साल अतिरिक्त दे सकेंगे। सहायक पुलिसकर्मियों का काम राज्य स्तर पर सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है।   

श्रीलंका बनाम बांग्लादेश: एशिया कप में टूटेगा लगातार एकतरफा जीत का सिलसिला?

नई दिल्ली एशिया कप के अब तक जितने भी मैच हुए हैं, एकतरफा रहे हैं। न टक्कर, न रोमांच। अगर नीरस कह दें तो भी गलत नहीं। लेकिन यह सिलसिला शनिवार को टूट सकता है जब श्रीलंका और बांग्लादेश की टीमें आमने-सामने होंगी। इतना ही नहीं, उस मैच का नतीजा ग्रुप बी से सुपर 4 की रेस की गिनती भी तेज कर देगा। अपने पहले मैच में हांगकांग पर आसान जीत से उत्साहित बांग्लादेश की टीम शनिवार को एशिया कप के ग्रुप बी मुकाबले में छह बार की चैम्पियन श्रीलंका से भिड़ेगी, जो इस मुश्किल ग्रुप का भाग्य तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है। एशिया कप खिताब की तलाश में लगे बांग्लादेश के अभियान की शुरुआत अच्छी रही। कप्तान लिटन दास ने 59 रन की पारी की मदद से बांग्लादेश ने हांगकांग पर सात विकेट से जीत दर्ज की। बांग्लादेश ने इस मैच में भले ही आसानी से जीत हासिल की लेकिन कुछ ऐसे विभाग हैं जिनमें उसकी कमजोरी खुलकर सामने आई। इनमें गेंदबाजी विभाग प्रमुख है। तेज गेंदबाज तस्कीन अहमद और लेग स्पिनर रिशाद हुसैन विकेट लेने के बावजूद रन लुटा बैठे। श्रीलंका के खिलाफ ऐसी कोई भी गलती बांग्लादेश को भारी पड़ सकती है। श्रीलंका की टीम तीनों विभाग में संतुलित नजर आती है और बांग्लादेश को इसकी कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ेगा। चरिथ असलांका की अगुवाई में श्रीलंका ने एक मजबूत टीम तैयार की है जिसमें शीर्ष क्रम की मजबूती, मध्य क्रम की ताकत और संयुक्त अरब अमीरात की परिस्थितियों के लिए अनुकूल स्पिन आक्रमण शामिल है। पथुम निसांका, कुसल मेंडिस और कुसल परेरा शीर्ष क्रम में स्थिरता प्रदान करते हैं, जबकि असलांका, दासुन शनाका और कामिन्दु मेंडिस की मौजूदगी में श्रीलंका की बल्लेबाजी की गहराई का पता चलता है। श्रीलंका ने मध्यक्रम के बल्लेबाज जनिथ लियानागे को भी टीम में शामिल किया है। उन्हें तीन साल बाद टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच में वापसी का मौका मिला है। उन्होंने हाल में जिंबॉब्वे के खिलाफ 70 रन की मैच विजेता पारी खेली थी। स्टार स्पिनर वानिंदु हसरंगा की वापसी से टीम को और मजबूती मिली है, जो हैमस्ट्रिंग की चोट से उबर चुके हैं। यूएई की धीमी पिचों पर श्रीलंका के स्पिनर हसरंगा, महेश थीक्षाना और दुनिथ वेल्लालेज प्रभावी साबित हो सकते हैं, जबकि तेज गेंदबाज मथीशा पथिराना गेंद से विविधता प्रदान करते हैं। बांग्लादेश की टीम लिट्टन और तौहीद ह्रदोय से अपने बल्लेबाजी फॉर्म को जारी रखने की उम्मीद करेगी। उसे गेंदबाजी में तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान का नई गेंद के साथ और बेहतर प्रदर्शन करने की उम्मीद होगी। अफगानिस्तान (4.700) नेट रन रेट के आधार पर बांग्लादेश (1.001) से काफी आगे है, इसलिए यह मुकाबला अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है। प्रत्येक ग्रुप से केवल दो टीमें ही आगे बढ़ सकती हैं। ऐसे में अगर तीन टीमों के अंक समान रहते हैं तो नेट रन रेट निर्णायक साबित हो सकता है। ऐसी स्थिति में बांग्लादेश और श्रीलंका दोनों पर अब बड़े अंतर से जीत हासिल करने का दबाव होगा। टीम इस प्रकार है: बांग्लादेश: लिटन दास (कप्तान), तंजीद हसन, परवेज हुसैन इमोन, सैफ हसन, तौहीद हृदोय, जेकर अली अनिक, शमीम हुसैन, काजी नुरुल हसन सोहन, शाक महेदी हसन, रिशाद हुसैन, नसुम अहमद, मुस्तफिजुर रहमान, तंजीम हसन साकिब, तस्कीन अहमद, शोरफुल इस्लाम, शैफ उद्दीन। श्रीलंका: चरिथ असलांका (कप्तान), पथुम निसांका, कुसल मेंडिस, कुसल परेरा, नुवानिदु फर्नांडो, कामिंडु मेंडिस, कामिल मिशारा, दासुन शनाका, जेनिथ लियानगे, चमिका करुणारत्ने, डुनिथ वेलालेज, वानिंदु हसरंगा, महीश थीक्षाना, दुष्मंथा चमीरा, बिनुरा फर्नांडो, नुवान तुषारा, मथीशा पथिराना। समय: मैच भारतीय समयानुसार रात 8:00 बजे शुरू होगा।  

बदलते दौर में बदलती शादियां: दिखावे से हटकर अब प्रैक्टिकल अप्रोच, परिवार अपनाएंगे ये रास्ता?

इंदौर  बिटिया की शादी, सोना खरीदना है… ये हर माता-पिता की चाहत होती है, और यही भारतीय परंपरा भी है. लेकिन अब कुछ ऐसे माता-पिता भी हैं, जो कह रहे हैं कि बिना गहनों के कैसे बिटिया को विदा करेंगे? भारतीय शादी में श्रृंगार का अहम स्थान है, और उसमें सोने की ज्वेलरी सबसे ऊपर है. दुल्हन के श्रृंगार से लेकर वर-वधू के परिवारों की शान तक, हर जगह सोना ही मुख्य आकर्षण होता है. यही कारण है कि सोने के बिना भारतीय शादी की कल्पना अधूरी-सी लगती है.  हालांकि शादी में मिले सोने-चांदी को संजोकर रखना भी हमारी परंपरा रही है, जो एक तरह से सुरक्षित निवेश भी है. परंपरा के अनुसार, दुल्हन को विवाह के समय सोने के गहने देना न सिर्फ उसकी सुंदरता को बढ़ाने के लिए होता है, बल्कि यह उसके भविष्य की आर्थिक सुरक्षा का भी संकेत है.  दरअसल, मौजूदा समय में सोने की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी हैं, लेकिन इस साल शादी का सीजन कई परिवारों के लिए मुश्किल भरा हो सकता है, क्योंकि इस वक्त सोना न सिर्फ महंगा हुआ है, बल्कि लगातार बढ़ती कीमतों ने उन परिवारों को सोचने पर मजबूर कर दिया है, जिनके यहां इस साल शादी है.  एक मध्यमवर्गीय परिवार के लिए शादी का बजट सीमित होता है. इस बदले हुए दौर में लोग ज्वेलरी के अलावा डेकोरेशन, फोटोग्राफी और हनीमून पैकेज जैसी चीजों पर खर्च कर रहे हैं. खासकर शहरों में युवाओं की सोच बदल रही है. ऐसे में शादी का बजट बिगड़ता जा रहा है और सोने का भाव भी बढ़ता जा रहा है.  सबसे ज्यादा चिंता उन परिवारों को है, जिनके यहां इस साल शादी है, क्योंकि पिछले एक साल में सोना करीब 46-47% महंगा हो चुका है. जबकि इसी साल यानी 2025 में ही सोने की कीमत करीब 40 फीसदी बढ़ चुकी है. एक साल पहले 24K कैरेट 10 ग्राम गोल्ड की कीमत करीब 75 हजार रुपये थी, जो बढ़कर 1,10,000 रुपये को पार कर चुकी है.  एक साल में सोने की  कितनी बढ़ी है (24 कैरेट)  सितंबर-2024         सितंबर- 2025 ₹75,930         ₹1,11,280 यानी एक साल में 10 ग्राम सोने की कीमत में 35000 रुपये से ज्यादा की बढ़ोतरी हो चुकी है.  आमतौर पर एक मध्यवर्गीय परिवार शादी में 5 से 10 लाख रुपये खर्च करता है, एक अनुमान 5 लाख रुपये खर्च करने वाला परिवार कम से कम 20 ग्राम सोना खरीदता था, जो करीब 1.50 लाख रुपये में आ जाता था. लेकिन इस साल शादी में 5 लाख खर्च करने वाला परिवार परेशान है, वो सोच रहे हैं कि अब कितने का सोना खरीदें, क्योंकि सोना हर रोज महंगा हो रहा है, और बजट से भी बाहर हो रहा है. भारत में शादी को लेकर परंपरा और दिखावे का दबाव हमेशा रहा है. ऐसी स्थिति बिना गहनों की शादी भी नहीं हो सकती. 10 लाख रुपये तक शादी में खर्च करने वाले पहले 40 ग्राम सोना खरीदते थे, जो कि करीब 3 लाख रुपये में आज जाता था, अब इस साल 10 लाख रुपये शादी में खर्च करने वाले केवल 20 ग्राम ही सोना खरीद सकता है, क्योंकि 40 ग्राम खरीदने पर बजट बिगड़ जाएगा.  सोना महंगा होने पर अब क्या विकल्प?    सोने की कीमतों में उछाल का सीधा असर ज्वेलरी बाजार पर भी दिख रहा है. ज्वेलर्स की बिक्री में गिरावट आई है और कई दुकानदार किस्तों पर गहने देने की योजना ला रहे हैं. जानकार भी कह रहे हैं कि कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं तो आने वाले महीनों में ज्वेलरी इंडस्ट्री को बड़ा झटका लग सकता है.  हालांकि सोने की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद अब लोग परंपरा निभाने के लिए नए विकल्प तलाश रहे हैं. शादी-ब्याह और त्योहारों में गहनों का महत्व बना रहता है, लेकिन बढ़ते दामों ने लोगों की पसंद और रणनीति दोनों बदल दी है.  1. हल्की और मिनिमल ज्वेलरी भारी नेकलेस और कंगन की जगह अब लोग हल्के डिजाइन चुन रहे हैं. छोटे चेन, स्लीक रिंग्स और मिनिमल ब्रेसलेट्स की डिमांड बढ़ी है. इससे सोना भी खरीदा जाता है और बजट पर बोझ भी कम पड़ता है. 2. 18 कैरेट और 14 कैरेट गोल्ड पहले लोग ज्यादातर 22 कैरेट और 24 कैरेट गोल्ड खरीदते थे, लेकिन अब 18K और 14K के गहने बनवा रहे हैं. इससे सोना सस्ता भी पड़ रहा है और फैशनेबल डिजाइनों की भी बड़ी रेंज मिलती है. 3. गोल्ड प्लेटेड और इमीटेशन ज्वेलरी खासकर शादी या फंक्शन के लिए, कई परिवार अब गोल्ड प्लेटेड ज्वेलरी या फिर हाई क्वालिटी वाली इमीटेशन ज्वेलरी ले रहे हैं. दिखने में ये लगभग असली सोने जैसी लगती हैं और खर्च काफी कम आता है. यानी बजट में होता है.  4. सिल्वर और प्लैटिनम सोने के विकल्प के तौर पर लोग अब सिल्वर और प्लैटिनम ज्वेलरी की तरफ रुख कर रहे हैं.. खासकर शहरी युवाओं में यह चलन बढ़ा है, क्योंकि यह आधुनिक लुक देता है और वैल्यू भी बनाए रखता है.

ट्रेन सफर में बोरियत खत्म! रेलवे ऐप पर फ्री मिलेगा मूवी और वेब सीरीज का मजा

मुंबई   सोचिए, आप ट्रेन में सफर कर रहे हैं, लंबी यात्रा है और आप बोर हो रहे हैं. काश! कोई नई फिल्म या वेब सीरीज देखने को मिल जाती. या फिर आपको अचानक जनरल टिकट लेना है, लेकिन लंबी लाइन देखकर पसीने छूट रहे हैं. या फिर आपको अपनी सीट पर गरमागरम खाना मंगवाना है. अब इन सभी कामों के लिए आपको 10 अलग-अलग ऐप रखने की कोई जरूरत नहीं है! भारतीय रेलवे ने अपने करोड़ों यात्रियों के लिए एक ऐसा 'सुपर ऐप' लॉन्च किया है, जो आपकी यात्रा से जुड़ी हर छोटी-बड़ी समस्या का 'वन-स्टॉप सॉल्यूशन' है. इस क्रांतिकारी ऐप का नाम है- RailOne. और सबसे बड़ी खुशखबरी यह है कि अब इस ऐप में आपको मनोरंजन का भी पूरा खजाना मिलेगा! रेलवे ने इस ऐप में फ्री OTT (ओवर-द-टॉप) की सुविधा जोड़ दी है, जिससे आपका सफर अब कभी बोरिंग नहीं होगा. क्या है ये RailOne ऐप और क्यों है यह इतना खास? 1 जुलाई, 2025 को लॉन्च हुआ RailOne ऐप रेलवे की तरफ से एक बहुत बड़ा कदम है. इसे सेंटर फॉर रेलवे इंफॉर्मेशन सिस्टम्स (CRIS) ने बनाया है. इसका मकसद रेलवे की सभी अलग-अलग सेवाओं को एक ही छत के नीचे लाना है, ताकि यात्रियों को एक सहज और आसान अनुभव मिल सके. अब आपको UTS (जनरल टिकट के लिए), NTES (ट्रेन ट्रैकिंग के लिए) और IRCTC (रिजर्वेशन के लिए) जैसे कई ऐप अपने फोन में रखने की जरूरत नहीं है. ट्रेन में देखें फ्री फिल्में और वेब सीरीज रेलवे ने इसके लिए WAVES OTT प्लेटफॉर्म के साथ साझेदारी की है. यह प्लेटफॉर्म प्रसार भारती द्वारा नवंबर 2024 में लॉन्च किया गया था. आप अपनी यात्रा के दौरान फिल्में, वेब सीरीज, डॉक्यूमेंट्री, ऑडियो प्रोग्राम और यहां तक कि गेम्स का भी मजा ले सकते हैं, वह भी बिल्कुल मुफ्त. सबसे अच्छी बात यह है कि यह कंटेंट 10 से ज्यादा भारतीय भाषाओं और बोलियों में उपलब्ध है. WAVES OTT ने देशभर के कंटेंट क्रिएटर्स, रीजनल ब्रॉडकास्टर्स और सांस्कृतिक संस्थानों के साथ मिलकर यह भाषाई विविधता सुनिश्चित की है. कैसे देखें फ्री OTT कंटेंट? सबसे पहले गूगल प्ले स्टोर या ऐप स्टोर से RailOne App डाउनलोड करें और लॉग इन करें. (आप अपने पुराने RailConnect या UTS क्रेडेंशियल्स का भी उपयोग कर सकते हैं). लॉग इन करने के बाद, ऐप के 'More Offerings' सेक्शन में जाएं. वहां 'Go To Waves' मेनू पर क्लिक करें. बस! आपकी स्क्रीन पर मनोरंजन का खजाना खुल जाएगा, जहां आप अपनी पसंदीदा फिल्म या शो चुनकर देख सकते हैं. सिर्फ मनोरंजन ही नहीं, ये हैं RailOne के 5 और दमदार फीचर 1. हर तरह की टिकट बुकिंग एक जगह: यह इस सुपर ऐप की सबसे बड़ी ताकत है. अब आप एक ही जगह से रिजर्व्ड टिकट (जैसे स्लीपर, AC) और अनारक्षित यानी जनरल टिकट (UTS) दोनों बुक कर सकते हैं. अब जनरल टिकट के लिए स्टेशन पर लंबी लाइनों में लगने का झंझट खत्म. 2. ट्रेन की पल-पल की खबर (Live Tracking): आपकी ट्रेन कहां पहुंची? कितनी लेट है? अगले स्टेशन पर कब आएगी? इन सभी सवालों का जवाब अब आपको एक ही ऐप में मिलेगा. आप किसी भी ट्रेन का लाइव रनिंग स्टेटस, उसका रूट, स्टॉपेज और पूरा शेड्यूल आसानी से चेक कर सकते हैं. PNR स्टेटस जानना और सीट की उपलब्धता जांचना भी अब बस एक क्लिक की दूरी पर है. 3. सीट पर आएगा गरमागरम खाना (E-Catering): लंबे सफर में खाने की चिंता अब पुरानी बात हो गई. आप इस ऐप के जरिए अपनी यात्रा के दौरान आने वाले स्टेशनों के मेनू में से अपना पसंदीदा खाना ऑर्डर कर सकते हैं, जो सीधे आपकी सीट पर पहुंचाया जाएगा. 4. कुली और टैक्सी की बुकिंग भी: ऐप में आपको कुली (Porter) बुक करने और स्टेशन से अपने घर या होटल तक के लिए 'लास्ट-माइल' टैक्सी बुक करने की भी सुविधा मिलती है. 5. सीधी शिकायत, तुरंत सुनवाई: अगर आपको यात्रा के दौरान कोई भी समस्या होती है – चाहे वह सीट को लेकर हो, सफाई को लेकर हो या सुरक्षा को लेकर – तो अब आप इस ऐप के जरिए सीधे रेलवे कस्टमर सर्विस में अपनी शिकायत, सुझाव या फीडबैक दर्ज करा सकते हैं. निष्कर्ष (Conclusion) RailOne ऐप भारतीय रेलवे के डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है. यह सिर्फ एक ऐप नहीं, बल्कि एक सच्चा 'ट्रैवल कंपेनियन' है, जो आपकी यात्रा के हर पहलू का ध्यान रखता है. टिकट बुकिंग की आसानी से लेकर, लाइव ट्रैकिंग की सुविधा और अब मुफ्त मनोरंजन का तड़का, रेलवे ने वाकई यात्रियों के अनुभव को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया है. यह पहल साबित करती है कि भारतीय रेलवे न केवल यात्रियों की जरूरतों को समझ रहा है, बल्कि उन्हें पूरा करने के लिए आधुनिक टेक्नोलॉजी का बेहतरीन इस्तेमाल भी कर रहा है. तो अगली बार जब आप ट्रेन का सफर प्लान करें, तो इस 'ब्रह्मास्त्र' को अपने फोन में रखना न भूलें!

ग्वालियर नगर निगम का बड़ा फैसला, एनर्जी ऑडिट से बिजली खर्च में आएगी कटौती

ग्वालियर  नगरीय निकायों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने नवाचारों पर फोकस करने के निर्देश दिए हैं। इसी क्रम में नगरीय निकायों के बिजली का खर्च कम कराने के लिए एनर्जी आडिट कराया जा रहा है। रीवा के बाद ग्वालियर नगर निगम दूसरा शहर है, जिसने इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए एनर्जी ऑडिट की टेंडर प्रक्रिया शुरू की है। ग्वालियर नगर निगम इस कार्य के लिए 1.67 करोड़ रुपये खर्च करेगा, जिसमें स्ट्रीट लाइट के साथ ही वाटर ट्रीटमेंट प्लांट, बोरिंग, सीवर ट्रीटमेंट प्लांट, सुलभ काम्प्लेक्स, निगम के कार्यालयों में आने वाले हर माह के सात से आठ करोड़ रुपये के बिल को कम कराने की दिशा में कार्य कराया जाएगा।

संपत्ति 242 करोड़, प्राइवेट जेट… फिर भी चर्चा में क्यों हैं विधायक संजय पाठक?

भोपाल  मध्य प्रदेश की राजनीति में संजय पाठक एक चर्चित चेहरा हैं। कटनी जिले की विजयराघवगढ़ विधानसभा सीट से विधायक संजय पाठक को प्रदेश के सबसे अमीर विधायकों में गिना जाता है। उनकी पहचान न केवल एक प्रभावशाली नेता के रूप में है, बल्कि अपार संपत्ति और आलीशान जीवनशैली के कारण भी वे सुर्खियों में रहते हैं। संपत्ति और आलीशान जीवन साल 2023 विधानसभा चुनाव में दाखिल एफिडेविट के अनुसार, संजय पाठक की कुल संपत्ति 242.09 करोड़ रुपये (BJP MLA Sanjay Pathak Net Worth) है। वे प्राइवेट जेट के मालिक भी हैं, जो उन्हें अन्य विधायकों से अलग बनाता है। 2022-23 में उनकी आय 3.9 करोड़ रुपये रही, जबकि उनकी पत्नी निधि पाठक की आय 4.02 करोड़ रुपये दर्ज की गई। हालांकि, अपार संपत्ति के बावजूद उनके ऊपर करीब 19 करोड़ रुपये का कर्ज भी है। राजनीतिक सफर विजयराघवगढ़ सीट से लगातार राजनीति कर रहे संजय पाठक का नाम क्षेत्र में मजबूत पकड़ रखने वाले नेताओं में आता है। उनकी सक्रियता और संगठन पर पकड़ ने उन्हें पार्टी में पहचान दिलाई। विवादों से घिरा नाम हाल ही में वे अवैध खनन से जुड़े मामले में चर्चा में आए। हाई कोर्ट के जज विशाल मिश्रा ने खुलासा किया कि पाठक ने उनसे फोन पर बातचीत करने की कोशिश की थी। इसके बाद जज ने खुद को मामले की सुनवाई से अलग कर लिया। इतना ही नहीं, पाठक के वकील अंशुमान सिंह ने भी केस से खुद को अलग कर लिया। 'मैं ये केस छोड़ रहा हूं…' उन्होंने साफ किया है कि मैंने कोर्ट को लिखा है कि आनंद माइनिंग कॉर्पोरेशन और निर्मला मिनरल्स, जिन दो कंपनियों के केस की मैं पैरवी कर रहा था, उनके किसी रिलेटिव ने जस्टिस मिश्रा को कॉल किया। इस बात का जस्टिस मिश्रा ने एक सितंबर के आदेश में जिक्र किया। इसकी वजह से मैं ये केस छोड़ रहा हूं और मैंने इस बारे में अपने क्लाइंट को बता दिया है।