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LPG बाजार में बड़ा बदलाव, अमेरिका बना भारत का बड़ा सप्लायर; खाड़ी देशों की बढ़ी टेंशन

  नई दिल्ली पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने भारत की ऊर्जा खरीद व्यवस्था को पूरी तरह बदल दिया है. इसी बदलाव का असर है कि मध्य-पूर्वी देशों से भारी मात्रा में लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) आयात करने वाला भारत अमेरिका से यह पेट्रोलियम उत्पाद खरीद रहा है. अब अमेरिका पारंपरिक खाड़ी देशों को पीछे छोड़ते हुए भारत का सबसे बड़ा LPG सप्लायर बन गया है. वहीं, रूस भू-राजनीतिक तनाव और प्रतिबंधों के बावजूद, भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर बना हुआ है।  डेटा एनालिटिक्स फर्म केप्लर के आंकड़ों के अनुसार, मई 2026 में भारत के कुल LPG आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी 55% रही, जबकि फरवरी में यह केवल 14% थी. इस बदलाव की सबसे बड़ी वजह अमेरिका इजरायल का ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू करना है।  28 फरवरी को दोनों देशों ने ईरान पर हमला कर दिया था जिसके बाद शुरू हुए युद्ध ने पूरे खाड़ी क्षेत्र में भारी तबाही मचाई. इस युद्ध ने एनर्जी सप्लाई चेन पर बहुत बुरा असर डाला क्योंकि ईरान ने तेल-गैस की सप्लाई के लिए अहम समुद्री रास्ते होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया. फिलहाल दोनों पक्षों के बीच बेहद नाजुक युद्धविराम कायम है और युद्ध खत्म करने के लिए कोई भी बातचीत अपने आखिरी मुकाम तक नहीं पहुंच पा रही है।  LPG के लिए खाड़ी देशों पर निर्भर भारत अब अमेरिका की तरफ मुड़ा  भारत पारंपरिक रूप से अपनी अधिकांश LPG जरूरतों के लिए खाड़ी देशों पर निर्भर रहा है. लेकिन युद्ध के कारण संयुक्त अरब अमीरात (UAE), सऊदी अरब, कुवैत और कतर जैसे देशों से आयात बहुत कम हुआ है. भारत के LPG आयात में इन देशों की संयुक्त हिस्सेदारी फरवरी में 81% से घटकर मई में केवल 16% रह गई।  मई में अमेरिका से भारत को LPG निर्यात 73% बढ़कर लगभग 6.66 लाख मीट्रिक टन पहुंच गया. इससे खाड़ी क्षेत्र से आने वाले कार्गो में आई भारी गिरावट की भरपाई करने में मदद मिली।    सप्लाई में आई रुकावट के चलते भारत को घरेलू स्तर पर भी सख्त कदम उठाने पड़े. सरकार ने हाल ही में पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) कनेक्शन वाले उपभोक्ताओं के लिए LPG सिलेंडर खरीदने पर रोक लगा दी और कुछ उद्योगों को LPG की सप्लाई कम कर दी ताकि घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता दी जा सके।  घरेलू उत्पादन में बढ़ोतरी ने भी स्थिति को कुछ हद तक संभालने में मदद की है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत का LPG उत्पादन संघर्ष से पहले लगभग 35,000 मीट्रिक टन प्रतिदिन था जो बढ़कर 50,000-52,000 मीट्रिक टन प्रतिदिन तक पहुंच गया है. इससे आयात पर निर्भरता कुछ कम हुई है लेकिन देश की कुल मांग का लगभग 60% हिस्सा अब भी आयात से पूरा होता है।  तेल आयात पर भी ईरान संघर्ष का असर भारत के तेल आयात में भी संघर्ष का असर देखने को मिला है. मई में रूस से कच्चे तेल का आयात 24% बढ़कर 19.5 लाख बैरल प्रतिदिन पहुंच गया, जो भारत के कुल लगभग 49 लाख बैरल प्रतिदिन के कच्चे तेल आयात का बड़ा हिस्सा है।  केप्लर के विश्लेषकों का कहना है कि रूस से मिलने वाला तेल भारतीय रिफाइनरियों को सही कीमत पर मिल रहा है. भारत को यह तेल ऐसे वक्त में मिल रहा है जब खाड़ी देशों से सप्लाई लगभग रुकी हुई है।  इसके साथ ही भारत ने वेनेजुएला और ओमान से भी खरीद बढ़ाई है. मई में ओमान से कच्चे तेल का आयात 179% बढ़ा, जो यह दिखाता है कि भारतीय रिफाइनरियां ऐसे सप्लायरों की ओर रुख कर रही हैं जिन्हें समंदर के जरिए देश में लाना आसान हो। 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया गोरखपुर, आजमगढ़ व बस्ती की संयुक्त मंडलीय खरीफ उत्पादकता संगोष्ठी-2026 का शुभारंभ

गोरखपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 12 वर्षों में खेती-किसानी के क्षेत्र में आए परिवर्तन के कारण अन्नदाता किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है। किसान समाज व राष्ट्र की मुख्यधारा से जुड़ते हुए आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को प्राप्त कर रहे हैं। देश की सबसे अच्छी उर्वरा भूमि और सर्वाधिक सिंचित भूमि (86 फीसदी) यूपी में है। रबी-खरीफ व जायद की तीनों फसलों से किसानों को अच्छा दाम भी मिल रहा है। यह किसानों की मेहनत का परिणाम है कि यूपी का बीमारूपन दूर हुआ और राज्य समृद्ध बना। किसानों ने कृषि विकास दर को 8 से बढ़ाकर 18 प्रतिशत तक पहुंचाने में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है।  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बुधवार को गोरखपुर के बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में आयोजित गोरखपुर, आजमगढ़ व बस्ती की संयुक्त मंडलीय खरीफ उत्पादकता संगोष्ठी-2026 का शुभारंभ करने के उपरांत उपस्थित जन-समूह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को  सम्मानित किया और उन्हें ट्रैक्टर की चाबी व केसीसी प्रमाण पत्र प्रदान किए। संगोष्ठी का संचालन चारूशीला सिंह ने किया। 2005-2014 के बीच देश में अनगिनत किसानों ने की आत्महत्या सीएम योगी ने कहा कि 12 वर्ष पहले किसान आत्महत्या पर मजबूर थे। 2005 से 2014 के बीच देश में अलग-अलग स्थानों पर अनगिनत किसानों ने आत्महत्या की थी। इसके पीछे भी त्रासदी थी, उनके लिए अच्छी क्वालिटी के बीज, उचित एमएसपी, आपदा से बचाव के उपयुक्त प्रबंध नहीं थे। लागत अधिक-उत्पादन कम था। यदि किसान ने मेहनत से अन्न उत्पादन किया भी तो उसके क्रय की उचित व्यवस्था नहीं थी।  धरती माता के स्वास्थ्य का भी परीक्षण करा रही सरकार सीएम ने कहा कि पहली बार कोई सरकार कह रही है कि जैसे हम अपने उत्तम स्वास्थ्य के लिए हेल्थ चेकअप करवाते हैं, ऐसे ही धरती माता के स्वास्थ्य का भी परीक्षण होना चाहिए। पीएम मोदी ने 2014 से अनिवार्य रूप से फ्री में सॉइल हेल्थ कार्ड उपलब्ध कराया। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना लागू हुईं। दलहन-तिलहन आयात में सरकार को लाखों-करोड़ रुपये खर्च करने पड़ते थे, लेकिन किसानों को अच्छे बीज देकर दलहन-तिलहन के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने विशेष अभियान प्रारंभ किया।  हमारी सरकार ने किसानों के लिए उठाए अभूतपूर्व कदम सीएम योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का लाभ दिया गया, जिससे अन्नदाता किसान साहूकार के सामने हाथ नहीं फैलाए और न ही कर्ज से दबे। मंडी में व्यापक रिफॉर्म किया गया। प्रदेश में जब डबल इंजन सरकार आई तो उसने भी इसे मजबूती से बढ़ाया। किसानों के लिए अभूतपूर्व कदम उठाए। 2017 में पहली कैबिनेट मीटिंग में कर्ज से दबे किसानों को राहत दी गई। फसल ऋण की विशेष योजना प्रारंभ की गई। प्रयास रहा कि किसानों को लागत का डेढ़ गुना दाम प्राप्त हो। जगह-जगह सरकारी क्रय केंद्र खोलकर उनकी उपज को खरीदा गया। दशकों से लंबित परियोजनाएं पूरी हुईं  सीएम योगी ने कहा कि प्रदेश में दशकों से लंबित सिंचाई परियोजनाओं को प्रारंभ करने के साथ बाणसागर, सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना, बुंदेलखंड आदि से जुड़ी परियोजनाओं को पूरा कराया गया। 24 लाख हेक्टेयर भूमि को अतिरिक्त सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराई गई। सरकार निजी नलकूप में भी किसानों को फ्री बिजली देती है और इसके लिए 3000 करोड़ रुपये का भुगतान भी करती है।  यूपी ने खाद्यान्न में आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को किया प्राप्त  सीएम ने कहा कि यूपी क्षेत्रफल में देश में चौथे स्थान पर है, इसके बावजूद खाद्यान्न, चीनी, एथेनॉल, आलू, सब्जी व दुग्ध का सर्वाधिक उत्पादन कर रहा है। सरकार के साथ किसानों की मेहनत का परिणाम सामने है। सरकार रबी, खरीफ के समय गोष्ठी के माध्यम से किसानों को बीज, तकनीक, शासन की योजनाओं के बारे में बताती है और उनके सुझावों/परेशानियों की जानकारी लेती है।  आत्मनिर्भरता का लक्ष्य प्राप्त करने का माध्यम बनेगा किसान मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को प्राप्त करने का माध्यम बनेगा। सरकार का काम है कि किसान शोषण-अभाव से मुक्त हो, उसके सामने चुनौती न हो, उनके कार्यों में बाधाओं को हटाया जाए। उन्हें अच्छा बीज मिल सके, सुविधा संपन्न करने के साथ उन्हें मंडी से जोड़ा जाए और समय पर उनकी आवश्यकताओं की पूर्ति की जाए। उत्तर प्रदेश में यह सब संभव हो पा रहा है। यूपी के पास देश की कुल कृषि योग्य भूमि में केवल 11 फीसदी भूमि है, लेकिन वह कुल खाद्यान्न उत्पादन में 21 फीसदी योगदान कर रहा है। यूपी की आबादी देश की कुल जनसंख्या का 16-17 फीसदी है। खाद्यान्न, सब्जी, औद्यानिक फसलों में यूपी देश को लीड कर रहा है, इसके बावजूद कई चुनौतियां भी हैं। परिजनों को 24 घंटे में पांच लाख की सहायता सीएम ने कहा कि यूपी में किसानों, सह किसानों (बटाईदारों) व उनके पारिवारिक सदस्यों को भी किसी हादसे की स्थिति में मुख्यमंत्री कृषक बीमा दुर्घटना योजना का लाभ दिया गया है। इस पर सरकार हर वर्ष एक हजार करोड़ रुपये खर्च करती है। किसान अतिवृष्टि, अनावृष्टि, लू, आकाशीय बिजली, वन्यजीव संघर्ष का शिकार हुआ तो सरकार 24 घंटे के अंदर पांच लाख रुपये की सहायता परिवार को उपलब्ध कराती है। लखनऊ में सीड पार्क, कुशीनगर में कृषि विश्वविद्यालय का निर्माण जारी सीएम योगी ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न चौधरी चरण सिंह के नाम पर लखनऊ में सीड पार्क तथा कुशीनगर में कृषि व प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय का निर्माण किया जा रहा है। कृषि विज्ञान केंद्र उत्तम तकनीक व बीज की क्वालिटी के बारे में जानकारी के माध्यम बने हैं। इसके बाद भी बहुत कुछ किए जाने की आवश्यकता है। जितना किसानों ने उत्पादन बढ़ाया है, इसमें अभी लगभग तीन गुना और वृद्धि कर सकते हैं। हमें बीज की क्वालिटी, तकनीक और समय पर खेतीबाड़ी-फसल चक्र को अपनाना पड़ेगा। इससे उत्पादन बढ़ेगा। किसान इस दिशा में कार्य प्रारंभ करें। सीएम ने चुनौतियों पर भी चर्चा की सीएम ने चुनौतियों पर चर्चा करते हुए कहा कि उत्पादन का पहला चरण यह है कि किसानों को सही बीज प्राप्त हों। सीएम ने क्वालिटी पर जोर देते हुए कहा कि कितना भी उत्पादन कर लें, यदि उत्पाद एक्सपोर्ट के लायक नहीं तैयार किया गया तो उचित मुनाफा नहीं होगा। आम का यहां 40-50 … Read more

केन्द्रीय मंत्रि-परिषद् ने सड़क विकास के लिए मध्यप्रदेश में 2 बड़ी परियोजनाओं को दी मंजूरी

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने केंद्रीय मंत्रि-परिषद् के आर्थिक मामलों की समिति द्वारा मध्यप्रदेश में 4,415.60 करोड़ रूपए की लागत वाली 2 सड़क निर्माण परियोजनाओं को मंजूरी देने के लिए प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री  नितिन गडकरी का आभार माना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में डबल इंजन की सरकार है, इसलिए यहां विकास की रफ्तार पर भी दोगुनी है। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार की इस महत्वपूर्ण सौगात से प्रदेश के जनजातीय बहुल जिले बैतूल, खंडवा, खरगौन और बड़वानी के समग्र विकास को तेज गति मिलेगी। साथ ही हजारों स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे। बुधवार को नई दिल्ली में हुई केन्द्रीय मंत्रि-परिषद् की बैठक में एनएच-347बी के हिवरखेड़ी-रोशनी-आशापुर-रुधी खंड पर मौजूदा इंटरमीडिएट लेन को पक्के शोल्डर स्टैंडर्ड के साथ 2-लेन की सड़क (125.01 किमी) में अपग्रेड करने तथा एनएच-347बी के देशगांव-जुलवानिया खंड (108.643 किमी) को हाइब्रिड एन्युटी मोड अन्तर्गत 2-लेन से 4-लेन सड़क में विस्तारित करने की मंजूरी दे दी गई है। कुल 233.653 किमी लंबी इस परियोजना पर करीब 4,415.60 करोड़ रूपए की लागत आएगी। इस परियोजना में खरगौन जिले में 16.20 किमी लंबा एक ग्रीनफील्ड बायपास भी विकसित किया जाएगा। यह उन्नत कॉरिडोर मध्यप्रदेश में बेहतर रोड कनेक्टिविटी सुनिश्चित करेगा और 6 पीएम गति-शक्ति आर्थिक नोड्स को जोड़ते हुए मल्टीमॉडल एकीकरण को भी बढ़ावा देगा। यह परियोजना मध्यप्रदेश के प्रमुख आर्थिक, सामाजिक और लॉजिस्टिक्स केंद्रों को निर्बाध रूप से जोड़ेगी। उन्नत कॉरिडोर 6 पीएम गति-शक्ति आर्थिक केंद्रों (1 कपड़ा क्लस्टर, 2 मेगा फूड पार्क, 1 औद्योगिक पार्क, 2 सुपर थर्मल पावर प्लांट), 5 सामाजिक केंद्रों (2 आकांक्षी जिले – खंडवा और बड़वानी, 3 जनजातीय जिले – बेतूल, खंडवा, खरगोन) और 5 लॉजिस्टिक्स केंद्रों (2 प्रमुख रेलवे स्टेशन, 2 हवाई अड्डे, 1 एमएमएलपी) से जुड़कर बहु-मोडल एकीकरण को बढ़ावा देगा, जिससे पूरे क्षेत्र में माल और यात्रियों की आवाजाही तेज हो सकेगी।  

सोना-चांदी के दाम में बड़ा बदलाव, चांदी में आई गिरावट; चेक करें आज का रेट

इंदौर  सोना-चांदी की कीमतों में फिर गिरावट आई है. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर दोनों कीमती धातुएं बुधवार को बाजार ओपन होने के साथ ही फिसल गईं. चांदी का वायदा भाव एक झटके में करीब 2000 रुपये कम हो गया, तो वहीं सोने के भाव में भी कमी आई है. इस ताजा गिरावट के बाद अब 1 किलो चांदी अपने हाई लेवल से 1.92 लाख रुपये सस्ती हो गई है. आइए जानते हैं 20, 22 और 24 कैरेट सोने का क्या रेट है?  चांदी का भाव तेजी से टूटा  एमसीएक्स सिल्वर प्राइस पर नजर डालें, तो सप्ताह के तीसरे कारोबारी दिन बुधवार को वायदा कारोबार की शुरुआत रेड जोन में हुई. 3 जुलाई की एक्सपायरी वाली चांदी का भाव अपने पिछले बंद 2,66,707 रुपये प्रति किलो की तुलना में एक झटके में कम होकर 2,64,760 रुपये पर आ गया. इस हिसाब से देखें, तो 1 Kg Silver Price 1947 रुपये कम हो गया।  चांदी ने इसी साल जनवरी महीने में 4 लाख रुपये प्रति किलोग्राम का आंकड़ा पार किया था और लाइफ टाइम हाई लेवल 4,57,328 रुपये छुआ था. इसके बाद इस कीमती धातु का भाव लगातार क्रैश होता चला गया. तमाम उतार-चढ़ाव के बाद अब ताजा गिरावट के बाद वायदा चांदी हाई से 1,92,568 रुपये प्रति किलो तक सस्ती मिल रही है।  सोना भी चांदी के साथ टूटा  सिर्फ चांदी ही नहीं, बल्कि एमसीएक्स पर सोने की कीमत में भी गिरावट आई है और ये कीमती धातु 1.60 लाख रुपये से नीचे आ गई है. MCX Gold Rate पर नजर डालें, तो बीते कारोबारी दिन ये कीमती पीली धातु 1,59,346 रुपये प्रति 10 ग्राम पर क्लोज हुई थी, जबकि बुधवार को खुलते ही 5 अगस्त की एक्सपायरी वाला 10 Gram 24 Karat Gold गिरकर 1,58,780 रुपये पर आ गया।  सोने के हाई लेवल से वर्तमान रेट की तुलना करें, तो अब ये और भी सस्ता मिल रहा है. एमसीएक्स पर इस एक्सपायरी वाले वायदा गोल्ड का लाइफ टाइम हाई लेवल 2,04,375 रुपये है और यहां से अब सोना 45,595 रुपये सस्ता मिल रहा है।  घरेलू मार्केट में सोना-चांदी का हाल एमसीएक्स के अलावा अगर घरेलू मार्केट में सोना-चांदी के रेट में आए चेंज की बात करें, तो इंडियन बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट IBJA.Com के मुताबिक, तो 24 कैरेट सोने का दाम 1,56,294 रुपये से कम होकर 1,55,264 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया है. वहीं चांदी की कीमत 2,65,300 रुपये प्रति किलो की तुलना में 3,300 रुपये कम होकर 2,62,000 रुपये पर आ गया. अलग-अलग क्वालिटी के गोल्ड रेट की बात करें, तो… गोल्ड क्वालिटी गोल्ड रेट/10 ग्राम 24 Karat Gold 1,55,264 रुपये/10 ग्राम 22 Karat Gold 1,54,642 रुपये/10 ग्राम 20 Karat Gold 1,42,222 रुपये/10 ग्राम 18 Karat Gold 1,16,448 रुपये/10 ग्राम 14 Karat Gold 90,829 रुपये/10 ग्राम ध्यान रहे, घरेलू मार्केट में सोना-चांदी की ज्वेलरी खरीदने पर ग्राहक को आईबीजेए रेट्स के साथ ही मेकिंग चार्ज और इस पर लागू जीएसटी भी देना होता है, जिसके जुड़ने से इनकी कीमतों में बढ़ोतरी हो जाती है।       

वर्षाकाल के पूर्व सभी जल संरचनाओं की आवश्यक मरम्मत एवं सुरक्षात्मक कार्य पूरे करें

भोपाल  जल संसाधन मंत्री  तुलसीराम सिलावट ने कहा है कि मध्यप्रदेश में प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के संकल्प के अनुसार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में जल संरक्षण और पर्यावरण सुधार के लिए जन आंदोलन चलाया जा रहा है। जल गंगा संवर्धन और एक पेड़ मां के नाम अभियान गांव गांव, नगर नगर में समाज के सभी वर्गों के सहयोग से चलाया जा रहा है, जिसके अच्छे परिणाम सामने आ रहे हैं। इन अभियानों में अधिक से अधिक जन भागीदारी सुनिश्चित करें। वर्षाकाल के पूर्व सभी विभागीय जल संरचनाओं की आवश्यक मरम्मत एवं सुरक्षात्मक कार्य पूरे कर लिए जाएं। कार्य में किसी भी प्रकार की कोई भी लापरवाही अक्षम्य होगी। जल संसाधन मंत्री  सिलावट ने बुधवार को मंत्रालय वल्लभ भवन में निर्माणाधीन विभागीय कार्य एवं परियोजनाओं की समीक्षा की तथा बारिश के पूर्व के सभी कार्य पूर्ण करने के अधिकारियों को निर्देश दिए। अपर मुख्य सचिव  राजेश राजौरा, प्रमुख अभियंता  विनोद देवड़ा सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। मंत्री  सिलावट ने कछार वार मुख्य अभियंताओं के साथ उनके क्षेत्र में निर्माणाधीन सिंचाई परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा भी की तथा निर्देश दिए कि वर्षाकाल के मद्देनजर आगामी 15 दिनों में वहां आवश्यक कार्य करा लिए जाएं। चंबल बेतवा कछार भोपाल के अंतर्गत पार्वती, सुठालिया, टेम, कान्याखेड़ी एवं ग्वालटोरिया परियोजनाओं की समीक्षा की गई. धसान केन कछार अंतर्गत आपचंद, मझगांय, सतधारू, पवई और काठन परियोजना, बीना पीएमयू सागर के अंतर्गत बंडा, हनोता, पंचम नगर, कडान, साजली कैथ, जूडी और जेरा परियोजना, बेतवा एमओयू भोपाल के अंतर्गत कोठा बैराज एवं बीना परियोजना, नर्मदा ताप्ती कछार इंदौर के अंतर्गत तलवाड़ा, पांगरी एवं कारम परियोजना, बेनगंगा कछार सिवनी के अंतर्गत छिंदवाड़ा सिंचाई कॉम्पलेक्स, पैंच माइक्रो सिंचाई, शेर सिंचाई काँम्प्‍लेक्स, मांडवा होज इरिगेशन, अपर बुडनेर, छीताबुजरी, हिरण, बगराजी नहर, मुर‍की पाइप नहर परियोजना, गंगा कछार रीवा के अंतर्गत त्योंथर बहाव, त्योंथर माइक्रो, रामनगर माइक्रो, नई गढ़ी माइक्रो, रिहंद माइक्रो, भन्नी, बहुती, गोढ़, सीतापुर हनुमना, दोरी सागर एवं सेमरिया माइक्रो परियोजना तथा यमुना कछार ग्वालियर के अंतर्गत कनेरा माइक्रो, चंबल माइक्रो, मुंझारी, चेंटीखेड़ी एवं सरकुला परियोजना के कार्यों की समीक्षा की गई. मंत्री  सिलावट द्वारा सिंहस्थ 2028 के मद्देनजर उज्जैन में कराए जा रहे हैं विभिन्न कार्यों कान्ह डायवर्सन परियोजना, सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी, घाट निर्माण, चितावद, समाकोटा, डुंगरिया, बनीहरवाखेड़ी, मां रेवा उद्वहन परियोजना, हाट पिपल्‍या परियोजना, कयामपुर-सीतामऊ, मल्हारगढ़, रामपुर मनासा, कबूलपुर और आहू परियोजनाओं के कार्यों की समीक्षा की तथा आवश्यक निर्देश दिए। मंत्री  सिलावट ने निर्देश दिए कि वर्षा पूर्व विभागीय सभी बांधों, नहरों, तालाबों एवं जल संरचनाओं का निरीक्षण कर आवश्यकतानुसार उनकी मरम्मत एवं अन्य सुरक्षात्मक उपाय सुनिश्चित करें। जलग्रहण क्षेत्रों में यदि कोई अवरोध हो तो उन्हें तत्काल हटाने की कार्रवाई करें। बांधों के गेट्स की आवश्यक मरम्मत, ऑइलिंग- ग्रीसिंग के साथ ही उनका एक बार संचालन अवश्य करलें। विभिन्न स्तरों पर बाढ नियंत्रण कक्ष स्थापित कर लिए जाएं जो 24 घंटे क्रियाशील रहें। निगरानी समितियों को सक्रिय किया जाए तथा मुख्य अभियंता, अधीक्षण यंत्री कार्यालय स्तर पर निरीक्षण दल गठित किए जाएं, जो जल संरचनाओं की निरंतर निगरानी कर वरिष्ठ स्तर पर रिपार्ट दें। मंत्री  सिलावट ने निर्देश दिए कि बड़ी जल संरचनाओं में जल स्तर की नियमित रूप से मॉनिटरिंग हो तथा जल स्तर बढ़ने एवं गेट्स खोले जाने की पूर्व सूचना पुलिस, प्रशासन, सभी संबंधितों एवं जन सामान्य को निरंतर दी जाए। गत तीन वर्षों में जहां बाढ़ आई हो उन गांवों एवं क्षेत्रों को चिन्हित कर वहां सभी सुरक्षात्मक इंतेजाम कर लिए जाएं। बड़ी जल संरचनाओं के पास गोताखोर, नाव, लाइफ जैकेट, रस्सी आदि सभी सुरक्षा उपकरण सुनिश्चित हों। वर्षाकाल से पूर्व सभी कछारों/ जिलों में सभी संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक कर ली जाए तथा उनसे निरंतर समन्वय रखा जाए।  

सिवान से पटना तक सफर पर बढ़ा खर्च, यात्रियों को अब देने होंगे ज्यादा पैसे

 सिवान  बिहार राज्य पथ परिवहन निगम ने बसों के किराये में बढ़ोतरी कर दी है। अब साधारण से लेकर डीलक्स बसों में सफर करना महंगा हो गया है। 2021 की तुलना में अब यात्रियों को 15 प्रतिशत अधिक पैसे देने होंगे। प्राप्त जानकारी के अनुसार, डीलक्स बसों से सिवान से पटना (वाया छपरा) का सफर पहले 213 रुपये में होता था, अब उसे लिए यात्रियों को 245 रुपये देने होंगे। इसी प्रकार लग्जरी बसों का किराया भी काफी बढ़ गया है। किराये में बढ़ोतरी का सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ रहा है। ऐसे में छपरा, हाजीपुर, पटना आने-जाने वाले यात्रियों का मासिक बजट बिगड़ना तय माना जा रहा है। बता दें कि डीजल और स्पेयर पार्ट्स की कीमतों में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। इससे निगम को लगातार हीं आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा था। डीलक्स बस से सिवान से छपरा के लिए लगेगा 114 रुपये किराया गौर करने वाली बात है कि डीलक्स बस से सिवान से दारौंदा के लिए पहले 30 रुपये किराया देना पड़ता था, जो अब बढ़कर 35 रुपये हो गया है। एकमा के लिए पहले 50 रुपये और अब 58 रुपये, छपरा के लिए पहले 98 रुपये और अब 114 रुपये, शीतलपुर के लिए 154 रुपये और अब 181 रुपये तथा हाजीपुर के लिए पहले 186 रुपये और अब 219 रुपये किराया देना होगा। इसी प्रकार पटना से हाजीपुर तक सफर के लिए 58 रुपये, शीतलपुर के लिए 91 रुपये, छपरा के लिए 148 रुपये, एकमा के लिए 200 रुपये तथा सिवान के लिए 245 रुपये किराया देना होगा। पीपीपी मोड में चलने वाली गाड़ियों पर भी लागू होगा किराया गौर करने वाली बात है कि किराया में यह बढ़ोतरी केवल निगम की अपनी बसों के लिए हीं नहीं हैं, बल्कि लोक निजी भागीदारी (पीपीपी) योजना के तहत चलने वाली सभी निजी बसों पर भी यहीं किराया लागू होगा। इस नए आदेश के जारी होने के साथ हीं किराये से संबंधित पूर्व में निर्गत सभी आदेश व नियम अब संशोधित माने जाएंगे। वहीं निजी बसों का किराया ट्रांसपोर्टरों की आगामी दिनों में होने वाली बैठक के बाद बढ़ने की संभावना है। शहर के मजहरूल हक बस स्टैंड स्थित सरकारी बस डिपो से मिली जानकारी के अनुसार, सिवान से छपरा होते हुए पटना जाने के लिए बिहार राज्य पथ परिवहन निगम की कुल पांच बसें चलाई जाती है। इसमें से एक बस में तकनीकी खराबी आ जाने के कारण उसका परिचालन पूरी तरह से बंद है। ऐसे में वर्तमान समय में चार बसें अपनी सेवा प्रदान कर रहे हैं। पदाधिकारियों की मानें तो पहली बस सुबह पांच बजे पटना के लिए रवाना होती है, जो पटना से दोपहर 12.20 बजे यात्रियों को लेकर लौटती है। वहीं, दूसरी बस दोपहर 12.20 बजे व तीसरी बस दोपहर 1.20 बजे पटना जाती है। वहीं पटना से शाम पांच बजे व 5.30 बजे वापसी करती हैं।  

NFHS-6 रिपोर्ट: उत्तर प्रदेश में शराब और तंबाकू सेवन बढ़ा, गांवों में ज्यादा असर

लखनऊ यूं तो देश के कई राज्यों में शराब के शौकीनों की संख्या बहुत अधिक है। मगर यूपी में शराब पीने वालों की संख्या सबसे तेजी से बढ़ी है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण की ताजा रिपोर्ट इसकी गवाही दे रही है। यह बढ़ोतरी 4.2 फीसदी की है जबकि राष्ट्रीय स्तर पर इस मामले में गिरावट आई है। यूपी में शहरों से ज्यादा गांवों में शराब पीने वालों की संख्या में इजाफा हुआ है। इससे हाई ब्लड शुगर और हाइपरटेंशन जैसी दिक्कतें बढ़ रही हैं। खास बात यह है कि प्रदेश में शराब की शौकीन महिलाओं का आंकड़ा स्थिर बना हुआ है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 (एनएफएचएस-6) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के पुरुषों में शराब पीने की प्रवृत्ति में बड़ी वृद्धि दर्ज की गई है। एनएफएचएस-5 में प्रदेश में 15 साल से अधिक उम्र वाले लोगों में शराब पीने वाले पुरुषों की संख्या 14.5 प्रतिशत थी। वहीं एनएफएचएस-6 की रिपोर्ट बताती है कि यूपी के पुरुषों में यह आंकड़ा बढ़कर 18.7 फीसदी हो गया है, जो राष्ट्रीय औसत के बराबर है। यह वृद्धि देश में सर्वाधिक है। महिलाओं में नहीं बढ़ी शराब की लत जबकि महिलाओं के मामले में यूपी की स्थिति यथावत बनी हुई है यानि 2019 से 2021 की रिपोर्ट में यह आंकड़ा 0.3 फीसदी था, जो 2023-24 की रिपोर्ट में भी जस का तस है। वहीं यदि राष्ट्रीय स्तर पर देखें तो देश में शराब के शौकीन पुरुषों की संख्या 18.9 फीसदी से घटकर 18.7 प्रतिशत हो गई है जबकि महिलाओं में यह आंकड़ा 1.3 फीसदी से घटकर 1.1 फीसदी पर आ गया है। राष्ट्रीय स्तर पर शराब पीने वालों के आंकड़े देखें तो अरुणाचल प्रदेश के पुरुष और महिलाएं इस फेहरिस्त में शीर्ष पर हैं। शराब पीने के मामले में देश के पांच शीर्ष राज्यों की स्थिति राज्य पुरुष महिलाएं अरुणाचल प्रदेश- 50.2 फीसदी 23.2 फीसदी तेलंगाना- 43.9 फीसदी 7.1 फीसदी सिक्किम- 42.2 फीसदी 19.9 फीसदी हिमाचल प्रदेश- 30.2 फीसदी 0.6 फीसदी उत्तराखंड- 27.2 फीसदी 0.3 फीसदी देश में घटे पर यूपी में बढ़े तंबाकू खाने वाले स्त्री-पुरुष यूपी में तंबाकू खाने वालों की बात करें तो पुरुष और महिलाओं दोनों में ही इसकी लत बढ़ी है। खासतौर से ग्रामीणों में यह बढ़ोत्तरी अधिक देखी गई है। प्रदेश में 15 साल से अधिक आयु की तंबाकू का सेवन करने वाली महिलाओं की संख्या वर्ष 2023-24 में 9.6 फीसदी रही। यह पहले 8.5 प्रतिशत थी। वहीं इसी आयु वर्ग के तंबाकू खाने वाले पुरुषों का आंकड़ा 45.2 फीसदी है, जो इशारा करता है कि लगभग हर दूसरा व्यक्ति तंबाकू या उससे जुड़े उत्पादों का सेवन करता है। पुरुषों में पहले यह 44.0 फीसदी था। वहीं यदि तंबाकू खाने वालों के राष्ट्रीय स्तर पर आंकड़े देखें तो महिलाओं और पुरुषों में इसमें कमी दर्ज की गई है। तंबाकू खाने वाली महिलाओं की संख्या 2019-21 की तुलना में 2023-24 में 8.9 प्रतिशत से घटकर 8.4 फीसदी रही है। पुरुषों में तंबाकू खाने की लत 38 प्रतिशत से घटकर 36.3 फीसदी रह गई है।

योगी सरकार के ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था लक्ष्य को नई गति देगा उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो का चौथा संस्करण

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश को ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम के रूप में यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस) 2026 का आयोजन किया जा रहा है। पिछले तीन संस्करणों की सफलता के बाद यह आयोजन अब उत्तर प्रदेश के उत्पादों, सेवाओं, तकनीक और नवाचारों को वैश्विक बाजार से जोड़ने वाला एक प्रमुख मंच बन चुका है। इसके माध्यम से प्रदेश के उद्योग, एमएसएमई, स्टार्टअप और निर्यात क्षेत्र को नए अवसर मिलने की उम्मीद है। 4.50 लाख आम नागरिकों की उपस्थिति का अनुमान यूपीआईटीएस-2026 में 2400 से अधिक प्रदर्शकों के भाग लेने का अनुमान है, जबकि 85 देशों से 550 से अधिक अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के आने की संभावना है। इसके अलावा 1.50 लाख से अधिक घरेलू बी-टू-बी खरीदार और लगभग 4.50 लाख आम नागरिकों की उपस्थिति का अनुमान लगाया गया है। यह आयोजन प्रदेश के उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने के साथ-साथ निवेश और व्यापारिक साझेदारियों को भी नई ऊंचाई देगा। 4000 से अधिक एमओयू होने की संभावना ट्रेड शो के दौरान 4000 से अधिक समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर होने की संभावना है, जिनका अनुमानित मूल्य ₹3200 करोड़ से अधिक हो सकता है। इसके अतिरिक्त ₹13,500 करोड़ से अधिक के संभावित व्यापारिक लीड और पूछताछ उत्पन्न होने का अनुमान है। इससे प्रदेश के एमएसएमई, ओडीओपी इकाइयों, निर्यातकों और उद्यमियों को व्यापक लाभ मिलने की उम्मीद है। औद्योगिक, निर्यात और निवेश प्रोत्साहन नीतियों का प्रदर्शन करीब 1.10 लाख वर्गमीटर प्रदर्शनी क्षेत्र में आयोजित होने वाला यह मेगा आयोजन योगी सरकार की औद्योगिक, निर्यात और निवेश प्रोत्साहन नीतियों का प्रदर्शन भी करेगा। विभागीय अधिकारियों के अनुसार यह आयोजन प्रदेश को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए और अधिक आकर्षक बनाने के साथ-साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के विजन को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

मंत्री सारंग ने टैलेंट सर्च अभियान की समीक्षा बैठक में दिए निर्देश

भोपाल  खेल एवं युवा कल्याण मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग ने प्रदेश में खेल प्रतिभाओं की खोज और संवर्धन को नई गति देने के उद्देश्य से टी.टी. नगर स्थित मेजर ध्यानचंद हॉल में टैलेंट सर्च अभियान की समीक्षा बैठक लेकर अधिकारियों एवं खेल प्रशिक्षकों को व्यापक दिशा-निर्देश दिए। मंत्री  सारंग ने कहा कि प्रथम स्तर पर प्रदेश के हर जिले में फीडर सेंटर स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने निर्देश दिए कि द्वितीय स्तर में प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में विकसित किए जा रहे नए स्टेडियमों को भी फीडर सेंटर के रूप में विकसित किया जाए, जिससे गांव और कस्बों के खिलाड़ियों को स्थानीय स्तर पर ही बेहतर प्रशिक्षण एवं सुविधाएं मिल सकें। मंत्री  सारंग ने कहा कि मध्यप्रदेश खेल अकादमियों के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बन चुका है और अब फीडर सेंटर नेटवर्क के माध्यम से भी मध्यप्रदेश राष्ट्रीय स्तर पर देश का नेतृत्व करेगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, आवश्यकता केवल उन्हें सही समय पर पहचानने और अवसर देने की है। इसी उद्देश्य से अब खेलवार और क्षेत्रवार टैलेंट सर्च अभियान चलाए जाएंगे। जिन क्षेत्रों में जिस खेल की प्रतिभाएँ अधिक हैं, वहां विशेष अभियान चलाए जाएंगे। मंत्री  सारंग ने स्कूलों, कॉलेजों, समर कैंपों और शिक्षा विभाग के साथ समन्वय बढ़ाने के निर्देश देते हुए कहा कि अधिक से अधिक बच्चों और युवाओं को खेलों से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने निर्देश दिए कि खेलो इंडिया स्मॉल सेंटर, फीडर सेंटर और खेल अकादमियों के लिए प्रतिभा खोज का कार्य एकीकृत रूप से किया जाए। बैठक में खेल अकादमियों में सीटें बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। उन्होंने टैलेंट सर्च प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने पर जोर देते हुए कहा कि आधुनिक आईटी सॉल्यूसन्स और एथलीट मैनेजमेंट सिस्टम के माध्यम से खिलाड़ियों की प्रगति की निरंतर मॉनिटरिंग की जाएगी। मंत्री  सारंग ने कहा कि खेलों को जन-आंदोलन बनाने के लिए सोशल मीडिया, मीडिया प्लेटफॉर्म, जन-प्रतिनिधियों, जिला प्रशासन स्तर तक व्यापक सहभागिता सुनिश्चित किया जाये। उन्होंने कहा कि यह अभियान केवल अल्पकालिक योजना नहीं, बल्कि प्रदेश में खेल संस्कृति को मजबूत करने का दीर्घकालिक मिशन है।  

पश्चिम बंगाल कार्रवाई के बाद सीमावर्ती बिहार में चौकसी सख्त, वाहनों की गहन जांच जारी

किशनगंज पश्चिम बंगाल में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों और फर्जी दस्तावेजों के सहारे निवास कर रहे लोगों के खिलाफ तेज हुई कार्रवाई का असर अब सीमावर्ती बिहार-नेपाल क्षेत्र में भी दिखाई देने लगा है। सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि कार्रवाई के दबाव में कुछ संदिग्ध तत्व सीमावर्ती रास्तों का उपयोग कर बिहार और नेपाल की ओर रुख कर सकते हैं। इस संभावना को देखते हुए किशनगंज जिले से सटे भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व रूप से मजबूत किया गया है। सीमा सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाल रही सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) ने किशनगंज के लगभग 122 किलोमीटर लंबे भारत-नेपाल बॉर्डर पर अलर्ट जारी कर दिया है। सीमा पर तैनात जवानों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। सीमा चौकियों पर निगरानी बढ़ाने के साथ-साथ संदिग्ध गतिविधियों पर विशेष नजर रखी जा रही है। संवेदनशील इलाकों में वाहनों और यात्रियों की हो रही जांच दिघलबैंक, ठाकुरगंज, गलगलिया, खानीबाड़ी और फतेहपुर सहित कई संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा एजेंसियां लगातार अभियान चला रही हैं। सीमा से होकर गुजरने वाले वाहनों की सघन तलाशी ली जा रही है, जबकि यात्रियों की पहचान का सत्यापन भी किया जा रहा है। सीमा चौकियों के अलावा वैकल्पिक रास्तों और पगडंडियों पर भी सुरक्षा बलों की निगरानी बढ़ा दी गई है, ताकि किसी भी प्रकार की अवैध आवाजाही को रोका जा सके। सीमा पार करने के नियम हुए सख्त सुरक्षा कारणों से सीमा पार करने की प्रक्रिया को भी अधिक कड़ा कर दिया गया है। अधिकारियों के अनुसार, अब केवल आधार कार्ड के आधार पर सीमा पार करने की अनुमति नहीं दी जा रही है। यात्रियों को वोटर पहचान पत्र, पासपोर्ट अथवा अन्य वैध सरकारी पहचान पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य किया गया है। वहीं, बच्चों के लिए जन्म प्रमाण पत्र या स्कूल पहचान पत्र दिखाना जरूरी होगा। घुसपैठ और तस्करी रोकना प्राथमिकता सीमावर्ती इलाका लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के लिए संवेदनशील माना जाता रहा है। खुली भारत-नेपाल सीमा का लाभ उठाकर घुसपैठ, मानव तस्करी, मादक पदार्थों की तस्करी और अन्य अवैध गतिविधियों की आशंका बनी रहती है। ऐसे में मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां किसी भी तरह की ढिलाई बरतने के पक्ष में नहीं हैं। एसएसबी के सहायक कमांडेंट प्रियरंजन चकमा ने बताया कि सीमा क्षेत्र में गश्त और निगरानी को और मजबूत किया गया है। जवानों को हर गतिविधि पर पैनी नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि अवैध घुसपैठ, तस्करी और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों को रोकने के लिए सीमा पर चौकसी बढ़ाई गई है तथा संदिग्ध व्यक्तियों की गहन जांच की जा रही है। आम लोगों से भी सहयोग की अपील सुरक्षा एजेंसियों ने सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों से भी सतर्क रहने और किसी संदिग्ध व्यक्ति या गतिविधि की जानकारी तत्काल प्रशासन अथवा सुरक्षा बलों को देने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि सीमा सुरक्षा केवल सुरक्षा बलों की ही नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों की सतर्कता से भी मजबूत होती है।