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सरकारी नौकरी का बड़ा मौका, राज्य सेवा मुख्य परीक्षा 2025 के जरिए भरे जाएंगे 265 पद

रायपुर. छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग द्वारा राज्य शासन के विभिन्न विभागों में 265 पदों पर भर्ती के लिए राज्य सेवा (मुख्य) परीक्षा 2025 शनिवार से शुरू हुई. यह परीक्षा 9 जून के बीच तक निर्धारित है. इस दौरान परीक्षा केंद्रों पर कड़ी व्यवस्था रखी गयी है. मुख्य परीक्षा के लिए अंबिकापुर, बिलासपुर, दुर्ग, जगदलपुर और रायपुर जिले में परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं. सभी सेंटरों पर सुबह से परीक्षा देने आने वालों की कतारें देखी गईं. परीक्षा प्रतिदिन दो पालियों में आयोजित की जाएगी. प्रथम पाली की परीक्षा सुबह 9 से 12 बजे के बीच, दूसरी पाली की परीक्षा दोपहर 2 से शाम 5 बजे के बीच निर्धारित है. 6 जून को लैंग्वेज और निबंध, दूसरे दिन 7 जून को जनरल स्टडीस-1 और 2, इसी तरह 8 जून को जनरल स्टडीस 3 और 4 के अलावा 9 जून को जनरल स्टडीस 5 के पेपर होंगे. मुख्य परीक्षा के लिए प्रवेश पत्र आयोग की वेबसाइट से डाउनलोड किया जा सकता है. पीएससी के परीक्षा नियंत्रक ने सूचना जारी कर कहा कि मुख्य परीक्षा के लिए आयोग ने किसी भी अभ्यर्थी को अलग से प्रवेश पत्र जारी नहीं किया है.  बता दें कि राज्य सेवा (प्रारंभिक) परीक्षा 2025 गत 22 फरवरी को आयोजित की गई थी. प्रारंभिक परीक्षा के बाद 265 पदों के लिए तीन गुना अभ्यर्थियों का मुख्य परीक्षा के लिए चयन किया गया और मेरिट सूची जारी की गई. मुख्य परीक्षा के बाद साक्षात्कार होगा. संभवतः साक्षात्कार समाप्त होने के साथ ही नतीजे घोषित कर दिए जाएंगे.

वास्तु शास्त्र में सीढ़ियां क्यों मानी जाती हैं घर की ऊर्जा और तरक्की का केंद्र

अक्सर हम घर की सजावट में बाकी कमरों पर तो ध्यान देते हैं, लेकिन सीढ़ियों को नजरअंदाज कर देते हैं. वास्तु शास्त्र में सीढ़ियां केवल एक रास्ता नहीं, बल्कि घर की सकारात्मक ऊर्जा का मुख्य स्तंभ मानी जाती हैं. घर की तरक्की, आर्थिक स्थिरता और सुख-शांति काफी हद तक इस बात पर निर्भर करती है कि आपकी सीढ़ियां वास्तु के नियमों के मुताबिक बनी हैं या नहीं. अक्सर जानकारी के अभाव में लोग सीढ़ियों के नीचे की जगह को कबाड़ का अड्डा बना देते हैं, जिससे घर में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ जाती है वास्तु के सिद्धांतों को समझकर आप न केवल इन दोषों को दूर कर सकते हैं, बल्कि अपने घर को खुशहाली का केंद्र भी बना सकते हैं. आइए, जानते हैं सीढ़ियों से जुड़े वास्तु के वे नियम जो आपके घर की ऊर्जा को पूरी तरह बदल सकते हैं. 1. सीढ़ियों की दिशा का चुनाव (Placement) दक्षिण-पश्चिम (South-west) कोना सीढ़ियों के लिए सबसे उत्तम है. यह घर में स्थिरता लाता है. अगर सिढ़ियां इस दिशा में हो तो उस घर में पैसों की कमी नहीं होती. दक्षिण (South) या पश्चिम (West) दिशा भी अच्छे विकल्प हैं. क्या न करें: उत्तर-पूर्व (North-east) दिशा में सीढ़ियां कभी नहीं बननी चाहिए.  यह वास्तु के अनुसार घर की प्रगति और शांति के लिए हानिकारक माना गया है. 2. सीढ़ियों का डिजाइन और बनावट घुमाव: सीढ़ियां हमेशा घड़ी की दिशा (Clockwise) में होनी चाहिए. यानी ऊपर जाते समय आप दाहिनी ओर मुड़ें. संख्या का नियम: सीढ़ियों की कुल संख्या हमेशा विषम (Odd number) होनी चाहिए (जैसे 9, 11, 15, 17 वहैरह). आरामदायक बनावट: सीढ़ियां बहुत खड़ी (steep) नहीं होनी चाहिए. सीढ़ी की ऊंचाई (Rise) 4 से 7.5 इंच के बीच हो. पैर रखने की चौड़ाई (Tread depth) 10 से 11.25 इंच के बीच होनी चाहिए. 3. रंग और रोशनी (Colors & Lighting) रंग: सीढ़ियों के लिए हल्के और सौम्य रंगों (Neutral colors) का इस्तेमाल करें. जैसे सफेद, क्रीम, हल्का बेज या पेस्टल शेड्स. गहरे या भड़कीले रंगों से बचना चाहिए क्योंकि ये ऊर्जा में असंतुलन पैदा कर सकते हैं. रोशनी: सीढ़ियां कभी भी अंधेरे में नहीं होनी चाहिए. वहां पर्याप्त रोशनी होनी चाहिए. अंधेरी सीढ़ियां वास्तु दोष का कारण बनती हैं. 4. सीढ़ियों के नीचे का स्थान (The area beneath the staircase) क्या न रखें: इस जगह का उपयोग कबाड़, टूटे-फूटे सामान, या जूते-चप्पल रखने के लिए बिल्कुल न करें. वास्तु के अनुसार सीढ़ियों के नीचे कबाड़ या जूते-चप्पल रखने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का बहाव रुक जाता है, जिससे आर्थिक तंगी और बेवजह के खर्च बढ़ते हैं. यह जगह घर की तरक्की का रास्ता मानी जाती है, इसलिए वहां गंदगी जमा करने से घर में तनाव और क्लेश पैदा होता है, और बरकत में रुकावट आती है. उपयोग: अगर आपको उस जगह का उपयोग करना ही है, तो उसे पूरी तरह व्यवस्थित रखें. आप वहां साफ-सुथरी कैबिनेट या स्टोरेज दराज बनवा सकते हैं, लेकिन उसे हमेशा बंद रखें. सफाई: यह जगह हमेशा धूल-मिट्टी से मुक्त और साफ होनी चाहिए. 5. हैंडरेल्स और रेलिंग (Handrails) सीढ़ियों पर रेलिंग लगाने के लिए लकड़ी सबसे अच्छी मानी जाती है. पत्थर, मार्बल या धातु की रेलिंग भी लगाई जा सकती है. डिजाइन: रेलिंग मजबूत होनी चाहिए और उसका कोई कोना नुकीला नहीं होना चाहिए. सही तरीका: ऊपर चढ़ते समय रेलिंग आपके दाहिने हाथ की ओर होनी चाहिए और नीचे उतरते समय बाएं हाथ की ओर.

36 खिलाड़ियों के दल ने बढ़ाया प्रदेश का मान, नेशनल यूथ म्यूथाई में जीते 17 मेडल

रायपुर. उत्तराखंड के हल्द्वानी स्थित इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम में आयोजित नेशनल यूथ म्यू थाई चैंपियनशिप में छत्तीसगढ़ के 36 सदस्यीय दल ने शानदार प्रदर्शन करते हुए इतिहास रच दिया. देश के 26 राज्यों और 5 केंद्र शासित प्रदेशों से आए करीब 900 खिलाड़ियों के बीच हुए कड़े मुकाबलों में छत्तीसगढ़ ने 7 स्वर्ण, 4 रजत और 6 कांस्य सहित कुल 17 पदक जीतकर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई. प्रतियोगिता में मेघालय ओवरऑल चैंपियन रहा, जबकि असम दूसरे स्थान पर रहा.चैंपियनशिप के अंतिम दिन फाइनल मुकाबलों में छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों ने बेहतरीन खेल का प्रदर्शन किया. रायपुर की समिधा अग्रवाल ने मिजोरम की प्रतिद्वंद्वी को हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया, वहीं संजीत मोहंती को मुकाबला ‘नो कॉन्टेस्ट’ घोषित होने के बाद गोल्ड मेडल मिला. बालोद (दल्लीराजहरा) की काप्सा गुप्ता ने बिहार की खिलाड़ी को मात देकर स्वर्ण पदक जीता. इसके अलावा बालोद की साधिका दुबे और हिमानी दरसेना ने ‘वाई क्रू’ एकल स्पर्धा के अपने-अपने वर्ग में स्वर्ण पदक हासिल कर राज्य के स्वर्ण पदकों की संख्या सात तक पहुंचा दी.

कटरा जा रही स्पेशल ट्रेन में तकनीकी खामी, लुधियाना में अलग हुई बोगी, बड़ा हादसा टला

 लुधियाना  दिल्ली से वैष्णो देवी जा रही स्पेशल ट्रेन की एक बोगी का बाथरूम के पास का हिस्सा टूट गया। हालांकि, बाथरूम के पास कोई यात्री न होने से बड़ा हादसा टल गया। फिलहाल ट्रेन लुधियाना रेलवे स्टेशन पर खड़ी है।लुधियाना रेलवे स्टेशन पर कटरा स्पेशल ट्रेन का हादसा हो गया। ट्रेन जब चलने लगी तो 2 कोच को जोड़ने वाला कपलर टूट गई। जिससे स्लीपर कोच का टॉयलेट धमाके जैसी आवाज के साथ टूट गया। दोनों कोच भी अलग हो गए। धमाके जैसी आवाज सुनते ही यात्रियों में अफरातफरी मच गई।  जिस वक्त हादसा हुआ, ट्रेन लुधियाना से चलने वाली थी। न्यू दिल्ली-श्री माता वैष्णो देवी कटरा स्पेशल (04081) नाम की यह ट्रेन आज (शनिवार) सुबह ही नई दिल्ली से वैष्णो देवी जा रही थी। हादसे का पता चलते ही रेलवे सुरक्षा बल और लोकल पुलिस स्टेशन पर पहुंच गई है। इस घटना से जुड़े 3 बड़े बयान पढ़िए:- 1. लुधियाना के ADCP समीर वर्मा:-     तकनीकी खराबी आई, जांच की: ADCP समीर वर्मा ने कहा- लुधियाना रेलवे स्टेशन पर शुक्रवार सुबह करीब 9 बजे दिल्ली-कटड़ा एक्सप्रेस ट्रेन के एक कोच में तकनीकी खराबी आने से अफरा-तफरी का माहौल बन गया। घटना के बाद पुलिस और रेलवे अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर जांच की।     दरार आई, वेल्डिंग फेलियर संभव: ADCP ने कहा- जांच में पता चला कि जम्मू-कटड़ा की ओर जा रही ट्रेन के एस-2 कोच के वॉशरूम वाले हिस्से में अचानक दरार (ब्रेकेज) आ गई थी। रेलवे के तकनीकी स्टाफ और इंजीनियरों ने जांच के दौरान बताया कि यह मामला वेल्डिंग फेलियर का प्रतीत होता है। कोच पुराना होने के कारण वेल्डिंग कमजोर पड़ गई थी और उसी स्थान से हिस्सा टूट गया।     ब्लास्ट नहीं, यात्री सुरक्षित: ADCP ने कहा- रेल अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह कोई ब्लास्ट या विस्फोट नहीं था। घटना में किसी यात्री को चोट नहीं आई और सभी यात्री सुरक्षित हैं। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी तरह की अफवाह फैलाने से बचें। 2. फिरोजपुर डिवीजन के DRM संजीव कुमार:-     पैनल ब्रेक हुआ, गाड़ी चेक की: DRM संजीव कुमार ने कहा- 9 बजे ट्रेन यहां रूकी और पांच मिनट बाद यहां से जाने लगी। उनका कहना है कि जब ट्रेन चलने लगी तो एस-2 बोगी का एन पैनल ब्रेक हो गया। ट्रेन में तैनात स्टाफ ने गाड़ी रुकवा दी। एहतियात के तौर पर सभी यात्रियों को बाहर निकाला गया। उसके बाद चेक किया गया।     आवाज आना स्वाभाविक, जांच करेंगे: DRM ने कहा- जब यह हादसा हुआ तो आवाज आना स्वाभाविक है। आवाज का सोर्स क्या था, यह अभी जांच का विषय है। उनका कहना है कि डब्बा 15 साल पुराना है जबकि डब्बे की लाइफ कम से कम 25 साल होती है। जांच के बाद ही स्पष्ट कारण बताए जा सकते हैं। जल्दी ही इन 2 डब्बों को छोड़कर गाड़ी तैयार की जाएगी ताकि लोगों को उनके गंतव्य तक भेजा जा सके। 3. ट्रेन में बैठा यात्री अमित चौहान:-     ट्रेन लेट हुई, दिल्ली में पुराना डिब्बा जोड़ा: ट्रेन में बैठे यात्री अमित चौहान का कहना है कि वो माता वैष्णो देवी जा रहे थे। ट्रेन का दिल्ली से टाइम 11.30 बजे थे लेकिन ट्रेन वहां से ढाई बजे रात को चली है। वहां पर लोग परेशान रहे। आखिर में दिल्ली में एक पुराने डब्बे को लाया गया और स्टोर में खड़ी बोगियों को लोकर ट्रेन तैयार की गई।     जैसे ही चलने लगी तो हादसा हुआ, माता की कृपा से बचे: अमित ने कहा- हमें तभी लग गया था कि यह ट्रेन गड़बड़ करेगी। उन्होंने बताया कि ट्रेन लुधियाना स्टेशन पर रूकी और पांच मिनट बाद जब चलने लगी तो यह हादसा हुआ। माता रानी की कृपा रही कि सभी सुरक्षित रहे। उसका कहना है कि अगर यह हादसा हाईस्पीड में होता तो मंजर खतरनाक हो सकता था।     अंदर बैठे लोग कांपने लगे, तुरंत बाहर आए: अमित ने कहा- लुधियाना रेलवे स्टेशन पर कुछ सामान चढ़ाया जा रहा था। जब ट्रेन चलने लगी तो तेज आवाज आई और लोग बाहर आ गए। लोग आवाज सुनकर डर गए और वो डर के मारे कांपने लगे। रेल विभाग इस तरह का काम न करे और लोगों की जान का को खतरे में न डाले।

स्ट्रेंथ का विरोधाभास: हर गुण स्थिति के अनुसार ताकत भी और कमजोरी भी बन सकता है

इस विचार का अर्थ यह है कि कोई भी गुण अपने आप में न तो पूर्णतः अच्छा होता है और न ही बुरा, उसका मूल्य इस बात पर निर्भर करता है कि आप उसे किस हालात में और किस तरह से इस्तेमाल कर रहे हैं. इसे मनोविज्ञान की भाषा में स्ट्रेंथ का विरोधाभास (The Paradox of Strengths) कहा जाता है. इसे समझने के लिए क्रिकेट की दुनिया के दिग्गज हर्ष भोगले का उदाहरण बहुत सटीक है. हर्ष भोगले क्रिकेट कमेंट्री की दुनिया का एक बहुत बड़ा नाम हैं.  उन्हें क्रिकेट की आवाज कहा जाता है.  वे अपनी शानदार कमेंट्री के लिए बेस्ट स्पोर्ट्स प्रेजेंटर के प्रतिष्ठित पुरस्कार से भी सम्मानित हो चुके हैं. खेल का मैदान  हो या जिंदगी का कोई भी दौर , हमेशा तर्क काम  नहीं आते, कभी-कभी स्थिति ऐसी होती है जहां  सिर्फ ठंडे तर्क नहीं, बल्कि जुनून और जोश की उम्मीद की जाती हैं. मान लीजिए, जब पूरा देश किसी रोमांचक मैच में अपनी टीम के लिए भावुक हो रहा हो, उस समय अगर कोई बहुत ज्यादा तार्किक बातें करे, तो कुछ लोगों को उनकी यही निष्पक्षता ठंडी या बे-मन वाली लग सकती है.  यहां उनकी वही खूबी (तार्किकता), जो उनकी सबसे बड़ी ताकत है, उस विशेष स्थिति में एक चुनौती बन जाती है. इसका अर्थ यह नहीं है कि उनकी यह खूबी खराब है या उन्हें बदलने की जरूरत है. इसका सीधा सा मतलब यह है कि दुनिया में कोई भी गुण हर परिस्थिति के लिए एक समान रूप से सही नहीं होता. जो व्यक्ति यह समझ जाता है कि उसे अपनी कौन सी ताकत का इस्तेमाल कब और कितनी मात्रा में करना है, वही वास्तव में समझदार है. सफलता का रहस्य गुणों में नहीं, बल्कि संदर्भ की समझ (Understanding the Context) में छिपा है.

ब्लू स्टार बरसी पर अमृतसर में बढ़ी हलचल, श्री अकाल तख्त से जत्थेदार का कौम के नाम संबोधन

अमृतसर  ऑपरेशन ब्लू स्टार की आज 42वीं बरसी है। श्री अकाल तख्त साहिब में सुबह से ही संगत पहुंचने लगी है।  सरबत खालसा के जत्थेदार ध्यान सिंह मंड अपने समर्थकों के साथ श्री अकाल तख्त पहुंचे। अकाली दल अमृतसर के अध्यक्ष सिमरनजीत सिंह मान अपने साथियों के साथ श्री अकाल तख्त पर पहुंचे। आज गुरुनगरी में बंद का आह्वान किया गया है। इसे देखते हुए पुलिस और अर्ध सैनिक बलों ने सुरक्षा के पुख्ता बंदोबस्त किए हैं। सिविल ड्रेस में पुलिस और गुप्तचर विभाग के कर्मचारी भी तैनात हैं।   एसजीपीसी ने भी श्री अकाल तख्त साहिब के आसपास अपनी टास्क फोर्स तैनात की है। अखंड पाठ साहिब के भोग के बाद जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह ने सिख कौम को संदेश दिया। श्री अकाल तख्त साहिब के पास संगत ने खालिस्तान के नारे लगाए। कड़ी सुरक्षा और नाकाबंदी पुलिस कमिश्नर गुरप्रीत सिंह भुल्लर ने बताया कि गुरु नगरी में 65 से ज्यादा जगहों पर नाकाबंदी है। संदिग्ध वाहनों और लोगों की तलाशी ली जा रही है। होटल मालिकों को संदिग्धों की जानकारी देने के निर्देश दिए गए हैं। प्रमुख प्रवेश मार्गों, रेलवे स्टेशन, बस अड्डा और एयरपोर्ट पर भी चेकिंग अभियान चल रहे हैं। जिले में पुलिस और अर्ध सैनिक बल की कुल ग्यारह कंपनियां तैनात की गई हैं।   ऑपरेशन ब्लू स्टार भारतीय इतिहास का वह अध्याय है, जिस पर आज भी बहस खत्म नहीं हुई. एक पक्ष इसे आतंकवाद के खिलाफ जरूरी कार्रवाई मानता है, तो दूसरा इसे सिख भावनाओं पर चोट के रूप में देखता है. यही वजह है कि हर साल 6 जून को अमृतसर में बड़ी संख्या में लोग जुटते हैं और भिंडरावाले को याद करते हैं. इस बार भी कई संगठनों ने विशेष अरदास की. प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि 1984 की कार्रवाई ने पूरे सिख समुदाय को गहरी पीड़ा दी थी. वहीं प्रशासन का फोकस किसी भी तरह की उग्र गतिविधि को रोकने पर रहा. सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर बहस तेज हो गई. कई वीडियो तेजी से वायरल हुए, जिनमें नारेबाजी और पोस्टर दिखाई दिए. ऐसे में सवाल फिर उठने लगा है कि आखिर 6 जून को ही स्वर्ण मंदिर में इतना संवेदनशील माहौल क्यों बन जाता है।  42 साल बाद भी क्यों जिंदा है ब्लू स्टार का जख्म?     ऑपरेशन ब्लू स्टार 1 जून से 8 जून 1984 के बीच चलाया गया था. तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के आदेश पर भारतीय सेना ने स्वर्ण मंदिर परिसर में कार्रवाई की थी. सेना का मकसद जरनैल सिंह भिंडरावाले और उनके हथियारबंद समर्थकों को बाहर निकालना था. इस ऑपरेशन के दौरान भारी गोलीबारी हुई और 6 जून 1984 को भिंडरावाले मारा गया. इसी वजह से हर साल 6 जून को उसकी बरसी के तौर पर कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।      इस सैन्य अभियान के दौरान अकाल तख्त को भारी नुकसान पहुंचा था. यही कारण है कि सिख समुदाय का एक बड़ा वर्ग इसे धार्मिक स्थल की बेअदबी मानता है. ऑपरेशन के बाद पूरे देश में तनाव फैल गया था. बाद में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके सिख अंगरक्षकों ने हत्या कर दी थी. इसके बाद देश में भयानक दंगे हुए थे।      स्वर्ण मंदिर परिसर में  सुरक्षा बेहद कड़ी रही. पंजाब पुलिस, अर्धसैनिक बल और खुफिया एजेंसियां अलर्ट मोड पर रहीं. मंदिर परिसर में आने-जाने वालों पर नजर रखी गई. प्रशासन ने साफ किया कि किसी भी हालत में कानून व्यवस्था बिगड़ने नहीं दी जाएगी।  अपनों ने किया श्री हरिमंदिर साहिब पर हमला जून 1984 की घटनाओं की स्मृति में आयोजित कार्यक्रम के दौरान श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने कौम के नाम संदेश पढ़ते हुए कहा कि जून 1984 में भारतीय सेना ने श्री हरिमंदिर साहिब और श्री अकाल तख्त साहिब पर कार्रवाई की थी, जिसमें दमदमी टकसाल के प्रमुख ज्ञानी जरनैल सिंह भिंडरांवाले, भाई अमरीक सिंह, जनरल शबेग सिंह समेत अनेक लोगों की मौत हुई। उन्होंने कहा कि इस घटना में टैंकों और भारी हथियारों का इस्तेमाल किया गया, जिसे सिख इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाओं में गिना जाता है। जत्थेदार ने बीबी सतनाम कौर और बीबी वाहेगुरु कौर सहित उन महिलाओं का भी उल्लेख किया, जिन्होंने अपने विश्वास के लिए बलिदान दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि समय-समय पर सिख पहचान और परंपराओं को कमजोर करने के प्रयास हुए हैं। साथ ही कहा कि सिख समुदाय ने दुनिया भर में मेहनत, सेवा और “सरबत दा भला” की भावना से सम्मान हासिल किया है। उन्होंने संगत से गुरु साहिबान की शिक्षाओं पर चलते हुए एकजुट रहने और कौमी हितों की रक्षा के लिए सजग रहने का आह्वान किया। जत्थेदार ने अपने संदेश में कहा कि पहले विदेशी ताकतें हमला करती थी। लेकिन  इस घल्लूघारा में अपनों ने ही हमला किया।  सिखों के खिलाफ नफरत फैलाने की कोशिश ज्ञानी गड़गज्ज ने कहा कि सिख इस देश के बराबरी के अधिकार रखने वाले नागरिक हैं और उन्होंने हमेशा अपनी आन, बान और शान के साथ जीवन व्यतीत किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि समय-समय पर सिख पहचान को कमजोर करने और पांच ककारों को समाप्त करने जैसी नीतियां बनाई गईं तथा सिखों की अलग पहचान मिटाने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि पंजाब की धरती पर दुनिया भर से लोग आकर रहते हैं, लेकिन जब सिख अन्य राज्यों में बसने जाते हैं तो कई बार उन्हें भेदभाव का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि सिख अपने गुरुओं और सिद्धांतों की रक्षा के लिए अंतिम सांस तक संघर्ष करने का जज्बा रखते हैं। जत्थेदार ने कहा कि आज सिख समुदाय पूरी दुनिया में अपनी मेहनत, सेवा और सरबत दा भला की भावना के कारण सम्मानित पहचान बना चुका है। हालांकि, उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पिछले कुछ समय से विभिन्न मुद्दों को आधार बनाकर विश्व स्तर पर सिखों के खिलाफ नफरत का माहौल तैयार करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने संगत से गुरु साहिबान की शिक्षाओं पर चलते हुए एकजुट रहने और कौमी हितों की रक्षा के लिए सजग रहने का आह्वान किया। पुलिस मुस्तैत, रिजर्व फोर्सेस तैनात हेरिटेज स्ट्रीट के चप्पे चप्पे की निगरानी पुलिस अफसर सीसी कैमरों के जरिए कर रही है। गुरुनगरी के मुख्य प्वाइंट्स पर … Read more

स्लो Windows PC को तेज करने के आसान तरीके: अपडेट, स्टोरेज और सेटिंग्स पर ध्यान दें

अगर आपका Windows PC पहले के मुकाबले स्लो चलने लगा है, बार-बार हैंग हो रहा है या ऐप्स खुलने में ज्यादा समय ले रहे हैं, तो इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं. अक्सर बैकग्राउंड में चल रहे ज्यादा ऐप्स, कम स्टोरेज,पुराने ड्राइवर्स या सिस्टम में मौजूद वायरस की वजह से PC की स्पीड कम होने लगती है. हालांकि कुछ आसान सेटिंग्स और छोटे बदलावों की मदद से आप अपने स्लो Windows PC को फिर से फास्ट और स्मूद बना सकते हैं. Windows और Drivers को अपडेट रखें Microsoft समय-समय पर Windows अपडेट जारी करता है, जिनमें सिक्योरिटी पैच, बग फिक्स और नए ड्राइवर अपडेट शामिल होते हैं. अगर सिस्टम अपडेटेड रहेगा, तो PC ज्यादा स्मूद और फास्ट काम करेगा. इसके लिए Start में जाकर Settings में जाएं और वहां फिर Windows Update पर जाएं. इसके बाद वहां दिखाई दे रही अपडेट्स को डाउनलोड कर और इंस्टॉल कर लें. Malware Scan जरूर करें कई बार वायरस या मालवेयर कंप्यूटर की स्पीड धीमी कर देते हैं, क्योंकि वे सिस्टम रिसोर्स का इस्तेमाल करते रहते हैं. ऐसे में समय-समय पर Quick Scan करना जरूरी होता है. इसके लिए Start में जाकर Settings में जाएं. यहां Privacy & Security के ऑप्शन में क्लिक कर Windows Security पर जाएं और Virus & Threat Protection ओपन कर लें. इसके बाद Quick Scan शुरू करें. स्टोरेज खाली करें अगर आपके कंप्यूटर की स्टोरेज लगभग भर चुकी है, तो सिस्टम की स्पीड धीमी होने लगती है. ऐसे में अनचाही फाइल्स और Temporary Files हटाना जरूरी हो जाता है. इसके लिए आप Windows के Storage Sense फीचर का इस्तेमाल कर सकते हैं. इसे ऑन करने के लिए Settings में जाएं. इसके बाद System में जाकर Storage में जाएं और Storage Sense को Enable कर दें. वहीं Temporary Files हटाने के लिए Settings में जाएं System में जाकर Storage में जाकर Temporary Files में जाकर गैर जरूरी फाइल्स डिलीट की जा सकती हैं. बेकार Apps हटाएं कई ऐसे ऐप्स होते हैं, जिनका इस्तेमाल हम नहीं करते, लेकिन वे स्टोरेज और RAM दोनों घेरते रहते हैं. ऐप हटाने के लिए Start में जाकर Settings में जाएं और Apps में जाकर Installed Apps में क्लिक करें. यहां आपको ऐप्स की लिस्ट मिल जाएगी. ऐसे में आपको जिस ऐप की जरूरत नहीं है, उसे Uninstall कर दें. Startup Apps बंद करें कुछ ऐप्स कंप्यूटर ऑन होते ही अपने आप शुरू हो जाते हैं. इससे PC बूट होने में ज्यादा समय लग सकता है. इन्हें बंद करने के लिए Ctrl + Shift + Esc दबाकर Task Manager खोलें. इसके बाद Startup Apps सेक्शन में जाएं और गैरजरूरी ऐप्स को Disable कर दें. Background Activity कम करें कई ऐप्स इस्तेमाल न होने पर भी बैकग्राउंड में चलते रहते हैं और सिस्टम स्लो कर देते हैं. इसे बंद करने के लिए Settings में Apps में जाएं. यहां Installed Apps में जाकर ऐप चुनें और Advanced Options खोलें. Background App Permissions को Never पर सेट कर दें. Visual Effects कम करें Windows में कई एनिमेशन और विजुअल इफेक्ट्स होते हैं, जो देखने में अच्छे लगते हैं लेकिन सिस्टम पर ज्यादा दबाव डालते हैं. ऐसे में स्पीड बढ़ाने के लिए Start Menu में Adjust the appearance and performance of Windows सर्च करें. फिर Visual Effects टैब में जाकर Adjust for best performance चुनें. इन बातों का भी रखें ध्यान     कंप्यूटर को समय-समय पर Restart करें.     SSD स्टोरेज इस्तेमाल करने से सिस्टम काफी तेज हो सकता है.     जरूरत से ज्यादा ब्राउजर टैब एक साथ न खोलें.     RAM कम हो तो अपग्रेड पर भी विचार करें.  

शिक्षा मंत्री सख्त: 10 साल पुराने मुकदमों की 15 दिन में होगी पहचान और समीक्षा

पटना बिहार का शिक्षा विभाग वर्षों से मुकदमों के बोझ तले दबा जा रहा है। हाल यह है कि विभाग 10145 मुकदमों में उलझा हुआ है। हालांकि अब इसके निपटारे की कार्ययोजना बनायी जा रही है। विभाग लंबित मुकदमों में से 10 वर्ष या उससे अधिक पुराने मामलों को प्राथमिकता के आधार पर चिह्नित कर बिहार मुकदमा नीति के प्रावधानों के अंतर्गत उनका शीघ्र निष्पादन सुनिश्चित करेगा। लंबित मुकदमों के मामले को शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने गंभीरता से लिया है। उन्होंने इसे लेकर विभाग के उच्चाधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक भी की। उन्होंने कहा कि मुकदमे न केवल प्रशासनिक संसाधनों की बर्बादी हैं, बल्कि ये शिक्षकों, कर्मियों और आम नागरिकों के हितों से जुड़े निर्णयों में भी अनावश्यक विलंब का कारण बनते हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ऐसे मामलों की विशेष सूची तैयार कर प्राथमिकता के आधार पर उनका निस्तारण किया जाए। मंत्री ने 15 दिनों के भीतर दस वर्ष से अधिक पुराने मामलों की पहचान, वर्गीकरण और प्रारंभिक समीक्षा पूरी कर बिहार मुकदमा नीति के अनुरूप कार्रवाई प्रारंभ करने को कहा है। शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में यह भी कहा कि इस कार्य में किसी भी प्रकार की शिथिलता स्वीकार नहीं की जाएगी। विभागीय स्तर पर इसकी नियमित निगरानी की जाएगी। मुकदमों के बोझ से मुक्त होने पर विभाग का समय, ऊर्जा और संसाधन सीधे तौर पर जनहितकारी कार्यों में लगाए जा सकेंगे। विद्यालयों की गुणवत्ता और आधारभूत ढांचे के विकास में, शिक्षकों और शिक्षाकर्मियों की लंबित समस्याओं के समाधान में तथा सरकारी शिक्षा योजनाओं के प्रभावी एवं त्वरित क्रियान्वयन में इसका उपयोग हो सकेगा। इससे प्रशासनिक निर्णय-प्रक्रिया भी अधिक पारदर्शी और सरल बनेगी। मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि बिहार मुकदमा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन और अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी से शिक्षा विभाग के मुकदमों के बोझ में उल्लेखनीय कमी आएगी। बिहार सरकार जवाबदेह और परिणामोन्मुख प्रशासन के लिए प्रतिबद्ध है और शिक्षा विभाग इस दिशा में सुशासन की एक नई नजीर पेश करेगा।

‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ में बड़ा ट्विस्ट, मायरा के साथ हादसे से बढ़ेगा ड्रामा

स्टार प्लस के लोकप्रिय धारावाहिक ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ में आने वाले एपिसोड्स दर्शकों को भावनाओं और ड्रामे से भरपूर कहानी दिखाने वाले हैं. शो में अभीरा और अरमान की जिंदगी पहले ही कई मुश्किलों से घिरी हुई है, लेकिन अब परिस्थितियां और भी जटिल होती नजर आ रही हैं. अरमान की स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां लगातार बढ़ रही हैं और अभिरा उसके सच से पूरी तरह वाकिफ हो चुकी है. मायरा के साथ होगा बड़ा हादसा आने वाले एपिसोड में मायरा स्कूल जाने के दौरान एक परेशान करने वाली स्थिति का सामना करेगी. उसे महसूस होगा कि कोई व्यक्ति उसका पीछा कर रहा है. हालात तब बिगड़ जाएंगे जब वह उस व्यक्ति का सामना करने की कोशिश करेगी. इस दौरान एक दुर्घटना हो जाएगी, जिसमें मायरा घायल हो सकती है. घटना के बाद उसे तुरंत घर लाया जाएगा, जहां उसकी हालत देखकर परिवार के सदस्य घबरा जाएंगे. बेटी की परेशानी से परेशान होगा अरमान मायरा से पूरी बात जानने के बाद अरमान का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच जाएगा. वह जिम्मेदार व्यक्ति को सबक सिखाने का फैसला करेगा. हालांकि, तनाव और मानसिक दबाव के बीच अरमान की सेहत पर भी बुरा असर पड़ता दिखाई देगा. परिवार के लोग उसकी बिगड़ती हालत को लेकर चिंता में पड़ जाएंगे. अभीरा को सताएगा सबसे बड़ा डर कहानी में भावनात्मक मोड़ तब आएगा जब अभीरा को यह एहसास होगा कि अरमान की बीमारी लगातार गंभीर होती जा रही है. वह अपने पति को खोने के डर से अंदर ही अंदर टूटने लगेगी. हालांकि वह हिम्मत नहीं हारती और अरमान के इलाज के लिए हर संभव कोशिश करने का संकल्प लेती है. कहानी में आएगा नया ट्विस्ट मीडिया रिपोर्ट्स और शो से जुड़े अपडेट्स की मानें तो आने वाले एपिसोड में अरमान की याददाश्त को लेकर भी बड़ा ट्विस्ट देखने को मिल सकता है. यदि ऐसा होता है तो अभीरा और पूरे परिवार के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो जाएंगी. ऐसे में दर्शकों को शो में भावनाओं, संघर्ष और रिश्तों की एक नई परीक्षा देखने को मिल सकती है.

8 जून 2026 को शुक्र गोचर से बनेगा गजलक्ष्मी राजयोग, कई राशियों के लिए शुभ संकेत

द्रिक पंचांग के अनुसार, 8 जून 2026 को सुख, सौंदर्य और भौतिक सुख-साधनों के कारक शुक्र देव मिथुन राशि से निकलकर कर्क राशि में गोचर करने जा रहे हैं. ज्योतिषीय दृष्टिकोण से इस बार का यह गोचर बेहद खास और दुर्लभ है, क्योंकि कर्क राशि में पहले से ही देवगुरु बृहस्पति उच्च के होकर विराजमान हैं. कर्क राशि में शुक्र और गुरु की यह युति गजलक्ष्मी राजयोग का निर्माण भी कर रही है, जो कई राशियों के लिए भाग्य के द्वार खोलने वाला साबित होगा. आइए जानते हैं कि शुक्र के इस गोचर से किन राशियों को सबसे ज्यादा फायदा होने वाला है: कर्क राशि (Cancer) शुक्र का गोचर आपकी ही राशि के प्रथम भाव (लग्न) में हो रहा है, जहां गुरु पहले से मौजूद हैं. आपके व्यक्तित्व में एक जबरदस्त आकर्षण और निखार आएगा. समाज और कार्यक्षेत्र में लोग आपकी तरफ आकर्षित होंगे. मान-सम्मान बढ़ेगा. नौकरीपेशा लोगों को नई जिम्मेदारियां या प्रमोशन मिल सकता है. जो लोग क्रिएटिव फील्ड से जुड़े हैं, उनके लिए यह समय बेहद शानदार रहेगा. वैवाहिक जीवन में मधुरता आएगी. यदि आप सिंगल हैं, तो जीवन में किसी खास व्यक्ति का आगमन हो सकता है. सिंह राशि (Leo) आपकी राशि से 12वें भाव (व्यय और विदेश भाव) में गजलक्ष्मी राजयोग का निर्माण हो रहा है. सिंह राशि वालों के लिए यह गोचर विशेष रूप से विदेश से जुड़े मामलों में बड़ी सफलता लेकर आ रहा है. आय के नए स्रोत खुलेंगे. लंबे समय से अटका हुआ पैसा या पुराने निवेश से बड़ा मुनाफा मिल सकता है. हालांकि सुख-सुविधाओं पर खर्च भी बढ़ेगा, लेकिन वह निवेश के रूप में होगा. यदि आप विदेश यात्रा या वहां व्यापार विस्तार की योजना बना रहे हैं, तो यह समय आपके पक्ष में है. साहस और पराक्रम में वृद्धि होगी. कन्या राशि (Virgo) शुक्र का यह गोचर आपकी राशि से 11वें भाव (लाभ और इच्छा पूर्ति के भाव) में होने जा रहा है. यह गोचर आपकी आर्थिक स्थिति को सबसे ज्यादा मजबूती देगा. आपकी अधूरी इच्छाएं पूरी होने का समय आ गया है. बिजनेस में कोई बड़ी और फायदेमंद डील फाइनल हो सकती है. नौकरी में भी सहकर्मियों और उच्च अधिकारियों का पूरा सहयोग मिलेगा. आपके सामाजिक दायरे का विस्तार होगा. पुराने मित्रों या प्रभावशाली लोगों की मदद से करियर में कोई बड़ा अवसर अचानक मिल सकता है. कर्क राशि में शुक्र का प्रभाव चूंकि कर्क एक भावुक और जल तत्व की राशि है, इसलिए इस गोचर के दौरान प्रेम संबंधों में केवल आकर्षण के बजाय भावनात्मक सुरक्षा, केयर और एक-दूसरे के प्रति निष्ठा का महत्व बहुत बढ़ जाएगा.