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शराब खरीदते समय मारपीट: चाकू व बोतल से वार, तीन घायल

रायपुर  गंजपारा शराब भट्ठी में शनिवार शाम शराब की लाइन में धक्का-मुक्की को लेकर विवाद हो गया। विवाद इतना बढ़ा कि आरोपितों ने चाकू और बीयर की बोतल से हमला कर तीन लोगों को घायल कर दिया। पुलिस के अनुसार, छोटा रामनगर कबीर चौक निवासी तेजपाल चौहान शनिवार की शाम करीब पांच बजे अपने दोस्तों गितेश वर्मा और तोषण साहू के साथ गंजपारा शराब भट्ठी शराब लेने पहुंचा था। लाइन में लगे होने के दौरान गंजपारा निवासी अमन सोनी, लक्की गोप, दुर्गेश उर्फ दरवेश और तामू उर्फ तामेश्वर पहुंचे और पहले शराब लेने की बात कहकर तेजपाल को धक्का देकर पीछे करने लगे। मना करने पर आरोपितों ने तेजपाल को गालियां देते हुए चाकू से बांयी जांघ पर वार कर दिया, जिससे वह घायल हो गए और खून बहने लगा। बीच-बचाव करने आए तोषण साहू के सिर पर बीयर की बोतल मार दी, जिससे उनके सिर में गंभीर चोट आई। वहीं, गितेश वर्मा को कांच के टुकड़े से मारा गया, जिससे उसे भी चोट आई है।  

भूपेश बघेल को SC से झटका, ED मामले में कानून का पालन अनिवार्य

रायपुर  सुप्रीम कोर्ट ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग ऐक्ट (पीएमएलए) की धारा 44 के तहत जांच करने के प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारों को चुनौती देने वाली छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की याचिका पर विचार करने से सोमवार को इनकार कर दिया। देश की सबसे बड़ी अदालत ने उन्हें हाई कोर्ट जाने की नसीहत दी। जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने बघेल की याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए कहा कि इस प्रावधान में कुछ भी गलत नहीं है। पीठ ने साथ ही कहा कि अगर इसका (धारा 44) दुरुपयोग हो रहा है तो पीड़ित पक्ष हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं। पीठ की ओर से न्यायमूर्ति बागची ने कहा, 'दुर्भावना कानून में नहीं, बल्कि उसे दुरुपयोग में है।' कांग्रेस नेता ने पीएमएलए की धारा 44 के तहत ईडी को मूल शिकायत के बाद दर्ज की गई अन्य शिकायतों के आधार पर धन शोधन से संबंधित मामले में आगे की जांच के अधिकार को चुनौती दी थी। गौरतलब है कि ईडी छत्तीसगढ़ में बघेल के मुख्यमंत्री कार्यकाल में कथित तौर पर 2,000 करोड़ रुपए की शराब बिक्री से संबंधित धन शोधन के आरोपों की जाच कर रही है। केंद्रीय जांच एजेंसी का दावा है कि संबंधित मामले में अवैध रूप से कमीशन की वसूली की गई, जिससे सरकारी खजाने को काफी नुकसान हुआ।

एक पेड़ माँ के नाम अभियान में पर चल रहा है पौध रोपण कार्यक्रम

भोपाल  प्रदेश के शासकीय विद्यालयों में 'एक पेड़ माँ के नाम 2.0' पौध रोपण अभियान 5 जून 2025 से स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा चलाया गया है। अभियान में अब तक करीब 9 लाख 90 हजार पौध रोपित किये जा चुके हैं। लगाए गये पौधों को मिशन लाइफ पोर्टल पर प्रदर्शित भी किया गया है। प्रदेश में विद्यालयों के आस-पास और परिसर में पूरी योजना के साथ पौध रोपण के निर्देश दिये गये है। विद्यालयों के प्राचार्यों को लगाए गये पौधों की सुरक्षा के समुचित उपाय किये जाने के निर्देश दिये गए है। प्रदेश में 92 हजार से अधिक शासकीय स्कूल हैं जहां ये अभियान चलाया जा रहा है। पौध रोपण कार्यक्रम आगामी 30 सितम्बर तक विद्यालयों में ईको क्लब के माध्यम से संचालित होगा। मिशन लाइफ का गठन शासकीय विद्यालयों में क्लब फॉर मिशन लाइफ का गठन किया गया है। इसके अंतर्गत 15 हजार से अधिक ईको क्लब का गठन किया गया है। ईको क्लब के माध्यम से पर्यावरण से जुड़े विषयों, निबंध प्रतियोगिता और जल शक्ति अभियान गतिविधियाँ प्रमुख रूप से आयोजित की जा रही हैं। राज्य स्तरीय शालेय खेल कैलेण्डर जारी लोक शिक्षण संचालनालय ने शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिये शालेय खेल कैलेण्डर जारी किया है। कैलेण्डर में राज्य स्तरीय खेल प्रतियोगिताएँ और स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के द्वारा राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं की तिथियाँ घोषित की गई हैं। इस संबंध में संभागीय संयुक्त संचालक लोक शिक्षण और समस्त जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी किये गये है। खेल प्रतियोगिताएँ 8 सितम्बर से शुरू होंगी जो 10 दिसम्बर तक 2025 निर्धारित तिथियों के अनुसार चलेंगी। इन प्रतियोगिताओं में बॉक्सिंग, जूडो, व्हालीबॉल, फुटबॉल, टेनिस, किक्रेट, जिमनास्टिक, मलखंब, कराते, शतरंग, कबड्डी, तलवार बाजी, एथलेटिक्स, बास्केट वॉल, हॉकी के साथ अन्य खेल भी शामिल किये गये हैं। ये खेल प्रतियोगिताएँ आयु वर्ग के हिसाब से बालक और बालिकाओं के लिये होगी। राज्य स्तरीय जवाहर लाल नेहरू हॉकी प्रतियोगिता प्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जवाहर लाल नेहरू हॉकी शालेय प्रतियोगिता की तिथियाँ भी तय कर दी गई है। जूनियर हॉकी टूर्नामेन्ट(15 वर्ष से कम आयु वर्ग) 8 अक्टूबर से 18 अक्टूबर तक, नेहरू बालिका हॉकी टूर्नामेंट (17 वर्ष से कम आयु वर्ग) 19 अक्टूबर से 30 अक्टूबर तक और नेहरू बालक हॉकी टूर्नामेंट (17 वर्ष से कम आयु वर्ग) 26 नवम्बर से 6 दिसम्बर 2025 तक तथा इससे जुड़ी राज्य स्तरीय प्रतियोगिता सिवनी में 24 से 30 अगस्त 2025 तक होंगी। इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी किये गये हैं।  

55 हजार से अधिक बच्चे हुए गुम, MP के बाणगंगा और लसूड़िया में सबसे ज्यादा मिसिंग केस

भोपाल  मध्य प्रदेश में गुमशुदा बच्चों को लेकर एमपी विधानसभा से बड़ी जानकारी सामने आई है, जो हैरान करने वाली भी है. क्योंकि पिछले चार साल में मध्य प्रदेश से 55 हजार से ज्यादा बच्चों के गुमशुदा होने के आंकड़े मिले हैं. यह जानकारी कांग्रेस विधायक और पूर्व मंत्री सचिन यादव के सवाल के जवाब में मिली है. सरकार की तरफ से यह माना गया है कि 2021 में 4 जुलाई से 2025 तक 59 हजार 365 बच्चे मध्य प्रदेश से गुमशुदा हुए हैं, जिनमें लड़कियों की संख्या ज्यादा है. यह आंकड़े हैरान करने वाले हैं, इनमें सबसे ज्यादा बच्चे भोपाल और इंदौर जैसे बड़े शहरों से गायब हुए हैं. जबकि इसमें कई दूसरे बड़े जिले भी शामिल हैं.  53 हजार को खोजा गया  बता दें कि मध्य प्रदेश में पिछले चार साल में 48,274 लड़कियां और 11,091 लड़के गुमशुदा हुए हैं. जिससे यह आंकड़े चौंकाने वाले जरूर है. हालांकि सरकार की तरफ से यह जानकारी भी दी गई जो बच्चें गुमशुदा हुए थे, उनमें से 53 हजार बच्चों को पुलिस ने खोज निकाला है, जो कुल बच्चों का 90 फीसदी है. लेकिन 6035 बच्चों की तलाश अभी भी पुलिस को जारी है.  इंदौर में तो वह हमारे पास बहुत अच्छे से रह रही थी। 8वीं के बाद उसने पढ़ाई नहीं की। मैं अपने बच्चे का एडमिशन कराने स्कूल गई थी। पिता काम पर गए थे। उसने कुछ बोला भी नहीं और चली गई। हमारी बेटी कहीं भी रहे, बस हमें ये पता चल जाए कि वह वहां ठीक है। अगर वह दूसरी जगह भी रहना चाहती है तो हमे कोई दिक्कत भी नहीं है। दूसरी बार उसे कहा ढूंढें, कहां जाएं, किससे पूछें। सबसे बड़ी दिक्कत तो ये है कि ढूंढें तो ढूंढें कहां। मोबाइल नंबर भी नहीं है। हमारे सामने किसी से बात भी नहीं करती थी…। प्रदेश में सबसे ज्यादा गुमशुदगी के मामले इंदौर से प्रदेश का ये पहला मामला नहीं है जब कोई बच्ची अचानक ही घर से लापता हुई हो और वर्षों तो उसका कोई सुराग न मिले। दरअसल, विधानसभा में कांग्रेस विधायक सचिन यादव द्वारा पूछे गए सवाल में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। विधायक यादव के सवालों पर मिले जवाब के मुताबिक मप्र में बीते साढे़ चार सालों में करीब 58 हजार से ज्यादा बच्चे गुम हुए हैं। इनमें 47 हजार बेटियां और 11 हजार बेटे गायब हुए हैं। बच्चों के गुम होने की जो जानकारी विधानसभा में दी गई है। उसमें ये सामने आया है कि सबसे ज्यादा बच्चे इंदौर से गायब हो रहे हैं। इंदौर शहर के जिन थानों से बच्चे गायब हो रहे हैं उनमें, बाणगंगा थाना क्षेत्र से सबसे ज्यादा 449 बेटियां गुम हुई हैं। दूसरे नंबर पर लसूडिया से 250, चंदन नगर से 220, आजाद नगर से 178, द्वारका पुरी से 168 बेटियां गुम हुई हैं। बच्चियों के गुम होने के मामले में धार जिला दूसरे नंबर पर है। सचिन यादव ने लगाया था सवाल  मध्य प्रदेश में बच्चों के गुमशुदा होने से जुड़ा सवाल कांग्रेस विधायक सचिन यादव ने लगाया था. उन्होंने कहा 'चार साल में 60 हजार से ज्यादा बच्चे मध्य प्रदेश में गुमशुदा हुए हैं, जिसमें 48 हजार के करीब बेटियां हैं. अकेले भोपाल में 2500 से 3000 के बीच यह आंकड़े हैं. कांग्रेस विधायक ने कहा कि यह चिंता का विषय हैं और प्रशासनिक तंत्र पर भी सवाल खड़े करता है.  क्योंकि राजधानी भोपाल और इंदौर जैसे बड़े शहरों में भी सुरक्षा पर सवाल खड़े होते हैं.  भोपाल-इंदौर में सबसे ज्यादा मिसिंग  बता दें कि भोपाल और इंदौर में सबसे ज्यादा बच्चों के गायब होने की बात सामने आई है. भोपाल में 2,980 बच्चे गायब हुए हैं, जिनमें 1,804 लड़कियां और 1,174 लड़के शामिल हैं. वहीं इंदौर की बात की जाए तो यहां चार साल में 4,574 बच्चे गायब हुए हैं, जिनमें 3,560 लड़कियां और 1,014 लड़के शामिल हैं. जबकि दूसरे जिलों में भी यह आंकड़े बढ़े हैं. ऐसे में प्रदेश के लिए यह चिंता का विषय बना हुआ है.  बता दें कि कई गुमशुदा बच्चों की पुलिस में रिपोर्ट भी दर्ज हुई हैं. लेकिन विधानसभा के मानसून सत्र में निकलकर आई यह जानकारी हैरान करने वाली जरूर है. बता दें कि मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में बीजेपी और कांग्रेस विधायकों के बीच इस बार तीखी तकरार दिख रही है.   जानिए इंदौर से लापता बच्ची के परिवार की हालत लसूडिया थाना क्षेत्र के राहुल गांधी नगर में रहने वाले एक परिवार की 16 साल की बेटी घर से अचानक लापता हो गई। परिवार ने इंदौर के साथ ही जिस गांव में वे रहते थे, वहां भी उसकी तलाश की, लेकिन बेटी का पता नहीं चला। हालत ये हो गई कि बेटी के गम में माता-पिता का खाना और काम पर जाना तक छूट गया था। उसे लापता हुए 1 महीना हो गए। मजबूरी में माता-पिता दोनों ही अपने-अपने काम पर जाने तो लगे, लेकिन उनकी आंखें हमेशा बेटी को तलाशती रहती हैं। पुलिस ने शिकायत दर्ज करने से मना किया लापता बच्ची के पिता ने बताया कि उनकी बेटी की उम्र 16 साल है। उसके लापता होने का बाद उसे जहां-जहां संभव हो सकता था वहां उसकी तलाश की, लेकिन उसका पता नहीं चला। रिश्तेदारों के यहां भी पूछ लिया। जब उसका कहीं पता नहीं चला तो मैं पुलिस की मदद लेने के लिए थाने गया। अब जानिए किस जिले के किन 5 थाना क्षेत्रों से सबसे ज्यादा बेटियां गुम हुईं ग्वालियर जिला: (कुल गुम हुए बच्चे- 1857,लड़कियां-1268, लड़के-589) ग्वालियर जिले में सबसे ज्यादा ग्वालियर थाने से 106 बच्चियां गुम हुई हैं। दूसरे नंबर पर डबरा से 90, मुरार से 88 जनकगंज से 86, बहोड़ापुर से 72 बच्चियां गुम हुई हैं। शिवपुरी जिला: (गुम हुए कुल बच्चे- 960, बेटियां- 764 बेटे- 196) शिवपुरी जिले में पिछोर थाने से सबसे ज्यादा 88 बच्चियां गुम हुई हैं। कोतवाली थाना क्षेत्र से 80, करेरा से 55, बैराड़ से 49 कोलारस और देहात थाना क्षेत्रों से 46- 46 बेटियां गुम हुई हैं। गुना जिला; (कुल गुम हुए बच्चे: 795, बेटियां – 662, बेटे – 133) गुना जिले में सबसे ज्यादा 98 बच्चियां कैंट थाना क्षेत्र से गुम हुई हैं। दूसरे नंबर पर कोतवाली से … Read more

भारतीय महिला फुटबॉल टीम का ऐतिहासिक कारनामा, एशियाई कप क्वालीफिकेशन पर मिला इनाम

यांगून  भारत की अंडर-20 महिला फुटबॉल टीम ने रविवार, 10 अगस्त को यांगून के थुवुन्ना स्टेडियम में अपने अंतिम ग्रुप डी मुकाबले में मेजबान म्यांमार को 1-0 से हरा दिया. इस जीत के दम पर भारत ने दो दशकों में पहली बार एएफसी (एशियन फुटबॉल कंफेडरेशन) अंडर-20 महिला एशियाई कप के लिए क्वालीफाई किया है. भारत ने पिछली बार 2006 में एएफसी अंडर-20 महिला एशियाई कप के लिए क्वालीफाई किया था. भारतीय महिला फुटबॉल टीम का शानदार प्रदर्शन भारत की अंडर-20 महिला टीम ने टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन किया और ग्रुप डी के क्वालीफिकेशन अभियान में अपराजित रही. इस अभियान में उन्होंने इंडोनेशिया (0-0) और तुर्कमेनिस्तान (7-0) के खिलाफ मैच खेले. इसके बाद उन्होंने मेजबान म्यांमार को 1-0 हराया. इस अभियान में उन्होंने एक भी गोल नहीं खाया. एएफसी अंडर-20 महिला एशियाई कप क्वालीफायर एएफसी अंडर-20 महिला एशियाई कप 2026 के लिए क्वालीफायर में कुल 32 टीमें 11 स्थानों के लिए प्रतिस्पर्धा कर रही हैं. मेजबान थाईलैंड ने होस्ट होने की वजह से पहले ही क्वालीफिकेशन हासिल कर लिया है. क्वालीफायर में, टीमों को चार-चार के आठ समूहों में विभाजित किया गया है. आठ समूह विजेता और सभी समूहों में से तीन सर्वश्रेष्ठ दूसरे स्थान पर रहने वाली टीमें मुख्य प्रतियोगिता के लिए क्वालीफाई करेंगी, जो अगले साल अप्रैल में 1 से 18 तक एएफसी अंडर-20 महिला एशियाई कप में आमने सामने होंगी. AIFF ने किया इनाम का ऐलान अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (AIFF ) ने अंडर-20 महिला राष्ट्रीय टीम के शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें 25,000 अमेरिकी डॉलर (लगभग 22 लाख रुपये) का इनाम देने की घोषणा की है. एआईएफएफ ने भारतीय खेल प्राधिकरण (एसएआई) के सहयोग से महिला फुटबॉल में जमीनी और युवा ढांचे को मजबूत करने के लिए कई पहल की हैं. ऐसी ही एक पहल है अस्मिता महिला फुटबॉल लीग, जिसके तहत 2023 से 2025 तक देश भर में अंडर-13, अंडर-15 और अंडर-17 स्तरों पर 155 लोगों का सफल आयोजन हुआ. 2023-24 के संस्करण में 6,305 जूनियर खिलाड़ियों ने भाग लिया, जो 2024-25 में बढ़कर 8,658 हो गई. इन प्रयासों के परिणामस्वरूप, भारत में पंजीकृत महिला फुटबॉलरों की संख्या में पिछले एक साल में 232% की वृद्धि हुई है. AIFF भारतीय खिलाड़ियों की हर संभव मदद करेगी एआईएफएफ ने एक बयान में कहा, "भविष्य को देखते हुए, एआईएफएफ अप्रैल 2026 में थाईलैंड में होने वाले एएफसी अंडर-20 महिला एशियाई कप 2026 के लिए सर्वोत्तम संभव तैयारी सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. महासंघ विस्तारित प्रशिक्षण शिविरों की सुविधा प्रदान करने और टीम के लिए उच्च-गुणवत्ता वाला अंतर्राष्ट्रीय अनुभव सुनिश्चित करने के लिए सभी हितधारकों के साथ मिलकर काम करेगा.' फेडरेशन ने आगे कहा, 'महासंघ का उद्देश्य न केवल खिलाड़ियों को प्रशिक्षण के माध्यम से शारीरिक और मानसिक रूप से फिट बनाना है, बल्कि उन्हें एशिया की सर्वश्रेष्ठ टीमों के खिलाफ खेलने के लिए तैयार करना भी है. एआईएफएफ के लिए तैयारी मैच खेलने के लिए अच्छे प्रतिद्वंद्वियों की व्यवस्था करने के अवसरों पर भी विचार किया जा रहा है.'

प्रोटोकॉल में भारी चूक: दूषित डीजल से सीएम काफिले की कारें बंद, पेट्रोल पंप संचालक पर कार्रवाई

रतलाम  रतलाम में मुख्यमंत्री के प्रोटोकॉल से जुड़ी गाड़ियों में मिलावटी डीजल भरने का मामला अब जांच रिपोर्ट से स्पष्ट हो गया है। 27 जून को एमपी राइज 2025 कार्यक्रम के दौरान सीएम के प्रोटोकॉल में शामिल 19 इनोवा कारें डोसीगांव स्थित भारत पेट्रोलियम के मेसर्स से रिफ्लिंग कराई गई थी।  रतलाम जिला प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए पेट्रोल पंप को सील कर तीन डीजल सैंपल लिए, जिन्हें BPCL लैब मांगलिया भेजा गया। अब आई जांच रिपोर्ट में डीजल में पानी की मिलावट की पुष्टि हुई है। पंप संचालक शक्ति बुंदेल और पंप मैनेजर अमरजीत डाबर के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। जांच में पाया गया कि पंप के डीजल टैंक में 197.43 लीटर पानी मौजूद था, और स्टॉक में 720 लीटर का अंतर मिला। घटना के बाद से पेट्रोल पंप अब तक बंद है और आगे की कार्रवाई पुलिस के हाथों में है। बता दें कि 26, जून की रात सीएम के काफिले में शामिल होने के लिए प्राइवेट गाड़ियां इंदौर से रतलाम आई थीं। डोसीगांव में स्थित भारत पेट्रोलियम के मेसर्स शक्ति फ्यूल्स पाईंट पर 19 इनोवा कारों में एक साथ डीजल भराया। डीजल भराने के बाद कारे कुछ दूरी तक ही चली और बंद हो गई। इन सभी को धक्का मारकर पेट्रोल पंप पर लाकर खड़ा किया था। जब प्रशासन को इस बारे में जानकारी लगी तो हड़कंप मच गया। अधिकारी पेट्रोल पंप पहुंचे। गाड़ियों के टैंक खुलवाकर डीजल खाली कराया तो उसमें डीजल के साथ पानी निकला। मामला सीएम से जुड़ा होने के कारण उसी रात पेट्रोल पंप को सील कर दिया। रात में ही प्रशासन ने इंदौर से अन्य गाड़ियों का इंतजाम किया। दूसरी गाड़िया इंदौर से रतलाम पहुंची। 27 जून को 3 सैंपल जांच के लिए भेजे, रिपोर्ट आई मामला सामने आने के बाद 27 जून को जिला आपूर्ति विभाग ने डीजल के 3 सैंपल लेकर भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) के मांगलिया लेब में टेस्ट के लिए भेजे गए। करीब एक पखवाड़ा बाद लेब से टेस्ट रिपोर्ट मिल गई है। जिला आपूर्ति विभाग ने आगे की कार्रवाई को लेकर थाना औद्योगिक क्षेत्र को जांच रिपोर्ट सौंप दी है। जिला आपूर्ति अधिकारी आनंद गोले की रिपोर्ट पर 27 जून को थाना औद्योगिक क्षेत्र ने पेट्रोल पंप संचालक शक्ति बुंदेल पति हेमराज बुंदेल और पंप मैनेजर अमरजीत पिता बल्लू डाबर के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की धारा 3/7 के तहत केस दर्ज किया था। दर्ज रिपोर्ट के अनुसार जांच में पाया कि पंप संचालक ने लापरवाही बरतते हुए वाहनों में अपमिश्रित डीजल भरा गया, जो कि उन्हें नहीं करना चाहिए था। तब से लेकर आज तक पेट्रोल पंप बंद है। पेट्रोल पंप संचालक जनसुनवाई में कलेक्टर के पास भी पहुंचे थे, ताकि पेट्रोल पंप को चालू कराया जा सके। जिला आपूर्ति अधिकारी ने टाली जवाबदेही जांच रिपोर्ट के संबंध में जब दैनिक भास्कर ने जिला आपूर्ति अधिकारी आनंद गोले से जानकारी मांगी, तो वे स्पष्ट जवाब देने से बचते नजर आए। उन्होंने शुरुआत में कहा कि रिपोर्ट सीधे पुलिस को भेज दी गई है। जब रिपोर्ट की विस्तृत जानकारी मांगी गई तो उन्होंने मामले को पुलिस की जांच से जोड़ते हुए कहा कि उनका काम केवल सैंपल लेकर जांच के लिए भेजना था। विभागीय जिम्मेदारी की बात उठाने पर उन्होंने कैमरे के सामने आने से बचते हुए स्वीकार किया कि जांच में डीजल में पानी की मिलावट पाई गई है। लेकिन जब आगे की कार्रवाई के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने इसे पुलिस का मामला बताकर अपनी जिम्मेदारी से किनारा कर लिया। विशेष रूप से चिंताजनक यह है कि मामला मुख्यमंत्री के काफिले से जुड़ा होने के बावजूद जिला आपूर्ति अधिकारी ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। यहां तक कि उन्होंने अपने वरिष्ठ अधिकारियों को भी जांच रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की। प्रशासन का दावा: गाड़ियां सीएम काफिले की नहीं मामले में ड्राइवरों और प्रशासन के बयानों में विरोधाभास सामने आया है। जहां ड्राइवरों ने गाड़ियां बंद होने पर बताया कि वे इंदौर से सीएम के काफिले में शामिल होने के लिए आए थे, वहीं जिला प्रशासन ने अगले दिन स्पष्ट किया कि ये केवल प्रोटोकॉल के लिए आई वीआईपी गाड़ियां थीं। प्रशासन के अनुसार, इन गाड़ियों के लिए मेसर्स इम्पेक्ट ट्रेवल्स इंदौर अधिकृत एजेंसी है। एजेंसी को शर्तों के तहत अपडेटेड कंडीशन में गाड़ियां, डीजल और ड्राइवर सहित प्रोटोकॉल के लिए उपलब्ध करानी थीं। गाड़ियों में ईंधन भरवाने की जिम्मेदारी भी ट्रेवल एजेंसी की थी, न कि जिला प्रशासन की। जानकारी के अनुसार, इम्पेक्ट ट्रेवल्स इंदौर ने इनोवा गाड़ियां रतलाम भेजीं और उन्हीं के द्वारा मेसर्स शक्ति फ्यूल्स पाइंट डोसीगांव रतलाम से डीजल भरवाया गया। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि ये गाड़ियां मुख्यमंत्री के काफिले का हिस्सा नहीं थीं, बल्कि अन्य प्रोटोकॉल के लिए थीं। डीजल भरवाने के बाद ये गाड़ियां कुछ दूरी तय करने के बाद बंद हो गईं। स्टॉक में मिला अंतर – जांच रिपोर्ट अधिकारियों ने पंप के डेंसिटी और स्टॉक की जांच की। जांच के दौरान डीजल के विक्रय के बाद शेष स्टॉक एवं डीप स्टॉक में 720 लीटर का अंतर पाया गया। यह मान्य छूट सीमा 426 लीटर से अधिक था। ऑटोमेशन डिस्प्ले में डीजल टैंक में वाटर लेवल 6.63 सेंटीमीटर तथा पानी की मात्रा 197.43 लीटर दिखाई दे रही थी, जो स्पष्ट करता है कि डीजल टैंक में पानी मिल रहा था। अधिकारियों ने पंप से 5995 लीटर पेट्रोल एवं 10657 लीटर डीजल जप्त किया। 184 में से मात्र 50 पंपों की जांच रतलाम जिले में कुल 184 पेट्रोल पंप हैं, लेकिन आपूर्ति विभाग अब तक केवल 50 पेट्रोल पंप की ही जांच कर पाया है। मुख्यमंत्री से मामला जुड़ा होने के कारण भोपाल स्तर से प्रदेश के सभी पेट्रोल पंप की जांच के आदेश दिए गए थे। कलेक्टर द्वारा हर तीन माह में पेट्रोल पंप की जांच का रोस्टर भी बनाया गया है। भारत पेट्रोलियम कंपनी के एरिया मैनेजर श्रीधर ने जांच रिपोर्ट के बारे में पूछे जाने पर कहा कि उन्होंने आपूर्ति अधिकारी को रिपोर्ट सौंप दी है और इस विषय पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे। कलेक्टर राजेश बाथम ने कहा-पेट्रोल कंपनी को भेजेंगे रिपोर्ट प्रोटोकॉल की अधिकृत वैंडर की गाड़िया थीं। डीजल में पानी मिलने की … Read more

सिवनी में दिल दहला देने वाला कांड: अपहरण के बाद 6 और 9 साल के बच्चों की गला रेतकर हत्या

सिवनी  सिवनी जिले में मंगलवार शाम से लापता दो मासूम भाइयों की गला रेतकर हत्या कर दी गई।  दोपहर को दोनों के शव अंबा माई के जंगल में बरामद हुए। मृतकों की पहचान मयंक ढाकरिया (9) और दिव्यांश ढाकरिया (6) के रूप में हुई है। पुलिस ने इस मामले में एक संदिग्ध को हिरासत में लिया है, जिससे पूछताछ जारी है। कोतवाली थाना प्रभारी किशोर वामनकर ने बताया कि सुभाष वार्ड निवासी पूजा ढाकरिया (30) ने मंगलवार रात अपने दोनों बेटों के लापता होने की शिकायत दर्ज कराई थी। महिला ने बताया कि शाम करीब 5 बजे वह घरों में काम करने गई थी, इस दौरान दोनों बच्चे घर पर ही थे। रात करीब आठ बजे वह वापस लौटी तो बच्चे घर में नहीं मिले। रात 11 बजे तक भी उनका कोई पता नहीं चला तो उसने पुलिस को सूचना दी।  पुलिस ने बच्चों की तलाश शुरू की लेकिन उनका कुछ पता नहीं चला। बुधवार दोपहर करीब 2 बजे बच्चों के शव अंबा माई के जंगल में मिले जो घर से करीब 13 किलोमीटर दूर है। दोनों बच्चों की बेरहमी से गला रेतकर हत्या की गई है। आरोपियों ने शवों को पत्थरों से ढंक दिया था।  पुलिस को शुरुआती जांच में वारदाम में किसी जान-पहचान वाले व्यक्ति के शामिल होने की आशंका जताई जा रही है। डूंडा सिवनी और कोतवाली थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने एक संदिग्ध को हिरासत में लिया है। घटनास्थल से डॉग स्क्वॉड और फोरेंसिक टीम की मदद से साक्ष्य जुटाए गए हैं। बच्चों के परिजनों और स्थानीय लोगों ने पुलिस से जल्द से जल्द आरोपियों को गिरफ्तार करने की मांग की है।   

वैष्णो देवी जाने वालों के लिए खुशखबरी: तीर्थयात्रियों की यात्रा होगी और आसान

जम्मू उत्तर भारत के सबसे व्यस्त और आस्था से जुड़े रेल रूट में अब एक और बड़ा बदलाव होने जा रहा है। रेल मंत्रालय ने जम्मू से श्री माता वैष्णो देवी कटरा तक की रेल लाइन को डबल करने के लिए अंतिम स्थान सर्वे की मंजूरी दे दी है। यह सर्वे लगभग 77.96 किलोमीटर लंबी रेल लाइन को कवर करेगा, जो भविष्य में इस मार्ग की कनेक्टिविटी और गति दोनों में बड़ा सुधार लाएगा। कटरा भारत के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है, जहां हर साल लाखों श्रद्धालु माता वैष्णो देवी के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मौजूदा समय में जम्मू और कटरा के बीच केवल एक सिंगल रेल लाइन है, जिसके कारण ट्रेनों की संख्या सीमित रहती है। एक ही लाइन होने के कारण ट्रेनों की रफ्तार और संचालन में बाधा आती है, साथ ही नई ट्रेनों को चलाने में भी दिक्कत होती है। अब, रेल लाइन की डबलिंग से ट्रेनों की संख्या में इजाफा, आवाजाही में तेजी और समय की बचत संभव होगी। इससे न केवल तीर्थयात्रा को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि क्षेत्र में पर्यटन और स्थानीय विकास भी गति पकड़ेगा।  12.59 करोड़ रुपये की लागत से होगा सर्वे उत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी हिमांशु शेखर उपाध्याय ने बताया कि इस सर्वे की अनुमानित लागत करीब 12 करोड़ 59 लाख रुपये होगी। इस फाइनल लोकेशन सर्वे के जरिए निर्माण कार्य की तकनीकी योजना और व्यवहारिकता तय की जाएगी। यह प्रोजेक्ट उत्तर रेलवे के अधीन संचालित किया जाएगा।  क्यों जरूरी हो गया है डबल ट्रैक? रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, जब से कटरा से श्रीनगर तक वंदे भारत ट्रेन की शुरुआत हुई है, देश के अन्य हिस्सों से कटरा तक सीधी और बेहतर कनेक्टिविटी की मांग काफी बढ़ गई है। डबल ट्रैक के ज़रिए यात्रियों की सुविधा के साथ-साथ मालवाहक ट्रेनों का संचालन भी सुचारू रूप से किया जा सकेगा।

बलूच विद्रोही समूह का बड़ा दावा: क़्वेटा-कलक में पाक सेना के 29 सैन्य कर्मी हताहत

 क्वेटा बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) का दावा है कि उन्होंने कलात और क्वेटा में दो अलग-अलग ऑपरेशन में पाकिस्तान के 29 सुरक्षाबलों को मार गिराया है. बीएलए ने पाकिस्तानी सेना के खिलाफ इस जंग को बदस्तूर जारी रखने की भी बात कही है.  बलूच लिबरेशन आर्मी ने बयान जारी कर बताया कि क्वेटा में बीएलए की स्पेशल यूनिट फतह स्क्वाड ने पाकिस्तानी सैन्यकर्मियों को ले जा रही बस को निशाना बनाकर IED अटैक किया. बलूच लिबरेशन आर्मी ने यह हमला अपनी इंटेलिजेंस इकाई ZIRAB के खुफिया इनपुट के बाद किया. ZIRAB पाकिस्तानी सैन्यकर्मियों को लेकर जा रही बस को लगातार मॉनिटर कर रहा था. यह बस पाकिस्तानी सैन्यकर्मियों को कराची से क्वेटा लेकर जा रही थी. इस हमले में 27 पाकिस्तानी सैन्यकर्मियों को मौके पर ही ढेर कर दिया गया जबकि कई गंभीर रूप से घायल हो गए. इस बस में कव्वाली गायक भी थे.  बीएलए ने कहा कि ये कव्वाली कलाकार हमारे निशाने पर नहीं थे इसलिए इन्हें हाथ तक नहीं लगाया गया. इस बीच बीएलए ने कलात के हजार गांजी इलाके में एक और IED अटैक किया. यह हमला भी पाकिस्तानी सेना के वाहन को निशाना बनाकर किया गया. इस हमले में दो सैनिकों को मार गिराया गया. कलात में बीएलए के ऑपरेशन में पाकिस्तानी सेना से जुड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर को भी बड़ा नुकसान पहुंचा. बलूच लिबरेशन आर्मी ने इन हमलों की जिम्मेदारी लेते हुए कहा है कि पाकिस्तानी सेना के खिलाफ हमारी जंग जारी तब तक जारी रहेगी, जब तक बलूचिस्तान को आजाद नहीं करा लिया जाता और तब तक पाकिस्तान की सेना इसकी कीमत चुकाएगी. इससे पहले बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी के लड़ाकों ने 11 मार्च को क्वेटा से पेशावर जा रही जाफर एक्सप्रेस ट्रेन को हाईजैक कर लिया था. इस दौरान ट्रेन में 440 यात्री सवार थे. लड़ाकों ने अपनी मांग मंगवाने के लिए पाकिस्तान सरकार पर दबाव बना रही थी. इस घटना में लड़ाकों ने 26 लोगों को मौत के घाट उतार दिया था, जिसमें 18 सुरक्षाकर्मी भी शामिल थे.

RCB इवेंट की अव्यवस्था पर सरकार सख्त, भगदड़ के लिए विराट और टीम मैनेजमेंट को जिम्मेदार बताया

बेंगलुरु  बेंगलुरु में मची भगदड़ मामले में कर्नाटक सरकार ने RCB यानी रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु को ही जिम्मेदार बताया है। हाल ही में जारी हुई रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। साथ ही रिपोर्ट में क्रिकेटर विराट कोहली के एक वीडियो का भी जिक्र है। 4 जून को IPL ट्रॉफी जीत के बाद हुए जश्न के दौरान मची भगदड़ में 11 लोगों की मौत हो गई थी। वहीं, 50 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। रिपोर्ट में बताया गया है कि कार्यक्रम के आयोजक डीएनए एंटरटेनमेंट नेटवर्क्स प्राइवेट लिमिटेड ने पुलिस को 3 जून को सिर्फ परेड के बारे में बताया था, लेकिन औपचारिक अनुमति नहीं मांगी गई थी। अनुमति लेना अनिवार्य है। इसमें कहा गया है कि इस तरह के आयोजन के लिए अनुमति 7 दिन पहले मांगी जाती है। बगैर पुलिस से बात किए लोगों को बुलाया रिपोर्ट में कहा गया है कि RCB ने बगैर पुलिस से विचार विमर्श किए लोगों को न्योता दे दिया। इसमें कहा गया है कि सुबह 7 बजकर 1 मिनट पर एक फोटो पोस्ट किया गया था, जिसमें 'लोगों के लिए फ्री एंट्री' की बात कही गई थी और विजय जुलूस के लिए न्योता दिया गया था। यह जुलूस विधानसभा से शुरू होना था और चिन्नास्वामी स्टेडियम पर खत्म होना था। रिपोर्ट में कहा गया है कि 4 जून को सुबह 8 बजे एक पोस्ट और की गई और 8 बजकर 55 मिनट पर RCB ने एक वीडियो क्लिप पोस्ट किया, जिसमें क्रिकेटर विराट कोहली नजर आ रहे थे। वह कह रहे थे कि टीम बेंगलुरु शहर के लोगों के साथ जीत का जश्न मनाना चाहती है। सरकार का कहना है कि इसके चलते 3 लाख से ज्यादा लोग आ गए और आयोजक या पुलिस इतनी भीड़ के लिए तैयार नहीं थे। इसके अलावा कन्फ्यूजन भी हुआ, क्योंकि दोपहर 3 बजकर 14 मिनट पर आयोजकों ने घोषणा कर दी कि स्टेडियम में आने के लिए पास की जरूरत होगी। खबर है कि इसके चलते लोग पैनिक हुए। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि RCB, DNA एंटरटेनमेंट और KSCA यानी कर्नाटक स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन सामंजस्य जमाने में असफल रहे। एंट्री गेट पर उचित प्लानिंग नहीं होना और गेट देरी से खोले जाने के चलते व्यवस्था बिगड़ी और भगदड़ जैसी स्थिति बन गई थी। कोर्ट ने दिए थे रिपोर्ट सार्वजनिक करने के आदेश कर्नाटक हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया था कि वह चार जून को हुई भगदड़ की घटना पर अपनी स्थिति रिपोर्ट सार्वजनिक करे। राज्य सरकार ने हाई कोर्ट से इस रिपोर्ट को गोपनीय रखने का अनुरोध किया था, लेकिन कोर्ट ने सोमवार, 14 जुलाई को स्पष्ट रूप से कहा कि इस तरह की गोपनीयता के लिए कोई कानूनी आधार नहीं है।