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नैनो उर्वरकों से बढ़ रहा किसानों का मुनाफा, कम लागत में बेहतर उत्पादन का नया मॉडल

नैनो उर्वरकों से खेती बन रही अधिक लाभकारी, किसान अपना रहे ‘कम लागत, अधिक मुनाफा’ का मॉडल नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के उपयोग से बढ़ रही उत्पादन क्षमता, मिट्टी की सेहत को भी मिल रहा संरक्षण रायपुर छत्तीसगढ़ में आधुनिक कृषि तकनीकों और नवाचार आधारित खेती को बढ़ावा मिलने से किसान कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त करने की दिशा में सफल कदम बढ़ा रहे हैं। नैनो यूरिया और नैनो डीएपी जैसे उन्नत उर्वरकों का उपयोग किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। इससे खेती की लागत में कमी आने के साथ-साथ फसलों को बेहतर पोषण और मिट्टी की गुणवत्ता के संरक्षण में भी मदद मिल रही है। प्रदेश के विभिन्न जिलों में किसान नैनो उर्वरकों के सकारात्मक परिणामों का अनुभव कर रहे हैं। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार नैनो तकनीक आधारित उर्वरक पौधों तक पोषक तत्वों की प्रभावी आपूर्ति सुनिश्चित करते हैं, जिससे उर्वरकों की उपयोग दक्षता बढ़ती है और फसलों का विकास बेहतर होता है। साथ ही पारंपरिक उर्वरकों की तुलना में इनके परिवहन, भंडारण और उपयोग में भी अधिक सुविधा होती है। सरगुजा जिले के प्रगतिशील किसान श्री सत्यम कुमार ने पिछले तीन वर्षों से अपनी कृषि भूमि में नैनो यूरिया और नैनो डीएपी का उपयोग कर सकारात्मक परिणाम प्राप्त किए हैं। उनके अनुभव बताते हैं कि नैनो उर्वरकों के उपयोग से फसलों की वृद्धि बेहतर हुई है तथा खेती की लागत में भी उल्लेखनीय कमी आई है। धान, गेहूं, सब्जियों और बाड़ी फसलों सहित विभिन्न कृषि गतिविधियों में इन उर्वरकों का सफल उपयोग किया जा रहा है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि नैनो उर्वरकों का छिड़काव सीधे पौधों पर किया जाता है, जिससे पोषक तत्वों का अवशोषण अधिक प्रभावी ढंग से होता है। इससे उर्वरकों की बर्बादी कम होती है और फसल को आवश्यक पोषण समय पर उपलब्ध होता है। यही कारण है कि किसान कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त कर रहे हैं। नैनो उर्वरकों का उपयोग पर्यावरणीय दृष्टि से भी लाभकारी माना जा रहा है। इनके उपयोग से मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में सहायता मिलती है तथा रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से होने वाले दुष्प्रभावों को कम किया जा सकता है। इससे टिकाऊ एवं संतुलित कृषि प्रणाली को बढ़ावा मिल रहा है। राज्य सरकार और कृषि विभाग किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने के लिए लगातार प्रयासरत हैं। प्रशिक्षण, प्रदर्शन एवं जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को नैनो उर्वरकों के उपयोग और उनके लाभों की जानकारी दी जा रही है। इसका परिणाम है कि प्रदेश में अधिक से अधिक किसान आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाकर अपनी आय बढ़ाने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

3 बिल्डरों को पीछे छोड़ BJP ने जीती बोली, 45 करोड़ में खरीदी बहुमूल्य जमीन

लखनऊ उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भाजपा के आलीशान दफ्तर के बाद प्रदेश मुख्यालय बनने का रास्ता साफ हो गया है। यूपी भाजपा ने लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) की नीलामी में तीन बिल्डरों को पछाड़कर 45 करोड़ की बोली लगाई और जीजामई में 5500 वर्ग मीटर की जमीन खरीद ली। एलडीए ने यह जमीन पिछले महीने लखनऊ नगर निगम से 29 करोड़ में ली थी, जिसे बीजेपी ने 45 करोड़ की सबसे ऊंची बोली के साथ खरीद लिया है। एलडीए को इस सौदे से 19 करोड़ का फायदा एक महीने में हो गया। इस नीलामी में तीन बड़े बिल्डर समूहों के साथ भारतीय जनता पार्टी भी शामिल थी। ऑनलाइन नीलामी में भाजपा ने सबसे अधिक कीमत लगाकर भूखंड अपने नाम कर लिया। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह जुलाई में यहां दफ्तर बनाने के काम की शुरुआत कर सकते हैं। पार्टी इस भूखंड पर अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त छह मंजिला प्रदेश मुख्यालय बनाने की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित भवन में प्रशासनिक कार्यालय, बैठक कक्ष, सम्मेलन सुविधाएं और अन्य आधुनिक व्यवस्थाएं होंगी। सूत्रों के अनुसार, भवन की सबसे ऊपरी मंजिल पर हेलीपैड भी विकसित करने की योजना है। ताकि राष्ट्रीय स्तर के नेताओं की आवाजाही सुगम हो सके। जमीन वापसी के बाद बदली पूरी रणनीति यह भूखंड पहले नगर निगम ने दीनदयाल उपाध्याय सेवा न्यास को आवंटित किया था। वर्ष 2020 में नगर निगम ने करीब 5500 वर्गमीटर जमीन 90 वर्ष की लीज पर न्यास को दी थी। बाद में इसे फ्रीहोल्ड करने का प्रस्ताव पारित हुआ था, ताकि यहां भाजपा का प्रदेश मुख्यालय बनाया जा सके। लेकिन 7 अप्रैल को न्यास के सदस्य कृष्ण कुमार दीक्षित ने नगर निगम को पत्र भेजकर बजट की कमी का हवाला देते हुए जमीन वापस करने का निर्णय लिया। इसके बाद पूरी प्रक्रिया ने नया मोड़ ले लिया। एलडीए ने डीएम सर्किल रेट के दोगुने पर खरीदी जमीन एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने नगर आयुक्त गौरव कुमार को पत्र भेजकर भूखंड को सर्किल रेट के दोगुने दर पर एलडीए को देने को कहा था। नगर निगम सदन ने भी जमीन एलडीए को देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इसके बाद एलडीए ने जमीन अपने अधिकार में लेकर नीलामी की प्रक्रिया शुरू की। एलडीए की रणनीति से बढ़ा राजस्व प्रत्यक्ष हस्तांतरण की बजाय नीलामी का रास्ता अपनाने से एलडीए को बड़ा आर्थिक लाभ हुआ। 29 करोड़ रुपये में खरीदी गई जमीन 45 करोड़ रुपये में बिकने से प्राधिकरण को 16 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व मिला। अधिकारियों का मानना है कि खुली नीलामी प्रक्रिया अपनाने से भविष्य में किसी कानूनी या प्रशासनिक विवाद की संभावना भी कम होगी। अमित शाह और राष्ट्रीय अध्यक्ष के आने की चर्चा भाजपा सूत्रों के अनुसार नए प्रदेश मुख्यालय के शिलान्यास और निर्माण प्रक्रिया को लेकर पार्टी का शीर्ष नेतृत्व भी गंभीर है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के जुलाई में इसका शिलान्यास करने की बात कही जा रही है। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। खसरा संख्या 196 राजनीतिक गतिविधियों का नया केंद्र जियामऊ स्थित खसरा संख्या 196 का यह भूखंड अब प्रदेश की राजनीति का नया केंद्र बनने जा रहा है। मुख्यालय बनने के बाद यहां से भाजपा की संगठनात्मक और राजनीतिक गतिविधियों का संचालन होगा, जिससे यह परिसर राजधानी के सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक परिसरों में शामिल हो जाएगा।

हाई कोर्ट की राज्य सरकार से जवाब-तलब, पंचायत चुनाव पर OBC आयोग की रिपोर्ट पेश करने के निर्देश

 लखनऊ  पंचायत चुनाव और वर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त किए जाने के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग से महत्वपूर्ण जानकारी तलब की है।अदालत ने पंचायत चुनावों से संबंधित पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आयोग की रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश राज्य सरकार को दिया है। साथ ही राज्य निर्वाचन आयोग से संभावित चुनाव कार्यक्रम के बारे में स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। यह आदेश न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति एके चौधरी की अवकाशकालीन पीठ ने स्थानीय अधिवक्ता ओम प्रकाश प्रजापति की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया।मामले की अगली सुनवाई 10 जुलाई को होगी। याचिका में राज्य सरकार के 25 मई के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसके तहत वर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त किया गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम की धारा-12 के अनुसार ग्राम प्रधान का कार्यकाल शपथ ग्रहण की तिथि से केवल पांच वर्ष का होता है। इसके बावजूद समय पर पंचायत चुनाव न कराकर मौजूदा प्रधानों को ही प्रशासक नियुक्त कर दिया गया, जिससे उनका कार्यकाल अनिश्चितकाल तक बढ़ गया है। यह व्यवस्था कानून के विपरीत है। याचिकाकर्ता ने मांग की है कि यदि किसी कारण से समय पर पंचायत चुनाव नहीं कराए जा सकते, तो पूर्व व्यवस्था के अनुसार एडीओ पंचायत या किसी अन्य सरकारी अधिकारी को प्रशासक नियुक्त किया जाए। सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने चुनाव तैयारियों और आरक्षण प्रक्रिया की स्थिति जानने के लिए ओबीसी आयोग की रिपोर्ट तलब की तथा निर्वाचन आयोग से संभावित चुनाव कार्यक्रम पर स्पष्ट जवाब मांगा है।

मुजफ्फरपुर अस्पताल अग्निकांड में 95 वर्षीय राधा की बहादुरी, समय रहते लोगों को किया सतर्क

मुजफ्फरपुर. प्रसाद हॉस्पिटल में हुए दर्दनाक हादसे के बीच मुशहरी प्रखंड के छपरा मेघ गांव की रहने वाली 95 वर्षीय बुजुर्ग महिला राधा देवी की जांबाजी और सूझबूझ की कहानी हर किसी की जुबान पर है। बीपी और सांस लेने में तकलीफ के बाद उन्हें अस्पताल के आईसीयू (ICU) में भर्ती कराया गया था। गुरुवार की सुबह जब वह जागी हुई थीं, तभी अचानक आईसीयू में शॉर्ट सर्किट से गाढ़ा धुआं फैलने लगा। ऐसे खौफनाक मंजर में जहां अच्छे-अच्छों के होश उड़ जाते हैं, वहां 95 साल की इस बहादुर दादी ने अद्भुत हिम्मत दिखाई। उन्होंने बिना डरे तुरंत अपने मुंह से ऑक्सीजन मास्क हटाया, हाथ में लगी सलाइन (ग्लूकोज) की सुई खुद ही खींचकर निकाल दी और स्ट्रेचर से उठकर बाहर की तरफ भाग पड़ीं। ऑन ड्यूटी नर्स को दी घटना की जानकारी चलने-फिरने में असमर्थ होने के बावजूद राधा देवी गिरते-पड़ते आईसीयू से बाहर निकलीं और वहां ड्यूटी पर मौजूद नर्स (मैडम) को अंदर आग लगने की सूचना दी। राधा देवी की इसी चेतावनी के बाद अस्पताल प्रशासन तुरंत हरकत में आया, आनन-फानन में अन्य मरीजों को बाहर निकाला गया और फायर ब्रिगेड को सूचित किया गया। अगर दादी ने सही समय पर हिम्मत दिखाकर स्टाफ को न जगाया होता, तो हादसा और भी भयावह हो सकता था। बाहर निकलली और मैडम के बतइली "आग लगते ही पूरा अंधेरा हो गइलई। आग कइसे लगलई इ हम कईसे बताऊं? धुआं फैलते हम बाहर निकलली और मैडम के बतइली, तब मैडम अंदर जाकर देखलई।" 3 घंटे तक मां को ढूंढता रहा बेटा घटना के बाद अस्पताल में मची भगदड़ के बीच राधा देवी खुद को बचाते हुए अस्पताल के ही एक दूसरे सुरक्षित कमरे में जाकर बैठ गईं। इधर, बाहर मौजूद उनका बेटा और परिजन इस आशंका से बुरी तरह रोते-बिलखते रहे कि कहीं मां आग की चपेट में न आ गई हों। करीब तीन घंटे की कड़ी मशक्कत और खोजबीन के बाद जब परिजनों ने राधा देवी को सुरक्षित बैठे देखा, तब जाकर उनकी जान में जान आई। इसके बाद स्वजन उन्हें सुरक्षित घर ले गए। भीषण आग के बाद मची चीख-पुकार यह पूरी घटना शहर के ब्रह्मपुर स्थित नामी-गिरामी प्रसाद हॉस्पिटल की है, जहां गुरुवार की सुबह करीब साढ़े तीन बजे अस्पताल की पांचवीं मंजिल पर स्थित आईसीयू में शॉर्ट सर्किट के कारण भीषण आग लग गई। आग लगते ही पूरे अस्पताल परिसर में चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल कायम हो गया। गंभीर रूप से बीमार मरीजों को शहर के अन्य विभिन्न अस्पतालों में शिफ्ट करने के लिए एंबुलेंस लगातार सड़कों पर दौड़ती रहीं। हादसे में अब तक 5 मरीजों की मौत इस भीषण अग्निकांड में दम घुटने और झुलसने के कारण अब तक कुल 5 मरीजों की मौत हो चुकी है। पहले चार लोगों की मौत की पुष्टि हुई थी, लेकिन बाद में गंभीर रूप से झुलसी महिला मरीज चंचला देवी को आसव (ASAV) अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। हादसे में जान गंवाने वाले सभी 5 मृतकों की पहचान इस प्रकार हुई है: 1. मृतका चंचला देवी: हादसे के बाद बेहद गंभीर हालत में इन्हें शहर के आसव (ASAV) अस्पताल में शिफ्ट कराया गया था, जहां इन्होंने अंतिम सांस ली। 2. मृतक उदय कुमार (विशंभरपुर, शिवहर): पेशे से एलआईसी (LIC) एजेंट उदय कुमार की हाल ही में ब्रेन सर्जरी हुई थी। शोर सुनकर जब ग्राउंड फ्लोर पर मौजूद उनका परिवार ऊपर भागा, तब तक वे दम तोड़ चुके थे। 3. मृतका गीता देवी (दिस्तौलिया, कथैया): शुगर, बीपी और डायलिसिस की मरीज गीता देवी 1 जून को ही अस्पताल में भर्ती हुई थीं। 4. मृतक शशांक (रतनपुरा, औराई): संजय चौधरी के पुत्र शशांक भी आईसीयू में जिंदगी की जंग लड़ रहे थे, लेकिन आग की भेंट चढ़ गए। 5. मृतक कृष्णनंदन सिंह (78 वर्ष, गोरिगमा डीह, मीनापुर): फेफड़े में पानी की शिकायत के बाद 22 मई से डॉ. संजीव की यूनिट में इलाजरत थे। 4-4 लाख मुआवजे का ऐलान हादसे की भयावहता को देखते हुए जिलाधिकारी (DM) सुब्रत कुमार सेन और पुलिस अधीक्षक (SP) समेत तमाम आला अधिकारी, सभी डीएसपी और फायर ऑफिसर दलबल के साथ मौके पर पहुंचे और राहत कार्य की निगरानी की। अस्पताल में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। डीएम सुब्रत कुमार सेन ने सभी 5 मृतकों के आश्रितों को सरकारी नियम के तहत 4-4 लाख रुपये की अनुग्रह सहायता राशि देने की घोषणा की है। साथ ही, अन्य अस्पतालों में शिफ्ट किए गए सभी मरीजों का इलाज सरकारी खर्च पर कराने और अस्पताल की बिजली वायरिंग व फायर सेफ्टी मानकों की जांच के कड़े निर्देश दिए हैं। बिजली विभाग के कार्यपालक अभियंता विजय कुमार भी टीम के साथ लोड और वायरिंग का जायजा लेने पहुंचे हैं।

किरायेदार को नहीं मिली राहत, मकान मालिक की आवश्यकता को मानते हुए हाईकोर्ट ने आदेश रखा बरकरार

चंडीगढ़. पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए किरायेदार को दुकान खाली करने के आदेश दे दिए हैं। साथ ही किया कि किरायेदार यह तय नहीं कर सकता कि मकान मालिक अपनी जरूरतों को किस प्रकार पूरा करे। यदि मकान मालिक की आवश्यकता वास्तविक और सद्भावनापूर्ण है तो किरायेदार उसे वैकल्पिक व्यवस्था सुझाकर किराये की संपत्ति खाली कराने की मांग को विफल नहीं कर सकता। अदालत ने इसी सिद्धांत को दोहराते हुए लुधियाना स्थित एक दुकान के किरायेदार की बेदखली को बरकरार रखा है। जस्टिस सुदीप्ति शर्मा ने यह फैसला सुनाते हुए कहा कि सर्वोच्च न्यायालय पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि किराया नियंत्रक को यह मानकर चलना चाहिए कि मकान मालिक की आवश्यकता वास्तविक है। ऐसे मामलों में किरायेदार यह निर्देश नहीं दे सकता कि मकान मालिक बिना किराये की संपत्ति का कब्जा प्राप्त किए अपनी जरूरतों को अन्य तरीके से पूरा कर ले। लुधियाना का मामला पहुंचा था हाई कोर्ट मामला लुधियाना के ब्राउन रोड स्थित एक दुकान से जुड़ा था। मकान मालिक ने दुकान खाली कराने की मांग यह कहते हुए की थी कि उसका विवाहित पुत्र स्वतंत्र रूप से स्पेयर पार्ट्स का कारोबार शुरू करना चाहता है और इसके लिए उक्त दुकान की आवश्यकता है। सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि पुत्र के पास न तो अपनी कोई अन्य दुकान है और न ही वह किसी अन्य व्यावसायिक परिसर पर कब्जा रखता है। ऐसे में उसकी जरूरत वास्तविक और उचित है। किरायेदार ने दी थी बेदखली आदेश को चुनौती दूसरी ओर किरायेदार ने बेदखली आदेश को चुनौती देते हुए तर्क दिया कि याचिकाकर्ता स्वयं को संपत्ति का मालिक साबित करने में विफल रहा है, इसलिए उसे बेदखली याचिका दायर करने का अधिकार नहीं है। हालांकि हाई कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने रिकॉर्ड पर उपलब्ध दस्तावेजों और साक्ष्यों का हवाला देते हुए कहा कि संपत्ति पहले एक पारिवारिक ट्रस्ट के अधीन थी, लेकिन वर्तमान में उसका स्वामित्व पूरी तरह संबंधित मकान मालिक के पास है। दस्तावेजों और जिरह के दौरान दिए गए बयानों से उसके मालिकाना अधिकार पर्याप्त रूप से सिद्ध होते हैं। इसलिए वह किराया प्राप्त करने और किरायेदार के खिलाफ बेदखली की कार्यवाही शुरू करने का हकदार है। ईस्ट पंजाब अर्बन रेंट रेस्ट्रिक्शन एक्ट, 1949 का हुआ उल्लेख हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि स्वामित्व संबंधी विवाद को अलग भी रख दिया जाए, तब भी किरायेदार का मामला टिक नहीं सकता। अदालत ने ईस्ट पंजाब अर्बन रेंट रेस्ट्रिक्शन एक्ट, 1949 का उल्लेख कर कहा कि कानून में "मकान मालिक" की परिभाषा में ट्रस्टी भी शामिल है। इसलिए किराया प्राप्त करने वाला ट्रस्टी भी बेदखली याचिका दायर कर सकता है। बेटे की जरूरत को वास्तविक बताया कोर्ट ने अपने आदेश में सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि "स्वयं के उपयोग" का अर्थ केवल मकान मालिक के व्यक्तिगत उपयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके आश्रित परिवार के सदस्यों की आवश्यकताओं को भी इसमें शामिल माना जाएगा। अदालत ने माना कि बेटे के स्वतंत्र व्यवसाय के लिए दुकान की आवश्यकता पूरी तरह वास्तविक है और इसमें किसी प्रकार का दुर्भावनापूर्ण उद्देश्य नहीं दिखता। इन टिप्पणियों के साथ हाई कोर्ट ने 19 मई 2025 के अपीलीय आदेश में किसी प्रकार की कानूनी त्रुटि न पाते हुए किरायेदार की पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी और बेदखली के आदेश को बरकरार रखा। साथ ही लंबित सभी अन्य आवेदन भी निस्तारित कर दिए गए।

दुर्ग पुलिस में बड़ा एक्शन, NDPS मामले में रिश्वत मांगने पर दो सब-इंस्पेक्टर सस्पेंड

दुर्ग. जिले में रिश्वत मांगने के आरोप में दो पुलिस अधिकारियों पर बड़ी कार्रवाई की गई है। दुर्ग एसएसपी विजय अग्रवाल ने एनडीपीएस एक्ट के एक मामले में आरोपी पक्ष से कथित रूप से पैसों की मांग करने के आरोप में दो सब इंस्पेक्टरों को निलंबित कर दिया है। निलंबित अधिकारियों में पुरानी भिलाई थाना में पदस्थ एसआई तुलसीराम साहू और खुर्सीपार थाना में पदस्थ एसआई देव लाल साहू शामिल हैं। दोनों को निलंबित कर रक्षित केंद्र दुर्ग अटैच किया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी ने छावनी सीएसपी प्रशांत पैकरा को जांच की जिम्मेदारी सौंपी है। उन्हें तीन दिनों के भीतर प्रारंभिक जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। महिला को छोड़ने के बदले मांगे थे 50 हजार रुपए जानकारी के अनुसार पुरानी भिलाई थाना क्षेत्र में एसआई तुलसीराम साहू ने रज्जी कौर नामक महिला को 5.80 ग्राम चिट्टा (मादक पदार्थ) के साथ गिरफ्तार किया था। आरोप है कि महिला को छोड़ने के एवज में उसकी बेटी से 50 हजार रुपए की मांग की गई थी। महिला की बेटी जसबीर का आरोप है कि उसने पहली बार में 20 हजार रुपए देने की बात स्वीकार की थी और राशि भी दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद उसकी मां को गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद भी पैसों की मांग जारी रही। इसी दौरान हुई बातचीत का ऑडियो रिकॉर्ड हो गया, जो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। ऑडियो वायरल होने के बाद हुई कार्रवाई ऑडियो वायरल होने के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया। प्रारंभिक जांच में ऑडियो को गंभीर मानते हुए एसएसपी विजय अग्रवाल ने तत्काल कार्रवाई करते हुए एसआई तुलसीराम साहू और उनके सहयोगी बताए जा रहे खुर्सीपार थाना में पदस्थ एसआई देव लाल साहू को निलंबित कर दिया। दुर्ग शहर एएसपी सुखनंद राठौर ने बताया कि पुरानी भिलाई थाना में दर्ज एनडीपीएस प्रकरण से जुड़े मामले में आरोपी पक्ष से कथित रूप से पैसों की मांग का ऑडियो सोशल मीडिया पर सामने आया था। शुरुआती जांच में वायरल ऑडियो के आधार पर दोनों अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। विभागीय नियमों के विपरीत आचरण पाए जाने पर निलंबन की कार्रवाई की गई। साइबर क्राइम कर्मियों पर भी लगाए आरोप आरोपी महिला की बेटी जसबीर ने यह भी आरोप लगाया है कि साइबर क्राइम से जुड़े कुछ लोगों ने भी उससे 2 लाख रुपए की मांग की थी। उसने दावा किया कि एसआई के साथ हुई बातचीत की पूरी रिकॉर्डिंग उसके पास सुरक्षित है। जसबीर ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा है कि जब्ती, गिरफ्तारी और पूछताछ से जुड़े सभी स्थानों के सीसीटीवी फुटेज की जांच कराई जाए। उसका आरोप है कि बरामद किए गए चिट्टे की मात्रा वास्तविक मात्रा से अधिक दर्शाई गई है। तीन दिन में सौंपी जाएगी जांच रिपोर्ट दुर्ग पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। छावनी नगर पुलिस अधीक्षक प्रशांत पैकरा को तीन दिनों के भीतर प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

मानसून ने पकड़ी रफ्तार, देश में बारिश की शुरुआत; यूपी और बिहार के लिए बड़ा अपडेट

तिरुवनन्तपुरम झुलसाती गर्मी, तपती सड़कें और उमस भरी हवाओं के बीच आखिरकार वह खबर आ गई जिसका पूरे देश को इंतजार था. दक्षिण-पश्चिम मानसून ने केरल में आधिकारिक तौर पर दस्तक दे दी है. इसके साथ ही भारत में बारिश के सबसे बड़े मौसम की शुरुआत हो चुकी है. मौसम विभाग (IMD) की घोषणा के बाद केरल के कई इलाकों में तेज बारिश शुरू हो गई है और आसमान में घने बादलों ने गर्मी की तपिश को काफी हद तक कम कर दिया है. हर साल की तरह इस बार भी मानसून की एंट्री सिर्फ मौसम की खबर नहीं है, बल्कि करोड़ों किसानों, व्यापारियों और आम लोगों के लिए राहत और उम्मीद का संकेत है. खेतों से लेकर शहरों तक अब नजरें बारिश के अगले दौर पर टिक गई हैं. मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि आने वाले दिनों में मानसून तेजी से आगे बढ़ेगा और देश के बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले लेगा. ऐसे में अब छाता और रेनकोट निकालने का वक्त आ गया है।  IMD ने गुरुवार को पुष्टि की कि दक्षिण-पश्चिम मानसून ने केरल में आधिकारिक रूप से प्रवेश कर लिया है. इसके साथ ही लक्षद्वीप और तटीय इलाकों में भी बारिश की गतिविधियां तेज हो गई हैं. मौसम विभाग ने 4 जून से 9 जून के बीच केरल में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है. कई जगहों पर 7 सेंटीमीटर से 20 सेंटीमीटर तक बारिश होने की संभावना जताई गई है. IMD के मुताबिक, तिरुवनंतपुरम, कोल्लम, पथानामथिट्टा, अलाप्पुझा, कोट्टायम, इडुक्की, एर्नाकुलम और त्रिशूर जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है. विभाग ने कहा है कि इन इलाकों में तेज बारिश के साथ जलभराव और जनजीवन प्रभावित होने की आशंका है।  मानसून की एंट्री के साथ बदला मौसम का मिजाज     केरल में मानसून की एंट्री के बाद मौसम पूरी तरह बदल गया है. कई जिलों में लगातार बारिश हो रही है और तापमान में गिरावट दर्ज की गई है. मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में उत्तर केरल के कोझिकोड, वायनाड, कन्नूर और कासरगोड जिलों में भी भारी बारिश का दौर शुरू हो सकता है. जैसे-जैसे मानसून मजबूत होगा, वैसे-वैसे बारिश का दायरा बढ़ता जाएगा।      IMD ने अपने बयान में कहा कि ‘दक्षिण-पश्चिम मानसून केरल में प्रवेश कर चुका है और अगले कुछ दिनों में इसके तेजी से आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं.’ विभाग के मुताबिक, अरब सागर, बंगाल की खाड़ी और दक्षिण भारत के कई हिस्सों में भी मानसून सक्रिय हो रहा है।      मानसून की यह शुरुआत देश की अर्थव्यवस्था के लिए भी बेहद अहम मानी जाती है. भारत की लगभग आधी आबादी किसी न किसी रूप में खेती पर निर्भर है. कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, देश की करीब 51 प्रतिशत खेती बारिश पर आधारित है. ऐसे में मानसून अच्छा रहने का मतलब है बेहतर फसल, मजबूत ग्रामीण अर्थव्यवस्था और बाजार में सकारात्मक असर।      पिछले कुछ दिनों से मानसून की रफ्तार थोड़ी धीमी मानी जा रही थी. मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि पश्चिमी प्रशांत महासागर में विकसित हो रहे एक टाइफून और लक्षद्वीप के पास बने चक्रवाती परिसंचरण की वजह से अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से नमी खिंच गई थी. इसी कारण मानसून की शुरुआती प्रगति कमजोर पड़ी. हालांकि अब परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल हो चुकी हैं और मानसून तेजी पकड़ रहा है।  UP-बिहार में कब आएगा मानसून? मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार बिहार में दक्षिण-पश्चिम मानसून की दस्तक 12 से 15 जून के बीच हो सकती है, हालांकि राज्य के कुछ इलाकों में यह थोड़ा पहले भी पहुंच सकता है. मानसून के पूरे बिहार में सक्रिय होने में इसके बाद करीब 2 से 3 दिन का समय लग सकता है. वहीं उत्तर प्रदेश में मानसून चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ेगा।   पूर्वी उत्तर प्रदेश में मानसून 15 से 20 जून के बीच पहुंचने की संभावना है, जबकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इसकी एंट्री 20 से 25 जून तक हो सकती है. मानसून के पहुंचने के साथ दोनों राज्यों में बारिश की गतिविधियां तेज होने और लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है।  कई राज्यों में आंधी-तूफान और तेज बारिश का अलर्ट मौसम विभाग ने सिर्फ केरल ही नहीं बल्कि देश के कई हिस्सों के लिए भी अलर्ट जारी किया है. IMD के अनुसार, उत्तर-पश्चिम, मध्य, पूर्वी और दक्षिण भारत के कई क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं. कई जगहों पर 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना है।  विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के आगे बढ़ने के साथ दिल्ली, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु और पूर्वोत्तर राज्यों में भी बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं. इससे लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिलेगी।  मौसम विभाग ने सिर्फ केरल ही नहीं बल्कि देश के कई हिस्सों के लिए भी अलर्ट जारी किया है।  किसानों और आम लोगों के लिए क्यों अहम है मानसून? भारत में मानसून सिर्फ मौसम नहीं बल्कि अर्थव्यवस्था की धड़कन माना जाता है. अच्छी बारिश होने पर खेती बेहतर होती है, जलाशयों में पानी भरता है और बिजली उत्पादन पर भी सकारात्मक असर पड़ता है. ग्रामीण बाजारों में मांग बढ़ती है और इसका असर पूरे आर्थिक ढांचे पर दिखाई देता है।  यही वजह है कि हर साल मानसून की एंट्री पर पूरे देश की नजर रहती है. इस बार भी मानसून की शुरुआत को राहत भरी खबर माना जा रहा है. हालांकि मौसम विभाग ने लोगों को सतर्क रहने की भी सलाह दी है क्योंकि भारी बारिश वाले इलाकों में जलभराव और भूस्खलन जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।  आने वाले दिनों में तेजी से आगे बढ़ेगा मानसून मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अब मानसून तेजी से आगे बढ़ेगा और जुलाई के मध्य तक देश के ज्यादातर हिस्सों को कवर कर लेगा. अगले कुछ दिनों में कर्नाटक, तमिलनाडु, गोवा और महाराष्ट्र के कई इलाकों में भी तेज बारिश शुरू हो सकती है. फिलहाल केरल में मानसून की धमाकेदार एंट्री ने गर्मी से परेशान लोगों को बड़ी राहत दी है. अब पूरे देश की नजर इस बात पर है कि मानसून की रफ्तार आगे कैसी … Read more

Cyber Fraud का बढ़ता जाल: पंजाब में करोड़ों की ठगी, निवेश और वीजा के नाम पर लोगों को बनाया शिकार

चंडीगढ़   पंजाब में साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहा है। पिछले चार महीनों के दौरान मोहाली और राज्य के विभिन्न जिलों में साइबर ठगों ने 30.14 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी को अंजाम दिया है। इस अवधि में ऑनलाइन धोखाधड़ी के 13 बड़े मामले सामने आए हैं, जिनमें निवेश, वीजा, नौकरी, प्रॉपर्टी और हनी ट्रैप जैसे तरीकों का इस्तेमाल कर लोगों को निशाना बनाया गया। मामलों की शिकायत मिलने के बाद मोहाली साइबर क्राइम थाना, स्टेट क्राइम और स्टेट साइबर क्राइम पुलिस थानों में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। साइबर अपराधियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए विशेषज्ञ टीमों को लगाया गया है। क्रिप्टो निवेश के नाम पर 19.84 करोड़ की ठगी सबसे बड़ा मामला लुधियाना के व्यवसायी जगदीप सिंघाल से जुड़ा है। साइबर ठगों ने उन्हें क्रिप्टोकरेंसी में निवेश पर भारी मुनाफे का लालच देकर 19.84 करोड़ रुपये की ठगी का शिकार बनाया। आरोपियों ने सोशल मीडिया के जरिए संपर्क कर उनका विश्वास जीता और एक फर्जी ट्रेडिंग वेबसाइट के माध्यम से निवेश करवाया। जांच में पता चला है कि ठगी की रकम 15 अलग-अलग बैंकों के 75 फर्जी खातों के जरिए निकाली गई। फर्जी निवेश कंपनी बनाकर 3.62 करोड़ की धोखाधड़ी होशियारपुर निवासी तरनजीत सिंह भल्ला से भी निवेश के नाम पर 3.62 करोड़ रुपये ठग लिए गए। आरोपियों ने ‘अटालिया’ नामक कंपनी में निवेश कराने के लिए सेबी और आरबीआई के कथित दस्तावेज दिखाए तथा हर महीने 3 प्रतिशत और सालाना 36 प्रतिशत रिटर्न का झांसा दिया। जब पीड़ित ने अपनी रकम वापस मांगी तो उसे जान से मारने की धमकियां भी दी गईं। नौकरी, वीजा और हनी ट्रैप के जरिए भी ठगी साइबर ठगों ने रेलवे में टिकट कलेक्टर की नौकरी दिलाने, बैंक ऋण से राहत दिलाने और पैसे दोगुने करने के नाम पर भी लोगों से लाखों रुपये ऐंठे। हनी ट्रैप के मामलों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। एक युवक को इंस्टाग्राम पर फर्जी महिला प्रोफाइल के जरिए जाल में फंसाया गया और अश्लील वीडियो वायरल करने की धमकी देकर उससे 4.50 लाख रुपये वसूल लिए गए। वहीं, एक महिला को इंस्टाग्राम लिंक भेजकर निवेश का झांसा दिया गया और उससे 70 हजार रुपये की ठगी कर ली गई। प्रॉपर्टी और ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म फ्रॉड भी सामने आए खरड़ में एक दंपती ने सोशल मीडिया पर कोठी बेचने का विज्ञापन देकर छह लोगों से करीब 1.5 करोड़ रुपये का बयाना लिया। बाद में संपत्ति किसी अन्य व्यक्ति के नाम रजिस्ट्री करवा दी गई। इसी तरह एचएसबीएस कैपिटल नामक फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के जरिए चार लोगों से 27.88 लाख रुपये की ठगी की गई। शुरुआत में कुछ लाभ दिखाकर विश्वास जीता गया और बाद में निवेशकों की रकम ब्लॉक कर दी गई। विदेश भेजने के नाम पर भी ठगी जॉर्जिया, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा के वर्क वीजा दिलाने के नाम पर भी कई लोगों को निशाना बनाया गया। आरोपियों ने दर्जनों युवाओं से लाखों रुपये वसूल लिए, लेकिन न तो वीजा मिला और न ही रकम वापस की गई। पुलिस ने जारी की एडवाइजरी पुलिस अधिकारियों ने लोगों से ऑनलाइन निवेश, सोशल मीडिया ऑफर और डिजिटल लेन-देन के दौरान विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी निवेश योजना में पैसा लगाने से पहले संबंधित कंपनी की वैधता की जांच अवश्य करें और असामान्य रूप से अधिक रिटर्न के दावों पर भरोसा न करें। पुलिस ने यह भी सलाह दी है कि साइबर ठगी का शिकार होने पर तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल या नजदीकी साइबर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराएं, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।

ट्रायल्स से बाहर होने के बावजूद WFI की जिद पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, विनेश फोगाट केस में अहम टिप्पणी

सोनीपत  सुप्रीम कोर्ट ने पहलवान विनेश फोगाट के एशियन गेम्स के ट्रायल्स में हिस्सा लेने के खिलाफ कुश्ती संघ की याचिका पर सुनवाई गुरुवार (4 जून, 2026) को बंद कर दी है. कोर्ट को बताया गया कि विनेश ट्रायल्स में हिस्सा ले चुकी हैं और हारकर बाहर भी हो चुकी हैं. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने आगे सुनवाई को गैरजरूरी बताया।  कुश्ती संघ (WFI) ने हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें विनेश को ट्रायल्स में जाने की अनुमति दी गई थी. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामले से जुड़े कानूनी सवाल खुले हैं. हाईकोर्ट चाहे तो उन पर विचार कर सकता है।  बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार कुश्ती संघ ने दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने की मांग की है. कुश्ती संघ की तरफ से सीनियर एडवोकेट डीएन गोवर्धन ने कोर्ट से अनुरोध किया है कि पैरा नंबर 31 से आगे का हाईकोर्ट का आदेश रद्द कर दिया जाना चाहिए, क्योंकि इसमें तो यहां तक कह दिया गया है कि डब्ल्यूएफआई की कार्रवाई दुर्भावनापूर्ण और निंदनीय है. हालांकि, कोर्ट ने आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है।  सुप्रीम कोर्ट ने कुश्ती संघ से कहा है कि हाईकोर्ट की इन टिप्पणियों का सिंगल बेंच के पास लंबित मामले की सुनवाई पर कोई असर नहीं पड़ेगा. कोर्ट ने यह भी कहा कि हाईकोर्ट के निष्कर्षों को सुप्रीम कोर्ट ने नहीं दोहराया है और मुद्दे अभी भी अनसुलझे हैं।  यह मुद्दा विनेश फोगाट को एशियन गेम्स के ट्रायल्स में शामिल होने के लिए इजाजत देने से जुड़ा है. पहले हाईकोर्ट ने विनेश फोगाट को ट्रायल्स में जाने की अनुमति दे दी थी और फिर 29 मई को सुप्रीम कोर्ट ने भी फैसले को बरकरार रखा. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने विनेश को इजाजत देने के लिए हाईकोर्ट की तरफ से अपनाए गए दृष्टिकोण पर विचार करने के लिए मामले को लंबित रखा था।  कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट ने आदेश में मातृत्व पर पन्ने दर पन्ने खर्च कर दिए, जबकि असली मुद्दा इंटरनेशनल टेस्टिंग एजेंसी (ITA) के मानदंडों से जुड़ा है क्योंकि विनेश फोगाट डोपिंग टेस्ट में शामिल नहीं हुईं।  सुप्रीम कोर्ट ने विनेश को फटकार भी लगाई थी कि वह 2024 से गायब हैं, कभी मातृत्व और कभी  बतौर विधायक हरियाणा विधनासभा की कार्यवाही में व्यस्त होने का हवाला दिया. 2026 के डोपिंग टेस्ट में भी शामिल नहीं हुईं. कोर्ट ने उनसे कहा था कि हमें समझना होगा कि भारतीय खेल, विश्व खेलों से जुड़े हुए हैं. खिलाड़ी की उपलब्धियों का सम्मान होना चाहिए, लेकिन देश हर बात से पहले है. हाईकोर्ट ने विनेश फोगाट को घरेलू प्रतियोगिताओं और 2026 के एशियन गेम्स के ट्रायल्स के लिए अयोग्य ठहराए जाने की डब्ल्यूएफआई की कार्रवाई को निंदनीय और बदले की भावना से प्रेरित बताया था. उन्होंने कहा था कि मातृत्व अवकाश के बाद वापसी कर रही खिलाड़ी से ऐसा व्यवहार अस्वीकार्य है। 

जनभागीदारी के दम पर हरियाली की ओर बढ़ता छत्तीसगढ़, पर्यावरण संरक्षण को मिली नई दिशा

विश्व पर्यावरण दिवस 2026 हरित विकास, जल संरक्षण और जनभागीदारी से पर्यावरणीय समृद्धि की ओर बढ़ता छत्तीसगढ़ रायपुर,    प्रकृति केवल हमारे जीवन का आधार नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, परंपरा और भविष्य की संरक्षक भी है। स्वच्छ वायु, निर्मल जल, घने वन और समृद्ध जैव विविधता किसी भी सभ्य समाज की अमूल्य धरोहर होते हैं। तेजी से बढ़ते शहरीकरण, जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव के इस दौर में पर्यावरण संरक्षण केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि मानव अस्तित्व की अनिवार्य आवश्यकता बन चुका है। इसी उद्देश्य से प्रतिवर्ष 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है, जो हमें प्रकृति के प्रति अपने दायित्वों का स्मरण कराता है। प्राकृतिक संपदा से समृद्ध छत्तीसगढ़ देश के उन राज्यों में शामिल है, जहां पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन स्थापित करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य के विशाल वन क्षेत्र, समृद्ध जैव विविधता और जल संसाधन इसकी पर्यावरणीय पहचान हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार हरित विकास, जल संरक्षण और जनभागीदारी को केंद्र में रखकर अनेक योजनाओं का सफल संचालन कर रही है। हरियाली से समृद्धि की ओर छत्तीसगढ़ में वृक्षारोपण को केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों की आय से भी जोड़ा गया है। ’हरियाली प्रसार योजना’ और ’किसान वृक्ष मित्र योजना’ के माध्यम से किसानों को कृषि वानिकी के लिए पौधे उपलब्ध कराए जा रहे हैं तथा उन्हें अपनी भूमि पर वृक्ष लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे एक ओर हरित क्षेत्र का विस्तार हो रहा है तो दूसरी ओर किसानों को दीर्घकालिक आर्थिक लाभ भी प्राप्त हो रहा है। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर संचालित ”एक पेड़ मां के नाम“ अभियान ने पर्यावरण संरक्षण को जनभावनाओं से जोड़ने का कार्य किया है। इस अभियान के माध्यम से लाखों नागरिक अपनी मां के सम्मान में पौधारोपण कर प्रकृति संरक्षण का संदेश दे रहे हैं। यह पहल पर्यावरणीय जिम्मेदारी को सामाजिक आंदोलन का स्वरूप प्रदान कर रही है। शहरों को मिल रही हरित पहचान तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण बनाए रखना एक बड़ी चुनौती है। इस दिशा में ’ऑक्सीवन योजना’ के तहत शहरों में ऑक्सीजन पार्क और हरित क्षेत्र विकसित किए जा रहे हैं। वहीं पर्यावरण वानिकी योजना’ के माध्यम से सड़क किनारे वृक्षारोपण, पर्यावरण पार्कों का निर्माण तथा सार्वजनिक स्थलों का हरित विकास किया जा रहा है। ये प्रयास न केवल प्रदूषण नियंत्रण में सहायक हैं, बल्कि नागरिकों को बेहतर जीवन गुणवत्ता भी प्रदान कर रहे हैं। जल संरक्षण बना जनआंदोलन जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को देखते हुए जल संरक्षण आज सबसे महत्वपूर्ण विषयों में से एक है। छत्तीसगढ़ सरकार ने इस दिशा में कई अभिनव पहलें की हैं। ’मोर गांव मोर पानी’ और ’मोर गांव मोर तरिया’ जैसे अभियान ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण की नई चेतना पैदा कर रहे हैं। परंपरागत तालाबों का पुनर्जीवन, वर्षा जल संचयन, चेक डैम निर्माण और जल पुनर्भरण संरचनाओं के विकास से भूजल स्तर में सुधार के प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य में ’भूजल एवं जल संरक्षण कार्यक्रमों’ के तहत जल स्रोतों के संरक्षण और संवर्धन पर विशेष बल दिया जा रहा है। जल सुरक्षा की यह सोच आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित भविष्य की नींव रख रही है। नदियों और आर्द्रभूमियों का संरक्षण प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाने के लिए ’नदी तट वृक्षारोपण योजना’ के अंतर्गत नदी किनारों पर बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया जा रहा है। इससे मिट्टी के कटाव पर नियंत्रण, भूजल संवर्धन और जैव विविधता संरक्षण में मदद मिल रही है। इसी प्रकार आर्द्र भूमि (वेटलैंड) जलवायु अनुकूलन परियोजना के तहत महानदी जलग्रहण क्षेत्र में आर्द्रभूमियों के संरक्षण और पुनर्जीवन का कार्य किया जा रहा है। यह पहल जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने और प्राकृतिक जल तंत्र को सुदृढ़ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। नई पीढ़ी को पर्यावरण का प्रहरी बनाने की पहल पर्यावरण संरक्षण की सफलता जन-जागरूकता और जनभागीदारी पर निर्भर करती है। इसी उद्देश्य से ’राष्ट्रीय हरित कोर योजना (नेशनल ग्रीन कॉर्प्स)’ तथा ’ईको-क्लब कार्यक्रमों’ के माध्यम से स्कूलों और महाविद्यालयों के विद्यार्थियों को पर्यावरणीय गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है। वृक्षारोपण, स्वच्छता अभियान, जल संरक्षण और जैव विविधता संरक्षण संबंधी कार्यक्रमों के जरिए बच्चों और युवाओं में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता विकसित की जा रही है। पर्यावरण संरक्षण : सरकार और समाज की साझा जिम्मेदारी पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं से संभव नहीं है। इसके लिए प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। एक पौधा लगाना, जल की बचत करना, प्लास्टिक का कम उपयोग करना, प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करना और स्वच्छता बनाए रखना ऐसे छोटे-छोटे कदम हैं जो बड़े परिवर्तन का आधार बन सकते हैं। विश्व पर्यावरण दिवस हमें यह संदेश देता है कि विकास और पर्यावरण एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं। छत्तीसगढ़ आज हरियाली, जल संरक्षण और जनभागीदारी आधारित विकास मॉडल के माध्यम से इसी संतुलित दृष्टिकोण को साकार कर रहा है। यदि हम सभी प्रकृति के प्रति अपने दायित्वों को समझें और पर्यावरण संरक्षण को जीवनशैली का हिस्सा बनाएं, तो आने वाली पीढ़ियों को एक स्वच्छ, हरित और सुरक्षित पृथ्वी सौंप सकेंगे। धरती हमें विरासत में नहीं मिली है, बल्कि हमने इसे आने वाली पीढ़ियों से उधार लिया है। इसलिए पर्यावरण की रक्षा करना हम सभी का नैतिक दायित्व है। •  डॉ. दानेश्वरी संभाकर     उपसंचालक, जनसंपर्क