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हंसाने वाले कलाकार की दुखभरी कहानी: बचपन में मां की मौत का ग़म

मुंबई आज हम आपको एक ऐसे कॉमेडियन के बारे में बता रहे हैं जिसका बचपन काफी दर्दनाक रहा है। 13 साल की उम्र में इस कॉमेडियन के सिर से उसकी मां का साया उठ गया था। ये कॉमेडियन बिग बॉस का विनर भी रह चुका है। क्या आप पहचान पाए इस विनर का नाम? अगर नहीं तो चलिए हम आपको बताते हैं। ये कॉमेडियन कोई और नहीं मुनव्वर फारूकी हैं। मुनव्वर फारूकी ने एक पुराने रियलिटी शो में बताया था कि उनकी मां ने एसिड पी लिया और उनकी मृत्यु हो गई थी। अब एक पॉडकास्ट में उन पलों को याद करके मुनव्वर फारूकी बहुत ज्यादा इमोशनल हो गए। मां को याद कर इमोशनल हुए मुनव्वर फारूकी प्रखर गुप्ता के पॉडकास्ट में मुनव्वर ने अपने बचपन के दिनों को याद किया। उन्होंने वो दर्दनाक कहानी सुनाई जब उनकी मां ने एसिड पी लिया था। मुनव्वर ने बताया कि उनके पिता उनकी मां को मारते थे। 22 साल तक उनकी मां ने उनके पिता के जुल्मों का सामना किया। मुनव्वर ने कहा कि जितना दर्द उनकी मां ने झेला वो कोई नहीं झेल सकता है। मुनव्वर ने कहा कि वो अपनी मां की मौत के लिए किसी को जिम्मेदार नहीं मानते हैं। उन्होंने कहा कि शायद उनका जाना ऐसे ही लिखा था। 13 साल की उम्र में उठा मां का साया मां की सुसाइड के बारे में बात करते हुए मुनव्वर ने कहा, “वो 13 साल के थे, और मुझे सुबह किसी ने उठाया और बताया कि मां को अस्पताल ले गए हैं। जब मैं अस्पताल पहुंता, मुझे पता चला कि मेरे परिवार के लोगों ने किसी को नहीं बताया था कि उन्होंने एसिड पी लिया है। मुझे भी लोग कह रहे थे कि किसी को मत बताना क्योंकि मेरे पिता के लिए समस्या हो सकती है। मुझे समझ नहीं आ रहा था। मैं एक नर्स के पास क्या, वो नर्स जान-पहचान की थीं, मेरी मां की तरफ से। मैंने उन्हें बताया कि ये हुआ है। इसके बाद मेरी मां को तुरंत इमरजेंसी में शिफ्ट किया गया, लेकिन उनकी मौत हो गई।” दो साल बाद पिता को लकवा मार गया मां के बारे में बात करते हुए मुनव्वर बहुत ज्यादा इमोशनल हो गए। मुनव्वर से पूछा गया कि क्या मां की मौत के बाद वो किसी से नाराज थे। मुनव्वर ने कहा कि वो अपने पिता और उनके पूरे परिवार से नाराज थे। मुनव्वर ने बताया कि मां के निधन के दो साल बात उनके पिता को लकवा मार गया था और उनका 80 प्रतिशत शरीर काम नहीं कर रहा था। मैं उन्हें विलेन मानता था, लेकिन फिर भी वो मेरे पिता थे। आप खुद को बताने लगते हो कि इस इंसान ने कुछ गलत किया है, लेकिन उसके लिए इनके साथ भी कुछ हो गया है, उन्हें भुगतना पड़ रहा है। इस इंसान से मैं क्या नफरत करूं। आपको लगता है कि आपके सिवा इनका कोई भी नहीं है।" मुनव्वर ने कहा कि उस परिस्थिति ने उन्हें लोगों को माफ करना सिखा दिया।  

‘दहेज प्रताड़ना के आरोप बेबुनियाद’, सुप्रीम कोर्ट ने बहू की सास को दी राहत

नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने कथित तौर पर दहेज के लिए बहू के साथ क्रूरता करने के 24 साल पुराने केस में ट्रायल कोर्ट और हाईकोर्ट द्वारा दोषी करार दी गई एक सास को बरी कर दिया। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ससुराल वालों द्वारा बहू को दहेज के लिए प्रताड़ित की बातें हवा से भी अधिक तेज फैलती हैं। जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने उत्तराखंड हाईकोर्ट के उस फैसले के खिलाफ शुक्रवार को एक याचिका पर यह फैसला सुनाया, जिसमें महिला की दोषसिद्धि और तीन साल की सजा बरकरार रखी गई थी। आरोपी सास को आईपीसी की धारा 498ए के तहत इस आधार पर दोषी ठहराया गया था कि उसकी मृत बहू ने अपने मायके वालों को दहेज उत्पीड़न होने की बातें बताई थीं।आईपीसी की धारा 498-ए, विवाहित महिला के प्रति उसके पति या उसके ससुरालवालों द्वारा की गई क्रूरता के अपराध से संबंधित है। सुप्रीम कोर्ट ने पड़ोसन की गवाही को माना अहम सुप्रीम कोर्ट ने हालांकि ने इस बात पर गौर किया कि केस में गवाह के तौर पर पेश हुई आरोपी महिला की पड़ोसी ने दावा किया कि बहू से कभी दहेज की मांग नहीं की गई थी। बेंच ने कहा, ‘‘सास के साक्ष्य को निचली अदालत और हाईकोर्ट द्वारा इस आधार पर खारिज कर दिया गया कि वह दहेज की मांग के संबंध में कोई तथ्य पेश नहीं कर सकी थी, क्योंकि यह चारदीवारी के भीतर होता है, जो एक गलत निष्कर्ष है, विशेष रूप से ऐसे मामलों में जब सास-ससुर द्वारा दहेज के लिए बहू को परेशान किए जाने की बातें हवा से भी तेज फैलती हैं।" जून 2001 में दर्ज कराई गई थी शिकायत मृतक बहू के पिता ने जून 2001 में दर्ज कराई अपनी शिकायत में बताया था कि उनकी बेटी ससुराल में मृत पाई गई थी। पिता ने आरोप लगाया था कि मौत के समय उनकी बेटी गर्भवती थी और वह अक्सर मायकेवालों को बताती थी कि उसकी सास दहेज के लिए उसे ताने ताने मारती है। शिकायतकर्ता ने यह भी कहा कि घटना के वक्त उसका दामाद शहर में नहीं था। मृतका के सास-ससुर और देवर को इस मामले में आरोपी बनाया गया था। हालांकि, निचली अदालत ने ससुर और देवर को बरी कर दिया, लेकिन यह माना कि सास के उत्पीड़न के कारण बहू ने जान दी थी। दोषी करार दी गई सास ने निचली अदालत के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट का रुख किया, जिसने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी भी रूप में दहेज की मांग अपने आप में आईपीसी की धारा 498ए के तहत केस दर्ज करने के लिए काफी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "इसी प्रकार, किसी विवाहित महिला को या उसके रिश्तेदार को किसी अवैध मांग को पूरा करने के लिए मजबूर करने के उद्देश्य से परेशान करना भी 'क्रूरता' की श्रेणी में आएगा।'' बेंच ने आरोपी महिला की अपील स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया और उसे बरी कर दिया।  

14 मंत्रियों के सवाल पर रमन सिंह का बड़ा बयान, कहा- न्यायालय का निर्णय रहेगा अंतिम

बिलासपुर साय कैबिनेट में 14 मंत्रियों पर हाईकोर्ट में कांग्रेस की ओर से दायर याचिका के बीच विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि इस पर न्यायालय का फैसला अंतिम रहेगा. हरियाणा में 5–6 साल से यह चल रहा है. 13.5 मतलब 13 भी हो सकता है, और 14 भी. बिलासपुर में स्वर्गीय काशीनाथ गोरे के स्मारिका विमोचन में शामिल होने पहुंचे विधानसभा अध्यक्ष रमन सिंह ने मीडिया से चर्चा में कहा कि जो लोग सवाल उठा रहे हैं, उन्हें न्यायालय पर भरोसा होना चाहिए, चिंता करने की कोई जरूरत नहीं. वहीं महाराष्ट्र के राज्यपाल के तौर पर उनके नाम को लेकर हो रही चर्चा पर कहा कि मैं छत्तीसगढ़ में ही भला हूं. दरअसल, महाराष्ट्र के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन को उपराष्ट्रपति पद के लिए नामांकित किया गया है. उनके उप राष्ट्रपति चुने जाने के साथ ही खाली होने वाले राज्यपाल के पद पर किसी वरिष्ठ भाजपा नेता को नियुक्त किए जाने की चर्चा है, इनमें से एक नाम पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह का भी नाम शामिल है.

हर बच्चे के नाम छोड़ी 244 करोड़ की संपत्ति, मौत के बाद 70 दिन तक पड़ी रही लाश

लॉस एंजिल्स शायद ही दुनिया में कभी ऐसा पॉप स्टार होगा, जिसके मरने पर पूरी दुनिया ने आंसू बहाए और इसकी अंतिम यात्रा में शामिल होने के लिए लकी टिकट निकाले गए थे। इसकी अंतिम यात्रा को स्ट्रीम किया गया, तो उसे दुनियाभर के 300 करोड़ लोगों ने देखा था। यही नहीं, मरने के 70 दिन बाद इसे दफनाया गया था और वह भी रहस्यमय तरीके से। और तो और इस पॉप स्टार ने मरने के बाद कई रिकॉर्ड बनाए थे। इसके नाम पर एक-दो नहीं, बल्कि 39 गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड हैं। बताया जाता है कि मौत के बाद इस पॉप स्टार की 17,110 करोड़ रुपए कमाई हुई। यह अपने हर बच्चे के नाम 244 करोड़ और बाकी प्रॉपर्टी में हिस्सा छोड़ गया था। यह स्टार 150 साल जीना चाहता था, इसलिए 12 डॉक्टर रखे थे। इसकी लाश को रहस्यमय तरीके से दफनाया गया था। इस पॉप स्टार की 16 साल पहले मौत हो गई थी, पर इसके गाने आज भी सुने जाते हैं और फैंस आज भी याद करते हैं। 150 साल जीने की चाह में यह ऑक्सीजन के चैंबर में सोता था, पर 50 साल की उम्र में ही मौत ने इसे अपने आगोश में ले लिया था। माइकल जैक्सन की मौत, कई लोग बेहोश, 13 ने किया था सुसाइड यह थे माइकल जैक्सन, जिन्हें दुनिया 'किंग ऑफ पॉप' भी कहती थी। 29 अगस्त को उनकी 67वीं बर्थ एनिवर्सरी थी। वह दुनिया के सबसे बेहतरीन सिंगर थे। आवाज के अलावा वह अपने गानों, डांसिंग स्टाइल और मून वॉक के लिए मशहूर थे। लाखों लोगों ने माइकल का मूव वॉक स्टाइल सीखा और आज तक कॉपी करते हैं। माइकल जैक्सन की 25 जून 2009 को मौत हो गई। बताया जाता है कि यह खबर सुनकर जहां कई लोग सड़क पर बेहोश हो गए थे, वहीं 13 फैंस ने सुसाइड कर लिया था। इस कारण हुई थी माइकल जैक्सन की मौत? लंबा जीने के लिए ऑक्सीजन चैंबर और लैब माइकल जैक्सन की मौत संदिग्ध हालातों में हुई थी। बताया जाता है कि उनकी मौत प्रोपोफॉल और बेंजोडायजेपाइन जैसी हेवी दवाइयों के ओवरडोज से हुई थी। इन दवाइयों के कारण माइकल जैक्सन को हार्ट अटैक आ गया था। कोई मानने को तैयार नहीं था कि माइकल जैक्सन की मौत हो चुकी है। आखिर जो इंसान 150 साल जीने की चाह रखता था, और ऑक्सीजन के चैंबर में सोता था…लंबे समय तक जीने के लिए घर में ही लैब बनवाकर रिसर्च करवा रहा था, वो कैसे मर सकता है? यह सवाल इसलिए भी उठ रहा था क्योंकि माइकल जैक्सन ने अपने लिए 12 डॉक्टरों की टीम रखी थी। वो उनकी दवाइयों से लेकर क्या खाना है और क्या नहीं, तक का ध्यान रखते थे। माइकल जैक्सन जो भी खाना खाते थे, उसे पहले लैब में टेस्ट किया जाता था। संदेह में थी मौत, जांच के लिए निकाला गया था दिमाग माइकल जैक्सन की मौत संदेह के घेरे में थी। मौत का सही कारण पता नहीं चल पा रहा था। ऐसे में पोस्टमार्टम के लिए माइकल जैक्सन का दिमाग निकाला गया और फिर उसकी जांच की गई। दो महीनों तक जांच चलती रही, पर कोई नतीजा नहीं निकला। तब माइकल जैक्सन के शव को 70 दिन बाद दफनाया गया। मौत के 70 दिन बाद सोने के ताबूत में दफनाया, यह था डर माइकल जैक्सन के शव को सोने के ताबूत में दफनाया गया था। हालांकि, इसे लेकर पहले उनके घरवाले डरे हुए थे। उन्हें डर था कि कहीं उनका शव और ताबूत चोरी न हो जाए। इसलिए पहले माइकल जैक्सन के शव को मेकअप आर्टिस्ट ने सजाया और फिर उसे सोने के ताबूत में रखकर कंक्रीट में दफना दिया। माइकल जैक्सन के शव को कहां दफनाया गया था, इसकी लोकेशन को सीक्रेट रखा गया। पर बाद में उसे निकालकर ग्रेट माइसीलियम में दफना दिया गया, जो फॉरेस्ट लॉन में स्थित है। माइकल जैक्सन का मेमोरियल, लाखों लोग उमड़े इसके बाद 7 जुलाई 2009 को माइकल जैक्सन का एक मेमोरियल बनाया गया, जिसमें हिस्सा लेने के लिए लाखों की भीड़ उमड़ी। इसके लिए बाकायदा टिकट सिस्टम रखा गया था, और कुछ लकी लोग ही टिकट खरीदकर इसमें शामिल हो पाए थे। मौत के बाद माइकल जैक्सन की कमाई, हर बच्चे के लिए छोड़ गए अरबों रुपये 'फोर्ब्स' की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मौत के बाद माइकल जैक्सन की 17,110 करोड़ रुपए कमाई हुई थी। वह मौत के 10 साल बाद भी सबसे ज्यादा कमाई करने वाले सिंग रहे। रिपोर्ट के मुताबिक, माइकल जैक्सन के नाम पर साल 2018 तक 28.40 अरब की कमाई हुई थी। बताया जाता है कि वह मरने से पहले अपनी प्रॉपर्टी में से हर बच्चे के लिए 244 करोड़ रुपये और बाकी संपत्ति में हिस्सा छोड़ गए थे।

बैंक मैनेजर के आदेश के खिलाफ कर्मचारियों का अनोखा विरोध, कैंटीन में खाया बीफ

तिरुवनंतपुरम केरल में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां कोच्चि के एक बैंक में मैनेजर ने कैंटीन में बीफ पर प्रतिबंध लगा दिया। इसके विरोध में बैंक कर्मचारियों ने बीफ पार्टी का आयोजन कर डाला। जानकारी के मुताबिक बैंक के रीजनल मैनेजर मूल रूप से बिहार के रहने वाले हैं। उनकी हाल ही में केरल के कोच्चि स्थित बैंक की शाखा में नियुक्ति हुई है। बैंक एम्प्लॉइज फेडरेशन ऑफ इंडिया (BEFI) के सदस्यों ने अधिकारियों के कथित मानसिक उत्पीड़न को लेकर मैनेजर के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने की योजना बनाई थी। लेकिन बीफ पर प्रतिबंध लगने के बाद विरोध को नई दिशा मिल गई। नहीं चलने देंगे संघ का एजेंडा प्रदर्शनकारियों ने ऑफिस के बाहर बीफ और परोटा (एक तरह की ब्रेड) परोसी। इस प्रदर्शन को केरल के कुछ नेताओं ने भी समर्थन दिया। लेफ्ट समर्थित निर्दलीय विधायक केटी जलील इस प्रदर्शन की तारीफ करते हुए कहा कि केरल में संघ परिवार के किसी भी एजेंडा को अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने फेसबुक पर लिखा, ‘क्या पहना जाए, क्या खाया जाए, क्या सोचा जाए इसे वरिष्ठ लोग तय नहीं करेंगे। हमारी जमीन लाल है। इस जमीन का दिल लाल है। जहां तक लाल झंडा फहरा रहा है, आप बिना किसी डर के फासीवाद के खिलाफ बोल सकते हैं। कोई भी आपको नुकसान नहीं पहुंचाएगा।’ पसंदीदा खाना सबका अधिकार बैंक फेडरेशन के एक नेता एसएस अनिल ने कहा कि यहां पर एक छोटी कैंटीन चलती है। चुनिंदा दिनों पर बीफ परोसा जाता है। मैनेजर ने कैंटीन स्टाफ से कहा कि अब बीफ नहीं परोसा जाएगा। उन्होंने कहा कि यह बैंक संविधान के अनुसार चलता है। खाना निजी पसंद का विषय है। भारत में हर व्यक्ति को अधिकार है कि वह क्या खाएगा। हम किसी को बीफ खाने पर बाध्य नहीं कर रहे हैं। यह हमारा विरोध का तरीका है।  

ट्रंप टैरिफ पर बोले राजनाथ सिंह- रिश्तों में स्थायित्व नहीं, हालात तय करते हैं रुख

नई दिल्ली  रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को कहा कि डिफेंस सेक्टर में भारत के लिए आत्मनिर्भर होना बेहद आवश्यक है और इसके लिए देश किसी विदेशी आपूर्ति पर निर्भर नहीं रह सकता। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से भारतीय आयात पर लगाए गए 50 प्रतिशत शुल्क का जिक्र करते हुए सिंह ने कहा कि कोई स्थायी दोस्त या दुश्मन नहीं है। उन्होंने कहा, 'कोई स्थायी दोस्त या दुश्मन नहीं होता, केवल हित स्थायी होते हैं। वैश्विक स्तर पर अभी व्यापार के लिए युद्ध जैसी स्थिति है।' उन्होंने कहा कि विकसित देश तेजी से संरक्षणवादी हो रहे हैं, लेकिन भारत अपने राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं करेगा। राजनाथ सिंह ने कहा कि सरकार हवाई सुरक्षा प्रणाली सुदर्शन चक्र के तहत अगले 10 वर्षों में देशभर के सभी अहम स्थलों को पूरी तरह हवाई सुरक्षा मुहैया कराने की योजना बना रही है। एनडीटीवी डिफेंस समिट में अपने संबोधन में सिंह ने कहा कि एक ऐसी सुरक्षा प्रणाली तैयार की जा रही है, जो दुश्मन के किसी भी हमले से बचाव करने और उसका जवाब देने में सक्षम होगी। उन्होंने कहा, 'जैसा कि हमने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान देखा आज की लड़ाइयों में हवाई सुरक्षा की अहमियत बहुत बढ़ गई है। ऐसे में सुदर्शन चक्र मिशन एक बड़ा बदलाव लाने वाला साबित होगा।' एयर डिफेंस प्रोजेक्ट की घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अपने भाषण में इस एयर डिफेंस प्रोजेक्ट की घोषणा की थी। यह ऐलान पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर की ओर से भविष्य में दोनों देशों के बीच किसी भी सैन्य टकराव की स्थिति में सीमा पर भारतीय संपत्तियों को निशाना बनाने के संकेतों के कुछ दिन बाद हुई थी। राजनाथ सिंह ने कहा कि बदलते वैश्विक हालात ने यह साफ कर दिया है कि अब रक्षा क्षेत्र में बाहरी देशों पर निर्भर रहना कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने कहा, 'आज की स्थिति में आत्मनिर्भरता हमारी अर्थव्यवस्था और सुरक्षा दोनों के लिए आवश्यक है।' आर्थिक ढांचे की सुरक्षा पर भी बयान रक्षा मंत्री ने कहा, 'आज रक्षा क्षेत्र केवल राष्ट्रीय सुरक्षा की नींव नहीं है, बल्कि यह हमारी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और उसके भविष्य को सुरक्षित करने का एक प्रमुख आधार भी बन गया है।' उन्होंने कहा कि यह केवल लोगों की सुरक्षा, जमीन की हिफाजत या सीमाओं की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारे पूरे आर्थिक ढांचे की सुरक्षा और स्थिरता की जिम्मेदारी भी निभा रहा है। रक्षा मंत्री ने यह स्पष्ट किया कि आत्मनिर्भरता और स्वदेशीकरण को संरक्षणवाद के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, 'रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का संबंध संरक्षणवाद से नहीं है, बल्कि यह हमारी संप्रभुता, राष्ट्रीय स्वायत्तता और आत्मविश्वास का मुद्दा है।'  

पेट्रोल टैंकर हादसा: भीषण आग के बाद तेज धमाका, इलाके में अफरा-तफरी

बलौदाबाजार जिले के सेमरिया गांव में शनिवार को एक बड़ा हादसा हो गया। जहां पेट्रोल से भरा टैंकर अनियंत्रित होकर सड़क किनारे पलट गया, जिसके बाद उसमें भीषण आग लग गई। देखते ही देखते पूरा टैंकर आग की लपटों में घिर गया और जोरदार ब्लास्ट हो गया। घटना के बाद आसपास के इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। घटना पलारी थाना क्षेत्र की है। बता दें कि हादसे में टैंकर चालक और परिचालक ने सूझबूझ दिखाते हुए कूदकर अपनी जान बचा ली। दोनों को मामूली चोटें आई हैं, लेकिन उनकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। स्थानीय लोगों ने तत्काल पुलिस को घटना की जानकारी दी। सूचना मिलते ही पलारी और गिधपुरी थाने की पुलिस मौके पर पहुंची और आग की चपेट में आने से लोगों को बचाने के लिए उन्हें सुरक्षित दूरी पर रोका। घटना स्थल पर बड़ी संख्या में ग्रामीण भी जुट गए थे। घटना का वीडियों भी सामने आया है, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। जानकारी के मुताबिक, यह पेट्रोल टैंकर रायपुर से लवन की ओर जा रहा था और उसमें बड़ी मात्रा में पेट्रोल भरा हुआ था। इसी रोड से महानदी से रेत का परिवहन होता है, जिसके कारण इस क्षेत्र की सड़कों की हालत बदतर है। बताया जा रहा है कि अचानक टैंकर का संतुलन बिगड़ने से यह पलट गया, जिसके कारण चिंगारी उठते ही उसमें आग लग गई। फिलहाल पुलिस ने पूरे इलाके को घेराबंदी कर सुरक्षित कर लिया है और आग पर काबू पाने के लिए दमकल विभाग को बुलाया गया है। घटना से पूरे क्षेत्र में दहशत और सनसनी फैल गई है।

MP टूरिज्म में लगेगा 3500 करोड़, नए डेस्टिनेशन और सुविधा से बढ़ेगी चमक

ग्वालियर  मध्यप्रदेश का टूरिज्म अब और फलेगा-फूलेगा। खासकर ग्वालियर पर्यटन के नक्शे पर अपनी अलग ही पहचान बनाएगा। आने वाले दिनों में ग्वालियर-चंबल और सागर संभाग में पर्यटन की बेहतर व्यवस्था होगी। जो लोग यहां घूमने आएंगे उन्हें रहने की 5-7 स्टार सुविधा मिलेगी। दरअसल, उद्योगपतियों-निवेशकों को मध्यप्रदेश निवेश के लिए आकर्षित कर रहा है। इसी कड़ी में निवेशकों ने ग्वालियर-चंबल-सागर संभाग में बड़े निवेश की इच्छा जताई है। निवेशक इस क्षेत्र में 3500 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश कर सकते हैं। उद्योगपतियों ने निवेश की यह इच्छा 30 अगस्त को ग्वालियर में आयोजित 'ग्वालियर रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव' में जताई। उनके इस निवेश से टूरिज्म में इजाफा होगा, साथ ही लोगों को रोजगार भी मिलेगा। इससे पूरे क्षेत्र की आर्थिक प्रगति होगी।  मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि ग्वालियर रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव में प्रमुख निवेशकों ने ग्वालियर-चंबल और सागर संभाग में 3500 करोड़ से अधिक के निवेश की इच्छा जताई है। इस तरह उन्होंने इन क्षेत्रों में पर्यटन के विकास की अपार संभावनाओं को रेखांकित किया है। यह ऐतिहासिक पल दोनों संभागों के लिए आर्थिक समृद्धि और रोजगार के नए द्वार खोलेगा। आज पर्यटन क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने के लिए 7 जमीनों के लिए 6 निवेशकों को लेटर ऑफ अलॉटमेंट जारी किए गए हैं। प्रदेश में इससे सीधे तौर पर 60 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश, प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के असंख्य अवसर पैदा होंगे। इन जमीनों पर होटल, रिसॉर्ट और इको टूरिज्म यूनिट आदि का निर्माण किया जाएगा। भविष्य में दिखेंगे सुखद परिणाम सीएम डॉ. यादव ने कहा कि आज कॉन्क्लेव में ग्वालियर की धरती पर 25 से अधिक प्रमुख इन्वेस्टर्स, देशभर से 125 से अधिक ट्रैवल-टूर ऑपरेटर, 500 से अधिक हितधारक और स्थानीय कलाकार शामिल हुए हैं। इन सभी के बीच द्विपक्षीय संवाद और पर्यटन क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा हुई है। इसके भविष्य में निश्चित ही अच्छे और सुखद परिणाम देखने को मिलेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में समय बदल रहा है। आज का दिन बेहद खास है। यहां पहली ही बार हो रही रीजनल कॉन्क्लेव जबरदस्त रही। ग्वालियर के पास आगरा, मथुरा, दिल्ली है। ग्वालियर देश की राजधानी का सबसे नजदीकी केंद्र है। धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से देखें तो मथुरा-वृंदावन का नजदीकी क्षेत्र है। ग्वालियर का ऐतिहासिक महत्व है। राजा मानसिंह का किला और उसकी अपनी गाथा विशेष है। ऐसा लगता है  जैसे स्वर्ग को कोई टुकड़ा यहां किले के रूप में आसमान से आ गया हो।  ग्वालियर का इतिहास समृद्ध है। बड़े-बड़े सत्ताधीश बुरे समय में यहां के किले की जेल में ही बंदी बनाए गए।  ग्वालियर वह जगह है जहां बुरे दौर में भी आध्यात्मिक ताकतों का प्रकटीकरण हुआ। मितावली-पड़ावली का चौंसठ योगिनी का मंदिर असल में हमारी पुरानी लोकसभा के भवन की प्लानिंग है। जब 1912 में दिल्ली बनी तो संसद का निर्माण किया गया। अब नई संसद भवन को विदिशा के मंदिर के डिजाइन पर बनाकर तैयार किया गया है। इसमें बना डोम सांची स्तूप की कॉपी है। हमारे यहां चीते गांवों में घूमते नजर आते हैं। प्रदेश में मनुष्य और वन्य प्राणियों के बीच सहअस्तित्व नजर आता है। ग्वालियर संगीत सम्राट तानसेन और बैजू बावरा की विरासत है। रीवा के बाद अब पर्यटन विकास के लिए ग्वालियर में सौगात मिल रही है। इंडिगो कंपनी ने सीएसआर के माध्यम से ग्वालियर किलों के विकास के लिए 100 करोड़ की राशि दी है। प्रधानमंत्री मोदी दुनिया में देश की विरासत और पर्यटन केंद्रों को आगे बढ़ा रहे हैं। मेक इन इंडिया, मेड इन इंडिया के माध्यम से स्वदेशी और स्वाबलंवन के लिए काम कर रहे हैं।  इतिहास और विरासत है प्रदेश की पहचान प्रदेश के पर्यटन मंत्री धर्मेंद्र भावसिंह लोधी ने कहा कि मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में देश में पर्यटन का केंद्र बने, इसके लिए सरकार कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री के पास आइडियाज का भंडार है और उन्हें जमीन पर उतारने का कार्य भी किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के विजन के अनुरूप मध्य प्रदेश को भी विकसित होना पड़ेगा। इसके लिए राज्य सरकार हर सेक्टर के विकास पर विशेष जोर दे रही है। प्रदेश में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। प्रदेश में वाइल्ड लाइफ की विविधता हैं। एमपी टाइगर स्टेट, चीता स्टेट और घड़ियाल स्टेट भी है। सांची के स्तूप, भीम बैठिका और खजुराहो के मंदिर यूनेस्को की स्थाई सूची में शामिल हैं। 15 स्थल अस्थायी सूची में दर्ज हैं। जबकि देशभर में यूनेस्को की विश्व धरोहरों की संख्या 62 है। उन्होंने कहा कि राज्य में नई पर्यटन नीति लागू की गई है। निवेशकों को सर्व सुविधाएं देते हुए रेड कारपेट बिछाकर आकर्षित किया जा रहा है। निवेशक मध्य प्रदेश आएं आपको कोई परेशानी नहीं होगी। मध्यप्रदेश को मोस्ट फिल्म फ्रेंडली अवॉर्ड मिला हुआ है। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि मध्यप्रदेश कृषि, जंगल, पर्यटन, शिक्षा सहित कई क्षेत्रों में देश का महत्वपूर्ण राज्य है और प्रदेश दुनिया में आगे बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के कार्यकाल में प्रदेश में उद्योग और निवेश का वातावरण बना है। प्रदेश में संभागीय स्तर पर छोटे शहरों में आयोजित रीजनल कॉन्क्लेव से प्रदेश की अर्थव्यवस्था को बल देंगे। निवेशकों का रुझान प्रदेश के विकास को नई गति प्रदान करेगा। प्रमुख सचिव, पर्यटन-संस्कृति शिव शेखर शुक्ला ने कहा कि मध्यप्रदेश अपने इतिहास और विरासत के लिए पहचान रखता है। प्रदेश में 750 से अधिक संरक्षित केंद्र हैं। यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थलों में प्रदेश की एक चौथाई से अधिक 18 साइट शामिल हैं। ग्वालियर विश्व के 54 चिह्नित शहरों में शामिल है। ग्वालियर को सांस्कृतिक महत्व से क्रिएटिव सिटी ऑफ म्यूजिक घोषित किया गया है। यह शहर तानसेन और बैजू बावरा के लिए जाना जाता है। प्रदेश का 30 प्रतिशत क्षेत्र जंगलों से आच्छादित है। प्रदेश में 12 नेशनल पार्क हैं। सबसे अधिक टाइगर रिजर्व मध्य प्रदेश में हैं। हाल ही में श्योपुर क्षेत्र में चीतों को दोबारा बसाया गया है। उनका कुनबा तेजी से बढ़ रहा है। प्रदेश में दो ज्योतिर्लिंग, भगवान राम और कृष्ण के फुट प्रिंट यहां हैं। मां नर्मदा के सौंदर्य देखने के लिए लोग आते हैं। उन्होंने … Read more

गर्मी का असर! भारत-पाक सहित एशिया कप मैचों की टाइमिंग में बड़ा बदलाव

नई दिल्ली  अमीरात क्रिकेट बोर्ड ने शनिवार को घोषणा की कि संयुक्त अरब अमीरात में भीषण गर्मी के कारण आगामी एशिया कप के 19 में से 18 मैचों का शुरू होने का समय मूल कार्यक्रम से आधे घंटे पीछे कर दिया गया है। संशोधित समय के अनुसार अब मैच स्थानीय समयानुसार शाम 6.30 बजे (भारतीय समयानुसार रात 8 बजे) शुरू होंगे। इस बार टी-20 प्रारूप में आयोजित होने वाला यह महाद्वीपीय टूर्नामेंट नौ से 28 सितंबर तक दुबई और अबू धाबी में खेला जाएगा।   सितंबर में जब टूर्नामेंट खेला जाएगा तो दिन के दौरान तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने और देर शाम तक ऐसे ही रहने की उम्मीद है। इतनी भीषण गर्मी में खेलने से बचने के लिए क्रिकेट बोर्डों ने मैचों के समय को थोड़ा आगे बढ़ाने का अनुरोध किया था। प्रसारकों से यह अनुरोध किया गया और उन्होंने बदलावों पर सहमति जताई। इसका मतलब है कि सभी दिन-रात्रि मैच भारतीय समयानुसार रात 8 बजे शुरू होंगे। इस बदलाव से अप्रभावित एकमात्र मैच टूर्नामेंट का एकमात्र दिन का मैच है, जोकि यूएई और ओमान के बीच होने वाला मुकाबला है। ये मैच 15 सितंबर को अबू धाबी के जायेद क्रिकेट स्टेडियम में खेला जाएगा। अफगानिस्तान और हांगकांग 9 सितंबर को अबु धाबी में आठ टीमों के इस टूर्नामेंट में अपना पहला मैच खेलेंगे। ईसीबी ने अपनी वेबसाइट पर एक बयान में कहा, ‘‘एशिया कप 2025 के 19 मैचों में से 18 के शुरू होने का समय अपडेट कर दिया गया है। ये मैच अब स्थानीय समयानुसार शाम 6:30 बजे शुरू होंगे।’’ बयान के अनुसार, ‘‘सोमवार, 15 सितंबर को यूएई और ओमान के बीच मैच स्थानीय समयानुसार दोपहर बाद चार बजे शुरू होगा। यह टूर्नामेंट का दिन में खेले जाने वाला एकमात्र मैच होगा।’’ एशियाई क्रिकेट परिषद ने इससे पहले जो कार्यक्रम जारी किया था उसके अनुसार मैच स्थानीय समयानुसार शाम छह बजे शुरू होने थे।  

ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण को मिलेगी नई उड़ान, ‘दीदी के गोठ’ रेडियो कार्यक्रम से बढ़ेगी जागरूकता

ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की नई पहल : ‘दीदी के गोठ’ रेडियो कार्यक्रम का होगा शुभारंभ ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण को मिलेगी नई उड़ान, ‘दीदी के गोठ’ रेडियो कार्यक्रम से बढ़ेगी जागरूकता पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की पहल, ‘दीदी के गोठ’ से अब हर गांव तक पहुँचेगी सशक्तिकरण की आवाज ‘दीदी के गोठ’ रेडियो कार्यक्रम का शुभारंभ, ग्रामीण महिलाओं को मिलेगी नई दिशा और पहचान 31 अगस्त को दोपहर 12:15 बजे सभी आकाशवाणी केंद्रों से प्रसारित होगा कार्यक्रम बिलासपुर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सुशासन की सरकार ने छत्तीसगढ़ की ग्रामीण महिलाओं को सामाजिक, आर्थिक और पारिवारिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक और ऐतिहासिक कदम बढ़ाया है। राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के अंतर्गत तैयार विशेष रेडियो कार्यक्रम “दीदी के गोठ” का शुभारंभ 31 अगस्त 2025 को दोपहर 12:15 बजे किया जाएगा। यह कार्यक्रम आकाशवाणी रायपुर केंद्र सहित प्रदेश के सभी आकाशवाणी केंद्रों से एक साथ प्रसारित होगा। साथ ही इसकी लाइव स्ट्रीमिंग ऑनलाइन प्लेटफॉर्म (www.onlineradiofm.in/stations/all-india-air-raipur) पर भी उपलब्ध रहेगी,आकाशवाणी के बिलासपुर केंद्र से इस प्रसारण को 103.2 मेगा हर्ट्ज सुना जा सकेगा साथ ही लाइव स्ट्रीमिंग www.onlineradiofm.in/stations/all-india-air-Bilaspur के जरिए भी लोग कार्यक्रम से जुड़ सकेंगे। मुख्यमंत्री और मंत्रियों का विशेष संदेश कार्यक्रम के इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय, भारत सरकार के केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री तथा राज्य के उप मुख्यमंत्री एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री विजय शर्मा द्वारा ग्रामीण महिलाओं के नाम विशेष संदेश और प्रेरणादायी शुभकामनाएँ प्रसारित की जाएंगी। यह अवसर न केवल एक कार्यक्रम का शुभारंभ होगा बल्कि शासन की नीतियों और योजनाओं को सीधे जनता तक पहुँचाने का एक सशक्त माध्यम भी बनेगा।      दीदी के गोठ का प्रमुख उद्देश्य ग्रामीण अंचलों की महिलाओं को शासन की विभिन्न योजनाओं से जोड़ना, उन्हें स्वरोजगार के अवसर प्रदान करना तथा आत्मनिर्भरता और स्वावलंबन की ओर अग्रसर करना है। इस कार्यक्रम में स्व-सहायता समूहों की सफल महिलाओं की कहानियाँ सुनाई जाएंगी। कैसे उन्होंने संघर्ष और कठिनाइयों को पार कर अपनी मेहनत और आत्मविश्वास से न सिर्फ़ आर्थिक रूप से मज़बूती हासिल की बल्कि समाज में भी एक नई पहचान बनाई। आज छत्तीसगढ़ की लाखों महिलाएँ लखपति दीदी  बन चुकी हैं। उनका जीवन बिहान योजना से सकारात्मक रूप से बदला है। इनकी प्रेरणादायी कहानियाँ रेडियो की आवाज़ के माध्यम से हर गाँव और हर घर तक पहुँचेंगी, ताकि दूसरी महिलाएँ भी आत्मनिर्भरता की राह पकड़ सकें।      इस कार्यक्रम के प्रभाव को और अधिक व्यापक बनाने के लिए पंचायत, ग्राम संगठन और संकुल संगठन स्तर पर सामूहिक श्रवण की व्यवस्था की जा रही है। इसमें जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, स्थानीय समुदाय और स्व-सहायता समूह की दीदियाँ विशेष रूप से शामिल होंगी। सामूहिक श्रवण से ग्रामीण क्षेत्रों में आपसी संवाद, चर्चा और प्रेरणा का वातावरण बनेगा। दीदी के गोठ केवल एक रेडियो कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय जी की सुशासन की सरकार की दूरदर्शी सोच का प्रतिबिंब है। इसका उद्देश्य महिलाओं की आवाज़ को पूरे समाज तक पहुँचाना, उनके संघर्ष और उपलब्धियों को सामने लाना तथा उन्हें शासन की योजनाओं से जोड़कर सकारात्मक परिवर्तन की राह दिखाना है।