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महेश भट्ट की पर्सनल लाइफ पर पूजा भट्ट का बड़ा खुलासा

फिल्ममेकर महेश भट्ट अपनी रोमांटिक-ड्रामा फिल्मों के लिए मशहूर रहे हैं. उन्होंने अपनी रियल लाइफ लव स्टोरी पर बेस्ड 1990s की सुपरहिट फिल्म आशिकी भी बनाई थी. हालांकि वो प्रोफेशनल से ज्यादा, अपनी पर्सनल जिंदगी को लेकर चर्चाओं में बने रहे. महेश भट्ट ने दो शादियां की थीं. इसके अलावा उनके धर्म परिवर्तन की बातें भी खूब चला करती थीं. कहा जाता है कि सोनी राजदान से शादी करने के लिए, उन्होंने मुसलमान धर्म अपना लिया था. पिता की दूसरी शादी पर बोलीं पूजा महेश भट्ट की जिंदगी विवादों से घिरी रही. हाल ही में उनकी बेटी पूजा भट्ट ने अपने पिता की दो शादियों और सोनी राजदान संग रिश्ते पर खुलकर बात की. विक्की लालवानी के यूट्यूब चैनल पर पूजा ने बताया कि उनके जन्म के बाद, मां किरण और पिता महेश भट्ट की लव स्टोरी ज्यादा समय तक टिक नहीं सकी, और महेश भट्ट घर से बाहर निकल गए. हालांकि वो कुछ समय बाद वापस घर लौटे और फिर उनके भाई राहुल भट्ट का जन्म हुआ. मगर वो भी उनके रिश्ते को बचा ना सका, जिसके बाद फिल्ममेकर की मुलाकात सोनी राजदान से हुई जिनसे उन्होंने शादी की. पूजा ने आगे कहा- मैं सोनी (राजदान) के बारे में मेरी मां से भी पहले जान चुकी थी. मेरे पिता ने मुझे नींद से उठाकर कहा कि मैं तुम्हें बताना चाहता हूं कि मैं एक महिला से मिला और मैं घर छोड़कर जाने वाला हूं. लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि मैं तुम्हें थोड़ा कम प्यार करता हूं और मैं हमेशा तुम्हारे साथ रहूंगा. कई लोगों ने मुझसे सवाल किए कि कैसे इतनी छोटी उम्र में तुम्हारे पिता ने तुमसे सच कह दिया? लेकिन मैंने उन्हें कहा कि अगर वो मुझसे नहीं कहेंगे, तो किससे कहेंगे? मैं किसी दूसरी जगह से बेहतर ये बात अपने पिता या मां के मुंह से सुनना पसंद करूंगी. जब सोनी राजदान को लगा बुरा पूजा आगे उस दिन का भी जिक्र करती हैं, जब सोनी राजदान ने एक्ट्रेस से उनकी और महेश भट्ट की शादी पर खुलकर बात की थी. उन्होंने बताया- एक दिन सोनी ने मुझसे अपने दिल की बात कही कि पूजा मुझे दोषी जैसा महसूस होता है. लेकिन मैंने उनसे पूरे दिल से कहा कि सोनी, तुम एक मजबूत रिश्ते को तोड़ नहीं सकती थी. एक मजबूत रिश्ते में किसी और के लिए कोई जगह नहीं होती जब तक कि उसमें कोई दरार न हो या कोई कमी न हो, ताकि कोई दूसरा आकर उस कमी को पूरा कर सके. पूजा ने इसी बातचीत में अपनी दोनों बहनों आलिया और शहीन भट्ट संग रिश्ते पर भी खुलकर बात की. उन्होंने बताया कि जब शहीन का जन्म हुआ था, तबसे वो उनसे करीब हो गई थीं. महेश भट्ट ने बेटी के जन्म के बाद सीधा उनकी मां किरण को कॉल किया था, जिसके बाद उन्होंने पूजा को बड़ी बहन बनने की खबर दी. वो धीरे-धीरे सोनी राजदान और उनके परिवार से करीब हो गईं. आज पूजा कहती हैं कि उनका रिश्ता आलिया, सोनी राजदान और शहीन भट्ट से काफी बेहतर है.

भिलाई स्टील प्लांट में बड़ी चोरी पकड़ी गई, 100 टन लोहा बरामद; पुलिस जांच तेज

भिलाई नगर. पुरानी भिलाई थाना अंतर्गत हथखोज के एक यार्ड में पुलिस की दबिश में भिलाई इस्पात संयंत्र से करोड़ों रुपए के लोहे चोरी का बड़ा खुलासा हुआ है। रात में पुलिस ने खुर्सीपार निवासी में संजय सिंह के घर में दबिश दी, लेकिन वह फरार बताया गया। पुलिस उसकी तलाश कर रही है। इस मामले में पुलिस चार लोगों से पूछताछ कर रही है। चोरी के लोहा के खेल में अभी भले ही ट्रांसपोर्टर संजय सिंह का नाम आया हो, लेकिन इस चोरी का असली मास्टर माइंड कौन है इसका खुलासा पूरी जांच के बाद ही होगा। पुलिस ने मौके पर एक ट्रक, दो हाइवा, एक जेसीबी व एक क्रेन व सैकडो ‘टन लोहा बरामद किया है। क्राइम डीएसपी यदुमणि सिदार ने बताया कि मंगलवार की शाम 5 बजे गुप्त सूचना मिली कि पुरानी भिलाई थाना अंतर्गत एके ट्रेडर्स यार्ड में बड़े पैमाने पर बीएसपी से चोरी का लोहा डंप किया जा रहा है। सूचना पर शहर एएसपी सुखनंदन राठौर, छावनी सीएसपी प्रशांत पैकरा, पुरानी भिलाई टीआई अंबर सिंह व पुलिस स्टॉफ ने दबिश दी। जहां पर हाइवा में लोड सैकड़ों की संख्या में बीएसपी से चोरी का लोहा, जेसीबी, केन, ट्रक व हाइवा मिला। मौके पर मिले ड्राइवरों से पूछताछ में पता चला कि यार्ड चलाने वाला कोई संजय सिंह है। पूरी जांच और पूछताछ के बाद पुलिस की टीम ने देर रात खुर्सीपार स्थित उसके निवास पर दबिश दी, जहां संजय सिंह नहीं मिला। अनुमान लगाया जा रहा है कि संजय को पुलिस के आने की भनक लग गई होगी तो वह फरार हो गया। पुलिस उसकी तलाश कर रही है। वहीं चार लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। स्पष्ट नहीं हो पाया कि इस चोरी के मामले में और कौन-कौन संलिप्त है।

‘ज़िंदगी तू ने मुझे क़ब्र से कम दी ज़मीं’ लिखने वाले मशहूर शायर बशीर बद्र नहीं रहे

भोपाल उर्दू के प्रसिद्ध शायद बशीर बद्र का गुरुवार को निधन हो गया। वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे। बशीर बद्र ने 91 साल की उम्र में अंतिम सांस ली। बशीर की पत्नी राहत बद्र ने शायर के निधन की जानकारी सोशल मीडिया एकाउंट पर साझा करते हुए लिखा, बशीर साहब लेफ्ट अस…प्रेयर्स। बशीर बद्र के निधन से पूरे साहित्य जगत में शोक की लहर है। बशीर बद्र को आधुनिक गजल के लिए उस्ताद माना जाता है।प्रसिद्ध उर्दू शायर आधुनिक ग़ज़ल के उस्ताद और पद्मश्री सम्मानित डॉ. बशीर बद्र का भोपाल में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया. वह 91 सालों के थे. मेरठ में एक जमाने में वह साहित्यिक आयोजन की शान होते थे. बाद में जब थोड़ी दूर पर स्थित उनके मकान के सामने से गुजरता था, तो उसकी दीवारों पर कुछ जले जैसे निशान नजर आते थे. मेरठ के 1987 के भीषण दंगों के बाद उन्होंने अपने इस शहर को हमेशा के लिए ही छोड़ दिया. लेकिन उनसे मुलाकातें, मुस्कुराहट और हर मौके के लिए मौजूं शायरियां अब तक याद तो हैं ही। बशीर बद्र को साहित्य क्षेत्र में योगदान के लिए पद्मश्री अवार्ड भी मिल चुका है। 15 फरवरी 1935 को अयोध्या में जन्मे शायद बशीर बद्र ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से अपनी उच्च शिक्ष और पीएचडी की थी। बशीर बद्र ने यहीं पर उर्दू के प्रोफेसर के रूप में सेवाएं भी दी थीं। बशीर बद्र को आसानी भाषाओं में गजलें लिखने में महाभारत हासिल थी। उन्होंने गजल विधा में कई नए और ठेठ शब्दों को शामिल किया था। बतादें कि बीमारी के कारण बशीर बद्र ने कई सालों से शायरी से किनारा कर लिया था। 1987 में मेरठ में दंगों में बशीर बद्र का जलाया गया था घर उर्दू शायरी से लोगों के दिलों पर राज करने वाले बशीर बद्र का 1987 के मेरठ के सांप्रदायिक दंगों में उनका घर जला दिया गया था। इस घटना में उनकी कई ऐतिहासिक रचनाएं और कविताएं हमेशा के लिए जलकर राख हो गई थीं। इस घटना के बाद से वे हमेशा के लिए भोपाल में शिफ्ट हो गए थे। मेरठ कॉलेज में लेक्चरार रह चुके हैं बशीर बद्र 1973 में बशीर बद्र ने एएमयू से पीएचडी की थी और 12 अगस्त 1974 को उन्होंने मेरठ कॉलेज के उर्दू विभाग में बतौर लेक्चरर ज्वाइन किया था। वे शायरी के ऊंचे मुकाम पर थे। जिस वक्त उन्होंने मेरठ कॉलेज ज्वाइन किया वे शायरी की दुनिया में जाने पहचने नाम थे।यही वजह रही कि जब तक उन्होंने नौकरी की, तब तक उन्हें पीएचडी की उपाधि की जरूरत नहीं पड़ी। उनका नाम ही पीएचडी से बड़ा हो गया था। शंहशाह-ए-गजल बशीर बद्र को 2018 में मिला था जोश-ए-उर्दू अवार्ड उर्दू शायद बशीर बद्र को जोश-ए-उर्दू-2018 अवार्ड से नवाजा गया था। दुबई की साहित्यिक संस्था बज्म-ए-उर्दू के पदाधिकारियों ने भोपाल स्थित उनके घर पहुंचकर यह अवार्ड दिया था। 6 जुलाई शुक्रवार को डॉ. बशीर बद्र का आवास पर जब अवार्ड पहुंचा तो पूरा घर ही चहक उठा था। दुबई की नामचीन साहित्यिक संस्था बज्म-ए-उर्दू ने डॉ. बशीर बद्र को ‘जोश-ए-उर्दू-2018 के तहत शॉल ओढ़ाकर चांदी की हैंडमेड शील्ड दी थी। बशीर बद्र उन चुनिंदा शायरों में थे, जिनकी गजलें सिर्फ मुशायरों तक सीमित नहीं रहीं. उनकी लाइनें लोगों की डायरी, वॉट्सऐप स्टेटस, मोहब्बत के खत और टूटे दिलों की जुबान बन गईं। उनका एक शेर तो जैसे हर दौर में जिंदा रहेगा- उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो, न जाने किस गली में जिंदगी की शाम हो जाए…' और ये भी- मुझे मालूम है उसका ठिकाना फिर कहां होगा परिंदा आसमां छूने में जब नाकाम हो जाए…' बशीर बद्र की शायरी की सबसे बड़ी ताकत यही थी कि वो मुश्किल अल्फाज में नहीं, सीधे दिल में उतरती थी। मोहब्बत को उन्होंने मुश्किल नहीं, आसान बताया. उनकी शायरी में दर्द था, लेकिन उम्मीद भी थी. मोहब्बत थी, लेकिन दिखावा नहीं था. उन्होंने लिखा- 'सर से पा तक वो गुलाबों का शजर लगता है बा-वजू होके भी छूते हुए डर लगता है…' और फिर मोहब्बत को इतना आसान बना दिया कि पढ़ने वाला मुस्कुरा उठे- 'मैं तेरे साथ सितारों से गुजर सकता हूं कितना आसान मोहब्बत का सफर लगता है…' बशीर बद्र सिर्फ इश्क के शायर नहीं थे. उन्होंने जिंदगी के संघर्ष को भी उतनी ही खूबसूरती से लिखा। उनका ये शेर आज भी लाखों लोगों को हिम्मत देता है- 'जिस दिन से चला हूं मेरी मंजिल पे नजर है आंखों ने कभी मील का पत्थर नहीं देखा…' और फिर जिंदगी की तकलीफ को कुछ यूं बयान किया- ये फूल मुझे कोई विरासत में मिले हैं तुमने मेरा कांटों भरा बिस्तर नहीं देखा…' उनकी शायरी में एक अजीब सी नरमी थी. ऐसा लगता था जैसे कोई बहुत धीरे से जिंदगी समझा रहा हो. 'कहां से आई ये खुशबू, ये घर की खुशबू है इस अजनबी के अंधेरे में कौन आया है… 'महक रही है जमीं चांदनी के फूलों से खुदा किसी की मोहब्बत पे मुस्कुराया है…' 15 फरवरी 1935 को उत्तर प्रदेश के अयोध्या में जन्मे बशीर बद्र बाद में भोपाल आकर बस गए. उन्होंने उर्दू साहित्य को कई यादगार गजलें, किताबें और अशआर दिए. कई बड़े सम्मानों से उन्हें नवाजा गया. लेकिन सच ये है कि उनका सबसे बड़ा सम्मान वो लोग थे, जिन्होंने उनकी शायरी को अपनी जिंदगी का हिस्सा बना लिया। आज बशीर बद्र नहीं हैं. लेकिन उनकी लाइनें शायद हमेशा रहेंगी… किसी की याद में, किसी की मोहब्बत में, किसी की तन्हाई में. डॉ. बशीर बद्र के निधन की खबर सामने आने के बाद साहित्य और शायरी जगत में शोक की लहर है. उनके चाहने वाले सोशल मीडिया पर उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं।

देश की सर्वोच्च अदालत में नई नियुक्तियों की तैयारी, वरिष्ठ वकील वी. मोहना का नाम भी चर्चा में

भोपाल सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने चार हाई कोर्ट चीफ जस्टिस व एक वरिष्ठ अधिवक्ता को सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत करने की सिफारिश की है. इस कॉलेजियम में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा समेत चार मुख्य न्यायधीशों को शामिल किया है। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम में 4 चीफ जस्टिस सर्वोच्च न्यायालय कॉलेजियम ने 22 और 27 मई, 2026 को आयोजित अपनी बैठकों में निम्निलिखित मुख्य न्यायधीशों को सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत करने की अनुशंसा की है। मध्य प्रदेश के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा बनेंगे सुप्रीम कोर्ट के जज     न्यायमूर्ति शील नागू, मुख्य न्यायाधीश, पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय (पीएचसी: मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय)     न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर, मुख्य न्यायाधीश, बॉम्बे उच्च न्यायालय (पीएचसी: झारखंड उच्च न्यायालय)     न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा, मुख्य न्यायाधीश, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (पीएचसी: दिल्ली उच्च न्यायालय)     न्यायमूर्ति अरुण पल्ली, मुख्य न्यायाधीश, जम्मू और कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय (पीएचसी: पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय)     वरिष्ठ अधिवक्ता वी. मोहना (सुप्रीम कोर्ट) चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा का दिल्ली से संबंध, चीफ जस्टिस नागू का एमपी से मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा का संबंध दिल्ली उच्च न्यायालय से है. वर्तमान में चीफ जस्टिस रहते हुए उन्होंने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में कई चर्चित मामलों की सुनवाई की हैं और कई ऐतिहासिक फैसले भी दिए हैं. उन्हें भी इस कोलेजियम में शामिल किया गया है. वहीं, जस्टिस न्यायमूर्ति शील नागू वर्तमान में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस हैं और उनका मूल मध्य प्रदेश हाईकोर्ट है. इसके अलावा जम्मू और कश्मीर व लद्दाख उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अरुण पल्ली पंजाब व हरियाणा उच्च न्यायालय से हैं। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम में मध्य प्रदेश के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा यदि केंद्र सरकार द्वारा कॉलेजियम की सिफारिशों को मंजूरी दे दी जाती है, तो सभी सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत होंगे. वहीं, वरिष्ठ अधिवक्ता वी मोहना बार से सीधे सर्वोच्च न्यायालय में पदोन्नत होने वाली दसवीं अधिवक्ता होंगी. वे सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा ​​के बाद यह उपलब्धि हासिल करने वाली दूसरी महिला होंगी. 22 और 27 मई को हुई अपनी बैठक में, कॉलेजियम ने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट की चीफ जस्टिस जस्टिस शील नागू, बॉम्बे हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस जस्टिस श्री चंद्रशेखर, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस जस्टिस संजीव सचदेवा, जम्मू कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस जस्टिस अरुण पल्ली, और सीनियर एडवोकेट वी मोहना को सुप्रीम कोर्ट के जज के तौर पर नियुक्ति को मंजूरी दी। तमिलनाडु की रहने वाली मोहना, अगर केंद्र इन सिफारिशों को मंजूरी दे देता है, तो सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाली दूसरी महिला वकील होंगी जिन्हें सीधे सुप्रीम कोर्ट में प्रमोशन मिलेगा। इससे पहले, जस्टिस इंदु मल्होत्रा ​​पहली महिला सीनियर एडवोकेट थीं जिन्हें सीधे सुप्रीम कोर्ट का जज नियुक्त किया गया था. 2021 में, तीन महिला जज, जस्टिस हिमा कोहली, बेला एम. त्रिवेदी, और बीवी नागरत्ना को सुप्रीम कोर्ट में प्रमोट (पदोन्नत) किया गया था। जस्टिस नागू मध्य प्रदेश हाई कोर्ट से, जस्टिस चंद्रशेखर झारखंड हाई कोर्ट से, जस्टिस सचदेवा दिल्ली हाई कोर्ट से, और जस्टिस पल्ली पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट से थीं। आगे क्या होगा? कॉलेजियम की इस सिफारिश को अब केंद्रीय कानून मंत्रालय के पास भेजा जाएगा। राष्ट्रपति की अंतिम मुहर और वारंट जारी होने के बाद ये सभी नाम तय हो जाएंगे, जिसके बाद राष्ट्रपति भवन या सुप्रीम कोर्ट में इनका शपथ ग्रहण समारोह होगा।

हाईकोर्ट सख्त! गुरुनानक देव यूनिवर्सिटी के VC-रजिस्ट्रार दोषी करार, जेल की सजा

चंडीगढ़ पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने गुरुनानक देव यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर और रजिस्ट्रार को अदालत की अवमानना का दोषी ठहराया है। अदालत ने दोनों अधिकारियों को एक-एक महीने के कारावास की सजा सुनाई है। हालांकि, उन्हें तत्काल जेल भेजने के बजाय 7 जुलाई तक राहत प्रदान की गई है। इस अवधि में वे इस फैसले के खिलाफ डिवीजन बेंच में अपील दायर कर सकते हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित समय तक अपील दाखिल नहीं हुई या अपील पर सजा पर रोक नहीं मिली, तो अधिकारियों को सजा भुगतनी होगी। यह मामला विश्वविद्यालय के क्लास-4 और अन्य अस्थायी कर्मचारियों को नियमित किए जाने से जुड़ा है। वर्ष 2024 में हाईकोर्ट ने कर्मचारियों के पक्ष में फैसला सुनाया था। विश्वविद्यालय को नियमितीकरण प्रक्रिया लागू करने का आदेश दिया गया था। अदालत ने माना था कि लंबे समय से सेवाएं दे रहे कर्मचारियों के मामले में विश्वविद्यालय को संवेदनशील रवैया अपनाना चाहिए। विश्वविद्यालय प्रशासन ने उस फैसले के खिलाफ कोई अपील दाखिल नहीं की। इसके बावजूद अदालत के आदेशों को पूरी तरह लागू नहीं किया गया। कर्मचारियों का आरोप था कि विश्वविद्यालय ने जानबूझकर आदेश के पालन में देरी की। कई कर्मचारियों को अब भी नियमित नहीं किया गया है। अदालत ने कई बार मांगी थी रिपोर्ट इसके बाद प्रभावित कर्मचारियों की ओर से हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की गई। सुनवाई के दौरान अदालत ने विश्वविद्यालय प्रशासन से कई बार अनुपालन रिपोर्ट मांगी। लेकिन संतोषजनक कार्रवाई सामने नहीं आई। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने विश्वविद्यालय प्रशासन के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि जब किसी फैसले को चुनौती नहीं दी गई, तब उसका पालन करना संबंधित अधिकारियों की कानूनी जिम्मेदारी बनती है। आदेश लागू न करना न्यायिक व्यवस्था की अवमानना है। आदेश पालन में मानी लापरवाही अदालत ने माना कि वाइस चांसलर और रजिस्ट्रार ने आदेशों के पालन में गंभीर लापरवाही बरती। इसी आधार पर दोनों को अवमानना का दोषी ठहराया गया। उन्हें एक-एक माह के साधारण कारावास की सजा सुनाई गई। यह फैसला न्यायिक आदेशों की गंभीरता को रेखांकित करता है। अधिकारियों को अदालत के निर्देशों का पालन करना अनिवार्य है। सात जुलाई तक दाखिल कर सकेंगे अपील सजा सुनाने के साथ ही हाईकोर्ट ने दोनों अधिकारियों को सीमित राहत भी दी है। अदालत ने कहा कि उन्हें 7 जुलाई तक अपील दाखिल करने की स्वतंत्रता रहेगी। इस अवधि में उनकी सजा पर रोक रहेगी। अब यदि डिवीजन बेंच से राहत नहीं मिलती है, तो विश्वविद्यालय के दोनों शीर्ष अधिकारियों को जेल जाना पड़ सकता है। यह मामला न्यायिक आदेशों के सम्मान का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।  

ऑफिस में बैठकर काम से बढ़ रहा कमर दर्द, सही पोस्टर और ब्रेक से मिल सकती है राहत

आजकल ऑफिस में लंबे समय तक बैठकर काम करना आम हो गया है, लेकिन इससे कमर दर्द की समस्या भी तेजी से बढ़ रही है. लगातार एक ही पोजिशन में बैठने से पीठ और कमर की मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है, जिससे दिन के अंत में दर्द और जकड़न महसूस होती है. कई लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन समय रहते ध्यान न देने पर यह समस्या बढ़ सकती है. सही बैठने का तरीका, बीच-बीच में ब्रेक लेना और हल्की एक्सरसाइज करने से इस दर्द से राहत पाई जा सकती है. कुछ आसान आदतें अपनाकर आप अपनी कमर को स्वस्थ और मजबूत रख सकते हैं. 1. सही पोस्टर रखें ऑफिस में बैठते समय हमेशा अपनी पीठ को सीधा रखें और कुर्सी के बैक सपोर्ट से सटाकर बैठें. कोशिश करें कि आपके कंधे ढीले रहें और झुककर काम न करें. पैरों को जमीन पर सीधा टिकाकर रखें, उन्हें हवा में लटकने न दें. गलत पोस्टर में लंबे समय तक बैठने से कमर की मांसपेशियों पर दबाव बढ़ता है, जिससे दर्द और जकड़न की समस्या हो सकती है. 2. हर 30-40 मिनट में ब्रेक लें लगातार एक ही जगह बैठकर काम करना कमर दर्द का बड़ा कारण है. इसलिए हर 30-40 मिनट में 2-3 मिनट का छोटा ब्रेक जरूर लें. इस दौरान आप खड़े होकर थोड़ा चल सकते हैं या हल्का स्ट्रेच कर सकते हैं. इससे शरीर की मांसपेशियों को आराम मिलता है और ब्लड सर्कुलेशन भी बेहतर होता है.  3. आरामदायक कुर्सी का इस्तेमाल करें ऑफिस में काम करते समय ऐसी कुर्सी का चुनाव करें जिसमें अच्छा बैक सपोर्ट हो. कुर्सी की ऊंचाई ऐसी हो कि आपके पैर आराम से जमीन पर टिक सकें. अगर कुर्सी में लंबर सपोर्ट नहीं है, तो आप कुशन या छोटा तकिया लगाकर अपनी कमर को सपोर्ट दे सकते हैं. सही कुर्सी आपके पोस्टर को सुधारने में मदद करती है.  4. स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज करें कमर दर्द से राहत पाने के लिए रोजाना कुछ आसान स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज करना बहुत फायदेमंद होता है. आप forward bend, back stretch और body twisting जैसी एक्सरसाइज कर सकते हैं. ये एक्सरसाइज मांसपेशियों की जकड़न को कम करती हैं और शरीर को लचीला बनाती हैं. दिन में 5-10 मिनट भी स्ट्रेचिंग करने से फर्क महसूस होगा. 5. गर्म सिकाई करें अगर दिनभर काम करने के बाद कमर में दर्द या भारीपन महसूस हो, तो गर्म सिकाई बहुत राहत देती है. आप गर्म पानी की बोतल या हीट पैड का इस्तेमाल कर सकते हैं. 10-15 मिनट तक सिकाई करने से मांसपेशियां रिलैक्स होती हैं और दर्द कम होता है. यह एक आसान और असरदार घरेलू उपाय है. 6. सही गद्दे का चुनाव करें रात में सोते समय गद्दे का सही होना भी बहुत जरूरी है. बहुत ज्यादा सॉफ्ट गद्दा आपकी कमर को सही सपोर्ट नहीं देता, जबकि बहुत हार्ड गद्दा भी असहज हो सकता है. मीडियम फर्म गद्दा कमर के लिए सबसे अच्छा माना जाता है, क्योंकि यह शरीर को संतुलित सपोर्ट देता है और दर्द से बचाव करता है.  7. पानी और पोषण का ध्यान रखें अक्सर लोग पानी पीने और सही खानपान को नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यह भी कमर दर्द का एक कारण हो सकता है. शरीर में पानी की कमी से मांसपेशियां जल्दी थक जाती हैं. दिनभर पर्याप्त पानी पिएं और अपनी डाइट में कैल्शियम, प्रोटीन और विटामिन्स शामिल करें, ताकि आपकी मांसपेशियां मजबूत और स्वस्थ बनी रहें.

केदारनाथ यात्रा 2026: रिकॉर्ड 9 लाख श्रद्धालु, हेली और फ्लाइट रूट चर्चा में

वर्ष 2026 की केदारनाथ यात्रा ने सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. कपाट खुलने के शुरुआती 35 दिनों में ही रिकॉर्ड 9 लाख से अधिक श्रद्धालु बाबा के दर्शन कर चुके हैं. हर रोज करीब 30,000 लोग केदारनाथ पहुंच रहे हैं. ऐसे में अगर आप भारी भीड़, लंबे जाम और 16 किलोमीटर की थका देने वाली पैदल चढ़ाई से बचना चाहते हैं, तो हवाई सफर (By Flight/Air) आपके लिए सबसे बेस्ट और आरामदायक विकल्प है. आइए जानते हैं दिल्ली और देहरादून से केदारनाथ धाम तक के हवाई सफर के दोनों बड़े विकल्प, रूट और खर्च का पूरा ब्योरा. दिल्ली से देहरादून (फ्लाइट द्वारा) आपकी हवाई यात्रा देश की राजधानी से शुरू होगी.  दिल्ली से उत्तराखंड के लिए सीधी फ्लाइट्स उपलब्ध हैं. फ्लाइट रूट: दिल्ली (DEL) से देहरादून के जॉली ग्रांट एयरपोर्ट (DED). समय: मात्र 50 मिनट से 1 घंटे 10 मिनट. खर्च: एडवांस बुकिंग पर आने-जाने (राउंड ट्रिप) का किराया लगभग ₹6,800 से ₹7,800 प्रति व्यक्ति आता है. देहरादून से आगे केदारनाथ के लिए हवाई विकल्प देहरादून पहुंचने के बाद आपके पास बाबा के धाम तक पहुंचने के लिए दो बेहतरीन विकल्प मौजूद हैं:  बेस कैंप से हेलीकॉप्टर सेवा देहरादून एयरपोर्ट पर उतरने के बाद आप सड़क मार्ग से सीधे नीचे दिए गए प्रमुख बेस कैंप हेलीपैड पर पहुंच सकते हैं, जहां से नियमित हेलीकॉप्टर सेवाएं दी जाती हैं: प्रमुख लोकेशंस: गुप्तकाशी (Guptkashi), सिरसी (Sirsi) और फाटा (Phata). समय: हेलीपैड से मंदिर तक का सफर महज 10 से 15 मिनट का होता है. खर्च: आने-जाने का कुल किराया (Return Ticket) लगभग ₹5,500 से ₹8,500 प्रति व्यक्ति के बीच होता है (यह आपके द्वारा चुने गए हेलीपैड पर निर्भर करता है). जरूरी नोट: हेलीकॉप्टर टिकटों में होने वाली धोखाधड़ी से बचें.  इसकी बुकिंग सिर्फ और सिर्फ IRCTC की आधिकारिक हेलीयात्रा वेबसाइट से ही कराना सही रहता है. विकल्प 2: देहरादून से डायरेक्ट चार्टर सेवा अगर आप बिना किसी कतार और बिना किसी झंझट के प्रीमियम सफर चाहते हैं, तो देहरादून से सीधे प्राइवेट चार्टर सर्विस ले सकते हैं. रूट प्लान: प्राइवेट चार्टर सेवा प्रदाता सीधे देहरादून से केदारनाथ के लिए उड़ान भरते हैं. इसके अलावा आप अपनी पसंद के अनुसार यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ, बद्रीनाथ (चार धाम) या फिर सिर्फ केदारनाथ और बद्रीनाथ (दो धाम) का कस्टमाइज्ड ट्रिप भी बुक कर सकते हैं. केदारनाथ के मुख्य आकर्षण: क्या देखें? हवाई सफर से उतरते ही आप सीधे बाबा के धाम पहुंचेंगे, जहां आपको इन मुख्य स्थलों के दर्शन जरूर करने चाहिए: ऐतिहासिक मंदिर व भीम शिला: 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक भव्य मंदिर.  इसके ठीक पीछे स्थित भीम शिला ने 2013 की भीषण बाढ़ के पानी को दो हिस्सों में बांटकर मंदिर की रक्षा की थी. आदि शंकराचार्य समाधि: मुख्य मंदिर के ठीक पीछे स्थित, जहां महान संत आदि शंकराचार्य ने मात्र 32 वर्ष की आयु में मोक्ष प्राप्त किया था. भैरव नाथ मंदिर: मंदिर से 500 मीटर की दूरी पर स्थित है.  इन्हें केदारनाथ का रक्षक माना जाता है, जो सर्दियों में कपाट बंद होने के बाद इस पूरे क्षेत्र की रक्षा करते हैं. रुद्र मेडिटेशन केव (मोदी गुफा): मंदिर परिसर से 2 किमी दूर बनी एक भूमिगत गुफा, जहां साल 2019 में पीएम नरेंद्र मोदी ने 17 घंटे ध्यान लगाया था.

नई शिक्षा नीति लागू करना प्राथमिकता, बोर्ड चेयरमैन ने संभाला कार्यभार

भिवानी  वरिष्ठ भाजपा नेता शंकर लाल धूपड़ को हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड का चेयरमैन नियुक्त किया गया है। मंगलवार देर रात उनकी नियुक्ति और डा. पवन कुमार को रिलीव करने के आदेश जारी किए गए। जिसके बाद बुधवार को नवनियुक्त चेयरमैन शंकर लाल धूपड़ ने स्वजन और भाजपा नेताओं, कार्यकर्ताओं के बीच हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड चेयरमैन का कार्यभार संभाला। कार्यभार संभालते हुए उन्होंने कहा कि भारत सरकार की नई शिक्षा नीति को पूर्णरूपेण लागू करना मेरी प्राथमिकता होगी। इससे पूर्व उन्होंने बोर्ड की लाबी में स्थापित मां सरस्वती की पूजा की। बोर्ड अध्यक्ष शंकर लाल धूपड़ का पूर्व बोर्ड अध्यक्ष डॉ. पवन कुमार, बोर्ड अधिकारियों/कर्मचारियों, बीजेपी कार्यकर्ताओं व समाजसेवियों ने फूलों के गुलदस्ते देकर स्वागत किया गया। कार्यग्रहण उपरांत धूपड़ ने बताया कि शिक्षा के क्षेत्र में सुधार करना उनकी प्राथमिकता रहेगी। बोर्ड की कार्यप्रणाली को अधिकाधिक सुदृढ़ किया जाएगा शिक्षा-परीक्षा को सुधारवादी कदमों को और अधिक गति देते हुए बोर्ड की कार्यप्रणाली को अधिकाधिक सुदृढ़ किया जाएगा। वे शिक्षा बोर्ड के उन सभी क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव के हिमायती व पैरोकार रहे हैं, जिनसे शिक्षा जगत का बहुआयामी विकास हो। उन्होंने कहा कि शिक्षा-परीक्षा में गुणात्मक सुधार, परीक्षाओं में नकल पर अंकुश लगाने तथा शिक्षा बोर्ड की कार्यप्रणाली को और अधिक उत्तरदायी, त्वरित, पारदर्शी व विद्यार्थियों/शिक्षकों के लिए संतुष्टिपूर्ण बनाने के लिए सत्त व सार्थक प्रयास किए जाएंगे। उनका मानना है कि शिक्षा के माध्यम से व्यक्ति को गुणवान, सुशील, ज्ञानवान, समाज व देश के प्रति समर्पित बनाया जा सकता है। शंकर लाल धूपड़ ने अपनी नियुक्ति के लिए केन्द्रीय मंत्री व पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, शिक्षा मंत्री महीपाल सिंह ढांडा, प्रदेशाध्यक्ष मोहनलाल बड़ौली का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने उन पर जो विश्वास जताया है वह उसे सार्थक सिद्ध करेंगे तथा बोर्ड सचिव व अधिकारियों के साथ मिलकर बोर्ड को उच्च मुकाम पर ले जाएंगे। शंकर लाल धूपड़ मूल रूप से जिला भिवानी के रहने वाले है जो कि पेशे से वकील है। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा भिवानी में पूरी करने के बाद जयपुर विश्वविद्यालय से एलएलबी की पढ़ाई की। उनकी राजनीतिक शुरूआत 1975 में हुई तथा वे लगभग 04 वर्षों तक जिला भिवानी के बीजेपी के जिलाध्यक्ष भी रहे हैं।

पद्मश्री सम्मानित शायर बशीर बद्र का जीवन और साहित्यिक योगदान

मेरठ उर्दू के प्रसिद्ध शायद बशीर बद्र का गुरुवार को निधन हो गया। वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे। बशीर बद्र ने 91 साल की उम्र में अंतिम सांस ली। बशीर की पत्नी राहत बद्र ने शायर के निधन की जानकारी सोशल मीडिया एकाउंट पर साझा करते हुए लिखा, बशीर साहब लेफ्ट अस…प्रेयर्स। बशीर बद्र के निधन से पूरे साहित्य जगत में शोक की लहर है। बशीर बद्र को आधुनिक गजल के लिए उस्ताद माना जाता है। बशीर बद्र को साहित्य क्षेत्र में योगदान के लिए पद्मश्री अवार्ड भी मिल चुका है। 15 फरवरी 1935 को अयोध्या में जन्मे शायद बशीर बद्र ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से अपनी उच्च शिक्ष और पीएचडी की थी। बशीर बद्र ने यहीं पर उर्दू के प्रोफेसर के रूप में सेवाएं भी दी थीं। बशीर बद्र को आसानी भाषाओं में गजलें लिखने में महाभारत हासिल थी। उन्होंने गजल विधा में कई नए और ठेठ शब्दों को शामिल किया था। बतादें कि बीमारी के कारण बशीर बद्र ने कई सालों से शायरी से किनारा कर लिया था। 1987 में मेरठ में दंगों में बशीर बद्र का जलाया गया था घर उर्दू शायरी से लोगों के दिलों पर राज करने वाले बशीर बद्र का 1987 के मेरठ के सांप्रदायिक दंगों में उनका घर जला दिया गया था। इस घटना में उनकी कई ऐतिहासिक रचनाएं और कविताएं हमेशा के लिए जलकर राख हो गई थीं। इस घटना के बाद से वे हमेशा के लिए भोपाल में शिफ्ट हो गए थे। मेरठ कॉलेज में लेक्चरार रह चुके हैं बशीर बद्र 1973 में बशीर बद्र ने एएमयू से पीएचडी की थी और 12 अगस्त 1974 को उन्होंने मेरठ कॉलेज के उर्दू विभाग में बतौर लेक्चरर ज्वाइन किया था। वे शायरी के ऊंचे मुकाम पर थे। जिस वक्त उन्होंने मेरठ कॉलेज ज्वाइन किया वे शायरी की दुनिया में जाने पहचने नाम थे।यही वजह रही कि जब तक उन्होंने नौकरी की, तब तक उन्हें पीएचडी की उपाधि की जरूरत नहीं पड़ी। उनका नाम ही पीएचडी से बड़ा हो गया था। शंहशाह-ए-गजल बशीर बद्र को 2018 में मिला था जोश-ए-उर्दू अवार्ड उर्दू शायद बशीर बद्र को जोश-ए-उर्दू-2018 अवार्ड से नवाजा गया था। दुबई की साहित्यिक संस्था बज्म-ए-उर्दू के पदाधिकारियों ने भोपाल स्थित उनके घर पहुंचकर यह अवार्ड दिया था। 6 जुलाई शुक्रवार को डॉ. बशीर बद्र का आवास पर जब अवार्ड पहुंचा तो पूरा घर ही चहक उठा था। दुबई की नामचीन साहित्यिक संस्था बज्म-ए-उर्दू ने डॉ. बशीर बद्र को ‘जोश-ए-उर्दू-2018 के तहत शॉल ओढ़ाकर चांदी की हैंडमेड शील्ड दी थी।

हीटवेव का प्रकोप जारी, 2–3 दिन और तपेगा राजस्थान

जयपुर राजस्‍थान में गर्मी सभी रिकॉर्ड तोड़ रही है. पिछले 24 घंटे में 48.2 डिग्री सेल्सियस के साथ श्रीगंगानगर देश का सबसे गर्म शहर रहा. नौतपा शुरू होने के साथ ही प्रदेश में गर्मी का प्रकोप लगातार जारी है. मौसम विभाग के मुताबिक, राज्य में चल रही हीटवेव और गर्म रातों का दौर आगामी 2-3 दिनों तक जारी रहने की प्रबल संभावना है. अधिकांश भागों में अधिकतम तापमान 44-46 डिग्री दर्ज होने की संभावना है. बीकानेर, कोटा संभाग और शेखावाटी क्षेत्र में कहीं-कहीं अधिकतम तापमान 46-47 डिग्री दर्ज होने की संभावना है. नया पश्चिमी विक्षोभ कराएगी बारिश   पश्चिमी राजस्थान के सीमावर्ती क्षेत्रों में 28 मई को कहीं-कहीं अधिकतम तापमान 48 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज होने की संभावना है. प्रदेश में आज से एक नए पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से कुछ भागों में आंधी बारिश की गतिविधियां शुरू होने की संभावना है. 30 मई से आंधी-बारिश की संभावना है. जून के पहले सप्ताह में कुछ भागों में आंधी बारिश होगी. जयपुर और भरतपुर में होगी बारिश पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से 29 से 31 मई के दौरान जयपुर, भरतपुर, कोटा, अजमेर, उदयपुर अैर जोधपुर-बीकानेर संभाग के कुछ भागों में तेज अंधड़, तेज हवाएं 60-70 Kmph और कहीं-कहीं बारिश होने की संभावना है. आंधी बारिश के असर से 29 मई से तापमान में 2 से 3 डिग्री गिरावट होने व 29-30 मई से हीटवेव से राहत मिलने की उम्मीद है. इन जिलों में बारिश का येलो अलर्ट आज विभाग की ओर से बारां, बूंदी, चित्तौड़गढ़, झालावाड़, कोटा, प्रतापगढ़, बालोतरा, बाड़मेर, और जोधपुर में हीटवेव का येलो अलर्ट जारी किया गया है.  बीकानेर, जैसलमेर, फलोदी और श्रीगंगानगर में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है.  अलवर, भरतपुर, दौसा, डीग, धौलपुर, जयपुर, झुंझुनूं, करौली, खैरथल तिजारा, कोटपुतली बहरोड़, सवाईमाधोपुर, सीकर, टोंक, चूरू से हनुमानगढ़ में हीटवेव के साथ आंधी बारिश का येलो अलर्ट भी है.  इन जिलों में शाम से आंधी बारिश का दौर शुरू हो सकता है.