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शैली सिंह का बड़ा बयान, लंबी कूद के नाप पर विवाद का फैसला स्वीकारेंगी; अब अगली प्रतियोगिताओं पर नजर

 नई दिल्ली लंबी कूद की एथलीट शैली सिंह एशियाई खेलों में विवादास्पद चौथे स्थान पर रहने की निराशा से उबरकर आगामी प्रतियोगिताओं पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं और वह भविष्य में भी ट्रिपल जंप में अपना भाग्य आजमाना चाहती हैं। जापान में एशियाई खेलों में इस 22 वर्षीय खिलाड़ी ने महिलाओं की लंबी कूद में 6.42 मीटर के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के साथ चौथा स्थान हासिल किया। हालांकि, भारत ने उनके चौथे प्रयास के नाप के तरीके पर आपत्ति जताई थी। इसे आधिकारिक तौर पर 6.41 मीटर दर्ज किया गया था लेकिन भारत ने आरोप लगाया था कि अधिकारियों ने कूद की लंबाई कम नापी थी। खेल पंचाट में पहुंचा मामला भारत ने प्रतियोगिता के दौरान विरोध दर्ज किया था जिसको खारिज कर दिया गया। इसके बाद भारतीय एथलेटिक्स महासंघ ने खेल पंचाट के सामने यह मामला उठाया। शैली में कहा कि जो कुछ हुआ वो मेरे लिए बिल्कुल नया था। उस समय मुझे कुछ भी समझ में नहीं आया। मुझे इससे उबरने में कई दिन लग गए। मैं इतने साल से मेहनत कर रही हूं लेकिन अगर मैं इसके बारे में ही सोचती रहूंगी तो उससे किसी तरह का फायदा नहीं होगा। मुझे इस घटना को भूलना होगा। फैसला स्वीकार होगा उन्होंने कहा कि हमने वहां भी आपत्ति दर्ज कराई थी और मामला अभी चल रहा है। फैसला जो भी हो मैं उसे स्वीकार करूंगी। शैली ने कहा कि वह उस घटना में उलझे रहने के बजाय आगामी चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं। उन्होंने कहा कि मुझे आगामी प्रतियोगिता के लिए भी तैयार होना है। इसलिए मुझे पुरानी बातों को पीछे छोड़ना होगा और नई चीजों को स्वीकार करना होगा।  

एशियन गेम्स के बाद सान्या यादव की दमदार वापसी, डिस्कस थ्रो में पदक जीतकर बढ़ाया मान

नारनौल  जापान में एशियाई खेलों के दौरान पदक जीतने की उम्मीदों पर खरी नहीं उतर सकीं बैरावास की बेटी सान्या यादव ने अब राष्ट्रीय मंच पर दमदार वापसी की है। नई दिल्ली में चल रही 65वीं नेशनल ओपन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में सान्या ने महिला डिस्कस थ्रो स्पर्धा में 52.45 मीटर चक्का फेंककर कांस्य पदक अपने नाम किया। अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाने के बाद सान्या की यह उपलब्धि उनके लिए अहम है। साथ ही, उन्होंने दिखाया है कि एक प्रतियोगिता का नतीजा उनके हौसले और मेहनत को कमजोर नहीं कर सकता। इनके हिस्से आए पदक जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में आठ से 11 अक्टूबर तक आयोजित चैंपियनशिप में महिला डिस्कस थ्रो का मुकाबला कड़ा रहा। हरियाणा की सीमा कालीरमण ने 57.63 मीटर का थ्रो फेंककर स्वर्ण पदक जीता। राजस्थान की निकिता कुमारी ने 52.48 मीटर के साथ रजत पदक हासिल किया, जबकि सान्या 52.45 मीटर के प्रदर्शन के साथ तीसरे स्थान पर रहीं। सान्या और रजत पदक विजेता के प्रदर्शन में केवल तीन सेंटीमीटर का अंतर रहा। वायुसेना में हैं पिता गांव बैरावास निवासी सान्या के पिता महेंद्र सिंह यादव वायुसेना में कार्यरत हैं। बेटी के खेल करियर को आगे बढ़ाने के लिए मां कृष्णा यादव ने देहरादून में उसके साथ रहकर प्रशिक्षण और रोजमर्रा की जरूरतों की जिम्मेदारी संभाली। कोच जगजीत सिंह के मार्गदर्शन में अभ्यास करते हुए सान्या ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई और एशियन गेम्स तक पहुंचीं। अब राष्ट्रीय चैंपियनशिप में पदक जीतकर उन्होंने फिर अपनी क्षमता साबित की है।  

मैरी कॉम के खिलाफ दिल्ली की अदालत पहुंचा पूर्व पति, आपराधिक मानहानि की शिकायत दर्ज

  नई दिल्ली ओलंपिक पदक विजेता मुक्केबाज मैरी कॉम के पूर्व पति करोंग ओंखोलर ने इस साल की शुरुआत में एक टेलीविजन साक्षात्कार में उनके खिलाफ कथित तौर पर झूठी और मानहानिकारक टिप्पणियां करने के आरोप में दिल्ली की एक अदालत में आपराधिक मानहानि की शिकायत दर्ज कराई है. छह अक्टूबर को दायर यह शिकायत समन जारी करने से पहले साक्ष्य दर्ज करने के लिए न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी शिवम गुप्ता की अदालत में लंबित है. अदालत में इस मामले पर 19 नवंबर को सुनवाई होनी है. समन जारी करने से पहले साक्ष्य (पीएसई) का मतलब निजी आपराधिक शिकायत के मामले में आरोपी को समन जारी करने का फैसला लेने से पहले मजिस्ट्रेट द्वारा दर्ज किए जाने वाले प्रारंभिक मौखिक और दस्तावेजी साक्ष्य से है. ओंखोलर ने आरोप लगाया है कि दिसंबर 2023 में उनकी शादी टूटने के बाद मैरी कॉम ने इस साल 11 जनवरी को प्रसारित एक टेलीविजन साक्षात्कार में ये टिप्पणियां की थीं. शिकायत के अनुसार, मैरी कॉम ने कथित तौर पर उन पर धोखा देने और उन्हें छोड़ने का आरोप लगाया था. उन्होंने यह भी दावा किया था कि ओंखोलर का कोई सफल करियर नहीं है और वह उनकी कमाई पर निर्भर थे. शिकायतकर्ता ने दलील दी है कि इन बयानों से यह गलत धारणा बनी कि उनकी अपनी कोई स्वतंत्र पेशेवर पहचान नहीं थी और उन्हें मुक्केबाज मैरी कॉम से शादी करने के कारण आर्थिक लाभ हुआ था. शिकायत में उन आरोपों पर भी आपत्ति जताई गई है कि ओंखोलर ने मैरी कॉम के बैंक खातों से बिना अनुमति पैसे निकाले, उनके नाम पर कर्ज लिया और बच्चों के पालन-पोषण में योगदान नहीं दिया. इसमें उन कथित टिप्पणियों का भी जिक्र है, जिनमें उन्हें ऐसे व्यक्ति के रूप में पेश किया गया था, जो कोई काम नहीं करता था और आर्थिक रूप से मैरी कॉम पर निर्भर था. शिकायत के अनुसार, दोनों की शादी 12 मार्च 2005 को हुई थी और वे फरीदाबाद में साथ रहते थे. 20 दिसंबर 2023 को पारंपरिक रीति-रिवाजों के तहत उनका वैवाहिक संबंध समाप्त हो गया. यह शिकायत अधिवक्ता आकाश कृष्ण और प्रगति शर्मा के माध्यम से दायर की गई है. ओंखोलर ने अदालत से कथित अपराध का संज्ञान लेने, समन जारी करने से पहले उनके साक्ष्य दर्ज करने और पर्याप्त आधार मिलने पर मैरी कॉम को अदालत में पेश होने के लिए समन जारी करने का अनुरोध किया है.

249 रन बनाकर भी हारा भारत, वेस्टइंडीज से पहले ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका भी दे चुके हैं झटके

नई दिल्ली टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट में बड़ा स्कोर बनाना जीत की गारंटी नहीं है। भारतीय टीम को रांची में इसका ताजा उदाहरण देखने को मिला, जब 249 रन बनाने के बावजूद वेस्टइंडीज ने 250 रन का लक्ष्य हासिल कर लिया। इससे पहले भी टीम इंडिया बड़े स्कोर बनाने के बाद हार का सामना कर चुकी है। आइए, ऐसे पांच मुकाबलों पर नजर डालते हैं। 249 रन vs वेस्टइंडीज रांची में भारत ने पहले बैटिंग करते हुए 5 विकेट पर 249 रन बनाए। वेस्टइंडीज ने 19वें ओवर में ही टारगेट हासिल कर लिया। टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट में यह भारत के खिलाफ चेज किया गया सबसे बड़ा टारगेट है। 222 रन vs ऑस्ट्रेलिया 2023 में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच गुवाहाटी में टी20 मैच हुआ था। भारत ने रुतुराज गायकवाड़ के शतक की मदद से 222 रन बनाए। ग्लेन मैक्सवेल ने आखिरी ओवर में 23 रन बनाकर टीम को जीत दिला दी थी। उन्होंने 104 रनों की पारी खेली थी। 211 रन vs साउथ अफ्रीका ऋषभ पंत की कप्तानी में भारतीय टीम ने अरुण जेटली स्टेडियम में 2022 में 4 विकेट पर 211 रन बनाए थे। डेविड मिलर ने सिर्फ 31 गेंदों पर नाबाद 64 रन ठोके और साउथ अफ्रीका को 5 गेंद रहते जीत दिला दी थी। 208 रन vs ऑस्ट्रेलिया मोहाली में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच 2022 में टी20 मैच हुआ थआ। हार्दिक पंड्या ने 30 गेंदों पर 71 रनों की पारी खेलकर भारत को 208 रनों तक पहुंचा दिया। कैमरून ग्रीन और मैथ्यू वेड की विस्फोटक बैटिंग से ऑस्ट्रेलिया ने टारगेट चेज कर लिया। 199 रन vs साउथ अफ्रीका रोहित शर्मा ने अपने टी20 इंटरनेशनल करियर का पहला शतक 2015 में साउथ अफ्रीका के खिलाफ धर्मशाला में ठोका था। भारत ने इसकी मदद से 199 रन बनाए। एबी डिविलियर्स और जेपी डुमिनी ने साउथ अफ्रीका को जीत दिला दी।

भारत को रांची टी20 में बड़ा झटका, 250 रन का लक्ष्य भी नहीं बचा पाए गेंदबाज; वेस्टइंडीज ने मारी बाजी

रांची भारत और वेस्टइंडीज के बीच टी20 सीरीज का दूसरा मुकाबला शुक्रवार (9 अक्टूबर) को रांची के JSCA इंटरनेशनल स्टेडियम कॉम्प्लेक्स में खेला गया. इस मुकाबले में वेस्टइंडीज ने 6 विकेट से जीत हासिल की. वेस्टइंडीज को जीत के लिए 250 रनों का टारगेट मिला था, जिसे उसने 18.3 ओवरों में हासिल कर लिया. वेस्टइंडीज के लिए कप्तान शाई होप ने 45 बॉल पर नाबाद 102 रन बनाए, जिसमें 9 छक्के और 6 चौके शामिल रहे. शेरफेन रदरफोर्ड ने भी बल्ले से तूफानी प्रदर्शन किया. टी20 इंटरनेशनल में ये वेस्टइंडीज का सबसे सफल रनचेज रहा. इस जीत के साथ ही वेस्टइंडीज ने पांच मैचों की टी20 सीरीज में 1-1 की बराबरी कर ली है. सीरीज का पहला मुकाबला लखनऊ में आयोजित हुआ था, जिसमें भारतीय टीम ने 8 विकेट से जीत हासिल की थी. रनचेज में वेस्टइंडीज की शुरुआत अच्छी नहीं रही. पहले ही ओवर में तेज गेंदबाज मयंक यादव ने कामिल पूरन (4 रन) और शिमरॉन हेटमायर (0 रन) को पवेलियन का रास्ता दिखा दिया. फिर मयंक ने तूफानी बल्लेबाजी कर रहे रोवमैन पॉवेल को भी आउट किया. पॉवेल के आउट होने के समय वेस्टइंडीज का स्कोर 58/3 था. यहां से शेरफेन रदरफोर्ड और कप्तान शाई होप ने चौथे विकेट के लिए 54 गेंदों पर 120 रनों की साझेदारी कर मैच का नक्शा पलट दिया. शेरफेन रदरफोर्ड ने 7 छक्के और 7 चौके की मदद से 37 बॉल पर 84 रनों का योगदान दिया. कुलदीप यादव ने रदरफोर्ड को आउट कर इस साझेदारी को तोड़ा. यहां से शाई होप और रोमारियो शेफर्ड (34*) ने नाबाद 74 रनों की साझेदारी कर भारतीय टीम को कोई मौका नहीं दिया. ऐसी रही भारत की बल्लेबाजी मुकाबले में भारतीय टीम ने टॉस हारकर पहले बैटिंग करते हुए 5 विकेट पर 249 रन बनाए. भारतीय टीम को अभिषेक शर्मा और संजू सैमसन ने अच्छी शुरुआत दिलाई. दोनों के बीच पहले विकेट के लिए 42 रनों की साझेदारी हुई. अभिषेक (20 रन) को रोस्टन चेज ने अपनी फिरकी में फंसाया. यहां से ईशान किशन और संजू सैमसन ने दूसरे विकेट के लिए 97 रन जोड़े. इस पार्टनरशिप के दौरान संजू ने 21 बॉल पर ही फिफ्टी पूरी कर ली. ईशान 43 रनों के निजी स्कोर पर रोस्टन चेज का शिकार बने. ईशान ने 22 गेंदों की पारी में 6 चौके और दो छक्के लगाए. शिवम दुबे (7 रन) कुछ खास नहीं कर पाए और उनका विकेट रोस्टन चेज ने लिया. फिर संजू सैमसन के रूप में वेस्टइंडीज को चौथी सफलता मिली. संजू ने 41 गेंदों पर 82 रन बनाए, जिसमें 9 चौके और 4 छक्के शामिल रहे. संजू का विकेट शमर स्प्रिंगर ने लिया. यहां से श्रेयस अय्यर (18 बॉल पर 40 रन) और तिलक वर्मा (18 बॉल पर नाबाद 44 रन) ने पांचवें विकेट के लिए 83 रनों की साझेदारी कर भारत को बड़े स्कोर तक पहुंचाने में मदद की. वेस्टइंडीज के लिए रोस्टन चेज ने तीन और शमर स्प्रिंगर ने दो सफलताएं हासिल कीं. इस मुकाबले के लिए भारतीय टीम ने अपनी प्लेइंग-11 में कोई बदलाव नहीं किया. भारतीय टीम उसी एकादश के साथ उतरी, जिसने उसे लखनऊ में खेले गए मुकाबले में जीत दिलाई थी. दूसरी ओर वेस्टइंडीज न मैथ्यू फोर्ड की जगह स्पिनर गुडाकेश मोती को प्लेइंग-11 में जगह दी. मुकाबले में भारत की प्लइंग-11: श्रेयस अय्यर (कप्तान), संजू सैमसन (विकेटकीपर), ईशान किशन, अभिषेक शर्मा, तिलक वर्मा, शिवम दुबे, अक्षर पटेल, नमन धीर, कुलदीप यादव, अर्शदीप सिंह, मयंक यादव. मुकाबले में वेस्टइंडीज की प्लेइंग-11: शाई होप (कप्तान/विकेटकीपर), कामिल पूरन, शिमरोन हेटमायर, रोवमैन पॉवेल, शेरफेन रदरफोर्ड, रोमारियो शेफर्ड, रोस्टन चेज, गुडाकेश मोती, अकील हुसैन, शमर जोसेफ और शमर स्प्रिंगर. भारत का स्क्वॉड: वैभव सूर्यवंशी, अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन (विकेटकीपर), श्रेयस अय्यर (कप्तान), ईशान किशन, तिलक वर्मा, शिवम दुबे, अक्षर पटेल, अर्शदीप सिंह, प्रिंस यादव, मयंक यादव, कुलदीप यादव, रवि बिश्नोई, नीतीश कुमार रेड्डी और नमन धीर. वेस्टइंडीज का स्क्वॉड: शाई होप (कप्तान/विकेटकीपर), कामिल पूरन, आमिर जंगू, शिमरॉन हेटमायर, शेरफेन रदरफोर्ड, रोवमैन पॉवेल, रोस्टन चेज, रोमारियो शेफर्ड, गुडाकेश मोती, अकील हुसैन, शमर जोसेफ, मैथ्यू फोर्ड, कीमो पॉल, क्वेंटिन सैम्पसन और शमर स्प्रिंगर. भारत vs वेस्टइंडीज हेड टू हेड • कुल टी20I मैच: 33 • भारत जीता: 21 • वेस्टइंडीज जीता: 11 • बेनतीजा: 1   वनडे सीरीज (3 मैच) 27 सितंबर : पहला वनडे (तिरुवनंतपुरम)- भारत जीता 8 विकेट से 30 सितंबर : दूसरा वनडे (गुवाहाटी)- भारत जीता 8 विकेट से 3 अक्टूबर : तीसरा वनडे (न्यू चंडीगढ़)- वेस्टइंडीज जीता 5 विकेट से टी20 सीरीज (5 मैच) 6 अक्टूबर : पहला टी20 (लखनऊ)- भारत जीता 8 विकेट से 9 अक्टूबर: दूसरा टी20 (रांची)- वेस्टइंडीज की 8 विकेट से जीत 11 अक्टूबर: तीसरा टी20 (इंदौर)- शाम 7:00 बजे 14 अक्टूबर: चौथा टी20 (हैदराबाद)- शाम 7:00 बजे 17 अक्टूबर: पांचवा टी20 (बेंगलुरु)- शाम 7:00 बजे

ऑस्ट्रेलिया का बॉल टेंपरिंग कांड कैसे पकड़ा गया? कैमरे के जूम ने खोली बेनक्रॉफ्ट की पोल

नई दिल्ली  दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया के बीच टेस्ट सीरीज की शुरुआत के साथ ही बॉल टेंपरिंग की घटना एक बार फिर चर्चा में है। ऑस्ट्रेलियाई टीम इससे पहले जब दक्षिण अफ्रीका पहुंची थी, तब कंगारू खिलाड़ियों ने मैच जीतने के लिए बॉल टेंपरिंग की थी। इससे ऑस्ट्रेलियाई टीम की बहुत बदनामी हुई थी। हालांकि, हैरान करने ववाली बात यह है कि ब्रॉडकास्टर ने बॉल टेंपरिंग का खुलासा गलती से किया था। फुटबॉल और रग्बी मैच कवर करने की आदत के कारण उन्होंने क्रिकेट में भी गेंद पर कैमरा बनाए रखा और बाद में जूम भी किया। इसी वजह से बेनक्राफ्ट के हाथ में सैंडपेपर दिखा। इसके बाद ऑस्ट्रेलियाई टीम की काली करतूत सामने आई। केप टाउन टेस्ट के ब्रॉडकास्टर एल्विन नाइकर ने बताया था कि ऑस्ट्रेलियाई टीम की बॉल टेंपरिंग पकड़े जाना एक संयोग ही था। बीबीसी के अनुसार उन्होंने कहा, 'ऑस्ट्रेलियाई टीम जिस तरह से पकड़ी गई, वह सरासर संयोग था। रग्बी और फुटबॉल का प्रसारण बहुत सुनियोजित होता है। पहले कैमरा एक और दो चालू होते हैं, फिर जब खेल रुक जाता है तो क्लोज-अप शॉट्स के जरिए पूरी कहानी दिखाई जाती है।' ऐसा ही क्रिकेट मैच में किया गया तो बॉल टेंपरिंग पकड़ी गई। हथेली पर गेंद घिसकर पकड़े गए बेनक्राफ्ट नैकर ने बताया कि 2018 की सीरीज खराब माहौल में शुरू हुई थी। पहले दो टेस्ट मैचों में गड़बड़ियों के बावजूद स्थानीय प्रसारक ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों की बॉल टेंपरिंग पर नजर नहीं रख रहे थे। उन्होंने कहा, 'किसी ने भी मुझे कुछ नहीं बताया। डरबन में पहले टेस्ट में जमकर बवाल हुआ था। इसके बाद पोर्ट एलिजाबेथ में दूसरे टेस्ट मैच में भी हंगामा हुआ। हमें तब भी कुछ समझ नहीं आया। गेंद विकेटकीपर के पास गई, फिर बैनक्रॉफ्ट के पास और वह गेंद को चमका रहे थे। पहले गेंद उसकी पैंट पर थी, फिर अगली गेंद पर, कैमरामैन का ध्यान बैनक्रॉफ्ट पर इसलिए रुका रहा, क्योंकि वह गेंद को अपनी पैंट पर नहीं, बल्कि अपनी हथेली पर रगड़ रहे थे।' बड़े लेंस में सामने आई सच्चाई नैकर ने कहा, 'जब उसने गेंद फेंकी, तो उसने अपना हाथ जेब में डाला। कैमरामैन ने बड़े-बड़े लेंस वाले कैमरे से जेब पर जूम किया। स्लो-मो ऑपरेटर ने उसे देखा, आगे-पीछे किया फिर जूम किया और सैंडपेपर नजर आया। इसके बाद बेनक्राफ्ट ने सैंडपेपर पैंट में छिपा लिया। इस घटना को ब्रॉडकास्टर ने बार-बार स्क्रीन पर दिखाया। जब बैनक्रॉफ्ट ने स्क्रीन पर देखा तो उसने उसे निकालकर अपनी अंडरवियर में रख लिया। कैमरामैन ने इसे रिकॉर्ड कर लिया। फिर भी यह लाइव नहीं था, हमने रिप्ले चलाया।' तीनों खिलाड़ियों पर लगा बैन इस घटना के बाद स्मिथ एक लाइव टेलीविजन इंटरव्यू के दौरान फूट-फूटकर रो पड़े और उन्होंने अपनी गलती स्वीकार की। हालांकि, इसके बाद उन पर अंतरराष्ट्रीय और घरेलू क्रिकेट से 12 महीने का बैन लगाया गया। इसके साथ ही उनसे कप्तानी भी छीन ली गई। वार्नर पर भी इसी तरह 12 महीने का बैन लगाया गया और उन्हें ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट में कभी भी कप्तान बनने से रोक दिया गया। वहीं, बैनक्रॉफ्ट पर अंतरराष्ट्रीय और घरेलू क्रिकेट से 9 महीने का बैन लगा दिया गया। इसमें हैरान करने वाली बात यह थी कि किसी भी गेंदबाज पर कोई एक्शन नहीं हुआ, जबकि गेंदबाज ही सबसे ज्यादा गेंद के संपर्क में रहते हैं। ऐसे में यह कैसे संभव था कि किसी भी गेंदबाज को बॉल टेंपरिंग के बारे में जानकारी नहीं थी

UFC Fight Rules: ऑक्टागन में कैसे जीतते हैं फाइटर्स, नॉकआउट से लेकर पॉइंट सिस्टम तक पूरी जानकारी

नई दिल्ली  UFC, जिसका मतलब है अल्टीमेट फाइटिंग चैंपियनशिप। यह एक ऐसी संस्था है, जो मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स (MMA) को प्रमोट करता है। एमएमए में दो फाइटर्स केज के अंदर पूरी दम से जीतने के लिए एक-दूसरे का खून बहाने से भी पीछे नहीं हटते हैं। एमएमए में एथलीट्स को स्ट्राइकिंग और ग्रैपलिंग का इस्तेमाल करने की अनुमति होती है। स्ट्राइकिंग का मतलब है कि फाइटर्स अपने हाथ और पैर का इस्तेमाल करते हुए पंचेस,किक्स,घुटने और कोहनी से एक-दूसरे को घायल करने की कोशिश करते हैं। बात करें ग्रैपलिंग की तो, इसमें फाइटर्स एक-दूसरे को रेसलिंग,ज्यू-जित्सू जैसे स्किल्स का उपयोग करते हुए सबमिशन के तहत टैप आउट कराने की कोशिश करते हैं।अगर कोई फाइटर्स टैप आउट कर देता है तो,वो फाइट हार जाता है। यूएफसी कैस काम करता है? यूएफसी फाइट ऑक्टोगन के अंदर होता है। यह एक 30 फीट चौड़ा, आठ तरफ वाला जालीदार पिंजरा होता है। ऑक्टोगन शुरुआत से ही यूएफसी का हिस्सा रहा है।यूएफसी के ज्यादातर फाइट तीन राउंड के होते हैं। हर एक राउंड पांच मिनट का होता है। वहीं मेन इंवेंट्स और चैंपियनशिप फाइट्स पांच राउंड के होते हैं। दो एथलीट्स के बीच फाइट, नॉकआउट, टेक्निकल नॉकआउट, सबमिशन या फिर जजेस के स्कोर के साथ खत्म होती है। अगर फाइट अंत तक जाता है यानी कोई भी फाइटर टैप आउट नहीं करता है या फिर नॉकआउट नहीं होता, तो ही जजेस के स्कोर के हिसाब से विजेता तय किया जाता है। जजेस हर राउंड में 10 अंको का स्कोरिंग सिस्टम फॉलो करते हैं।उनका ध्यान मुख्यत: चार चीजों पर होती है, जिसमें असरदार स्ट्राइकिंग और ग्रैपलिंग, अग्रेसन और ऑक्टोगन कंट्रोल शामिल है। हर मैच में तीन जज होते हैं, सभी जज केज के नजदीक बैठ कर अपना फैसला तय करते हैं। यूएफसी का नियम क्या है? यूएफसी फाइट में एमएमए के ही नियम लागू होते हैं, हालांकि समय के साथ इसमें भी कई बदलाव आए हैं।यूएफसी में फाइटर्स को कमर के नीचे और ऊपर मारने की अनुमति होती है। मगर इसके लिए भी कुछ स्पेशल रूल्स होते हैं। फाइटर्स सिर के पीछे वाले हिस्से और रीढ़ की हड्डी पर वार नहीं कर सकते।इसके अलावा आंख में उंगली करना, काटना, अपने सिर से विरोधी पर हमला करना, ग्रोइन पर मारना या ऐसी किसी मूव का इस्तेमाल करना, जो खतरनाक और हानि पहुंचाने वाले हों, यूएफसी के नियमों के खिलाफ है। अगर कोई खिलाड़ी नियमों का उल्लंघन करता है तो, उसके अंक काटे जा सकते हैं या फिर उसे मैच से बाहर भी किया जा सकता है। फाइट के दौरान अगर कोई फाइटर मुकाबला जारी रखने की हालत में न हो या वो अपने आप को सही से डिफेंड नहीं कर पा रहा हो तो, ऑक्टोगन के अंदर मौजूद रेफरी कभी भी फाइट को खत्म या रोक सकता है, क्योंकि फाइटर्स का सुरक्षित रहना यूएफसी की सबसे बड़ी प्राथमिकता है और संस्था हर इवेंट से पहले सख्त मेडिकल नियमों का पालन करती है।

33 गेंदें खेलीं, खाता तक नहीं खुला! ऑस्ट्रेलियाई बैटर निक की वापसी बनी निराशाजनक

डरबन ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका के बीच पहला टेस्ट मैच डरबन में खेला जा रहा है। ऑस्ट्रेलिया के कप्तान पैट कमिंस ने पहले मैच में टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया है। हालांकि लंच तक टीम ने तीन विकेट गंवा दिए हैं। मार्नश लाबुशेन और स्टीव स्मिथ ने पारी को संभालने की कोशिश की लेकिन लाबुशेन लंच से पहले पवेलियन लौट गए। पहले बल्लेबाजी करने उतरी ऑस्ट्रेलिया की टीम को निक मैडिन्सन और ट्रेविस हेड उम्मीद के मुताबिक शुरुआत नहीं दिला सके। ट्रेविस हेड सस्ते में पवेलियन लौटे तो वहीं निक बिना खाता खोले आउट हुए। इसके साथ ही उनके नाम बतौर ओपनर एक शर्मनाक रिकॉर्ड भी दर्ज हो गया है। बिना रन बनाए आउट होने वाले सलामी बल्लेबाज बतौर टेस्ट सलामी बल्लेबाज सबसे ज्यादा गेंदें खेलने के बाद बिना खाता खोले आउट होने का रिकॉर्ड न्यूजीलैंड के डैरिन मर्रे के नाम है। वह 1995 में श्रीलंका के खिलाफ 39 गेंद खेलकर बिना रन बनाए आउट हुए थे। इस लिस्ट में दूसरे नंबर पर जिम्बाब्वे के ट्रेवर ग्रिपर हैं, जिन्होंने 2000 में किंग्सटन में वेस्टइंडीज के खिलाफ टेस्ट में 36 गेंदें खेलने के बाद खाता नहीं खोल सके थे। ऑस्ट्रेलिया के बल्लेबाज निक मैडिन्सन का नाम शुक्रवार (9 अक्टूबर) को इस लिस्ट में जुड़ा। निक दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पहले टेस्ट मैच में आउट होने तक 33 गेंदें खेली लेकिन खाता नहीं खोल सके। जिम्बाब्वे के मार्क डेक्कर का 1994 में श्रीलंका के खिलाफ 30 गेंद खेलने के बाद खाता नहीं खुला था। इंग्लैंड के ब्रायन लकहर्स्ट 1971 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मुकाबले में 29 गेंद खेलने के बाद भी रन नहीं बना सके थे। निक मैडिन्सन की लंबे समय बाद वापसी ऑस्ट्रेलिया के सलामी बल्लेबाज निक मैडिन्सन ने करीब 10 साल बाद टेस्ट टीम में वापसी की है लेकिन वह पहली ही पारी में बिना रन बनाए पवेलियन लौट गए। उन्होंने इससे पहले ऑस्ट्रेलिया के लिए अपना आखिरी मैच पाकिस्तान के खिलाफ दिसंबर 2016 में खेला था। वह करीब 9 साल और 10 महीने तक टीम से बाहर रहे। ऑस्ट्रेलिया ने लंच तक गंवाए तीन विकेट टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी ऑस्ट्रेलिया की टीम को ट्रेविस हेड के रूप में पहला झटका लगा। हेड 19 गेंद में 9 रन बनाकर वियान मुल्डर का शिकार बने। दोनों के बीच पहले विकेट के लिए 17 रन की साझेदारी हुई। इसके बाद 11वें ओवर में निक मैडिन्सन बिना खाता खोले आउट हो गए। उन्होंने 33 गेंदों का सामना किया। मार्नश लाबुशेन ने 58 गेंद में 37 रन की पारी खेली। उन्होंने 6 चौके लगाए। मार्नश ने स्मिथ के साथ मिलकर तीसरे विकेट के लिए 94 गेंद में 60 रन जोड़े। ऑस्ट्रेलिया ने पहले दिन लंच तक पहली पारी में तीन विकेट खोकर 84 रन बना लिए हैं।

पार्थिव पटेल के साथ स्कूल में करते थे ओपनिंग, अब न्यूजीलैंड के पूर्व बल्लेबाज जीत रावल ने कहा क्रिकेट को अलविदा

 नई दिल्ली न्यूजीलैंड के पूर्व टेस्ट ओपनर जीत रावल ने प्रोफेशनल क्रिकेट से संन्यास का ऐलान कर दिया है. 38 साल के रावल ने 2016 से 2020 के बीच न्यूजीलैंड के लिए 24 टेस्ट मैच खेले. फर्स्ट क्लास क्रिकेट में उनके नाम 10 हजार से ज्यादा रन दर्ज हैं. क्रिकेट को अलविदा कहने के बाद वह अब चार्टर्ड अकाउंटेंट के तौर पर अपने करियर पर ध्यान दे सकते हैं. रावल का जन्म 22 सितंबर 1988 को गुजरात में हुआ था. किशोरावस्था में उनका परिवार न्यूजीलैंड के ऑकलैंड चला गया था. उन्होंने दिसंबर 2008 में ऑकलैंड की ओर से वेस्टइंडीज की दौरा करने वाली टीम के खिलाफ फर्स्ट क्लास डेब्यू किया. उनका क्रिकेट करियर करीब 18 साल चला. पार्थिव पटेल के साथ पढ़े, फिर न्यूजीलैंड के लिए खेले जीत रावल का भारतीय क्रिकेट से भी खास कनेक्शन रहा है. वह अहमदाबाद के विद्यानगर स्कूल में भारतीय विकेटकीपर-बल्लेबाज पार्थिव पटेल के साथ पढ़े थे. न्यूजीलैंड जाने के बाद रावल ने वहां के अंडर-19 क्रिकेट से आगे बढ़ते हुए सीनियर टीम तक का सफर तय किया. ऑकलैंड की ओर से शुरुआत में मिडिल ऑर्डर में खेलने वाले रावल बाद में न्यूजीलैंड के घरेलू क्रिकेट के सफल ओपनरों में शामिल हो गए. उन्होंने अपने 292 फर्स्ट क्लास पारियों में से 285 में ओपनिंग की और इस दौरान 10,127 रन बनाए. ओपनर के तौर पर उनका औसत 37.36 रहा, जबकि उन्होंने 23 शतक लगाए. दिसंबर 2025 में नॉर्दर्न डिस्ट्रिक्ट्स की कप्तानी करते हुए वह फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 10 हजार रन बनाने वाले न्यूजीलैंड के 30वें खिलाड़ी बने. उनका आखिरी प्रतिस्पर्धी मुकाबला इस साल मार्च में सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट्स के खिलाफ प्लंकेट शील्ड में था. न्यूजीलैंड के लिए खेले 24 टेस्ट रावल ने 2016 में क्राइस्टचर्च में पाकिस्तान के खिलाफ टेस्ट डेब्यू किया. न्यूजीलैंड की ओर से 24 टेस्ट में उन्होंने 1,143 रन बनाए. इस दौरान उनके बल्ले से एक शतक और सात अर्धशतक निकले. अपने पहले टेस्ट शतक के लिए उन्हें 28 पारियों का इंतजार करना पड़ा. वह न्यूजीलैंड की उस टीम का हिस्सा थे, जिसने जून 2021 में पहले वर्ल्ड टेस्ट चैम्प‍ियनश‍िप (WTC) का खिताब जीता था. खिताबी जीत के बाद वह टेस्ट गदा के साथ न्यूजीलैंड के अलग-अलग हिस्सों में आयोजित सप्ताह भर के दौरे में भी शामिल रहे. रावल ने बाद में बताया था कि उनके करियर के शुरुआती दौर में शतक नहीं आने के बावजूद केन विलियमसन, रोस टेलर और टीम के अन्य सीनियर खिलाड़ियों ने उनका समर्थन किया. इससे उन्हें दबाव के बीच भी टीम के लिए योगदान देने का भरोसा मिला. हालांकि, इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज और ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान उनका फॉर्म गिर गया. कुछ मैचों में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाने के बाद टीम मैनेजमेंट ने दूसरे विकल्प की ओर रुख किया. रावल ने इस फैसले पर निराशा जताई थी, लेकिन साथ ही कहा था कि उन्हें खुशी है कि किसी दूसरे खिलाड़ी ने टीम की जरूरत के मुताबिक प्रदर्शन किया. घरेलू क्रिकेट में शानदार रिकॉर्ड रावल ने न्यूजीलैंड के घरेलू क्रिकेट में ऑकलैंड, सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट्स और नॉर्दर्न डिस्ट्रिक्ट्स का प्रतिनिधित्व किया. प्लंकेट शील्ड में उन्होंने कुल 8,662 रन बनाए. इस टूर्नामेंट के इतिहास में उनसे ज्यादा रन माइकल पैप्स (11,463), मैथ्यू सिंक्लेयर (8,842) और पीटर फुल्टन (8,719) ने बनाए हैं. नॉर्दर्न डिस्ट्रिक्ट्स के साथ उन्होंने 2024-25 में टीम को एक दशक से ज्यादा समय बाद पहला प्लंकेट शील्ड खिताब दिलाने में अहम भूमिका निभाई. उन्होंने अपनी पार्ट टाइम लेग स्पिन से भी योगदान दिया और उस सीजन में 11.14 के औसत से 14 विकेट लिए. इस दौरान उन्होंने पहली बार फर्स्ट क्लास क्रिकेट में पांच विकेट लेने का कारनामा भी किया. लिस्ट ए क्रिकेट में रावल ने 96 मैचों में 2,714 रन बनाए और 44 विकेट लिए. टी20 क्रिकेट के 76 मैचों में उनके नाम 1,484 रन हैं. उनका टी20 औसत 21.50 और स्ट्राइक रेट 121.44 रहा. मैदान के बाहर रावल ऑडिटिंग फर्म में चार्टर्ड अकाउंटेंट के तौर पर काम कर रहे हैं. करियर के आखिरी दौर में उन्होंने कोचिंग में भी हाथ आजमाए. क्रिकेट के साथ चार्टर्ड अकाउंटेंट भी रहेमाया और समोआ की टीम में हेड  कोच तरुण नेथुला के सहायक के रूप में काम किया.

भारत में नहीं खेलेगा पाकिस्तान, एशियन चैंपियंस ट्रॉफी में बांग्लादेश को मिली एंट्री

नई दिल्ली  पाकिस्तान ने भारत में होने वाले हॉकी एशियंस चैंपियंस ट्रॉफी से अपना नाम वापस ले लिया है। पाकिस्तान हॉकी फेडरेशन (PHF) ने सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए अपने मुकाबलों को न्यूट्रल वेन्यू पर कराने की मांग की थी। हालांकि, भारत ने पाकिस्तान की इस मांग को ठुकरा दिया, जिस वजह से पाकिस्तान को इस टूर्नामेंट से बाहर होना पड़ा है। उनकी जगह अब बांग्लादेश को एंट्री मिली है। भारत ने ठुकराई पाकिस्तान की मांग पीएचएफ ने एशियन हॉकी फेडरेशन (AHF) से पाकिस्तान और भारत के बीच होने वाले मैचों को इंडिया से बाहर कराने की मांग की थी। मगर भारत ने न्यूट्रल वेन्यू पर मैच खेलने से पूरी तरह से इनकार कर दिया। भारत का कहना है कि टूर्नामेंट का आयोजन अपने शेड्यूल के हिसाब से ही होगा। वहीं, पाकिस्तान का कहना है कि उनके लिए खिलाड़ियों का सम्मान और सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता है। हालांकि भारत ने अपना रुख साफ कर दिया, जिस वजह से पाकिस्तान की जगह टूर्नामेंट में बा्ंग्लादेश को शामिल कर लिया गया है। 27 अक्टूबर से शुरु होगी चैंपियंस ट्रॉफी एशियन हॉकी चैंपियंस ट्रॉफी की शुरुआत 27 अक्टूबर से होगी, जबकि फाइनल मुकाबला 5 नवंबर को होगा। मेजबान भारत के अलावा, मलेशिया, चाइना, जापान, साउथ कोरिया और बांग्लादेश टूर्नामेंट का हिस्सा होंगी। चैंपियंस ट्रॉफी के मैच जालंधर और मोहाली में खेले जाएंगे। जालंधर के ओलंपियन सुरजीत सिंह हॉकी स्टेडियम में सभी लीग मैच आयोजित होंगे। वहीं मोहाली के ओलंपियन बलबीर सिंह इंटरनेशनल हॉकी स्टेडियम में नॉकआउट मैच खेले जाएंगे। एशियन चैंपियंस ट्रॉफी में भारत का रहा है दबदबा एशियन चैंपियंस ट्रॉफी की शुरुआत साल 2011 से हुई थी। इसके बाद से भारतीय टीम ने टूर्नामेंट में अपना दबदबा बनाए रखा है। भारत ने कुल 5 बार चैंपियंस ट्रॉफी का खिताब अपने नाम किया है। इसके अलावा साल 2018 में भारत ने बारिश की वजह से फाइनल रद होने के कारण पाकिस्तान के साथ ट्रॉफी शेयर की थी। भारत पिछले दो बार से अपनी ट्रॉफी डिफेंड करते हुए आ रहा है। पिछले साल टीम इंडिया ने साउथ कोरिया को हराकर ट्रॉफी अपने नाम की थी। फैंस को इस बार भी भारत से शानदार प्रदर्शन की उम्मीद होगी। हरमनप्रीत सिंह की अगुवाई वाली टीम लगातार चौथी बार खिताब जीतने के इरादे से टूर्नामेंट में उतरेगी।