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बस्तर में निवेश के नए अवसर, 11 सितंबर को होगा बस्तर इन्वेस्टर कनेक्ट

रायपुर क्षेत्रीय विकास को नई गति देने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ शासन का वाणिज्य एवं उद्योग विभाग आगामी 11 सितंबर 2025 को बस्तर में इन्वेस्टर कनेक्ट का आयोजन करने जा रहा है। यह प्रमुख निवेश संवर्धन पहल इससे पहले दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, रायपुर तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर टोक्यो, ओसाका और सियोल में सफलतापूर्वक आयोजित की जा चुकी है। इन आयोजनों के माध्यम से नवंबर 2024 से अब तक ₹6.65 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। राज्य सरकार अब छत्तीसगढ़ इन्वेस्टर कनेक्ट के माध्यम से निवेश संभावनाओं को बस्तर तक ले जा रही है, जो प्रदेश के सबसे गतिशील और संभावनाशील क्षेत्रों में से एक है। बस्तर इन्वेस्टर कनेक्ट राज्य सरकार की छत्तीसगढ़ औद्योगिक विकास नीति 2024–30 के अंतर्गत संतुलित क्षेत्रीय विकास की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इस नीति का उद्देश्य रोजगार सृजन, उद्यमिता को बढ़ावा और स्थानीय समुदायों का सशक्तिकरण है। साथ ही यह सुनिश्चित करना है कि बस्तर की समृद्ध जनजातीय धरोहर और सांस्कृतिक पहचान का संरक्षण भी हो। छत्तीसगढ़ औद्योगिक विकास नीति 2024–30 के अंतर्गत ₹1000 करोड़ से अधिक निवेश करने वाली अथवा 1000 से अधिक रोजगार सृजित करने वाली परियोजनाओं के लिए विशेष प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है। इस नीति में औषधि निर्माण, कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण, वस्त्र उद्योग, आईटी एवं डिजिटल तकनीक, उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस व डिफेंस और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है। पर्यटन को भी उद्योग का दर्जा प्रदान किया गया है, जिसके तहत बस्तर में होटल, इको-टूरिज़्म, वेलनेस सेंटर, एडवेंचर स्पोर्ट्स और खेल सुविधाओं जैसी परियोजनाओं पर 45 प्रतिशत तक सब्सिडी उपलब्ध कराई जाएगी। उल्लेखनीय है कि बस्तर के 88 प्रतिशत ब्लॉक ग्रुप-3 श्रेणी में आते हैं, जिससे निवेशकों को अधिकतम नीति लाभ सुनिश्चित हो सकेगा। समावेशन को बढ़ावा देने के लिए इस नीति में विशेष प्रावधान किए गए हैं। इसके तहत एससी/एसटी उद्यमियों को 10 प्रतिशत अतिरिक्त सब्सिडी मिलेगी, वहीं नक्सलवाद से प्रभावित परिवारों और व्यक्तियों को भी 10 प्रतिशत अतिरिक्त सब्सिडी का लाभ दिया जाएगा। यह सरकार की सामाजिक पुनर्वास और समावेशी विकास के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। एक अभिनव पहल के रूप में, नई औद्योगिक इकाइयों में आत्मसमर्पित नक्सलियों को रोजगार देने पर पाँच वर्षों तक उनके वेतन पर 40 प्रतिशत सब्सिडी (अधिकतम ₹5 लाख प्रतिवर्ष) उपलब्ध कराई जाएगी। इसके साथ ही, बस्तर में स्टील सेक्टर की इकाइयों को 15 वर्षों तक रॉयल्टी रीइम्बर्समेंट की सुविधा प्रदान की जाएगी, जिससे निवेशकों को दीर्घकालिक भरोसा मिलेगा और औद्योगिक विकास को स्थिरता प्राप्त होगी। सरकार को उम्मीद है कि बस्तर इन्वेस्टर कनेक्ट में देश-विदेश से 200 से अधिक प्रमुख निवेशक, उद्योग जगत के दिग्गज और स्थानीय उद्यमी शामिल होंगे। यह आयोजन सहयोग और विकास का एक उच्च-स्तरीय मंच साबित होगा। इस अवसर पर कई महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर होने की भी संभावना है, जो बस्तर की विकास यात्रा में एक ऐतिहासिक पड़ाव सिद्ध होंगे। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि हमारी सरकार बस्तर के युवाओं को वह कौशल और अवसर देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है, जिसके वे अधिकारी हैं और जिनसे वे छत्तीसगढ़ की विकास गाथा के सक्रिय सहभागी बन सकेंगे। औद्योगिक नीति की प्रत्येक पहल स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाने और समृद्धि को घर-घर तक पहुँचाने के उद्देश्य से सोच-समझकर तैयार की गई है। बस्तर में छत्तीसगढ़ इन्वेस्टर कनेक्ट का आयोजन बस्तर के समग्र विकास को साकार करने की दिशा में एक अहम मील का पत्थर साबित होगा। यह बस्तर को सतत् और समावेशी विकास का प्रतीक बनाएगा, जिसकी जड़ें क्षेत्र की सामाजिक और सांस्कृतिक संरचना में गहराई से जुड़ी हैं। इसके साथ ही यह सुनिश्चित करेगा कि अवसरों और लाभों का प्रवाह सीधे स्थानीय जनता तक पहुँचे।

22 सितंबर से सस्ते होंगे प्रोडक्ट्स? GST कटौती पर दुकानदारों की प्रतिक्रिया

नई दिल्ली.  सरकार ने दिवाली से पहले देशवासियों को बड़ा तोहफा देते हुए रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले घरेलू सामानों से लेकर कार-बाइक तक पर लागू जीएसटी को घटा दिया है। जीएसटी काउंसिल की बीते 3 सितंबर को हुई बैठक में चार की जगह सिर्फ दो जीएसटी स्लैब रखे गए हैं, जो 5% और 18% के हैं। जबकि 12% और 28% को हटा दिया गया है। इसके बाद तेल, साबुन, शैंपू, दूध, मक्खन, घी से लेकर टीवी, फ्रिज, एसी समेत तमाम सामानों का स्लैब चेंज हुआ है, जिससे इनपर टैक्स घट गया है और नई दरें 22 सितंबर 2025 से लागू होने वाली हैं। ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि क्या इस तारीख से ग्राहकों को सस्ते रेट में सामान मिलने लगेगा? आजतक ने दुकानदारों की राय जानी और इसके असर को समझा।।। पुराने स्टॉक को लेकर बड़ी परेशानी मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक 3 सितंबर को जीएसटी रेट कट का ऐलान किए जाने के बाद ये जानने के लिए दुकानदारों से बात की कि क्या 22 सितंबर के बाद खुदरा दुकानदार नई लागू सस्ती दरों पर सामान को घाटा सहकर बेचेंगें और इससे दुकानदारों के बिजनेस पर क्या असर होगा? इस पर खुदरा दुकानदारों और रिटेलरों ने अपनी-अपनी राय रखी। नोएडा में किराने का दुकान चलाने वाले तेजपाल सिंह ने बताया कि रिटेलर के पास तो पुराने माल का स्टॉक भरा पड़ा है। क्योंकि हम इसे थोड़ा-थोड़ा करके बेचते हैं और जीएसटी रेट कट के बाद अभी तो पता ही नहीं रेट कितनी कमी आई है। उन्होंने कहा कि अगर समान आगे से महंगा आएगा, तो फिर हम महंगा बेचेंगे।उन्होंने कहा कि खुदरा दुकानदार 100 ग्राम से 500 ग्राम या किलो के भाव में बेंचते हैं, तो पूरी आने वाले समय में ही कीमतों के बारे में पूरी तस्वीर साफ हो पाएगी।  एक अन्य दुकानदार नरेश का जीएसटी सुधार को लेकर लिए गए फैसले पर कहना है कि सरकार का काम अच्छा है इससे हम लोगों को फायदा होगा, लेकिन आगे देखने वाली बात होगी कि यह कितना असरदार साबित होता है। हम लोग दाल, चीनी, चावल बेचते हैं, तो उनके रेट किस तरह रहेंगे, इसका पता तो नई दरें लागू होने के बाद हम तक पहुंचने वाले सामान के बाद ही सही से पता चल पाएगा। लेकिन जो माल स्टॉक में है, उस पुराने माल को तो हम लोग अभी इसी रेट पर बेचेंगे, जब पीछे से जीएसटी कम होकर आएगा, तो हम भी सस्ता कर देंगे।  सवाल- कितने तैयार हैं दुकानदार?  सरकार के जीएसटी कट के फैसले के बाद चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) ने भी बड़ा सवाल खड़ा करते हुए कहा है कि केंद्र सरकार ने करीब 400 वस्तुओं और सेवाओं पर  GST दरों में बड़ी कटौती की है, जो 22 सितंबर से लागू होने वाली हैं। इनमें फूड प्रोडक्ट्स से लेकर रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली चीजें, इलेक्ट्रॉनिक्स, कार-बाइक्स, बीमा पॉलिसी तक शामिल हैं, जो सस्ते हो जाएंगे। सीटीआई के मुताबिक, सरकार चाहती है कि इस बदलाव का सीधा फायदा आम जनता तक पहुंचे। लेकिन सवाल यह है कि आने वाले दिनों में लोगों को जीएसटी कटौती का फायदा देने के लिए व्यापारी और दुकानदार कितने तैयार हैं? इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए सीटीआई के चेयरमैन बृजेश गोयल ने कहा कि यह बड़ा सवाल इसलिए उठ रहा है, क्योंकि पहले ही पुरानी दरों वाला हजारों टन माल दुकानों और गोदामों में भरा पड़ा है। उन्होंने कहा कि ऐसे में उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वे पुराने सामान पर दाम कैसे घटाएं और ग्राहकों को इसका फायदा कैसे दे पाएं। 22 सितंबर से पहले के माल पर पुरानी दरों का ही टैग और दाम होगा, अब उसी माल को घटे हुए दाम पर बेचने के लिए कंपनियों, डिस्ट्रीब्यूटर्स और दुकानदारों को आपसी समन्वय करना होगा। इन तरीकों से हल्का होगा बोझ बृजेश गोयल ने दुकानदारों पर पड़ने वाले बोझ को हल्का करने के कुछ तरीके भी शेयर किए। उन्होंने कहा प्राइस एडजस्टमेंट से पुराने स्टॉक को लेकर पैदा हुई समस्या कम हो सकती है। इसके लिए कंपनियां पुरानी दरों वाले सामान के लिए डीलरों को क्रेडिट नोट देंगी। उदाहरण के तौर पर अगर किसी डीलर ने साबुन का एक कार्टून पुरानी GST की दरों के हिसाब से खरीदा है और अब उसकी कीमत घट गई है, तो फिर कंपनी उसे बराबर का क्रेडिट देगी, इससे डीलर नुकसान में नहीं रहेगा और ग्राहकों को सामान भी सस्ता मिलेगा। सीटीआई चेयरमैन के मुताबिक, रिटेल सेक्टर की दिग्गज कंपनियां रिलायंस, डीमार्ट के पास मजबूत तकनीकी सिस्टम है, वे अपने बिलिंग सॉफ्टवेयर और पीओएल मशीनों को तुरंत अपडेट भी कर सकते हैं, लेकिन दूसरी ओर छोटे दुकानदारों और मोहल्लों के दुकान चलाने वाले किराना व्यापारियों को यह बदलाव करने में थोड़ी दिक्कत पेश आ सकती है, क्योंकि उनके पास उस तरह का तकनीक उपलब्ध नहीं है। बृजेश गोयल के मुताबिक, कंपनियों को साबुन, शैंपू, टूथपेस्ट, बिस्कुट जैसे उत्पादों पर नई MRP वाले स्टीकर लगाने पड़ेंगे या फिर हो सकता है कुछ कंपनियां कीमत घटाने की जगह उस सामान के पैकिंग का वजन बढ़ा दें, जैसे 10 रुपये वाले बिस्किट के पैकेट में ज्यादा बिस्किट मिलने लगें, लेकिन प्राइस पुराना ही रहे।  दुकानदारों के लिए बड़ी चुनौती CTI चेयरमैन बृजेश गोयल की मानें, तो कुल मिलाकर सरकार द्वारा तय की गई नई दरें 22 सितंबर से ही लागू होंगी और आम उपभोक्ताओं को GST कटौती का लाभ पहुंचाना छोटे व्यापारियों और दुकानदारों के लिए बड़ी चुनौती साबित होने वाली है, क्योंकि पुरानी जीएसटी दरों का सामान नई दरों के हिसाब से बेचना दुकानदारों के लिए घाटे का सौदा भी साबित हो सकता है।

कमेंट्री बॉक्स में सितारों की एंट्री, Asia Cup 2025 में सहवाग-इरफान समेत कई दिग्गज

नई दिल्ली एशिया कप 2025 में सिर्फ मैदान पर ही नहीं, बल्कि कमेंट्री बॉक्स में भी दिग्गजों की जंग देखने को मिलेगी. यूएई में मंगलवार से शुरू हो रहे एशिया कप टी20 में सोनी स्पोर्ट्स नेटवर्क के बहुभाषी कमेंट्री पैनल में भारत के क्रिकेट दिग्गज सुनील गावस्कर, रवि शास्त्री और वीरेंद्र सहवाग शामिल होंगे. पूर्व गेंदबाजी कोच भरत अरुण भी तमिल पैनल का हिस्सा बनेंगे, जिससे प्रशंसकों को हर भाषा में बेहतरीन विश्लेषण मिलेगा. 17वां एशिया कप: महाद्वीपीय क्रिकेट का महासंग्राम इस टूर्नामेंट में भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश, अफगानिस्तान, यूएई, ओमान और हॉन्ग कॉन्ग अगले साल होने वाले आईसीसी टी20 विश्व कप से पहले महाद्वीपीय वर्चस्व के लिए भिड़ेंगे. भारत अपना अभियान बुधवार को यूएई के खिलाफ शुरू करेगा। विश्व फीड के लिए चुने गए कमेंटेटर विश्व फीड कमेंटेटरों में भारत के पूर्व मुख्य कोच रवि शास्त्री, सुनील गावस्कर, संजय मांजरेकर, रॉबिन उथप्पा, बाजिद खान, वकार यूनिस, वसीम अकरम, रसेल अर्नोल्ड और साइमन डूल शामिल हैं.  हिंदी कमेंट्री पैनल के सितारे हिंदी पैनल में वीरेंद्र सहवाग, इरफान पठान, अजय जडेजा, पूर्व बल्लेबाजी कोच अभिषेक नायर और सबा करीम मुख्य नाम हैं. उनका अनुभव और विशेषज्ञता प्रशंसकों के लिए हर मैच को और रोमांचक बना देगी. तमिल और तेलुगु कमेंट्री पैनल भरत अरुण तमिल पैनल में डब्ल्यूवी रमन जैसे पूर्व खिलाड़ियों के साथ जुड़ेंगे. तेलुगु पैनल में वेंकटपति राजू और वेणुगोपाल राव जैसी हस्तियां शामिल हैं. सुनील गावस्कर ने कहा, ‘सूर्यकुमार यादव के नेतृत्व में टीम इंडिया एशिया कप में कदम रख रही है. यह टीम अनुभव और युवा प्रतिभा का बेहतरीन मिश्रण है और भारतीय क्रिकेट के भविष्य का प्रतीक है.' रवि शास्त्री ने कहा, ‘सूर्यकुमार यादव की कप्तानी और शुभमन गिल की उप-कप्तानी टीम में अनुभव और युवा का आदर्श संतुलन पेश करती है. जसप्रीत बुमराह, अभिषेक शर्मा और हार्दिक पंड्या लगातार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन कर रहे हैं, जबकि तिलक वर्मा और हर्षित राणा जैसी युवा प्रतिभाएं टीम में जोश और विकल्प जोड़ती हैं.’ एशिया कप के लिए भारत की टीम सूर्यकुमार यादव (कप्तान), शुभमन गिल (उपकप्तान), अभिषेक शर्मा, तिलक वर्मा, हार्दिक पंड्या, शिवम दुबे, अक्षर पटेल, जितेश शर्मा (विकेटकीपर), जसप्रीत बुमराह, अर्शदीप सिंह, वरुण चक्रवर्ती, कुलदीप यादव, संजू सैमसन (विकेटकीपर), हर्षित राणा, रिंकू सिंह.

चुनाव आयोग को सुप्रीम कोर्ट की हिदायत, SIR डॉक्यूमेंट्स में आधार को किया शामिल

पटना  बिहार में चुनाव आयोग की ओर से चल रहे SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण में अब आधार को भी मान्यता रहेगी। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने इस संबंध में आदेश दिया और चुनाव आयोग से कहा कि 11 अन्य दस्तावेजों की तरह आधार को भी मान्यता दी जाए। जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने कहा कि चुनाव आयोग किसी की ओर से दिए गए आधार की वैधता की जांच कर सकता है। इस तरह अब वोटर लिस्ट में शामिल करने के लिए आधार को भी मान्यता मिल गई है, जिसकी डिमांड लंबे समय से की जा रही थी। बेंच ने स्पष्ट किया कि आधार कार्ड को SIR के लिए वैध दस्तावेज के तौर पर स्वीकार किया जाए। अदालत ने स्पष्ट किया कि SIR के लिए आधार कार्ड को पहचान और पते के प्रमाण के तौर पर स्वीकार किया जाए। अदालत ने कहा कि चुनाव आयोग के पास यह अधिकार रहेगा कि वह आधार कार्ड की प्रमाणिकता के बारे में जांच कर ले। इस तरह आधार कार्ड को जन्म प्रमाण पत्र, पासपोर्ट, राशन कार्ड समेत अन्य 11 दस्तावेजों की तरह ही मान्यता मिलेगी। बेंच ने चुनाव आयोग से कहा है कि वह आज ही आधार कार्ड को लेकर नोटिफिकेशन जारी कर दे ताकि स्पष्ट संदेश दिया जा सके। बेंच ने यह भी कहा कि आधार कार्ड सिर्फ पहचान का ही प्रमाण है। सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग का पक्ष रख रहे वकील ने यह भी कहा कि SIR के दौरान ऐसे लोग भी पाए गए हैं, जो यहां के वोटर बने हुए थे। लेकिन वास्तव में वे घुसपैठिए हैं और अवैध तौर पर भारत में प्रवेश कर के आए हैं। इस पर जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि यह एक समस्या है। इसी को लेकर उन्होंने कहा कि आधार कार्ड का वेरिफिकेशन चुनाव आयोग की ओर से किया जा सकता है। बता दें कि यही वजह है कि चुनाव आयोग कहता रहा है कि आधार कार्ड को पता या फिर नागरिकता का आधार नहीं माना जा सकता। गौरतलब है कि चुनाव आयोग का कहना है कि SIR की प्रक्रिया में वोटर्स को पूरा वक्त दिया जाएगा और नामांकन से एक दिन पहले तक यह जारी रहेगा।

अलवर में बम धमकी का अलर्ट, मिनी सचिवालय को उड़ाने की दी गई चेतावनी

अलवर अलवर शहर के मिनी सचिवालय को एक बार फिर बम से उड़ाने की धमकी मिली है। यह धमकी भरा मेल इस बार तमिलनाडु से भेजा गया है। मेल में साफ लिखा गया है कि दोपहर तक मिनी सचिवालय को खाली कर दिया जाए, वरना गंभीर नतीजे भुगतने होंगे। धमकी मिलते ही प्रशासन और पुलिस विभाग पूरी तरह अलर्ट हो गए और सुरक्षा व्यवस्था को तत्काल कड़ा कर दिया गया।   सचिवालय परिसर में मचा हड़कंप धमकी की सूचना मिलते ही सचिवालय परिसर में अफरातफरी मच गई। आनन-फानन में कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकालने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। परिसर में प्रवेश करने वाले हर व्यक्ति की गहन जांच की जा रही है। साथ ही आसपास के इलाके को भी सुरक्षा घेरे में ले लिया गया है।   बम निरोधक दस्ते और पुलिस ने संभाला मोर्चा धमकी को गंभीरता से लेते हुए बम निरोधक दस्ते को मौके पर बुलाया गया। पुलिस की टीमें तलाशी अभियान चला रही हैं और हर कोने की बारीकी से जांच कर रही हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसी भी स्थिति में लापरवाही नहीं बरती जाएगी।   पहले भी मिल चुकी हैं धमकियां गौरतलब है कि यह तीसरी बार है जब अलवर मिनी सचिवालय को बम से उड़ाने की धमकी मिली है। इससे पहले भी दो बार इसी तरह के मेल आ चुके हैं, जिनके चलते सचिवालय को खाली कराना पड़ा था। लगातार मिल रही धमकियों ने प्रशासन की चिंता और बढ़ा दी है। साइबर सेल कर रही जांच पुलिस की साइबर सेल इस मेल की जांच में जुट गई है। मेल भेजने वाले का लोकेशन तमिलनाडु से जुड़ा पाया गया है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि धमकी वास्तविक है या फिर अफवाह फैलाने की साजिश। अधिकारी मान रहे हैं कि इस तरह की बार-बार की धमकियां किसी बड़ी योजना का हिस्सा भी हो सकती हैं।   दहशत में शहरवासी, प्रशासन की अपील लगातार धमकियों ने शहरवासियों में दहशत का माहौल बना दिया है। लोग सचिवालय और आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और सुरक्षा एजेंसियों के साथ सहयोग करें। एडीएम सिटी बीना महावर ने बताया कि जैसे ही धमकी भरे मेल की सूचना मिली, तुरंत सुरक्षा बलों को सक्रिय किया गया और सचिवालय को खाली कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रशासन पूरी तरह सतर्क है और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार है।

CM नीतीश का तोहफा: बिहार में महिलाओं के लिए 80 पिंक बस सेवा की शुरुआत

पटना,  बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य की महिलाओं को एक बड़ा तोहफा दिया है। उन्होंने महिलाओं के लिए विशेष रूप से चलाई जाने वाली 80 पिंक बसों को हरी झंडी दिखाई। इन बसों में ड्राइवर और कंडक्टर भी महिलाएं होंगी, जिससे महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। यह कार्यक्रम सोमवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सरकारी आवास पर आयोजित किया गया, जहां उन्होंने 1,065 बसों में ई-टिकट सुविधा का भी उद्घाटन किया। इस पहल से बिहार के विभिन्न जिलों में महिलाओं के लिए यात्रा को सुरक्षित और सुगम बनाने का प्रयास किया गया है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ”आज बिहार राज्य पथ परिवहन निगम की 1,065 बसों में ई-टिकटिंग सुविधा लागू करने का शुभारंभ किया तथा द्वितीय चरण में नई 80 पिंक बसों का लोकार्पण भी किया। इन बसों में केवल महिलाएं ही यात्रा कर सकती हैं। इन पिंक बसों के परिचालन से महिलाओं का सफर ज्यादा सुरक्षित और आरामदायक होगा और उन्हें आवागमन में काफी सहूलियत होगी। साथ ही ई-टिकटिंग की व्यवस्था से राज्य के लोगों को विभिन्न जगहों पर यात्रा करने में सुगमता होगी।” बिहार में विशेष तौर पर महिलाओं के लिए पिंक बस चलाई जा रही है। इस बस में सभी तरह की सुविधाएं रहती हैं। बस में कंडक्टर के साथ-साथ कोशिश यह होती है कि इस बस का ड्राइवर भी महिला ही रहे, जिससे सुरक्षा बनी रहे। पिंक बस की कंडक्टर सविता कुमारी ने कहा, “यह सरकार की अच्छी पहल है, इससे महिलाओं को काफी फायदा मिलेगा। बस में महिलाओं के लिए सुरक्षा का विशेष प्रबंध किया गया है। बस में मेडिकल सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा गया है।” कंडक्टर पिंकी कुमारी ने बताया कि महिलाओं की सुरक्षा को देखते हुए बस में तीन कैमरे लगाए गए हैं। दूरदराज जाने वाली महिलाओं के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। अगर बस में गर्भवती महिला सफर करती है तो उनके लिए अलग से सीट है, साथ ही कंडक्टर भी उनका विशेष ध्यान देंगी। उन्होंने आगे बताया कि महिलाओं से सफर के दौरान फीडबैक भी लिया जाएगा, जिससे सुविधाओं में सुधार लाने में मदद मिलेगी। सभी बसें राज्य के विभिन्न जिलों में चलेंगी, जिन्हें कंट्रोल रूम से मॉनिटर किया जाएगा।  

साय कैबिनेट की पहली बैठक से पहले सियासी घमासान, PCC चीफ बोले- मीटिंग में बस खाते हैं चाय-बिस्किट

रायपुर पीसीसी चीफ दीपक बैज ने आगामी कैबिनेट मीटिंग समेत कई मुद्दों पर सरकार पर निशाना साधा है. बैज ने कहा कि सरकार 2 सालों से सो रही है. अब तक कोई निर्णय नहीं हुआ. किसानों के लिए DAP-यूरिया तो मिला नहीं, युवाओं के लिए रोजगार भी नहीं मिला. कर्मचारी सड़कों पर हैं. स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह बदहाल है. क्या इन सब विषय पर बात होगी.? बैज ने कहा कि ये सब कैबिनेट मीटिंग में बैठकर केवल चाय और बिस्किट खाते हैं. कांग्रेस कल बिलासपुर में “वोट चोर गद्दी छोड़” कार्यक्रम आयोजित करने जा रही है. पीसीसी चीफ दीपक बैज इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए बिलासपुर दौरे पर रहेंगे. कार्यक्रम की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम में कांग्रेस प्रदेश प्रभारी सचिन पायलट समेत तीनों सह प्रभारी भी शामिल होंगे. उन्होंने कहा कि पूरे देश में भारतीय लोकतंत्र को बचाने के लिए कांग्रेस लड़ाई लड़ रही है. बीते दिन एक वीडियो सामने आया जिसमें मंत्री केदार कश्यप के बंगले के एक कर्मचारी ने मंत्री पर मारपीट करने का आरोप लगाया और न्याय की मांग की. वीडियो वायरल होते ही प्रदेश की सियासत गर्म हो गई. इस मामले को लेकर आज कांग्रेस मंत्री केदार कश्यप के बंगले का घेराव करने जा रही है. मंत्री को कर्मचारी से माफी मांगनी चाहिए : PCC चीफ इस मामले को लेकर पीसीसी चीफ ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री इसे कांग्रेस का षडयंत्र बता रहे हैं. लेकिन क्या कांग्रेस ने मां की गाली देने बोला था ? मंत्री को कर्मचारी से माफी मांगनी चाहिए. यहां 2 कानून है : पीसीसी चीफ उन्होंने आगे कहा कि सरकार मंत्री के ऊपर कार्यवाही नही करेगी. इसलिए माफी मांग लेना चाहिए. घटना के एक घण्टे पहले और बाद का सीसीटीवी वीडियो जारी करना चाहिए. क्या मुख्यमंत्री उस कर्मचारी से बात की ? दोनों पक्षों को सुनना चाहिए. किसी भी छोटे कर्मचारियों की इतनी हिम्मत नही होती कि ऐसी हरकत करे, यहां दो कानून हैं- बड़े अधिकारी के लिए कुछ और गरीब के लिए कुछ और है. धर्मांतरण सरकार की प्री प्लानिंग : पीसीसी चीफ प्रदेश में धर्मांतरण के बढ़ते मामलों को लेकर PCC चीफ बैज ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि यह सरकार की बड़ी विफलता है. पहले कांग्रेस के ऊपर आरोप लगा रही थी. आज बीजेपी की सरकार में कितनी घटनाएं घट रही.?  मुद्दों का ध्रुवीकरण और राजनीति कर रही सरकार. धर्मांतरण सरकार की प्री प्लानिंग थी.

संचालन के लिए हो रही है विशेष पहल : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

माता-पिता, गुरुजनों के योगदान के प्रति हमेशा रहें कृतज्ञ : राज्यपाल पटेल दीक्षांत, शैक्षणिक यात्रा की पूर्णता के साथ, समाज और राष्ट्र की सेवा यात्रा का शुभारंभ अवसर विश्वविद्यालयों में कृषि संकाय, फैशन डिजाइनिंग जैसे रोजगारपरक कोर्स संचालन के लिए हो रही है विशेष पहल : मुख्यमंत्री डॉ. यादव दीक्षांत समारोह सिर्फ डिग्री प्राप्त करने का उत्सव नहीं, विद्यार्थियों की मेहनत, अनुशासन और गुरुजनों के मार्गदर्शन का है प्रतिफल राज्यपाल पटेल एवं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विद्यार्थियों को उपाधि और स्वर्ण पदक प्रदान किए राज्यपाल पटेल ने बरकतउल्ला विश्वविद्यालय को ग्लोबल वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग में प्रदेश के एकमात्र विश्वविद्यालय के रूप में स्थान प्राप्त करने पर दी बधाई राज्यपाल पटेल एवं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्वलित कर दीक्षांत समारोह का किया शुभारंभ बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के 78 हजार विद्यार्थियों को मिली पीएचडी, स्नातकोत्तर सहित अन्य उपाधि कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में हुआ बरकतउल्ला विश्वविद्यालय दीक्षांत समारोह भोपाल राज्यपाल एवं कुलाधिपति मंगुभाई पटेल ने कहा कि विद्यार्थी अपने माता-पिता और गुरूजनों के योगदान के प्रति हमेशा कृतज्ञ रहें। सफलता के बाद भी उनका हमेशा सम्मान करें। दीक्षांत शपथ का प्रतिदिन मनन करें और जीवन भर उसका अनुसरण भी करें। राज्यपाल पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नए, डिजिटल और "विकसित भारत" के सपने को साकार करने में विश्वविद्यालयों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। दीक्षांत, वह अवसर है जब शैक्षणिक यात्रा की पूर्णता के साथ, समाज और राष्ट्र की सेवा यात्रा का शुभारंभ होता है। यह केवल डिग्री प्राप्त करने का उत्सव नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के वर्षों की मेहनत, अनुशासन और गुरुजनों के सफल मार्गदर्शन का प्रतिफल है। राज्यपाल पटेल सोमवार को बरकतउल्ला विश्वविद्यालय, भोपाल के दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। राज्यपाल मंगुभाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में दीप प्रज्ज्वलन और मां सरस्वती की प्रतिमा पर पुष्प अर्पण कर समारोह का शुभारंभ किया। विश्वविद्यालयीन स्मारिका और पुस्तक का लोकार्पण भी किया। राज्यपाल व कुलाधिपति पटेल तथा मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अगुवाई में बरकतउल्ला विश्वविद्यालय की शोभा यात्रा ने मंत्रोच्चार के बीच सभागार में प्रवेश किया। राज्यपाल पटेल का विश्वविद्यालय के कुलगुरु सुरेश कुमार जैन ने पौधा, अंग वस्त्र और स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया। कुलगुरु जैन ने दीक्षित विद्यार्थियों को दीक्षांत उपदेश दिया और दीक्षांत शपथ दिलाई। डिग्री और स्वर्ण पदक प्राप्त कर खिले विद्यार्थियों के चेहरे राज्यपाल पटेल ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के माध्यम से युवाओं के लिए उनके कौशल, रुचि और क्षमता के अनुसार शिक्षा के प्रत्येक स्तर पर अनेक अवसर विद्यमान है। आज देश में कृषि, खाद्य, फिजिकल एजुकेशन, साइबर सिक्योरिटी, फोरेंसिक साइंस, ड्रोन तकनीक और विधि आदि विषयों में कैरियर की संभावनाएं तेजी से बढ़ी है। राज्यपाल पटेल ने युवाओं से अपने ज्ञान और कौशल से समाज और राष्ट्र उत्थान के लिए आगे आने का आह्वान किया है। राज्यपाल पटेल ने समारोह में विद्यार्थियों को डिग्री और स्वर्ण पदक प्रदान किए। दीक्षित विद्यार्थियों और स्वर्ण पदक प्राप्तकर्ताओं को बधाई दी। उन्होंने विश्वविद्यालय को शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के बेहतर प्रयासों के लिए नैक से "ए" ग्रेड प्राप्त करने और ग्लोबल वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिग में प्रदेश के एक मात्र विश्वविद्यालय के रूप में स्थान बनाने के लिए शुभकामनाएं दी। दीक्षांत समारोह अब भारतीय परंपरा के अनुरूप आयोजित किए जा रहे हैं : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में भारतीय अपनी क्षमता से विश्व में पहचान बना रहे हैं। अतीत की गलतियों को सुधारते हुए दीक्षांत समारोह अब भारतीय परंपरा के अनुरूप आयोजित किए जा रहे हैं। प्रदेश में सबसे पहले वर्ष 2020 में शिक्षा नीति लागू की गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सभी भाषाओं के अध्ययन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सभी राज्यों में बोली जाने वाली भाषाएं हमारी राष्ट्रभाषा हैं। मध्यप्रदेश सरकार ने राष्ट्रभाषा हिंदी में मेडिकल की पढ़ाई कराने की पहल की है, जिसे काफी सराहना मिल रही है। शिक्षा को केवल नौकरियों से न जोड़ा जाए, यह समाज में ज्ञान के सतत प्रसार का माध्यम है। राज्य में कुलपति को कुलगुरु की नई संज्ञा मिली है, जिसे जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय दिल्ली ने भी अपनाया है। प्रदेश के विश्वविद्यालयों में नवाचारों के साथ कृषि संकाय और फैशन डिजाइनिंग जैसे रोजगारपरक पाठ्यक्रम की पढ़ाई कराई जा रही है। नए मेडिकल कॉलेज और अस्पतालों में विश्वविद्यालयों की बड़ी भूमिका मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के माध्यम से आज 54 हजार से अधिक विद्यार्थियों को स्नातक, 23 हजार विद्यार्थियों को स्नातकोत्तर, 190 विद्यार्थियों को पीएचडी, 21 विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल, इस प्रकार कुल 78 हजार विद्यार्थियों के सपने साकार हो रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी विद्यार्थियों एवं प्राध्यापकों को बधाई दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में प्राइवेट कॉलेज और शासकीय विश्वविद्यालयों को मेडिकल कॉलेज और अस्पताल खोलने के लिए सरकार पूर्ण सहयोग प्रदान कर रही है। देवी अहिल्याबाई विश्वविद्यालय इंदौर के सहयोग से जनजातीय बहुल झाबुआ जिले में मेडिकल कॉलेज खुलने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देश में सुशासन की नई बयार आई है। देश के युवा, किसान, गरीब सभी वर्गों के कल्याण के साथ सरकार आगे बढ़ रही है। प्रधानमंत्री मोदी देश के स्वाभिमान और समाज के सभी वर्गों के हितरक्षक हैं। 21वीं सदी भारत की होगी और भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगा। प्रदेश के विश्वविद्यालयों में डिजिटल वैल्यूएशन होगा शुरू : मंत्री परमार तकनीकी एवं उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि आज विद्यार्थियों ने ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। हमें जीवनभर समाज और परिवार का ऋण उतारने के लिए कार्य करना चाहिए। देश में भारतीय परंपरा के अनुसार दीक्षांत समारोह आयोजित किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के उच्च शिक्षा मंत्री रहते हुए सबसे पहले प्रदेश में शिक्षा नीति लागू की गई। राज्य सरकार सभी विश्वविद्यालयों में डिजिटल मूल्यांकन शुरू करेगी। विद्यार्थियों को ऑनलाइन कॉपी उपलब्ध कराएंगे। शिक्षा नीति के क्रियान्वयन के साथ प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों में 1 या 2 भाषाओं की पढ़ाई शुरू करेंगे। मध्यप्रदेश हृदय प्रदेश है। यहां भाषाओं को जोड़ने का कार्य शुरू होगा। विद्यार्थी अपनी ऊर्जा राष्ट्र और समाज के कल्याण में लगाएं कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार जैन ने विद्यार्थियों को शपथ दिलाते … Read more

SC ने सुनाया बड़ा आदेश, दुर्घटना के शिकार बच्चों और दिव्यांगों को मिले कुशल श्रमिक के बराबर मुआवजे

इंदौर सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश के एक दुर्घटना क्लेम मामले में सुनवाई करते हुए एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा है कि दुर्घटना में बच्चे की मृत्यु या उसके स्थायी रूप से दिव्यांग होने पर क्षतिपूर्ति की गणना उसे कुशल श्रमिक मानते हुए की जाएगी। राज्य में दुर्घटना के समय कुशल श्रमिक का जो न्यूनतम वेतन होगा, उसे ही बच्चे की आय माना जाएगा। दावेदार व्यक्ति को न्यायाधिकरण के समक्ष न्यूनतम वेतन के संबंध में दस्तावेज पेश करने होंगे।  सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश के एक दुर्घटना क्लेम मामले में सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है, जिसका असर देशभर में होगा। सर्वोच्च अदालत ने कहा है कि दुर्घटना में बच्चे की मृत्यु या स्थायी रूप से दिव्यांग होने पर क्षतिपूर्ति की गणना अब बच्चे को कुशल श्रमिक मानते हुए की जाएगी। राज्य में दुर्घटना के समय कुशल श्रमिक का जो न्यूनतम वेतन होगा, उसे ही बच्चे की आय माना जाएगा। दावेदार व्यक्ति को न्यायाधिकरण के समक्ष न्यूनतम वेतन के संबंध में दस्तावेज पेश करने होंगे, अगर वह ऐसा नहीं कर पाता है तो इन दस्तावेजों को पेश करने की जिम्मेदारी बीमा कंपनी की होगी। फैसले की प्रति सभी मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरणों को भेजी जाए, ताकि निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित हो सके। बता दें, अब तक दुर्घटना में बच्चे की मृत्यु या स्थायी दिव्यांग होने की स्थिति में क्षतिपूर्ति की गणना नोशन इंकम (काल्पनिक आय, वर्तमान में 30 हजार रुपये प्रतिवर्ष) के हिसाब से की जाती है, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। अब राज्य में कुशल श्रमिक के न्यूनतम वेतन के हिसाब से क्षतिपूर्ति मिलेगी। वर्तमान में मप्र में कुशल श्रमिक का न्यूनतम वेतन 14,844 मासिक, यानी 495 रुपये प्रतिदिन निर्धारित है। साल 2012 में हुई थी दुर्घटना, ऐसे सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला 14 अक्टूबर 2012 को इंदौर निवासी आठ वर्षीय हितेश पटेल पिता के साथ सड़क पर खड़ा था, तभी गुजर रहे वाहन ने टक्कर मार दी। दुर्घटना में हितेश को गंभीर चोट आई। यह कहते हुए कि उसे स्थायी दिव्यांगता आई है, मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (जिला न्यायालय) के समक्ष दस लाख रुपये का क्षतिपूर्ति दावा प्रस्तुत किया गया। जिला न्यायालय ने यह मानते हुए कि हितेश को 30 प्रतिशत दिव्यांगता आई है, उसे तीन लाख 90 हजार रुपये क्षतिपूर्ति देने के आदेश बीमा कंपनी को दिए। इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई। हाई कोर्ट ने यह मानते हुए कि चूंकि हितेश की आयु सिर्फ आठ वर्ष है, क्षतिपूर्ति की राशि को बढ़ाकर आठ लाख 65 हजार रुपये कर दिया। इस फैसले से असंतुष्ट होकर सुप्रीम कोर्ट में अपील हुई। इसे स्वीकारते हुए कोर्ट ने क्षतिपूर्ति की राशि 35 लाख 90 हजार रुपये कर दी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश में क्या? बता दें कि अब तक दुर्घटना में बच्चे की मृत्यु या उसके स्थायी दिव्यांग होने की स्थिति में क्षतिपूर्ति की गणना नोशन इनकम (काल्पनिक आय, वर्तमान में 30 हजार रुपये प्रतिवर्ष) के हिसाब से की जाती है। अब राज्य में कुशल श्रमिक के न्यूनतम वेतन के हिसाब से क्षतिपूर्ति मिलेगी। वर्तमान में मध्य प्रदेश में कुशल श्रमिक का न्यूनतम वेतन 14844 मासिक यानी 495 रुपये प्रतिदिन निर्धारित है।     कुशल श्रमिक के न्यूनतम वेतन को ही मानें बच्चे की आय     कोर्ट ने फैसले की प्रति सभी मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरणों को भेजने का दिया निर्देश ऐसे सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला? 14 अक्टूबर 2012 को इंदौर निवासी आठ वर्षीय हितेश पटेल पिता के साथ सड़क पर खड़ा था, तभी एक वाहन ने उसे टक्कर मार दी। हितेश को गंभीर चोट आई। यह कहते हुए कि उसे स्थायी दिव्यांगता आई है, मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण के समक्ष 10 लाख रुपये का क्षतिपूर्ति दावा प्रस्तुत किया गया। न्यायालय ने यह मानते हुए कि हितेश को 30 प्रतिशत दिव्यांगता आई है, उसे तीन लाख 90 हजार रुपये क्षतिपूर्ति देने का आदेश बीमा कंपनी को दिया। इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई। हाई कोर्ट ने यह मानते हुए कि चूंकि हितेश की आयु सिर्फ आठ वर्ष है, क्षतिपूर्ति की राशि को बढ़ाकर आठ लाख 65 हजार रुपये कर दिया। ऐतिहासिक फैसला, देशभर में लागू होगा     सुप्रीम कोर्ट का फैसला ऐतिहासिक है। पहली बार बच्चों की मृत्यु या स्थायी दिव्यांग होने पर उन्हें कुशल श्रमिक मानते हुए कुशल श्रमिक के न्यूनतम वेतन के हिसाब से क्षतिपूर्ति के लिए हकदार माना है। फैसले का असर पूरे देश में चल रहे क्लेम प्रकरणों पर पड़ेगा। -राजेश खंडेलवाल, दुर्घटना क्लेम प्रकरण के वकील  

बॉलीवुड एक्ट्रेस पर मेलबर्न में भारी जुर्माना, 1.25 लाख रुपए चुकाने पड़े

मेलबर्न भारत के कई हिस्सों में शादी या किसी भी त्योहार में महिलाएं बालों में गजरा लगाती हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि फूलों से बना ये गजरा लगाने पर आपको 1.25 लाख रूपए का भारी जुर्माना भरना पड़ सकता है. जी हां, हाल ही में मलयालम एक्ट्रेस नव्या नायर ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में मलयाली समुदाय द्वारा आयोजित ओणम समारोह में हिस्सा लेने के लिए गई थीं, लेकिन वहां पहुंचते ही उनके साथ ऐसी घटना हुई, जिसकी उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी. गजरे के कारण एक्ट्रेस ने चुकाई मोटी रकम बता दें कि मेलबर्न अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर मलयालम एक्ट्रेस नव्या नायर को उनके हैंडबैग में रखे गए चमेली के फूलों की वजह से रोक लिया गया. 15 सेंटीमीटर लंबी एक छोटी सी चमेली की माला ले जाने के कारण एक्ट्रेस को 1980 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (लगभग ₹1.25 लाख) का भारी जुर्माना भरना पड़ा है. ओणम समारोह के मंच से खुद एक्ट्रेस ने इस घटना का खुलासा किया है. मंच पर एक्ट्रेस ने बताया कि यह माला उनके पिता ने उनके लिए कोच्चि एयरपोर्ट से खरीदी थी. एक्ट्रेस नव्या नायर ने माला को दो टुकड़ों में बांट दिया था. जिसका एक टुकड़ा कोच्चि से सिंगापुर की फ्लाइट में पहन लिया, लेकिन सिंगापुर पहुंचते-पहुंचते वह मुरझा गया था. माला का दूसरा टुकड़ा एक्ट्रेस ने एक प्लास्टिक कैरी बैग में रखकर अपने हैंडबैग में रख लिया, ताकि वह सिंगापुर एयरपोर्ट पर फिर से पहन सकें. लेकिन नव्या नायर को मालूम नहीं था कि फूलों को इस तरह ऑस्ट्रेलिया ले जाना कानून के खिलाफ है. मेलबर्न अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर अधिकारियों ने जब उनके बैग की तलाशी ली तो चमेली के फूल देखकर उन्हें रोक लिया और तुरंत जुर्माना लगाया दिया. नव्या ने ओणम समारोह के मंच से अपनी बात रखते हुए कहा, ‘मुझे पता है कि मुझसे गलती हुई, लेकिन यह जानबूझकर नहीं किया गया था. मैं बस अपने पिता के कहने पर वह माला ले जा रही थी. उन्होंने मुझे 28 दिनों के अंदर जुर्माना भरने को कहा है.’ बता दें कि ऑस्ट्रेलिया का बायो-सिक्योरिटी कानून इस मामले में बेहद सख्त है. ऑस्ट्रेलियाई सीमा बल की वेबसाइट के मुताबिक, ‘पौधे, फूल और बीज’ जैसे जैविक पदार्थ बिना सरकारी परमिट के देश में लाना मना है. ऐसा इसलिए क्योंकि ये पदार्थ कीटों, बीमारियों और जैविक असंतुलन का कारण बन सकते हैं. खासतौर पर उन फूलों और बीजों पर मिट्टी, पत्ते, फलियां या तनों के अवशेष पाए जाने पर इन्हें खतरे की श्रेणी में रखा जाता है.