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पीयूष गोयल का बड़ा बयान: भारत और अमेरिका की ट्रेड डील की बातचीत सफल, नवंबर में पहला फाइनल चरण

नई दिल्ली केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को कहा कि भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील का पहला चरण नवंबर तक फाइनल हो सकता है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच चर्चा सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है और दोनों पक्ष अब तक की प्रगति से संतुष्ट हैं। पत्रकारों से बातचीत के दौरान गोयल ने कहा कि फरवरी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने मंत्रियों को इस समझौते पर काम करने और इस साल नवंबर तक पहले चरण को अंतिम रूप देने का निर्देश दिया था। गोयल ने आगे कहा कि इस ट्रेड डील का पहला चरण नवंबर 2025 तक पूरा हो जाना चाहिए, और मार्च से ही इस विषय पर बहुत अच्छे माहौल में बहुत गंभीरता से चर्चा चल रही है और प्रगति हो रही है। साथ ही कहा कि इस प्रगति से दोनों पक्ष संतुष्ट हैं। गोयल का यह बयान ऐसे समय पर आया है, जब सोशल मीडिया पर डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच ट्रेड डील को लेकर सकारात्मक संवाद हुआ है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा कि वह दोनों देशों के बीच चल रही बातचीत से खुश हैं और उन्हें विश्वास है कि दोनों देश एक सफल निष्कर्ष पर पहुंचेंगे। ट्रंप ने आगे कहा, "मुझे यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि भारत और अमेरिका, दोनों देशों के बीच व्यापार बाधाओं को दूर करने के लिए बातचीत जारी रखे हुए हैं।" उन्होंने यह भी कहा कि वह आने वाले हफ्तों में अपने "बहुत अच्छे दोस्त" प्रधानमंत्री मोदी से बात करने के लिए उत्सुक हैं। एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए, प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिका को अपना घनिष्ठ मित्र और स्वाभाविक साझेदार बताया। प्रधानमंत्री ने कहा कि ट्रेड डील भारत-अमेरिका साझेदारी की असीम संभावनाओं को उजागर करने में मदद करेगी और आश्वासन दिया कि दोनों टीमें चर्चाओं को जल्द से जल्द पूरा करने के लिए काम कर रही हैं। बाद में ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी के पोस्ट को फिर से शेयर किया, जो दिखाता है कि ट्रेड डील को लेकर दोनों देशों में सकारात्मक रुख बना हुआ है।

व्यापार बाधाओं को खत्म करने के लिए मणिपुर सरकार ने यूनाइटेड नगा काउंसिल से की अपील

इंफाल  मणिपुर सरकार ने राज्य में नगा समुदाय की शीर्ष संस्था यूनाइटेड नगा काउंसिल (यूएनसी) से नगा बहुल क्षेत्रों में राष्ट्रीय राजमार्गों पर अनिश्चितकालीन 'व्यापार प्रतिबंध' हटाने का अनुरोध किया है। अधिकारियों ने गुरुवार को यह जानकारी दी। यूएनसी और अन्य नगा संगठनों ने भारत-म्यांमार अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर बाड़ लगाने और मुक्त आवागमन व्यवस्था (एफएमआर) को समाप्त करने का विरोध करते हुए 8 सितंबर की मध्यरात्रि से सभी नगा आबादी वाले क्षेत्रों में व्यापार प्रतिबंध लागू कर दिया। इंफाल में एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इंफाल-जिरीबाम राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-37) और इंफाल-दीमापुर राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-2) पर विभिन्न स्थानों पर सैकड़ों माल से लदे और खाली ट्रक, साथ ही परिवहन ईंधन ले जाने वाले टैंकर फंसे हुए हैं। अधिकारी ने बताया कि मणिपुर के मुख्य सचिव पुनीत कुमार गोयल ने यूएनसी अध्यक्ष एनजी लोरहो को लिखे एक पत्र में अनुरोध किया कि जनहित में अपना आंदोलन वापस ले लें और गृह मंत्रालय (एमएचए) ने नगा संगठनों के साथ अपनी बातचीत जारी रखी। मुख्य सचिव ने यूएनसी अध्यक्ष को लिखे अपने पत्र में कहा: "गृह मंत्रालय, नगा बहुल क्षेत्रों में भारत और म्यांमार के बीच अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर बाड़ लगाने के मुद्दे पर यूएनसी के साथ बातचीत कर रहा है। राज्य सरकार को इस विषय पर आपके ज्ञापन और अभ्यावेदन भी प्राप्त हुए हैं।" पत्र में आगे कहा गया है, "यह सूचित किया जाता है कि केंद्र सरकार ने यूएनसी और अन्य हितधारकों द्वारा उठाई गई चिंताओं पर ध्यान दिया है। तदनुसार, केंद्र सरकार बाड़ लगाने का काम शुरू करने से पहले यूएनसी और अन्य हितधारकों के साथ पूर्व परामर्श के लिए बातचीत कर रही है और करती रहेगी। यूएनसी के साथ अगली त्रिपक्षीय बैठक पारस्परिक रूप से तय की गई तिथि और स्थान पर होगी।" इस बीच, गृह मंत्रालय के अधिकारियों और मणिपुर के तीन नगा समूहों के नेताओं ने 26 अगस्त को दिल्ली में पुरानी एफएमआर को बहाल करने और भारत-म्यांमार सीमा पर चल रही बाड़ लगाने की कार्रवाई को रोकने की मांग पर एक बैठक की थी। ये बैठक बेनतीजा रही। गृह मंत्रालय की आधिकारिक टीम का नेतृत्व डॉ. के.पी. मिश्रा कर रहे हैं, जो पूर्वोत्तर मामलों पर गृह मंत्रालय के सलाहकार हैं, जबकि 11 सदस्यीय नागा प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व यूएनसी अध्यक्ष एनजी लोरहो ने किया और इसमें यूएनसी, ऑल नागा स्टूडेंट्स एसोसिएशन, मणिपुर (एएनएसएएम) और नागा महिला संघ (एनडब्ल्यूयू) के प्रतिनिधि शामिल थे। यूएनसी ने पहले केंद्र सरकार को एक अल्टीमेटम दिया था और 16 अगस्त को मणिपुर के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला के साथ बैठक की थी, जिसमें पुराने एफएमआर को बहाल करने और मणिपुर से लगी भारत-म्यांमार सीमा के 398 किलोमीटर पर बाड़ लगाने पर रोक लगाने पर चर्चा की गई थी। यूएनसी और अन्य नागा संगठन पिछले साल से अपनी मांगों के समर्थन में आंदोलन कर रहे हैं और "एफएमआर को एकतरफा रूप से रद्द करने और भारत-म्यांमार सीमा पर बाड़ लगाने" का विरोध कर रहे हैं। व्यापार प्रतिबंध और मालवाहक वाहनों के रोके जाने के कारण, सोमवार से इस पूर्वोत्तर राज्य में राज्य के बाहर से आवश्यक वस्तुओं और खाद्यान्नों की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है। आर्थिक नाकेबंदी ने राज्य के कई हिस्सों में आपूर्ति श्रृंखलाओं को बाधित कर दिया है, जिससे इंफाल घाटी और दक्षिणी कुकी-बहुल पहाड़ी जिलों पर असर पड़ा है। व्यापार प्रतिबंध का सेनापति, उखरुल और तामेंगलोंग जिलों पर गहरा प्रभाव पड़ा है, जहां आवश्यक वस्तुओं से लदे ट्रक विभिन्न चौकियों पर फंसे हुए हैं। नगा संगठनों के अनुसार, सीमा पर बाड़ लगाने और एफएमआर को निरस्त करने के सरकार के फैसले से मणिपुर, नगालैंड, अरुणाचल प्रदेश और म्यांमार में रहने वाली नगा जनजातियां भौतिक रूप से विभाजित हो जाएंगी, जिससे उनकी सांस्कृतिक पहचान, पारंपरिक और पैतृक संबंधों को खतरा होगा। पिछले साल गृह मंत्रालय ने घोषणा की थी कि एफएमआर, जो पहले भारत-म्यांमार सीमा पर रहने वाले लोगों को बिना पासपोर्ट और वीजा के एक-दूसरे के क्षेत्र में 16 किलोमीटर तक यात्रा करने की अनुमति देता था, को समाप्त कर दिया जाएगा। इसके बजाय, गृह मंत्रालय ने सीमा पार आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए सीमा के दोनों ओर 10 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले भारत और म्यांमार दोनों के सीमावर्ती निवासियों को पास जारी करने की एक नई योजना अपनाने का फैसला किया था। नागालैंड और मिजोरम की सरकारें और दोनों पूर्वोत्तर राज्यों के कई राजनीतिक दल और नागरिक समाज सीमा पर बाड़ लगाने और पुराने एफएमआर को खत्म करने का कड़ा विरोध कर रहे हैं। चार पूर्वोत्तर राज्य—अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, नागालैंड और मिजोरम – म्यांमार के साथ 1,643 किलोमीटर लंबी बिना बाड़ वाली सीमा साझा करते हैं। गृह मंत्रालय ने पहले 31,000 करोड़ रुपये की लागत से हथियारों, गोला-बारूद, नशीले पदार्थों और अन्य प्रतिबंधित वस्तुओं की तस्करी के लिए जानी जाने वाली पूरी सीमा पर बाड़ लगाने का फैसला किया था।

दत्तक पुत्र की भांति वृद्धजनों को अडाप्ट करने पर फोकस किया जाए : मंत्री कुशवाह

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में दिए सुझाव भोपाल  सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण मंत्री श्री नारायण सिंह कुशवाह गुरूवार को सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय भारत सरकार द्वारा आयोजित सामाजिक कल्याण एवं सुरक्षा क्षेत्र पर मंत्री समूह की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में शामिल हुए। बैठक केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेन्द्र कुमार की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। मंत्री श्री कुशवाह ने ईज ऑफ डुइंग बिजनेस, ईज ऑफ लिविंग को बेहतर बनाने तथा नागरिकों और उद्यमों पर अनुपालन बोझ कम करने के लिए दत्तक पुत्र की भांति वृद्धजनों को अडॉप्ट करने, पैरेंटल केयर लीव लिए जाने तथा सशुल्क वृद्धाश्रमों को पीपीपी मोड पर विकसित करने के सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था से समाज कल्याण के क्षेत्र में बेहतर कार्य हो सकेगा। मंत्री श्री कुशवाह ने कहा कि वृद्धजनों को समाज की मुख्य धारा में बनाए रखने की जरूरत है, जो वृद्धजन शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ हैं, उनको क्षमता के अनुसार रचनात्मक कार्यों से जोड़ा जा सकता है। उन्होंने कहा कि सभी वृद्धाश्रमों, नशा मुक्ति केंद्र, डीआरसी भिक्षु गृह आदि के संचालन के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिव प्रोसीजर बनाया जाना चाहिए। सभी जरूरतमंदों के लिए एक हेल्पलाइन विकसित किए जाने, ट्रांसजेण्डर व्यक्तियों को 50 वर्ष की आयु के बाद वृद्धजनों का दर्जा दिए जाने तथा केन्द्र में ओबीसी एवं एससी विभाग पृथक पृथक बनाए जाने का सुझाव भी दिया। केंद्रीय मंत्री श्री वीरेंद्र कुमार ने बताया कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी कि विकसित भारत 2047 की परिकल्पना को आगे बढ़ाने के लिये सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय समाज के वंचित वर्गों के विकास के लिए एक रोड मैप पर कार्य कर रहा है। इसी कड़ी में सभी प्रदेशों के सामाजिक न्याय विभागों से सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत, डिजिटल इंडिया और न्यूनतम सरकार अधिकतम शासन के अनुरूप संस्थाओं को सुदृढ़ बनाना, केंद्र, राज्य, नगर निगम सुधारों की पहचान करना और मौजूदा कानून में आवश्यक संशोधन पर भी विचार किया जा रहा है। इसी कड़ी में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुझाव आमंत्रित किए गये है।

वोटर लिस्ट विवाद में सोनिया गांधी पर छाया राहत का सूरज, कोर्ट ने याचिका ठुकराई

नई दिल्ली  कांग्रेस की वरिष्ठ नेता, सांसद और पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी को राऊज एवेन्यू कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने उनके खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें आरोप लगाया गया था कि सोनिया गांधी ने बिना नागरिकता हासिल किए 1980 की वोटर लिस्ट में अपना नाम शामिल कराया। याचिका में दावा किया गया था कि सोनिया गांधी ने 30 अप्रैल 1983 को भारतीय नागरिकता प्राप्त की थी, जबकि उनका नाम 1980 की दिल्ली की वोटर लिस्ट में शामिल था। याचिका में यह सवाल उठाया गया था कि 1980 में सोनिया गांधी का नाम वोटर लिस्ट में कैसे आया, जबकि उन्होंने नागरिकता 1983 में हासिल की थी। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया था कि 1982 में उनका नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया गया था। याचिकाकर्ता ने सवाल उठाया कि 1982 में उनका नाम वोटर लिस्ट से क्यों हटाया गया और इसके पीछे क्या वजह थी। इस याचिका में एक और गंभीर सवाल उठाया गया था कि 1983 में भारतीय नागरिकता हासिल करने के बाद 1980 की वोटर लिस्ट में सोनिया गांधी का नाम किस आधार पर शामिल किया गया? क्या इसके लिए किसी फर्जी दस्तावेज का सहारा लिया गया था? याचिकाकर्ता ने यह भी मांग की थी कि दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया जाए कि वह इस मामले में मुकदमा दर्ज करे और जांच कर के स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करे। हालांकि, राऊज एवेन्यू कोर्ट ने इस याचिका को खारिज करते हुए इस मामले में आगे किसी भी तरह की जांच की आवश्यकता नहीं मानी। बता दें कि बुधवार की सुनवाई में कोर्ट ने इस फैसले को सुरक्षित रख लिया था, जिसे गुरुवार को खारिज कर दिया गया। यह याचिका विकास त्रिपाठी नामक व्यक्ति ने दाखिल की थी। बुधवार की सुनवाई में कोर्ट ने इस मामले पर गुरुवार की शाम 4 बजे के करीब फैसला सुनाए जाने की बात कही थी।

कलेक्टर्स व्यवस्थित ढंग से करायें खाद का वितरण : कृषि मंत्री कंषाना

प्रदेश में गत वर्ष की तुलना में इस वर्ष खाद की अधिक उपलब्धता भोपाल  किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री श्री एदल सिंह कंषाना ने कहा है कि प्रदेश के सभी जिलों में खाद की पर्याप्त उपलब्धता है। उन्होंने सभी जिला कलेक्टर्स को अपने जिले में खाद का वितरण व्यवस्थित ढंग से कराने के निर्देश दिये हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में गत वर्ष की तुलना में इस वर्ष अधिक खाद उपलब्ध होगी। प्रदेश में गत वर्ष 01 अप्रैल से 9 सितम्बर 2024 तक 15.83 लाख मीट्रिक टन यूरिया का विक्रय हुआ था जिसके विरुद्ध इस वर्ष 9 सितंबर 2025 तक 18.34 लाख मीट्रिक टन की कुल उपलब्धता थी, जिसमें से 16.19 लाख मीट्रिक टन का विक्रय किया जा चुका है। प्रदेश में 2.15 लाख मीट्रिक टन यूरिया उपलब्ध है। प्रदेश में गत वर्ष 01 अप्रैल से 9 सितम्बर 2024 तक 9.39 लाख मीट्रिक टन डी.ए.पी + एन.पी.के. का विक्रय हुआ था जिसके विरुद्ध इस वर्ष 9 सितंबर तक 13.96 लाख मीट्रिक टन की कुल उपलब्धता थी, जिसमें से 9.71 लाख मीट्रिक टन का विक्रय किया जा चुका है एवं 4.25 लाख मीट्रिक टन डी.ए.पी. + एन.पी.के. प्रदेश में उपलब्ध है। प्रदेश के लिए प्रतिदिन लगभग 7 से 8 रैक विभिन्न जिलों के लिए आ रही हैं।  

मुख्यमंत्री ने जिले में खराब हुई सोयाबीन की फसल का सर्वे कराने के दिये निर्देश

भोपाल  प्रदेश सरकार किसानों के साथ है और हम किसानों को किसी तरह का नुकसान नहीं होने देंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरूवार को शाजापुर जिले की पोलायकलां तहसील के ग्राम खड़ी में विभिन्न कारणों से खराब हुई सोयाबीन की फसल के अवलोकन के बाद किसानों को यह भरोसा दिलाया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शाजापुर कलेक्टर सहित प्रदेश के सभी कलेक्टर्स को खराब हुई सोयाबीन की फसल का सर्वे कराने के निर्देश दिये। किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री श्री एदल सिंह कंषाना, विधायक श्री घनश्याम चन्द्रवंशी, श्री अरूण भीमावद, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री हेमराज सिंह सिसोदिया एवं डॉ. रवि पाण्डेय भी इस अवसर पर मौजूद थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसान चौपाल में कहा कि बारिश कम होने एवं कीट प्रकोप के कारण जहां-जहां भी सोयाबीन की फसल को नुकसान हुआ है, उसका पूरा सर्वे कराया जायेगा, किसानों को नुकसान नहीं होने देंगे। किसानों को अधिकतम लाभ दिया जायेगा। किसानों की जिंदगी बेहतर हो, इसके लिए केन्द्र एवं राज्य की सरकार लगातार प्रयासरत हैं। उन्होंने कलेक्टर शाजापुर को निर्देश दिये कि जिन किसानों को पिछले वर्षों की बीमा राशि प्राप्त नहीं हुई है, उनके प्रकरणों का निराकरण कराएं। आने वाले समय में शाजापुर जिले के किसानों को नर्मदा-पार्वती-चंबल-कालीसिंध लिंक परियोजना से पानी उपलब्ध कराया जायेगा। इससे गरीब किसानों के जीवन में बदलाव आएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने देशी गाय पालन को प्रोत्साहन देने के लिए शुरू की गई कामधेनु योजना के बारे में बताते हुए कहा कि इस योजना में किसानों से गाय का दूध क्रय किया जायेगा। उन्होंने 25 गाय के पालन पर लगने वाली राशि 40 लाख पर सरकार द्वारा 10 लाख रूपये का अनुदान भी दिया जायेगा। ग्रामीण क्षेत्रों में गायों के लिए गौशालाएं भी बनाई जायेगी। गौशालाओं को गायों के रखरखाव के लिए 40 रूपये प्रति गाय की दर से अनुदान दिया जायेगा। पांच हजार से अधिक पशु रखकर गौशाला संचालित करने पर भूमि भी उपलब्ध कराई जायेगी। इसी तरह क्षेत्र में विचरण कर रहे वन्यप्राणियों हिरण, नील गाय आदि के समुचित व्यवस्थापन के निर्देश भी वन विभाग को दिये। उन्होंने कहा कि किसान बिना किसी चिंता के अपनी फसलों का उत्पादन प्राप्त करें और खुशहाल बनें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने “एक बगिया माँ के नाम” योजना के बारे में बताया और कहा कि किसानों को एक एकड़ जमीन में फलोद्यान लगाने पर प्रथम वर्ष 2 लाख रूपये तथा इसके अगले वर्ष 55 हजार रूपये इस प्रकार 3 वर्ष तक अनुदान दिया जायेगा। कपास उत्पादन को प्रदेश सरकार प्रोत्साहित करेगी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में कपास उत्पादन को प्रोत्साहित किया जायेगा। इसके लिए धार जिले के बदनावर में “पीएम मित्रा” औद्योगिक पार्क विकसित करने जा रहे हैं, जिसका 17 सितम्बर को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा शिलान्यास किया जायेगा। उन्होंने कहा कि धार जिले सहित मालवा निमाड़ अंचल के कपास उत्पादक किसानों के जीवन में अभूतपूर्व परिवर्तन लाने का माध्यम बनेगा। किसान से नुकसान की जानकारी ली मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ग्राम खड़ी के किसान श्री परवत सिंह बगाना के निवास पर जाकर उनसे सोयाबीन की खराब हुई फसल से हुए नुकसान की जानकारी ली।

कर्तव्य और कृतज्ञता पर योगी का विचार, कहा- यह सनातन धर्म का पहला संस्कार है

गोरखपुर गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कर्ता के प्रति कृतज्ञता का भाव प्रकट करना सनातन धर्म का पहला संस्कार है। भारतीय मनीषा के ज्ञान दर्शन में इस बात को प्रतिष्ठित किया गया है कि जीवन में हमारे, समाज और राष्ट्र के प्रति जिस किसी ने योगदान दिया हो, उसके प्रति कृतज्ञता का भाव होना ही चाहिए। मुख्यमंत्री योगी युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की 56वीं तथा राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की 11वीं पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में आयोजित साप्ताहिक श्रद्धांजलि समारोह के अंतिम दिन गुरुवार को महंत अवेद्यनाथ की पुण्यतिथि पर श्रद्धासुमन अर्पित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने रामायणकाल में हनुमानजी और मैनाक पर्वत के बीच हुए संवाद के मुख्य उद्धरण ‘कृते च कर्तव्यम एषः धर्म सनातनः’ को समझाते हुए कहा कि यह भाव सनातन से ही मिलता है। सनातन की परंपरा में पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता का भाव व्यक्त करने के लिए आश्विन माह का पूरा कृष्ण पक्ष ही समर्पित किया गया है। गोरक्षपीठ में ब्रह्मलीन पूज्य महंतद्वय की पुण्य स्मृति में साप्ताहिक आयोजन भी कृतज्ञता ज्ञापन का ही आयाम है। मुख्यमंत्री योगी ने अपने दादागुरु ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ और गुरुदेव ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ का स्मरण करते हुए कहा कि महंतद्वय समाज, राष्ट्र और लोक जीवन से जुड़े हर मुद्दे पर सनातन धर्म और भारत के हितों के प्रति प्रतिबद्ध रहे। महंत दिग्विजयनाथ जी ने सनातन धर्म, शिक्षा, सेवा और राष्ट्रीयता के जिन मूल्यों और आदर्शों को स्थापित किया, उन्हें महंत अवेद्यनाथ जी ने आत्मसात कर आगे बढ़ाया। इन मूल्यों और आदर्शों के लिए, देश और धर्म के लिए महंतद्वय आजीवन समर्पित रहे। दोनों ने सदैव देश और धर्म को प्राथमिकता दी। गोरक्षपीठ आज भी उनके बताए मार्ग का अनुसरण कर रहा है। उन्होंने कहा कि गोरक्षपीठ के ब्रह्मलीन महंतद्वय ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को सभ्य समाज और सशक्त राष्ट्र की आधारशिला माना। महंत दिग्विजयनाथ जी ने इसी ध्येय से देश की गुलामी के कालखंड में ही 1932 में महाराणा प्रताप जैसे वीर योद्धा के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना की थी। 1932 में पहली संस्था खुली और फिर यह श्रृंखला बढ़ती गई। गोरखपुर में जब पहले विश्वविद्यालय की स्थापना की बात आई तो उन्होंने महाराणा प्रताप महाविद्यालय और महाराणा प्रताप महिला विद्यालय दान में देकर विश्वविद्यालय की स्थापना का शुभारंभ कराया। यह कार्य श्रेय के लिए नहीं था। उन्होंने महिला शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, आयुष शिक्षा सहित शिक्षा के हरेक क्षेत्र को आगे बढ़ाया। उनके बाद महंत अवेद्यनाथ जी ने भी इस सिलसिले को जारी रखा। उन्होंने अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण में गोरक्षपीठ के ब्रह्मलीन महंतद्वय के अविस्मरणीय योगदान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि श्रीराम मंदिर निर्माण के यज्ञ का शुभारंभ महंत दिग्विजयनाथ जी ने किया था। उनके बाद 1983 से लेकर जीवनपर्यंत महंत अवेद्यनाथ मंदिर निर्माण के लिए संघर्षरत रहे। ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ समाज को तोड़ने वाली ताकतों से चिंतित रहे। उन्होंने आजीवन सामाजिक समरसता को आगे बढ़ाया।  

भारत और मॉरीशस ने लिया बड़ा आर्थिक कदम, काशी में हुई समझौता से डॉलर की पकड़ कमजोर

वाराणसी मॉरीशस के साथ भारत की काशी में द्वि‍पक्षीय बैठक में एक अहम फैसला स्‍थानीय मुद्रा में कारोबार रहा है। इस फैसले के बाद अब वैश्‍व‍ि‍क कारोबार में आपसी मुद्रा में ही लेन देन शुरू होगा। इसकी वजह से अब दोनों देशों के कारोबार में डालर का वर्चस्‍व टूट गया है।  बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी में भारत-मारीशस के बीच द्विपक्षीय वार्ता ने देश- दुनिया को कई बड़े संदेश दिए। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत-मारीशस के संबंधों का जिक्र करते हुए कहा कि मुझे यह कहते हुए गर्व हो रहा है कि भारत और मारीशस सिर्फ भागीदार नहीं, बल्कि एक परिवार हैं। पिछले साल मारीशस में यूपीआइ और रुपे कार्ड लांच किए गए थे। अब हम लोकल करेंसी में व्यापार को सक्षम करने की दिशा में काम करेंगे।   प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी होटल ताज में गुरुवार को भारत-मारीशस के बीच द्विपक्षीय वार्ता को संबोधित कर रहे थे। कहा कि ये मेरे लिए गर्व का विषय है कि मुझे अपने संसदीय क्षेत्र में आपका स्वागत करने का अवसर मिल रहा है। चिर काल से काशी भारत की सभ्यता और सांस्कृतिक आत्मा का प्रतीक रही है। इसके अलावा दोनों देशों में कारोबार के साथ ही रुपे कार्ड ही नहीं बल्‍क‍ि यूपीआई का भी प्रयोग शुरू हो चुका है। इसकी वजह से दोनों देशों के बीच डालर में कारोबार का वर्चस्‍व अब टूट चुका है।    हमारी संस्कृति और संस्कार, सदियों पहले भारत से मारीशस पहुंचे और वहां की जीवन-धारा में रच-बस गए। काशी में मां गंगा के अविरल प्रवाह की तरह भारतीय संस्कृति का सतत प्रवाह मारीशस को समृद्ध करता रहा है। यह केवल औपचारिक नहीं बल्कि एक आत्मिक मिलन है। मार्च में मुझे मारीशस के राष्ट्रीय दिवस समारोह में शामिल होने का सौभाग्य मिला था।मारीशस भारत की पड़ोसी प्रथम नीति और विजन महासागर का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। मार्च में मुझे मारीशस के राष्ट्रीय दिवस समारोह में शामिल होने का सौभाग्य मिला। उस समय हमने अपने संबंधों को उन्नत रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया।   वोस्ट्रो अकाउंट खोलने से म‍िलेगी सुव‍िधा दो देशों के बीच आपसी मुद्रा में लेन देन के ल‍िए भारतीय रिजर्व बैंक ने रुपये में वोस्ट्रो अकाउंट खोलने से जुड़े नियमों में भी इसी वर्ष बदलाव किया है। इस कड़ी में बैंकों को अब बिना क‍िसी पूर्व अनुमति के विदेशी बैंकों के लिए विशेष रुपये का वोस्ट्रो अकाउंट खोलने की अनुमति म‍िल चुकी है। वोस्ट्रो अकाउंट एक घरेलू बैंक द्वारा विदेशी बैंक के लिए खोला गया खाता होता है। यह खाता घरेलू बैंक की मुद्रा में ही शाम‍िल होता है। रिजर्व बैंक की पूर्वानुमति से विदेशी बैंकों के विशेष रुपया वोस्ट्रो अकाउंट खोलने की अनुमति देने के बाद दोनों देशों के स्‍थानीय मुद्रा में लेन देन सहज हो सकेगा। वोस्ट्रो अकाउंट खोलने के लिए आरबीआई की मंजूरी लेने की आवश्यकता को खत्म करने का फैसला लेने के साथ ही डालर का वर्चस्‍व टूटना शुरू हो चुका है। विदेशी बैंकों में विशेष रुपया वोस्ट्रो अकाउंट खोल सकने की प्रक्र‍िया में अब काफी तेजी आएगी। दरअसल वोस्ट्रो अकाउंट एक प्रकार का बैंक खाता है जो एक घरेलू बैंक किसी विदेशी बैंक की ओर से, लोकल करेंसी में कारोबार अथवा लेन देन की अनुमत‍ि रखता है। एक विदेशी बैंक फंड के लिए मध्यस्थ के रूप में काम करता है।  

मॉरीशस दौरे में पीएम मोदी ने परोसा स्वादिष्ट बनारसी भोजन, विदेशियों ने की तारीफ

वाराणसी प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी द्वारा मॉरीशस के प्रधानमंत्री के सम्‍मान में ताज होटल में द‍िए गए मध्याह्न भोज में व‍िदेशी म‍ित्रों के स्‍वाद का जहां ध्‍यान रखा गया वहीं बनारसी जायके की सुवास भी टेबल पर ब‍िखरी और सुस्‍वादु बनारसी जायका भी विदेशी मेहमानों ने खूब पसंद क‍िया। दरअसल गुरुवार को भारत के प्रधानमंत्री और काशी के सांसद नरेन्‍द्र मोदी मेजबान की भूम‍िका में नजर आए। उनके द्वारा डॉ. नवीनचंद्र रामगुलाम और श्रीमती वीणा राम गुलाम के सम्मान में मध्याह्न भोज में जो मीनू परोसा गया वह खांटी भारतीय और बनारसी जायके से भरपूर था।    भुने भुट्टे और पुदीना का रस से बने पुदीना और भारतीय मसाले से युक्त भुने हुए मक्के का पतला सूप मीनू में पहले नंबर पर था। वहीं टिक्की टमाटर चाट में स्थानीय व्यंजन मसालेदार टमाटर मैश के ऊपर भुनी हुई कुरकुरी आलू पैटी, रागी दही बड़ा में मीठे मसाले वाली दही की चटनी में भिगोई हुई रागी थी। वहीं पनीर लौंग लता में स्थानीय व्यंजन के क्रम में मखमली टमाटर अखरोट से तैयार ग्रेवी में पका हुआ भरवा पनीर था। बनारसी कढ़ी पकौड़ी में छाछ से तैयार ग्रेवी में पक्के अजवाइन और बेसन के तले हुए पकौड़े थे। आलू कुटी मिर्च में दरदरे भरे कश्मीरी मिर्च से सजे जीरे के तड़के वाली मसालेदार सूखी आलू की सब्जी भी थी। तुवर दाल में तड़का में जीरा टमाटर और भारतीय मसाले से युक्त पीली दाल भी शाम‍िल थी। सब्जी दम बिरयानी में दम शैली में पकाई गई सुगंधित सब्जियों के साथ केसर उत्तर लंबे दाने वाले बासमती चावल भी थे। इसके अलावा मिश्रित भारतीय रोटियां भी मीनू में शाम‍िल थीं। इसके अलावा लाल पेड़ा भी था जो धीरे-धीरे पकाए गए दूध से बनी सूखी मिठाई है। स्थानीय व्यंजन में जलेबी- रबड़ी गाढ़े दूध के साथ परोसे गए केसर चीनी सिरप में भिगोए हुए खमीर युक्त आटे के कुरकुरे स्पाइरल भी थे। इसके अलावा आखि‍र में बनारसी पान के पत्‍ते में लपेटा हुआ गुलाब गुलकंद, सौंफ और कटे हुए खजूर के अलावा चाय- कॉफी के साथ कश्‍मीरी कहवा का भी जायका रखा गया था। व‍िदेशी मेहमान बनारसी जायके को जहां खूब पसंद क‍िए वहीं पीएम ने भी बनारसी जायके का आनंद ल‍िया।   

उच्च शिक्षा विभाग ने कृषि पाठ्यक्रम के लिए सुचारू शिक्षण व्यवस्था के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश किए जारी

भोपाल  उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री श्री इन्दर सिंह परमार के निर्देशों के अनुपालन में, उच्च शिक्षा विभाग ने समस्त शासकीय स्वशासी एवं अन्य संबंधित महाविद्यालय में कृषि पाठ्यक्रम संचालन के लिए सुचारू शिक्षण व्यवस्था बनाने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए है। आदेशानुसार ऐसे महाविद्यालय, जहां सत्र 2025-26 से बी.एससी. कृषि पाठ्यक्रम संचालन हो रहा है, वहां उक्त पाठ्यक्रम की शिक्षण व्यवस्था के लिए आई.सी.ए.आर./यू.जी.सी. के मापदण्डों के अनुसार शैक्षणिक अर्हताओं के आधार पर महाविद्यालय की जनभागीदारी समिति की सक्षम अनुमति के साथ कम से कम तीन अतिथि विद्वानों को तत्काल आमंत्रित करने के लिए निर्देशित किया गया है। साथ ही संबंधित महाविद्यालयों में कृषि पाठ्यक्रम के प्रायोगिक कार्यों के लिए, निकटवर्ती किसानों एवं अन्य शासकीय संस्थानों के साथ 30 सितम्बर तक एमओयू (MoU) सुनिश्चित किए जाने के निर्देश भी दिए गए हैं। इनमें शासकीय एम.एल.बी. कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय भोपाल, शासकीय सरोजिनी नायडू कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय भोपाल, उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान भोपाल, शासकीय कमला राजे कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय ग्वालियर, शासकीय एम.एल.बी. कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय ग्वालियर, शासकीय होल्कर विज्ञान महाविद्यालय इन्दौर, माता जीजाबाई शासकीय कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय मोती तबेला इन्दौर, शासकीय आदर्श विज्ञान महाविद्यालय जबलपुर, शासकीय मोहनलाल हरगोविन्द दास गृह विज्ञान महाविद्यालय जबलपुर, शासकीय ठाकुर रणमत सिंह महाविद्यालय रीवा, शासकीय स्रातकोत्तर महाविद्यालय दतिया, शासकीय महाकौशल कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय जबलपुर, शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय छिन्दवाड़ा, शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय सतना, शासकीय संजय गांधी स्मृति महाविद्यालय सीधी, शासकीय कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय सागर, शासकीय के. आर.जी. कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय ग्वालियर, शासकीय मानकुंवर बाई स्रातकोत्तर महाविद्यालय जबलपुर, शासकीय माधव विज्ञान महाविद्यालय, उज्जैन (अन्य महाविद्यालय) एवं शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय दमोह (अन्य महाविद्यालय) शामिल हैं।