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आईईएचई एवं सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ़ झारखंड के बीच हुआ एमओयू

भोपाल उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान, भोपाल एवं सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ़ झारखंड, रांची के बीच गुरुवार को एक एमओयू हुआ है। एमओयू के अंतर्गत रिसर्च स्कॉलर्स एवं फैकल्टी एक्सचेंज, वैज्ञानिक शोध, अकादमिक प्रोजेक्ट्स, सेमिनार, कॉन्फ्रेंस एवं संयुक्त शैक्षणिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। एमओयू से दोनों संस्थाओं के विद्यार्थियों, रिसर्च स्कॉलर्स एवं फैकल्टी को लाभ होगा। साथ ही दोनों संस्थाओं के बीच जॉइंट रिसर्च प्रोजेक्ट एवं पेटेंट पर भी कार्य किया जाएगा। इस दौरान आईईएचई संस्थान द्वारा संस्थान की अकादमिक गतिविधि, रिसर्च कार्यों एवं उपलब्धियों के बारे में प्रेजेंटेशन दिया गया। एमओयू के अंतर्गत दोनों संस्थान एक मॉनिटरिंग टीम गठित करेंगे। एमओयू के दौरान सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ़ झारखंड के कुलगुरु, प्रोफेसर सारंग मेढेकर, रजिस्ट्रार,के. खोसला राव, डीन (आर एंड डी), प्रोफेसर मनोज कुमार तथा आईईएचई के संचालक, डॉक्टर प्रज्ञेश कुमार अग्रवाल, प्रोफेसर अनुज, प्रोफेसर शैलजा दुबे, प्रोफेसर बी.के. सिन्हा, प्रोफेसर अमित जैन, प्रोफेसर महेंद्र सिंघई, प्रोफेसर सभाकांत द्विवेदी आदि उपस्थित रहे।  

​’कृषक उन्नति योजना’ से किसानों को संबल-राजस्व मंत्रीटंक राम वर्मा

रायपुर अगर हमें अपनी आने वाली पीढ़ी को एक स्वस्थ और सुरक्षित भविष्य देना है, तो रासायनिक खादों की अंधी दौड़ से बाहर निकलना होगा। धरती की उर्वरा शक्ति को बचाने और इंसानी सेहत को संवारने का एकमात्र रास्ता जैविक और प्राकृतिक खेती ही है। यह विचार प्रदेश के कृषि मंत्रीरामविचार नेताम ने भाटापारा में आयोजित 'जिला स्तरीय तिलहन मेला सह जैविक कृषि कार्यशाला' के दौरान व्यक्त किए। शासकीय गजानन्द अग्रवाल स्नातकोत्तर महाविद्यालय के ऑडिटोरियम में संपन्न हुए इस समारोह में राजस्व मंत्रीटंक राम वर्मा, राज्यसभा सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा और रायपुर लोकसभा सांसदबृजमोहन अग्रवाल भी विशेष रूप से मंच पर मौजूद रहे। ​अंधाधुंध रासायनिक उपयोग पर जताई चिंता            ​ कृषि मंत्रीनेताम ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर पूरे देश में 1 से 30 जून तक 'खेत चलो अभियान' चलाया जा रहा है, जिसका मुख्य ध्येय किसानों को पारंपरिक और प्राकृतिक खेती की ओर वापस लाना है। छत्तीसगढ़ के 'धान का कटोरा' होने के गौरव को रेखांकित करते हुए उन्होंने चिंता जताई कि अधिक उत्पादन की लालसा में रासायनिक खादों का अंधाधुंध इस्तेमाल बढ़ गया है। इससे तात्कालिक पैदावार भले बढ़ रही हो, लेकिन यह मानव स्वास्थ्य और मिट्टी, दोनों को गंभीर नुकसान पहुंचा रहा है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे सिर्फ पारंपरिक फसलों तक सीमित न रहें, बल्कि पशुपालन, मछलीपालन और बकरी पालन को जोड़कर अपनी आय के नए स्रोत बनाएं।  किसानों को आत्मनिर्भर बनाने सरकार प्रतिबद्ध        ​     किसानों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कृषि मंत्री ने बताया कि सरकार ने 'कृषक उन्नति योजना' का दायरा और बढ़ा दिया है। अब खरीफ सीजन में धान के बदले दलहन (दालें) और तिलहन (तेल बीज) की खेती करने वाले किसानों को सरकार की तरफ से 15 हजार रुपए प्रति एकड़ की दर से आदान सहायता राशि (इनपुट सब्सिडी) दी जाएगी। उन्होंने क्षेत्र के किसानों से इस योजना का बढ़-चढ़कर लाभ उठाने का आग्रह किया। ​पशुधन आधारित खेती ही समृद्धि का आधार: मंत्रीटंक राम वर्मा            ​ समारोह को संबोधित करते हुए राजस्व मंत्रीटंक राम वर्मा ने कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने का सपना जैविक खेती के जरिए ही साकार हो सकता है। उन्होंने कहा कि पुराने समय में हमारी कृषि का मूल आधार पशुधन हुआ करता था, जिससे पर्यावरण और जमीन दोनों सुरक्षित थे। आज रासायनिक खादों के कारण पानी, हवा और भोजन सब प्रदूषित हो रहे हैं। जैविक खेती से जब हमारी जमीन की सेहत सुधरेगी, तभी हमें शुद्ध अन्न मिलेगा और हमारा समाज स्वस्थ रहेगा। कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा, लोकसभा सांसदबृजमोहन अग्रवाल और पूर्व विधायकशिवरतन शर्मा ने भी अपने विचार साझा किए। ​योजनाओं के हितग्राहियों को मिला लाभ             ​ कार्यशाला केवल विमर्श तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें शासन की कल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाया गया। कार्यक्रम में अतिथियों के हाथों 5 किसानों को अरहर बीज किट, 5 किसानों को नैनो यूरिया और 2 मछुआ समितियों को आधुनिक महाजाल व आइस बॉक्स का वितरण किया गया। इसके साथ ही पीएम किसान सम्मान निधि और पीएम आशा योजना के तहत उत्कृष्ट काम करने वाले 5-5 किसानों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।     ​ इस अवसर पर नगर पालिका अध्यक्ष, पूर्व विधायक डॉ. सनम जांगड़े, जिला पंचायत सीईओ, सहित भारी संख्या में प्रगतिशील किसान और विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

पेट्रोल-डीजल बचाने की पहल, MP हाईकोर्ट ने कार-पूलिंग और वर्चुअल सुनवाई को बढ़ावा देने के दिए निर्देश

जबलपुर  देश में ईंधन संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और न्यायिक कार्यों को निर्बाध बनाए रखने के उद्देश्य से मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। भारत सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के कार्यालय ज्ञापन के अनुरूप जारी इस एडवाइजरी को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के आदेश पर लागू किया गया है। यह निर्देश मप्र हाईकोर्ट की मुख्य पीठ जबलपुर, इंदौर एवं ग्वालियर खंडपीठों के साथ-साथ प्रदेश की सभी जिला अदालतों, न्यायिक अधिकारियों, कर्मचारियों और अधिवक्ताओं पर लागू होंगे। नई गाइडलाइन के तहत न्यायालयों में उपलब्ध सरकारी वाहनों के उपयोग को नियंत्रित और व्यवस्थित किया जाएगा। निर्देशों के तहत पूल वाहनों का उपयोग केवल न्यायिक और प्रशासनिक कार्यों के लिए किया जाएगा। अधिकारियों और कर्मचारियों के निवास स्थान के आधार पर रूट-वाइज तथा लोकैलिटी-वाइज वाहन योजना तैयार की जाएगी। वाहनों की अधिकतम बैठने की क्षमता का उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा। किसी अधिकारी या कर्मचारी को व्यक्तिगत वाहन सुविधा केवल आपातकाल, सुरक्षा, प्रोटोकॉल अथवा चिकित्सीय आवश्यकता की स्थिति में ही उपलब्ध होगी। अधिवक्ताओं और कर्मचारियों को कार-पूलिंग की सलाह दी गई है। हाईकोर्ट ने अधिवक्ताओं और कर्मचारियों से सार्वजनिक परिवहन, कार-पूलिंग तथा टू-व्हीलर पूलिंग को प्राथमिकता देने का अनुरोध किया है। इसके अलावा, अधिक व्यस्त मार्गों पर आवश्यकता के अनुसार मिनी बस, ट्रैवलर या अन्य साझा परिवहन सुविधाएं उपलब्ध कराने की भी व्यवस्था की जा सकती है। ये अपील की गई गाइडलाइन में अधिवक्ताओं से विशेष रूप से अपील की गई है कि जहां संभव हो, वे अपने मामलों की सुनवाई और पैरवी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से करें। प्रशासनिक बैठकों और आधिकारिक चर्चाओं का आयोजन भी वर्चुअल माध्यम से किया जाएगा। वकीलों और न्यायालय प्रशासन के बीच संवाद को भी डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए प्रोत्साहित किया जाएगा। अनावश्यक यात्रा से बचकर ईंधन की बचत सुनिश्चित की जाएगी। हाईकोर्ट ने संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे वाहनों के उपयोग और ईंधन खपत की दैनिक निगरानी करें। वाहनों की उपलब्धता और उपयोग को कार्य की आवश्यकता तथा प्राथमिकता के आधार पर निर्धारित किया जाएगा। समय-समय पर इसकी समीक्षा भी की जाएगी। यह व्यवस्था फिलहाल अस्थायी रूप से लागू हाईकोर्ट रजिस्ट्री ने स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था फिलहाल अस्थायी रूप से लागू की गई है, ताकि राष्ट्रीय स्तर पर ईंधन संरक्षण के प्रयासों में न्यायपालिका भी योगदान दे सके और न्यायिक कार्य प्रभावित न हों। निर्देशों में कहा गया है कि सभी संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों और अधिवक्ताओं के लिए इन उपायों का पालन अनिवार्य होगा।    

हड़ताली कर्मचारियों पर पंजाब सरकार सख्त, नए निर्देशों से बढ़ी हलचल

नूरपुरबेदी/चंडीगढ़. पंजाब के नूरपुरबेदी में पिछले 25 दिनों से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे मनरेगा कर्मचारियों के खिलाफ राज्य सरकार ने कड़ा रुख अपना लिया है। सरकार ने इन हड़ताली कर्मचारियों पर दबाव बनाने और उन्हें डराने के उद्देश्य से ‘काम नहीं, तो वेतन नहीं’ का सिद्धांत लागू करते हुए हड़ताल के दिनों का वेतन काटने का सख्त फरमान जारी किया है। ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग के प्रशासनिक सचिव के निर्देश पर डिप्टी डायरैक्टर द्वारा सभी जिलों के डिप्टी कमिश्नरों और समन्वयकों को ये आधिकारिक आदेश जारी कर दिए गए हैं। इस फैसले की जानकारी मिलते ही नूरपुरबेदी में धरने पर बैठे कर्मचारियों में भारी रोष फैल गया और उन्होंने राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपना कड़ा विरोध जताया। कर्मचारी नेताओं ने सरकार के इस कदम की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा द्वारा 1 जुलाई को सुबह 11 बजे जत्थेबंदी के साथ बैठक तय की गई थी। लेकिन इस प्रस्तावित बातचीत से ठीक पहले वेतन काटने के आदेश जारी करना सरकार की बौखलाहट को दर्शाता है। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि उन्हें पंचायत विभाग में मर्ज करके नियमित किया जाए, जिसे सरकार लंबे समय से गंभीरता से नहीं ले रही है। कर्मचारियों ने सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों का जल्द समाधान नहीं हुआ, तो आने वाले समय में जन मिलनियों के दौरान विधायकों, हलका इंचार्जों और मंत्रियों का घेराव किया जाएगा। यूनियन नेताओं ने स्पष्ट किया कि विभागीय अफसरशाही के रवैये ने कर्मचारियों के भीतर गुस्से की आग को और भड़का दिया है और अब वे किसी भी झूठे आश्वासन से रुकने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि चाहे उन पर लाठीचार्ज किया जाए, मुकदमे दर्ज हों या जेल भेजा जाए, मनरेगा कर्मचारी अपना हक लेकर ही रहेंगे। जिला प्रधान कुलदीप सिंह, सतनाम सिंह, जसपाल सिंह और अन्य मौजूद कर्मचारियों ने साफ किया कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक संघर्ष और हड़ताल इसी तरह जारी रहेगी।

केंद्रीय मंत्री ने प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अगले चरण के लिए 6.18 लाख पात्र लाभार्थियों की सूची मुख्यमंत्री को सौंपी

लखनऊ  केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उत्तर प्रदेश के बागवानी क्षेत्र को नई गति देने के उद्देश्य से लखनऊ में क्लीन प्लांट सेंटर स्थापित किए जाने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि इस केंद्र के माध्यम से किसानों को गुणवत्तायुक्त एवं रोगमुक्त पौधे उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे उद्यानिकी क्षेत्र का विस्तार होगा और किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि सुनिश्चित होगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को लखनऊ स्थित योजना भवन के वैचारिकी सभागार में उत्तर प्रदेश के कृषि रोडमैप, कृषि क्षेत्र की विभिन्न केंद्रीय एवं राज्य योजनाओं तथा ग्रामीण विकास कार्यक्रमों के क्रियान्वयन की संयुक्त समीक्षा की। बैठक में केंद्र एवं राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी भाग लिया। बैठक को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि विकसित भारत के संकल्प की सिद्धि के लिए समृद्ध उत्तर प्रदेश सबसे अनिवार्य है। उत्तर प्रदेश जितनी तेजी से कृषि, ग्रामीण विकास और किसानों की समृद्धि के क्षेत्र में आगे बढ़ेगा, विकसित भारत का लक्ष्य उतनी ही शीघ्रता से साकार होगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र और राज्य सरकार आपसी समन्वय तथा साझा प्रयासों से इस राष्ट्रीय संकल्प को अवश्य पूरा करेंगी। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश कभी बीमारू राज्यों की श्रेणी में गिना जाता था, लेकिन आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में विकास के नए प्रतिमान स्थापित कर रहा है। कृषि, ग्रामीण विकास, आधारभूत संरचना तथा जनकल्याण के विभिन्न क्षेत्रों में प्रदेश ने उल्लेखनीय उपलब्धियां अर्जित की हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रहा है, लेकिन बदलते समय की चुनौतियों के बीच विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप कृषि क्षेत्र में गंभीर मंथन आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इसी उद्देश्य से यह समीक्षा बैठक आयोजित की गई है, ताकि कृषि को अधिक उत्पादक, लाभकारी, जलवायु अनुकूल एवं टिकाऊ बनाने के लिए प्रभावी रणनीति तैयार की जा सके। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने चना, मसूर एवं सरसों की सरकारी खरीद की अवधि बढ़ाए जाने की मंजूरी भी प्रदान की। उन्होंने इस संबंध में स्वीकृति का आशय पत्र मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपा। मुख्यमंत्री ने इसके लिए केंद्रीय मंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इससे प्रदेश के अधिकाधिक किसानों को अपनी उपज न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बेचने का अवसर मिलेगा और उनके हितों का बेहतर संरक्षण सुनिश्चित होगा।  केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के आगामी चरण के लिए पात्र 6,18,482 लाभार्थियों की सूची मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपते हुए प्रदेश सरकार को बधाई दी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में गरीब कल्याण की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया गया है। पात्रता के आधार पर प्रत्येक जरूरतमंद परिवार को आवास उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। उन्होंने निर्देश दिए कि योजना के अगले चरण में भी सभी पात्र लाभार्थियों को पूर्ण पारदर्शिता एवं समयबद्ध तरीके से लाभान्वित किया जाए, ताकि कोई भी पात्र परिवार योजना के लाभ से वंचित न रहे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान के लखनऊ आगमन के लिए हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत नए आवासों की स्वीकृति, चना, मसूर एवं सरसों की सरकारी खरीद की अवधि बढ़ाए जाने तथा उत्तर प्रदेश के बागवानी क्षेत्र के लिए लखनऊ में क्लीन प्लांट सेंटर स्थापित किए जाने की स्वीकृति के लिए भी केंद्रीय मंत्री के प्रति आभार प्रकट किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व एवं केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के मार्गदर्शन में देश का कृषि क्षेत्र नई दिशा प्राप्त कर रहा है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में शिवराज सिंह चौहान जी का लंबा एवं सफल अनुभव रहा है। उनके नेतृत्व में मध्य प्रदेश ने कृषि क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की और आज उनके अनुभव, दूरदर्शिता तथा मार्गदर्शन का लाभ पूरे देश को प्राप्त हो रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र एवं राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से विकसित कृषि एवं विकसित भारत के लक्ष्य को समयबद्ध रूप से प्राप्त किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि विकसित भारत@2047 के लक्ष्य की प्राप्ति में आईसीएआर द्वारा तैयार ‘विकसित कृषि रोडमैप’ उत्तर प्रदेश के लिए अत्यंत उपयोगी एवं मार्गदर्शक सिद्ध होगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार कृषि क्षेत्र को अधिक उत्पादक, लाभकारी एवं तकनीक आधारित बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। कृषि विविधीकरण, आधुनिक कृषि तकनीकों के विस्तार, मूल्य संवर्धन, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा किसानों की आय वृद्धि के लिए केंद्र और राज्य सरकार समन्वित रूप से कार्य कर रही हैं। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व तथा केंद्र सरकार के सतत सहयोग से उत्तर प्रदेश विकसित कृषि के लक्ष्य को प्राप्त करते हुए विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। बैठक में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के महानिदेशक ने 'विकसित कृषि @2047:उत्तर प्रदेश कार्ययोजना' पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। इसमें जलवायु समावेशी विकास, कृषि विविधीकरण, संसाधन आधारित नियोजन, विज्ञान आधारित कृषि, मूल्य श्रृंखला सुदृढ़ीकरण तथा संपूर्ण शासन तंत्र के समन्वित दृष्टिकोण को विकसित कृषि का आधार बताया गया। बताया गया कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश की कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था लगभग 7.41 ट्रिलियन रुपये की है, जिसे वर्ष 2047 तक कृषि विविधीकरण एवं उच्च उत्पादकता आधारित रणनीति के माध्यम से बढ़ाकर 96.96 ट्रिलियन रुपये तक पहुंचाया जाना चाहिए। इसके लिए वास्तविक कृषि वृद्धि दर को 3.19 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.41 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। कार्ययोजना के अनुसार वर्ष 2047 तक कृषि विकास का आधार केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि उत्पादकता, किसानों की आय, मूल्य संवर्धन तथा निर्यात क्षमता में समग्र वृद्धि होना चाहिए। इसके लिए प्रत्येक जनपद की कृषि-जलवायु परिस्थितियों एवं बाजार की मांग के अनुरूप कृषि विविधीकरण को व्यापक स्तर पर अपनाया जाना चाहिए। धान एवं गेहूं पर अत्यधिक निर्भरता को कम करते हुए दलहन, तिलहन, मोटे अनाज, मक्का, बागवानी तथा अन्य उच्च मूल्य वाली फसलों का विस्तार किया जाना चाहिए। साथ … Read more

सहकारिता मंत्रालय के 5 वर्ष पूर्ण होने पर 29 जून से 6 जुलाई तक मनाया जाएगा सहकारी सप्ताह

रायपुर भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय की स्थापना के पांच वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में 29 जून से 6 जुलाई 2026 तक पूरे देश में सहकारी सप्ताह मनाया जाएगा। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ में भी सहकारिता के माध्यम से समृद्धि, आत्मनिर्भरता और ग्रामीण विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। राज्य स्तरीय सहकारी चिंतन शिविर, सहकार मेला, अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता दिवस समारोह एवं सहकारी संगोष्ठी का आयोजन किया जाएगा, इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्रीविष्णुदेव साय मुख्य अतिथि तथा सहकारिता मंत्रीकेदार कश्यप अध्यक्षता करेंगे। सहकारिता मंत्रीकेदार कश्यप ने तैयारियों की समीक्षा की                 गौरतलब है कि सहकारी सप्ताह के सफल आयोजन के लिए सहकारिता मंत्रीकेदार कश्यप ने विगत 23 जून को विभागीय अधिकारियों की समीक्षा बैठक ली। इसके साथ ही उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश की पैक्स समितियों के प्राधिकृत अधिकारियों एवं संभागीय अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। मंत्रीकश्यप ने सभी संबंधित संस्थाओं और समितियों को आयोजन में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने तथा सहकारिता आंदोलन को जन-जन तक पहुंचाने के निर्देश दिए। 2573 पैक्स समितियों में होंगे विविध कार्यक्रम              सहकारी सप्ताह के दौरान प्रदेश की सभी 2573 पैक्स समितियों सहित दुग्ध, मत्स्य, बुनकर एवं अन्य सहकारी समितियों द्वारा विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। इनमें प्रमुख रूप से सहकारी ध्वजारोहण,सदस्यता अभियान,माइक्रो एटीएम, किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) एवं रू-पे केसीसी कार्ड वितरण,सहकार दौड़,वृक्षारोपण अभियान,मृदा परीक्षण,कृषक संगोष्ठियां एफपीओ एवं पैक्स की भूमिका पर परिचर्चा आदि कार्यक्रम शामिल हैं। 9 पैक्स गोदामों का होगा भूमिपूजन              सहकारी सप्ताह के समापन अवसर पर 6 जुलाई 2026 को भारत सरकार के केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री द्वारा सहकारी क्षेत्र में विकेंद्रीकृत विश्व की सबसे बड़ी अन्न भंडारण योजना के अंतर्गत प्रदेश के 9 पैक्स में गोदाम निर्माण कार्य का भूमिपूजन किया जाएगा। रायपुर में होगा राज्य स्तरीय सहकारी चिंतन शिविर एवं सहकार मेला              राज्य स्तरीय सहकारी चिंतन शिविर, सहकार मेला, अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता दिवस समारोह एवं सहकारी संगोष्ठी का आयोजन 3 एवं 4 जुलाई 2026 को इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय परिसर स्थित कृषि मंडपम ऑडिटोरियम, लाभांडी (रायपुर) में किया जाएगा। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्रीविष्णुदेव साय मुख्य अतिथि तथा सहकारिता मंत्रीकेदार कश्यप अध्यक्षता करेंगे। सहकारी संस्थाओं और राष्ट्रीय संगठनों की होगी भागीदारी कार्यक्रम में पैक्स, दुग्ध, मत्स्य, लघु वनोपज, बुनकर एवं अन्य सहकारी समितियों के साथ-साथ नाबार्ड, एनसीडीसी, एनसीसीएफ, नैफेड, सीएससी, इफको, कृभको, राज्य सहकारी संघ तथा अन्य प्रमुख संस्थाएं अपनी सहभागिता सुनिश्चित करेंगी। सहकारिता से समृद्धि के मॉडल होंगे प्रदर्शित               सहकार मेले में सहकारिता क्षेत्र की उपलब्धियों, नवाचारों और सफल मॉडलों का प्रदर्शन किया जाएगा। साथ ही किसानों, महिला समूहों, दुग्ध उत्पादकों, मत्स्य पालकों, बुनकरों एवं ग्रामीण उद्यमियों को सहकारी योजनाओं से जोड़ने के लिए विशेष गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। आयोजन की रूपरेखा पर हुई विस्तृत चर्चा            बैठक में कार्यक्रम की रूपरेखा, सहभागिता और विभिन्न गतिविधियों के सफल संचालन पर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में सभी ने सहकारिता आंदोलन को और अधिक सशक्त बनाने तथा सहकारी सप्ताह को व्यापक जनभागीदारी के साथ सफल बनाने का संकल्प व्यक्त किया।            सहकारी सप्ताह के आयोजन को लेकर सहकारिता मंत्रीकेदार कश्यप की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक मर्या० (अपेक्स बैंक) के प्राधिकृत अधिकारीकेदार नाथ गुप्ता, छ०ग०राज्य सहकारी विपणन संघ मार्कफेड के अध्यक्षशशिकांत द्विवेदी, जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक दुर्ग के अध्यक्षप्रीतपाल बेलचंदन, जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक राजनांदगांव अध्यक्षसचिन बघेल, जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक …

शराबी दूल्हे को देख दुल्हन का बड़ा फैसला, शादी से किया इनकार; बिना दुल्हन लौटी बारात

जांजगीर-चांपा. जो शादी के दिन नशे मे धुत्त हैं अपने आप को नहीं संभाल पा रहा हैं, वह मुझे क्या संभालेगा. यह कहते हुए मुस्कान प्रधान ने नशे में धुत्त दूल्हे के साथ घर में आई बारात को बैरंग लौटाकर समाज को एक बड़ा संदेश दिया है. मुस्कान की इस हिम्मत की दाद देते हुए पुलिस अधीक्षक ने उनका सम्मान करते हुए जिले का आईकॉन करार दिया. कोसमंदा की बेटी मुस्कान प्रधान ने वह काम किया है, जिसे करने की बहुत से लोग हिम्मत नहीं जुटा पाते हैं. घटना 23 जून की रात की है. मुस्कान के घर शराब पीकर दूल्हा बारात लेकर पहुंचा था. इस बात की जानकारी मिलते ही सोलह श्रृंगार कर बैठी ने मुस्कान ने शादी से इंकार कर दिया. दुल्हन के इंकार किया जाना दूल्हे पक्ष को मंजूर नहीं हुआ, और दुल्हन को ले जाने के लिए अड़ा रहा. दुल्हन के इंकार और दूल्हे की जिद की वजह से स्थिति तनावपूर्ण हो गई. लेकिन दूल्हे की हरकत को देखते हुए मुस्कान के परिवारवालों ने भी उसका साथ दिया. फिर भी जब दूल्हे पक्ष वाले नहीं माने तो फिर पुलिस का बुलाना पड़ा. आखिरकार पूरे माहौल को खिलाफ में देखते हुए बारात वापस खोखरा गांव लौट गई. मुस्कान के इंकार करने के पीछे एक बड़ा दर्द भी छिपा था. दरअसल, 10वीं कक्षा तक पढ़ी मुस्कान तीन बहनों और एक भाई में सबसे बड़ी है. मुस्कान का पिता भी शराबी था, जिसका शादी के 15 साल बाद निधन हो गया. परिवार की बड़ी बेटी होने के नाते माता और भाई-बहनों की तकलीफ को देख चुकी मुस्कान ने अपनी जिंदगी को अपनी मां की तरह बर्बाद नहीं होने देने का निर्णय लिया. शराबी दूल्हे को लौटाए जाने की केवल परिवार और गांव वाले के ही नहीं बल्कि प्रशासन भी मुस्कान के साथ खड़ा है. कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक के साथ महिला और सामाजिक संगठनों ने मुस्कान के इस साहसिक कदम का सम्मान किया. एसपी विजय कुमार पाण्डेय ने मुस्कान को नशे के खिलाफ जिला का आइकान बताया. इसके साथ ही मुस्कान को काउंसलर की नियुक्ति दी गई है. यही नहीं पुलिस ने मुस्कान के कॉलेज तक शिक्षा का खर्च वहन करने का निर्णय लिया है. 

वित्त मंत्रीओ.पी. चौधरी के प्रयासों से स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल एवं अधोसंरचना विकास को मिलेगी नई गति

रायपुर  मुख्यमंत्रीविष्णु देव साय के नेतृत्व और वित्त मंत्रीओ.पी. चौधरी के सतत प्रयासों से रायगढ़ जिले के खनन प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों को लगातार गति मिल रही है। जिला खनिज न्यास (डीएमएफ) मद से स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, पशु चिकित्सा एवं अन्य आधारभूत सुविधाओं के विस्तार के लिए 26 करोड़ रुपये से अधिक लागत के विभिन्न विकास कार्यों को मंजूरी प्रदान की गई है। इन परियोजनाओं से हजारों ग्रामीण परिवारों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी तथा क्षेत्र के समग्र विकास को नई दिशा मिलेगी। स्वीकृत कार्यों में सर्वाधिक 16 करोड़ 73 लाख 27 हजार रुपये की लागत से रायगढ़ शहर के विजयपुर क्षेत्र में 100 बिस्तरों वाले सीनियर सिटीजन हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर का निर्माण किया जाएगा। यह आधुनिक केंद्र वरिष्ठ नागरिकों को समर्पित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराएगा और जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाएगा। स्वास्थ्य अधोसंरचना को मजबूत करने के लिए लैलूंगा, धरमजयगढ़, घरघोड़ा एवं तमनार विकासखंडों के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों के निर्माण एवं उन्नयन हेतु कुल 9 करोड़ 52 लाख 71 हजार रुपये से अधिक की राशि स्वीकृत की गई है। इन कार्यों के पूर्ण होने से दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों को बेहतर एवं सुलभ स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी। पशुधन संरक्षण एवं संवर्धन को बढ़ावा देने के लिए जिले में नवीन पशु चिकित्सालय भवनों के निर्माण को भी मंजूरी दी गई है। रायगढ़ विकासखंड के पतरापाली सहित विभिन्न ग्रामों में पशु चिकित्सालय भवनों का निर्माण कराया जाएगा, जिससे पशुपालकों को स्थानीय स्तर पर बेहतर उपचार एवं परामर्श सुविधाएं उपलब्ध होंगी। ग्रामीण क्षेत्रों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लैलूंगा, तमनार, घरघोड़ा एवं रायगढ़ विकासखंड के विभिन्न गांवों में नलकूप खनन एवं पंप स्थापना के कार्य स्वीकृत किए गए हैं। इन योजनाओं से ग्रामीणों को पेयजल संकट से राहत मिलेगी और जलापूर्ति व्यवस्था मजबूत होगी। शिक्षा, पोषण एवं खाद्य सुरक्षा को सुदृढ़ बनाने के लिए तमनार विकासखंड के पेलमा एवं लालपुर में नवीन आंगनबाड़ी भवनों के निर्माण तथा पेलमा एवं खर्रा में प्राथमिक शाला भवनों के निर्माण को स्वीकृति दी गई है। वहीं रायगढ़ विकासखंड के लामीदरहा में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) भवन निर्माण के लिए भी राशि मंजूर की गई है, जिससे ग्रामीणों को राशन वितरण की बेहतर सुविधा मिल सकेगी। जिला प्रशासन ने सभी निर्माण एजेंसियों को कार्यों को समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने के बाद खनन प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, पशु चिकित्सा एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं का विस्तार होगा तथा हजारों परिवारों के जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव आएगा। यह विकास पैकेज रायगढ़ के संतुलित और समावेशी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

दिव्यांगता के बारे में स्कूली स्तर पर सभी को बनाएं संवेदनशील

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि दिव्यांगजन के आवागमन के लिए सभी शासकीय भवनों को बाधारहित बनाना आवश्यक है। बच्चों में दिव्यांगता के बारे में संवेदनशीलता विकसित करने के लिए स्कूली पाठ्यक्रम में आवश्यक सामग्री शामिल की जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नशामुक्ति के लिए चलायें जा रहे अभियान के लिए सभी संबंधित विभागों को समन्वित रूप से कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नशे के दुष्परिणामों से किशोरों और युवाओं को समय रहते परिचित कराना जरूरी है। नशे के विरूद्ध वातावरण बनाने के उद्देश्य से स्कूली और महाविद्यालयीन स्तरों के पाठ्यक्रमों में नशे के विरूद्ध जागरूकता पर केंद्रित सामग्री शामिल की जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दिव्यांगजन को निजी क्षेत्र में रोजगार उपलब्ध कराने और उनकी क्षमता अनुसार कौशल उन्नयन की गतिविधियां भी संचालित की जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उक्त निर्देश सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग की समीक्षा बैठक में दिए। मंत्रालय में गुरूवार को हुई बैठक में विभाग के मंत्रीनारायण सिंह कुशवाहा, मुख्य सचिवअनुराग जैन विशेष रूप से उपस्थित थे। दिव्यांगजन के लिए की गई है 168 स्मार्ट क्लास मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जन्म दिवस, विवाह वर्षगांठ जैसे शुभ अवसरों और परिजन की स्मृति में जरूरतमंदों को भोजन कराने की परंपरा भारतीय संस्कृति में रही है। उन्होंने ऐसी व्यक्तिगत, पारिवारिक और सामाजिक पहल को, प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर निराश्रितों को भोजन कराने के लिए निश्चित व्यवस्था के रूप में विकसित करने का सुझाव दिया। बैठक में जानकारी दी गई कि मुख्यमंत्री सेवा पखवाड़ा अभियान वर्ष 2025 अंतर्गत प्रदेश में 6 करोड़ 52 लाख रुपए के कृत्रिम अंग एवं सहायक यंत्र दिव्यागंजन को उपलब्ध कराये गये। प्रदेश में दिव्यांगजन के लिए संचालित विशेष विद्यालयों में दिव्यांगजन के लिए 168 स्मार्ट क्लास तैयार की गई हैं। नशामुक्ति भारत अभियान के अंतर्गत 12 हजार वालेंटियर्स बनाये गये हैं, जो नशे के दुष्परिणामों से जन सामान्य को अवगत करा रहे हैं। दिव्यांगजन को आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें रोजगार उपलबध कराने के लिए भारत सरकार से प्राप्त पुरस्कार संस्थानों से एमओयू किया गया है। इन संस्थाओं द्वारा 12 दिव्यांगजनों को रोजगार उपलब्ध कराया गया। वृद्धजनों की देखभाल के लिए 54 प्रतिभागियों को केयर-गिवर का प्रशिक्षण दिलवाया गया। बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभाग में संचालित विभिन्न योजनाओं की प्रगति की बिंदुवार समीक्षा की। बैठक में अपर मुख्य सचिवनीरज मंडलोई,संजय शुक्ला,मनीष रस्तोगी, प्रमुख सचिव श्रीमती सोनाली वायंगणकर सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।  

उद्धव ठाकरे की बैठक में नहीं पहुंचे 23 MLA, पवार की अनुपस्थिति ने तेज की राजनीतिक चर्चाएं

मुंबई महाराष्ट्र की राजनीति में एक और बड़े भूचाल के संकेत मिल रहे हैं। महा विकास अघाड़ी (MVA) गठबंधन में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। शाम को बुलाई गई गठबंधन की एक अहम रणनीतिक बैठक से 60 में से 23 विधायकों ने दूरी बना ली। विधायकों के अलावा, इनमें शरद पवार जैसे बड़े नाम भी शामिल हैं। हाल ही में उद्धव ठाकरे गुट के 6 सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट में शामिल होने के बाद अब विधायकों की इस गैरमौजूदगी ने गठबंधन के भविष्य पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मुश्किल घड़ी में उद्धव ठाकरे का दर्द भी छलक पड़ा है और उन्होंने पूछा है- "क्या हम सच में एक साथ हैं?" बैठक से नदारद रहे ये दिग्गज नेता यह अहम बैठक मुख्य रूप से मॉनसून सत्र के लिए रणनीति तैयार करने के मकसद से बुलाई गई थी, लेकिन इसमें कई बड़े नेता नहीं पहुंचे। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के मुखिया शरद पवार और उनके वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल इस बैठक में शामिल नहीं हुए। बताया गया कि वे निजी कारणों से उपलब्ध नहीं थे। कांग्रेस नेता नाना पटोले और विजय वडेट्टीवार भी बैठक से गायब रहे। वडेट्टीवार के कार्यालय की ओर से जानकारी दी गई कि वे अस्वस्थ हैं। हालांकि, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल और ठाकरे गुट के संकटमोचक संजय राउत इस बैठक में मौजूद रहे। उद्धव ठाकरे ने जाहिर की अपनी पीड़ा पिछले हफ्ते शिवसेना (यूबीटी) के 6 सांसदों ने बगावत करते हुए एकनाथ शिंदे गुट का दामन थाम लिया था। चार साल में दूसरी बार अपनी पार्टी टूटने का दंश झेल रहे पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने बैठक में अपनी हताशा जाहिर की। उन्होंने गठबंधन के नेताओं से पूछा, "क्या हम वाकई एक साथ हैं?" बागी सांसदों का जिक्र करते हुए उद्धव ने अपील की कि हमें उन लोगों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए जो हमारे साथ हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा, "जो चले गए… उन्हें जाने दें।" उद्धव ठाकरे ने एकजुटता पर सवाल उठाते हुए कहा, "हम कहते हैं कि हम एक साथ हैं… लेकिन क्या हम सदन में महा विकास अघाड़ी के रूप में एकजुट हैं? क्या हम एक साथ मिलकर मुद्दे उठाते हैं?" क्या था बैठक का असली मकसद? रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस बैठक में 6 बागी सांसदों के मुद्दे पर कोई चर्चा नहीं हुई। यह बैठक मुख्य रूप से तीन दिन पहले शुरू हुए मानसून सत्र की रणनीति तय करने के लिए बुलाई गई थी। लेकिन सांसदों की बगावत के तुरंत बाद हुई इस बैठक में विधायकों की गैरमौजूदगी को गठबंधन की एकता के 'टेस्ट' में फेल होने के तौर पर देखा जा रहा है। खतरे में एमवीए का अस्तित्व? नवंबर 2019 में वजूद में आए एमवीए (MVA) गठबंधन की स्थिरता पर हमेशा से सवालिया निशान रहे हैं। सात साल, तीन बड़े चुनावों और कई बगावतों का सामना करने के बावजूद यह गठबंधन अब तक टिका हुआ है। जून 2022 में शिवसेना में हुई बड़ी बगावत के बाद, ठीक उसी तर्ज पर जून 2023 में एनसीपी में भी टूट हुई थी। कांग्रेस-एनसीपी और कट्टर हिंदुत्व वाली शिवसेना के एक साथ आने को आलोचकों ने हमेशा 'अवसरवादी राजनीति' करार दिया है। कई राजनीतिक जानकारों का मानना है कि लगातार हो रही बगावत और अब विधायकों की दूरी यह संकेत दे रही है कि एमवीए गठबंधन अपने आखिरी दौर से गुजर रहा है।