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‘अज्ञात’ का एक और निशाना, हमजा बुरहान के बाद सामने आई आतंकियों की लंबी लिस्ट

नई दिल्ली  पाकिस्तान की धरती पर भारत के दुश्मनों का काल बनकर मंडरा रहे अज्ञात हमलावरों ने एक और बड़े आतंकी को जहन्नुम पहुंचा दिया है. गुरुवार को खबर आई कि पुलवामा हमले के मास्टरमाइंड हमजा बुरहान की पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी पीओके में ताबड़तोड़ गोलियां मारकर हत्या कर दी गई है. पिछले कुछ सालों से पाकिस्तान के अलग-अलग शहरों में भारत के मोस्ट वांटेड आतंकियों को चुन-चुनकर निशाना बनाया जा रहा है. मोटरसाइकिल पर आने वाले इन अज्ञात हमलावरों ने अब तक लश्कर, जैश और हिजबुल के कई टॉप कमांडरों को मौत के घाट उतार दिया है । इन रहस्यमय हत्याओं ने पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों और वहां पनाह लिए बैठे आतंकियों के आकाओं की नींद उड़ा दी है. कोई नहीं जानता कि इन आतंकियों की जान लेने वाले ये अज्ञात लोग आखिर कौन हैं।  पुलवामा हमले के मास्टरमाइंड हमजा बुरहान को कैसे मिली मौत? भारत सरकार की तरफ से साल 2022 में आतंकी घोषित किया गया हमजा बुरहान अब इस दुनिया में नहीं है. उसे मुजफ्फरराबाद में अज्ञात हमलावरों ने कई गोलियां मारीं, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई. हमजा बुरहान का असली नाम अर्जुमंद गुलजार डार था और वह खतरनाक आतंकी संगठन अल बदर से जुड़ा हुआ था. साल 2019 में पुलवामा में हुए आत्मघाती हमले की साजिश में उसका बड़ा हाथ था, जिसमें भारत के 40 सीआरपीएफ जवान शहीद हुए थे. इस हमले के बाद से ही वह भारत का बड़ा दुश्मन बना हुआ था, लेकिन पीओके में अज्ञात बंदूकधारियों ने उसे गोलियां मारकर हमेशा के लिए खामोश कर दिया ।  लाहौर में लश्कर के संस्थापक अमीर हमजा पर कैसे हुआ था हमला? पाकिस्तान के लाहौर शहर में लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक सदस्यों में शामिल अमीर हमजा को भी इसी साल अप्रैल में निशाना बनाया गया था. बाइक पर सवार होकर आए अज्ञात हमलावरों ने अमीर हमजा पर अचानक अंधाधुंध फायरिंग कर दी. इस जानलेवा हमले में वह बुरी तरह जख्मी हो गया, जिसके बाद उसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था. अमीर हमजा भारत के खिलाफ लंबे समय से जहर उगलने और आतंकी नेटवर्क को मजबूत करने का काम कर रहा था।  मसूद अजहर और हाफिज सईद के करीबियों को किसने ढेर किया? जैश-ए-मोहम्मद के चीफ मौलाना मसूद अजहर के बड़े भाई मोहम्मद ताहिर अनवर की भी पिछले महीने पाकिस्तान में रहस्यमयी हालात में मौत हो गई. वह जैश के सभी बड़े ऑपरेशन्स को संभालता था. वहीं, पिछले साल मार्च में 26/11 मुंबई हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद के बेहद करीबी अबू कतल उर्फ कतल सिंधी को झेलम सिंध में अज्ञात हमलावरों ने मार गिराया. कतल सिंधी साल 2024 में जम्मू-कश्मीर के रियासी में तीर्थयात्रियों की बस पर हुए हमले का मुख्य आरोपी था. इसके अलावा कराची में हाफिज सईद के एक और खास मुफ्ती कैसर फारूक को भी अज्ञात हमलावरों ने मदरसा के पास पीठ में गोलियां मारकर ढेर कर दिया था।  पठानकोट हमले के गुनहगार शाहिद लतीफ का अंत कैसे हुआ? साल 2016 में भारत के पठानकोट एयरबेस पर हुए बड़े आतंकी हमले के मुख्य साजिशकर्ता शाहिद लतीफ को सियालकोट की एक मस्जिद में अज्ञात बंदूकधारियों ने गोलियां मार दी थीं. 54 साल का शाहिद लतीफ भारत की मोस्ट वांटेड लिस्ट में शामिल था और लंबे समय से पाकिस्तान में बैठकर कश्मीरी युवाओं को भड़काने का काम कर रहा था. इसी तरह लश्कर का एक और खतरनाक भर्ती कमांडर अकरम खान गाजी भी नवंबर 2023 में मोटरसाइकिल सवार हमलावरों की गोलियों का शिकार बन गया. गाजी भारत में आतंकियों की घुसपैठ कराने के लिए नए लड़कों का ब्रेनवॉश करता था।  ख्वाजा शाहिद का सिर कलम और विमान हाईजैक के आरोपी की मौत कैसे हुई? लश्कर-ए-तैयबा के टॉप कमांडर ख्वाजा शाहिद उर्फ मियां मुजाहिद की लाश एलओसी के पास नीलम घाटी में बेहद डरावनी हालत में मिली थी. अज्ञात हमलावरों ने पहले उसका अपहरण किया, फिर उसे बुरी तरह टॉर्चर करने के बाद उसका सिर धड़ से अलग कर दिया. इससे पहले साल 1999 में इंडियन एयरलाइंस के आईसी-814 विमान को हाईजैक करने वाले मुख्य आतंकियों में शामिल मिस्त्री जहूर इब्राहिम को कराची में मौत के घाट उतारा गया था. वह जाहिद अखुंद नाम से फर्जी पहचान छिपाकर रह रहा था, लेकिन अज्ञात हमलावरों ने उसके सिर में पॉइंट ब्लैंक रेंज से दो गोलियां मारकर उसका काम तमाम कर दिया था।  यूएपीए (UAPA) के तहत घोषित व्यक्तिगत आतंकियों की लिस्ट     मौलाना मसूद अजहर उर्फ मौलाना मोहम्मद मसूद अजहर अल्वी उर्फ वली आदम इस्सा.     हाफिज मोहम्मद सईद उर्फ हाफिज मोहम्मद साहिब उर्फ हाफिज मोहम्मद सईद उर्फ हाफिज मोहम्मद उर्फ हाफिज सईद उर्फ हाफेज मोहम्मद सईद उर्फ हाफिज मोहम्मद सयीद उर्फ मोहम्मद सईद उर्फ मोहम्मद सईद.     जकी-उर-रहमान लखवी उर्फ अबू वाहीद इर्शाद अहमद अर्शद उर्फ काकी उर-रहमान उर्फ जाकिर रहमान लखवी उर्फ जकी-उर-रहमान लकवी उर्फ जाकिर रहमान.     दाऊद इब्राहिम कास्कर.     वधावा सिंह बब्बर उर्फ चाचा.     लखबीर सिंह उर्फ रोडे.     रंजीत सिंह उर्फ नीता.     परमजीत सिंह उर्फ पंजवड़.     भूपिंदर सिंह भिंडा.     गुरमीत सिंह बग्गा.     गुरपतवंत सिंह पन्नून.     हरदीप सिंह निज्जर.     परमजीत सिंह उर्फ पम्मा.     साजिद मीर उर्फ साजिद मजीद उर्फ इब्राहिम शाह उर्फ वासी उर्फ खाली उर्फ मोहम्मद वसीम.     यूसुफ मुजम्मिल उर्फ अहमद भाई उर्फ यूसुफ मुजम्मिल बट उर्फ हुरैरा भाई.     अब्दुर रहमान मक्की उर्फ अब्दुल रहमान मक्की.     शाहिद महमूद उर्फ शाहिद महमूद रहमतुल्लाह.     फरहातुल्लाह गोरी उर्फ अबू सूफियान उर्फ सरदार साहब उर्फ फारू.     अब्दुल रऊफ असगर उर्फ मुफ्ती उर्फ मुफ्ती असगर उर्फ साद बाबा उर्फ मौलाना मुफ्ती रऊफ असगर.     इब्राहिम अथर उर्फ अहमद अली मोहम्मद अली शेख उर्फ जावेद अमजद सिद्दीकी उर्फ ए.ए. शेख उर्फ चीफ.     यूसुफ अजहर उर्फ अजहर यूसुफ उर्फ मोहम्मद सलीम.     शाहिद लतीफ उर्फ छोटा शाहिद भाई उर्फ नूर अल दीन.     सैयद मोहम्मद यूसुफ शाह उर्फ सैयद सलाहुद्दीन उर्फ पीर साहब उर्फ बुजुर्ग.     गुलाम नबी खान उर्फ आमिर खान उर्फ सैफुल्लाह खालिद उर्फ खालिद सैफुल्लाह उर्फ जवाद उर्फ दांद.     जफर हुसैन भट उर्फ खुर्शीद उर्फ मोहम्मद … Read more

वैश्विक टकराव के बीच भारत पर बढ़ा दबाव, आखिर कैसे टूटेगा ये चक्रव्यूह?

नई दिल्ली भारत आर्थिक तौर पर संकट के दौर से गुजर रहा है. कारण सबको पता है, मिडिल-ईस्ट में तनाव. हालात ये हैं कि भारत के लोग सुबह उठकर सबसे पहले नजर डालते हैं कि दुनिया में कच्चा तेल और युद्ध को लेकर क्या अपडेट्स हैं।  दरअसल, दुनिया के किसी कोने में कोई मिसाइल दागता है, दो देश आपस में टकराते हैं, या कोई बड़ा देश कमजोर देश पर पाबंदियां लगाता है, तो उसकी सीधी मार भारत की जेब पर पड़ती है. यानी करे कोई, और भुगते कोई. यह सिस्टम हर भारतीय को चुभता है।  रूस-यूक्रेन का युद्ध हो, या फिलहाल अमेरिका और ईरान की जंग. तबाही का मंजर भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखा है? जबकि इस दौरान अमेरिकी शेयर बाजार रिकॉर्ड ऊंचाई के आसपास बना हुआ है, भारत का बाजार ही पस्त नहीं है, बल्कि जीडीपी की रफ्तार थमने वाली है।  अब सवाल उठता है कि आखिर क्यों दुनिया की हर जंग का बिल भारत को चुकाना पड़ता है, इसके पीछे के असली कारण क्या हैं और इस चक्रव्यूह से निकलने का रास्ता क्या है. ऐसा नहीं है कि यह पहली बार हो रहा है, और इसके पीछे कोई इत्तेफाक है, मुख्यतौर पर फिलहाल 4 कारण सामने दिख रहे हैं।  1. कच्चा तेल (भारत की मजबूरी) भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है. यानी एक तरह से भारत की इकोनॉमी तेल पर टिकी है. जब भी पश्चिम एशिया में तनाव होता है, हॉर्मुज जैसे समुद्री रास्तों पर संकट आता है, तेल की कीमतें आसमान छूने लगती हैं, और भारत कुछ नहीं कर पाता है।  जबकि अमेरिका का गणित अलग है. अमेरिका अब सिर्फ तेल खरीदता नहीं है, वह दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक भी है. जब तेल महंगा होता है, तो अमेरिकी कंपनियों को फायदा होता है, यानी ऐसे संकट में भी अमेरिका को कोई बड़ा आर्थिक नुकसान नहीं होता. जबकि भारत के डॉलर पानी की तरह बहने लगते हैं. इसे अर्थशास्त्र की भाषा में 'आयातित महंगाई' कहते हैं, यानी महंगाई बढ़ने के कारण विदेशी फैसले होते हैं।  2. डॉलर की दादागीरी दुनिया में व्यवस्था ऐसी है कि भारत को कच्चा तेल खरीदने के लिए डॉलर में भुगतान करना पड़ता है. जब दुनिया में अनिश्चितता बढ़ती है, तो ग्लोबल इंवेस्टर्स अपना पैसा सुरक्षित रखने के लिए डॉलर खरीदने भागते हैं. इससे डॉलर मजबूत होता है और भारतीय रुपया कमजोर पड़ जाता है. मौजूदा दौर में पिछले करीब 2 महीने से यही हो रहा है. रुपया कमजोर होने का सीधा मतलब है कि जो तेल दो महीने पहले महज 70-75 डॉलर प्रति बैरल में खरीद रहे थे, अब उसके लिए 100 डॉलर से ज्यादा का भुगतान करना पड़ रहा है. एक तो कच्चा तेल का महंगा होना, और फिर रुपया का कमजोर पड़ना, भारतीय अर्थव्यवस्था पर दोहरी चोट पहुंचाता है. इसका सीधा असर विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ता है।  3. शेयर बाजार का गणित वैश्विक तनाव के दौरान हमेशा भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट आती है, और उसकी वजह भी विदेशी निवेशक (FII) ही होते हैं. जबकि ऐसे संकट के समय में अमेरिका बच जाता है. क्योंकि अमेरिका को दुनिया का 'सेफ हेवन' माना जाता है. जैसे ही दुनिया में युद्ध जैसी स्थिति बनती है, विदेशी निवेशक भारत जैसे 'इमर्जिंग मार्केट्स' से अपना मुनाफा समेटते हैं और उस पैसे को निकालकर अमेरिका के सरकारी बॉन्ड्स या अमेरिकी शेयर बाजार में लगा देते हैं. जिसका नतीजा ये होता है कि भारत का बाजार गिर जाता है और अमेरिका का बाजार मजबूती से डटा रहता है।  4. तनाव का एक्सपोर्ट पर सीधा असर भारत इंजीनियरिंग गुड्स, टेक्सटाइल और केमिकल्स जैसी कई चीजें एक्सपोर्ट करता है. लेकिन जब समुद्री रास्तों पर युद्ध का साया होता है, तो एक्सपोर्ट बाधित हो जाता है, या फिर जहाजों की आवाजाही दूसरे लंबे रूटों से करनी पड़ती है. इससे जहाजों का किराया और इंश्योरेंस का प्रीमियम 3 से 4 गुना बढ़ जाता है. फिर विदेशी बाजारों में पहुंचते-पहुंचते इनमें आयात किया जाने वाला सामान काफी महंगा हो जाता है, प्रोडक्ट महंगा होने की वजह से बिक्री घट जाती है. यानी कुल मिलाकर एक्सपोर्ट ठप पड़ जाता है और देश में आने वाली विदेशी करेंसी कम हो जाती है।  जब ये सारे संकट एक साथ आते हैं, तो देश की विकास दर यानी जीडीपी की रफ्तार सुस्त पड़ जाती है, भारत चाहकर भी कुछ नहीं कर पाता, क्योंकि घरेलू मोर्चे पर किसी तरह का कोई संकट नहीं होता है. केवल एक तेल महंगा होने से माल ढुलाई महंगी होती है. जिससे सब्जी, दूध, राशन से लेकर हर चीज के दाम बढ़ते हैं. फिर महंगाई को काबू करने के लिए रिजर्व बैंक को ब्याज दरें बढ़ानी पड़ती हैं. ब्याज दरें बढ़ते ही होम लोन, कार लोन और बिजनेस लोन महंगे हो जाते हैं।  फिर जब लोन महंगा होगा और जेब में पैसा कम बचेगा. आम आदमी नया घर, गाड़ी या मोबाइल चाहकर भी नहीं खरीद पाएगा. जब लोग नहीं खरीदेंगे तो फैक्ट्रियों में सामान नहीं बनेगा. फैक्ट्रियों में सामान नहीं बनेगा, तो नई नौकरियां नहीं आएंगी. जिससे जीडीपी की रफ्तार अपने आप सुस्त पड़ जाएगी।  इस चक्रव्यूह से बचने के लिए भारत को क्या करना चाहिए? ये तो साफ है कि इस संकट के लिए दुनिया को कोसने से कुछ नहीं होगा. भारत को अगर वाकई में आत्मनिर्भर बनना है, तो कुछ मोर्चों पर युद्ध स्तर पर काम करना होगा।  ऊर्जा पर विदेशी निर्भरता कम  जब तक हम तेल के लिए खाड़ी देशों पर निर्भर रहेंगे, हमारी नब्ज उनके हाथ में रहेगी, और ऐसे झटके लगते रहेंगे. हमें पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता को तेजी से कम करना होगा. गाड़ियों को इलेक्ट्रिक पर शिफ्ट करना और पेट्रोल में E30 यानी 30 फीसदी तक एथेनॉल मिलाना होगा. सौर ऊर्जा और ग्रीन हाइड्रोजन के मामले में भारत को इतनी आत्मनिर्भरता हासिल करनी होगी कि हमें बाहर से कच्चा तेल मंगाने की जरूरत सिर्फ पेट्रोकेमिकल्स के लिए पड़े, न कि ईंधन के लिए।  इसके अलावा भारत को 'डी-डॉलरइजेशन' यानी डॉलर की दादागीरी को कम करने की दिशा में सोचना पड़ेगा. रूस, यूएई, ईरान या जिन भी देशों के साथ भारत व्यापार करता है. उनसे सीधे 'रुपया-रुबल' या 'रुपया-दिरहम' में ट्रेड सेटलमेंट को बढ़ावा देना होगा. … Read more

Axis My India के प्रदीप गुप्ता का बड़ा दावा, अगले दो दशक तक BJP रहेगी ताकतवर

नई दिल्ली एक्सिस माय इंडिया (Axis My India) के प्रमुख और पॉलिटिकल एक्सपर्ट प्रदीप गुप्ता ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर बड़ी भविष्यवाणी की है। उन्होंने कहा है कि 2014 में शुरू हुआ भाजपा के राजनीतिक दबदबे का मौजूदा दौर कम से कम 20 साल तक जारी रहेगा। 'द एक्सिस माई इंडिया' सर्वेक्षण संस्था के प्रमुख गुप्ता ने तर्क दिया कि सत्तारूढ़ दल की स्थिति तब तक सुरक्षित रहेगी जब तक उसके शासन का प्रदर्शन बहुत कमजोर नहीं हो जाता। मालूम है कि प्रदीप गुप्ता के एक्सिस माय इंडिया के अतीत में ज्यादातर सर्वे और एग्जिट पोल्स सही साबित हुए हैं। हालांकि, 2024 लोकसभा चुनाव के एग्जिट पोल में उनसे चूक हो गई थी। कांग्रेस के लंबे समय तक रहे राजनीतिक प्रभुत्व के साथ तुलना करते हुए, गुप्ता ने कहा कि भारतीय राजनीति एक पार्टी के प्रभाव के एक और दौर की साक्षी बन रही है। गुप्ता ने 'पीटीआई-भाषा' को दिए साक्षात्कार में कहा, ''राजनीति में एक सीमा होती है। पहले, कांग्रेस ने 1977 तक लगातार शासन किया। उसके बाद, उसे मुश्किलें आने लगीं। उन दिनों, हम लगभग 20 साल तक चलने वाली राजनीतिक पीढ़ी की बात करते थे। वह 20 साल का दौर अब भी बना रहेगा।'' 'राजनीति का केंद्रीय ध्रुव बनी रह सकती है BJP' उन्होंने कहा कि भाजपा भी इसी तरह लंबे समय तक भारतीय राजनीति का केंद्रीय ध्रुव बनी रह सकती है। उनके विचार में, सत्तारूढ़ गठबंधन और विपक्ष दोनों का भविष्य काफी हद तक मौजूदा सरकार के कामकाज पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा, ''इतना बड़ा जनादेश मिलने के बाद, भाजपा से उम्मीदें भी बढ़ गई हैं। इसलिए भाजपा और एनडीए को अब शानदार कामकाज करना होगा।'' गुप्ता ने कहा, ''जब तक उनका प्रदर्शन कमजोर या खराब नहीं होता, वे जीतते रहेंगे और विपक्ष हारता रहेगा।'' 'कांग्रेस के लिए विरासत में मिले मुद्दों का बोझ बना हुआ है' उन्होंने कहा कि कांग्रेस पर पहले कुशासन रहने की धारणाओं से जुड़े 'विरासत में मिले मुद्दों' का बोझ बना हुआ है जिससे उसके राजनीतिक नुकसान की भरपाई एक लंबी प्रक्रिया बन गई है। उन्होंने कहा, ''अगर आप 2029 की भी बात करें, तो इसका मतलब होगा लगभग 15 साल (कांग्रेस के लिए सत्ता से बाहर रहने के)। मुझे लगता है कि उन्हें पूरे देश को मनाने में कम से कम पांच साल और लग सकते हैं।'' गुप्ता ने यह भी कहा कि राजनीतिक प्रभुत्व ने जनता की आकांक्षाएं भी बढ़ा दी हैं। उन्होंने कहा, ''जब आप बड़ी ऊंचाइयों पर पहुंचते हैं, तो बाद में नीचे आने की भी प्रवृत्ति बनी रहती है। भाजपा भी उस स्तर पर पहुंच गई है जहां उससे आकांक्षाएं बढ़ गई हैं।'' 'यूपी में शासन के प्रति संतुष्टि का स्तर अच्छा, पंजाब में मिला-जुला’ वहीं, प्रदीप गुप्ता का कहना है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में एक साल से भी कम समय बचा है और सत्तारूढ़ भाजपा मजबूत स्थिति में नजर आ रही है, क्योंकि जनता योगी आदित्यनाथ सरकार के कामकाज से काफी हद तक संतुष्ट है। गुप्ता ने कहा कि पंजाब में चार-कोणीय मुकाबले के उभरने के कारण सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी के प्रति जनता की संतुष्टि का स्तर ''मिला-जुला' बना हुआ है। प्रदीप गुप्ता ने राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इन दोनों राज्यों में अपनी एजेंसी के जमीनी स्तर पर किए गए काम से प्राप्त अवलोकन साझा किए। दोनों राज्यों में 2027 की शुरुआत में चुनाव प्रस्तावित है और जिनके परिणामों का व्यापक राष्ट्रीय प्रभाव होने की उम्मीद है।

सेमीकंडक्टर से टेक्नोलॉजी तक, प्रधानमंत्री मोदी के दौरे ने खोले विकास के नए रास्ते

नई दिल्ली  दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच इस समय भारत सिर्फ एक बाजार नहीं बल्कि एक भरोसेमंद ताकत बनकर उभर रहा है. यही वजह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया पांच देशों की यात्रा अब सिर्फ कूटनीतिक दौरा नहीं मानी गई, इसे भारत के आर्थिक भविष्य की बड़ी जीत के तौर पर देखा गया है. विदेशों में अक्सर भारत की राजनीतिक बहस चर्चा में रहती है, लेकिन इस बार तस्वीर अलग थी. दुनिया की दिग्गज कंपनियों के सीईओ भारत में निवेश बढ़ाने की बात कर रहे थे. सेमीकंडक्टर से लेकर लॉजिस्टिक्स और टेक्नोलॉजी तक, हर सेक्टर में भारत को लेकर उत्साह दिखाई दिया. करीब ₹3.5 लाख करोड़ के निवेश और विस्तार योजनाओं ने यह संकेत दिया कि वैश्विक कंपनियां अब चीन प्लस वन रणनीति में भारत को सबसे मजबूत विकल्प मान रही हैं. यही कारण है कि इस दौरे को भारत की आर्थिक कूटनीति का बड़ा मास्टरस्ट्रोक कहा जा रहा है।  पीएम मोदी की इस यात्रा के दौरान 50 से ज्यादा वैश्विक कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक हुई. इन कंपनियों की कुल वैल्यू लगभग 2.7 से 3 ट्रिलियन डॉलर बताई जा रही है. इनमें से कई कंपनियां पहले से भारत में काम कर रही हैं, लेकिन अब वे अपने कारोबार का दायरा बढ़ाना चाहती हैं. अधिकारियों के मुताबिक, भारत की तेज आर्थिक वृद्धि, बढ़ती खपत और स्थिर नीतियां विदेशी निवेशकों को आकर्षित कर रही हैं. संयुक्त अरब अमीरात ने अकेले करीब 5 अरब डॉलर यानी लगभग ₹45 हजार करोड़ के नए निवेश की घोषणा की. सरकार इसे भारत की मजबूत ग्लोबल इमेज और निवेशकों के भरोसे का बड़ा संकेत मान रही है. विपक्ष जहां सरकार पर सवाल उठाता रहा है, वहीं इस निवेश ने यह संदेश दिया कि वैश्विक मंच पर भारत की आर्थिक पकड़ लगातार मजबूत हो रही है।  किन सेक्टर्स में आएंगे सबसे ज्यादा पैसे प्रधानमंत्री मोदी की पांच देशों की यात्रा के दौरान जिन कंपनियों से बातचीत हुई, उनमें टेक्नोलॉजी, इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स, ग्रीन एनर्जी और सेमीकंडक्टर सेक्टर की कई बड़ी कंपनियां शामिल थीं. अधिकारियों का कहना है कि इन कंपनियों का भारत में पहले से करीब 180 अरब डॉलर का निवेश और कारोबारी एक्सपोजर है. अब वे नए प्रोजेक्ट्स और एक्सपेंशन प्लान पर तेजी से काम करना चाहती हैं. इससे आने वाले वर्षों में लाखों रोजगार पैदा होने की उम्मीद है।  इस दौरे का सबसे बड़ा संदेश यह रहा कि दुनिया की बड़ी कंपनियां भारत को सिर्फ एक उपभोक्ता बाजार नहीं बल्कि मैन्युफैक्चरिंग और इनोवेशन हब के रूप में देख रही हैं. चीन और पश्चिमी देशों के बीच बढ़ते तनाव के बाद कई कंपनियां अपनी सप्लाई चेन भारत में शिफ्ट करना चाहती हैं. यही वजह है कि पीएम मोदी की बैठकों में “मेक इन इंडिया” और “डिजिटल इंडिया” जैसे अभियानों को काफी समर्थन मिला।  UAE ने सबसे बड़ा दांव क्यों लगाया? संयुक्त अरब अमीरात ने भारत में करीब 5 अरब डॉलर के निवेश का ऐलान किया है. यह निवेश इंफ्रास्ट्रक्चर, बंदरगाह, ऊर्जा और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में किया जाएगा. विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और UAE के बीच तेजी से मजबूत होते व्यापारिक रिश्तों का यह बड़ा असर है. दोनों देशों के बीच CEPA समझौते के बाद व्यापार और निवेश में लगातार बढ़ोतरी हुई है।  किन सेक्टर्स को होगा सबसे ज्यादा फायदा? सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, सेमीकंडक्टर, एआई, लॉजिस्टिक्स, ग्रीन एनर्जी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर ऐसे सेक्टर हैं जहां सबसे ज्यादा निवेश आने की संभावना है. भारत सरकार इन सेक्टर्स में पहले ही कई प्रोत्साहन योजनाएं चला रही है. विदेशी कंपनियां अब भारत को लंबे समय के निवेश केंद्र के रूप में देख रही हैं।  भारत की अर्थव्यवस्था के लिए कितना बड़ा संकेत? करीब ₹3.5 लाख करोड़ के निवेश प्रस्तावों को भारत की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा सकारात्मक संकेत माना जा रहा है. इससे न केवल रोजगार बढ़ेंगे बल्कि टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता में भी इजाफा होगा. सरकार का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकता है।  क्या विपक्ष के सवालों का जवाब है यह दौरा? प्रधानमंत्री मोदी के विदेश दौरों को लेकर अक्सर विपक्ष सवाल उठाता रहा है. लेकिन इस बार निवेश और व्यापारिक समझौतों ने सरकार को मजबूत राजनीतिक संदेश देने का मौका दिया है. भाजपा इसे भारत की बढ़ती वैश्विक ताकत और मोदी की व्यक्तिगत कूटनीतिक क्षमता का प्रमाण बता रही है।  पीएम मोदी की इस यात्रा से भारत को कितना निवेश मिला? प्रधानमंत्री मोदी की पांच देशों की यात्रा के दौरान करीब ₹3.5 लाख करोड़ यानी लगभग 40 अरब डॉलर के निवेश और कारोबारी विस्तार योजनाओं पर चर्चा हुई. इनमें कई बड़े प्रोजेक्ट शामिल हैं. UAE ने अकेले 5 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा की है. यह निवेश भारत के कई रणनीतिक सेक्टर्स में होगा।  किन सेक्टर्स में सबसे ज्यादा निवेश आने की उम्मीद है? सेमीकंडक्टर, ग्रीन एनर्जी, लॉजिस्टिक्स, टेक्नोलॉजी, एआई और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में सबसे बड़े निवेश होंगे. भारत सरकार पहले से इन क्षेत्रों में उत्पादन बढ़ाने और विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए नीतियां चला रही है. इससे रोजगार और उत्पादन दोनों बढ़ सकते हैं।  क्या यह निवेश भारत की अर्थव्यवस्था को बड़ा फायदा देगा? विशेषज्ञों का मानना है कि इतने बड़े निवेश से भारत की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ेगी, नई टेक्नोलॉजी आएगी और लाखों रोजगार पैदा होंगे. साथ ही भारत की वैश्विक सप्लाई चेन में हिस्सेदारी मजबूत होगी. इससे भारत की आर्थिक वृद्धि को लंबी अवधि में बड़ा फायदा मिल सकता है। 

PM मोदी को मिले प्राचीन ताम्र पत्र, तमिलनाडु और चोल वंश की विरासत फिर चर्चा में

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने नीदरलैंड दौरे पर दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करते हुए 17 समझौतों पर हस्ताक्षर किए. पीएम मोदी और नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटन के बीच रक्षा, सेमीकंडक्टर, ऊर्जा, जल प्रबंधन, साइबर सुरक्षा, व्यापार, शिक्षा और समुद्री सहयोग समेत कई अहम क्षेत्रों में साझेदारी के लिए सहमति बनी. इसके अलावा नीदरलैंड की यात्रा में देश को एक बड़ी सांस्कृतिक और राजनयिक उपलब्धि भी हासिल हुई है. देश की करीब 1000 साल पुरानी विरासत वापस मिल गई है. नीदरलैंड की डच सरकार ने 11वीं सदी की अनैमंगलम ताम्र पट्टिकाओं (Anaimangalam Copper Plates) को भारत को सौंप दिया है. आईए जानते हैं कि ‘लाइडेन प्लेट्स’ (Leiden Plates) के नाम से मशहूर 30 किलोग्राम की ये 21 बड़ी और 3 छोटी पट्टिकाओं में क्या लिखा है? इनका तमिलनाडु और चोल वंश से क्या कनेक्शन है? क्या हैं अनैमंगलम ताम्र पट्टिकाएं: अनैमंगलम ताम्र पट्टिकाओं को 'लीडेन प्लेट्स' भी कहा जाता है. ये 11वीं सदी की अत्यंत दुर्लभ और ऐतिहासिक तांबे की प्लेटें हैं, जो दक्षिण भारत के गौरवशाली चोल राजवंश से संबंधित हैं. लगभग 30 किलोग्राम वजनी इन पट्टिकाओं में 21 बड़ी और 3 छोटी प्लेटें शामिल हैं, जो एक विशाल तांबे की अंगूठी से जुड़ी हुई हैं. इस पर चोल शासक राजेंद्र चोल प्रथम की शाही मुहर भी अंकित है. 1690 ईस्वी के आसपास इन्हें डच ईस्ट इंडिया कंपनी के अधिकारी भारत से नीदरलैंड ले गए थे. लंबे समय तक ये लीडेन विश्वविद्यालय (Leiden University) में सुरक्षित थीं. इसीलिए इनको इतिहासकार लीडेन प्लेट्स के नाम से भी जानते हैं. अनैमंगलम ताम्र पट्टिकाओं का क्या है इतिहास: अनैमंगलम ताम्र पट्टिकाएं 1005 ईस्वी के आसपास चोल सम्राट राजराजा चोल प्रथम और उनके बेटे राजेंद्र चोल प्रथम के शासनकाल के दौरान जारी की गई थीं. ये पट्टिकाएं चोल शासकों द्वारा तमिलनाडु के नागापट्टनम में स्थित 'चूड़ामणि विहार' नामक बौद्ध मठ को अनैमंगलम गांव का राजस्व और कर दान करने के शाही आदेश को प्रमाणित करती हैं. यह मठ दक्षिण-पूर्व एशिया (जावा/सुमात्रा) के शैलेंद्र सम्राट द्वारा बनवाया गया था. कैसी दिखती हैं अनैमंगलम ताम्र पट्टिकाएं: अनैमंगलम पट्टिकाओं में 21 तांबे की प्लेटें शामिल हैं, जिन्हें एक कांस्य की अंगूठी से बांधा गया है. इस अंगूठी पर राजा राजेंद्र चोल प्रथम की मुहर लगी है, जिन्होंने 11वीं शताब्दी में शासन किया था. 5 प्लेटों पर संस्कृत में शिलालेख हैं और बाकी 16 प्लेट्स पर तमिल में शिलालेख हैं. संस्कृत में चोल राजाओं का इतिहास और वंशावली लिखी हुई है. जबकि तमिल भाषा में दान और प्रशासनिक नियमों की जानकारी दी गई है. तमिल में प्रशासनिक डेटा, भूमि की सीमाएं, टैक्स छूट और स्थानीय शासन के नियम लिखे गए हैं. ये प्लेटें राजेंद्र चोल प्रथम की आधिकारिक शाही मुहर से बंद की गई हैं. इस मुहर पर चोल बाघ का प्रतीक, दो मछलियां (पांड्य प्रतीक) और एक धनुष (चेर प्रतीक) अंकित हैं, जो दक्षिण भारत पर चोलों की सर्वोच्चता को दर्शाते हैं. ताम्र पट्टिकाओं पर क्या लिखा है: तांबे की 5 पट्टियां संस्कृत भाषा में हैं, जिन पर चोल राजवंश की वंशावली अंकित है. इसकी शुरुआत विष्णु की स्तुति और पौराणिक दिव्य (सूर्यवंशी) पूर्वजों के नामों से होती है. वहीं, तमिल भाग राजा राजराज प्रथम (शासनकाल: 985-1012 ई.) के शासनकाल से संबंधित है, जो राजेंद्र चोल प्रथम के पिता थे. शिलालेख में कहा गया है कि राजा राजराज प्रथम ने अपने शासनकाल के 21वें वर्ष में यह घोषणा की थी कि एक बौद्ध तीर्थस्थल (विहार) के निर्माण के लिए एक गांव (अनैमंगलम) का संपूर्ण राजस्व और उसकी भूमि दान में दी जाएगी. चोलों की हिंदू धर्म के प्रति आस्था का प्रमाण हैं ताम्र पट्टिकाएं: यह शिलालेख चोलों की धार्मिक सहिष्णुता (एक हिंदू सम्राट द्वारा बौद्ध मठ को आर्थिक सहायता देना) का एक महत्वपूर्ण प्रमाण है. इसके साथ ही यह श्रीविजय साम्राज्य (आधुनिक सुमात्रा, इंडोनेशिया) जिसके शासक ने इस मठ का निर्माण करवाया था, के साथ उनके गहरे समुद्री और भू-राजनीतिक संबंधों को भी उजागर करता है. तांबे की 3 छोटी प्लेट्स में क्या लिखा: तीन तांबे की प्लेट्स भी एक कांस्य की अंगूठी से एक साथ बांधी हैं. इस पर राजा कुलोत्तुंग चोल प्रथम (जिन्होंने 1070 से 1120 तक शासन किया) की मुहर लगी है. इन पर तमिल में शिलालेख हैं. चोल प्लेटें, जो 1862 से लीडेन विश्वविद्यालय के पास सुरक्षित हैं. जो दक्षिण भारत में शाही फरमानों (राजकीय आदेशों) के महत्वपूर्ण स्रोत हैं. ये प्लेटें चोल और श्रीविजय साम्राज्यों के बीच संबंधों के बारे में ऐतिहासिक जानकारी भी देती हैं. इनका कुल वजन 30 किलोग्राम है. चोल वंश का पूरा इतिहास खोलती हैं ये तांबे की प्लेट्स: इन तांबे की प्लेट्स को चोल साम्राज्य के सबसे मूल्यवान अभिलेखों में से एक माना जाता है, जिनमें इनके प्रशासन, कराधान, भूमि सुधार, सिंचाई प्रणालियों और व्यापारिक प्रथाओं का विस्तृत विवरण मिलता है. ये शिलालेख इस राजवंश की धार्मिक सद्भाव की भावना को भी उजागर करते हैं. इनमें दक्षिण-पूर्व एशिया के श्रीविजय शासकों द्वारा स्थापित एक बौद्ध विहार के लिए 'अनैमंगलम' गांव को दान में दिए जाने का उल्लेख है. इतिहासकारों का मानना ​​है कि ये प्लेट्स लगभग एक हजार साल पहले दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच मौजूद मजबूत समुद्री, कूटनीतिक और सांस्कृतिक संबंधों का दुर्लभ प्रमाण प्रस्तुत करती हैं. चोल शासन के स्वर्ण युग से जुड़ी ये पट्टिकाएं भारत के दो सबसे शक्तिशाली समुद्री सम्राटों- राजराज चोल प्रथम (985-1014 ईस्वी) और उनके बेटे राजेंद्र चोल प्रथम (1014-1044 ईस्वी) के शासनकाल को दर्शाती हैं. अनैमंगलम गांव का इतिहास: अनैमंगलम, भारत के तमिलनाडु राज्य में नागापट्टनम के पास स्थित एक गांव है. ऐतिहासिक दृष्टि से यह गांव इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां सम्राट राजराजा चोल प्रथम ने 'चूड़ामणि विहार' नामक बौद्ध मठ को शाही भूमि दान में दी थी. इस मठ का निर्माण 1005 ईस्वी के आसपास श्रीविजय राजा श्री विजय मारविजयतुंगवर्मन ने करवाया था. सम्राट राजराजा चोल प्रथम ने इस मठ के भरण-पोषण के लिए अनैमंगलम गांव से प्राप्त होने वाले राजस्व को अनुदान के रूप में दे दिया था. राजराजा के पुत्र, राजेंद्र चोल प्रथम ने इस अनुदान को औपचारिक रूप प्रदान करते हुए, इसे 24 ताम्र-पत्रों (21 बड़े और 3 छोटे) पर उत्कीर्ण करवाने का आदेश दिया. चोल वंश की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था का प्रमाण हैं ताम्र पट्टिकाएं: … Read more

देश में इबोला खतरे की आशंका पर एडवाइजरी जारी, सरकार सतर्क

नई दिल्ली केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने वैश्विक स्तर पर बढ़ रहे इबोला वायरस के खतरे को देखते हुए देश के सभी बंदरगाहों, हवाई अड्डों और एंट्री पॉइंट्स पर सख्त हेल्थ एडवाइजरी जारी की है। यह कदम विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा पिछले हफ्ते इबोला प्रकोप को वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किए जाने के बाद एहतियात के तौर पर उठाया गया है। एडवाइजरी के अनुसार, अत्यधिक जोखिम वाले देशों से आने या वहां से होकर गुजरने करने वाले यात्रियों की सघन निगरानी की जाएगी। उनमें कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य, युगांडा और दक्षिण सूडान जैसे देश शामिल हूं। इन देशों से आने वाले किसी भी यात्री में यदि बीमारी के लक्षण दिखते हैं तो उन्हें इमिग्रेशन चेक से पहले एयरपोर्ट के हेल्थ ऑफिसर या हेल्प डेस्क को इसकी सूचना देनी होगी। यदि कोई यात्री इबोला के किसी संदिग्ध या पुष्ट मरीज के खून या शारीरिक तरल पदार्के सीधे संपर्क में आया है, तो उसे भी अनिवार्य रूप से स्वास्थ्य अधिकारियों को रिपोर्ट करना होगा। स्वास्थ्य मंत्रालय ने अपील करते हुए कहा, "यात्रियों की सुरक्षा और अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य नियमों को ध्यान में रखते हुए कृपया हेल्थ स्क्रीनिंग और सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों में सहयोग करें।" यह व्यवस्था काफी हद तक कोविड-19 महामारी के दौर की याद दिलाती है। राहत की बात यह है कि वर्तमान में भारत में इबोला का एक भी मामला सामने नहीं आया है। यह एडवाइजरी पूरी तरह से एहतियाती तौर पर जारी की गई है। हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस बात पर चिंता जताई थी कि यह वायरस बेहद तेजी से फैल रहा है, जिसके बाद ही इसे अंतर्राष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया गया। खतरे को भांपते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने बुधवार को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की। इस बैठक में राज्यों को सभी मोर्चों पर तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं। एसओपी के मुताबिक, केंद्र ने राज्यों के साथ विस्तृत SOP साझा की है, जिसमें आगमन से पहले और बाद की स्क्रीनिंग, क्वारंटाइन प्रोटोकॉल, केस मैनेजमेंट, रेफरल सिस्टम और लैब टेस्टिंग की प्रक्रिया शामिल है। स्वास्थ्य सचिव ने सभी नामित स्वास्थ्य केंद्रों को आपसी समन्वय के साथ निगरानी रखने और समय पर रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने पर जोर दिया है। यह वायरस ऑर्थोइबोलावायरस परिवार से संबंधित एक जूनोटिक संक्रमण है, जो इंसानों के लिए बेहद घातक और जानलेवा साबित हो सकता है। सामान्य फ्लू की तरह बुखार, कमजोरी, थकान, सिरदर्द, गले में खराश, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द इसके लक्षण है। गंभीर स्थिति में उल्टी और दस्त जैसे लक्षण होते हैं। शरीर के आंतरिक और बाहरी अंगों से बिना किसी स्पष्ट कारण के खून बहना इस बीमारी का सबसे मुख्य और विशिष्ट लक्षण है। कैसे फैलता है यह संक्रमण? संक्रमित व्यक्ति के खून, लार, पसीना, आंसू, उल्टी, मल और मां के दूध जैसे शारीरिक तरल पदार्थों के सीधे संपर्क में आने से। वायरस से दूषित कपड़ों, बिस्तरों या सतहों को छूने से। संक्रमण से मरने वाले व्यक्ति के शव के सीधे संपर्क में आने से भी यह तेजी से फैलता है। SOP की भी की जा रही समीक्षा सरकार की ओर से उठाए गए प्रमुख कदमों में स्क्रीनिंग, निगरानी, क्वॉरंटीन और केस मैनेजमेंट से जुड़े एसओपी की समीक्षा शामिल है। पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी को इबोला जांच के लिए नामित किया गया है, जबकि चरणबद्ध तरीके से अन्य प्रयोगशालाओं को भी तैयार किया जा रहा है। अपील जारी, घबराएं नहीं स्वास्थ्य मंत्रालय ने लोगों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं और किसी भी अपुष्ट जानकारी को साझा करने से बचें। कहा, सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह सतर्क और किसी भी उभरती स्थिति से निपटने के लिए तैयार है। कैसे फैलता है इबोला वायरस बता दें कि इबोला वायरस को जानलेवा संक्रमण माना जाता है। इसमें हेमोरेजिक फीवर यानी रक्त स्त्राव के साथ बुखार होता है। इससे पीड़ित मरीज को तेज बुखार आता है और शरीर के इंटर्नल अंगों में खून बहना शुरू हो जाता है और ऑर्गन फेलियर जैसी चीजें भी होती हैं।     इबोला वायरस संक्रमित जंगली जानवरों (जैसे चमगादड़) का मांस खाने से इंसानों में पहुंच सकता है।     इसके अलावा किसी संक्रमित व्यक्ति के खून, पसीने, लार, मल-मूत्र या उल्टी के सीधे संपर्क में आने से फैलता है।     बता दें कि इबोला वायरस पानी या हवा के संपर्क में आने पर एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलता।

पाकिस्तान में मारा गया पुलवामा साजिश का बड़ा चेहरा, अज्ञात हमलावरों ने बरसाई गोलियां

श्रीनगर  पुलवामा हमले के मास्टरमाइंड आतंकी हमजा बुरहान का खात्मा कर दिया गया है। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के मुजफ्फराबाद में एक अज्ञात हमलावर ने उसे गोलियों से भूनकर खत्म कर दिया। उसकी मौके पर ही मौत हो गई। हमजा बुरहान 2019 में कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले के मास्टरमाइंड्स में एक था। यह शख्स खुद को एक शिक्षक बताता था। वह लंबे समय से अपनी पहचान छिपाकर पाकिस्तान में छिपता फिर रहा था। इस घटनाक्रम से जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकी नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है। अरजुमंद गलजार डार उर्फ हमजा बुरहान प्रतिबंधित आतंकी संगठन अल बद्र (Al-Badr) का प्रमुख कमांडर था।हजमा बुरहान मूल रूप से जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले के रत्नीपोरा का रहने वाला था। वह 2017 में उच्च शिक्षा के बहाने पाकिस्तान गया था। इसके बाद वह स्थानीय युवाओं की भर्ती करने, आतंकी फंडिंग जुटाने और घुसपैठ नेटवर्क को संचालित करने में सक्रिय हो गया। UAPA कानून के तहत आतंकवादी घोषित 14 फरवरी 2019 को हुए पुलवामा हमले में सीआरपीएफ के 40 से अधिक जवान शहीद हुए थे। इस बर्बर हमले की साजिश में बड़ी भूमिका होने के कारण, भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने 2022 में उसे यूएपीए (UAPA) कानून के तहत आतंकवादी घोषित किया था। मंत्रालय के अनुसार हमजा बुरहान पुलवामा और दक्षिण कश्मीर में आतंक फैलाने, युवाओं को आतंकी संगठनों में भर्ती कराने और आतंकवाद के लिए आर्थिक सहायता जुटाने में सक्रिय भूमिका निभा रहा था लेकिन अब उसका खात्मा हो चुका है। पहलगाम हमले में भी था शामिल बता दें कि पुलवामा की घटना भारत में सुरक्षाकर्मियों पर किया गया अब तक का सबसे घातक हमला था, जिसे जैश-ए-मोहम्मद (JeM) ने अंजाम दिया था। 14 फरवरी, 2019 को जैश के एक आतंकवादी ने लेथपोरा में CRPF के काफिले में विस्फोटकों से भरी एक कार से टक्कर मार दी, जिसमें 40 जवान शहीद हो गए थे। इस घटना की जंच कर रही भारतीय राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA)ने हमजा बुरहान का नाम पुलवामा हमले की साजिश रचने और आतंकवादियों को स्थानीय स्तर पर लॉजिस्टिक और वित्तीय मदद पहुंचाने वाले मुख्य किरदारों में शामिल किया था। जांच एजेंसियों के अनुसार, वह सिर्फ पुलवामा ही नहीं बल्कि कश्मीर घाटी के पहलगाम और अन्य क्षेत्रों में हुए बड़े आतंकी हमलों को सीमा पार से सीधे निर्देशित कर रहा था। पुलवामा हमला 14 फरवरी 2019 को जम्मू-कश्मीर में हुआ था पुलवामा हमला 14 फरवरी 2019 को जम्मू-कश्मीर में हुआ था, जिसमें CRPF के 40 जवान शहीद हो गए थे। इस हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया था और इसके बाद भारत ने बालाकोट एयरस्ट्राइक कर आतंकियों के ठिकानों को निशाना बनाया था। हमजा लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के निशाने पर था 2017 में पुलवामा से पाकिस्तान चला गया था हमजा बुरहान पुलवामा हमले के साजिशकर्ताओं में शामिल था. वह खुद को पाकिस्तान में टीचर बताता था. साथ ही 2019 के बाद से कई आतंकी घटनाओं में शामिल रहा था. वह पीओके के इलाके में कई आतंकी संगठनों को ट्रेनिंग दे रहा था. साथ ही बॉर्डर इलाके में वह आतंकियों को घुसपैठ कराने में मदद करता था।  हमजा बुरहान का पूरा नाम अरजुमंद गुलजार डार है. इसे हमजा बुरहान के नाम से भी जाना जाता है अपने सर्किल में ये आतंकी 'डॉक्टर' के नाम से भी जाना जाता है।  27 साल का हमजा बुरहान पुलवामा के रत्नीपोरा का रहने वाला है. हमजा 2017 में पाकिस्तान गया और वहां जाकर आतंकवादी संगठन 'अल बद्र' में शामिल हो गया. 'अल बद्र' को भारत में एक आतंकवादी संगठन के तौर पर लिस्ट किया गया है. हमजा 'अल बद्र' के कमांडर के तौर पर काम कर रहा था।  ये शख्स पुलवामा में 'ओवर ग्राउंड वर्कर्स' से विस्फोटक बरामद होने के मामलों में, जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में CRPF पर ग्रेनेड हमले में और युवाओं को आतंकवादी संगठन 'अल बद्र' में शामिल होने के लिए उकसाने के मामलों में शामिल पाया गया है।  ISI ने मुहैया कराया था ऑफिस और सिक्योरिटी आतंकी हमजा बुरहान उर्फ डॉक्टर न सिर्फ पुलवामा के अलावा दूसरे आतंकी हमले में शामिल था बल्कि वह युवाओं को बरगलाकर उन्हें कट्टरपंथ के रास्ते पर ले जाता था. इस काम के लिए ISI ने उसे एक ऑफिस मुहैया कराया था. और इसकी सुरक्षा में 24 घंटे AK-47 के साथ गनर तैनात रहते थे।  आतंकी गतिविधियों का अड्डा मुजफ्फराबाद पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में स्थित मुजफ्फराबाद भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियों का अड्डा है. यहां कई तंजीमों के लोग रहते हैं और उसी की आड़ में भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियों को अंजाम देते हैं. आतंकी हमजा बुरहान इसी काम में शामिल था और वह लो प्रोफाइल रहता था।  पुलवामा हमला और भारत का ऑपरेशन बालाकोट  14 फरवरी 2019 को दोपहर करीब 3:15 बजे जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले में जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे पर एक भयानक आतंकी हमला हुआ.  पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी और स्थानीय कश्मीरी युवक आदिल अहमद डार ने 300-350 किलो IED से भरी SUV को CRPF के काफिले की एक बस में घुसा दिया. इसमें 40 CRPF जवान शहीद हो गए और कई घायल हुए. यह 1989 के बाद जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों पर सबसे घातक हमला था. जैश-ए-मोहम्मद ने हमले की जिम्मेदारी ली थी।  हमले के 12 दिन बाद 26 फरवरी 2019 को भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में बालाकोट स्थित जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी ट्रेनिंग कैंप पर सर्जिकल एयर स्ट्राइक किया. इसमें बड़ी संख्या में आतंकी मारे गए।    उसकी हत्या ऐसे समय में हुई है, जब पाकिस्तान में आतंकी संगठनों और कट्टरपंथी नेटवर्क से जुड़े कई लोगों पर हमलों की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। हमजा लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के निशाने पर था। बता दें कि हाल के सालों में कई आतंकियों को अज्ञात हमलावरों ने निशाना बनाया है या तो गैंगवार में उनकी मौत हुई है। PoK में एक स्कूल टीचर का फर्जी पहचान के साथ रह रहा था मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक बताया जा रहा है कि वह पिछले कई सालों से PoK में एक स्कूल टीचर का फर्जी पहचान के साथ रह रहा था। वहीं आतंकी ट्रेनिंग कैंप और घुसपैठ के नेटवर्क को चला रहा था। वैसै वह जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले के रत्नीपोरा का रहने वाला … Read more

कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान को भारत ने UN में घेरा, सुनाई खरी-खरी

 नई दिल्ली भारत ने बुधवार को यूनाइटेड नेशन्स सिक्योरिटी काउंसिल (UNSC) में पाकिस्तान पर तीखा हमला बोलते हुए कहा, "नरसंहार के कृत्यों का 'लंबे वक्त से दागदार' रिकॉर्ड एक ऐसा पैटर्न दिखाता है, जिसमें पाकिस्तान अपनी सीमाओं के अंदर और बाहर हिंसा के ज़रिए अपनी अंदरूनी नाकामियों का ठीकरा दूसरों पर फोड़ने की कोशिश करता है." भारत का यह बयान सशस्त्र संघर्षों में नागरिकों की सुरक्षा पर UN सुरक्षा परिषद की सालाना खुली बहस के दौरान आया।  UN में भारत के स्थायी प्रतिनिधि, राजदूत हरीश परवथनेनी ने ये टिप्पणियां तब कीं, जब पाकिस्तान के प्रतिनिधि ने बहस के दौरान जम्मू-कश्मीर का जिक्र किया। हरीश ने कहा, "यह विडंबना है कि पाकिस्तानने ऐसे मुद्दों का जिक्र करना चुना है, जो पूरी तरह से भारत का अंदरूनी मामला है।  'पवित्र महीने में…' इस साल की शुरुआत में अफगानिस्तान पर पाकिस्तान के हमलों का जिक्र करते हुए भारतीय प्रतिनिधि परवथनेनी ने कहा, "दुनिया यह नहीं भूली है कि इसी साल मार्च में रमजान के पवित्र महीने के वक्त पाकिस्तान ने काबुल में 'उम्मीद एडिक्शन ट्रीटमेंट हॉस्पिटल' पर एक बर्बर हवाई हमला किया था।  अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, “हिंसा की इस कायरतापूर्ण और अमानवीय हरकत में 269 नागरिकों की जान चली गई और 122 अन्य घायल हो गए. यह घटना एक ऐसी जगह पर हुई, जिसे किसी भी तरह से मिलिट्री टारगेट के तौर पर सही नहीं ठहराया जा सकता.” उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान का यह रवैया 'दोहरे मापदंड' वाला है कि वह एक तरफ तो अंतरराष्ट्रीय कानून के ऊंचे सिद्धांतों की बात करता है और दूसरी तरफ अंधेरे की आड़ में बेकसूर नागरिकों को निशाना बनाता है।  UNAMA के मुताबिक,प ये हवाई हमले शाम की तरावीह की नमाज खत्म होने के वक्त हुए, जब कई मरीज मस्जिद से बाहर निकल रहे थे. परवथानेनी ने UNAMA के उस आकलन का भी जिक्र किया, जिसके मुताबिक अफगान नागरिकों के खिलाफ सीमा पार से की गई सशस्त्र हिंसा की वजह से 94 हजार से ज्यादा लोग विस्थापित हुए।  उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की तरफ से इस तरह की हरकतें किसी ऐसे देश के लिए हैरानी की बात नहीं होनी चाहिए, जो अपने ही लोगों पर बम बरसाता है और सुनियोजित तरीके से नरसंहार करता है।  राजदूत हरीश ने यह भी कहा कि 1971 में 'ऑपरेशन सर्चलाइट' के दौरान पाकिस्तान ने अपनी ही सेना द्वारा चार लाख महिलाओं के साथ सुनियोजित तरीके से सामूहिक बलात्कार और नरसंहार का अभियान चलाया था. इस बहस में भारत का हस्तक्षेप इन्हीं आरोपों पर केंद्रित रहा, क्योंकि उसने पाकिस्तान की उस कोशिश को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें पाकिस्तान ने इस मामले को अपना 'आंतरिक मामला' बताया था। 

अब मदरसों में भी अनिवार्य हुआ ‘वंदे मातरम्’, बंगाल सरकार ने जारी किए निर्देश

कोलकाता  पश्चिम बंगाल की शुभेदु अधिकारी सरकार ने बड़ा आदेश जारी किया है। सरकार ने राज्य के सभी मदरसों में सुबह की प्रार्थना के दौरान ‘ वंदे मातरम ’ गाना अनिवार्य करने का आदेश जारी किया है। इससे पहले यह नियम केवल सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में लागू था। राज्य के अल्पसंख्यक मामलों और मदरसा शिक्षा मंत्री खुदीराम टुडू ने इसकी पुष्टि की। उन्होंने कहा कि राज्य के अन्य सरकारी स्कूलों की तरह अब मान्यता प्राप्त मदरसों में भी ‘वंदे मातरम्’ गाना अनिवार्य होगा। मंत्री ने आगे क्या बताया तुडू ने बताया कि पश्चिम बंगाल में कई सरकारी स्कूल ऐसे हैं, जहां पढ़ाई संताली भाषा में होती है। जब उन स्कूलों में ‘वंदे मातरम्’ अनिवार्य है, तो मान्यता प्राप्त मदरसों में इसे अनिवार्य क्यों नहीं किया जा सकता? इस संबंध में पश्चिम बंगाल मदरसा शिक्षा निदेशालय ने एक आधिकारिक आदेश जारी कर राज्य के सभी सहायता प्राप्त मदरसों में ‘वंदे मातरम्’ गाना अनिवार्य कर दिया है। पश्चिम बंगाल में कई सरकारी स्कूल ऐसे हैं, जहां पढ़ाई संताली भाषा में होती है। जब उन स्कूलों में ‘वंदे मातरम्’ अनिवार्य है, तो मान्यता प्राप्त मदरसों में इसे अनिवार्य क्यों नहीं किया जा सकता? आदेश में क्या मदरसा शिक्षा निदेशक द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि पूर्व में जारी सभी आदेशों और प्रथाओं को निरस्त करते हुए अब पश्चिम बंगाल के अल्पसंख्यक मामलों और मदरसा शिक्षा विभाग के अंतर्गत आने वाले सभी सरकारी मॉडल मदरसे (अंग्रेजी माध्यम), मान्यता प्राप्त सहायता प्राप्त मदरसे, स्वीकृत एमएसके, स्वीकृत एसएसके और मान्यता प्राप्त गैर-सहायता प्राप्त मदरसों में कक्षाएं शुरू होने से पहले प्रार्थना सभा के दौरान ‘वंदे मातरम्’ तत्काल प्रभाव से अनिवार्य किया जाता है। शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूलों के लिए जारी की थी अधिसूचना इससे पहले 13 मई की शाम को पश्चिम बंगाल शिक्षा विभाग ने भी राज्य के सभी सरकारी स्कूलों में ‘वंदे मातरम्’ गाना अनिवार्य करने संबंधी अधिसूचना जारी की थी। राज्य के नए और नौवें मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने 14 मई को अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर शिक्षा विभाग की अधिसूचना साझा की थी। अतिरिक्त मुख्य सचिव द्वारा जारी अधिसूचना में कहा गया था कि पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य के स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत आने वाले सभी स्कूलों में कक्षाएं शुरू होने से पहले प्रार्थना सभा के दौरान राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ गाना तत्काल प्रभाव से अनिवार्य कर दिया है। मुख्यमंत्री बनते ही शुभेंदु अधिकारी ने लिया ये बड़ा फैसला पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार बन गई है. राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से नई-नवेली भाजपा सरकार ने एक बड़ा फैसला किया है. पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने चिकन नेक कॉरिडोर क्षेत्र में करीब 120 एकड़ जमीन केंद्र सरकार को हस्तांरित करने का फैसला किया है. बता दें, चिकन नेक का आधिकारिक नाम सिलिगुड़ी कॉरिडोर है. ये भारत के प्रमुख भाग को पूर्वी राज्यों से जोड़ने वाला बहुत ही संकरा रास्ता है।  मंगलवार को एक रिपोर्ट सामने आई, जिसके अनुसार जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. रणनीतिक रूप से चिकन नेक भारत के लिए बहुत अहम माना जाता है. क्योंकि चिकन नेक के आस-पास बांग्लादेश, नेपाल और भूटान जैसे देशों की सीमाएं हैं. वहीं, चीनी सीमा की दूरी भी बहुत ज्यादा दूर नहीं है।  रक्षा योजनाओं में ‘चिकन नेक’ कॉरिडोर की अहम भूमिका एक्सपर्ट्स की मानें तो कॉरिडोर के कुछ हिस्सों की चौड़ाई सिर्फ 20 से 22 किलोमीटर तक है, जिस वजह से ये इलाका संकट की स्थिति में बहुत संवेदनशील बन जाता है. भारतीय सुरक्षा रणनीति और रक्षा योजनाओं में चिकन नेक कॉरिडोर की भूमिका बहुत अधिक है।  बता दें, केंद्र सरकार ने पूर्ववर्ती टीएमसी और ममता बनर्जी सरकार से अनुरोध किया था कि जमीन हस्तांतरण किया जा सके. लेकिन ये प्रक्रिया लंबे वक्त तक ठंडे बस्ते में पड़ी थी. लेकिन जैसे ही राज्य में भाजपा की सरकार आई, वैसे ही चिकन नेक कॉरिडोर को लेकर काम शुरू हो गया है।  पूर्वोत्तर के आठों राज्यों के लिए देश की जीवनरेखा है चिकन नेक चिकन नेक को पूर्वी आठ राज्यों के लिए देश की जीवनरेखा के समान है. सड़क, रेल, सैन्य आपूर्ति, व्यापारिक गतिविधियों और रसद संचालन के लिए यही मुख्य संपर्क मार्ग है. ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार की भूमि उपलब्धता को राष्ट्रीय महत्व माना जाता है।   राष्ट्रीय सुरक्षा पर क्या होगा असर? जमीन हस्तांतरण से चिनक नेक में भारत की सामरिक क्षमता और सीमा सुरक्षा को मजबूत करने में मदद मिल सकती है. इस इलाके में सैन्य ढांचा और लॉजिस्टिक नेटवर्क को विकसित किया जाएगा, जिससे सीमावर्ती इलाकों में सेना की त्वरित तैनाती और आपूर्ति व्यवस्थित और प्रभावी हो सकेगी।  केंद्र के साथ राज्य सरकार का समन्वय तेज बता दें, पश्चिम बंगाल में भाजपा ने 2026 के विधानसभा में ऐतिहासिक जीत हासिल की और भाजपा ने पहली बार प्रदेश में सरकार बनाई. पहली बार राज्य में भाजपा का मुख्यमंत्री बना है. शुभेंदु अधिकारी ने प्रदेश के मुखिया की शपथ ग्रहण करते ही केंद्र सरकार के साथ राजनीतिक समन्वय तेज कर दिया है. सत्ता में आते ही शुभेंदु सरकार ने कानून व्यवस्था, प्रशासनिक फेरबदल और कथित भ्रष्टाचार की जांच तेज कर दी है।   

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश लागू करना कितना आसान? आवारा कुत्तों के लिए सुविधाओं पर उठी बहस

 नई दिल्ली आवारा कुत्तों को लेकर दिए गए फैसले ने एक बार फिर देशभर में बहस छेड़ दी है. सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अपने नवंबर 2025 के उस आदेश में बदलाव करने से इनकार कर दिया, जिसमें अस्पतालों, स्कूलों, कॉलेजों, बस स्टेशनों और रेलवे स्टेशनों जैसे सार्वजनिक संस्थानों और जगहों से आवारा कुत्तों को हटाने का निर्देश दिया गया था. यानी कोर्ट ने आवारा कुत्तों को शेल्टर होम में शिफ्ट करने को कहा है. लेकिन अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या भारत में इतने शेल्टर होम हैं,  जहां सभी कुत्तों को शिफ्ट किया जा सके. अगर ऐसा नहीं है तो फिर यह आदेश जमीन पर कैसे लागू होगा? तो समझने की कोशिश करते हैं कि आखिर हकीकत है क्या? भारत में कितने आवारा कुत्ते हैं? वैसे भारत में आधिकारिक रुप से सरकार की ओर से इसे लेकर कोई आंकड़ा शेयर नहीं किया गया है. लेकिन, कई सर्वे  के आधार पर बताया जाता है कि भारत में करीब 1.53 करोड़ आवारा कुत्ते हैं. यह आंकड़ा देश में स्ट्रे डॉग्स की वास्तविक स्थिति का सबसे व्यापक अनुमान माना जाता है. इसके अलावा, अगर कुल आवारा पशुओं की बात की जाए, तो संख्या करीब 2.04 करोड़ तक पहुंच जाती है, जिसमें गाय, बकरी और अन्य पशु भी शामिल हैं. हालांकि इनमें कुत्ते सबसे बड़ा हिस्सा बनाते हैं।  इंडिया डेटा रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश में 20.6 लाख, ओडिशा में 17.3 लाख, महाराष्ट्र में 12.8 लाख, राजस्थान में 10 लाख, मध्य प्रदेश में 10 लाख, कर्नाटक में 10 लाख, पश्चिम बंगाल में 10 लाख और आंध्र प्रदेश में 8.6 लाख आवारा कुत्ते हैं. ये आंकड़े बताते हैं कि देश के कई बड़े राज्यों में स्ट्रे डॉग्स की आबादी बहुत अधिक है।  कितने डॉग शेल्टर हैं? अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इतने कुत्तों के लिए पर्याप्त शेल्टर मौजूद हैं? भारत में लगभग 3,345 एनिमल शेल्टर होने का अनुमान है. लेकिन इनमें सिर्फ डॉग शेल्टर ही नहीं, बल्कि गौशालाएं और अन्य पशु आश्रय भी शामिल हैं. यानी वास्तविक डॉग शेल्टर की संख्या इससे काफी कम हो सकती है. बीएमसी ने बताया था कि मुंबई में 90,000 से ज्यादा स्ट्रे डॉग्स के लिए केवल 8 शेल्टर होम थे. दिल्ली में एमसीडी के पास लगभग 20 एनिमल कंट्रोल सेंटर हैं, जिन्हें पूरी तरह आधुनिक शेल्टर नहीं माना जाता।  क्या पॉसिबल हो पाएगा? सुनवाई के दौरान यह तर्क रखा गया कि अगर सभी स्ट्रे डॉग्स को स्कूल, अस्पताल, रेलवे स्टेशन और अन्य सार्वजनिक जगहों से हटाकर शेल्टर में रखा जाए, तो इसके लिए एक विशाल और महंगा सिस्टम बनाना पड़ेगा. इसके लिए कुत्तों की पहचान और पकड़, उन्हें शेल्टर तक पहुंचाना, नसबंदी और टीकाकरण, लंबे समय तक देखभाल, लगातार रिकॉर्ड और निगरानी का काम करना होगा. ऐसे में अगर एक कुत्ते पर औसतन 40 रुपये प्रतिदिन का भोजन खर्च माना जाए, तो केवल खाने का सालाना खर्च ही 22,000 करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है।  कोर्ट में भी ये कहा गया था कि अगर भारत में 1.53 करोड़ आवारा कुत्तों को शेल्टर में रखा जाए, और एक शेल्टर में औसतन 200 कुत्ते रखे जाएं, तो देश को 77,000 से ज्यादा शेल्टर की जरूरत पड़ेगी. अब नए शेल्ट होम बनाने के लिए हजारों एकड़ जमीन, लाखों कर्मचारियों की जरूरत और हजारों करोड़ रुपये का निवेश की जरुरत होगी।   कुत्ते के काटने के कितने केस? साल 2024 में भारत में 37.17 लाख डॉग बाइट केस दर्ज किए गए थे. इसमें 54 संदिग्ध रेबीज़ मौतें रिपोर्ट हुईं. यह डेटा NCDC द्वारा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से एकत्र किया गया है और संसद में प्रस्तुत किया गया।