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ट्रंप दक्षिण कोरिया पहुंचेंगे, जिनपिंग और किम से बातचीत की संभावना

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके शीर्ष सलाहकार एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (एपेक) व्यापार मंत्रियों की बैठक के लिए अक्टूबर में दक्षिण कोरिया की यात्रा की तैयारी कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप की चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से भी मुलाकात संभव है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब अमेरिकी सरकार की टैरिफ नीतियों को लेकर दुनियाभर के देश चिंता में हैं। वहीं, इसका वैश्विक व्यापार पर भी असर देखा जा रहा है। अमेरिकी प्रशासन के अधिकारियों ने शनिवार को कहा कि एपेक के दौरान द्विपक्षीय बैठक के बारे में गंभीर चर्चा हुई है, लेकिन अभी तक कोई ठोस योजना नहीं बनी है। अक्टूबर के अंत और नवंबर की शुरुआत में ग्योंगजू शहर में होने वाले इस शिखर सम्मेलन को ट्रंप के लिए राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिलने का एक अहम अवसर माना जा रहा है। पिछले महीने एक फोन कॉल में जिनपिंग ने ट्रंप और उनकी पत्नी को चीन आने का निमंत्रण दिया था। इस निमंत्रण का अमेरिकी राष्ट्रपति ने भी स्वागत किया था, हालांकि अभी तक तारीख तय नहीं हुई है। अधिकारियों ने कहा कि ट्रंप प्रशासन इसे अमेरिका में अधिक आर्थिक निवेश हासिल करने के अवसर के रूप में भी देख रहा है। ट्रंप की सऊदी अरब, कतर और संयुक्त अरब अमीरात की यात्राओं सहित हालिया विदेश यात्राओं का मुख्य केंद्र यही रहा है। व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने सीएनएन को बताया, "दक्षिण कोरिया की यात्रा पर चर्चा हो रही है। यह यात्रा आर्थिक सहयोग पर केंद्रित होगी।" अधिकारी ने बताया कि अन्य लक्ष्यों में व्यापार, रक्षा और असैन्य परमाणु सहयोग पर चर्चा पर ध्यान केंद्रित करना शामिल है। इस क्षेत्र में ट्रंप की मौजूदगी उन्हें उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन के साथ एक बार फिर बातचीत करने की स्थिति में ला सकती है, हालांकि किम इसमें शामिल होंगे या नहीं, यह अभी भी सवाल है। अधिकारियों का कहना है कि शी जिनपिंग के साथ संभावित बैठक के आयोजन पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है। दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने पिछले हफ्ते ट्रंप के साथ बैठक के दौरान उन्हें एपेक शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया था। इस दौरान उन्होंने सुझाव दिया था कि यह आयोजन ट्रंप को किम से मिलने का अवसर प्रदान कर सकता है। शनिवार को पत्रकारों को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा कि वह किम से मिलने के इच्छुक हैं। उत्तर कोरियाई नेता के बारे में ट्रंप ने दावा किया, "मैं ऐसा करूंगा और हम बातचीत करेंगे। वह मुझसे मिलना चाहेंगे। हम उनसे मिलने के लिए उत्सुक हैं और हम संबंधों को बेहतर बनाएंगे।" अमेरिकी राष्ट्रपति की दक्षिण कोरिया की अपेक्षित यात्रा ऐसे समय में हो रही है, जब शी जिनपिंग और किम दोनों के साथ उनके संबंध तनावपूर्ण हैं। शी जिनपिंग ने इस हफ्ते बीजिंग में किम, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मेजबानी की थी। जिनपिंग के साथ संभावित बैठक ऐसे समय में हो रही है, जब वाशिंगटन और बीजिंग ट्रंप के टैरिफ को लेकर आमने-सामने हैं। अमेरिका और चीन के अधिकारी एक व्यापार समझौते पर कई वार्ताओं में शामिल रहे हैं, जिसमें यूरोप में दोनों देशों के शीर्ष आर्थिक सलाहकारों के साथ दो आमने-सामने की बैठकें भी शामिल हैं। ट्रंप ने अप्रैल में चीन के आयात पर 145 प्रतिशत टैरिफ लगाया था और चीन ने जवाबी कार्रवाई करते हुए अमेरिकी वस्तुओं पर 125 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया था। टैरिफ पिछले महीने लागू होने वाले थे। लेकिन, ट्रंप ने कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर करके नवंबर तक बढ़ी हुई टैरिफ पर रोक लगा दी।

जुहू बीच पर झाड़ू लेकर उतरे अक्षय कुमार, लोगों को दिया स्वच्छता का बड़ा संदेश

मुंबई बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार को रविवार को मुंबई के जुहू बीच पर देखा गया। यहां वे एक सफाई अभियान में शामिल होने पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने समुद्र तट की सफाई की और लोगों को खास संदेश भी दिया। दरअसल, मुंबई के जुहू बीच पर गणपति विसर्जन के बाद कूड़ा-कचरा फैल जाता है। इसी कारण उसकी सफाई के लिए अभिनेता अक्षय कुमार भी पहुंचे। सफाई अभियान के दौरान उन्होंने लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक भी किया। उन्होंने कहा, "ज्ञान सिखाता है कि हमें स्वच्छता बनाए रखनी चाहिए। हमारे प्रधानमंत्री भी समय-समय पर इस पर जोर देते रहते हैं। स्वच्छता केवल सरकार का कर्तव्य नहीं है, न ही केवल बीएमसी की जिम्मेदारी है, बल्कि यह जनता की भी जिम्मेदारी है।" इस स्वच्छता अभियान में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस और बीएमसी कमिश्नर भूषण गगरानी भी शामिल हुए। इसकी कुछ तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। वीडियो में अक्षय कुमार कचरे को थैलों में डालते दिखाई दे रहे हैं। उनके साथ अमृता और अन्य लोग भी दिखाई दे रहे हैं। हाल ही में अक्षय कुमार ने पंजाब में आई विनाशकारी बाढ़ से पीड़ित लोगों के लिए 5 करोड़ रुपए दान किए थे। अक्षय कुमार ने लोगों से भी बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए गुहार लगाई थी। उन्होंने कहा था, "मैं पंजाब बाढ़ पीड़ितों के लिए राहत सामग्री खरीदने के लिए 5 करोड़ रुपए दे रहा हूं, लेकिन मैं कौन होता हूं, किसी को 'दान' देने वाला? जब भी मुझे मदद का हाथ बढ़ाने का अवसर मिलता है, तो मैं खुद को धन्य महसूस करता हूं। आप भी जितना हो सके, लोगों की मदद करें।" वर्क फ्रंट की बात करें तो अक्षय कुमार के पास कई फिल्में हैं। उनकी फिल्म 'जॉली एलएलबी 3' 19 सितंबर को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। इसके अलावा, उनके पास 'भूत बांग्ला' फिल्म भी है, जिसमें वामिका गब्बी और परेश रावल भी हैं। साथ ही उनके पास सुनील शेट्टी और परेश रावल के साथ 'हेरा फेरी 3' भी है।

महिला सुरक्षा पर सवाल: नारी 2025 रिपोर्ट ने खोली हेमंत सरकार की नाकामी – प्रतुल शाहदेव ने कसा तंज

रांची राष्ट्रीय महिला आयोग के द्वारा जारी नारी रिपोर्ट 2025 पर भारतीय जनता पार्टी ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा कि यह रिपोर्ट हेमंत सरकार की संवेदनहीनता और नाकामी को उजागर करती है। शाहदेव ने कहा कि ‘‘देश के 31 शहरों में महिला सुरक्षा को लेकर हुए सर्वे में राजधानी रांची की महिलाएं सबसे असुरक्षित बताई जाती हैं। सरकार के लिए सबसे शर्मनाक पहलू है कि राजधानी की 27त्न महिलाएं छेड़खानी के कारण अपना घर बदलने को मजबूर होती हैं।'' प्रतुल शाहदेव ने आगे कहा कि लोगों का पुलिस पर अविश्वास इतना बढ़ गया है कि ‘‘9त्न महिलाएं अपने साथ हुए अपराध को छुपा लेती हैं और सबसे दुर्भाग्यपूर्ण तथ्य यह है कि सर्वे के अनुसार 85त्न महिलाओं को प्रशासन पर भरोसा ही नहीं है। इससे साफ है कि झारखंड में महिलाएं पूरी तरह असुरक्षित महसूस कर रही हैं।'' शाहदेव ने आरोप लगाया कि ‘‘रांची ही नहीं, पूरे झारखंड में यही स्थिति है। हेमंत सरकार पार्ट 1 और पार्ट 2 में अब तक 8000 से ज्यादा बलात्कार के मामले दर्ज हो चुके है। बलात्कारियों को सजा दिलाने का सरकार का रिकॉर्ड भी फिसड्डी है। आदिवासी बालिकाएं लगातार ट्रैफिकिंग की चपेट में आ रही हैं, लेकिन हेमंत सरकार पिछले 6 वर्षों से राज्य महिला आयोग का गठन तक नहीं कर पाई। यह उसकी महिलाओं के प्रति हो रहे अपराधों के प्रति संवेदनहीनता का जीता-जागता उदाहरण है।'' प्रतुल ने कहा कि ‘‘हेमंत सरकार महिलाओं की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह असंवेदनशील है जो सरकार महिला आयोग तक नहीं बना पाई, उससे महिलाओं की सुरक्षा की उम्मीद करना बेमानी है।''  

अरविंद सैनी का बयान: प्रधानमंत्री मोदी ने GST सुधारों से बदल दी देश की टैक्स व्यवस्था

हरियाणा देश की मोदी सरकार ने जी.एस.टी दरों में कमी करके जहां देश के विभिन्न वर्गों को राहत देते हुए विपक्ष को मुद्दाविहीन कर दिया है तो वहीं महंगाई को कम करने की दशा में एक बड़ी पहल की है । अहम बात ये है कि भारत पर टैरिफ लगाने को लेकर पिछले कुछ दिनों से जितना अमेरिका मुखर था, उतनी ही मुखरता से भारत के अंदर विपक्षी दल भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की कोशिश में लगे थे। विपक्षी नेताओं ने अमेरिकी टैरिफ के गुब्बारे में महंगाई और बेरोज़गारी की नकारात्मक हवा भर इसे और बड़ा बनाने की कोशिश की, लेकिन नरेंद्र मोदी सरकार ने नए जी.एस.टी रिफार्म्स से न केवल अमेरिकी टैरिफ के गुब्बारे को फोड़ा, बल्कि विपक्ष द्वारा बनाए जा रहे मंहगाई और बेरोज़गारी बढ़ने के नैरेटिव को भी धराशाई कर दिया। सच तो यह है कि नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश ने आज़ादी के बाद का सबसे बड़ा आर्थिक सुधार देखा है। जी.एस.टी और अब नेक्स्ट जेन जी.एस.टी सुधारों ने आम उपभोक्ताओं को राहत, व्यापारियों को सरलता और देश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई दी है। यह सुधार व्यवस्था में सरलीकरण लाएगा जो व्यापार करने के माहौल को बेहतर और अधिक प्रभावी बनाएगा।  हालांकि विपक्ष (खासकर कांग्रेस) मोदी सरकार के इस एतिहासिक नए जीएसटी रिफार्म्स को पचा नहीं पा रहा है और बिहार चुनाव को इससे जोड़कर दिखाना चाह रहा है। इसी चाह में कांग्रेस बीड़ी और बिहार की तुलना भी कर चुकी है। ये बात और है कि जब कांग्रेस का यह दांव उलटा पड़ गया तो केरल कांग्रेस ने ट्वीट कर इस पर माफ़ी भी मांगी है। खैर ये कांग्रेस और विपक्षी दलों की मानसिकता बन गई है। विपक्षी नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरोध में इतने अंधे हो चुके हैं कि अब उन्हें पता ही नहीं चलता कि मोदी सरकार का विरोध करते-करते कब देश का विरोध करने लग जाते हैं। ट्रंप के सुर में सुर मिलाते हुए राहुल गांधी का भारत को डेड अर्थव्यवस्था कहना इसका ताजा उदाहरण है। अमेरिकी टैरिफ लागू होने के दौरान भी भारत की बढ़ती जी.डी.पी भारत को डेड इकोनोमी कहने वालों के मुंह पर तमाचा है। इसी तरह नए जीएसटी रिफार्म्स जहां आम जनता को राहत और बचत देते दिख रहे हैं, वहीं विपक्षी पार्टियों को इसके बाद वोटों में चपत लगती दिख रही है।  जीएसटी में नेक्स्ट जेन रिफॉर्म्स का तोहफा 22 सितंबर, नवरात्रि के पहले दिन से मिलने जा रहा है। जीएसटी में यह सुधार माँग बढ़ाएगा, निवेश लाएगा और करोड़ों युवाओं को रोज़गार देगा। मोदी सरकार के इस दावे पर देश विश्वास करता दिख रहा है कि उद्योग जगत जीएसटी दरों में कमी का पूरा लाभ उपभोक्ताओं तक पहुँचाएंगा।    हरियाणा भारतीय जनता पार्टी के मीडिया प्रभारी अरविंद सैनी ने कहा कि कांग्रेस सरकारों ने केवल वादे किए, लेकिन सुधार कभी लागू नहीं कर पाई। प्रधानमंत्री मोदी ने राज्यों को भरोसा दिया, घाटा होने पर क्षतिपूर्ति की गारंटी दी और एक राष्ट्र-एक कर का सपना साकार किया। दैनिक रोज़मर्रा की कई वस्तुओं, जीवन बीमा, स्वास्थ्य बीमा, मेडिकल उपकरणों और जीवनरक्षक दवाओं पर जीएसटी शून्य कर दिया गया है। कपड़े, जूते, दवाइयाँ, फ्रिज-टीवी, कृषि उपकरण, घर निर्माण की सामग्री तक सब सस्ते हुए हैं। इस बदलाव से हमारे देश के युवा-युवतियों, महिलाओं, किसानों, कृषि उत्पादन, एमएसएमई क्षेत्र, उपभोक्ताओं, दुकानदारों और उद्योग चलाने वाले उद्यमियों सहित हर वर्ग को बड़ा लाभ मिलेगा। 2014 से पहले कांग्रेस की सरकारों के दौरान उपभोक्ताओं और व्यापारियों पर जितना बोझ था, चाहे वह टैक्स का हो या कागजी झंझटों का, वह 2017 में जीएसटी लागू होने के बाद लगातार कम होता गया। आज भारत की अर्थव्यवस्था इतनी मजबूत स्थिति में है कि बैंक के ब्याज दरों में कमी आई है, महंगाई दर में भारी गिरावट आई है और विकास दर ऐतिहासिक ऊँचाइयों पर पहुँची है। जब पूरी दुनिया आर्थिक सुस्ती से जूझ रही है, तब भारत 7.8% की दर से दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बनी। जीएसटी सुधारों का यह निर्णय देश को 2047 तक विकसित भारत के संकल्प की ओर ले जाता दिख रहा है। वैसे इन परिस्थितियों में नए जीएसटी रिफार्म्स कर पाना आसान नहीं था, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने घाटा होने पर राज्यों को क्षतिपूर्ति की गारंटी दी और एक राष्ट्र-एक कर का सपना साकार किया।  रोज़मर्रा की वस्तुएँ, कपड़े, जूते, दवाइयाँ, बीमा, टू-व्हीलर से लेकर फ्रिज-टीवी तक सब सस्ते हुए हैं। मेडिकल उपकरणों और जीवनरक्षक दवाओं पर टैक्स शून्य कर दिया गया है। यह सुधार माँग बढ़ाएगा, निवेश लाएगा और करोड़ों युवाओं को रोज़गार देगा। आजादी के बाद पहली बार देश के टैक्स ढांचे में इतना बड़ा परिवर्तन किया गया है। व्यवस्था में सरलीकरण आएगा, जो व्यापार करने के माहौल को बेहतर और अधिक प्रभावी बनाएगा।    15 अगस्त को देश के प्रधानमंत्री ने देश से वादा किया था कि अब भारत रुकेगा नहीं, झुकेगा नहीं, बल्कि आगे बढ़कर बड़े कदम उठाएगा। जो क्षमता देश में अब दिखाई दे रही है, वो क्षमता 2014 से पहले नहीं थी। उस समय देश की अर्थव्यवस्था बेहद कमजोर हालत में थी।  कांग्रेस के 10 वर्षों के शासन में भ्रष्टाचार तो खूब हुआ, लेकिन कोई ठोस और परिवर्तनकारी सुधार नहीं किए गए।  श्रद्धेय अटल जी ने एक राष्ट्र-एक कर की परिकल्पना की थी। उस समय देश में लगभग 30-35 तरह के टैक्स, ड्यूटी और लेवीस लागू थे। अटल जी चाहते थे कि इन सबको समेटकर एक टैक्स बने, लेकिन 2004 में वे दोबारा चुनकर नहीं आए और इसके बाद यूपीए सरकार सिर्फ वादे करती रही। कांग्रेस के वित्त मंत्री बार-बार घोषणा करते रहे कि वे एक टैक्स लाएंगे, लेकिन राज्य सरकारें उन पर विश्वास नहीं करती थीं। तब राज्यों को भरोसा नहीं था कि अगर इस सुधार से उनका राजस्व घटा या घाटा हुआ, तो केंद्र उनकी मदद करेगा।  लेकिन मोदी जी ने प्रधानमंत्री के रूप में राज्यों को विश्वास दिलाया कि जीएसटी लागू होने के बाद यदि किसी राज्य के राजस्व में कमी आती है या उसकी वृद्धि दर 14% से कम रहती है, तो केंद्र सरकार उसे कंपनसेशन के माध्यम से पूरा करेगी, वह भी पूरे 5 साल तक। यही विश्वास और यह गारंटी इस ऐतिहासिक सुधार को सफल बनाने में निर्णायक … Read more

सिवान को नीतीश सरकार का तोहफ़ा, 558 करोड़ से 9 विकास परियोजनाओं की हुई शुरुआत

पटना  मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने आज सिवान जिला के नारायणपुर मोड़, पचरुखी में आयोजित कार्यक्रम स्थल से 558 करोड़ 35 लाख रुपये लागत की 9 विकासात्मक योजनाओं का शिलान्यास एवं कार्यारंभ किया। इसके अंतर्गत 222 करोड़ 1 लाख रुपये की लागत से 220/132/33 केवी ग्रिड, उपकेन्द्र मैरवा एवं सम्बद्ध लाईन 'बे' का निर्माण, 120 करोड़ 48 लाख रुपये की लागत से पचरुखी बाईपास मोहम्मदपुर मोड़ (एन० एच०-531) से छपिया-टेढ़ी घाट-गोपालपुर (एनएच-227) पथ का चौड़ीकरण, 92 करोड़ 16 लाख रुपये की लागत से राज्य उच्च पथ स० 89 (बबुनिया सिसवन रोड) पर सिवान यार्ड (सिवान रेलवे स्टेशन से पचरुखी रेलवे स्टेशन के बीच अवस्थित लेवल क्रॉसिंग संख्या-91 एसपीएल पर रेल ओवरब्रिज का निर्माण कार्य शामिल है। CM नीतीश ने जीविका दीदियों एवं अन्य लाभुकों के साथ किया संवाद साथ ही मुख्यमंत्री ने 67 करोड़ 47 लाख रुपये की लागत से सिवान आंदर पथ का चौड़ीकरण, 18 करोड़ 26 लाख रुपये की लागत से भण्टापोखर जीरादेई पथ का भाया जामापुर बाजार तक चौड़ीकरण, 10 करोड़ 12 लाख रुपये की लागत से सोनकारा, आन्दर में 33/11 के०वी० विद्युत शक्ति उपकेंद्र का निर्माण, 9 करोड़ 83 लाख की लागत से माधोपुर, महाराजगंज में 33/11 केवी विद्युत शक्ति उपकेंद्र के निर्माण, 9 करोड़ 43 लाख रुपये की लागत से मशरख-महाराजगंज 132 के०वी० संचरण लाइन का द्वितीय सर्किट स्ट्रिगिंग एवं सम्बद्ध लाईन 'बे' के निर्माण, 8 करोड़ 49 लाख की लागत से सिवान ग्रिड उपकेन्द्र में 80 एमवीए ट्रांसफार्मर के अधिष्ठापन कार्य का शिलान्यास/कार्यारंभ किया। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने सिवान के नारायणपुर मोड़, पचरूखी स्थित कार्यक्रम स्थल पर बड़ी संख्या में उपस्थित पेंशनधारी लाभुकों, जीविका दीदियों एवं अन्य लाभुकों के साथ संवाद किया। इस दौरान कार्यक्रम स्थल पर विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉल का मुख्यमंत्री ने अवलोकन किया। वहां उपस्थित लोगों ने मुख्यमंत्री का धन्यवाद करते हुए कहा कि वृद्धजनो, दिव्यांगजनों एवं विधवा महिलाओं की पेंशन राशि को 400 रुपये से बढ़ाकर 1100 रुपये कर दिया गया है। इससे सभी लोग खुश हैं। घरेलू उपभोक्ताओं को 125 यूनिट बिजली फ्री करने से लोगों को बहुत फायदा हो रहा है। वे लोग बचत राशि का उपयोग अन्य विकास कार्यों में कर रहे हैं। जीविका दीदियों ने महिलाओं के उत्थान की दिशा में सरकार द्वारा किए जा रहे कार्यों की प्रशंसा करते हुए मुख्यमंत्री के प्रति आभार प्रकट किया। इस दौरान ममता बहनों ने प्रोत्साहन राशि में दो गुना बढ़ोतरी किये जाने पर तथा आशा कार्यकर्ताओं ने प्रोत्साहन राशि तीन गुना वृद्धि किए जाने पर मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। मिड डे मील रसोइया, गृह रक्षा वाहिनी के लोगों ने भी मानदेय में वृद्धि को लेकर मुख्यमंत्री का आभार जताया। आप सभी बुलंदी के साथ रहिए और आगे बढ़िए- CM Nitish लाभार्थियों से संवाद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आप सभी बुलंदी के साथ रहिए और आगे बढ़िए। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए हर स्तर पर काम किया जा रहा है। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी आप सभी जीविका दीदियां बहुत अच्छा काम कर रही हैं। आप लोग मन लगाकर काम करें, सरकार आप लोगों की हर संभव मदद कर रही है। अपने परिवार की तरक्की कीजिए और बिहार के विकास में अपना अहम योगदान दीजिए।

अब जेब ढीली करेगी ऑनलाइन फूड डिलीवरी: Zomato और Swiggy ने लगाया नया चार्ज

नई दिल्ली  अगर आप अक्सर Zomato, Swiggy या Magicpin से ऑनलाइन खाना ऑर्डर करते हैं, तो यह खबर आपके लिए है। फेस्टिव सीजन से ठीक पहले, इन प्रमुख फूड डिलीवरी कंपनियों ने अपनी 'प्लेटफॉर्म फीस' बढ़ा दी है, जिससे अब ऑनलाइन फूड ऑर्डर करना पहले से महंगा हो जाएगा। इसके अलावा, 22 सितंबर से डिलीवरी चार्ज पर लगने वाले 18% जीएसटी के बाद यह बोझ और भी बढ़ जाएगा। किस कंपनी ने कितना बढ़ाया चार्ज? Swiggy: स्विगी ने चुनिंदा शहरों में अपनी प्लेटफॉर्म फीस बढ़ाकर 15 रुपये प्रति ऑर्डर कर दी है, जिसमें जीएसटी भी शामिल है। Zomato: ज़ोमैटो ने भी अपनी प्लेटफॉर्म फीस में बढ़ोतरी की है, जो अब 12.50 रुपये (जीएसटी को छोड़कर) हो गई है। Magicpin: मैजिकपिन, जो इन कंपनियों के बाद सबसे बड़ा फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म है, ने भी अपना शुल्क बढ़ाकर 10 रुपये प्रति ऑर्डर कर दिया है। कंपनी के प्रवक्ता ने कहा है कि यह इंडस्ट्री के रुझान के अनुरूप है और उनका शुल्क अभी भी सबसे कम है। जीएसटी के बाद बढ़ेगा और बोझ 22 सितंबर से लागू होने वाले डिलीवरी चार्ज पर 18% जीएसटी के कारण ग्राहकों पर और भी बोझ बढ़ सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस नए नियम के बाद ज़ोमैटो पर हर ऑर्डर पर करीब 2 रुपये और स्विगी पर करीब 2.6 रुपये का अतिरिक्त चार्ज लग सकता है। हालांकि, कंपनियों की तरफ से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। फूड डिलीवरी कंपनियों के लिए यह प्लेटफॉर्म फीस अब कमाई का एक नया जरिया बन गई है। 

यूपी में ऐतिहासिक फैसला: बेटियों को पिता की संपत्ति में बराबर का अधिकार, जानें कैसे होगा लागू

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में महिलाओं के अधिकारों को लेकर बड़ा बदलाव होने जा रहा है. अब तक शादीशुदा बेटियों को पिता की कृषि भूमि में हिस्सा नहीं मिलता था, लेकिन जल्द ही यह स्थिति बदल सकती है. राजस्व परिषद ने इसके लिए प्रस्ताव तैयार कर लिया है और इसी माह इसे शासन को भेजा जाएगा. फिलहाल उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता-2006 की धारा 108 (2) के तहत किसी पुरुष भूमिधर के निधन के बाद जमीन का नामांतरण केवल उसकी विधवा, पुत्र और अविवाहित पुत्री के नाम किया जाता है. शादीशुदा बेटियों को इस अधिकार से बाहर रखा गया है. यही कारण है कि लंबे समय से इस प्रावधान को भेदभावपूर्ण मानते हुए संशोधन की मांग उठ रही थी. कया बदलेगा नियम सूत्रों के मुताबिक, प्रस्तावित संशोधन में धारा-108 से विवाहित और अविवाहित जैसे शब्द हटा दिए जाएंगे. इसके बाद शादीशुदा बेटियों को भी उतना ही अधिकार मिलेगा जितना बेटों या अविवाहित बेटियों को मिलता है. यानी विरासत दर्ज करते समय विवाह के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होगा. इतना ही नहीं, मृतक भूमिधर की बहनों के अधिकार में भी यह फर्क खत्म कर दिया जाएगा.   अन्य राज्यों में पहले से लागू मध्य प्रदेश और राजस्थान में यह व्यवस्था पहले से लागू है. वहां विवाहित बेटियों को पिता की कृषि भूमि में पुत्रों के बराबर अधिकार मिलता है. यूपी सरकार का यह कदम भी उसी दिशा में माना जा रहा है. आगे की प्रक्रिया प्रस्ताव शासन स्तर पर परीक्षण के बाद कैबिनेट में जाएगा. इसके बाद विधानसभा और विधान परिषद की मंजूरी मिलने पर यह कानून का रूप ले लेगा. इसे महिलाओं को बराबरी का हक़ दिलाने और महिला सशक्तीकरण की दिशा में अहम पहल के तौर पर देखा जा रहा है.

छत्तीसगढ़ में नक्सली दहशत: सुकमा में हुई निर्मम हत्याओं की हकीकत

बस्तर  बस्तर एक बार फिर माओवादी हिंसा की चपेट में आ गया है. छत्तीसगढ़ के सुकमा ज़िले में रविवार देर रात हथियारबंद नक्सलियों ने दो ग्रामीणों की निर्मम हत्या कर दी. यह घटना केरलापाल थाना क्षेत्र के सिरसेटी के नंदापारा में हुई. मृतकों की पहचान पदम पोज्जा और पदम देवेंद्र के रूप में हुई है. सूचना पर पुलिस दल मौके पर पहुंच गए हैं और बस्तर पुलिस जल्द ही आधिकारिक बयान जारी करेगी. सुकमा में एक हफ़्ते के भीतर माओवादियों से जुड़ी यह दूसरी हत्या है. इससे पहले जगरगुंडा के सिलगेर गांव में शिक्षादूत लक्ष्मण बारसे की हत्या कर दी गई थी.   पिछले एक पखवाड़े में माओवादियों ने बस्तर में नागरिकों पर हमले तेज़ कर दिए हैं. कांकेर में स्वतंत्रता दिवस पर एक माओवादी स्मारक पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने के बाद 25 वर्षीय ग्रामीण मनीष नुरेती का अपहरण कर उसकी हत्या कर दी गई थी. खबरों के अनुसार, उसकी फांसी से पहले एक "जन अदालत" का आयोजन किया गया था. एक अन्य मामले में सुकमा के पोलमपल्ली में 40 वर्षीय सोदी देवा की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी. बीते दिनों तीन नक्सलियों को किया गया था गिरफ्तार नक्सलियों के खिलाफ सुरक्षाबलों द्वारा लगातार कार्रवाई की जा रही है. बीते रविवार को सुकमा जिले में विस्फोटकों के साथ तीन नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया था. गिरफ्तार नक्सलियों की पहचान पोडियम जोगा (25), माडवी मासा (25) और पोज्जा माडवी (29) के रूप में हुई थी. ये तीनों प्रतिबंधित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के मिलिशिया सदस्य हैं. इनके पास से लगभग 3 किलोग्राम वजन का एक टिफिन बम, पांच डेटोनेटर, पांच जिलेटिन रॉड, चार पेंसिल सेल, बिजली के तार और डेटोनेटिंग कॉर्ड बरामद किए गए थे.

दुर्घटना ने बदली खुशियों की शाम, रायसेन में विसर्जन के दौरान दो भाइयों की गई जान

रायसेन मध्य प्रदेश के रायसेन में गणेश विसर्जन के दौरान बड़ा हादसा हो गया. घाटखेड़ा गांव में दो भाई डूब गए जिससे उनकी मौत हो गई. पांच लोग विसर्जन के लिए गए थे, तभी फिसलकर दो नाबालिग गहरे पानी में समा गए. एक को निकालकर अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया. इस घटना से गांव में मातम पसरा है और परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है.   मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के घाटखेड़ा गांव में गणेश विसर्जन के दौरान दर्दनाक हादसा सामने आया है. शनिवार रात करीब 8 बजे गणेशोत्सव की समाप्ति पर घर से गणेश प्रतिमा विसर्जन के लिए निकले पांच युवकों में से दो की डूबने से मौत हो गई. प्रतिमा विसर्जन के दौरान हादसा जानकारी के अनुसार, उमरावगंज थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले इस गांव में एक ही परिवार के पांच युवक विसर्जन के लिए नजदीकी नाले में गए थे. सभी किशोर प्रतिमा विसर्जन के बाद एक पत्थर पर खड़े होकर पानी देख रहे थे, तभी नीचे की मिट्टी धंस गई और वो पानी में गिर पड़े. इस हादसे में 16 साल के अनुज साहू और 17 साल के नितिन साहू गहरे पानी में बह गए. दो भाइयों की डूबने से मौत गांववालों ने तुरंत शोर सुनकर बचाव कार्य शुरू किया. करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद अनुज का शव बरामद हुआ. वहीं नितिन को निकालकर सीपीआर (CPR) दिया गया और तत्काल भोपाल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन वहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. पुलिस के मुताबिक, अन्य तीन लोग किसी तरह तैरकर सुरक्षित बाहर आ गए. हादसे के बाद पूरे गांव में मातम पसर गया.  उमरावगंज थाना प्रभारी शैलेंद्र सिंह तोमर ने बताया कि घटना के बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची और दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया. उन्होंने कहा कि यह एक दुखद हादसा है और परिजनों को ढांढस बंधाया गया है. गांववालों ने कहा कि हर साल यहां विसर्जन के लिए बड़ी संख्या में लोग आते हैं, लेकिन पानी की गहराई का अंदाजा नहीं होने की वजह से यह हादसा हो गया. 

सरकारी कर्मचारियों के लिए जरूरी खबर: समय खत्म होने से पहले करें यह फैसला

नई दिल्ली  केंद्र सरकार ने कर्मचारियों को यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) से नेशनल पेंशन स्कीम (NPS) में लौटने का अवसर दिया है। वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह सुविधा केवल एक बार मिलेगी और इसके बाद दोबारा UPS में लौटना संभव नहीं होगा। सरकार ने कहा कि पात्र कर्मचारी और रिटायर कर्मचारी इस विकल्प का इस्तेमाल 30 सितंबर 2025 तक कर सकते हैं। तय समय सीमा के बाद यदि कोई कर्मचारी कदम नहीं उठाता है, तो उसे डिफॉल्ट रूप से UPS के अंतर्गत ही माना जाएगा। बता दें कि यह कदम उन कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण है जो तय लाभ वाली UPS योजना से हटकर बाजार-आधारित NPS में जाना चाहते हैं। UPS निश्चित पेंशन, DA से जुड़ा महंगाई समायोजन, ग्रेच्युइटी और पारिवारिक पेंशन जैसे लाभ देता है, जबकि NPS कर्मचारियों को अधिक रिटर्न और निवेश में लचीलापन प्रदान करता है, लेकिन इसमें बाजार जोखिम भी शामिल रहता है। क्या हैं शर्तें बता दें कि केंद्र सरकार ने कर्मचारियों के लिए UPS से NPS में बदलाव को लेकर स्पष्ट शर्तें तय की हैं। वित्त मंत्रालय के अनुसार, यह विकल्प केवल एक बार ही इस्तेमाल किया जा सकेगा और कर्मचारी इसके बाद दोबारा (UPS) में वापस नहीं लौट पाएंगे। बदलाव का निर्णय भी समय से पहले लेना होगा। कर्मचारी को यह विकल्प अपनी सेवानिवृत्ति से कम से कम एक वर्ष पहले या स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) से कम से कम तीन महीने पहले, जो भी पहले हो, चुनना होगा। इसके अलावा, जिन कर्मचारियों पर हटाए जाने, बर्खास्तगी, दंडस्वरूप अनिवार्य सेवानिवृत्ति जैसी कार्रवाई चल रही हो, या जिनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही लंबित हो, वे इस सुविधा का लाभ नहीं ले पाएंगे। कौन सा विकल्प चुने कर्मचारी वित्त मंत्रालय द्वारा पेश किए गए पेंशन विकल्पों को लेकर अब स्पष्ट तुलना सामने आ गई है। जानकारों का कहना है कि UPS कर्मचारियों के लिए एक कम जोखिम वाला, सरकारी गारंटी वाला विकल्प है। इसमें पेंशन के साथ ग्रेच्युइटी और पारिवारिक पेंशन जैसी सुविधाएँ भी मिलती हैं। हालांकि, इसकी सीमाएं भी हैं—जैसे कि निवेश में लचीलापन कम होना, एकमुश्त निकासी का हिस्सा छोटा होना और ऊंचे रिटर्न की संभावना अपेक्षाकृत कम रहना। वहीं, नेंशनल पेंशन स्कीम (NPS) एक डिफाइंड कंट्रिब्यूशन स्कीम है, जिसमें निवेश इक्विटी, कॉरपोरेट बॉन्ड और सरकारी सिक्योरिटी में किया जाता है। इससे कर्मचारियों को निवेश आवंटन पर ज्यादा नियंत्रण और बेहतर ग्रोथ की संभावना मिलती है। NPS में कर्मचारी अपनी पेंशन राशि में से 60% हिस्सा एकमुश्त निकाल सकते हैं, जबकि बाकी 40% से अनिवार्य रूप से एन्युइटी खरीदनी पड़ती है। इसमें कर लाभ भी शामिल हैं, जैसे धारा 80C और 80CCD के तहत छूट। लेकिन चूंकि यह बाजार से जुड़ा है, इसलिए इसमें जोखिम बना रहता है और UPS की तरह मुद्रास्फीति समायोजन या पारिवारिक पेंशन की सुविधा नहीं मिलती। तुलनात्मक रूप से देखें तो, UPS एक डिफाइंड बेनिफिट प्लान है, जिसमें पेंशन की गारंटी और DA से जुड़ा महंगाई भत्ता मिलता है। UPS में कर्मचारी को बेसिक वेतन + DA का 10% योगदान करना होता है, जबकि नियोक्ता (सरकार) 18.5% योगदान करती है। दूसरी ओर, NPS एक डिफाइंड कंट्रिब्यूशन प्लान है, जिसमें कर्मचारी भी 10% योगदान करते हैं लेकिन नियोक्ता का हिस्सा 14% होता है। UPS में पारिवारिक पेंशन और ग्रेच्युइटी उपलब्ध हैं, जबकि NPS में ये दोनों सुविधाएं नहीं हैं। इसके बदले NPS अधिक रिटर्न और निवेश की आजादी देता है, लेकिन जोखिम और अनिश्चितता भी साथ लाता है।