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शेयर बाजार की जोरदार शुरुआत, GST कट और ट्रंप के सुर बदलने से निवेशकों में उत्साह

मुंबई  मोदी सरकार के जीएसटी रेट कट के ऐलान का अभी भी असर शेयर बाजार पर दिख रहा है. सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाले सेंसेक्स इंडेक्स ने खुलने के साथ ही 200 अंकों की छलांग लगा दी, तो वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी अपने पिछले बंद के मुकाबले तेजी के साथ ग्रीन जोन में ओपन हुआ. शुरुआती कारोबार में टाटा स्टील, टाटा मोटर्स के साथ ही महिंद्रा एंड महिंद्रा, इंफोसिस, बीईएल जैसे बड़े शेयर तेज रफ्तार के साथ भागते हुए नजर आए. जीएसटी कट के असर के साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत को लेकर बदले रुख का प्रभाव भी बाजार पर साफ देखने को मिला है.  ग्रीन जोन में खुले दोनों इंडेक्स शेयर बाजार की तेज शुरुआत के बीच सेंसेक्स अपने पिछले बंद 80,710.76 के मुकाबले चढ़कर 80.904.40 के लेवल पर ओपन हुआ और फिर मिनटों में ही ये 81,000 के लेवल के पार निकल गया. बीएसई इंडेक्स की तरह ही निफ्टी की भी चाल नजर आई और ये एनएसई इंडेक्स अपने पिछले कारोबारी बंद 24,741 की तुलना में चढ़कर 24,802.60 पर खुलने के बाद 24,831.35 तक उछला.  ये 10 शेयर ओपन होते ही भागे मार्केट में कारोबार शुरू होने के साथ ही जिन शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी देखने को मिली, उनमें टॉप-10 स्टॉक्स की बात करें, तो लार्जकैप में टाटा स्टील शेयर (2.50%), टाटा मोटर्स शेयर (2.35%), महिंद्रा एंड महिंद्रा शेयर (1.95%) और अडानी पोर्ट्स शेयर (1.10%) की तेजी के साथ कारोबार कर रहे थे. मिडकैप कैटेगरी में शामिल फर्स्टक्राई शेयर (3.90%), मान्यवर शेयर (3%), भारतफोर्ज शेयर (2.95%) और ओलेक्ट्रा शेयर (2.90%) की तेजी लेकर ट्रेड कर रहे थे. स्मॉलकैप कंपनियों में प्राइम फोकस शेयर (10%) और म्यूफिन शेयर (8.10%) चढ़कर कारोबार कर रहा था.  बीते सप्ताह ऐसी थी बाजार की चल  बीता सप्ताह शेयर बाजार के लिए शानदार रहा था. हालांकि दोनों इंडेक्स आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को मामूली घट-बढ़ के साथ बंद हुए थे. सेंसेक्स महज 7.25 अंक गिरकर लेकर 80,710.76 पर, जबकि निफ्टी सिर्फ 6.70 अंक की बढ़त लेकर 24,741 पर क्लोज हुआ था. लेकिन, पूरे सप्ताह की चाल देखें, तो बीएसई का सेंसेक्स 901.11 अंक या 1.12% की बढ़त में रहा, वहीं एनएसई का निफ्टी में 314.15 अंक या 1.28% का उछाल दर्ज किया गया था. बाजार में रौनक के चलते निवेशकों ने भी खूब कमाई की थी.  मिल रहे थे तेजी के संकेत  भारत के लिए सोमवार को पहले से ही विदेशों से पॉजिटव सिग्नल मिल रहे थे. जापान, हांगकांग-साउथ कोरिया समेत ज्यादातर एशियाई बाजार तेजी के साथ ट्रेड कर रहे थे. जापान का निक्केई इंडेक्स 700 अंक से ज्यादा चढ़कर 43,700 के लेवल पर कारोबार कर रहा था, तो वहीं हांगकांग का हैंगसेंग इंडेक्स भी 35 अंक की बढ़त लेते हुए 25,453.50 के लेवल पर, जबकि साउथ कोरिया का कोस्पी इंडेक्स भी तेजी पकड़े हुए ग्रीन जोन में नजर आ रहा था और ये तेजी के साथ 3,206.34 पर ट्रेड कर रहा था. गिफ्ट निफ्टी भी 70 अंक चढ़कर कारोबार कर रहा था.  जीएसटी के साथ ट्रंप के बदले रुख का असर जीएसटी सुधार को लेकर किए गए मोदी सरकार के ऐलानों का असर पहले से ही शेयर बाजार पर देखने को मिल रहा था, सरकार ने टैक्स स्लैब की संख्या घटाने के साथ ही कई सामानों पर जीएसटी से राहत दी है. जिसके बाद संबंधित कंपनियों के शेयर रॉकेट बने हुए हैं. वहीं अब भारत को लेकर डोनाल्ड ट्रंप की सॉफ्ट टोन का इम्पैक्ट भी देखने को मिला है. बता दें कि भारत-यूएस के बीच रूसी तेल खरीद को लेकर बीते कई महीनों से अनबन की खबरों के बाद पिछले शनिवार को अचानक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपना भड़काऊ रुख छोड़ते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति दोस्ती का कार्ड चला है. वहीं पीएम मोदी ने भी तुरंत पॉजिटिव रिस्पांस देते हुए और भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर विश्वास जताया.

दिवाली पर किसानों की झोली होगी भारी! GST कटौती और PM KISAN 21वीं किस्त की तैयारी

नई दिल्ली केंद्र की मोदी सरकार ने GST Rate Cut करके किसानों को ही नहीं पूरे देशवासियों को दिवाली का गिफ्ट नवरात्रि में ही दे दिया। 22 सितंबर से जीएसटी की नई दरें लागू होंगी। रोजमर्रा की जरूरतों का लगभग हर सामान सस्ता हो गया। कुछ वस्तुओं पर तो 0 जीएसटी लगेगा। ये गिफ्ट देश के हर वर्ग के लोग किसानों से लेकर मिडिल क्लास तक सभी के लिए हैं। लेकिन किसानों को दिवाली पर मोदी सरकार एक और तोहफा दे सकती है। ये तोहफा PM KISAN YOJANA की 21वीं किस्त का हो सकता है। पीएम किसान योजना केंद्र सरकार की एक योजना है जिसे किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए डिजाइन किया गया है। इससे पहले 2 अगस्त को PM Modi ने अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी से 20वीं किस्त जारी की थी। अब किसानों को अगली किस्त का इंतजार है। GST Rate Cut के बाद अब दिवाली पर PM Kisan Yojana की 21वीं किस्त? कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि किसानों को दिवाली या दिवाली से पहले 21वीं किस्त का तोहफा मिल सकता है। पिछले साल की बात करें तो अक्टूबर 2024 में मोदी सरकार ने 18वीं किस्त जारी की थी। इस बार दिवाली 20 और 21 अक्टूबर को पड़ रही है।  ऐसे में संभावना यही है कि इस बार भी अक्टूबर में मोदी सरकार PM Kisan Yojana की 21वीं किस्त जारी कर सकती है। हालांकि, अभी सरकार द्वारा आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। बैंक खाते में आएंगे 2-2 हजार? अगर दिवाली से पहले किसानों के खाते में 2-2 हजार रुपये आते हैं तो यह डबल धमाके जैसे होगा। क्योंकि सरकार ने पहले ही जीएसटी की दरों में कटौती कर दी है। 22 सितंबर यानी नवरात्रि के पहले दिन से New GST Rates लागू हो रहे हैं। सम्मान निधि योजना की 21वीं किस्त (21st installment of the PM Kisan Samman Nidhi Yojana) जल्द ही जारी होने की उम्मीद है। इस योजना के तहत, पात्र किसानों को सालाना 6,000 रुपये मिलते हैं, जो 2,000 रुपये की तीन किस्तों में विभाजित होते हैं, सीधे उनके बैंक खातों में।  

कार्लोस अल्कारेज का धमाका, सिनर को हराकर बने यूएस ओपन चैंपियन और दुनिया के नंबर-1 खिलाड़ी

न्यूयॉर्क कार्लोस अल्कारेज ने रविवार को यूएस ओपन फाइनल में जैनिक सिनर को 6-2, 3-6, 6-1, 6-4 से हराकर खिताब अपने नाम किया. यह लगातार तीसरा ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंट रहा जिसमें दोनों खिलाड़ी खिताबी मुकाबले में आमने-सामने आए. इस जीत के साथ अल्कारेज ने फ्लशिंग मीडोज पर अपना दूसरा और कुल मिलाकर छठा ग्रैंड स्लैम खिताब जीता. फाइनल मुकाबले में मौजूद रहे ट्रंप फाइनल के दौरान आर्थर ऐश स्टेडियम में स्पॉन्सर के सुइट में मौजूद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को दर्शकों से मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली. कुछ ने उनके लिए तालियां बजाईं तो कुछ ने हूटिंग की. मैच शुरू होने में लगभग आधा घंटा इसलिए भी देरी हुई क्योंकि हजारों दर्शक सुरक्षा जांच की लंबी कतार में फंसे थे. अमेरिकी राष्ट्रपति की मौजूदगी के चलते सुरक्षा बेहद कड़ी थी.  बेहद रोमांचक मुकाबला आखिरी बार साल 2000 में बिल क्लिंटन यूएस ओपन में मौजूद रहे थे. बारिश की वजह से बंद छत के नीचे खेला गया फाइनल शुरुआत से ही रोमांचक रहा. कार्लोस अल्कारेज ने मौजूदा चैंपियन सिनर पर शुरुआत से दबाव बनाए रखा. करीब दो महीने पहले विम्बलडन में सिनर से मिली हार का बदला अल्कारेज ने इस बार जीत दर्ज करके चुका लिया. अल्कारेज ने छीनी नंबर-1 की रैंकिंग इस जीत के साथ अल्कारेज और सिनर के बीच आमने-सामने का रिकॉर्ड अब 10-5 हो गया है. ग्रैंड स्लैम खिताबों की गिनती में भी अल्कारेज 6-4 से आगे निकल गए हैं, जबकि यूएस ओपन फाइनल्स में उनका पलड़ा 2-1 हो गया है. इस खिताबी जीत के साथ 22 वर्षीय अल्कारेज ने 24 वर्षीय सिनर से विश्व नंबर-1 की रैंकिंग भी छीन ली. पुरुष टेनिस में कायम दोनों का जलवा फिलहाल पुरुष टेनिस में अल्कारेज और सिनर का दबदबा कायम है. पिछले आठ ग्रैंड स्लैम खिताबों में से सभी इन्हीं दोनों ने जीते हैं. पिछले 13 ग्रैंड स्लैम में से 10 खिताब इनके नाम रहे, जबकि बाकी तीन नोवाक जोकोविच ने जीते. रविवार का फाइनल टेनिस इतिहास में पहला मौका बना, जब एक ही सीजन में लगातार तीन ग्रैंड स्लैम फाइनल्स में वही दो खिलाड़ी आमने-सामने उतरे.

नीतीश राज में उठी नई चुनौती: निर्दलीय उम्मीदवारों की बढ़ती लोकप्रियता

पटना इसे राजनीतिक दलों का बढ़ता प्रभुत्व कहें या लोकतंत्र का बदला चेहरा, बिहार विधानसभा चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशियों की पूछ लगातार घट रही है। वर्ष 2000 में झारखंड बंटवारे के बाद हुए पिछले पांच विधानसभा चुनावों के आंकड़ों पर गौर करें तो निर्दलीय उम्मीवारों के सीट जीतने की क्षमता में तेजी से गिरावट हुई है। वोट शेयर भी लगभग आधा हो गया है। फरवरी, 2005 के विधानसभा चुनाव में 17 निर्दलीय विधायक जीते थे, जिसमें चुनाव दर चुनाव कमी आती गई। वर्ष 2020 के पिछले चुनाव में महज एक निर्दलीय प्रत्याशी सुमित कुमार सिंह ही जीत दर्ज कर सके। उन्होंने भी महज 551 मतों से चकाई से निर्दलीय जीत दर्ज की थी। बाद में वह जदयू के पाले में चले गए और वर्तमान में मंत्री भी हैं। इसके पहले वर्ष 2015 के विधानसभा चुनाव में चार निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की थी। इनमें बोचहां से बेबी कुमारी, कांटी से अशोक कुमार चौधरी, मोकामा से अनंत सिंह और वाल्मीकिनगर से धीरेन्द्र प्रताप सिंह उर्फ रिंकू सिंह शामिल थे।  वर्ष 2010 में छह विधायक निर्दलीय जीते। इनमें बलरामपुर से दुलाल चंद्र गोस्वामी, डेहरी से ज्योति रश्मि, ढाका से पवन कुमार जायसवाल, लौरिया से विनय बिहारी, ओबरा से सोमप्रकाश सिंह और सिकटा से दिलीप वर्मा शामिल रहे। 2005 में दो विधानसभा चुनाव, जीते 27 निर्दलीय विधायक वर्ष 2005 में छह माह के अंतराल पर दो विधानसभा चुनाव हुए जिनमें कुल 27 निर्दलीय विधायकों ने जीत दर्ज की थी। फरवरी, 2005 में हुए विधानसभा चुनाव में 17 विधायकों ने निर्दलीय जीत दर्ज की थी। इनमें बछवाड़ा से रामदेव राय, बहादुरगंज से मो तौसिफ आलम, बिस्फी से हरिभूषण ठाकुर, गरखा से रघुनंदन मांझी, गया मुफिस्सल से अवधेश कुमार सिंह, घोसी से जगदीश शर्मा, गोबिंदपुर से कौशल यादव, मधेपुरा से रूप नारायण झा, महिषी से सुरेन्द्र यादव, मढ़ौरा से लालबाबू राय, मशरख से तारकेश्वर सिंह, मटिहानी से नरेन्द्र कुमार सिंह, मुजफ्फरपुर से विजेन्द्र चौधरी, नवादा से पूर्णिमा यादव, रघुनाथपुर से जगमातो देवी, सिकटी से मुरलीधर मंडल और सोनबरसा से किशोर कुमार निर्दलीय जीते। राष्ट्रपति शासन लगने के कारण जब अक्टूबर, 2005 में फिर से विधानसभा चुनाव हुए तो दस निर्दलीय विधायक जीतकर सदन पहुंचे। इनमें बाइसी से सैयर रुकनुदीन, बिस्फी से हरिभूषण ठाकुर, डेहरी से प्रदीप कुमार जोशी, गोबिंदपुर से कौशल यादव, मढ़ौरा से लालबाबू राय, मटिहानी से नरेन्द्र कुमार सिंह, मुजफ्फरपुर से विजेन्द्र चौधरी, नवादा से पूर्णिमा यादव, सोनबरसा से किशोर कुमार और वारसलिगंज से प्रदीप कुमार ने निर्दलीय जीत दर्ज की। जीत के बाद दलों के हो जाते हैं निर्दलीय बिहार के चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशियों की अपनी पहचान रही है। उनका अपना गढ़ रहा है। जिसे भेदने में बड़े-बड़े दिग्गज हार गए। डुमरांव से ददन पहलवान, मोकामा से अनंत सिंह, मुजफ्फरपुर से विजेन्द्र चौधरी, बिस्फी से हरिभूषण ठाकुर, सोनबरसा से किशोर कुमार, रूपौली से बीमा भारती समेत ऐसे कई नाम रहे। बाद में इनमें से कई निर्दलीय राजनीतिक दलों में शामिल हो गए और फिर पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ने लगे। दरअसल, राजनीतिक दलों को भी ऐसे उम्मीदवारों की तलाश होती है, जिनका अपना वोट बैंक हो। ऐसे में निर्दलीय जीतकर आए उम्मीदवार, उनकी पहली पसंद होते हैं। अमूमन देखा जाता है कि बड़े राजनीतिक दल ऐसे निर्दलीय उम्मीवारों को अगली बार उसी सीट से अपना उम्मीदवार बना लेते हैं। चुनाव दर चुनाव निर्दलीय प्रत्याशियों की संख्या घटने का यह भी एक बड़ा कारण है। कभी मुख्यमंत्री को हराकर निर्दलीय बने थे सीएम बात 1967 के विधानसभा चुनाव की है। तब पटना पश्चिम (वर्तमान बांकीपुर सीट) से चुनाव लड़ रहे तत्कालीन मुख्यमंत्री केबी सहाय चुनाव को निर्दलीय प्रत्याशी महामाया प्रसाद सिन्हा ने हरा दिया था। इस चुनाव में किसी गठबंधन को पूर्ण बहुमत नहीं मिला। इसके बाद संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी, जनसंघ, सीपीआइ, जन क्रांति दल और प्रजा सोशलिस्ट जैसी पार्टियों ने मिलकर सरकार बनाई। महामाया प्रसाद जनक्रांति दल में शामिल हो गए और खुद मुख्यमंत्री बने।  

रायपुर : गौ-सेवा से ही मिलती है सच्ची शांति और ऊर्जा : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर : गौ-सेवा से ही मिलती है सच्ची शांति और ऊर्जा : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुख्यमंत्री साय ने सीएम हाउस में गौमाता को रोटी और गुड़ खिलाकर प्रदेशवासियों के कल्याण की प्रार्थना की रायपुर मुख्यमंत्री साय ने आज चन्द्रग्रहण से पूर्व मुख्यमंत्री निवास में गौमाता को रोटी और गुड़ खिलाया। इस अवसर पर उन्होंने पूरे प्रदेश की सुख-समृद्धि, शांति और कल्याण की कामना की। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि गौ-सेवा करने से उन्हें आत्मिक संतोष और नई ऊर्जा का अनुभव मिलता है।

बच्चों से जवान तक: भारत में ये बीमारियां बना रही 56% मौतों का मुख्य कारण

नई दिल्ली  भारत में दिल की बीमारियां अब सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं रह गई हैं। बीते कुछ सालों में 10 साल के बच्चों से लेकर जिम में वर्कआउट करते नौजवानों तक को हार्ट अटैक पड़ते देखा गया है। सोशल मीडिया पर लगभग हर हफ्ते ऐसे दिल दहला देने वाले वीडियो सामने आते हैं, जो इस खतरे की गंभीरता को उजागर करते हैं। हाल ही में महाराष्ट्र के कोल्हापुर में एक 10 साल के बच्चे की दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई, जिससे पूरे देश में चिंता की लहर दौड़ गई है। अब एक सरकारी रिपोर्ट ने इस डर को और गहरा कर दिया है। भारत के रजिस्ट्रार जनरल द्वारा जारी सैंपल रजिस्ट्रेशन सर्वे (SRS) के अनुसार, देश में होने वाली कुल मौतों में से करीब एक-तिहाई मौतें सिर्फ हार्ट अटैक के कारण हो रही हैं। यानी भारत में हर तीसरी मौत दिल से जुड़ी बीमारी की वजह से हो रही है। कौन सी बीमारियां ले रही हैं सबसे ज्यादा जान? इस रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ कि भारत में अब संक्रामक रोगों से ज्यादा जानलेवा साबित हो रहे हैं गैर-संक्रामक रोग (Non-communicable diseases – NCDs)। आंकड़ों के मुताबिक:- दिल की बीमारियां (Heart Attack/Cardiovascular issues): 31% मौतें सांस के संक्रमण (Respiratory Infections): 9.3% कैंसर व ट्यूमर (Tumors): 6.4% पुरानी सांस की बीमारियां (Chronic Respiratory Diseases): 5.7% पाचन संबंधी समस्याएं: 5.3% बुखार और वायरल इंफेक्शन: 4.9% डायबिटीज (Diabetes Mellitus): 3.5% मूत्र और जननांग तंत्र की बीमारियां: 3% कुल मिलाकर, 56.7% मौतें अब नॉन-कम्युनिकेबल डिजीजेज यानी लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियों की वजह से हो रही हैं।   हार्ट अटैक क्यों बन रहा है बड़ा खतरा? एक वक्त था जब हार्ट अटैक सिर्फ बुजुर्गों की बीमारी मानी जाती थी, लेकिन अब यह तेजी से युवाओं को भी अपनी चपेट में ले रहा है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इसके पीछे सबसे बड़ा कारण है – बदलती जीवनशैली। देर तक बैठकर काम करना, फिजिकल एक्टिविटी की कमी, अनियमित खानपान, जंक फूड का अत्यधिक सेवन और नींद की अनदेखी जैसी आदतें दिल पर बुरा असर डाल रही हैं। कुछ रिपोर्ट्स में कोरोना वैक्सीन को भी हार्ट अटैक से जोड़ने की कोशिश की गई थी, लेकिन स्वास्थ्य एजेंसियों ने इसे खारिज किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि हार्ट अटैक के बढ़ते मामलों के पीछे सबसे बड़ा हाथ लाइफस्टाइल डिसऑर्डर का है, न कि वैक्सीन का। कैंसर भी कम घातक नहीं दिल की बीमारियों के अलावा कैंसर भी भारत में एक प्रमुख जानलेवा बीमारी बनकर उभरा है। National Cancer Registry Programme की रिपोर्ट के अनुसार, 2015 से 2019 के बीच भारत में कैंसर के 7.08 लाख मामले दर्ज हुए, जिनमें से 2.06 लाख लोगों की जान चली गई। खासकर पूर्वोत्तर भारत के राज्यों में कैंसर के मामले सबसे अधिक सामने आए हैं। अब क्या किया जा सकता है? इस alarming स्थिति से निपटने के लिए सिर्फ सरकारी योजनाएं काफी नहीं हैं। हर व्यक्ति को अपनी जीवनशैली में बदलाव लाने की जरूरत है: नियमित व्यायाम करें संतुलित और पौष्टिक आहार लें समय पर सोएं और तनाव को कम करें रेगुलर हेल्थ चेकअप कराएं स्मोकिंग और अल्कोहल से दूरी बनाए रखें दिल की सेहत को लेकर जागरूकता और सतर्कता अब सिर्फ विकल्प नहीं, बल्कि ज़रूरत बन चुकी है।  

हॉकी एशिया कप 2025: भारत ने जीता खिताब, PM मोदी बोले- गर्व का पल, खिलाड़ियों को मिली लाखों की इनामी राशि

नईदिल्ली  हॉकी एशिया कप 2025 के फाइनल मुकाबलें में भारतीय टीम ने साउथ कोरिया को करारी शिकस्त दी. बिहार के राजगीर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में खेले गए इस मुकाबले में भारतीय हॉकी टीम ने साउथ कोरिया को 4-1 के अंतर से पटखनी दी. इस जीत के साथ ही टीम ने अगले साल यानी 2026 में बेल्जियम और नीदरलैंड द्वारा संयुक्त मेजबानी में आयोजित होने वाले विश्व कप के लिए क्वालिफाई कर लिया है. भारत ने चौथी बार हॉकी एशिया कप के खिताब पर अपना कब्जा जमाया है. ये जीत इसलिए भी खास है क्योंकि भारत ने 5 बार की चैम्पियन साउथ कोरिया को शिकस्त दी है. इससे पहले 2017 में मलेशिया को हराकर भारत ने एशिया कप जीता था.  ऐसे रहा दोनों टीमों के बीच मुकाबला इस फाइनल मुकाबले के पहले क्वार्टर के पहले ही मिनट में भारत के सुखजीत सिंह ने गोल दागा. पहला क्वार्टर खत्म होने के बाद भारत 1-0 से आगे रहा. भारत ने दोनों क्वार्टर में 1-1 गोल दागा और 2-0 की बढ़त बना ली. हाफ टाइम तक भारत का स्कोर 2-0 रहा. साउथ कोरिया ने अटैकिंग खेल दिखाया लेकिन वो गोल नहीं कर सके.  तीसरे क्वार्टर के आखिरी मिनट में भारत ने फिर गोल दागा और बढ़त 3-0 की कर ली. चौथे क्वार्टर के 50वें मिनट में भारत को पेनल्टी कॉर्नर मिला. रोहिदास ने मौके को भुनाया और गोल दाग दिया. लेकिन इसी क्वार्टर में साउथ कोरिया ने भी एक गोल दागा. लेकिन भारत की बढ़त 4-1 की हो चुकी थी. इसके बाद भारतीय टीम ने साउथ कोरिया को गोल नहीं दागने दिया और डिफेंसिव अप्रोच अपनाया. आखिरकार भारत ने जीत हासिल कर ली. दोनों टीमों ने ऐसे हासिल किया था फाइनल का टिकट भारतीय हॉकी टीम ने अपने आखिरी सुपर-4 मैच में चीन को 7-0 से हराया और फाइनल में जगह बनाई. लीग में भारत का सफर अजेय रहा था. वहीं दूसरी तरफ कोरिया ने आखिरी सुपर-4 मैच में मलेशिया को 4-3 से हराकर दूसरे स्थान पर रहते हुए फाइनल में जगह बनाई थी. ऐसा रहा है एशिया कप में भारत का इतिहास भारत ने अब तक 2003, 2007, 2017 के बाद अब 2025 में चौथी बार एशिया कप का टाइटल अपने नाम किया है. टीम 1982, 1985, 1989, 1994 और 2013 में 5 बार उपविजेता भी रही है. 

मौसम का कहर: यूपी में तीन दिन तक बरसेंगे बादल, पड़ोसी राज्यों का हाल भी जानें

नई दिल्ली  देशभर में मॉनसून का दूसरा फेज चल रहा है। आने वाले दिनों में मॉनसून की वापसी होने लगेगी, इससे पहले जमकर बारिश हो रही है। उत्तर से लेकर दक्षिण और पूर्व से लेकर पश्चिम भारत तक भारी बरसात हो रही है। उत्तर प्रदेश में 11-13 सितंबर तक भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। इसके अलावा, उत्तरी गुजरात और उससे सटे दक्षिण पश्चिम राजस्थान पर दबाव की वजह से आठ सितंबर तक राजस्थान और गुजरात में भारी से बहुत भारी बारिश होगी। सात सितंबर को उत्तरी गुजरात और सौराष्ट्र व कच्छ में असाधारण रूप से भारी बारिश होने की संभावना है। उत्तर पश्चिम भारत के मौसम की बात करें तो सात सितंबर को जम्मू संभाग, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, मध्य महाराष्ट्र में हल्की से मध्यम बारिश के साथ, सात, 8 और 13 सितंबर को उत्तराखंड, 12 और 13 सितंबर को उत्तर प्रदेश, 11-13 तारीख के दौरान पूर्वी उत्तर प्रदेश में अलग-अलग जगहों पर भारी बारिश होने वाली है। पूर्वी और मध्य भारत की बात करें तो 7, 8, 10 और 13 सितंबर को ओडिशा में कुछ जगहों पर भारी बारिश, 11-12 सितंबर के दौरान भारी से बहुत भारी बरसात की संभावना है। सात तारीख को पश्चिमी मध्य प्रदेश, 7, 8, 13 सितंबर को पूर्वी मध्य प्रदेश, 11 और 12 सितंबर को विदर्भ, सात और 10-13 सितंबर के दौरान छत्तीसगढ़, 7-13 सितंबर के दौरान उप हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम, 9-11 सितंबर के दौरान बिहार में अधिकांश जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश होने वाली है। इसके अलावा, पूर्वोत्तर भारत की बात करें तो 7, 10, 11 सितंबर को नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, सात और 10 सितंबर को अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय में भारी बारिश की संभावना है। 11-13 सितंबर के दौरान असम, मेघालय, अरुााचल प्रदेश, 12, 13 सितंबर को नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना है।  

अलमारी में जमा पुराने कपड़े ला सकते हैं नकारात्मकता, जानें तुरंत समाधान

आपकी अलमारी में ऐसे कई कपड़े रखें होंगे, जिन्हें आपने महीनों या सालों से नहीं पहना होगा। वहीं, कुछ ऐसे भी कपड़े घर में आपने जमा कर रखें होंगे, जो फटे पुराने होंगे। अगर, ऐसा है तो अनजाने में आप अपने घर में निगेटिविटी को न्योता दे रहे हैं, जो आगे चलकर आपके दुर्भाग्य का कारण बन सकता है। दरअसल, ज्योतिष शास्त्र में पुराने कपड़ों का संबंध शनि और राहु से माना जाता है। जिन घरों में पुराने कपड़े होते हैं, वहां पर शनि और राहु का अशुभ प्रभाव रहता है। पुराने, बिना इस्तेमाल में आने वाले सामान और कबाड़ को भरकर रखने से निगेटिव एनर्जी बनने लगते हैं। ऐसा होने पर आपकी तरक्की और सुख-समृद्धि में बाधा आ सकती है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर पर शुभ और अच्छी चीजों को रखने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बना रहता है। इसलिए घर में और अलमारी में उन्हीं कपड़ों को रखें जो पहनने लायक हों और फटे-पुराने नहीं हों। आइए जानते हैं पुराने कपड़ों का क्या करें… वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर पर फटे, पुराने और बेकार कपड़ों को तुरंत ही अलमारी से बाहर निकाल दें। इन कपड़ों की वजह से आपको आर्थिक और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार कभी भी पुराने, बेकार और फटे हुए कपड़ों दान नहीं करने चाहिए। यदि आप किसी जरूरतमंद व्यक्ति को कुछ दान करना चाहते हैं, तो ऐसे कपड़े दें, जो पहनने लायक हों। यदि आपके पास काले कपड़े हों, तो उन्हें शनिवार के दिन दान करने से शनि दोष कम होता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, बेरंग हो चुके कपड़े पहनने या उन्हें घर में रखे रहने से आपकी जिंदगी भी बेरंगी होने लगती है। इसी तरह दाग-धब्बे लगे कपड़े भी घर में नहीं रखने चाहिए। इसलिए इन कपड़ों को भी फेंक दें।  

1951 मॉडल रोल्स रॉयस कार के विवाद में तलाक, पूर्व प्रधानमंत्री की कार बनी विवाद का कारण

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने अलग रह रहे एक दंपती की शादी को खत्म कर दिया है. दंपती के रिश्ते में 1951 मॉडल की रोल्स रॉयस कार को लेकर खटास आ गई थी, जिसे पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने बड़ौदा की तत्कालीन "महारानी" के लिए मंगवाया था. जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते को दर्ज किया, जिसके अनुसार पुरुष अपनी पूर्व पत्नी को 2.25 करोड़ रुपये का भुगतान करेगा, जिसके बाद उनके बीच सभी दावों का निपटारा हो जाएगा. पीठ ने 29 अगस्त को कहा, "हम याचिकाकर्ता और प्रतिवादी 1 (पति) के बीच विवाह को भंग करते हैं. अब उनके बीच कोई भी वैवाहिक या अन्य संबंध नहीं रहेगा." समझौते के अनुसार, पति 31 अगस्त तक 1 करोड़ रुपये और शेष 1.25 करोड़ रुपये 30 नवंबर तक चुकाएगा. इस व्यवस्था के तहत, महिला अपने पति द्वारा दिए गए उपहार अपने पास रखेगी और पति उसे और उसके परिवार को मिले सभी उपहार, जैसे सगाई की अंगूठी और अन्य कीमती सामान, एक करोड़ रुपये के डिमांड ड्राफ्ट के साथ लौटा देगा. कोर्ट ने दोनों पक्षों को दी चेतावनी दंपती के बीच सभी मामलों को रद्द करते हुए पीठ ने इसे पूर्ण और अंतिम समझौता माना. विवाह खत्म होने के बाद, शीर्ष अदालत ने पक्षों को सोशल मीडिया सहित किसी भी रूप में एक-दूसरे को बदनाम न करने की चेतावनी दी. ग्वालियर में रहने वाली महिला ने दावा किया कि वह बहुत प्रतिष्ठित परिवार से ताल्लुक रखती है, जिसके पूर्वज छत्रपति शिवाजी महाराज की नौसेना में एडमिरल थे और उन्हें कोंकण क्षेत्र का शासक घोषित किया गया था. दूसरी ओर, महिला का पति सैन्य अधिकारियों के परिवार से ताल्लुक रखता है और मध्य प्रदेश में एक शैक्षणिक संस्थान चलाता है. रोल्स रॉयस कार के कारण विवाद इस विवाद का मुख्य कारण 1951 मॉडल की प्राचीन हस्तनिर्मित क्लासिक रोल्स रॉयस कार थी, जो आज तक एक ही मॉडल है और जिसकी वर्तमान कीमत 2.5 करोड़ रुपये से अधिक है. यह कार पंडित नेहरू ने बड़ौदा की तत्कालीन महारानी के लिए मंगवाई थी. महिला ने दावा किया कि उसके अलग हुए पति और उसके परिवार ने दहेज के तौर पर रोल्स रॉयस कार और मुंबई में एक फ्लैट की मांग करके उसे लगातार परेशान किया था. हालांकि पति ने इस आरोप से इनकार किया है. महिला ने अपनी याचिका में कहा, "उच्च न्यायालय ने इस बात पर विचार नहीं किया कि प्रतिवादी 1 और 2 (पति और उसके पिता) का शुरू से ही दुर्भावनापूर्ण इरादा था कि वे रोल्स रॉयस कार और मुंबई में एक फ्लैट मांगें. जब प्रतिवादियों की मांगें पूरी नहीं हुईं, तो उन्होंने शादी से इनकार करना शुरू कर दिया और याचिकाकर्ता पर झूठे और तुच्छ आरोप लगाने लगे और उसके चरित्र पर कीचड़ उछालने लगे." उच्च न्यायालय के 5 दिसंबर, 2023 के आदेश की आलोचना करते हुए याचिका में कहा गया, "…यह स्पष्ट है कि प्रतिवादी 1 (पति) और 2 (पति के पिता) ने याचिकाकर्ता (महिला) के पिता की रोल्स रॉयस कार के प्रति अपना आकर्षण दिखाया है और उन्हें उक्त कार उपहार में मिलने की उम्मीद थी और मुंबई में फ्लैट के संबंध में, दहेज की इस मांग को पूरा न करना ही इसका मुख्य कारण था. याचिकाकर्ता को उसके ससुराल नहीं ले जा रहे हैं." मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की ग्वालियर पीठ ने महिला द्वारा अपने पति के खिलाफ दहेज और क्रूरता के मामले को खारिज कर दिया था. इसके बाद अलग हुए दंपती का विवाद सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया. दूसरी ओर, पति ने अलग हुई पत्नी, उसके माता-पिता और रिश्तेदारों के खिलाफ विवाह प्रमाणपत्र तैयार करने में धोखाधड़ी और जालसाजी का मामला दर्ज कराया था. सुप्रीम कोर्ट ने पहले वरिष्ठ अधिवक्ता और केरल उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश आर बसंत को इस मामले में मध्यस्थ नियुक्त किया था.