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ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन सबसे बड़ी चुनौती, मंत्री भूरिया ने जताई चिंता

भोपाल विश्व पर्यावरण दिवस पर महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने झाबुआ में 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के तहत पौधारोपण किया। मंत्री सुश्री भूरिया ने प्रकृति के साथ हो रहे मानवीय हस्तक्षेप पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज संपूर्ण विश्व ग्लोबल वार्मिंग, वर्षा की अनियमितता, प्लास्टिक प्रदूषण और जल संकट जैसी विकराल पर्यावरणीय समस्याओं से जूझ रहा है। हमारे पूर्वज हमें एक बेहद समृद्ध प्राकृतिक विरासत सौंपकर गए हैं, जिसे सहेजना और आगे बढ़ाना हमारा परम कर्तव्य है। बेंगलुरु जैसे महानगरों में वर्षों पुराने वृक्ष आज भी वहां के नागरिकों की जागरूकता के कारण सुरक्षित हैं। मंत्री सुश्री भूरिया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में शुरू हुआ 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान केवल एक दिन का औपचारिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह धरती माता के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और समाज को भावनात्मक रूप से जोड़ने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि आगामी 21 जून तक पूरे झाबुआ जिले में 1 लाख पौधे लगाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने कड़े निर्देश दिए कि पौधारोपण के साथ पौधों को जीवित रखना और उन्हें वृक्ष के रूप में विकसित करना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। इस पूरे अभियान की पारदर्शिता और मॉनिटरिंग 'मेरी लाइफ' (Meri LiFE) ऐप के माध्यम से सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही उन्होंने पूर्व के वर्षों में रोपे गए महुआ के पौधों की विशेष देखरेख और मॉनिटरिंग करने के भी निर्देश दिए।  

एनएमडीसी ने मनाया पर्यावरण दिवस 2026

हैदराबाद  भारत की सबसे बड़ी लौह अयस्क उत्पादक और एक जिम्मेदार खनन कंपनी एनएमडीसी ने हैदराबाद में अपने मुख्यालय और देश भर में स्थित अपनी परियोजनाओं में विश्व पर्यावरण दिवस 2026 मनाया,  जो सतत खनन और पर्यावरण प्रबंधन के प्रति एनएमडीसी की प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है । कंपनी ने एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया जो पर्यावरण सुस्थिरता की दिशा में सामूहिक कार्रवाई के महत्व को उजागर करते हुए विश्व पर्यावरण दिवस की थीम  “प्रकृति से प्रेरित, जलवायु के लिए, हमारे भविष्य के लिए” पर केंद्रित रहा । समारोह की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ जो हरित भविष्य के निर्माण के लिए एक साझा प्रतिबद्धता का प्रतीक है । श्री अमिताभ मुखर्जी, अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक के नेतृत्व में श्री जॉयदीप दासगुप्ता, निदेशक (उत्पादन), श्री कृष्ण कुमार ठाकुर, निदेशक (कार्मिक), श्री अनुराग कपिल, निदेशक (वित्त), और श्री सी. नीलकंठ रेड्डी, मुख्य सतर्कता अधिकारी ने पर्यावरण की शपथ दिलवाते हुए कर्मचारियों को प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा और सुस्थिर प्रथाओं को बढ़ावा देने में योगदान करने के लिए प्रेरित किया ।  कार्यक्रम के भाग के रूप में, पर्यावरण के प्रति जागरूकता संबंधी अनेक वीडियो दिखाए गए और एनएमडीसी की पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संरक्षण, वनीकरण और सुस्थिर खनन प्रथाओं के लिए चल रही पहलों को प्रदर्शित करने वाला एक वृत्तचित्र दिखाया गया । अपनी सभी परियोजनाओं में, एनएमडीसी ने वृक्षारोपण अभियान चलाए और कर्मचारियों तथा छात्रों के लिए पर्यावरण जागरूकता को बढ़ावा देने और सुस्थिरता पर अभिनव सोच को प्रोत्साहित करने के लिए अनेक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया। कंपनी ने सुस्थिर विकल्पों को बढ़ावा देने और रोजमर्रा के जीवन में पर्यावरणीय जिम्मेदारी को सुदृढ़ करने के लिए पर्यावरण के अनुकूल उत्पादों का वितरण भी किया । अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक श्री अमिताभ मुखर्जी ने सभा को संबोधित करते हुए कहा, “पृथ्वी अपने अस्तित्व के अधिकांश समय तक मनुष्यों के बिना जीवित रही है और अस्तित्व उल्लेखनीय रहा है । मुझे यकीन है कि अगर भविष्य में मनुष्य का अस्तित्व समाप्त हो जाता है, तो भी पृथ्वी का अस्थित्व आराम से बना रहेगा । इसलिए, यह हमारे ही हित में है कि हम भूमंडल की देखभाल करें और यह सुनिश्चित करें कि यह यह हमारे रहने योग्य बना रहे। यह पृथ्वी के लिए नहीं बल्कि मानवता की उत्तरजीविता की रणनीति है । व्यावसायिक और व्यक्तिगत दोनों प्रकार से हम जो भी कदम उठाते हैं, उसे उठाने से पहले हम उनपर जिम्मेवारीपूर्वक विचार अवश्य करें ।“  पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार संगठन के रूप में, एनएमडीसी जिम्मेदार खनन में विश्वास रखता है और उसका पालन करता है । आज हम जो करते हैं वह हमें गर्व महसूस कराता है, न केवल इसलिए कि हम व्यवसाय में निरंतर मजबूत प्रदर्शन कर रहे हैं, बल्कि इसलिए भी कि हम पर्यावरण और समुदायों की सेवा के लिए प्रतिबद्ध हैं ।“  इस अवसर पर वरिष्ठ प्रबंधन द्वारा विश्व पर्यावरण दिवस पर एनएमडीसी की आंतरिक प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मानित किया गया, जिन्होंने रचनात्मकता और भागीदारी के माध्यम से पर्यावरणीय चेतना को बढावा देने का प्रयास किया ।  आज जब देश एक सुस्थिर भविष्य की ओर बढ़ रहा है, एनएमडीसी यह प्रदर्शित करता है कि जिम्मेदार खनन और पर्यावरण प्रबंधन साथ-साथ चल सकते हैं, यह सुनिश्चित करते हुए कि पृथ्वी की सतह से नीचे जो पोषित होता है वह उसके ऊपर मौजूद जीवन में भी सार्थक योगदान देता है ।

राजीव स्मृति वन में बरगद का पौधा लगाकर दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

रायपुर   मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर  राजधानी रायपुर स्थित राजीव स्मृति वन में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान 2026-27 का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री  साय ने कृष्ण वट (बरगद) का पौधा रोपित कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। इस अवसर पर वन मंत्री  केदार कश्यप ने भी बेल का पौधा लगाकर अभियान में सहभागिता निभाई। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव  साय ने कहा कि प्रकृति और मानव जीवन का संबंध अभिन्न है। अनियंत्रित वृक्ष कटाई और पर्यावरणीय असंतुलन पूरी मानवता के लिए गंभीर चुनौती बनते जा रहे हैं। ऐसे समय में प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी द्वारा प्रारंभ किया गया ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाने की दिशा में एक प्रेरक और भावनात्मक पहल है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि गत वर्ष प्रदेश में ढाई करोड़ पौधारोपण का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन जनसहभागिता और विभागीय प्रयासों से साढ़े तीन करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस वर्ष भी प्रदेशवासी निर्धारित लक्ष्य से कहीं अधिक पौधारोपण कर नया कीर्तिमान स्थापित करेंगे। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ देश के उन राज्यों में शामिल है जहां लगभग 44 प्रतिशत भू-भाग वनाच्छादित है। राज्य सरकार और वन विभाग के सतत प्रयासों से वन क्षेत्र का संरक्षण और विस्तार निरंतर जारी है। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अपने घर, खेत, आंगन और मेड़ों में अपनी माता के नाम एक पौधा लगाने का आग्रह करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी दायित्व नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की नैतिक जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री ने आदिवासी समाज की प्रकृति संरक्षण परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि जनजातीय समुदाय सदियों से जंगलों को अपनी संस्कृति और जीवन का अभिन्न हिस्सा मानकर उनकी रक्षा करता आया है। सरना स्थलों में वृक्षों को देवतुल्य मानकर पूजा जाना प्रकृति के प्रति हमारी सांस्कृतिक आस्था और संरक्षण की भावना का जीवंत उदाहरण है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने समाज सेवा एवं जनकल्याण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले पद्म सम्मानित व्यक्तित्व  पंडी राम मंडावी,  जागेश्वर यादव तथा डॉ. रामचंद्र गोडबोले का सम्मान किया। उन्होंने कहा कि इन विभूतियों का जीवन समाजसेवा, समर्पण और जनहित का प्रेरणादायी उदाहरण है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ राज्य जैव विविधता बोर्ड द्वारा प्रकाशित पुस्तकों—‘द बैगा’, ‘वेटलैंड्स ऑफ छत्तीसगढ़’, ‘फ्लोरल डायवर्सिटी ऑफ बीजापुर डिवीजन’, ‘मैमल्स ऑफ छत्तीसगढ़’ तथा ‘उत्तरी छत्तीसगढ़ के अनूठे पर्यटन स्थल और उनकी विविधता’—का विमोचन भी किया। वन मंत्री  केदार कश्यप ने कहा कि ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान प्रकृति और मातृत्व के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का एक अनूठा माध्यम है। उन्होंने प्रदेशवासियों से इस अभियान को जन-जन का आंदोलन बनाने का आह्वान किया। उन्होंने बिलासपुर जिले के कोपरा जलाशय को रामसर साइट का दर्जा मिलने पर प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए इसे छत्तीसगढ़ के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया। कार्यक्रम में भानुप्रतापपुर विकासखंड के ग्राम सिलीबहार की सु चन्दनबती कोला ने स्व-सहायता समूहों द्वारा जंगल संरक्षण और जैविक खेती के क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि गांव में 138 एकड़ क्षेत्र में प्राकृतिक एवं जैविक खेती की जा रही है, जिससे युवाओं का पलायन पूरी तरह रुक गया है तथा पर्यावरण संरक्षण को नई दिशा मिली है। कार्यक्रम को अपर मुख्य सचिव  मनोज पिंगुआ तथा प्रधान मुख्य वन संरक्षक  अरुण कुमार पाण्डेय ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम के अध्यक्ष  रामसेवक पैकरा, आदिवासी स्थानीय स्वास्थ्य परम्परा एवं औषधि पादप बोर्ड के उपाध्यक्ष  अंजय शुक्ला, विधायक  मोतीलाल साहू, जिला पंचायत अध्यक्ष  नवीन अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल की बड़ी पहल, विभिन्न आय वर्गों के लिए विकसित होंगे आधुनिक मकान

रायपुर  छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल द्वारा कुनकुरी विकासखंड अंतर्गत ग्राम गिनाबहार में शासन की महत्वाकांक्षी अटल विहार योजना के अंतर्गत एक आधुनिक आवासीय परियोजना विकसित की जा रही है। यह परियोजना क्षेत्र में सुव्यवस्थित एवं योजनाबद्ध आवासीय विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है तथा कुनकुरी क्षेत्र की पहली आधुनिक आवासीय कॉलोनी होगी। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय द्वारा अवगत कराया गया कि छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल प्रदेश के सभी 33 जिलों में आवासीय योजनाओं का विस्तार करने तथा नागरिकों को बेहतर आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इसी उद्देश्य के अनुरूप मंडल द्वारा इस परियोजना का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है, जिससे क्षेत्र के समग्र विकास एवं कुनकुरी वासियों के जीवन स्तर में सकारात्मक सुधार सुनिश्चित हो सकेगा। साथ ही जशपुर में आने वाले दिनों में शीघ्र ही अटल विहार योजना बालाछापर, पत्थलगॉव एवं अटल आवास योजना महुआ टोली, कंदोरा पर भी आवासीय योजनाए प्रारंभ की जाएगी। ज्ञात हो कि इससे पूर्व कुनकुरी में कोई व्यवस्थित कॉलोनी मण्डल अथवा प्राईवेट बिल्डर्स द्वारा विकसित नही किया गया है। आवास मंत्री एवं जिला जशपुर के प्रभारी मंत्री  ओ. पी. चौधरी के विशेष निर्देश पर यह आवासीय परियोजना ग्राम गिनाबहार, तहसील कुनकुरी, जिला जशपुर में लगभग 7 एकड़ क्षेत्र में विकसित की जाएगी, जिसके लिए 17 करोड़ 15 लाख 71 हजार रुपये की प्रशाकीय स्वीकृति दी गई है। परियोजना के अंतर्गत विभिन्न आय वर्गों के लिए कुल 97 आवासों का निर्माण किया जाएगा।जिसमे EWS एवं LIG  श्रेणी के 91 मकान निर्मित किये जाएंगे। अटल विहार योजना हेतु शासन द्वारा छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल को  1/- रुपयें प्रति वर्गफीट के हिसाब से भूमि आबंटित की गई है तथा ई.डब्ल्यू.एस. अंतर्गत पात्र हितग्राहियों को रुपयें 80,000/- एवं एल.आई.जी. के पात्र हितग्राहियों को रुपयें 40,000/- का अनुदान दिया जाता है।   अनुराग सिंह देव अध्यक्ष छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल द्वारा बताया गया कि विकसित की जा रही यह कॉलोनी आधुनिक सुविधाओं से युक्त कॉलोनी होगी। इसमें सुरक्षा व्यवस्था, चौड़ी एवं सुव्यवस्थित सड़कें, स्वच्छ एवं हरित वातावरण, समुचित जल निकासी व्यवस्था तथा अन्य आवश्यक अधोसंरचनात्मक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। एक नियोजित आवासीय परिसर के रूप में विकसित होने के कारण यह परियोजना नागरिकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनने की संभावना रखती है। परियोजना स्थल कुनकुरी-बगीचा मार्ग पर राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-43) से मात्र 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह स्थान शहर से सटा हुआ होने के साथ-साथ महत्वपूर्ण संस्थानों के निकट भी है। एशिया के द्वितीय सबसे बड़े चर्च, हॉलीक्रॉस मिशन अस्पताल, लोयला स्कूल एवं लोयला महाविद्यालय जैसे प्रमुख संस्थान परियोजना स्थल से लगभग 3 से 3.5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं। भविष्य में इस क्षेत्र के आसपास शासकीय अस्पतालों, शासकीय कार्यालयों तथा अन्य महत्वपूर्ण शासकीय भवनों के निर्माण की भी योजना है। वर्तमान में परियोजना स्थल के समीप शासकीय अस्पताल का निर्माण कार्य प्रगतिरत है। इससे क्षेत्र के सुनियोजित विकास को गति मिलने के साथ-साथ भविष्य में भूमि का विकास एवं मूल्य में वृद्धि की संभावनाएं भी प्रबल हैं, जिससे यह परियोजना आवासीय एवं निवेश, दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण सिद्ध हो सकती है । यह परियोजना क्षेत्रवासियों को गुणवत्तापूर्ण एवं किफायती आवास उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उल्लेखनीय है कि यह परियोजना माननीय मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के विधानसभा क्षेत्र कुनकुरी में विकसित की जा रही है।

पर्यावरण संरक्षण सबकी साझा जिम्मेदारी, मंत्री टेटवाल ने किया जनभागीदारी का आह्वान

पर्यावरण संरक्षण सबकी साझा जिम्मेदारी है: मंत्री टेटवाल विश्व पर्यावरण दिवस पर ग्लोबल स्किल्स पार्क में हुआ पौध-रोपण प्रदेश की सभी आईटीआई में 200 पौधों का होगा रोपण भोपाल कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम टेटवाल ने कहा कि मानव जीवन और प्रकृति एक-दूसरे के पूरक है। वर्षों से हम प्रकृति से जल, वायु, भूमि और अन्य संसाधन प्राप्त करते रहे हैं, लेकिन विकास और सुविधाओं की बढ़ती आवश्यकता के बीच प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन भी हुआ है। इसका परिणाम आज जलवायु परिवर्तन, बढ़ते प्रदूषण, जल संकट, तापमान में वृद्धि और पर्यावरणीय असंतुलन जैसी गंभीर चुनौतियों के रूप में सामने आ रहा है। ऐसे समय में प्रकृति के संरक्षण और संवर्धन के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी निभाना आवश्यक हो गया है। पर्यावरण संरक्षण सबकी साझा जिम्मेदारी है। संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल्स पार्क में विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आयोजित पौध-रोपण कार्यक्रम में मंत्री डॉ. टेटवाल ने कहा कि अब समय केवल प्रकृति से लेने का नहीं, बल्कि उसे लौटाने का है। पर्यावरण संरक्षण के लिए किए जाने वाले प्रयास किसी एक दिन, सप्ताह या अभियान तक सीमित नहीं होने चाहिए, बल्कि इन्हें हमारे दैनिक जीवन और व्यवहार का हिस्सा बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति यदि अपने स्तर पर पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार आचरण अपनाए तो बड़े सकारात्मक परिवर्तन संभव हैं। प्रदूषण नियंत्रण, जल संरक्षण और स्वच्छता के लिए करें सतत प्रयास मंत्री टेटवाल ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण का अर्थ केवल पौधे लगाना नहीं है। प्रदूषण को कम करना, जल स्रोतों का संरक्षण करना, स्वच्छता को बढ़ावा देना और प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने कहा कि नदियां, तालाब, जलाशय और अन्य जल स्रोत हमारी अमूल्य धरोहर हैं। इनके संरक्षण के बिना सतत विकास की कल्पना नहीं की जा सकती। मंत्री टेटवाल ने कहा कि जल संरक्षण और स्वच्छता के लिए किए जाने वाले प्रयास निरंतर और आजीवन होने चाहिए। वर्तमान पीढ़ी यदि पर्यावरण और जल स्रोतों के संरक्षण के प्रति सजग नहीं हुई तो आने वाली पीढ़ियों को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ते हुए जन-आंदोलन का स्वरूप दिया जाना चाहिए। प्रदेशभर में चलेगा पौधरोपण अभियान मंत्री टेटवाल ने बताया कि विभाग द्वारा पर्यावरण संरक्षण और हरित परिसर निर्माण के उद्देश्य से प्रदेश की प्रत्येक औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था (आईटीआई) में 200-200 पौधे लगाए जाएंगे। इसके साथ ही संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल्स पार्क परिसर में 1000 पौधे लगाये जाएंगे। उन्होंने कहा कि पौध-रोपण भविष्य की पीढ़ियों को स्वच्छ वातावरण देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसके साथ ही लगाए गए पौधों का संरक्षण और संवर्धन सुनिश्चित करना भी हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। मंत्री टेटवाल ने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण को केवल औपचारिक गतिविधि न मान कर इसे अपने जीवन का हिस्सा बनाएं। प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का भाव ही बेहतर भावी जीवन की आधारशिला है। पर्यावरण संरक्षण वर्षभर की जिम्मेदारी संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल्स पार्क के मुख्य कार्यपालन अधिकारी गिरीश शर्मा ने कहा कि विश्व पर्यावरण दिवस का उद्देश्य केवल एक दिवसीय कार्यक्रम आयोजित करना नहीं है। पर्यावरण संरक्षण वर्ष के सभी 365 दिनों की जिम्मेदारी है। संस्थान द्वारा हरित परिसर निर्माण, पौधरोपण और पर्यावरण जागरूकता से जुड़े प्रयास निरंतर किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता और व्यवहारगत परिवर्तन ही इस दिशा में स्थायी परिणाम सुनिश्चित कर सकते हैं। कार्यक्रम में पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण, जल संवर्धन और स्वच्छता के प्रति सामूहिक संकल्प लिया गया। इस अवसर पर संस्थान के अधिकारी, कर्मचारी एवं प्रशिक्षणार्थी उपस्थित रहे।  

सीमा पर बढ़ी सख्ती: घुसपैठियों की वापसी को लेकर BSF-BGB के बीच विवाद की स्थिति

कलकत्ता भारत में बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ सख्ती के बाद सीमा पर टकराव की नौबत है. बांग्लादेश गार्ड बॉर्डर (BGB) अपने ही नागरिकों को अपने देश में एंट्री नहीं दे रहा है. भारत-बांग्लादेश सीमा पर कई दिनों से सैकड़ों बांग्लादेशी घर वापसी के लिए इंतजार कर रहे हैं. लेकिन BGB इन्हें बांग्लादेशी मानती ही नहीं है।  BGB ने लालमोनिरहाट में तीन बॉर्डर पॉइंट्स पर अपने 33 लोगों को बांग्लादेश में घुसने नहीं दिया. बांग्लादेश के अखबार द डेली स्टार ने अपनी एक रिपोर्ट में लिखा है कि BGB ने लालमोनिरहाट में तीन बार्डर पॉइंट्स से 33 लोगों को अंदर भेजने की बीएसएफ की कोशिश को सफल नहीं होने दिया।  अखबार ने लिखा है, "BGB अधिकारियों के अनुसार आज सुबह-सुबह भारत के बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स ने लालमोनिरहाट में तीन बॉर्डर पॉइंट्स से 33 लोगों को बांग्लादेश में भेजने की कोशिश की, जिसे बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) ने रोक दिया. BGB-16 और 61 बटालियन के अधिकारियों ने बताया कि ये घटनाएं सुबह करीब 5:00 बजे बॉर्डर पर अलग-अलग जगहों पर हुईं।  BGB-15 लालमोनिरहाट बटालियन के कमांडिंग ऑफिसर लेफ्टिनेंट कर्नल मेहदी इमाम ने दावा किया कि सभी लोगों को ज़ीरो लाइन पर रोक दिया गया. उन्होंने कहा कि बॉर्डर पर कड़ी नज़र रखी जा रही है और BGB हाई अलर्ट पर है; साथ ही इस घटना को लेकर BSF के साथ बातचीत भी चल रही है।  BGB मीडिया सेल ने दावा किया कि सबसे पहले BGB-61 तीस्ता बटालियन के तहत बाराखाटा बॉर्डर आउटपोस्ट (BOP) इलाके से 11 लोगों को बांग्लादेश की तरफ पुश-इन करते हुए देखा गया. आगे BGB ने दावा किया कि फिर उसी समय पैशात्तीबारी BOP इलाके से भी 10 और लोगों को अंदर धकेला जा रहा था।  जानकारी मिलने के बाद BGB की पेट्रोलिंग टीमें तुरंत दोनों जगहों पर पहुंचीं और स्थिति को काबू में किया. BGB ने उन लोगों को बॉर्डर पर ही रोक दिया गया और वे भारतीय सीमा में ही रहे।  पश्चिम बंगाल में अवैध रुप से घुसे बांग्लादेशियों के खिलाफ जबर्दस्त अभियान चलाया जा रहा है. इसके बाद देश में अवैध रूप से घुसे कई बांग्लादेशी स्वेच्छा से वापस बांग्लादेश जाना चाहते हैं, लेकिन बांग्लादेश सरकार और सेना इन लोगों को अपना नागरिक मानने से ही इनकार कर रही है।  अखबार के अनुसार दुर्गापुर और दिघलतारी BOP की BGB KR पेट्रोलिंग टीमों ने भारतीय सीमा की तरफ से बॉर्डर पिलर 925 और 927 के पास 12 लोगों बांग्लादेश में घुसने से रोक दिया।  बांग्लादेश के अखबार प्रथम आलो ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि उन्होंने बंगाबाडी बॉर्डर इलाके में 28 लोगों बांग्लादेश घुसने रोक दिया।  इस मामले को लेकर गुरुवार दोपहर BGB और BSF के बीच एक फ्लैग मीटिंग हुई. बंगाबाड़ी बॉर्डर पर हुई इस मीटिंग में BSF ने BGB को बताया कि वे इस मुद्दे पर अपने सीनियर अधिकारियों से बात करेंगे और इसका समाधान निकालेंगे।  भारत में इस समय सिर्फ पश्चिम बंगाल ही नहीं बल्कि दिल्ली, अहमदाबाद, गुरुग्राम बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ पुलिस/प्रशासनिक अभियान चलाये जा रहे हैं. ये अभियान अवैध घुसपैठ, फर्जी दस्तावेजों और सुरक्षा मुद्दों पर केंद्रित हैं। 

धर्म, अनुशासन और शौर्य का संगम: गुरुद्वारा सिंह शहीदां में जारी गुरमत-गतका प्रशिक्षण शिविर

मोहाली. बच्चों को गुरसिख धर्म, सिख इतिहास और सिख परंपराओं से जोड़ने के मकसद से गुरुद्वारा सिंह शहीदां सोहाना में 18 दिन का गुरमत और गतका ट्रेनिंग कैंप लगाया जा रहा है। यह कैंप 1 जून से शुरू हुआ है और 18 जून तक हर दिन सुबह 6 बजे से 9 बजे तक चलेगा। इस बारे में जानकारी देते हुए गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी के प्रवक्ता ने बताया कि मैनेजमेंट कमेटी और गतका अखाड़े की तरफ से मिलकर लगाए गए इस कैंप में बच्चों को सिख इतिहास, पंजाबी भाषा का ज्ञान, गुरबानी कंठा, गुरमत शिक्षा, शास्त्र विद्या और गतका की खास ट्रेनिंग दी जा रही है। उन्होंने बताया कि कैंप के दौरान बच्चों के ओवरऑल डेवलपमेंट और उनके धार्मिक ज्ञान को बढ़ाने के लिए कई तरह की एक्टिविटीज़ करवाई जा रही हैं। कैंप के आखिरी दो दिनों में गुरमत प्रशोंत्री कॉम्पिटिशन, गुरबानी कंठा कॉम्पिटिशन और गतका कॉम्पिटिशन होंगे। ऑर्गनाइज़र के मुताबिक, कॉम्पिटिशन में अच्छा परफॉर्म करने वाले स्टूडेंट्स को स्पेशल प्राइज़ दिए जाएंगे, जबकि कैंप में हिस्सा लेने वाले हर स्टूडेंट को सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि कैंप के दौरान, एक दिन स्टूडेंट्स को बसों के ज़रिए श्री चमकौर साहिब, दास्तान-ए-शहादत और दूसरे ऐतिहासिक गुरुद्वारों के दर्शन कराए जाएंगे, ताकि बच्चों को सिख इतिहास और गुरुओं की शहादत के बारे में डिटेल में जानकारी मिल सके। कैंप के दौरान रोज़ गुरु का अटूट लंगर भी परोसा जा रहा है। गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी ने इलाके के पेरेंट्स से अपील की है कि वे अपने बच्चों को ऐसे धार्मिक और कल्चरल कैंप से जोड़ें, ताकि नई पीढ़ी सिख सिद्धांतों, गुरबानी और सिख विरासत से और मज़बूती से जुड़ सके।

पीड़ित दुकानदार को दिलासा, धमोली और SDM पहुंचे मौके पर, हालात का किया आकलन

राजपुरा.  पंजाब व्यापार आयोग के वाइस चेयरमैन गुरप्रीत सिंह धमोली और SDM राजपुरा सुखजिंदर सिंह टिवाना ने हाल ही में लगी आग से बुरी तरह प्रभावित PMN कॉलेज रोड पर स्थित दुकान का दौरा किया और नुकसान का जायजा लिया। इस मौके पर उन्होंने दुकान के मालिक पलविंदर सिंह गोलू से मुलाकात की और घटना के बारे में जानकारी ली। दुकानदार पलविंदर सिंह ने बताया कि घटना के समय वह अपने घर में मौजूद थे। पड़ोसियों ने फोन पर आग लगने की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उनकी तीन मंजिला दुकान में आग तेजी से फैल गई थी और फायर ब्रिगेड की तीन गाड़ियों ने काफी मुश्किल के बाद आग पर काबू पाया। उनके मुताबिक इस घटना में करीब 15 से 20 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। SDMS सुखजिंदर सिंह टिवाना ने कहा कि पीड़ित दुकानदार को नियमानुसार बनता मुआवजा दिलाने के लिए सरकार को सिफारिश भेजी जाएगी। इस मौके पर गुरप्रीत सिंह धमोली ने कहा कि पंजाब सरकार व्यापारियों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है और व्यापार आयोग व्यापारियों की समस्याओं को हल करने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। इस मौके पर AAP नेता कीरत सिंह सिहरा, हरदीप सिंह टिंकू, जगमीत सिंह और अन्य गणमान्य लोग मौजूद थे।

हाथियों के संरक्षण को मिलेगी नई मजबूती, वन मंत्री केदार कश्यप ने बताए बड़े कदम

हाथियों के संरक्षण को मिलेगी नई मजबूती -वन मंत्री केदार कश्यप वन मंत्री ने किया राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ विशेषज्ञ देंगे वैज्ञानिक प्रबंधन का प्रशिक्षण रायपुर छत्तीसगढ़ में हाथियों के संरक्षण और मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के उद्देश्य से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ आज वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने अपने निवास कार्यालय में वर्चुअल माध्यम से किया। इस अवसर पर वन बल प्रमुख अरुण कुमार पाण्डेय भी साथ में थे। इस कार्यशाला में देशभर के वन्यजीव विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, पशु चिकित्सक और वन अधिकारी शामिल हुए। संरक्षण प्रयासों से बढ़ी हाथियों की संख्या            वन मंत्री कश्यप ने कहा कि छत्तीसगढ़ जैव विविधता और वन संपदा से समृद्ध राज्य है। राज्य सरकार के संरक्षण प्रयासों का सकारात्मक परिणाम सामने आया है। वर्ष 2022 में प्रदेश में लगभग 240 हाथी थे, जिनकी संख्या बढ़कर वर्ष 2026 में करीब 450 हो गई है। यह वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि है। मानव-हाथी संघर्ष कम करना सरकार की प्राथमिकता             कश्यप ने बताया कि वर्तमान में हाथियों का विचरण सरगुजा, बिलासपुर, रायगढ़, रायपुर और दुर्ग संभाग के कई क्षेत्रों तक फैल चुका है। ऐसे में हाथियों के संरक्षण के साथ-साथ प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी आवश्यक है। राज्य सरकार जनभागीदारी, सतत निगरानी और वैज्ञानिक प्रबंधन के माध्यम से मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर जोर            वन मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार हाथियों के संरक्षण के लिए दीर्घकालिक और वैज्ञानिक रणनीति पर कार्य कर रही है। आधुनिक तकनीक, विशेषज्ञों के मार्गदर्शन और प्रशिक्षित मानव संसाधन की मदद से वन्यजीव प्रबंधन को और मजबूत बनाया जा रहा है। इस तरह की कार्यशालाएं अधिकारियों और कर्मचारियों को नवीनतम जानकारी और व्यावहारिक अनुभव प्रदान करती हैं। विशेषज्ञ देंगे स्वास्थ्य प्रबंधन और संरक्षण का प्रशिक्षण          कार्यशाला में भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून तथा भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान, बरेली सहित विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञ वन अधिकारियों और पशु चिकित्सकों को प्रशिक्षण दे रहे हैं। प्रशिक्षण के दौरान हाथियों की मृत्यु के कारणों की वैज्ञानिक जांच, नमूनों का संरक्षण, स्वास्थ्य परीक्षण, शव प्रबंधन और स्वास्थ्य निगरानी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से जानकारी दी जाएगी। वन्यजीव संरक्षण में छत्तीसगढ़ बन रहा मॉडल राज्य         वन मंत्री कश्यप ने विश्वास व्यक्त किया कि कार्यशाला से प्राप्त ज्ञान और अनुभव हाथियों के संरक्षण, सुरक्षा और प्रभावी प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ वन्यजीव संरक्षण और वैज्ञानिक प्रबंधन के क्षेत्र में देश के लिए एक मजबूत मॉडल के रूप में उभर रहा है। विशेषज्ञों और प्रतिभागियों का किया आभार व्यक्त        वन मंत्री ने सभी विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए जैव विविधता संरक्षण तथा मानव-वन्यजीव सहअस्तित्व को बढ़ावा देने के लिए निरंतर बेहतर कार्य करने का आह्वान किया।

हरियर छत्तीसगढ़’ हमारी पहचान, पर्यावरण संरक्षण सबकी जिम्मेदारी: वन मंत्री केदार कश्यप

हरियर छत्तीसगढ़ हमारी पहचान, पर्यावरण संरक्षण हमारी जिम्मेदारी- वन मंत्री केदार कश्यप विश्व पर्यावरण दिवस पर वन मंत्री ने प्रदेशवासियों को दी बधाई, पौधा लगाने का किया आह्वान एक पेड़ मां के नाम अभियान बना जनआंदोलन उदंती-सीतानदी में दूधराज का घोंसला समृद्ध जैव विविधता का प्रतीक रायपुर विश्व पर्यावरण दिवस के गरिमामय अवसर पर वन मंत्री  केदार कश्यप ने समस्त प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ अपनी समृद्ध वन संपदा, अनुपम जैव विविधता और अद्वितीय प्राकृतिक संसाधनों के कारण देश का एक अत्यंत समृद्ध राज्य है। वर्तमान में राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण और हरित विकास को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए निरंतर कार्य कर रही है। जनआंदोलन बना एक पेड़ मां के नाम अभियान          वन मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के कुशल नेतृत्व में प्रदेश में वन एवं वन्यजीव संरक्षण सहित हरित क्षेत्र को बढ़ाने के लिए कई प्रभावी योजनाएं चलाई जा रही हैं। ष्एक पेड़ मां के नामष् अभियान के तहत पिछले दो वर्षों में राज्य में करोड़ों पौधों का रोपण किया गया है। आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से अब यह अभियान एक बड़े जनआंदोलन का रूप ले चुका है। 44 प्रतिशत वनाच्छादित क्षेत्र छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी पूंजी         मंत्री  कश्यप ने कहा कि छत्तीसगढ़ का लगभग 44 प्रतिशत भू-भाग वनों से ढका है, जो हमारी सबसे बड़ी प्राकृतिक संपदा है। वन विभाग द्वारा वैज्ञानिक प्रबंधन, प्राकृतिक पुनर्जनन और व्यापक वृक्षारोपण के माध्यम से इस हरित आवरण को और अधिक मजबूत किया जा रहा है। सुरक्षित हुए प्राकृतिक आवास, बढ़ा जल स्तर       कश्यप ने वन्यजीवों के संरक्षण पर बात करते हुए बताया कि राज्य के राष्ट्रीय उद्यानों और अभयारण्यों में वन्यप्राणियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। हाल ही में उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में मध्य प्रदेश के राजकीय पक्षी दूधराज द्वारा घोंसला बनाने का दुर्लभ दृश्य देखा गया है, जो हमारी सुरक्षित एवं अनुकूल पर्यावरण प्रणाली का प्रत्यक्ष प्रमाण है। इसके अलावा, वन क्षेत्रों में हज़ारों जल संरक्षण संरचनाओं के निर्माण से वन्यजीवों को सालभर पानी मिल रहा है और भूजल स्तर में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है। पर्यावरण संरक्षण के साथ आजीविका को बढ़ावा          वन मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार वनाश्रित परिवारों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए लघु वनोपजों के संग्रहण, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन पर विशेष ध्यान दे रही है। इससे पर्यावरण की रक्षा के साथ-साथ स्थानीय लोगों की आय में भी बढ़ोतरी हो रही है। उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि वे आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित और स्वच्छ भविष्य के लिए कम से कम एक पौधा अवश्य लगाएं और उसके संरक्षण की जिम्मेदारी लें।