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जरांगे के दोहरे दांव से BJP परेशान, गणेशोत्सव के बीच बढ़ा आरक्षण का शोर

मुंबई  महाराष्ट्र एक तरफ जहां 10 दिवसीय गणेशोत्सव के रंग में रंगा हुआ है और गणपति की भक्ति में डूबा हुआ है, उसी बीच मराठों को आरक्षण दिलाने के लिए लंबे समय से लड़ाई लड़ रहे मराठा कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल ने मुंबई के आजाद मैदान में अपना अनशन शुरू कर दिया है। वे राज्य में देवेंद्र फडणवीस की अगुवाई वाली महायुति सरकार से मराठों के लिए आरक्षण का अपना वादा पूरा करने की मांग कर रहे हैं। जरांगे ने पिछले साल भी मुंबई में मार्च किया था, तब एकनाथ शिंदे सरकार ने उन्हें मराठों को आरक्षण देने का भरोसा दिलाकर मना लिया था। हालाँकि, मनोज जरांगे और मराठा आंदोलनकारियों को सरकार ने कुछ शर्तों के साथ आजाद मैदान में सिर्फ एक दिन के लिए विरोध प्रदर्शन करने की अनुमति दी है,लेकिन जरांगे ने अनिश्चितकालीन अनशन का ऐलान किया है। लिहाजा, सरकार और आंदोलनकारियों के बीच टकराव की संभावना बढ़ गई है। त्योहारों के मौसम में मराठों के प्रदर्शन ने मुंबई पुलिस की भी चिंता बढ़ा दी है। इसकी बानगी तब देखने को मिली, जब शुक्रवार के विरोध प्रदर्शन के लिए आजाद मैदान पहुंच रहे मराठों की वजह से शहर की सड़कें जाम हो गईं और लोगों को अपने-अपने दफ्तर जाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ा। हालांकि, व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए मंबई पुलिस ने 1,500 कर्मियों को तैनात किया था लेकिन वे नाकाफी साबित हुए। भाजपा की क्या चिंता? अब बात भाजपा की टेंशन की। पहली चिंता तो गणेशोत्सव के दौरान मंबई में मराठों के अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की वजह से टकराव से जुड़ी है। दूसरी, मराठा आंदोलनकारी अब धीरे-धीरे महायुति सरकार पर हमलावर हो रहे हैं। करीब नौ महीने तक शांत रहने के बाद जरांगे पाटिल ने अब अपनी बयानबाजी तेज कर दी है। उन्होंने भाजपा के नेतृत्व वाली फडणवीस सरकार पर "मराठा समुदाय को मूर्ख" बनाने का आरोप लगाया और दावा किया कि अगर उन्हें "गोलियों का सामना" करना पड़ा, तब भी वह पीछे नहीं हटेंगे। विधानसभा चुनाव से पहले लड़ाई कर दी थी शिथिल बड़ी बात यह है कि 9 महीने पहले इन्हें मराठों ने विधानसभा चुनाव से ऐन पहले अपनी लड़ाई कम कर दी थी। उस समय सीएम एकनाथ शिंदे, जो खुद एक मराठा हैं, आगे बढ़ते हुए जरांगे को समझाने और शांत कराने में कामयाब रहे थे लेकिन इस बार वही शिंदे इस लड़ाई से दूर बने हुए हैं। भाजपा को इस बात की भी चिंता है कि उसके सहयोगी किनारे क्यों हैं। शिंदे ने यह कदम तब उठाया था, जब लोकसभा चुनावों में मराठा आंदोलन का भारी असर देखने को मिला था। लोकसभा चुनावों में मराठों के विरोध का खामियाजा 2024 के लोकसभा चुनावों में जरांगे पाटिल द्वारा मराठों से भाजपा का बहिष्कार करने का आह्वान कारगर रहा था। यही कारण बना कि सत्तारूढ़ भाजपा 28 संसदीय सीटों पर चुनाव लड़कर केवल 9 पर ही जीत सकी। जबकि उनके सहयोगी दल 20 सीटों पर लड़कर 8 सीट जीत सके। हालाँकि, विधानसभा चुनावों से पहले, भाजपा और उसके गठबंधन ने उन ओबीसी समुदायों को एकजुट करने पर ध्यान केंद्रित किया, जो कुनबी (सबसे बड़े ओबीसी समूहों में से एक जो अलग से ओबीसी आरक्षण की मांग कर रहा है) के लिए आवंटित मराठों को आरक्षण का लाभ देने का विरोध कर रहे हैं। इस रणनीति का चुनावों में अच्छा परिणाम मिला और पार्टी 148 सीटों पर चुनाव लड़कर 132 सीटें जीतकर सत्ता में वापस आ गई। स्थानीय निकाय चुनावों से पहले फिर आंदोलन स्थानीय चुनावों से पहले फिर से शुरू किए गए आंदोलन के बीच इस बार फिर से ओबीसी, जरांगे पाटिल के आरक्षण के विरोध में कमर कस रहे हैं। महाराष्ट्र ओबीसी महासंघ के अध्यक्ष बबनराव तायवाड़े ने दीर्घकालिक रणनीति बनाने के लिए शुक्रवार को नागपुर में एक बैठक बुलाई है। महाराष्ट्र राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अनुसार, ओबीसी राज्य की कुल आबादी का लगभग 38% हिस्सा हैं। तायवाड़े ने कहा, “ओबीसी एक बड़ी ताकत हैं और अगर कोई भी इससे छेड़छाड़ करने की कोशिश करता है, तो हम सड़क पर उतरकर आंदोलन के जरिए उसका मुकाबला करेंगे। हम मराठा आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन इसे ओबीसी कोटे से ऊपर और ऊपर होना चाहिए।” MVA सियासी लाभ के फेर में दूसरी तरफ, जारंगे पाटिल के विरोध प्रदर्शन से सियासी लाभ की उम्मीद कर रही कांग्रेस, शरद पवार की NCP और उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) के विपक्षी महा विकास अघाड़ी (MVA) गठबंधन ने उनका समर्थन किया है। इंडियन एक्सप्रेस से कांग्रेस नेता बालासाहेब थोराट ने कहा, "मैं जारंगे पाटिल के आंदोलन की सफलता के लिए प्रार्थना करता हूँ ताकि मराठों को आरक्षण मिले। साथ ही, सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ओबीसी कोटा बरकरार रहे।"  

अंबाला के रिहायशी इलाकों में बाढ़ का खतरा, अनिल विज ने लिया जायजा, NDRF जुटाई राहत टीम

अंबाला बरसाती दिनों में अक्सर परेशानी खड़ी करने वाली टांगरी नदी बृहस्पतिवार सुबह अचानक उफान पर आ गई। सुबह करीब 30 हजार क्यूसिक से अधिक पानी नदी में पहुंचा, जो सामान्य से कई गुना ज्यादा था। नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर चला जाने पर आसपास की कॉलोनियों में चिंता फैल गई। हालात का जायजा लेने ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज खुद मौके पर पहुंचे और प्रशासन को अलर्ट रहने के निर्देश दिए। मंत्री अनिल विज ने सुबह सबसे पहले टांगरी नदी पुल पर खड़े होकर बहाव की स्थिति देखी। इसके बाद उन्होंने टांगरी बांध रोड, मतिदास नगर, गोल्डन पार्क, बब्याल, रामपुर, सरसेहड़ी, प्रभु प्रेम पुरम, करधान और नग्गल तक का दौरा किया। उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों को बार-बार अनाउंसमेंट कर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश दिए। मौके पर भाजपा नेता कपिल विज, संजीव वालिया, अजय बवेजा और विशाल टांगरी सहित अन्य लोग मौजूद रहे। विज ने कहा कि बरसात से पहले टांगरी नदी की खुदाई कर इसे गहरा किया गया था, जिससे पानी का बहाव सुरक्षित निकल सके। हालांकि अवरोधों के कारण केवल 25 फीसदी काम ही हो पाया है। “इसके बावजूद हमें उम्मीद है कि पानी सुरक्षित निकल जाएगा, लेकिन खतरे को देखते हुए सभी विभागों को सतर्क रहने को कहा गया है।” स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अंबाला छावनी में एनडीआरएफ की टीम तैनात कर दी गई है। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन ने कश्तियां भी मंगवाई हैं। मंत्री विज ने कहा कि जिनके घर टांगरी नदी के किनारे या कैचमेंट एरिया में हैं, उन्हें अपना जरूरी सामान लेकर सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी जा रही है।   मंत्री ने मौके पर सिंचाई विभाग, पुलिस, नगर परिषद और अन्य विभागों के अधिकारियों की बैठक भी की और सभी को मिलकर काम करने के आदेश दिए। उन्होंने सिंचाई विभाग से जानकारी ली कि दोपहर तक नदी में और कितना पानी आ सकता है।

मौसम विभाग का पूर्वानुमान: यूपी समेत कई राज्यों में अगले हफ्ते तक बरसेंगे बादल

नई दिल्ली मॉनसून अपने दूसरे फेज में चल रहा है और कुछ समय बाद धीरे-धीरे खत्म होने लगेगा। ऐसे में जाने से पहले देशभर में मॉनसून की वजह से झमाझम बरसात हो रही है। पहाड़ी राज्यों उत्तराखंड से लेकर हिमाचल प्रदेश तक में नदियां ऊफान पर हैं, वहीं, उत्तर प्रदेश, पंजाब जैसे मैदानी इलाकों में भी भारी बारिश हो रही है। मौसम विभाग ने उत्तर प्रदेश में आने वाले दिनों में भारी बरसात की चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग के अनुसार, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के इलाके में 29 अगस्त से दो सितंबर तक भारी बारिश होने वाली है। इसके अलावा, पूर्वी उत्तर प्रदेश में 29 अगस्त, एक और दो सितंबर को भारी बारिश होगी। वहीं, अन्य राज्यों की बात करें तो 30 अग्सत तक कोंकण, गोवा, मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा, गुजरात, केरल, तटीय कर्नाटक में भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। आज गुजरात में अत्यधिक भारी बरसात हो सकती है। अगले पांच दिनों तक उत्तर पश्चिम भारत में अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश जारी रहने वाली है। 29-31 अगस्त के दौरान हिमाचल प्रदेश, 29 अगस्त से दो सितंबर के दौरान उत्तराखंड में अलग-अलग स्थानों पर बहुत भारी बरसात होगी। उत्तर-पश्चिम भारत की बात करें तो उत्तराखंड, पूर्वी राजस्थान में अगले सात दिनों तक, जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 29 अगस्त से दो सितंबर, पश्चिमी राजस्थान में 31 अगस्त और एक सितंबर, पूर्वी उत्तर प्रदेश में 29 अगस्त, एक और दो सितंबर को अलग अलग जगहों पर भारी बारिश होगी। हिमाचल प्रदेश में 29-31 अगस्त तक, उत्तराखंड में 29 अगस्त से दो सितंबर तक, पंजाब में 30 अगस्त को बहुत भारी बारिश होगी। दक्षिण भारत की बात करें तो तटीय कर्नाटक में अगले सात दिनों तक, केरल में 29, 30 अगस्त और तीन व चार सितंबर, आंतरिक कर्नाटक, तटीय आंध्र प्रदेश और यनम, तेलंगाना, लक्षद्वीप, तमिलनाडु में 29 अगस्त को अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश होने वाली है। तटीय कर्नाटक में 29 और 30 अगस्त को और केरल में 29 अगस्त को बहुत भारी बरसात होगी। अगले सात दिनों तक इलाके में अधिकांश जगह गरज और बिजली के साथ हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है। पूर्व और मध्य भारत की बात करें तो मध्य प्रदेश में अगले सात दिनों तक, उप हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम में 29-31 अगस्त तक, विदर्भ में 29 अगस्त और चार सितंबर को, बिहार में 29 और 30 अगस्त को, झारखंड में 30 अगस्त, दो सितंबर, ओडिशा, छत्तीसगढ़ में 31 अगस्त से तीन सितंबर तक अलग-अलग स्थानों में भारी बारिश की संभावना है। उत्तर पूर्व भारत की बात करें तो अरुणाचल प्रदेश में 29, 30 अगस्त, चार सितंबर, असम, मेघालय, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा में 29 अगस्त से चार सितंबर तक अलग अलग जगहों पर भारी बारिश की संभावना है। अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड, मिजोरम में 29 अगस्त को बहुत भारी बरसात होगी।  

प्रदेश की फॉरेंसिक संरचना को ‘नई वैज्ञानिक शक्ति’ उपलब्ध कराने का माध्यम बनेगा एमओयू

-राज्य विधि विज्ञान प्रयोगशाला उ.प्र तथा सेंचुरियन विश्वविद्यालय ओडिशा में अहम समझौता ज्ञापन पर हुए हस्ताक्षर -सीएम योगी के विजन अनुसार यह पहल प्रशासनिक, शैक्षणिक और संस्थागत सहयोग को मजबूत करने में होगी निर्णायक -उत्तर प्रदेश को वैज्ञानिक अन्वेषण व फॉरेंसिक उत्कृष्टता के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में प्रभावी होगा कदम -पुलिस मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम में पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्णा की उपस्थिति में एमओयू पर हुए हस्ताक्षर लखनऊ,  उत्तर प्रदेश को आधुनिक तकनीक से युक्त प्रदेश के तौर पर रूपांतरित कर रहे सीएम योगी का विजन धरातल पर उतरने लगा है। इसी कड़ी में, प्रदेश में फॉरेंसिक संरचना को भी नई वैज्ञानिक शक्ति प्रदान करने के उद्देश्य से शुक्रवार को एक बड़ी पहल हुई। पुलिस मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम में उ.प्र के पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्णा की उपस्थिति में राज्य विधि विज्ञान प्रयोगशाला उ.प्र व सेंचुरियन विश्वविद्यालय ओडिशा के मध्य समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुआ। यह एमओयू कई मायनों में विशिष्ट होगा। यह सहयोग हाल ही में प्रदेश में शुरू की गई कई फॉरेंसिक पहलों को और गति देगा। उल्लेखनीय है कि नए आपराधिक कानूनों के अंतर्गत अब गंभीर अपराधों में फॉरेंसिक विशेषज्ञ का घटनास्थल पर पहुंचना अनिवार्य कर दिया गया है, जिससे सबूतों का वैज्ञानिक और सटीक संकलन सुनिश्चित हो रहा है। राजीव कृष्णा ने की सराहना पुलिस महानिदेशक (उ.प्र) राजीव कृष्णा ने इस एमओयू की सराहना करते हुए कहा कि यह ज्ञान-विनिमय, नवाचार और फॉरेंसिक क्षमता-वृद्धि की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह न केवल शैक्षणिक शोध को मज़बूत करेगा बल्कि प्रदेश की फॉरेंसिक संरचना को भी नई वैज्ञानिक शक्ति प्रदान करेगा। उनके अनुसार, यह पहल उत्तर प्रदेश को वैज्ञानिक अन्वेषण और फॉरेंसिक उत्कृष्टता के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अत्याधुनिक अनुसंधान को बढ़ावा देने वाला कदम अपर पुलिस महानिदेशक नवीन अरोरा (तकनीकी सेवाएं) ने बताया कि इस समझौता ज्ञापन के कई लाभ हैं। यह संयुक्त शिक्षण/प्रशिक्षण और अनुसंधान पहल, शोध सामग्री प्रकाशनों और पुस्तकालय संसाधनों का आदान-प्रदान, वैज्ञानिक उपकरणों/ सॉफ्टवेयर और प्रयोगशाला सुविधाओं का सदुपयोग, वैज्ञानिकों/शोधार्थियों के लिए सह-मार्गदर्शन के अवसर प्रदान करेगा। यह एमओयू छात्रों को तेजी से विकसित हो रहे फॉरेंसिक विज्ञान क्षेत्र में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त प्रदान करेगा, उनकी रोजगार क्षमता को बढ़ाएगा तथा अत्याधुनिक अनुसंधान को बढ़ावा देगा, जो देश भर में कानून प्रवर्तन और न्यायिक प्रणालियों का समर्थन करेगा। उल्लेखनीय है कि इसी महीने 75 अत्याधुनिक मोबाइल फॉरेन्सिक वैन का शुभारम्भ सीएम योगी द्वारा किया गया है। ये वैन डीएनए सैंपलिंग, फिंगरप्रिंट विश्लेषण, टॉक्सिकोलॉजी परीक्षण और अन्य आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित हैं। इससे प्रदेश में फॉरेंसिक-आधारित पुलिसिंग को नया आयाम मिला है। उत्कृष्टता केन्द्र के तौर पर है अधिसूचित सेंचुरियन विश्वविद्यालय, व्यावसायिक शिक्षा व प्रशिक्षण स्कूल को हाल ही में कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा उत्कृष्टता केंद्र (सेंटर फॉर एक्सिलेंस) के रूप में अधिसूचित किया गया है, जो अब तक यह मान्यता प्राप्त करने वाला भारत का एकमात्र विश्वविद्यालय है। सेंचुरियन विश्वविद्यालय के प्रेसीडेंट, प्रोफेसर मुक्तिकान्त मिश्र ने कहा कि विधि विज्ञान प्रयोगशाला की फॉरेंसिक विशेषज्ञता के साथ हमारे शैक्षिक संसाधनों को संयोजित करके, हम छात्रों और शोधकर्ताओं को फॉरेंसिक विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी में प्रगति में सार्थक योगदान देने के लिए सशक्त बनाएंगे।              समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर के कार्यक्रम में अपर पुलिस महानिदेशक/पुलिस महानिदेशक के जनरल स्टाफ ऑफिसर, पुलिस उपमहानिरीक्षक, तकनीकी सेवायें मुख्यालय एवं प्रभारी निदेशक, विधि विज्ञान प्रयोगशाला उपस्थित रहे। साथ ही, सेंचुरियन विश्वविद्यालय, ओडिशा के प्रेसीडेंट, प्रोफेसर मुक्तिकान्त मिश्र, वॉयस चांसलर डॉ. सुप्रिया पटनायक, निदेशक मोनालिशा घोष एवं एसोसिएट डीन डॉ. रीना सी. झमतानी व अन्य उपस्थित रहे।

कर्मठता को सलाम! हरियाणा के पांच कर्मचारियों को मिला HSSC चेयरमैन का सम्मान

हरियाणा  हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (एचएसएससी) ने कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट (सीईटी)-2025 के सफल आयोजन में असाधारण योगदान देने वाले पांच कर्मचारियों को बुधवार को विशेष प्रशस्ति पत्र और नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया। यह आयोजन पंचकूला स्थित आयोग मुख्यालय में हुआ। एचएसएससी के चेयरमैन हिम्मत सिंह ने सम्मानित कर्मचारियों की सराहना करते हुए कहा कि सीईटी जैसी बड़ी परीक्षा का सफल आयोजन केवल टीम भावना, मेहनत और ईमानदारी से ही संभव है। उन्होंने बताया कि सम्मानित कर्मचारियों ने परीक्षा प्रक्रिया के प्रत्येक चरण में उत्कृष्ट निष्ठा और समर्पण दिखाया, जो सभी के लिए प्रेरणास्पद है। सम्मानित कर्मचारियों में सोनीपत के स्पेशल पुलिस अधिकारी देवेंद्र कुमार और पवन कुमार, ईएसआई पद पर कार्यरत ऋषिपाल, पंचकूला में क्लर्क पद पर कार्यरत अमित कुमारी और रोहतक रोडवेज में क्लर्क पद पर कार्यरत सतीश कुमार शामिल हैं। इन सभी ने परीक्षा के दौरान अनुकरणीय कार्यशैली और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय दिया। चेयरमैन हिम्मत सिंह ने बताया कि उन्होंने स्वयं निरीक्षण दौरे के दौरान इन कर्मचारियों के कार्य को देखा और उनकी मेहनत को देखते हुए उन्हें विशेष रूप से सम्मानित किया गया। इसके साथ ही, आयोग ने प्रत्येक जिले के उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक को भी प्रशंसा पत्र जारी किया है और सुझाव दिया कि वे अपने अधीनस्थ कर्मचारियों को भी प्रेरित करें।   हिम्मत सिंह ने आगे कहा कि जल्द ही एचएसएससी स्टाफ के अन्य कर्मचारियों को भी प्रशस्ति पत्र प्रदान किए जाएंगे, जिन्होंने सीईटी परीक्षा की प्रक्रिया को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उल्लेखनीय है कि 26 और 27 जुलाई को सीईटी परीक्षा का सफल आयोजन किया गया। इसमें कुल 13 लाख 48 हजार से अधिक अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड जारी किए गए थे। इस बड़ी परीक्षा को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए सभी कर्मचारियों की मेहनत और प्रतिबद्धता सराहनीय रही।  

उत्तर प्रदेश से ही है भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र : योगी आदित्यनाथ

    – जनता ही है हमारे लिए जनार्दन – 12 करोड़ से अधिक मतदाता त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में भाग लेते हैं, यह किसी भी राज्य की आबादी से अधिक है – 57,600 ग्राम पंचायतें और 14,000 से अधिक पार्षदों का चुनाव कराने का दायित्व निभा रहा है यूपी का निर्वाचन आयोग – लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत जनता है, जो केवल मतदाता नहीं बल्कि जनार्दन है – अब तक निर्वाचन आयोग किराए के भवन से काम कर रहा था, अब उसे मिलेगा अपना आधुनिक कार्यालय – भारत 2047 तक विकसित राष्ट्र बनेगा, विकसित उत्तर प्रदेश के बिना यह सपना अधूरा – उत्तर प्रदेश में लोकतंत्र को नई मजबूती देगा राज्य निर्वाचन आयोग का अपना भवन – ₹50 करोड़ की लागत से छह मंजिला भवन होगा अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस – लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत बनाने में निर्वाचन आयोग की भूमिका सबसे अहम लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को अवध विहार योजना में उत्तर प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग के आधुनिक कार्यालय भवन का शिलान्यास किया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि यह भवन पारदर्शी और सुव्यवस्थित निर्वाचन व्यवस्था को नई मजबूती देगा और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को और अधिक सशक्त बनाएगा। करीब 50 करोड़ की लागत से बनने वाला यह भवन 2618.59 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में फैला होगा और इसमें स्टिल्ट फ्लोर सहित कुल छह मंजिलें होंगी। भवन की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए छत पर 25,000 लीटर क्षमता का आरसीसी टैंक और भूमिगत स्तर पर एक लाख लीटर क्षमता का अंडरग्राउंड टैंक स्थापित किया जाएगा। इस अवसर पर सीएम योगी ने कहा कि जनता हमारे लिए केवल जतना नहीं बल्कि जनार्दन है। उन्होंने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश से ही भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। उत्तर प्रदेश से ही है भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र अपने संबोधन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राज्य निर्वाचन आयोग का स्वयं का भवन होना लोकतंत्र की मजबूती की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में पंचायत और स्थानीय निकाय चुनाव की विशाल प्रक्रिया को आयोग अब और बेहतर तरीके से संपन्न कर सकेगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था में अकेले 12 करोड़ से अधिक मतदाता मतदान में भाग लेते हैं, जो किसी भी अन्य राज्य की कुल आबादी से अधिक है। उत्तर प्रदेश में वर्तमान में 57,600 ग्राम पंचायतें, 826 क्षेत्र पंचायतें और 75 जिला पंचायतें हैं। वहीं, 17 नगर निगम, 199 नगर पालिकाएं और 544 नगर पंचायतें भी हैं, जिनके साथ 14,000 से अधिक पार्षदों के चुनाव की जिम्मेदारी भी राज्य निर्वाचन आयोग ही निभाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब भारत को दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र कहा जाता है तो उसमें उत्तर प्रदेश की यह व्यापक चुनावी प्रक्रिया अहम भूमिका निभाती है। जनता की आवाज को सुनना और महत्व देना ही जनप्रतिनिधियों का दायित्व योगी आदित्यनाथ ने लोकतंत्र की ताकत को रेखांकित करते हुए कहा कि जनता केवल मतदाता नहीं है बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की जनार्दन है। उसकी आवाज को सुनना और महत्व देना ही जनप्रतिनिधियों का दायित्व है। यदि कोई जनप्रतिनिधि जनता की अपेक्षाओं की अनदेखी करता है तो पांच साल बाद जनता उसे नकार देती है। यही लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति है और इसी व्यवस्था ने भारत को एक सशक्त राष्ट्र के रूप में खड़ा किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य रखा गया है और इसके लिए विकसित उत्तर प्रदेश की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं और निर्वाचन व्यवस्था का मजबूत होना ही इस दिशा में सबसे बड़ी गारंटी है। नए भवन के निर्माण से आयोग को कामकाज में और गति मिलेगी उन्होंने कहा कि अब तक राज्य निर्वाचन आयोग किराए के भवन से कामकाज कर रहा था, जिससे कई प्रकार की कठिनाइयां आती थीं, लेकिन अब नए भवन के निर्माण से आयोग को कामकाज में और गति मिलेगी। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि राजकीय निर्माण निगम 18 महीनों से भी कम समय में इस छह मंजिला आधुनिक भवन का निर्माण पूरा कर देगा। इसके बाद उत्तर प्रदेश देश के उन चुनिंदा राज्यों में शामिल होगा जिनके पास निर्वाचन आयोग का स्वयं का भवन होगा। नये भवन में होंगी ये सुविधाएं भवन की विशेषताओं की बात करें तो परिसर में रोड पाथवे, ओपन पार्किंग और रेन वाटर हार्वेस्टिंग की सुविधा उपलब्ध होगी। 25 के.एल.डी. क्षमता का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) लगाया जाएगा। पूरे भवन में सुरक्षा के लिए सीसीटीवी सिस्टम होगा। कर्मचारियों और आगंतुकों की सुविधा के लिए 13 यात्री क्षमता वाली दो लिफ्ट और 8 यात्री क्षमता वाली एक लिफ्ट लगाई जाएगी। इसके साथ ही आंतरिक विद्युतीकरण और पावर वायरिंग की अत्याधुनिक व्यवस्था भी की जाएगी। यह भवन न केवल निर्वाचन आयोग के कामकाज को गति देगा बल्कि तकनीक और सुविधाओं से लैस होकर एक मॉडल ऑफिस के रूप में भी उदाहरण प्रस्तुत करेगा। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर, राज्य निर्वाचन आयुक्त राजन प्रताप सिंह, यूपी महिला आयोग की अध्यक्ष, एससी-एसटी आयोग की अध्यक्ष, पंचायती राज्य आयोग के अधिकारीगण और अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे। भवन की विशेषताएं – परिसर में रोड पाथवे, ओपन पार्किंग और रेन वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था – 25 के.एल.डी. क्षमता का एस.टी.पी. (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) – पूरे भवन में सीसीटीवी सिस्टम से सुरक्षा – कर्मचारियों और आगंतुकों के लिए 13 यात्री क्षमता वाली दो लिफ्ट और 8 यात्री क्षमता वाली एक लिफ्ट – आंतरिक विद्युतीकरण और पावर वायरिंग की आधुनिक व्यवस्था

इस दिशा में तर्पण करने से पितरों की कृपा प्राप्त, खुलेगा सुख-समृद्धि का मार्ग

श्राद्ध पक्ष, जिसे पितृ पक्ष भी कहा जाता है, हिंदू पंचांग के अनुसार आश्विन मास की पूर्णिमा से अमावस्या तक का समय होता है। यह समय पितरों को श्रद्धांजलि अर्पित करने और उनके आशीर्वाद प्राप्त करने का होता है। इस दौरान तर्पण या श्राद्ध करने के विशेष दिशा निर्देश भी होते हैं, जो वास्तु शास्त्र के अनुसार महत्वपूर्ण होते हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार, श्राद्ध पक्ष के दौरान तर्पण करते समय उत्तर दिशा की ओर मुंह करके बैठना चाहिए। इसका कारण यह है कि उत्तर दिशा को पितरों और पूर्वजों की दिशा माना जाता है। उत्तर दिशा में ध्यान केंद्रित करने से पितरों को श्रद्धा और सम्मान का अहसास होता है, जो कि उन्हें आर्शीवाद देने की ओर प्रेरित करता है। उत्तर दिशा में तर्पण करने का एक महत्वपूर्ण कारण यह है कि उत्तर दिशा की ओर इशारा करते हुए तर्पण करने से पूजा स्थल की पवित्रता बनी रहती है। इस दिशा की ओर मुंह करके तर्पण करने से वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और पितरों के प्रति सम्मान और श्रद्धा प्रकट होती है। उत्तर दिशा को ज्ञान और समृद्धि की दिशा भी माना जाता है इसलिए इस दिशा की ओर मुंह करके तर्पण करने से पितरों के आशीर्वाद के साथ-साथ पारिवारिक समृद्धि और सुख-शांति की प्राप्ति होती है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, तर्पण करते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि पूजा स्थल स्वच्छ और पवित्र हो। इसके अलावा, तर्पण के समय सही दिशा का पालन करने से परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है और पितर भी अपने संतोष और आशीर्वाद से परिवार को लाभ पहुंचाते हैं। इसलिए उत्तर दिशा की ओर मुंह करके तर्पण करना श्राद्ध पक्ष में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

आम आदमी पार्टी को गुजरात में बड़ा झटका, रावल ने छोड़ी पार्टी

अहमदाबाद गुजरात में विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी आम आदमी पार्टी (आप) को बड़ा झटका लगा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता चेतन रावल ने अचानक इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया है। रावल ने अपने इस्तीफे में व्यक्तिगत कारणों का हवाला दिया है, लेकिन वास्तविक वजहों को लेकर अटकलों को दौर शुरू हो गया है। गुजरात में पार्टी के मुखिया इशुदान गढ़वी को भेजे इस्तीफे में रावल ने कहा है कि उन्होंने व्यक्तिगत कारणों की वजह से तत्काल प्रभाव से आम आदमी पार्टी से से इस्तीफा दे दिया है। चेतन रावल पूर्व टीवी एक्टर हैं और गुजरात के अहमदाबाद में प्रमुख राजनीतिक शख्सियत हैं। 2022 में उन्होंने कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा देकर 'आप' का दामन थाम लिया था। वह अहमदाबाद शहर के कांग्रेस अध्यक्ष और राज्य महासचिव भी रह चुके हैं। वह असारवा और खाडिया सीट से विधानसभा चुनाव भी लड़ चुके हैं। गौरतलब है कि रावल के पिता प्रबोध रावल भी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे हैं और गुजरात गृह मंत्री भी रह चुके हैं। पिता के नक्शेकदम पर चलते हुए वह कांग्रेस में सक्रिय हुए और अहमदाबाद शहर के कांग्रेस अध्यक्ष बने। बाद में खुद को दरकिनार बताते हुए वह आम आदमी पार्टी में शामिल हो गए थे। अब तीन साल बाद उन्होंने अरविंद केजरीवाल की अगुआई वाली पार्टी छोड़ दी है। रावल का अगला कदम क्या होगा, इसको लेकर उन्होंने कोई खुलासा नहीं किया है।  

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मेजर ध्यानचंद की जयंती पर उनकी स्मृतियों को किया नमन

  हर कमिश्नरी में स्पोर्ट्स कॉलेज और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की हो रही स्थापनाः सीएम ग्राम पंचायत से जनपद स्तर तक प्रदेश सरकार कर रही खेल अवसंरचना का विस्तारः मुख्यमंत्री खेल दिवस पर सीएम योगी ने 88 पदक विजेता खिलाड़ियों का किया सम्मान कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने सहायक खेल प्रशिक्षकों को प्रदान किया नियुक्ति पत्र विभिन्न जनपदों में खेल अवस्थापना सुविधाओं के निर्माण का किया लोकार्पण लखनऊ, राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद जी को नमन करते हुए कहा कि हर खिलाड़ी अपने आप में समाज के लिए एक हीरो होता है। हर नागरिक को एक खिलाड़ी की तरह अपने राष्ट्र के प्रति समर्पण भाव से आगे बढ़ने, खेल जीवन के अनुशासन को बनाए रखने, समन्वय स्थापित करने और जीवन में उत्कृष्टता के लक्ष्य को प्राप्त करने के प्रयासों का हिस्सा होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक विजेता उत्तर प्रदेश के 88 खिलाड़ियों को पुरस्कार राशि प्रदान की और सहायक खेल प्रशिक्षकों को नियुक्ति पत्र वितरित किए। समारोह में खेल मंत्री ने मुख्यमंत्री को अंगवस्त्र पहनाकर और मोमेंटो देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने पूर्व ओलंपियन और अर्जुन पुरस्कार प्राप्त खिलाड़ियों सहित नेशनल गेम्स में मेडल जीतने वाले खिलाड़ियों का सम्मान किया। इस दौरान उन्होंने विभिन्न जनपदों में खेल अवस्थापना सुविधाओं के निर्माण का लोकार्पण भी किया। मेजर ध्यानचंद को नमन मुख्यमंत्री ने कहा कि जब मेजर ध्यानचंद जी की बात आती है तो हर भारतीय के मन में हॉकी की स्टिक नजर आने लगती है। 1928, 1932 और 1936—तीन ओलंपिक में स्वर्ण पदक दिलाकर उन्होंने भारत की हॉकी को वैश्विक पहचान दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश का सबसे प्रतिष्ठित खेल रत्न पुरस्कार किसी नेता नहीं, बल्कि मेजर ध्यानचंद के नाम पर समर्पित किया गया। उत्तर प्रदेश के लिए यह इसलिए भी गौरव की बात है क्योंकि यह उनकी जन्मभूमि है। उनकी स्मृति में मेरठ में प्रदेश की पहली स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी का नामकरण मेजर ध्यानचंद जी के नाम पर किया गया है और इस सत्र से वहां पाठ्यक्रम प्रारंभ हो गया है। खेलों में नई क्रांति की शुरुआत मुख्यमंत्री ने विजयंत खंड स्थित मोहम्मद शाहिद हॉकी स्टेडियम में स्पोर्ट्स हॉस्टल बनाम स्पोर्ट्स कॉलेज का रोमांचक हॉकी मैच भी देखा। उन्होंने कहा कि यह खेल कितना फास्ट है, कितनी ऊर्जा और टीमवर्क मांगता है। यह मैच इसका जीवंत उदाहरण है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में खेलो इंडिया से फिट इंडिया मूवमेंट तक, सांसद एवं विधायक स्तर की प्रतियोगिताओं तक, देश में खेलों की एक नई क्रांति आई है। प्रदेश सरकार ने नई खेल नीति लागू की है, जिससे खिलाड़ियों को मंच, कोच और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध हो रहा है। ग्राम से जनपद तक खेल ढांचा मुख्यमंत्री ने कहा कि हर कमिश्नरी में एक स्पोर्ट्स कॉलेज की स्थापना की जा रही है। विभिन्न खेलों के लिए इन कॉलेजों में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस विकसित किए जाएंगे। पूर्व ओलंपियन/कॉमनवेल्थ/एशियाड/नेशनल गेम्स मेडलिस्टों को कोच बनाकर नई प्रतिभाओं को तराशा जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि हर ग्राम पंचायत में खेल का मैदान, हर विकासखंड पर मिनी स्टेडियम और हर जनपद में एक स्टेडियम निर्माण की कार्यवाही युद्धस्तर पर जारी है। ओपन जिम के निर्माण व युवा कल्याण विभाग के माध्यम से युवक मंगल दल और महिला मंगल दल को स्पोर्ट्स किट उपलब्ध कराई जा रही हैं। यूपी की हॉकी विरासत को किया याद मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश ने हॉकी में अनेक दिग्गज दिए हैं। मेजर ध्यानचंद, के. डी. सिंह ‘बाबू’, मोहम्मद शाहिद, रवींद्र पाल, सैयद अली, डॉ. आर. पी. सिंह, सुजीत कुमार, रजनीश मिश्रा, मोहम्मद शकील, देवेश चौहान, एम. पी. सिंह, जगवीर सिंह, विवेक सिंह, राहुल सिंह, तुषार खांडेकर, दानिश मुर्तजा, ललित उपाध्याय, राजकुमार पाल, रंजना श्रीवास्तव, मंजू बिष्ट, पुष्पा श्रीवास्तव, रजनी जोशी, वंदना कटारिया, रितुषा कुमारी आर्या जैसे हॉकी खिलाड़ियों प्रदेश और देश का गौरव बढ़ाया। पेरिस ओलंपिक में भारतीय टीम को मेडल दिलाने वाले ललित उपाध्याय और राजकुमार पाल उत्तर प्रदेश की ही देन हैं। खेल से बनता है सशक्त भारत सीएम ने कहा कि खाली दिमाग शैतान का घर होता है। व्यक्ति यदि खेलकूद से जुड़ेगा तो राष्ट्र के प्रति समर्पण का भाव विकसित होगा। शरीर के साथ मन भी तंदुरुस्त रहेगा और वह स्वस्थ शरीर-स्वस्थ मस्तिष्क के साथ सशक्त भारत के निर्माण में योगदान देगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय खेल दिवस के उपरांत 17 सितंबर से 2 अक्टूबर के बीच देशभर में सांसद खेलकूद प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी। इससे पूर्व विधायक खेलकूद प्रतियोगिताएं खेल एवं युवा कल्याण विभाग आयोजित कराएगा। खिलाड़ियों को मिल रहा रोजगार मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में सरकारी नौकरियों में खिलाड़ियों के लिए 2 प्रतिशत हॉरिजेंटल आरक्षण लागू किया गया है। अब तक 500 खिलाड़ियों को उत्तर प्रदेश पुलिस बल और अन्य विभागों में समाहित किया जा चुका है। उत्तर प्रदेश के खेल सचिव सुहास एल. वाई. का जिक्र करते हुए सीएम योगी ने कहा कि वह स्वयं पैरालंपिक में मेडल जीत चुके खिलाड़ी हैं, जो खिलाड़ियों के हित में नीतिगत सुधार कर रहे हैं। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री गिरीश चंद्र यादव, लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल, सांसद ब्रजलाल, संजय सेठ, विधायक जय देवी, योगेश शुक्ला, इंजीनियर अवनीश कुमार सिंह समेत अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।   सीएम योगी ने हॉकी स्टिक उठाई, शॉट लगाया और फिटनेस की शपथ दिलाई सीएम योगी ने कार्यक्रम के दौरान हॉकी स्टिक से गेंद को हिट करके स्टेट हॉकी प्रतियोगिता का भी शुभारंभ किया। यही नहीं, उन्होंने कुछ देर तक हॉकी मैच भी देखा। इससे पहले मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों को खेल गतिविधियों में सम्मिलित होने और फिटनेस के प्रति जागरूक रहने की शपथ भी दिलाई। उन्होंने शपथ दिलाई, 'मैं शपथ लेता हूं कि मैं खुद को सार्वजनिक रूप से फिट, मानसिक रूप से मजबूत और भावनात्मक रूप से संतुलित बनाऊंगा। मैं अपने परिवार और दोस्तों को हर दिन एक खेल और फिटनेस गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करूंगा। मैं हर खेल में उत्कृष्टता, सम्मान और खेल के अलौकिक मूल्यों को आत्मसात करने का प्रयास करूंगा।' मुख्यमंत्री ने सभी खिलाड़ियों का परिचय भी प्राप्त किया और उनके खेल और पढ़ाई के विषय में भी बात की। मैच के अंत … Read more

सुप्रीम कोर्ट में केंद्र का दावा- बंगाल में सुनियोजित घुसपैठ का खेल

कोलकाता  पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बीते कुछ सप्ताह में लगातार यह आरोप लगाए हैं कि केंद्र सरकार के द्वारा बंगाली भाषाओं को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने इसे ‘भाषाई आतंकवाद’ का नाम भी दिया है। इस बीच केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में बड़ा दावा किया है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को कहा है कि पश्चिम बंगाल और आस-पास के कुछ क्षेत्रों में व्यवस्थित तरीके से घुसपैठ करवाया जा रहा है और इस काम के लिए कई एजेंट भी सक्रिय हैं। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में भारत के नागरिक ना होने के संदेह में बंगाली भाषी मुस्लिम प्रवासियों को हिरासत में लिए जाने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई चल रही थी। इस दौरान केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने शुक्रवार को कहा कि सिर्फ बंगाल में ही नहीं बल्कि कई इलाकों में घुसपैठ हो रहा है। उन्होंने रोहिंग्याओं का भी जिक्र किया। तुषार मेहता ने आगे बताया," रोहिंग्याओं के साथ-साथ एक व्यवस्थित गिरोह भी है। कई आतंकवादी भी घुसपैठ कर रहे हैं।" वहीं याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वकील प्रशांत भूषण ने सुनवाई के दौरान कहा कि एक महिला को बिना जांच किए देश से बाहर निकाल दिया गया। उन्होंने कहा, “वह गर्भवती है। सिर्फ इसलिए कि वह बंगाली बोलती है, सरकार कह रही है कि वह एक बांग्लादेशी है। इस देश में कोई भी अधिकारी किसी व्यक्ति को बिना यह जांच किए सीमा पार कैसे धकेल सकता है कि वह विदेशी है या नहीं? ऐसा करना अंतर्राष्ट्रीय कानून के खिलाफ है।” केंद्र सरकार से सवाल इसके बाद जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाला बागची की पीठ ने केंद्र सरकार से सवाल किया कि क्या लोगों को भाषा के आधार पर उठाया जा रहा है। पर एसजी मेहता ने जवाब दिया कि भाषा के आधार पर किसी को निशाना नहीं बनाया जा रहा है। कोर्ट ने केंद्र से पूछा, "दो महत्वपूर्ण मसले हैं। एक राष्ट्र की सुरक्षा और अखंडता, और यह सर्वोपरि है। दूसरा प्रश्न विरासत और संस्कृति का है। पंजाब और बंगाल दोनों जगह भाषा एक ही है पर सीमा पर विभाजन है। हम चाहते हैं कि आप अपना रुख स्पष्ट करें।" इस पर जवाब देते हुए SG मेहता ने कहा कि फिर प्रभावित लोगों के बजाय कोई समूह ही सुप्रीम कोर्ट क्यों आते हैं? लोग व्यक्तिगत रूप से लोग क्यों नहीं आते? यह एक समस्या है। भारत दुनिया के अवैध प्रवासियों की जगह नहीं है। एक व्यवस्था होती है। उन्हें बताना होगा कि वे भारत में क्यों रह रहे हैं।"