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RBI ला रहा ‘किल स्विच’, एक क्लिक में बंद होंगे बैंक ट्रांजैक्शन

डिजिटल पेमेंट्स ने लोगों की जिंदगी आसान जरूर बनाई है, लेकिन इसके साथ साइबर ठगी और ऑनलाइन फ्रॉड के मामले भी तेजी से बढ़े हैं. खासकर पिछले कुछ वर्षों में फर्जी पुलिस कॉल, डिजिटल अरेस्ट और बैंकिंग फ्रॉड जैसी घटनाओं ने लाखों लोगों को आर्थिक नुकसान पहुंचाया है. अब भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) एक ऐसे सुरक्षा सिस्टम पर काम कर रहा है जो किसी भी संदिग्ध स्थिति में बैंकिंग ट्रांजैक्शन को तुरंत रोक सकता है. इसे ‘किल स्विच’ नाम दिया गया है. अगर यह सुविधा लागू होती है तो यूजर्स को अपने खाते की सुरक्षा पर पहले से कहीं ज्यादा नियंत्रण मिल सकता है. क्या है आरबीआई का ‘किल स्विच’ सिस्टम? ‘किल स्विच’ एक इमरजेंसी सुरक्षा फीचर होगा, जिसकी मदद से कोई भी ग्राहक अपने बैंक खाते से होने वाले सभी डिजिटल ट्रांजैक्शन को तुरंत रोक सकेगा. यदि किसी व्यक्ति को लगे कि वह साइबर ठगी का शिकार बन सकता है या उसके खाते से अनधिकृत लेनदेन होने का खतरा है, तो वह बैंकिंग ऐप के जरिए एक बटन दबाकर सभी वित्तीय गतिविधियों को अस्थायी रूप से बंद कर सकेगा. इसका उद्देश्य फ्रॉड के दौरान होने वाले नुकसान को शुरुआती चरण में ही रोकना है, ताकि अपराधियों को पैसा ट्रांसफर करने का मौका न मिले. डिजिटल अरेस्ट जैसे फ्रॉड ने बढ़ाई चिंता हाल के वर्षों में डिजिटल अरेस्ट नाम का साइबर अपराध तेजी से सामने आया है. इसमें ठग खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी या किसी अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर लोगों को वीडियो कॉल पर डराते हैं. फर्जी दस्तावेज, नकली गिरफ्तारी वारंट और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर पीड़ितों से बड़ी रकम ट्रांसफर करवाई जाती है. ऐसे मामलों में कई लोग अपनी जीवनभर की बचत गंवा चुके हैं. इसी बढ़ते खतरे को देखते हुए सरकार और आरबीआई नये सुरक्षा उपायों पर विचार कर रहे हैं. सभी डिजिटल पेमेंट्स के लिए आयेगा ऑन-ऑफ फीचर आरबीआई सिर्फ किल स्विच तक सीमित नहीं रहना चाहता. केंद्रीय बैंक सभी प्रमुख डिजिटल पेमेंट माध्यमों के लिए स्विच ऑन-स्विच ऑफ सुविधा लाने की संभावना भी तलाश रहा है. इस व्यवस्था के तहत ग्राहक अपनी जरूरत के अनुसार यूपीआई, इंटरनेट बैंकिंग, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, एटीएम निकासी और अंतरराष्ट्रीय ट्रांजैक्शन जैसी सेवाओं को कभी भी बंद या चालू कर सकेंगे. उदाहरण के लिए, यदि कोई व्यक्ति रोज यूपीआई का उपयोग नहीं करता है, तो वह इसे बंद रख सकता है और जरूरत पड़ने पर कुछ सेकंड में दोबारा सक्रिय कर सकता है. ग्राहकों को मिलेगा ज्यादा नियंत्रण और सुरक्षा वर्तमान में कई बैंक कार्ड ट्रांजैक्शन के लिए ऑन-ऑफ सुविधा देते हैं, जिससे ग्राहक अपने कार्ड को सुरक्षित रख पाते हैं. आरबीआई अब इसी मॉडल को पूरे डिजिटल बैंकिंग इकोसिस्टम तक विस्तार देने पर विचार कर रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे न केवल धोखाधड़ी के मामलों में कमी आयेगी, बल्कि ग्राहकों का डिजिटल पेमेंट सिस्टम पर भरोसा भी मजबूत होगा. साथ ही यूजर्स अपनी जरूरत के हिसाब से बैंकिंग सेवाओं का इस्तेमाल कर पाएंगे. डिजिटल पेमेंट्स का भविष्य और नयी सुरक्षा रणनीति भारत दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल पेमेंट बाजारों में शामिल हो चुका है. यूपीआई ट्रांजैक्शन लगातार नये रिकॉर्ड बना रहे हैं. ऐसे में सुरक्षा को मजबूत बनाना समय की जरूरत बन गया है. किल स्विच और ऑन-ऑफ बैंकिंग कंट्रोल जैसी सुविधाएं आने वाले समय में डिजिटल बैंकिंग को ज्यादा सुरक्षित और भरोसेमंद बना सकती हैं. यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो किसी भी संदिग्ध कॉल, मैसेज या डिजिटल फ्रॉड की आशंका होने पर यूजर तुरंत अपने खाते को सुरक्षित मोड में डाल सकेगा और आर्थिक नुकसान से बच सकता है.

छत्तीसगढ़ में गर्मी से राहत के संकेत, बंगाल की खाड़ी से आई नमी लाएगी बारिश

रायपुर. नौतपा के बीच ही मौसम ने करवट ले ली है. प्रदेश के उत्तरी और दक्षिणी हिस्सों में बारिश की गतिविधि ने लोगों को चिलचिलाती गर्मी और हीटवेव से राहत दी है. इन इलाकों के तापमान में करीब 3 से 5 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई है. हालांकि मध्य क्षेत्रों में गर्मी का कहर जारी है. राजनांदगांव में सबसे ज्यादा अधिकतम तापमान 46 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया है. बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी के कारण आंधी, बारिश होने की संभावना है. अधिकतम तापमान में कमी आ सकती है. छत्तीसगढ़ में शुक्रवार को कुछ स्थानों में बारिश हुई है. सबसे ज्यादा सुकमा में 4 सेमी पानी गिरा. इसके अलावा जगदलपुर, तोंगपाल, दरभा में 3 सेमी, तोकापाल में 2 सेमी और कोंडागांव, कोंटा, भानपुरी, लोहांडीगुड़ा, अंबिकापुर और सरगुजा में 1 सेमी बारिश दर्ज की गई. आज कुछ स्थानों में बरसेंगे बादल मौसम विज्ञानी एच.पी. चंद्रा ने जानकारी दी कि एक द्रोणिका मध्य पाकिस्तान से अंदरुनी उड़ीसा तक राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर छत्तीसगढ़ होते हुए 0.9 किलोमीटर ऊंचाई तक विस्तारित है. एक ऊपरी हवा का चक्रीय चक्रवाती परिसंचरण पूर्व मध्य बंगाल की खाड़ी और दक्षिण पूर्व बंगाल की खाड़ी के ऊपर विस्तारित है. एक पश्चिमी विक्षोभ 75 डिग्री पूर्व में स्थित है. बंगाल की खाड़ी से प्रदेश में नमी का आगमन लगातार जारी है. इन मौसम प्रणालियों के कारण शनिवार को एक दो स्थानों पर हल्की वर्षा और गरज चमक के साथ छींटे पड़ने की संभावना है. सभी संभागों में एक दो स्थानों पर गरज चमक के साथ अंधड़ और वज्रपात की संभावना है. साथ ही अधिकतम तापमान में गिरावट होने के आसार हैं. बारिश का इन इलाकों में अलर्ट मौसम विभाग ने प्रदेश के कई इलाकों में आंधी और बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया है. रायगढ़, बिलासपुर, कोरबा, जशपुर, गौरेला-पेंड्रा मरवाही, सुरगुजा, सूरजपुर, कोरिया और बलरामपुर में मेघगर्जन, आकाशीय बिजली, अचानक तेज हवा (30-40 प्रति घंटे रफ्तार) और वर्षा की संभावना है. रायपुर में आज कैसा रहेगा मौसम ? राजधानी रायपुर के लिए मौसम विभाग ने पूर्वानुमान जारी किया है. इसके मुताबिक, शनिवार को शहर में आकाश आंशिक मेघमय रहेंगे. वर्षा, गरज-चमक या अंधड़ चलने की संभावना है. अधिकतम तापमान 43 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान में 29 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है. 

उत्तर प्रदेश में बिजली हुई महंगी, अब हर महीने ज्यादा ढीली होगी जेब

लखनऊ  उत्तर प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक बेहद बुरी खबर है। प्रदेश में भीषण गर्मी, भारी बिजली कटौती और किल्लत के बीच अब जनता पर महंगाई की एक और मार पड़ने वाली है। यूपी पावर कॉरपोरेशन (UPPCL) ने राज्य में बिजली दरों को महंगा करने का एक बड़ा और चौंकाने वाला फैसला लिया है। इसके तहत अब उपभोक्ताओं के बिजली बिल में सीधे 10% का इजाफा होने जा रहा है। ‘ईंधन अधिभार’ के नाम पर वसूला जाएगा अतिरिक्त शुल्क जानकारी के मुताबिक, बिजली दरों में यह बढ़ोतरी ‘ईंधन अधिभार’ (Fuel Surcharge) के नाम पर की जा रही है। इसका मतलब यह है कि उपभोक्ताओं को अब अपनी सामान्य बिजली खपत के लिए तय दर से 10% राशि अलग से (अतिरिक्त शुल्क के रूप में) चुकानी होगी। पावर कॉरपोरेशन के इस फैसले से प्रदेश के करोड़ों घरेलू और व्यावसायिक उपभोक्ताओं की जेब पर सीधा असर पड़ेगा। 10 फीसदी अतिरिक्त शुल्क बढ़ा सामने आया है कि, अगले महीने से उत्तर प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं को बड़ा झटका लगने जा रहा है. यूपी पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) ने बिजली बिल में 10 फीसदी तक अतिरिक्त शुल्क वसूलने का फैसला किया है. यह राशि फ्यूल सरचार्ज पर बढ़ोतरी के कारण बढ़ी है. जारी आदेश के अनुसार, बढ़ा हुआ शुल्क जून महीने के बिजली बिल के साथ जोड़ा जाएगा. यानी उपभोक्ताओं को अपने नियमित बिजली बिल के अलावा 10 फीसदी अतिरिक्त राशि भी चुकानी होगी।  फ्यूल सरचार्ज बढ़ाने के कारण बढ़ोतरी इस फैसले का असर प्रदेश के लाखों घरेलू, व्यावसायिक और अन्य श्रेणी के बिजली उपभोक्ताओं पर पड़ेगा. बिजली विभाग का कहना है कि बिजली उत्पादन और खरीद में आने वाली अतिरिक्त लागत की भरपाई के लिए फ्यूल सरचार्ज लगाया जा रहा है. इसके तहत उपभोक्ताओं के बिल में अलग से शुल्क जोड़ा जाएगा।  कई इलाकों में बिजली कटौती से जूझ रहे हैं लोग हालांकि ऐसे समय में बिजली दरों में बढ़ोतरी का फैसला आया है, जब प्रदेश के कई हिस्सों में बिजली कटौती और आपूर्ति संबंधी शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं. गर्मी के मौसम में बढ़ती मांग के बीच उपभोक्ता पहले से ही बिजली संकट और अनियमित आपूर्ति की समस्या से जूझ रहे हैं. ऐसे में बिजली बिल में 10 फीसदी अतिरिक्त भार पड़ने से आम उपभोक्ताओं की जेब पर सीधा असर पड़ेगा।  जून के बिल के साथ जुड़कर आएगी बढ़ी हुई दरें राहत की उम्मीद लगाए बैठे उपभोक्ताओं को यह झटका बहुत जल्द लगने वाला है। विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, बिजली का यह बढ़ा हुआ दाम आगामी जून के बिल के साथ जुड़कर आएगा। यानी जून महीने में आप जो बिजली इस्तेमाल करेंगे, उसका बिल 10% अतिरिक्त शुल्क के साथ आपके हाथ में आएगा। भारी कटौती और किल्लत के बीच जनता को झटका एक तरफ जहाँ उत्तर प्रदेश के कई जिलों में इस समय भीषण गर्मी के कारण बिजली की भारी किल्लत देखी जा रही है और अघोषित बिजली कटौती से लोग परेशान हैं, वहीं दूसरी तरफ बिजली की दरों में इस तरह की बढ़ोतरी ने आम जनता की मुश्किलों को और बढ़ा दिया है। इस फैसले के सामने आने के बाद से ही सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक उपभोक्ताओं में भारी नाराजगी देखी जा रही है।

CM मोहन यादव ने किए माता वैष्णो देवी के दर्शन, श्राइन बोर्ड की व्यवस्था की जमकर तारीफ

भोपाल  मध्य प्रदेश के महाकाल, ओंकारेश्वर जैसे तीर्थ स्थानों पर क्राउड मैनेजमेंट का पूरा प्लान तैयार करने जम्मू के वैष्णो देवी मंदिर के भीड़ प्रबंधन का अध्ययन किया जाएगा. कटरा पहुंचे मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने बताया, " हमारे साथ पूरा एक प्रतिनिधिमंडल भी आया है, जो यहां श्रद्धालुओं के दर्शन से लेकर मंदिर ट्रस्ट की सभी व्यवस्थाओं का अध्ययन कर रहा है. जिस पर रिपोर्ट तैयार की जाएगी और आगे मध्य प्रदेश के तीर्थ स्थलों में इसे लागू किया जाएगा।  माता वैष्णों देवी के दरबार में पहुंचे मोहन यादव मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शुक्रवार को जम्मू कश्मीर के कटरा पहुंचे. वे यहां पर माता वैष्णों देवी के दर्शन तो करेंगे ही, लेकिन यहां की व्यवस्थाओं का अध्ययन भी होगा. उन्होंने बताया कि वे यहां माता वैष्णों के दर्शन के साथ-साथ भीड़ प्रबंधन सहित सभी व्यवस्थाओं का जायजा लेंगे. इन चीजों पर अध्ययन करने के लिए उनके साथ प्रतिनिधिमंडल भी है. केवल वैष्णों देवी नहीं देश के अलग-अलग तीर्थ स्थलों में किस तरह के प्रबंध है, ये जानने के लिए इसी तरह के अध्ययन के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कई अन्य प्रतिनिधिमंडल देश के अलग-अलग हिस्सों में भी भेजे हैं।  बताई दौरे की वजह कटरा पहुंचने पर सीएम डॉ. यादव ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि हम एक प्रतिनिधिमंडल के साथ यहां आए हैं, ताकि महाकाल मंदिर, महाकालेश्वर देवस्थान, ओंकारेश्वर देवस्थान तथा भोजशाला जैसे प्रमुख धार्मिक संस्थानों का अध्ययन किया जा सके। सीएम ने आगे बताया कि हाल ही में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भोजशाला को मां वाग्देवी के मंदिर की मान्यता दी है। हमारा उद्देश्य यह समझना है कि धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की भीड़ प्रबंधन, जनसुविधाओं और धार्मिक सेवाओं के लिए एक उत्कृष्ट एवं प्रभावी मॉडल किस प्रकार विकसित किया जा सकता है। बताई दौरे की वजह कटरा पहुंचने पर सीएम डॉ. यादव ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि हम एक प्रतिनिधिमंडल के साथ यहां आए हैं, ताकि महाकाल मंदिर, महाकालेश्वर देवस्थान, ओंकारेश्वर देवस्थान तथा भोजशाला जैसे प्रमुख धार्मिक संस्थानों का अध्ययन किया जा सके। सीएम ने आगे बताया कि हाल ही में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भोजशाला को मां वाग्देवी के मंदिर की मान्यता दी है। हमारा उद्देश्य यह समझना है कि धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की भीड़ प्रबंधन, जनसुविधाओं और धार्मिक सेवाओं के लिए एक उत्कृष्ट एवं प्रभावी मॉडल किस प्रकार विकसित किया जा सकता है। सीएम यादव ने बताया कि वह अधिकारियों के एक दल के साथ यहां आए हैं ताकि वैष्णो देवी मंदिर की व्यवस्थाओं का अध्ययन किया जा सके और इसे मध्य प्रदेश के प्रमुख मंदिरों के लिए एक मॉडल के रूप में विकसित किया जा सके। उन्होंने कहा कि उनके राज्य में भी प्रमुख मंदिरों में भीड़ प्रबंधन, सार्वजनिक सेवाओं और श्रद्धालु सुविधाओं को बेहतर बनाने पर काम किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि देश के अलग-अलग धार्मिक स्थलों का अध्ययन कर एक प्रभावी प्रबंधन मॉडल तैयार किया जा रहा है। वैष्णो देवी मंदिर में बेहतर व्यवस्थाओं और सुचारू दर्शन व्यवस्था की उन्होंने सराहना की। मुख्यमंत्री ने बताया कि श्राइन बोर्ड द्वारा यहां शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े कई संस्थान भी संचालित किए जा रहे हैं, जो श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के लिए उपयोगी हैं। उन्होंने कहा कि इसी तरह का समन्वित मॉडल अन्य मंदिरों में भी लागू करने की योजना है। इससे पहले हाल ही में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के एक फैसले का भी उल्लेख किया गया जिसमें एक धार्मिक स्थल से जुड़े मामले में ऐतिहासिक निर्णय दिया गया था। धार्मिक संस्थानों का होगा अध्ययन मीडिया से बात करते हुएमुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा, " हम एक प्रतिनिधिमंडल के साथ यहां आए हैं, जिससे महाकाल मंदिर, महाकालेश्वर देवस्थान, ओंकारेश्वर देवस्थान व भोजशाला जैसे प्रमुख धार्मिक संस्थानों का अध्ययन किया जा सके. हाल ही में उच्च न्यायालय ने भोजशाला को मां वाग्देवी के मंदिर की मान्यता दी है. हमारा उद्देश्य यह समझना है कि धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की भीड़ प्रबंधन, जनसुविधाओं और धार्मिक सेवाओं के लिए कैसे एक मॉडल तैयार हो सके. जिससे श्रद्धालुओं की सुविधा बढ़ाई जा सके।  बाकी तीर्थ स्थलों में भी जनसुविधाओं की लेंगे जानकारी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा, "देश के अलग-अलग हिस्सों में भी जो दल गए हैं, वे अध्ययन के बाद अपनी रिपोर्ट सौपेंगे. उसके हिसाब से मध्य प्रदेश के तीर्थ स्थलों में प्लान लागू होगा." उन्होंने कहा, "मुझे जानकारी दी गई है कि यहां मंदिर प्रबंधन के साथ-साथ एक विश्वविद्यालय, एक मेडिकल कॉलेज व अनेक सेवा-प्रधान संस्थाएं भी संचालित की जा रही हैं. हमारी सरकार भी अब रिलीजियस टूरिज्म के नए सर्किट तैयार कर उन्हें विकसित करने पर जोर दे रही है।   

योगी सरकार की पारदर्शी तबादला नीति, स्क्रीन पर चुनकर मिली तैनाती

लखनऊ उत्तर प्रदेश की योगी सरकार तबादला नीति में पारदर्शिता को लेकर विशेष ध्यान दे रही है. सरकार का पूरा प्रयास है कि विभागों में तबादले के दौरान किसी भी तरह का भ्रष्टाचार न हो और कार्मिकों को मेरिट के आधार पर तैनाती मिले. इसके तहत शुक्रवार को नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति विभाग ने एक अनूठी पहल शुरू की. जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह की अगुवाई में आज ट्रांसफर के इच्छुक सभी कर्मचारियों और अधिकारियों को मनचाही तैनाती उनके सामने पारदर्शी तरीके से दी गई. इस पूरी प्रक्रिया में 170 अधिकारियों-कर्मचारियों का तबादला किया गया. प्रक्रिया के दौरान विभाग के राज्य मंत्री दिनेश खटीक, रामकेश निषाद और अपर मुख्य सचिव अनुराग श्रीवास्तव भी मौजूद रहे. इस पूरी प्रक्रिया के दौरान 170 कर्मचारियों और अधिकारियों का ट्रांसफर किया गया. इसमें जल निगम ग्रामीण विभाग के 131, लघु सिंचाई विभाग के 28 और भूगर्भ जल विभाग के 11 अधिकारियों का ट्रांसफर किया गया. इसमें 2 मुख्य अभियंता, 15 अधीक्षण अभियंता, 35 अधिशासी अभियंता, 40 सहायक अभियंता और 78 जूनियर इंजीनियर के तबादले किए गए. पहली बार कार्मिकों से पूछकर दी गई तैनाती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए जल निगम ग्रामीण विभाग के हॉल में 8 स्क्रीनों की व्यवस्था की गई थी. इन 8 स्क्रीनों पर संबंधित पदों के लिए रिक्त जिलों की सूची प्रदर्शित की गई. सबसे वरिष्ठ और सक्षम अधिकारियों से क्रमवार उनके तबादले की प्राथमिकता पूछी गई और उनके मनचाहे जिले को लॉक कर दिया गया. कम्प्यूटर का बटन दबते ही कुछ सेकेंड में ही कार्मिकों का ट्रांसफर लेटर उनके मोबाइल में पहुंच गया. इस प्रक्रिया में पूरे प्रदेश के ट्रांसफर के इच्छुक अधिकारी और कर्मचारी मौजूद थे. इस दौरान जो कार्मिक किसी कारणवश नहीं आ पाए थे, उन्हें ऑनलाइन प्रक्रिया से जोड़ा गया था, जिससे वो अपनी बात मंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों के सामने रख सकें. वरिष्ठता क्रम और कार्य की गुणवत्ता को बनाया मानक जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने बताया कि पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए कार्मिकों के वरिष्ठता क्रम और कार्य की गुणवत्ता को मानक बनाया गया था. जो उनके केपीआई (की परफॉर्मेंस इंडेक्स) के आधार पर तय होता है. इस पूरी प्रक्रिया में कोई भी हस्तक्षेप नहीं हो सकता है. इस पूरी प्रक्रिया से सभी कार्मिकों में खुशी की लहर है. इस दौरान अपर मुख्य सचिव अनुराग श्रीवास्तव ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन और जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह की अगुवाई में भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस नीति के तहत काम हो रहा है. इसी के तहत पारदर्शी तरीके से ट्रांसफर प्रक्रिया को पूरा किया गया.  

महाभारत काल में लंबी उम्र का रहस्य, भीष्म-द्रोणाचार्य कैसे रहते थे इतने दीर्घायु?

आज की भागदौड़ वाली जिंदगी में बदलते लाइफस्टाइल के कारण भारतीयों का शरीर धीरे धीरे बीमारियों का घर बनता जा रहा है. जिसके कारण भारतीयों की लाइफ एक्सपेक्टेंसी कुल 60 से 70 साल रह गई है. लेकिन, क्या आपको पता है कि महाभारत काल में लोग आज के मुकाबले ज्यादा लंबी उम्र जीते थे. कहा जाता है कि उस दौर में कई लोग 80-90 साल से भी ज्यादा जिए थे. कुछ मान्यताओं के मुताबिक यह भी बताया गया है कि उस समय दिन और साल की गणना आज के समय से अलग थी, जिससे उस युग का रहस्य और भी बढ़ जाता है. महाभारत ग्रंथ के मुताबिक, भगवान कृष्ण भी 100 साल से ज्यादा जिए थे. उनकी लंबी उम्र का कारण आध्यात्मिक जीवन, अनुशासन, योग और सात्विक आहार था. वहीं, आज के समय में भी पूरी दुनिया में कई ऐसे लोग हैं जो 100 साल से ज्यादा जीते हैं. उनकी लाइफस्टाइल भी इन्हीं चीजों पर निर्भर करती है. इसी काल में कई महान योद्धा हुए, जिनमें खासतौर पर द्रोणाचार्य और भीष्म पितामह अपनी लंबी उम्र के लिए सबसे ज्यादा जाने जाते हैं. कहते हैं कि भीष्म पितामह को तो इच्छामृत्यु का वरदान मिला हुआ था. कहा जाता है कि महाभारत युद्ध में गंभीर रूप से घायल होने के बाद भी उन्होंने करीब 20 दिन तक प्राण नहीं त्यागे थे और फिर अपनी इच्छा से देह त्याग दिया था. लंबी उम्र जीने के पीछे के सीक्रेट गुरु द्रोणाचार्य गीता के मुताबिक, द्रोणाचार्य की लंबी उम्र का श्रेय उनके योग, व्यायाम, युद्ध-कला और सादगी भरे जीवन को जाता है. द्रोणाचार्य युद्ध-कला के महान आचार्य थे और कौरव-पांडव के गुरु भी थे. उनके बारे में कहा जाता है कि वे अच्छा आहार लेते थे. इसी वजह से उनका शरीर मजबूत रहता था. भीष्म पितामह वहीं भीष्म पितामह, जिनकी उम्र अलग-अलग ग्रंथों में 110 से 120 साल के बीच बताई गई है. उन्होंने अपना पूरा जीवन एक ऋषि की तरह सख्त अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा के साथ जीया था. भीष्म पितामह का सादा जीवन भी उनकी सेहत बनाए रखने में बड़ा कारण माना जाता है. उस समय खानपान में प्राकृतिक और शुद्ध चीजों को ज्यादा महत्व दिया जाता था. जो लंबी उम्र के लिए फायदेमंद मानी जाती थीं. इसके अलावा, इनका आजीवन ब्रह्मचर्य का पालन करना भी इनकी फिटनेस का राज था. कहा जाता है कि दोनों ही योद्धाओं ने कठिन अभ्यास और बढ़िया अनुशासन के कारण इतनी लंबी उम्र पाई थी. वे अपने कर्तव्यों को पूरी लगन से निभाते थे. दोनों एक हर दिन के तय दिनचर्या का पालन करते थे, जिससे उनका शरीर फिट और मन साफ रहता था. क्या खाते थे भीष्म पितामह? महाभारत ग्रंथ के अनुसार, भीष्म पितामह सात्विक आहार लेते थे. उनके खाने में ताजे फल, सब्जियां, साबुत अनाज, मेवे और दूध-घी जैसी चीजें शामिल थीं. कहा जाता है कि भीष्म बहुत नियंत्रित तरीके से भोजन करते थे और कभी भी जरूरत से ज्यादा नहीं खाते थे. यह आदत उन्हें स्वास्थ्य रखने और बीमारियों से बचाने में मदद करती थी. इन्हीं मान्यताओं के अनुसार पता चलता है कि भीष्म पितामह नॉन वेज नहीं खाते थे. ये थीं दिनचर्या माना जाता है कि महाभारत काल में लोग साफ-सुथरे माहौल, अच्छे लाइफस्टाइल और शारीरिक अनुशासन की वजह से लंबी उम्र जीते थे. कहा जाता है कि उस दौर में लोग 100 साल की उम्र में भी उतने ही फिट रहते थे, जितने आज के समय में 70 साल के लोग होते हैं. इसी तरह एक और महान ऋषि थे वेदव्यास, जिन्हें महाभारत का रचयिता माना जाता है. प्राचीन मान्यताओं के अनुसार, उनकी उम्र करीब 130 साल तक बताई जाती है. वेदव्यास का जन्म सत्यवती और ऋषि पराशर से हुआ था, और उनके जन्म से जुड़ी एक अनोखी और प्रसिद्ध कहानी भी सुनने को मिलती है. पांडवों की क्या थी उम्र? वैसे तो पांडवों की उम्र का कोई पुख्ता सबूत नहीं है. लेकिन, पांडवों के बड़े भाई युधिष्ठिर की 90 से 100 साल तक जिए थे. वहीं, भीम इनसे 1 से 2 साल छोटे थे, अर्जुन 3 से 4 साल छोटे थे और नकुल-सहदेव अर्जुन से 10 से 15 छोटे थे. महाभारत युद्ध के दौरान युधिष्ठिर की उम्र करीब 70 से 75 साल की थी. युद्ध के बाद, पांडवों ने हस्तिनापुर पर 36 साल तक शासन किया था, जिसके बाद उन्होंने अपनी स्वर्ग की यात्रा शुरू की थी. धृतराष्ट्र की क्या उम्र थी? महाभारत ग्रंथ के मुताबिक, धृतराष्ट्र का जन्म नियोग प्रथा से हुआ था, जिसमें ऋषि वेदव्यास ने राजा विचित्रवीर्य की मृत्यु के बाद उन्हें जन्म दिया. वे पांडु और विदुर के बड़े भाई थे. माना जाता है कि महाभारत युद्ध के समय उनकी उम्र करीब 90-100 साल के बीच थी. इससे इस बात अंदाजा लगाया जा सकता है कि उस समय दुर्योधन और उसके भाई-बहन करीब 50-60 साल के थे. युद्ध के बाद धृतराष्ट्र, गांधारी और कुंती के साथ लगभग 15 साल तक हस्तिनापुर में रहे. इसके बाद वे जंगल में चले गए (वनवास ले लिया), जहां 2-3 साल बाद जंगल में लगी आग में उनकी मृत्यु हो गई बताई जाती है. महाभारत काल में एक साल कितने समय का होता था? जानकारी के मुताबिक, महाभारत काल में साल की गणना चंद्र और सूर्य दोनों के आधार पर होती थी, यानी समय को चांद और सूरज दोनों के हिसाब से माना जाता था. चंद्र वर्ष करीब 354 दिनों का होता था, जिसमें 12 महीने होते थे. उस वक्त का हर महीना लगभग 29-30 दिन का माना जाता है. इस साल को सौर वर्ष के साथ संतुलित रखने के लिए बीच-बीच में एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता था, जिसे अधिक मास कहा जाता है.

किचन में इन 3 चीजों को चूल्हे के पास न रखें, वरना बढ़ सकता है वास्तु दोष

 शास्त्रों में रसोई को घर का सबसे खास हिस्सा माना गया है, क्योंकि यहीं से पूरे परिवार को अच्छी सेहत और ऊर्जा मिलती है. किचन में जो गैस चूल्हा होता है, उसे अग्नि देव का रूप माना जाता है.  चूल्हे का सीधा संबंध हमारी तरक्की और घर की तिजोरी से होता है. अक्सर हम अनजाने में चूल्हे के पास गलत चीजें रख देते हैं या गलत दिशा में मुंह करके खाना बनाते हैं, जिससे घर में वास्तु दोष लग जाता है.  आइए जानते हैं इससे जुड़े जरूरी नियम . इन 3 चीजों को चूल्हे के पास से तुरंत हटाएं 1. पानी का सिंक, मटका या बोतलें (आग और पानी की दुश्मनी)- गैस चूल्हे के बिल्कुल पास या उसके ठीक सामने कभी भी पानी की चीजें नहीं होनी चाहिए. जैसे बर्तन धोने का सिंक, पानी का मटका, वॉटर फिल्टर या पीने के पानी की बोतलें. क्या है नुकसान: गैस चूल्हा आग है वहीं सिंक पानी का जरिया है. आग और पानी एक-दूसरे के विरोधी तत्व हैं.  जब ये दोनों बिल्कुल पास होते हैं, तो घर में अशांति बढ़ती है. परिवार के लोगों में बिना बात के झगड़े होने लगते हैं, इससे कमाया हुआ पैसा बीमारियों में खर्च हो जाता है. उपाय: अगर किचन छोटा है, तो चूल्हे और सिंक के बीच में एक छोटा सा लकड़ी का बोर्ड या पार्टिशन रख दें. 2. डस्टबिन, झाड़ू या गंदे कपड़े – कई लोग आसानी के लिए गैस चूल्हे के ठीक नीचे या बगल में छोटा डस्टबिन (कूड़ेदान) रख देते हैं, या फिर सफाई के बाद झाड़ू- गंदा पोछा वहीं छोड़ देते हैं. क्या है नुकसान: चूल्हा वह जगह है जहाँ मां लक्ष्मी का वास होता है. वहीं डस्टबिन-झाड़ू गंदगी व नकारात्मक ऊर्जा के प्रतीक हैं.  चूल्हे के पास कचरा रखने से मां लक्ष्मी रूठ जाती हैं , जिससे घर में बरकत (पैसों की बचत) खत्म हो जाती है. उपाय: डस्टबिन को हमेशा चूल्हे से दूर ढककर रखें. झाड़ू को भी ऐसी जगह छिपाकर रखें जहां किसी की सीधी नजर न पड़े. दिशाओं का रखें खास ध्यान (Kitchen Direction Rules)वास्तु शास्त्र में दिशाओं का बहुत बड़ा महत्व होता है. गलत दिशा में बना किचन या गलत दिशा में रखा चूल्हा घर के मुखिया की तरक्की रोक सकता है. 3- मिक्सर ग्राइंडर – वास्तु के अनुसार मिक्सर ग्राइंडर को गैस चूल्हे के बिल्कुल पास नहीं रखना चाहिए.गैस चूल्हे और मिक्सर के बीच कम से कम 2 से 3 फीट की दूरी होनी चाहिए. पास रखने से घर में मानसिक तनाव बढ़ता है. मिक्सर, माइक्रोवेव या ओवन जैसे बिजली के सामानों को रसोई के दक्षिण (South) या दक्षिण-पश्चिम (South-West) कोने में रखना सबसे शुभ होता है. किचन की सही दिशा: घर में रसोई हमेशा आग्नेय कोण यानी दक्षिण-पूर्व (South-East) दिशा में होनी चाहिए. यह दिशा अग्नि देव की मानी जाती है.  अगर यहां संभव न हो, तो उत्तर-पश्चिम (North-West) दिशा दूसरा सबसे अच्छा विकल्प है. भोजन बनाने वाले का मुंह: खाना बनाते समय खाना पकाने वाले का मुंह हमेशा पूर्व (East) दिशा की ओर होना चाहिए.  पूर्व दिशा की ओर मुंह करके खाना बनाने से सेहत अच्छी रहती है . इस दिशा में न रखें चूल्हा: गैस चूल्हे को कभी भी उत्तर (North) दिशा में नहीं रखना चाहिए.  उत्तर दिशा धन के देवता कुबेर की होती है.  इस दिशा में आग जलाने से पैसों की भारी तंगी का सामना करना पड़ सकता है. बरकत के लिए 3 आसान नियम:रात में जूठे बर्तन न छोड़ें: सोने से पहले सिंक के सारे बर्तन धो लें और चूल्हे को साफ करके सोएं.  साफ किचन में ही रात के समय मां लक्ष्मी आती हैं. तवे को छिपाकर रखें: खाना बनाने के बाद तवे या कढ़ाई को चूल्हे के ऊपर मत छोड़ें.  उसे धोकर अलमारी के अंदर रखें.  तवे को कभी भी उल्टा करके नहीं रखना चाहिए. पहली रोटी गाय की: सुबह जब भी पहली बार चूल्हा जलाएं, तो पहली रोटी हमेशा गाय के लिए निकालें.  इससे पितृ दोष दूर होते हैं और घर में खुशहाली आती है.

2 जून 2026 को गुरु का बड़ा गोचर, 4 राशियों की बदलेगी किस्मत

 ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों का राशि परिवर्तन सभी 12 राशियों के जीवन में बड़े बदलाव लेकर आता है. 2 जून 2026 को देवगुरु बृहस्पति मिथुन राशि से निकलकर अपनी उच्च राशि कर्क में प्रवेश करने जा रहे हैं.  गुरु के इस गोचर से सिंह राशि में पहले से मौजूद केतु के साथ उनका द्विद्वादश योग बनेगा. ज्योतिष में ज्ञान और अध्यात्म के कारक माने जाने वाले इन दोनों ग्रहों का यह दुर्लभ संयोग 4 राशियों के लिए शिक्षा, करियर और आर्थिक मोर्चे पर छप्परफाड़ खुशियां लेकर आने वाला है. मेष राशि मेष राशि के जातकों के लिए यह योग उनकी छिपी हुई क्षमताओं को बाहर लाएगा. कार्यक्षेत्र में आपका प्रदर्शन बेहतरीन रहेगा, जिससे उच्च पद या प्रमोशन की प्राप्ति हो सकती है. मेडिकल और बॉटनी (वनस्पति विज्ञान) की पढ़ाई कर रहे छात्रों को बड़ी सफलता मिलेगी. पारिवारिक जीवन सुखद रहेगा. आपकी आर्थिक स्थिति में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा. कर्क राशि 2 जून को गुरु का गोचर आपकी ही राशि में होने जा रहा है, जबकि केतु आपके धन भाव में रहेंगे. यदि आप जनसंचार (Mass Comm), सेल्स या मार्केटिंग के छात्र हैं, तो आपको शानदार परिणाम मिलेंगे.  बेरोजगारों को मनचाही जगह पर नौकरी मिल सकती है. अध्यात्म की तरफ झुकाव बढ़ेगा, मानसिक तनाव से पूरी तरह मुक्ति मिलेगी. धनु राशि धनु राशि के स्वामी खुद देवगुरु बृहस्पति हैं.  इस गोचर से आपका आठवां और नौवां भाव सक्रिय होगा, जिससे गूढ़ व रहस्यमयी विषयों को जानने की उत्सुकता बढ़ेगी.  जो छात्र रिसर्च या अनुसंधान के कार्यों से जुड़े हैं, उनके लिए यह समय सुनहरे अवसर लेकर आएगा. करियर में बड़ी उपलब्धियां मिलेंगी, धार्मिक यात्राओं के योग बनेंगे. कुंभ राशि कुंभ राशि वालों के लिए द्विद्वादश योग करियर में बेहद सुखद अनुभव लेकर आएगा. आपका सुलझा हुआ स्वभाव लोगों को प्रभावित करेगा. आप अपने शत्रुओं को परास्त करने में सफल रहेंगे. विद्यार्थियों की एकाग्रता में सुधार होगा, जिससे पढ़ाई में मन लगेगा. इस दौरान किसी बड़े आध्यात्मिक गुरु से मुलाकात आपके जीवन की दिशा बदल सकती है.

झारखंड के मोहनाद गांव में तनाव, तीन राउंड फायरिंग के बाद तीन हिरासत में

 टुंडी झारखंड के टुंडी की बरवाटांड़ पंचायत अंतर्गत मोहनाद गांव में शुक्रवार की शाम प्रतिबंधित मांस मिलने के बाद भारी बवाल मच गया। सैकड़ों आक्रोशित लोगों ने आरोपियों को उनके घर में ही घेर लिया। मौके पर पहुंची पुलिस को भीड़ से आरोपियों को सुरक्षित निकालकर ले जाने के लिए फायरिंग भी करनी पड़ी। तीन राउंड फायरिंग और लाठीचार्ज के बाद भीड़ छंट गई और पुलिस तीनों आरोपियों को सुरक्षित हिरासत में लेकर थाना चली गई। वहां पर तनाव को देखते हुए एसडीएम लोकेश बारंगे ने निषेधाज्ञा लगा दी है। पूरे गांव में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। हिरासत में लिए गए लोगों में अशरफ अंसारी, उसके पिता और घर के मालिक सरफुद्दीन अंसारी एवं वाहन चालक मनव्वर अंसारी शामिल हैं। घटना के संबंध में बताया जा रहा है कि मोहनाद में एक तालाब के किनारे मांस फेंका हुआ था। खेलने गए बच्चों ने सबसे पहले इसे देखा। इसके बाद गांव के लोगों को इसकी जानकारी हुई। गांव में फैली सनसनी प्रतिबंधित मांस होने की बात पूरे गांव में फैल गई। इसके बाद ग्रामीण उग्र हो गए। दर्जनों लोग सरफुद्दीन अंसारी के घर के बाहर जुट गए। ग्रामीणों का आरोप है कि वहां भी मांस फेंका हुआ था, जिसे बाद में हटा लिया गया। ग्रामीणों का गुस्सा और बढ़ गया। इसी बीच सरफुद्दीन अंसारी का पुत्र अशरफ अंसारी एक मालवाहक से अपने घर की ओर आ रहा था। ग्रामीणों ने वाहन रोका। उसमें एक मवेशी लदा था। यह देख ग्रामीण और उग्र हो गए। इधर अशरफ और वाहन चालक मनव्वर अंसारी किसी तरह भीड़ से बचकर अपने घर में घुस गए। क्या बोली पुलिस इस घटना को लेकर जानकारी देते हुए तुंडी के थाना प्रभारी उमाशंकर ने बताया कि तीन लोगों को इस मामले में हिरासत में लिया गया है। तीनों से पूछताछ की जा रही है। भीड़ से तीनों को सुरक्षित निकालने के लिए तीन राउंड फायरिंग करनी पड़ी है। स्थिति नियंत्रण में है। वहां निषेधाज्ञा लगा दी गई है।

भारतीय आमों पर जापान की रोक से हलचल, आखिर वहां कौन-सा मैंगो है लोगों की पहली पसंद?

नई दिल्ली भारत दुनिया में आम का सबसे बड़ा उत्पादक है. यहां हर साल लगभग 24 मिलियन मीट्रिक टन आम की पैदावार होती है और इसकी बेहतरीन किस्म दुनिया भर के देशों में एक्सपोर्ट की जाती हैं. हालांकि जापान ने अब भारतीय आमों के आयात पर अस्थायी रोक लगा दी है.  इसके बाद अल्फोंसो, केसर, लंगड़ा और बंगनपल्ली जैसी मशहूर किस्मों के निर्यातकों को झटका लगा है. इसी बीच अब कई लोग यह जानने को उत्सुक हैं कि जापान में असल में आम की कौन सी किस्म सबसे ज्यादा खाई जाती है? आइए जानते हैं इस सवाल का जवाब।  जापान का भारतीय आमों पर प्रतिबंध      जापान ने भारतीय आमों के आयात पर कड़े क्वॉरेंटाइन नियमों के कारण रोक लगाई।     यह रोक आम की गुणवत्ता या स्वाद की चिंता से नहीं, बल्कि पैकेजिंग में तकनीकी कमी से है।     जापान में घरेलू 'इरविन' किस्म के आम लोकप्रिय हैं, जिन्हें लग्जरी उत्पाद माना जाता है।     रोक से पहले भारतीय आमों की विदेशी फलों की चाहत रखने वाले ग्राहकों में काफी मांग थी। जापान का यह फैसला स्वाद या फिर गुणवत्ता से जुड़ी चिंता की वजह से नहीं बल्कि कड़े कृषि क्वॉरेंटाइन नियम की वजह से लिया गया है. मार्च 2026 में जापान के क्वॉरेंटाइन अधिकारियों ने भारत में आमों के उपचार और पैकेजिंग सुविधाओं का निरीक्षण किया और कथित तौर पर एक्सपोर्ट से पहले इस्तेमाल की जाने वाली फ्यूमिगेशन और साफ सफाई प्रक्रिया में तकनीकी कमियां पाई।  जापान आयातित फलों में कीटों और फ्रूट फ्लाइज के संबंध में काफी कड़ी जीरो टॉलरेंस नीति का पालन करता है. निरीक्षण के बाद जापान ने 25 मार्च 2026 के बाद जारी किए गए प्रमाण पत्रों के साथ आने वाली आमों की खेपों को स्वीकार करना बंद कर दिया।  जापान में आम की कौन सी किस्म सबसे ज्यादा मशहूर?  जापान में सबसे ज्यादा खाई जाने वाली आम की किस्म इरविन है. इसे आमतौर पर एप्पल मैंगो के नाम से जाना जाता है. भारत के उलट जहां आम को एक मौसमी फल माना जाता है जापान में आमों को विलासिता की वस्तु माना जाता है और अक्सर इन्हें काफी बेहतरीन उपहार के तौर पर खरीदा जाता है. इरविन किस्म की खेती मुख्य रूप से जापान के ओकिनावा और मिजायाकी प्रति में ग्रीन हाउस के अंदर काफी कंट्रोल्ड परिस्थितियों में की जाती है. ये आम अपने गहरे लाल रंग, मलाईदार बनावट, जबरदस्त मिठास और पूरी तरह से रेशे रहित गूदे के लिए जाने जाते हैं।  वहीं अगर भारत की बात करें तो भारत के केसर, अल्फांसो, लंगड़ा और बंगनपल्ली आम जापान में सबसे ज्यादा भेजी जाती हैं और पसंद की जाती हैं।  जापान में कौन से इंपोर्टेड आम लोकप्रिय हैं? घरेलू तौर पर लग्जरी आमों का उत्पादन करने के बावजूद जापान अपनी कुल मांगों को पूरा करने के लिए अभी भी इंपोर्ट पर ही निर्भर है.  रोक लगने से पहले भारतीय आम उन ग्राहकों के बीच काफी लोकप्रिय थे जो विदेशी इंपोर्टेड फलों की तलाश में रहते थे. भारत के अलावा जापान थाईलैंड, मेक्सिको और फिलिपींस जैसे देशों से भी आम इंपोर्ट करता है।