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मध्य प्रदेश में 14 अक्टूबर को 3,310 लाख यूनिट बिजली सप्लाई, जल और ताप विद्युत उत्पादन में आई कमी

बिजली की कमी को दूर करने प्रयास जारी : ऊर्जा मंत्री तोमर भोपाल  ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया है कि प्रदेश में इस वर्ष कुछ क्षेत्रों में हुई अल्पवृष्टि, धान की सिंचाई एवं पलेवा के लिए बिजली की मांग में अचानक वृद्धि हुई है। पिछले वर्ष 14 अक्टूबर 2025 की अधिकतम मांग 11874 मेगावाट थी जो इस वर्ष 17124 मेगावाट हो गयी है। मतलब मांग मे लगभग 5000 मेगावाट की वृद्धि हुई है। पिछले वर्ष 1 अक्टूबर 25 को कृषि के लिये बिजली की मांग 1752 मेगावाट होती थी जो इस वर्ष 01 अक्टूबर 26 को ही 3701 मेगावाट हो गयी है। ऊर्जा मंत्री तोमर ने बताया है कि पिछले वर्ष के मुक़ाबले 14 अक्टूबर 2026 को 38.6 प्रतिशत अधिक विद्युत प्रदाय की गयी है। पिछले वर्ष 2423 लाख यूनिट विद्युत प्रदाय की गयी थी, जबकि इस वर्ष 3310 लाख यूनिट विद्युत आपूर्ति की गयी। वर्षा की कमी के कारण जल विद्युत उत्पादन क्षमता में भी कमी आई है। इससे गांधीसागर, ओंकारेश्वर, इंदिरा सागर, राजघाट और सरदार सरोवर से जल विद्युत उत्पादन मे लगभग 1500 मेगावाट कमी आई है। पूरे देश मे कोयले की कमी एवं तकनीकी समस्या के कारण ताप विद्युत इकाइयों की ट्रिपिंग से ताप विद्युत उत्पादन में भी कमी आई है। ताप विद्युत गृहों मे तकनीकी समस्या के कारण भी लगभग 1000 मेगावाट उत्पादन प्रभावित हुआ है। भारत के प्रमुख बिजली एक्सचेंज, इंडियन एनर्जी एक्सचेंज मे 13 अक्टूबर 2026 की स्थिति मे पीक आवर्स मे बिजली खरीदने की अधिकतम बोली लगभग 70 हजार मेगावाट की रही ,जबकि उक्त अवधि मे बेंचने वाले केवल 500 मेगावाट (लगभग) रहे, और उसकी दर भी 10 रूपये प्रति यूनिट है। पूरे देश मे बिजली की कमी है। वर्तमान में बिजली एक्सचेंज मे भी बिजली उपलब्ध नही है। प्रदेश मे विद्युत की पर्याप्त उपलब्धता हो इसके लिए उत्तर प्रदेश से पीक घंटो मे 500 मेगावॉट पॉवर ले रहे हैं और भारत के प्रमुख बिजली एक्सचेंज से भी विद्युत खरीदने के प्रयास किए जा रहे हैं। इकाइयाँ जो वार्षिक संधारण के कारण बंद हैं उनको भी जल्दी शुरू करने के प्रयास किए जा रहे हैं। खंडवा और बीरसिंहपुर की इकाई में मेंटेनेन्स के बाद पुन: ऊर्जा उत्पादन शुरू हो गया हैं। इससे लगभग 1000 मेगावाट ऊर्जा उपलब्धता में वृद्धि हो गई है। 20 अक्टूबर 2026 तक लेनको पॉवर एवं एनटीपीसी गाडरवाड़ा की यूनिट से भी बिजली उपलब्ध हो जायेगी। इससे लगभग 600 मेगावाट की ऊर्जा उपलब्धता में वृद्धि होगी। इसके अतिरिक्त तकनीकी कारणों से बंद हुई लगभग 1200 मेगावाट की इकाइयां भी 1 से 2 दिन मे प्रारंभ हो जायेगी। प्रदेश मे 16 अक्टूबर 2026 से 500 मेगावॉट की बैंकिंग ऊर्जा भी उपलब्ध होने लगेगी। इस प्रकार आगामी सप्ताह से लगभग 3 से 4 हजार मेगावॉट अतिरिक्त ऊर्जा उपलब्ध हो जायेगी, इससे वर्तमान मे उत्पन्न बिजली की कमी दूर होने की पूरी संभावना है। रबी सीज़न में विद्युत उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु किए जा रहे उपाय गत वर्ष 3600 मिलियन यूनिट की तुलना में लगभग 225 मिलियन यूनिट अतिरिक्त अग्रिम बैंकिंग की गई है, जिससे 01.11.2026 से 10.03.2027 तक 407 से 3,900 मेगावॉट विद्युत प्राप्त होगी।   

MP में औद्योगिक विकास को मिलेगी रफ्तार, धरमपुरा और आष्टा में बनेंगे विशाल इंडस्ट्रियल पार्क

इंदौर/भोपाल/जबलपुर  मध्यप्रदेश में विकास की नई इबारत लिखने की तैयारी हो रही है। राज्य के तीन प्रमुख शहरों इंदौर, भोपाल और जबलपुर को जोड़ने वाले प्रस्तावित 600 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेस-वे के किनारे प्रदेश का सबसे बड़ा और पहला इंडस्ट्रियल कॉरिडोर विकसित किया जाएगा। यह एक्सप्रेस-वे महज शहरों के बीच सफर का रास्ता नहीं होगा, बल्कि इसके आसपास के इलाकों में नए औद्योगिक क्षेत्र बसाए जाएंगे, जो नए उद्योगों की स्थापना का मुख्य आधार बनेंगे। धरमपुरा और आष्टा में बनेंगे विशाल औद्योगिक पार्क     इस महात्वाकांक्षी परियोजना के तहत जबलपुर और भोपाल के बीच धरमपुरा में 576 करोड़ रुपये की लागत से 954 एकड़ में एक मल्टी-प्रोडक्ट इंडस्ट्रियल पार्क तैयार किया जा रहा है। यह जगह जबलपुर से मात्र 40 किमी और भोपाल से 297 किमी की दूरी पर स्थित है। वहीं, भोपाल और इंदौर के मध्य सीहोर जिले के आष्टा में लगभग 21 हजार एकड़ (8,482 हेक्टेयर) जमीन पर एक और विशाल औद्योगिक पार्क प्रस्तावित है। इसके अलावा बढ़ियाखेड़ी और झीलेरा में भी नए औद्योगिक केंद्र विकसित किए जाएंगे। आष्टा वाले प्रोजेक्ट के लिए सरकार 5 हजार हेक्टेयर निजी जमीन का अधिग्रहण करेगी, जबकि 6 हजार एकड़ सरकारी और औद्योगिक विकास निगम की जमीन पहले से उपलब्ध है। जमीन अधिग्रहण के लिए बनेगी स्पेशल कंपनी (SPV)     सड़क किनारे उद्योगों के लिए माकूल जमीन तलाशने का जिम्मा एक नई स्पेशल पर्पज व्हीकल (एसपीवी) कंपनी को सौंपा जाएगा। सरकार इस कंपनी को जमीन अधिग्रहण के विशेष अधिकार भी दे सकती है। गुरुवार को होने वाली कैबिनेट बैठक में इस कंपनी के गठन को मंजूरी मिलने की पूरी संभावना है। इसके लिए सरकार एक अलग कंपनी (एसपीवी) बनाएगी, जो सड़क के आसपास उद्योगों के लिए उपयुक्त जमीन तलाशेगी। कंपनी को जमीन अधिग्रहण के अधिकार भी दिए जा सकते हैं। प्रस्ताव गुरुवार को कैबिनेट में आ सकता है। मंजूरी मिली तो यह प्रदेश का पहला और सबसे बड़ा इंडस्ट्रियल कॉरिडोर होगा। एक साल में नए निवेश क्षेत्र तय होंगे 1. जबलपुर-भोपाल के बीच धरमपुरा में 954 एकड़ में मल्टी प्रोडक्ट इंडस्ट्रियल पार्क विकसित होगा। इस पर 576 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। यह जबलपुर से 40 किमी, सिवनी से 156 किमी, नागपुर से 260 किमी, भोपाल से 297 किमी दूर होगा। 2. भोपाल-इंदौर के बीच सीहोर जिले के आष्टा में 8,482 हेक्टेयर यानी करीब 21 हजार एकड़ में औद्योगिक पार्क प्रस्तावित है। इसके अलावा बड़ियाखेड़ी और झीलेला में औद्योगिक क्षेत्र विकसित होंगे। यहां 6 हजार एकड़ सरकारी और मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम की जमीन है। 5 हजार हेक्टेयर निजी अधिग्रहीत करेंगे। 3. कैबिनेट की मंजूरी के बाद कंपनी बनेगी उद्योग विभाग ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट से पहले जमीन की उपलब्धता व सड़क संपर्क की संभावनाएं तलाश रहा है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद अलग कंपनी गठित होगी। यह एक साल में तय करेगी कि एक्सप्रेस-वे के आसपास किन-किन जगहों पर नए औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए जा सकते हैं। प्रस्ताव के मुताबिक, किराया राज्य के बजाय कलेक्टर की अध्यक्षता वाली जिला समिति तय करेगी। प्रदेश के 19 जिलों में बस संचालन के लिए ऑपरेटर नहीं मिलने से करीब 1.5 लाख बच्चे परेशान हैं। विभिन्न विभागों की योजनाएं 31 मार्च 2031 तक जारी रखने के प्रस्ताव भी रखे जाएंगे। कैबिनेट की हरी झंडी मिलने के बाद, यह कंपनी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट से पहले कनेक्टिविटी और जमीन की उपलब्धता तलाशेगी और एक साल के भीतर यह तय करेगी कि एक्सप्रेस-वे के आसपास किन-किन जगहों पर उद्योग स्थापित किए जा सकते हैं।     गौरतलब है कि प्रदेश के 19 जिलों में बस ऑपरेटर नहीं मिलने के कारण करीब 1.5 लाख बच्चों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसके अतिरिक्त, बैठक में नए जिलों (निवाड़ी, मैहर, मऊगंज और पांढुर्ना) में महिला एवं बाल विकास विभाग के कार्यालय खोलने और विभिन्न विभागों की योजनाओं को 31 मार्च 2031 तक निरंतर रखने के प्रस्ताव भी रखे जाएंगे।  

इंदौर में 14 इंच कम बारिश से बढ़ी चिंता, भूजल स्तर आधा; जलसंकट से निपटने के लिए मांगे ₹50 करोड़

इंदौर  इंदौर में इस बार कमजोर मानसून ने अगले साल गर्मी में जल संकट की आशंका बढ़ा दी है। शहर में सामान्य तौर पर होने वाली करीब 37 इंच बारिश के मुकाबले इस मानसून में लगभग 23 इंच पानी ही बरसा। यानी करीब 14 इंच बारिश कम हुई। इसका असर जलस्रोतों के साथ भूजल रिचार्ज पर भी दिखाई दे रहा है। यशवंत सागर सहित शहर के प्रमुख तालाबों में भी पिछले वर्षों की तुलना में कम पानी जमा हुआ है। वहीं, 2026 में भूजल रिचार्ज का आंकड़ा पिछले चार वर्षों के मुकाबले काफी नीचे आ गया है। 2008 में भी बनी थी जलसंकट की स्थिति इंदौर में वर्ष 2008 में भी करीब 20 इंच बारिश हुई थी और उस समय भी जल संकट की स्थिति बनी थी। अब 18 साल बाद कम बारिश के कारण एक बार फिर गर्मी में पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ रही है। शहर की बड़ी आबादी नर्मदा जलापूर्ति पर निर्भर है, लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक नर्मदा से मिलने वाले पानी की मात्रा बढ़ाने की गुंजाइश सीमित है। ऐसे में तालाबों में कम जलभराव, भूजल का लगातार दोहन और सप्लाई नेटवर्क में होने वाला नुकसान चुनौती बढ़ा सकते हैं। शहर की आबादी करीब 35 से 40 लाख मानी जाती है। घरेलू जरूरतों के लिए प्रतिदिन करीब 620 एमएलडी पानी की आवश्यकता का अनुमान है। औद्योगिक, व्यावसायिक, संस्थागत और अन्य उपयोग जोड़ने पर कुल मांग 750 से 800 एमएलडी तक बताई जाती है। नर्मदा से 440 एमएलडी पानी मिलने का आंकड़ा इसके मुकाबले नर्मदा से करीब 440 एमएलडी पानी मिलने का आंकड़ा दिया गया है। वितरण के दौरान लीकेज और अन्य कारणों से 20 से 22 प्रतिशत तक पानी का नुकसान होने की बात भी सामने आती है। ऐसे में उपलब्ध पानी का बेहतर प्रबंधन और वैकल्पिक स्रोतों को सुरक्षित रखना जरूरी है। पिछली गर्मियों में बोरवेल पर निर्भर आबादी के करीब 40 प्रतिशत हिस्से को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ा था। हालात संभालने के लिए करीब 700 टैंकरों से पानी पहुंचाना पड़ा। शहर में एक लाख से अधिक निजी बोरवेल और नगर निगम के करीब 6,500 बोरवेल व हाइड्रेंट बताए जाते हैं। लेकिन भूजल का लगातार दोहन भविष्य के लिए चिंता का विषय है। केंद्रीय भूजल बोर्ड की 2025 की रिपोर्ट में शहर और ग्रामीण क्षेत्रों को क्रिटिकल जोन में रखे जाने का उल्लेख है। भूजल दोहन का स्तर करीब 90 प्रतिशत बताया गया है, जो बढ़ने पर स्थिति और गंभीर हो सकती है। इंदौर शहर में 27 तालाब शहर में तालाबों की भूमिका भी अहम है। इंदौर में 27 तालाब हैं, जिनमें से सात प्रमुख तालाबों की निगरानी नगर निगम करता है। इनकी संयुक्त क्षमता करीब 2,880 करोड़ लीटर बताई गई है, जबकि उपलब्ध पानी का एक अन्य आकलन करीब 2,260 करोड़ लीटर है। 2022 से 2025 तक भूजल रिचार्ज का आंकड़ा लगभग 40 से 42 हजार हेक्टेयर मीटर के बीच रहा। 2026 में यह घटकर 21,039 हेक्टेयर मीटर रह गया। तालाबों में नहीं हुआ जलभराव इस बार कम बारिश के कारण तालाबों में अपेक्षित जलभराव नहीं हुआ। कुछ तालाबों में जलस्तर क्षमता के मुकाबले काफी नीचे है, जबकि कुछ के आंकड़ों का दोबारा मिलान जरूरी है। शहर के कई वार्डों में अपनी ओवरहेड टंकियां नहीं हैं। ऐसे क्षेत्रों में दूसरे वार्डों की टंकियों से पानी पहुंचाया जाता है। कुछ जगहों पर एक ही टंकी से तीन वार्डों तक आपूर्ति होती है। इससे सप्लाई के समय और वितरण पर दबाव बढ़ता है। पिछले साल मालवा मिल स्थित हाइड्रेंट को भी पहली बार बंद करना पड़ा था। इस बार संकट से बचने के लिए जलस्रोतों की स्थिति, टैंकरों की जरूरत, पाइपलाइन लीकेज और भूजल रिचार्ज पर समय रहते काम करने की जरूरत है। सीएम से 50 करोड़ का का पैकेज मांगा इस बीच महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से जल प्रबंधन के लिए 50 करोड़ रुपए के पैकेज की मांग की है। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की 15 अक्टूबर को नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अपर मुख्य सचिव, मंत्री तुलसी सिलावट और जलप्रदाय व नगर निगम के अधिकारियों के साथ बैठक प्रस्तावित है। इसमें नर्मदा-गंभीर लिंक के जरिए यशवंत सागर और बिलावली तालाबों तक पानी पहुंचाने की संभावना सहित जल संकट से निपटने के उपायों पर चर्चा हो सकती है। वार्डवार संकट का आकलन, टैंकरों की व्यवस्था, लीकेज सुधार, रिचार्ज पिट और वर्षा जल संचयन जैसे उपाय भी अहम होंगे। भूजल पर बढ़ती निर्भरता     शहर में एक लाख से अधिक निजी बोरवेल बताए जाते हैं।     नगर निगम के करीब 6,500 बोरवेल और हाइड्रेंट हैं।     पिछली गर्मियों में बोरवेल पर निर्भर आबादी के करीब 40 प्रतिशत हिस्से को गंभीर संकट का सामना करना पड़ा।     पानी की आपूर्ति के लिए करीब 700 टैंकर लगाने पड़े थे।     केंद्रीय भूजल बोर्ड की 2025 की रिपोर्ट में इंदौर शहर और ग्रामीण क्षेत्रों को क्रिटिकल जोन में रखने का उल्लेख है।     भूजल दोहन का स्तर करीब 90 प्रतिशत बताया गया है। पानी की गुणवत्ता भी चिंता 2019 में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 70 स्थानों पर बोरवेल के पानी के नमूनों की जांच किए जाने का उल्लेख है। इनमें से 69 नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे थे। इस आंकड़े का उपयोग करते समय जांच के मानक, प्रदूषण के प्रकार और रिपोर्ट का संदर्भ स्पष्ट करना जरूरी है। भूजल की उपलब्धता के साथ उसकी गुणवत्ता की नियमित जांच भी जरूरी है।

पंजाब में वोटर लिस्ट के विशेष पुनरीक्षण से बदलेगा चुनावी गणित? 13.60 लाख मतदाताओं की कटौती

चंडीगढ़  पंजाब में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। सूबे में एसआईआर के बाद मतदाताओं की संख्या 2.14 करोड़ से घटकर 2.01 करोड़ रह गई है। एसआईआर से पहले राज्य में 2,14,61,043 मतदाता पंजीकृत थे, जबकि अब जारी अंतिम सूची में 2,01,00,727 मतदाता दर्ज हैं। कुल 13,60,316 मतदाता कम हुए हैं, जबकि 13 अगस्त को जारी ड्राफ्ट सूची में 20,66,608 नाम हटाए गए थे। दावे-आपत्तियों के निपटारे के बाद 7,06,292 मतदाता बढ़े। एसआईआर की स्थिति देखें तो पंजाब में अधिकतर दिग्गजों के हलकों में जितने नए वोट जुड़े हैं, उससे ज्यादा कट गए हैं। वोटों का यही गणित आगामी विधानसभा चुनाव में सभी 117 सीटों पर नए सियासी समीकरण बनाएगा। लगभग सभी हलकों में मतदाताओं की संख्या घटी है। राजनीतिक मामलों के जानकार परमजीत सिंह कहते हैं कि यह देखना होगा कि किस हलके में कितने वोट कम हुए हैं और कितने बढ़े हैं, यानी दोनों के बीच अंतर कितना है। इससे राजनीतिक समीकरण बदलेंगे। वोट घटने से पारंपरिक जीत-हार के अंतर और जातिगत समीकरणों पर सीधा असर पड़ेगा। इससे आगामी चुनावों में मुकाबला रोचक और अप्रत्याशित होने की उम्मीद है। कहां कितने वोटर  मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान: धूरी हलके में एसआईआर से पहले 1,66,143 पंजीकृत मतदाता थे। अब 1,57,073 मतदाता हैं। 9,070 वोट कम हुए और 3,052 वोट बढ़े। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा: दिड़बा हलके में पहले 1,82,695 मतदाता थे। अब 1,83,640 मतदाता हैं। 945 मतदाता बढ़े। मंत्री अमन अरोड़ा: सुनाम हलके में एसआईआर से पहले 1,95,780 मतदाता थे। अब 1,89,779 मतदाता हैं। 6,001 मतदाता कम हुए और 1,148 बढ़े। मंत्री हरजोत बैंस: आनंदपुर साहिब हलके में पहले 1,91,727 मतदाता थे। एसआईआर के बाद 1,80,471 मतदाता हैं। 11,256 वोट कटे और 1,715 वोट जुड़े। मंत्री डॉ. बलजीत कौर: मलोट हलके में एसआईआर से पहले 1,94,875 मतदाता थे। अब इनकी संख्या 1,67,963 है। 26,912 वोट कटे और 2,564 वोट बढ़े। मंत्री हरभजन सिंह ईटीओ: जंडियाला हलके में एसआईआर से पहले 1,79,560 पंजीकृत मतदाता थे। अब 1,74,635 मतदाता हैं। 4,925 मतदाता घटे और 7,189 बढ़े। मंत्री लालचंद कटारूचक: भोआ हलके में पहले 1,94,845 मतदाता थे। अब 1,83,841 मतदाता हैं। 11,004 वोट कटे और 6,219 वोट जुड़े। मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंद: खन्ना हलके में पहले 1,74,061 मतदाता थे। अब 1,61,347 मतदाता हैं। 12,714 वोट कटे और 4,514 वोट बढ़े। मंत्री बरिंदर गोयल: लहरा हलके में पहले 1,74,451 मतदाता थे। अब 1,73,265 मतदाता हैं। 1,186 वोट कटे और 4,435 मतदाता बढ़े। मंत्री डॉ. रवजोत सिंह: शाम चौरासी हलके में एसआईआर से पहले 1,74,770 पंजीकृत मतदाता थे। अब 1,67,179 मतदाता हैं। 7,591 वोट कटे और 5,858 मतदाता बढ़े। मंत्री डॉ. बलबीर सिंह: पटियाला ग्रामीण हलके में पहले 2,20,255 मतदाता थे। अब 2,06,147 मतदाता हैं। 14,108 वोट कटे और 7,676 वोट बढ़े। मंत्री मोहिंदर भगत: जालंधर पश्चिम हलके में पहले 1,71,462 मतदाता थे। अब 1,63,415 मतदाता हैं। 8,047 वोट घटे और 9,698 वोट बढ़े। मंत्री संजीव अरोड़ा: लुधियाना पश्चिम हलके में पहले 1,74,437 मतदाता थे। अब 1,45,610 मतदाता हैं। 28,827 वोट कटे और 4,144 वोट बढ़े। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष परगट सिंह: जालंधर कैंट में एसआईआर से पहले 1,89,711 मतदाता थे। अब 1,76,638 मतदाता हैं। 13,073 वोट कटे और 8,595 वोट बढ़े। शिअद अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल: जलालाबाद हलके में पहले 2,13,903 मतदाता थे। अब 2,11,189 मतदाता हैं। 2,714 वोट घटे और 5,592 वोट बढ़े। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों: बरनाला हलके में पहले 1,80,088 मतदाता थे। अब 1,63,329 मतदाता हैं। 16,759 वोट कटे और 3,498 मतदाता बढ़े। नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा: कादियां हलके में एसआईआर से पहले 1,82,130 मतदाता थे। अब 1,79,762 मतदाता हैं। 2,368 मतदाता घटे और 10,190 बढ़े।  

राजा वड़िंग को लेकर सचिन पायलट का बड़ा बयान, पंजाब चुनाव के लिए कांग्रेस की क्या है रणनीति?

चंडीगढ़  पंजाब में कांग्रेस ने पिछले दिनों अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद से हटाकर परगट सिंह को कमान सौंपी। ऐसे में पंजाब की सियासत और कांग्रेस में अंदरूनी कलहों ने जोर पकड़ लिया। इस क्रम में अब राज्य के लिए पार्टी के केंद्रीय प्रभारी सचिन पायलट ने राजा वड़िंग के लिए बड़ी बात कही है। समाचार एजेंसी पीटीआई को दिए एक इंटरव्यू में सचिन पायलट ने उन्हें एक "लड़ाकू" बताया है। उन्होंने कहा कि अगले साल की शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनावों में वडिंग बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। राज्य के प्रभारी के रूप में कार्यभार संभालने के तुरंत बाद जब पायलट से पंजाब इकाई में हुए बदलाव के बारे में पूछा गया तो उन्होंने वड़िंग की तारीफ की और कहा कि उन्होंने संगठन को मजबूत करने के लिए कड़ी मेहनत की है। हालांकि, कांग्रेस महासचिव ने यह भी कहा कि कभी-कभी संगठन में बदलाव जरूरी हो जाते हैं। वड़िंग को 20 साल से जानता हूं: सचिन पायलट पायलट ने पीटीआई से कहा, "मैं आपको बता दूं कि मैं राजा वड़िंग को 20 साल से जानता हूं। वह बहुत ही ऊर्जावान और मेहनती युवा हैं। उन्होंने कांग्रेस पार्टी को तब मजबूत करने में मदद की, जब हमारे पास केवल 15-16 विधायक थे। वह बहुत ही चुनौतीपूर्ण समय था। उन्होंने चार साल से भी ज्यादा समय तक संगठन को मजबूत करने के लिए कड़ी मेहनत की है। पार्टी आलाकमान के फैसले के बाद, राजा वड़िंग ने 2 अक्टूबर को प्रदेश अध्यक्ष का पद छोड़ दिया और पूर्व ओलंपियन परगट सिंह ने यह जिम्मेदारी संभाली। उस समय राजा वड़िंग अपने पद से हटने के लिए परोक्ष रूप से पायलट को जिम्मेदार ठहरा रहे थे। इस हफ्ते की शुरुआत में परगट सिंह के कार्यभार संभालने के कार्यक्रम के दौरान राजा वडिंग ने कहा था कि हो सकता है पायलट उन्हें हटा दें या उन्हें चुनाव का टिकट भी न दें, लेकिन वह राहुल गांधी के एक सिपाही के रूप में कांग्रेस का झंडा ऊंचा रखना जारी रखेंगे। हालांकि, एक इंटरव्यू में पायलट ने वड़िंग की खूब तारीफ की। राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री ने कहा…     वह एक फाइटर हैं। लेकिन कभी-कभी संगठन में बदलाव होते रहते हैं। उत्तर प्रदेश में भी फरवरी में चुनाव होने हैं, वहां भी हमारे पास एक नई अध्यक्ष (आराधना मिश्रा-मोना) हैं। इसी तरह परगट सिंह जी को पंजाब का नया अध्यक्ष बनाया गया है। तो ये बदलाव समय-समय पर होते रहते हैं, जो इस बात पर निर्भर करता है कि हम आगे कैसे बढ़ना चाहते हैं। सचिन पायलट, कांग्रेस प्रभारी क्या राजा वड़िंग उपयुक्त नहीं थे? जब पायलट से पूछा गया कि क्या उन्हें लगता है कि राजा वड़िंग अब राज्य कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में उपयुक्त नहीं थे, तो पायलट ने कहा कि यह उपयुक्तता का सवाल ही नहीं है। उन्होंने कहा, "जैसा कि मैंने कहा, उन्होंने युवाओं के लिए बहुत काम किया है। उन्होंने युवाओं को आगे आने और आम आदमी पार्टी से मुकाबला करने के लिए प्रोत्साहित किया है। लेकिन चुनावों के दौरान कई बातों पर विचार करना पड़ता है, और नेतृत्व ने तय किया कि यूपी और पंजाब में नए अध्यक्ष नियुक्त किए जाने चाहिए।''  

Maa Katyayani Katha 2026: नवरात्रि के छठे दिन पढ़ें मां कात्यायनी की व्रत कथा

Navratri Day 6 2026 Maa Katyayani Katha: नवरात्रि के छठे दिन मां दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की पूजा करते हैं. इस बार नवरात्रि का छठा दिन यानि आश्विन शुक्ल षष्ठी तिथि 16 अक्टूबर को है. मां कात्यायनी चार भुजाओं वाली देवी हैं, वे अपनी भुजाओं में तलवार और कमल धारण करती हैं. उनकी एक भुजा अभय मुद्रा और एक भुजा वर मुद्रा में होती है. मां कात्यायनी की पूजा करने से यश और सफलता की प्राप्ति होती है. नकारात्मकता का नाश होता है, भक्तों को शक्ति और निडरता मिलती है. मां कात्यायनी सिंह पर सवारी करती हैं. सिंह पर सवार होकर माता असुरों का विनाश करती हैं. मां कात्यायनी कौन हैं? महिषासुर वध के लिए कैसे हुई देवी की उत्पत्ति? मां कात्यायनी की कथा पौराणिक क​था के अनुसार, प्राचीन समय में कात्यायन ऋषि थे, तो देवी भगवती के अनन्य भक्त थे. उन्होंने वर्षों तक कठोर तप किया, ताकि मां जगदंबा प्रसन्न हों. एक दिन मां भगवती उनकी तपस्या से प्रसन्न हुईं और दर्शन दिया. उन्होंने माता को प्रणाम किया, देवी ने वरदान मांगने को कहा. तब कात्यायन ऋषि ने उनको अपनी पुत्री के रूप में पाने की इच्छा प्रकट की. तब उन्होंने कहा कि ऐसा ही होगा. उस समय महिषासुर का तीनों लोकों में अत्याचार बढ़ रहा था. उसने स्वर्ग पर भी अधिकार कर लिय था. उसके आतंक से देवता, ऋषि-मुनि और मनुष्य सभी भयभीत थे. उसे कोई हरा नहीं पा रहा था. ऐसी स्थिति में एक दिन त्रिदेवों ब्रह्मा, विष्णु और महेश ने अपने तेज पुंज से एक दिव्य देवी को प्रकट किया. कात्यायन ऋषि ने सबसे पहले उस देवी की विधिपूर्वक पूजा अर्चना की. वही देवी कात्यायनी के रूप में पहचानी गईं. अश्विन कृष्ण चतुर्दशी को मां कात्यायनी का प्रकाट्य हुआ. उन्होंने अश्विन शुक्ल सप्तमी, अष्टमी और नवमी यानि लगातार तीन दिनों तक उनकी पूजा स्वीकार की. फिर दशमी तिथि को मां कात्यायनी ने अपना युद्ध वाला स्वरूप धारण किया और महिषासुर का वध कर दिया. इसके बाद से तीनों लोकों में धर्म और शांति की स्थापना हुई. सुयोग्य जीवनसाथी के लिए उपाय य​दि आपके विवाह में किसी प्रकार से कोई बाधा या समस्या आ रही है तो आपको मां कात्यायनी की पूजा करनी चाहिए. ऐसे ही जो लोग सुयोग्य जीवनसाथी की कामना करते हैं, उनको भी मां कात्यायनी की कृपा लेनी चाहिए मां कात्यायनी के मंत्र और प्रिय भोग मां कात्यायनी की विधि विधान से पूजा करते समय आपको शहद, मीठा पान और लौकी का भोग लगाना चाहिए. मां देवी कात्यायन्यै नम या देवी सर्वभू‍तेषु मां कात्यायनी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ से इनका पूजन कर सकते हैं.

झाबुआ में 99 क्विंटल से अधिक वजन के गांजे के पौधे जब्त, अनुमानित कीमत 9 करोड़ 42 लाख रूपए से अधिक

भोपाल मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशन में प्रदेश को 31 दिसंबर 2029 तक (तीन वर्ष में) नशामुक्त बनाने के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए मादक पदार्थों के अवैध कारोबार में संलिप्त सिंडिकेट को ध्वस्त करने, नशीले पदार्थों की अवैध खेती एवं तस्करी पर प्रभावी अंकुश लगाने तथा इस कारोबार में शामिल व्यक्तियों के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए कठोर वैधानिक कार्रवाई करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। पुलिस महानिदेशक श्री कैलाश मकवाणा के मार्गदर्शन में प्रदेश में मादक पदार्थों की अवैध खेती, तस्करी एवं कारोबार के विरुद्ध पुलिस द्वारा लगातार प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में पुलिस महानिरीक्षक इंदौर जोन (ग्रामीण) श्री अनुराग और पुलिस उपमहानिरीक्षक इंदौर रेंज (ग्रामीण) श्री मनोज कुमार सिंह के निर्देशन में तथा पुलिस अधीक्षक झाबुआ श्री देवेंद्र पाटीदार के नेतृत्व में झाबुआ पुलिस ने ग्राम कलमोड़ा के दुर्गम एवं पहाड़ी क्षेत्र में कपास की फसल के बीच की जा रही अवैध गांजा खेती का पर्दाफाश करते हुए तीन अलग-अलग प्रकरणों में 15,609 गांजे के पौधे जब्त किए हैं। इन पौधों का कुल वजन 99 क्विंटल 16 किलो 427 ग्राम तथा अनुमानित कीमत 9 करोड़ 42 लाख रुपये है। तीनों प्रकरणों में एनडीपीएस एक्ट के तहत वैधानिक कार्रवाई की गई है। ग्राम कलमोड़ा में पुलिस ने तीन स्थानों पर की कार्रवाई थाना कोतवाली एवं चौकी पारा पुलिस को ग्राम कलमोड़ा में पहाड़ी, तलहटी एवं दुर्गम क्षेत्रों में कपास की फसल के बीच में अवैध गांजे की खेती किए जाने की सूचना प्राप्त हुई थी। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने क्षेत्र में दबिश देकर तीन अलग-अलग स्थानों पर अवैध रूप से उगाए गए गांजे के पौधों को जब्त किया। मध्यप्रदेश पुलिस का "नशामुक्त मध्‍यप्रदेश'' के संकल्प को साकार करने के लिए मादक पदार्थों की अवैध खेती एवं तस्करी के विरुद्ध अभियान लगातार जारी रहेगा।  

विधानसभा चुनाव से पहले चुनाव आयोग का बड़ा फैसला

 नई दिल्ली    मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर जारी विवाद के बीच चुनाव आयोग ने 17 राज्यों में मतदाता सूची का विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसएसआर) कराने की घोषणा की है। इनमें उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, मणिपुर और गोवा जैसे वे राज्य भी शामिल हैं, जहां अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। चुनाव आयोग ने संबंधित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को पत्र भेजकर इस प्रक्रिया की जानकारी दी है। आयोग के मुताबिक, पुनरीक्षण के लिए एक जनवरी 2027 को अर्हता तिथि निर्धारित किया गया है। नए मतदाताओं को जोड़ने पर रहेगा जोर विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण का उद्देश्य मतदाता सूची में पात्र लोगों के नाम शामिल करना है। इसमें खास तौर पर युवाओं और पहली बार मतदान करने वाले लोगों पर ध्यान दिया जाएगा। इसके अलावा, मौजूदा मतदाता सूची में दर्ज गलतियों को सुधारने और सूची को सटीक व अद्यतन बनाने का प्रयास किया जाएगा। अगले साल कई राज्यों में विधानसभा चुनाव उत्तर प्रदेश की 403 सदस्यीय विधानसभा का कार्यकाल अगले साल 22 मई को समाप्त हो रहा है। वहीं, मणिपुर, गोवा, पंजाब और उत्तराखंड की विधानसभाओं का कार्यकाल मार्च 2027 में अलग-अलग तारीखों पर पूरा होगा। इन राज्यों में विधानसभा सीटों की संख्या क्रमशः 60, 40, 117 और 70 है। छह महीने पहले भी हो सकते हैं चुनाव जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के तहत चुनाव आयोग को विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होने से छह महीने पहले भी चुनाव कराने की अनुमति है। ऐसे में चुनाव वाले राज्यों में मतदाता सूची को समय पर दुरुस्त करना महत्वपूर्ण है। गौरतलब है कि एसआईआर को लेकर विपक्षी दलों के इंडिया गठबंधन ने दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे को लेकर लगातार विरोध-प्रदर्शन किया है। वहीं, कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संयोजक अभिजीत दिपके ने भी अपनी पार्टी के नेताओं आशुतोष रांका और सौरव दास की गिरफ्तारी के खिलाफ दिल्ली में 16 अक्तूबर को कनॉट प्लेस में तिरंगा फहराने के लिए लोगों से अपील की है।

आज का राशिफल 16 अक्टूबर 2026: शुक्रवार को किन राशियों को मिलेगी सफलता? जानें भविष्यफल

मेष राशि– तनाव दूर करने के लिए वॉक पर जा सकते हैं। सिंगल लोगों की लाइफ में किसी नए शख्स की एंट्री होने की संभावना है। करियर में बैलेंस मेंटेन करके चलें। खुद को हाइड्रेटेड जरूर रखें। वृषभ राशि- आपकी मेहनत आपको पूरी लगन से अपना प्रदर्शन दिखाने में मदद करेगी। शाम रोमांटिक रहने वाली है। ऑफिस का काम आपके दिन को व्यस्त बना सकता है। हाइड्रेटेड रहना न भूलें। मिथुन राशि– फाइनेंशियली आप अच्छे रहेंगे। प्रोफेशनल लाइफ में खुद पर फीलिंग्स को हावी न होने दें। जल्दबाजी में आकर आज कोई जरूरी डिसीजन न ही लें तो बेहतर है। ब्रेक लेते रहें। कर्क राशि– ऑफिस का काम घर लेकर न आएं। सेहत पर ध्यान देने की आज जरूरत है। इन्वेस्टमेंट करना आज ठीक नहीं रहेगा। कुछ लोगों को राजनीतिक लाभ मिल सकता है। सिंह राशि- आपको अपने स्वास्थ्य की देख-रेख करनी चाहिए। बॉस की सलाह पर ध्यान दें। आज डाइट को हेल्दी रखें। भले ही आपकी शादी को काफी समय हो गया हो लेकिन साथ में समय व्यतीत करना जरूरी है। कन्या राशि- थोड़ा स्ट्रेस फील कर सकते हैं। आज का राशिफल नए विचारों को लाइफ में लाने की एडवाइस दे रहा है। करियर तौर पर प्रोडक्टिव रहेंगे। आर्थिक दृष्टि से अच्छा अवसर आज दरवाजे पर दस्तक दे सकता है। तुला राशि- सीनियर्स के साथ किसी नए प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर सकते हैं। वित्तीय स्थिति आज पॉजिटिव रहने वाली है। वर्क और लाइफ के बीच बैलेंस मेन्टेन करके रखना बेहद जरूरी है। वृश्चिक राशि- सही दृष्टिकोण और थोड़े से साहस के साथ आप अपने रोमांटिक सपनों को एक खूबसूरत हकीकत में बदल सकते हैं। वर्क प्रेशर आज ज्यादा फील हो सकता है। बैलेंस मेंटेन रखें। धनु राशि- काम करते दौरान समय-समय पर ब्रेक लें। सुख-समृद्धि भरा दिन रहेगा दिन। हेल्दी ड्रिंक का सेवन करें। पैसे के मामले में होशियार रहना आज बेहद जरूरी है। आज खुद पर फोकस करें। मकर राशि- आपको सेल्फ केयर पर फोकस करना चाहिए। नए रास्ते खोजने के लिए आप तैयार हैं। अपनी मेंटल हेल्थ पर ध्यान दें। आगे बढ़ने और दुनिया को यह दिखाने से न डरें की आप कितने काबिल हैं। कुंभ राशि– आपका शरीर और दिमाग दोनों तालमेल में रहने वाले हैं। अपनी फीलिंग्स को पार्टनर के साथ शेयर करना अच्छा साबित होगा। स्ट्रेस दूर करने के लिए मेडिटेशन या योग का सहारा लें। मीन राशि– करियर में कुछ नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। फाइनेंशियल दिक्कतों से छुटकारा पाने के लिए अपने पार्टनर से सलाह लें। आज काफी मोटिवेटेड फील करेंगे। भीड से अलग होने से न डरें।

गांधीसागर फॉरेस्ट रिट्रीट के पांचवे संस्करण का हुआ शुभारंभ

ऑल सीजन टेंट सिटी के साथ रोमांचक साहसिक गतिविधियों का मिलेगा आनंद भोपाल ऑल सीजन टेंट सिटी के साथ जल, नभ और थल पर आधारित साहसिक गतिविधियों का प्रमुख आकर्षक गंतव्य 'गांधीसागर फॉरेस्ट रिट्रीट' के पांचवें संस्करण का मंदसौर जिले के गांधीसागर जलाशय के सुरम्य बैकवाटर पर शुभारंभ हुआ। एमपी टूरिज्म बोर्ड और लल्लूजी एंड सन्स एवं इवोक कैंपिंग के सहयोग से आयोजित यह रिट्रीट पर्यटकों को चंबल के शांत जल विस्तार और प्राकृतिक सौंदर्य के बीच रोमांच और सुकून का अनूठा अनुभव प्रदान करेगा। रिट्रीट में पर्यटक हाई रोप, ज़िपलाइन, एटीवी राइड, साइकलिंग, डुओ साइकिल, एयरगन शूटिंग और पैरामोटरिंग जैसी साहसिक और रोमांचक गतिविधियों का आनंद ले सकेंगे। पर्यटक स्पीड बोट, जेट स्कीइंग, बनाना बोट, ड्रैगन बोट और कयाकिंग का भी रोमांच ले सकेंगे। इसके अतिरिक्त जंगल सफारी, नाइट वॉक, स्टार गेज़िंग, बोट सफारी, बोट स्पा, योग एवं वेलनेस सत्र तथा इनडोर खेलों की सुविधाएँ भी उपलब्ध हैं। गरोठ विधायक श्री चंदर सिंह सिसोदिया और कलेक्टर श्री दिव्यांक सिंह ने रिट्रीट का औपचारिक शुभारंभ किया। स्थानीय संस्कृति और पर्यटन को मिलेगा प्रोत्साहन रिट्रीट के माध्यम से पर्यटकों को मध्यप्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोक कलाओं, पारंपरिक जीवनशैली और स्थानीय व्यंजनों से परिचित कराने के लिए विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएगे। वर्ष 2023 में शुरू हुआ गांधीसागर फॉरेस्ट रिट्रीट अपने पांचवें संस्करण के साथ क्षेत्र में प्रकृति-आधारित एवं साहसिक पर्यटन को नई दिशा दे रहा है। गांधीसागर की पर्यटन संभावनाओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। पर्यटकों की बढ़ती आवाजाही से आतिथ्य, परिवहन, खानपान और स्थानीय उत्पादों से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। गांधीसागर फॉरेस्ट रिट्रीट प्राकृतिक सौंदर्य, साहसिक गतिविधियों, लग्जरी प्रवास और सांस्कृतिक अनुभवों का संगम है, जो मध्यप्रदेश को अनुभवात्मक एवं जिम्मेदार पर्यटन के प्रमुख गंतव्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। गांधीसागर तक सुगम पहुँच: प्रमुख शहरों से सड़क व रेल संपर्क गांधीसागर फॉरेस्ट रिट्रीट देश-प्रदेश के प्रमुख शहरों से सड़क एवं रेल मार्ग द्वारा सुलभ है। इंदौर से लगभग 250 से 300 किलोमीटर की दूरी सुगम राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों के माध्यम से निजी वाहन, टैक्सी अथवा नियमित बस सेवाओं से 4 से 6 घंटे में तय की जा सकती है। रेल मार्ग से आने वाले पर्यटक नागदा या भवानी मंडी जंक्शन उतरकर वहाँ से स्थानीय परिवहन ले सकते हैं। वहीं, राजधानी भोपाल से लगभग 333 किलोमीटर का सफर सड़क मार्ग से 7 घंटे में पूरा किया जा सकता है। भोपाल से ट्रेन द्वारा आने वाले यात्री निकटतम रेलवे स्टेशनों—भवानी मंडी (55 किमी), मंदसौर (70 किमी) या नीमच (115 किमी) तक पहुँचकर वहाँ से टैक्सी अथवा बस द्वारा आसानी से गांधीसागर पहुँच सकते हैं।