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वसीयत विवाद ने बढ़ाई टेंशन: संजय कपूर की संपत्तियों पर कानूनी जंग तेज

नई दिल्ली दिवंगत बिजनेसमैन संजय कपूर की संपत्ति को लेकर चल रहे विवाद में नया मोड़ आ गया है। बॉलीवुड एक्ट्रेस करिश्मा कपूर के बच्चों समायरा और कियान कपूर ने अपनी सौतेली मां प्रिया सचदेव कपूर पर आरोप लगाते हुए दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था और प्रॉपर्टी में हिस्सा मांगा था। वहीं, अब संजय की मां रीना कपूर ने अपने दिवंगत बेटे की वसीयत में हिस्सा मांगा है।   उनके वकील वैभव गग्गर ने कहा कि संजय की वसीयत से संबंधित किसी भी दस्तावेज की जानकारी उनकी मां को नहीं दी गई है। इस मामले को लेकर वकील वैभव गग्गर ने मीडिया को जानकारी देते हुए कहा, ''आज के मामले में, संजय कपूर की पूर्व पत्नी करिश्मा कपूर ने अपने बच्चों की ओर से दावा किया है कि उन्हें एक वसीयत दिखाई गई है, जिसके आधार पर उनके बच्चों को संजय कपूर की निजी संपत्ति से बाहर कर दिया गया है। उन्होंने इस वसीयत को फर्जी बताया है।'' उन्होंने आगे कहा कि इस मामले में 'इंटेस्टेट सक्सेशन' यानी बिना वसीयत के उत्तराधिकार लागू हो, जिसके अनुसार संजय कपूर की संपत्ति पांच हिस्सों में बांटी जाए, करिश्मा के दो बच्चे, संजय की पत्नी प्रिया, उनका बेटा और संजय कपूर की मां रानी कपूर के बीच संपत्ति का विभाजन हो। बता दें कि प्रिया सचदेव कपूर का दावा है कि संजय कपूर ने 21 मार्च को एक वैध वसीयत बनाई थी, जिसके अनुसार संपूर्ण संपत्ति उन्हें सौंपी गई है। इस वसीयत को लेकर विवाद और गहरा हो गया है क्योंकि करिश्मा कपूर के बच्चों ने आरोप लगाया है कि यह वसीयत सात हफ्ते तक छुपाई गई और फिर अचानक एक पारिवारिक बैठक में पेश की गई, जिससे संदेह की स्थिति पैदा हुई। वकील गग्गर ने कहा, ''मैं इस वक्त मामले की मेरिट्स पर ज्यादा नहीं बोलूंगा, क्योंकि यह मामला अदालत के विचाराधीन है, लेकिन जो केस दायर किया गया है, उसकी यही मूल भावना है।'' कोर्ट ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट आदेश देते हुए कहा कि प्रिया सचदेव कपूर को 12 जून 2025 (संजय कपूर की मृत्यु की तारीख) तक की सभी निजी संपत्तियों का विस्तृत विवरण कोर्ट में दाखिल करना होगा। साथ ही कोर्ट ने सभी पक्षों को निर्देश दिया है कि वे अपनी-अपनी याचिकाएं, जवाब और कानूनी रुख लिखित में कोर्ट के समक्ष पेश करें। इस हाई-प्रोफाइल संपत्ति विवाद की अगली सुनवाई 9 अक्टूबर 2025 को निर्धारित की गई है।

फार्मेसी पंजीयन प्रक्रिया होगी पूरी तरह ऑनलाइन, पूरी पारदर्शिता से करें प्रकरणों का निराकरण : उप मुख्यमंत्री शुक्ल

मध्यप्रदेश स्टेट फार्मेसी परिषद की बैठक हुई भोपाल  उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि अब ऑनलाइन प्रणाली से घर बैठे पंजीयन प्रमाणपत्र मेल और डिजिलॉकर के माध्यम से उपलब्ध होंगे। इससे पंजीयन प्रक्रिया सुव्यवस्थित हुई है और लंबित मामलों का निपटारा तेजी से किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लगभग 50 प्रतिशत विद्यार्थियों के आवेदन अपूर्ण हैं, जिन्हें समय पर पूरा करवाना आवश्यक है। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल होटल पलाश भोपाल में मध्यप्रदेश स्टेट फार्मेसी परिषद की बैठक में शामिल हुए। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि प्राइवेट विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों की जिम्मेदारी है कि वे सभी विद्यार्थियों की सही जानकारी उपलब्ध कराएँ। यदि गलती छात्रों की है तो उन्हें सुधार के लिये सूचित किया जाए और यदि संस्थान की लापरवाही है तो मान्यता एवं एफिलिएशन पर कार्रवाई करें। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि फार्मासिस्ट, पैरामेडिकल और नर्सिंग स्टाफ राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ हैं। विकसित और स्वस्थ भारत के लिए गुणवत्तापूर्ण मानव संसाधन उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। बैठक में जून 2025 से अगस्त 2025 तक की कार्यप्रगति की समीक्षा की गई। इसमें 3500 से अधिक नए पंजीयन सफलतापूर्वक पूर्ण हुए, 5800 आवेदन प्रक्रिया में लंबित रहे तथा 1650 आवेदन निजी विश्वविद्यालयों की सूची उपलब्ध न होने के कारण शेष रहे। बताया गया कि संपूर्ण कार्यप्रणाली को अब डिजिटल मोड पर स्थानांतरित कर दिया गया है। इसमें समग्र आईडी, डिजिलॉकर, विवाह एवं निवास प्रमाणपत्र तथा एफडीए का एकीकरण किया गया है। नई प्रणाली से स्लॉट बुकिंग एवं परिषद कार्यालय में उपस्थित होकर सत्यापन कराने की आवश्यकता समाप्त होगी और सिस्टम आधारित ऑटो वेरिफिकेशन से प्रमाणपत्र सीधे डिजिलॉकर पर उपलब्ध होंगे। यह पहल परिषद को डिजिटल गवर्नेंस में देश की अग्रणी परिषद बनाएगी। बैठक में परिषद अध्यक्ष श्री संजय कुमार जैन, सदस्य श्री राजू चतुर्वेदी, श्री गौतमचंद धींग, श्री रामरतन गर्ग, श्री सत्येन्द्र सिंह चौहान, श्री देवेंद्र कुमार बजाजत्य, श्री अशोक जैन एवं डॉ. पवन दुबे सहित श्री दिनेश मौर्य (ड्रग कंट्रोलर, म.प्र.), श्री आत्री मुख्य विश्लेषक और चिकित्सा शिक्षा, स्वास्थ्य एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के प्रतिनिधि शामिल हुए। परिषद की रजिस्ट्रार श्रीमती भव्या त्रिपाठी ने प्रगति और आगामी योजनाओं का विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया।

DGHS का निर्देश – फिजियोथेरेपिस्ट मेडिकल डॉक्टर नहीं, ‘डॉक्टर’ शब्द के प्रयोग पर रोक

नई दिल्ली स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय ने एक निर्देश जारी कर फिजियोथेरेपिस्ट्स से कहा है कि वे अपने नाम के आगे 'डॉक्टर' शब्द का प्रयोग न करें, क्योंकि वे मेडिकल डॉक्टर नहीं हैं। 9 सितंबर को लिखे एक पत्र में, डीजीएचएस डॉ. सुनीता शर्मा ने कहा कि फिजियोथेरेपिस्ट अगर अपने नाम के आगे 'डॉ.' का प्रयोग करेंगे तो ये भारतीय चिकित्सा उपाधि अधिनियम, 1916 का कानूनी उल्लंघन होगा। आईएमए के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दिलीप भानुशाली को लिखे पत्र में शर्मा ने कहा, "फिजियोथेरेपिस्ट मेडिकल डॉक्टर के रूप में प्रशिक्षित नहीं होते हैं, इसलिए उन्हें 'डॉ.' प्रयोग नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह मरीजों और आम जनता को गुमराह करता है, जिससे संभावित रूप से धोखाधड़ी को बढ़ावा मिलता है।" उन्होंने आगे कहा, "फिजियोथेरेपिस्टों को प्राथमिक चिकित्सा पद्धति में काम करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए और उन्हें केवल रेफर किए गए मरीजों का ही इलाज करना चाहिए, क्योंकि वो चिकित्सीय स्थितियों को डायग्नोज करने के लिए प्रशिक्षित नहीं होते हैं। उनकी अनुचित फिजियोथेरेपी सलाह मामले को बिगाड़ भी सकती है।" पत्र में पटना और मद्रास उच्च न्यायालयों और देश भर की चिकित्सा परिषदों सहित विभिन्न न्यायालयों द्वारा जारी पूर्व कानूनी घोषणाओं और सलाहकार आदेशों का भी हवाला दिया गया है, जिनमें फिजियोथेरेपिस्ट/व्यावसायिक चिकित्सकों को 'डॉ.' शब्द का उपयोग करने से प्रतिबंधित किया गया है। अप्रैल में, राष्ट्रीय संबद्ध एवं स्वास्थ्य सेवा व्यवसाय आयोग (एनसीएएचपी) ने घोषणा की थी कि फिजियोथेरेपिस्ट अब अपने नाम के आगे 'डॉक्टर' और आगे 'पीटी' लगा सकते हैं। यह निर्णय केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत एनसीएएचपी द्वारा 2025 फिजियोथेरेपी पाठ्यक्रम के शुभारंभ के एक भाग के रूप में लिया गया है। डीजीएचएस ने कहा, "यह उल्लेख करना उचित होगा कि परिषद की आचार समिति (पैरामेडिकल एवं फिजियोथेरेपी केंद्रीय परिषद विधेयक, 2007) ने पहले निर्णय लिया था कि 'डॉक्टर' (डॉक्टर) की उपाधि का प्रयोग केवल आधुनिक चिकित्सा, आयुर्वेद, होम्योपैथी और यूनानी चिकित्सा के पंजीकृत चिकित्सकों द्वारा ही किया जा सकता है। नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ सहित किसी अन्य श्रेणी के चिकित्सा पेशेवरों को इस उपाधि का उपयोग करने की अनुमति नहीं है।" पत्र में आगे कहा गया है कि किसी भी उल्लंघन पर "आईएमए अधिनियम की धारा 6 और 6ए के उल्लंघन के लिए धारा 7 के तहत कार्रवाई की जा सकती है", क्योंकि परिषद ने मार्च 2004 में अपनी बैठक में कानूनी राय अपनाई थी। पत्र में कहा गया है, " यह निर्देश दिया जाता है कि फिजियोथेरेपी के लिए योग्यता आधारित पाठ्यक्रम, अनुमोदित पाठ्यक्रम 2025 में फिजियोथेरेपिस्ट के लिए 'डॉ.' उपसर्ग का प्रयोग तत्काल हटा दिया जाए। फिजियोथेरेपी के स्नातक और स्नातकोत्तर छात्रों के लिए, मरीजों या जनता को अस्पष्टता पैदा किए बिना, एक अधिक उपयुक्त और सम्मानजनक उपाधि पर विचार किया जा सकता है।"

टीकमगढ़ परीक्षण संभाग को एम.पी. ट्रांसको की सर्वोत्तम दक्षता ट्रॉफी

भोपाल  मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी (एम.पी. ट्रांसको) के टीकमगढ़ परीक्षण संभाग ने उत्कृष्ट प्रदर्शन कर प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया है। इस उपलब्धि के लिए टीकमगढ़ को राज्य स्तरीय सर्वोत्तम दक्षता ट्रॉफी से सम्मानित किया गया। जबलपुर मुख्यालय में आयोजित समारोह में एम.पी. ट्रांसको के प्रबंध संचालक श्री सुनील तिवारी ने यह ट्रॉफी टीकमगढ़ टीम को प्रदान की। टीकमगढ़ की ओर से कार्यपालन अभियंता श्री आर.पी. कान्यकुब्ज, सहायक अभियंता श्री जी.पी. राय और श्रीमती चंदा यादव ने यह सम्मान ग्रहण किया। प्रबंध  संचालक श्री सुनील तिवारी ने कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद टीकमगढ़ की टीम की यह उपलब्धि सभी के लिए प्रेरणा है। 

प्रदेश के 9300 हाई एवं हायर सेकण्डरी स्कूलों में 12 सितंबर को उमंग दिवस

बच्चों को जीवन कौशल शिक्षा देने के लिये चलाया जा रहा है कार्यक्रम भोपाल "उमंग है तो जिंदगी में रंग है" इस थीम पर आधारित उमंग दिवस का आयोजन 12 सितम्बर को प्रदेश के 9 हजार 300 हाई एवं हायर सेकेंडरी स्कूलों में किया जा रहा है। इस कार्यक्रम का लाभ 20 लाख से अधिक बच्चों को मिलेगा। इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा निर्धारित 10 जीवन कौशलों से परिचित करवाना है। कार्यक्रम की मदद से बच्चे जीवन में आने वाले चुनौतियों का सामना मजबूती से कर सकेंगे। कार्यक्रम का एक और उद्देश्य है कि बच्चों को जीवन में आगे बढ़ने के लिए तैयार किया जाये। यह कार्यक्रम स्कूल शिक्षा विभाग एवं संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (यूएनएफपीए) के सहयोग से तैयार किया गया है। जीवन कौशल शिक्षा आधारित करिकुलम और उसके संचालन में की गई पिछले 7 वर्षों की कड़ी मेहनत से बच्चों के जीवन में आए सकारात्मक बदलाव को उत्साह के रूप में मनाना है। कार्यक्रम में बच्चे एक-दूसरे के अनुभवों को साझा करते हैं और अन्य विद्यार्थियों को प्रोत्साहित एवं मार्गदर्शित करते है। उमंग स्कूल हेल्थ एवं वेलनेस कार्यक्रम एक फ्लैगशिप प्रोग्राम है जिसमें गतिविधि आधारित कक्षावार जीवन कौशल शिक्षा के मॉड्यूल हैं जिसे शिक्षा विभाग, स्वास्थ विभाग एवं यूनाईटेड नेशन्स पॉप्युलेशन फंड (यूएनएफपीए) की बराबर भागीदारी से मिलकर चलाया जा रहा है। प्रदेश की सभी शासकीय हाई एवं हॉयर सेकेंडरी स्कूलों में प्रत्येक मंगलवार को एक सत्र लिया जाता है। प्रत्येक शाला से 2 शिक्षकों को (एक पुरुष एवं एक महिला) हेल्थ एवं वेलनेस एंबेसेडर के रूप में प्रशिक्षित किया गया है। राज्य में अब तक लगभग 19 हजार शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। यह प्रशिक्षित शिक्षक हेल्थ एंड वैलनेस एम्बेसडर कक्षाओं में जीवन कौशल गतिविधियों का संचालन करते हैं। उमंग दिवस के कार्यक्रम में विभिन्न विभाग के अधिकारी एवं मोटिवेशनल वक्ताओं को भी शिक्षण संस्था में आमंत्रित किया जाएगा, जिससे विद्यार्थी आगे बढ़ाने के लिए और उत्साह पूर्वक कदम बढ़ाने के लिए प्रेरित हो सकें। इस कार्यक्रम में न केवल विद्यार्थियों को बल्कि शाला में उपस्थित प्रत्येक शिक्षक को भी इस विषय से अवगत होने का मौका मिलेगा।  

भारत-यूरोपीय संघ में बढ़ी साझेदारी: वैश्विक आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त रणनीति

ब्रसेल्स भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) ने ब्रसेल्स में आयोजित आतंकवाद-रोधी संयुक्त कार्यकारी समूह की 15वीं बैठक में आतंकवाद के सभी स्वरूपों और खासतौर पर सीमा-पार आतंकवाद की कड़ी निंदा की। दोनों पक्षों ने इस बात पर जोर दिया कि आतंकवाद एक वैश्विक समस्या है और इससे निपटने के लिए सतत एवं व्यापक वैश्विक सहयोग की जरूरत है। बैठक की सह-अध्यक्षता यूरोपीय बाहरी कार्य सेवा (ईईएएस) के सुरक्षा एवं रक्षा नीति निदेशक मचीज स्टाडेजेक और भारत के विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव (आतंकवाद-रोधी) के. डी. देवाल ने की। विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, “भारत और ईयू ने संयुक्त राष्ट्र, ग्लोबल काउंटर टेररिज्म फोरम और एफएटीएफ जैसे बहुपक्षीय मंचों में सहयोग की अहमियत पर बल दिया। बैठक के दौरान घरेलू, क्षेत्रीय और वैश्विक खतरे के आकलनों पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। प्रतिभागियों ने कहा कि विश्व के विभिन्न क्षेत्रों में अस्थिरता और संघर्ष आतंकवाद व उग्रवाद को बढ़ावा देते हैं।” बैठक में आतंकवाद के वित्त पोषण को रोकने, ऑनलाइन कट्टरपंथ की रोकथाम, आतंकियों और आतंकी संगठनों की सूचीबद्धता में सहयोग तथा नई उभरती प्रौद्योगिकियों के दुष्प्रभाव जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने भविष्य में आतंकवाद-रोधी सहयोग को और मजबूत करने के रास्तों की पहचान की। अगली बैठक नई दिल्ली में पारस्परिक सहमति से तय तिथि पर होगी। भारत और ईयू ने 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले की भी निंदा की। ईयू ने निर्दोष नागरिकों की हत्या पर भारत के प्रति संवेदना व्यक्त की। उल्लेखनीय है कि हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन से फोन पर बातचीत की थी। बातचीत में भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते को जल्द निष्कर्ष तक पहुंचाने और भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक कॉरिडोर के क्रियान्वयन पर सहमति जताई गई। दोनों नेताओं ने व्यापार, प्रौद्योगिकी, निवेश, नवाचार, सतत विकास, रक्षा, सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला जैसे क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों में हुई प्रगति का स्वागत किया। पीएम मोदी ने दोनों नेताओं को भारत-ईयू शिखर सम्मेलन के लिए भारत आने का आमंत्रण दिया। प्रधानमंत्री कार्यालय के बयान में कहा गया, “दुनिया की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक शक्तियों के रूप में भारत और यूरोपीय संघ के बीच भरोसे, साझा मूल्यों और साझा दृष्टिकोण पर आधारित मजबूत संबंध हैं। नेताओं ने वैश्विक मुद्दों से निपटने, स्थिरता लाने और नियम-आधारित व्यवस्था को बढ़ावा देने में भारत-ईयू रणनीतिक साझेदारी की अहम भूमिका को रेखांकित किया।” बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने यूक्रेन संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान और जल्द से जल्द शांति एवं स्थिरता बहाल करने के प्रति भारत के निरंतर समर्थन को दोहराया।

माँ नर्मदा की उद्गम स्थली में कपिलधारा पहुँच मार्ग का भूमिपूजन

गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होगा : लोक निर्माण मंत्री सिंह भोपाल  लोक निर्माण मंत्री श्री राकेश सिंह ने अमरकंटक में कपिलधारा पहुँच मार्ग का भूमिपूजन किया। माँ नर्मदा की उद्गम स्थली को नमन करते हुए उन्होंने कहा कि यह मार्ग केवल सड़क नहीं बल्कि श्रद्धा और आस्था को आधुनिकता से जोड़ने वाला पथ बनेगा। कपिलधारा जलप्रपात, जिसे ऋषि कपिल की तपोभूमि माना जाता है, हर वर्ष लाखों श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करता है। मंत्री श्री सिंह ने बताया कि पाँच किलोमीटर लंबे इस नए पहुँच मार्ग को ऐसा रूप दिया जाएगा, जिससे यह केवल सड़क न लगकर एक पर्यटन स्थल जैसा अनुभव प्रदान करेगा।इस दो लेन चौड़े मार्ग पर पैदल यात्रियों के लिए फुटपाथ, छायादार आश्रय स्थल, कम्पोस्ट शौचालय और सौर ऊर्जा से संचालित दीपक लगाए जाएँगे। मार्ग की बाउंड्री पर कपिल मुनि की तपस्या, राजा सगर के पुत्रों और माँ गंगा के अवतरण की गाथाएँ उकेरी जाएँगी। मंत्री श्री सिंह ने कहा कि यह मॉडल भीमबेटका और भोजपुर जैसे स्थलों पर भी लागू किया जाएगा। समीक्षा बैठक में विभागीय निर्णय लोक निर्माण विभाग की समीक्षा बैठक में प्रदेश के मुख्य अभियंता उपस्थित रहे। बैठक में विभागीय प्रस्तुतियाँ दी गईं। मंत्री श्री सिंह ने गुणवत्ता पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि किसी भी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि कुछ अधिकारियों ने औचक निरीक्षणों में सख़्ती दिखाई है, वहीं कुछ ने बिल्कुल भी कार्रवाई नहीं की। यह रवैया अब स्वीकार्य नहीं होगा। उन्होंने घोषणा की कि अच्छा काम करने वालों को सम्मान और लापरवाही करने वालों को दंड मिलेगा। लोक कल्याण सरोवर योजना पर जोर बैठक में लोक कल्याण सरोवर योजना पर चर्चा हुई। मंत्री श्री सिंह ने निर्देश दिए कि प्रत्येक परिक्षेत्र में 10-10 सरोवरों का चयन कर मुख्य अभियंता स्वयं उनका भौतिक निरीक्षण करें। इन सरोवरों पर सूचना पट्टिकाएँ लगाई जाएँ और इन्हें स्थानीय समाज के लिए उपयोगी धरोहर बनाया जाए। टेक्नोलॉजी आधारित नवाचार मंत्री श्री सिंह ने बताया कि 18 से 20 सितम्बर तक प्रदेश की सभी सड़कों और पुलों का सर्वेक्षण रोड़ ट्रेकिंग एंड सर्वे मोबाइल ऐप से किया जाएगा। यह ऐप मुख्यमंत्री द्वारा अभियंता दिवस पर लोकार्पित किए जाने का प्रस्ताव है। भास्कराचार्य संस्थान द्वारा तैयार मास्टर प्लान रोड मैपिंग टूल पर भी चर्चा हुई, जिसे 1 नवम्बर को मध्यप्रदेश स्थापना दिवस पर लॉन्च करने का लक्ष्य रखा गया है। मंत्री श्री सिंह ने कहा कि इस टूल से सड़क योजना वैज्ञानिक और डेटा आधारित होगी। नर्मदा परिक्रमा पथ का विकास बैठक में नर्मदा परिक्रमा पथ पर प्रस्तुतीकरण भी दिया गया। मंत्री श्री सिंह ने कहा कि यह पथ श्रद्धालुओं के लिए केवल एक रास्ता नहीं होगा, बल्कि आस्था और संस्कृति का अनुभव बनेगा। इसमें ठहरने, भोजन और शौचालय जैसी सुविधाएँ होंगी। घाटों और मंदिरों का जीर्णोद्धार होगा तथा पूरी योजना ईको-फ्रेंडली सिद्धांतों पर आधारित रहेगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि संत समुदाय और स्थानीय समाज की राय लेकर ही इस योजना को अंतिम रूप दिया जाएगा। पारदर्शिता और जवाबदेही पर बल समीक्षा बैठक में मंत्री श्री सिंह ने कहा कि विभाग की प्राथमिकता पारदर्शिता और जवाबदेही है। उन्होंने कहा कि “जनता को हर सड़क और भवन में गुणवत्ता और पारदर्शिता का अनुभव होना चाहिए।  

प्रधानमंत्री मोदी के धार आगमन पर स्वास्थ्य गतिविधियों की तैयारी की उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने की समीक्षा

भोपाल प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के प्रस्तावित धार आगमन पर उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में प्रदेश में स्वास्थ्य संस्थानों द्वारा की जाने वाली गतिविधियों की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कहा कि सभी कार्य योजनाबद्ध रूप से किए जाएँ ताकि विशेष स्वास्थ्य सेवाओं से अधिक से अधिक लक्षित समूह लाभान्वित हो सके। उन्होंने आगामी 17 सितंबर से “स्वस्थ नारी सशक्त परिवार अभियान” पखवाड़े को सुव्यवस्थित रूप से आयोजित कर अधिक से अधिक नागरिकों को लाभान्वित करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि अभियान की सतत मॉनिटरिंग की व्यवस्था की जाये। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में मेडिकल टीचर्स की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सेवा शर्तों, मानदेय और अन्य सुविधाओं की व्यवस्था करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं और व्यवस्थाओं से संबंधित अन्य महत्वपूर्ण विषयों की समीक्षा की और आवश्यक निर्देश दिए। बैठक में प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा श्री संदीप यादव, आयुक्त चिकित्सा शिक्षा श्री तरुण राठी, मिशन संचालक डॉ. सलोनी सिडाना और सीईओ आयुष्मान मध्यप्रदेश डॉ. योगेश भरसट उपस्थित थे।  

पौधे लगाने का काम शुरू: सिंगरौली, खंडवा, रायसेन और देवास में लक्ष्य से अधिक स्वीकृति

भोपाल प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के एक पेड़ मां के नाम अभियान 2.0 से प्रेरित होकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश में मनरेगा योजना के अंतर्गत एक बगिया मां के नाम से परियोजना शुरू की है। इसके माध्यम से स्व-सहायता समूह की महिलाओं को आर्थिक रूप से समृद्ध बनाया जा रहा है। समूह की महिलाओं की निजी भूमि पर फलदार पौधे लगाए जा रहे हैं। फलोद्यान की बगिया विकसित करने में प्रदेश में सिंगरौली, खंडवा, रायसेन और देवास जिलों की महिलाएं सबसे अधिक जागरूक दिखाई दे रही हैं। इन जिलों की महिलाओं ने निर्धारित लक्ष्य को पूर्ण कर लिया है। सिंगरौली जिले में समूह की 300 महिलाओं को परियोजना का लाभ दिए जाने का लक्ष्य रखा गया था, जबकि यहां 571 महिलाओं को फलदार पौधे लगाने की स्वीकृति मिली है। इसी तरह से खंडवा जिले में 700 की जगह 1187, रायसेन जिले में 700 की जगह 1178 और देवास जिले में 600 की जगह 751 महिलाओं को फलोद्यान की बगिया लगाने की स्वीकृति मिली है। अब तक 15 हजार 377 महिलाओं को मिली स्वीकृति प्रदेश में समूह की 31 हजार 300 महिलाओं को एक बगिया मां के नाम परियोजना का लाभ दिए जाने का लक्ष्य रखा गया है। अब तक 15 हजार 377 महिलाओं को फलोद्यान की बगिया लगाने की स्वीकृति भी मिल चुकी है। साथ ही इन महिलाओं की निजी जमीन पर विभिन्न प्रकार के फलदार पौधों को लगाने का कार्य भी शुरू हो गया है। पौधों की सुरक्षा से लेकर कटीले तार की फेंसिंग, पौधे खरीदने, खाद, गड्ढे खोदने के साथ ही सिंचाई के लिए 50 हजार लीटर का जल कुंड बनाने के लिए राशि भी उपलब्ध कराई जा रही है। ड्रोन से निगरानी एक बगिया मां के नाम परियोजना अंतर्गत किए जा रहे पौधरोपण की मध्यप्रदेश इलेक्ट्रिक डेव्हलेपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड द्वारा ड्रोन के माध्यम से मॉनिटरिंग की जाएगी, ताकि चयनित जमीन, गड्ढे सहित पौधों की यथास्थिति के बारे में आसानी से जानकारी प्राप्त हो सकें। सिपरी सॉफ्टवेयर की मदद से किया जा रहा पौधरोपण का कार्य प्रदेश में पहली बार पौधरोपण का कार्य सिपरी सॉफ्टवेयर के माध्यम से किया जा रहा है। जलवायु के साथ ही किस जमीन पर कौन सा फलदार पौधा उपयोगी है, पौधा कब और किस समय लगाया जाएगा, पौधों की सिंचाई के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी कहां पर उपलब्ध है, यह सब वैज्ञानिक पद्धति (सिपरी सॉफ्टवेयर) के माध्यम से पता लगाया जा रहा है। साथ ही जमीन के उपयोगी नहीं पाए जाने पर पौधरोपण का कार्य नहीं होगा। । 30 लाख लगाए जाएंगे फलदार पौधे प्रदेश में “एक बगिया मां के नाम’’ परियोजना अंतर्गत 31 हजार 300 स्व-सहायता समूह की महिलाओं की निजी जमीन पर 30 लाख से अधिक फलदार पौधे लगाएं जाएंगे, जो समूह की महिलाओं की आर्थिक उन्नति का आधार बनेंगे। प्रथम 3 जिले, 10 जनपद और 25 ग्राम पंचायत को मिलेगा पुरस्कार एक बगिया मां के नाम परियोजना अंतर्गत उत्कृष्ट कार्य करने वाले प्रथम 3 जिले, 10 जनपद पंचायत और 25 ग्राम पंचायत को पुरस्कृत किया जाएगा। इसके साथ ही पर्यवेक्षण के लिए अलग से एक डैशबोर्ड बनाया गया है। इसके माध्यम से प्रतिदिन किस जिले में कितना कार्य हो रहा है, इसकी निगरानी की जा रही है। एक बगिया मां के नाम परियोजना का लाभ लेने के लिए चयनित हुई समूह की महिला के पास बगिया लगाने के लिए भूमि भी निर्धारित की गई है। चयनित महिला के पास न्यूनतम 0.5 डिसमिल या अधिकतम एक एकड़ जमीन होना अनिवार्य है। क्रियान्वयन में टॉप-10 जिले व ब्लॉक एक बगिया मां के नाम परियोजना के क्रियान्वयन में 10 सितंबर की स्थिति में 10 जिले आगे हैं। इसमें सिंगरौली, खंडवा, रायसेन, देवास, छिंदवाड़ा, आगर मालवा, बैतूल, खरगोन, सागर और बड़वानी जिला शामिल है। वहीं टॉप 10 ब्लॉक में चितरंगी, खंडवा, पंधाना, खालवा, बैढ़न, छैगांव माखन, पुनासा, देवसर, हरसूद और मुलताई शामिल है।  

ईंधन पर GST लाना अभी संभव नहीं, सरकार ने साफ किए संकेत

नई दिल्ली पेट्रोल और डीजल को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के दायरे में लाने पर केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) के चेयरमैन संजय कुमार अग्रवाल ने कहा कि फिलहाल इन्हें जीएसटी के अंतर्गत लाना संभव नहीं है। मिडिया की ओर से सवाल पूछे जाने पर कि क्या पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे में लाया जाना चाहिए, अग्रवाल ने कहा कि पेट्रोल और डीजल पर फिलहाल केंद्रीय उत्पाद शुल्क और मूल्य वर्धित कर (वैट) लगता है और इन दोनों पेट्रोलियम पदार्थों से राज्यों को वैट के रूप में और केंद्र सरकार को केंद्रीय उत्पाद शुल्क के रूप में अच्छा-खासा राजस्व प्राप्त होता है। उन्होंने आगे कहा, "राजस्व संबंधी प्रभावों को देखते हुए, इन वस्तुओं को फिलहाल जीएसटी के दायरे में लाना संभव नहीं है।" सीबीआईसी चेयरमैन ने यह बयान ऐसे समय पर दिया है जब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले हफ्ते कहा था कि केंद्र सरकार ने जानबूझकर पेट्रोल और डीजल को जीएसटी परिषद के प्रस्ताव में शामिल नहीं किया है। उस दौरान वित्त मंत्री ने कहा था कि कानूनी तौर पर हम तैयार हैं, लेकिन यह फैसला राज्यों को लेना होगा। वित्त मंत्री ने अपने बयान में कहा था कि पेट्रोल और डीजल को जीएसटी लागू होने के समय ही शामिल किया जाना तय था, "मुझे याद है कि मेरे दिवंगत पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इस बारे में बात की थी।" वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा, "राज्यों की सहमति के बाद, उन्हें परिषद में कराधान की दर तय करनी होगी। एक बार यह फैसला हो जाने के बाद, इसे कानून में शामिल कर लिया जाएगा।" जुलाई 2017 में लागू हुए जीएसटी में पेट्रोल, डीजल और मादक पेय पदार्थों जैसे उत्पादों को तब से इसके दायरे से बाहर रखा गया था। ये वस्तुएं केंद्र और राज्य सरकारों, दोनों के लिए उत्पाद शुल्क और वैट के माध्यम से राजस्व का प्रमुख स्रोत हैं। कई राज्यों के लिए, ये उनके कर राजस्व में 25-30 प्रतिशत से अधिक का योगदान करते हैं।