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भोपाल में होगा भारतीय सेना का ऐतिहासिक राष्ट्रीय समारोह

आपकी सेना–आपके पास" थीम के साथ सेना के शौर्य और सामर्थ्य का साक्षी बनेगा भोपाल भोपाल मध्यप्रदेश के इतिहास में पहली बार भोपाल में भारतीय सेना के राष्ट्रीय स्तर का गौरवशाली आयोजन होने जा रहा है, जो प्रदेश के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि और गर्व का अवसर होगा। खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने कहा कि यह समारोह देश के वीर सैनिकों के अदम्य साहस, शौर्य, अनुशासन और राष्ट्र के प्रति उनके अटूट समर्पण को करीब से जानने का अवसर प्रदान करेगा। साथ ही, नागरिकों में राष्ट्रभक्ति, सैन्य सेवाओं के प्रति सम्मान और देश की सुरक्षा के प्रति जागरूकता का भाव सुदृढ़ करेगा। आगामी 15 जनवरी 2027 को भोपाल में आयोजित होने वाले भारतीय सेना दिवस के राष्ट्रीय समारोह को लेकर गुरुवार को मंत्री सारंग ने टीटी नगर स्टेडियम स्थित मेजर ध्यानचंद हॉल में उच्च स्तरीय बैठक ली। बैठक में भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारियों, खेल और युवा कल्याण विभाग, संस्कृति सहित संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ आयोजन की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की गई। उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ समयबद्ध रूप से तैयारियां पूर्ण करने के निर्देश दिए। मंत्री सारंग ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के राष्ट्रीय सैन्य आयोजनों को दिल्ली से बाहर देश के विभिन्न हिस्सों तक ले जाने के दृष्टिकोण के अनुरूप भारतीय सेना ने भोपाल में सेना दिवस समारोह आयोजित करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। इस आयोजन की मुख्य थीम "आपकी सेना–आपके पास" रखी गई है, जो भारतीय सेना और आम नागरिकों के बीच आत्मीय जुड़ाव को और मजबूत करेगी। भोपाल के विभिन्न स्थलों पर दिखेगा भारतीय सेना का सामर्थ्य सेना दिवस-2027 के अवसर पर भोपाल के विभिन्न प्रमुख स्थलों पर मुख्य परेड के साथ अनेक भव्य एवं रोमांचक कार्यक्रम होंगे। बीएचईएल स्थित कालीबाड़ी मार्ग में मुख्य आर्मी-डे परेड आयोजित होगी, जिसमें भारतीय सेना के अनुशासित दस्तों और सैन्य सामर्थ्य का भव्य प्रदर्शन होगा। टीटी नगर स्टेडियम, भोपाल में शौर्य संध्या ‘रणहुंकार’ का आयोजन किया जाएगा, जिसमें देशभक्ति से ओतप्रोत प्रस्तुतियों के साथ मध्यप्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक एवं जनजातीय विरासत को भी प्रदर्शित किया जाएगा। इसमें आड़ा-खड़ा और भगोरिया जैसे पारंपरिक लोकनृत्य आकर्षण का केंद्र होंगे। वहीं जंबूरी मैदान में भारतीय सेना के अत्याधुनिक सैन्य उपकरणों का स्टेटिक एवं डायनेमिक डिस्प्ले होगा। नागरिकों को आधुनिक सैन्य प्रणालियों को करीब से देखने तथा उनकी कार्यक्षमता और संचालन को समझने का अवसर मिलेगा। साथ ही बड़े तालाब के वीआईपी बोट क्लब क्षेत्र में इंटीग्रेटेड कॉम्बैट डिस्प्ले के माध्यम से भारतीय सेना की सामरिक क्षमता, रणनीतिक कौशल और समन्वित सैन्य कार्रवाई का प्रदर्शन किया जाएगा। सेना दिवस से जुड़े मुख्य कार्यक्रम और तिथियां 1 नवंबर 2026 (मध्य प्रदेश स्थापना दिवस) से मेरी माटी अभियान की शुरुआत होगी, जिसके तहत विभिन्न जिलों से मिट्टी एकत्रित कर शौर्य स्मारक में संकल्प वृक्ष लगाया जाएगा। सेना दिवस से जुड़े कार्यक्रमों की शुरुआत 9 जनवरी 2027 से होगी। 9 से 12 जनवरी के बीच सैन्य उपकरणों की प्रदर्शनी, लाइव डेमो और एयर-शो/वाटर स्पोर्ट्स बड़ा तालाब, अटल पथ, जंबूरी मैदान में की जाएगी। 15 जनवरी सेना दिवस पर मुख्य परेड भोपाल के भेल क्षेत्र में कालीबाड़ी मार्ग पर होगी। साथ ही टीटी नगर स्टेडियम में 15 जनवरी की शाम देशभक्ति से ओतप्रोत शौर्य संध्या (रणहुंकार) का आयोजन किया जाएगा। पहली बार शहर के सार्वजनिक क्षेत्र में दिखेगा सेना दिवस का भव्य आयोजन भोपाल में आयोजित होने वाला यह राष्ट्रीय समारोह इसलिए भी विशेष है, क्योंकि आर्मी-डे परेड किसी सैन्य छावनी तक सीमित नहीं रहकर शहर के सार्वजनिक क्षेत्र में आयोजित की जाएगी। सेना के विभिन्न दस्तों, टैंकों, ड्रोन और अत्याधुनिक सैन्य प्रणालियों के प्रदर्शन से नागरिकों को भारतीय सेना की कार्यप्रणाली, आधुनिक तकनीक और सामरिक क्षमताओं को नजदीक से जानने का अवसर मिलेगा। बैठक में खेल एवं युवा कल्याण विभाग के संचालक चंचल शेखर, संस्कृति विभाग के संचालक एन.पी. नामदेव, अपर सचिव (खेल एवं युवा कल्याण) अजय श्रीवास्तव, भारतीय सेना के पश्चिम मध्यप्रदेश सब एरिया के मेजर जनरल विकास लाल, कर्नल सुब्रत मिश्रा सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।  

सौर ऊर्जा से बिजली बिल में राहत, छात्रवृत्ति से उच्च शिक्षा को संबल और स्वरोजगार से खुल रहे आर्थिक उन्नति के नए रास्ते

रायपुर  विकास की वास्तविक पहचान केवल सड़कों, भवनों और अधोसंरचनाओं के निर्माण से नहीं, बल्कि आम नागरिकों के जीवन में आने वाले सकारात्मक बदलाव से होती है। जब किसी परिवार का बिजली खर्च कम होने लगे, आर्थिक कठिनाइयों के बीच विद्यार्थी उच्च शिक्षा जारी रख सके, कोई महिला स्वयं का व्यवसाय स्थापित कर परिवार की जिम्मेदारियां संभाले और एक उद्यमी उद्योग लगाकर रोजगार के अवसर विकसित करे, तब जनकल्याणकारी योजनाओं का वास्तविक प्रभाव दिखाई देता है। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित परिवारों की कहानियां ऐसे ही बदलाव की तस्वीर प्रस्तुत कर रही हैं। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी की पहल पर संचालित विभिन्न केंद्रीय योजनाओं तथा मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार की जनकल्याणकारी पहलों से नागरिकों को शिक्षा, स्वरोजगार, महिला सशक्तिकरण और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने के अवसर मिल रहे हैं। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना, छात्रवृत्ति योजनाएं, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम, छत्तीसगढ़ महिला कोष की सक्षम योजना और महतारी वंदन योजना जैसी पहलें जरूरतमंद परिवारों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के साथ उनकी क्षमताओं को विकसित करने में भी सहायक बन रही हैं। सरगुजा के पांच हितग्राहियों के अनुभव बताते हैं कि योजनाओं का लाभ जब लोगों की वास्तविक जरूरतों से जुड़ता है, तो उसका प्रभाव केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे परिवार के भविष्य को नई दिशा मिलती है। पीएम सूर्य घर योजना: कभी चार से पांच हजार रुपये आता था बिजली बिल, अब सौर ऊर्जा से मिल रही राहत बढ़ती घरेलू बिजली जरूरतों के बीच सौर ऊर्जा नागरिकों के लिए बिजली खर्च कम करने का उपयोगी विकल्प बन रही है। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के माध्यम से घरों की छतों पर सोलर सिस्टम स्थापित करने के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। अम्बिकापुर के बिलासपुर रोड स्थित मठपारा निवासी  पंकज साहू ने इस योजना का लाभ लेकर अपने घर की छत पर तीन किलोवाट क्षमता का सोलर सिस्टम स्थापित कराया है। पंकज साहू बताते हैं कि पहले गर्मी के दिनों में उनके घर का मासिक बिजली बिल लगभग चार से पांच हजार रुपये तक पहुंच जाता था। घरेलू बिजली खर्च कम करने के उद्देश्य से उन्होंने योजना के पोर्टल के माध्यम से आवेदन किया और सोलर सिस्टम लगवाया। इसके लिए उन्हें केंद्र सरकार की ओर से 78 हजार रुपये तथा राज्य सरकार की ओर से 30 हजार रुपये की सब्सिडी प्राप्त हुई। इस प्रकार कुल एक लाख आठ हजार रुपये की आर्थिक सहायता से सोलर सिस्टम स्थापित करने का खर्च कम हुआ। सोलर सिस्टम लगने के बाद उनके बिजली बिल में उल्लेखनीय कमी आई है। पंकज साहू के अनुसार, कई बार घरेलू आवश्यकता से अधिक उत्पादित बिजली ग्रिड में भेजे जाने के कारण उनका बिजली खाता क्रेडिट में भी दिखाई देता है। पहले जहां बिजली बिल परिवार के नियमित खर्च का महत्वपूर्ण हिस्सा था, वहीं अब घर की छत पर स्थापित सोलर सिस्टम बिजली खर्च में राहत देने के साथ स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन का माध्यम बन गया है। पंकज साहू का अनुभव दर्शाता है कि सौर ऊर्जा के उपयोग से परिवार अपनी बिजली जरूरतों का एक हिस्सा स्वयं पूरा कर सकते हैं। इससे घरेलू खर्च कम करने के साथ पर्यावरण अनुकूल ऊर्जा को भी प्रोत्साहन मिलता है। छात्रवृत्ति बनी कृष्णा यादव की उच्च शिक्षा का सहारा, किताबों और कॉलेज आने-जाने के खर्च में मिली मदद शिक्षा किसी भी परिवार की सामाजिक और आर्थिक प्रगति का महत्वपूर्ण आधार है, लेकिन सीमित आय वाले परिवारों के लिए उच्च शिक्षा से जुड़े खर्चों की व्यवस्था करना आसान नहीं होता। ऐसे विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति योजनाएं पढ़ाई जारी रखने का महत्वपूर्ण सहारा बन रही हैं। अम्बिकापुर के राजीव गांधी पीजी कॉलेज में बीएससी प्रथम सेमेस्टर के छात्र कृष्णा यादव की कहानी इसका उदाहरण है। कृष्णा के पिता कृषि कार्य कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। खेती से प्राप्त सीमित आय में परिवार की रोजमर्रा की जरूरतों के साथ कॉलेज की पढ़ाई का खर्च उठाना चुनौतीपूर्ण होता है। किताबें, कॉपियां, अध्ययन सामग्री और कॉलेज आने-जाने पर होने वाला खर्च परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों को बढ़ा देता है। ऐसे में छात्रवृत्ति से मिलने वाली सहायता कृष्णा की शिक्षा को निरंतर जारी रखने में उपयोगी साबित हो रही है। कृष्णा छात्रवृत्ति की राशि का उपयोग पढ़ाई से संबंधित आवश्यक सामग्री खरीदने और आवागमन के खर्च में करते हैं। इससे उनके परिवार पर आर्थिक दबाव कम करने में मदद मिल रही है। आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद उच्च शिक्षा प्राप्त करने का उनका प्रयास दर्शाता है कि छात्रवृत्ति योजनाएं जरूरतमंद विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा विकसित करने और भविष्य के लिए बेहतर अवसर तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। पीएमईजीपी से हर्षिता खत्री बनीं उद्यमी, 25 लाख रुपये के ऋण से स्थापित किया फर्नीचर निर्माण उद्योग आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में स्वरोजगार और उद्यमिता की महत्वपूर्ण भूमिका है। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के माध्यम से इच्छुक उद्यमियों को स्वयं का उद्योग या व्यवसाय स्थापित करने के लिए वित्तीय सहायता प्राप्त करने का अवसर मिलता है। अम्बिकापुर की मती हर्षिता खत्री ने इस योजना के अंतर्गत 25 लाख रुपये का ऋण प्राप्त कर फर्नीचर निर्माण उद्योग स्थापित किया है। मती हर्षिता खत्री  साईं इंडस्ट्रीज एंड प्रोडक्ट की प्रोपराइटर हैं। उनके पति  दिलीप खत्री उद्योग के संचालन और प्रबंधन में सहयोग करते हैं। परिवार लंबे समय से स्वयं का व्यवसाय स्थापित करना चाहता था, लेकिन पर्याप्त आर्थिक संसाधन उपलब्ध नहीं होने के कारण यह सपना पूरा नहीं हो पा रहा था। जिला व्यापार एवं उद्योग कार्यालय से प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम की जानकारी मिलने के बाद हर्षिता खत्री के नाम से ऋण के लिए आवेदन किया गया। ऋण स्वीकृत होने पर फर्नीचर निर्माण इकाई की स्थापना संभव हो सकी। इस इकाई में पार्टिकल बोर्ड से टेबल, ऑफिस टेबल, ड्रेसिंग टेबल, सोफा, पलंग और अलमारी सहित विभिन्न प्रकार के फर्नीचर तैयार किए जाते हैं। उद्योग स्थापना से हर्षिता खत्री के परिवार को स्वरोजगार का अवसर मिला है, वहीं इकाई से जुड़े कर्मचारियों की आजीविका को भी सहारा मिल रहा है। हर्षिता की सफलता बताती है कि उद्यमिता के लिए आवश्यक वित्तीय सहयोग और मार्गदर्शन उपलब्ध होने पर लोग अपने व्यावसायिक विचारों को वास्तविक उद्योग में … Read more

सेवा संकल्प अभियान अंतर्गत लगाए गए एक हजार 345 शिविर

इन्दौर, भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, झाबुआ एवं आलीराजपुर में बनाई गई हृयूमन रंगोली मुख्यमंत्री ने डॉ. ढालसिंह बिसेन को उत्तराखंड का राज्यपाल नियुक्त होने पर दी बधाई मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रि-परिषद की बैठक से पहले किया संबोधित भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के सफल और उपलब्धियों से भरे 25 वर्ष पूर्ण होने पर आरंभ सेवा सेतु अभियान के अंतर्गत प्रदेश में 01 हजार 345 शिविर लगाए गए। इन शिविरों में 17 लाख 18 हजार से अधिक आवेदन प्राप्त हुए तथा 15 लाख 83 हजार आवेदकों को हितलाभ मिला है। उन्होंने बताया कि सेवा ज्योति यात्रा में लगभग 01 हजार 600 यात्राएं निकालीं गईं। यात्राएं लगभग 15 हजार ग्रामीण और नगरीय क्षेत्र में निकाली गई। इन यात्राओं में 11 लाख से अधिक नागरिकों ने सहभागिता की। सेवा मेरा योगदान अंतर्गत कुल 11 प्रकार की सेवाओं में 50 लाख से अधिक नागरिकों ने सहभागिता की। नमो सेवा में 665 नुक्कड़ टोलियाँ बनीं, जिनकी 03 हजार 700 से अधिक प्रस्तुतियाँ हुई। सेवा के रंग – राष्ट्र के संग के अंतर्गत 06 जिलों इन्दौर, भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, झाबुआ एवं आलीराजपुर में हृयूमन रंगोली बनाई गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह जानकारी मंत्रालय में मंत्रि-परिषद की बैठक से पहले अपने संबोधन में दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बालाघाट-सिवनी लोकसभा क्षेत्र के पूर्व सांसद और प्रदेश के वरिष्ठ नेता डॉ. ढालसिंह बिसेन को उत्तराखंड का राज्यपाल नियुक्त होने पर हार्दिक बधाई दी। पी.एम. आवास योजना शहरी में मध्यप्रदेश देश में तीसरे स्थान पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रदेश के 05 जिलों क्रमश: डिण्डौरी, सीधी, उमरिया टीकमगढ़ एवं शहडोल को पी.एम. धन-धान्य कृषि योजना में बेहतर प्रदर्शन के लिए भारत सरकार सम्मानित कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस उपलब्धि के लिए कृषि मंत्री सहित संबंधित जिलों के कलेक्टर और कृषि विभाग के अधिकारियों को बधाई दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राष्ट्रीय पोषण माह-2026 में मध्यप्रदेश ने देश में तीसरा स्थान हासिल किया है। प्रदेश में पोषण जागरुकता से जुड़ी लगभग 2 करोड़ गतिविधियों की प्रविष्टियां दर्ज की गईं। मंदसौर और नीमच ने राष्ट्रीय स्तर पर क्रमशः पहला और दूसरा स्थान हासिल किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पी.एम. आवास योजना शहरी के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए भारत सरकार ने मध्यप्रदेश को पुरस्कृत किया है। इस योजना में मध्यप्रदेश पूरे देश में तीसरे स्थान पर रहा है। उन्होंने इस उपलब्धि के लिए विभाग को बधाई दी। उद्योग में 90 हजार करोड़ और पर्यटन 3,729 करोड़ रूपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि गत दिवस हुए मुम्बई रोड शो में अक्षय ऊर्जा और भंडारण, फार्मास्युटिकल, ई-बस, बायोगैस, स्मार्ट मीटर सहित अन्य मूलभूतउ उद्योग सेक्टरों में लगभग 90 हजार करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए। इससे लगभग 20 हजार से अधिक रोजगार सृजित होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि म.प्र. पर्यटन द्वारा प्रदेश में पर्यटन गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के लिए आयोजित ट्रेवल मार्ट सफल रहा। इसमें 34 देशों के 100 से अधिक एवं भारत के 180 से अधिक पर्यटन उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों ने भाग लिया। दस हजार से अधिक बी2बी मीटिंग्स ने असीम पर्यटन संभावनाओं को वैश्विक पहचान दिलाई। मार्ट में लगभग 3,729 करोड़ रूपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए, जो निवेशकों के बढ़ते विश्वास को दर्शाते हैं। ये प्रस्ताव लक्जरी होटलों, वेलनेस रिसॉर्ट्स, गोल्फ कोर्स, वॉटरफ्रंट रिट्रीट्स और वन्यजीव लॉज के विकास से जुड़े हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सफल आयोजन के लिए पर्यटन विभाग को बधाई दी। उन्होंने कहा कि मार्ट की सफलता को देखते हुए एक तिथि निर्धारित कर प्रतिवर्ष यह आयोजन उस तिथि पर ही किया जाएगा। धार्मिक पर्यटन में उज्जैन सबसे आगे मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि देश के घरेलू पर्यटन पर हाल ही में एक रिपोर्ट प्रकाशित हुई है। रिपोर्ट के अनुसार मध्यप्रदेश में वर्ष-2021 में 4 करोड़ 88 लाख पर्यटक आये। वर्ष – 2025 में यह संख्या बढ़कर लगभग 21 करोड़ हो गई है, इनमें सबसे बड़ा आँकड़ा धार्मिक पर्यटन का है। उज्जैन में सर्वाधिक 08 करोड़ धार्मिक पर्यटक आये। प्रसन्नता का विषय है कि प्रदेश में पर्यटकों की संख्या में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। तेजी से हो स्वामित्व योजना का काम मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्वामित्व योजना को लेकर बना गतिरोध अब समाप्त हो गया है। प्रसन्नता है कि पटवारी संवाद के बाद एक बार फिर अपने काम पर लौट रहे हैं। कर्मचारी हमारे कर्मयोगी है और सरकार उनके वाजिब हितों को संरक्षित करने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पटवारियों से तेजी से काम प्रारंभ कर समय-सीमा में लक्ष्य पूर्ण करने की अपील की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ओबोसी आरक्षण के संबंध में कहा कि राज्य सरकार ओबीसी के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नोबेल शांति पुरस्कार के लिए सुश्री नवी पिल्ले को बधाई दी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि सुश्री नवी पिल्ले को वर्ष 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार देने की घोषणा हुई है। वे दक्षिण अफ्रीका में जन्मीं है लेकिन भारतीय मूल की है। उनके दादा, परदादा भारत से दक्षिण अफ्रीका गए थे। उन्होंने जीवनभर युद्ध, नरसंहार, मानवता के खिलाफ होने वाले अपराधों के विरूद्ध और मानव अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सुश्री पिल्ले को हार्दिक बधाई दी।  

छत्तीसगढ़ शक्तिपीठ परियोजना से बदलेगी मंदिरों की तस्वीर, पांच प्रमुख शक्तिपीठों का होगा कायाकल्प

विशेष लेख छत्तीसगढ़ की शक्तिपीठ परियोजना पांच प्रमुख शक्तिपीठों का होगा विकास  धनंजय राठौर संयुक्त संचालक, जनसंपर्क रायपुर पर्यटन एक ऐसी यात्रा या भ्रमण है, जो मनोरंजन या फुर्सत के क्षणों का आनंद उठाने के उद्देश्य से किया जाता है। अतिथि देवो भवः भारतीय परंपरा प्राचीन काल से रही है। छत्तीसगढ़ में लगभग 138 स्थलों को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व के आधार पर पर्यटन स्थल के रूप में प्राथमिकता दी गई है, जिसमें 58 स्मारकों को 11 अभ्यारण 03 राष्ट्रीय उद्यान को संरक्षित घोषित किया गया है। पर्यटन मानव की प्राचीन एवं मौलिक प्रवृत्ति है। पर्यटन धरातलीय तथा मानवीय विभिन्नताओं विविधताओं का अवलोकन कर ज्ञान की बढ़ोतरी एवं मनोरंजन करता है। छत्तीसगढ़ प्राकृतिक और सांस्कृतिक पर्यटन का एक प्रमुख गंतव्य है। यहाँ के प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक धरोहर ने इसे एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया है। छत्तीसगढ़ सरकार ने उत्तराखंड के चार धाम की तर्ज पर राज्य के प्रमुख धार्मिक स्थलों को जोड़ने के लिए शक्तिपीठ परियोजना की शुरुआत की है। इस परियोजना के तहत लगभग 1,000 किलोमीटर लंबे आध्यात्मिक और धार्मिक पर्यटन कॉरिडोर का विकास किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ के प्रमुख शक्तिपीठों एवं महत्वपूर्ण पूजा स्थलों का विकास, सौंदर्याकरण तथा आधारभूत सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। शक्तिपीठों में श्रद्धालुओं के लिए सुगम पहुंच मार्ग, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था, स्वच्छता, विश्राम स्थल एवं सुरक्षा व्यवस्था जैसी आवश्यक सुविधाएं विकसित की जाएंगी।   छत्तीसगढ़ आस्था पथ (शक्तिपीठ भ्रमण) योजना प्रारंभ करने जा रहे हैं, जिसमें पांचों शक्तिपीठों का भ्रमण एवं दर्शन कराया जाएगा, इसके लिए सरकार ने वर्ष 2026-27 के  बजट में 5 करोड़ का  प्रावधान किया है। प्रदेश के पांच शक्तिपीठों कुदरगढ़, डोगरगढ़, रतनपुर, चन्द्रपुर एवं दंतेवाड़ा को शक्तिपीठ सर्किट के रूप में विकसित करने के लिए बजटीय प्रावधान किया है। इस परियोजना के तहत रतनपुर स्थित मां महामाया, चंद्रपुर की मां चंद्रहासनी, डोंगरगढ़ की मां बम्लेश्वरी, दंतेवाड़ा की मां दंतेश्वरी और सूरजपुर के कुदरगढ़ मंदिर को एक धार्मिक सर्किट के रूप में विकसित किया जाना था। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सरकार गठन के बाद बजट में इसके लिए पांच करोड़ रुपये का प्रावधान भी किया गया था, जिससे प्रदेश में धार्मिक पर्यटन को नई दिशा मिलने की उम्मीद थी। इन पाँचों शक्तिपीठों को बेहतर सड़कों, यात्री सुविधाओं, विश्राम स्थलों और सुरक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर से जोड़ना। छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल और जिला प्रशासन द्वारा इन मंदिरों में सौंदर्यीकरण और श्रद्धालुओं की सुविधाओं का काम तेजी से किया जा रहा है। केंद्र सरकार की प्रसाद (PRASHAD)योजना के तहत छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले स्थित माँ महामाया मंदिर, रतनपुर के समग्र विकास के लिए 200 करोड़ की कार्ययोजना तैयार की गई है, जिसे केन्द्र सरकार के पर्यटन मंत्रालय को प्रेषित की गई है। उक्त कार्य योजना को स्वीकृति मिलते ही एंजेसी तय कर कार्य प्रारंभ की जाएगी। यह मंदिर 11वीं-12वीं शताब्दी के दौरान कलचुरी राजा रत्नदेव प्रथम द्वारा बनवाया गया था और यह माँ महालक्ष्मी एवं माँ महासरस्वती को समर्पित है। यह दक्षिण कोशल क्षेत्र की आराध्य देवी और रतनपुर राज्य की कुलदेवी के रूप में पूजी जाती हैं। इसके अलावा डोंगरगढ़, कुदरगढ़, चंद्रपुर और दंतेवाड़ा की शक्तिपीठों के लिए सीपीआर तैयार करने प्रक्रियाधीन है। प्रसाद योजना के तहत केंद्र सरकार ने प्रथम चरण में देश के 26 धार्मिक तीर्थ स्थलों का चयन किया है। इन्हें पर्यटन के लिहाज से विकसित किया जा रहा है ताकि देश-विदेश के पर्यटक यहां पहुंच सकें। पर्यटन को बढ़ावा मिले। इन स्थलों की प्रसिद्धी का विस्तार हो। हमारे प्रमुख देवी तीर्थ स्थल महामाया मंदिर और दंतेश्वरी मंदिर को प्रसाद योजना में शामिल करवाने के लिए प्रस्ताव तैयार किया जाकर केंद्र सरकार को भेजा गया है। यह सुविधाएं की जानी है विकसित पांचों शक्तिपीठों में गार्डन, ठहने की व्यवस्था, लाइटिंग, हवन-पूजन स्थल, रेलिंग, पानी, सामुदायिक शौचालय, बैठने की व्यवस्था, रोप-वे, पर्यटन मंडल का केंद्र, सीसीटीवी कैमरा, सुरक्षा व्यवस्था और होम स्टे आदि की सुविधाएं विकसित की जानी है। इन स्थलों में बेहतर सड़क संपर्क, स्वच्छ पेयजल, आधुनिक शौचालय, सुव्यवस्थित पार्किंग, पर्यटक सहायता केंद्र, डिजिटल सूचना प्रणाली, प्राथमिक चिकित्सा और सुरक्षा जैसी आवश्यक सुविधाओं को प्राथमिकता के साथ विकसित किया जाएगा। इन पर्यटन स्थलों की विशिष्टता को ध्यान में रखते हुए उनके विकास में स्थानीय वास्तुकला, संस्कृति और प्राकृतिक परिवेश के संरक्षण का भी विशेष ध्यान रखा जाएगा। 1.    मां बम्लेश्वरी मंदिर डोंगरगढ़ छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में स्थित डोंगरगढ़ की सुरम्य पहाड़ियों की गोद में विराजी माँ बम्लेश्वरी देवी इस क्षेत्र की ही नहीं, बल्कि देश-विदेश के लाखों-करोड़ों श्रद्धालुओं की अगाध आस्था का मुख्य केंद्र हैं। समुद्र तल से लगभग 1600 फीट की ऊँचाई पर पहाड़ी पर स्थित यह पवित्र मंदिर माँ शक्ति के पावन रूपों में विशेष स्थान रखता है। छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ में स्थित माँ बम्लेश्वरी मंदिर का इतिहास लगभग 2200 वर्ष पुराना है। यह एक प्रसिद्ध शक्तिपीठ है। 2200 वर्ष पहले यहाँ कामाख्या नगरी (वर्तमान डोंगरगढ़) थी, जहाँ राजा वीरसेन का शासन था। निःसंतान होने पर उन्होंने शिव और दुर्गा की आराधना की। देवी की कृपा से उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई, जिसके बाद उन्होंने इस मंदिर की स्थापना करवाई। 11वीं शताब्दी में कलचुरी राजा कर्णदेव ने इस मंदिर को पुनर्विकसित किया। बाद में 15वीं-16वीं शताब्दी में गोंड राजाओं ने इस क्षेत्र और मंदिर का विस्तार किया। मां बम्लेश्वरी मंदिर डोंगरगढ़ छत्तीसगढ़ ही नहीं देश-विदेशों में भक्तों के लिए आस्था का केंद्र हैं। मां बम्लेश्वरी मंदिर का इतिहास 2500 वर्ष से भी प्राचीन बताया जाता है। केंद्र सरकार ने यहां प्रसाद योजना के तहत अंतरराष्ट्रीय स्तर की परियोजना की घोषणा की है। 2.    मां महामाया मंदिर रतनपुर रतनपुर महामाया मंदिर छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के रतनपुर में स्थित एक प्रसिद्ध और ऐतिहासिक सिद्ध शक्तिपीठ है। बिलासपुर-कोरबा मार्ग पर महामाया देवी का यह मंदिर 1050 ईसवी में बना बताया जाता है। राजा रत्नदेव प्रथम द्वारा स्थापित मंदिर क्षेत्र को कलचुरियों की राजधानी माना जाता है। यह कलचुरी राजाओं की कुलदेवी का ऐतिहासिक मंदिर है, जहाँ माता का कंधा गिरने की मान्यता है। इस मंदिर का निर्माण 11वीं-12वीं शताब्दी (लगभग 12-13वीं शताब्दी) में कलचुरी वंश के राजा रतनदेव प्रथम द्वारा कराया गया था। बाद में 1492 ईस्वी (विक्रम संवत 1552) में राजा बहार साईं ने वर्तमान मंदिर का जीर्णोद्धार व निर्माण कराया। गर्भगृह में माँ महामाया की दुर्लभ दोहरी (ड्यूअल) … Read more

सारसमाल में कर्मा पूजा महोत्सव में शामिल हुए मुख्यमंत्री, मांदर की थाप पर समाजजनों के साथ किया पारंपरिक कर्मा नृत्य

रायगढ़ मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा है कि आदिवासी समाज का इतिहास शौर्य, स्वाभिमान, संघर्ष और प्रकृति के प्रति अगाध श्रद्धा का गौरवशाली इतिहास है। हमारी जनजातीय संस्कृति में प्रकृति केवल जीवन का आधार नहीं, बल्कि आराध्य है। जल, जंगल और जमीन के संरक्षण की जो सीख आदिवासी समाज ने सदियों से अपने जीवन और परंपराओं के माध्यम से दी है, वह आज पूरी दुनिया के लिए प्रेरणादायी है। कर्मा पर्व इसी समृद्ध सांस्कृतिक चेतना, सामूहिकता और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का जीवंत प्रतीक है। मुख्यमंत्री  साय आज रायगढ़ जिले के तमनार विकासखंड अंतर्गत ग्राम सारसमाल स्थित माध्यमिक शाला के खेल मैदान में उरांव समाज विकास समिति, छत्तीसगढ़-ओडिशा हिमगिर क्षेत्र द्वारा आयोजित कर्मा पूजा महोत्सव को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने भगवान करम देव तथा आराध्य देव भगवान शिव और माता पार्वती की विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, खुशहाली और मंगल की कामना की। कार्यक्रम में जनजातीय संस्कृति की जीवंत छटा उस समय और मनोहारी हो उठी, जब कर्मा दलों के आग्रह पर मुख्यमंत्री  साय स्वयं मांदर लेकर समाजजनों के बीच पहुंचे। मांदर की थाप और पारंपरिक लोकधुनों के बीच मुख्यमंत्री ने महिला-पुरुषों के साथ कर्मा नृत्य किया। मुख्यमंत्री की आत्मीय और सहज सहभागिता से समाजजनों में विशेष उत्साह देखने को मिला। समाज के पदाधिकारियों ने गजमाला पहनाकर मुख्यमंत्री का आत्मीय स्वागत किया। जनजातीय महापुरुषों का संघर्ष हमारी अमूल्य विरासत मुख्यमंत्री  साय ने कर्मा तिहार की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि जनजातीय समाज ने देश की संस्कृति और स्वतंत्रता आंदोलन में अविस्मरणीय योगदान दिया है। भगवान बिरसा मुंडा, शहीद वीर नारायण सिंह, गुंडाधुर सहित अनेक जनजातीय महानायकों ने मातृभूमि, स्वाभिमान और अधिकारों की रक्षा के लिए अदम्य साहस के साथ संघर्ष किया। उनके त्याग, तपस्या और बलिदान से नई पीढ़ी को परिचित कराना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री एवं भारत रत्न स्वर्गीय  अटल बिहारी वाजपेयी ने जनजातीय समाज के कल्याण और विकास को विशेष प्राथमिकता देते हुए अलग जनजातीय कार्य मंत्रालय का गठन किया। इससे जनजातीय समाज के विकास के प्रयासों को संस्थागत आधार और नई गति मिली। आज प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जनजातीय समाज के सम्मान के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, सड़क, पेयजल, आजीविका और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के लिए व्यापक स्तर पर कार्य हो रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह हम सभी के लिए गर्व की बात है कि आज देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर जनजातीय समाज की बेटी राष्ट्रपति मती द्रौपदी मुर्मु विराजमान हैं। छत्तीसगढ़ में भी जनजातीय समाज के एक बेटे को मुख्यमंत्री के रूप में प्रदेश की सेवा करने का अवसर मिला है। यह जनजातीय समाज के बढ़ते सम्मान और भागीदारी का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि नया रायपुर में स्थापित जनजातीय संग्रहालय हमारी समृद्ध जनजातीय विरासत को नई पीढ़ी से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम है। यहां जनजातीय समाज के इतिहास, जीवनशैली, परंपराओं, संस्कृति और वीर महापुरुषों के योगदान को जानने-समझने का अवसर मिलता है। हमारी सरकार जनजातीय संस्कृति और परंपराओं को सहेजते हुए समाज को विकास के आधुनिक अवसरों से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। कर्मा पर्व हमारी जड़ों और प्रकृति से जुड़ाव का उत्सव मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि आदिवासी समाज मूल रूप से प्रकृति का उपासक है। प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व और पर्यावरण संरक्षण हमारी परंपराओं में रचा-बसा है। कर्मा पर्व नई फसल की खुशी, प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और सामूहिक जीवन की भावना को अभिव्यक्त करता है। ऐसे आयोजन हमारी सांस्कृतिक पहचान को सहेजने के साथ नई पीढ़ी को अपनी जड़ों, भाषा, परंपराओं और सामाजिक मूल्यों से जोड़ते हैं। उन्होंने समाजजनों से अपनी समृद्ध संस्कृति, परंपरा और भाषा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का आह्वान करते हुए कहा कि अपनी जड़ों से जुड़े रहते हुए शिक्षा और आधुनिक अवसरों को अपनाकर समाज तेजी से आगे बढ़ सकता है। संस्कृति हमारी पहचान है और शिक्षा हमारे उज्ज्वल भविष्य का आधार है। शिक्षा से खुलेगा प्रगति का मार्ग, युवा ऊंचे लक्ष्य निर्धारित करें मुख्यमंत्री  साय ने युवाओं को विशेष रूप से संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा जीवन में आगे बढ़ने का सबसे सशक्त माध्यम है। आज हमारे युवाओं के सामने अवसरों की कमी नहीं है। आवश्यकता है कि वे अपना लक्ष्य निर्धारित करें, परिश्रम करें और उपलब्ध सुविधाओं का पूरा लाभ उठाएं। उन्होंने कहा कि आदिवासी विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की बेहतर तैयारी का अवसर उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार लगातार प्रयास कर रही है। प्रयास आवासीय विद्यालयों के माध्यम से प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को आगे बढ़ने का अवसर दिया जा रहा है। नालंदा परिसर जैसी आधुनिक अध्ययन सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है, ताकि युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अनुकूल वातावरण और आवश्यक संसाधन मिल सकें। मुख्यमंत्री ने युवाओं से राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में प्रवेश के लिए भी प्रयास करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि दिल्ली में जनजातीय विद्यार्थियों के लिए छात्रावास की क्षमता बढ़ाकर 200 सीट की गई है, जिससे उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं को सुविधा मिलेगी। उन्होंने कहा कि समाज तभी तेजी से आगे बढ़ेगा, जब हमारी नई पीढ़ी अच्छी शिक्षा प्राप्त कर प्रशासन, चिकित्सा, इंजीनियरिंग, तकनीक, उद्योग, उद्यमिता और अन्य क्षेत्रों में अपनी मजबूत भागीदारी सुनिश्चित करेगी। युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए लगातार खुल रहे नए अवसर मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को शिक्षा के साथ कौशल और रोजगार के अवसरों से जोड़ने पर विशेष जोर दे रही है। शासकीय विभागों में भर्ती प्रक्रियाओं के साथ रोजगार मेलों और उद्योगों के माध्यम से युवाओं के लिए अवसर तैयार किए जा रहे हैं। प्रदेश में निवेश और औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार का उद्देश्य भी स्थानीय युवाओं के लिए अधिक से अधिक रोजगार के अवसर सृजित करना है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे प्रतियोगी परीक्षाओं, कौशल विकास कार्यक्रमों, रोजगार मेलों और स्वरोजगार से जुड़ी योजनाओं की जानकारी रखें तथा इनका अधिकतम लाभ उठाएं। शिक्षा और रोजगार के माध्यम से आगे बढ़ने वाला प्रत्येक युवा अपने परिवार के साथ पूरे समाज की प्रगति का मार्ग प्रशस्त करता है। जनजातीय अंचलों में अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रही विकास की योजनाएं मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार जनजातीय बहुल क्षेत्रों में … Read more

धर्म बदला तो आरक्षण पर क्या होगा असर? OBC आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर चर्चा

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि हिंदू धर्म में अनुसूचित जाति (SC) या पिछड़े वर्ग से जुड़ा व्यक्ति किसी दूसरे धर्म को अपनाने के बाद उसी आधार पर आरक्षण का लाभ पाने का दावा नहीं कर सकता। कोर्ट के मुताबिक, हिंदू सामाजिक व्यवस्था में किसी व्यक्ति की सामाजिक पिछड़ेपन से जुड़ी स्थिति दूसरे धर्म को अपनाने के बाद अपने आप उस धर्म की सामाजिक व्यवस्था में लागू नहीं हो जाती। कोर्ट ने इस मामले में मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को सही माना है। हाईकोर्ट ने तमिलनाडु सरकार के उस फैसले को रद्द कर दिया था, जिसमें धर्म बदलकर मुस्लिम बने लोगों को आरक्षण देने का फैसला किया गया था। मद्रास हाईकोर्ट ने रद्द किया था तमिलनाडु सरकार का फैसला सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस पीके मिश्रा और जस्टिस श्री चंद्रशेखर की पीठ ने तमिलनाडु में सात मुस्लिम समुदायों को पिछड़ा वर्ग (Backward Class) के रूप में मान्यता देने से जुड़े सरकारी आदेश (GO) को चुनौती देने वाली याचिका पर  फैसला सुनाया है. मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में इस सरकारी आदेश को रद्द कर दिया था.इस आदेश के तहत अन्य पिछड़े वर्गों के ऐसे व्यक्तियों को जो इस्लाम धर्म अपना लेते थे, पिछड़ा वर्ग मुस्लिम श्रेणी में शामिल होने की अनुमति दी गई थी. मामले में तमिलनाडु सरकार ने मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. राज्य सरकार का तर्क है कि धर्म परिवर्तन के कारण सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े लोगों को आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए।  मद्रास हाईकोर्ट फैसला और तमिलनाडु सरकार का बयान बता दें कि मद्रास हाईकोर्ट ने इस आदेश को असंवैधानिक बताया और रद्द कर दिया था. कोर्ट ने कहा था कि जाति जन्म से तय होती है. धर्म बदलने से जाति तय नहीं होती. इस्लाम धर्म में जातिगत ऊंच-नीच न होने के कारण धर्म परिवर्तन के बाद आरक्षण का दावा नहीं कर सकते. लब्बाई, मरक्कायर, राउथर और दक्कानी मुस्लिम जैसी अधिसूचित समुदायों की सदस्यता जन्म से तय होती है, धर्म परिवर्तन से नहीं. इस पर तमिलनाडु सरकार की तरफ से कहा गया कि ये सरकारी आदेश नया पिछड़ा वर्ग बनाने के लिए नहीं है. तमिलनाडु पिछड़ा वर्ग आयोग की सिफारिश पर ये आदेश जारी किया गया था और इसका उद्देश्य केवल इतना था कि संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत धर्म की स्वतंत्रता का प्रयोग करने वाले व्यक्ति को केवल धर्म परिवर्तन के कारण आरक्षण से वंचित न होना पड़े।  तमिलनाडु सरकार को झटका इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार की याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि इस्लाम अपनाने भर से कोई व्यक्ति राज्य की तय पिछड़े मुस्लिम समुदायों में शामिल नहीं हो जाता। पुराने जाति या समुदाय के आधार पर नए धर्म में आरक्षण का लाभ अपने आप नहीं मिल सकता। कोर्ट ने कहा कि अनुसूचित जाति का दर्जा भी संविधान में तय धर्म संबंधी नियमों के अनुसार ही मिलेगा।  दरअसल, तमिलनाडु सरकार ने मार्च 2024 में एक आदेश जारी किया था। इसके तहत पिछड़े वर्ग, अति पिछड़े वर्ग, कुछ अधिसूचित समुदायों और अनुसूचित जाति से इस्लाम अपनाने वाले लोगों को पिछड़े मुस्लिम वर्ग के तहत प्रमाणपत्र देकर आरक्षण का लाभ देने की व्यवस्था की गई थी। मद्रास हाईकोर्ट ने इस आदेश को रद्द कर दिया था। अब सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है। हाई कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार की अधिसूचना को कर दिया था रद्द न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति चंद्रशेखर की पीठ ने मद्रास उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ तमिलनाडु सरकार की याचिका को खारिज कर दिया। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि इस्लाम अपनाने वाला कोई व्यक्ति केवल धर्म परिवर्तन के आधार पर 'पिछड़ा वर्ग (मुस्लिम)' श्रेणी के तहत आरक्षण का दावा नहीं कर सकता। कोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखते हुए, जिसने धर्म परिवर्तन करने वाले मुसलमानों को आरक्षण देने संबंधी तमिलनाडु सरकार की अधिसूचना को रद्द कर दिया था। शीर्ष अदालत ने कहा कि इसमें किसी हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। 7 अगस्त को, शीर्ष अदालत ने हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ राज्य सरकार द्वारा दायर याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। राज्य सरकार की अपील में कहा गया था कि यह फैसला ऐसे महत्वपूर्ण सवाल खड़े करता है जो एक विशेषज्ञ वैधानिक आयोग की सिफारिशों के आधार पर बनाई गई कार्यकारी नीति में हस्तक्षेप के दायरे से जुड़े हैं।

33/11 केवी विद्युत सब स्टेशन से 16 गांवों को मिलेगी बेहतर बिजली आपूर्ति, लो वोल्टेज की समस्या से मिलेगी राहत

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की पहल से नागलोक क्षेत्र को बड़ी सौगात मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के निर्देशानुसार प्रदेश के दूरस्थ ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने तथा आम नागरिकों को बेहतर विद्युत सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार कार्य किए जा रहे हैं। इसी क्रम में मुख्यमंत्री  साय के गृह जिले जशपुर के नागलोक क्षेत्र को बड़ी सौगात मिली है। जिले के फरसाबहार तहसील अंतर्गत ग्राम समडमा में 2 करोड़ 91 लाख रुपये की लागत से 33/11 केवी विद्युत सब स्टेशन का निर्माण किया जा रहा है। इस सब स्टेशन के शुरू होने से क्षेत्र के 16 गांवों के बिजली उपभोक्ताओं को बेहतर विद्युत आपूर्ति का लाभ मिलेगा और लंबे समय से चली आ रही लो वोल्टेज की समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है। नागलोक क्षेत्र के ग्रामीण लंबे समय से लो वोल्टेज और बिजली आपूर्ति संबंधी समस्याओं का सामना कर रहे थे। पर्याप्त वोल्टेज नहीं मिलने के कारण घरेलू विद्युत उपकरणों के संचालन, कृषि कार्यों और अन्य दैनिक गतिविधियों में कठिनाइयां होती थीं। क्षेत्र की इन समस्याओं को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के निर्देश पर समडमा में विद्युत सब स्टेशन का निर्माण कराया जा रहा है। इसके पूर्ण होने से स्थानीय विद्युत वितरण व्यवस्था को मजबूती मिलेगी तथा बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता और विश्वसनीयता में सुधार होगा। समडमा सहित 16 गांवों के हजारों ग्रामीणों को मिलेगा बेहतर बिजली व्यवस्था का लाभ समडमा में निर्माणाधीन 33/11 केवी विद्युत सब स्टेशन से समडमा, सांको, साहिलता, बांसाझाल, छरला, मांझापारा, कोरचिकानी, लावाकेरा, जूनाडीह, जगदमपुर, रेंगारमुण्डा, जाडामल, बेलडीपा, चालडीह, जामडांड और रंगीयाडीपा सहित आसपास के क्षेत्रों के विद्युत उपभोक्ताओं को लाभ मिलेगा। विद्युत सब स्टेशन के शुरू होने से इन गांवों में बिजली वितरण व्यवस्था अधिक सुदृढ़ होगी। इससे उपभोक्ताओं को पर्याप्त वोल्टेज के साथ बेहतर बिजली आपूर्ति उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। विशेष रूप से दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की गुणवत्ता में सुधार होने से लोगों के दैनिक जीवन में सहूलियत बढ़ेगी। कृषि, शिक्षा और ग्रामीण आजीविका को मिलेगा बढ़ावा समडमा में विद्युत सब स्टेशन का निर्माण केवल बिजली आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे क्षेत्र की कृषि, शिक्षा, छोटे व्यवसाय और ग्रामीण आजीविका से जुड़ी गतिविधियों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है। बेहतर विद्युत आपूर्ति से किसानों को सिंचाई पंप और अन्य कृषि उपकरणों के संचालन में सुविधा होगी। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे व्यवसायों और स्वरोजगार से जुड़ी गतिविधियों के संचालन में भी सहूलियत मिलेगी। इसके साथ ही घरों में विद्युत उपकरणों का उपयोग अधिक सुगम होगा और विद्यार्थियों को अध्ययन के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी। विद्युत अधोसंरचना के विस्तार से ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने और स्थानीय विकास को गति देने में सहायता मिलेगी। मुख्यमंत्री  साय की पहल से दूरस्थ अंचलों में मजबूत हो रही विद्युत अधोसंरचना मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के निर्देशानुसार दूरस्थ ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। समडमा में 2.91 करोड़ रुपये की लागत से निर्माणाधीन विद्युत सब स्टेशन इसी दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इसके शुरू होने से नागलोक क्षेत्र में बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने और उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। लंबे समय से बिजली संबंधी समस्याओं का सामना कर रहे क्षेत्रवासियों ने विद्युत सब स्टेशन के निर्माण पर प्रसन्नता व्यक्त की है। ग्रामीणों ने इस महत्वपूर्ण सुविधा के लिए मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति आभार जताते हुए उम्मीद व्यक्त की है कि सब स्टेशन के शुरू होने से क्षेत्र में लो वोल्टेज की समस्या दूर होगी और बिजली आपूर्ति व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार आएगा।

किसानों से धोखाधड़ी की तैयारी! मुरैना में नकली खाद फैक्ट्री पकड़ी, पुलिस ने किया खुलासा

मुरैना  प्रदेश के मुरैना में किसानों को नकली खाद तैयार करने के एक बड़े मामले का खुलासा हुआ है। जेवराखेरा रोड पर बुधवार शाम पुलिस ने एक प्लॉट में छापा मारकर नकली डीएपी खाद की पैकिंग का काम पकड़ा। मौके पर हरे रंग के उन बोरों में खाद भरा जा रहा था, जिन पर इंडियन पोटाश लिमिटेड कंपनी का नाम, प्रधानमंत्री की तस्वीर और भारतीय जन उर्वरक परियोजना का उल्लेख था। पुलिस को मौके से पैक किए हुए 300 बोरे मिले, जबकि एक कमरे में सफेद बोरों में भरा खाद भी बड़ी मात्रा में रखा था। स्टेशन रोड थाना प्रभारी दर्शन शुक्ला के मुताबिक जेवराखेरा रोड पर कॉलोनी की प्लॉटिंग के बीच एक प्लॉट में दीवार खड़ी कर टिनशेड बनाया गया था। इसी के भीतर आठ लोग बोरों की पैकिंग कर रहे थे। जांच में पता चला कि सफेद बोरों से खाद निकालकर उसे हरे रंग की पैकिंग में भरा जा रहा था, ताकि वह असली डीएपी खाद जैसा दिखाई दे। पानी में डालते ही घुल गया खाद पुलिस ने मौके पर मिली सामग्री की जांच के लिए कृषि विभाग को सूचना दी। इसके बाद उप संचालक कृषि अनंत सड़ैया अपनी टीम के साथ पहुंचे। अधिकारियों ने खाद का नमूना पानी में डालकर देखा तो वह तत्काल मिट्टी की तरह घुल गया। कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार, डीएपी में मौजूद नाइट्रोजन का हिस्सा आसानी से घुल सकता है, लेकिन इसमें मौजूद फास्फोरस को पूरी तरह घुलने में 10 से 12 घंटे तक लग सकते हैं। मौके पर खाद के इस तरह घुलने के बाद अधिकारियों ने उसके नकली होने की आशंका जताई। अधिकारियों का कहना है कि सामान्य किसान के लिए केवल देखकर खाद की असलियत पहचानना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में इस तरह की मिलावट किसानों तक पहुंचने पर उनकी फसल और खेती की लागत पर असर पड़ सकता है। हालांकि, खाद की गुणवत्ता और उसकी वास्तविक संरचना की पुष्टि के लिए प्रयोगशाला जांच महत्वपूर्ण होगी। 300 बोरे पैक मिले छापे के दौरान पुलिस को मौके पर पैकिंग के लिए इस्तेमाल की जा रही मशीन भी मिली। बाहर खड़े एक मिनी लोडिंग वाहन में डीएपी खाद के आठ बोरे रखे हुए थे। पूछताछ में सामने आया कि कुछ समय पहले ही एक लोडिंग वाहन से नकली बताए जा रहे खाद के बोरे वहां से भेजे गए थे। पुलिस ने मौके पर मिली खाद को जब्ती में लेकर जांच शुरू की। अब यह पता लगाने की जरूरत है कि खाद कहां से लाया जा रहा था, उसकी पैकिंग किसके निर्देश पर की जा रही थी और पहले भेजे गए बोरों की आपूर्ति किन लोगों तक हुई। दिहाड़ी पर लाए थे मजदूरों को प्लॉट में खाद की पैकिंग करते मिले आठ लोगों ने पूछताछ में बताया कि वे भवन निर्माण में मजदूरी करते हैं। उनके मुताबिक, सुबह दो लोग उनके पास आए थे और 700 रुपये मजदूरी देने की बात कहकर काम पर लाए थे। उन्हें बताया गया था कि रेत को बोरों में भरना है, लेकिन मौके पर पहुंचने के बाद सफेद बोरों से सामग्री निकालकर हरे बोरों में भरने का काम मिला। मजदूरों ने बताया कि काम पर लाने वाले दोनों व्यक्ति बाद में वापस नहीं लौटे। उन्होंने अपने नाम श्रीनिवास जाटव, देवेंद्र जाटव, रामअवतार पिप्पल, सतीश जाटव, गिर्राज जाटव, लाखन जाटव और बारेलाल पचौरी बताए। सभी ने अपना निवास उत्तमपुरा बताया। उपलब्ध जानकारी में आठवें मजदूर का नाम स्पष्ट नहीं है। अधूरे भवन में चल रहा था पूरा खेल जिस प्लॉट में खाद की पैकिंग की जा रही थी, वहां एक कच्चा और अधूरा भवन बना हुआ था। भवन की दीवार पर 'यह जगह बिकाऊ है' लिखा था। इसी स्थान पर खाद को कथित तौर पर असली कंपनी की पैकिंग जैसा रूप देने का काम चल रहा था।  

महिला आरक्षक को जेंडर परिवर्तन संबंधी मिली अनुमति

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पुलिस में पदस्थ महिला आरक्षक के जेंडर परिवर्तन संबंधी प्रकरण में गृह विभाग को अनुमति प्रदान करने की प्रक्रिया के संबंध में आवश्यक कार्यवाही शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए थे। इन निर्देशों के परिपालन में गृह विभाग द्वारा आदेश जारी किए गए हैं। प्रकरण में नियमानुसार आगामी कार्यवाही पुलिस मुख्यालय द्वारा की जा रही है। महिला आरक्षक द्वारा जेंडर परिवर्तन के संबंध में आवेदन प्रस्तुत किया गया था। प्रकरण के संबंध में भारत के राजपत्र में संबंधित अधिसूचना का प्रकाशन कराया गया तथा नोटरीकृत शपथ-पत्र भी प्रस्तुत किया गया था। प्रकरण के परीक्षण के लिए गांधी चिकित्सा महाविद्यालय, भोपाल में चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया। इसके उपरांत मानसिक रोग विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष द्वारा चिकित्सकीय प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया। जिला मेडिकल बोर्ड द्वारा भी प्रकरण में अनुशंसा की गई। प्रकरण से संबंधित दस्तावेजों एवं चिकित्सकीय अभिमतों के परीक्षण के उपरांत पुलिस मुख्यालय, भोपाल द्वारा आवश्यक निर्णय के लिए अनुशंसा सहित प्रकरण शासन को प्रेषित किया गया था।  

मनी रिस्टोरेशन मॉड्यूल के तहत स्टाम्प शुल्क 1 हजार रूपए से घटाकर 100 रूपए किए जाने की प्रक्रिया जारी

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर साइबर अपराधों के पीड़ितों को आर्थिक राहत प्रदान करने और उनकी ठगी गई धनराशि वापस दिलाने की प्रक्रिया को अधिक किफायती बनाने के उद्देश्य से राज्य शासन द्वारा महत्वपूर्ण निर्णय लिया जा रहा है। इसके तहत मनी रिस्टोरेशन मॉड्यूल के माध्यम से धनराशि की वापसी की प्रक्रिया पर देय स्टाम्प शुल्क 1 हजार रूपए से घटाकर 100 रूपए किया जाएगा। इस निर्णय से संबंधित प्रक्रिया में पीड़ितों पर पड़ने वाला आर्थिक भार कम होगा और उन्हें अपनी धनराशि वापस प्राप्त करने की प्रक्रिया में राहत मिलेगी। राज्य शासन की इस पहल से साइबर अपराध पीड़ितों के हितों की रक्षा और उन्हें आर्थिक राहत प्रदान करने के प्रयासों को बल मिलेगा। साइबर ठगी के मामलों में धनराशि वापस दिलाने की प्रक्रिया को कम खर्चीला बनाना पीड़ित-केंद्रित व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। राज्य शासन साइबर अपराधों की रोकथाम, नागरिकों में साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने और साइबर अपराध से प्रभावित व्यक्तियों को सहायता उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है। नागरिकों से अपील है कि साइबर ठगी का शिकार होने पर तत्काल हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें और आधिकारिक पोर्टल www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं, जिससे समय रहते आवश्यक कार्रवाई की जा सके।