samacharsecretary.com

हरियाणा में यमुनानगर का ग्रीन रिकॉर्ड, 60 लाख से अधिक पौधारोपण के साथ शीर्ष पर पहुंचा

यमुना नगर. विश्व पर्यावरण दिवस पर हरियाणा की हरियाली की तस्वीर में यमुनानगर सबसे आगे दिखाई देता है। वन विभाग की डिजिटल वृक्ष गणना में जंगलों से बाहर हरियाणा में 60.94 लाख पेड़ दर्ज किए गए, जो पूरे प्रदेश में सबसे अधिक हैं। प्रदेश के 4.01 करोड़ पेड़ों में 14.86 प्रतिशत पेड़ अकेले यमुना नगर में हैं, यानी प्रदेश के कुल पेडों में हर सातवां पेड़ यमुनानगर जिले का है। वन क्षेत्र मामले में भी जिला दूसरे स्थान पर है। हालांकि बढ़ता प्रदूषण, गिरता भूजल, अवैध खनन व वनों पर बढ़ती तस्करी भविष्य की चुनौतियां खड़ी कर रहे हैं, पर इस बीच भी कलेसर नेशनल पार्क, वन्यजीव अभयारण्य व किसानों की कृषि वानिकी यमुनानगर को हरियाणा की हरित पहचान बना रहे हैं। कलेसर व किसानों ने दिलाई पहचान वन विभाग द्वारा कराई गई डिजिटल वृक्ष गणना के अनुसार प्रदेश में जंगलों से बाहर 4.01 करोड़ पेड़ हैं। इनमें सबसे अधिक 60 लाख 94 हजार 153 पेड़ यमुनानगर में दर्ज किए गए हैं। इसके बाद अंबाला में 34,08,972, सिरसा में 33,18,033 और फरीदाबाद में 5,72,416 पेड़ हैं। इसके बाद कुरुक्षेत्र, पलवल और गुरुग्राम का स्थान है। पेड़ों की संख्या में यमुनानगर के आगे रहने की उपलब्धि के पीछे 25 हजार एकड़ में फैला कलेसर नेशनल पार्क व वन्यजीव अभयारण्य बड़ी वजह हैं। शिवालिक की तलहटी स्थित यह क्षेत्र हरियाणा की सबसे समृद्ध जैव विविधता वाला वन क्षेत्र है। दूसरी ओर किसानों ने निजी भूमि पर पापलर, सफेदा व शीशम के बड़े स्तर पर रोपण कर कृषि वानिकी को नई ऊंचाई दी है। यही कारण है कि यमुनानगर को देश की प्लाईवुड राजधानी के रूप में पहचान मिली। किसान संघ के महामंत्री रामबीर चौहान का कहना है कि किसानों की भागीदारी के बिना यह उपलब्धि संभव नहीं थी। 10.94% वन क्षेत्र से प्रदेश में दूसरा नंबर भारतीय वन सर्वेक्षण की इंडिया स्टेट आफ फारेस्ट रिपोर्ट के अनुसार हरियाणा का कुल वन क्षेत्र 1559 वर्ग किलोमीटर है, जो राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 3.53 प्रतिशत है। वन क्षेत्र के मामले में पंचकूला 47.4 प्रतिशत वन क्षेत्र के साथ पहले स्थान पर है। यमुनानगर 10.94 प्रतिशत वन क्षेत्र के साथ दूसरे स्थान पर है। प्रदेश में हर वर्ष बड़े स्तर पर पौधरोपण अभियान चलाए जाते हैं। विभिन्न योजनाओं के तहत हर साल 2.2 से 2.5 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य रखा जाता है। हालांकि पौधों को जीवित रखना अभी भी चुनौती बना हुआ है। औसतन 65 से 70 प्रतिशत पौधे ही जीवित रह पाते हैं। सड़कों व नहरों किनारे यह दर कई बार 50 से 55 प्रतिशत तक सिमट जाती है। इसी कारण पौधरोपण करने वाली एजेंसियों को पांच वर्ष तक रखरखाव की जिम्मेदारी दी जा रही है। बढ़ रहे वाहन और गिर रहा भूजल स्तर प्रदेश में हर साल सात से आठ लाख नए वाहन पंजीकृत हो रहे हैं। कुल वाहनों की संख्या एक करोड़ से अधिक हो चुकी है। सर्दियों में जींद, बहादुरगढ़, धारूहेड़ा व गुरुग्राम जैसे शहर गंभीर वायु प्रदूषण का सामना करते हैं। दूसरी ओर प्रदेश में 19,487 तालाब होने के बावजूद भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है। राज्य के 143 ब्लाकों में 85 से 88 ब्लाक ओवर एक्सप्लाइटेड श्रेणी में पहुंच चुके हैं। महेंद्रगढ़ में भूजल स्तर 52 मीटर से अधिक गहराई तक पहुंच चुका है। यमुनानगर की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है। जिले में औसत भूजल स्तर 14 से 16 मीटर के बीच है, पर यहां भी लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। विशेषज्ञ बोले- उपलब्धि बड़ी, खतरे गंभीर पर्यावरणविद् डा. रविश चौहान ने कहा कि यमुनानगर का पेड़ों की संख्या में प्रदेश में पहले स्थान पर होना एक आंकड़ा नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि है। कलेसर के जंगल व किसानों की कृषि वानिकी ने जिले को विशेष पहचान दी है। लेकिन अवैध खनन, खैर कटान, भूजल दोहन व बढ़ता प्रदूषण चिंता का विषय हैं। यदि संरक्षण व संवर्धन साथ-साथ नहीं चले तो आने वाले वर्षों में पर्यावरणीय संतुलन प्रभावित हो सकता है। श्रेणी / सूचक    आंकड़े और महत्वपूर्ण जानकारी प्रदेश में कुल पेड़ (जंगलों से बाहर)            4.01 करोड़ यमुना नगर में कुल पेड़ (जंगलों से बाहर)     60.94 लाख (प्रदेश के कुल पेड़ों का बड़ा हिस्सा) वन क्षेत्र (Forest Area) में पहला स्थान        पंचकूला वन क्षेत्र (Forest Area) में दूसरा स्थान        यमुनानगर यमुनानगर का कुल वन क्षेत्र प्रतिशत            10.94% हरियाणा का कुल वन क्षेत्र                           1,559 वर्ग किमी हर साल पौधारोपण का लक्ष्य                        2.2 से 2.5 करोड़ पौधे पौधों के जीवित रहने की दर                         65% से 70% प्रदेश में कुल तालाबों की संख्या                    19,487 ओवर एक्सप्लाइटेड ब्लॉक (अति-दोहित क्षेत्र)   85 – 88 ब्लॉक महेंद्रगढ़ में भूजल स्तर                                  52 मीटर से अधिक गहरा सालाना पंजीकृत होने वाले नए वाहन                7 से 8 लाख

बेटियों के सपनों को मिली उड़ान, लाड़ली लक्ष्मी योजना बनी उच्च शिक्षा का मजबूत सहारा

बेटियों के टूटने नहीं दिए ख्वाब: मध्यप्रदेश की लाड़ली लक्ष्मी योजना बनी उच्च शिक्षा का संबल भोपाल अगर सरकार से यह मदद न मिलती, तो गरीबी के आगे मेरे घुटने टिक जाते और मेरी पढ़ाई हमेशा के लिए बंद हो जाती। आज मैं कॉलेज जा रही हूँ, तो सिर्फ इसलिए क्योंकि मेरे सिर पर 'लाड़ली लक्ष्मी योजना' का हाथ है।" यह भावुक कर देने वाले शब्द मध्यप्रदेश के अशोकनगर जिले की प्रतिभा बुरेडिया के हैं। यह महज एक बच्ची की जुबानी नहीं है, बल्कि मध्यप्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी 'लाड़ली लक्ष्मी योजना' की सफलता की वह जीवंत कहानी है, जो आज प्रदेश की लाखों बेटियों की जिंदगी में रोशनी बिखेर रही है। आर्थिक तंगहाली और मजबूरियों के अंधेरे को चीरकर अपनी किस्मत खुद लिखने वाली दो बेटियों-प्रतिभा बुरेडिया और ओशीन खान की दास्तान आज राष्ट्रीय पटल पर उन सभी परिवारों के लिए एक मिसाल है, जो तंगहाली के कारण बेटियों की पढ़ाई बीच में ही छुड़वा देते हैं। मजदूर की बेटियों को मिला हौसलों का आसमान अशोकनगर के वार्ड क्रमांक 21 की रहने वाली प्रतिभा के पिता राजेंद्र रजक मजदूरी करते हैं। गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले इस परिवार के लिए दो वक्त की रोटी के साथ बच्चों को पढ़ाना एक बड़े पहाड़ जैसा था। प्रतिभा बताती हैं कि जब वह कक्षा 12वीं में थीं, तो घर की माली हालत देखकर उन्हें लगा कि अब पढ़ाई का सफर यहीं थम जाएगा। ठीक ऐसी ही कहानी वार्ड क्रमांक 18 की ओशीन खान की भी है। मध्यमवर्गीय मजदूर परिवार से आने वाली ओशीन के पिता अमजद खान पर पूरे परिवार और बच्चों की शिक्षा का भारी बोझ था। लेकिन, दोनों ही बेटियों के सपनों के आड़े गरीबी नहीं आ सकी, क्योंकि बचपन में ही आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से उनका पंजीयन लाड़ली लक्ष्मी योजना में हो चुका था। कदम-कदम पर मिली आर्थिक सुरक्षा की गारंटी योजना के तहत इन बेटियों को स्कूल से लेकर कॉलेज तक हर मोड़ पर वित्तीय सहारा मिला। प्रतिभा को कक्षा 6वीं में ₹2,000 की राशि, कक्षा 9वीं में ₹4,000, कक्षा 11वीं में ₹6,000 और कक्षा 12वीं (वर्ष 2025) में ₹6,000 की छात्रवृत्ति मिली। इस वित्तीय सहायता के दम पर दोनों बेटियों ने साल 2025 में न सिर्फ 12वीं की परीक्षा शानदार अंकों से उत्तीर्ण की, बल्कि कॉलेज की दहलीज पर भी कदम रख दिया। वर्तमान में प्रतिभा को कॉलेज के प्रथम वर्ष के लिए ₹12,500 की किश्त मिल चुकी है, वहीं ओशीन को स्नातक स्तर पर दो किश्तों में कुल ₹25,000 की सहायता मिल रही है। ₹1.43 लाख की वित्तीय सुरक्षा: बाल विवाह पर लगाम, शिक्षा को उड़ान मध्यप्रदेश सरकार की यह योजना केवल एक आर्थिक मदद नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का एक बड़ा आंदोलन बन चुकी है। योजना के अंतर्गत पात्र बालिकाओं को जन्म से लेकर 21 वर्ष की आयु पूरा होने तक कुल 1,43,000 रूपये की वित्तीय सहायता राशि चरणबद्ध तरीके से प्रदान की जाती है। बेटियों के जन्म के प्रति रूढ़िवादी समाज की सोच को बदलकर उसे प्रोत्साहित करना। बालिकाओं की शिक्षा को बिना किसी बाधा के उच्च स्तर तक ले जाना। बाल विवाह जैसी कुप्रथा पर पूरी तरह रोक लगाना (क्योंकि योजना का लाभ तभी मिलता है जब बेटी की शादी 18 वर्ष से कम उम्र में न हुई हो)। मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार आज जब ये बेटियाँ हाथ में कॉलेज की किताबें लेकर आगे बढ़ रही हैं, तो उनके चेहरों पर एक नया आत्मविश्वास है। प्रतिभा और ओशीन कहती हैं, "यह योजना हमारे लिए किसी वरदान से कम नहीं है। बेटियों को बोझ समझने वाली सोच को इस योजना ने जड़ से खत्म कर दिया है। हम माननीय मुख्यमंत्री जी का तहे दिल से आभार व्यक्त करती हैं, जिन्होंने हमारे सपनों को मरने नहीं दिया।" मध्यप्रदेश से निकलकर आ रही ये सफलता की कहानियाँ इस बात का पुख्ता प्रमाण हैं कि अगर सरकारें संवेदनशील हों और नीतियां जमीन पर सही ढंग से लागू हों, तो देश की कोई भी 'लाड़ली' अपनी उड़ान भरने से वंचित नहीं रह सकती।  

16 जून से 15 अगस्त तक मत्स्याखेट पर रोक, छोटे असंबद्ध तालाबों को मिलेगी छूट

16 जून से 15 अगस्त तक मत्स्याखेट पर प्रतिबंध, नदियों से असंबद्ध छोटे तालाबों को छूट नदियों और उससे जुड़े जलाशयों में मछली पकड़ने पर रोक, उल्लंघन पर होगी कार्रवाई भोपाल  मध्यप्रदेश में मछलियों के प्राकृतिक प्रजनन को बढ़ावा देने और जलीय पारिस्थितिकी के संरक्षण के लिए 16 जून से 15 अगस्त 2026 तक की अवधि को 'बंद ऋतु' (क्लोज सीजन) घोषित किया गया है। इन दो महीने की अवधि में प्रदेश की समस्त नदियों और उनसे जुड़े जलाशयों में मत्स्याखेट पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। गुरुवार को संचालनालय मत्स्योद्योग ने इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इस अवधि में यदि कोई भी व्यक्ति नियमों का उल्लंघन कर अवैध रूप से मत्स्याखेट या परिवहन करते हुए पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। प्रतिबंध से ऐसे छोटे तालाब या अन्य जल स्रोत जिनका किसी भी नदी से कोई संबंध नहीं है और जिन्हें 'निर्दिष्ट जल' की परिभाषा के अंतर्गत नहीं लाया गया है, उन पर यह नियम लागू नहीं होंगे। इन निजी या स्थानीय छोटे तालाबों में सामान्य दिनों की तरह मत्स्य पालन और आखेट किया जा सकेगा। मछुआ समुदाय को समय रहते जानकारी मिलने से मछुआरे अनजाने में होने वाली किसी भी परेशानी से बच सकेंगे और नियमों का पालन कर प्राकृतिक रूप से मत्स्य बीज उत्पादन में सहयोग कर सकेंगे।  

खाने-पीने की चीजों में गड़बड़ी! दूध और पनीर के 8 सैंपल मानकों पर खरे नहीं उतरे

अमृतसर. अमृतसर में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा चलाए गए विशेष अभियान के दौरान विभिन्न डेयरियों से लिए गए दूध और दुग्ध उत्पादों के नमूनों की जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जांच रिपोर्ट के अनुसार कुल 12 नमूनों में से 8 नमूने निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे। इतना ही नहीं, इनमें दो नमूने मानव उपभोग के लिए असुरक्षित पाए गए, जबकि छह नमूने गुणवत्ता के निर्धारित मानकों से कम पाए गए हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित डेयरियों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम-2006 के तहत कार्रवाई शुरू कर दी है। विभाग का कहना है कि उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। 21 मई को लिए गए थे सेंपल सहायक आयुक्त खाद्य डॉ. जी.एस. पन्नू ने बताया कि पंजाब खाद्य एवं औषधि प्रशासन के निर्देशों पर 21 मई को शहर की विभिन्न डेयरियों से दूध, पनीर, दही और अन्य दुग्ध उत्पादों के कुल 12 नमूने एकत्र किए गए थे। इन नमूनों को जांच के लिए खरड़ स्थित प्रयोगशाला भेजा गया था। जांच रिपोर्ट आने के बाद पता चला कि केवल चार नमूने ही निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पाए गए। जानें किनके सेंपल हुए पास व फेल रिपोर्ट के अनुसार रामतीर्थ मार्ग स्थित गिल डेयरी से लिए गए पनीर के दो नमूनों में से एक नमूना मानव उपभोग के लिए असुरक्षित पाया गया, जबकि दूसरा निम्न गुणवत्ता का निकला। पुतलीघर स्थित गुरु नानक डेयरी से लिया गया दूध का नमूना भी गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं उतरा। इसी तरह गुरु डेयरी से लिए गए दूध और पनीर के नमूने भी निर्धारित स्तर से नीचे पाए गए। जांच में शर्मा डेयरी का दही तथा छाबड़ा डेयरी का पनीर भी निम्न गुणवत्ता का पाया गया। इसके अलावा इंडिया गेट क्षेत्र स्थित ढिल्लों डेयरी से लिया गया पनीर का नमूना मानव उपभोग के लिए असुरक्षित घोषित किया गया है। यह तथ्य सबसे अधिक चिंताजनक माना जा रहा है क्योंकि ऐसे उत्पादों के सेवन से लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। कानूनी कार्रवाई करेगा सेहत विभाग खाद्य सुरक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिन डेयरियों के नमूने फेल पाए गए हैं, उनके खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि खाद्य पदार्थों में मिलावट या गुणवत्ता से समझौते को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। डॉ. पन्नू ने उपभोक्ताओं से भी सतर्क रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि दूध, पनीर, दही और अन्य खाद्य पदार्थ खरीदते समय गुणवत्ता, स्वच्छता और विश्वसनीयता का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। लोगों को केवल भरोसेमंद विक्रेताओं से ही खाद्य सामग्री खरीदनी चाहिए। खाद्य सुरक्षा विभाग का यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। अधिकारियों का कहना है कि समय-समय पर बाजार से नमूने लेकर जांच की जाएगी ताकि लोगों तक सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थ पहुंच सकें।

सुशासन तिहार में जनता की बड़ी भागीदारी, 1210 आवेदन प्राप्त, 50 लोगों को मिला लाभ

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देशन में आयोजित ‘सुशासन तिहार 2026’ के अंतर्गत सरगुजा जिले के लखनपुर विकासखंड के ग्राम बेलदगी में जनसमस्या निवारण शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में क्लस्टर की 20 ग्राम पंचायतों से बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए और शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी प्राप्त करते हुए अपनी मांगों एवं शिकायतों से संबंधित आवेदन प्रस्तुत किए। ग्रामीणों से सीधे संवाद कर सुनी समस्याएं शिविर में लुण्ड्रा विधायक श्री प्रबोध मिंज ने सहभागिता करते हुए ग्रामीणों से सीधे संवाद किया। उन्होंने आमजन की मांगों, समस्याओं और शिकायतों को गंभीरता से सुना तथा संबंधित अधिकारियों को प्राप्त आवेदनों का समय-सीमा में निराकरण सुनिश्चित कर आवेदकों को सूचना देने के निर्देश दिए। विधायक श्री मिंज ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पहल पर आयोजित सुशासन तिहार का उद्देश्य शासन और जनता के बीच की दूरी को समाप्त करना है। उन्होंने ग्रामीणों से अपनी समस्याएं और आवश्यकताएं खुलकर रखने का आग्रह करते हुए कहा कि प्रशासन उनके समाधान के लिए प्रतिबद्ध है। जनहित के मुद्दों पर दिया गया विशेष जोर जिला पंचायत सीईओ श्री विनय कुमार अग्रवाल ने बताया कि सुशासन तिहार के अंतर्गत 15 से 25 गांवों के समूहों में समाधान शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिविरों में प्राप्त आवेदनों का त्वरित निराकरण किया जाएगा तथा आवश्यक प्रकरण शासन स्तर पर भेजे जाएंगे। उन्होंने राजस्व विभाग को शिकायतों के निराकरण में विशेष संवेदनशीलता बरतने के निर्देश दिए। स्वास्थ्य विभाग द्वारा एचपीवी टीकाकरण अभियान की जानकारी देते हुए पात्र बालिकाओं का टीकाकरण सुनिश्चित करने की अपील की गई। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आयोजित होने वाली विशेष ग्राम सभाओं की जानकारी देते हुए उन्होंने जल संरक्षण, तालाब गहरीकरण, कुओं एवं अन्य जल संरचनाओं के संरक्षण तथा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को बढ़ावा देने पर जोर दिया। साथ ही नल-जल योजनाओं के बेहतर संचालन एवं रखरखाव के लिए ग्राम पंचायतों को जलकर संग्रहण करने की सलाह दी। 1210 आवेदन प्राप्त, 50 हितग्राही लाभान्वित शिविर में कुल 1210 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें 1151 मांग संबंधी तथा 59 शिकायत संबंधी आवेदन शामिल रहे। शिविर में लगभग 26 विभागों द्वारा स्टॉल लगाकर विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी गई तथा पात्र हितग्राहियों को लाभान्वित किया गया। आधार कार्ड एवं आयुष्मान कार्ड निर्माण के लिए विशेष सुविधा उपलब्ध कराई गई। स्वास्थ्य विभाग द्वारा टीबी मुक्त सरगुजा अभियान के तहत स्वास्थ्य परीक्षण एवं टीबी स्क्रीनिंग की गई। वहीं, बिहान बाजार के माध्यम से स्व-सहायता समूहों द्वारा तैयार उत्पादों का प्रदर्शन कर ग्रामीण आजीविका गतिविधियों को प्रोत्साहित किया गया। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा गोदभराई एवं अन्नप्राशन कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। शिविर में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास की चाबी, किसान क्रेडिट कार्ड, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, आयुष्मान कार्ड, स्वास्थ्य कार्ड, मनरेगा जॉब कार्ड तथा राशन कार्ड सहित विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत 50 हितग्राहियों को लाभान्वित किया गया। इस अवसर पर जिला पंचायत सदस्य मोनिका पैकरा, जनपद पंचायत अध्यक्ष शशिकला सिंह, उपाध्यक्ष कामेश्वर राजवाड़े, जनपद सदस्यगण, सभी ग्राम पंचायतों के सरपंच, एसडीएम रामराज सिंह, जनपद पंचायत सीईओ, जिला एवं विकासखंड स्तरीय अधिकारी-कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

कार पूलिंग कर बैठक में पहुंचे शिवराज, बोले- सार्वजनिक परिवहन अपनाएं; वीडियो हुआ वायरल

भोपाल केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान जब-तब अपने अलग अंदाज और बातचीत को लेकर सुर्खियों में छाए रहते हैं। उनका एक और वीडियो सामने आया जिसमें वे दो अन्य केंद्रीय मंत्रियों के साथ कार पूलिंग करते नजर आए। यह मामला इसलिए चर्चा में आ गया, क्योंकि काफिला कम करने को लेकर तो खबरें खूब सामने आएं, लेकिन सेंट्रल मिनिस्टर्स द्वारा कार पूलिंग का संभवत: यह पहला मामला है। ईरान-अमेरिका युद्ध के बीच पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा पेट्रोलियम की बचत को लेकर की गई अपील के बाद नेताओं, अधिकारियों और मंत्रियों के काफिला कम करने को लेकर वीडियो सामने आ रहे हैं। बुधवार को केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान दो अन्य केंद्रीय मंत्रियों संग सफर करते दिखे। शिवराज सिंह ने बताया कि पेट्रोल-डीजल बचाने केंद्रीय मंत्री चंद्रकांत रघुनाथ पाटिल और जी. किशन रेड्डी के साथ पूलिंग कर रहे हैं। एक ही कार से तीनों मंत्री कैबिनेट बैठक में शामिल होने पहुंचे। शिवराज सिंह चौहान मीडिया को बताया कि आज मैं, पाटिल जी और किशन जी कार पूलिंग करके जा रहे हैं। हमारे पीएम ने देश का आह्वान किया है। उनकी अपील के बाद पेट्रोल—डीजल की खपत बचाने के लिए पूरा देश उठ खड़ा हुआ है। हम लोग तो उनके मंत्रिमंडल में सहयोगी हैं। इसलिए हमने सोचा कि हम लोग भी कार पूल करके जाएं। शिवराज ने बताया कि आज हम तीनों कार पूलिंग कर जा रहे है।  चौहान ने क्या बताया? इस मौके पर शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों से पेट्रोल और डीजल की अनावश्यक खपत कम करने की अपील की है, जिसे देशभर में सकारात्मक समर्थन मिल रहा है। उन्होंने बताया कि तीनों मंत्री कैबिनेट सहयोगी हैं, इसलिए उन्होंने भी कारपूलिंग के माध्यम से इस अभियान में अपना योगदान देने का फैसला किया। चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की सोच दूरदर्शी है और मौजूदा समय में तेल, डीजल व पेट्रोल के अनावश्यक उपयोग को कम करना बेहद जरूरी है। उन्होंने नागरिकों से भी ईंधन बचत और पर्यावरण संरक्षण के लिए ऐसे प्रयासों में सक्रिय भागीदारी करने की अपील की।  सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करना चाहिए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि, सभी को पेट्रोल-डीजल बचाने की दिशा में काम करना चाहिए। जितना संभव हो सके, सभी को सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करना चाहिए। इससे लोगों में सकारात्मक संदेश भी जाएगा।केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि आज सी.आर. पाटिल, जी. किशन रेड्डी और मैं कार पूलिंग करके जा रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरे देश का आह्वान किया है और उनके आह्वान पर अनावश्यक पेट्रोल और डीजल की खपत बचाने के लिए पूरा देश उठ खड़ा हुआ है और उस पर अमल कर रहा है. हम तो मंत्रिमंडल के सहयोगी हैं. हमने भी सोचा कि कार पूलिंग करके हम लोग यात्रा करें. आज की परिस्थितियों में ये आवश्यक है कि हम अनावश्यक पेट्रोल और डीजल की खपत को कम करें. जितना संभव है सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करना चाहिए। 

ममता बनर्जी की बढ़ीं मुश्किलें, विवादित बयान को लेकर सिलीगुड़ी में मामला दर्ज

सिलीगुड़ी  पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। कोलकाता में एक विरोध प्रदर्शन के दौरान बांग्लादेश के एक हाई-प्रोफाइल हत्याकांड में केंद्रीय गृह मंत्रालय और गृह मंत्री अमित शाह का नाम घसीटने पर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। यह शिकायत सिलीगुड़ी साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में एक वकील द्वारा दर्ज कराई गई है। क्या है पूरा मामला और ममता बनर्जी का दावा? यह विवाद 2 जून 2026 को कोलकाता के धर्मतला (Y-चैनल) में टीएमसी के एक धरना प्रदर्शन के दौरान शुरू हुआ। अपने भाषण में ममता बनर्जी ने दावा किया कि उन्हें बांग्लादेश में हुई एक 'बड़ी हत्या' के पीछे की पूरी साजिश और लोगों के नामों की जानकारी है, लेकिन वह उनका खुलासा नहीं करेंगी क्योंकि इससे पड़ोसी देश में उथल-पुथल मच सकती है। क्या बोलीं थी ममता बनर्जी सभा में ममता बनर्जी ने बांग्लादेश में हुए विवादित ओसमान हादी हत्याकांड का जिक्र किया. नाम लिये बिना ममता बनर्जी बोलीं “बांग्लादेश से एक बड़ा खूनी एसटीएफ ने गिरफ्तार किया था, जिसे लेकर बांग्लादेश में बड़ा बवाल हुआ. मैं दूसरे देश की बात नहीं कर रही. मैं जो पॉइंट बता रही हूं, वो मेघालय से बंगाल आते हैं. यहां आने पर हमारी एसटीएफ पकड़ती है. होम मिनिस्टर खुद कह रहे हैं… इतने दिन नहीं बोली, आज अत्याचार की सीमा पार कर गया इसलिए बोल रही हूं. उन्होंने कहा… आप बंगाल पुलिस को कह दीजिए ये बात बाहर न जाये. ये देश के लिए है. किससे मर्डर करवाया था, किन-किन के नाम आये थे… मैं सब जानती हूं।  विवाद की वजह दरअसल, दिसंबर में बांग्लादेश में ओसमान हादी की हत्या हुई थी. जनवरी में हत्यारे मेघालय बॉर्डर से बंगाल आये तो एसटीएफ ने दो को पकड़ा. ममता ने सभा में इसी केस को लेकर गृह मंत्रालय पर इशारों में टिप्पणी की. गत जनवरी में मेघालय की सीमा पार कर इस राज्य में आते सम ही बंगाल एसटीएफ ने दो लोगों को गिरफ्तार किया।  एफआईआर में क्या आरोप है शिकायत में कहा गया कि ममता ने देश की आंतरिक सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील मामले पर सार्वजनिक मंच से बयान दिया. गृहमंत्री का हवाला देकर उकसाने वाली बात कही. इसे ‘देशविरोधी’ बताते हुए सिलीगुड़ी साइबर क्राइम थाने में केस दर्ज हुआ है. तृणमूल का कहना है कि ममता ने सच बोला है, वहीं भाजपा इसे ‘राष्ट्रीय सुरक्षा से खिलवाड़’ बता रही है।  कौन थे ओसमान हादी ओसमान हादी (शरीफ़ उस्मान हादी) बांग्लादेश के एक युवा नेता और लोकतंत्र समर्थक कार्यकर्ता थे. जुलाई 2024 में शेख हसीना सरकार के खिलाफ हुए छात्र आंदोलन और ‘इंकलाब मंच’ से जुड़े थे. 12 दिसंबर 2025 को ढाका में चुनावी प्रचार के दौरान नकाबपोश हमलावरों ने उनके सिर में गोली मार दी थी. इसके बाद 18 दिसंबर 2025 को सिंगापुर के एक अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गयी थी। उनका इशारा स्पष्ट रूप से बांग्लादेशी छात्र नेता शरीफ उस्मान बिन हादी की हत्या की ओर था। ममता बनर्जी ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जब मार्च 2026 में पश्चिम बंगाल पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने इस हत्याकांड के संदिग्धों को राज्य से गिरफ्तार किया था, तब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से फोन किया था। ममता का दावा है कि अमित शाह ने "राष्ट्रीय हित" का हवाला देते हुए उनसे इस गिरफ्तारी की खबर को दबाने और बाहर न आने देने के लिए कहा था। रिंकी सेन चटर्जी ने कहा कि मुख्यमंत्री रहते हुए ममता बनर्जी चाहतीं तो इस मामले को सीधे गृह मंत्रालय के समक्ष उठा सकती थीं। उनका आरोप है कि अब वह यह दावा कर रही हैं कि बांग्लादेश में हुई हत्या गृह मंत्रालय के निर्देश पर कराई गई थी। ममता के बयान कट्टरपंथी तत्वों को प्रोत्साहित करने वाले हैं शिकायतकर्ता के अनुसार, इस तरह के आरोप भारत और बांग्लादेश के बीच तनाव बढ़ा सकते हैं तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की छवि को नुकसान पहुंचा सकते हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि ऐसे बयान बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा को प्रभावित कर सकते हैं। शिकायत में यह भी कहा गया है कि संवैधानिक पद पर रहते हुए ममता बनर्जी ने देश की गोपनीयता और हितों की रक्षा की शपथ ली थी, लेकिन पद छोड़ने के बाद उनके बयान कट्टरपंथी तत्वों को प्रोत्साहित करने वाले हैं। FIR में क्या आरोप लगाए गए हैं? ममता बनर्जी के इस सनसनीखेज दावे के बाद, सिलीगुड़ी की वकील रिंकी चटर्जी सिंह ने उनके खिलाफ सिलीगुड़ी साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में आपराधिक मामला दर्ज कराया है। शिकायत के अनुसार, एक पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा बिना सबूत के केंद्रीय गृह मंत्रालय पर ऐसे गंभीर आरोप लगाना जनता में भ्रम और सामाजिक अशांति पैदा करने का प्रयास है। इस तरह की बयानबाजी भारत और बांग्लादेश के संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय और कूटनीतिक संबंधों को नुकसान पहुंचा सकती है। बयान को असंवैधानिक और भड़काऊ बताते हुए कहा गया है कि यह राजनीतिक फायदे के लिए गढ़ा गया नैरेटिव है।

e-HRMS पोर्टल पर कर सकेंगे ट्रांसफर आवेदन, शिक्षकों-कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण सूचना

मध्यप्रदेश में शिक्षकों व कर्मचारियों के स्थानांतरण आवेदन 3 से 8 जून तक e-HRMS पोर्टल पर होगी प्रक्रिया भोपाल  राज्य शासन की स्थानांतरण नीति 2026-27 के तहत जनजातीय कार्य एवं अनुसूचित जाति कल्याण विभाग ने स्थानांतरण आवेदनों के संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। आयुक्त, जनजातीय कार्य विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार स्वैच्छिक स्थानांतरण के आवेदन 3 जून से 8 जून तक e-HRMS पोर्टल पर ऑनलाइन स्वीकार किए जाएंगे। आवेदक स्थानांतरण के लिए अधिकतम 15 कार्यालयों/संस्थाओं का चयन कर सकेंगे। आवेदन में दर्शाए गए कारणों के समर्थन में आवश्यक दस्तावेज पीडीएफ स्वरूप में अपलोड करना अनिवार्य होगा, जिनका आकार अधिकतम 2 एमबी निर्धारित किया गया है। एक बार आवेदन सबमिट होने के बाद उसमें किसी प्रकार का संशोधन नहीं किया जा सकेगा। विभाग ने यह स्पष्ट किया है कि आवेदन में गलत जानकारी देने या सत्यापन में अनियमितता पाए जाने पर संबंधित कर्मचारी एवं सत्यापन अधिकारी के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। पोर्टल पर प्रदर्शित रिक्तियां अस्थायी (टेंटेटिव) होंगी और समय-समय पर अपडेट की जा सकेंगी। माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक शिक्षकों के स्थानांतरण केवल उनके विषय की रिक्तियों पर ही किए जाएंगे। वहीं प्राथमिक, माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक शिक्षक संवर्ग के प्रशासनिक एवं स्वैच्छिक स्थानांतरण परिवीक्षा अवधि के दौरान नहीं किए जाएंगे। जिला अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे 5 जून 2026 तक e-HRMS पोर्टल पर सभी रिक्त पदों की सही जानकारी दर्ज एवं सत्यापित करें। रिक्तियों की एंट्री और सत्यापन की जिम्मेदारी संबंधित कार्यालय प्रमुख, डीडीओ एवं ऑफिस एडमिन की होगी। केवल ऑनलाइन आवेदन करने मात्र से स्थानांतरण का अधिकार सुनिश्चित नहीं होगा। आवेदनों को स्वीकार या अस्वीकार करने का अंतिम निर्णय मुख्यालय स्तर पर लिया जाएगा और इस संबंध में शासन का निर्णय अंतिम माना जाएगा। यह आदेश प्रदेश के जनजातीय कार्य एवं अनुसूचित जाति कल्याण विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों तथा शिक्षकों पर लागू होगा।  

पिच्चेकट्टा जलाशय के कार्यों के लिए 4.85 करोड़ रुपए स्वीकृत

रायपुर  छत्तीसगढ़ शासन जल संसाधन विभाग द्वारा कांकेर जिले के विकासखण्ड-भानुप्रतापपुर के पिच्चेकट्टा जलाशय के जीर्णाेद्धार एवं नहर लाईनिंग कार्य के लिए 4 करोड़ 85 लाख 2 हजार रुपए स्वीकृत किए गए है। योजना के प्रस्तावित कार्यो के पूर्ण हाने पर क्षेत्र के किसानों को कुल 364 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिल सकेगी। योजना के निर्माण कार्यों को पूर्ण कराने के लिए मुख्य अभियंता गोदावरी कछार जल संसाधन विभाग जगदलपुर को प्रशासकीय स्वीकृति जारी की गई है।

महिला की शिकायत पर कार्रवाई, रेप केस में डिप्टी कलेक्टर गिरफ्तार

मुरैना मुरैना में पदस्थ रहे डिप्टी कलेक्टर अरविंद माहौर के खिलाफ एक युवती की शिकायत पर दुष्कर्म का मामला दर्ज किया गया है। शिकायत के बाद पुलिस ने डिप्टी कलेक्टर को गिरफ्तार पर लिया है। पीड़िता ने आरोप लगाया है कि अधिकारी ने शादी का झांसा देकर लंबे समय तक उसका शारीरिक शोषण किया और बाद में शादी से इंकार कर दिया।  जानकारी के अनुसार, मुरैना की रहने वाली 32 वर्षीय युवती ने सिविल लाइन थाना पुलिस में दर्ज शिकायत में बताया कि वर्ष 2025 की शुरुआत में उसकी पहचान फेसबुक के माध्यम से अरविंद माहौर से हुई थी। उस समय माहौर सबलगढ़ में एसडीएम के पद पर पदस्थ थे। दोनों के बीच बातचीत बढ़ी और बाद में मुलाकातों का सिलसिला शुरू हुआ। ये आरोप भी गंभीर पीड़िता का आरोप है कि अधिकारी ने उससे शादी करने का वादा किया और इसी भरोसे पर कई बार शारीरिक संबंध बनाए। शिकायत में कहा गया है कि 30 मार्च 2025 को उसे घुमाने के बहाने मुरैना रेस्ट हाउस के पीछे ले जाकर दुष्कर्म किया गया। इसके बाद सरकारी आवास और ग्वालियर स्थित एक फ्लैट में भी कई बार उसका शोषण किया गया। युवती ने यह भी आरोप लगाया है कि आरोपी अधिकारी ने शादी के बदले पांच करोड़ रुपये नकद और एक माह के लिए युवती को किसी अन्य व्यक्ति के साथ भेजने जैसी आपत्तिजनक मांग की थी। शिकायत में मोबाइल फोन में मौजूद कुछ वीडियो और अन्य साक्ष्यों का भी उल्लेख किया गया है। जान से मारने की धमकी भी दी पीड़िता के अनुसार, जब उसने शादी का दबाव बनाया तो आरोपी ने शादी से साफ इंकार कर दिया और शिकायत करने पर पूरे परिवार को जान से मरवाने की धमकी दी। मामले की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने डिप्टी कलेक्टर के खिलाफ दुष्कर्म सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर आरोपी डिप्टी कलेक्टर को गिरफ्तार कर लिया है। आज कोर्ट में करेंगे पेश सिविल लाइन थाना प्रभारी उदय भान यादव ने मीडिया को बताया कि एक महिला ने गलत काम करने के आरोप लगाते हुए शिकायत की थी। उसने बताया कि आरोपी डिप्टी कलेक्टर अरविंद माहौर ने शादी का झांसा देकर कई बार गलत काम किया गया। माहौर को बुधवार रात में गिरफ्तार कर लिया गया है। गुरुवार को मेडिकल जांच के बाद कोर्ट में पेश करेंगे। बताया जा रहा है कि गिरफ्तारी के बाद माहौर का ब्लड प्रेशर बढ़ गया था। इसके चलते सुबह करीब 4 बजे उनका इलाज कराया गया, अब हालत ठीक है।