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भोपाल में BJP की अहम बैठक, क्या फिर सक्रिय भूमिका में लौटेंगे नरोत्तम मिश्रा?

दतिया   मध्य प्रदेश में दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव की सुगबुगाहट तेज हो गई है। राज्य के दोनों बड़े दलों ने अंदरखाते में तैयारियां शुरु कर दी है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के निर्देश मिलने के बाद दतिया कलेक्टर ने चुनाव संबंधी तैयारियां भी शुरू कर दी है। अटकलें हैं कि यदि उपचुनाव होते है तो दिग्गज नेता व पूर्व गृहमंत्री भाजपा के संभावित उम्मीदवार हो सकते हैं। इसी बीच मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने मध्य प्रदेश भाजपा प्रभारी महेंद्र सिंह से मुलाकात की। यह मुलाकात नरोत्तम मिश्रा के भोपाल स्थित निवास पर हुई। इस मुलाकात को दतिया उपचुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है। इस दौरान डॉ. मिश्रा ने पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका स्वागत किया। इसके बाद दोनों नेताओं ने संगठनात्मक गतिविधियों, प्रदेश की राजनितिक परिस्थितियों एंव विभिन्न समसामयिक विषयों पर लंबी चर्चा की। दरअसल, यदि दतिया में उपचुनाव होते हैं, तो कांग्रेस और भाजपा दोनों ही पार्टियां हर हालत में इस चुनाव को जीतना चाहती है। भाजपा नरोत्तम मिश्रा के जरिए दतिया सीट पर वापसी करना चाहती है। वहीं नरोत्तम मिश्रा भी हर हाल में इस चुनाव को जीतना चाहते हैं। क्योंकि उनके पास सत्ता में वापसी का ये सुनहरा मौका है। यही वजह है कि भाजपा इस उपचुनाव को बेहद गंभीरता से ले रही है और रणनीति तैयार करने में जुट गई है। दतिया सीट भाजपा के लिए इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के राजेंद्र भारती ने डॉ. नरोत्तम मिश्रा को कड़े मुकाबले में हराया था। नरोत्तम मिश्रा के लिए ये चुनाव उनके राजनीतिक सफर के लिए बेहद अहम है। वहीं अगर कांग्रेस की बात करें तो कांग्रेस कोर्ट के जरिए उपचुनाव को रोकना चाहती है, वहीं यदि उपचुनाव होते भी हैं तो पार्टी मजबूत रणनीति के साथ मैदान में उतरेगी। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि दतिया उपचुनाव केवल एक विधानसभा सीट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भाजपा और कांग्रेस इसे प्रतिष्ठा से जोड़कर देख रही है।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश को बड़ी सौगात : खिलाड़ियों के लिए नई उम्मीद और नए अवसरों का बनेगा नया केंद्र

अलीगढ़ बनेगा यूपी का नया स्पोर्ट्स पावर हाउस, सीएम योगी सौंपेंगे ओलंपिक स्टैंडर्ड कॉम्प्लेक्स पश्चिमी उत्तर प्रदेश को बड़ी सौगात : खिलाड़ियों के लिए नई उम्मीद और नए अवसरों का बनेगा नया केंद्र अब छोटे शहरों से चमकेंगे बड़े सितारे, अलीगढ़ में 13,000 स्क्वायर मीटर में तैयार विश्वस्तरीय स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स स्विमिंग पूल से मल्टीपर्पज हॉल तक, अलीगढ़ को खेल सुविधाओं की सबसे बड़ी सौगात लखनऊ उत्तर प्रदेश में खेल क्रांति को नई गति देते हुए योगी सरकार अलीगढ़ मंडल को एक ऐसी सौगात देने जा रही है, जो आने वाले वर्षों में प्रदेश की खेल प्रतिभाओं की दिशा बदल देगी। 13,000 स्क्वायर मीटर में बना 57 करोड़ से अधिक की लागत से ओलंपिक स्टैंडर्ड इन्डोर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स अब बनकर पूरी तरह  तैयार है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जल्द ही इसे जनता को समर्पित करेंगे। अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस यह परिसर अलीगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के खिलाड़ियों के लिए नई उम्मीद और नए अवसरों का केंद्र बनने जा रहा है। नगर आयुक्त प्रेम प्रकाश मीणा ने बताया कि यह मंडल का पहला ऐसा विश्वस्तरीय इन्डोर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स है, जहां राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप खेल सुविधाएं विकसित की गई हैं। योगी सरकार की मंशा केवल स्टेडियम बनाना नहीं, बल्कि गांव, कस्बों और छोटे शहरों की प्रतिभाओं को ऐसा मंच देना है, जहां से वे राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक अपनी पहचान बना सकें। राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए तैयार विश्वस्तरीय सुविधाएं इस विशाल खेल परिसर की सबसे बड़ी खासियत इसका राष्ट्रीय स्तर का स्विमिंग पूल है। अत्याधुनिक तकनीक से तैयार यह पूल भविष्य में राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के आयोजन का केंद्र बन सकता है। अब तक बड़े शहरों पर निर्भर रहने वाले अलीगढ़ मंडल के तैराकों को अपने ही शहर में उच्च स्तरीय अभ्यास और प्रतियोगिताओं का अवसर मिलेगा। कॉम्प्लेक्स में आधुनिक मल्टीपर्पज हॉल भी बनाया गया है, जहां विभिन्न इनडोर खेल प्रतियोगिताएं आयोजित की जा सकेंगी। बैडमिंटन और बास्केटबॉल कोर्ट को अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार किया गया है। इसके साथ ही बिलियर्ड्स रूम और हाईटेक जिम की सुविधा भी खिलाड़ियों को उपलब्ध कराई गई है। पेशेवर प्रशिक्षण और फिटनेस को ध्यान में रखते हुए तैयार यह परिसर खिलाड़ियों को बड़े शहरों जैसी सुविधाएं देगा। खिलाड़ियों से लेकर दर्शकों तक हर सुविधा का रखा गया ध्यान स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स को केवल अभ्यास केंद्र नहीं, बल्कि बड़े खेल आयोजनों के लिए एक सम्पूर्ण स्पोर्ट्स हब के रूप में विकसित किया गया है। दर्शकों की सुविधा के लिए अत्याधुनिक स्पेक्टेटर गैलरी बनाई गई है, जहां बड़ी संख्या में लोग बैठकर प्रतियोगिताओं का आनंद ले सकेंगे। इसके अलावा वीआईपी रूम, मीडिया रूम और आधुनिक लाउंज क्षेत्र भी तैयार किए गए हैं, जिससे राष्ट्रीय स्तर के आयोजन आसानी से कराए जा सकेंगे। इससे अलीगढ़ भविष्य में बड़े खेल आयोजनों की मेजबानी के लिए भी तैयार माना जा रहा है। अब छोटे शहरों से निकलेंगी बड़ी प्रतिभाएं नगर आयुक्त प्रेम प्रकाश मीणा ने बताया कि इस कॉम्प्लेक्स के शुरू होने के बाद अलीगढ़ और आसपास के जिलों के खिलाड़ियों को प्रशिक्षण के लिए दिल्ली, नोएडा या लखनऊ जैसे शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा। अब स्थानीय प्रतिभाओं को अपने क्षेत्र में ही विश्वस्तरीय सुविधाएं मिलेंगी। इससे आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को सबसे बड़ा लाभ मिलेगा। आने वाले समय में यह परिसर अलीगढ़ को उत्तर प्रदेश के प्रमुख स्पोर्ट्स सेंटर के रूप में स्थापित करेगा। यहां नियमित प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं के आयोजन से राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी तैयार होने की संभावना बढ़ेगी। 'खेलेगा यूपी, खिलेगा यूपी’ विजन को मिल रही नई ताकत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में खेल इंफ्रास्ट्रक्चर को लगातार मजबूत किया जा रहा है। गांवों में मिनी स्टेडियम, जिलों में स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और अंतर्राष्ट्रीय स्तर की सुविधाओं के निर्माण के जरिए सरकार युवाओं को खेलों से जोड़ने की रणनीति पर काम कर रही है। अलीगढ़ का यह स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स उसी विजन का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है। खेल प्रेमियों में उत्साह, अलीगढ़ को नई पहचान मिलने की उम्मीद कॉम्प्लेक्स के तैयार होने से खेल प्रेमियों और स्थानीय नागरिकों में उत्साह है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यह परियोजना आने वाले समय में अलीगढ़ के लिए गेम चेंजर साबित होगी। जिस अलीगढ़ की पहचान अब तक ताला उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों से जुड़ी रही, वहीं अब यह शहर खेल प्रतिभाओं के नए केंद्र के रूप में भी उभर सकता है। वहीं, स्थानीय खिलाड़ियों का कहना है कि विश्वस्तरीय सुविधाओं के साथ अभ्यास का मौका मिलने से अब उनके सपनों को नई उड़ान मिलेगी। खेल जगत को उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में अलीगढ़ से राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के कई खिलाड़ी निकलेंगे और प्रदेश का नाम रोशन करेंगे।

आईजीआरएस और सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं: मुख्यमंत्री

हर विकास खंड में लगेगी साप्ताहिक चौपाल, जन समस्याओं का होगा मौके पर समाधान आईजीआरएस और सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं: मुख्यमंत्री बकरीद पर सार्वजनिक स्थलों पर कुर्बानी की अनुमति नहीं, प्रतिबंधित पशुओं की कुर्बानी पर जीरो टॉलरेंस: मुख्यमंत्री अधिकारियों को मुख्यमंत्री की दो टूक, सड़क जाम कर नमाज की अनुमति नहीं, परंपरागत स्थलों पर ही हो आयोजन अवैध स्लॉटर हाउस और खुले में मांस विक्रय पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश अवैध खनन और भू-माफियाओं के खिलाफ चलाया जाए विशेष अभियान: मुख्यमंत्री लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनता की विभिन्न शिकायतों के समाधान के लिए प्रत्येक विकास खंड स्तर पर साप्ताहिक चौपाल लगाने का निर्णय लिया है। इन चौपालों में राजस्व वाद, घरेलू हिंसा, अवैध वसूली तथा स्थानीय स्तर पर दर्ज न होने वाली पुलिस शिकायतों जैसी आमजन से जुड़ी समस्याओं का तत्काल समाधान किया जाएगा। साथ ही सरकारी लाभार्थीपरक योजनाओं से वंचित पात्र लोगों को योजनाओं का लाभ भी इन चौपालों के माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा। रविवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित कानून-व्यवस्था एवं प्रशासनिक समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि शासन की प्राथमिकता जनता की समस्याओं का समयबद्ध, पारदर्शी और संतुष्टिपरक समाधान सुनिश्चित करना है। उन्होंने निर्देश दिए कि इन चौपालों के संचालन के लिए शासन स्तर से विस्तृत एसओपी जारी की जाएगी तथा प्रत्येक आवेदन और शिकायत का गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित किया जाएगा। जनपद स्तरीय अधिकारियों की उपस्थिति इन चौपालों में अनिवार्य रहेगी। मुख्यमंत्री ने आईजीआरएस और सीएम हेल्पलाइन के माध्यम से प्राप्त होने वाली शिकायतों को लेकर अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि हर शिकायत को पूरी गंभीरता से लिया जाए। केवल औपचारिक निस्तारण नहीं, बल्कि पीड़ित को वास्तविक राहत मिलनी चाहिए। बैठक में मुख्यमंत्री ने आगामी गंगा दशहरा और बकरीद पर्व को देखते हुए विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि बकरीद के अवसर पर सार्वजनिक स्थलों पर पशुओं की कुर्बानी की अनुमति नहीं होगी तथा प्रतिबंधित पशुओं की कुर्बानी पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। कुर्बानी केवल पूर्व निर्धारित स्थलों पर ही की जाएगी और किसी भी नई परंपरा को बढ़ावा नहीं दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि नमाज केवल परंपरागत स्थलों पर ही अदा की जाए तथा सड़क मार्ग अवरुद्ध कर नमाज की अनुमति किसी भी स्थिति में न दी जाए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जिले में कुर्बानी के बाद अपशिष्ट निस्तारण की सुनियोजित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। खुले में मांस विक्रय प्रतिबंधित रहे तथा अवैध स्लॉटर हाउस किसी भी दशा में संचालित न हों। वैध स्लॉटर हाउस में भी निर्धारित क्षमता से अधिक पशु न रखे जाएं। उन्होंने पर्वों के दौरान बिजली आपूर्ति, स्वच्छता और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए। संवेदनशील क्षेत्रों में पर्व से पूर्व फ्लैग मार्च किया जाए तथा धार्मिक स्थलों के आसपास पुलिस बल की सतत पैदल गश्त सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री ने अलीगढ़, बिजनौर, सहारनपुर, रामपुर और संभल सहित संवेदनशील जनपदों के जिलाधिकारियों और पुलिस कप्तानों से संवाद करते हुए कहा कि विगत वर्षों की घटनाओं का अध्ययन कर संभावित अराजक तत्वों की सूची तैयार की जाए तथा आवश्यकतानुसार निषेधात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। सभी थाना, तहसील और जनपद स्तर पर पीस कमेटियों के साथ नियमित संवाद बनाए रखने के भी निर्देश दिए गए। गंगा दशहरा की तैयारियों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने प्रयागराज, वाराणसी, अयोध्या, चित्रकूट, हापुड़, मुजफ्फरनगर और अमरोहा सहित विभिन्न जनपदों में गंगा घाटों की साफ-सफाई, बैरिकेडिंग, एम्बुलेंस तैनाती, छायादार व्यवस्था तथा पार्किंग प्रबंधन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि तेज गर्मी को देखते हुए श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। बैठक में सड़क सुरक्षा और अवैध खनन पर भी मुख्यमंत्री ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने बिना नम्बर प्लेट वाले वाहनों के विरुद्ध अभियान चलाने तथा अवैध खनन के खिलाफ टास्क फोर्स गठित कर कठोरतम कार्रवाई करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से स्पष्ट कहा कि किसी भी दबाव या सिफारिश में आए बिना जीरो टॉलरेंस नीति के तहत कार्रवाई की जाए, लेकिन जांच के नाम पर आम नागरिकों का उत्पीड़न नहीं होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने भू-माफियाओं के विरुद्ध कार्रवाई को और तेज करने के निर्देश देते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति का वैध अधिकार प्रभावित नहीं होना चाहिए। साथ ही जिन जिलों में मुख्य चिकित्सा अधिकारी की तैनाती नहीं है, वहां तत्काल नियुक्ति सुनिश्चित करने को कहा। बैठक में मुख्य सचिव ने ‘ज्ञान भारतम मिशन’ के अंतर्गत प्रदेश में अब तक 12 लाख पांडुलिपियों के चिन्हांकन की जानकारी दी। पुलिस महानिदेशक ने आगामी पर्वों और परीक्षाओं को लेकर पुलिस की तैयारियों से मुख्यमंत्री को अवगत कराया। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित इस बैठक में सभी मंडलायुक्त, जिलाधिकारी, पुलिस आयुक्त, अपर पुलिस महानिदेशक, पुलिस महानिरीक्षक, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, पुलिस अधीक्षक सहित शासन स्तर के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

क्या कांग्रेस खुद कमजोर कर रही राहुल गांधी की राजनीति? सोनिया गांधी क्यों हैं खामोश

नई दिल्ली हर बच्चा अपने मां बाप के प्यार दुलार में बड़ा होता है. नेता हो आम आदमी. बड़ा राजनीतिक घराना हो या कॉरपोरेट पावर हाउस. गांधी फैमिली में भी यही होता आया. आयरन लेडी होते हुए भी इंदिरा गांधी ने अपने दोनों बेटों को प्यार से पाला. पर संजय गांधी और राजीव गांधी बिल्कुल अलग मिजाज के निकले. संजय गांधी की रुचि पॉलिटिक्स में थी और वो अंदर ही अंदर इतने पावरफुल हो गए कि बड़े से बड़े कैबिनेट मंत्री भी उनकी मर्जी के बिना इंदिरा से नहीं मिल सकते थे. आपातकाल में तो संजय पावर ने जो किया वो सबको पता है. अपनी जिद के आगे वो मां की भी नहीं सुनते थे. सीएम बदलने तक का फैसला संजय गांधी कर सकते थे. अकाल मृत्यु के साथ 23 जून 1980 को संजय का संक्षिप्त सक्रिय इतिहास खत्म हो गया।  इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राजीव को बागडोर तो मिली लेकिन संजय गांधी वाली पकड़ नहीं थी. वो उन्हीं नेताओं की चौकड़ी में आगे बढ़े जो कभी उनकी मां के साथ हुआ करते थे. खुद का रॉयल मृदुभाषी अंदाज. जब 1991 में उनकी हत्या हो गई तो सोनिया गांधी को पार्टी संभालने में समय लगा. पीवी नरसिंह राव की पीएम पारी के बाद 1998 में सीताराम केसरी को धकिया कर वो अध्यक्ष बनीं. इटालियन बेबी पर बवाल न हुआ होता तो मनमोहन सिंह की जगह वही पीएम बनती लेकिन नेशनल एडवाइजरी काउंसिल बनाकर सोनिया ने पार्टी और सरकार दोनों को मुट्ठी में कर लिया।  पर राहुल गांधी कुछ नहीं सीख पाए. 2017 से 2019 तक दो साल अध्यक्ष तो रहे लेकिन न अपनी मां और न ही संजय गांधी वाली बात इनमें दिखाई दी. बल्कि हो इससे उलट रहा है. कहने को तो मल्लिकार्जुन खरगे अभी अध्यक्ष हैं और सोनिया बीमार हैं. इसलिए राहुल गांधी के पास ही पार्टी की चाबी है पर ये किसी काम का नहीं. राहुल लगातार पार्टी में बेइज्जत हो रहे हैं. और ये सिलसिला पिछले 9 साल से चल रहा है।  जब खरगे उनके सामने अड़ गए जब राहुल कोई फैसला करते हैं तो उसे स्टेट यूनिट नहीं मानती. और जब स्टेट यूनिट कोई फैसला करता है तो उसे राहुल गांधी नहीं मानते. इसी कन्फ्यूजन में कांग्रेस खत्म हो रही है. हरियाणा में हुड्डा को छूट दे दी तो जीता चुनाव हार गए. तमिलनाडु में एक्टर विजय से प्री पोल अलाएंस करना चाहते थे तो खरगे जी अड़ गए. सबसे दुखद बात ये रही कि बच्चे के फैसले में मां सोनिया कभी साथ नहीं रही. वो ओल्ड गार्ड के फेवर में रही. केरल में भी खरगे चला लेते लेकिन अंत में राहुल ने जमीनी नेता वीडी सतीशन को सीएम बना दिया. पर किस काम के सीएम. होम मिनिस्ट्री रमेश चेन्नीथला के पास चला गया।  अगर संजय गांधी वाला एक भी गुण राहुल में होता ते इन नेताओं की मजाल थी कि बकार भी निकल पाता. ऊपर से जो नैरेटिव सेट करते हैं राहुल उसी का नाश करते हैं उनके नेता. जब पश्चिम बंगाल में सुवेंदु अधिकारी ने मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज अग्रवाल को चीफ सेक्रेटरी बना दिया तो राहुल ने जम कर हमला बोला. बीजेपी-चुनाव आयोग को चोर बाजार बता दिया. जो जितना बड़ा चोर उसे उतना बड़ा इनाम. ये उनका सोशल मीडिया पोस्ट था. पर केरल में उन्हीं के सीएम ने वही काम किया जो सुवेंदु ने किया. मुख्य चुनाव अधिकारी रतन केलकर को अपना ही सेक्रेटरी बनाकर राहुल गांधी के मुंह पर तमाचा जड़ दिया. अब बीजेपी सवाल पूछ रही है. क्या केरल में कांग्रेस की जीत चुनाव अधिकारी के कारण हुई है? यहां तो राहुल गांधी के एसआईआर के सारे नैरेटिव पर उन्हीं की पार्टी ने पानी फेर दिया. ऐसी बेइज्जती किसी शीर्ष नेता की हुई है क्या. संजय गांधी होते तो सतीशन नप गए होते। 

बिजली संकट से राहत की दिशा में बड़ा कदम, ऊंचाहार प्लांट में जुड़ेगी नई NTPC यूनिट

 रायबरेली  बिजली उत्पादन बढ़ेगा एनटीपीसी में नई यूनिट लगाने तैयारी जारी हो गई है। 800 मेगावाट की नई यूनिट लगाई जाने से बिजली की मांग को पूरा करने में आसानी होगी। ऊंचाहार एनटीपीसी परियोजना में बिजली उत्पादन बढ़ाने की तैयारी है। यहां पर 800 मेगावाट की नई यूनिट लगाई जाएगी। उच्च स्तर पर इसके कवायद शुरू हो गई है। ऊंचाहार परियोजना में यह सबसे बड़ी यूनिट होगी। इसके बनने से बिजली की मांग को पूरा करने में आसानी होगी। बिजली की मांग दिनों दिन बढ़ रही है। इस मांग को पूरा करने के लिए तमाम प्रयास हो रहे हैं इसके लिए उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। एनटीपीसी परियोजना की अभी 1550 मेगावाट क्षमता है। इसकी क्षमता में और वृद्धि की जाएगी। उच्च स्तर पर चर्चा शुरू हो गई है। यहां 800 मेगावाट की इकाई लगाई जाएगी नई इकाई लगाने के लिए परियोजना में पर्याप्त जगह है। नई यूनिट लगने के यहां पर सारे पैरामीटर भी दुरुस्त आए नई इकाई लगाने के लिए जल्द ही प्रक्रिया शुरू होगी। इसके लिए परियोजना रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इन यूनिट के लगने से बिजली उत्पादन और बढ़ जाएगा लोगों को बेहतर बिजली मिलने का रास्ता साफ हो जाएगा। अभी 6 यूनिट कर रही हैं काम वर्तमान में एनटीपीसी परियोजना में 6 इकाइयां हैं। इसमें यूनिट संख्या 1 से लेकर 5 तक प्रत्येक के उत्पादन क्षमता 210- 210 मेगावाट है। छठवीं यूनिट का उत्पादन क्षमता 500 मेगावाट है। इस परियोजना से 1550 मेगावाट बिजली उत्पादन होता है। अब इसकी क्षमता में वृद्धि की तैयारी है। नौ राज्यों को मिलती है बिजली ऊंचाहार एनटीपीसी परियोजना में विद्युत आपूर्ति उत्तरी ग्रिड के माध्यम से की जाती है। इस परियोजना में से 9 राज्यों दिल्ली हरियाणा ,उत्तराखंड ,उत्तर प्रदेश, राजस्थान ,पंजाब, जम्मू- कश्मीर हिमाचल प्रदेश और चंडीगढ़ को बिजली मिलती है। इन राज्यों में भी बिजली की मांग दिनों दिन बढ़ रही है ।क्षमता बढ़ाने से मांग को काम किया जा सकेगा। ऊंचाहार एनटीपीसी परियोजना के मानव संसाधन विभाग के अपर महाप्रबंधक पंकज कुमार का कहना है कि ऊंचाहार एनटीपीसी परियोजना की क्षमता बढ़ेगी अब जहां भी नहीं यूनिट लगती है। उसकी क्षमता 800 मेगावाट की होती है। यहां भी 800 मेगावाट की यूनिट लगेगी अभी कर योजना प्रारंभिक स्तर पर चल रहा है।

बुरहानपुर में विकास की बड़ी उड़ान, औद्योगिक हब बनाने सरकार की मेगा तैयारी

 बुरहानपुर बुरहानपुर शहर ऐतिहासिक और यहां सभी धर्मों के संगम के रूप में जाना जाता है। 400 साल पहले मुगल समय से यहां कपड़े की सबसे बड़ी मंडी रही। जिस तरह यहां कपड़े का ताना बाना बुना जाता था, उसी तरह यहां की गंगा-जमुनी तहजीब रही। यहां का कपड़ा दुनियाभर में प्रसिद्ध था, समय के साथ बाजार की चमक जरूर फीकी पड़ी, लेकिन अब बदलते समय यहां का कपड़ा फिर देशभर में सप्लाइ होने लगा। आने वाले पांच सालों में इसे और उड़ान मिलने जा रही है। साथ ही केले के लिए प्रसिद्ध बुरहानपुर में एक्सपोर्ट जोन से लेकर इस पर आधारित कृषि उद्योग की भी रफ्तार बढ़ी है। टेक्सटाइल उद्योग से ही बुरहानपुर की पहचान प्रदेश के सबसे बड़े टेक्सटाइल उद्योग के रूप में बुरहानपुर की एक अलग ही पहचान है। आने वाले सालों में इस उद्योग की एक और नई तस्वीर उभरेगी। यहां पर एक हजार करोड़ से अधिक का निवेश होने जा रहा है, जिससे 12 हजार से अधिक नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे।  अभी जो तेजी से प्रयास हो रहे हैं इससे एक नए शहर का भविष्य देखने को मिल रहा है। यहां उद्योग के लिए जो माहौल और जमीन तैयार हुई उसमें स्थानीय ही नहीं बल्कि गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र तक उद्योगपति निवेश में रुचि दिखा रहे हैं। यही वजह है कि 2015-16 तक जो बुरहानपुर का कपड़ा उद्योग 770 करोड़ का था, वह अब 1 हजार करोड़ का होगा। इससे जिले की तस्वीर ही बदल जाएगी। जानें यहां उद्योग की इकॉनोमी -211 करोड़ का जीएसटी टैक्स 4 साल में दे चुका है बुरहानपुर -04 साल पहले तक 60 करोड़ का जाता था टैक्स -04 हजार रजिस्टर्ड औद्योगिक प्रतिष्ठान यहां -45 हजार पावरलूम -05 हजार आधुनिक लूम यहां -01 लाख लोग कपड़ा उद्योग से जुड़े -01 लाख लोग केला उद्योग से जुड़े हुए भविष्य में निवेश की तैयारी -200 करोड़ रेहटा में निवेश की तैयारी -400 करोड़ सुखपुरी में निवेश -200 करोड़ फेयर डील में निवेश -400 करोड़ चार नई स्पीनिंग मिल प्रस्तावित – 12 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा एफॉर्डेबल हाउसिंग पर पड़ सकता है असर नए नियमों से छोटे और मझोले डेवलपर्स की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। रियल एस्टेट क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि इसका सबसे ज्यादा असरभोपाल और इंदौर जैसे शहरों में होगा। यहां 10 हेक्टेयर क्षेत्र जुटाना छोटे डेवलपर्स के लिए आसान नहीं होगा। वहीं पॉलिसी के तहत डेवलपर के लिए न्यूनतम 5 करोड़ की नेटवर्थ और 6 करोड़ रुपए का औसत वार्षिक टर्नओवर भी प्रभाव डालेगा। साथ ही टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग में पंजीयन के लिए 50 हजार रुपए खर्च करने होंगे, वहीं पांच साल बाद नवीनीकरण के लिए भी 25 हजार देना होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि छोटे और मझोले डेवलपर्स मध्यमवर्गीय और किफायती आवासीय योजनाएं विकसित करते हैं। ऐसे डेवलपर्स बाजार से बाहर होंगे तो, एफॉर्डेबल हाउसिंग प्रोजेक्ट्स की संख्या घटने की आशंका है। नई साधिकार समितियां गठित होंगी अब टाउनशिप संबंधी प्रस्तावों पर संचालक टाउन एंड कंट्री प्लानिंग की अध्यक्षता वाली समिति विचार नहीं करेगी। इसके स्थान पर नई साधिकार समितियां गठित की गई हैं। 5 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में सचिव नगरीय विकास की अध्यक्षता में समिति प्रस्तावों का परीक्षण-अनुमोदन करेगी। वहीं जिलों में अधिकार कलेक्टर की अध्यक्षता वाली समिति को है। ये क्षेत्र देंगे ऊंची उड़ान टैक्सटाइल टैक्सटाइल में बुरहानपुर शहर में विकास की खासी संभावनाएं हैं। यहां का कपड़ा देशभर में सप्लाय होता है, लेकिन इसमें वेल्यू एडिशन के लिए डाइंग, प्रिंटिंग, गारमेंटस, अपेरल मेकिंग को बढ़ावा देना होगा। अभी निम्न गुणवत्ता कपड़ा यहां बन रहा है। टूरिज्म यहां का पर्यटन अनछुआ पहलू है। टूरिज्म सर्किट में आना चाहिए। यहां पर टूरिज्म की उद्योग में बढ़ोतरी हुई है। रेस्टोरेंट, होटल, एऊयूजमेंट पार्क भी बढऩा शुरू हो गई, लेकिन अभी इसमें और काम करने जरूरत है। सरकार के साथ हमारा प्रतिनिधित्व करेंगे तो अच्छा लाभ मिल सकते हैं। ट्रांसपोर्टेशन देश के मध्य भाग में होने से सेंट्रल लाइन मुख्य रेल मार्ग, सड़क मार्ग बुरहानपुर से जुड़ चुके हैं। फोरलेन बुरहानपुर में पहुंच चुका है। अभी नया हाईवे लगभग बन चुका है। आगे महाराष्ट्र को जोड़ने का काम बाकी है। जबकि नई रेलवे लाइन भी शहर के विकास में उपयोगी होगी। बुरहानपुर बड़ा केंद्र, बड़े शहर में उभरेगा बुरहानपुर उद्योग का बहुत बड़ा केंद्र है। यहां आगे टूरिज्म, कृषि और टेक्सटाइल के रूप में अच्छे परिणाम सामने आएंगे। स्वरोजगार यहां अच्छा मिलेगा। अब हाइवे और रेलवे से कनेक्टिविटी भी बहुत अच्छी बन रही है। बुरहानपुर आगे जाकर बड़े शहर के रूप में उभरेगा। – हर्षसिंह, कलेक्टर, बुरहानपुर पर्यटन को मिले उड़ान यहां के उद्योग को उड़ान मिलना चाहिए। बुरहानपुर में मिनी एयरपोर्ट की तैयारी चल रही है, अच्छा है, लेकिन इसे और गति मिलने की जरूरत है। यहां के पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। यहां हवाई अड्डे की सुविधा हो जाए तो बुरहानपुर से 105 किमी अजंता, 110 पर ओंकारेश्वर, 165 किमी महेश्वर है। -होशंग हवलदार, पुरातत्वविद्

तकनीकी समस्या दूर, आयुष्मान योजना के अस्पतालों को फिर शुरू हुआ भुगतान

तकनीकी समस्या दूर, आयुष्मान योजना के अस्पतालों को फिर शुरू हुआ भुगतान – योगी सरकार की तत्परता से सुलझी बैंकिंग की तकनीकी समस्या, 14 मई से रुक गया था भुगतान  – तकनीकी समस्या के कारण रुक गया था अस्पतालों का 600 करोड़  रुपये का भुगतान  – 23 मई को जारी हुए 100 करोड़, अगले एक-दो दिन में 500 करोड़ रूपये का हो जाएगा भुगतान  लखनऊ  योगी सरकार द्वारा प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (ABPMJAY)को और अधिक प्रभावी तथा पारदर्शी बनाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। योजना के तहत आयुष्मान कार्ड धारकों को बेहतर और समयबद्ध स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना योगी सरकार की प्राथमिकता है। इसी का नतीजा है कि योजना के शुरू होने के बाद अब तक 50 लाख से अधिक मरीजों ने 91 लाख से अधिक बार अस्पतालों में अपना इलाज कराया। इसके लिए योगी सरकार द्वारा 15 हजार करोड़ से अधिक अस्पतालों को भुगतान किया जा चुका है। वहीं 14 मई से 22 मई तक बैंक में तकनीकी समस्या से अस्पतालों का भुगतान रुक गया था, जिसे ठीक करके 23 मई से दोबारा शुरू कर दिया गया है।  23 मई को अस्पतालों को किया गया 100 करोड़ रु. का भुगतान साचीज की सीईओ अर्चना वर्मा ने बताया कि 14 मई को नेशनल हेल्थ अथॉरिटी (एनएचए) और संबंधित बैंकों के बीच भुगतान फाइलों के आदान-प्रदान के दौरान तकनीकी समस्या उत्पन्न हो गई थी। इसके चलते लगभग 633 करोड़ रुपये की राशि होल्ड पर चली गई थी। भुगतान प्रक्रिया बाधित होने के कारण योजना से जुड़े अस्पतालों को क्लेम राशि मिलने में देरी हो रही थी, जबकि अधिकांश दावों को राज्य स्वास्थ्य एजेंसी द्वारा पहले ही स्वीकृति प्रदान की जा चुकी थी। तकनीकी बाधा के चलते अस्पतालों को समय से भुगतान नहीं मिल पा रहा था, जिससे निजी और सरकारी सूचीबद्ध अस्पतालों में चिंता की स्थिति बनी हुई थी। हालांकि प्रदेश सरकार ने इसे गंभीरता से लेते हुए तत्काल समाधान की दिशा में कार्रवाई शुरू की। चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने एनएचए और संबंधित बैंकों के साथ कई दौर की बैठकें कर समस्या के समाधान के लिए लगातार समन्वय बनाए रखा। उन्होंने बताया कि 22 मई को बैंक स्तर पर आई तकनीकी समस्या का सफलतापूर्वक समाधान कर लिया गया। इसके बाद 23 मई को अस्पतालों को 100 करोड़ रुपये का भुगतान जारी कर दिया गया है। वहीं, अधिकारियों के अनुसार अगले एक से दो दिनों के भीतर शेष लगभग 500 करोड़ रुपये का भुगतान भी संबंधित अस्पतालों को कर दिया जाएगा। लगातार नए अस्पतालों को योजना से जोड़ा जा रहा साचीज की सीईओ ने बताया कि तकनीकी समस्या पूरी तरह दूर होने के बाद भुगतान प्रक्रिया सामान्य रूप से शुरू कर दी गई है। अब सूचीबद्ध अस्पतालों को चरणबद्ध तरीके से भुगतान भेजा जा रहा है ताकि मरीजों के इलाज और स्वास्थ्य सेवाओं पर किसी प्रकार का असर न पड़े। उन्होंने बताया कि योगी सरकार लगातार नए अस्पतालों को योजना से जोड़ रही है ताकि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों को भी बेहतर इलाज की सुविधा मिल सके। इसके अलावा गोल्डन कार्ड वितरण अभियान, ई-केवाईसी, हेल्प डेस्क और डिजिटल मॉनिटरिंग जैसी व्यवस्थाओं को भी मजबूत किया गया है। अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग अमित घोष ने भी योजना की प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि अस्पतालों के भुगतान में किसी प्रकार की अनावश्यक देरी न हो। साथ ही तकनीकी प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाया जाए ताकि भविष्य में इस प्रकार की समस्याओं की पुनरावृत्ति न हो।

ऐतिहासिक इलाके के नीचे से गुजरेगी मेट्रो, अंडरग्राउंड टनल प्रोजेक्ट को हरी झंडी

इंदौर  इंदौर में मेट्रो के अंडरग्राउंड रूट का काम अब तेजी पकड़ने जा रहा है. सुपर कॉरिडोर से रेडिसन तक के हिस्से को सीएमआरएस (कमिश्नर ऑफ मेट्रो रेल सेफ्टी) से हरी झंडी मिल चुकी है, जिसके बाद अब टनल निर्माण की तैयारियां तेज कर दी गई हैं. इस प्रोजेक्ट के लिए 4 बड़ी टनल बोरिंग मशीनें (टीबीएम) जल्द ही इंदौर पहुंचेंगी. ये मशीनें लगभग 20 मीटर गहराई तक खुदाई करने में सक्षम होंगी. इन मशीनों के कुछ अहम हिस्से जर्मनी में बनाए गए हैं और उनका अंतिम असेंबलिंग कार्य थाईलैंड में किया जा रहा है।  इन मशीनों को खास तौर पर इंदौर की जमीन और भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. शहर के मध्य हिस्से में मेट्रो का अंडरग्राउंड रूट पुराने और घनी आबादी वाले इलाकों से होकर गुजरेगा, जहां 100 साल से भी पुराने मकान मौजूद हैं. ऐसे में खुदाई के दौरान किसी भी तरह के नुकसान से बचने के लिए स्पेशल टेक्निक का इस्तेमाल किया जा रहा है. इंदौर की मिट्टी में हार्ड रॉक, सॉफ्ट सॉइल और मुरम जैसी परतें हैं, इसलिए ‘मिक्स लेयर’ तकनीक वाली मशीनें चुनी गई हैं. हाल ही में मेट्रो कॉर्पोरेशन, कंसल्टेंट और ठेकेदारों की टीम ने जर्मनी और थाईलैंड जाकर मशीनों का अंतिम निरीक्षण भी किया है।  टनल खुदाई का काम शुरू भास्कर की रिपोर्ट के हवाले से जुलाई 2026 से टनल खुदाई का काम शुरू करने की योजना है. ये चारों मशीनें शहर के अलग-अलग हिस्सों में काम करेंगी, जिसमें एयरपोर्ट और नगर निगम क्षेत्र से जुड़े स्टेशन और ट्रैक का निर्माण शामिल है. मशीनें जमीन के नीचे जाकर सुरक्षित तरीके से टनल तैयार करेंगी. वहीं, छोटा गणपति स्टेशन पर ‘नेटाम’ तकनीक से निर्माण कार्य पहले से जारी है और वहां खुदाई का काम चल रहा है।  इसके अलावा शहीद पार्क से खजराना तक मेट्रो ट्रैक और स्टेशन का काम भी तेजी से आगे बढ़ रहा है. पहले इस रूट को एलिवेटेड बनाने की योजना थी, लेकिन अब इसे अंडरग्राउंड कर दिया गया है. इस बदलाव के चलते टेंडर प्रोसेस में संशोधन किया जा रहा है. फिलहाल, शहीद पार्क से खजराना तक कई स्टेशन और ट्रैक का ढांचा आकार ले रहा है. रेडिसन तक 17 किलोमीटर का मेट्रो कॉरिडोर तैयार हो चुका है और यहां लगातार ट्रायल रन चल रहा है. हालांकि, इसे आम जनता के लिए शुरू करने के लिए अभी पीएम ऑफिस की अंतिम मंजूरी का इंतजार है. इसकी मंजूरी मिलते ही इंदौर में  मेट्रो सेवाएं और व्यापक स्तर पर शुरू हो जाएंगी। 

गो संरक्षण विशेष : यूके, यूएसए, ऑस्ट्रेलिया समेत 10 से अधिक देशों में बजा यूपी का डंका

गो संरक्षण विशेष : यूके, यूएसए, ऑस्ट्रेलिया समेत 10 से अधिक देशों में बजा यूपी का डंका एक हजार से ज्यादा देशी गायों के सहारे 10 करोड़ रुपये के सालाना कारोबार का एथिकल डेयरी मॉडल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी की है इस मॉडल से संरक्षित साहीवाल गाय की आरती और गोपूजन सीएम योगी की प्रेरणा से अमेरिकी सॉफ्टवेयर इंजीनियर समेत टीम 100 ने संभाला देशी गायों के संरक्षण का जिम्मा देशी गायों से बने A2 दूध, बिलौना घी, ब्राह्मी घृत, शतधौत घृत, कुकीज, लड्डू, हर्बल चाय समेत 150 प्रकार के प्रोडक्ट की दुनिया में धूम लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का ‘गो संरक्षण से समृद्धि’ मॉडल अब जमीन से उठकर ग्लोबल मंच पर अपनी ताकत दिखा रहा है। उत्तर प्रदेश में देशी गायों के सहारे न सिर्फ 10 करोड़ रुपये का सालाना कारोबार खड़ा हुआ है, बल्कि यूके, यूएसए, ऑस्ट्रेलिया समेत 10 से अधिक देशों में ‘मेड इन यूपी’ गो उत्पादों की धूम मच गई है। यह मॉडल सिर्फ गोसेवा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे एक सशक्त आर्थिक ताकत में बदल दिया गया है। ‘हेता’ (HETHA) के जरिए 1000 से ज्यादा देशी गायों पर आधारित एथिकल डेयरी सिस्टम खड़ा किया गया है, जिसने देशी नस्लों को बाजार से जोड़कर आत्मनिर्भरता की नई परिभाषा लिख दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस मॉडल से संरक्षित साहीवाल गाय की आरती और गोपूजन कर चुके हैं। सीएम योगी की प्रेरणा से सिकंदरपुर, गाजियाबाद के असीम रावत ने इस अभियान की शुरुआत की। असीम 14 साल तक लगातार अमेरिका समेत दुनिया के तमाम देशों की दिग्गज सॉफ्टवेयर कंपनियों में इंजीनियर रहे। फिर इन्होंने गो संरक्षण की राह चुनी। आज 100 लोगों की एक स्पेशल टीम के साथ वे इस मिशन को न सिर्फ चला रहे हैं, बल्कि इसे ग्लोबल ब्रांड बना दिया है। हेता का मॉडल देशी गायों के समग्र उपयोग पर आधारित है। यहां दूध से लेकर पंचगव्य, आयुर्वेदिक उत्पाद, ऑर्गेनिक फूड और वेलनेस प्रोडक्ट्स तक करीब 150 प्रकार के प्रोडक्ट तैयार किए जा रहे हैं। A2 दूध, बिलौना घी, ब्राह्मी घृत, शतधौत घृत, कुकीज, लड्डू, हर्बल चाय, स्किन-हेयर केयर और गोमूत्र अर्क जैसे उत्पाद अंतर्राष्ट्रीय बाजार में तेजी से अपनी जगह बना रहे हैं। अमेरिका, कनाडा, यूनाइटेड किंगडम, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, यूरोप, सिंगापुर, दुबई तक यूपी की पहचान इस मॉडल की सबसे खास बात यह है कि यहां वृद्ध गोवंश को भी बोझ नहीं, बल्कि जिम्मेदारी माना गया है। उन्हें छोड़ा नहीं जाता, बल्कि संरक्षण का अभिन्न हिस्सा बनाया जाता है। हेता के उत्पाद आज भारत के अलावा अमेरिका, कनाडा, यूनाइटेड किंगडम, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, यूरोप, सिंगापुर, दुबई और अन्य मध्य-पूर्व व एशियाई देशों तक पहुंच रहे हैं, जिससे यूपी की पहचान वैश्विक स्तर पर मजबूत हो रही है। डेयरी मास्टर प्लान के तहत लाखों रुपये अनुदान पशुपालन विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश मेश्राम के अनुसार योगी सरकार इस मॉडल को व्यापक बनाने के लिए बड़े स्तर पर नीतिगत समर्थन भी दे रही है। ‘ऑपरेशन-4’ के तहत स्वदेशी गायों के पालन पर 50 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जा रही है। डेयरी मास्टर प्लान के तहत 2 से 25 गायों तक पशु पालकों को लाखों रुपये का अनुदान मिल रहा है। योजना में 15 प्रतिशत स्वयं निवेश, 35 प्रतिशत बैंक ऋण और 50 प्रतिशत सब्सिडी का स्पष्ट फार्मूला लागू किया गया है।  ‘गो-इकोनॉमी’ मॉडल उत्तर प्रदेश को वैश्विक डेयरी शक्ति बनाने की दिशा में बड़ा कदम साहीवाल, गिर, गंगातीरी और सिंधी जैसी उच्च गुणवत्ता वाली स्वदेशी नस्लों के संरक्षण और विस्तार पर सरकार का विशेष फोकस है। प्रदेश में लागू चार बड़ी योजनाएं मिलकर डेयरी सेक्टर को नई रफ्तार दे रही हैं। इसका नतीजा यह है कि अब किसान देशी गायों के सहारे करोड़ों की आय अर्जित कर रहे हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नया उछाल देखने को मिल रहा है। योगी सरकार का यह ‘गो-इकोनॉमी’ मॉडल अब सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश को वैश्विक डेयरी शक्ति बनाने की दिशा में बड़ा कदम बन चुका है।

पेपर लीक गैंग की अफवाहबाजी फेल, लखनऊ में फैलाई गई पेपर लीक की झूठी सूचना जांच में निकली पूरी तरह फर्जी

पेपर लीक गैंग की अफवाहबाजी फेल, लखनऊ में फैलाई गई पेपर लीक की झूठी सूचना जांच में निकली पूरी तरह फर्जी जांच में साफ हुआ कि प्रश्नपत्र और ओएमआर शीट पूरी तरह सीलबंद और सुरक्षित योगी सरकार की सख्ती और प्रशासन व यूपीएसएसएससी की सतर्कता से शांतिपूर्वक संपन्न हुई थी लेखपाल मुख्य परीक्षा एआई, बायोमैट्रिक और हाईटेक निगरानी ने नकल माफियाओं की तोड़ी कमर, 44 जिलों में सकुशल हुई परीक्षा लखनऊ, उत्तर प्रदेश में भर्ती परीक्षाओं को लेकर वर्षों तक सक्रिय रहे पेपर लीक और नकल माफियाओं के नेटवर्क पर योगी सरकार की सख्ती लगातार भारी पड़ रही है। इसका बड़ा उदाहरण विगत दिनों आयोजित लेखपाल मुख्य परीक्षा-2025 में देखने को मिला, जहां सोशल मीडिया के जरिए पेपर लीक की अफवाह फैलाने की कोशिश हुई, लेकिन प्रशासन और आयोग की सतर्कता के आगे यह साजिश पूरी तरह नाकाम साबित हुई। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूपीएसएसएससी) द्वारा आयोजित यह परीक्षा प्रदेश के 44 जिलों के 861 केंद्रों पर शांतिपूर्ण और पारदर्शी तरीके से संपन्न कराई गई। कुल 3,66,712 पंजीकृत अभ्यर्थियों में से 3,01,756 अभ्यर्थियों ने परीक्षा में हिस्सा लिया। उपस्थिति प्रतिशत 82.29 रहा, जो अभ्यर्थियों के भरोसे को भी दर्शाता है। पेपर लीक का शोर, लेकिन हकीकत में निकली अफवाह परीक्षा शुरू होते ही लखनऊ के ऐशबाग स्थित गोपीनाथ लक्ष्मणदास रस्तोगी इंटर कॉलेज को लेकर कुछ लोगों ने पेपर लीक की अफवाह फैलाने की कोशिश की। सूचना मिलते ही जिला प्रशासन, आयोग और निगरानी टीमों ने तत्काल जांच शुरू की। जांच में साफ हुआ कि प्रश्नपत्र और ओएमआर शीट पूरी तरह सीलबंद और सुरक्षित थीं। दरअसल, एक कक्ष के कुछ अभ्यर्थी भ्रम की स्थिति में बाहर आ गए थे, जिसे कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर पेपर लीक का रंग देने की कोशिश की। अधिकारियों ने मौके पर स्थिति स्पष्ट की, जिसके बाद अभ्यर्थी वापस परीक्षा कक्ष में पहुंचे और परीक्षा शांतिपूर्वक जारी रही। योगी सरकार का हाईटेक एग्जाम मॉडल बना ढाल इस बार परीक्षा की निगरानी पूरी तरह तकनीक आधारित रही। आयोग मुख्यालय से लेकर सभी परीक्षा केंद्रों तक कंट्रोल कमांड रूम के जरिए लाइव मॉनिटरिंग की गई। पूरे प्रदेश में 18,883 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे। इसके अलावा 7,683 बायोमैट्रिक ऑपरेटर और 6,297 फ्रिस्किंग गार्ड तैनात किए गए थे। एआई आधारित पहचान प्रणाली के जरिए प्रतिरूपण और फर्जीवाड़े पर नजर रखी गई। यही कारण रहा कि बुलंदशहर में एक संदिग्ध अभ्यर्थी तुरंत पकड़ लिया गया और उसे पुलिस के हवाले कर दिया गया। नकल माफिया पर लगातार कड़ा प्रहार उत्तर प्रदेश में एक समय भर्ती परीक्षाएं पेपर लीक और सॉल्वर गैंग के कारण सवालों में रहती थीं, लेकिन योगी सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह बदलने की दिशा में सख्त कदम उठाए हैं। हाईटेक निगरानी, बायोमैट्रिक सत्यापन, एआई ट्रैकिंग और प्रशासनिक जवाबदेही ने नकल माफियाओं की कमर तोड़ दी है। लेखपाल मुख्य परीक्षा-2025 का शांतिपूर्ण आयोजन इस बात का संकेत है कि अब प्रदेश में भर्ती परीक्षाएं पारदर्शिता और सख्ती के नए मॉडल पर आगे बढ़ रही हैं।