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ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम, ओमान-गुजरात पाइपलाइन से बदलेगा भारत का गैस नेटवर्क

अहमदाबाद  वेस्‍ट एशिया में तनाव के बीच एनर्जी संकट ने दुनिया को सतर्क कर दिया है. खासकर भारत जैसे देश, जो मिडिल ईस्‍ट से सप्‍लाई रुकने के बाद सबसे ज्‍यादा प्रभातिव हुए है. इसी के मद्देनजर, भारत तेजी से अपने एनर्जी सप्‍लाई को निर्बाध करने में जुटा हुआ है. अब ओमान से गुजरात के बीच एक लंबी पाइपलाइन बिछने जा रही है।  यह अरब सागर के पार लगभग 2,000 किलोमीटर लंबी एक गहरे समुद्र में बिछाई जाने वाली गैस पाइपलाइन होगी. यह ओमान और गुजरात को जोड़ने की लंबे समय से चर्चित योजना है, क्योंकि भारत तेजी से अनिश्चित भू-राजनीतिक तना के बीच अधिक विश्वसनीय ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा है।  पिछले तीन दशकों में इस परियोजना की कई बार समीक्षा की गई है, लेकिन उच्च लागत, तकनीकी बाधाओं और व्यावसायिक  दिक्‍कतों के कारण यह योजना आगे नहीं बढ़ पाई. अब, इस प्रस्ताव को सपोर्ट करने वाले प्राइवेट ग्रुप SAGE द्वारा मार्ग और इसकी इंजीनियरिंग चुनौतियों का वैल्‍यूवेशन करने के लिए समुद्र तल सर्वे के साथ-साथ तकनीकी और वित्तीय अध्ययन पूरा करने के बाद इस परियोजना को नई गति मिली है।   कितना आएगा खर्च?  अनुमान है कि इस प्रोजेक्‍ट के तहत करीब  40,000 करोड़ रुपये का खर्च आएगा. यह ओमान-गुजरात डीप-सी गैस पाइपलाइन, अब तक के सबसे गहरे समुद्री मार्गों में से एक होगी. यह नेचुरल गैस की निर्बाध सप्‍लाई करेगी. अगर ये पाइपलाइन बन जाती है, तो इससे खाड़ी देशों और भारत के बीच एक सीधा ऊर्जा गलियारा स्थापित हो सकता है, जिससे देश की होर्मुज जलडमरूमध्‍य से गुजरने वाले समुद्री मार्गों पर निर्भरता कम हो जाएगी।  यह परियोजना क्यों महत्वपूर्ण है? भारत आयातित ऊर्जा पर काफी हद तक निर्भर है. देश अपनी ज्‍यादातर कच्चे तेल की जरूरतों का आयात करता है और प्राकृतिक गैस, विशेष रूप से एलएनजी की विदेशी आपूर्ति पर काफी हद तक निर्भर है. इन आयातों का एक बड़ा हिस्‍सदा खाड़ी देशों से आता है और फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाले संकरे मार्ग, होर्मुज के माध्‍यम से भारत पहुंचता है. इस मार्ग पर किसी भी तरह की रुकावट ग्‍लोबल मार्केट्स पर तुरंत असर डाल सकता है. इससे शिपिंग कॉस्‍ट, ईंधनी की कीमतें और आप‍ूर्ति चेन प्रभावित हो सकती हैं।  कैसी दिखेगी ये पाइपलाइन?  प्रस्‍तावित प्रोजेक्‍ट, अरब सागर में फैले एक पानी के नीचे के नेटवर्क के माध्‍यम से ओमान को सीधे गुजरात से जोड़ेगी. इसकी सबसे खास बात, इसकी गहराई है. मार्ग का कुछ हिस्सा समुद्र तल से 3,000 मीटर से अधिक नीचे होने की संभावना है, जिससे यह अब तक प्रस्तावित सबसे गहरी समुद्री पाइपलाइन परियोजनाओं में से एक बन जाएगी. इतनी गहराई ज्‍यादातर अपतटीय ऊर्जा परियोजनाओं में पाई जाने वाली गहराइयों से कहीं अधिक है और इसके लिए अत्यधिक विशेष इंजीनियरिंग समाधानों की आवश्यकता होगी।  गैस आने में कितना होगा खर्च?  इस पाइपलाइन के माध्यम से दीर्घकालिक आपूर्ति समझौतों के तहत प्राकृतिक गैस का परिवहन होने की उम्मीद है, जिससे संभावित रूप से भारत को अपने ऊर्जा सोर्स में विविधता लाने में मदद मिलेगी. साथ ही ओमान को एक स्थिर निर्यात बाजार भी मिलेगा. परियोजना प्रस्तावों के अनुसार, परिवहन लागत 2-2.25 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू के बीच हो सकती है. हालांकि अंतिम लागत फंडिंग व्यवस्था, निर्माण व्यय और भविष्य में गैस की कीमतों पर निर्भर करेगी। 

भारत ने जोजिला टनल में रचा इतिहास, अब सालभर आसान होगा लद्दाख और श्रीनगर का सफर

 श्रीनगर जम्मू-कश्मीर को लद्दाख से जोड़ने वाली 'जोजिला सुरंग' का अंतिम 'ब्रेकथ्रू' आज पूरा हो गया है. केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा इस ऐतिहासिक पल के गवाह बने।  इस कामयाबी के साथ ही कश्मीर और लद्दाख के बीच ऑल-वेदर रास्ता बनने का सालों पुराना सपना हकीकत के बेहद करीब पहुंच गया है. इस मौके पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एलजी मनोज सिन्हा ने खुशी जाहिर की. वहीं, नितिन गडकरी ने भी इस टनल की अहमियत बताई।  एलजी मनोज सिन्हा ने कहा, 'ये एक ऐतिहासिक तारीख है कि आज लद्दाख के लोगों को ऑल वेदर कनेक्टिविटी के लिए अंतिम चरण के पड़ाव को मंत्री जी (नितिन गडकरी) ने पूरा किया. मैं लद्दाख और जम्मू-कश्मीर के लोगों को दिल से बधाई देता हूं।  मनोज सिन्हा ने इंजीनियरों को दी बधाई सिन्हा ने सुरंग के निर्माण में जुटे कार्यबलों की तारीफ करते हुए आगे कहा, 'मैं इस प्रोजेक्ट में काम करने वाले सभी इंजीनियरों को बधाई देता हूं, जिन्होंने इतनी ऊंचाई पर मुश्किल परिस्थितियों में काम किया है. हम सभी जानते हैं कि कनेक्टिविटी से ही विकास होता है. पिछले 12 सालों में इस क्षेत्र में बहुत काम हुआ है।  एशिया ही नहीं, दुनिया के इतिहास में नंबर-1 बनेगी ये टनल- गडकरी केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इस ब्रेकथ्रू को भारतीय इंजीनियरिंग के इतिहास का एक सुनहरा पन्ना बताया. उन्होंने कहा, 'आज का दिन भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर के इतिहास का सुनहरा दिन है. क्योंकि ये टनल 14 किलोमीटर लंबी है और स्टेट ऑफ आर्ट है. मुझे अभी बताया गया कि अब तक हम इसे एशिया का सबसे लंबा टनल कह रहे थे. लेकिन ये वर्ल्ड के इतिहास में भी नंबर 1 पर जाएगा, ये जानकर मुझे बहुत खुशी है. ये लेह और लद्दाख के लोगों के लिए लाइफलाइन है।  कंपाने वाली ठंड में इंजीनियर्स और मजदूरों ने किया कमाल केंद्रीय मंत्री ने सुरंग बनाने के दौरान आने वाली प्राकृतिक चुनौतियों और टीम की कड़ी मेहनत को भी सराहा. उन्होंने बताया, 'यहां की ऊंचाई लगभग 3 हजार मीटर है. जब काम हो रहा था, तो यहां -4 डिग्री या उससे भी कम तापमान के हालात थे. ऐसी कड़ाके की ठंड में हमारे इंजीनियर्स, मजदूर, ठेकेदारों और डॉक्टर्स ने बहुत मेहनत से काम किया है।  गडकरी ने आहे बताया कि ये टनल वर्ल्ड क्लास सेफ्टी स्टैंडर्ड्स के लिहाज से बनाई गई है और इससे लद्दाख-लेह को ऑल वेदर कनेक्टिविटी मिलेगी।  जोजिला सुरंग की अहमियत इस अंतिम ब्रेकथ्रू के साथ ही पहाड़ के दोनों छोर अब आपस में पूरी तरह मिल गए हैं. अब सुरंग के अंदर सड़क बनाने, लाइटिंग, सीसीटीवी कैमरे और आधुनिक सुरक्षा प्रणालियों को लगाने का काम तेजी से पूरा हो पाएगा. इस सुरंग के पूरी तरह चालू होने से सर्दियों में लद्दाख का देश से संपर्क कटना हमेशा के लिए बंद हो जाएगा। 

अगले 48 घंटे बेहद अहम! IMD की चेतावनी, कई राज्यों में मूसलाधार बारिश और मौसम का बड़ा बदलाव

नई दिल्ली देश में मौसम का रुख एक बार फिर पूरी तरह बदल चुका है. केरल में दस्तक देने के बाद मानसून ने महाराष्ट्र में अपनी मजबूत एंट्री कर ली है. यह एंट्री भले ही तय समय के आसपास हुई हो, लेकिन इसके असर ने पूरे देश को अलर्ट मोड पर ला दिया है. एक तरफ जहां किसानों के चेहरे पर राहत की उम्मीद दिख रही है, वहीं दूसरी तरफ कई राज्यों में मौसम विभाग की चेतावनियों ने चिंता बढ़ा दी है।  IMD के ताजा अपडेट के मुताबिक आने वाले दिनों में मानसून तेजी से आगे बढ़ेगा और कई राज्यों को अपनी चपेट में लेगा. अरब सागर से लेकर बंगाल की खाड़ी तक मौसम प्रणाली सक्रिय हो चुकी है, जिसका सीधा असर उत्तर, पूर्व और दक्षिण भारत में देखने को मिलेगा।  अल-नीनो की परिस्थितियों के बावजूद दक्षिण-पश्चिम मॉनसून मूसलाधार बारिश करवाता हुआ तेजी से आगे बढ़ रहा है। मॉनसून अब महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और पूर्वोत्तर के सभी राज्यों को कवर कर चुका है। मौसम विभाग ने कहा है कि आने वाले सात दिन कई राज्यों पर भारी पड़ सकते हैं। केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु, सिक्किम, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, नागालैंड, मेघालय और पश्चिम बंगाल के उप-हिमालयी क्षेत्रों में भारी बारिश होने की संभावना है। वहीं IMD ने उत्तर प्रदेश, बिहार और दिल्ली में भी पश्चिमी विक्षोभ के असर और बारिश का अलर्ट जारी किया है। 11 से 12 जून तक उत्तर भारत में बारिश और ओलावृष्टि हो सकती है। इन राज्यों में होने वाली है मॉनसून की एंट्री मॉनसून अब तेजी से आगे बढ़ते हुए पूर्वोत्तर के राज्यों के बचे हुए हिस्से को कवर करने वाला है। वहीं दो से तीन दिन में ही यह ओडिशा, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल को भी पूरी तरह से कवर कर लेगा। रिपोर्ट के मुताबिक 5 जुलाई तक मॉनसून पूरे देश को कवर करेगा। महाराष्ट्र के कई हिस्सों में भी मॉनसून पहुंच चुका है और झमाझम बारिश हो रही है। पश्चिमी विक्षोभ कराएगा बारिश मौसम विभाग के अपडेट के मुताबिक पश्चिमी हिमालयी इलाके में सक्रिय होने वाला पश्चिमी विक्षोभ अगले तीन से चार दिन में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में भी बारिश करवाने वाला है। इन राज्यों में 9 से 14 जून तक हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। इसके अलावा 10 से 14 जून के बीच पूर्वी उत्तर प्रदेश, दिल्ली, चंडीगढ़, हरियाणा, पंजाब और पश्चिमी राजस्थान में भी बारिश हो सकती है। जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, गिलगित-बाल्टिस्तान में 11 और 12 जून को तेज हवाओँ के साथ बारिश हो सकती है। दिल्ली, पंजाब और हरियाणा में 11 और 12 जून को धूलभरी आंधी चल सकती है। मौसम विभाग के मुताबिक हवाओँ की गति 50 से 60 किमी प्रतिघंटे तक पहुंचने की संभावना है। यूपी-बिहार का मौसम मौसम विभाग के मुताबिक 10 से 14 जून के बीच उत्तर प्रदेश में बारिश का दौर शुरू होगा। इसके अलावा मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में 9 से 14 जून के बीच मध्यम से भारी बारिश हो सकती है। 10 जून के बाद बिहार के पटना, सिवान, भागलपुर, मुंगेर जिलों में मध्यम बारिश हो सकती है। झारखंड, बिहार और गंगा के आसपास के क्षेत्रों में 10 से 15 जून के बीच आंधी के साथ तेज बारिश की संभावना है। दिल्ली का मौसम आईएमडी के अनुसार, हालांकि बारिश से कुछ स्थानों पर थोड़ी राहत मिली। सुबह साढ़े आठ बजे तक 24 घंटे की कुल वर्षा के आंकड़ों के अनुसार, केवल पालम और आयानगर में हल्की बारिश हुई लेकिन सुबह साढ़े आठ बजे से शाम साढ़े पांच बजे के बीच किसी भी वेधशाला में बारिश दर्ज नहीं की गई। आईएमडी के अनुसार, 10 जून तक अधिकतम तापमान धीरे-धीरे बढ़कर 43 डिग्री तक पहुंच सकता है, और उसके बाद 11 जून से आंधी की वजह से तापमान में गिरावट आ सकती है। देशभर में मौसम का सिस्टम एक्टिव, तेज हवाओं और बारिश का खतरा     मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार वर्तमान में कई चक्रवाती परिसंचरण अलग-अलग हिस्सों में सक्रिय हैं. यही वजह है कि मौसम का मिजाज बेहद अस्थिर हो गया है. कहीं तेज धूप के बाद अचानक बारिश हो रही है तो कहीं आंधी-तूफान ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं।      अगले 2 से 3 दिनों में मानसून के और आगे बढ़ने की संभावना है. इसके बाद यह छत्तीसगढ़, ओडिशा, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम तक पहुंच सकता है.हवाओं की गति कई जगहों पर 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने का अनुमान है, जिससे पेड़ गिरने और बिजली आपूर्ति बाधित होने का खतरा बढ़ गया है।  दिल्ली-NCR में मौसम का बदलाव और तेज हवाओं का असर दिल्ली-NCR में मौसम ने एक बार फिर करवट ली है. 7 जून को आंशिक बादल छाए रहने के साथ तेज हवाओं और बारिश की संभावना जताई गई है. अधिकतम तापमान 38 से 40 डिग्री के बीच रह सकता है, लेकिन आंधी और बारिश के चलते शाम तक राहत मिल सकती है. मौसम विभाग ने यहां 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की चेतावनी दी है. कई इलाकों में अचानक मौसम बिगड़ सकता है, जिससे यातायात और जनजीवन प्रभावित होने की संभावना है।  उत्तर प्रदेश में मौसम का बदलता रुख और आंधी-तूफान का अलर्ट उत्तर प्रदेश में मौसम अगले कुछ दिनों तक काफी सक्रिय रहने वाला है. पूर्वी और पश्चिमी दोनों हिस्सों में रुक-रुककर बारिश और गरज-चमक की स्थिति बनी रहेगी. 9 से 12 जून के बीच कई जिलों में तेज बारिश की संभावना है. IMD ने राज्य के कई जिलों में 70 से 75 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चलने की चेतावनी दी है. लखनऊ, वाराणसी, प्रयागराज, कानपुर और मेरठ जैसे शहरों में मौसम अचानक बदल सकता है. गर्मी और उमस के बीच यह बारिश कुछ राहत भी दे सकती है, लेकिन बिजली गिरने का खतरा बना रहेगा।  बिहार में मौसम का मिजाज और बारिश की गतिविधियां बिहार में 7 और 8 जून को मौसम काफी सक्रिय रहने वाला है. कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ आंधी-तूफान की स्थिति बन सकती है. पटना, गया, दरभंगा, पूर्णिया और भागलपुर जैसे जिलों में तेज हवाएं चलने की संभावना है. 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं, … Read more

मृत्यु के बाद 13 दिन का रहस्य और तुलसी का महत्व, गरुड़ पुराण में छिपा जीवन का सच

मृत्यु एक ऐसा शब्द है, जो अपने साथ हमेशा एक गहरा सन्नाटा लेकर आता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि प्राण निकलने के बाद वास्तव में क्या होता है? यह सफर जितना भयावह प्रतीत होता है, उतना ही रहस्यमय और कहीं-कहीं अद्भुत भी है. आज हम इसी विषय को समझने के लिए प्राचीन ग्रंथ गरुड़ पुराण की ओर चलते हैं, जहां मृत्यु, कर्म और आत्मा की यात्रा का विस्तृत वर्णन मिलता है. यह ग्रंथ लगभग 19,000 श्लोकों का विशाल ज्ञान भंडार है, जिसमें भगवान विष्णु और पक्षीराज गरुड़ के बीच संवाद के माध्यम से मृत्यु के बाद की दुनिया को समझाया गया है. गरुड़ पुराण के अनुसार, मृत्यु केवल एक क्षण नहीं, बल्कि एक प्रक्रिया है. जब शरीर से प्राण निकलते हैं, तो आत्मा एक नए रूप को धारण करती है. यह शरीर अंगूठे के आकार का होता है और आगे की यात्रा का माध्यम बनता है. उस क्षण का अनुभव इतना तीव्र होता है मानो एक साथ सैकड़ों बिच्छुओं ने डंक मार दिया हो. इसी अवस्था में यमदूत आत्मा को अपने साथ ले जाते हैं और यहीं से शुरू होती है यमलोक की कठिन यात्रा. यह मार्ग बेहद कष्टदायक बताया गया है जैसे तपती रेत, कंटीले जंगल, भयावह हवाएं और असहनीय प्यास-भूख. लेकिन इस यात्रा में आत्मा पूरी तरह अकेली नहीं होती है. तुलसी का पौधा लगाने का महत्व दाह संस्कार के बाद परिवार के लिए कुछ नियम निर्धारित किए गए हैं जैसे श्मशान से लौटते समय पीछे मुड़कर न देखना. यह प्रतीक है मोह से मुक्ति का, ताकि आत्मा पुनः इस संसार में बंध न जाए. नीम के पत्ते चबाना या अग्नि के ऊपर से गुजरना नकारात्मक ऊर्जा से बचाव के उपाय माने जाते हैं. इस पूरे अंधकारमय वर्णन के बीच एक अत्यंत पवित्र तत्व सामने आता है और वो है तुलसी. गरुड़ पुराण में तुलसी को आत्मा की रक्षा करने वाली दिव्य शक्ति माना गया है. मृत्यु के समय तुलसी का पौधा पास रखना, गंगाजल के साथ तुलसी पत्ता देना, या चिता में तुलसी की लकड़ी का प्रयोग करना, ये सभी उपाय आत्मा को शांति और मोक्ष की ओर ले जाने वाले माने गए हैं. कहा जाता है कि जिस आत्मा पर तुलसी की कृपा होती है, उसके पास यमदूत भी नहीं पहुंच पाते हैं. वह सीधे विष्णुधाम की ओर प्रस्थान करता है. यही कारण है कि अंतिम संस्कार के बाद घर में तुलसी का पौधा लगाना शुभ माना जाता है. तुलसी का पौधा वातावरण को शुद्ध करता है और शोक की ऊर्जा को संतुलित करता है. अगर गहराई से देखा जाए, तो गरुड़ पुराण के ये वर्णन डराने के लिए नहीं हैं, बल्कि जीवन का सार समझाने के लिए हैं. यह हमें याद दिलाते हैं कि हमारे कर्म ही हमारे भविष्य का मार्ग तय करते हैं. इस जीवन में भी और उसके बाद भी. 13 दिनों का महत्व गरुड़ पुराण के मुताबिक, मृत्यु के बाद के 13 दिन अत्यंत महत्वपूर्ण माने गए हैं. इस दौरान किए जाने वाले पिंडदान से आत्मा के नए शरीर का निर्माण होता है. पहले दिन सिर, फिर क्रमशः आंख, कान, गर्दन, छाती, पेट और अंत में दसवें दिन पूरा शरीर निर्मित होता है. तभी आत्मा को कुछ राहत मिलती है. अंत्येष्टि संस्कार भी केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि गहरा आध्यात्मिक विज्ञान है. अग्नि को एक रक्षक माना गया है, जो आत्मा को सुरक्षित आगे बढ़ने में सहायता करती है. शरीर के नौ द्वारों को पवित्र करने के लिए उनमें सोने के अंश रखना भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा है.

6 महीने के बच्चों की डाइट गाइड: लिक्विड फूड से करें सॉलिड फूड की शुरुआत

नवजात बच्चों को आमतौर पर 6 महीने के बाद ही धीरे-धीरे सॉलिड फूड खिलाना शुरू किया जाता है. जब किसी का बच्चा 6 महीने का हो जाता है तो पेरेंट्स के मन में सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि अब उसे मां के दूध के अलावा खाने में क्या दिया जाए? इस उम्र में बच्चे का पाचन तंत्र नाजुक होता है इसलिए शुरुआत हमेशा हल्की और आसानी से पचने वाली चीजों से करनी चाहिए. डॉक्टर्स के मुताबिक, शिशु को सीधे ठोस आहार देने के बजाय लिक्विड डाइट से शुरुआत करना सबसे सुरक्षित और सही तरीका माना जाता है. तो बच्चे के लिए क्या फूड ऑपशंस हो सकते हैं, इस बारे में जान लीजिए. लिक्विड डाइट से करें शुरुआत मैक्स हेल्थकेयर के पीडियाट्रिशियन डॉक्टर अंकुर सेठी ने एक इंटरव्यू में बताया, बताते हैं कि 6 महीने के बच्चे के लिए सबसे पहले क्लियर सूप, सब्जियों की प्यूरी और फलों की प्यूरी बेहतरीन ऑपशंस हैं. अगर आपके घर में रोजाना दाल बनती है, तो आप बच्चे के लिए दाल पकाते समय उसमें 2 सीटी एक्स्ट्रा लगा लें. इसके बाद दाल को अच्छी तरह मैश करके, उसमें थोड़ा सा घी या तेल मिलाकर बिल्कुल पतला सूप जैसा बना लें. यह दाल का पानी या सूप बच्चे के लिए बेहद पौष्टिक और पचाने में आसान होता है. उम्र के साथ बदलें खाना जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है, वैसे-वैसे उसकी डाइट और खाने के टेक्सचर को भी बदलना चाहिए. डॉक्टर के अनुसार, जब बच्चा थोड़ा बड़ा हो जाए तो आप उसे दाल-चावल मिक्स करके अच्छी तरह मैश करके दे सकते हैं. जब बच्चा 9 महीने का हो जाता है, तब उसे सॉफ्ट सॉलिड फूड यानी थोड़ा गाढ़ा और मसला हुआ खाना देना शुरू करना चाहिए. इस स्टेज पर आप बच्चे को मैश किया हुआ केला, उबला और मैश किया हुआ आलू या बिल्कुल सॉफ्ट पराठा दे सकते हैं. 1 साल के बच्चे की डाइट जब बच्चा एक या सवा साल का हो जाता है तब तक वह खाना चबाने के लिए पूरी तरह ट्रेन हो चुका होता है. इस उम्र में आप उसे थोड़ा और सॉलिड खाना देना शुरू कर सकते हैं. डॉक्टर सेठी का कहना है कि हमारा अल्टीमेट टारगेट यही होना चाहिए कि जब तक बच्चा डेढ़ से 2 साल का हो, वह घर के बाकी सदस्यों की तरह ही नॉर्मल खाना खाने लगे. ध्यान रखें कि हर बच्चा अलग होता है इसलिए उसकी पसंद और क्षमता के हिसाब से धीरे-धीरे डाइट बदलें.

इतिहास की सच्चाई: जेल में बिरसा मुंडा की मौत और अंतिम संस्कार से जुड़े विवादित दावे

 रांची  कोकर के डिस्टिलरी पुल के पास आज के दिन ही नौ जून, 1900 को धरती आबा का अंतिम संस्कार कर दिया गया था। तब, यह क्षेत्र काफी सुनसान था। जंगल था। एक नदी बहती थी, जो अब विकास की भेंट चढ़ गई। 125 साल पहले 25 साल के युवा बिरसा से ब्रिटिश सरकार डरी-सहमी थी। सुबह-सुबह बिरसा की कथित हैजे से मौत हो गई। जेल में बिरसा की हालत दो दिन पहले खराब हो गई थी। नौ जून को स्थिति और खराब हो गई। नौ बजते-बजते नाड़ी बंद हो गई। डॉक्टरों ने नाड़ी देखी और सरकार इस अप्रत्याशित घटना से सकते में आ गई। 25 साल के युवा से ब्रिटिश सरकार डरी ऐसा पहली बार हुआ कि 25 साल के युवा से ब्रिटिश सरकार डरी हुई थी। जेल के अंदर दिन भर कवायद जारी रहा। शाम होते ही अंतिम संस्कार कर दिया गया। शव को ब्रिटिश सरकार ने परिवार को सौंपना उचित नहीं समझा। रांची में 1850 के आसपास स्थापित गोस्सनर चर्च बिरसा के आंदोलन को शक की निगाह से देखता था। बिरसा मुंडा ने मतांतरण के खिलाफ भी आंदोलन चलाया था। इसलिए इस मिशन की पत्रिका घरबंधु ने 15 जून के अंक में खबर छपी। शीर्षक था-दाऊद बिरसा मर गया। जब बिरसा का बपतिस्मा हुआ था तब यही नाम दाउद ही मिला था, लेकिन जल्द ही वह इस धर्म से दूर, खुद ही एक अलग धर्म बिरसाइत की स्थापना की थी। पत्रिका ने इसकी सूचना दी 9 जून को दाऊद बिरसा जेल में हैजे से मर गया और उसी दिन में डोम लोग उसको नदी तक ले गये और जेलर बाबू के सामने जलाया। थोड़े दिनों के पीछे हाकिम का बिचारने उसको अपने पास बुलाया और उसका बिचार किया। उस बिचार की निंदा उसने की और अपने मुक्तिदाता को छोड़ दिया था जो कहता है कि स्वर्ग और पृथ्वी का समस्त अधिकार मुझे दिया गया है। केवल दो लोग हैजे से पकड़े गए घरबंधु इस मौत पर अचंभित होता है। आगे लिखता है, बड़े अचंभे की बात है कि जेलखाने के जिस आंगन में बिरसा और उसके निज चेले अपनी-अपनी कोठरी में रहते थे केवल दो जन हैजे से पकड़े गए हैं जो कचहरी में पहुंचाए जाते रहते थे अर्थात बिरसा और बराया मुंडा। वही पहले मर गया। हैजे से निधन पर घर बंधु संदेह भी करता है। आगे लिखता है-वे सब एक खाना खाते थे और केवल वे ही दो पकड़े गये। निश्चय उनको चुप कराने की लालसा उन लोगों की रही जिन्होंने अपनेको छिपाके बिरसाको उलगुलान करने के लिये उस्काया और निश्चय वे बहुत डरते थे कि बिरसा इजहार देनेके समय में उस उलगुलान का भेद खोलेगा। कचहरी में बहुत लोग बिरसा के आसपास जमा हुए और उसका गुप्तमें तमाकू वा दूसरी चीजके साथ विष देने का बहुत अवसर मिलता था ऐसा हुआ कि नहीं हुआ सो ईश्वर जानता है। घरबंधु में प्रकाशित होती थी खबरें बिरसा मुंडा के आंदोलन की खबरें घरबंधु में प्रकाशित होती रहती थीं। एक तरह से आंदोलन पर इस पाक्षिक पत्रिका की नजर भी रहती थी। 1900 अप्रैल के अंक में बिरसा भगवान का गोलमाल शीर्षक से खबर प्रकाशित की गई। इसमें सरवदा चर्चा पर हुए हमले में दोषी के दंड का जिक्र है। खबर है- जो उपद्रवी जेल में हें उनका इजहार बराबर लिया जाता रहता है। 27वीं अप्रैल में कातिंगकेलके परौ मुन्डा का बिचार हुआ जिसने सरवदा के रोमन पादरी पर तीर चलाया जिससे वह घायल किया गया, वह जीवन भर दायमुल भेजा जाता है। और पांडु मुन्डा को घर जलाने के कारण सात बरस जेल हुआ। एक खबर गया मुंडा को लेकर भी प्रकाशित हुई थी। इस तरह धार्मिक पत्रिका घर बंधु में समय-समय पर इस तरह की खबरें भी ठीक से स्थान पाती थीं। बिरसा मुंडा के साथियों ने सरवदा चर्च पर क्रिसमस की पूर्व संध्या पर हमला किया था, जिसमें फादर हाफमैन भी घायल हो गए थे। बाद में फादर ने जमीन सुरक्षा को लेकर सीएनटी एक्ट का ड्राफ्ट तैयार किया था और 16 खंडों में इनसाइक्लोपीडिया आफ मुंडारिका लिखी। हाफमैन बाद में जर्मनी अपने देश वापस चले गए थे। बिरसा जेल अब बन गया स्मारक रांची जेल की स्थापना 1890 के बाद हुई थी। बिरसा के बलिदान के बाद इस जेल का नाम धरती आबा के नाम से कर दिया गया। पहली बार धरती आबा की बड़े स्तर पर चर्चा तब हुई जब रांची से 40 किमी दूर रामगढ़ में कांग्रेस का महाधिवेशन 1940 के मार्च में हुआ था। तब गांधी, नेहरू, पटेल से लेर मौलाना आजाद, बाबू राजेंद्र प्रसाद आदि सभी बड़े-छोटे नेता आए थे। उस समय बिरसा मुंडा द्वार बना था और उस समय प्रकाशित स्मारिक में बिरसा मुंडा पर एक लेख भी अंग्रेजी में प्रकाशित हुआ था। लंबे समय बाद, झारखंड बनने के बाद जब नया जेल बना तो इसे स्मारक व पार्क में बदल दिया गया। जिस कक्ष में बिरसा मुंडा बंदी थे, उसमें एक प्रतिमा लगा दी गई है। इसके बाद जहां उनका अंतिम संस्कार किया गया था, वहां भी एक स्मारक बना दिया गया है। कुल पांच साल तक चला आंदोलन 15 नवंबर 1875 को खूंटी जिले के उलिहातू में जन्मे धरती आबा का आंदोलन 1895 से लेकर 1900 तक चला। यानी, 20 साल की उम्र में उन्होंने बिगुल फूंक दिया। हिंदू-ईसाई धर्म का ज्ञान भी प्राप्त किया और एक नया धर्म बिरसाइत धर्म चलाया। पांच साल तक चले इस आंदोलन के कारण ब्रिटिश सरकार को आदिवासी जमीन के लिए एक नया कानून बनाना पड़ा। 1908 में अस्तित्व में आया यह कानून आज भी जारी है। बिरसा ने कई समाज सुधार के काम भी किए। इसलिए उसे पैगंबर भी कहा गया। मसीहा भी कहा गया। ब्रिटिश लेखक ने ईसा मसीह से भी तुलना की।

पतरातू यार्ड में मॉक ड्रिल: आपात स्थिति में यात्रियों को बचाने का किया गया अभ्यास

धनबाद  रेल दुर्घटनाओं के दौरान राहत एवं बचाव कार्यों को अधिक प्रभावी और त्वरित बनाने के उद्देश्य से मंगलवार को धनबाद मंडल के पतरातू यार्ड में व्यापक स्तर पर मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया. यह मॉक ड्रिल वरीय मंडल सुरक्षा आयुक्त, धनबाद के निर्देशानुसार निरीक्षक प्रभारी पतरातू के नेतृत्व में आयोजित की गई. कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य रेल दुर्घटना जैसी आपात परिस्थितियों में विभिन्न विभागों की तैयारियों, समन्वय क्षमता तथा राहत-बचाव कार्यों की दक्षता का आकलन करना था. रेल दुर्घटना मॉक ड्रिल का आयोजन मॉक ड्रिल के दौरान पतरातू यार्ड में खड़ी स्टेबल रेक को दुर्घटनाग्रस्त ट्रेन के रूप में चिन्हित किया गया. जैसे ही काल्पनिक दुर्घटना की सूचना प्रसारित हुई, रेलवे सुरक्षा बल, इंजीनियरिंग विभाग और चिकित्सा विभाग की टीमें तुरंत सक्रिय होकर मौके पर पहुंचीं और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया. यात्रियों को सुरक्षित निकालने का अभ्यास अभ्यास के दौरान यह प्रदर्शित किया गया कि आपात स्थिति में यात्रियों को सुरक्षित कैसे बाहर निकाला जाए, घटनास्थल की घेराबंदी और सुरक्षा व्यवस्था कैसे सुनिश्चित की जाए और यात्रियों के सामान की सुरक्षा किस प्रकार की जाए. घायलों के उपचार और चिकित्सा व्यवस्था ड्रिल में घायल यात्रियों को प्राथमिक उपचार देने, गंभीर रूप से प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और अस्पताल भेजने से पहले आवश्यक चिकित्सा सहायता प्रदान करने का अभ्यास किया गया. चिकित्सा टीम ने मौके पर ही अस्पताल पूर्व चिकित्सा की प्रक्रिया का प्रदर्शन किया. आपात तैयारी की जांच बचाव दलों के बीच समन्वय, कम्युनिकेशन सिस्टम और आपातकालीन संसाधनों के उपयोग की भी जांच की गई. अधिकारियों ने बताया कि रेल दुर्घटना के शुरुआती घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं, इसलिए सभी विभागों का सतर्क और प्रशिक्षित रहना जरूरी है. अधिकारियों और कर्मचारियों की सक्रिय भागीदारी इस मॉक ड्रिल में आरपीएफ निरीक्षक अजय कुमार सिंह, उप निरीक्षक सोनू कुमार, उप निरीक्षक प्रवीण कुमार सहित आरपीएफ के जवानों ने सक्रिय भूमिका निभाई. वहीं वरीय अनुभाग अभियंता (रेल पथ) शशि कुमार अपने विभागीय कर्मचारियों के साथ उपस्थित थे. चिकित्सा विभाग की ओर से डॉ अभिषेक कुमार और उनकी टीम ने घायलों के उपचार और चिकित्सकीय सहायता संबंधी प्रक्रियाओं का प्रदर्शन किया. इसके अलावा, विभिन्न विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी भाग लेकर आपदा प्रबंधन की तैयारियों को परखा.

Heatwave Alert: 46 डिग्री के पार पहुंचा पारा, राजस्थान में लू का कहर जारी

जयपुर जस्थान में आग उगलती गर्मी और लू के थपेड़ों ने आम जनजीवन बेहाल कर दिया है. इसी बीच, प्रदेश के स्कूली बच्चों, पैरेंट्स और टीचर्स के लिए शिक्षा विभाग ने एक बड़ी राहत भरी खबर दी है. अगर आप सोच रहे थे कि 20 जून को छुट्टियां खत्म हो रही हैं और चिलचिलाती धूप में स्कूल जाना पड़ेगा, तो अब टेंशन छोड़ दीजिए. गर्मी के भयंकर प्रकोप को देखते हुए सरकार ने गर्मियों की छुट्टियों (Summer Vacations) को आगे बढ़ा दिया है. अब 20 नहीं, 28 जून को खुलेंगे स्कूल बीकानेर शिक्षा विभाग से 9 जून 2026 को जारी लेटेस्ट अपडेट के मुताबिक, प्रदेश में अब ग्रीष्मकालीन अवकाश 28 जून तक रहेगा. पहले सरकार ने शिविरा पंचांग (Academic Calendar 2026-27) जारी करते हुए इन छुट्टियों को 17 मई से 20 जून (महज 35 दिन) तक ही सीमित कर दिया था. लेकिन अब छुट्टियां 7 दिन और बढ़ गई हैं, जिससे कुल अवकाश 42 दिनों का हो गया है. इसके साथ ही एक और राहत दी गई है. अब स्कूलों के प्रिंसिपल के पास अपने अधिकार से एक दिन की बजाय दो दिन की छुट्टी मंजूर करने की पावर होगी. पहले क्यों कम कर दी गई थीं छुट्टियां? दरअसल, छुट्टियों में इस कटौती के पीछे शिक्षा मंत्री मदन दिलावर का एक खास प्लान था. शिक्षा संकुल में शिक्षक संगठनों के साथ हुई बैठक में तय किया गया था कि शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए पढ़ाई के दिन बढ़ाकर 214 किए जाएंगे. इसका दूसरा सबसे बड़ा कारण 21 जून को होने वाला अंतरराष्ट्रीय योग दिवस था. सरकार चाहती थी कि 20 जून को छुट्टियां खत्म हों और 21 जून को स्कूल खुलने पर सभी बच्चे और टीचर्स एक साथ मिलकर बिना किसी सिरदर्द के योगाभ्यास कर सकें. लेकिन शिक्षक संघ शुरुआत से ही इस फैसले पर अपना विरोध दर्ज करवा रहे थे. 46 डिग्री के पार पहुंचा पारा सरकार का प्लान अच्छा था, लेकिन राजस्थान के मौसम ने सारा खेल पलट दिया. इस वक्त प्रदेश भट्टी की तरह तप रहा है. जैसलमेर में तापमान सबसे ज्यादा 46.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है. बाड़मेर (46.0 डिग्री), कोटा (45.7 डिग्री) और चूरू (45.3 डिग्री) का भी बुरा हाल है. जयपुर मौसम विभाग (IMD) ने अगले 3 से 4 दिनों तक पश्चिमी और उत्तर-पूर्वी राजस्थान के कई हिस्सों में हीटवेव (लू) चलने की चेतावनी जारी की है, जहां पारा 44 से 45 डिग्री तक रह सकता है. हालांकि, आज दोपहर बाद पश्चिमी और उत्तरी इलाकों में धूलभरी आंधी और हल्की बूंदाबांदी से गर्मी से मामूली राहत मिलने के आसार जरूर हैं.

खनिज विभाग की ताबड़तोड़ कार्रवाई, अवैध कोयला और रेत परिवहन में लगे 8 वाहन पकड़े गए

सूरजपुर. प्रदेश में अवैध खनिज उत्खनन, परिवहन और भंडारण के विरुद्ध राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे अभियान के तहत खनिज विभाग ने सूरजपुर जिले में बड़ी कार्रवाई करते हुए कोयला एवं रेत के अवैध परिवहन में संलिप्त वाहनों को जब्त कर संबंधित वाहन मालिकों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज किए हैं। यह कार्रवाई मुख्यमंत्री के सुशासन एवं प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के संकल्प के अनुरूप तथा जिला प्रशासन के सतत निगरानी अभियान के तहत की गई। कलेक्टर के निर्देश पर चलाया गया विशेष जांच अभियान कलेक्टर रेना जमील के निर्देशानुसार खनिज विभाग, जिला स्तरीय टास्कफोर्स एवं खनिज अमले द्वारा खनन प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखी जा रही है। 7 जून को तहसील सूरजपुर अंतर्गत ग्राम पचिरा-मानी चौक मार्ग पर विशेष जांच अभियान चलाया गया। जांच के दौरान ग्राम बेलटिकरी के पास अवैध रूप से खनिज कोयला परिवहन करते हुए 06 मोटरसाइकिलों को पकड़ा गया। इन वाहनों से लगभग 5 टन कोयला जब्त किया गया, जिसे पुलिस थाना सूरजपुर में सुरक्षार्थ रखा गया है। अवैध खनिज परिवहन में संलिप्त वाहन जब्त खनिज विभाग ने ग्राम राजापुर, हर्राटिकरा एवं आसपास के क्षेत्रों में भी कार्रवाई करते हुए अवैध रेत परिवहन में संलिप्त 03 टिपर वाहनों के मालिकों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज कर नियमानुसार कार्रवाई प्रारंभ की है। इसके अलावा 08 जून को राजापुर रेत खदान क्षेत्र के औचक निरीक्षण के दौरान अवैध रेत परिवहन में लगे 02 और टिपर वाहनों को जब्त किया गया। संबंधित वाहन मालिकों के विरुद्ध खनिज नियमों के तहत प्रकरण दर्ज करते हुए जप्त वाहनों एवं खनिज सामग्री को पुलिस थाना जयनगर के सुपुर्द किया गया है। खनिज विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिले में अवैध उत्खनन, परिवहन एवं भण्डारण के विरुद्ध अभियान निरंतर जारी रहेगा। प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा तथा राजस्व क्षति रोकने के उद्देश्य से खनिज अमला नियमित निरीक्षण एवं सघन जांच अभियान संचालित कर रहा है। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि अवैध खनिज गतिविधियों में संलिप्त पाए जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

किसानों को सिंचाई की बेहतर सुविधा देने के लिए प्रतिबद्ध पंजाब सरकार: गज्जनमाजरा

चंडीगढ़  पंजाब के जल संसाधन एवं भूमि व जल संरक्षण मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने अमरगढ़ विधानसभा क्षेत्र के गांव माणकमाजरा और दहलीज़ खुर्द में 13 करोड़ रुपये की सिंचाई परियोजनाओं का शुभारंभ किया। इस मौके पर उनके साथ क्षेत्र के विधायक प्रो. जसवंत सिंह गज्जनमाजरा भी मौजूद रहे। इस संबंधी समारोह को संबोधित करते हुए कैबिनेट मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने बताया कि इन परियोजनाओं से क्षेत्र के 3,832 एकड़ से अधिक कृषि योग्य क्षेत्र को पहली बार सिंचाई के लिए नहरी पानी मिलेगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री स. भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार किसानों को बेहतर सिंचाई सुविधाएं मुहैया कराने और भूजल पर निर्भरता घटाने के लिए वचनबद्ध है।  उन्होंने कहा कि मान सरकार का लक्ष्य नहरी पानी की हर बूंद को टेलों तक पहुंचाकर पानी, पंजाब और पंजाबियत को सुरक्षित करना और नशों से जवानी को बचाकर 'रंगला पंजाब' बनाना है।  उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों ने पानी के मुद्दे पर सिर्फ़ राजनीति की और पंजाब के हिस्से के पानी की रक्षा करने में विफ़ल रहीं। उन्होंने कहा, "हमारी सरकार ने राज्य के पानी की रक्षा करने के साथ-साथ नहरी ढांचे को मज़बूत करने के लिए ठोस कदम उठाए हैं ताकि किसानों को लंबे समय के लिए भरोसेमंद सिंचाई सुविधाएं प्रदान की जा सकें।" कैबिनेट मंत्री ने गांव माणकमाजरा में भरी सभा को संबोधित करते हुए बताया कि कोटला ब्रांच नहर से नया भसौड़ माइनर बनाया गया है, जिसे करीब 4.07 करोड़ रुपये की लागत से कंक्रीट लाइनिंग करके पक्का किया गया है, जिससे ज़िला मालेरकोटला और संगरूर के 9 गांवों को लगभग 50-60 साल बाद नहरी पानी की सुविधा मिलेगी। इसके अलावा भसौड़ माइनर से 1.73 करोड़ रुपये की लागत से गांव दरोगेवाल और माणकमाजरा के लिए 7,640 मीटर लंबी भूमिगत पाइपलाइन बिछाई जा रही है।  इस परियोजना से 1,006 एकड़ कृषि योग्य क्षेत्र को सिंचाई के लिए पहली बार नहरी पानी मिलेगा। इसी माइनर से करीब 1.03 करोड़ रुपये की लागत से गांव रुस्तमगढ़, संगाली, संगाला और भैणी कलां के लिए 4,200 मीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई जा रही है, जिससे करीब 980 एकड़ क्षेत्र को देश की आज़ादी के बाद पहली बार नहरी पानी की सुविधा प्राप्त होगी। इसी तरह गांव दहलीज़ खुर्द में करीब 6.17 करोड़ रुपये की लागत की नहरी पानी परियोजनाओं का औपचारिक शुभारंभ करने के बाद कैबिनेट मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने बताया कि 5.63 करोड़ रुपये की लागत से बठिंडा ब्रांच से 20,149 मीटर लंबी उच्च गुणवत्ता वाली आधुनिक पाइपलाइन बिछाई जा रही है, जिससे गांव महरना खुर्द, कंगनपुर और रसूलपुर के कुल 1486 एकड़ क्षेत्र को पहली बार भरोसेमंद नहरी पानी उपलब्ध होगा, जबकि 54 लाख रुपये की लागत से गांव दहलीज़ कलां और दहलीज़ खुर्द के 360 एकड़ क्षेत्र को नहरी सिंचाई सुविधा से जोड़ा जाएगा। विधायक प्रो. जसवंत सिंह गज्जनमाजरा ने कहा कि मुख्यमंत्री स. भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार किसानों के विकास और जन कल्याण को प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा कि नहरी ढांचे के आधुनिकीकरण के ज़रिए हर खेत तक नहरी पानी पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ये परियोजनाएं किसानों की लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करने के साथ-साथ कृषि उत्पादन और आय में वृद्धि करेंगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि अमरगढ़ क्षेत्र के विकास के लिए फंडों की कोई कमी नहीं आने दी जाएगी। इस मौके पर चेयरमैन ज़िला योजना बोर्ड साकिब अली राजा, चेयरमैन ज़िला परिषद मालेरकोटला रघबीर सिंह चौंदा, चेयरमैन मार्केट कमेटी अमरगढ़ हरप्रीत सिंह नंगल, चेयरमैन पंजाब हज कमेटी हाशिम सूफी, आम आदमी पार्टी नेता केवल सिंह जागोवाल, क्षेत्र कॉर्डिनेटर नशा-मुक्ति यात्रा गुरप्रीत सिंह बनभौरा (बिट्टू), सहायक कमिश्नर मनदीप कौर, डी.एस.पी. संजीव कपूर, एक्सियन हरमनिंदर सिंह, एक्सियन संगरूर अतिंदरपाल सिंह सिद्धू, एक्सियन दमनजीत सिंह, राजीव, अभिजोत के अलावा बड़ी संख्या में क्षेत्र के निवासी मौजूद थे।