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टैरिफ के फैसले पर ट्रंप के खिलाफ बढ़ी आवाज़, भारत सहित आलोचना हुई जोरदार

वाशिंगटन  भारत पर मोटा टैरिफ लगाकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत-अमेरिकी संबंधों को भी ताक पर रख दिया है। डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर रूसी तेल की खरीद कर यूक्रेन युद्ध में रूस की आर्थिक मदद का आरोप लगाते हुए भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगा दिया है। वहीं अमेरिकी दल ने भारत के साथ ट्रेड डील को लेकर चल रही बातचीत के अगले दौर को भी स्थगित कर दिया है। इन नीतियों की वजह से अब ट्रंप को घर में ही विरोध का सामना करना पड़ रहा है। अमेरिकी राजनेताओं और विशेषज्ञों ने ट्रंप की टैरिफ नीतियों और भारत पर लगाए गए शुल्कों की कड़ी आलोचना की है। बुधवार से भारत कर अतिरिक्त 25 फीसदी टैरिफ लागू होने के बाद कई अमेरिकी सांसदों, राजनयिकों और विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यह कदम अमेरिका की सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदारियों में से एक को नुकसान पहुंचा सकता है। हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी के डेमोक्रेट्स ने कहा है कि अमेरिका के इस कदम से चीन को फायदा मिल सकता है। बुधवार को एक पोस्ट में समिति ने आरोप लगाया कि सिर्फ भारत को निशाना बनाया जाना बिल्कुल सही नहीं है। पोस्ट में उन्होंने लिखा, “टैरिफ के साथ सिर्फ भारत पर ध्यान केंद्रित करने का ट्रंप का फैसला अमेरिकियों को नुकसान पहुंचा रहा है और इस प्रक्रिया में अमेरिका-भारत संबंधों खराब हो रहे हैं।" पोस्ट में आगे कहा गया, “अगर ट्रंप प्रशासन रूसी तेल खरीदने वाले हर देश पर अतिरिक्त प्रतिबंधों की धमकी का विकल्प चुनता, तो बात अलग होती। लेकिन सिर्फ भारत पर ध्यान केंद्रित करने के फैसले का नतीजा शायद सबसे भ्रामक नीतिगत फैसला है। रूसी तेल का सबसे बड़ा आयातक, चीन अभी भी रियायती दामों पर तेल खरीद रहा है और अब तक उसे ऐसी सजा नहीं दी गई है।” पूर्व उपराष्ट्रपति ने भी सुनाया वहीं अमेरिका के पूर्व उपराष्ट्रपति माइक पेंस ने भी ट्रंप की नीति की आलोचना की है। पेंस ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, "अमेरिकी कंपनियां और अमेरिकी उपभोक्ता अमेरिकी टैरिफ की कीमत चुका रहे हैं।" पेंस ने एक लेख भी शेयर किया जिसमें बताया गया था कि कैसे फोर्ड ने अपनी ज्यादातर गाड़ियां अमेरिका में बनाईं। इसके बावजूद सिर्फ तीन महीनों में 80 करोड़ डॉलर का टैरिफ चुकाया। मोदी को घुटने नहीं टेकने चाहिए- पूर्व उप विदेश मंत्री अमेरिका के पूर्व उप विदेश मंत्री कर्ट कैंपबेल ने अमेरिका और भारत की साझेदारी को 21वीं सदी में अमेरिका का सबसे महत्वपूर्ण रिश्ता बताया है। उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री मोदी को राष्ट्रपति ट्रंप के आगे घुटने नहीं टेकने चाहिए।" भारत में अमेरिका के पूर्व राजदूत केनेथ जस्टर ने भी इन चिंताओं को दोहराया और कहा कि अचानक टैरिफ की घोषणा एक कूटनीतिक झटका है जिससे अमेरिका का ही नुकसान होगा। रिपब्लिकन पार्टी से भी मिल रही आलोचना वहीं ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के कुछ नेताओं ने भी ट्रंप की नीतियों पर सवाल उठाए हैं। पूर्व संयुक्त राष्ट्र राजदूत और विदेश मंत्री पद की उम्मीदवार निक्की हेली ने हाल ही में कहा है कि व्यापार को लेकर भारत के साथ संबंधों को कमजोर करना एक रणनीतिक आपदा होगी, जिससे चीन का मुकाबला करने की अमेरिका की क्षमता कमजोर होगी। ट्रंप के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रहे जॉन बोल्टन ने टैरिफ को एक गलती करार दिया है और चेतावनी दी है कि इससे भारत चीन और रूस के करीब जा सकता है।  

दीपोत्सव 2025: अयोध्या में तैयारी जोरों पर, नोडल अधिकारी घोषित

अयोध्या उत्तर प्रदेश की रामनगरी अयोध्या में दीपोत्सव 2025 को लेकर तैयारी जोरशोर चल रही है। इसके लिए यूपी सरकार ने अधिकारियों की टीम भी गठित कर दी है। इसे लेकर एक पत्र भी जारी किया गया है। रामनगरी अयोध्या में आयोजित होने वाले भव्य दीपोत्सव 2025 की तैयारियां अब तेज हो गई हैं। उत्तर प्रदेश सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग ने दीपोत्सव आयोजन की निगरानी और समन्वय के लिए अधिकारियों की टीम गठित कर दी है। जारी आदेश के अनुसार, अरविंद कुमार मिश्रा और डॉ. जितेंद्र प्रताप सिंह को दीपोत्सव के लिए नोडल अधिकारी नामित किया गया है। ये दोनों अधिकारी आयोजन से जुड़े सभी कार्यक्रमों, व्यवस्थाओं और मीडिया समन्वय का कार्य संभालेंगे। यह आदेश सूचना निदेशक विशाल सिंह ने जारी किया है। उत्तर प्रदेश सरकार सूचना एवं जन संपर्क विभाग द्वारा जारी संशोधित आदेश के अनुसार, अयोध्या में 19 अक्टूबर 2025 को प्रान्तीयकृत दीपोत्सव मेला का आयोजन होगा। बता दें कि पिछले साल 2024 में अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के बाद पहली बार भगवान राम के आगमन पर दीपोत्सव का आयोजन हुआ था। इस दौरान 25 लाख 12 हजार 585 दीये जलाकर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया गया। इसके साथ 1 हजार 121 लोगों ने एक साथ सरयू आरती कर एक नया रिकॉर्ड कायम किया। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्यक्रम का शुभारंभ पहला दीया जलाकर किया था। सरयू घाट पर लेजर और लाइट शो का आयोजन हुआ था, जिसमें दीयों और रंग-बिरंगी रोशनी से जगमगाता घाट, साउंड-लाइट शो के जरिए रामलीला का वर्णन किया गया। पहली बार 1,121 वेदाचार्यों ने एक साथ सरयू मैया की आरती की थी।

केजरीवाल ने दिल्ली चुनाव में हार पर कहा, ‘जो होता है, अच्छा होता है’

नई दिल्ली  दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने गुरुवार को दिल्ली में अपने विधायकों और पार्षदों की बैठक ली। अरविंद केजरीवाल ने पार्टी के जनप्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए दिल्ली चुनाव में पार्टी की हार का भी जिक्र किया और कहा कि उनका विश्वास ईश्वर में है और भगवान जो करता है अच्छे के लिए करता है। उन्होंने कहा कि आज दिल्ली की जनता उनकी सरकार को याद करने लगी है और आज चुनाव हो जाए तो सारी सीटें जीत जाएंगे। दिल्ली में 'आप' की तीन बार की सरकार को हटाकर सत्ता में आई भाजपा के कामकाज की आलोचना करते हुए अरविंद केजरीवाल ने कहा, ‘दिल्ली में छह महीने से…. मैं भगवान में बहुत यकीन करता हूं। मैं समझता हूं भगवान जो करता है अच्छे के लिए करता है। छह महीने में इन्होंने ऐसा कर दिया दिल्ली के अंदर, शायद भगवान यही दिखाना चाहता था कि आम आदमी पार्टी वाले कितने अच्छे थे। आज जनता याद कर रही है। मेरे पास काफी लोग आते हैं, कोई कहता है कि आज चुनाव हो जाएं तो 60 सीटें आएंगी, कोई कहता है कि 65 सीटें आएंगी, कोई कहता है कि 70 की 70 सीटें आएंगी।’ केजरीवाल ने रेखा गुप्ता सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि लुटियंस दिल्ली में भी पांच-पांच बार लाइट जाती है। उन्होंने कहा, ‘10 साल से बिजली नहीं गई थी। सारे इनवर्टर वालों की दुकानें बंद हो गई थीं। दोबारा खुलवा दी। मैं लुटियंस दिल्ली में रहता हूं, पीएम का घर और राष्ट्रपति भवन थोड़ी दूरी पर है। मेरे घर रोज 5-5 बार बिजली जाती है। कभी आधे घंटे के लिए कभी एक घंटे के लिए। बाकी दिल्ली का तो क्या हाल कर दिया, पूरी दिल्ली में बिजली जा रही है। बच्चों की फीस बढ़ गई, सड़कें टूटी पड़ी हैं। एक बारिश में दिल्ली का बुरा हाल हो जाता है। सीवर जाम पड़े हैं, पानी नहीं आ रहा है। चारों तरफ झुग्गियां तोड़ रहे हैं। गरीबों का तो जीना हराम कर दिया।’ कांग्रेस और भाजपा में समझौता: केजरीवाल आप प्रमुख ने कहा कि 15 साल में कांग्रेस का जो हाल हुआ था, वह भाजपा सरकार ने छह महीने में कर दिया। उन्होंने कहा कि जनता को पांच साल बाद मौका मिलेगा इन्हें हटाने का। उन्होंने भाजपा और कांग्रेस के बीच समझौते का आरोप भी लगाया और कहा कि जनता कह रही है कि उनके इतने नेता गिरफ्तार हो गए, कांग्रेस का एक भी नेता क्यों नहीं जेल गया। मुफ्त बिजली बंद करने जा रहे हैं: केजरीवाल अरविंद केजरीवाल ने अपने जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं को अगले चुनाव तक जनता के बीच रहकर काम करने को कहा। उन्होंने कहा, 'जनता के बीच में रहो। मुझे पता चला है कि ये बिजली की सब्सिडी खत्म करने जा रहे हैं। दिल्ली के अंदर जो फ्री बिजली मिल रही है, यह इन्हे तकलीफ दे रही है। जनता के बीच रहे, जनता के सुख दुख में काम आओ। भगवान ने संदेश दिया है कि जब तक अगला चुनाव नहीं होता, अगले चुनाव में फिर सरकार चलाने का मौका मिलेगा। तब तक जनता के बीच रहकर काम करते रहेंगे।'  

हाई कोर्ट ने गुरुग्राम मेयर के जाति प्रमाण पत्र मामले में उपायुक्त को नोटिस और 30 दिन का समय दिया

गुरुग्राम नगर निगम गुरुग्राम की मेयर राजरानी मल्होत्रा का जाति प्रमाण पत्र सही है या नहीं, इसकी जांच उपायुक्त करेंगे। यह आदेश पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने फर्जी जाति प्रमाण होने को लेकर डाली गई याचिका पर 25 अगस्त को सुनवाई करते हुए जारी किया है। उपायुक्त को 30 दिनों के भीतर जांच पूरी कर सच्चाई सामने लाने को कहा गया है। साथ ही वादी पक्ष को इस संबंध में हरियाणा सरकार द्वारा बनाई गई स्टेट कमेटी के सामने अपना पक्ष रखने को भी कहा गया है। याचिकाकर्ता यशपाल प्रजापति का आरोप है कि मेयर राजरानी मल्होत्रा ने चुनाव लड़ने के लिए अपनी जाति बदलकर पिछड़ा वर्ग-ए का जाति प्रमाण पत्र बनवाया है। राजरानी मल्होत्रा जाति से पंजाबी जाट खत्री हैं। चुनाव लड़ने के लिए उन्होंने फर्जी तरीके से सुनार दर्शा कर बैकवर्ड क्लास का सर्टिफिकेट जारी करवाया है। प्रजापति ने फर्जी प्रमाण पत्र को रद कर सख्त कार्रवाई की मांग की है। याचिकाकर्ता ने मेयर पद के लिए कांग्रेस पार्टी से उम्मीदवार रहीं सीमा पाहूजा के ऊपर भी फर्जी जाति प्रमाण पत्र बनवाने का आरोप लगा रखा है। न्यायालय ने यह भी कहा है कि अगर उपायुक्त 30 दिनों में जांच नहीं करते हैं तो याचिकाकर्ता राज्य स्तर की जांच समिति के समक्ष अपील करने के लिए स्वतंत्र है। इधर, जाति प्रमाण पत्र सही है या नहीं, इसकी जांच पूरी होने तक जिला अदालत में भी एक याचिका दायर है। याचिकाकर्ता अधिवक्ता बनवारी लाल का दावा है कि मेयर का जाति प्रमाण पत्र फर्जी है। उनके पास प्रमाण हैं। चुनाव लड़ने के लिए फर्जी प्रमाण बनवाया गया। उनकी मांग है कि जब तक मामले की जांच पूरी नहीं हो जाती है जब तक मेयर को उनके अधिकार से वंचित किया जाए यानी उन्हें काम करने पर रोक लगाई जाए।  

स्वागत समारोह में पीएम मोदी को दी गई गाली, वायरल हुआ वीडियो

पटना/ नई दिल्ली  राहुल गांधी और तेजस्वी यादव के नेतृत्व में चल रही वोटर अधिकार यात्रा के दौरान बुधवार को दरभंगा जिले में सिंहवाड़ा प्रखंड में एक मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मां की गाली दी गई है। इसका वीडियो वायरल है जिसकी पुष्टि हिन्दुस्तान नहीं कर रहा हैं। कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि पार्टी के मंच पर ऐसा नहीं हुआ है, लेकिन उनके मंच से कुछ दूर टिकट के एक दावेदार के मंच पर इस बदतमीजी की बात बताई जा रही है। वायरल वीडियो जाले विधानसभा सीट से कांग्रेस का टिकट मांग रहे मोहम्मद नौशाद के समर्थन में अलग से बनाए गए मंच का बताया जा रहा है। वीडियो में दिख रहा है कि अपशब्द का प्रयोग होने के बाद एक आदमी इसे गलत बताते हुए माइक लेता है और नौशाद के समर्थन में नारे लगवाने लगता देता है। पीएम मोदी को दिवंगत मां की गाली देने से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेता उबल पड़े हैं। भाजपा ने कहा कि राजनीति में ऐसी नीचता पहले कभी नहीं देखी गई। यह यात्रा अपमान, घृणा और स्तरहीनता की सारी हदें पार कर चुकी है। पार्टी ने कहा है कि यह ऐसी गलती है कि राहुल और तेजस्वी अगर हजार बार कान पकड़कर उठक-बैठक करके भी माफी मांगें, तब भी बिहार की जनता उन्हें माफ नहीं करेगी। भाजपा मुख्यालय में संबित पात्रा ने इसको लेकर पीसी की है। केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय, डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी समेत भाजपा के कई नेताओं ने अपशब्द कहने की भर्त्सना की है। इस मसले पर अभी तक राहुल गांधी या तेजस्वी यादव का कोई बयान नहीं आया है। वायरल वीडियो के संबंध में कांग्रेस से टिकट के दावेदार जाले इलाके के नेता मोहम्मद नौशाद से जब पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उनके मंच का यह वीडियो एडिट किया हुआ हो सकता है। उन्होंने कहा कि वो राहुल गांधी के काफिले में मुजफ्फरपुर की ओर जा रहे थे। प्रधानमंत्री मोदी का सम्मान करने की बात करते हुए नौशाद ने कहा कि यह घटना उनके समर्थकों ने नहीं की है। इसकी जांच होनी चाहिए। सिंहवाड़ा प्रखंड कांग्रेस अध्यक्ष रेयाज अहमद डेजी ने बताया कि पार्टी की तरफ से अतरबेल में एक होटल के पास गठबंधन का मंच बना था। वहां सभी दलों के नेता-कार्यकर्ता झंडा-बैनर के साथ जुटे थे। रेयाज ने इसकी निंदा की और कहा कि कांग्रेस के मंच पर यह घटना नहीं हुई है। कांग्रेस के विधानसभा प्रभारी मेराज अली ने बताया कि पार्टी कार्यकर्ताओं ने जो मंच बनाया था, वहां राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और तेजस्वी यादव कुछ सेकंड के लिए रुके भी थे, लेकिन आगे बनाए गए नौशाद के मंच के सामने उनका काफिला रुका तक नहीं था। सिमरी थानाध्यक्ष अरविंद कुमार ने बताया कि वायरल वीडियो की जानकारी उन्हें नहीं मिली है और ना ही कहीं से कोई शिकायत मिली है। इसकी शिकायत मिलने पर नियमानुकूल कारवाई की जाएगी। प्रखंड प्रमुख पुष्पा झा, मुखिया संघ के अध्यक्ष पप्पू चौधरी, समाजसेवी गणेश चौबे, निर्भय कुमार, संजय कुमार, शंभू ठाकुर समेत कई संघ-संगठनों के लोगों ने मोदी को अपशब्द कहने की तीखी निंदा की है। क्या है वायरल वीडियो में वायरल वीडियो में ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ नारे लगाती साधारण कार्यकर्ताओं की बड़ी भीड़ मंच पर दिख रही है। राहुल, प्रियंका या तेजस्वी की सुरक्षा व्यवस्था ऐसी है, जिसमें मंच पर इस तरह की भीड़ और इस तरह के लोग चढ़ नहीं पाते। इसी नारेबाजी के दौरान एक आदमी की आवाज आती है जो पीएम मोदी की मां को लेकर अपशब्द कहता है। मंच पर तभी एक आदमी की यह आवाज आती है कि गलत है, गलत है और फिर सामान्य नारेबाजी शुरू हो जाती है।  

बड़े औद्योगिक और श्रम सुधारों की ओर बढ़ रहा उत्तर प्रदेश: मुख्यमंत्री

राज्य में जल्द आएगा ’सुगम्य व्यापार (प्रावधानों का संशोधन) विधेयक  लखनऊ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के रिफॉर्म, परफॉर्म, ट्रांसफॉर्म के मंत्र के अनुरूप मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में औद्योगिक व श्रम सुधारों की दिशा में बड़े कदम उठाना शुरू कर दिए हैं। राज्य में उद्योग और व्यापार से जुड़े 13 राज्य अधिनियमों के लगभग 99 फीसदी आपराधिक प्रावधान समाप्त करने की तैयारी कर रही है। ऐसा होने पर उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य बनने जा रहा है, जो व्यावहारिकता के दृष्टिकोण से इतने बड़े पैमाने पर आपराधिक प्रावधानों को गैर-आपराधिक श्रेणी में परिवर्तित करेगा। गुरुवार को एक उच्चस्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस को और सशक्त बनाने के लिए नए कदम उठाना समय की मांग है। साथ ही यह भी उतना ही आवश्यक है कि औद्योगिक विकास के साथ श्रमिकों की सुरक्षा और सुविधा की गारंटी सुनिश्चित हो। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘श्रमेव जयते’ के भाव को आत्मसात करते हुए हमें ऐसे सुधार करने होंगे, जो उद्यमियों और श्रमिकों; दोनों के लिए लाभकारी सिद्ध हों। मुख्यमंत्री के निर्देश पर राज्य सरकार शीघ्र ही ‘सुगम्य व्यापार (प्रावधानों का संशोधन) विधेयक, 2025’ लाने जा रही है। इसके अंतर्गत आबकारी अधिनियम, शीरा अधिनियम, वृक्ष संरक्षण अधिनियम, राजस्व संहिता, गन्ना अधिनियम, भूगर्भ जल अधिनियम, नगर निगम अधिनियम, प्लास्टिक कचरा अधिनियम, सिनेमा अधिनियम तथा क्षेत्र व जिला पंचायत अधिनियम सहित कई कानूनों को अधिक व्यावहारिक स्वरूप दिया जाएगा। इनमें जहां पहले कारावास की सज़ा का प्रावधान था, वहां अब अधिक आर्थिक दंड व प्रशासनिक कार्रवाई को वरीयता देने की योजना है। नए प्रावधानों पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अनावश्यक दंडात्मक प्रावधानों को समाप्त कर, उनकी जगह पारदर्शी और न्यायसंगत व्यवस्था लागू करना समय की मांग है। बैठक में अवगत कराया गया कि इस विधेयक पर संबंधित 14 विभागों से राय ली गई है। अधिकांश विभाग सहमत हैं, जबकि कुछ ने आपत्तियाँ दर्ज कराई हैं। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि आपत्तियों और सुझावों पर गंभीरता से विचार करते हुए विधेयक को ऐसा स्वरूप दिया जाए, जो उद्योग और श्रमिकों के हितों में संतुलित हो। बैठक में श्रम कानूनों के सरलीकरण पर भी चर्चा हुई। प्रस्तावों में फैक्ट्री लाइसेंस की अवधि बढ़ाने, दुकानों व प्रतिष्ठानों के नियमों में व्यावहारिक बदलाव करने और महिलाओं को अधिक अवसर उपलब्ध कराने जैसे कदम शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि निरीक्षण व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए स्व-सत्यापन और थर्ड पार्टी ऑडिट की प्रणाली अपनाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि इन सुधारों से जहां उद्योगों का बोझ कम होगा, वहीं श्रमिकों का हित भी सुरक्षित होगा। सुधारों की शृंखला में ‘निवेश मित्र 3.0’ पर भी विचार-विमर्श हुआ।  इसके तहत निवेशकों की आवेदन व अनुमोदन प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और सुगम बनाया जाएगा। कॉमन एप्लिकेशन फॉर्म, पैन-आधारित पहचान, स्मार्ट डैशबोर्ड, बहुभाषी सहायता और एआई चैटबॉट जैसी सुविधाएँ जोड़ी जाएंगी। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि सेवाओं की समयबद्ध डिलीवरी और निवेशकों की शिकायतों का त्वरित समाधान सुनिश्चित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि निवेश मित्र पोर्टल का नया संस्करण शीघ्र ही लॉन्च किया जाए, जिससे ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस को नई मजबूती मिलेगी।  

मध्य प्रदेश फार्मेसी काउंसिल: पंजीयन नवीनीकरण अब फेस स्कैन से संभव

भोपाल मध्य प्रदेश मेडिकल काउंसिल की तरह अब फार्मेसी काउंसिल में भी पंजीयन नवीनीकरण के लिए फार्मासिस्ट का भौतिक सत्यापन अनिवार्य करने की तैयारी है। 60 वर्ष से कम उम्र वालों का आधार केवायसी से सत्यापन किया जाएगा, ताकि पता चल सके कि वे जीवित है या नहीं। इससे अधिक उम्र वालों को भोपाल में फार्मेंसी काउंसिल में उपस्थित होना पड़ेगा। ऐसा इसलिए, क्योंकि अभी सिर्फ कागजों के आधार पर पंजीयन नवीनीकरण हो जाता है, जिससे यही पता नहीं चलता कि जिसके नाम से पंजीयन वह व्यक्ति जीवित है या नहीं। इसी पंजीयन के आधार पर औषधि प्रशासन विभाग मेडिकल स्टोर का लाइसेंस जारी करता है। कई बार तो ड्रगिस्ट एवं केमिस्ट एसोसिएशन की तरफ से भी फार्मासिस्टों के नवीनीकरण आवेदन एकत्र करके काउंसिल में भेजे जाते हैं।       उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश मेडिकल काउंसिल ने भी पंजीकृत सभी डाॅक्टरों का आधार सत्यापन दो वर्ष पहले शुरू किया था।     कारण, कई डाॅक्टर दुनिया में नहीं रहे तो कुछ दूसरे राज्य या विदेश में चले गए पर काउंसिल में इसके बाद भी वह पंजीकृत हैं। सत्यापन में स्थिति सामने आ गई।     अब ऐसी ही व्यवस्था फार्मेसी काउंसिल करने जा रहा है। प्रदेश में 80 हजार से अधिक फार्मासिस्ट पंजीकृत हैं। हर पांच वर्ष में पंजीयन नवीनीकरण अनिवार्य है।     इनमें मेडिकल स्टोर संचालित करने वाले या सरकारी-निजी क्षेत्र में सेवा देने वाले फार्मासिस्टों का पंजीयन नवीनीकरण नहीं हुआ तो वे न तो दुकान चला सकते न ही सेवा दे सकते।     स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इसकी तैयारी चल रही है। लगभग एक माह में पंजीयन नवीनीकरण के लिए यह व्यवस्था प्रारंभ कर दी जाएगी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा- राज्य सरकार अन्य पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण दिलाने के लिए प्रतिबद्ध

जिन विभागों में गुंजाइश थी, वहां 27 प्रतिशत आरक्षण दिया गया मुख्यमंत्री डॉ. यादव की पहल को सभी राजनीतिक दलों ने सराहा भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण देने का विषय सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है। प्रदेश में सभी राजनीतिक दल अन्य पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए सहमत हैं। विभिन्न पक्षों के अधिवक्ता इस विषय में न्यायालय के सामने अपने-अपने बिन्दु रख रहे हैं। सर्वोच्च न्यायालय अन्य पिछड़ा वर्ग आरक्षण विषय पर 22 सितम्बर से प्रतिदिन सुनवाई करेगा। इस विषय पर सभी दलों की सहमति हो, इस संबंध में गुरूवार को मुख्यमंत्री निवास पर सर्वदलीय बैठक हुई। बैठक में सर्वसम्मति से संकल्प पारित किया गया कि इस विषय में सभी दल एकजुट होकर एक फोरम पर आएंगे और विभिन्न पक्षों के अधिवक्तागण भी 10 सितम्बर तक एक साथ बैठक करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण के संबंध में मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में हुई सर्वदलीय बैठक के बाद जारी अपने संदेश में यह बात कही। बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सभी राजनीतिक दल एक मत से राज्य में अन्य पिछड़ा वर्ग के सदस्यों को 27 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करने के लिए कटिबद्ध हैं। प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग के सदस्यों को राज्य शासन और उसके विभिन्न घटकों द्वारा की गई चयन प्रक्रिया में विभिन्न न्यायिक आदेशों के फलस्वरूप नियुक्ति आदेश जारी किए जाने से वंचित शेष 13 प्रतिशत अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र जारी किए जाने सभी दल एकजुट होकर इसे क्रियान्वित करने के लिए विधायिका, न्यायपालिका और कार्यपालिका के सभी फोरम पर मिलकर प्रयास करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने अन्य पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण देने की अपनी प्रतिबद्धता के अनुसार हरसंभव प्रयास किए हैं। जिन विभागों में गुंजाइश थी उन सभी विभागों में आरक्षण देने में सरकार पीछे नहीं रही। कई विभाग जिनमें स्टे नहीं था, जैसे लोक निर्माण विभाग आदि में 27 प्रतिशत आरक्षण दिया गया। इस विषय में राज्य सरकार वरिष्ठतम अधिवक्ताओं की सलाह लेने और राज्य सरकार का पक्ष रखने में उनका सहयोग लेने के लिए वर्तमान में भी सहमत और तत्पर हैं। उन्होंने कहा कि अन्य पिछड़ा वर्ग को उनका हक दिलाने में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर हो रही जातिगत जनगणना से भी मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा इस विषय पर सर्वदलीय बैठक आयोजित करने की पहल की राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने सराहना की। सर्वदलीय बैठक में शामिल सभी राजनैतिक दलों के प्रतिनिधियों और सदस्यों ने अन्य पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने के प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित किया। बैठक में प्रदेश अध्यक्ष कांग्रेस श्री जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष एवं विधायक श्री उमंग सिंघार, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष कांग्रेस श्री अरूण यादव, प्रदेश अध्यक्ष बहुजन समाज पार्टी श्री रमाकांत पिप्प्ल, प्रदेश अध्यक्ष समाजवाद पार्टी श्री मनोज यादव, प्रदेश अध्यक्ष गोंडवाना गणतंत्र पार्टी एवं विधायक श्री तलेश्वर सिंह मरकाम, प्रदेश अध्यक्ष आम आदमी पार्टी एवं महापौर नगर पालिक निगम सिंगरौली श्रीमती रानी अग्रवाल, भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी के श्री जे.पी दुबे, पूर्व मंत्री श्री कमलेश्वर पटेल तथा अधिवक्ता श्री वरूण ठाकुर उपस्थित थे। बैठक में पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्री श्री प्रहलाद पटेल, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर, अध्यक्ष पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग श्री रामकृष्ण कुसमारिया, विधायक एवं प्रदेश अध्यक्ष भाजपा श्री हेमंत खंडेलवाल, सतना सांसद श्री गणेश सिंह तथा विधायक श्री प्रदीप शामिल हुए। बैठक में एडवोकेट जनरल श्री प्रशांत सिंह ने वर्चुअली सहभागिता की। मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन, प्रमुख सचिव विधि श्री एन.पी. सिंह सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष श्री जीतू पटवारी ने सर्वदलीय बैठक को स्वागत योग्य पहल बताया। समाजवाटी पार्टी के श्री मनोज यादव ने कहा कि अन्य पिछड़ा वर्ग को उनका अधिकार मिलना चाहिए। पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्री श्री प्रहलाद पटेल, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष श्री हेमंत खंडलवाल तथा भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के श्री जे.पी. दुबे ने भी अपने विचार रखे। अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए शिक्षा एवं सेवाओं में आरक्षण 27 प्रतिशत किए जाने संबंधी जानकारी     दिनांक 08 मार्च 2019 को म.प्र. शासन द्वारा अध्यादेश जारी कर अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए शिक्षा एवं सेवाओं में आरक्षण 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत किया गया। दिनांक 14 अगस्त 2019 को विधानसभा में विधेयक पारित कर इसे कानून के रूप में लागू किया गया।     वर्तमान में 19 मार्च 2019 को दायर WP 5901/ 2019 (आशिता दुबे विरुद्ध मध्यप्रदेश शासन) सहित 40 से अधिक प्रकरण उच्चतर न्यायालयों में प्रचलन में हैं, जिनमें मूलतः अंतरिम आदेश द्वारा अध्यादेश/अधिनियम में 14 प्रतिशत से अधिक आरक्षण के क्रियान्वयन पर रोक लगाई गई है, परंतु अधिनियम की वैधानिकता पर न्यायालय द्वारा कोई प्रतिकूल टिप्पणी नहीं की गई है। अतः उपरोक्त अधिनियम आज की स्थिति में वैधानिक है एवं इसकी वैधानिकता पर वर्तमान में उच्चतम न्यायालय में याचिका क्रमांक Writ Petition (s) (Civil) No(s). 606/2025 में अंतिम सुनवाई 22 सितंबर 2025 से प्रारंभ होना नियत है।     दिनांक 19 मार्च 2019 को दायर याचिका WP 5901/2019 (आशिता दुबे विरुद्ध मध्यप्रदेश शासन) में अंतरिम आदेश द्वारा अध्यादेश के आधार पर 14 प्रतिशत से अधिक आरक्षण महावि‌द्यालय में प्रवेश के दौरान न देने के निर्देश दिये। (चिकित्सा शिक्षा विभाग) WP No.-25181/2019, WP No.-8923/2020 एवं 40 अन्य याचिकाओं में 27 प्रतिशत आरक्षण के साथ प्रकाशित विज्ञापनों (यथा MPPSC, PEB, TET आदि) पर रोक लगाई गई। उपरोक्त प्रकरणों में समय-समय पर पारित अंतरिम आदेश के कारण प्रावधानित 27 प्रतिशत अन्य पिछडा वर्ग आरक्षण का क्रियान्वयन प्रायोगिक रूप से संभव नहीं हो पाया है।     शासन द्वारा उच्च न्यायालय जबलपुर में प्रचलित WP No.-25181/2019, WP No.-8923/2020 एवं 40 अन्य याचिकाओं को WP 5901/2019 के साथ सम्मिलित कराया गया। उपरोक्त याचिकाओं में पारित अंतरिम आदेशों के म‌द्देनजर महाधिवक्ता के माध्यम से मध्यप्रदेश शासन द्वारा प्रभावी प्रतिरक्षण की कार्यवाही सुनिश्चित की गई।     दिनांक 29 सितंबर 2022 को सामान्य प्रशासन विभाग ‌द्वारा मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग को परीक्षा परिणाम दो भागों में, 87 प्रतिशत पदों पर मुख्य तथा 13 प्रतिशत पदों पर प्रावधिक परिणाम घोषित करने के निर्देश जारी किये गए।     दिनांक 27 जनवरी 2024 को सामान्य प्रशासन … Read more

12.41 करोड़ रुपये से हरियाणा के शहर में बनेगी स्लिप रोड, जाम की समस्या खत्म

हिसार  हिसारवासियों के लिए खुशखबरी आई है। दरअसल शहर से ट्रैफिक दबाव कम करने के लिए 5 स्थानों पर स्लिप रोड का निर्माण और अन्य कामों के लिए 1241.03 लाख रुपये स्वीकृत कर लिए गए है। इसकी जानकारी कैबिनेट मंत्री रणबीर सिंह गंगवा ने दी है।  कैबिनेट मंत्री ने बताया कि क्लॉथ मार्केट के पास तुलसी चौक टी जंक्शन पर स्लिप रोड बनाने के लिए 76.93 लाख रुपये, ऑटो मार्केट टी जंक्शन नजदीक जीजेयू के पास स्लिप रोड निर्माण के लिए 174.30 लाख रुपये, लघु सचिवालय के पास हिसार राजगढ़ रोड और साउथर्न बाईपास पर स्लिप रोड निर्माण के लिए 385.81 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। उन्होंने कहा कि इसी प्रकार से डाबड़ा चौक जंक्शन के सुधार के लिए स्लिप रोड निर्माण के लिए 94.78 लाख रुपये स्वीकृत किए गए है। वहीं हिसार राजगढ़ रोड और दक्षिण बाईपास के समीप बालसमंद सब ब्रांच पर RCC बॉक्स टाइप पुल सहित स्लिप रोड के निर्माण के लिए 509.21 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। हालांकि मंत्री ने कहा कि सभी कामों पर जल्द से जल्द काम शुरू करने को लेकर विभागों को निर्देश जारी किए जा चुके हैं। 

PAK ने खुद के शख्स को अपनाने से किया मना, हाईकोर्ट में अटकी सुनवाई

कोलकाता कलकत्ता हाईकोर्ट के सामने हाल ही में तब बड़ी दुविधा खड़ी हो गई है कि जब पाकिस्तान ने भारतीय जेल में बंद अपने ही नागरिक की रिहाई के बाद उसे स्वीकारने से ही मना कर दिया है। इससे पहले शख्स को विदेशी नागरिक ठहराया गया था और वह बीते एक दशक से अधिक समय से जेल में बंद था। अब रिहाई के बाद भी पाकिस्तान उसे वापस लेने से मना कर रहा है, जिसके बाद कोर्ट ने शख्स के भविष्य को लेकर केंद्र से राय मांगी है। वहीं फिलहाल दमदम केंद्रीय कारावास में बंद पी. यूसुफ नाम के इस शख्स ने हाईकोर्ट से उसे पाकिस्तान वापस भेजने का निर्देश देने का अनुरोध किया है। सुनवाई के दौरान जस्टिस अमृता सिन्हा ने भारत सरकार की ओर से पेश वकील को निर्देश दिया कि वह यूसुफ के संबंध में आगे की कार्रवाई के लिए उचित निर्देश प्राप्त करें। अदालत ने बुधवार को निर्देश दिया, ‘‘याचिकाकर्ता को रिहा करना है या उसे हिरासत में रखना है, इस बारे में अधिकारियों को स्पष्ट रूप से निर्देश दिए जाए।” अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 17 सितंबर के लिए निर्धारित की है। 2012 में हुआ था गिरफ्तार जानकारी के मुताबिक यूसुफ को 2012 में बांग्लादेश से पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले में सीमा पार कर अवैध रूप से भारत में प्रवेश करने के बाद गिरफ्तार किया गया था। चार अप्रैल 2013 को दोषी ठहराए जाने के बाद उसे 650 दिनों के कारावास की सजा सुनाई गई थी।उसके वकील ने बताया कि यूसुफ को सजा बहुत पहले पूरी कर लेने के बावजूद वापस नहीं भेजा गया और वह अब भी दमदम केंद्रीय कारागार में बंद है। पाकिस्तान ने किया इनकार वहीं पश्चिम बंगाल सरकार के वकील ने अदालत में सुधार सेवा निदेशालय के प्रभारी अधिकारी की एक रिपोर्ट पेश की। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान यूसुफ को अपना नागरिक नहीं मान रहा है। रिपोर्ट में कहा गया कि यूसुफ को दो बार ‘कांसुलर एक्सेस’ दिया गया और दिल्ली स्थित पाकिस्तान उच्चायोग ले जाया गया। राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि यूसुफ के साथ कैद दो अन्य लोगों को पाकिस्तान ने अपना नागरिक स्वीकार कर लिया, जबकि यूसुफ को नागरिक स्वीकार नहीं किया। सरकार ने दिए तर्क कोर्ट को यह भी बताया गया कि पाकिस्तान से इनकार मिलने के बाद शख्स ने हाईकोर्ट की दूसरी पीठ के सामने दावा किया कि वह एक भारतीय नागरिक है और उसने केरल में कुछ जमीन की खरीद के कुछ कागज भी पेश किए। हालांकि पश्चिम बंगाल सरकार के वकील ने अदालत में दलील दी कि केरल सरकार की एक रिपोर्ट में बताया गया कि यूसुफ ने कन्नूर के एक स्कूल में सातवीं कक्षा तक पढ़ाई की थी लेकिन उसके बाद अपने पिता मीर मोहम्मद के साथ पाकिस्तान चला गया था। केंद्र सरकार की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि यूसुफ एक विदेशी नागरिक है।