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मंत्री विश्वास सारंग ने करोड़ों के विकास कार्यों का किया भूमि-पूजन, क्षेत्र को मिलेगी नई सौगात

मंत्री विश्वास सारंग ने किया करोड़ों की लागत से होने वाले विकास कार्यों का भूमि-पूजन वार्ड 78 में सीवेज परियोजना से हजारों परिवारों को मिलेगा प्रत्यक्ष लाभ भोपाल  सहकारिता, खेल और युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने  नरेला विधानसभा अंतर्गत वार्ड 78, विश्वकर्मा नगर में 23 करोड़ से अधिक की लागत से होने वाली सीवेज परियोजना एवं अन्य विकास कार्यों का भूमि-पूजन किया। मंत्री सारंग ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार मध्यप्रदेश में विकास और जनकल्याण के नए आयाम स्थापित कर रही है। हर वर्ग के कल्याण और हर क्षेत्र का समुचित विकास सरकार की प्राथमिकता है। मंत्री सारंग ने कहा कि हमारा लक्ष्य केवल विकास कार्य करना नहीं बल्कि प्रत्येक नागरिक के जीवन को सुगम भी बनाना है। मंत्री सारंग ने कहा कि इस परियोजना से स्वच्छता व्यवस्था बेहतर होगी, जलभराव एवं गंदगी की समस्या से राहत मिलेगी तथा नागरिकों को स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण प्राप्त होगा। कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधि सहित बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी उपस्थित रहे। हज़ारों परिवारों को मिलेगा प्रत्यक्ष लाभ वार्ड 78 स्थित विश्वकर्मा नगर में 23 करोड़ से अधिक की लागत से निर्माण होने वाली इस परियोजना के अंतर्गत 13 करोड़ रुपये की लागत से 42 किलोमीटर लंबा सीवर नेटवर्क बनाया जाएगा तथा 9 करोड़ रुपये की लागत से 8079 हाउस सीवर कनेक्शन प्रदान किए जाएंगे, जिससे लगभग 35,306 नागरिकों को प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त होगा। परियोजना पूर्ण होने के बाद क्षेत्रवासियों को बेहतर स्वच्छता, आधुनिक सीवेज व्यवस्था और सुगम नागरिक सुविधाएं प्राप्त होंगी। इससे न केवल जनजीवन अधिक सरल एवं सुविधाजनक बनेगा बल्कि क्षेत्र के समग्र विकास को भी नई दिशा मिलेगी। कार्यक्रम में मंत्री सारंग का क्षेत्रवासियों द्वारा पुष्पवर्षा एवं माल्यार्पण कर भव्य स्वागत किया गया। और क्षेत्रवासियों ने करोड़ों की लागत से होने वाले इन विकास कार्यों की सौगात के लिए आभार व्यक्त किया।  

धार भोजशाला विवाद पर बड़ा निर्णय, हाई कोर्ट ने परिसर को सरस्वती मंदिर घोषित किया

धार  अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद धार्मिक स्थलों से जुड़े सबसे अहम फैसलों में से एक में फैसले में 15 मई को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने यह कहा कि धार में स्थित विवादित भोजशाला-कमल मौला परिसर मूल रूप से एक हिंदू धार्मिक और शैक्षिक ढांचा है – यह देवी वाग्देवी (सरस्वती) को समर्पित एक मंदिर और संस्कृत सीखने का एक केंद्र है, जिसकी स्थापना परमार वंश के राजा भोज के शासनकाल में 1034 ईस्वी में हुई थी। जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की डिवीज़न बेंच द्वारा दिया गया 242 पन्नों का यह फैसला, आपस में टकराने वाले धार्मिक दावों के पारंपरिक निर्धारण से कहीं आगे जाता है। कोर्ट ने कथित तौर पर पुरातात्विक सर्वेक्षणों, शिलालेखों, वास्तुशिल्प अवशेषों, ऐतिहासिक साहित्य, औपनिवेशिक गजेटियरों, विधायी इतिहास, संवैधानिक सिद्धांतों, हिंदू बंदोबस्ती कानून, इस्लामी वक्फ़ सिद्धांत और अयोध्या फैसले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा विकसित न्यायिक ढांचे की गहन जांच-पड़ताल की। इस फैसले का मूल यह है कि कोर्ट इस निष्कर्ष पर पहुंचा है कि भोजशाला में मौजूद मौजूदा ढांचा, पहले से मौजूद एक मंदिर परिसर को नष्ट करने और उसमें बदलाव करने के बाद बनाया गया था, और यह कि इस जगह पर हिंदू पूजा-अर्चना की निरंतरता "कभी खत्म नहीं हुई"। बेंच ने आखिरकार भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा 2003 में बनाई गई उस व्यवस्था को रद्द कर दिया, जिसके तहत परिसर के अंदर हिंदू पूजा-अर्चना पर रोक लगाते हुए शुक्रवार की नमाज की इजाजत दी गई थी। साथ ही, कोर्ट ने आपस में टकराने वाले धार्मिक दावों में संतुलन बनाने की कोशिश की – हालांकि यह बहुत ज्यादा भरोसेमंद नहीं लगी – और यह टिप्पणी की कि मुस्लिम समुदाय धार जिले में एक मस्जिद बनाने के लिए किसी दूसरी जगह के आवंटन के लिए राज्य सरकार से आवेदन कर सकता है। इस फैसले के गहरे कानूनी और राजनीतिक प्रभाव होने की संभावना है, ऐसा न केवल भोजशाला के बारे में इसके निष्कर्षों की वजह से है, बल्कि इसलिए भी है क्योंकि कोर्ट ने जिस संवैधानिक और साक्ष्य-आधारित कार्यप्रणाली को अपनाया है – वह स्पष्ट रूप से अयोध्या फैसले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले के विवादास्पद सिद्धांतों से प्रेरित है और उनका विस्तार करती है। 1991 के 'पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम' को रद्द करना नागरिकों और कानूनी जानकारों के लिए जिस बात को समझना और आत्मसात करना सबसे ज्यादा ज़ररी है, वह यह है कि कोर्ट खुद एक मौजूदा कानून – 1991 के 'पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम' – के साथ क्या कर रहे हैं। 6 दिसंबर, 1992 को बाबरी मस्जिद गिराए जाने के बाद पारित यह कानून- जिसे नरसिम्हा राव सरकार द्वारा पेश किए जाने के बाद विधायिका का जबरदस्त समर्थन मिला था (संयोग से, जिस समय यह गैर-कानूनी काम हुआ था, उस समय भी यही सरकार सत्ता में थी)- फिलहाल भारत के सुप्रीम कोर्ट में संवैधानिक चुनौती का सामना कर रहा है। विडंबना यह है कि आखिरी बार इस "कानून को दी गई चुनौती" पर शीर्ष अदालत ने दिसंबर 2024 में सुनवाई की थी, जब यह तय हुआ था कि इस मामले पर चार हफ्तों बाद सुनवाई होगी। हालांकि ऐसा नहीं हुआ, लेकिन भोजशाला जैसे फैसले एक बार फिर इस कानून को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट का 12 दिसंबर, 2024 का आदेश- भले ही यह निचली अदालतों के लिए था- उनसे यह कहता है कि वे पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 को दी गई चुनौती पर फैसला आने तक, पूजा स्थलों के धार्मिक स्वरूप को चुनौती देने वाले मामलों में कोई भी नया मुकदमा दर्ज न करें और न ही कोई प्रभावी आदेश (सर्वेक्षण के आदेशों सहित) पारित करें। यह आदेश भारत के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने पारित किया था, जिसमें न्यायमूर्ति पी.वी. संजय कुमार और न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन शामिल थे, उस समय न्यायाधीशों ने इस बात पर जोर दिया था कि इस तरह की कार्यवाही पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 का उल्लंघन करती है। यह कानून पूजा स्थलों के धार्मिक स्वरूप को बदलने पर रोक लगाता है, जैसा कि वे 15 अगस्त, 1947 को थे। दिसंबर 2024 में अदालत का यह हस्तक्षेप- सालों की पेंडेंसी और देरी के बाद (इन याचिकाओं पर 2021 में नोटिस जारी किया गया था)- ऐसे समय में आया, जब धार्मिक स्थलों की स्थिति को चुनौती देने वाली याचिकाओं और मुकदमों की बाढ़ सी आ गई थी, इनमें से कई स्थल मध्यकालीन मस्जिदें और दरगाहें हैं। उस समय, उत्तर प्रदेश में 16वीं सदी की संभल जामा मस्जिद के संबंध में एक निचली अदालत द्वारा नवंबर 2024 में दिए गए सर्वेक्षण के आदेश ने सांप्रदायिक तनाव को बढ़ा दिया था, जिसका नतीजा नवंबर में हुई हिंसक झड़पों के रूप में सामने आया, जिसमें चार लोगों की जान चली गई थी। हालांकि अदालत ने उस समय कहा था कि वह इस कानून – पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991- को दी गई चुनौतियों पर सुनवाई शुरू करेगी, लेकिन अभी तक ऐसा नहीं हुआ है। इन घटनाक्रमों के बारे में विस्तार से यहां पढ़ें। PWA 1991 का संदर्भ और व्यापक निहितार्थ 1991 का अधिनियम पूजा स्थलों के धार्मिक स्वरूप में बदलाव को रोकने के लिए लाया गया था, जिसमें केवल बाबरी मस्जिद स्थल को अपवाद के तौर पर रखा गया था, जो अयोध्या विवाद का विषय था। यह अधिनियम, जिसे अब लगातार चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, यह सुनिश्चित करना चाहता है कि धार्मिक स्थलों- विशेषकर ऐतिहासिक महत्व वाले स्थलों- की स्थिति को लेकर 15 अगस्त, 1947 के बाद कोई नया कानूनी विवाद शुरू न हो। इस महत्वपूर्ण संदर्भ को यहां पढ़ें: ‘राम विलास पासवान ने कब और कैसे पूजा स्थल अधिनियम, 1991 के पक्ष में जोरदार वकालत की थी।’ बिहार के एक कद्दावर नेता- जिन्हें भारतीय राजनीति का ‘मौसम विज्ञानी’ भी कहा जाता था- राम विलास पासवान (जो उस समय नेशनल फ्रंट के सदस्य थे) ने विपक्ष की बेंच से प्रस्तावित कानून के समर्थन में जोरदार भाषण दिया। उन्होंने पूजा स्थलों को ढहाने की BJP की विनाशकारी राजनीति (बाबरी मस्जिद, 6 दिसंबर, 1991) की तीखी आलोचना की और इस मामले में कांग्रेस को भी नहीं बख्शा। बाबरी मस्जिद विध्वंस के बारे में, और … Read more

शुभेंदु अधिकारी का बड़ा बयान, बोले- अब हर मौत का हिसाब होगा

कलकत्ता पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भारतीय जनता पार्टी के नेताओं पर हुए हमलों को लेकर ऐक्शन मोड में हैं। उन्होंने चेतावनी दे दी है कि 2021 चुनाव के बाद हुए कथित हमलों की कानूनी जांच की जाएगी। साथ ही उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को भी कानून हाथ में नहीं लेने की हिदायत दी है। खास बात है कि 2026 विधानसभा चुनाव में जीत के बाद अधिकारी पहली बार रविवार को नंदीग्राम पहुंचे थे। हमलों का रखा है रिकॉर्ड नंदीग्राम में अधिकारी ने कहा कि भाजपा ने उसके कार्यकर्ताओं पर हुए तृणमूल कांग्रेस के कथित हमलों का रिकॉर्ड रखा है। उन्होंने कहा, '2021 विधानसभा चुनावों के बाद कई भाजपा कार्यकर्ताओं के घरों को तोड़ा गया और कई पार्टी समर्थकों को मारा गया। सभी का हिसाब रखा गया है और सभी को कानूनी न्याय मिलेगा।' उन्होंने कहा, 'अगर आप चाहें, तो तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं के घरों की ईंटें खींच लें, लेकिन ऐसा कभी नहीं करना। भाजपा ऐसे कामों को बढ़ावा नहीं देती है। मुझे सब याद है और मैं किसी भी बात को नहीं छोड़ूंगा।' मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने कहा, 'मेरे लिए वोट करने में कई लोग मारे गए हैं।' उन्होंने कहा, 'मैंने पूरा रिकॉर्ड रखा है। भरोसा कीजिए, मैं नंदीग्राम का कर्ज चुकाऊंगा।' नंदीग्राम से वादा रविवार को नंदीग्राम में आयोजित रैली में, अधिकारी ने विधायक पद से अपने इस्तीफे को लेकर समर्थकों के बीच फैली चिंताओं को दूर करने की कोशिश की और इस बात पर जोर दिया कि सीट छोड़ने से इस क्षेत्र से उनका जुड़ाव कमजोर नहीं होगा। नंदीग्राम को अपना 'घर' और अपने राजनीतिक उत्थान की जन्मस्थली बताते हुए अधिकारी ने कहा कि 2003 से संघर्ष के दौरान बना उनका रिश्ता भवानीपुर जाने के बावजूद पहले की तरह कायम रहेगा। अधिकारी ने 2026 के विधानसभा चुनावों में नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों सीटों से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की थी। जीत के बाद उन्होंने नंदीग्राम सीट खाली कर दी। इससे पहले 2021 में भी नंदीग्राम में उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी को मामलू अंतर से हरा दिया। हालांकि, 2026 में उन्होंने बनर्जी के सामने ही 15 हजार से ज्यादा मतों से जीत दर्ज की है। छोटे भाई को दी जिम्मेदारी खास बात है कि सीएम अधिकारी ने नंदीग्राम की जिम्मेदारी छोटे भाई सोमेंदु अधिकारी को दी है। उन्होंने कहा, 'फिलहाल मेरे ऊपर पूरे राज्य की ज़िम्मेदारी है। सरकार चलाने के काम के दबाव के कारण मैंने सोमेंदु अधिकारी को यह खास जिम्मेदारी सौंपी है। नंदीग्राम में पंचायत, प्रशासन और जनता की सेवा से जुड़े मामलों में पांच विधायक उनकी मदद करेंगे।'

खेल और अध्यात्म जगत की हस्तियां होंगी सम्मानित, हरमनप्रीत-कौच बलदेव सिंह को पद्मश्री

चंडीगढ़  पंजाब की तीन हस्तियों को आज पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। इनमें हॉकी कोच बलदेव सिंह, भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर और संत निरंजन दास शामिल हैं। बलदेव सिंह एक अनुभवी हॉकी कोच हैं जिन्होंने 50 से अधिक अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों का मार्गदर्शन किया है। साथ ही एक प्रमुख महिला हॉकी प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना की। वहीं प्रसिद्ध महिला क्रिकेटर हरमनप्रीत कौर ने कप्तान के रूप में भारत को महिला विश्व कप में जीत दिलाई और टी20 क्रिकेट में अंतरराष्ट्रीय शतक बनाने वाली पहली भारतीय महिला क्रिकेटर बनकर इतिहास रचा। आध्यात्मिक नेता संत निरंजन दास ने सरवन दास चैरिटेबल आई हॉस्पिटल और सरवन दास मॉडल स्कूल की स्थापना की। सभी लोगों को भय और गरीबी से मुक्त जीवन जीने का उपदेश दिया। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर तीनों को पद्मश्री पुरस्कार देने की घोषणा की गई थी और अब सोमवार को सम्मानित किया जाएगा। स्वच्छता के सिपाही इंदरजीत सिद्धू को राष्ट्रपति द्रौपदी मूर्मु करेंगी सम्मानित चंडीगढ़ के लिए आज गर्व का क्षण होगा जब सेक्टर-49 की सड़कों पर रोज सुबह झाड़ू लगाकर स्वच्छता का संदेश देने वाले 88 वर्षीय रिटायर्ड डीआईजी इंदरजीत सिंह सिद्धू को राष्ट्रपति भवन के गणतंत्र मंडप में पद्मश्री सम्मान से नवाजा जाएगा। राष्ट्रपति द्रौपदी मूर्मु पहले सिविल इनवेस्टिचर समारोह में उन्हें यह सम्मान प्रदान करेंगी। पंजाब पुलिस से 1996 में सेवानिवृत्त हुए इंदरजीत सिंह सिद्धू पिछले कुछ वर्षों से रोज सुबह पांच बजे उठकर खुद सड़कों की सफाई करते हैं। उनका कहना है कि वह किसी पर दबाव डालने के बजाय खुद उदाहरण पेश कर लोगों को स्वच्छता के लिए प्रेरित करना चाहते हैं। पिछले वर्ष उनका सफाई करते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था जिसके बाद वह देशभर में चर्चा का विषय बन गए। मूलरूप से पंजाब के संगरूर निवासी सिद्धू आतंकवाद के दौर में अमृतसर में एसपी सिटी जैसे अहम पदों पर तैनात रहे। पत्नी के निधन और बेटे के विदेश में बसने के बाद भी उन्होंने समाज सेवा का रास्ता नहीं छोड़ा। वह कहते हैं कि जब तक शरीर साथ देगा, सफाई अभियान जारी रखेंगे। उन्होंने बताया कि अमेरिका यात्रा के दौरान बेटे की ओर से सड़क पर कागज फेंकने से रोकने की घटना ने उन्हें स्वच्छता के प्रति प्रेरित किया।

मौत के वक्त पहने कपड़ों से मिला अहम सुराग, ट्विशा शर्मा केस में बढ़ा सस्पेंस

भोपाल मॉडल और फिल्म एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा भले ही पंचतत्व में विलीन हो गईं पर अपने पीछे अनेक सवाल छोड़ गई हैं। उनकी डेथ मिस्ट्री अभी सुलझी नहीं है। भोपाल एम्स AIIMS में दिल्ली एम्स की टीम ने उनके शव का दोबारा पोस्टमार्टम किया और नमूने, फोटोग्राफ, वीडियो आदि लिए। फॉरेंसिक मेडिसिन एवं टॉक्सिकोलॉजी विभाग के प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष डॉ. सुधीर कुमार गुप्ता की टीम द्वारा किए गए इस दूसरे पोस्टमार्टम से मामले में कुछ खुलासे की उम्मीद है। इधर ट्विशा की मौत की ​हकीकत जल्द सामने के लिए भोपाल पुलिस भी जुटी है। जहां एक ओर आरोपी पति समर्थ सिंह से सख्ती से पूछताछ की जा रही है वहीं अभी तक मिले साक्ष्यों की पड़ताल भी पुलिस कर रही है। इस बीच मौत के समय पहने ट्विशा की शॉर्ट्स की जेब से मिली एक चाबी ने मामले से संबंधित सभी लोगों को उलझा दिया है। यह फॉक्सवैगन कार की चाबी है जबकि ट्विशा को ड्राइविंग आती ही नहीं थी। कार किसकी है, उसके पास चाबी कैसे आई, अब इन सवालों से पुलिस रूबरू है। ट्विशा शर्मा केस की सीबीआई जांच मंजूर की जा चुकी है पर अभी केंद्रीय एजेंसी ने मामला अपने हाथ में नहीं लिया है। अभी भोपाल पुलिस ही मामले की जांच कर रही है। पुलिस एक एक कर वारदात के सभी सबूतों, घटनाक्रमों की कड़ी जोड़ रही है। भोपाल पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक ट्विशा का मोबाइल फोन पहले ही जब्त किया जा चुका है। उसके मोबाइल की कॉल डिटेल्स निकलवाई जा रही है। ट्विशा शर्मा के चैट की जांच भी चल रही है। कभी घर की कार तक नहीं चलाई पुलिस ने मौत के समय पहने ट्विशा के कपड़े भी जब्त किए थे। अधिकारियों ने बताया कि उसकी शॉर्ट्स की जेब से एक फॉक्सवैगन की चाबी भी मिली थी। इससे पुलिस के साथ ही ट्विशा के ससुरालवाले, मायका पक्ष और अन्य परिचित, रिश्तेदार, दोस्त भी उलझन में पड़ गए। दरअसल ट्विशा शर्मा को ड्राइविंग ही नहीं आती थी। ससुरालवालों के मुताबिक उसने कभी घर की कार तक नहीं चलाई। ऐसे में ट्विशा शर्मा के पास कार की चाबी मिलने पर कई सवाल खड़े हो गए हैं। फॉक्सवैगन कार किसकी ससुराल वाले तो इस मुद्दे की जांच पर खासा जोर दे रहे हैं। सास गिरीबाला सिंह ने मीडिया से बातचीत में साफ कहा है कि यह फॉक्सवैगन कार किसकी है, इसकी चाबी ट्विशा के पास कैसे आई, इन तथ्यों का पता लगाना बहुत जरूरी है। पुलिस भी इस मुद्दे की अहमियत जानती है। ट्विशा के पास कार की चाबी कैसे पहुंची, इसकी जांच की जा रही है।

नामांकन रद्द होने से बदला चुनावी गणित, पंजाब निकाय चुनाव में BJP की रणनीति पर नजर

चंडीगढ़  पंजाब के निकाय चुनाव में कई सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला है तो कई में आमने-सामने की सीधी टक्कर है। इसकी दो बड़ी वजह सामने आ रही हैं एक तो कई वार्डों में कुछ प्रत्याशियों के प्रचार में धार नहीं दिख रही और दूसरी, कई जगह मुख्य पार्टियों के प्रत्याशी ही मैदान से बाहर हैं। आठ नगर निगमों और 97 नगर परिषदों व नगर पंचायतों की बात करें तो आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी तो लगभग सभी सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं मगर भाजपा, शिरोमणि अकाली दल (शिअद) और कांग्रेस जैसे मुख्य सियासी दलों के प्रत्याशी मैदान से बाहर हैं।  शिअद के अध्यक्ष सुखबीर बादल, भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष सुनील जाखड़ और पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग आरोप लगाते हैं कि यह स्थिति इसलिए बनी है क्योंकि कई वार्डों में जानबूझकर उनके मजबूत प्रत्याशियों के नामांकन पत्र रद्द कर दिए गए हैं। ऐसा करने का कोई मजबूत आधार भी नहीं बताया जा रहा है। कई प्रत्याशी अपना दुखड़ा लेकर राज्य चुनाव आयोग तक भी पहुंचे थे जिनकी शिकायतें संबंधित जिलों के जिला निर्वाचन अधिकारियों को आगामी कार्रवाई के लिए भेज दी गई हैं। उधर, बहुत से वॉर्डों में सिर्फ दो ही प्रत्याशी हैं जबकि बठिंडा नगर निगम के वॉर्ड नंबर 30 और सुनाम नगर परिषद का वॉर्ड नंबर 15, ये दो वॉर्ड ऐसे हैं जहां 10-10 प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं। आठ नगर निगमों में प्रत्याशियों की स्थिति 105 नगर निकायों में से आठ नगर निगमों के चुनाव सभी दलों के लिए बड़ी प्रतिष्ठा का सवाल हैं क्योंकि इन निगमों के अंतर्गत बड़ा शहरी क्षेत्र आता है। सभी नगर निगमों में 50-50 वार्ड हैं मगर बहुत वार्डों में मुख्य सियासी दलों के प्रत्याशी ही चुनाव रण से बाहर हैं जबकि आप के प्रत्याशी करीबन हर सीट पर चुनाव लड़ रहे हैं। बरनाला नगर निगम में भाजपा के 26 प्रत्याशी, कांग्रेस के 36 और शिअद के 27 प्रत्याशी, बठिंडा नगर निगम में भाजपा के 42, कांग्रेस के 43 और शिअद के 46 प्रत्याशी, अबोहर नगर निगम में भाजपा के 49, कांग्रेस के 31 और शिअद के 33 प्रत्याशी, बटाला नगर निगम में भाजपा के 22, कांग्रेस के 48 और शिअद के 21 प्रत्याशी, बरनाला नगर निगम में भाजपा व शिअद के 27-27 प्रत्याशी और कांग्रेस के 39 प्रत्याशी, कपूरथला नगर निगम में भाजपा के 33, कांग्रेस के 50, शिअद के 23 प्रत्याशी, मोगा नगर निगम में भाजपा के 40, कांग्रेस के 48 व शिअद के 38 प्रत्याशी और पठानकोट नगर निगम में भाजपा-कांग्रेस के 50-50 जबकि शिअद के 30 प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं। भाजपा केंद्रीय योजनाओं के गणित के सहारे भाजपा ने हर नगर निकाय की अलग-अलग रणनीति खास ढंग से बनाई है। भाजपा जानती है कि पंजाब में उनकी सरकार नहीं है लिहाजा पार्टी ने केंद्रीय योजनाओं के गणित के आधार पर अपना होमवर्क किया है। भाजपा ने हर नगर निकाय के लिए हजारों परचे छपवाए हैं जिसमें यह बताया गया है कि संबंधित वार्ड में स्वच्छ भारत मिशन शहरी, अमरूत योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, प्रधानमंत्री मानधन श्रम योगी योजना, एक राष्ट्र एक राशन कार्ड योजना व प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत कितने लोगों को लाभ मिला है। यह भी बताया गया है कि इन योजनाओं में साल 2015-16 से साल 2025-26 तक कितने करोड़ संबंधित नगर निकाय के लिए केंद्र सरकार की ओर से पहुंचे। इसके अतिरिक्त मतदाताओं को यह भी बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी की सरकार ने अपने 11 साल के कार्यकाल में पंथक, पंजाब व पंजाबियों से जुड़े क्या-क्या बड़े काम किए हैं। इसमें साल 1984 के दंगा पीड़ितों को इंसाफ दिलवाने का भी जिक्र है।  

गंगा दशहरा सिर्फ पर्व नहीं, जल के प्रति कृतज्ञता का संदेश है : डॉ. मोहन यादव

गंगा दशहरा जल के प्रति कृतज्ञता का पर्व-डॉ. मोहन यादव भोपाल भारतीय संस्कृति और हिंदू धर्म में नदियों को मात्र जल स्रोत नहीं, बल्कि देवी के रूप में पूजा जाता है। इनमें गंगा का स्थान सर्वोपरि है। गंगा दशहरा या गंगावतरण ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाने वाला प्रमुख त्यौहार है। इस दिन को गंगा दशहरा, गंगा दशमी या दशहरा के नाम से जाना जाता है। यह पर्व गंगा नदी के पृथ्वी पर अवतरण की स्मृति में मनाया जाता है। दरअसल, गंगा दशहरा जल के प्रति कृतज्ञता का पर्व है. गंगा यानी पवित्र-साफ जल के इसी महत्व को समझते हुए यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने जल संरक्षण को एक राष्ट्रीय जन आंदोलन का रूप दिया है। उन्होंने जल को विकास का प्रमुख पैरामीटर बनाते हुए हर घर जल और जल है तो कल है के संकल्प को साकार किया। उनके नेतृत्व में जल शक्ति मंत्रालय का गठन, जल जीवन मिशन, नमामी गंगे, अमृत सरोवर मिशन और जल शक्ति अभियान जैसी ऐतिहासिक पहल हुईं, जिन्होंने देश की जल सुरक्षा को नई दिशा दी है। अमृत सरोवर योजना ने जल संरक्षण को नया आयाम दिया। प्रत्येक जिले में 75 जलाशयों के निर्माण या पुनरुद्धार का लक्ष्य रखा गया। अब तक 70 हजार से अधिक अमृत सरोवर तैयार हो चुके हैं। इनसे वर्षा जल संचयन, भूजल रिचार्ज और सिंचाई सुविधा बढ़ी है। यह मिशन आजादी का अमृत महोत्सव का हिस्सा है और सामुदायिक भागीदारी का उत्कृष्ट उदाहरण है। नमामी गंगे परियोजना, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, नदी फ्रंट विकास और जैव विविधता संरक्षण के कार्य भी हो रहे हैं। इसी प्रकार प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजनाके तहत प्रति बूंद अधिक फसल का मंत्र दिया गया, जिसमें ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई को बढ़ावा मिला। कैच द रेन अभियान ने वर्षा जल संचयन को जन आंदोलन बनाया। प्रधानमंत्री ने बार-बार कहा कि पानी बचाना स्वच्छ भारत मिशन की तरह सामूहिक दायित्व है। उनके मार्गदर्शन में लाखों जल संरचनाएं बनीं, चेकडैम, रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम और पारंपरिक जल स्रोतों का पुनरुद्धार हुआ। इन प्रयासों का परिणाम साफ दिखता है। भूजल रिचार्ज बढ़ा है, ओवर-एक्सप्लॉइटेड इकाइयों की संख्या घटी है और कई जिलों में जल संकट कम हुआ है। प्रधानमंत्री मोदी का विजन केवल बुनियादी ढांचा निर्माण तक सीमित नहीं, बल्कि जल संरक्षण को संस्कृति और आदत बनाने का है। वे बच्चों को वाटर वॉरियर्स बनाने और समाज को जिम्मेदार बनाने पर जोर देते हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जल संरक्षण भारत की विकास यात्रा का अभिन्न अंग बन गया है। ये प्रयास न केवल वर्तमान की जरूरतें पूरी कर रहे हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जल-समृद्ध भारत का आधार तैयार कर रहे हैं। जल संरक्षण अब मात्र नीति नहीं बल्कि राष्ट्र निर्माण का हिस्सा बन चुका है। मध्यप्रदेश भी, जिसे प्राकृतिक जल संसाधनों से समृद्ध माना जाता है, जल संरक्षण की दिशा में अनुकरणीय पहल कर रहा है। जल गंगा संवर्धन अभियान एक राज्य स्तरीय जन आंदोलन है। वर्ष 2025 में यह अभियान 19 मार्च से 30 जून तक चलाया गया। चालू वर्ष-2026 में भी यह अभियान पूरे जोर-शोर से चल रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य जल स्रोतों का संरक्षण, संवर्धन और पुनर्जीवन करना है, ताकि प्रदेश जल संकट से मुक्त हो सके।अभियान के तहत नदियों, तालाबों, कुओं, बावड़ियों, चेकडैम और अन्य जल संरचनाओं का जीर्णोद्धार, गहरीकरण, स्वच्छता और सौंदर्यीकरण किया जा रहा है। नए जल स्रोतों का निर्माण, वर्षा जल संचयन, भूजल रिचार्ज और पुरानी जल संरचनाओं का पुनरुद्धार अभियान के प्रमुख स्तंभ हैं। प्रदेश में 10 हजार से अधिक चेकडैम और स्टॉपडैम के संधारण, हजारों तालाबों के गहरीकरण, नई जल संरचनाओं का निर्माण और लगभग 2,500 करोड़ रुपये की लागत से बड़े पैमाने पर कार्य किए जा रहे हैं। ग्राम पंचायतों, नगरीय निकायों, जनप्रतिनिधियों, महिलाओं और युवाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है। मध्यप्रदेश कृषि प्रधान राज्य है। यहां की अर्थव्यवस्था और किसानों की समृद्धि जल पर निर्भर है। बढ़ती जनसंख्या, अनियमित वर्षा, भूजल स्तर में गिरावट और जल प्रदूषण ने जल संकट को गहरा दिया है। इस अभियान का महत्व इन्हीं चुनौतियों के समाधान में निहित है। अभियान से वर्षा जल का अधिकतम संचयन होता है, जिससे सिंचाई सुविधा बढ़ती है। भूजल स्तर में वृद्धि से सूखाग्रस्त क्षेत्रों में भी फसल उत्पादन संभव होता है। खेत तालाबों, रिज-टू-वैली मॉडल और जल संरक्षण संरचनाओं से किसानों की आय बढ़ रही है। मध्यप्रदेश में प्राचीन बावड़ियां, तालाब और जल संरचनाएं सांस्कृतिक धरोहर हैं। उनका जीर्णोद्धार सांस्कृतिक गौरव बढ़ाता है और पर्यटन को बढ़ावा देता है।अभियान जनभागीदारी पर आधारित है। पानी चौपाल जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को कम पानी वाली फसलें, ड्रिप सिंचाई और आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी जा रही है। इससे जल संरक्षण की संस्कृति विकसित हो रही है। महिलाओं और युवाओं की भागीदारी से सामुदायिक जिम्मेदारी बढ़ रही है। इस अभियान से मध्यप्रदेश जल संरक्षण में देश का अग्रणी राज्य बन रहा है। अमृत सरोवरों के जल क्षेत्र में भारी वृद्धि, नदियों का पुनःप्रवाह और लाखों जल संरचनाओं का निर्माण राष्ट्रीय स्तर पर उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है। यह अभियान केवल सरकारी प्रयास नहीं, बल्कि सामूहिक संकल्प है।यशस्वी प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में यह जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने में सफल हो रहा है।यह मध्यप्रदेश के भविष्य की नींव है। यह हमें सिखाता है कि जल ही जीवन है और उसकी रक्षा हमारा दायित्व है। यदि हम आज जल स्रोतों का संरक्षण करेंगे, तो आने वाली पीढ़ियां समृद्ध जल संसाधनों का उपयोग कर सकेंगी। प्रदेशवासियों को इस अभियान से जुड़कर जल संरक्षण का संकल्प लेना चाहिए। स्वच्छ, समृद्ध और जल-सम्पन्न मध्यप्रदेश का सपना तभी साकार होगा जब हर नागरिक इसमें अपना योगदान देगा।  

गर्मी का कहर शुरू, नौतपा के पहले दिन ही हीटवेव अलर्ट; लेकिन राहत की भी खबर

नई दिल्ली आज यानी 25 मई से नौतपाक की शुरुआत हो गई है। यह 2 जून तक जारी रहेगा। यानी इन 9 दिनों में भयंकर गर्मी पड़ने वाली है। हिंदू पंचांग के मुताबिक ये ऐसे 9 दिन होते हैं जिनमें सूर्य पृथ्वी के सबसे करीब होते हैं और ऐसे में तेज धूप के साथ ही गर्म हवाएं गर्मी को चरम पर पहुंचा देती हैं। अगर ज्योतिषीय गणना की बात करें तो रोहिणी नक्षत्र लगते ही नौतपा की शुरुआत हो जाती है। मौसम विभाग का कहना है कि उत्तर और पश्चिम भारत के कई इलाकों में अधिकतम तापमान 48 डिग्री सेल्सियस तक जा सकता है। वहीं 28 से 30 मई के बीच तेज आंधी की भी चेतावनी जारी की गई है। कैसा रहेगा दिल्ली का मौसम राजधानी दिल्ली में भीषण गर्मी पड़ रही है। रविवार को यहां अधिकतम तापमान 46 डिग्री तक पहुंच गया। मौसम विभाग का कहना है कि 28 मई तक अभी गर्मी से राहत नहीं मिलने वाली है। इसके बाद बारिश से तापमान में 6 से 7 डिग्री सेल्सियस की कमी आ सकती है। वहीं 25 मई को बादल छाने की संभावना है। हालांकि गर्मी से राहत की संभावना कम ही है। यहां भयंकर लू का अलर्ट मौसम विभाग के अनुसार बिहार, झारखंड और ओडिशा में मौसम करवट ले सकता है। यहां मध्यम बारिश की संभावना है। ओडिशा और झारखंड में गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है। वहीं दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में भयंकर गर्मी का प्रकोप बना रहेगा। दिल्ली, पंजाब और हरियाणा के साथ ही पूर्वी उत्तर प्रदेश में तापमान 47 से 48 डिग्री तक जा सकता है। राजस्थान के कई इलाकों में तापमान 48 डिग्री तक जाने की संभावना है। कहां है बारिश का अनुमान आईएमडी के मुताबिक पूर्वोत्तर के राज्यों असम, मेघायलय, नागालैंड, मिजोरम, त्रिपुरा और अरुणाचल प्रदेश में बारिश हो सकती है। अरुणाचल प्रदेश में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। इसके अलावा हवाओं की स्पीड भी 40 से 50 किमी प्रति घंटे तक जा सकती है। बंगाल और सिक्किम में भी भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। दक्षिण के राज्यों में बारिश दक्षिण के राज्यों में बारिश का दौर शुरू हो सकता है। मौसम विभाग के मुताबिक तमिलनाडु, केरल, पुडुचेरी और कर्नाटक के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है। इसके अलावा हवाओं की गति 40 से 50 किलोमीटर प्रतिघंटा रह सकती है। आंध्र प्रदेश के रायलसीमा और तेलंगाना में भी बादल छाए रहेंगे और कई जगहों पर बारिश हो सकती है। महाराष्ट्र में 47.2 डिग्री तक पहुंचा पारा कई राज्यों में रविवार को भीषण गर्मी पड़ी जिनमें से महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र का ब्रह्मपुरी 47.2 डिग्री सेल्सियस के साथ देश का सबसे गर्म स्थान रहा। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने यह जानकारी दी। हालांकि, मौसम विभाग ने 29 मई से गर्मी से धीरे-धीरे राहत मिलने का अनुमान लगाया है। आईएमडी ने अपने पूर्वानुमान में कहा, ''अगले सात दिनों तक मध्य और उत्तर-पश्चिम भारत में तथा अगले 3-5 दिनों तक पूर्वी और उससे सटे प्रायद्वीपीय भारत में लू से लेकर भीषण लू की स्थिति बनी रहने की संभावना है।'' पश्चिमी विक्षोभ दिलाएगा राहत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, 28-29 मई को एक नए पश्चिमी विक्षोभ से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है, जिसके चलते राज्य के कुछ हिस्सों में तेज आंधी, 50-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने के साथ हल्की बारिश हो सकती है। उत्तर प्रदेश में, राजधानी लखनऊ में अधिकतम तापमान 42.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 2.4 डिग्री अधिक है, और न्यूनतम तापमान 28.7 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 3.2 डिग्री अधिक है। बांदा राज्य का सबसे गर्म स्थान रहा, जहां तापमान 46.8 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 3.3 डिग्री अधिक है।

फिर बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम, मध्यप्रदेश में तेल कीमतों ने तोड़े रिकॉर्ड

भोपाल   ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के हालातों के चलते देश में एक बार फिर पेट्रोल – डीजल के दामों में बड़ी बढ़ोतरी की गई है। मध्य प्रदेश की बात करें तो यहां पेट्रोल – डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। तेल कंपनियों ने 25 मई को फिर ईंधन के दाम बढ़ा दिए। प्राप्त जानकारी के अनुसार, पेट्रोल पर 2.61 रुपए और डीजल में 2.71 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है, जिसे आम लोगों के जेब पर बड़ा झटका माना जा रहा है। पेट्रोलियम कंपनी की ओर से जारी पेट्रोल और डीजल की नई कीमतों पर गौर करें तो एमपी के कई शहरों में पेट्रोल के दाम 115 रुपए के करीब पहुंच गए हैं, जबकि डीजल 100 रुपए के पार निकल गया है। भोपाल में सोमवार सुबह 6 बजे से पेट्रोल की प्रति लीटर दर से कीमत 114.65 रुपए और डीजल 99.74 रुपए प्रति लीटर बिक रहा है। उज्जैन में सबसे महंगा पेट्रोल प्रदेश के बड़े शहरों में उज्जैन सबसे महंगा हो गया है, जहां पेट्रोल 115.03 रुपए और डीजल 100.11 रुपए प्रति लीटर पहुंच गया। इंदौर में पेट्रोल 114.54 रुपए और डीजल 99.57 रुपए हो गया है। जबलपुर और ग्वालियर में भी तेल की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 11 दिन में चौथी बार बढ़े दाम मई महीने में यह चौथी बार है जब तेल कंपनियों ने कीमतें बढ़ाई हैं। 15 मई से शुरू हुई बढ़ोतरी के बाद अब तक पेट्रोल-डीजल करीब 8 रुपए प्रति लीटर तक महंगे हो चुके हैं। इस महीने कब-कब बढ़े रेट -15 मई को पहली बार 3.14 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर 3.11 रूपए प्ति लीटर की बढ़ोतरी हुई है। -19 मई को पेट्रोल और डीजल के दामों में लगभग 90 पैसे की बढ़ोतरी हुई। -23 मई को 87 रूपए पेट्रोल पर तो वहीं, 91 पैसे डीजल पर बढ़ाए गए। -25 मई यानी आज एक बार फिर पेट्रोल पर 2.61 रूपए और डीजल पर 2.71 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। बढ़ेगा मालभाड़ा, महंगी होंगी रोजमर्रा की चीजें डीजल महंगा होने का सीधा असर परिवहन पर पड़ेगा। ट्रक और मालवाहक वाहनों का किराया बढ़ने से सब्जियां, फल, राशन और दूसरे जरूरी सामान महंगे हो सकते हैं। स्कूल बस, ऑटो और सार्वजनिक परिवहन का किराया भी बढ़ने के संकेत हैं। खेती-किसानी पर भी असर पड़ेगा। ट्रैक्टर और पंपिंग सेट चलाने का खर्च बढ़ने से किसानों की लागत बढ़ेगी, जिसका असर अनाज और खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर पड़ सकता है। कच्चे तेल की कीमतें बनी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी को इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह बताया जा रहा है। ईरान-अमेरिका तनाव के बाद क्रूड ऑयल 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। तेल कंपनियों का कहना है कि बढ़ती लागत के कारण दाम बढ़ाना जरूरी हो गया था। कमलनाथ का सरकार पर निशाना पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सोशल मीडिया पर सरकार को घेरते हुए कहा कि सरकार महंगाई रोकने के बजाय पूरा बोझ जनता पर डाल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब कच्चे तेल के दाम कम थे तब जनता को राहत नहीं दी गई और अब लगातार कीमतें बढ़ाई जा रही हैं।

मां, मेरी दौड़ देखी? गुरिंदर वीर ने 100 मीटर में बनाया नया इतिहास

जालंधर  जालंधर के गांव पतिआल के युवा धावक गुरिंदर वीर सिंह ने भारतीय खेल जगत में नया इतिहास रच दिया है। रांची में 23 मई को आयोजित 29वें राष्ट्रीय वरिष्ठ प्रतियोगिता कप में गुरिंदर ने 100 मीटर दौड़ महज 10.09 सेकंड में पूरी कर नया राष्ट्रीय कीर्तिमान अपने नाम कर लिया। इस उपलब्धि के साथ उन्होंने राष्ट्रमंडल खेलों के लिए भी अपनी दावेदारी मजबूत कर ली है।  गुरिंदर की जीत के बाद पूरे जालंधर में खुशी का माहौल है। अंतिम दौड़ खत्म होते ही घर पर बधाई देने वालों का तांता लग गया। करीब 90 वर्षीय दादी चरण कौर ने पोते को लड्डू खिलाकर आशीर्वाद दिया जबकि पिता कमलजीत सिंह की आंखें खुशी से नम हो गईं। दौड़ खत्म होने के तुरंत बाद गुरिंदर ने सबसे पहला फोन अपनी मां गुरविंदर कौर को किया और पूछा मम्मी देखी मेरी दौड़? मां ने जवाब दिया हां बेटा, तूने कमाल कर दिया। बाद में पिता से बात करते हुए गुरिंदर ने मुस्कुराकर कहा डेडी दस्स फेर किदां? बेटे की यह बात सुन परिवार की खुशी और बढ़ गई। पूर्व वॉलीबॉल खिलाड़ी हैं पिता गुरिंदर के पिता कमलजीत सिंह पंजाब पुलिस से सहायक उप निरीक्षक के पद से सेवानिवृत्त हैं और वॉलीबॉल खिलाड़ी भी रह चुके हैं। उन्होंने बताया कि गुरिंदर बचपन से ही गांव की गलियों, खेतों और पगडंडियों में दौड़ता रहता था। 12 साल की उम्र में उसने गंभीरता से अभ्यास शुरू किया और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। रोज आठ घंटे अभ्यास करते हैं गुरिंदर पिता के अनुसार गुरिंदर रोज करीब आठ घंटे अभ्यास करता था। कई बार परिवार से बात करने तक का समय नहीं होता था। अंतिम दौड़ से पहले उसने अपने सीने पर लगे क्रमांक के पीछे 10.10 सेकंड का लक्ष्य लिख रखा था। कीर्तिमान बनाने के बाद उसने उसी क्रमांक की ओर इशारा कर जश्न मनाया। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने भी गुरिंदर को बधाई दी। उन्होंने कहा कि पंजाब के इस गबरू ने देश और दुनिया में राज्य का नाम रोशन किया है। गुरिंदर के प्रशिक्षक सर्बजीत सिंह ने कहा कि 10.09 सेकंड का समय भारत के लिए बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने बताया कि गुरिंदर ने राष्ट्रमंडल खेलों का अर्हता समय भी पार कर लिया है। अब उनका लक्ष्य ओलंपिक, एशियाई खेल और राष्ट्रमंडल खेलों में पदक जीतना है। महान धावक मिल्खा सिंह और उसैन बोल्ड को अपना आदर्श मानने वाले गुरिंदर वीर आज पंजाब और देश के युवाओं के लिए नई प्रेरणा बन गए हैं।